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मध्य प्रदेश में AAP के सभी प्रत्याशियों की जमानत जब्त, जदयू और समाजवादी पार्टी का भी बुरा हाल: NOTA से भी पिछड़ गईं I.N.D.I. गठबंधन की पार्टियाँ

मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और मिजोरम के विधानसभा चुनावों के अंतिम परिणामों की घोषणा हो चुकी है। मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में भारतीय जनता पार्टी ने पूर्ण बहुमत से जीत दर्ज की है जबकि तेलंगाना कॉन्ग्रेस के हिस्से में आया है। मिजोरम में नई पार्टी ZPM सत्ता में आई। जिन प्रदेशों में बीजेपी ने जीत दर्ज की है वहाँ सीधा मुकाबला कॉन्ग्रेस से ही रहा। इन राज्यों में आम आदमी पार्टी (AAP), जनता दल यूनाइटेड (JDU) और समाजवादी पार्टी (SP) ने भी अपने प्रत्याशी खड़े किए थे।

हालाँकि, इन सभी पार्टियों के प्रत्याशियों को जीत तो दूर, अपनी जमानतें बचाने के लिए संघर्ष करना पड़ा। कइयों को तो NOTA (नोटा) से भी कम वोट प्राप्त हुए हैं।

मध्य प्रदेश में I.N.D.I. गठबंधन का मुकाबला NOTA से

मध्य प्रदेश चुनाव में JDU ने कुल 10 प्रत्याशी उतारे थे। इसमें से 1 ने बाद में सरेंडर कर दिया था जिसके चलते पार्टी के 9 प्रत्याशी चुनाव लड़े। इन सभी की जमानत जब्त हो गईं। 4 जगहों पर तो JDU प्रत्याशियों को 200 से भी कम वोट मिले। थांदला से तोल सिंह भूरिया अधिकतम 3103 वोट हासिल कर पाए। JDU को मिला कुल वोट प्रतिशत महज 0.02 रहा। साल 2003 से मध्य प्रदेश में चुनाव लड़ रही JDU से अभी तक महज 1 बार अपने प्रत्याशी सरोज बच्चन चुनाव जीत कर विधायक बन पाए हैं।

I.N.D.I. गठबंधन के दूसरे घटक दल समाजवादी पार्टी के मध्य प्रदेश में कुल 69 सीटों पर उम्मीदवार चुनाव लड़े थे। इनमें से एक भी प्रत्याशी जीत के आसपास भी नहीं दिखा। सपा को मिला कुल वोट प्रतिशत महज 0.46 रहा। 43 सीटों पर सपा कैंडिडेट्स को 1 हजार से भी कम वोट मिले। अखिलेश यादव की ताबड़तोड़ रैलियों के बावजूद कहीं किसी एक सीट पर भी समाजवादी पार्टी का उम्मीदवार दूसरे नंबर पर नहीं रहा। हारे प्रत्याशियों में बुधनी सीट से ‘मिर्ची बाबा’ के नाम से प्रसिद्ध चर्चित स्वामी वैराग्यनंद भी शामिल हैं।

मध्य प्रदेश में आम आदमी पार्टी (AAP) की हालत भी कमोबेश JDU और सपा जैसी रही। अरविंद केजरीवाल ने मध्य प्रदेश में कुल 70 उम्मीदवार उतारे थे। इनमें से अंतिम रिजल्ट और रुझान मिला कर एक भी जीत के आसपास नहीं दिखा। सभी 70 प्रत्याशियों की जमानतें जब्त हो गईं। आप पार्टी का मध्य प्रदेश में कुल वोट प्रतिशत 0.42 रहा। हारे प्रत्याशियों में दमोह सीट से टीवी अभिनेत्री चाहत पांडेय और सिंगरौली की मेयर रानी अग्रवाल शामिल हैं।

बीजेपी की जीत से बाजार ने भरी उड़ान, अब तक के सर्वोच्च स्तर पर पहुँच निफ्टी-सेंसेक्स ने मनाया जश्न: ₹6 लाख करोड़ की कमाई

3 दिसंबर 2023 को तीन राज्यों में बीजेपी को बड़ी जीत मिली। इसका असर अगले दिन शेयर बाजार में भी देखने को मिला। सोमवार (4 दिसंबर 2023) को बाजार खुलते ही दोनों सूचकांक रिकॉर्ड उच्च स्तर पर आ गए। बाजार में आई इस तेजी की वजह से निवेशकों की पूँजी ₹6 लाख करोड़ बढ़ गई।

भाजपा ने मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ तीनों राज्यों में बहुमत प्राप्त किया है। बीते सप्ताह 1 दिसंबर को बाजार 67,447 के स्तर पर बंद हुआ था। नतीजों के बाद सोमवार को यह सुबह 9 बजे 68,435 के स्तर पर खुला। इसके बाद बाजार दिन में ट्रेडिंग के बीच 68,918 तक गया। यह आज तक सेंसेक्स का सबसे ऊँचा स्तर है।

इसके अलावा सूचकांक निफ्टी50 1 दिसंबर को 20,248 के स्तर पर बंद हुआ था। यह सोमवार को 20,565 के स्तर पर खुला। दिन में शेयर बाजार में खूब तेजी रही जिसके कारण यह 20,702 तक गया। यह आज 20,684 पर बंद हुआ है।

गौरतलब है कि जीडीपी वृद्धि के मजबूत आँकड़ों और बढ़ी हुई कारोबारी गतिविधि के कारण बाजार पहले ही ऊँचे स्तर पर चल रहा था। भाजपा की जीत के बाद यह और बढ़ गया। इस तेजी के बीच इन्फ्रा और बिजली क्षेत्र से जुड़े हुए शेयर खूब बढ़े। तेजी के कारण BSE पर अंकित कम्पनियों की बाजार में कुल वैल्यू बढ़ कर ₹3.43 लाख करोड़ हो गई। आज की तेजी के कारण बाजार में 6 लाख करोड़ की बढ़ोतरी हुई है।

भाजपा की तीन राज्यों में जीत के कारण बाजार में यह सन्देश गया है कि आने वाले 2024 के आम चुनावों में भी जीत हासिल कर सकती है, जिससे देश में राजनीतिक स्थिरता बनी रहेगी। इससे बाजार में यह भी भावना आती है कि नीतियों में भी कोई बड़ा बदलाव नहीं आएगा। इसी कारण से बाजार में यह तेजी देखी गई।

भाजपा ने मध्य प्रदेश में 230 में से 163, राजस्थान में 199 में से 115 और छतीसगढ़ में 90 में से 54 सीट हासिल की हैं। उसने जहाँ राजस्थान और छत्तीसगढ़ में कॉन्ग्रेस को सत्ता से बाहर किया है वहीं मध्य प्रदेश में अपनी सत्ता बचाते हुए प्रचंड बहुमत हासिल किया है। तेलंगाना में भी उसने 8 सीट हासिल की है। मिज़ोरम में उसे 2 सीट हासिल हुई है।

26/11 के जिस गुनहगार को चीन ने बचाया, उसे पाकिस्तान की जेल में ‘अज्ञात’ ने दे दिया जहर: वेंटिलेटर पर लश्कर आतंकी साजिद मीर

पाकिस्तान में ‘अज्ञात लोगों’ ने एक और आतंकी को निपटा दिया है। लश्कर-ए-तैय्यबा का आतंकवादी सरगना साजिद मीर वेंटिलेटर पर है। उसे अज्ञात लोगों ने ज़हर दे दिया। वो मुंबई में 2008 में हुए 26/11 हमलों का साजिशकर्ता है। उसे पाकिस्तान के डेरा गाजी खान स्थित सेन्ट्रल जेल में ही ज़हर दे दिया गया। इसके बाद CMH बहावलपुर में उसका इलाज चल रहा है। पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी ISI उसे एयरलिफ्ट कर के यहाँ के अस्पताल में लेकर आई है।

पाकिस्तान का पुलिस-प्रशासन इस मामले में जेल में खाना बनाने वाले शख्स पर ही शक ज़ाहिर कर रहा है और उसके खिलाफ जाँच शुरू भी कर दी गई है। वो एक प्राइवेट कुक है, जिसे अक्टूबर 2023 में जेल में बहाल किया गया था। अब वो फरार हो गया है। हाल के दिनों में पाकिस्तान में कई आतंकवादियों को ठिकाने लगाने की खबरें आई हैं और इनमें ‘अज्ञात लोगों’ के नाम आए हैं। अब ये ‘अज्ञात’ कौन हैं, इस संबंध में किसी को कुछ खास पता नहीं चला पा रहा है।

साजिद मीर उन आतंकियों में से है जिसका 26/11 हमलों की साजिश रचने में बड़ा रोल है। उसे कुछ ही दिनों पहले लाहौर सेन्ट्रल जेल से शिफ्ट किया गया था। उसे अमेरिकी ने भी मोस्ट वॉन्टेड की सूची में रखा है। साजिद मीर की उम्र 40-50 साल के बीच है। उस पर अमेरिका ने 5 मिलियन डॉलर (41.68 करोड़ रुपए) का इनाम रखा है। जून 2022 में उसे एक टेरर फाइनेंसिंग के मामले में पाकिस्तान के आतंकरोधी कोर्ट ने सज़ा सुनाई थी।

पाकिस्तान के अधिकारियों ने कुछ महीनों पहले तक ये फैलाने की कोशिश भी की थी कि साजिद मीर मर चुका है। लेकिन, पश्चिमी देशों ने इसे मानने से इनकार करते हुए कहा था कि वो इसे साबित कर के दिखाए। उसे हाल ही में ग्लोबल टेररिस्ट घोषित किए जाने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC)में प्रस्ताव लाया गया था लेकिन चीन ने वीटो लगा कर इसे ब्लॉक कर दिया था। भारत ने इस दौरान कहा भी था कि आतंकवाद से लड़ने को लेकर चीन गंभीर नहीं है।

‘चलो नई मिसाल हो, बढ़ो नया कमाल हो’ : नेवी डे पर PM मोदी ने किया छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा का अनावरण, कहा- सेना में बढ़ाएँगे नारी शक्ति​

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज (4 दिसंबर 2023) नौसेना दिवस के मौके पर महाराष्ट्र के सिंधुदुर्ग पहुँचे। यहाँ से वह सिंधुदुर्ग किले गए। उन्होंने छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा का अनावरण किया। यह प्रतिमा भारतीय नौसेना की तरफ से सिंधुदुर्ग जिले में स्थापित की गई है।

अनावरण के दौरान पीएम मोदी ने छत्रपति शिवाजी महाराज को पुष्प चढ़ाकर श्रद्धांजलि दी और फिर दोनों हाथ जोड़कर उन्हें नमन किया। इसके बाद वह सिंधुदुर्ग के तारकर्ली बीच भी गए। वहाँ कार्यक्रम का आयोजन हुआ। जिसके बाद पीएम मोदी ने जनसभा को संबोधित किया।

संबोधन में पीएम मोदी ने नौसेना को बधाई देते हुए कहा, “आपके लिए ही कहा गया है कि… चलो नई मिसाल हो, बढ़ो नया कमाल हो, झुको नहीं, रुको नहीं, बढ़े चलो, बढ़े चलो।”

उन्होंने कहा, “अपनी विरासत पर गर्व करने की भावना के साथ मुझे एक और घोषणा करते हुए गौरव हो रहा है। भारतीय नौसेना अब अपने रैंक्स का नामकरण भारतीय परंपराओं के अनुरूप करने जा रही है। हम सशस्त्र बलों में अपनी नारीशक्ति की संख्या बढ़ाने पर भी जो दे रहे हैं।”

वह बोले कि छत्रपति शिवाजी महाराज से प्रेरणा लेकर भारत औपनिवेशिक विचारों को खत्म कर रहा है। उन्होंने कहा, “ये भारत के इतिहास का वो कालखंड है जो सिर्फ 5-10 साल का नहीं, बल्कि आने वाली सदियों का भविष्य लिखने वाला है। 10 वर्ष से भी कम के कालखंड में भारत, दुनिया में 10वें नंबर की आर्थिक ताकत से बढ़कर 5वें नंबर पर पहुँच गया है। अब तीसरे नंबर की आर्थिक शक्ति बनने की ओर अग्रसर है।”

सिंधुदुर्ग में नौसेना दिवस कार्यक्रम

गौरतलब है कि दरअसल, सिंधुदुर्ग भारतीय नौसेना के लिए आज के समय में बहुत महत्वपूर्व द्वीप है जिसे 1664 से 1667 के बीच में छत्रपति शिवाजी महाराज ने बनवाया था। ये पूरा किला 48 एकड़ में फैला है। यहाँ पदमगढ़ नामक अन्य किला है जो मराठा नौसेना के लिए शिपयार्ड के रूप में काम आता था। इसे सिंधुदुर्ग के सामने एक छोटे से द्वीप पर बनाया गया था। यही वो द्वीप थे जिसे मराठाओं ने अंग्रेजी, डच और पुर्तगाली नौसेना के खिलाफ अपनी मजबूत पकड़ बनाने के लिए इस्तेमाल किया।

पिछले साल ही नौसेना को अपना निशान मिला था उसक कनेक्शन भी छत्रपति शिवाजी महाराज के समय से जुड़ा था। नए एनसाइन, जिसमें भारत के गौरवशाली इतिहास की शौर्य गाथा और उपनिवेशवाद से आजादी का प्रतीक शामिल किया गया था। नए एनसाइन में बाईं ओर ऊपरी में राष्ट्रीय ध्वज, और फ्लाई साइड के केंद्र में एक नेवी ब्लू – गोल्ड अष्टकोण रखा गया।

अष्टकोण के भीतर शामिल डिजाइन को भारतीय नौसेना के शिखर से लिया गया, जिसमें औपनिवेशिक विरासत से जुड़े फाउल्ड एंकर को हटाकर भारतीय नौसेना की दृढ़ता को रेखांकित करने के लिए एंकर के साथ बदल दिया गया।

मालूम हो कि अष्टकोणीय आकार का नेवी ब्लू रंग भारतीय नौसेना की नीली जल क्षमताओं को दर्शाता है। वहीं जुड़वाँ अष्टकोणीय सीमाएँ छत्रपति शिवाजी महाराज की मुहर से प्रेरणा लेती हुई है।

3 राज्यों के नतीजों से विदेशी मीडिया भी नतमस्तक, माना और मजबूत हुए PM मोदी: ‘अल जजीरा’ को ‘हिन्दू राष्ट्रवाद’ से चिढ़

भारतीय जनता पार्टी ने राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में बहुमत के साथ विजय पाई है। जहाँ मध्य प्रदेश में उसने सत्ता को बचाए रखा है, वहीं छत्तीसगढ़ और राजस्थान में कॉन्ग्रेस को सत्ता से बेदखल किया है। भाजपा की इस जीत को विदेशी मीडिया संस्थानों में भी खासी कवरेज मिली है।

यूरोपियन मीडिया संस्थानों से लेकर अमेरिकी मीडिया संस्थान, जो कि अधिकांश समय भाजपा और प्रधानमंत्री मोदी को ‘हिन्दू राष्ट्रवादी’ की संज्ञा देते हैं, ने इस बार कुछ रुख बदला है। इस बार मीडिया रिपोर्ट में भाजपा और प्रधानमंत्री मोदी को लेकर कुछ नरमी दिखी है।

ब्रिटिश मीडिया संस्थान बीबीसी ने भाजपा की तीन राज्यों में जीत पर लिखा है, “राज्य चुनाव परिणाम: तीन राज्यों की जीत ने प्रधानमंत्री मोदी के फिर से चुने जाने को मजबूती दी है।” हालाँकि, बीबीसी का कहना है कि इन चुनावों से 2024 के आम चुनावों में उतना फर्क नहीं पड़ने की संभावना है लेकिन हाँ इससे प्रधानमंत्री मोदी की छवि जरूर मजबूत हुई है। BBC ने इसी वर्ष प्रधानमंत्री मोदी की 2002 में गुजरात दंगों में भूमिका पर एक डाक्यूमेंट्री बनाई थी और प्रोपगैंडा फैलाने का प्रयास किया था।

प्रमुख अमेरिकी मीडिया संस्थान ‘द न्यू यॉर्क टाइम्स’ (NYT) ने लिखा, “राज्यों में बड़ी जीत के साथ मोदी ने भारत में अपना प्रभाव बढ़ाया।” न्यूयॉर्क टाइम्स का कहना है कि भाजपा ने इन राज्यों में जीत के साथ अपने हिन्दू राष्ट्रवाद के वोटरबेस को मजबूत किया है। इसने जनवरी 2024 में अयोध्या रामलला के मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा का भी जिक्र किया है।

यूरोप के बड़े प्रकाशन DW ने लिखा, “भारतीय प्रधानमंत्री मोदी की भाजपा ने 3 राज्यों में जीत हासिल की।” इसने भी इन चुनावों के जरिए प्रधानमंत्री मोदी की अगले साल के चुनावों के लिए दावेदारी मजबूत होने की बात की है। इसका कहना है कि भाजपा ने उम्मीदों से अच्छा प्रदर्शन किया है।

अधिकतर समय प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा को हिन्दू राष्ट्रवादी बताने वाले और भारत में मानवाधिकारों का रोना रोने वाले प्रकाशन फाइनेंसियल टाइम्स ने लिखा, “नरेन्द्र मोदी की भाजपा राज्य चुनावों में विजयी।” गौरतलब है कि इस बार ‘फाइनेंसियल टाइम्स’ की भाषा कहीं नरम है और इसमें एक भी बार ‘हिन्दू राष्ट्रवाद’ का जिक्र नहीं है।

हालाँकि, अरब जगत का सबसे बड़ा प्रकाशन ‘अल जज़ीरा‘ अभी भी अपने एजेंडे से चिपटा हुआ है। इसने भाजपा की चुनावी जीत के विषय बताने वाली रिपोर्ट की पहली लाइन में भाजपा को हिन्दू राष्ट्रवादी बताया। इसने फिर से वही मुस्लिमों के खिलाफ बयान आदि का राग भी अपने रिपोर्ट में छेड़ा है। इसके अलावा तुर्की के बड़े मीडिया संस्थान TRT वर्ल्ड ने भी इस बार भाजपा की जीत पर लिखते हुए कॉन्ग्रेस के नेपथ्य में चले जाने की बात की है। TRT वैसे अन्य मीडिया संस्थानों की तरह ही भाजपा और प्रधानमंत्री मोदी पर हमले करता आया है लेकिन इस बार उसके स्वर बदल गए हैं।

भंवरी देवी से बंद हुई पिता की राजनीतिक दुकान, बेटी से भैराराम ने चुकता किया ‘हिसाब’: CM के थे ख्वाब, पर ओसियाँ भी जीत नहीं पाईं दिव्या मदेरणा

2011 का साल था। राजस्थान में अशोक गहलोत के नेतृत्व में कॉन्ग्रेस की सरकार चल रही थी। अचानक से भंवरी देवी नाम ने प्रदेश में सियासी तूफान खड़ा कर दिया। इस प्रकरण ने महिपाल मदेरणा की राजनीति पर ग्रहण लगा दिया। इन्हीं महिपाल मदेरणा की बेटी हैं दिव्या जो इस विधानसभा चुनाव में ओसियाँ के मैदान में परास्त हुईं हैं।

चुनाव प्रचार के दौरान समर्थक दिव्या को भविष्य का मुख्यमंत्री बता रहे थे। उनकी गिनती प्रदेश में कॉन्ग्रेस के बड़े युवा चेहरों में हो रही थी। इसके कारण ओसियाँ राजस्थान की सबसे चर्चित सीटों में से एक बनी हुई थी। लेकिन बीजेपी के भैरा राम चौधरी ने उन्हें हराकर पुराना हिसाब चुकता कर लिया है।

भाजपा के भैरा राम चौधरी को 1,03,746 वोट मिले हैं, जबकि दिव्या 1,00,939 वोट पा सकी हैं। वह 2018 में भैरा राम को हराकर ही पहली बार विधायक बनीं थी।

दिव्या मदेरणा करीबी मुकाबले में हार गई हैं।

दिव्या ने अपनी राजनीतिक पारी 2010 में चालू की थी, जब वह जोधपुर जिला परिषद सदस्य चुनी गईं थी। उनकी माँ भी जिला परिषद की सदस्य और अध्यक्ष भी रही हैं। दिव्या पुणे और इंग्लैंड में पढ़ चुकी हैं।

दिव्या मदेरणा राजस्थान के सबसे ताकतवर राजनीतिक परिवारों में से एक मदेरणा परिवार से आती हैं। उनके पिता महिपाल मदेरणा भंवरी देवी कांड में फँसने से पहले तत्कालीन अशोक गहलोत की सरकार में कैबिनेट मंत्री हुआ करते थे। महिपाल मदेरणा की 2021 में मौत हुई थी। उससे पहले ही वे अपनी राजनीतिक विरासत बेटी दिव्या को सौंप चुके थे। दिव्या के दादा परसराम मदेरणा भी अपने जमाने में राजस्थान कॉन्ग्रेस के बड़े नेताओं में शुमार थे।

भंवरी देवी केस

भंवरी देवी का मामला अगस्त 2011 का है। उस समय एएनएम भंवरी देवी के अचानक गायब होने पर उनके पति अमरचंद ने प्रदेश के तत्कालीन मंत्री महिपाल मदेरणा पर पत्नी को गायब कराने का आरोप लगाया था। कुछ समय बाद मामला परत दर परत खुला और एक के बाद एक कर कई लोग इस पूरी कहानी में जुड़ते गए, लेकिन भंवरी का कहीं पता नहीं लग पाया। बाद में सीबीआई मामले की जाँच में जुटी और तभी भंवरी देवी और महिपाल मदेरणा की एक सीडी वायरल हो गई।

मदेरणा इस मामले में जेल भी गए थे। बाद में उन्हें और मलखान सिंह को जमानत पर रिहा किया गया था। 2021 में जब महिपाल मदेरणा की कैंसर से मौत हुई वे जेल से बाहर ही थे।

दिव्या ने अपने पिता की राजनीतिक विरासत को पाँच साल तक आगे बढ़ाया, लेकिन इस हार के बाद अब उन्हें नए सिरे से अपनी जमीन तैयार करनी होंगी। दिव्या को पार्टी में भी मुखर नेता माना जाता रहा है, लेकिन कॉन्ग्रेस की आंतरिक लड़ाई के कारण गहलोत सरकार के अंतिम दिनों में वह साइडलाइन हो गईं थी।

मिजोरम में ZPM की सरकार, जानिए कौन हैं लालडुहोमा जिनसे परास्त हो गई 62 साल पुरानी पार्टी: 01 सीटों पर सिमटी कॉन्ग्रेस

मिजोरम की 40 सीटों में से 27 सीटों पर बहुमत पाकर ‘जोरम पीपुल्स मूवमेंट’ ने 2023 विधानसभा चुनावों में सत्ता हासिल कर ली है। राज्य की 62 साल पुरानी पार्टी ‘मिजो नेशनल फ्रंट’ को सिर्फ 10 सीट मिल पाई जबकि भाजपा को जहाँ 2 और कॉन्ग्रेस को सिर्फ 1 सीट मिली है।

जिस पार्टी ने इस बार मिजोरम को जीता है उसे पिछले वर्ष यानी 2018 के चुनावों में सिर्फ 8 सीटें मिली थी और एमएनएफ ने 26 सीट से बहुमत पाकर सरकार बनाई थी। जेडपीएम पार्टी की बात करें तो ये केवल 6 साल पहले ही शुरू हुई थी।

इस पार्टी को शुरू करने वाले पूर्व आईपीएस अधिकारी लालडुहोमा है। उन्होंने साल 1972 से 1977 तक लालडुहोमा ने मिजोरम के मुख्यमंत्री के प्रधान सहायक के तौर पर काम किया था। स्नातक की पढ़ाई के बाद उन्होंने सिविल परीक्षा दी और 1977 में आईपीएस बने। उन्होंने सक्वाड लीडर के तौर पर काम किया।

1982 में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी ने उन्हें अपना सुरक्षा प्रभारी नियुक्त किया था। पुलिस आयुक्त के रूप में विशेष पदोन्नति दी गई थी। फिर राजीव गाँधी की अध्यक्षता में 1982 एशियाई खेलों के आयोजन समिति के सचिव भी बने। बाद में पुलिस की नौकरी छोड़कर वो 1984 में कॉन्ग्रेस से जुड़ गए और लोकसभा चुनाव में जीत हासिल करके लालडुहोमा संसद पहुँचे।

साल, 1988 में उन्होंने कॉन्ग्रेस की सदस्यता से इस्तेफा दे दिया। इसके कारण दलबदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य घोषित करके लोकसभा की सदस्यता छीन ली गई। 2017 में जाकर उन्होंने छह छोटे क्षेत्रीय दलों को मिलाकर जेडपीएम बनाई। 2018 में उनकी पार्टी को मान्यता नहीं मिली लेकिन स्वतंत्र रूप से इस पार्टी से 38 उम्मीदवार उतारे गए जिनमें से 8 ने जीत हासिल की और इसके अध्यक्ष लालडुहोमा बने। 2019 में इस पार्टी को मान्यता मिली।

साल 2021 में वो सेरछिप सीट से निर्दलीय से जेडपीएम पार्टी में आ गए, पर फिर से उनपर दलबदल कानून की तलवार चली और इनकी विधायकी चली गई। फिर चुनाव हुए तो इन्होंने अपनी पार्टी जेडपीएम से चुनाव लड़े और इस पार्टी से पहले विधायक बने। इसके बाद 2023 की तैयारी शुरू हुई और नतीजा आज सबके सामने है कि जिस कॉन्ग्रेस के साथ उन्होंने राजनीति शुरू की थी, उसी की आज ऐसी हालत कर दी कि वो एक सीट ही जुटा पाए।

1 साल में महिलाओं के खिलाफ अपराध के 45000 मामले, 3.12 लाख क्राइम: बलात्कार के मामले में राजस्थान को No.1 बना कर विदा हुए हैं अशोक गहलोत

तीन राज्य के विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी स्पष्ट बहुत के साथ सत्ता में आई है। इनमें से राजस्थान में उसने अशोक गहलोत की कॉन्ग्रेस सरकार को सत्ता से बेदखल किया है। अशोक गहलोत ने काफी रेवड़ियों का ऐलान किया था लेकिन अपराध पर काबू ना कर पाना उनके फेल होने का एक बड़ा कारण बना है।

अशोक गहलोत कानून-व्यवस्था के मामले में किस तरीके से विफल रहे हैं, यह चुनावों के बाद सामने आए ‘राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो’ (NCRB) के आँकड़ो ने स्पष्ट किया है। NCRB हर साल देश में होने वाले अपराधों के विषय में आँकड़े जारी करती है। NCRB के आँकड़ों के अनुसार, राजस्थान देश में बलात्कार के मामलों में नम्बर एक है। अशोक गहलोत की सरकार के दौरान महिला सुरक्षा एक बड़ा मुद्दा रहा है। भाजपा ने इसे अपने चुनावी कैम्पेन में प्रमुख मुद्दा बनाया था।

वर्ष 2022 में राजस्थान से 5399 बलात्कार के मामले सामने आए हैं। इससे पहले वर्ष 2020 और 2021 में राजस्थान के भीतर बलात्कार की क्रमशः 5310 और 6337 घटनाएँ हुई थीं। बलात्कार की घटनाओं पर कार्रवाई के मामले में भी राजस्थान काफी पीछे है। NCRB की रिपोर्ट बताती है कि वर्ष 2022 में राजस्थान में बलात्कार समेत महिलाओं के विरुद्ध अपराध के कुल 45,058 मामले सामने आए हैं। वर्ष 2021 और वर्ष 2020 की तुलना में महिलाओं के विरुद्ध अपराध राजस्थान में बढ़ गए हैं।

वर्ष 2020 में महिलाओं के विरुद्ध राजस्थान में 34,535 अपराध के मामले सामने आए थे जबकि 2021 के दौरान यह बढ़ कर 40,378 हो गए थे। इस प्रकार वर्ष 2021 के मुकाबले 2022 में राजस्थान में महिलाओं के विरुद्ध अपराध के मामलों में 11.5% की वृद्धि हुई है।

राजस्थान में महिलाओं के विरुद्ध अपराध जहाँ लगातार बढ़ रहे हैं वहीं अशोक गहलोत के शासन में पुलिस भी अकर्मण्य रही है। NCRB की यह रिपोर्ट बताती है कि महिलाओं के विरुद्ध हुए अपराधों के मामलों में राजस्थान पुलिस केवल 54% में ही चार्जशीट लगा पाई है। देश के अन्य बड़े राज्यों में यह आँकड़ा 70% के ऊपर है।

ऐसा नहीं है कि राजस्थान केवल बलात्कार के मामलों में ही आगे है। अन्य अपराध भी राजस्थान में तेज़ी बढ़े हैं। राजस्थान में वर्ष 2022 में अपराधों की संख्या 3 लाख पार कर गई है। वर्ष 2022 में राजस्थान में 3,12,804 आपराधिक घटनाएँ सामने आई हैं। 2020 में यह घटनाएँ 2.84 लाख और 2020 में 2.60 लाख थी। वर्ष 2022 में 2021 की तुलना में राजस्थान के भीतर 10% की वृद्धि हुई है। राजस्थान में वर्ष 2022 में 1,834 हत्या की वारदातें हुई हैं। यह वर्ष 2021 में 1,786 और 2020 में 1,719 थीं।

इन वर्ष 2022 में राजस्थान में हुई 1834 हत्याओं में से मात्र 57% मामलों में ही राजस्थान पुलिस चार्जशीट लगाने में सफल हुई है। 43% मामलों में अब भी चार्जशीट तक नहीं लग पाई है। राजस्थान में हत्या, बलात्कार के इन बढ़ते मामलों और उन पर कार्रवाई ना होने के कारण लोगों का अशोक गहलोत की सरकार में विश्वास चला गया था। इसलिए भाजपा ने जब इसे चुनावी मुद्दा बनाया तो जनता ने कॉन्ग्रेस को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखा दिया।

बीजेपी MP ने रखा प्रस्ताव और राज्यसभा ने खत्म कर दिया राघव चड्ढा का निलंबन, उप-सभापति को धन्यवाद दे AAP सांसद ने पढ़ा ‘चराग़’ वाला शेर

राज्यसभा से AAP के सांसद राघव चड्ढा का निलंबन वापस ले लिया गया है। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट और सभापति जगदीप धनखड़ को धन्यवाद दिया है। बता दें कि सोमवार (4 दिसंबर, 2023) को उच्च सदन ने राज्यसभा से राघव चढ़ा का निलंबन वापस ले लिया गया। वो 115 दिनों से निलंबित चल रहे थे। उन्हें 11 अगस्त, 2023 को राज्यसभा से निलंबित किया गया था। राघव चड्ढा ने इसके बाद सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। सुप्रीम कोर्ट ने याचिका का संज्ञान लिया था।

राघव चड्ढा ने अब वीडियो जारी कर के कहा है, “सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद संसद भवन के भीतर एक प्रस्ताव लाकर मेरे निलंबन को रद्द किया गया। इस दौरान मैं जनता के सवाल सरकार से नहीं पूछ सका, आपके हक़ की आवाज़ नहीं उठा सका। इस 115 दिन के निलंबन के मेरे समय में मुझे आप सबका बहुत आशीर्वाद और प्यार मिला लड़ाई लड़ने की और डट कर मुकाबला करने की, कैसे मैसेज और फोन आए। इसके लिए मैं आपका धन्यवाद करता हूँ।”

इस दौरान उन्होंने ‘दुआ करो कि सलामत रहे मेरी हिम्मत, ये एक चराग़ कई अंधेरों पर भारी है’ शेर भी पढ़ा। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने राघव चड्ढा को निर्देश दिया था कि वो चयन समिति को लेकर हुए विवाद पर वो उप-राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ से बिना शर्त माफ़ी माँगें, इसके बाद सभापति इस पर सहानुभूतिपूर्वक विचार कर सकते हैं। बता दें कि भाजपा सांसदों ने आरोप लगाया था कि एक प्रस्ताव में राघव चड्ढा ने उनकी सहमति के बिना उनके नाम जोड़ दिए थे।

इस प्रस्ताव में ‘दिल्ली सेवा विधेयक’ की जाँच के लिए एक चयन समिति के गठन की माँग की गई थी। दिल्ली कैडर के अधिकारियों की तैनाती और उनके तबादले के मुद्दे पर ये विधेयक आया था। राघव चड्ढा ने इस पर प्रस्ताव तैयार कर के सभापति को दे दिया था। उन पर फर्जीवाड़े और विशेषाधिकार हनन के आरोप लगे थे। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी इस मामले में जाँच की माँग की थी। जाँच पूरी होने तक सभापति ने राघव चड्ढा को निलंबित कर दिया था।

निलंबन का प्रस्ताव उत्तर प्रदेश से भाजपा के राज्यसभा सांसद GVL नरसिंहा राव लेकर आए। उन्होंने नियमों का हवाला देते हुए मोशन मूव किया और कहा कि राघव चड्ढा को विशेषाधिकार हनन का दोषी पाया गया है और अब तक उन्होंने जो निलंबन भुगता है, वो उनके लिए पर्याप्त सज़ा है। उन्होंने इसके सभापति ने मौखिक रूप से इस पर सांसदों से वोट लिया और मोशन को अडॉप्ट किया। फिर उन्होंने कहा कि राघव चड्ढा अब संसद की कार्यवाही में हिस्सा ले सकते हैं।

जब भारतीय नौसेना की 3 मिसाइल बोट ने कराची में कर दिया अँधेरा… उसी विजय दिवस पर सिंधुदुर्ग में PM मोदी: 2022 में दिया था शिवाजी वाला शौर्य निशान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज नौसेना दिवस (4 दिसंबर) पर महाराष्ट्र के सिंधुदुर्ग में 4 बजे के बाद शिवाजी प्रतिमा का अनावरण करने वाले हैं। इसके बाद सिंधुदुर्ग में ही होने वाले नौसेना के कार्यक्रम में वो शामिल होंगे। सिंधुदुर्ग और शिवाजी महाराज से नौसेना से नाता है इसी वजह से नौसेना दिवस पर अनावरण के अवसर को और इस जगह को चुना गया।

सिंधुदुर्ग में नौसेना दिवस का समारोह

दरअसल, सिंधुदुर्ग भारतीय नौसेना के लिए आज के समय में बहुत महत्वपूर्व द्वीप है जिसे 1664 से 1667 के बीच में छत्रपति शिवाजी महाराज ने बनवाया था। ये पूरा किला 48 एकड़ में फैला है। यहाँ पदमगढ़ नामक अन्य किला है जो मराठा नौसेना के लिए शिपयार्ड के रूप में काम आता था। इसे सिंधुदुर्ग के सामने एक छोटे से द्वीप पर बनाया गया था। यही वो द्वीप थे जिसे मराठाओं ने अंग्रेजी, डच और पुर्तगाली नौसेना के खिलाफ अपनी मजबूत पकड़ बनाने के लिए इस्तेमाल किया।

आज भी इस जगह को छत्रपति शिवाजी महाराज के सैन्य कौशल और दूरदृष्टि के प्रमाण के रूप में देखा जाता है। इस किले को उन्होंने अपनी निगरानी में बनवाया था। निर्माण के वक्त मजबूत डिजाइन और कड़ी सुरक्षा को ध्यान में रखा गया था। बताया जाता है कि किले को पूरा 500 से अधिक राजमिस्त्री, 200 लोहार, 100 पुर्तगाली और 3000 के कार्यबल ने 3 वर्षों तक अथक परिश्रम किया।

भारतीय सेना को मिला नए एनसाइन

पिछले साल ही नौसेना को अपना निशान मिला था उसक कनेक्शन भी छत्रपति शिवाजी महाराज के समय से जुड़ा था। नए एनसाइन, जिसमें भारत के गौरवशाली इतिहास की शौर्य गाथा और उपनिवेशवाद से आजादी का प्रतीक शामिल किया गया था। नए एनसाइन में बाईं ओर ऊपरी में राष्ट्रीय ध्वज, और फ्लाई साइड के केंद्र में एक नेवी ब्लू – गोल्ड अष्टकोण रखा गया।

अष्टकोण के भीतर शामिल डिजाइन को भारतीय नौसेना के शिखर से लिया गया, जिसमें औपनिवेशिक विरासत से जुड़े फाउल्ड एंकर को हटाकर भारतीय नौसेना की दृढ़ता को रेखांकित करने के लिए एंकर के साथ बदल दिया गया।

मालूम हो कि अष्टकोणीय आकार का नेवी ब्लू रंग भारतीय नौसेना की नीली जल क्षमताओं को दर्शाता है। वहीं जुड़वाँ अष्टकोणीय सीमाएँ छत्रपति शिवाजी महाराज की मुहर से प्रेरणा लेती हुई हैं जिन्हें एक दूरदर्शी समुद्री दृष्टिकोण वाले राजाओं में से एक माना जाता है।

4 दिसंबर को नौसेना दिवस क्यों मनाया जाता है।

4 दिसंबर को ही नौसेना दिवस क्यों मनाया जाता है ये जानना बेहद दिलचस्प है क्योंकि इसके तार जुड़े हैं पाकिस्तान को करारी शिकस्त देने से।

बात 1971 की है जब भारतीय सेना ने ऑपरेशन त्रिडेंट को अंजाम दिया था। उस समय बांग्लादेश में आजादी की लड़ाई चल रही थी… इसी बीच 3 दिसंबर को पाकिस्तान ने ‘ऑपरेशन चंगेज खान’ के तहत भारत के 11 एयरबेसों पर हमला कर दिया। इस ऑपरेशन का जो भारत ने जवाब दिया उसी को ऑपरेशन त्रिडेंट कहा गया।

ऑपरेशन त्रिडेंट

3 दिसंबर 1971 के हमले के बदले पाकिस्तान के लोंगेवाला में भारतीय नौसेना के तीन मिसाइल बोट कराची भेजी गईं, जिनका नाम INS निपत, INS निर्घाट और INS वीर था। वहीं उन्हें पाकिस्तान का जहाज पीएनएस खैबर मिला। रात में जब पाकिस्तान जहाज को भारतीय सेना के आने का इल्म हुआ तो वो भी अटैक करने आगे आ गया। भारत की मिसाइल बोटों ने फौरन रडार का इस्तेमाल कर उसपर इतना सटीक हमला किया कि खैबर में आग लग गई। भारत ने फिर मिसाइल दागी और खैबर को पूरा समुद्र में डुबा दिया। इसमें 222 पाकिस्तानी सेलर थे।

ऑपरेशन ट्राइडेंट, नौसेना दिवस
ऑपरेशन ट्राइडेंट (तस्वीर साभार: The Indian Express )

इसके बाद एक और जहाज को भारतीय मिसाइल बोट निपत ने निशाना बनाया। बाद में पता चला कि वो एमवी वीनस चैलेंजर बोट थी जिसमें अमेरिका से पाकिस्तान के लिए गोला-बारूद हथियार भेजे जा रहे थे। फिर, भारत की तीसरी मिसाइल बोट INS VEER ने एक और पाकिस्तान के जंगी जहाज को डुबाया जिसका नाम पीएनएस मुहाफिज था जिसमें 33 पाकिस्तानी नाविक थे।

इन तीनों बोट्स ने कराची के बंदरगाहों को तबाह किया। फिर रडार में किमारी ऑयल टैंक आए तो उसपर भी मिसाइल दागी गईं। बताया जाता है कि कुल 90 मिनट में भारतीय नौसेना ने 6 मिसाइलें दागीं, जिससे पाकिस्तान के 4 जहाज डूब गए।

भारतीय नौसेना ने अपने इस मिशन में पाकिस्तान के कराची बंदरगाह को बमबारी करके पूरा तबाह कर दिया था और सैंकड़ों पाकिस्तानी फौजियों को मौत के घाट उतार दिया था। कहा जाता है कि इस बमबारी के बाद पाकिस्तान के जो हालात हुए थे वहाँ 7 दिन तक सूरज की किरण साफ नहीं दिखी थी। पाकिस्तान का एक गाजी पनडुब्बी युद्ध से पहले ही आईएनएस विक्रांत द्वारा डुबाया जा चुका था चुका था।

भारतीय नौसेना की इसी जांबाजी को देखते हुए 4 दिसंबर को नौसेना दिवस घोषित किया गया। इसके बाद से हर साल भारतीय नौसेना इस दिवस को मनाने लगी। इस दिन को भारत की उपलब्धि के तौर पर भी मनाया जाता है।