दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के मंगलवार (3 अक्टूबर,2023) को न्यूज़क्लिक के संस्थापक और संपादक प्रबीर पुरकायस्थ और एचआर प्रमुख अमित चक्रवर्ती की गिरफ्तारी ने इस मामले को सुर्खियों में ला दिया है। इसके बाद दोनों को बुधवार (4 अक्टूबर, 2023) को दिल्ली की एक अदालत ने सात दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है।
दिल्ली पुलिस ने कहा कि न्यूज़क्लिक के फाउंडर पुरकायस्थ को इस बात के सबूत मिलने के बाद गिरफ्तार किया गया कि उनके ऑनलाइन न्यूज पोर्टल ने यह दिखाने के लिए “वैश्विक एजेंडा” चलाया कि अरुणाचल प्रदेश और कश्मीर भारत का हिस्सा नहीं हैं। पुलिस के मुताबिक, प्रबीर पुरकायस्थ और अमित चक्रवर्ती को उक्त नक्शा बनाने के लिए 115 करोड़ रुपए से अधिक की विदेशी फंडिंग मिली थी।
दिल्ली पुलिस ने पटियाला हाउस कोर्ट में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश हरदीप कौर के सामने दोनों को हिरासत में लेकर पूछताछ करने के लिए अपनी दलीलें रखीं। पुलिस ने कोर्ट को हिरासत में रखने की वजहों में पूरी साजिश का खुलासा करने, डिजिटल डिवाइसेज से निकाले गए सबूतों पर आरोपितों से पूछताछ करने, पीपीके न्यूज़क्लिक कार्यालय में तलाशी पूरी करने और आपत्तिजनक ईमेल सामग्री के बारे में आरोपितों से तहकीकात करने की जरूरतों को गिनाया। गौरतलब है कि पुलिस ने शुरू में दोनों आरोपितों के लिए 15 दिन के लिए पुलिस हिरासत की माँग की थी।
रिमांड नोट क्या कहता है?
पुलिस के कोर्ट को सौंपे गए रिमांड नोट में खास तौर से साल 2019 के आम चुनावों को नाकाम करने की साजिश से लेकर भारत के बिगड़े नक्शे के प्रसार तक कई आरोप इसमें लगाए गए हैं। स्पेशल सेल का आरोप है कि पुरकायस्थ और अन्य को भारत में असंतोष फैलाने के लिए पैसा मिला।
रिमांड नोट में जिक्र किया गया है कि प्रबीर पुरकायस्थ, नेविल रॉय सिंघम और सिंघम के स्वामित्व वाली शंघाई की कंपनी स्टारस्ट्रीम के कुछ अन्य चीनी कर्मचारियों के बीच ईमेल का लेन-देन हुआ है, जो कश्मीर और अरुणाचल प्रदेश को भारत के हिस्से के तौर पर न दिखाने के उनके इरादे को उजागर करता है। इन लोगों ने वैश्विक और घरेलू स्तर पर यह कहानी फैलाने की साजिश रची कि कश्मीर और अरुणाचल प्रदेश विवादित क्षेत्र है।
रिमांड नोट्स में कहा गया है कि भारत की उत्तरी सीमाओं के साथ छेड़छाड़ करने और नक्शों में कश्मीर और अरुणाचल प्रदेश को भारत के हिस्सों के रूप में न दिखाने की उनकी कोशिश भारत की एकता और क्षेत्रीय अखंडता को कमजोर करने के इरादे से किया गया काम है। इसमें इस बात का भी जिक्र है कि प्रबीर पुरकायस्थ ने 2019 के आम चुनावों के दौरान चुनावी प्रक्रिया को बाधित करने के लिए पीपुल्स अलायंस फॉर डेमोक्रेसी एंड सेक्युलरिज्म (पीएडीएस) नामक एक समूह के साथ मिलकर साजिश रची थी।
दिल्ली सेल ने आगे आरोप लगाया कि पीएडीएस का इस्तेमाल साजिश के तहत अवैध तौर से भेजे गए विदेशी फंड के करोड़ों रुपए के बदले में पेड न्यूज के जरिए झूठी बातें फैलाने के लिए किया गया था। स्पेशल सेल ने रिमांड नोट में ये भी जिक्र किया है, “कोविड-19 महामारी को रोकने के लिए भारत सरकार के कोशिशों को बदनाम करने के लिए भी एक झूठी कहानी फैलाई गई है।”
स्पेशल सेल ने अपने रिमांड नोट में कहा, “यह पता चला है कि साल 2018 में पीपीके न्यूज़क्लिक स्टूडियो प्राइवेट लिमिटेड के स्थापित होने के बाद से ही गौतम नवलखा इसके शेयरधारक रहे हैं। नवलखा प्रतिबंधित नक्सलियों का समर्थन करने जैसी भारत विरोधी और गैरकानूनी गतिविधियों में सक्रिय तौर से शामिल रहे। उनकी पाकिस्तान के आईएसआई एजेंट गुलाम नबी फाई के साथ देश-विरोधी साँठगाँठ है। यह भी पता चला कि गौतम नवलखा और पुरकायस्थ ने 1991 में सागरिक प्रोसेस एनालिस्ट प्राइवेट लिमिटेड बनाई थी। उस वक्त से ही दोनों जुड़े हुए हैं।
रिमांड नोट में आगे कहा, “जाँच के दौरान यह भी जानकारी मिली कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी 14 अगस्त 2023 को नंबर एफ.नंबर: ईसीआईआर/14/एचआईयू/2020 के तहत पीपीके न्यूजक्लिक स्टूडियो प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ केस दर्ज किया था। इस जाँच के दौरान ईडी ने मौजूदा एफआईआर में नामित संदिग्धों से जुड़े पीपीके के इलेक्ट्रॉनिक गैजेट जब्त कर लिए थे। इनसे निकाला गया डेटा पांच हार्ड डिस्क में लिया गया था और उसका विश्लेषण किया गया था। इस डेटा में प्रबीर पुरकायस्थ,अमित चक्रवर्ती और अन्य संदिग्धों के ईमेल डंप में कुल 4.27 लाख ईमेल हैं। इसमें कथित कंपनी और कथित संदिग्धों से संबंधित बड़ी संख्या में दस्तावेज़ भी शामिल हैं।”
न्यूज क्लिक पर हुई छापेमारी
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने यह भी बताया कि आरोपितों ने अवैध विदेशी फंडिंग के जरिए से किसानों के विरोध को लंबा खींचकर सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुँचाने और नष्ट करने की साजिश रची है।
दरअसल, प्रबीर पुरकायस्थ को न्यूज़क्लिक के एचआर हेड अमित चक्रवर्ती की गिरफ्तारी पुलिस के न्यूज़क्लिक परिसर और न्यूज़ पोर्टल से जुड़े कई पत्रकारों और कर्मचारियों के घरों पर छापेमारी के बाद हुई। दिल्ली पुलिस ने दोनों को 3 अक्टूबर को गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत गिरफ्तार किया था। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने इस मामले में 17 अगस्त को न्यूज पोर्टल के खिलाफ यूएपीए की धारा 13, 16, 17, 18, 22 और भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 153 ए और 120 बी के तहत एफआईआर दर्ज की थी।
गौरतलब है कि भारत के खिलाफ चीनी प्रोपेगेंडा के लिए चीन से विदेशी फंडिंग के मामले में दिल्ली पुलिस ने 3 अक्टूबर को न्यूज़क्लिक ऑफिस पर छापा मार कर उसे सील कर दिया था। न्यूज़क्लिक से जुड़े स्थानों के अलावा इस समाचार पोर्टल से जुड़े देश भर में 40 पत्रकारों के आवासों पर भी दिल्ली पुलिस ने छापा मारा था। इनमें तीस्ता सीतलवाड, अभिसार शर्मा, परंजॉय गुहा ठाकुरता, सीपीआई (एम) नेता सीताराम येचुरी, संजय राजौरा और अन्य शामिल थे।
महाराष्ट्र के पुणे में विश्व हिंदू परिषद (विहिप) और बजरंग दल के कई सदस्य मंगलवार (3 अक्टूबर, 2023) को उन मुस्लिम गुंडों के खिलाफ केस दर्ज कराने के लिए मंचर पुलिस स्टेशन में इकट्ठे हुए थे। दरअसल, इन लोगों ने शुक्रवार (29 सितंबर, 2023) की रात को स्थानीय बजरंग दल कार्यकर्ता सूरज चक्रधर धरम के घर पर हमला किया था। हालाँकि, अब इस मामले में पुलिस ने मंचर शहर को शांतिपूर्ण बताया है।
बता दें कि यह हमला 28 सितंबर, 2023 को मंचर में गणपति विसर्जन जुलूस के दौरान मुस्लिमों और हिंदुओं के बीच हुई एक छोटी सी झड़प के बाद हुआ था। इस मामले में हाथापाई शांत होने के बाद भी मुस्लिम भीड़ ने बजरंग दल कार्यकर्ता चक्रधर धरम के घर पर हमला किया था, जबकि इस हमले से एक दिन पहले ही दोनों पक्षों ने समझौता कर लिया था। घर पर चक्रधर के न मिलने पर उनके घर की महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार किया गया और जान से मारने की धमकी दी गई।
इस मामले में यह बात भी सामने आई है कि पुलिस प्रशासन पीड़ित कार्यकर्ता और उनकी माँ की शिकायत पर आरोपितों के खिलाफ केस दर्ज करने में देरी कर रहा था। इसके बाद बजरंग दल कार्यकर्ता और विश्व हिंदू परिषद के सदस्य मिलकर पुलिस स्टेशन पहुँचे। तब कई घंटों की मशक्कत के बाद पुलिस ये मानने को तैयार हुई कि गलती हमलावर मुस्लिम भीड़ की थी।
थाने में शाम से शुरू हुई ये मशक्कत रात करीब 12 से 12:30 बजे तक चलती रही थी। इसके बाद मामले की गंभीरता को महसूस करते हुए मुस्लिमों ने सूरज धरम, उनकी माँ और परिवार के अन्य सदस्यों से बगैर शर्त माफी माँगी। यहीं नहीं उन्होंने एक लिखित माफीनामा भी दिया। इसमें कहा गया कि वे भविष्य में किसी भी तरह से हिंदू युवाओं को नुकसान नहीं पहुँचाएँगे।
मंचर में बजरंग दल और विहिप ने संभाला मोर्चा
इस मामले में पुणे और मंचर के विहिप और बजरंग दल की सक्रियता पीड़ित परिवार के लिए बेहद फायदेमंद साबित हुई। इनमें पुणे जिला के वीएचपी प्रमुख संतोष खामकर, विहिप संचार प्रमुख गणेश राऊत सहित मंचर के बजरंग दल के ब्लाक प्रमुख अक्षय जगदाले, मंचर शहर के बजरंग दल प्रमुख चिन्मय महाजन, वरिष्ठ हिंदू कार्यकर्ता चेतन और महेश थोराट का अहम योगदान रहा। ये लोग सूरज चक्रधर धरम को साथ लेकर अन्य सैकड़ों हिंदू युवाओं के साथ 3 अक्टूबर की शाम को हमलावरों के खिलाफ मामला दर्ज करने के लिए मंचर पुलिस स्टेशन गए।
सूरज की माँ ने शिकायत में कई आरोपितों का जिक्र किया था। इनमें रियाज जमादार, इसरार शाहबाज खान पठान, आजम मोमिन, कय्यूम पठान, मीरान अनीस इनामदार, आकिब रहमान अत्तार, अमन रहमान अत्तार, मोहम्मद सरताज अली जमादार, तरबेज मुख्तार कुरेशी, दानिश सिराज मोमिन, तौकीर मोहम्मद मतीन जमादार, अदनान मोहम्मद, जावेद शेख, मोहम्मद साबिर रिजवान अली सैयद, इरफान तहजान मंडल, अजहर सिराज मोमिन, अतीक वसीम इनामदार, उजेफ वसीम इनामदार, आसिफ खान, जिया अहमद इम्तियाज जमादार, रेहान रिजवान इनामदार, शाहबाज अली इनामदार, सकलैन सरफराज इनामदार, और मोहम्मद फ़ज़ल शेख सहित कई पर हमले का आरोप लगाया गया था।
मंचर पुलिस शुरू में नहीं करना चाहती थी FIR दर्ज
मंचर पुलिस स्टेशन में तैनात एपीआई बलवंत मांडगे ने शुरू में सोमवार (2 अक्टूबर, 2023) को आरोपितों के खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं किया। उन्होंने साफ तौर से सूरज की माँ के अनुरोध को यह कहते हुए नजरअंदाज कर दिया कि गणपति विसर्जन के मौके पर हुई हाथापाई का उसी दिन निपटारा कर दिया गया था। जब ऑपइंडिया ने पुलिस स्टेशन से इस बारे में जानना चाहा कि एफआईआर दर्ज क्यों नहीं की गई, तो वहाँ के पुलिसकर्मियों ने कहा कि अधिकारी ही इस बारे में साफ बता पाएँगे।
हालाँकि, इस मामले में यह बात पूरी तरह से नजरअंदाज कर दी गई कि कथित समझौते के एक दिन बाद कैसे इस हमले को अंजाम दिया गया। यही वजह रही कि 3 अक्टूबर को हिंदू कार्यकर्ता सूरज को लेकर थाने पहुँचे थे। वहीं हिंदू कार्यकर्ताओं के पुलिस स्टेशन पहुँने पर शहर के कई मुस्लिम नेताओं को भी बुलाया गया। इस वजह से पुलिस स्टेशन में लोगों की एक अच्छी खासी भीड़ जमा हो गई थी।
दोनों पक्षों की बात सुनकर पुलिस ने राय दी कि अगर वे केस दर्ज करना चाहते हैं तो वो दोनों पक्षों का केस लेंगे। इसके जवाब में हिंदू कार्यकर्ताओं ने अधिकारियों को समझाया कि दोनों घटनाएँ अलग-अलग थीं। हिंदू कार्यकर्ता पर हमले की बाद की घटना जानबूझकर हिंसा भड़काने और पीड़ित और उसके परिवार को धमकी देने के लिए की गई थी जो कि पूरी तरह से एक अलग मामला है।
हमलावरों ने बगैर शर्त माँगी माफी
इस दौरान पुणे ग्रामीण पुलिस के डीएसपी सुदर्शन पाटिल भी पुलिस स्टेशन में मौजूद थे। उन्होंने सभी लोगों को एक तरफ इंतजार करने को कहा। इसके बाद डीएसपी पाटिल ने मुस्लिम पक्ष के एक सदस्य और सूरज चक्रधर धरम से अलग-अलग पूरा मामला सुना। इस वक्त तक मुस्लिम पक्ष के लोग भी इस बात से सहमत थे कि दूसरे दिन का हमला पहले की घटना के शांत होने के बाद हुआ था। इस मामले में हमलावरों ने हिन्दू परिवार से बेशर्त माफ़ी माँगी थी।
मंचर में हिंदू कार्यकर्ता ने ऑपइंडिया को क्या बताया?
ऑपइंडिया ने इस बारे में विहिप के पुणे जिले के संचार प्रमुख गणेश राउत से बात की। उन्होंने बताया, “3 दिन पहले ही स्थानीय मुस्लिम समुदाय के कुछ असामाजिक तत्वों ने हमारे साथी बजरंग दल कार्यकर्ता सूरज धरम और संतोष धरम के घर पर उनकी गैरमौजूदगी में रात में कायरतापूर्ण हमला किया। हमलावरों ने उसके परिजनों को धमकाया।” राउत ने बताया कि विहिप और बजरंग दल ने इस हमले के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया। इसके साथ ही पीड़ित संग पुलिस स्टेशन जाकर सभी आरोपितों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग की।
गणेश राउत ने आगे कहा, “इसके बाद दोनों पक्षों के नेताओं को पुलिस स्टेशन बुलाया गया। हमने पुलिस अधिकारियों के संज्ञान में यह बात लाई कि गणपति विसर्जन के दौरान झड़प की घटना को तुरंत सुलझा लिया गया था, लेकिन इसके एक दिन बाद का यह हमला हिंसा भड़काने की जानबूझकर की गई एक कोशिश थी। अधिकारियों ने भी इस बात को माना। आपराधिक मानसिकता वाले मुस्लिम समुदाय के अपराधियों को पुलिस अधिकारियों ने सख्त चेतावनी दी और मामले के नतीजों को देखते उन्होंने पीड़ित परिवार से बगैर शर्त माफी माँग ली।”
गणेश राउत ने कहा, “पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में पुलिस स्टेशन में लंबे टकराव के बाद आपसी समझ का यह कदम उठाया गया, जिन्होंने स्थिति को शांत कराने में मदद की। आरोपितों ने यह भी आश्वासन दिया कि सूरज के परिवार के किसी भी सदस्य को नुकसान नहीं पहुँचाया जाएगा और हिंदू कार्यकर्ता के खिलाफ कोई भी गैरकानूनी गतिविधि या हमला उनके द्वारा नहीं किया जाएगा। इसके अलावा, उन्होंने 29 सितंबर की रात को हुई घटना के लिए लिखित माफी भी माँगी है।
उन्होंने आगे कहा, “इस घटना के जरिए विहिप और बजरंग दल आश्वस्त करते हैं कि हम अपने किसी भी हिंदू कार्यकर्ता भाई-बहन को संकट की ऐसी स्थिति में अकेला नहीं छोड़ेंगे। इस मकसद से हमने सक्रिय तौर से इस मामले को आगे बढ़ाया और समाधान होने तक पुलिस स्टेशन में रहे। हमने मामला दर्ज करने पर जोर दिया, लेकिन बाद में मुस्लिम पक्ष ने माफी माँग ली।”
राउत ने यह भी कहा, “हम उम्मीद करते हैं कि सभी समुदायों को इस शांति और सद्भाव को बनाए रखने के लिए समान जिम्मेदारी लेनी चाहिए। यदि ऐसी कोई घटना दोहराई जाती है, तो हम इसका ऐसा जवाब देंगे कि हमलावर बेहतर तरीके से समझ सके। इस घटना के लगातार फॉलो-अप और इसे उस स्तर तक ले जाने के लिए जहाँ इसे सुना जा सके, के लिए हम ऑपइंडिया के आभारी हैं। यह एक ऐसा समर्थन है जिसकी हम इन मुद्दों पर सारी मीडिया से अपेक्षा करते हैं जहाँ वास्तव में हमें ऐसी गैरजरूरी परेशानियों को सामना करना पड़ता हैं।”
उन्होंने कहा, “इस घटना में एक और पीड़ित था जिसे मुस्लिमों ने निशाना बनाया था, लेकिन अपने स्थानीय कारोबार को ध्यान में रखते हुए, उन्होंने शिकायत दर्ज न कराने का विकल्प चुना। हमारे युवा कार्यकर्ता सूरज चक्रधर धरम मुस्लिम बहुल इलाके में रहते हैं। वह हमारे साथी कार्यकर्ता हैं जो कूरियर डिलीवरी के काम से अपना परिवार पालते हैं। वो होम डिलीवरी के लिए शहर के कई घरों में जाते हैं। उनके विनम्र स्वभाव की वजह से स्थानीय समाज में उनके सबसे मधुर रिश्ते हैं। इसके साथ ही वह धर्म की स्थापना के लिए कई तरह के काम भी करते हैं। वो एक मुखर कार्यकर्ता हैं जो गौरक्षा के लिए काम करते हैं और लव जिहाद जैसी सामाजिक समस्याओं के खिलाफ आवाज उठाते हैं।”
गणेश राउत ने आगे बताया, “सूरज हमारे स्थानीय संगठन का एक अहम सदस्य हैं। उनकी माँ और परिवार के अन्य सदस्यों को गुंडों ने धमकी दी थी। उन्होंने किसी दुश्मनी के वजह से नहीं बल्कि सूरज और उसके परिवार की सुरक्षा की माँग के लिए शिकायत दर्ज करवाई थी। सूरज अनुसूचित जाति से आते हैं। शायद हमलावरों ने सोचा होगा कि कोई उनकी परवाह नहीं करेगा, लेकिन यहाँ ऐसा बिल्कुल नहीं है। मंचर का पूरा हिंदू समाज सूरज के साथ है। हम सभी पुलिस स्टेशन गए अपनी फिक्र के बारे में बताया और आखिरकार मुस्लिम पक्ष ने माफी माँगी।”
मुद्दा क्या था?
महाराष्ट्र के पुणे शहर के पास मंचर में शुक्रवार 29 सितंबर को मुस्लिमों की भीड़ ने बजरंग दल के एक कार्यकर्ता के घर पर हमला किया। पीड़ित हिंदू कार्यकर्ता की पहचान सूरज चक्रधर धरम के रूप में की गई। मुस्लिम ने पीड़ित के घर पर हमला किया और घर की महिला सदस्यों के साथ बदसलूकी की। गणपति विसर्जन के दौरान कथित तौर पर मौलाना की कार रोकने पर भीड़ ने सूरज के घर पर हमला किया था।
हालाँकि, सूरज ने उस घटना का वीडियो बनाया था। जिसमें साफ दिख रहा था कि सभी ने मौलाना के वाहन को रास्ता दिया था। सूरज की शिकायत पर पुलिस ने जाँच नहीं की। सूरज ने ऑपइंडिया को बताया कि वह कट्टरपंथियों के निशाने पर थे, क्योंकि वह गौ रक्षा और लव जिहाद के खिलाफ मुखर रहे हैं। यह मामला पुणे के अंबेगांव क्षेत्र के मंचर पुलिस स्टेशन क्षेत्र का है। सूरज की माँ ने सोमवार, 2 अक्टूबर, 2023 को पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई। शिकायत के मुताबिक, 29 सितंबर को उनके आवास पर 150 से 200 मुसलमानों की भीड़ जमा हुई।
जब गुस्साई भीड़ सूरज चक्रधर के घर पर पहुँची थी, उस वक्त संयोग से सूरज घर पर नहीं थे। सूरज के न मिलने पर भीड़ ने उनके घर में मौजूद महिलाओं के साथ मारपीट शुरू कर दी। सूरज की माँ ने बताया कि घटना के दौरान मुस्लिम भीड़ ने उनके घर पर पथराव भी किया। उन्होंने दरवाजे तोड़ दिए और घर की महिलाओं को भी नहीं बख्शा। इस शिकायत की एक कॉपी ऑपइंडिया के पास है। इसके अलावा भीड़ ने पूछा कि क्या सूरज बजरंग दल से जुड़ा था। यही नहीं सूरज की माँ से कहा गया, “वह जहाँ भी मिलेगा, उसके हाथ-पैर तोड़ दिए जाएँगे।” ये वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल हो गया है।
Mob including hundreds of Islamists led by PFI members launched an attack on the residence of Hindu activist Suraj Dharam in Manchar, Pune, Maharashtra.
Attackers have been identified as Riyaz Jamadar, Israr Pathan, Azam Momin, Qayyum Pathan among others. pic.twitter.com/Qn81NPovTS
सूरज की माँ ने पुलिस से सुरक्षा का अनुरोध करते हुए दावा किया था कि उनके पूरे परिवार को खतरा है। साथ ही उन्होंने घटना के सीसीटीवी और वीडियो फुटेज की समीक्षा के बाद उम्मीद जताई कि सभी अपराधियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
मंचर शहर पूरी तरह शांतिपूर्ण, अफवाहों पर न करें विश्वास
वहीं गणपति विसर्जन जुलूस (28 सितंबर) विवाद पर पुणे पुलिस ने पोस्ट कर बताया है कि दोनों पक्षों के लोगों एक-दूसरे से माफी माँगकर विवाद सुलझा लिया है। मंचर शहर में पूर्ण शांति है।
पुणे पुलिस ने मंचर को बताया शांतिपूर्ण
इस मामले में पुलिस का कहना है कि सोशल मीडिया पर कोई यह अफवाह फैला रहा है कि मंचर शहर में जानबूझकर पथराव और गाली-गलौज की गई है। हालाँकि, मंचर शहर में अब माफीनामें के बाद पूरी तरह से शांति है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारीयों ने कानून व्यवस्था बनाए रखने के संबंध में दोनों पक्षों को मार्गदर्शन दिया गया है। साथ ही पुलिस का कहना है कि सोशल मीडिया पर किसी भी तरह की गलत पोस्ट फैलाने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
गौरतलब है कि पुणे जिले का मंचर से मई 2023 में लव जिहाद के कई चौंकाने वाले मामले सामने आए थे। यहाँ 20 मई, 2023 को महाराष्ट्र पुलिस ने एक एफआईआर दर्ज की थी। आरोपितों पर भारतीय दंड संहिता की धारा 363 (अपहरण) और 376 (बलात्कार) और POCSO अधिनियम की धारा 4, 6, 8, 10 के तहत मामला दर्ज किया गया। इसके तहत 22 साल के जावेद शेख को महाराष्ट्र के पुणे के मंचर शहर में एक नाबालिग हिंदू लड़की का अपहरण करने, उसका यौन उत्पीड़न करने और फिर उससे जबरदस्ती निकाह करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। पीड़िता अपहरण और बलात्कार के वक्त महज 16 साल की थी। इस घटना की पूरी रिपोर्ट यहाँ पढ़ी जा सकती है।
ब्रिटेन की राजधानी लंदन में हाल ही में खालिस्तानियों द्वारा भारतीय उच्चायोग के बाहर तिरंगे पर गौमूत्र डालने और उसे अपमानित करने की घटना सामने आई थी।। इस बीच एक भारतीय ने इस तिरंगा को सम्मान के साथ उठाकर रख लिया था। इस भारतीय की पहचान सत्यम सुराणा के रूप में हुई है।
सत्यम सुराणा ने एक्स (पहले ट्विटर) पर इस घटना के बारे में लिखा है। खालिस्तानियों ने 2 अक्टूबर 2023 को यह प्रदर्शन किया था। यह विरोध प्रदर्शन खालिस्तानी आतंकी गुरचरण सिंह के नेतृत्व में हुआ था। इस दौरान प्रदर्शनकारी खालिस्तानियों ने तिरंगे को लातों से रौंदा और फिर उसे भारतीय उच्चायोग की दीवाल से सटाकर उस पर एक बोतल में लाया गया गोमूत्र डाल दिया।
तिरंगे का अपमान करने के दौरान वहाँ मौजूद अन्य भारतीय शांत नहीं रहे। सत्यम सुराणा इन खालिस्तानियों के बीच में घुसकर तिरंगा उठा लाए। सत्यम के तिरंगा उठाने से पहले उस पर एक ब्रिटिश पुलिसकर्मी भी खड़ा दिखता है। हालाँकि, पुलिसकर्मी की मंशा स्पष्ट नहीं है कि उसने तिरंगे पर पैर जानबूझ कर रखे या अनजाने में ऐसा हुआ।
सत्यम के खालिस्तानियों के बीच से तिरंगा छीनकर लाने का यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। वीडियो वायरल होने के पश्चात ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले भारतीय छात्र करन कटारिया ने सत्यम की पहचान की और ट्वीट करके बताया कि खालिस्तानियों से तिरंगा छीनने वाला शख्स कौन है।
?? My LSE junior proudly picked up the Indian tricolour outside @HCI_London battling extremism with passion and non violance. pic.twitter.com/pKGK5qOlcI
गौरतलब है कि करन कटारिया वही व्यक्ति हैं, जिनको आरएसएस से संबंध रखने के कारण ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी में छात्र संघ का चुनाव लड़ने से रोक दिया गया था। उनके खिलाफ राहुल गाँधी के कार्यक्रमों में दिखने वाली एक भारतीय मूल की प्रोफ़ेसर ने घृणा कैम्पेन चलाया था। इसके बाद उन पर रोक लगाई गई थी।
सत्यम सुराणा ने ट्वीट करके करन का आभार जताया और लिखा, “सौगंध मुझे मेरे मिट्टी की, मैं रहूँ या ना रहूँ भारत रहना चाहिए, मैं खुद को रोक नहीं सका और तिरंगा उठाकर लाया। चाहे 1 करोड़ लोग हमारे खिलाफ क्यों ना हो, मेरे जैसा 1 देशभक्त भारतीय हमेशा हमारे देश के सम्मान को बचाएगा।”
सत्यम सुराणा महाराष्ट्र के पुणे के रहने वाले हैं और पेशे से वकील हैं। वह वर्तमान में लंदन रह कर में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से लॉ में पोस्ट ग्रेजुएशन यानी एलएलएम की पढ़ाई कर रहे हैं।
I am so motivated by you words @karanatLSE ❤️ Always there for my ??. You can take me out of Bharat but not Bharat out of me! When I picked up our तिरंगा there, the only thing in my mind was मैं रहूँ या ना रहूँ भारत ये रहना चाहिए! #London#indiantricolourhttps://t.co/kJUZn737E9
कटारिया ने इस मामले पर दोबारा ट्वीट किया और लिखा, “दुनिया में ऐसी कोई भी बाधा नहीं है, जो किसी बेटे को उसकी माँ से प्यार करने से रोक सके।” सत्यम के इस बहादुरी के कृत्य के चलते सोशल मीडिया पर बड़ाई हो रही है।
There is no barrier that can stop a Son from loving his Mother! भारत माता सुपूत?❤️?? https://t.co/UGGMHpX0nq
उत्तर प्रदेश में गो-तस्करों के साथ पुलिस की मुठभेड़ हुई है। इनमें कई गो-तस्करों को गोली लगी है। दो अलग-अलग मामलों में यूपी पुलिस ने गो-तस्करों ने गिरफ्तार कर लिया है। मामला रामपुर और श्रावस्ती से जुड़ा हुआ है।
रामपुर जिले में स्वार और टांडा थाना की पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए चार गो तस्करों को घेर लिया। उन्होंने क्रूरतापूर्वक गोवंश को बाँध रखा था। पुलिस ने मुखबिरों के सूचना के आधार पर उन्हें जब रोकने की कोशिश की तो वे पुलिस पर फायरिंग करने लगे।
इसके बाद पुलिस ने जवाबी कार्रवाई की। इसमें फहीम पुत्र सफी अहमद, सलीम पुत्र महबूब शाह के पैर में गोली लगी। वहीं, दढ़ियाल के चौकी प्रभारी के बाएँ हाथ में गोली लगी। इससे वे भी घायल हो गए। घायलों को अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया गया है।
हालाँकि, पुलिस की इस कार्रवाई के दौरान दो अन्य तस्कर भागने में कामयाब रहे। भागने वाले गो-तस्करों के नाम मनन पुत्र इस्लाम और फरमान पुत्र युसूफ है। इसी बीच स्वार थाना के प्रभारी कोमल सिंह को दो संदिग्ध दिखाई दिए।
स्वार थाना प्रभारी ने जब उन्हें रोकने की कोशिश की तो वे उन पर गोली चलाने लगे। कोमल सिंह ने भी फायरिंग की, जिसमें इन दोनों आरोपितों के पैरों में गोली जा लगी। इस तरह चारों पशु तस्करों को पैर में गोली लगने के बाद गिरफ्तार कर लिया गया।
पुलिस ने पशु तस्करों के पास से एक गोवंशीय पशु, एक कार, तीन तमंचे, सात कारतूत और चार खाली कारतूस बरामद किए हैं। बताया जा रहा है कि आरोपितों पर पहले ही कई मुदकमें दर्ज हैं। वहीं, आरोपितों ने एक सांड की हत्या की बात कबूल की है।
श्रावस्ती में एनकाउंटर के बाद 6 गिरफ्तार
वहीं, यूपी के श्रावस्ती में यूपी पुलिस ने मुठभेड़ के बाद 6 पशु तस्करों को गिरफ्तार किया है। इनमें पाँच तस्करों के पैरों में गोली लगी है। सूचना के आधार पर पुलिस ने जब घेराबंदी शुरू की तो उन्होंने पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी।
इसके बाद पुलिस ने भी जवाबी कार्रवाई की, जिसमें 5 पशु तस्करों के पैरों में गोली लगी। कोतवाली भिनगा और थाना सिरसा की संयुक्त पुलिस टीम ने इस कार्रवाई को अंजाम दिया। घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
पुलिस ने आरोपितों के पास से चार पशु, उसे काटने का सामान, पाँच तमंचा, तीन 12 बोर और तीन 315 बोर के हथियार बरामद किए हैं। इसके अलावा, पाँच चाकू, एक बोगदा, तराजू और बाट को भी पुलिस ने जब्त किया है। एसपी प्राची सिंह ने रात में घटना स्थल का जायजा खुद लिया।
गिरफ्तार आरोपितों की पहचान सलीम पुत्र नुरुल सलाम, आँधी उर्फ नसीरुद्दीन पुत्र कादिर अली, सहीम पुत्र अब्दुल अमीन, छोटन उर्फ इकबाल पुत्र नन्हें खान, शहजाद उर्फ सैय्यद बग्गा पुत्र मोहर्रम अली और सूफियान पुत्र इस्लाम के रूप में हुई है।
दिल्ली की एक फैमिली कोर्ट ने भारतीय क्रिकेटर शिखर धवन और आयशा मुखर्जी के तलाक पर मुहर लगा दी है। अदालत ने माना है कि शिखर को आयशा मानसिक तौर पर प्रताड़ित करती थीं। उनको बदनाम करने के लिए कई लोगों को अपमानजनक संदेश भेजे थे। शादी के बाद भारत में रहने के वादे को नहीं निभाया। साथ ही संपत्तियों का मालिकाना हक हासिल करने के लिए भी दबाव डाला।
बुधवार (4 अक्टूबर 2023) को फैमिली कोर्ट के जज हरीश कुमार ने धवन के आरोपों को आधार बनाते हुए उन्हें तलाक दे दिया। इनमें से कई आरोपों पर आयशा ने अपना बचाव नहीं किया और कई में वे ऐसा करने में असफल रहीं। अदालत ने माना कि शिखर धवन को उनकी पत्नी लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रही थीं। इसमें शिखर धवन को उनके पुत्र से ना मिलने देना और सालों तक उनसे दूर उसे ऑस्ट्रेलिया में रखना भी शामिल है।
शिखर धवन ने तलाकशुदा आयशा मुखर्जी से साल 2012 में शादी की थी। पूर्व पति से आयशा की दो बेटियाँ हैं जो ऑस्ट्रेलिया में उनके साथ रहती हैं। इस जोड़े के संबंधों में तनाव 2021 से ही शुरू हो गया था।
आयशा ऑस्ट्रेलियाई नागरिक हैं। शिखर धवन से उनका एक आठ साल का बेटा है। वह भी अपनी माँ के साथ ऑस्ट्रेलिया में रह रहा है। विवाह के बाद शिखर आयशा के पूर्व पति की बेटियों की पढ़ाई का खर्चा भी उठा रहे थे। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया में आयशा के लिए कुछ संपत्ति भी खरीदी थी। अदालत में शिखर धवन ने बताया है कि उनकी पत्नी विवाह के समय किए गए वादे के विपरीत भारत में उनके साथ नहीं रुकी और उनके बेटे को भी ऑस्ट्रेलिया ले गईं।
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार कोर्ट ने कहा, “आयशा का दावा है कि वह भारत में रहना चाहती थीं। लेकिन अपनी बेटियों के प्रति दायित्व के कारण ऑस्ट्रेलिया में रहना उनकी मजबूरी थी। इसलिए वह भारत में नहीं रहीं। इससे जाहिर है कि वह शादी के समय किए गए अपने वादे से पीछे हट गईं। इसके कारण धवन को लंबी दूरी की शादी का सामना करना पड़ा और वर्षों तक अपने ही बेटे से अलग रहने की भारी पीड़ा झेलनी पड़ी।”
कोर्ट में शिखर ने यह भी बताया है कि आयशा ने विवाह के बाद ऑस्ट्रेलिया में उनके अपने पैसे से खरीदी तीन संपत्तियों में 99% हिस्सेदारी ले ली और अन्य दो संपत्तियों में खुद को हिस्सेदार बना लिया। शिखर धवन को परेशान और बदनाम करने के इरादे से आयशा उनके साथी खिलाड़ियों और आईपीएल में उनकी टीम के मालिकों को अपमानजनक मैसेज भेजती थीं। हालाँकि, आयशा का कहना था कि ऐसा उन्होंने समय से गुजारा भत्ता पाने के इरादे से किया था। कोर्ट ने इन्हीं सब बातों को आधार मानते हुए शिखर द्वारा तलाक की अर्जी को मंजूर कर लिया।
धवन और आयशा के बेटे की परमानेंट कस्टडी पर किसी तरह का आदेश पारित करने से अदालत ने इनकार किया है। धवन को भारत और ऑस्ट्रेलिया में उचित अवधि के लिए अपने बेटे से मिलने और उसके साथ वीडियो कॉल पर बातचीत करने का अधिकार दिया है।
मध्य प्रदेश में अब सरकारी नौकरियों में महिलाओं को 35 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा। शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार ने महिलाओं का कोटा बढ़ाने का फैसला लिया है। वन विभाग की भर्तियों को छोड़ सभी महकमों में यह कोटा लागू होगा।
मध्य प्रदेश में महिलाओं के आरक्षण को 35% करने का शासनादेश 3 अक्टूबर 2023 को जारी किया गया था। मध्य प्रदेश में विधानसभा के चुनाव जल्द होने हैं। इसे चुनावों की तैयारी के बीच भाजपा सरकार का बड़ा कदम माना जा रहा है।
मध्य प्रदेश ने मध्य प्रदेश सिविल सेवा (महिलाओं की नियुक्ति के लिए विशेष प्रावधान) नियम, 1997 में संशोधन किया है, जिसमें वन विभाग को छोड़कर महिलाओं को भर्ती में 35% आरक्षण प्रदान किया गया है। pic.twitter.com/ELv03kIhGI
इससे पहले प्रदेश में महिलाओं के लिए नौकरियों में 33% आरक्षण का प्रावधान था जो कि वर्ष 1995 में लागू किया गया था। मध्य प्रदेश में शिक्षक भर्तियों में 50% पद महिलाओं के लिए आरक्षित हैं।
मध्य प्रदेश में महिलाओं का आरक्षण भाजपा की महिला वोटरों को लुभाने के प्रति राजनीति के नए कदम के तौर पर देखा जा रहा है। यह कदम महिलाओं को विधानसभाओं और संसद में 33% आरक्षण देने के मोदी सरकार के बिल के पास होने के कुछ ही दिनों बाद उठाया गया है।
मध्य प्रदेश में भाजपा लगातार महिला कल्याण के लिए योजनाएँ ला रही है। इससे पहले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ‘लाडली बहना’ के तहत कई योजनाओं का ऐलान कर चुके हैं। इसमें प्रति माह प्रदेश की महिलाओं को ₹1500 दिए जाते हैं। अब तक इस योजना के तहत पाँच किश्तें भेजी जा चुकी हैं।
मेरी लाड़ली बहनों, तुम्हारे जीवन को आसान बनाने के लिए आज खुशियों की पांचवीं किस्त डाल दी है। pic.twitter.com/h5xM7WImh6
मध्य प्रदेश की नई मतदाता सूची के अनुसार, 48.8% मतदाता महिलाएँ हैं। प्रदेश में 2.72 करोड़ वोटर महिला हैं। लाडली बहना योजना के अंतर्गत लगभग 1.3 करोड़ महिलाओं को लाभ मिल रहा है। प्रदेश में महिला मतदाताओं की संख्या पिछले चुनावों के मुकाबले 12.9% बढ़ी है।
इसके अलावा मध्य प्रदेश में लाडली बहना योजना के अलावा राज्य में रसोई गैस सिलेंडर को लेकर भी बड़ी सब्सिडी दी जा रही है। राज्य में 36.62 लाख परिवारों को ₹450 में रसोई गैस सिलेंडर मिल रहा है।
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बेहद बुद्धिमान व्यक्ति बताया है। कहा है कि उनके नेतृत्व में भारत बेहतरीन प्रगति कर रहा है। साथ ही मोदी के साथ बहुत अच्छे राजनीतिक संबंध होने की बात कही है।
राष्ट्रपति पुतिन ने कहा, “उनके (PM मोदी) नेतृत्व में भारत विकास में बेहतरीन प्रगति कर रहा है। यह भारत और रूस दोनों के हितों को पूरी तरह से पूरा करता है।” उन्होंने वित्तीय सुरक्षा और साइबर अपराध के खिलाफ लड़ाई में रूस और भारत के बीच आगे भी सहयोग जारी रहने की उम्मीद जताई।
गौरतलब है कि रूसी राष्ट्रपति की ये सराहना और तारीफ भारत में जी-20 शिखर सम्मेलन में नई दिल्ली घोषणा-पत्र जारी होने के बाद आई है। इस घोषणा-पत्र में में यूक्रेन में चल रहे संघर्ष में शांति स्थापित करने का आह्वान किया गया था। यूक्रेन ने इसकी आलोचना की थी।
इसमें युद्ध का दोष रूस पर नहीं मढ़ा गया था। ये बीते साल बाली के जी-20 घोषणा-पत्र से पूरी तरह अलग था। बाली के घोषणा-पत्र में संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव का संदर्भ देते हुए कड़े शब्दों में रूस की आक्रमकता की आलोचना की गई थी।
नई दिल्ली घोषणा का स्वागत करते हुए मॉस्को ने इसे मील का पत्थर करार दिया था। इसके साथ ही साउथ ग्लोबल से जी20 देशों को ‘एकजुट’ करने में भारत की अध्यक्षता की सक्रिय भूमिका की भी खासी तारीफ की थी।
ये पहली बार नहीं है कि रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने पीएम मोदी की तारीफ की है। इससे पहले भी उन्होंने बीते महीने पीएम मोदी की तारीफ करते हुए कहा था कि वह मेक इन इंडिया कार्यक्रम को बढ़ावा देने में ‘सही काम’ कर रहे हैं।
8वें ईस्टर्न इकोनॉमिक फोरम (ईईएफ) को सम्बोधित करते हुए राष्ट्रपति पुतिन ने कहा था, “आप जानते हैं कभी हमारे पास घरेलू स्तर पर निर्मित कारें नहीं थीं। आज हैं। भले वे 1990 के दशक में हमारे द्वारा खरीदी गईं मर्सिडीज या ऑडी कारों के मुकाबले मामूली दिखती हैं, लेकिन यह कोई मुद्दा नहीं है। मुझे लगता है कि इस मामले में हमें अपने साझेदारों का अनुकरण करना चाहिए, मसलन भारत।”
पुतिन ने आगे कहा, “वे भारत में बने वाहनों के निर्माण और इस्तेमाल पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। मुझे लगता है कि प्रधानमंत्री मोदी मेक इन इंडिया कार्यक्रम को बढ़ावा देने के लिए सही काम कर रहे हैं। वह सही हैं।”
चीन में चल रहे एशियाई गेम्स में 4 अक्टूबर 2023 को ओलंपिक चैंपियन नीरज चोपड़ा ने जैवलिन थ्रो में गोल्ड जीता। भारत के ही किशोर जेना को इस स्पर्धा में सिल्वर मिला। लेकिन स्पर्धा के दौरान चीन ने जो बेईमानी की कोशिश की उस पर भारत ने कड़ी आपत्ति जताई है। दरअसल इवेंट के दौरान चोपड़ा के भाले का पहला थ्रो नहीं मापा गया था।
इसके बाद चीन पर जानबूझकर भारत को निशाना बनाने के आरोप लग रहे हैं। एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (AFI) की उपाध्यक्ष और लम्बी कूद की पूर्व खिलाड़ी अंजू बॉबी जॉर्ज ने हांगझाऊ एशियन खेलों में चीन के खेल अधिकारियों पर बेईमानी का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि इसको लेकर भारत अपना विरोध दर्ज करवाएगा।
अंजू बॉबी जॉर्ज ने कहा, “यह केवल नीरज के साथ नहीं हुआ है। पहले हमारे लम्बी चाल वाले खिलाड़ियों के साथ यही हुआ। फिर ज्योति (बाधा दौड़ की खिलाड़ी) के साथ हुआ। उसके बाद जैवलिन थ्रोअर अन्नू रानी के साथ और फिर जेना (किशोर जेना) और नीरज के साथ यही हुआ है। वे लोग (चीन के खेल अधिकारी) जानबूझकर यह कर रहे हैं। मैं इस प्रकार के वाकए एशियन खेलों में देख कर दुखी हूँ। हम चीनी अधिकारियों के विरुद्ध अपना विरोध दर्ज करवाएँगे।”
गौरतलब है कि जैवलिन थ्रो के आखिरी मुकाबले में नीरज के भाला फेंकने के पहले प्रयास पर चीन के अधिकारियों ने कहा कि कुछ तकनीकी गड़बड़ी की वजह से वह उसे माप नहीं सके। इसके पश्चात किशोर जेना के दूसरे प्रयास को अवैध ठहरा दिया गया। इससे एक दिन पहले जैवलिन थ्रो की महिला खिलाड़ी अन्नू रानी का पहला प्रयास भी नहीं रिकॉर्ड किया गया था। अन्नू ने भी इस प्रतियोगिता में चीन की बेईमानी के बावजूद स्वर्ण जीता था।
किशोर जेना के प्रयास को अवैध ठहराने पर साथी खिलाड़ी नीरज चोपड़ा ने विरोध दर्ज किया तो इसे मान लिया गया। सोशल मीडिया पर चीन के अधिकारियों के इस रवैए के खिलाफ काफी गुस्सा देखा जा रहा है। लोगों ने कहा कि वह भारतीय खिलाड़ियों को पदक जीतने से रोकने के लिए ऐसा कर रहे हैं।
#NeerajChopra threw a monster throw in his first attempt but the Chinese technology failed and they couldn't measure it.
once this Asian Games gets over, this cheating by Chinese officials throughout the tournament against Indian athletes should be thoroughly investigated. pic.twitter.com/NhTvGt4zwY
हालाँकि चीन के खेल अधिकारियों के इन प्रयासों का भारत के खिलाड़ियों पर कोई फर्क नहीं पड़ा और नीरज तथा किशोर जेना, दोनों ने स्वर्ण और रजत अपने नाम किए। नीरज चोपड़ा ने स्वर्ण जीतने के बाद चीन के खेल अधिकारियों के इस रवैए पर भी सवाल भी उठाए थे।
NEERAJ CAME, HE CONQUERED & CONQUERED AGAIN?
Our Champion @Neeraj_chopra1 successfully defends his #AsianGames Title with a Season Best throw of 88.88m in Men's Javelin?
His medal marks a historic milestone for ??, surpassing our previous record of 16 Gold medals (2018… pic.twitter.com/WdHNiLtfD8
Heartfelt congratulations to @Kishore78473748 on winning ?in Men's Javelin
A name that we will see at #Paris2024 Olympics!! Achieving his PB and then again bettering it to 87.54m & securing a quota for #Paris2024– truly commendable and… pic.twitter.com/UrLcfs4BzP
उन्होंने कहा था, “मुझे बड़ा खराब लगा कि इतने बड़े इवेंट में मेरा पहला थ्रो खराब गया। ज्योति यार्राजी के साथ भी ऐसा ही हुआ। मेरे साथ भी गड़बड़ हुई है। जेना के एक थ्रो में भी समस्याएँ थी। लेकिन अंत में हमारा परिणाम अच्छा था जो कि प्रदर्शित करता है कि हम तैयार हो कर आए थे।”
बाधा दौड़ की खिलाड़ी ज्योति यार्राजी को दौड़ से बाहर कर दिया गया था, क्योंकि एक चीनी खिलाड़ी ने बेईमानी से दौड़ने की शुरुआत कर दी थी। बाद में उनके दौड़ने का समय भी रिकॉर्ड नहीं किया गया। उनको पहले कांस्य पदक दिया गया था जो कि विरोध के बाद रजत में बदल दिया गया।
कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी ने जैक रसेल टेरियर नस्ल की एक पपी अपनी मम्मी सोनिया को उपहार में दी है। वे इसे गोवा से लेकर आए हैं। इसका नाम ‘नूरी’ रखा है। राहुल ने एक वीडियो के जरिए अपने परिवार के इस सदस्य के बारे में लोगों को बताया है।
असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने कुतिया का नाम नूरी रखे जाने पर एतराज जताया है। वैसे नूरी का मोटे तौर पर अर्थ प्रकाश होता है। लेकिन ऐसा लगता है कि हाल के समय में जाति पर लगातार प्रलाप कर रहे राहुल अपने पापा राजीव से नूर लेना भूल गए हैं।
एक तरफ राहुल जातीय जनगणना के पैरोकार बने घूम रहे हैं, वहीं उनके पापा राजीव जाति विहीन समाज चाहते हैं। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी ने संसद में मंडल कमीशन की सिफारिशों का विरोध करते हुए यह बात कही थी। पूरे देश ने इसे सुना था, पर शायद राहुल इससे रूबरू होना भूल गए।
न्यूज18 ने राजीव गाँधी के उस भाषण की समीक्षा प्रकाशित की है। इस संबोधन के दौरान राजीव की तत्कालीन प्रधानमंत्री वीपी सिंह के साथ तीखी नोकझोंक हुई थी, क्योंकि वे मंडल आयोग की रिपोर्ट को आगे बढ़ा रहे थे।
राजीव गाँधी ने कहा था, “यह बेहद दुखद है कि इस सरकार (वीपी सिंह सरकार) की सोच जाति के इर्द-गिर्द घूमती है। वीपी सिंह हमारे समाज में दरार पैदा कर रहे हैं। इस देश का लक्ष्य जाति विहीन समाज होना चाहिए और आपको ऐसा कोई भी कदम उठाने से बचना चाहिए जो देश को जाति-ग्रस्त समाज की ओर ले जाए।”
राजीव गाँधी ने ये भाषण 6 सितंबर 1990 को संसद में दिया था। उन्होंने आगे कहा था, “जिस तरह से आपने मंडल आयोग को लागू किया है, मेरे लिए यह मेरे देश को तोड़ रहा है। इस समय में देश को इस जाति विभाजन से बचाने का समय है। जातिवाद की वजह से देश को इसके लिए बहुत भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।”
आरक्षण पर ये थी राजीव गाँधी की राय
वीपी सिंह सरकार द्वारा संसद में मंडल कमीशन की रिपोर्ट रखे जाने के समय चर्चा में राजीव गाँधी ने अपने भाषण के अंत में आरक्षण पर भी अपनी राय रखी थी। राजीव गाँधी ने कहा था, “सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों को आरक्षण सहित हर संभव मदद की जरूरत है और कॉन्ग्रेस इसमें आपका समर्थन करेगी। हम चाहते हैं कि इसका लक्ष्य सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों में सबसे गरीब और सबसे कमजोर लोगों को लक्षित किया जाए, जिसे कॉन्ग्रेस पार्टी ने इस साल 30 अगस्त को संसदीय कार्य समिति के प्रस्ताव में रेखांकित किया है।” राजीव गाँधी का बयान साफ तौर पर कहता है कि वो जाति के आधार पर नहीं, बल्कि आर्थिक तौर पर पिछड़े लोगों और कमजोर लोगों की मदद के पक्षधर थे।
राहुल गाँधी का ऐलान, कॉन्ग्रेस कराएगी जातिगत जनगणना
राजीव गाँधी ने संसद में जो कुछ भी कहा था, वो लोकसभा की कार्यवाही का हिस्सा है। उनके शब्द मिटाए नहीं जा सकते हैं। लेकिन अब राहुल गाँधी जो कुछ भी बोल रहे हैं, वो राजीव गाँधी की सोच के एकदम उलट है। राहुल गाँधी कह चुके हैं कि कॉन्ग्रेस के सत्ता में आते ही जातिगत जनगणना कराई जाएगी।
Caste census भारत का X-Ray है!
OBC कितने हैं? बाकी वर्ग के लोग कितने हैं? जब ये आंकड़े सामने आएंगे, तभी देश सबकी भागीदारी दे कर आगे बढ़ पाएगा।
कांग्रेस की सरकारें अडानी की नहीं – देश के किसानों, मज़दूरों, दलितों, वंचितों और आदिवासियों की हैं। pic.twitter.com/GTMaEBURDz
दिल्ली पुलिस ने मीडिया संस्थान ‘Newsclick’ के संस्थापक प्रबीर पुरकायस्थ और HR हेड अमित चक्रवर्ती को गिरफ्तार किया है। संस्थान से जुड़े अन्य तथाकथित पत्रकारों अभिसार शर्मा, उर्मिलेश और परंजॉय गुहा ठाकुरता से भी पूछताछ की गई। मामला है चीन से फंडिंग का। इसका खुलासा किसी भारतीय मीडिया संस्थान ने नहीं, बल्कि अमेरिकी अख़बार ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ (NYT) ने की। आरोप साफ़ हैं – चीन के अजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए इस मीडिया पोर्टल को 38 करोड़ रुपए की फंडिंग की गई।
सबसे बड़ी बात, मामला अवैध लेनदेन का है, मनी लॉन्ड्रिंग का है। चीन और भारत की कंपनियों में कई करार हुए होंगे, लेकिन ये सरकार से छिपा कर पिछले दरवाजे से हुई डील थी। इन सबके पीछे है करोड़पति नेविल रॉय सिंघम, जो कि चीन की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी की प्रोपेगंडा शाखा से जुड़ा हुआ है। सिर्फ ‘न्यूज़क्लिक’ ही नहीं, इसने दुनिया भर में कई मीडिया संस्थानों को पैसे खिलाए। श्रीलंकाई-क्यूबा मूल के सिंघम के साथ प्रबीर पुरकायस्थ की ईमेल के माध्यम से हुई बातचीत भी सामने आई थी।
भारत की संप्रभुता और अखंडता के खिलाफ ‘Newsclick’ का चीनी प्रोपेगंडा
अब आप सोचिए, भारत-चीन सीमा विवाद हो या फिर दोनों देशों के सैनिकों के बीच संघर्ष, चीन का पैसा खाने वाले भारत में बैठे दलालों की वफादारी किस तरफ रहती होगी? जवाब आप जानते हैं। तथ्य भी जान लीजिए। असल में प्रबीर और सिंघम के बीच यही बातचीत हो रही थी कि भारत-चीन सीमा विवाद को कैसे रिपोर्ट किया जाए। उत्तर-पूर्वी राज्यों पर चीन अपना दावा ठोकता रहा है। भारत में बैठे उसके दलाल चीन के लिए माहौल बनाते हैं। बात देश की संप्रमुखता और अखंडता की है, कार्रवाई क्यों नहीं की जाए?
‘न्यूज़क्लिक’ पर छपेमारी के बाद मीडिया गिरोह रोने लगा। गिरोह, मतलब चंद लोग जो 2014 से पहले निर्धारित करते थे कि देश में किस चीज की चर्चा होगी, किस एंगल से होगी और कौन सा नैरेटिव चलेगा। इतना ही नहीं, केंद्रीय मंत्रिमंडल तक यही गिरोह निर्धारित करता था। आज उस गिरोह के लोग रोते हैं। ‘इंडिया टुडे’ के राजदीप सरदेसाई ने पूछ डाला कि आखिर पत्रकार देश के दुश्मन कैसे हो गए? उसी तरह, जैसे कोई बाकी देशद्रोही हो जाता है। वो पत्रकार है या नहीं है, इससे क्या फर्क पड़ता है? गद्दार तो किसी भी व्यवसाय में हो सकता है?
वहीं ‘द वायर’ की आरफा खानुम शेरवानी ने भारत पर ‘लोकतंत्र की जननी’ वाला तंज कसा। ऐसे ही ये गिरोह भारत पर ‘विश्वगुरु’ वाला भी तंज भी कसता है। सार ये कि देश की हर उपलब्धि पर तंज कसना इनकी आदत है। AltNews वाले प्रतीक सिन्हा का क्या कहना। उन्होंने सरकार पर हद पार करने का आरोप मढ़ दिया। ये वही संस्थान है, जो मुस्लिम अपराधियों के बचाव में दिन-रात एक कर देता है। इसी तरह रोहिणी सिंह ने लिखा कि पत्रकारिता इस देश में अपराध हो गई है। रोहिणी सिंह को जानना चाहिए कि अपराध पत्रकारिता नहीं, बल्कि देश से गद्दारी है।
पत्रकारों की तो छोड़ दीजिए, पत्रकारों के संगठनों तक ने इस मामले में ‘न्यूजक्लिक’ के समर्थक में घोड़े खोल दिए। ‘प्रेस क्लब ऑफ इंडिया (PCI)’ का उदाहरण ले लीजिए। उसने छापेमारी के दौरान ही ‘न्यूज़क्लिक’ के साथ खड़े होने का ऐलान कर दिया। PCI में आनन-फानन में बैठक बुलाई गई। फिर अगले दिन बड़ी संख्या में पत्रकारों को जुटाया गया और विरोध प्रदर्शन किया गया। परंजॉय गुहा ठाकुरता को बुलाया गया पत्रकारों को संबोधित करने के लिए।
इतना ही नहीं, इस संगठन ने पत्रकारों की तरफ से एक लंबा-चौड़ा पत्र लिख कर सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश DY चंद्रचूड़ को भेजा और आरोप लगाया कि देश की जाँच एजेंसियों को पत्रकारों के खिलाफ हथियार बनाया जा रहा है। क्या गौतम नवलखा जैसे अर्बन नक्सलियों, जो भीमा-कोरेगाँव हिंसा के लिए जिम्मेदार हैं, उनके साथ गठजोड़ कर चीनी प्रोपेगंडा फैलाना पत्रकारिता है? उन्हें इससे भी दिक्कत है कि जाँच एजेंसियों के पास ‘इतनी शक्तियाँ’ क्यों हैं।
इलीट गिरोह के झुण्ड में घुसा एक आम पत्रकार, पूछा – ‘क्यों लिया चीन से पैसा?’
लेकिन, इस दौरान एक पत्रकार ने PCI में ही इन्हें आईना दिखा दिया। उस पत्रकार का नाम है – सागर मलिक। सागर मलिक अकेले ‘चीन के दलालों को जेल भेजो’ वाला बैनर लेकर गिरोह विशेष के पत्रकारों की भीड़ में पहुँच गए। ये ऐसा ही था, जैसे भेड़ियों की झुण्ड में घुस कर कोई शेर चहलकदमी कर रहा हो। इसके बाद हलचल तो मचनी ही थी, मच गई। सागर मलिक से पूछा जाने लगा कि वो PCI में कैसे घुस गए। सवाल जायज है। है ना? आखिर कोई आम पत्रकार इस प्रबुद्ध समूह में कैसे घुस सकता है? ये तो बड़े हैं, देश की जाँच एजेंसियों से बड़े हैं, सरकार से बड़े हैं, आम जनता से बड़े हैं।
प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के अंदर पहुँचकर इस राष्ट्रवादी पत्रकार सागर मालिक ने चीन के समर्पित पत्रकारों के प्रेस कॉन्फ्रेंस में शेर के तरह घुसकर दहाड़ कर अपनी बात रखी pic.twitter.com/UN3Ud4hnOS
— Gaurav Mishra गौरव मिश्रा ?? (@gauravstvnews) October 4, 2023
सागर मलिक का एक ही सवाल था उस झुण्ड से – चीन से पैसा क्यों लिया? इस पर झुण्ड की एक महिला पत्रकार उलटा उनसे पूछने लगी, “तुम कौन हो?” अब भला कोई आम पत्रकार कैसे इलीट पत्रकारों से सवाल पूछ सकता है? कैसे उनके बीच जा सकता है? उसे अपना धर्म, जाति, कुल, गोत्र, फंडिंग सब बतानी होगी न? आम के लिए ख़ास के बीच जगह कहाँ! सागर मलिक का लॉजिक सिंपल था – जैसे आप अब पोस्टर-बैनर लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, मेरा भी अधिकार है कि बैनर लेकर खड़े होकर सवाल पूछूँ।
बस अंतर इतना था कि इनका सवाल थोड़ा कड़वा था, सच्चा था, जो इलीट ग्रुप को हजम नहीं हुआ। लेकिन, आखिर एक अकेले पत्रकार इस इलीट समूह से पंगा लेने की हिम्मत कैसे की? ऑपइंडिया से बात करते हुए सागर मलिक इसका जवाब देते हैं, “जब बात मेरे देश की आएगी तो मैं ऐसे दलाल पत्रकारों को जवाब अवश्य दूँगा। मेरा सवाल केवल इतना था कि चीन से पैसा लिया क्यों? अगर आप राष्ट्रवादी पत्रकार हैं तो चीन से पैसा लिया क्यों? अगर मेरे इस सवाल का जवाब ये पत्तलकार दे दें, तो मैं आगे की बात करूँ।”
उनका कहना है कि अगर आप देशप्रेमी हैं तो आपने हमारे दुश्मन देश चीन से पैसा क्यों लिया? वो कहते हैं, “अगर इन दलाल चीनी पत्रकारों का चीन प्रेम इतना उभर कर बाहर आ रहा है तो मैं उनसे निवेदन करूँगा, जो चीन की गुलामी कर रहे हैं, अगर उन्हें भारत देश में कोई समस्या है तो जब चाहें चीन या पाकिस्तान के पास जाकर रहें, वहाँ के दरवाजे उनके लिए हमेशा खुले हैं। अगर टिकट के पैसे नहीं हैं तो मैं इनका टिकट कटाने के लिए भी तैयार हूँ।”
उन्होंने सीधा ऐलान किया कि अगर ये देश के साथ गद्दारी करेंगे तो इनके घर में घुस कर, इनके ऑफिस में घुस कर इनकी छाती पर प्रहार किया जाएगा। यहाँ सोचने वाली बात है कि आखिर क्या कारण है कि एक युवा पत्रकार को इस गिरोह के बीच में घुस कर ये सवाल पूछना पड़ा? सागर मलिक ‘शाश्वत न्यूज़‘ नामक YouTube चैनल चलाते हैं। गुजरात दंगों में निर्दोषों को फँसाने वाली जिस तीस्ता सीतलवाड़ पर सुप्रीम कोर्ट तक कड़ी टिप्पणी कर चुका है, उससे भी इस ‘न्यूज़क्लिक’ के संबंध थे। सोचिए, क्या ये नेटवर्क देश के लिए काम कर रहा था?
अभिजीत मजूमदार के पीछे पड़ी तमिलनाडु पुलिस, गिरोह ने साधी चुप्पी
अब बात करते हैं यहाँ एक और पत्रकार की। थोड़ा और पीछे जाएँगे, लेकिन ज़रा ठहर कर। ताज़ा घटना पहले। अभिजीत मजूमदार का नाम सुना होगा आपने? वो ‘Earshot’ नामक पॉडकास्ट प्लेटफॉर्म चलाते हैं। आजकल ‘Firstpost’ से जुड़े हुए हैं, जो ‘नेटवर्क 18’ के अंतर्गत आता है, जो चैनल ‘न्यूज़ 18’ चैनल को भी संचालित करता है। अभिजीत मजूमदार ‘एशियानेट न्यूज़’ के भी एडिटर-इन-चीफ रहे हैं। ट्विटर पर आधे मिलियन से ज़्यादा की फॉलोविंग है, कई मुद्दों पर बेबाक राय रखने के लिए जाने जाते हैं।
उनकी चर्चा से पहले एक घटना की याद ताज़ा कर लें। भारत के दक्षिणवर्ती राज्य तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी DMK के मुखिया हैं एमके स्टालिन, जो राज्य के मुख्यमंत्री भी हैं। उनके पिता कई दशकों तक राज्य की राजनीति के केंद्र रहे। अब एमके स्टालिन हैं। उनके बेटे उदयनिधि स्टालिन को भविष्य के लिए तैयार किया जा रहा है। उदयनिधि न सिर्फ पार्टी के यूथ विंग के महासचिव हैं, बल्कि राज्य के खेल मंत्री भी हैं। उदयनिधि स्टालिन ने सनातन धर्म को डेंगू-मलेरिया बताते हुए इसे खत्म करने बात की और इसी मंशा के साथ आयोजित एक कार्यक्रम में हिन्दू विरोधी भाषण दिया।
अभिजीत मजूमदार ने ‘फर्स्टपोस्ट’ में लिखे गए अपने लेख में इस बयान की आलोचना की। इस लेख में अभिजीत मजूमदार ने याद किया था कि कैसे 70 के दशक में पेरियार की रैली में हिन्दू देवी-देवताओं की तस्वीरों को जूते-चप्पल से मारा गया था और ‘ब्राह्मणों द्वारा निचली जातियों पर अत्याचार’ के विरोध के नाम पर ये सब किया गया था। उन्होंने ध्यान दिलाया कि कैसे चोल, पल्लव और परांतक के हिन्दू साम्राज्यों का स्थल रहे तमिलनाडु में अब हिन्दुओं के खिलाफ घृणा सामान्य हो गई है।
चूँकि उदयनिधि स्टालिन की माँ एक आस्थावान हिन्दू हैं, अभिजीत मजूमदार ने अपने लेख के जरिए सनातन धर्म की हत्या को मातृहत्या के समान बता दिया। इसके बाद क्या हुआ? वो जिस मीडिया संस्थान से जुड़े हुए हैं, वहाँ तमिलनाडु पुलिस के अधिकारी पहुँचे उन्हें उठाने के लिए। वो उस दौरान यात्रा में थे, इस कारण बच गए। उनके खिलाफ FIR दर्ज कर ली गई। ये सब क्यों? सिर्फ एक लेख के लिए, बाकी कोई आरोप नहीं। उनके समर्थन में लिबरल गिरोह का एक कुत्ता भी खड़ा नहीं हुआ, मालिकों की बातें तो छोड़ ही दीजिए।
हमने इस पूरे मामले को लेकर अभिजीत मजूमदार से बात की। उन्होंने इस पर दुःख जताया कि जहाँ चीन की पैरवी करने वालों का समर्थन किया जा रहा है, वहीं जो सही में फासीवाद का शिकार हो रहे हैं उनके पक्ष में आवाज़ नहीं उठाई जा रही। उन्होंने याद दिलाया कि कैसे जब बिहार के यूट्यूबर मनीष कश्यप को गिरफ्तार किया गया और उन पर NSA लगा दिया गया, तब भी उनके लिए आवाज़ नहीं उठी पत्रकारों के समूह में से। उन्होंने बंगाल और कर्नाटक पुलिस द्वारा पत्रकारों पर कार्रवाई का मुद्दा भी उठाया।
अभिजीत मजूमदार ने ध्यान दिलाया कि कैसे हमारा देश एक तरह से चीन के साथ अगर युद्ध नहीं तो संघर्ष और प्रॉक्सी वॉर के दौर से गुजर रहा है। ऐसे समय में पत्रकारों का एक गिरोह खुल कर उस मीडिया संस्थान के समर्थन में आ जाता है, जो चीन की पैरवी करता है, वहाँ से फंडिंग लेता है। अभिजीत मजूमदार कहते हैं कि फासीवाद-फासीवाद चीखने वाले इस गिरोह को फासीवाद की परिभाषा का शायद भान नहीं है, तभी विपक्ष शासित राज्यों में पत्रकारों के खिलाफ हो रही कार्रवाई पर इनका मुँह नहीं खुलता।
वरिष्ठ पत्रकार ने ऑपइंडिया से बात करते हुए ये भी याद दिलाया कि ये वही गैंग है जिसने I.N.D.I. गठबंधन द्वारा 14 पत्रकारों पर ‘बैन’ लगाए जाने पर चूँ तक नहीं किया। उन्होंने पूछा कि क्या एक लेख लिखना इतना बड़ा अपराध है कि एक पत्रकार को पकड़ने के लिए पुलिस लगा दी जाए? उन्होंने कहा कि इसकी तो चीन की दलाली से तुलना भी नहीं की जा सकती। उनका सवाल जायज है। दुश्मन देश की दलाली के लिए किसी पर कार्रवाई होना और सिर्फ आलोचना के लिए किसी को उठवा लेना – दोनों में अंतर है। लेकिन, ये पत्रकारों का गिरोह विशेष है। इनके लिए सागर मलिक या अभिजीत मजूमदार पत्रकार की श्रेणी में नहीं आते, क्योंकि वो मोदी सरकार का अंधविरोध नहीं करते।
अभिजीत मजूमदार ने महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार द्वारा अर्णब गोस्वामी को गिरफ्तार कराए जाने का मामला भी उठाया। इस मामला का जिक्र हो ही गया तो एडिटर्स गिल्ड के दोहरे रवैये की भी चर्चा आवश्यक है। पश्चिम बंगाल में ‘न्यूज़ 9’ के पत्रकारों पर हमले का मामला हो या राजस्थान पुलिस का अमन चोपड़ा के घर पर पहुँच जाना, एडिटर्स गिल्ड चूँ तक नहीं करता। लेकिन, जब कार्रवाई चीन के दलाल गिरोह पर होती है तो यही एडिटर्स गिल्ड कहता है कि ‘प्रेस फ्रीडम’ के खिलाफ आपराधिक कानूनों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
एडिटर्स गिल्ड का भी ऐसा ही दोहरा रवैया
‘एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया’ एक बयान जारी कर के पुलिस-प्रशासन पर प्रक्रियाओं का पालन न करने का आरोप मढ़ता है, साथ ही इस बात पर चिंता जताता है कि कहीं ये मीडिया को चुप कराने की कोशिश तो नहीं। ये अलग बात है कि जब एक न्यूज़ रिपोर्ट के लिए सुधीर चौधरी पर कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार FIR कर देती है, तब ये संगठन चुप बैठ जाता है। मणिपुर हिंसा पर तो ये ‘फैक्ट फाइंडिंग मिशन’ चलाता है, लेकिन राजस्थान में महिलाओं के खिलाफ अपराध की बात आती है तो इसे एक भी फैक्ट नज़र नहीं आता।
हमें आज मीडिया के इस गिरोह को पहचानने की ज़रूरत है। आज इनके इशारे पर सरकार नहीं चलती, सोशल मीडिया पर आम आदमी इनके झूठ का पर्दाफाश कर देता है और आम पत्रकार इनके बीच घुस कर आईना दिखाते हैं – इससे ये तिलमिला उठे हैं। आज जम्मू कश्मीर और अरुणाचल प्रदेश को भारत से अलग बताने की साजिश रचने वालों का समर्थन हो रहा है। जब बात देश की संप्रभुता और अखंडता की आएगी, जनता हर कार्रवाई का समर्थन करेगी। अब वो ज़माना गया, जब मुट्ठी भर पत्रकारों का गिरोह दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के चुनाव को प्रभावित करता था।