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भाग रहे थे फहीम, सलीम, यूसुफ और इस्लाम, UP पुलिस ने गोली मारकर पकड़ा: रामपुर से पहले श्रावस्ती में भी धरे गए थे 6 गो तस्कर

उत्तर प्रदेश में गो-तस्करों के साथ पुलिस की मुठभेड़ हुई है। इनमें कई गो-तस्करों को गोली लगी है। दो अलग-अलग मामलों में यूपी पुलिस ने गो-तस्करों ने गिरफ्तार कर लिया है। मामला रामपुर और श्रावस्ती से जुड़ा हुआ है।

रामपुर जिले में स्वार और टांडा थाना की पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए चार गो तस्करों को घेर लिया। उन्होंने क्रूरतापूर्वक गोवंश को बाँध रखा था। पुलिस ने मुखबिरों के सूचना के आधार पर उन्हें जब रोकने की कोशिश की तो वे पुलिस पर फायरिंग करने लगे।

इसके बाद पुलिस ने जवाबी कार्रवाई की। इसमें फहीम पुत्र सफी अहमद, सलीम पुत्र महबूब शाह के पैर में गोली लगी। वहीं, दढ़ियाल के चौकी प्रभारी के बाएँ हाथ में गोली लगी। इससे वे भी घायल हो गए। घायलों को अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया गया है।

हालाँकि, पुलिस की इस कार्रवाई के दौरान दो अन्य तस्कर भागने में कामयाब रहे। भागने वाले गो-तस्करों के नाम मनन पुत्र इस्लाम और फरमान पुत्र युसूफ है। इसी बीच स्वार थाना के प्रभारी कोमल सिंह को दो संदिग्ध दिखाई दिए।

स्वार थाना प्रभारी ने जब उन्हें रोकने की कोशिश की तो वे उन पर गोली चलाने लगे। कोमल सिंह ने भी फायरिंग की, जिसमें इन दोनों आरोपितों के पैरों में गोली जा लगी। इस तरह चारों पशु तस्करों को पैर में गोली लगने के बाद गिरफ्तार कर लिया गया।

पुलिस ने पशु तस्करों के पास से एक गोवंशीय पशु, एक कार, तीन तमंचे, सात कारतूत और चार खाली कारतूस बरामद किए हैं। बताया जा रहा है कि आरोपितों पर पहले ही कई मुदकमें दर्ज हैं। वहीं, आरोपितों ने एक सांड की हत्या की बात कबूल की है।

श्रावस्ती में एनकाउंटर के बाद 6 गिरफ्तार

वहीं, यूपी के श्रावस्ती में यूपी पुलिस ने मुठभेड़ के बाद 6 पशु तस्करों को गिरफ्तार किया है। इनमें पाँच तस्करों के पैरों में गोली लगी है। सूचना के आधार पर पुलिस ने जब घेराबंदी शुरू की तो उन्होंने पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी।

इसके बाद पुलिस ने भी जवाबी कार्रवाई की, जिसमें 5 पशु तस्करों के पैरों में गोली लगी। कोतवाली भिनगा और थाना सिरसा की संयुक्त पुलिस टीम ने इस कार्रवाई को अंजाम दिया। घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

पुलिस ने आरोपितों के पास से चार पशु, उसे काटने का सामान, पाँच तमंचा, तीन 12 बोर और तीन 315 बोर के हथियार बरामद किए हैं। इसके अलावा, पाँच चाकू, एक बोगदा, तराजू और बाट को भी पुलिस ने जब्त किया है। एसपी प्राची सिंह ने रात में घटना स्थल का जायजा खुद लिया।

गिरफ्तार आरोपितों की पहचान सलीम पुत्र नुरुल सलाम, आँधी उर्फ नसीरुद्दीन पुत्र कादिर अली, सहीम पुत्र अब्दुल अमीन, छोटन उर्फ इकबाल पुत्र नन्हें खान, शहजाद उर्फ सैय्यद बग्गा पुत्र मोहर्रम अली और सूफियान पुत्र इस्लाम के रूप में हुई है।

शिखर धवन को टॉर्चर करती थीं आयशा मुखर्जी, बदनाम करने के लिए भेजती थी संदेश: कोर्ट ने तलाक पर लगाई मुहर, माना भारत में रहने के वादे को भी नहीं निभाया

दिल्ली की एक फैमिली कोर्ट ने भारतीय क्रिकेटर शिखर धवन और आयशा मुखर्जी के तलाक पर मुहर लगा दी है। अदालत ने माना है कि शिखर को आयशा मानसिक तौर पर प्रताड़ित करती थीं। उनको बदनाम करने के लिए कई लोगों को अपमानजनक संदेश भेजे थे। शादी के बाद भारत में रहने के वादे को नहीं निभाया। साथ ही सं​पत्तियों का मालिकाना हक हासिल करने के लिए भी दबाव डाला।

बुधवार (4 अक्टूबर 2023) को फैमिली कोर्ट के जज हरीश कुमार ने धवन के आरोपों को आधार बनाते हुए उन्हें तलाक दे दिया। इनमें से कई आरोपों पर आयशा ने अपना बचाव नहीं किया और कई में वे ऐसा करने में असफल रहीं। अदालत ने माना कि शिखर धवन को उनकी पत्नी लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रही थीं। इसमें शिखर धवन को उनके पुत्र से ना मिलने देना और सालों तक उनसे दूर उसे ऑस्ट्रेलिया में रखना भी शामिल है।

शिखर धवन ने तलाकशुदा आयशा मुखर्जी से साल 2012 में शादी की थी। पूर्व पति से आयशा की दो बेटियाँ हैं जो ऑस्ट्रेलिया में उनके साथ रहती हैं। इस जोड़े के संबंधों में तनाव 2021 से ही शुरू हो गया था।

आयशा ऑस्ट्रेलियाई नागरिक हैं। शिखर धवन से उनका एक आठ साल का बेटा है। वह भी अपनी माँ के साथ ऑस्ट्रेलिया में रह रहा है। विवाह के बाद शिखर आयशा के पूर्व पति की बेटियों की पढ़ाई का खर्चा भी उठा रहे थे। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया में आयशा के लिए कुछ संपत्ति भी खरीदी थी। अदालत में शिखर धवन ने बताया है कि उनकी पत्नी विवाह के समय किए गए वादे के विपरीत भारत में उनके साथ नहीं रुकी और उनके बेटे को भी ऑस्ट्रेलिया ले गईं।

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार कोर्ट ने कहा, “आयशा का दावा है कि वह भारत में रहना चाहती थीं। लेकिन अपनी बेटियों के प्रति दायित्व के कारण ऑस्ट्रेलिया में रहना उनकी मजबूरी थी। इसलिए वह भारत में नहीं रहीं। इससे जाहिर है कि वह शादी के समय किए गए अपने वादे से पीछे हट गईं। इसके कारण धवन को लंबी दूरी की शादी का सामना करना पड़ा और वर्षों तक अपने ही बेटे से अलग रहने की भारी पीड़ा झेलनी पड़ी।”

कोर्ट में शिखर ने यह भी बताया है कि आयशा ने विवाह के बाद ऑस्ट्रेलिया में उनके अपने पैसे से खरीदी तीन संपत्तियों में 99% हिस्सेदारी ले ली और अन्य दो संपत्तियों में खुद को हिस्सेदार बना लिया। शिखर धवन को परेशान और बदनाम करने के इरादे से आयशा उनके साथी खिलाड़ियों और आईपीएल में उनकी टीम के मालिकों को अपमानजनक मैसेज भेजती थीं। हालाँकि, आयशा का कहना था कि ऐसा उन्होंने समय से गुजारा भत्ता पाने के इरादे से किया था। कोर्ट ने इन्हीं सब बातों को आधार मानते हुए शिखर द्वारा तलाक की अर्जी को मंजूर कर लिया।

धवन और आयशा के बेटे की परमानेंट कस्टडी पर किसी तरह का आदेश पारित करने से अदालत ने इनकार किया है। धवन को भारत और ऑस्ट्रेलिया में उचित अवधि के लिए अपने बेटे से मिलने और उसके साथ वीडियो कॉल पर बातचीत करने का अधिकार दिया है।

सरकारी नौकरियों में महिलाओं को 35% आरक्षण, मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनावों से पहले शिवराज सरकार ने बढ़ाया कोटा

मध्य प्रदेश में अब सरकारी नौ​करियों में महिलाओं को 35 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा। शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार ने महिलाओं का कोटा बढ़ाने का फैसला लिया है। वन विभाग की भर्तियों को छोड़ सभी महकमों में यह कोटा लागू होगा।

मध्य प्रदेश में महिलाओं के आरक्षण को 35% करने का शासनादेश 3 अक्टूबर 2023 को जारी किया गया था। मध्य प्रदेश में विधानसभा के चुनाव जल्द होने हैं। इसे चुनावों की तैयारी के बीच भाजपा सरकार का बड़ा कदम माना जा रहा है।

इससे पहले प्रदेश में महिलाओं के लिए नौकरियों में 33% आरक्षण का प्रावधान था जो कि वर्ष 1995 में लागू किया गया था। मध्य प्रदेश में शिक्षक भर्तियों में 50% पद महिलाओं के लिए आरक्षित हैं।

मध्य प्रदेश में महिलाओं का आरक्षण भाजपा की महिला वोटरों को लुभाने के प्रति राजनीति के नए कदम के तौर पर देखा जा रहा है। यह कदम महिलाओं को विधानसभाओं और संसद में 33% आरक्षण देने के मोदी सरकार के बिल के पास होने के कुछ ही दिनों बाद उठाया गया है।

मध्य प्रदेश में भाजपा लगातार महिला कल्याण के लिए योजनाएँ ला रही है। इससे पहले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ‘लाडली बहना’ के तहत कई योजनाओं का ऐलान कर चुके हैं। इसमें प्रति माह प्रदेश की महिलाओं को ₹1500 दिए जाते हैं। अब तक इस योजना के तहत पाँच किश्तें भेजी जा चुकी हैं।

मध्य प्रदेश की नई मतदाता सूची के अनुसार, 48.8% मतदाता महिलाएँ हैं। प्रदेश में 2.72 करोड़ वोटर महिला हैं। लाडली बहना योजना के अंतर्गत लगभग 1.3 करोड़ महिलाओं को लाभ मिल रहा है। प्रदेश में महिला मतदाताओं की संख्या पिछले चुनावों के मुकाबले 12.9% बढ़ी है।

इसके अलावा मध्य प्रदेश में लाडली बहना योजना के अलावा राज्य में रसोई गैस सिलेंडर को लेकर भी बड़ी सब्सिडी दी जा रही है। राज्य में 36.62 लाख परिवारों को ₹450 में रसोई गैस सिलेंडर मिल रहा है।

बेहद बुद्धिमान व्यक्ति हैं PM मोदी, उनके नेतृत्व में भारत कर रहा है बेहतरीन प्रगति: रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन हुए मुरीद

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बेहद बुद्धिमान व्यक्ति बताया है। कहा है कि उनके नेतृत्व में भारत बेहतरीन प्रगति कर रहा है। साथ ही मोदी के साथ बहुत अच्छे राजनीतिक संबंध होने की बात कही है।

राष्ट्रपति पुतिन ने कहा, “उनके (PM मोदी) नेतृत्व में भारत विकास में बेहतरीन प्रगति कर रहा है। यह भारत और रूस दोनों के हितों को पूरी तरह से पूरा करता है।” उन्होंने वित्तीय सुरक्षा और साइबर अपराध के खिलाफ लड़ाई में रूस और भारत के बीच आगे भी सहयोग जारी रहने की उम्मीद जताई।

गौरतलब है कि रूसी राष्ट्रपति की ये सराहना और तारीफ भारत में जी-20 शिखर सम्मेलन में नई दिल्ली घोषणा-पत्र जारी होने के बाद आई है। इस घोषणा-पत्र में में यूक्रेन में चल रहे संघर्ष में शांति स्थापित करने का आह्वान किया गया था। यूक्रेन ने इसकी आलोचना की थी।

इसमें युद्ध का दोष रूस पर नहीं मढ़ा गया था। ये बीते साल बाली के जी-20 घोषणा-पत्र से पूरी तरह अलग था। बाली के घोषणा-पत्र में संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव का संदर्भ देते हुए कड़े शब्दों में रूस की आक्रमकता की आलोचना की गई थी।

नई दिल्ली घोषणा का स्वागत करते हुए मॉस्को ने इसे मील का पत्थर करार दिया था। इसके साथ ही साउथ ग्लोबल से जी20 देशों को ‘एकजुट’ करने में भारत की अध्यक्षता की सक्रिय भूमिका की भी खासी तारीफ की थी।

ये पहली बार नहीं है कि रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने पीएम मोदी की तारीफ की है। इससे पहले भी उन्होंने बीते महीने पीएम मोदी की तारीफ करते हुए कहा था कि वह मेक इन इंडिया कार्यक्रम को बढ़ावा देने में ‘सही काम’ कर रहे हैं।

8वें ईस्टर्न इकोनॉमिक फोरम (ईईएफ) को सम्बोधित करते हुए राष्ट्रपति पुतिन ने कहा था, “आप जानते हैं कभी हमारे पास घरेलू स्तर पर निर्मित कारें नहीं थीं। आज हैं। भले वे 1990 के दशक में हमारे द्वारा खरीदी गईं मर्सिडीज या ऑडी कारों के मुकाबले मामूली दिखती हैं, लेकिन यह कोई मुद्दा नहीं है। मुझे लगता है कि इस मामले में हमें अपने साझेदारों का अनुकरण करना चाहिए, मसलन भारत।”

पुतिन ने आगे कहा, “वे भारत में बने वाहनों के निर्माण और इस्तेमाल पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। मुझे लगता है कि प्रधानमंत्री मोदी मेक इन इंडिया कार्यक्रम को बढ़ावा देने के लिए सही काम कर रहे हैं। वह सही हैं।”

केवल गोल्ड पर ही नीरज चोपड़ा ने नहीं मारा भाला, चीन की बेईमानी को भी भेदा: एशियन गेम्स में धोखाधड़ी पर भड़कीं अंजू बॉबी जॉर्ज

चीन में चल रहे एशियाई गेम्स में 4 अक्टूबर 2023 को ओलंपिक चैंपियन नीरज चोपड़ा ने जैवलिन थ्रो में गोल्ड जीता। भारत के ही किशोर जेना को इस स्पर्धा में सिल्वर मिला। लेकिन स्पर्धा के दौरान चीन ने जो बेईमानी की कोशिश की उस पर भारत ने कड़ी आपत्ति जताई है। दरअसल इवेंट के दौरान चोपड़ा के भाले का पहला थ्रो नहीं मापा गया था।

इसके बाद चीन पर जानबूझकर भारत को निशाना बनाने के आरोप लग रहे हैं। एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (AFI) की उपाध्यक्ष और लम्बी कूद की पूर्व खिलाड़ी अंजू बॉबी जॉर्ज ने हांगझाऊ एशियन खेलों में चीन के खेल अधिकारियों पर बेईमानी का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि इसको लेकर भारत अपना विरोध दर्ज करवाएगा।

अंजू बॉबी जॉर्ज ने कहा, “यह केवल नीरज के साथ नहीं हुआ है। पहले हमारे लम्बी चाल वाले खिलाड़ियों के साथ यही हुआ। फिर ज्योति (बाधा दौड़ की खिलाड़ी) के साथ हुआ। उसके बाद जैवलिन थ्रोअर अन्नू रानी के साथ और फिर जेना (किशोर जेना) और नीरज के साथ यही हुआ है। वे लोग (चीन के खेल अधिकारी) जानबूझकर यह कर रहे हैं। मैं इस प्रकार के वाकए एशियन खेलों में देख कर दुखी हूँ। हम चीनी अधिकारियों के विरुद्ध अपना विरोध दर्ज करवाएँगे।”

गौरतलब है कि जैवलिन थ्रो के आखिरी मुकाबले में नीरज के भाला फेंकने के पहले प्रयास पर चीन के अधिकारियों ने कहा कि कुछ तकनीकी गड़बड़ी की वजह से वह उसे माप नहीं सके। इसके पश्चात किशोर जेना के दूसरे प्रयास को अवैध ठहरा दिया गया। इससे एक दिन पहले जैवलिन थ्रो की महिला खिलाड़ी अन्नू रानी का पहला प्रयास भी नहीं रिकॉर्ड किया गया था। अन्नू ने भी इस प्रतियोगिता में चीन की बेईमानी के बावजूद स्वर्ण जीता था।

किशोर जेना के प्रयास को अवैध ठहराने पर साथी खिलाड़ी नीरज चोपड़ा ने विरोध दर्ज किया तो इसे मान लिया गया। सोशल मीडिया पर चीन के अधिकारियों के इस रवैए के खिलाफ काफी गुस्सा देखा जा रहा है। लोगों ने कहा कि वह भारतीय खिलाड़ियों को पदक जीतने से रोकने के लिए ऐसा कर रहे हैं।

हालाँकि चीन के खेल अधिकारियों के इन प्रयासों का भारत के खिलाड़ियों पर कोई फर्क नहीं पड़ा और नीरज तथा किशोर जेना, दोनों ने स्वर्ण और रजत अपने नाम किए। नीरज चोपड़ा ने स्वर्ण जीतने के बाद चीन के खेल अधिकारियों के इस रवैए पर भी सवाल भी उठाए थे।

उन्होंने कहा था, “मुझे बड़ा खराब लगा कि इतने बड़े इवेंट में मेरा पहला थ्रो खराब गया। ज्योति यार्राजी के साथ भी ऐसा ही हुआ। मेरे साथ भी गड़बड़ हुई है। जेना के एक थ्रो में भी समस्याएँ थी। लेकिन अंत में हमारा परिणाम अच्छा था जो कि प्रदर्शित करता है कि हम तैयार हो कर आए थे।”

बाधा दौड़ की खिलाड़ी ज्योति यार्राजी को दौड़ से बाहर कर दिया गया था, क्योंकि एक चीनी खिलाड़ी ने बेईमानी से दौड़ने की शुरुआत कर दी थी। बाद में उनके दौड़ने का समय भी रिकॉर्ड नहीं किया गया। उनको पहले कांस्य पदक दिया गया था जो कि विरोध के बाद रजत में बदल दिया गया।

मम्मी के लिए ‘नूरी’ बढ़िया है राहुल जी, पर पापा राजीव से ‘नूर’ लेना आप भूल गए: बेटे का जाति प्रलाप, बाप चाहते थे जाति विहीन समाज

कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी ने जैक रसेल टेरियर नस्ल की एक पपी अपनी मम्मी सोनिया को उपहार में दी है। वे इसे गोवा से लेकर आए हैं। इसका नाम ‘नूरी’ रखा है। राहुल ने एक वीडियो के जरिए अपने परिवार के इस सदस्य के बारे में लोगों को बताया है।

असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने कुतिया का नाम नूरी रखे जाने पर एतराज जताया है। वैसे नूरी का मोटे तौर पर अर्थ प्रकाश होता है। लेकिन ऐसा लगता है कि हाल के समय में जाति पर लगातार प्रलाप कर रहे राहुल अपने पापा राजीव से नूर लेना भूल गए हैं।

एक तरफ राहुल जातीय जनगणना के पैरोकार बने घूम रहे हैं, वहीं उनके पापा राजीव जाति विहीन समाज चाहते हैं। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी ने संसद में मंडल कमीशन की सिफारिशों का विरोध करते हुए यह बात कही थी। पूरे देश ने इसे सुना था, पर शायद राहुल इससे रूबरू होना भूल गए।

न्यूज18 ने राजीव गाँधी के उस भाषण की समीक्षा प्रकाशित की है। इस संबोधन के दौरान राजीव की तत्कालीन प्रधानमंत्री वीपी सिंह के साथ तीखी नोकझोंक हुई थी, क्योंकि वे मंडल आयोग की रिपोर्ट को आगे बढ़ा रहे थे।

राजीव गाँधी ने कहा था, “यह बेहद दुखद है कि इस सरकार (वीपी सिंह सरकार) की सोच जाति के इर्द-गिर्द घूमती है। वीपी सिंह हमारे समाज में दरार पैदा कर रहे हैं। इस देश का लक्ष्य जाति विहीन समाज होना चाहिए और आपको ऐसा कोई भी कदम उठाने से बचना चाहिए जो देश को जाति-ग्रस्त समाज की ओर ले जाए।”

राजीव गाँधी ने ये भाषण 6 सितंबर 1990 को संसद में दिया था। उन्होंने आगे कहा था, “जिस तरह से आपने मंडल आयोग को लागू किया है, मेरे लिए यह मेरे देश को तोड़ रहा है। इस समय में देश को इस जाति विभाजन से बचाने का समय है। जातिवाद की वजह से देश को इसके लिए बहुत भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।”

आरक्षण पर ये थी राजीव गाँधी की राय

वीपी सिंह सरकार द्वारा संसद में मंडल कमीशन की रिपोर्ट रखे जाने के समय चर्चा में राजीव गाँधी ने अपने भाषण के अंत में आरक्षण पर भी अपनी राय रखी थी। राजीव गाँधी ने कहा था, “सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों को आरक्षण सहित हर संभव मदद की जरूरत है और कॉन्ग्रेस इसमें आपका समर्थन करेगी। हम चाहते हैं कि इसका लक्ष्य सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों में सबसे गरीब और सबसे कमजोर लोगों को लक्षित किया जाए, जिसे कॉन्ग्रेस पार्टी ने इस साल 30 अगस्त को संसदीय कार्य समिति के प्रस्ताव में रेखांकित किया है।” राजीव गाँधी का बयान साफ तौर पर कहता है कि वो जाति के आधार पर नहीं, बल्कि आर्थिक तौर पर पिछड़े लोगों और कमजोर लोगों की मदद के पक्षधर थे।

राहुल गाँधी का ऐलान, कॉन्ग्रेस कराएगी जातिगत जनगणना

राजीव गाँधी ने संसद में जो कुछ भी कहा था, वो लोकसभा की कार्यवाही का हिस्सा है। उनके शब्द मिटाए नहीं जा सकते हैं। लेकिन अब राहुल गाँधी जो कुछ भी बोल रहे हैं, वो राजीव गाँधी की सोच के एकदम उलट है। राहुल गाँधी कह चुके हैं कि कॉन्ग्रेस के सत्ता में आते ही जातिगत जनगणना कराई जाएगी।

वैसे, ओबीसी आरक्षण पर राहुल गाँधी और कॉन्ग्रेस किस तरह से लगातार झूठ बोल रहे हैं, उसके बारे में जानने के लिए आप य​ह रिपोर्ट रिपोर्ट पढ़ सकते हैं।

चीन से पैसा क्यों लिया… दलाल झुण्ड में अकेले घुस पत्रकार ने दिखाया आईना: अभिजीत मजूमदार के पीछे लगी तमिलनाडु पुलिस तो चुप्पी, मनी लॉन्ड्रिंग का समर्थन

दिल्ली पुलिस ने मीडिया संस्थान ‘Newsclick’ के संस्थापक प्रबीर पुरकायस्थ और HR हेड अमित चक्रवर्ती को गिरफ्तार किया है। संस्थान से जुड़े अन्य तथाकथित पत्रकारों अभिसार शर्मा, उर्मिलेश और परंजॉय गुहा ठाकुरता से भी पूछताछ की गई। मामला है चीन से फंडिंग का। इसका खुलासा किसी भारतीय मीडिया संस्थान ने नहीं, बल्कि अमेरिकी अख़बार ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ (NYT) ने की। आरोप साफ़ हैं – चीन के अजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए इस मीडिया पोर्टल को 38 करोड़ रुपए की फंडिंग की गई।

सबसे बड़ी बात, मामला अवैध लेनदेन का है, मनी लॉन्ड्रिंग का है। चीन और भारत की कंपनियों में कई करार हुए होंगे, लेकिन ये सरकार से छिपा कर पिछले दरवाजे से हुई डील थी। इन सबके पीछे है करोड़पति नेविल रॉय सिंघम, जो कि चीन की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी की प्रोपेगंडा शाखा से जुड़ा हुआ है। सिर्फ ‘न्यूज़क्लिक’ ही नहीं, इसने दुनिया भर में कई मीडिया संस्थानों को पैसे खिलाए। श्रीलंकाई-क्यूबा मूल के सिंघम के साथ प्रबीर पुरकायस्थ की ईमेल के माध्यम से हुई बातचीत भी सामने आई थी।

भारत की संप्रभुता और अखंडता के खिलाफ ‘Newsclick’ का चीनी प्रोपेगंडा

अब आप सोचिए, भारत-चीन सीमा विवाद हो या फिर दोनों देशों के सैनिकों के बीच संघर्ष, चीन का पैसा खाने वाले भारत में बैठे दलालों की वफादारी किस तरफ रहती होगी? जवाब आप जानते हैं। तथ्य भी जान लीजिए। असल में प्रबीर और सिंघम के बीच यही बातचीत हो रही थी कि भारत-चीन सीमा विवाद को कैसे रिपोर्ट किया जाए। उत्तर-पूर्वी राज्यों पर चीन अपना दावा ठोकता रहा है। भारत में बैठे उसके दलाल चीन के लिए माहौल बनाते हैं। बात देश की संप्रमुखता और अखंडता की है, कार्रवाई क्यों नहीं की जाए?

‘न्यूज़क्लिक’ पर छपेमारी के बाद मीडिया गिरोह रोने लगा। गिरोह, मतलब चंद लोग जो 2014 से पहले निर्धारित करते थे कि देश में किस चीज की चर्चा होगी, किस एंगल से होगी और कौन सा नैरेटिव चलेगा। इतना ही नहीं, केंद्रीय मंत्रिमंडल तक यही गिरोह निर्धारित करता था। आज उस गिरोह के लोग रोते हैं। ‘इंडिया टुडे’ के राजदीप सरदेसाई ने पूछ डाला कि आखिर पत्रकार देश के दुश्मन कैसे हो गए? उसी तरह, जैसे कोई बाकी देशद्रोही हो जाता है। वो पत्रकार है या नहीं है, इससे क्या फर्क पड़ता है? गद्दार तो किसी भी व्यवसाय में हो सकता है?

वहीं ‘द वायर’ की आरफा खानुम शेरवानी ने भारत पर ‘लोकतंत्र की जननी’ वाला तंज कसा। ऐसे ही ये गिरोह भारत पर ‘विश्वगुरु’ वाला भी तंज भी कसता है। सार ये कि देश की हर उपलब्धि पर तंज कसना इनकी आदत है। AltNews वाले प्रतीक सिन्हा का क्या कहना। उन्होंने सरकार पर हद पार करने का आरोप मढ़ दिया। ये वही संस्थान है, जो मुस्लिम अपराधियों के बचाव में दिन-रात एक कर देता है। इसी तरह रोहिणी सिंह ने लिखा कि पत्रकारिता इस देश में अपराध हो गई है। रोहिणी सिंह को जानना चाहिए कि अपराध पत्रकारिता नहीं, बल्कि देश से गद्दारी है।

पत्रकारों की तो छोड़ दीजिए, पत्रकारों के संगठनों तक ने इस मामले में ‘न्यूजक्लिक’ के समर्थक में घोड़े खोल दिए। ‘प्रेस क्लब ऑफ इंडिया (PCI)’ का उदाहरण ले लीजिए। उसने छापेमारी के दौरान ही ‘न्यूज़क्लिक’ के साथ खड़े होने का ऐलान कर दिया। PCI में आनन-फानन में बैठक बुलाई गई। फिर अगले दिन बड़ी संख्या में पत्रकारों को जुटाया गया और विरोध प्रदर्शन किया गया। परंजॉय गुहा ठाकुरता को बुलाया गया पत्रकारों को संबोधित करने के लिए।

इतना ही नहीं, इस संगठन ने पत्रकारों की तरफ से एक लंबा-चौड़ा पत्र लिख कर सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश DY चंद्रचूड़ को भेजा और आरोप लगाया कि देश की जाँच एजेंसियों को पत्रकारों के खिलाफ हथियार बनाया जा रहा है। क्या गौतम नवलखा जैसे अर्बन नक्सलियों, जो भीमा-कोरेगाँव हिंसा के लिए जिम्मेदार हैं, उनके साथ गठजोड़ कर चीनी प्रोपेगंडा फैलाना पत्रकारिता है? उन्हें इससे भी दिक्कत है कि जाँच एजेंसियों के पास ‘इतनी शक्तियाँ’ क्यों हैं।

इलीट गिरोह के झुण्ड में घुसा एक आम पत्रकार, पूछा – ‘क्यों लिया चीन से पैसा?’

लेकिन, इस दौरान एक पत्रकार ने PCI में ही इन्हें आईना दिखा दिया। उस पत्रकार का नाम है – सागर मलिक। सागर मलिक अकेले ‘चीन के दलालों को जेल भेजो’ वाला बैनर लेकर गिरोह विशेष के पत्रकारों की भीड़ में पहुँच गए। ये ऐसा ही था, जैसे भेड़ियों की झुण्ड में घुस कर कोई शेर चहलकदमी कर रहा हो। इसके बाद हलचल तो मचनी ही थी, मच गई। सागर मलिक से पूछा जाने लगा कि वो PCI में कैसे घुस गए। सवाल जायज है। है ना? आखिर कोई आम पत्रकार इस प्रबुद्ध समूह में कैसे घुस सकता है? ये तो बड़े हैं, देश की जाँच एजेंसियों से बड़े हैं, सरकार से बड़े हैं, आम जनता से बड़े हैं।

सागर मलिक का एक ही सवाल था उस झुण्ड से – चीन से पैसा क्यों लिया? इस पर झुण्ड की एक महिला पत्रकार उलटा उनसे पूछने लगी, “तुम कौन हो?” अब भला कोई आम पत्रकार कैसे इलीट पत्रकारों से सवाल पूछ सकता है? कैसे उनके बीच जा सकता है? उसे अपना धर्म, जाति, कुल, गोत्र, फंडिंग सब बतानी होगी न? आम के लिए ख़ास के बीच जगह कहाँ! सागर मलिक का लॉजिक सिंपल था – जैसे आप अब पोस्टर-बैनर लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, मेरा भी अधिकार है कि बैनर लेकर खड़े होकर सवाल पूछूँ।

बस अंतर इतना था कि इनका सवाल थोड़ा कड़वा था, सच्चा था, जो इलीट ग्रुप को हजम नहीं हुआ। लेकिन, आखिर एक अकेले पत्रकार इस इलीट समूह से पंगा लेने की हिम्मत कैसे की? ऑपइंडिया से बात करते हुए सागर मलिक इसका जवाब देते हैं, “जब बात मेरे देश की आएगी तो मैं ऐसे दलाल पत्रकारों को जवाब अवश्य दूँगा। मेरा सवाल केवल इतना था कि चीन से पैसा लिया क्यों? अगर आप राष्ट्रवादी पत्रकार हैं तो चीन से पैसा लिया क्यों? अगर मेरे इस सवाल का जवाब ये पत्तलकार दे दें, तो मैं आगे की बात करूँ।”

उनका कहना है कि अगर आप देशप्रेमी हैं तो आपने हमारे दुश्मन देश चीन से पैसा क्यों लिया? वो कहते हैं, “अगर इन दलाल चीनी पत्रकारों का चीन प्रेम इतना उभर कर बाहर आ रहा है तो मैं उनसे निवेदन करूँगा, जो चीन की गुलामी कर रहे हैं, अगर उन्हें भारत देश में कोई समस्या है तो जब चाहें चीन या पाकिस्तान के पास जाकर रहें, वहाँ के दरवाजे उनके लिए हमेशा खुले हैं। अगर टिकट के पैसे नहीं हैं तो मैं इनका टिकट कटाने के लिए भी तैयार हूँ।”

उन्होंने सीधा ऐलान किया कि अगर ये देश के साथ गद्दारी करेंगे तो इनके घर में घुस कर, इनके ऑफिस में घुस कर इनकी छाती पर प्रहार किया जाएगा। यहाँ सोचने वाली बात है कि आखिर क्या कारण है कि एक युवा पत्रकार को इस गिरोह के बीच में घुस कर ये सवाल पूछना पड़ा? सागर मलिक ‘शाश्वत न्यूज़‘ नामक YouTube चैनल चलाते हैं। गुजरात दंगों में निर्दोषों को फँसाने वाली जिस तीस्ता सीतलवाड़ पर सुप्रीम कोर्ट तक कड़ी टिप्पणी कर चुका है, उससे भी इस ‘न्यूज़क्लिक’ के संबंध थे। सोचिए, क्या ये नेटवर्क देश के लिए काम कर रहा था?

अभिजीत मजूमदार के पीछे पड़ी तमिलनाडु पुलिस, गिरोह ने साधी चुप्पी

अब बात करते हैं यहाँ एक और पत्रकार की। थोड़ा और पीछे जाएँगे, लेकिन ज़रा ठहर कर। ताज़ा घटना पहले। अभिजीत मजूमदार का नाम सुना होगा आपने? वो ‘Earshot’ नामक पॉडकास्ट प्लेटफॉर्म चलाते हैं। आजकल ‘Firstpost’ से जुड़े हुए हैं, जो ‘नेटवर्क 18’ के अंतर्गत आता है, जो चैनल ‘न्यूज़ 18’ चैनल को भी संचालित करता है। अभिजीत मजूमदार ‘एशियानेट न्यूज़’ के भी एडिटर-इन-चीफ रहे हैं। ट्विटर पर आधे मिलियन से ज़्यादा की फॉलोविंग है, कई मुद्दों पर बेबाक राय रखने के लिए जाने जाते हैं।

उनकी चर्चा से पहले एक घटना की याद ताज़ा कर लें। भारत के दक्षिणवर्ती राज्य तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी DMK के मुखिया हैं एमके स्टालिन, जो राज्य के मुख्यमंत्री भी हैं। उनके पिता कई दशकों तक राज्य की राजनीति के केंद्र रहे। अब एमके स्टालिन हैं। उनके बेटे उदयनिधि स्टालिन को भविष्य के लिए तैयार किया जा रहा है। उदयनिधि न सिर्फ पार्टी के यूथ विंग के महासचिव हैं, बल्कि राज्य के खेल मंत्री भी हैं। उदयनिधि स्टालिन ने सनातन धर्म को डेंगू-मलेरिया बताते हुए इसे खत्म करने बात की और इसी मंशा के साथ आयोजित एक कार्यक्रम में हिन्दू विरोधी भाषण दिया।

अभिजीत मजूमदार ने ‘फर्स्टपोस्ट’ में लिखे गए अपने लेख में इस बयान की आलोचना की। इस लेख में अभिजीत मजूमदार ने याद किया था कि कैसे 70 के दशक में पेरियार की रैली में हिन्दू देवी-देवताओं की तस्वीरों को जूते-चप्पल से मारा गया था और ‘ब्राह्मणों द्वारा निचली जातियों पर अत्याचार’ के विरोध के नाम पर ये सब किया गया था। उन्होंने ध्यान दिलाया कि कैसे चोल, पल्लव और परांतक के हिन्दू साम्राज्यों का स्थल रहे तमिलनाडु में अब हिन्दुओं के खिलाफ घृणा सामान्य हो गई है।

चूँकि उदयनिधि स्टालिन की माँ एक आस्थावान हिन्दू हैं, अभिजीत मजूमदार ने अपने लेख के जरिए सनातन धर्म की हत्या को मातृहत्या के समान बता दिया। इसके बाद क्या हुआ? वो जिस मीडिया संस्थान से जुड़े हुए हैं, वहाँ तमिलनाडु पुलिस के अधिकारी पहुँचे उन्हें उठाने के लिए। वो उस दौरान यात्रा में थे, इस कारण बच गए। उनके खिलाफ FIR दर्ज कर ली गई। ये सब क्यों? सिर्फ एक लेख के लिए, बाकी कोई आरोप नहीं। उनके समर्थन में लिबरल गिरोह का एक कुत्ता भी खड़ा नहीं हुआ, मालिकों की बातें तो छोड़ ही दीजिए।

हमने इस पूरे मामले को लेकर अभिजीत मजूमदार से बात की। उन्होंने इस पर दुःख जताया कि जहाँ चीन की पैरवी करने वालों का समर्थन किया जा रहा है, वहीं जो सही में फासीवाद का शिकार हो रहे हैं उनके पक्ष में आवाज़ नहीं उठाई जा रही। उन्होंने याद दिलाया कि कैसे जब बिहार के यूट्यूबर मनीष कश्यप को गिरफ्तार किया गया और उन पर NSA लगा दिया गया, तब भी उनके लिए आवाज़ नहीं उठी पत्रकारों के समूह में से। उन्होंने बंगाल और कर्नाटक पुलिस द्वारा पत्रकारों पर कार्रवाई का मुद्दा भी उठाया।

अभिजीत मजूमदार ने ध्यान दिलाया कि कैसे हमारा देश एक तरह से चीन के साथ अगर युद्ध नहीं तो संघर्ष और प्रॉक्सी वॉर के दौर से गुजर रहा है। ऐसे समय में पत्रकारों का एक गिरोह खुल कर उस मीडिया संस्थान के समर्थन में आ जाता है, जो चीन की पैरवी करता है, वहाँ से फंडिंग लेता है। अभिजीत मजूमदार कहते हैं कि फासीवाद-फासीवाद चीखने वाले इस गिरोह को फासीवाद की परिभाषा का शायद भान नहीं है, तभी विपक्ष शासित राज्यों में पत्रकारों के खिलाफ हो रही कार्रवाई पर इनका मुँह नहीं खुलता।

वरिष्ठ पत्रकार ने ऑपइंडिया से बात करते हुए ये भी याद दिलाया कि ये वही गैंग है जिसने I.N.D.I. गठबंधन द्वारा 14 पत्रकारों पर ‘बैन’ लगाए जाने पर चूँ तक नहीं किया। उन्होंने पूछा कि क्या एक लेख लिखना इतना बड़ा अपराध है कि एक पत्रकार को पकड़ने के लिए पुलिस लगा दी जाए? उन्होंने कहा कि इसकी तो चीन की दलाली से तुलना भी नहीं की जा सकती। उनका सवाल जायज है। दुश्मन देश की दलाली के लिए किसी पर कार्रवाई होना और सिर्फ आलोचना के लिए किसी को उठवा लेना – दोनों में अंतर है। लेकिन, ये पत्रकारों का गिरोह विशेष है। इनके लिए सागर मलिक या अभिजीत मजूमदार पत्रकार की श्रेणी में नहीं आते, क्योंकि वो मोदी सरकार का अंधविरोध नहीं करते।

अभिजीत मजूमदार ने महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार द्वारा अर्णब गोस्वामी को गिरफ्तार कराए जाने का मामला भी उठाया। इस मामला का जिक्र हो ही गया तो एडिटर्स गिल्ड के दोहरे रवैये की भी चर्चा आवश्यक है। पश्चिम बंगाल में ‘न्यूज़ 9’ के पत्रकारों पर हमले का मामला हो या राजस्थान पुलिस का अमन चोपड़ा के घर पर पहुँच जाना, एडिटर्स गिल्ड चूँ तक नहीं करता। लेकिन, जब कार्रवाई चीन के दलाल गिरोह पर होती है तो यही एडिटर्स गिल्ड कहता है कि ‘प्रेस फ्रीडम’ के खिलाफ आपराधिक कानूनों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

एडिटर्स गिल्ड का भी ऐसा ही दोहरा रवैया

‘एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया’ एक बयान जारी कर के पुलिस-प्रशासन पर प्रक्रियाओं का पालन न करने का आरोप मढ़ता है, साथ ही इस बात पर चिंता जताता है कि कहीं ये मीडिया को चुप कराने की कोशिश तो नहीं। ये अलग बात है कि जब एक न्यूज़ रिपोर्ट के लिए सुधीर चौधरी पर कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार FIR कर देती है, तब ये संगठन चुप बैठ जाता है। मणिपुर हिंसा पर तो ये ‘फैक्ट फाइंडिंग मिशन’ चलाता है, लेकिन राजस्थान में महिलाओं के खिलाफ अपराध की बात आती है तो इसे एक भी फैक्ट नज़र नहीं आता।

हमें आज मीडिया के इस गिरोह को पहचानने की ज़रूरत है। आज इनके इशारे पर सरकार नहीं चलती, सोशल मीडिया पर आम आदमी इनके झूठ का पर्दाफाश कर देता है और आम पत्रकार इनके बीच घुस कर आईना दिखाते हैं – इससे ये तिलमिला उठे हैं। आज जम्मू कश्मीर और अरुणाचल प्रदेश को भारत से अलग बताने की साजिश रचने वालों का समर्थन हो रहा है। जब बात देश की संप्रभुता और अखंडता की आएगी, जनता हर कार्रवाई का समर्थन करेगी। अब वो ज़माना गया, जब मुट्ठी भर पत्रकारों का गिरोह दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के चुनाव को प्रभावित करता था।

जिसने उज्जैन में बच्ची के साथ की हैवानियत, उसके घर पर चला बुलडोजर: नरसंहार के बाद देवरिया के प्रेम यादव की बीवी बोली- नहीं गिरने देंगे घर

‘अपराधियों को किसी भी हाल में छोड़ा नहीं जाएगा’। ये बयान है उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी इसे अपनाया है। दोनों ही राज्यों में अपराधियों के घरों पर बुलडोजर चलाने की कार्रवाई अक्सर मीडिया की सुर्खियाँ बनती हैं।

उज्जैन रेप कांड के आरोपित भरत सोनी के घर पर मध्य प्रदेश सरकार ने बुलडोजर चला दिया। वहीं, उत्तर प्रदेश के देवरिया में एक ही परिवार के 5 लोगों की हत्या के मामले में बुलडोजर चलाने की तैयारियाँ शुरू हो गई हैं। देवरिया में राजस्व विभाग की टीम ने आरोपितों के घरों की पैमाइश कर ली है।

राजस्व विभाग की टीम रुद्रपुर थाना इलाके के फतेहपुर गाँव पहुँची और हत्याकांड में शामिल आरोपितों के घरों की पैमाइश की। बताया जा रहा है कि यहाँ बुलडोजर चलाने की कार्रवाई कभी भी हो सकती है। इस बीच, हत्याकांड में सबसे पहले मारे गए प्रेमचंद्र यादव (पूर्व जिला पंचायत सदस्य) की पत्नी शीला यादव ने कहा है कि वो अपने घर पर बुलडोजर नहीं चलने देंगी।

इस पूरे कांड में दबंग बताए जा रहे प्रेमचंद्र यादव की हत्या सबसे पहले हुई थी। इसके बाद प्रेमचंद्र यादव के पक्ष के लोगों ने विपक्षी सत्य प्रकाश दुबे के घर पर हमला बोल दिया और दुबे सहित उनके परिवार के 5 सदस्यों की बेरहमी से हत्या कर दी। इन लोगों को गोली मार दी गई और कुछ लोगों को हथियारों से काट दिया गया था।

कचहरी से कागज लाओ, फिर कार्रवाई करो

राजस्व विभाग की टीम द्वारा मृतक प्रेमचंद्र यादव के घर की पैमाइश करने के बाद मृतक प्रेमचंद यादव की पत्नी शीला यादव ने बयान दिया है। शीला यादव ने कहा, “मेरे घर के 2 लोगों को पुलिस उठाकर ले गई है। बाकी पड़ोसियों को भी पुलिस पकड़ कर ले गई है। अंतिम संस्कार से जुड़े क्रिया-कलापों के लिए भी मर्द नहीं बचे हैं।”

शीला यादव ने कहा, “मेरा घर तोड़ने की भी बात चल रही है, जबकि ये पूरी तरह से लीगल है और मेरी सास के नाम पर इसका बैनामा है। पहले वो कागज कचहरी से लाया जाए, उसके बाद कोई काम हो। मैं अपना घर नहीं तोड़ने दूँगी।” शीला यादव ने कहा, “पहले मेरे पति की हत्या हुई, इस बात की जाँच की जाए। इसके बाद ही कुछ हो।”

उज्जैन में रेप के आरोपित के घर चला बुलडोजर

उधर, मध्य प्रदेश के उज्जैन में 15 साल की बच्ची के साथ रेप के आरोपित भरत सोनी के घर पर बुलडोजर चला दी गई। भरत सोनी ने सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा करके अपना घर बनाया था। उसने मंदिर भी बना रखा था। कब्जे वाली इन जमीनों को प्रशासन की टीम ने मुक्त करवा लिया और बुलडोजर चलाकर सभी अवैध निर्माणों को गिरा दिया।

‘ग्वाला बढ़ गए, बाकी कम कैसे हो गए?’: बिहार की जाति जनगणना पर माँझी ने उठाए सवाल, बोले- यादव ने नाम पर 10 जातियों को मिला दिया

बिहार में नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव की गठबंधन सरकार ने जातिगत आँकड़े जारी किए, इसको लेकर सवाल उठने लगे हैं। कई राजनेताओं द्वारा सवाल उठाने के बाद अब पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम माँझी ने इन आँकड़ों पर सवाल उठाए हैं।

हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) के संस्थापक जीतनराम माँझी ने कहा, “… 1931 में ग्वाला जाति का प्रतिशत 4 से कुछ अधिक था। अब जबकि 2022 की जनगणना हुई है तो उसमें वो 14 प्रतिशत से कुछ अधिक हैं। इतना कैसे उनमें बढ़ोतरी हो गई और दूसरी जातियों की जनसंख्या में कमी क्यों हुई है।

अब चुनाव नहीं लड़ने का प्रण लेने वाले जीतनराम माँझी ने कहा कि यादव के नाम पर बिहार सरकार ने 8-10 जातियों को एक साथ मिला दिया है। उन्होंने कहा, “हमारे भूइयाँ जाति को अलग कर दिया गया। दो के बजाय एक होना चाहिए था। हमने तो लिखकर भी दिया था माननीय मुख्यमंत्री जी को। मुख्यमंत्री जी आपने ही कहा था कि भूइयां और मुसहर दोनों एक हैं।”

माँझी ने सवाल किया कि नीतीश कुमार की सरकार के वर्तमान मंत्रीमंडल को बर्खास्त किया जाए और संख्या आधारित मंत्रिपरिषद का गठन करें। इससे समाज के हर तबके को प्रतिनिधित्व का मौका मिल पाए। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि दरी बिछाने वाला जमाना गया, जो बिछाएगा वही बैठेगा। 

हिंदुओं की जाति आधारित संख्या की बात करे तो सबसे अधिक जनसंख्या यादव लिखने वाले अहीर/गोप/ग्वाला जाति की है। उनकी जनसंख्या 14 प्रतिशत है। वहीं, दूसरे स्थान पर 4.21 प्रतिशत आबादी के साथ कुशवाहा (कोइरी) दूसरे स्थान पर हैं। तीसरे स्थान पर ब्राह्मण, चौथे स्थान पर क्षत्रिय यानी राजपूत और पाँचवे स्थान पर मुसहरों की आबादी है।

महत्वपूर्ण बात यह है कि जो बात जीतनराम माँझी कह रहे हैं, वही बात सरकारी दस्तावेज में भी दिख रहा है। सरकारी द्वारा जारी किए गए आँकड़े में साफ दिख रहा है कि यादव के नाम पर बिहार सरकार ने अहीर, ग्वाला, गोरा, घासी, मेहर, सदगोप और लक्ष्मी नारायण गोला जैसी जातियों को जोड़ा गया है।

बताते चलें कि जातिगत आँकड़े जारी होने के बाद से ही बिहार में सियासत चरम पर है। आँकड़ों में फर्जीवाड़ों के आरोप लग रहे हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री और पटना साहिब से भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद ने भी कहा कि जातीय गणना की रिपोर्ट के आँकड़ों में फर्जीवाड़ा किया गया है। उन्होंने कहा कि उनके घर जनगणना के लिए एक टीम ने न उनसे मुलाकात की और न ही उनका हस्ताक्षर नहीं लिया।

बंगाल पुलिस को हाईकोर्ट का झटका: हिन्दुओं की यात्रा को मिली अनुमति, VHP-बजरंग दल करेंगे ‘शौर्य जागरण’ का शंखनाद

पश्चिम बंगाल पुलिस ने विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल की राष्ट्रव्यापी यात्रा के पश्चिम बंगाल हिस्से को मंजूरी नहीं दी थी, जिसके बाद हिंदू संगठनों ने कलकत्ता हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। कलकत्ता हाई कोर्ट ने पूरे मामले की सुनवाई की और विहिप-बजरंग दल के ‘शौर्य जागरण यात्रा’ को मंजूरी दे दी।

पश्चिम बंगाल पुलिस की ओर से राज्य के कुछ जिलों में रैली को आगे बढ़ाने की अनुमति देने से इनकार करने के बाद वीएचपी और बजरंग दल के सदस्यों द्वारा तीन अलग-अलग याचिकाएँ दायर की गईं। राष्ट्रव्यापी रैली 4 अक्टूबर से 8 अक्टूबर तक पश्चिम बंगाल से गुजरने वाली है। वकील अनामिका पांडे और फिरोज एडुल्जी के माध्यम से विहिप और बजरंग दल के तीन सदस्यों चंदन कैटी, अमित प्रमाणिक और देबजीत भर द्वारा याचिकाएँ दायर की गईं।

याचिकाकर्ताओं ने पश्चिम बंगाल पुलिस की ओर से अनुमति न मिलने के बारे में हाई कोर्ट में अपनी बात रखी। इन संगठनों की तरफ से कहा गया, “इस यात्रा का उद्देश्य ‘हिंदू धर्म’ से संबंधित विभिन्न मुद्दों के बारे में जागरूकता फैलाना है। इसका उद्देश्य विभिन्न स्वतंत्रता सेनानियों को सम्मानित करना भी है, जिन्होंने हिंदू धर्म और हिंदू संस्कृति की रक्षा करते हुए देश के लिए अपना जीवन लगा दिया। यह धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व वाले विभिन्न स्थलों से होकर गुजरेगा। इस यात्रा के दौरान किसी तरह का अस्त्र-शस्त्र नहीं रहेगा।”

आजादी की लड़ाई के बारे में जागरुकता पैदा करना है लक्ष्य

याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट से कहा है कि यात्रा में वीएचपी और बजरंग दल का कोई भी सदस्य हथियार नहीं रखेगा। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि नागरिकों के बीच राष्ट्रवाद की अलख जगाने के लिए इस यात्रा का आयोजन किया जा रहा है। अपनी दलील में याचिकाकर्ताओं ने कहा, “लोगों को यह याद दिलाना ज़रूरी है कि 15 अगस्त 1947 की आजादी के पीछे लड़ाइयों, विद्रोहों और आंदोलनों का लंबा इतिहास रहा है, जिसे भूलना नहीं चाहिए।” इस बीच, पश्चिम बंगाल में इस यात्रा की शुरुआत हो गई है।

विहिप ने अपने एक्स (पूर्व में ट्विटर) हैंडल पर इस यात्रा के पश्चिम बंगाल में शुरू होने की जानकारी दी गई है। पोस्ट में लिखा गया है, “आज उत्तर बंगाल प्रांत के अलीपुरद्वार जिले के जयगांव प्रखंड भूटान बॉर्डर से बजरंग दल शौर्य जागरण यात्रा का शुभारंभ विश्व हिन्दू परिषद् के अखिल भारतीय संगठन महामंत्री श्री विनायक राव देशपांडे जी के द्वारा हुआ। इस यात्रा में हजारों की संख्या में नवयुवक और मातृ शक्ति ने हिस्सा लिया।”

कलकत्ता हाई कोर्ट में याचिकाकर्ताओं ने कहा है कि इस ‘शौर्य जागरण यात्रा’ में भारी भीड़ नहीं बुलाई जाएगी, बल्कि इसमें सिर्फ 3 ट्रक और करीब 20 मोटरसाइकिलें ही शामिल होंगी। इस दौरान विहिप और बजरंग दल के अधिकतम 200 सदस्य ही मौजूद होंगे।