आम आदमी पार्टी (आप) के सांसद संजय सिंह के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के पास पुख्ता सबूत है। ईडी के सूत्रों ने इसकी पुष्टि की है। संजय सिंह को बुधवार (4 सितंबर, 2023) को दिल्ली में उनके आवास पर 10 घंटे की लंबी छापेमारी के बाद गिरफ्तार किया गया था। उनकी ये गिरफ्तारी दिल्ली शराब नीति घोटाले के सिलसिले में हुई थी। इस गिरफ़्तारी ने राजनीतिक हलकों में भूचाल ला दिया है। वहीं दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट ने राज्यसभा सांसद संजय सिंह को 10 अक्टूबर तक 5 दिनों की रिमांड पर भेज दिया है।
दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट ने अब खत्म हो चुकी दिल्ली की आबकारी नीति या शराब घोटाला मामले में आम आदमी पार्टी के नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह को 10 अक्टूबर तक रिमांड पर भेज दिया है।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गुरुवार को संजय सिंह को उनके दिल्ली स्थित आवास पर ईडी अधिकारियों… pic.twitter.com/7lUoXZrDkA
जाँच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, ईडी का दावा है कि उसके पास इस बात के पुख्ता सबूत हैं कि संजय सिंह को इस केस में आरोपित से सरकारी गवाह बने दिनेश अरोड़ा से काफी रकम मिली थी। कथित तौर पर ईडी ने दोनों के बीच साफ तौर पर पैसे का लेन-देन पुख्ता किया है। यह आरोप है कि सिंह ने अब खत्म हो चुकी शराब नीति को तैयार करने में अहम भूमिका निभाई थी और इसके लिए करोड़ों की रिश्वत ली थी।
सूत्र बताते हैं कि ईडी के पास दिनेश अरोड़ा के आप सांसद संजय सिंह के पैसे लेने की बात कबूलने के अलावा अन्य बयान भी हैं। यही वजह है कि इस वाकए ने ईडी को जाँच का दायरा बढ़ाने के लिए केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) को लिखने के लिए प्रेरित किया।
संजय सिंह की गिरफ्तारी ने आप और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के बीच पहले से ही चल रहे राजनीतिक विवाद को और हवा दे दी है। आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने इस गिरफ्तारी की निंदा करते हुए इसे पूरी तरह से अवैध करार दिया है।
सीएम केजरीवाल ने ये भी कहा कि ये आगामी 2024 के आम चुनावों को लेकर भाजपा की आशंका का नतीजा है। लोकसभा चुनावों में भाजपा को हार का डर है। उन्होंने ईडी की कार्रवाई को सत्तारूढ़ पार्टी का आखिरी हताश कोशिश कहा है। वो एमपी संजय सिंह गिरफ्तारी के बाद उनके परिवार से मिलने भी गए।
गौरतलब है कि पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के बाद संजय सिंह की गिरफ्तारी दिल्ली शराब नीति मामले में दूसरी हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारी है। संजय सिंह की गिरफ्तारी वाईएसआर कॉग्रेस पार्टी के लोकसभा सांसद मगुंटा श्रीनिवासुलु रेड्डी के बेटे राघव मगुंटा और कारोबारी दिनेश अरोड़ा को कथित शराब नीति घोटाले से संबंधित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सरकारी गवाह बनने की मंजूरी देने के तुरंत बाद हुई है।
एमपी सिंह ने अपनी गिरफ्तारी से पहले रिकॉर्ड किए गए एक वीडियो मैसेज में अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों का जोरदार खंडन किया है। इसमें उन्होंने ईडी पर उन्हें बगैर किसी सबूत के गिरफ्तार करने का आरोप लगाया। उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखने का संकल्प लिया और कहा कि वह डरेंगे नहीं।
वहीं दूसरी तरफ इस राजनीतिक उथल-पुथल के बीच भाजपा ने आप नेताओं के खिलाफ शराब घोटाले के आरोपों को दिखाते हुए पोस्टर जारी किए। आप सांसद संजय सिंह की गिरफ्तारी के जवाब में विपक्षी गठबंधन ने भी केंद्र सरकार की आलोचना तेज कर दी।
बता दे कि ईडी ने बुधवार (5 अक्टूबर, 2023) को राउज एवेन्यू कोर्ट में आप सांसद संजय सिंह को पेश किया और 10 दिनों की रिमांड माँगी। हालाँकि, सिंह के वकील मोहित माथुर ने इसका विरोध किया। वहीं दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट ने अब खत्म हो चुकी दिल्ली की आबकारी नीति या शराब घोटाला मामले में आम आदमी पार्टी के नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह को 10 अक्टूबर तक रिमांड पर भेज दिया है।
वकील माथुर ने कोर्ट को कहा कि जब जाँच एजेंसी को किसी को गिरफ्तार करने का मन होता है तो पुराने बयानों को निकाल लाते हैं। उन्होंने कहा, “मुख्य गवाह (दिनेश अरोड़ा) दोनों मामलों में आरोपित हैं और दोनों मामलों में सरकारी गवाह बनाए गए हैं।”
इसके बाद कोर्ट ने इस मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया है। ये मामला लगातार सुलझ रहा है और राजनीतिक तनाव चरम पर है अब ये देखना बाकी है कि यह हालात दिल्ली की राजनीति पर क्या असर डालते हैं।
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक (British PM Rishi Sunak) ने जेंडर विचारधारा चलाने और बच्चों को भ्रमित करने वालों पर करारा प्रहार किया है। उन्होंने कहा है किसी को इस बात में विश्वास करने के लिए परेशान नहीं किया जाना चाहिए कि एक पुरुष, पुरुष है और महिला, महिला है। उन्होंने कहा कि यह साधारण और कॉमन सेन्स है।
ब्रिटेन के पहले हिंदू प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने कन्जर्वेटिव पार्टी की सालाना कॉन्फ्रेंस में कहा, “हमें इस बात पर विश्वास ना करने के लिए परेशान नहीं किया जाना चाहिए कि कोई किसी भी लिंग का हो सकता है। एक पुरुष एक पुरुष है, एक महिला एक महिला है, यह सिर्फ कॉमन सेन्स है।”
प्रधानमंत्री ने अपने बयान में कहा कि कोई किसी भी लिंग का नहीं हो सकता है। अब सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। बता दें कि अमेरिका, ब्रिटेन समेत तमाम पश्चिमी देशों में बच्चों को बताया जा रहा है कि कोई पुरुष पैदा हो महिला, वह जो चाहे अपने आप को वह मान सकते हैं।
इस पर पश्चिमी देशों में लम्बे समय से बहस भी चलती आई है। प्रधानमंत्री ऋषि सुनक द्वारा कहे गए विचारों का अधिकांश रूढ़िवादी विचारक समर्थन करते हैं। लिबरल विचारक लगातार लोगों को यह समझाने में जुटे हुए हैं कि संसार में पुरुष और स्त्री के अलावा और भी तरह के लोग होते हैं।
ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने इस कथन के जरिए अपनी पार्टी में अगले चुनावों तक अपनी प्रधानमंत्री पद की जिम्मेदारी भी मजबूत कर ली। इस कॉन्फ्रेंस में प्रधानमंत्री सुनक ने ब्रिटेन से सम्बन्धित अन्य मुद्दों पर भी अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं और सांसदों को संबोधित किया।
प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने ब्रिटेन में बाहर से आने वाले अवैध घुसपैठियों के विषय में भी बात की। ब्रिटेन में यह एक बड़ी समस्या है। प्रधानमंत्री सुनक ने बताया कि उनकी सरकार के एक वर्ष के कार्यकाल में वह बाहर से समुद्र के रास्ते आने वाले अवैध घुसपैठियों की नावों को 20% तक रोकने में सफल रहे हैं।
प्रधानमंत्री सुनक ने ब्रिटेन में सिगरेट के कारण होने वाली मौतों पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा है कि चाहे कितनी भी कम सिगरेट पी जाए, वह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक ही है। उन्होंने इसकी रोकथाम के लिए कहा है कि हम प्रति वर्ष सिगरेट पीने की कम से कम आयु एक वर्ष बढ़ाते रहेंगे।
फ्रांस के प्रसिद्ध पत्रकार फ्रांस्वा गॉटियर ने कहा है कि हिन्दू भारत में बहुसंख्यक हैं, लेकिन उनकी मानसिकता अल्पसंख्यकों वाली है। गॉटियर आजकल भारत में ही रहते है। वह महाराष्ट्र के पुणे में छत्रपति शिवाजी महाराज की स्थापना कर चुके हैं। इसके लिए लगातार विदेशों से चंदा जुटाने में लगे हुए हैं। वे फ्रांस के विभिन्न अख़बारों में काम कर चुके हैं। वह कई दशकों से भारत में रह रहे हैं और उन्होंने एक भारतीय नमृता बिंदर से विवाह भी किया है।
गॉटियर ने एक साक्षात्कार में हिन्दुओं को लेकर कई महत्वपूर्व बातें कही हैं। उन्होंने कहा, “हमें इतिहास से यह सबक मिला है कि हिन्दुओं को लड़ना चाहिए। विश्व में आज भी हिन्दू धर्म पर हमले हो रहे हैं। चाहे पाकिस्तान हो या अफगानिस्तान हो। ईसाई मिशनरियों द्वारा धर्मांतरण अब यह बहुत बड़ी समस्या है, विशेष कर पंजाब और दक्षिण में।”
उन्होंने आगे कहा, “केबल टीवी के माध्यम से भारत का पश्चिमीकरण हो रहा है। पूरे विश्व में विशेषज्ञों को भारत के विषय में बताने के लिए सरकारों द्वारा कहा जाता है, जो कि समझने के लिए काफी कठिन देश है। यह विशेषज्ञ हिन्दुओं के प्रति द्वेष भाव रखते हैं।” गॉटियर ने कहा, “हिन्दू धर्म कभी नहीं कहता कि आप धर्मान्तरित हो जाओ या फिर मैं आपको धर्मान्तरित करने के लिए मिशनरी भेज दूँगा।”
उन्होंने इस विशेषज्ञों द्वारा हिन्दुओं के विषय में फैलाई जाने वाली घृणा को लेकर कहा, “यह विशेषज्ञ लगातार कहते रहते हैं कि हिन्दू रूढ़िवाद, इस्लामिक रूढ़िवाद के समान है जो कि बिलकुल झूठ है। ऐसा इसलिए है क्योंकि हिंदुत्व कभी भी भारत के बाहर विश्व विजय पर नहीं गया और ना ही अपने धर्म को इस तरह से रखा जैसे कि ईसाईयत ने दक्षिण अमेरिका की सभी सभ्यताओं को साफ़ कर दिया और ना ही इस्लाम की तरह जिसने मिस्र की सभ्यता को खत्म कर दिया।”
गॉटियर ने कहा कि हिन्दुओं की संख्या 1.3 अरब है और वह विश्व का तीसरा सबसे बड़ा धर्म है। हिन्दू सबसे शांतिपूर्ण लोग हैं, लेकिन हिन्दुओं की मानसिकता अल्पसंख्यकों के जैसी है। यही सबसे बड़ी समस्या है। भारत में भी वह बहुसंख्यक हैं, लेकिन मानसिकता अल्पसंख्यक की रखते हैं। जब गॉटियर से पश्चिमी देशों में भारत में हिंदुत्व के बढ़ते प्रभाव को लेकर की जाने वाले नकारात्मक रिपोर्टिंग के विषय में पूछा गया तो उन्होंने इसे बकवास बताया।
गॉटियर ने कहा, “यह बेवकूफी है। हिन्दू विश्व में सबसे सहिष्णु लोग हैं। आज भी हम यह देख रहे हैं कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सभी समुदायों- हिन्दू, मुस्लिम, सिख और ईसाई का ध्यान रखते हैं। इसलिए जो भी यह कहता है कि हिंदुत्व के माध्यम से चरमपंथ को बढ़ावा दिया जा रहा है, वह इस महान धर्म को अपमानित कर रहा है।”
सीवान के जेडए इस्लामिया कॉलेज (ZA Islamia College of Siwan) ने छात्र-छात्राओं के साथ बैठने पर पाबंदी लगा दी है। बातचीत करने और साथ हँसने पर भी बैन लगाया गया है। इस कॉलेज की बुर्का वाली छात्राओं का बॉयफ्रेंड के लिए लड़ाई करने का वीडियो हाल ही में वायरल हुआ था।
सीवान का इस्लामिया कॉलेज बिहार के जयप्रकाश विश्वविद्यालय से संबंधित है। कॉलेज ने लड़कियों और लड़कों के साथ बैठने और बातचीत करने पर पाबंदी को लेकर नोटिस जारी किया है। कॉलेज प्रशासन का कहना है कि यह कदम कॉलेज में अनुशासन कायम करने के लिए उठाया गया है।
कॉलेज के प्राचार्य के द्वारा जारी पत्र में कहा गया है, “कॉलेज में छात्र-छात्राएँ अक्सर एक साथ बैठते और बातचीत करते हैं, जो कॉलेज में अनुशासन को बिगाड़ रहा है। इसलिए, कॉलेज में लड़कियों और लड़कों के साथ बैठने और बातचीत करने पर पाबंदी लगा दी गई है।” कॉलेज द्वारा जारी आदेश के मुताबिक, कक्षा खत्म होने के बाद छात्र-छात्राएँ एक साथ बैठकर पढ़ाई एवं बातचीत नहीं कर सकते हैं। यही नहीं, साथ में हँसी-मजाक पर भी बैन लगाया गया है। अगर कोई ऐसा करता पकड़ा जाएगा, तो उसका नाम कॉलेज से काट दिया जाएगा।
अल्पसंख्यक कॉलेज, नियम बनाने का संवैधानिक हक
हैरान करने वाली ये है कि इस नोटिस में संविधान की धारा 29 और 30 का भी जिक्र किया गया है। प्राचार्य के आदेश से जारी नोटिस में संविधान की धारा 29 एवं 30 का हवाला देते हुए कहा गया है कि यह एक अल्पसंख्यक महाविद्यालय है और इससे जुड़े फैसले लेने का हक कॉलेज प्रशासन के पास है। इस मामले में कोई हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता है।
इस्लामिया कॉलेज प्रशासन की सफाई
इस नोटिस के बारे में मीडिया वालों के सवाल का जवाब देते हुए प्रिंसिपल मोहम्मद इदरिस आलम ने कहा कि कॉलेज में ‘शरारती तत्व’ आते हैं। वे यहाँ की लड़कियों से बातचीत करते हैं। हँसी-मजाक होता है। इसे ही रोकने के लिए ये पत्र जारी किया गया है, ताकि बाहर के लोग कॉलेज में न घुसें और कॉलेज का अनुशासन बना रहे।
बॉयफ्रेंड के लिए बुर्के में लड़ाई का वीडियो हुआ था वायरल
बता दें कि कुछ दिनों पहले सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ था। इसमने बुर्का पहने कुछ लड़कियाँ मारपीट कर रही थी। ये लड़कियाँ इसी इस्लामिया कॉलेज का था। कथित तौर पर वीडियो में मारपीट करते दिख रही लड़कियों के बीच बॉयफ्रेंड को लेकर पहले क्लास में झगड़ा हुआ। बाद में कॉलेज बंद होने पर दोनों सड़क पर फिर से उसी बात पर झगड़ने लगी। इस दौरान दोनों के बीच लात-घूँसे चले।
नेशनल शूटर तारा शाहदेव लव जिहाद मामले में सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने दोषी रकीबुल हसन उर्फ रंजीत कोहली को उम्रकैद की सजा सुनाई है। इसके साथ ही रकीबुल की अम्मी कैशर रानी को 10 साल और साजिश रचने के आरोपित रहे हाईकोर्ट के बर्खास्त रजिस्ट्रार मुश्ताक अहमद को 15 साल कैद की सजा सुनाई गई है। वहीं, सभी दोषियों पर 50-50 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है।
रकीबुल हसन ने तारा शाहदेव से अपनी पहचान छुपाकर शादी की थी और बाद में धर्म परिवर्तन कर इस्लाम अपनाने के लिए उन्हें प्रताड़ित करता था। इस फैसले के बाद तारा शाहदेव ने कहा, ”मैं कोर्ट और सीबीआई को धन्यवाद देना चाहती हूँ, जिन्होंने मुझे न्याय दिलाया। ये न्याय सिर्फ मेरे लिए नहीं है, देश की हर बेटी को ये भरोसा मिलेगा कि जो भी उनके साथ ऐसा करेगा, उसे सजा मिलेगी।”
#WATCH | Ranchi, Jharkhand: National Shooter Tara Shahdeo says, "I want to thank the court and the CBI who served me justice. This justice is not just for me, every daughter in the country will gain trust that whoever does this to them will be punished. People who do this would… pic.twitter.com/zBpgxOWocZ
तारा शाहदेव ने आगे कहा, “इस फैसले के बाद डर बनेगा कि किसी के साथ ऐसा व्यवहार न करें। जब मेरी लड़ाई शुरू हुई तो इसे घरेलू हिंसा का नाम दे दिया गया, लेकिन मेरी कोशिश थी कि किसी भी लड़की के साथ ऐसा न हो। लोग यह शब्द बोलने से झिझक रहे थे। इस फैसले के बाद वे इसके ख़िलाफ़ खुलकर सामने आएँगे।”
National Shooter Tara Shahdeo forced conversion case | CBI court pronounces quantum of punishment for the convicted Raqibul aka Ranjit Kohli, sentences him to life imprisonment.
His mother Kaushar Rani has been pronounced ten years imprisonment. The then registrar of the High…
दरअसल झारखंड की राजधानी राँची में साल 2014 में यह केस चर्चा में आया था। सीबीआई से पहले झारखंड पुलिस इस केस की जाँच कर रही थी। इसके बाद झारखंड हाईकोर्ट के आदेश पर केस को साल 2015 में सीबीआई को सौंप दिया गया। इस मामले में तीनों आरोपितों के खिलाफ साल 2017 में कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की गई थी। वहीं, सीबीआई की विशेष अदालत ने इस केस में तीनों आरोपितों को 30 सितंबर 2023 को दोषी करार दिया था।
जानकारी के मुताबिक, जब तारा शाहदेव राष्ट्रीय स्तर पर शूटिंग प्रतियोगिता में बेहतर प्रदर्शन के लिए होटवार में अभ्यास कर रही थी। इस दौरान उनकी दोस्ती दोस्ती रकीबुल हसन उर्फ रंजीत सिंह कोहली से हुई। राँची की रहने वाली शाहदेव ने आरोप लगाया था कि कोहली ने अपने प्यार के जाल में फँसाकर आखिरकार अगस्त 2014 में उनसे शादी करने के लिए कहा। इस दौरान उसने अपनी मुस्लिम पहचान छुपाए रखी।
शादी के बाद ही उसे पता चला कि उसके पति का असली नाम रकीबुल हसन है। इसके बाद तारा के सताने का दौर शुरू हो गया। बाद में हसन और उसकी माँ उन पर धर्म बदलने के लिए दबाव डालने लगे। तारा का आरोप था कि धर्म परिवर्तन से इनकार करने पर उन्हें कुत्ते से कटवाया गया और प्रतिबंधित मांस खिलाने की कोशिश की गई थी। बाद में वह किसी तरह वो इनके चंगुल से बचकर भागी थी। इसके बाद ये मामला पुलिस थाने तक पहुँचा था।
तारा ने यह भी आरोप लगाया था कि शादी के बाद भी कई लड़कियाँ हसन से मिलने आती थीं। उन्होंने कहा था कि कोहली बना रकीबुल हसन राँची रेलवे स्टेशन के पास एक होटल में स्थायी रूप से एक कमरा बुक करवाया था, जहाँ वह इन लड़कियों को प्रभावशाली लोगों के पास भेजकर उनका मनोरंजन करता था।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राजस्थान के जोधपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में भारत द्वारा कोरोना वैक्सीन के निर्माण पर बनाई गई फिल्म ‘द वैक्सीन वॉर’ की प्रशंसा की है। उन्होंने फिल्म बनाने वालों को बधाई देने के साथ कहा है कि इसमें वैज्ञानिकों की मेहनत को दर्शाया गया है। गहलोत के अलावा पीएम मोदी का भाषण लाल डायरी, पेपरलीक, विकास, महिला अपराध और भ्रष्टाचार पर फोकस रहा।
प्रधानमंत्री जोधपुर में कई योजनाओं का शिलान्यास करने और कई का लोकार्पण करने गए हुए थे। प्रधानमंत्री ने इस दौरान दो नई ट्रेनों को रवाना किया और नए IIT ब्लाक का लोकार्पण किया। प्रधानमंत्री ने इस दौरान कहा कि मैं रेलवे स्टेशन को एयरपोर्ट से भी बढ़िया बना दूँगा।
प्रधानमंत्री ने इसके अतिरिक्त सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा से संबंधित कई प्रोजेक्ट की आधारशिला रखी। इस कार्यक्रम के पश्चात प्रधानमंत्री ने एक विशाल जनसभा को संबोधित किया जहाँ उन्होंने राजस्थान सरकार की नाकामियाँ गिनाई और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर हमला बोला।
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज सरकारी कार्यक्रम में अशोक गहलोत नहीं आए क्योंकि उनको भरोसा है कि मोदी आएगा तो ठीक होगा। मैं गहलोत जी से कहता हूँ आप विश्राम कीजिए, हम सब सँभाल लेंगे। प्रधानमंत्री ने कहा कि भाजपा आएगी तो खुशहाली लाएगी।
प्रधानमंत्री ने इसी दौरान हाल ही में आई फिल्म द वैक्सीन वॉर का भी अपने भाषण में जिक्र किया। उन्होंने कहा, “मैंने सुना है कि आजकल एक मूवी आई है, ‘द वैक्सीन वॉर’, मैंने सुना है कोविड से लड़ाई लड़ने के लिए हमारे वैज्ञानिकों ने जो मेहनत की। अपनी लैब में एक ऋषि की तरह साधना की, उन सारी बातों को एक बढ़िया तरीके से वैक्सीन वॉर फिल्म में दर्शाया गया है। हमें गर्व हो रहा है कि हमारे वैज्ञानिक ऐसा काम कर रहे हैं। वैक्सीन वॉर फिल्म बनाकर इसके निर्माताओं ने देश के वैज्ञानिकों और विज्ञान को महत्व दिया है।”
#WATCH | Jodhpur, Rajasthan: "I have heard that a film 'The Vaccine War' has come. The scientists of our country worked hard day and night to fight COVID-19 in India…All these things have been shown in that film… I congratulate the makers of this film for giving importance to… pic.twitter.com/XQvUc6Ne9O
गौरतलब है कि हाल ही में फिल्म निर्देशक विवेक रंजन अग्निहोत्री ने ‘द वैक्सीन वॉर’ फिल्म रिलीज की है जिसमें दर्शाया गया है कि भारत ने कैसे कोरोना महामारी के बाद स्वदेशी वैक्सीन बनाई। इस फिल्म में यह भी दर्शाया गया है कि भारतीय वैज्ञानिकों की मेहनत को रोकने का प्रयास भी किया गया।
प्रधानमंत्री ने राजस्थान सरकार की विफलताओं को भी गिनाया। उन्होंने कहा, “कॉन्ग्रेस की एक और आखिरी नीति केवल और केवल तुष्टिकरण है। रामनवमी, परशुराम जयंती , हनुमान जयंती कोई भी त्यौहार ऐसा नहीं है जिसमें राजस्थान से पत्थरबाजी की खबर न आती हो।”
प्रधानमंत्री मोदी ने भ्रष्टाचार पर बात करते यह भी कहा कि कॉन्ग्रेस सरकार राजस्थान में 5 साल में एक कदम भी नहीं चली है। यहाँ सिर्फ कुर्सी का खेल चलता रहा और कॉन्ग्रेस नेता प्रदेश को लूटने में लगे रहे। लोग कहते हैं कि लाल डायरी में कॉन्ग्रेस के हर भ्रष्टचार की काली करतूत लिखी है। इसके राज खुलने चाहिए, लेकिन कॉन्ग्रेस ऐसा होने नहीं देगी। इसलिए, भाजपा की सरकार लाइए। हम भ्रष्टाचार करने वालों को छोड़ने वाले नहीं हैं।
आगे उन्होंने कहा, “कॉन्ग्रेस भाजपा का विरोध करते-करते भारत का विरोध करने लगी है। आज पूरी दुनिया में भारत का डंका बज रहा है, लेकिन कॉन्ग्रेस को इससे दिक्कत हो रही है।” प्रधानमंत्री ने गहलोत सरकार पर विकास के लिए होने वाली चर्चा में प्रतिबंधित आतंकी संगठन पोपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया को बुलाने का आरोप लगाया है।
आज कांग्रेस, भाजपा का विरोध करते-करते भारत का विरोध करने लगी है।
गौरतलब है कि राजस्थान में जल्द ही विधानसभा चुनाव होने वाले हैं और सामने आ रहे सर्वे से यह स्पष्ट हो रहा है कि राज्य में सत्ता बदलने के पूरे आसार हैं। प्रधानमंत्री मोदी इन्हीं चुनावों की तैयारी को भी आचार संहिता लगने से पहले धार दे रहे हैं।
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने तीन दिन पहले इस्लामिक स्टेट (ISIS) के तीन आतंकियों को गिरफ्तार किया है। इनके नाम शाहनवाज आलफ उर्फ सफीउज्जमा, अरशद वारसी और रिजवान अब्दुल हाजी अली हैं। इनमें से शाहनवाज आलम आईएस के पुणे मॉड्यूल का हिस्सा था।
शाहनवाज NIA की गिरफ्त से एक बार पहले भाग चुका है। उस पर एनआईए ने तीन लाख रुपए का ईनाम भी रखा था। वहीं, उसे दिल्ली में शाहनवाज को शरण देने वाला अरशद वारसी था। वह दिल्ली के जामिया मिल्लिया विश्वविद्यालय से पीएचडी कर रहा है। अरशद वारसी तिहाड़ जेल में बंद शरजील इमाम का साथी है और वो दिल्ली के हिंदू विरोधी दंगों के साथ ही शाहीन बाग के प्रदर्शनों में अहम भूमिका निभा चुका है।
शाहनवाज उर्फ सफीउज्जमा हजारीबाग का रहने वाला है। वो तीन साल से परिवार के संपर्क में भी नहीं था। उसके पिता इंटर कॉलेज के प्रिंसिपल रह चुके हैं। साल 2020 में हजारीबाग पुलिस ने अवैध हथियार रखने के आरोप में शाहनवाज को गिरफ्तार किया था। इसमें जमानत मिलने के बाद से वह फरार था और पहले पुणे, फिर दिल्ली में रहकर आईएस के लिए भर्तियाँ कर रहा था। उसने गुजरात की एक हिंदू लड़की बसंती पटेल को मरियम बनाकर निकाह भी किया है।
शाहनवाज को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने 2 अक्टूबर 2023 को गिरफ्तार किया था। शाहनवाज के साथ ही दिल्ली पुलिस ने रिजवान और अरशद वारसी को गिरफ्तार किया है। झारखंड का रहने वाले अरशद वारसी ने लॉकडाउन के दौरान मुरादाबाद की लड़की जैनब से निकाह कर लिया था।
वारसी 1 अक्टूबर को अपनी ससुराल में जाकर छिप गया था। वहाँ से उसे दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने छापेमारी कर गिरफ्तार कर लिया। अरशद वारसी ने अलीगढ़ से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान जैनब के साथ नजदीकी बढ़ाई थी और दिल्ली में रहते हुए उसने परिजनों की सहमति से निकाह किया था।
दिल्ली को निशाना बनाने की थी साजिश
दिल्ली पुलिस ने बताया है कि तीनों संदिग्ध आतंकी मंदिरों और भीड़भाड़ वाली जगहों पर दिवाली से पहले धमाके की साजिश रच रहे थे। आतंकी साजिश के आरोप में गिरफ्तार अरशद ने पूछताछ में बताया है कि वो 2016 से कट्टरपंथी गतिविधियों में शामिल है। वो आईएस के आतंकी शाहनवाज को पहले से जानता है और अब दिल्ली में वो दोनों मिलकर आतंकी हमले की साजिश रच रहे थे।
काफी टेढ़ा निकला अरशद वारसी
अरशद वारसी झारखंड के गढ़वा का रहने वाला है। उसे पिता गढ़वा के हाईस्कूल में शिक्षक हैं। वो शरजील इमाम का अभिन्न साथी है। दोनों साथ ही में जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पीएचडी कर रहे हैं। दिल्ली पुलिस ने बताया है कि अरशद जामिया में पढ़ते हुए रेडिकल छात्रों का ग्रुप संचालित करता था और शाहीन बाग के प्रदर्शन के आयोजन में अहम भूमिका निभा चुका था।
आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक, अरशद वारसी ने शरजील इमाम के साथ मिलकर दिल्ली दंगों के लिए जमीन तैयार की थी। उसका जिक्र चार्जशीट में भी है। चार्जशीट के मुताबिक, एंटी सीएए-एनआरसी प्रोटेस्ट के लिए शरजील इमाम, उमर खालिद और अरशद वारसी ने अलग-अलग वाट्स ग्रुप और संगठन बनाया गया था, जिसमें अरशद ने ‘स्टूडेंट ऑफ जामिया’ नाम का एक ग्रुप दंगों के पहले 2019 में बनाया गया था।
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने ‘स्टूडेंट ऑफ जामिया’ को रेडिकल ग्रुप करार दिया है। यही नहीं, अरशद ने शरजील इमाम के साथ मिलकर एंटी सीएए-एनआरसी प्रदर्शनों के दौरान दिल्ली के कई मस्जिदों और मुस्लिम इलाकों में भड़काऊ पर्चे बाँटे थे, जिसमें अयोध्या राम मंदिर Vs बाबरी मस्जिद मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने पर चक्का जाम करने और विरोध प्रदर्शनों की अपील की गई थी।
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के मंगलवार (3 अक्टूबर,2023) को न्यूज़क्लिक के संस्थापक और संपादक प्रबीर पुरकायस्थ और एचआर प्रमुख अमित चक्रवर्ती की गिरफ्तारी ने इस मामले को सुर्खियों में ला दिया है। इसके बाद दोनों को बुधवार (4 अक्टूबर, 2023) को दिल्ली की एक अदालत ने सात दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है।
दिल्ली पुलिस ने कहा कि न्यूज़क्लिक के फाउंडर पुरकायस्थ को इस बात के सबूत मिलने के बाद गिरफ्तार किया गया कि उनके ऑनलाइन न्यूज पोर्टल ने यह दिखाने के लिए “वैश्विक एजेंडा” चलाया कि अरुणाचल प्रदेश और कश्मीर भारत का हिस्सा नहीं हैं। पुलिस के मुताबिक, प्रबीर पुरकायस्थ और अमित चक्रवर्ती को उक्त नक्शा बनाने के लिए 115 करोड़ रुपए से अधिक की विदेशी फंडिंग मिली थी।
दिल्ली पुलिस ने पटियाला हाउस कोर्ट में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश हरदीप कौर के सामने दोनों को हिरासत में लेकर पूछताछ करने के लिए अपनी दलीलें रखीं। पुलिस ने कोर्ट को हिरासत में रखने की वजहों में पूरी साजिश का खुलासा करने, डिजिटल डिवाइसेज से निकाले गए सबूतों पर आरोपितों से पूछताछ करने, पीपीके न्यूज़क्लिक कार्यालय में तलाशी पूरी करने और आपत्तिजनक ईमेल सामग्री के बारे में आरोपितों से तहकीकात करने की जरूरतों को गिनाया। गौरतलब है कि पुलिस ने शुरू में दोनों आरोपितों के लिए 15 दिन के लिए पुलिस हिरासत की माँग की थी।
रिमांड नोट क्या कहता है?
पुलिस के कोर्ट को सौंपे गए रिमांड नोट में खास तौर से साल 2019 के आम चुनावों को नाकाम करने की साजिश से लेकर भारत के बिगड़े नक्शे के प्रसार तक कई आरोप इसमें लगाए गए हैं। स्पेशल सेल का आरोप है कि पुरकायस्थ और अन्य को भारत में असंतोष फैलाने के लिए पैसा मिला।
रिमांड नोट में जिक्र किया गया है कि प्रबीर पुरकायस्थ, नेविल रॉय सिंघम और सिंघम के स्वामित्व वाली शंघाई की कंपनी स्टारस्ट्रीम के कुछ अन्य चीनी कर्मचारियों के बीच ईमेल का लेन-देन हुआ है, जो कश्मीर और अरुणाचल प्रदेश को भारत के हिस्से के तौर पर न दिखाने के उनके इरादे को उजागर करता है। इन लोगों ने वैश्विक और घरेलू स्तर पर यह कहानी फैलाने की साजिश रची कि कश्मीर और अरुणाचल प्रदेश विवादित क्षेत्र है।
रिमांड नोट्स में कहा गया है कि भारत की उत्तरी सीमाओं के साथ छेड़छाड़ करने और नक्शों में कश्मीर और अरुणाचल प्रदेश को भारत के हिस्सों के रूप में न दिखाने की उनकी कोशिश भारत की एकता और क्षेत्रीय अखंडता को कमजोर करने के इरादे से किया गया काम है। इसमें इस बात का भी जिक्र है कि प्रबीर पुरकायस्थ ने 2019 के आम चुनावों के दौरान चुनावी प्रक्रिया को बाधित करने के लिए पीपुल्स अलायंस फॉर डेमोक्रेसी एंड सेक्युलरिज्म (पीएडीएस) नामक एक समूह के साथ मिलकर साजिश रची थी।
दिल्ली सेल ने आगे आरोप लगाया कि पीएडीएस का इस्तेमाल साजिश के तहत अवैध तौर से भेजे गए विदेशी फंड के करोड़ों रुपए के बदले में पेड न्यूज के जरिए झूठी बातें फैलाने के लिए किया गया था। स्पेशल सेल ने रिमांड नोट में ये भी जिक्र किया है, “कोविड-19 महामारी को रोकने के लिए भारत सरकार के कोशिशों को बदनाम करने के लिए भी एक झूठी कहानी फैलाई गई है।”
स्पेशल सेल ने अपने रिमांड नोट में कहा, “यह पता चला है कि साल 2018 में पीपीके न्यूज़क्लिक स्टूडियो प्राइवेट लिमिटेड के स्थापित होने के बाद से ही गौतम नवलखा इसके शेयरधारक रहे हैं। नवलखा प्रतिबंधित नक्सलियों का समर्थन करने जैसी भारत विरोधी और गैरकानूनी गतिविधियों में सक्रिय तौर से शामिल रहे। उनकी पाकिस्तान के आईएसआई एजेंट गुलाम नबी फाई के साथ देश-विरोधी साँठगाँठ है। यह भी पता चला कि गौतम नवलखा और पुरकायस्थ ने 1991 में सागरिक प्रोसेस एनालिस्ट प्राइवेट लिमिटेड बनाई थी। उस वक्त से ही दोनों जुड़े हुए हैं।
रिमांड नोट में आगे कहा, “जाँच के दौरान यह भी जानकारी मिली कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी 14 अगस्त 2023 को नंबर एफ.नंबर: ईसीआईआर/14/एचआईयू/2020 के तहत पीपीके न्यूजक्लिक स्टूडियो प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ केस दर्ज किया था। इस जाँच के दौरान ईडी ने मौजूदा एफआईआर में नामित संदिग्धों से जुड़े पीपीके के इलेक्ट्रॉनिक गैजेट जब्त कर लिए थे। इनसे निकाला गया डेटा पांच हार्ड डिस्क में लिया गया था और उसका विश्लेषण किया गया था। इस डेटा में प्रबीर पुरकायस्थ,अमित चक्रवर्ती और अन्य संदिग्धों के ईमेल डंप में कुल 4.27 लाख ईमेल हैं। इसमें कथित कंपनी और कथित संदिग्धों से संबंधित बड़ी संख्या में दस्तावेज़ भी शामिल हैं।”
न्यूज क्लिक पर हुई छापेमारी
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने यह भी बताया कि आरोपितों ने अवैध विदेशी फंडिंग के जरिए से किसानों के विरोध को लंबा खींचकर सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुँचाने और नष्ट करने की साजिश रची है।
दरअसल, प्रबीर पुरकायस्थ को न्यूज़क्लिक के एचआर हेड अमित चक्रवर्ती की गिरफ्तारी पुलिस के न्यूज़क्लिक परिसर और न्यूज़ पोर्टल से जुड़े कई पत्रकारों और कर्मचारियों के घरों पर छापेमारी के बाद हुई। दिल्ली पुलिस ने दोनों को 3 अक्टूबर को गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत गिरफ्तार किया था। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने इस मामले में 17 अगस्त को न्यूज पोर्टल के खिलाफ यूएपीए की धारा 13, 16, 17, 18, 22 और भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 153 ए और 120 बी के तहत एफआईआर दर्ज की थी।
गौरतलब है कि भारत के खिलाफ चीनी प्रोपेगेंडा के लिए चीन से विदेशी फंडिंग के मामले में दिल्ली पुलिस ने 3 अक्टूबर को न्यूज़क्लिक ऑफिस पर छापा मार कर उसे सील कर दिया था। न्यूज़क्लिक से जुड़े स्थानों के अलावा इस समाचार पोर्टल से जुड़े देश भर में 40 पत्रकारों के आवासों पर भी दिल्ली पुलिस ने छापा मारा था। इनमें तीस्ता सीतलवाड, अभिसार शर्मा, परंजॉय गुहा ठाकुरता, सीपीआई (एम) नेता सीताराम येचुरी, संजय राजौरा और अन्य शामिल थे।
महाराष्ट्र के पुणे में विश्व हिंदू परिषद (विहिप) और बजरंग दल के कई सदस्य मंगलवार (3 अक्टूबर, 2023) को उन मुस्लिम गुंडों के खिलाफ केस दर्ज कराने के लिए मंचर पुलिस स्टेशन में इकट्ठे हुए थे। दरअसल, इन लोगों ने शुक्रवार (29 सितंबर, 2023) की रात को स्थानीय बजरंग दल कार्यकर्ता सूरज चक्रधर धरम के घर पर हमला किया था। हालाँकि, अब इस मामले में पुलिस ने मंचर शहर को शांतिपूर्ण बताया है।
बता दें कि यह हमला 28 सितंबर, 2023 को मंचर में गणपति विसर्जन जुलूस के दौरान मुस्लिमों और हिंदुओं के बीच हुई एक छोटी सी झड़प के बाद हुआ था। इस मामले में हाथापाई शांत होने के बाद भी मुस्लिम भीड़ ने बजरंग दल कार्यकर्ता चक्रधर धरम के घर पर हमला किया था, जबकि इस हमले से एक दिन पहले ही दोनों पक्षों ने समझौता कर लिया था। घर पर चक्रधर के न मिलने पर उनके घर की महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार किया गया और जान से मारने की धमकी दी गई।
इस मामले में यह बात भी सामने आई है कि पुलिस प्रशासन पीड़ित कार्यकर्ता और उनकी माँ की शिकायत पर आरोपितों के खिलाफ केस दर्ज करने में देरी कर रहा था। इसके बाद बजरंग दल कार्यकर्ता और विश्व हिंदू परिषद के सदस्य मिलकर पुलिस स्टेशन पहुँचे। तब कई घंटों की मशक्कत के बाद पुलिस ये मानने को तैयार हुई कि गलती हमलावर मुस्लिम भीड़ की थी।
थाने में शाम से शुरू हुई ये मशक्कत रात करीब 12 से 12:30 बजे तक चलती रही थी। इसके बाद मामले की गंभीरता को महसूस करते हुए मुस्लिमों ने सूरज धरम, उनकी माँ और परिवार के अन्य सदस्यों से बगैर शर्त माफी माँगी। यहीं नहीं उन्होंने एक लिखित माफीनामा भी दिया। इसमें कहा गया कि वे भविष्य में किसी भी तरह से हिंदू युवाओं को नुकसान नहीं पहुँचाएँगे।
मंचर में बजरंग दल और विहिप ने संभाला मोर्चा
इस मामले में पुणे और मंचर के विहिप और बजरंग दल की सक्रियता पीड़ित परिवार के लिए बेहद फायदेमंद साबित हुई। इनमें पुणे जिला के वीएचपी प्रमुख संतोष खामकर, विहिप संचार प्रमुख गणेश राऊत सहित मंचर के बजरंग दल के ब्लाक प्रमुख अक्षय जगदाले, मंचर शहर के बजरंग दल प्रमुख चिन्मय महाजन, वरिष्ठ हिंदू कार्यकर्ता चेतन और महेश थोराट का अहम योगदान रहा। ये लोग सूरज चक्रधर धरम को साथ लेकर अन्य सैकड़ों हिंदू युवाओं के साथ 3 अक्टूबर की शाम को हमलावरों के खिलाफ मामला दर्ज करने के लिए मंचर पुलिस स्टेशन गए।
सूरज की माँ ने शिकायत में कई आरोपितों का जिक्र किया था। इनमें रियाज जमादार, इसरार शाहबाज खान पठान, आजम मोमिन, कय्यूम पठान, मीरान अनीस इनामदार, आकिब रहमान अत्तार, अमन रहमान अत्तार, मोहम्मद सरताज अली जमादार, तरबेज मुख्तार कुरेशी, दानिश सिराज मोमिन, तौकीर मोहम्मद मतीन जमादार, अदनान मोहम्मद, जावेद शेख, मोहम्मद साबिर रिजवान अली सैयद, इरफान तहजान मंडल, अजहर सिराज मोमिन, अतीक वसीम इनामदार, उजेफ वसीम इनामदार, आसिफ खान, जिया अहमद इम्तियाज जमादार, रेहान रिजवान इनामदार, शाहबाज अली इनामदार, सकलैन सरफराज इनामदार, और मोहम्मद फ़ज़ल शेख सहित कई पर हमले का आरोप लगाया गया था।
मंचर पुलिस शुरू में नहीं करना चाहती थी FIR दर्ज
मंचर पुलिस स्टेशन में तैनात एपीआई बलवंत मांडगे ने शुरू में सोमवार (2 अक्टूबर, 2023) को आरोपितों के खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं किया। उन्होंने साफ तौर से सूरज की माँ के अनुरोध को यह कहते हुए नजरअंदाज कर दिया कि गणपति विसर्जन के मौके पर हुई हाथापाई का उसी दिन निपटारा कर दिया गया था। जब ऑपइंडिया ने पुलिस स्टेशन से इस बारे में जानना चाहा कि एफआईआर दर्ज क्यों नहीं की गई, तो वहाँ के पुलिसकर्मियों ने कहा कि अधिकारी ही इस बारे में साफ बता पाएँगे।
हालाँकि, इस मामले में यह बात पूरी तरह से नजरअंदाज कर दी गई कि कथित समझौते के एक दिन बाद कैसे इस हमले को अंजाम दिया गया। यही वजह रही कि 3 अक्टूबर को हिंदू कार्यकर्ता सूरज को लेकर थाने पहुँचे थे। वहीं हिंदू कार्यकर्ताओं के पुलिस स्टेशन पहुँने पर शहर के कई मुस्लिम नेताओं को भी बुलाया गया। इस वजह से पुलिस स्टेशन में लोगों की एक अच्छी खासी भीड़ जमा हो गई थी।
दोनों पक्षों की बात सुनकर पुलिस ने राय दी कि अगर वे केस दर्ज करना चाहते हैं तो वो दोनों पक्षों का केस लेंगे। इसके जवाब में हिंदू कार्यकर्ताओं ने अधिकारियों को समझाया कि दोनों घटनाएँ अलग-अलग थीं। हिंदू कार्यकर्ता पर हमले की बाद की घटना जानबूझकर हिंसा भड़काने और पीड़ित और उसके परिवार को धमकी देने के लिए की गई थी जो कि पूरी तरह से एक अलग मामला है।
हमलावरों ने बगैर शर्त माँगी माफी
इस दौरान पुणे ग्रामीण पुलिस के डीएसपी सुदर्शन पाटिल भी पुलिस स्टेशन में मौजूद थे। उन्होंने सभी लोगों को एक तरफ इंतजार करने को कहा। इसके बाद डीएसपी पाटिल ने मुस्लिम पक्ष के एक सदस्य और सूरज चक्रधर धरम से अलग-अलग पूरा मामला सुना। इस वक्त तक मुस्लिम पक्ष के लोग भी इस बात से सहमत थे कि दूसरे दिन का हमला पहले की घटना के शांत होने के बाद हुआ था। इस मामले में हमलावरों ने हिन्दू परिवार से बेशर्त माफ़ी माँगी थी।
मंचर में हिंदू कार्यकर्ता ने ऑपइंडिया को क्या बताया?
ऑपइंडिया ने इस बारे में विहिप के पुणे जिले के संचार प्रमुख गणेश राउत से बात की। उन्होंने बताया, “3 दिन पहले ही स्थानीय मुस्लिम समुदाय के कुछ असामाजिक तत्वों ने हमारे साथी बजरंग दल कार्यकर्ता सूरज धरम और संतोष धरम के घर पर उनकी गैरमौजूदगी में रात में कायरतापूर्ण हमला किया। हमलावरों ने उसके परिजनों को धमकाया।” राउत ने बताया कि विहिप और बजरंग दल ने इस हमले के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया। इसके साथ ही पीड़ित संग पुलिस स्टेशन जाकर सभी आरोपितों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग की।
गणेश राउत ने आगे कहा, “इसके बाद दोनों पक्षों के नेताओं को पुलिस स्टेशन बुलाया गया। हमने पुलिस अधिकारियों के संज्ञान में यह बात लाई कि गणपति विसर्जन के दौरान झड़प की घटना को तुरंत सुलझा लिया गया था, लेकिन इसके एक दिन बाद का यह हमला हिंसा भड़काने की जानबूझकर की गई एक कोशिश थी। अधिकारियों ने भी इस बात को माना। आपराधिक मानसिकता वाले मुस्लिम समुदाय के अपराधियों को पुलिस अधिकारियों ने सख्त चेतावनी दी और मामले के नतीजों को देखते उन्होंने पीड़ित परिवार से बगैर शर्त माफी माँग ली।”
गणेश राउत ने कहा, “पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में पुलिस स्टेशन में लंबे टकराव के बाद आपसी समझ का यह कदम उठाया गया, जिन्होंने स्थिति को शांत कराने में मदद की। आरोपितों ने यह भी आश्वासन दिया कि सूरज के परिवार के किसी भी सदस्य को नुकसान नहीं पहुँचाया जाएगा और हिंदू कार्यकर्ता के खिलाफ कोई भी गैरकानूनी गतिविधि या हमला उनके द्वारा नहीं किया जाएगा। इसके अलावा, उन्होंने 29 सितंबर की रात को हुई घटना के लिए लिखित माफी भी माँगी है।
उन्होंने आगे कहा, “इस घटना के जरिए विहिप और बजरंग दल आश्वस्त करते हैं कि हम अपने किसी भी हिंदू कार्यकर्ता भाई-बहन को संकट की ऐसी स्थिति में अकेला नहीं छोड़ेंगे। इस मकसद से हमने सक्रिय तौर से इस मामले को आगे बढ़ाया और समाधान होने तक पुलिस स्टेशन में रहे। हमने मामला दर्ज करने पर जोर दिया, लेकिन बाद में मुस्लिम पक्ष ने माफी माँग ली।”
राउत ने यह भी कहा, “हम उम्मीद करते हैं कि सभी समुदायों को इस शांति और सद्भाव को बनाए रखने के लिए समान जिम्मेदारी लेनी चाहिए। यदि ऐसी कोई घटना दोहराई जाती है, तो हम इसका ऐसा जवाब देंगे कि हमलावर बेहतर तरीके से समझ सके। इस घटना के लगातार फॉलो-अप और इसे उस स्तर तक ले जाने के लिए जहाँ इसे सुना जा सके, के लिए हम ऑपइंडिया के आभारी हैं। यह एक ऐसा समर्थन है जिसकी हम इन मुद्दों पर सारी मीडिया से अपेक्षा करते हैं जहाँ वास्तव में हमें ऐसी गैरजरूरी परेशानियों को सामना करना पड़ता हैं।”
उन्होंने कहा, “इस घटना में एक और पीड़ित था जिसे मुस्लिमों ने निशाना बनाया था, लेकिन अपने स्थानीय कारोबार को ध्यान में रखते हुए, उन्होंने शिकायत दर्ज न कराने का विकल्प चुना। हमारे युवा कार्यकर्ता सूरज चक्रधर धरम मुस्लिम बहुल इलाके में रहते हैं। वह हमारे साथी कार्यकर्ता हैं जो कूरियर डिलीवरी के काम से अपना परिवार पालते हैं। वो होम डिलीवरी के लिए शहर के कई घरों में जाते हैं। उनके विनम्र स्वभाव की वजह से स्थानीय समाज में उनके सबसे मधुर रिश्ते हैं। इसके साथ ही वह धर्म की स्थापना के लिए कई तरह के काम भी करते हैं। वो एक मुखर कार्यकर्ता हैं जो गौरक्षा के लिए काम करते हैं और लव जिहाद जैसी सामाजिक समस्याओं के खिलाफ आवाज उठाते हैं।”
गणेश राउत ने आगे बताया, “सूरज हमारे स्थानीय संगठन का एक अहम सदस्य हैं। उनकी माँ और परिवार के अन्य सदस्यों को गुंडों ने धमकी दी थी। उन्होंने किसी दुश्मनी के वजह से नहीं बल्कि सूरज और उसके परिवार की सुरक्षा की माँग के लिए शिकायत दर्ज करवाई थी। सूरज अनुसूचित जाति से आते हैं। शायद हमलावरों ने सोचा होगा कि कोई उनकी परवाह नहीं करेगा, लेकिन यहाँ ऐसा बिल्कुल नहीं है। मंचर का पूरा हिंदू समाज सूरज के साथ है। हम सभी पुलिस स्टेशन गए अपनी फिक्र के बारे में बताया और आखिरकार मुस्लिम पक्ष ने माफी माँगी।”
मुद्दा क्या था?
महाराष्ट्र के पुणे शहर के पास मंचर में शुक्रवार 29 सितंबर को मुस्लिमों की भीड़ ने बजरंग दल के एक कार्यकर्ता के घर पर हमला किया। पीड़ित हिंदू कार्यकर्ता की पहचान सूरज चक्रधर धरम के रूप में की गई। मुस्लिम ने पीड़ित के घर पर हमला किया और घर की महिला सदस्यों के साथ बदसलूकी की। गणपति विसर्जन के दौरान कथित तौर पर मौलाना की कार रोकने पर भीड़ ने सूरज के घर पर हमला किया था।
हालाँकि, सूरज ने उस घटना का वीडियो बनाया था। जिसमें साफ दिख रहा था कि सभी ने मौलाना के वाहन को रास्ता दिया था। सूरज की शिकायत पर पुलिस ने जाँच नहीं की। सूरज ने ऑपइंडिया को बताया कि वह कट्टरपंथियों के निशाने पर थे, क्योंकि वह गौ रक्षा और लव जिहाद के खिलाफ मुखर रहे हैं। यह मामला पुणे के अंबेगांव क्षेत्र के मंचर पुलिस स्टेशन क्षेत्र का है। सूरज की माँ ने सोमवार, 2 अक्टूबर, 2023 को पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई। शिकायत के मुताबिक, 29 सितंबर को उनके आवास पर 150 से 200 मुसलमानों की भीड़ जमा हुई।
जब गुस्साई भीड़ सूरज चक्रधर के घर पर पहुँची थी, उस वक्त संयोग से सूरज घर पर नहीं थे। सूरज के न मिलने पर भीड़ ने उनके घर में मौजूद महिलाओं के साथ मारपीट शुरू कर दी। सूरज की माँ ने बताया कि घटना के दौरान मुस्लिम भीड़ ने उनके घर पर पथराव भी किया। उन्होंने दरवाजे तोड़ दिए और घर की महिलाओं को भी नहीं बख्शा। इस शिकायत की एक कॉपी ऑपइंडिया के पास है। इसके अलावा भीड़ ने पूछा कि क्या सूरज बजरंग दल से जुड़ा था। यही नहीं सूरज की माँ से कहा गया, “वह जहाँ भी मिलेगा, उसके हाथ-पैर तोड़ दिए जाएँगे।” ये वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल हो गया है।
Mob including hundreds of Islamists led by PFI members launched an attack on the residence of Hindu activist Suraj Dharam in Manchar, Pune, Maharashtra.
Attackers have been identified as Riyaz Jamadar, Israr Pathan, Azam Momin, Qayyum Pathan among others. pic.twitter.com/Qn81NPovTS
सूरज की माँ ने पुलिस से सुरक्षा का अनुरोध करते हुए दावा किया था कि उनके पूरे परिवार को खतरा है। साथ ही उन्होंने घटना के सीसीटीवी और वीडियो फुटेज की समीक्षा के बाद उम्मीद जताई कि सभी अपराधियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
मंचर शहर पूरी तरह शांतिपूर्ण, अफवाहों पर न करें विश्वास
वहीं गणपति विसर्जन जुलूस (28 सितंबर) विवाद पर पुणे पुलिस ने पोस्ट कर बताया है कि दोनों पक्षों के लोगों एक-दूसरे से माफी माँगकर विवाद सुलझा लिया है। मंचर शहर में पूर्ण शांति है।
पुणे पुलिस ने मंचर को बताया शांतिपूर्ण
इस मामले में पुलिस का कहना है कि सोशल मीडिया पर कोई यह अफवाह फैला रहा है कि मंचर शहर में जानबूझकर पथराव और गाली-गलौज की गई है। हालाँकि, मंचर शहर में अब माफीनामें के बाद पूरी तरह से शांति है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारीयों ने कानून व्यवस्था बनाए रखने के संबंध में दोनों पक्षों को मार्गदर्शन दिया गया है। साथ ही पुलिस का कहना है कि सोशल मीडिया पर किसी भी तरह की गलत पोस्ट फैलाने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
गौरतलब है कि पुणे जिले का मंचर से मई 2023 में लव जिहाद के कई चौंकाने वाले मामले सामने आए थे। यहाँ 20 मई, 2023 को महाराष्ट्र पुलिस ने एक एफआईआर दर्ज की थी। आरोपितों पर भारतीय दंड संहिता की धारा 363 (अपहरण) और 376 (बलात्कार) और POCSO अधिनियम की धारा 4, 6, 8, 10 के तहत मामला दर्ज किया गया। इसके तहत 22 साल के जावेद शेख को महाराष्ट्र के पुणे के मंचर शहर में एक नाबालिग हिंदू लड़की का अपहरण करने, उसका यौन उत्पीड़न करने और फिर उससे जबरदस्ती निकाह करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। पीड़िता अपहरण और बलात्कार के वक्त महज 16 साल की थी। इस घटना की पूरी रिपोर्ट यहाँ पढ़ी जा सकती है।
ब्रिटेन की राजधानी लंदन में हाल ही में खालिस्तानियों द्वारा भारतीय उच्चायोग के बाहर तिरंगे पर गौमूत्र डालने और उसे अपमानित करने की घटना सामने आई थी।। इस बीच एक भारतीय ने इस तिरंगा को सम्मान के साथ उठाकर रख लिया था। इस भारतीय की पहचान सत्यम सुराणा के रूप में हुई है।
सत्यम सुराणा ने एक्स (पहले ट्विटर) पर इस घटना के बारे में लिखा है। खालिस्तानियों ने 2 अक्टूबर 2023 को यह प्रदर्शन किया था। यह विरोध प्रदर्शन खालिस्तानी आतंकी गुरचरण सिंह के नेतृत्व में हुआ था। इस दौरान प्रदर्शनकारी खालिस्तानियों ने तिरंगे को लातों से रौंदा और फिर उसे भारतीय उच्चायोग की दीवाल से सटाकर उस पर एक बोतल में लाया गया गोमूत्र डाल दिया।
तिरंगे का अपमान करने के दौरान वहाँ मौजूद अन्य भारतीय शांत नहीं रहे। सत्यम सुराणा इन खालिस्तानियों के बीच में घुसकर तिरंगा उठा लाए। सत्यम के तिरंगा उठाने से पहले उस पर एक ब्रिटिश पुलिसकर्मी भी खड़ा दिखता है। हालाँकि, पुलिसकर्मी की मंशा स्पष्ट नहीं है कि उसने तिरंगे पर पैर जानबूझ कर रखे या अनजाने में ऐसा हुआ।
सत्यम के खालिस्तानियों के बीच से तिरंगा छीनकर लाने का यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। वीडियो वायरल होने के पश्चात ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले भारतीय छात्र करन कटारिया ने सत्यम की पहचान की और ट्वीट करके बताया कि खालिस्तानियों से तिरंगा छीनने वाला शख्स कौन है।
?? My LSE junior proudly picked up the Indian tricolour outside @HCI_London battling extremism with passion and non violance. pic.twitter.com/pKGK5qOlcI
गौरतलब है कि करन कटारिया वही व्यक्ति हैं, जिनको आरएसएस से संबंध रखने के कारण ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी में छात्र संघ का चुनाव लड़ने से रोक दिया गया था। उनके खिलाफ राहुल गाँधी के कार्यक्रमों में दिखने वाली एक भारतीय मूल की प्रोफ़ेसर ने घृणा कैम्पेन चलाया था। इसके बाद उन पर रोक लगाई गई थी।
सत्यम सुराणा ने ट्वीट करके करन का आभार जताया और लिखा, “सौगंध मुझे मेरे मिट्टी की, मैं रहूँ या ना रहूँ भारत रहना चाहिए, मैं खुद को रोक नहीं सका और तिरंगा उठाकर लाया। चाहे 1 करोड़ लोग हमारे खिलाफ क्यों ना हो, मेरे जैसा 1 देशभक्त भारतीय हमेशा हमारे देश के सम्मान को बचाएगा।”
सत्यम सुराणा महाराष्ट्र के पुणे के रहने वाले हैं और पेशे से वकील हैं। वह वर्तमान में लंदन रह कर में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से लॉ में पोस्ट ग्रेजुएशन यानी एलएलएम की पढ़ाई कर रहे हैं।
I am so motivated by you words @karanatLSE ❤️ Always there for my ??. You can take me out of Bharat but not Bharat out of me! When I picked up our तिरंगा there, the only thing in my mind was मैं रहूँ या ना रहूँ भारत ये रहना चाहिए! #London#indiantricolourhttps://t.co/kJUZn737E9
कटारिया ने इस मामले पर दोबारा ट्वीट किया और लिखा, “दुनिया में ऐसी कोई भी बाधा नहीं है, जो किसी बेटे को उसकी माँ से प्यार करने से रोक सके।” सत्यम के इस बहादुरी के कृत्य के चलते सोशल मीडिया पर बड़ाई हो रही है।
There is no barrier that can stop a Son from loving his Mother! भारत माता सुपूत?❤️?? https://t.co/UGGMHpX0nq