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KCR की ‘टोपी’ चुग गई कॉन्ग्रेस, जानिए क्यों तेलंगाना में मुस्लिमों ने थामा ‘हाथ’: वो ‘सूत्र’ जिसे पकड़ प्रदीप भंडारी ने किया नतीजों का सबसे सटीक आकलन

5 राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव में सिर्फ एक से ही कॉन्ग्रेस के लिए अच्छी खबर आई है और वो है – तेलंगाना। तेलंगाना के गठन के बाद से ही वहाँ BRS सत्ता में थी। बता दें कि BRS (भारत राष्ट्र समिति) का नाम पहले TRS (तेलंगाना राष्ट्र समिति) हुआ करता था, लेकिन मुख्यमंत्री KCR (कलवाकुन्तला चंद्रशेखर राव) की राष्ट्रीय राजनीति की महत्वकांक्षाओं के कारण इसका नाम दिसंबर 2022 में BRS कर दिया गया था। हालाँकि, अब अपने ही राज्य में उनकी ऐसी दुर्गति हो गई है कि दिल्ली तो एकदम दूर है।

तेलंगाना के विधानसभा चुनावों की बात करें तो कॉन्ग्रेस 64 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बन कर उभरी है। बहुमत के लिए 60 सीटों की आवश्यकता होती है, ऐसे में उसका सरकार बनाना तय है। वहीं पिछले 10 वर्षों से वहाँ सत्ता में रही BRS 39 सीटों पर सिमट गई है। भाजपा की बात करें तो पहले वहाँ उसका एक ही विधायक था लेकिन अब 8 हैं। वहीं हैदराबाद की 8 में से 7 सीटें AIMIM ने अपने पास रखी, जो पहले से ही उसके पास थी। हैदराबाद की एकमात्र सीट भाजपा जीतती रही है जो है गोशामहल – वहाँ से राजा सिंह ने बतौर MLA हैट्रिक लगाई है।

तेलंगाना में BRS और AIMIM एक समझौते के तहत चुनाव लड़ती रही है। हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी के साथ के कारण BRS को मुस्लिम वोटों का भी फायदा मिलता रहा है। हैदराबाद के मुस्लिम वोटर तो AIMIM के साथ रहते ही हैं। लेकिन, इस चुनाव में ऐसा प्रतीत होता है कि मुस्लिम वोटरों ने कॉन्ग्रेस को प्राथमिकता दी, BRS-AIMIM की जगह। इस चुनाव में कॉन्ग्रेस का मत प्रतिशत 39.40 रहा तो वहीं BRS को 37.35% वोट मिले।

KCR ने किया था ‘मुस्लिम IT पार्क’ का वादा

दोनों पक्षों ने मुस्लिम वोटरों को लुभाने की पूरी कोशिश की। KCR ने तो यहाँ तक वादा किया था कि मुस्लिमों के लिए अलग से IT पार्क बनवाया जाएगा। उन्होंने हैदराबाद के पास पहाड़ीशरीफ में मुस्लिमों के लिए ये आईटी पार्क बनवाने की बात कही थी, अगर बीआरएस सत्ता में लौटती है तो। उन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान कॉन्ग्रेस पर मुस्लिमों को सिर्फ वोट बैंक समझने और उनके विकास के लिए कोई काम न करने का आरोप लगाया। यहाँ तक कि उन्होंने शिक्षा एवं रोजगार में मुस्लिमों के आरक्षण को 12% तक करने की घोषणा कर डाली।

उन्होंने मुस्लिमों के लिए ‘शादीखाना’ तैयार करने की घोषणा की। सिर्फ मुस्लिमों के लिए 296 आवासीय विद्यालय खोले। यानी, उन्होंने राज्य की 13% जनसंख्या पर 12,000 करोड़ रुपए अलग से खर्च करना पड़ा। अब ये भी साफ़ हो गया है कि I.N.D.I. गठबंधन में भी BRS को कोई एंट्री नहीं मिलेगी। लोकसभा चुनावों में पार्टी की स्थिति और कमजोर होगी, क्योंकि मुस्लिम वोटों के लिए मारामारी और तेज़ होगी। हालाँकि, मुस्लिम वोटरों के रुख से साफ़ है कि वो 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले कॉन्ग्रेस को मजबूत करना चाहती है ताकि वो भाजपा के खिलाफ लड़ाई में आ सके।

वो मुस्लिम लड़कियों के लिए ‘शादी मुबारक’ नामक योजना लेकर आए, जिसके तहत उन्हें शादी के लिए वित्तीय मदद दी जाती है। उन्होंने पुराने हैदराबाद के विकास को तुर्की की राजधानी इस्ताम्बुल की तर्ज पर करने की बात कही थी। चुनाव से पहले जमात-ए-इस्लामी के राज्य अध्यक्ष हामिद मोहम्मद खान ने कहा था कि हमारे पास इसका कोई कारण नहीं है कि हम BRS को समर्थन देना जारी रखें। उन्होंने पार्टी पर संसद में मुस्लिम विरोधी बिल्स के समर्थन का आरोप लगाया।

बता दें कि तीन तलाक के खिलाफ आए बिल के दौरान KCR की पार्टी वोटिंग से अनुपस्थित रही थी। वहीं जमीयत उलेमा-ए-हिन्द के पूर्व राज्य अध्यक्ष हाफिज पीर सब्बीर अहमद ने भी BRS पर मुस्लिमों को 12% आरक्षण के मुद्दे पर मुस्लिमों से वादाखिलाफी का आरोप लगाया था। तेलंगाना में मुस्लिमों की 13% जनसंख्या है। राहुल गाँधी की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ भी तेलंगाना में मुस्लिमों के प्रभाव वाले इलाकों से गुजरी। इस बार ओवैसी की पार्टी ने 9 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, वहीं बाकी सभी सीटों पर BRS का समर्थन किया था।

कॉन्ग्रेस ने मुस्लिम वोटरों को साधने के लिए बनाई विशेष रणनीति

इसके बावजूद मुस्लिम वोटरों ने KCR को अपनी पहली पसंद नहीं बनाया, जबकि ओवैसी 9 में से 7 सीटें जीतने में कामयाब रहे। जहाँ एक तरफ KCR मुस्लिम तुष्टिकरण में डूबे हुए थे, वहीं कॉन्ग्रेस ने भी मुस्लिम वोटरों को रिझाने के लिए कम प्रयास नहीं किए। कर्नाटक के आवासन एवं अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री ज़मीर अहमद खान को तेलंगाना में मुस्लिम मतदाताओं को लुभाने के लिए लगाया था। उन्होंने 28 दिन तेलंगाना में रह कर मुस्लिम समुदाय के नेताओं, चिंतकों और पार्टी के मुस्लिम नेताओं के साथ एक के बाद एक बैठकें की।

उन्होंने कई रैलियाँ भी मुस्लिमों के प्रभाव वाले इलाकों में की। 49 सीटों पर उन्होंने मुस्लिमों को कॉन्ग्रेस के पक्ष में ध्रुवीकृत करने के लिए खूब प्रयास किए। उन्होंने कॉन्ग्रेस महासचिव KC वेणुगोपाल के साथ मिल कर रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया और वो पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से भी लगातार संपर्क में थे। BRS और AIMIM के कई नेताओं को भी इस रणनीति के तहत कॉन्ग्रेस में लाया गया। कर्नाटक के कई अन्य मुस्लिम नेताओं को भी तेलंगाना में लगाया गया था।

यही सब कारण रहे कि ग्रेटर हैदराबाद को छोड़ दें तो तेलंगाना के लगभग हर जिले में मुस्लिम वोट कॉन्ग्रेस को मिले। हैदराबाद के गोशामहल जहाँ से फायरब्रांड हिन्दू नेता राजा सिंह जीतते रहे हैं, वहाँ से ओवैसी ने कोई प्रत्याशी नहीं उतारा। वहीं जुबली हील्स क्षेत्र में BRS प्रत्याशी के रहते हुए कॉन्ग्रेस उम्मीदवार अज़हरुद्दीन के सामने अपना प्रतयषी उतारा। नतीजा ये हुआ कि यहाँ से कॉन्ग्रेस को हार मिली। हालाँकि, कॉन्ग्रेस ने इसे इस तरह से प्रचारित किया था कि मुस्लिम वोटों को जानबूझकर विभाजित किया जा रहा है।

इसीलिए, ये कहा जा सकता है कि असदुद्दीन ओवैसी ने अपने हैदराबाद का गढ़ तो जैसे-तैसे बचा लिया लेकिन बाकी के तेलंगाना में वो अपने मित्र KCR को मुस्लिम वोट ट्रांसफर नहीं करा सके। तभी ज़मीर अहमद खान ने भी कहा कि कॉन्ग्रेस की गारंटी योजनाओं के अलावा 49 सीटों के लिए ‘मुस्लिम थिंक टैंक’ के साथ मिल कर चुनावी रणनीति बनाने की प्रक्रिया सफल रही। उन्होंने मुस्लिम समुदाय के नेताओं के साथ बैठकों को भी जीत का श्रेय दिया।

‘जन की बात’ के संस्थापक प्रदीप भंडारी भी मानते हैं कि मुस्लिम वोट कॉन्ग्रेस को मजबूत करने के लिए उसकी तरफ गया है। उन्होंने विधानसभा चुनावों में तेलंगाना के लिए सटीक आकलन किया था। ‘जन की बात’ के आकलन का कहना था कि वहाँ कॉन्ग्रेस को 48-64 सीटें मिल सकती हैं, वहीं BRS 40-55 सीटों के बीच रहेगी, और भाजपा की सीटों की 13 रहेगी। उनका आकलन सटीक रहा और BRS को उनके आकलन से सिर्फ 1 सीट कम मिली।

‘जो मोदी के खिलाफ मजबूत होगा, उसके खिलाफ गोलबंद होगा मुस्लिम वोट’: प्रदीप भंडारी

प्रदीप भंडारी से ऑपइंडिया ने तेलंगाना में मुस्लिम वोटरों के रुख को लेकर बात की। उन्होंने कहा कि मुस्लिम वोटों के मुख्य मकसद है कि उसे भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को रोकना है, उसकी हमेशा से पहली प्राथमिकता कॉन्ग्रेस पार्टी होती है। उन्होंने कहा कि जब भी मुस्लिम मतदाता देखते हैं कि कॉन्ग्रेस मजबूत हो सकती है तो वो उस तरफ शिफ्ट होते हैं। उन्होंने याद दिलाया कि कैसे कर्नाटक में कॉन्ग्रेस की सरकार बनने के बाद पार्टी ने ये माहौल बनाने की कोशिश की कि 2024 में नरेंद्र मोदी को हराया जा सकता है।

प्रदीप भंडारी मानते हैं कि इसी कारन मुस्लिम वोटरों को लगा कि ‘उनकी कॉन्ग्रेस’ बहुत अच्छे तरीके से चुनाव लड़ रही है, तो ऐसी स्थिति में अधिकतर मुस्लिम वोटर BRS से कॉन्ग्रेस की तरफ शिफ्ट हुए। उन्होंने राजस्थान का जिक्र करते हुए कहा कि कन्हैया लाल तेली के ‘सर तन से जुदा’ की इस्लामी कट्टरपंथियों ने हत्या कर दी तो उन्हें मिले मुआवजे में देरी हुई, जबकि जयपुर में एक आपसी संघर्ष में मुस्लिम युवक की मौत हुई तो कलक्टर ने रातोंरात 50 लाख रुपए दे दिए। इसीलिए, मुस्लिमों को पता है कि उनकी पहली प्राथमिकता कॉन्ग्रेस है और वो इसीलिए ‘घर-वापसी’ करना चाहता है।

बता दें कि राजस्थान में जब ये सब हुआ तब वहाँ मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नेतृत्व में कॉन्ग्रेस पार्टी की सरकार थी। उन्होंने आँकड़ों का जिक्र करते हुए कहा कि जहाँ मुस्लिम वोटर ज़्यादा हैं, यानी 30% के आसपास हैं वहाँ राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भाजपा जीती है। उन्होंने कहा कि पहले कॉन्ग्रेस को लगता था कि जिस सीट पर मुस्लिम ज़्यादा हैं वहाँ वो केवल उनकी ही बातें कर के चुनाव जीत जाएगी, लेकिन अब ऐसा नहीं हो रहा। अब तुष्टिकरण के खिलाफ लोग एकजुट हो रहे हैं।

प्रदीप भंडारी ने इस दौरान तमिलनाडु के मंत्री उदयनिधि स्टालिन के बयान का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने सनातन धर्म को डेंगू-मलेरिया बता कर इसे खत्म करने की बात की थी। ‘जन की बात’ के संस्थापक ने कहा कि जानबूझकर कॉन्ग्रेस पार्टी ने इस बयान की निंदा नहीं की, जिसका खामियाजा उसे भुगतना पड़ा। उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश की 35 सीटें जहाँ मुस्लिम वोट प्रभावी है वहाँ भाजपा की जीत हुई। छत्तीसगढ़ की 12 ऐसी सीटों में से भी अधिकतर भाजपा के खाते में गईं।

प्रदीप भंडारी ने कहा कि मुस्लिम वोट सिर्फ कॉन्ग्रेस के पीछे ही गोलबंद नहीं होगा, बल्कि अगर वो पश्चिम बंगाल में देखता है कि ममता बनर्जी की TMC मजबूत है तो वो उसके पीछे गोलबंद होगा। वहीं तेलंगाना में कॉन्ग्रेस मजबूत है तो उसके पीछे ये वोट गोलबंद हुआ। प्रदीप भंडारी इसमें एक और चीज ध्यान देने लायक बताते हैं – हिंदी हार्टलैंड के जो नतीजे आए हैं उसके बाद मुस्लिम वोटरों में एक हताशा आ गई है कि वो पूरी कोशिश कर के भी नरेंद्र मोदी को नहीं रोक पा रहे।

प्रदीप भंडारी आगे कहते हैं, “मुस्लिम वोटर हर उस पार्टी के खिलाफ गोलबंद होगा जो उसके हिसाब से 2024 में नरेंद्र मोदी को हरा सकती हो। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी या फिर दक्षिण भारत में कॉन्ग्रेस पार्टी, लेकिन वो तमिलनाडु में DMK के पीछे गोलबंद होगा। बंगाल और बिहार में वो कॉन्ग्रेस के पीछे नहीं जाएगा।” यानी, उनका साफ़ मानना है कि कॉन्ग्रेस मुस्लिमों की पहली पसंद होगी, लेकिन जहाँ क्षेत्रीय ताकतें भाजपा के खिलाफ मजबूती से लड़ रही हों वहाँ उनके साथ ये वोटर जाएँगे।

‘होटल में सेक्स, मस्जिद में निकाह’: बांग्लादेश से ओडिशा आ गई मरियम, कहा- बीवी बनाओ नहीं तो प्राइवेट फोटो सबको दिखा दूँगी

बांग्लादेश की एक महिला शनिवार (2 दिसंबर 2023) को ओडिशा के बालासोर पहुँच गई। वो यहीं के निवासी वीरेंद्र प्रताप नाम के युवक से शादी करने की जिद कर रही है। रुमा मरियम नाम की इस महिला का दावा है कि उसके और वीरेंद्र के बीच शारीरिक संबंध है। कथित तौर पर ये संबंध वीरेंद्र की बांग्लादेश यात्रा के दौरान बने थे। हालाँकि वीरेंद्र का परिवार शादी से इनकार कर रहा है। मामला पुलिस में पहुँच चुका है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला बालासोर जिले के कामरदा थाना क्षेत्र का है। यहाँ बुधकुसमी इलाके में वीरेंद्र प्रताप अपने परिवार के साथ रहता है। शनिवार को अचानक एक महिला वीरेंद्र के घर पहुँची। महिला ने खुद को बांग्लादेश के बारगुना जिले की रहने वाली बताया। वो वीरेंद्र से शादी करने की जिद करने लगी। महिला का आरोप है कि 2018 में वह सोशल मीडिया के जरिए वीरेंद्र के संपर्क में आई। दोनों के बीच लगभग 5 वर्षों तक प्रेम-प्रसंग चला।

रुमा मरियम का दावा है कि वीरेंद्र उससे मिलने बांग्लादेश भी आया था। यहाँ के एक होटल में दोनों के बीच शारीरिक संबंध बने। रुमा का कहना है कि वीरेंद्र ने उसे शादी का भरोसा दिया था। 1 साल पहले रुमा ने वीरेंद्र पर इस्लामी तौर तरीकों से निकाह का दबाव बनाया। कथित तौर पर बांग्लादेश की एक मस्जिद में मौलाना की मौजूदगी में दोनों का निकाह हुआ। इसके बाद वीरेंद्र भारत लौट आया और मरियम से दूरी बनानी शुरू कर दी।

मरियम ने इसके बाद काफी समय तक वीरेंद्र से सम्पर्क करने का प्रयास किया। असफल रहने पर वह शनिवार को सीधे बालासोर पहुँच गई। मरियम से वीरेंद्र के परिजनों ने लौट जाने को कहा। यह भी बताया कि वीरेंद्र की शादी कहीं और हो चुकी है। लेकिन मरियम ने शादी की जिद नहीं छोड़ी। उसने अपनी और वीरेंद्र की प्राइवेट पलों की कुछ तस्वीरें और वीडियो भी दिखाए। बीवी नहीं बनाने पर ये तस्वीरें सबको दिखाने की धमकी दी। काफी देर तक चले हंगामे के बाद मरियम पुलिस के पास पहुँच गई।

बताते चलें कि इसी तरह अगस्त 2023 में बांग्लादेश की सोनिया अख्तर नाम की महिला अपने बच्चे के साथ उत्तर प्रदेश के नोएडा आ गई थी। महिला का कहना था कि ढाका में सौरव कान्त तिवारी ने उससे शादी की और बाद में छोड़ कर भारत आ गया। इस मामले की शिकायत पुलिस में दर्ज करवाई गई थी।

सड़कें, रेल, उड़ानें सब रद्द, पानी में बह रहीं गाड़ियाँ, डूबे मकान… तमिलनाडु में तबाही मचा रहा ‘मिचाउंग’ चक्रवाती तूफ़ान: भारी बारिश और तेज़ हवाओं का यूपी में भी असर

तमिलनाडु में ‘मिचाउंग’ तूफ़ान तबाही मचा रहा है। खासकर राजधानी चेन्नई से कई वीडियो और तस्वीरें सामने आई हैं, जिसमें देखा जा सकता है कि रिहायशी इलाके पानी में डूबे हुए हैं और गाड़ियाँ तैर रही हैं। चेन्नई पुलिस भी बचाव कार्य में लगी हुई है, मडिपक्कम में एक बुजुर्ग को बचाया गया। भाजपा अध्यक्ष JP नड्डा ने प्रदेश अध्यक्ष K अन्नामलाई से बात की है और पड़ोसी राज्यों के भाजपा कार्यकर्ताओं के माध्यम से राहत कार्य शुरू करवाया है।

वहीं चेन्नई एयरपोर्ट को भी कई घंटे तक बंद रखा गया। तेज़ हवाएँ चल रही हैं और भारी बारिश हो रही है। इस कारण कई उड़ानों को रद्द करना पड़ा। सभी एयरलाइन्स ने यात्रियों से कहा है कि वो पहले फ्लाइट स्टेटस चेक करें, तभी एयरपोर्ट के लिए निकलें। चेन्नई की सबअर्बन ट्रेन्स को अस्थायी काल के लिए निलंबित कर दिया गया है। चेन्नई के 14 सबवे बंद कर दिए गए हैं। बिजली एवं इंटरनेट सेवाओं में व्यवधान पहुँचा है। लोगों को उबाला हुआ पानी पीने की ही सलाह दी गई है।

IMD (मौसम विज्ञान विभाग) ने चेन्नई, कांचीपुरम, चेंगलपट्टू और तिरुवल्लुर में आगे भी भारी बारिश की चेतावनी दी है। रानीपेट, वेल्लोर, तिरुवन्नामलाई और विल्लुपुरम जिलों में भीषण बारिश की चेतावनी दी है। कुड्डलोरे, कल्लाकुरीचि, तिरुपत्तूर और यहाँ तक कि पुदुच्चेरी में भी बारिश होती रहेगी। अगले 2 दिनों तक ये आपदा जारी रहेगी। मंगलवार (5 दिसंबर, 2023) को ‘मिचाउंग’ तूफ़ान आंध्र प्रदेश के दक्षिणी तट पर जमीन से टकराएगा।

वहीं उत्तर प्रदेश भी बंगाल की खाड़ी में उठे इस चक्रवाती तूफान से अछूता नहीं है। पुरवैया एवं मिश्रित हवा ने पश्चिम से आने वाली ठंडी हवा का रास्ता रोका, जिससे कि तापमान में 4.2 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी दर्ज की गई। पूर्व से आने वाली हवाएँ बारिश भी करा सकती हैं। हालाँकि, चक्रवात का असर कम होते ही ठंडी पछुआ हवाएँ चलेंगी। आसमान से बादलों के हटने के कारण सूर्य का प्रकाश तेज हुआ और इस कारण तापमान में और बढ़ोतरी देखी जा सकती है।

मौसम वैज्ञानिक मोहम्मद दानिश ने बताया है कि आगे इस तूफान का क्या रुख रहेगा। 4 दिसंबर को ये दक्षिणी आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु के तट से होते हुए मध्य बंगाल की खाड़ी तक पहुँच रहा है। इसके बाद यहीं से ये उत्तर की ओर और दक्षिणी आंध्र प्रदेश के तट की ओर बढ़ेगा। नेल्लोर और मछलीपट्टनम के बीच जब ये गंभीर चक्रवाती तूफान बन कर आंध्र के तटों को पार करेगा, तब हवाओ की रफ़्तार 110 किलोमीटर प्रति घंटे से भी अधिक पहुँच जाएगी।

‘रणबीर कपूर के दोनों पैर चाटना चाहता हूँ’: फिल्म देख ‘Animal’ हुए रामगोपाल वर्मा, कहा- मन होता है संदीप वांगा के मुँह को चूम लूँ

बॉलीवुड फिल्म निर्माता राम गोपाल वर्मा ने ‘एनिमल’ फिल्म देखने के बाद उसके मेकर संदीप रेड्डी वांगा की प्रशंसा की है। वर्मा इस फिल्म को देखने के बाद इतना खुश हैं कि फिल्म निर्माता के पैर छूना और उनके मुँह को चूमना चाहते हैं। साथ ही रणबीर कपूर के पैर को चाटना चाहते हैं। उन्होंने इस फिल्म की तारीफ में कबीर सिंह फिल्म को बच्चों वाली फिल्म बताया है।

उन्होंने कहा, “एनिमल का बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन खत्म होने के काफी समय बाद तक इसके कंटेंट और रणबीर के किरदार को लेकर बड़े पैमाने पर झगड़े होंगे। मुझे सच में विश्वास है कि संदीप ने जिस तरह से काम किया है, ईमानदारी से नैतिक पाखंड को नंगा किया है, उससे एक सांस्कृतिक बदलाव आ सकता है।”

अपने पोस्ट में उन्होंने संदीप वांगा द्वारा फिल्म में दिखाए गए दृश्यों को अन्य फिल्म मेकरों के दृश्यों से हटकर बताया और इसकी तारीफ भी की। उन्होंने लिखा, “अरे संदीप वांगा, आप अपने पैरों की एक तस्वीर भेजें ताकि मैं कई उन्हें छू सकूँ।” उन्होंने जहाँ अपने पोस्ट में संदीप वांगा के लिए लिखा- “मैं तुम्हारे मुँह को चूमना चाहता हूँ” तो वहीं रणबीर कपूर के लिए लिखा गया- “मैं तुम्हारे पैरों को चाटना चाहता हूँ।”

रणबीर के कैरेक्टर की तारीफ करते हुए उन्होंने फिल्म का अपना पसंदीदा सीन भी बताया। उन्होंने कहा, “मेरे पसंदीदा सीन्स में से एक वह है जब कोई सोचता भी नहीं है कि, वह बेसबॉल बैट या कुछ और के साथ वापस आएगा, लेकिन जब वह मशीन गन के साथ वापस आता है तो लगभग हम सभी अपनी कुर्सियों से गिर जाते हैं और वह क्षण एक शुद्ध सिनेमाई रत्न है।”

फिल्ममेकर ने यह भी लिखा, “कुछ बेतरतीब कॉमिक सीन जैसे ब्रा स्ट्रैप स्पैंकिंग, डॉक्टरों के साथ फिजिकल होने के बारे में बात करना आदि कुछ ऐसे नाम हैं, जिनका कोई कॉन्टैक्स्ट नहीं हैं, लेकिन वे वास्तव में नायक के चरित्र को दर्शकों के दिमाग में बिठाने के लिए अवचेतन रूप से एक हथौड़े की तरह काम करते हैं।”

हिरोइन का चाट चुके हैं पाँव

बता दें कि इससे पहले राम गोपाल वर्मा की एक फोटो वीडियो एक हिरोइन आशू रेड्डी का पाँव चाटते हुए वायरल हो चुकी है। वीडियो में दिखा था कि राम गोपाल वर्मा उनके कदमों के पास नीचे जमीन पर बैठे थे और उनका पाँव हाथ में लेकर उसे चूम रहे थे उसे चाट रहे थे। वो हिरोइन को वीडियो में ये भी सलाह दे रहे थे कि कभी शादी मत करना क्योंकि इससे उसके पति को पूरे शरीर पर अधिकार मिल जाएगा। 

‘यहाँ मत निकालिए हार का गुस्सा’: संसद के शीतकालीन सत्र से पहले PM मोदी की विपक्ष को सलाह, जाएगी महुआ मोइत्रा की सदस्यता?

संसद का शीतकालीन सत्र आज से चालू हो रहा है। सत्र के चालू होने से पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मीडिया से बातचीत की है। उन्होंने अपने संबोधन में चार राज्यों के चुनावी नतीजों की चर्चा की और नए संसद भवन के विषय में बात की। यह सत्र नए संसद भवन में हो रहा है।

संसद का यह शीतकालीन सत्र सोमवार (4 दिसम्बर, 2023) से चालू होकर 22 दिसम्बर, 2023 तक चलेगा। इस बीच कई महत्वपूर्ण बिल पेश होंगे और बाकी विधायी कार्य होंगे। पहले दिन की कार्यवाही चालू होने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संसद पहुँचे।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “अगर मैं वर्तमान चुनाव नतीजों के आधार कहूँ तो विपक्ष में बैठे साथियों के लिए यह सुनहरा मौका है, इस सत्र में पराजय का गुस्सा निकालने की योजना बनाने की बजाय इस पराजय से सीख कर के पिछले 9 वर्षों से नकारात्मकता की प्रवृत्ति को छोड़ कर इस सत्र में सकारात्मकता के साथ आगे बढ़ेंगे तो देश उनकी तरफ देखने का दृष्टिकोण बदलेगा। उनके लिए यहाँ से नए द्वार खुल सकते हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “अगर वो विपक्ष में हैं तो भी अच्छी सलाह दे रहा हूँ, सकारात्मक विचार के साथ आइए, अगर हम 10 कदम चल रहे हैं तो आप 12 कदम चलने का फैसला लेकर आइए। हर किसी का भविष्य उज्ज्वल है, निराश होने की जरूरत सबके लिए अवसर हैं, लेकिन कृपा करके बाहर की पराजय का गुस्सा सदन में मत उतारना। हताशा-निराशा होगी, आपके साथियों को दम दिखाने के लिए आपको कुछ ना कुछ करना पड़ेगा लेकिन कम से कम लोकतंत्र के मंदिर को वो मंच मत बनाइए।”

प्रधानमंत्री मोदी ने इन पार्टियों को सलाह दी कि वह अपना रुख बदलें और सिर्फ विरोध करने के लिए विरोध ना करें। देशहित में सकारात्मक चीजों का साथ दें। उन्होंने विपक्ष से कहा कि इससे देश में जो आपके प्रति नफरत पैदा हो रही है वह मोहब्बत में बदल जाए। प्रधानमंत्री ने कहा कि आपका भला भी इसी में है कि आप सकारात्मक बनें। प्रधानमंत्री ने अपील की कि नए संसद भवन में जो कमियाँ रह गई हों वो उन्हें बताएँ।

संसद की कार्यवाही से पहले भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कहा कि आज उनकी जिन्दगी का सबसे महत्वपूर्ण दिन है। बता दें कि उन्होंने TMC सांसद महुआ मोइत्रा के खिलाफ ‘सवाल के बदले घूस’ का मामला उठाया था, जिस पर संसद में कार्रवाई फिर से चालू होगी। इस मामले में संसद की आचार समिति की रिपोर्ट संसद के पटल पर रखी जाएगी।

केंद्र सरकार इस सत्र में 19 विधेयक लेकर आ रही है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण चुनाव आयुक्त की नियुक्ति से जुड़ा विधेयक है। गौरतलब है कि बीते दिनों सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति पर एक कानून बनाने को कहा था। इसके अतिरिक्त इस सत्र में नई दंड संहिताओं पर भी चर्चा होगी।

शिव जीत गया… कौन है 26 साल का वह लड़का जिसकी जीत के लिए पाकिस्तान में भी हुई प्रार्थना, जो BJP की जीत में निर्दलीय होकर भी लूट रहा चर्चे

3 दिसंबर 2023 को मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान और तेलंगाना विधानसभा चुनावों के नतीजे आए। तीन राज्यों में बीजेपी तो तेलंगाना में कॉन्ग्रेस को जीत मिली। कॉन्ग्रेस को बेदखल कर बीजेपी राजस्थान की सत्ता में वापसी करने में सफल रही है। लेकिन बीजेपी की इस शानदार जीत के बीच भी 26 साल का एक युवक चर्चे लूट रहा है।

इस युवक का नाम है, रविंद्र सिंह भाटी। बीजेपी से टिकट नहीं मिले पर उन्होंने शिव सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ा था। जितनी चर्चा उनकी बगावत, उनके चुनाव लड़ने के तरीकों, प्रचार के दौरान उन्हें मिल रहे समर्थन की हुई, उससे कहीं ज्यादा चर्चे अब शिव विधानसभा सीट से उनकी जीत के हैं।

रविंद्र सिंह भाटी का जलवा ऐसा है कि निर्दलीय होने के बाद भी चुनाव प्रचार के दौरान ही उन्हें अलग-अलग दलों से जुड़े लोगों और आम जनता का भारी समर्थन सोशल मीडिया पर मिल रहा था। विशेषकर युवा वर्ग से। उन्होंने फतेह खान को 3950 वोटों से हराया है। फतेह खान भी निर्दलीय मैदान में थे। रविंद्र सिंह भाटी को कुल 79495 वोट मिले हैं।

रविन्द्र सिंह भाटी ने फ़तेह खान को हराया है।
रविन्द्र सिंह ने फ़तेह खान को हराया है।

ऐसा भी नहीं है कि भाटी को समर्थन केवल शिव में ही मिल रहा था। सोशल मीडिया पर राजस्थान सहित देश भर से लोगों ने उनका समर्थन किया। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान में भी उनकी जीत के लिए प्रार्थना हुई।

दरअसल, शिव विधानसभा क्षेत्र पाकिस्तान की सीमा से सटा इलाका है। रविंद्र, भाटी राजपूत हैं। इस समाज के लोग पाकिस्तान में भी हैं। आज भी इस समाज के दोनों तरफ के लोगों के बीच रोटी-बेटी का रिश्ता है। लिहाजा पाकिस्तान में रहने वाले इस समाज के लोग भी रविंद्र की जीत चाहते थे।

रविंद्र सिंह ने शिव का 70 साल का रिकॉर्ड तोड़ा है। वह इससे पहले भी रिकॉर्ड तोड़ने के लिए ही जाने जाते रहे हैं। 2019 में राजस्थान के जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय के वे छात्रसंघ अध्यक्ष चुने गए थे। छात्रसंघ के 57 साल के इतिहास में वे पहले निर्दलीय अध्यक्ष थे।

रविंद्र सिंह का छात्र राजनीति से लेकर विधानसभा पहुँचने का सफ़र काफी दिलचस्प रहा है। वे बाड़मेर जिले के रहने वाले हैं, जिसके अंतर्गत यह शिव विधानसभा आती है। वे यहाँ के दुधौड़ा गाँव के निवासी हैं। उनका परिवार राजनीति से नहीं जुड़ा हुआ है। वह अपने घर के पहले ऐसे व्यक्ति हैं जो राजनीति में सक्रिय हुए हैं।

रविंद्र सिंह भाटी के पिता अध्यापक हैं। उनकी राजनीतिक सक्रियता की शुरुआत वर्ष 2016 से प्रारम्भ हुई, जब वह जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय पहुँचे। यहाँ छात्र नेताओं के सम्पर्क में आने के बाद वह भी छात्र राजनीति में सक्रिय हो गए। 2019 में उन्होंने भारतीय विद्यार्थी परिषद से छात्रसंघ अध्यक्ष का चुनाव लड़ने के लिए टिकट माँगा था। लेकिन नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने यह चुनाव निर्दलीय लड़ा और जीत भी गए। उन्होंने NSUI और ABVP दोनों के उम्मीदवारों को हराया था।

वह 2019 से लेकर 2022 तक जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय के छात्रसंघ अध्यक्ष रहे। इस दौरान दो वर्ष तक चुनाव कोरोना के कारण टलते रहे। इसके पश्चात रविंद्र दलीय राजनीति में आ गए। वे बीजेपी के टिकट पर शिव से विधानसभा चुनाव लड़ना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने नवम्बर 2023 में भाजपा की सदस्यता भी ली। लेकिन भाजपा ने इस सीट से स्वरुप सिंह खारा को टिकट दे दिया। इसके बाद रविंद्र सिंह भाटी ने निर्दलीय लड़कर इतिहास रच दिया है।

कौन हैं भगवाधारी प्रताप पुरी जिन्होंने गाजी फकीर का गढ़ ढहाया: कभी कहलाता था ‘सरहद का सुल्तान’, कॉन्ग्रेस सरकारों में बोलती थी तूती

राजस्थान विधानसभा चुनावों में इस बार कई जाने-माने चेहरे हार गए। राजस्थान के जैसलमेर जिले की पोखरण सीट से भाजपा के महंत प्रताप पुरी ने कॉन्ग्रेस के उम्मीदवार सालेह मोहम्मद को हराया है। सालेह मोहम्मद अशोक गहलोत की सरकार में मंत्री भी थे। महंत प्रताप पुरी को इस सीट पर 1,12,925 वोट मिले और उन्होंने 35,427 वोटों के अंतर से सालेह को हराया। महंत से हारने वाले सालेह, जैसलमेर के गाजी फ़कीर के बेटे हैं। जैसलमेर के गाजी फ़कीर को यहाँ समानांतर सत्ता चलाने के लिए जाना जाता था, उसका निधन 2021 में हो गया था।

पोकरण से गाजी फ़कीर के बेटे सालेह मोहम्मद को महंत प्रताप पुरी ने हराया
पोखरण से गाजी फ़कीर के बेटे सालेह मोहम्मद को महंत प्रताप पुरी ने हराया

गाजी फ़कीर इस इलाके में सिन्धी मुस्लिमों का बड़ा मजहबी उलेमा था और उसका इतना रसूख था कि जो भी पुलिस अधिकारी उसके अपराधों की फाइल खोलता था उसका ट्रांसफर हो जाता था। गाजी फ़कीर पर ही हाथ डालने के कारण आईपीएस पंकज चौधरी का भी 2013 में ट्रांसफर कर दिया गया था।

गाजी फ़कीर अशोक गहलोत का करीबी था। जब भी राज्य में कॉन्ग्रेस की सरकार आई तब-तब उसके परिवार का रसूख बढ़ता चला गया और उसके परिवार के अनेकों लोग सरकार में कई महत्वपूर्ण पदों पर काबिज हो गए। उसके इस इलाके में प्रभाव का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उसका बेटा सालेह मोहम्मद जैसलमेर से राज्य सरकार में मंत्री बनने वाला पहला विधायक था। सालेह को गाजी फ़कीर ने कम उम्र से ही राजनीति में एंट्री दिलवा दी थी। उसे 23 की उम्र में ही पंचायत समिति का प्रधान बनवा दिया गया था।

सालेह मोहम्मद (बाएँ, फूल माला के साथ) और गाजी फ़कीर (बैठे हुए)
सालेह मोहम्मद (बाएँ, फूल माला के साथ) और गाजी फ़कीर (बैठे हुए)

देशद्रोह सहित कई मामलों में आरोपित गाज़ी कई वर्षों से भारतीय एजेंसियों के पकड़ में नहीं आ पाया क्योंकि उसके ख़िलाफ़ सबूत ही नहीं होते थे। पुलिस हिस्ट्रीशीट में उसका नाम 1965 से ही आता रहा है लेकिन कॉन्ग्रेस में उसके वर्चस्व के कारण कोई उसका बाल भी बाँका नहीं कर सका।

पंकज चौधरी ने कहा था कि उनके पूर्ववर्तियों ने गाज़ी के बारे में फाइल्स में कई भयानक बातें लिख रखी थी। उन्होंने उसका अधिक विवरण देने से इनकार कर दिया था लेकिन उनके इस बयान से स्थिति की गंभीरता को समझा जा सकता है। उसके ख़िलाफ़ जुलाई 1965 के एक तस्करी वाले मामले को फिर से खोला गया था।

स्थानीय प्रशासन में उसकी पकड़ इतनी मजबूत थी कि ऊपर से आदेश के बावजूद उसको छुआ तक नहीं जा सका। उसके ख़िलाफ़ तैयार की गई फाइल 1984 में गायब हो गई। उस समय राज्य में कॉन्ग्रेस की सरकार थी।

1990 में एक एसपी सुधीर प्रताप सिंह आए जिन्होंने गाज़ी पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया। लेकिन, एसपी सुधीर प्रताप सिंह को राजस्थान सरकार ने चुपचाप ट्रांसफर कर दिया। 2011 में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की सरकार ने फिर से उस हिस्ट्रीशीट को बंद करवा दिया। इसके बाद दृश्य में पंकज चौधरी की एंट्री हुई जिन्होंने गाज़ी पर नकेल कसी।

उनका कार्य भी अधूरा रह गया और इससे पहले कि वे किसी नतीजे पर पहुँच पाते, उनका भी ट्रांसफर करवा दिया गया। गाज़ी के बारे में सबसे बड़ी बात श्रीकांत घोष की पुस्तक ‘Pakistan’s ISI: Network of Terror in India‘ में कही गई थी। इस पुस्तक के पृष्ठ संख्या 55 पर गाज़ी फ़क़ीर का जिक्र किया गया है।

उन्होंने सीमा क्षेत्र में सक्रिय एक इस्लामी संस्था तबलीग-ए-जमात का जिक्र करते हुए लिखा है कि इलाक़े में सैयाद शाह मर्दान शाह-II यानी पीर पगारो का प्रभाव बढ़ रहा है। पीर पगारो पाकिस्तान मुस्लिम लीग (एफ) का अध्यक्ष है। इसके आगे श्रीकांत घोष ने लिखा था कि जैसलमेर निवासी गाज़ी फ़क़ीर पाकिस्तान की सीमा पर की जा रही आतंकी गतिविधियों में उसकी मदद करता है। इसके अलावा वह पाकिस्तानी एजेंटों को भारतीय सीमा पर स्थित गाँवों में बसाने में मदद करता है।

जब अप्रैल 2021 में गाजी फ़कीर की मौत हुई थी तब भी उसका इस इलाके में प्रभाव दिखा था। उसकी मौत के वक्त कोरोना से सम्बंधित बंदिशें लागू थीं। उसकी मौत से चार दिन पहले ही उसका बेटा सालेह मोहम्मद कोरोना पॉजिटिव पाया गया था। लेकिन इन सब बातों को नजरंदाज करते हुए उसके जनाजे में बड़ी भीड़ इकट्ठा की गई थी और कोविड नियमों की धज्जियाँ उड़ाई गईं थी।

बता दें कि सालेह पहली बार 2008 में विधायक बने थे और 2013 में भाजपा के शैतान सिंह से हार गए थे। 2018 में पुनः विधायक बन कर वह मंत्री बने। लेकिन अब इन चुनावों में उन्हें महंत प्रताप पुरी ने एक बार फिर पटखनी दी है।

40 सीट, 174 प्रत्याशी, 80% वोटिंग: मिजोरम में चल रही वोटों की गिनती, 6 साल पुरानी पार्टी 62 साल पुरानी MNS से आगे: पूर्व IPS बोले- कॉन्ग्रेस से गठबंधन नहीं

मिजोरम की 40 विधानसभा सीटों के लिए 7 नवंबर को राज्य में 80.66% वोटिंग हुई थी। आज 4 दिसंबर मतगणना का दिन है। यहाँ किसी भी पार्टी को बहुमत पाने के लिए 21 सीटें जीतनी होंगीं।

पहले यहाँ अन्य प्रदेशों की तरह रविवार (3 दिसंबर 2023) को ही मतगणना होनी थी, हालाँकि स्थानीय लोगों की माँग के बाद चुनाव आयोग ने यह तारीख बदलकर 4 दिसंबर कर दी।

1984 के बाद से नॉर्थ ईस्ट के राज्य में प्रमुख रूप से (22 अक्टूबर 1961 को अस्तित्व में आई) मिजो नेशनल फ्रंट और कॉन्ग्रेस पार्टी चुनावों में आमने-सामने रही थी। लेकिन 2017 में पूर्व आईपीएस लालदुहोमा के नेतृत्व में बनी नई राजनीतिक पार्टी इन्हें टक्कर देने अस्तित्व में आई। पार्टी का नाम ‘जोरम पिपुल्स मूवमेंट’ है।

इन तीनों पार्टियों ने 40 सीटों पर अपने सारे-सारे उम्मीदवार उतारे हैं। वहीं भाजपा ने मिजोरम में 23 सीटों पर, आम आदमी पार्टी ने 4 सीटों पर अपने प्रत्याशियों को खड़ा किया है। इनके अलावा 27 निर्दलीय उम्मीदवार भी खड़े हुए हैं। कुल 174 उम्मीदवार इस बार मिजोरम में चुनाव लड़ रहे हैं।

शुरुआती रुझानों में एमएनएफ ने अपनी बढ़त तो बनाई थी लेकिन जेडपीएम पार्टी ने मतगणना शुरू होने के थोड़ी देर बाद ही उन्हें अच्छी खासी सीटों के फासले से पीछे कर दिया।

खबर लिखने तक MNF जहाँ रुझानों में 8 सीट पाई है वहीं ZPM को 28 सीट मिली है। कॉन्ग्रेस इस रेस में 1 सीटों पाई है जबकि भाजपा को तीन सीटें लेते दिखाया गया है।

एक्जिट पोल्स की बात करें तो मिजोरम में इस बार जेडपीएम को ही उभरती पार्टी दिखाया गया था। उसके अध्यक्ष लालदुहोमा भी अपनी पार्टी की जीत को लेकर बेहद आश्वस्त थे।

उन्होंने दावा किया हुआ है कि मिजोरम में इस बार उनकी सरकार बनने से कोई भी दल नहीं रोक सकता। कॉन्ग्रेस से गठबंधन के लिए वो बिलकुल साफ मना कर चुके हैं। पिछले साल इसी पार्टी को चुनावों में मात्र 8 सीटों से संतोष करना पड़ा था।

गौरतलब है कि मिजोरम के अलावा इस बार चार और राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए थे। मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना। इन राज्यों में वोट की काउंटिंग 3 दिसंबर को हुई।

2023 के विधानसभा चुनाव के नतीजे-

  • मध्यप्रदेश की 230 सीटों पर भारतीय जनता पार्टी ने 163 सीट पाकर बहुमत हासिल किया, जबकि कॉन्ग्रेस को 66 सीट आई और अन्य को 1।
  • राजस्थान की 199 विधानसभा सीटों पर भाजपा ने 115 सीटें जीतीं, कॉन्ग्रेस को 69 सीट मिली, बसपा के हिस्से 2 आईं और अन्य को 13 सीट मिली।
  • इसी तरह छत्तीसगढ़ में 90 सीट में से 54 सीट बीजेपी ने अपने नाम की जबकि कॉन्ग्रेस को 35 पर संतुष्ट होना पड़ा। अन्य के खाते में 1 आई।
  • तेलंगाना में कॉन्ग्रेस ने बाजी मारी। 119 सीट में 64 जीतकर उन्होंने बीआरएस को सत्ता से हटा दिया। भाजपा ने भी पिछले सालों के मुकाबले यहाँ बढ़त बनाते हुए 8 सीटें हासिल की।

मुस्लिम फकीर से खाए दनादन चप्पल, फिर भी 60 हजार वोटों से हार गए कॉन्ग्रेस उम्मीदवार: काम नहीं आई ‘दुआ’

मध्य प्रदेश चुनावों में एक मुस्लिम फ़कीर की चप्पलों वाली दुआ लेने के बाद भी कॉन्ग्रेस प्रत्याशी पारस सकलेचा हार गए। बीते दिनों उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था जिसमें वह सड़क किनारे एक मुस्लिम पीर से खुद को चप्पल रसीद करवा रहे थे। चप्पलों की ये मार दुआ के रूप में ली जा रही थीं।

पारस सकलेचा रतलाम शहरी सीट से चुनाव लड़ रहे थे। उनको भाजपा के चेतन कश्यप ‘भैयाजी’ ने हराया है। चेतन कश्यप को 1,09,656 लाख वोट मिले हैं जबकि सकलेचा को 48,948 वोट मिले हैं। वह 60,708 वोट के अंतर से हारे हैं। परिणाम में दिख रहा है कि मुस्लिम फ़कीर की चप्पलों का कोई असर सकलेचा के चुनावी नतीजे पर नहीं पड़ा।

चप्पल रूप आशीर्वाद लेने वाले सकलेचा को भाजपा उम्मीदवार ने हरा दिया है।
चप्पल के रूप में दुआ लेने वाले पारस सकलेचा को भाजपा उम्मीदवार ने हरा दिया है

पारस सकलेचा का यह वीडियो चुनाव प्रचार के दौरान वायरल हुआ था। वीडियो में देख सकते हैं कि पारस सकलेचा को वीडियो में नजर आ रहे फकीर बाबा कभी पीठ पर कभी कंधे पर, कभी मुँह पर चप्पल मारते हैं। और ऐसा नहीं कि ये कि वो एक बार मारकर रुकते हैं, देख सकते हैं कि किस तरह वीडियो में वो ताबड़तोड़ चप्पल मारते ही रहते हैं। पीछे से कोई व्यक्ति कहता भी है ‘बस बाबा बस’, लेकिन फकीर बाबा नहीं रुकते। इस दौरान कॉन्ग्रेस नेता हँसते-हँसते बस उनकी पैर छूते रहते हैं।

इस वीडियो को देखने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने कॉन्ग्रेस नेता का बहुत मजाक उड़ाया था। कोई कह रहा था कि कॉन्ग्रेस है ही चप्पल खाने लायक तो कोई चुटकी लेते हुए कह रहा है कि बाबा ने दुआ देने में कोई कमी नहीं रखी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कॉन्ग्रेस नेता को चप्पल-चप्पल मारने वाला व्यक्ति कमाल रजा नाम का फकीर है।

वह महू नीमच रोड पर घूमते हैं और अपने पास मुराद लेकर आने वाले लोगों को चप्पलों से पीटकर दुआ देते हैं। अपनी फरियाद लेकर तमाम लोग नई चप्पलें लेकर आते हैं ताकि उन्हें उसी से पीटकर कमाल रजा अपनी दुआ दे सकें। कॉन्ग्रेस नेता समेत तमाम लोगों का मानना था कि इस तरह की दुआ जिन फरियादियों को कमाल रजा ने दी, उनके जीवन में उन्हें सफलता मिली। पारस सकलेचा भी इस बार चुनावी मैदान में थे तो अपनी जीत के लिए उन्होंने ये हथकंडा आजमाया था, जो कि फेल हो गया।

पारस सकलेचा वही नेता हैं जिन्होंने भोपाल की सांसद साध्वी प्रज्ञा को ‘डायन’ कहा था। यह विवादित बयान उन्होंने 2019 चुनावों के दौरान दिया था। वह मध्य प्रदेश के व्यापम घोटाले के व्हिसलब्लोअर भी हैं।

स्कूटी सीख रही थी लड़की, खींचकर ले गए और किया गैंगरेप: UP पुलिस ने मोहम्मद जुनैद के पाँव में मारी गोली, 4 अन्य की तलाश

उत्तर प्रदेश की गाजियाबाद पुलिस की रविवार (3 दिसंबर, 2023) को बदमाशों के साथ मुठभेड़ हुई है। इस मुठभेड़ में मोहम्मद जुनैद नाम के एक आरोपित को के पैर में गोली लगी है। मुठभेड़ के दौरान जुनैद के 4 अन्य साथी फरार होने में सफल रहे जिनकी तलाश की जा रही है। जुनैद पर अपने 2 साथियों संग मिल कर गुरुवार (30 नवंबर, 2023) को एक लड़की के साथ गैंगरेप का आरोप है।

यह मामला गाजियाबाद जिले के थाना क्षेत्र ट्रोनिका सिटी का है। ACP लोनी ने एक बयान में बताया कि 30 नवंबर, 2023 को गाजियाबाद के ट्रोनिका सिटी क्षेत्र में एक लड़की के साथ दुष्कर्म का मामला दर्ज हुआ था। इस मामले में पुलिस टीमों का गठन कर के आरोपितों की तलाश की जा रही थी। इस बीच 3 दिसंबर को मुखबिर द्वारा पुलिस को ट्रोनिका सिटी क्षेत्र में आने वाले खानपुरा के जंगलों में कुछ संदिग्धों की मौजूदगी की सूचना मिली। सूचना के बाद पुलिस टीम मौके पर पहुँची।

पुलिस के मुताबिक सूचना सही पाई गई। खानपुरा के जंगलों में मौजूद संदिग्धों ने पुलिस को देखते ही गोलीबारी शुरू कर दी। जवाबी और आत्मरक्षा में पुलिस ने भी गोलियाँ चलाईं। इस गोलीबारी में जुनैद नाम के एक संदिग्ध के पैर में गोली लग गई। गोलीबारी के बीच जुनैद के बाकी साथी भाग निकले। पुलिस ने जुनैद को अस्पताल में भर्ती करवाया और पूछताछ की। पूछताछ में जुनैद ने 30 नवंबर को ट्रोनिका सिटी थाने में हुई गैंगरेप की घटना में अपनी संलिप्तता कबूल की।

ACP ने बताया कि जुनैद ने कबूल किया कि उसने अपने 2 अन्य साथियों के साथ पीड़िता के साथ गैंगरेप की घटना को अंजाम दिया था। वहीं जुनैद के साथ 2 अन्य साथी भी घटनास्थल पर थे। ये पीड़िता की सहेली के साथ गैंगरेप करना चाहते थे लेकिन इस प्राइवेट कार आ जाने के चलते वो दोनों अपने मंसूबों में सफल नहीं हुए और डर से भाग गए। पुलिस टीमें जुनैद के बयान में सामने आए 4 अन्य फरार आरोपितों की तलाश में जुटी हुईं हैं।

क्या था मामला

यह मामला गुरुवार (30 नवंबर, 2023) का है। तब दिल्ली की रहने वाली एक युवती ने गाजियाबाद पुलिस को अपने साथ हुए गैंगरेप की सूचना दी। पीड़िता ने बताया कि वो गाजियाबाद के ट्रोनिका सिटी स्थित एक फैक्ट्री में नौकरी करती है। घटना के दिन पीड़िता की सहेली अपने एक पुरुष साथी के साथ स्कूटी सीखने एक सुनसान सड़क पर गई थी। पीड़िता भी इनके साथ गई थी। इसी दौरान ऑटो से कुछ लोग उतरे और उन्होंने पीड़िता को झाड़ियों में ले जा कर गैंगरेप किया। पुलिस ने इस मामले में पीड़िता की सहेली के पुरुष मित्र से भी पूछताछ की थी।

आरोपितों में एक ऑटो चालक भी बताया जा रहा है। पुलिस घटना में प्रयोग हुए ऑटो की तलाश कर रही है।