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नेपाल में मुस्लिम भीड़ ने लगाए ‘सर तन से जुदा’ के नारे, छतों से हिन्दुओं पर फेंके पत्थर: फेसबुक पोस्ट पर बवाल, हिंसा के बाद लगा कर्फ्यू

नेपाल के तराई में बसे बाँके जिला के नेपालगंज शहर में मुस्लिम भीड़ ने एक फेसबुक पोस्ट को लेकर न सिर्फ ‘सर तन से जुदा’ और ‘लब्बैक-लब्बैक’ के नारे लगाए, जुलुस निकाले बल्कि हिन्दुओं की रैली पर पथराव कर हिंसा की है। इस्लामी भीड़ ने हिन्दुओं की एक शांतिपूर्ण यात्रा पर अपने घरों की छतों से पथराव किया है। जिसके बाद नेपालगंज में कर्फ्यू लागू है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत-नेपाल की सीमा पर बसे नेपालगंज शहर में 1 अक्टूबर, 2023 को मुस्लिम भीड़ ने एक रैली निकाली जिसमें हजारों की तादाद में शामिल लोगों ने ‘गुस्ताख-ए-नबी की एक ही सजा – सर तन से जुदा’, ‘नारा-ए-तकबीर’ और लब्बैक के नारे लगाए गए। इस भीड़ का कहना था कि वह इसलिए प्रदर्शन कर रहे हैं क्योंकि किसी ने फेसबुक पोस्ट में उनके नबी को कथित तौर पर अपमानित किया है।

यह भी कहा गया है कि इस रैली में शामिल मजहबी भीड़ ने हिन्दुओं को धमकाया और उनके साथ हिंसा भी की। इस रैली के कई वीडियो नेपाल के मुस्लिम समुदाय के सोशल मीडिया पेज पर साझा किए गए हैं जिसमें भीड़ नारे लगाती और आगजनी करती दिखती है।

एक्स (पहले ट्विटर) पर एक यूजर @Treeni ने एक थ्रेड में बताया है कि नेपालगंज में यह हिंसा करवाने वाला एक स्थानीय पार्षद शराफत खान है।

वहीं मजहबी भीड़ की हिंसा के विरोध में नेपालगंज के स्थानीय हिन्दुओं ने भी शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन का आयोजन करने की अर्जी स्थानीय प्रशासन को दी थी। यह विरोध प्रदर्शन स्थानीय हिन्दू समूह ‘ओमकार परिवार’ द्वारा किया जाना था।

इसको लेकर प्रशासन ने नेपालगंज में सुरक्षा बढ़ा दी थी। ओमकार परिवार द्वारा आयोजित यह विरोध रैली बागेश्वरी मंदिर से शुरु होकर बीपी चौक पहुँचा था। इस चौक से आगे बढ़ने पर रैली के ऊपर मुस्लिमों ने अपने घरों की छतों से पत्थरबाजी शुरू कर दी।

हिन्दुओं पर किए गए इस एकाएक हमले से भय की स्थिति उत्पन्न हो गई और उन्होंने भी अपनी जान बचाने का लिए जवाब में पत्थरबाजी की। इसके पश्चात प्रशासन ने एहतियातन तौर पर कर्फ्यू लगा दिया और हिंसक तत्वों पर कार्रवाई की है।

गौरतलब है कि नेपालगंज कस्बा भारत की सीमा पर बसा हुआ है और भारत-नेपाल व्यापार में महत्वपूर्ण बिंदु है। नेपालगंज कस्बे की सीमा बहराइच के रुपैडिहा कस्बे से लगती है। दोनों देशों के लोगों में आपस रोटी-बेटी के संबंध हैं। यह रिपोर्ट भी सामने आई थी कि तराई जिलों में दोनों तरफ मुस्लिम आबादी बढ़ रही है।

नेपाल की जनसंख्या के सबसे नए आँकड़ों के अनुसार, नेपालगंज में लगभग 1.64 लाख लोग रहते हैं। इसमें से 47,244 (28.7%) जनसंख्या मुस्लिम है। अभी तक की जानकारी के अनुसार, शराफत खान को गिरफ्तार नहीं किया गया है।

बिहार की जाति जनगणना के बाद क्यों हो रही रोहिणी आयोग की चर्चा, कैसे OBC के नाम पर सब कुछ खा रही हैं गिनती की जातियाँ: जानिए सब कुछ

बिहार सरकार ने जातीय जनगणना के आँकड़े जारी कर दिए हैं। नीतीश कुमार हों या लालू यादव या फिर राहुल गाँधी, सभी लोग एक ही सुर में गाना गा रहे हैं, ‘जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी’। वैसे, हल्ला खूब मचा हुआ है। दो अक्टूबर को गाँधी जयंती के दिन इस जनगणना के आँकड़े जारी किए गए तो विपक्षी फुदकने लगा।

राहुल गाँधी ने तो ऐलान कर दिया कि कॉन्ग्रेस की सरकार बनी तो पहला काम पूरे देश में जातीय जनगणना का ही होगा। हालाँकि, इन दिनों रोहिणी आयोग की भी चर्चा है, जिसका गठन कालेलकर आयोग और मंडल आयोग की तर्ज पर मोदी सरकार ने किया था।

क्या है रोहिणी आयोग?

दिल्ली हाईकोर्ट की रिटायर्ड चीफ जज जस्टिस जी. रोहिणी की अध्यक्षता में भारत सरकार यानि मोदी सरकार ने 2 अक्टूबर 2017 को एक कमीशन का गठन किया था। इसे रोहिणी आयोग के रूप में भी जाना जाता है। भारत के संविधान के अनुच्छेद 340 के तहत किए गए इस आयोग का काम अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के उप-वर्गीकरण का था।

अब आप पूछेंगे कि अनुच्छेद 340 क्या बला है? तो भारत के संविधान के अनुच्छेद 340 में सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों में सुधार हेतु जाँच के लिए एक आयोग की नियुक्ति का प्रावधान है। राष्ट्रपति भारत के पिछड़े वर्गों की स्थितियों और पृष्ठभूमि की जाँच के लिए एक आयोग नियुक्त करने का आदेश दे सकता है।

संविधान के अनुच्छेद 340 के तहत ये सिर्फ तीसरा मौका था, जब किसी आयोग का गठन किया गया। इसके पहले साल 1953 में देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने काका कालेलकर की अध्यक्षता में पिछड़ा आयोग बनाया था, जो पिछड़े लोगों पर सरकार को अपनी रिपोर्ट दी थी। इस डाटा का इस्तेमाल आरक्षण इत्यादि में होना था। हालाँकि, नेहरू सरकार ने इस आयोग के सुझावों को मानने से इनकार कर दिया था।

इसका दूसरी बार इस्तेमाल 1979 में हुआ, जब मंडल कमीशन बनाया गया। मंडल कमीशन के बारे में तो जानते ही होंगे आप? नहीं, तो बता देते हैं कि मंडल कमीशन ने ओबीसी वर्ग को आरक्षण देने की सलाह दी थी। 1980 से 1989 तक इंदिरा गाँधी और राजीव गाँधी की सरकारों ने इसे लटकाए रखा, लेकिन साल 1990 में वीपी सिंह ने इसे लागू कर दिया। इसके बाद देश में मंडल-कमंडल की राजनीति ऐसी आगे बढ़ी कि जाति के बिना भारत में राजनीति संभव नहीं है।

अब, साल 2017 में मोदी सरकार ने तीसरी बार अनुच्छेद 340 का इस्तेमाल किया। क्यों किया, ये ऊपर बताया जा चुका है। 31 जुलाई 2023 को रिपोर्ट पेश करने से पहले इस आयोग का कार्यकाल 13 बार बढ़ाया गया। रिपोर्ट को राष्ट्रपति के पास भेजा जा चुका है। इसे अभी तक संसद में नहीं रखा गया है। मोटा-मोटी मान लेते हैं कि सरकार इस रिपोर्ट को अब स्वीकार कर चुकी है, जिसे लागू करने के लिए उसे कुछ कदम उठाने भर की देर है।

रोहिणी आयोग का फायदा-नुकसान?

आरक्षण का लाभ उठा रहे वर्गों जैसे एससी, एसटी, ओबीसी में कुछ मजबूत वर्ग इसका ज्यादा फायदा पा रहे हैं। वहीं, कुछ जातियों को बिल्कुल भी इसका फायदा नहीं मिल रहा है। अगर ओबीसी वर्ग की बात करें तो इसमें शामिल ऐसी कुछ जातियाँ हैं, जो सबसे ज्यादा फायदा उठा रही हैं, तो हजारों जातियों को इसका बिल्कुल भी लाभ नहीं मिल रहा है।

मोटा-मोटी ओबीसी वर्ग में 2700 जातियाँ शामिल हैं। इन जातियों की आर्थिक, सामाजिक, शैक्षिक स्थिति का अध्ययन करने और उसी अनुपात में कोटे के अंदर कोटा सिस्टम पर सलाह देने के लिए इस आयोग का गठन किया गया था। चूँकि इस आयोग के आँकड़े सार्वजनिक नहीं किए गए हैं, इसलिए पक्का नहीं बता सकते कि आयोग ने क्या सिफारिशें की हैं और किस तरह के डाटा का इस्तेमाल किया गया है।

रोहिणी आयोग में हो सकती हैं कैसी सिफारिशें?

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो रोहिणी आयोग ने नौकरियों और शिक्षा में 97 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण का लाभ ओबीसी की 25 प्रतिशत जातियाँ उठा रही हैं। शेष 75 प्रतिशत जातियों की भागीदारी 3 प्रतिशत ही है। इसमें भी 983 ओबीसी जातियों की हिस्सेदारी शून्य है।

चूँकि भारत सरकार के पास जनसाँख्यिकी का आँकड़ा 2010-2011 तक का ही है। ऐसे में मान सकते हैं कि अभी के हिसाब से जनसंख्या का डाटा रोहिणी आयोग ने इस्तेमाल ही होगा। मोटा-मोटी मीडिया रिपोर्ट्स की मान भी लें, तो रोहिणी आयोग की रिपोर्ट करीब 1100 पन्नों की है, जिसे दो भागों में बाँटा गया है।

पहले हिस्से में आरक्षण का फायदा पा रही जातियों में उनकी हिस्सेदारी से जुड़ी बात है तो दूसरे हिस्से में मौजूदा समय में ओबीसी में शामिल 2633 पिछड़ी जातियों की पहचान, जनसंख्या में उनके आनुपातिक प्रतिनिधित्व और अब तक आरक्षण नीतियों से उन्हें मिले लाभों की जानकारी है। हालाँकि कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, 3000 जातियों की जानकारी इस रिपोर्ट में है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, रोहिणी आयोग ने ओबीसी की 3000 जातियों को 4 वर्गों में विभाजित करने का सुझाव दिया है। इन वर्गों में आरक्षण का पूरा लाभ, अधूरा लाभ, बिल्कुल लाभ नहीं ले पाने वाली और एक दम अक्षम जातियों का 4 वर्ग तैयार हो सकता है, जिन्हें 10 प्रतिशत, 5 प्रतिशत, 8 प्रतिशत, जो भी डाटा इस आयोग की सिफारिश के साथ होगा, उन्हें मिल जाएगा।

क्या होगा असर?

अभी ओबीसी जातियों की राजनीति को लेकर मुखर रहने वाली ताकतवर ओबीसी जातियों का कोटा इस सिस्टम की वजह से घट जाएगा। ऐसे में संभव है कि ये जातियाँ अपने पुराने रहनुमाओं को छोड़कर नए विकल्प तलाशें। वहीं, जिन जातियों को आरक्षण का लाभ अब तक नहीं मिल पाया है, या बहुत कम मिला है, रोहिणी आयोग की सिफारिशों की वजह से उनका कोटा बढ़ जाएगा।

वो आगे बढ़कर अपनी हिस्सेदारी क्लेम भी कर पाएँगे। चूँकि अभी ओबीसी वर्ग में दो वर्ग है- एक क्रीमी लेयर और दूसरा गैर-क्रीमी लेयर। इनमें से क्रीमी लेयर वाले आरक्षण का फायदा ज्यादा उठा पाते हैं, क्योंकि वो आर्थिक और शैक्षिक स्तर पर मजबूत होते हैं। ऐसे में इन वर्गों का 4 वर्गों में विभाजन होते ही उन कमजोर जातियों का फायदा होगा, जो वंचित हैं।

राजनीति पर क्या पड़ेगा प्रभाव?

बिहार में जेडीयू, आरजेडी, हम, वीआईपी जैसी पार्टियाँ, उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी, समाजवादी पार्टी, रालोद, अपना दल, सुभासपा, हरियाणा में इनेलो, जेजेपी जैसी पार्टियाँ और अन्य राज्यों में जो भी ऐसी पार्टियाँ हैं, अब तो पूरे देश में कॉन्ग्रेस भी है, जो ओबीसी आरक्षण के नाम पर हल्ला काट रही हैं। इसके अलावा जाट, पटेल (पाटीदार आंदोलन के बाद भी ओबीसी आरक्षण नहीं), यादव जैसी जातियाँ और इनकी उपजातियाँ भी छटपटाएँगी, क्योंकि इसमें से कुछ को ज्यादा फायदा मिलता है।

ऐसे में इन जातियों की राजनीति करने वाली पार्टियों को रोहिणी आयोग की सिफारिशें झटका देने वाली साबित हो सकती हैं, क्योंकि इस आयोग की सिफारिश के बाद जो ओबीसी वोटर एक साथ बड़े समूह में दिखते हैं, वो कई वर्गों में दिखने लगेंगे। ऐसे में जातीय राजनीति करने वाली पार्टियों के लिए आगे की राह मुश्किल हो सकती है।

जिसके समर्थकों ने दुबे परिवार का किया नरसंहार, उसके घर पर चल सकता है बुलडोजर: जमीन की पैमाइश कर रही टीम, अवैध कब्जे की शिकायतें

देवरिया में दुबे परिवार के पति-पत्नी, 2 बेटियों और एक बेटे की हत्या के मामले में अब उत्तर प्रदेश सरकार बड़ी कार्रवाई की तैयारी कर रही है। फतेहपुर गाँव में प्रेम यादव की हत्या के बाद दुबे परिवार के नरसंहार को अंजाम दिया गया था। अब इस मामले में प्रेम यादव और उसके परिजनों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। प्रशासन को सूचना मिली है कि प्रेम यादव का आलीशान मकान और खलिहान सरकारी जमीन पर अवैध कब्ज़ा कर के बना हुआ था। ऐसे में राजस्व टीम बुधवार (4 अक्टूबर, 2023) को प्रेम यादव के घर पहुँची।

फतेहपुर गाँव में पहुँची राजस्व विभाग की टीम ने जमीन की पैमाइश शुरू कर दी है। रेवेन्यू डिपार्टमेंट के अधिकारियों का कहना है कि अगर सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण किया गया होगा तो फिर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी। लेहड़ा टोला में हुई घटना के बाद से ही राज्य की सियासत गर्म है और भू-माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई की माँग जोर पकड़ रही है। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर मामला दर्ज कराया है। अब तक 16 लोगों की गिरफ़्तारी की जा चुकी है।

सत्यप्रकाश दुबे की बड़ी बेटी शोभिता द्वारा दर्ज कराई गई FIR में 27 नामजद और 50 अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज कराया गया है। वहीं दूसरे पक्ष की तरफ से मृतक के रिश्तेदार अनिरुद्ध यादव ने FIR दर्ज कराई है। अब जब मृतक प्रेम यादव को लेकर जमीन कब्जाने के खुलासे हुए हैं, उसके बाद से कयास लगाए जा रहे हैं कि अवैध कब्जों के खिलाफ बुलडोजर कार्रवाई की जा सकती है। राजस्व विभाग के कर्मचारियों द्वारा जमीन मापने का वीडियो भी सामने आया है।

सत्यप्रकाश दुबे की बेटी शोभिता ने बताया है कि 2014 में उनके चाचा का अपहरण कर लिया गया था और धोखाधड़ी से उनकी जमीन हड़प ली गई थी। उन्होंने बताया कि तभी से प्रेम यादव उनके परिवार को खत्म करना चाहता था। उन्होंने स्थानीय तहसीलदार और SDM पर भी आरोप लगाते हुए कहा कि बार-बार शिकायत के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई। बेटी ने दूसरे पक्ष को माफिया गिरोह बताते हुए माँग की कि माफिया गिरोह के आरोपितों को फाँसी दी जाए, या फिर उनका एनकाउंटर किया जाए।

ग्रामीणों के हवाले से बताया गया है कि प्रेम यादव ने एक सरकारी शिक्षण संस्थान और ग्राम सभा की जमीन तक कब्जा ली और उस पर आलीशान भवन खड़ा कर दिया। जिला पंचायत सदस्य रहते उसने गाँव की एक एकड़ जमीन कब्जा ली थी। गाँव में एक ऐसी जमीन है जो मानस विद्यालय नाम से दर्ज है, लेकिन उस पर कब्ज़ा प्रेम यादव का है। GS स्कूल और खलिहान के नाम से दर्ज जमीन पर भी उसका कब्ज़ा है। वन विभाग, स्कूल और गाँव – तीनों की जमीन पर उसने कब्जे किए।

सब्जी छीली, बर्तन धोए, जूते उठाए… स्वर्ण मंदिर में राहुल गाँधी की ‘सेवा’ से नहीं पसीजा SGPC, पूछा- दादी-पिता के ‘कर्मो’ का प्रायश्वित करने आए हो

कॉन्ग्रेंस नेता राहुल गाँधी के अमृतसर स्वर्ण मंदिर जाने और सेवा देने पर शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (एसजीपीसी) ने खासा एतराज जताया है। भले ही वहाँ उन्होंने महिला श्रद्धालुओं के साथ बैठकर सब्जियाँ छीलीं, श्रद्धालुओं को रोटियाँ परोसी, बर्तन धोए, जोड़ा घर से जूते उठाए, लंगर चखा और मत्था टेका हो। भले ही कुछ सिख विद्वानों ने उनकी सेवा को सराहा, लेकिन एसजीपीसी को उनका ये करना जरा भी रास नहीं आया

एसजीपीसी ने कहा कि उसने दरबार साहिब की यात्रा के दौरान राहुल गाँधी को पूरा सहयोग दिया। हालाँकि एसजीपीसी के महासचिव हरचरण सिंह ग्रेवाल ने उनकी मंशा पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने 1984 का मामला उठाया और कहा कि ये किसी अन्य गैर-सिख राजनेता का यहाँ सबसे लंबा प्रवास है आखिर इसका मकसद क्या है?

दरअसल, कॉन्ग्रेस नेता दो दिनों तक स्वर्ण मंदिर में अपनी सेवा देते रहे। उन्होंने इसे लेकर अपने इंस्टाग्राम पर मंगलवार (3 अक्टूबर, 2023) को तस्वीरे पोस्ट करते हुए लिखा, “आज,अमृतसर में स्वर्ण मंदिर, श्री हरमंदिर साहिब पहुँच कर मत्था टेका और सेवा आरंभ की।” वहाँ से निकलने से पहले उन्होंने अरदास भी की।

‘राहुल की दादी ने अकाल तख्त पर हमला करवाया’

भले अधिकांश सिख संगठन राहुल गाँधी के इस दौरे पर चुप्पी साधे रहे और इसे उनकी निजी और आध्यात्मिक यात्रा कहते रहे हों, लेकिन एसजीपीसी इस सबसे नहीं पसीजा। एसजीपीसी महासचिव हरचरण सिंह ग्रेवाल ने एक बयान में कहा, ”राहुल गाँधी की दादी ने अकाल तख्त पर हमला किया था। उनके पिता ने दिल्ली में सिखों के नरसंहार को जायज ठहराते हुए कहा था कि जब कोई बड़ा पेड़ गिरता है तो धरती काँप उठती है। किसी ने हमारे जख्मों पर मरहम नहीं लगाया। क्या हम उनके इस दौरे को पश्चाताप कह सकते हैं?”

हरचरण सिंह ग्रेवाल ने आगे कहा, “क्या वह (राहुल गाँधी) उन कॉन्ग्रेस नेताओं पर टिप्पणी करेंगे जिन्होंने सिखों का नरसंहार किया और फिर भी वो लोग कॉन्ग्रेस पार्टी की बैठकों में शामिल रहे? प्रियंका गाँधी जेल में उस महिला से मिलने गईं जो उनके पिता की हत्या में शामिल थी, लेकिन वे कभी दिल्ली की विधवा कॉलोनी में नहीं गए। क्यों?” जब तक इन सवालों का जवाब नहीं दिया जाता तब तक कुछ भी हमारे जख्मों का इलाज नहीं कर सकता।”

‘शायद उनको हो पछतावा’

इस बीच, अकाली दल की दिल्ली यूनिट के अध्यक्ष परमजीत सिंह सरना ने गाँधी की इस यात्रा और उनके स्वर्ण मंदिर में उनकी सेवा की तारीफ की। उन्होंने कहा, मैं उनके सद्भाव की इज्जत करता हूँ। एसजीपीसी को ऐसा बयान नहीं देना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि सिखो को इतिहास से भी सीख लेनी चाहिए। जहाँगीर ने गुरु अर्जन देव की हत्या करवाई थी, लेकिन गुरु हरगोबिंद सिंह ने इसके बावजूद उनसे अच्छे रिश्ते रखे।

उन्होंने कहा कि किसी के पूर्वजों की गलतियों के लिए उस पर दोष थोपना सिखों की परंपरा नहीं है। वहीं साल 1984 की राज्य की कार्रवाइयों की कड़ी आलोचना करने वाले लेखक अजमेर सिंह का कहना है, “कॉन्ग्रेस के साथ हमारा वैचारिक टकराव है। वह राजनीति है, लेकिन हमें निंदक नहीं होना चाहिए। एक मानवीय कारक भी है।”

उन्होंने आगे कहा हो सकता है कि राहुल गाँधी को अतीत में जो कुछ हुआ उसका पछतावा हो। एसजीपीसी को उन पर हमला नहीं करना चाहिए था। अगर उन्होंने कोई राजनीतिक बयान दिया होता तो बात अलग होती। शिरोमणि अकाली दल ने भाजपा नेता लाल कृष्ण आडवाणी और अन्य की यात्रा की सुविधा दी थी।

नूहं हिंसा में कॉन्ग्रेस MLA मामन खान को अंतरिम जमानत, रिहाई के बाद जुटी समर्थकों की भारी भीड़: उधर हिन्दुओं की बैठक, पूछा – मोनू मानेसर जेल में क्यों?

जुलाई 2023 के अंत में हरियाणा के नूहं में हुई हिन्दू विरोधी हिंसा के मामले में कॉन्ग्रेस विधायक मामन खान को अंतरिम जमानत मिल गई है। वहीं हिन्दू कार्यकर्ताओं ने उसकी रिहाई का विरोध किया है। फिरोजपुर झिरका से विधायक मामन खान का नाम मेवात के नल्हड़ मंदिर पर हुए हमले और उसके बाद भड़की हिंसा में सामने आया था। मंगलवार (3 अक्टूबर, 2023) को नूहं की अदालत ने उसे 2 मामलों में अंतरिम जमानत दे दी। 18 अक्टूबर को इस पर अगली सुनवाई होगी, तब तक के लिए उसे अंतरिम राहत मिली है।

मामन खान को इसके बाद रिहा कर दिया गया है। एडिशन डिस्ट्रिक्ट एन्ड सेशन जज अजय शर्मा ने उसे अंतरिम जमानत दी। मामन खान को 15 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था। आपको याद होगा कि कैसे मेवात में हिन्दू कार्यकर्ताओं द्वारा निकाली जा रही शोभा यात्रा पर हमला किया गया था। पत्थरबाजी से वारदात शुरू हुई और बाद में भीड़ अस्पताल तक में घुस गई। सोहना, गुरुग्राम, फरीदाबाद और पलवल तक में हिंसा फ़ैल गई थी। मेवात में ‘लव जिहाद’ की कई घटनाएँ भी सामने आती रही हैं।

अब गोरक्षक मोनू यादव के गाँव मानेसर में मामन खान की रिहाई के आदेश के बाद हिन्दुओं की पंचायत बैठी। गाँव स्थित भीष्म मंदिर में ये बैठक हुई। बता दें कि राजस्थान में नासिर-जुनैद हत्याकांड में मोनू यादव का नाम आया था, जिसके बाद हरियाणा पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर के राजस्थान पुलिस को सौंप दिया। 7 अक्टूबर को दोबारा हिन्दू कार्यकर्ताओं की बैठक होगी और आगे की रणनीति तय की जाएगी। उन्होंने पूछा कि जब कॉन्ग्रेस विधायक मामन खान को जमानत मिल सकती है तो फिर मोनू मानेसर को क्यों नहीं?

अंतरिम जमानत के बाद मामन खान अपने समर्थकों के साथ कॉन्ग्रेस नेता आफताब अहमद के आवास पर पहुँचा। कुछ दिनों पहले VHP की बैठक में इमरान नाम का एक संदिग्ध युवक मिला था, जिसके बाद पत्रकारों और बाहरी लोगों को बैठक में एंट्री नहीं दी जा रही है। पटौदी पुलिस भी एक मामले को लेकर मोनू मानेसर को राजस्थान से लाने की जुगत में लगी है। वहीं अब नूहं हिंसा में मामन खान की रिहाई के बाद ये सवाल भी उठ रहा है कि इतनी बड़ी घटना होने के बावजूद उसके साथ नरमी क्यों बरती जा रही है?

‘रामसेतु को विरासत घोषित कर उस पर बनाई जाए दीवार’: सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की याचिका, सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका में टैग से भी इनकार

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (3 अक्टूबर 2023) को रामसेतु के समुद्र वाले हिस्से में कुछ किलोमीटर तक दीवार बनाने की माँग वाली याचिका को खारिज कर दिया है। याचिकाकर्ता ने इसके पीछे तर्क दिया था कि इससे लोग वहाँ जाकर ‘दर्शन’ कर सकेंगे। इसके साथ ही याचिका में राम सेतु को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की भी प्रार्थना की गई है।

इस मामले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस सुधांशु धूलिया की पीठ इस याचिका को खारिज कर दिया। पीठ ने साफ शब्दों में कहा कि यह एक प्रशासनिक मामला है और याचिकाकर्ता को इसके बजाय सरकार से संपर्क करना चाहिए।

याचिकाकर्ता अशोक पांडे ने अपनी याचिका में पीठ से अनुरोध किया था कि उनकी याचिका को सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका के साथ टैग किया जाए। दरअसल, स्वामी ने ‘राम सेतु’ को राष्ट्रीय विरासत का दर्जा देने की माँग की है, जो कि लंबित है। स्वामी ने सुप्रीम कोर्ट को कहा था कि इसे राष्ट्रीय विरासत का दर्जा देने की प्रक्रिया जारी है।

याचिकाकर्ता से जस्टिस कौल ने सवाल किया कि इस मसले पर सुब्रमण्यम स्वामी की एक याचिका लंबित है। उन्होंने कहा कि अगर एक याचिका लंबित है तो एक और याचिका की क्या आवश्यकता क्या है। उन्होंने याचिकाकर्ता पांडे से पूछा, “आप क्या चाहते हैं? अदालत दीवार बनाने का निर्देश कैसे दे सकती है? ये प्रशासनिक मामले हैं।”

इसके बाद याचिकाकर्ता ने अदालत से अनुरोध किया कि इस याचिका को सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका के साथ टैग कर दिया जाए। इस पर जज ने कहा, “नहीं, हम इसे नहीं जोड़ रहे हैं… हम याचिकाकर्ता द्वारा माँगे गए किसी भी निर्देश देने के लिए भारत के संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत हस्तक्षेप करने के इच्छुक नहीं हैं। खारिज की जाती है।”

बता दें कि इस बिंदु पर सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका कोर्ट में लंबित है। उस याचिका पर केंद्र सरकार (Central Government) ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) को बताया था कि इस ऐतिहासिक धरोहर को राष्ट्रीय विरासत स्मारक घोषित करने की प्रक्रिया संस्कृति मंत्रालय में चल रही है।

अशोक पांडे की याचिका पर मार्च 2023 में सुनवाई हुई थी। याचिका में यह भी कहा गया था कि रामसेतु पर दीवार बनाए जाने से करोड़ों लोगों की इच्छा पूरी होगी। वे उस ऐतिहासिक और पौराणिक पुल पर चल सकेंगे, जिस पर चलकर भगवान राम अपनी सेना के साथ लंका गए गए थे और वहाँ जाकर जाकर अत्याचारी रावण को मारकर राम राज्य की स्थापना की थी।

सुप्रीम कोर्ट ने बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी को कहा था कि अगर उनके पास इससे संबंधित कोई अन्य दस्तावेज या सामग्री है तो वो संस्कृति मंत्रालय को दे सकते हैं। कोर्ट ने यह भी कहा था कि स्वामी चाहें तो मंत्रालय के समक्ष अतिरिक्त बातें रख सकते हैं। इस पर स्वामी था ने कहा कि वे अपनी बातें रख चुके हैं।

बता दें कि भाजपा के पूर्व राज्यसभा सांसद सु्ब्रमण्यम स्वामी (Subramaniyan Swamy) ने रामसेतु को ऐतिहासिक स्मारक के रूप में मान्यता देने की माँग वाली याचिका दाखिल की थी। इसके बाद उन्होंने साल 2020 में इस याचिका पर जल्द सुनवाई की माँग की थी।

इससे पहले केंद्र सरकार ने 12 जनवरी 2023 को सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि स्वामी की याचिका पर वह फरवरी के पहले सप्ताह में जवाब दाखिल करेगी। जस्टिस चंद्रचूड़ और जस्टिस पीएस नरसिम्हा ने सुनवाई फरवरी के दूसरे सप्ताह में करने की बात कही थी। हालाँकि, मामले को गुरुवार (19 जनवरी 2023) को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर लिया गया।

भाजपा नेता ने स्वामी ने कहा कि वह मुकदमे का पहला दौर उसी समय जीत चुके थे, जब केंद्र सरकार ने रामसेतु के अस्तित्व को स्वीकार किया था। उन्होंने कहा कि उनकी माँग पर विचार करने के लिए 2017 में बैठक संबंधित मंत्री ने बैठक बुलाई थी, लेकिन कुछ नहीं हुआ।

बता दें कि सुब्रह्मण्यम स्वामी ने इससे पहले की कॉन्ग्रेस की अगुवाई वाली यूपीए सरकार के पहले कार्यकाल में सेतुसमुद्रम पोतमार्ग परियोजना के खिलाफ जनहित याचिका दायर किया था। यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुँचा और उसके बाद साल 2007 मे इस परियोजना पर रोक लगा दी।

गाँव, स्कूल, वन विभाग – सबकी जमीन पर प्रेम यादव का कब्ज़ा, वहीं दूसरों की गाड़ी चला कर परिवार चलाते थे सत्यप्रकाश दुबे: MLA बोले – देवरिया नरसंहार भू-माफिया बनाम गरीब

उत्तर प्रदेश के देवरिया में एक ही परिवार के 5 लोगों की हत्या कर दी गई, जिनमें 3 बच्चे थे। एक व्यक्ति की हत्या का बदला लेने के लिए ये सब किया गया। प्रेम यादव का शव मिलने के बाद उसके परिजनों समर्थकों ने मिल कर सत्य प्रकाश दुबे के घर पर हमला कर दिया गया। सत्य प्रकाश दुबे, उनकी पत्नी, 2 बेटियाँ और एक बेटे को मार डाला गया। अब देवरिया के विधायक शलभ मणि त्रिपाठी ने कहा है कि ये भू-माफिया बनाम एक गरीब परिवार की लड़ाई है। उन्होंने इसके सबूत के रूप में स्थानीय अख़बारों की कतरनें भी शेयर की।

सत्यप्रकाश दुबे के बेटे ने बताया है कि प्रेम यादव उनके घर आकर धमकी दे रहा था, फिर वो मारपीट करने लगा। उसने ये भी बताया कि प्रेम यादव ने उसकी बहन के साथ भी बदतमीजी की। वो थप्पड़ चलने लगे। उसने बताया कि उनके पिता को भीड़ ने घेर लिया और फिर हत्या की गई। प्रेम यादव के ज़िंदा बचे 2 बेटों में से बड़े वाले ने अपना दुःख बयाँ करते हुए कहा कि भीड़ ने सबके सामने उनके पिता को मार डाला। सोशल मीडिया में भी इस घटना को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है।

जर्जर घर, ऊपर से मुकदमे: सत्यप्रकाश दुबे का परिवार था गरीब

इनमें से एक खबर ‘हिंदुस्तान’ की है, जिसमें बताया गया है कि सत्यप्रकाश दुबे का परिवार आर्थिक रूप से कमजोर था। सत्यप्रकाश दुबे परिवार के भरण-पोषण के लिए प्राइवेट वाहन चलाया करते थे। उनकी बेटी प्राइवेट स्कूल में पढ़ाती थी, ताकि परिवार के खर्चों में पिता का सहयोग कर सके। वहीं एक बेटा एक दुकान में काम करता था। दूसरा बेटा देवरिया में शास्त्री की पढ़ाई के साथ-साथ धार्मिक अनुष्ठान कर के अपना खर्च चलाता था। ऊपर से मुकदमों के कारण परिवार परेशान रहता था।

गरीबी का आलम ये था कि दुबे परिवार का घर भी जर्जर स्थिति में था। घर में से जब एक के बाद एक कर के 5 शव निकाले गए, तो लोगों ने घर की हालत देखी। सत्यप्रकाश दुबे और उनकी पत्नी किरण के 6 बच्चे थे – शोभिता, देवेश, सलोनी, नंदिनी, गाँधी और अनमोल थे। इनमें से सलोनी, नंदिनी और गाँधी को मार डाला गया। गाँधी जयंती के दिन जन्म होने के कारण एक बेटे का नाम गाँधी रखा गया था, और उसकी हत्या भी गाँधी जयंती के दिन ही कर दी गई।

सत्यप्रकाश दुबे के घर की ये स्थिति थी कि बरसात में सिर ढँकने के लिए भी आफत आ जाती थी। एक शेड में पूरा परिवार रहता था। शोभिता की जहाँ शादी हो गई थी, वहीं देवेश सबसे बड़ा बेटा था जो शास्त्री की पढ़ाई कर रहा था। सलोनी गाँव में ही एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ाती थी। गाँधी पकड़ी बाजार स्थित इलेक्ट्रॉनिक्स की दुकान में काम करता था। देवेश इसीलिए बच गए, क्योंकि हमले के वक्त वो एक अनुष्ठान कार्यक्रम के लिए बलिया गए हुए थे।

प्रेम यादव का सपा कनेक्शन, भू-माफिया होने के आरोप

वहीं एक अन्य अख़बार के स्थानीय संस्करण में प्रेम यादव के बारे में भी बताया गया है कि कैसे उसका समाजवादी पार्टी से कनेक्शन था। जमीन की खरीद-फरोख्त को लेकर प्रेम यादव अक्सर विवादों में रहता था। जमीं पर कब्जे के लिए वो धन और सियासी बल का इस्तेमाल करता था। कई महँगी जमीनों को दबंगई के जरिए कम दाम में खरीदने के आरोप उस पर लगे हैं। रुद्रपुर मोड़ पर उसने 3 कट्ठा विवादित जमीन खरीदी थी, उसे लेकर भी पंचायत बैठी थी।

ग्रामीणों के हवाले से बताया गया है कि प्रेम यादव ने एक सरकारी शिक्षण संस्थान और ग्राम सभा की जमीन तक कब्जा ली और उस पर आलीशान भवन खड़ा कर दिया। जिला पंचायत सदस्य रहते उसने गाँव की एक एकड़ जमीन कब्जा ली थी। गाँव में एक ऐसी जमीन है जो मानस विद्यालय नाम से दर्ज है, लेकिन उस पर कब्ज़ा प्रेम यादव का है। GS स्कूल और खलिहान के नाम से दर्ज जमीन पर भी उसका कब्ज़ा है। वन विभाग, स्कूल और गाँव – तीनों की जमीन पर उसने कब्जे किए।

ये भी आरोप लगा है कि राजस्व विभाग के कर्मचारियों की मिलीभगत से वो इन करतूतों को अंजाम देता था। ग्राम प्रधान प्रतिनिधि रामाशीष निषाद ने कहा कि राजस्व विभाग में कई बार आवेदन दिए जाने के बावजूद कब्जा हटाने की कार्रवाई नहीं हुई। फतेहपुर गाँव में रहने वाले प्रेम यादव की माँ भी ग्राम प्रधान रह चुकी थीं। सत्यप्रकाश दुबे के भाई ज्ञानप्रकाश का कोई परिवार नहीं था, ऐसे में उन्हें अपने साथ रख कर उसने उनकी जमीन भी अपने नाम करा ली थी।

इन खबरों पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा विधायक शलभ मणि त्रिपाठी ने कहा, “ग्राउंड ज़ीरो से सैकड़ों मील दूर बैठे जो लोग देवरिया की घटना का आकलन अपने अपने हिसाब से कर रहे है, उनके लिए प्रस्तुत है स्थानीय अखबारो की ये खबरें। ये जंग भूमाफ़िया बनाम एक बेहद गरीब परिवार की है, लिहाज़ा इंसाफ की जंग हर हाल में लड़ी जाएगी।” उन्होंने सत्यप्रकाश दुबे के घर जाकर उनके बेटे से मुलाकात की और स्थानीय लोगों से इस घटना के बारे में जाना, साथ ही सहयोग का आश्वासन दिया।

असम में बाल विवाह के खिलाफ हिमंता सरकार का एक्शन जारी, दूसरे चरण में 1039 गिरफ्तार: पहले फेज में पकड़े गए लोगों में 63% मुस्लिम

असम की हिमंता सरकार द्वारा बाल विवाह के खिलाफ चलाए गए एक बड़े अभियान में 1039 लोगों को गिरफ्तार किया गया। पूरे राज्य में बाल विवाह के खिलाफ दूसरे चरण का ये अभियान मंगलवार (3 अक्टूबर, 2023) की सुबह चलाया गया। आगे भी इस अभियान के जारी रहने की खबर सामने आई है।

इस बीच राज्य के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने गिरफ्तारियों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई है। बता दें कि इस साल फरवरी में भी असम सरकार ने राज्य में बाल विवाह के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई शुरू की थी। इसमें एक महीने में 3141 लोगों को गिरफ्तार किया गया था।

पंचायत सचिव सहित कई सोर्स से ली जानकारी

पिछली कार्रवाई में गिरफ्तार लोगों के रिकॉर्ड के इंडियन एक्सप्रेस के विश्लेषण से पता चला था कि गिरफ्तार किए गए लोगों में से 62.24 फीसदी मुस्लिम थे, जबकि बाकी हिंदू या अन्य समुदाय के लोग थे।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, दूसरे चरण में राज्य भर में 916 लोगों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस का कहना है कि इस अभियान के तहत 706 एफआईआर दर्ज की गई हैं और 1,041 लोग आरोपित हैं।

गिरफ्तार लोगों में 551 पुरुषों पर कम उम्र की लड़कियों से शादी करने का आरोप है। वहीं 351 पति या पत्नी के रिश्तेदार हैं। इसके साथ ही 14 मौलवी आदि हैं जिन्होंने ये शादी करवाई थी।

अब तक 35 पुलिस जिलों में से 31 में गिरफ्तारियाँ हुई हैं। कामरूप (मेट्रो) के तहत आने वाले गुवाहाटी शहर में सबसे ज्यादा गिरफ्तारियाँ हुई हैं। इसके बाद धुबरी में 192 और बारपेटा जिले में 142 में लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

इन जिलों के बाद हैलाकांडी 59, कामरूप में 50 और करीमगंज 47 लोगों को पकड़ा गया। बारपेटा के पुलिस अधीक्षक अमिताव सिन्हा ने कहा कि जिले में गिरफ्तार किए गए सभी 142 लोगों को रात के दौरान उठाया गया था।

उन्होंने आगे कहा, “हमने कई सोर्स से जानकारी इकट्ठा की थी। इसमें पिछले अभियान के दौरान बाल विवाह निषेध अधिकारी के रूप में नियुक्त पंचायत सचिव भी शामिल थे। उसके बाद ही गिरफ्तारियाँ शुरू की गईं।”

सीएम सरमा की जीरो टॉलरेंस पॉलिसी

गौरतलब है कि सीएम सरमा की किसी भी सामाजिक बुराई के खिलाफ जीरो टॉलरेंस पॉलिसी के ऐलान के बाद ही असम सरकार ने बाल विवाह के खिलाफ एक्शन शुरू किया। इस साल की शुरुआत में असम सरकार ने फरवरी में बाल विवाह के खिलाफ इस अभियान का पहला चरण चलाया था। तब उन्होंने प्रजनन और बाल स्वास्थ्य (आरसीएच) पोर्टल का हवाला देते हुए कहा था कि बीते साल असम में 6.2 लाख से अधिक गर्भवती महिलाओं में से लगभग 17 फीसदी किशोरियाँ थीं।

दरअसल, राज्य सरकार ने बाल विवाह के “पीड़ितों” के पुनर्वास पर एक कैबिनेट उप-समिति का गठन किया है। इसमें सीएम सरमा के कैबिनेट सहयोगियों रानोज पेगु, केशब महंत और अजंता नियोग को पैनल का सदस्य बनाया था। वहीं अब विपक्ष के नेता देबब्रत सैकिया ने इस अभियान की आलोचना करते हुए कहा कि हम पुलिस बल के जरिए बाल विवाह नहीं रोक सकते हैं।

बाल विवाह करने वालों के खिलाफ की गई कार्रवाई पर 11 सितंबर को ही राज्य के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने असम विधानसभा में बताया था कि बीते 5 साल में बाल विवाह से जुड़े मामलों में कुल 3907 गिरफ्तारियाँ की गईं।

इसमें से 3319 के खिलाफ यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) एक्ट 2012 के तहत आरोप तय किए गए थे। हालाँकि, अदालत ने बाल विवाह निषेध अधिनियम-2006 के तहत अब तक केवल 62 लोगों को दोषी ठहराया है।

चीन के जाल में फँसकर मर गए चीन के ही 55 नौसैनिक, पनडुब्बी में दम घुटने से हुई सबकी मौत: रिपोर्ट में बताया- अमेरिकी सबमरीन के लिए डाला था फंदा

अपनी ही जाल में फँसकर चीन के 55 नौसैनिकों के मारे जाने की आशंका है। चीन के नौसैनिकों की मौत परमाणु संपन्न पनडुब्बी के अंदर ऑक्सीजन खत्म होने के बाद दम घुटने से हुई है। यह दावा समाचारपत्र ‘द मिरर’ ने ब्रिटिश खुफिया रिपोर्ट के हवाले से किया है।

मिरर में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, चीन की एक पनडुब्बी अपनी नौसेना द्वारा बनाए गए एक जाल में फँस गई। यह जाल अमेरिकी और ब्रिटिश जहाज़ों को फँसाने के लिए बुना गया था। यह घटना अगस्त की है। यह सारे दावे मिरर ने एक ब्रिटिश खुफिया रिपोर्ट के माध्यम से किए हैं।

जिन नौसैनिकों के मरने की आशंका जताई जा रही है, वे पनडुब्बी 093-417 पर तैनात थे। यह पनडुब्बी घटना के दौरान पीले सागर में थी। इस पनडुब्बी के समस्या में फँसने और इस पर तैनात नौसैनिकों के मरने की खबर को चीन की सरकार ने नकार दिया है।

ब्रिटिश रिपोर्ट में लिखा गया है, “21 अगस्त 2023 को स्थानीय समय सुबह 8:12 बजे इस पनडुब्बी में एक दुर्घटना हुई। उस समय वह पीले सागर में अपने मिशन पर थी। इस घटना में 55 नौसैनिकों की मृत्यु हुई है। इन नौसैनिकों में 22 ऑफिसर, 7 कैडेट ऑफिसर, 9 पेटी ऑफिसर और 17 नाविक थे।”

रिपोर्ट में आगे बताया गया है, “जिन नौसैनिकों की मृत्यु हुई है, उनमें इस पनडुब्बी के कप्तान जू-योंग-पेंग भी शामिल हैं। हमारा मानना है कि पनडुब्बी में ऑक्सीजन की कमी हो गई, जिससे उन सबकी मौत हो गई। पनडुब्बी जहाज रोकने के लंगर और चेन से टकरा गई, जिससे इसके कई सिस्टम खराब हो गए और इन्हें बनाने में 6 घंटे से अधिक लगे। इसी के कारण पनडुब्बी में अंदर जहरीली हवा फ़ैल गई और लोगों की मौत हो गई।”

जिस पनडुब्बी पर यह दुर्घटना हुई वह 093 टाइप की पनडुब्बी थी। इस पनडुब्बी के चलने पर काफी कम शोर होता है, जिससे दुश्मन आसानी से इन्हें पकड़ नहीं पाते। यह पनडुब्बी चीनी नौसेना के आधुनिकीकरण का हिस्सा है। यह परमाणु ईंधन से चलती है।

यदि यह खबर सही साबित होती है तो यह बीते वर्षों में हुए भीषण सैन्य हादसों में से एक होगा। हालाँकि, चीन ने इस रिपोर्ट को एकदम निराधार बताया है और ऐसी किसी भी घटना से इंकार किया है। ब्रिटिश ख़ुफ़िया एजेंसी ने भी इस रिपोर्ट पर कोई भी टिप्पणी करने से इंकार किया है।

जाति गिनने वाले बिहार से कमाने पंजाब आए सुशील मंडल, फिर भी पेट भरने को पड़े लाले तो तीन बेटियों को दूध में जहर देकर मार डाला

पंजाब के जालंधर से दिल दहलाने वाली खबर सामने आई है। जालंधर के कानपुर में बिहार के कटिहार से आया एक दंपती अपने 5 बच्चों, जिसमें 4 बेटियाँ और एक बेटा था, के साथ रहता था। इस दंपती ने अपनी तीन बड़ी बेटियों को जहर मिला दूध पिला दिया और उन्हें बक्से में बंद कर दिया। तीनों बच्चियों की तड़प कर मौत हो गई। इस मामले में पुलिस ने आरोपित माता-पिता को गिरफ्तार कर लिया है।

बिहार के कटिहार का रहने वाला है आरोपित

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जालंधर के कानपुर में सुशील मंडल अपने परिवार के साथ रहता था। वो बिहार के कटिहार जिले के पोठिया ओपी क्षेत्र में आने वाले डुमर पंचायत का निवासी था और जालंधर में चार साल से मजदूरी करता था। सुशील शराब पीने का आदी था और कमाई कम थी। इस वजह से उसने अपनी तीन बड़ी बेटियों को पत्नी के साथ मिलकर मार डाला, क्योंकि वो पाँचों बच्चों का पालन-पोषण नहीं कर पा रहा था। मरने वाली बच्चियों के नाम अमृता कुमारी (9 वर्ष), साक्षी (7 वर्ष) और कंचन (4 वर्ष) थी।

पुलिस ने जाँच के बाद किया गिरफ्तार

जानकारी के मुताबिक, सुशील और उसकी पत्नी मंजू देवी ने अपने बचाव में बच्चियों के अगवा होने की झूठी कहानी रची, मगर ये पुलिस के आगे अधिक देर तक टिक नहीं सकी। जालंधर के एसएसपी (ग्रामीण) मुखविंदर सिंह भुल्लर और एसपी मनप्रीत सिंह ढिल्लों ने इस मामले में मीडिया से बातचीत की और बताया कि सूचना पाकर डीएसपी बलवीर सिंह अपनी टीम के साथ मौके पर पहुँचे थे। उन्होंने शुरूआती जाँच के बाद हत्यारोपी सुशील मंडल और उसकी पत्नी मंजू देवी को गिरफ्तार कर लिया।

रविवार सुबह जहरीला दूध पिलाया

एसएसपी ने बताया कि आरोपित सुशील मंडल शराब का आदी था। उसने रविवार की सुबह करीब साढ़े सात बजे बच्चियों को जहरीला दूध पिलाकर बक्से में बंद कर दिया और खुद काम पर चला गया। इसमें उसकी पत्नी मंजू देवी ने भी साथ दिया। वो सोमवार को घर छोड़कर भागने वाले थे, लेकिन बक्से की वजह से फँस गए। उन्होंने कहा कि दंपती के बाकी बचे दोनों बच्चों अनुष्का (2 वर्ष) और एक साल के बेटे शनि को चाइल्ड केयर होम भेजा जाएगा।