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‘पत्नी के खिलाफ गवाही दो नहीं तो काटकर फेंक देंगे’: जो जज CM ममता के भतीजे के केस की कर रहीं सुनवाई, उनके पति को टॉर्चर करने का CID पर आरोप

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के सांसद भतीजे और सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के महासचिव अभिषेक बनर्जी के मामले की सुनवाई कर रहीं कलकत्ता हाईकोर्ट की जज अमृता सिन्हा के वकील पति ने राज्य की CID पर प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है। वकील प्रताप चंद्र डे ने आरोप लगाया है कि एक मामले में CID ने उन्हें पूछताछ के लिए दो बार थाने बुलाया और उन्हें यातना दी।

जज अमृता सिन्हा के पति प्रताप ने इस संबंध में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मदद माँगी है। इसके अलावा, उन्होंने कोलकाता बार एसोसिएशन, पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल को शिकायती पत्र लिखा है। दरअसल, CID ने उन्हें साल्टलेक के बिधाननगर दक्षिण पुलिस स्टेशन में दर्ज संपत्ति विवाद के एक मामले में CrPC की धारा 160 के तहत गवाह के रूप में पूछताछ के लिए बुलाया था।

कोलकाता बार एसोसिएशन को लिखे गए 4 पेज के पत्र में वकील प्रताप चंद्र डे ने बताया कि जाँच एजेंसी ने कैसे उन्हें सिर्फ इसलिए प्रताड़ित किया, क्योंकि उनकी पत्नी अमृता सिन्हा कलकत्ता उच्च न्यायालय की न्यायाधीश हैं और वह ममता बनर्जी सरकार एवं टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी से संबंधित भ्रष्टाचार के मामलों की सुनवाई कर रही हैं।

वकील डे ने बताया कि उन्हें 1 दिसंबर 2023 को सीआईडी की आर्थिक अपराध शाखा ने बुलाया था। उन्होंने कहा, “वहाँ पहुँचने पर मेरे साथ एक अपराधी की तरह व्यवहार किया गया, जैसे कि मैं किसी जघन्य अपराध का आरोपित था। मुझसे एक से अधिक अधिकारियों ने पूछताछ की और केवल मेरी पत्नी एवं उनके व्यक्तिगत विवरण के बारे में प्रश्न पूछे गए।”

यह बताने के बावजूद कि यह ‘गलत पहचान’ का मामला था, सीआईडी अधिकारियों ने प्रताप चंद्र डे को परेशान करना जारी रखा। उन्होंने लिखा, “अधिकारियों ने मुझे बताया कि उन्हें मामले के विवरण में कोई दिलचस्पी नहीं है, लेकिन वे मेरी पत्नी के संबंध में जवाब चाहते हैं। उनकी इच्छा और सुविधा के अनुसार वीडियो को चालू और बंद किया जाता था। साढ़े तीन घंटे तक यातना और उत्पीड़न चलता रहा।”

कलकत्ता उच्च न्यायालय के वकील प्रताप चंद्र डे को सीआईडी ने इस साल 16 दिसंबर को फिर से तलब किया था। उन्होंने बताया, “उन्होंने स्थानीय गुंडों की तरह व्यवहार किया। वे ऊँचे स्वर में चिल्लाए। एक भी सभ्य भाषा का प्रयोग नहीं किया गया। सभी अपशब्द और गंदे अपशब्द थे। कैमरा भी लगातार चालू नहीं था।”

जज के पति ने आगे कहा, “उन्होंने (CID के अधिकारियों ने) मेरी पत्नी के खिलाफ गवाही देने के लिए मुझ पर जबरदस्त दबाव डाला। जैसे ही मैंने उनके खिलाफ कोई भी बयान देने से इनकार कर दिया, अत्याचार कई गुना बढ़ गया। उस दौरान सभी अप्रासंगिक सवाल मुझे दबाव में तोड़ने के इरादे से पूछे गए।”

कलकत्ता उच्च न्यायालय के वकील ने कहा कि सीआईडी अधिकारियों ने कलकत्ता उच्च न्यायालय में जज उनकी पत्नी अमृता सिन्हा के खिलाफ ये बयान देने के लिए भारी रिश्वत देने की कोशिश की। उन्होंने कहा, “मुझे बड़ी रकम, महँगी कारें, शानदार आवासीय अपार्टमेंट और कई अन्य चीजों की पेशकश की गई, जिनका उल्लेख करने में मुझे शर्म आती है।”

उन्होंने आगे कहा, “अगर मैं उनकी सलाह के अनुसार गवाही देने से मना किया तो मुझे गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई। मेरी पत्नी और बच्चे को भी धमकी दी गई है। उन्होंने कहा कि वे अपने वरिष्ठ अधिकारियों की सलाह के अनुसार कार्य कर रहे थे। अगर मैं उनके आदेश का पालन करने में विफल रहा तो वे हमें टुकड़ों में काटकर वे मेरे पूरे परिवार को बर्बाद कर देंगे।”

प्रताप चंद्र डे ने कहा, “उन्होंने मुझे पूरी रात रोके रखने के अपने इरादे का खुलासा किया और यदि वरिष्ठ अधिकारी से निर्देश मिलता है तो वे मुझे झूठे मामलों में गिरफ्तार कर सकते हैं। अपमान और प्रताड़ना इस हद तक बढ़ गई कि एक समय मैं टूट गया। अधिकारी मुझे नुकसान पहुँचाने और शारीरिक रूप से घायल करने पर तुले हुए थे। मुझ पर भारी दबाव डालने और मेरी पत्नी को भ्रष्टाचार के आरोप में फँसाने के लिए मुझसे झूठे बयान लेने के लिए वे कई बार हमला करने के उद्देश्य से मुझ पर टूट पड़े।”

उन्होंने आगे कहा, “मैंने लंबे समय तक खाना नहीं खाया था और यह बताने के बावजूद कि मुझे दवाएँ लेनी होंगी, उन्होंने मुझे छोड़ने की जहमत नहीं उठाई। मैं ऐसे ख़राब माहौल में बेहद अस्वस्थ और असहज महसूस कर रहा था। अगर थोड़ी देर और होती तो मैं कुछ देर बाद गिर जाता।”

उन्होंने अपना पक्ष रखते हुए कहा, “एक वकील, जो इस मामले से जुड़ा नहीं है, को दी गई अमानवीय यातना पूरी तरह से अवैध है और इसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। एक वकील को किसी वादी का बचाव करने का पूरा अधिकार है, यदि वादी उसके पक्ष में वकालतनामा निष्पादित करता है। इसका उद्देश्य मुझे और मेरे परिवार की प्रतिष्ठा को बदनाम करना और नुकसान पहुँचाना था।”

वहीं, बंगाल CID ने इस पूरे मामले को झूठा एवं मनगढ़ंत बताया है। सीआईडी ​​ने कहा, “इस तरह के आरोपों के पीछे का इरादा न केवल संबंधित अधिकारियों की प्रतिष्ठा को खराब करना है, बल्कि चल रही जाँच पर प्रश्नचिह्न लगाना और मुद्दे को भटकाना है। CID ने कहा कि वकील डे के साथ हर तरह का सहयोग किया गया और पूछताछ की पूरी वीडियो रिकॉर्डिंग कराई गई।

जिस यूनिवर्सिटी में पढ़ता था, वहीं दनादन बरसाई गोलियाँ: प्राग में 14 की मौत, हमलावर छात्र खुद भी मारा गया

चेक रिपब्लिक की राजधानी प्राग की चार्ल्स यूनिवर्सिटी में गुरुवार (21 दिसंबर 2023) को मास शूटिंग में 14 लोगों की मौत हो गई। 25 अन्य घायल हैं। इनमें 10 की हालत गंभीर है। मृतकों में फायरिंग करने वाला छात्र भी शामिल है।

सीएएन के अनुसार हमलावर छात्र यूनिवर्सिटी में फिलॉसफी की पढ़ाई कर रहा था। पुलिस ने उसकी भी लाश बरामद की है। कहा जा रहा है कि फायरिंग को अंजाम देने के बाद उसने खुद अपनी जान ले ली। हालाँकि आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं हुई है। यूनिवर्सिटी में गोलीबारी की घटना के बाद हमलावर छात्र के पिता का शव प्राग से करीब 100 मील दूर स्थित उनके घर से बरामद किया गया है।

पुलिस अधिकारियों ने इस घटना के आतंकवाद से जुड़े होने का खंडन किया है। चार्ल्स यूनिवर्सिटी में भाषा विज्ञान के एसोसिएट प्रोफेसर राडेक सिमिक ने बताया कि जब उन्होंने छात्रों के चिल्लाने की आवाज सुनी तब वे पहली मंजिल पर क्लास ले रहे थे।

कुछ रिपोर्टों में बंदूकधारी छात्र की पहचान 24 साल के डेविड के तौर पर की गई है। कहा गया है कि हमलावर छात्र यूनिवर्सिटी की आर्ट फैकल्टी में वर्ल्ड हिस्ट्री की पढ़ाई कर रहा था। प्राग में मीडिया से बात करते हुए राष्ट्रीय पुलिस बल के मुखिया मार्टिन वोंद्रासेक ने बताया कि वह विदेशों में हुई मास शूटिंग की घटनाओं से प्रेरित था।

इन्होने बताया कि अधिकारी इस बात की जाँच कर रहे हैं कि टेलीग्राम पर डेविड कोजाक नाम से पोस्ट किए गए हिंसक, अपशब्दों से भरे रूसी भाषा के संदेश इसी छात्र से जुड़े हैं या नहीं। इस संदेश में रूस में हुई दो सामूहिक गोलीबारी से प्रेरणा लेने की बात कही गई है। इसमें एक इस महीने यूक्रेन की सीमा के पास ब्रांस्क के एक स्कूल में और दूसरी 2021 में रूसी क्षेत्र तातारस्तान की राजधानी कजान में हुई थी।

एक दिन पहले टेलीग्राम पर डेविड कोजाक के नाम से पोस्ट किए गए एक संदेश में कहा गया था, “जब मैं स्कूल में शूटिंग के लिए जाऊँगा तो यह मेरी डायरी होगी।” ये संदेश गुरुवार को एडिट किया गया था। शूटिंग के बाद गुरुवार देर रात इस टेलीग्राम अकाउंट को प्राइवेट कर दिया गया, जबकि डेविड इसके पहले ही मर चुका था।

मध्य यूरोपीय देश में सामूहिक गोलीबारी की घटनाएँ बमुश्किल ही होती है। यही वजह रही कि प्रधानमंत्री पेट्र फियाला को चेक गणराज्य के पूर्व में ओलोमौक शहर की यात्रा छोड़कर और गुरुवार शाम एक इमरजेंसी सरकारी बैठक के लिए प्राग वापस आना पड़ा। वहीं चेक गणराज्य के राष्ट्रपति पीटर पॉवेल ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर लिखा है कि वे इस घटना से सदमे में हैं। उन्होंने पीड़ितों के परिवारों और रिश्तेदारों के प्रति संवेदना व्यक्त की है।

‘गो माँस खाने वाली कामिया जानी जगन्नाथ मंदिर में कैसे घुसी’: बीजेपी बोली- गिरफ्तार करो, BJD नेता के साथ महाप्रसाद चखते बनाया Video

ओडिशा के जगन्नाथ मंदिर में वीडियो बनाने को लेकर सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर और यूट्यूब चैनल ‘कर्ली टेल्स’ की फाउंडर कामिया जानी (Kamiya Jani) विवादों में घिर गईं हैं। बीजेपी की प्रदेश ईकाई ने उन्हें गो माँस खाने वाली बताते हुए गिरफ्तारी की माँग की है। जगन्नाथ मंदिर में कामिया सत्ताधारी बीजू जनता दल (BJD) के नेता वीके पांडियन के साथ महाप्रसाद चखती नजर आईं थी।

कामिया जानी का यह वीडियो सोशल मीडिया में वायरल है। वीडियो में वह हरे सूट में बीजेडी नेता वीके पंडियन के साथ जगन्नाथ मंदिर परिसर में जमीन पर बैठकर केले के पत्ते पर महाप्रसाद ग्रहण करती और बतियाते दिख रही हैं। बीजेपी ने उन्हें बीफ प्रमोटर बताते हुए इस पर एतराज जताया है। पूछा है कि बीफ खाते हुए वीडियो बनाने वाली महिला को मंदिर में प्रवेश कैसे दिया गया। कहा है कि इससे हिंदुओं की धार्मिक भावनाएँ आहत हुई हैं।

वीडियो में कामिया जानी को बीजद नेता पांडियन के साथ पुरी श्रीमंदिर हेरिटेज कॉरिडोर परियोजना और महाप्रसाद के बारे में बात करते देखा जा सकता है। ओडिशा बीजेपी महासचिव जतिन मोहंती ने कहा है, “बीजेडी नेता वीके पांडियन ने यूट्यूबर कामिया जानी के साथ मिलकर पुरी जगन्नाथ मंदिर में ‘महाप्रसाद’ चखने पर एक वीडियो बनाया है। इससे पहले कामिया जानी ने गो माँस खाते हुए एक वीडियो पोस्ट किया था। गो माँस खाने वालों को जगन्नाथ मंदिर के अंदर जाने की अनुमति नहीं है। धार्मिक भावनाओं को आहत करने के लिए उनके खिलाफ 295 आईपीसी के तहत मामला दर्ज किया जाना चाहिए। अगर उन्हें गिरफ्तार नहीं किया गया, तो हम अदालत का दरवाजा खटखटाएँगे।”

ओडिशा बीजेपी ने अपने आधाकारिक एक्स हैंडल पर लिखा है, “ऐतिहासिक और आध्यात्मिक विरासत से समृद्ध पुरी श्रीमंदिर की पवित्रता की वीके पांडियन द्वारा शर्मनाक तरीके से अवहेलना की गई है। उन्होंने एक बीफ प्रमोटर को जगन्नाथ मंदिर के प्रतिष्ठित परिसर में प्रवेश की अनुमति दी। बीजेडी ओडिशा के लोगों की भावनाओं और जगन्नाथ संस्कृति की पवित्रता के प्रति उदासीन रहता है। जिम्मेदार लोगों को शीघ्र और गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।”

यही नहीं ओडिशा बीजेपी यूनिट ने अपने एक्स हैंडल पर कामिया के पुराने वीडियो का स्क्रीनशॉट भी शेयर किया है। इसमें वो बीफ व्यंजन का प्रचार करती दिख रही हैं। विवाद के बाद कामिया जानी की सफाई भी आई है। अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी में उन्होंने कभी भी बीफ नहीं खाने की बात कही है।

कामिया जानी की इंस्टाग्राम स्टोरी

कामिया ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी में कहा है, “एक भारतीय के तौर पर मेरा मिशन भारतीय संस्कृति और विरासत को दुनिया भर में ले जाना है। मैं सौभाग्यशाली हूँ कि सभी ज्योतिर्लिंगों और चार धामों की यात्रा कर चुकी हूँ। मेरी आँख जगन्नाथ मंदिर यात्रा पर सवाल उठाने वाली खबर के साथ खुली है। मैं स्पष्ट करना चाहती हूँ कि मैं बीफ नहीं खाती हूँ और मैंने कभी भी बीफ नहीं खाया है। जय जगन्नाथ।”

जर्जर मकानों में छिपा रखे थे ₹329 करोड़… कॉन्ग्रेस MP धीरज साहू के ठिकानों से क्या-क्या मिला, सब कुछ IT ने बताया

कॉन्ग्रेस के राज्यसभा सांसद धीरज साहू की कंपनी से जुड़े ठिकानों पर पिछले दिनों आयकर विभाग (IT Department) ने छापेमारी की थी। करीब 6 दिन तक चली इस कार्रवाई के दौरान ओडिशा, झारखंड और पश्चिम बंगाल के 10 जिलों में 30 से अधिक जगहों पर दबिश दी गई थी। अब आयकर विभाग ने इस कार्रवाई का पूरा ब्यौरा सार्वजनिक किया है।

इसके मुताबिक 351 रुपए से अधिक का अघोषित कैश और 2.80 करोड़ रुपए से अधिक मूल्य के जेवर जब्त किए गए। कुल अघोषित कैश में से 329 करोड़ रुपए ओडिशा के बोलांगीर जिले के सुदापाड़ा, टिटलागढ़ और संभलपुर जिले खेतराजपुर जैसे छोटे शहरों से बरामद किए गए। इन जगहों पर जर्जर इमारतों के भीतर बने तहखानों में पैसे रखे गए थे।

विभाग ने बताया है कि छापेमारी के दौरान दस्तावेजों और डिजिटल डेटा के रूप में बड़े पैमाने पर साक्ष्य भी जब्त किए गए हैं। इनके शुरुआती विश्लेषण से देशी शराब की बेहिसाब बिक्री का पता चला है। सबूतों से पता चलता है कि कंपनी शराब कारोबार से हुई कमाई को बड़े स्तर पर पर छिपाने में लगी हुई थी।

गौरतलब आयकर विभाग ने बलदेव साहू एंड ग्रुप ऑफ कंपनीज के ठिकानों पर कार्रवाई 6 दिसंबर 2023 को शुरू की थी। मूल रूप से देशी शराब बनाने के कारोबार से जुड़ी यह कंपनी विदेशी शराब की बॉटलिंग, अस्पताल और शैक्षणिक संस्थान भी चलाती है। कंपनी का नाम धीरज साहू के पिता बलदेव साहू के नाम पर है। कॉन्ग्रेस सांसद के अलावा उनके परिवार के अन्य सदस्य भी इस कंपनी में शामिल हैं।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक इस छापेमारी में आयकर विभाग के 100 से अधिक अधिकारी शामिल हुए थे। बरामद हुई नकदी को गिनने के लिए 40 मशीनों को काम पर लगाना पड़ा था। इनमें से कई मशीनें तो नोटों को गिनते-गिनते खराब तक हो गईं थी।

आयकर विभाग की कार्रवाई के बाद कॉन्ग्रेस सांसद धीरज साहू ने कहा था कि जो पैसे बरामद हुए हैं वो न तो उनका अपना है और न ही कॉन्ग्रेस का है। ये उनके फैमिली बिजनेस से आया पैसा है। इसके बारे में सिर्फ उनका परिवार ही बता सकता है। उन्होंने कहा था, “ये जो पैसा है ये मेरे परिवार द्वारा चलाई जा रही कंपनियों का है। इनकम टैक्स का जवाब आने दीजिए कि ये काला धन है या सफेद धन। मैं बिजनेस लाइन में नहीं हूँ। परिवार वाले इसका जवाब देंगे। मुझे नहीं पता कि लोग इसको कैसे देख रहे हैं लेकिन मैं बस इतना कह सकता हूँ कि इन सबका कॉन्ग्रेस या अन्य किसी पार्टी से कोई लेना-देना नहीं है।”

जम्मू-कश्मीर के राजौरी में सैन्य वाहन पर आतंकी हमला: 3 जवान बलिदान, मुठभेड़ में शामिल होने के लिए जा रहा था सैनिकों का काफिला

जम्मू-कश्मीर के राजौरी सेक्टर के थाना मंडी इलाके में गुरुवार (21 दिसंबर 2023) को आतंकवादियों ने दो सैन्य वाहनों पर हमला कर दिया, जिसमें तीन जनाव वीरगति को प्राप्त हो गए। वहीं, तीन अन्य जवान घायल हो गए हैं। ये जवान आतंकियों के खिलाफ एक अभियान में शामिल होने के लिए जा रहे थे। हमले के बाद पूरे इलाके की घेराबंदी करके तलाशी अभियान शुरू कर दी गई है।

सेना के एक अधिकारी ने बताया, “ये हमला उस काफिले को निशाना बनाकर किया गया, जो थाना मंडी इलाके में जारी मुठभेड़ में री-इन्फोर्समेंट के लिए पहुँच रहा था। उस इलाके में कल (20 दिसंबर 2023) शाम से ही मुठभेड़ चल रही थी। वहाँ जाते वक्त आतंकियों ने दोनों वाहनों को निशाना बनाया। इस हमले में तीन जवान वीरगति को प्राप्त हो गए हैं।”

दो गाड़ियों में ये जा रहे इन जवानों पर घात लगाकर बैठे आतंकियों ने अंधाधुन फायरिंग शुरू कर दी। इन जवानों ने भी जवाबी फायरिंग की, जिनमें तीन जवान बलिदान हो गए। दरअसल, पिछले कुछ समय से आतंकी जम्मू-कश्मीर में शांति और कानून व्यवस्था को बिगाड़ने में लगे हुए हैं। हालाँकि, सुरक्षाबल उनके नापाक मंंसूबों को हर बार नाकामयाब करती रही है। इस दौरान कई कुख्यात आतंकी भी मार गिराए गए।

बता दें कि बीते नवंबर माह में राजौरी के कालाकोट जंगलों में चल रही मुठभेड़ में 23 नवंबर 2023 को सुरक्षाबलों ने दो आतंकियों को मार गिराया था। इनमें से एक लश्कर-ए-तैयबा के टॉप कमांडर कारी था। वो कम से कम पाँच हत्याओं में शामिल रहा था। जानकारी के मुताबिक, दोनों आतंकियों को जम्मू-कश्मीर के राजौरी और पुंछ में फिर से आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए भेजा गया था।

मारे गए दोनों आतंकी आईईडी बनाने में और उसे चलाने में माहिर थे। इसके अलावा दोनों ही एक्सपर्ट स्नाइपर भी थे। इन दोनों ने गुफाओं में छिपने में भी महारत हासिल की थी। इन दोनों आतंकियों के खिलाफ चलाए गए उस ऑपरेशन में सेना के अधिकारी समेत 4 जवानों को वीरगति प्राप्त हुई थी।

चामुंडा मंदिर पर इस्लामी कट्टरपंथियों का प्रोपेगेंडा पुलिस ने किया फुस्स, हमला करने वाली भीड़ में मुस्लिम औरतें भी: FIR की पूरी डिटेल

मुरादाबाद में चामुंडा मंदिर के विस्तार के दौरान मुस्लिमों महिलाओं सहित उन्मादी भीड़ ने पुलिस और हिंदुओं पर हमला कर दिया था। इसके बाद पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर कर दिया था। अब इस्लामी कट्टरपंथी और लेफ्ट लिबरल गिरोह इसको लेकर फेक न्यूज फैला रहे हैं। उन्होंने यह फैलाना शुरू कर दिया कि मुरादाबाद पुलिस ने मुस्लिमों पर हमला किया है। इस गिरोह का कहना है कि चामुंडा मंदिर अवैध तरीके से बन रही थी, जिसका विरोध किया जा रहा था और इस दौरान पुलिस ने उनकी पिटाई की।

दरअसल, उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले के मूढ़ापांडे थाना क्षेत्र के रौंडा में चामुंडा माता मंदिर की बाउंड्री के निर्माण को लेकर दो समुदाय के आमने-सामने आने से सांप्रदायिक तनाव फैल गया। इस दौरान मामले को शांत कराने गई पुलिस पर कट्टरपंथी मुस्लिमों ने पथराव कर दिया था। पुलिस ने अब्दुल्ला और रहीस सहित कुल 34 आरोपितों पर FIR दर्ज करके 5 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। घटना मंगलवार (19 दिसंबर 2023) की है।

इस मंदिर की जर्जर चारदीवारी के पुनर्निर्माण का मुस्लिम पक्ष ने विरोध किया। हंगामे की सूचना के बाद पुलिस मौके पर पहुँच गई और निर्माण कार्य रुकवा दिया था। इस बीच 19 दिसंबर 2023 (मंगलवार) को एक बार फिर से मंदिर की चारदीवारी का निर्माण कार्य शुरू हुआ तो मुस्लिम पक्ष ने मंदिर के सामने के कब्रिस्तान की बाउंड्री बनानी शुरू कर दी। इसके बाद हालात तनावपूर्ण हो गए।

सूचना पाकर मौके पर पुलिस भी पहुँची, तभी बातचीत के दौरान ही मुस्लिम पक्ष पत्थरबाजी करने लगा। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। जब पुलिस ने बल प्रयोग करके उपद्रवियों को काबू करना चाहा तो पत्थरबाज पुलिस से ही भिड़ गए। पत्थरबाजी की चपेट में महिला कॉन्स्टेबल भी आई। हालाँकि, पुलिस ने उपद्रवियों पर काबू पा लिया। चौकी इंचार्ज सब इंस्पेक्टर सुरेंद्र कुमार की तहरीर पर कुल 34 आरोपितों के खिलाफ FIR दर्ज कर ली गई है।

इस मामले में अब इस्लामी कट्टरपंथी फेक न्यूज फैला रहे हैं। इस घटना को लेकर मुखलिफीन ए मजलिस नाम के ट्विटर हैंडल पर लिखा गया है, “यूपी पुलिस एंटी सोशल एलिमेंट्स के साथ मिलकर महिलाओं पर लाठी चार्ज क्यों कर रही है? उन ‘गुंडों’ (हिंदुओं) पर कार्रवाई करने के बजाय पुलिस लोगों की पिटाई कर रही है। इस मामले को शौकत जी (ओवैसी की AIMIM के यूपी अध्यक्ष) देखें और जरूरी कदम उठाएँ।”

इस वीडियो को शेयर करते हुए क्विंट के पत्रकार पीयूष राय ने लिखा, “पुलिसकर्मियों ने जिले के मूढ़ापांडे इलाके में एक समुदाय के धार्मिक स्थल के निर्माण का कथित तौर पर विरोध करने वाले दूसरे समुदाय के लोगों पर हमला किया। खुलेआम लाठीचार्ज किया। समूह ने पथराव भी किया, क्योंकि निर्माण को लेकर शुरुआती बहस जल्द ही बड़े विवाद में बदल गई।”

सबा खान नाम के एक एक्स (पूर्व में ट्विटर) हैंडल पर लिखा गया, “यूपी के मुरादाबाद के मुंडापांडे कस्बे में पुलिस ने असामाजिक तत्वों के साथ मिलकर मुस्लिम महिलाओं पर लाठीचार्ज किया।”

इस्लामी कट्टरपंथी फैला रहे मंदिर के अवैध होने की बात

इस्लामी कट्टरपंथी सोशल मीडिया पर इस बात को जोर-शोर से प्रसारित कर रहे हैं कि हिंदू पक्ष मुस्लिम बहुल इलाके में अवैध तरीके से मंदिर निर्माण करा रहा है। इसका मुस्लिमों ने विरोध किया और निर्माण को हटाने की माँग की तो पुलिस ने उन पर हमला किया। कट्टरपंथियों के मुताबिक, पुलिस ने ‘अल्पसंख्यकों’ की हितों की रक्षा करने के बजाय कथित तौर पर हिंदुओं के साथ मिलकर मुस्लिम महिलाओं पर हमला कर दिया।

खानाबदोश नाम के एक्स हैंडल ने लिखा, “उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद का खौफनाक मंजर। मुस्लिम उस भीड़ का विरोध कर रहे थे, जो मुस्लिम बहुल इलाके में एक मंदिर का अवैध रूप से निर्माण कर रहे थे। भीड़ से जमीन के दस्तावेज माँगे जाने पर पुलिस ने हस्तक्षेप किया और मुस्लिम महिलाओं एवं युवाओं की पिटाई शुरू कर दी। पीड़ित पक्षों के मुताबिक, पुलिस ने मुस्लिम समुदाय के खिलाफ एकतरफा कार्रवाई की, जबकि मंदिर की जमीन के कागजात भी नहीं दिखाए जा रहे हैं और जबरन निर्माण कराया जा रहा है।”

इस पूरे मामले में ये साफ है कि मुस्लिमों ने पहले पुलिस पर हमला किया और फिर चामुंडा माता मंदिर की चारदीवारी बना रहे हिंदुओं को निशाने पर लिया। ये मंदिर निजी जमीन पर बना है। मुस्लिमों ने इस मंदिर को अवैध बता दिया। वहीं, पुलिस ने मामले की जाँच की और पाया कि ये मंदिर निजी जमीन पर बना है, ऐसे में विरोध प्रदर्शन करने की कोई वजह नहीं है। इसके बावजूद, महिलाएँ और नाबालिग सहित मुस्लिमों की भीड़ ने मंदिर की चारदीवारी के निर्माण का विरोध किया और पुलिस के साथ ही स्थानीय हिंदुओं पर पत्थरबाजी की।

ऑपइंडिया ने इस मामले की एफआईआर की कॉपी देखी है, जिसमें साफ लिखा है कि मुस्लिम समुदाय के लोग, जिसमें महिलाएँ भी शामिल थी, उन्होंने पुलिसवालों पर पत्थरबाजी की, अधिकारियों के साथ बदतमीजी की और गाली-गलौच की।मुस्लिम भीड़ ने ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों को निशाना बनाया, जिसके बाद पुलिस ने आत्मरक्षा में सबको तितर-बितर करने की कार्रवाई की।

मुस्लिमों ने मंदिर के सामने सरकारी जमीन पर शुरू किया अवैध निर्माण, पुलिस ने रोका: FIR में जिक्र

एक तरफ लेफ्ट लिबरल गिरोह और इस्लामिक कट्टरपंथी समूह ये बात प्रचारित कर रहा है कि चामुंडा माता से जुड़ा निर्माण अवैध है, जबकि एफआईआर की कॉपी में साफ लिखा है कि मुस्लिम समुदाय ने मंदिर के सामने ही सरकारी जमीन पर कब्जा करके उस पर अवैध निर्माण शुरू कर दिया। इसमें कहा गया है कि मंदिर से सिर्फ 50 मीटर की दूरी पर सरकारी जमीन है।

एफआईआर के मुताबिक, हिंदुओं ने सरकारी जमीन पर बने मुस्लिम कब्रिस्तान की चारदीवारी बनाने का विरोध किया, जो राज्य सरकार की संपत्ति है। इस बारे में पुलिस को सूचना भी दी गई कि मुस्लिम सरकारी जमीन पर कब्जा कर रहे हैं और उन्हें ऐसा करने से रोका जाए। इसके बाद पुलिस ने मामले की गंभीरता का संज्ञान लिया और कार्रवाई की।

अब्दुल्ला और जैबुलनिशा नाम की महिला सहित मुस्लिम पक्ष ने पुलिस के साथ बातचीत में सहयोग नहीं किया और अपने समूह के लोगों को सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण को जारी रखने के उकसाया। उनका कहना था कि हिंदू जिस मंदिर की चारदीवारी का पुनर्निर्माण कर रहे हैं, वो अवैध है। पहले उसे रोका जाए। इस पर पुलिस ने उन्हें बताया कि मंदिर निजी जमीन पर बना है, जबकि उनके द्वारा कराया जा रहा निर्माण सरकारी जमीन पर है।

एफआईआर की कॉपी

एफआईआर की कॉपी में साफ तौर पर लिखा है कि 19 दिसंबर को दोपहर 12.30 बजे आरोपित, जिनमें महिलाएँ भी शामिल हैं, इकट्ठा हुए और उनके समुदाय द्वारा सरकारी जमीन पर कराए जा रहे अवैध निर्माण को सही ठहराना और मंदिर के निर्माण कार्य का विरोध करना शुरू कर दिया। पुलिस ने सभी लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की।

हालाँकि, महिलाओं सहित 19 लोगों ने पुलिस पर हमला कर दिया। उन पर पथराव के साथ ही पुलिस अधिकारियों के साथ गाली-गलौच की गई। इसके बाद पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर किया और 5 आरोपितों को मौके से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने आत्मरक्षा में ये कदम उठाया। इस मामले में 14 अन्य लोगों के खिलाफ भी शिकायत दर्ज की गई है।

एफआईआर की कॉपी में जैबुलनिशा के साथ ही 19 लोगों के नाम

पुलिस ने इस मामले में जिन 19 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है, उसमें जैबुलनिशा नाम की महिला का भी नाम शामिल है। वो खुद को वकील बता रही है और उसने पुलिस की चेतावनी के बावजूद मुस्लिमों से निर्माण कार्य जारी रखने के लिए उकसाया। जैबुनिशा ने मंदिर के पहले से बने होने को स्वीकार किया, साथ ही यह भी कहा कि हिंदू पक्ष मंदिर का विस्तार कर रहा है।

हालाँकि, पुलिस ने ऑपइंडिया के साथ बातचीत में साफ कहा कि हिंदू पक्ष अपनी जमीन पर निर्माण कार्य करवा रहा था और ये काम गैर-कानूनी नहीं था। मुरादाबाद पुलिस के एडिशनल एसपी ने ऑपइंडिया से बातचीत में कहा, “दूसरे समुदाय के लोगों ने हंगामा किया, जिसके बाद पुलिस ने 5 लोगों को गिरफ्तार किया है। इस मामले की जाँच जारी है।”

Additional SP of Moradabad police on Chamunda Mata temple issue from OpIndia Videos on Vimeo.

मुरादाबाद पुलिस द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर में जो 19 नाम हैं, उनमें अब्दुल्लाह, रहीस, इसरार, फहीम, तौसीब, जैबुलनिशा (महिला), नवीश, मुजम्मिल, नवेज, कामिल, मासू अली, इलियास, रविक, रिहान, कर्रार, जावेद, नजाकत, नादिर, जाबिर और 15-20 अन्य अज्ञात लोग हैं। पुलिस ने बताया है कि महिला समेत आरोपितों ने पुलिस पर पत्थरबाजी की। महिला खुद को वकील बता रही है।

एफआईआर में जैबुनिशा का नाम भी शामिल

पुलिस ने इस मामले में अब तक अब्दुल्लाह, रहीस, इसरार, फहीम और तौसीब को गिरफ्तार कर लिया है। बाकी आरोपितों की तलाश की जा रही है और उनकी गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है। एफआईआर सुरेंद्र सिंह नाम के एक पुलिसकर्मी की शिकायत के आधार पर दर्ज की गई है। 

पुलिस ने IPC की धारा 147 (दंगा फैलाना), धारा 148 (जानलेवा हथियारों के साथ दंगा करना), 149 (गैरकानूनी रूप से जमा होना), 332 (सरकारी कर्मचारी के काम में बाधा पहुँचाना), 353 (शांति भंग करने के उद्देश्य से गाली-गलौच करना) और 506 (आपराधिक कृत्य को अंजाम देना) जैसी धाराओं में केस दर्ज किया है। साथ ही आपराधिक कानून संशोधन अधिनियम, 1932 की धारा 7 भी लगाई है। 

राहुल गाँधी पर कार्रवाई के लिए चुनाव आयोग को 8 सप्ताह का समय, PM मोदी को ‘जेबकतरा’ कहने के मामले में हाई कोर्ट का निर्देश

राहुल गाँधी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। उन्होंने 22 नवंबर 2023 को राजस्थान के भरतपुर जिले में आने वाले नदबई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और बिजनेसमैन गौतम अडाणी को लेकर टिप्पणी की थी। अब इस मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। हाई कोर्ट ने चुनाव आयोग से कहा है कि वो 8 सप्ताह में इस संबंध में कार्रवाई को लेकर फैसला करें। हाई कोर्ट ने राहुल गाँधी की टिप्पणी को बेहद गलत बताया, जिसमें उन्होंने पीएम मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और गौतम अडाणी को ‘जेबकतरा’ कहा था।

चुनाव आयोग को 8 सप्ताह का समय

दिल्ली हाई कोर्ट में कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस मनमोहन और जस्टिस मिनी पुशकर्णा की दो सदस्यीय बेंच ने इस मामले की सुनवाई की। इसमें चुनाव आयोग की तरफ से पेश हुईं अधिवक्ता सुरुचि सूरी ने बताया कि राहुल गाँधी को उनकी टिप्पणी को लेकर 23 नंवबर को ‘शो कॉज नोटिस’ जारी किया गया था। इसका जवाब उन्हें 25 नवंबर तक देना था, लेकिन राहुल गाँधी ने नोटिस का जवाब तक नहीं दिया। इसके बाद कोर्ट ने कहा कि वो चुनाव आयोग को इस मामले में कार्रवाई से संबंधित फैसला लेने के लिए 8 सप्ताह का समय देते हैं।

याचिका में कहा गया है, “राहुल गाँधी द्वारा बिना किसी सबूत के लगाए गए आरोप सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध हैं और राहुल गाँधी को यह साबित करने के लिए कहा जाना चाहिए कि नरेंद्र मोदी, अमित शाह और गौतम अडानी “पॉकेट मार” हैं।” हाई कोर्ट ने इस मामले में दाखिल पीआईएल को खारिज कर दिया और कहा कि वो इस मामले में हस्तक्षेप नहीं करेगी। हाई कोर्ट ने कहा कि ये मामला चुनाव आयोग और सरकार से जुड़ा है, हम इस मामले में हस्तक्षेप नहीं करते। वो खुद कदम उठाएंगे, हमने इसके लिए 8 सप्ताह का समय दिया है।

राहुल गाँधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की माँग

लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले में अधिवक्ता भरत नागर ने पीआईएल दाखिल की थी। उनकी तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता आदिश अगरवाल और कीर्ति उप्पल ने हाई कोर्ट में जिरह की। जिसमें उन्होंने राहुल गाँधी के खिलाफ आईपीसी की धारा 171(डी), 171(एफ), 171 (जी), 406, 419, 426 और 463 के साथ लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 के सेक्शन 123 के तहत मामला दर्ज करने की माँग की थी।

याचिका में कहा गया कि चुनाव आयोग के पास राहुल गाँधी के खिलाफ ‘शो कॉज नोटिस’ जारी करने के सीमित अधिकार हैं, जिसमें वो इसका जवाब देते हैं या नहीं, इसकी भी बाध्यता नहीं है। नागर ने अपनी याचिका में कहा है कि राहुल गाँधी के ऐसे बयानों का जनता पर व्यापक असर पड़ सकता है, और हो सकता है कि राहुल गाँधी ही उस ‘शो कॉज नोटिस’ का जवाब इतनी देरी से दें कि वहाँ पर वोटिंग हो चुकी हो।

चुनाव आयोग के पक्ष में दिल्ली हाई कोर्ट का फैसला

इस मामले में अब कार्रवाई के लिए दिल्ली हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग के पक्ष में फैसला दिया है है। बता दें कि राजस्थान विधानसभा चुनाव के दौरान ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को न सिर्फ ‘पॉकेटमार’ बोला गया था, बल्कि उन्हें ‘पनौती’ तक बोला गया था। वो भी सार्वजनिक मंचों से। ऐसे में नोटिस का जवाब न देने और लगातार गलत तरीके से टिप्पणियाँ करने पर चुनाव आयोग क्या कार्रवाई करता है, ये आने वाले समय में पता चल ही जाएगा।

उपराष्ट्रपति के अपमान पर मुंबई में निकला मार्च, महाराष्ट्र के मंत्री ने राहुल गाँधी और कल्याण बनर्जी के खिलाफ की पुलिस कंप्लेन

महाराष्ट्र सरकार में कैबिनेट मंत्री और बीजेपी नेता मंगल प्रभात लोढ़ा ने उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ की मिमिक्री पर एतराज जताया है। उन्होंने गुरुवार (21 दिसंबर 2023) को कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी और तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) सांसद कल्याण बनर्जी के खिलाफ मुंबई के कालाचौकी पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई है।

अपनी शिकायत में मंत्री लोढ़ा ने लिखा है कि भारत के उपराष्ट्रपति का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने दोनों सांसदों के खिलाफ FIR दर्ज करने की माँग की है। शिकायत दर्ज कराने से पहले उनकी अगुवाई में मुंबई के भारत माता सिनेमा से लालबाग पुलिस स्टेशन तक विरोध मार्च भी निकाला गया।

इस विरोध मार्च में ‘उपराष्ट्रपति के सम्मान में, भाजपा मैदान में’ लिखे पोस्टर लहराए गए। इस दौरान प्रदर्शन में शामिल लोगों ने ‘उपराष्ट्रपति का ये अपमान, नहीं सहेगा हिंदुस्तान’ के नारे लगाए। इसमें दक्षिण मुंबई बीजेपी कार्यकर्ता कैबिनेट मंत्री और बीजेपी नेता मंगल प्रभात लोढ़ा के साथ चलते नजर आए।

फोटो साभार: x हैंडल @MPLodha

इस मसले पर बीजेपी नेता मंगल प्रभात लोढ़ा ने अपने एक्स हैंडल पर लिखा, “घमंडिया गठबंधन के सांसदों का यह कृत्य देश के लिए शर्मनाक और अस्वीकार्य! देश के उपराष्ट्रपति आदरणीय श्री जगदीप धनखड़ जी का संसद भवन के बाहर मजाक उड़ाकर अपमान करना देश के लिए शर्मनाक और अस्वीकार्य है।”

उन्होंने आगे लिखा, “एक सांसद मजाक उड़ा रहा है और दूसरा कैमराजीवी सांसद (राहुल गाँधी) उस घटना का वीडियो बना रहा था। यह घटना हम देशवासियों के लिए असहनीय है। भारत की जनता परिवारवादी घमंडिया गठबंधन को इसका उत्तर जरूर देगी और जिस तरह से वे आज कैमरों का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं। कल वही कैमरा उनकी असलियत दुनिया को दिखाएगा!”

विपक्षी सांसदों के निलंबन के बाद संसद परिसर में उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ की मिमिक्री पर कई लोगों और नेताओं ने खासा एतराज जताया है। इसे लेकर खुद उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने संसद में अपनी राय जाहिर की थी। इसको लेकर देश भर से सत्तारूढ़ पार्टी बीजेपी के नेताओं भी आपत्ति दर्ज करा रहे हैं।

टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी की और कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी की हर तरफ आलोचना हो रही है। दरअसल टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी संसद परिसर में उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ की मिमिक्री कर रहे थे। उस वक्त कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी टीएमसी नेता बनर्जी के इस काम का मोबाइल से वीडियो बनाते दिखे थे।

‘मैं कुश्ती को ही त्याग देती हूँ’: कैमरों को आँसू दिखा साक्षी मलिक ने लिया ‘संन्यास’, बृजभूषण सिंह के करीबी ने जीता चुनाव तो रोने लगीं

कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष बृजभूषण सिंह के करीबी संजय सिंह के चुने जाने पर भारतीय पहलवान साक्षी मलिक ने कुश्ती से संन्यास लेने का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि जिसे WFI का अध्यक्ष बनाया गया है वो बृजभूषण के लिए बेटे से भी प्यारा है।

उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि आने वाले पीढ़ियाँ शोषण के लिए तैयार रहें। वहीं बजरंग पूनिया ने भी कहा कि संजय सिंह को अध्यक्ष बनाने का जो फैसला हुआ है उससे लड़कियों को इंसाफ नहीं मिलेगा।

साक्षी मलिक ने रोते हुए कहा- “एक बात कहना चाहूँगी कि हमने लड़ाई लड़ी, पूरे दिल से लड़ी। लेकिन अगर अध्यक्ष बृजभूषण सिंह जैसा आदमी रहेगा या उसका सहयोगी रहेगा तो मैं अपनी कुश्ती को त्यागती हूँ और मैं आज के बाद आपको वहाँ नहीं दिखूँगी। बस सब देशवासियों को धन्यवाद जिन्होंने मेरा सपोर्ट किया और मुझे इस मुकाम तक पहुँचाया।”

उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “आज जो महासंघ का अध्यक्ष बना है…हमें पता था वही बनेगा… वह बृजभूषण के लिए बेटे से भी प्यारा है… जो अब तक परदे के पीछे से होता था अब खुले आम होगा। हम अपनी लड़ाई में कामयाब नहीं हो पाए। हमने हर किसी को अपनी बात बताई। पूरे देश को पता होते हुए भी सही इंसान नहीं WFI का चीफ नहीं बना। मैं अपने आने वाली पीढ़ियों को कहना चाहती हूँ कि शोषण के लिए तैयार रहिए।”

वहीं बजरंग पूनिया ने कहा, “खेल मंत्रालय ने वादा किया था कि फेडरेशन में WFI से अलग का कोई आदमी आएगा, जिस तरह पूरे तंत्र ने काम किया उससे मुझे नहीं लगता कि बेटियों को न्याय मिलेगा, हमारे देश में कोई न्याय नहीं बचा है वह केवल कोर्ट में मिलेगा, हमने जो लड़ी लड़ी आने वाली पीढ़ी को और लड़नी पड़ेगी। सरकार ने जो वादा किया पूरा नहीं किया।”

बता दें कि बृजभूषण शरण सिंह के करीबी संजय सिंह के अध्यक्ष बनने के बाद बृजभूषण सिंह के दिल्ली आवास के बाहर दबदबा कायम रहने के पोस्टर लगाए गए। बाद में उन्होंने मीडिया से कहा कि वो कुश्ती के लिए नेशनल कैंप आयोजित करवाए जाएँगे, जिन्हें राजनीति करनी है वो करते रहें, जिन्हें कुश्ती लड़नी है वो लड़ेंगे। वहीं बृजभूषण सिंह से जब पूछा गया कि साक्षी कुश्ती छोड़ने की बात कह रही हैं तो इस पर उन्होंने कहा कि इसका उनसे क्या लेना-देना।

मोहन भागवत को इस्लामी आतंकियों और माओवादियों से जान का खतरा, बिहार दौरे पर पहुँचे RSS प्रमुख की सुरक्षा को लेकर पुलिस अलर्ट

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत को इस्लामिक कट्टरपंथियों से खतरा है। बिहार पुलिस को खुफिया सूचनाओं के आधार पर अलर्ट पर रखा गया है। सूत्रों के मुताबिक, खुफिया एजेंसियों को जानकारी मिली है कि कुछ इस्लामिक कट्टरपंथी मोहन भागवत की हत्या की साजिश रच रहे हैं। इस सूचना के बाद बिहार पुलिस ने मोहन भागवत की सुरक्षा बढ़ा दी है।

भागवत की व्यक्तिगत सुरक्षा में लगे कर्मियों की संख्या बढ़ा दी गई है। उनकी सुरक्षा में लगे अधिकारियों को विशेष निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही उनके होने वाले कार्यक्रमों में भी विशेष चौकसी रखी जाएगी। उनके कार्यक्रमों में भी सुरक्षाकर्मियों की संख्या बढ़ा दी गई है। बता दें कि भागवत तीन दिनों के बिहार दौरे पर हैं।

बिहार पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि मोहन भागवत की सुरक्षा के लिए सभी आवश्यक इंतजाम किए हैं। हर समय उनकी सुरक्षा पर नजर रखी जा रही है। पुलिस मुख्यालय की ओर से जारी अलर्ट में कहा गया है कि मोहन भागवत पर माओवादियों, आतंकियों और इस्लामिक कट्टरपंथियों के साथ ही पाकिस्तान की आईएसआई की ओर से खतरा बना हुआ है।

डीआइजी से मिले निर्देश बाद से भागलपुर में सभी प्रमुख मार्गों, जिले के प्रवेश नाकों पर वाहनों की सघन तलाशी ली जा है। होटलों और धर्मशालाओं के अलावा लॉजों पर विशेष नजर रखी जा रही है। संघ प्रमुख के 21 और 22 दिसंबर को भागलपुर में हो रहे परिभ्रमण कार्यक्रम से जुड़े स्थलों और उसके आसपास के इलाकों में पुलिस सक्रिय हो गई है।

बता दें कि मोहन भागवत 21 दिसंबर 2023 की शाम भागलपुर पहुँचे हैं। वहाँ वो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ताओं से मुलाकात करेंगे। अगले दिन 22 दिसंबर 2023 को महर्षि मेंहीं आश्रम कुप्पा घाट में होने वाले कार्यक्रम में भाग लेंगे। इसके बाद वो पटना रवाना हो जाएँगे।

इन कार्यक्रमों की सुरक्षा का जिम्मा भागलपुर रेंज के डीआइजी विवेकानंद, एसएसपी आनंद कुमार, सिटी एसपी अमित रंजन, सिटी डीएसपी अजय कुमार चौधरी को सौंपी गई है। यही नहीं कोतवाली, जोगसर और बरारी थानाक्षेत्र में संघ प्रमुख के आगमन, कार्यक्रम और प्रवास को देखते हुए इन तीनों थाना क्षेत्रों में आवाजाही वाले मार्ग की किलेबंदी की गई है।

बताते चलें कि मोहन भागवत को जेड प्लस सुरक्षा मिली हुई है। इसके अलावा, उन्हें सीआईएसएफ की विशेष सुरक्षा भी मिली हुई है। इसके बाद प्रदेश की सरकार वहाँ की पुलिस को विशेष तौर तैनात करेगी। इसके लिए पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को लगाया गया है।