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स्कूल में छोटे-छोटे बच्चों से पढ़वाई नमाज़, भड़के अभिभावकों ने किया प्रदर्शन: ‘सांस्कृतिक कार्यक्रम’ के नाम पर पहनाई इस्लामी टोपी

गुजरात के अहमदाबाद में एक स्कूल ने ईद (मीलाद उन-नबी) के मौके पर आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में हिन्दू बच्चों से नमाज पढ़वाई है। इन बच्चों को नमाज की जालीदार टोपी और कुर्ता-पैजामा भी पहनाया गया। इस कार्यक्रम का वीडियो वायरल होने के बाद बच्चों के अभिभावकों ने प्रदर्शन किया है।

जानकारी के अनुसार, अहमदाबाद के घातलोडिया में स्थित कैलोरेक्स स्कूल में शुक्रवार (29 सितम्बर, 2023) को ईद (मीलाद उन-नबी) के मौके पर एक कथित सांस्कृतिक कार्यक्रम के नाम पर छोटे-छोटे बच्चों को नमाज़ वाली ड्रेस पहना कर उनसे ‘लब पर आती है दुआ’ वाला मजहबी तराना गवाया गया। उनको इस दौरान नमाज़ करना सिखाया गया।

यह पूरा कार्यक्रम बच्चों के अभिभावकों से अनुमति लिए बिना किया गया। जब इस घटना का वीडियो वायरल हुआ तो अभिभावक भड़क गए। यह सूचना हिन्दू संगठनों को भी मिली कि स्कूल में एक विशेष मजहब के तौर-तरीके छोटे बच्चों को सिखाए गए हैं।

हिन्दू संगठनों और अभिभावकों ने स्कूल में इस बात पर 3 अक्टूबर, 2023 विरोध प्रदर्शन किया और प्रधानाध्यापक के इस्तीफे की माँग की। बच्चों के अभिभावकों ने स्कूल से अपने बच्चों का नाम कटवाने की भी बात की। उनका कहना था कि छोटे बच्चों को नमाज़ सिखाना उनके मस्तिष्क पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है और वह इसकी कभी अनुमति नहीं देंगे।

नमाज़ पढ़वाने पर स्कूल ने माँगी माफ़ी

हिन्दू संगठनों और अभिभावकों का कड़ा विरोध देखकर स्कूल ने एक माफ़ीनामा जारी किया। इस माफ़ीनामे में उन्होंने इस कार्यक्रम को भूल बताया और कहा कि भविष्य में ऐसा कोई भी कृत्य वह नहीं दोहराएँगे। स्कूल के विरुद्ध अब शिक्षा विभाग भी एक्शन में आ गया है। अहमदाबाद के जिला शिक्षा अधिकारी रोहित चौधरी ने ऑपइंडिया को बताया कि स्कूल को इस वायरल वीडियो के मामले में एक नोटिस भेजा गया है।

उन्होंने कहा, “हमने स्कूल को नोटिस भेजकर इस मामले में जवाब माँगा है। उनका जवाब आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।” स्कूल को भेजे गए नोटिस में कहा गया है कि उसका जो वीडियो वायरल हुआ है उससे लोगों की धार्मिक भावनाएँ आहत हुई हैं।

पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे ही मामले

ऐसा नहीं है कि यह कोई पहला मामला है जिसमें हिन्दू बच्चों को दूसरे मजहबों के तौर-तरीके सिखाए गए हों। ईद-उल-मिलाद के मौके पर मध्य प्रदेश के गुना में ऐसा ही एक मामला हाल में ही सामने आया था। गुना के प्रिंस पब्लिक स्कूल में 27 सितम्बर, 2023 को ईद के लिए एक कथित सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया था, जिसमें हिन्दू बच्चियों को हिजाब पहना कर उनसे ‘भर दे झोली मेरी या मुहम्मद’ जैसे गीत गवाए गए थे।

इसके पश्चात हिन्दू संगठनों द्वारा किए गए विरोध प्रदर्शन के कारण प्रधानाध्यापक और इस कार्यक्रम को आयोजित करने वाले शिक्षक को नौकरी से निकाल दिया गया था। स्कूल ने इस घटना पर माफ़ी माँगी थी और दोबारा ऐसी हरकत ना करने का वादा किया था। इससे पहले गुजरात के कच्छ से जून 2023 में एक मामला सामने आया था जहाँ ईद के मौके पर पर्ल हार्बर स्कूल में हिन्दू बच्चों को गोल टोपियाँ पहनाई गई थी। स्कूल ने विरोध के पश्चात माफ़ी माँगी थी।

जिस साध्वी को चमड़े के बेल्ट से पीटा, पुरुष कैदियों के साथ रख पोर्न वीडियो देखने को किया मजबूर, वह कोर्ट में हुईं भावुक: जानिए मामला

मध्य प्रदेश के भोपाल से भाजपा सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर मंगलवार (3 अक्टूबर 2023) को मालेगाँव धमाकों के संबंध में हो रही सुनवाई के दौरान भावुक हो गईं। साध्वी प्रज्ञा के भावुक होने के कारण कोर्ट ने अपनी कार्यवाही 10 मिनट के लिए रोक दी और उनके सामान्य होने पर फिर कार्यवाही शुरू की।

दरअसल, साध्वी प्रज्ञा ठाकुर वर्ष 2008 में हुए मालेगाँव धमाकों के सम्बन्ध में NIA के विशेष कोर्ट के समक्ष अपना बयान दर्ज करवा रही थीं। उनके साथ मालेगाँव धमाके में आरोपित बनाए गए अन्य 7 व्यक्तियों का भी बयान दर्ज किया जा रहा था।

साध्वी प्रज्ञा के साथ जिन अन्य लोगों के बयान दर्ज किए गए उनमें लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित, मेजर (रिटायर्ड) रमेश उपाध्याय, सुधाकर चतुर्वेदी, सुधाकर द्विवेदी, समीर कुलकर्णी और अजय राहिरकर शामिल हैं। इस दौरान साध्वी से लगभग 60 प्रश्न पूछे गए।

साध्वी से जब धमाके के बाद मृत और घायल लोगों को आई चोटों के सम्बन्ध में प्रश्न पूछे गए तो वह भावुक हो गईं। इसके पश्चात मामले की सुनवाई कर रहे न्यायाधीश एके लाहोटी ने कार्रवाई को 10 मिनट के लिए रोक दिया। मालेगाँव में 29 सितम्बर को हुए इन धमाकों में 9 लोगों की मृत्यु हुई थी और 100 से अधिक घायल हुए थे।

बताया गया था कि यह धमाके एक मोटरसाईकिल में बम लगाकर किए गए थे। इस मामले में साध्वी प्रज्ञा और कर्नल पुरोहित समेत अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया था। NIA द्वारा वर्ष 2016 में दाखिल अंतिम चार्जशीट में उनका नाम नहीं था और उन्हें जमानत मिल गई थी। उनको इस मामले में दोषी नहीं माना गया था।

साध्वी प्रज्ञा ने एक इंटरव्यू के दौरान बताया था कि कॉन्ग्रेस की ध्रुवीकरण की राजनीति के कारण उन्हें गिरफ्तार किया गया था जिसका नेतृत्व तत्कालीन गृह मंत्री पी चिदंबरम और नेता दिग्विजय सिंह कर रहे थे। उन्होंने दिग्विजय सिंह को आतंक का समर्थक भी बताया था। पी चिदंबरम को उन्होंने विधर्मी कहा था।

आतंकी साबित करने के लिए दी गई थी साध्वी प्रज्ञा को प्रताड़ना

साध्वी प्रज्ञा को मालेगाँव धमाका मामले में गिरफ्तार किए जाने के पश्चात उनको महाराष्ट्र ATS और पुलिसकर्मियों ने तरह-तरह की प्रताड़नाएँ दी थीं। इसका जिक्र उन्होंने स्वयं जनता के बीच दिया था। साध्वी प्रज्ञा ने बताया था कि उन्हें चमड़े की बेल्ट से पीटा जाता था। उन्हें 24 दिनों तक भूखा रखा गया था, उनको बिजली के झटके दिए जाते थे।

साध्वी ने बताया कि उनके साथ गाली-गलौज आम बात थी। उनको पुरुष कैदियों के साथ रखकर पोर्न वीडियो देखने पर मजबूर किया जाता था। उनको पीटने के लिए लगातार 5-6 पुलिस वाले लगाए जाते थे और जब वह थक जाते थे तो दूसरे पुलिसकर्मी उनको पीटने लग जाते थे।

इन सबके बाद जब उन्हें कोर्ट के आदेश पर डॉक्टर के पास ले जाया जाता था तो उन पर दबाव रहता था कि वह यह रिपोर्ट दे कि साध्वी एकदम ठीक हैं। 25 सितम्बर 2023 को NIA कोर्ट के सामने पेश हुईं साध्वी प्रज्ञा ने बताया था उनकी बीमारी की हालत के लिए कॉन्ग्रेस जिम्मेदार है।

साध्वी ने बताया कि जब उनको मालेगाँव धमाके के बाद पूछताछ के लिए बुलाया गया था तब वह पूरी तरह स्वस्थ थीं, लेकिन पुलिस की हिरासत में उनकी हालत बिगड़ी। उनको कैंसर और न्यूरो की बीमारी हो गई। शरीर में पस तक पड़ गया।

45 दिन, 450 छापेमार, गुप्त जाँच, तकनीकी निगरानी: ‘पुलिस का भी मोबाइल जब्त’ जैसी प्लानिंग के बाद जाल में फँसा NewsClick

IAS/IPS अधिकारियों को गिरफ्तार होते हम सबने देखा है। डॉक्टर-इंजीनियर-जज-नेता-सासंद-विधायक भी होते हैं। बवाल, प्राइम टाइम, दंगल, खबर पर खबर, संपादकीय… ये सब लेकिन सिर्फ तब होता है, जब बात पत्रकार की गिरफ्तारी की होती है। प्रेस क्लब इसके खिलाफ मोर्चा खोल देता है, एडिटर्स गिल्ड चिट्ठी-पत्री लिखने लगता है। ऐसी बवाली ‘जाति’ पर कार्रवाई करने से पहले पुलिस-प्रशासन क्या-क्या तैयारी करती होगी? किन-किन मुद्दों पर सोचती होगी? आरोप को साबित करने के लिए कहाँ-कहाँ से डेटा निकालती होगी? इन सब सवालों का जवाब है न्यूज क्लिक (NewsClick) पर की गई कार्रवाई।

न्यूज क्लिक (NewsClick) और इससे जुड़ी चायनीज फंडिंग के मामले में छापेमारी की गई 3 अक्टूबर 2023 को। कुल 46 पत्रकारों से पूछताछ की गई, 2 गिरफ्तार भी हुए। तथाकथित मीडिया और जंग खाए चंद कहानीकारों (खुद को पत्रकार कहते हैं) वाली फर्जी वेबसाइट न्यूज क्लिक पर हाथ डालने की शुरुआत लेकिन होती है 17 अगस्त से यानी 45 दिन पहले

पुलिस के एक्शन से 12 दिन पहले न्यूज क्लिक (NewsClick) पोस्टमॉर्टम छपता है ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ में। 5 अगस्त को ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ ने अमेरिकी व्यवसायी नेविल रॉय सिंघम के साथ चीनी सरकार के संबंध और ‘न्यूज क्लिक’ नामक वामपंथी प्रोपेगेंडा पोर्टल को मिल रही फंडिंग को लेकर खुलासा किया था।

अंतररराष्ट्रीय मीडिया में ‘न्यूज क्लिक’ को लेकर छपी खबर के बाद भारत सरकार के मंत्री अनुराग ठाकुर ने 7 अगस्त को प्रेस कॉन्फ्रेंस किया था। इसके 10 दिन के बाद दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल ने 17 अगस्त को यूएपीए (UAPA: Unlawful Activities Prevention Act, गैरकानूनी गतिविधियाँ रोकथाम अधिनियम) के तहत केस दर्ज किया और जाँच शुरू की गई।

शुरुआत में यह जाँच ईडी (ED: Enforcement Directorate, प्रवर्तन निदेशालय) के जुटाए फाइल, डॉक्यूमेंट्स के आधार पर आगे बढ़ रही थी। यह केस लेकिन इतना आसान भी नहीं था। बात यहाँ सिर्फ पैसों के लेन-देन की नहीं थी।

जाँच जैसे-जैसे आगे बढ़ती गई, इसमें चायनीज पैसा, चीनी षड्यंत्र, अमेरिकी कनेक्शन, वामपंथी संगठन, भारत-विरोधी गतिविधियाँ आदि तक इस केस में जुड़ते चले गए। भारत की संप्रभुता को खतरा जैसी षड्यंत्रकारी गतिविधियों को देखते हुए पूरी जाँच के लिए स्पेशल टीम का गठन किया गया। अच्छी तरीके से जाँच कर पूरे मुद्दे के तह तक जाने के लिए आरोपितों की तकनीकी निगरानी के लिए स्पेशल उपकरणों का उपयोग भी किया गया।

टारगेट पर 3 टीम, 100 लोकेशन, पुलिस वाले 450

न्यूज क्लिक (NewsClick) और इससे जुड़ी चायनीज फंडिंग के मामले में इसके संस्थापक प्रबीर पुरकायस्थ और HR हेड अमित चक्रवर्ती गिरफ्तार किए गए हैं। यह लेकिन इतना आसान नहीं था।

वित्तीय मामलों की जाँच कर रही स्पेशल टीम ने इनको दबोचने से पहले इनके बैंक डिटेल्स, इनकी संस्था से जुड़े कॉर्पोरेट बिल आदि से संबंधित हजारों पन्नों की खाक छानी। वित्तीय मामलों से अलग एक टीम सिर्फ यह जाँच कर रही थी कि ‘न्यूज क्लिक’ पर कैसे कॉन्टेंट पब्लिश किए गए, वीडियो कैसे-कैसे डाले गए। इस टीम को यह भी देखना था कि अगर कोई कॉन्टेंट या डेटा इनकी वेबसाइट से डिलीट किया गया है तो वो कब हुआ, उसका संदर्भ क्या था?

जाँच करने वाली स्पेशल टीम जब सारा काला चिट्ठा जुगाड़ लेती है, तब जाकर 2 अक्टूबर 2023 की आधी रात को दिल्ली पुलिस की स्पेशल टीम की मीटिंग होती है। इस बैठक में 200 से अधिक पुलिसकर्मी हिस्सा लेते हैं। किसी भी तरह की जानकारी लीक होने से रोकने के लिए सभी पुलिस अधिकारियों के मोबाइल फोन इस मीटिंग से पहले जमा कर लिए गए थे। फिर 100 जगहों पर छापेमारी, कुल 46 पत्रकारों से पूछताछ आदि का खाका तैयार हुआ।

जिस पर आरोप गंभीर, दबोचने का तरीका भी लीक-प्रूफ

सभी आरोपितों से एक जैसा सवाल-जवाब किया गया, ऐसा नहीं था। आरोपितों को भी उनके चायनीज कनेक्शन/फंडिंग को देखते हुए ए, बी और सी कैटेगिरी में बाँटा गया। 3 अक्टूबर की सुबह से जब छापेमारी शुरू हुई, तो वो रात में बनाई गई प्लानिंग के तहत ही थी। इस प्लान का डिटेल आप ऐसे समझ सकते हैं कि गिरफ्तार किए गए प्रबीर पुरकायस्थ और अमित चक्रवर्ती ए कैटेगिरी में थे। इसी ए कैटेगिरी में 4 और आरोपितों पर स्पेशल पुलिस की रडार है।

ऐसे जाल में फँसा NewsClick

ए कैटेगिरी वाले हर आरोपितों को पकड़ने, पूछताछ करने के लिए 8 से 10 पुलिस वाले लगाए गए थे। 3 अक्टूबर की सुबह छापेमारी के वक्त तक इन पुलिस वालों को पता नहीं था कि इनका टास्क क्या है, किस पर हाथ डालना है। बस एक जगह बता दी गई थी कि फलां जगह पहुँचो। छापेमारी जैसे-जैसे आगे बढ़ रही थी, जरूरत के हिसाब से पुलिस वालों को जानकारी दी जा रही थी।

देश के अलग-अलग शहरों जैसे दिल्ली, गुरुग्राम, नोएडा, गाजियाबाद, मुंबई में न्यूज क्लिक (NewsClick) से संबंधित छापेमारी की गई। इन जगहों पर कुल 46 पत्रकारों से पूछताछ की गई,जिनमें से 9 महिलाएँ हैं। इन सभी के डिजिटल उपकरण (मोबाइल, लैपटॉप आदि), दस्तावेज आदि को जाँच के लिए जब्त कर लिया गया है।

आपको बता दें कि न्यूज क्लिक (NewsClick) पर जो एफआईआर की गई है, वो यूएपीए की धारा 13 (गैरकानूनी गतिविधियाँ); धारा 16 (आतंकवादी कृत्य); धारा 17 (आतंकवादी कृत्यों के लिए धन जुटाना); धारा 18 (षड्यंत्र रचना); धारा 22 (सी) (कंपनियों, ट्रस्टों द्वारा अपराध करना) के तहत की गई है। इनके अलावा आईपीसी की धारा 153ए (विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना) और 120बी (आपराधिक साजिश) भी जोड़ी गई है।

जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी भागीदारी: अब राबड़ी नहीं, रामरतिया का बेटा होगा राजद का नेता

दिल्ली का राउज एवेन्यू कोर्ट। तारीख 4 अक्टूबर 2023। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव दिखे। कभी बिहार पर मुख्यमंत्री के रूप में थोप दी गईं राबड़ी देवी दिखीं। दोनों के उपमुख्यमंत्री बेटे तेजस्वी यादव दिखे। सांसद बिटिया मीसा भारती दिखीं। मामला जमीन लेकर रेलवे में नौकरी देने का है। कोर्ट ने सबको जमानत दे दी है।

मीडिया में टन-टना-टन की आवाज और बिग ब्रेकिंग के उद्घोष के साथ खबर भी चलने लगी- लालू परिवार को बड़ी राहत। लेकिन परिवार की खुशी दूसरे ब्रेकिंग से धड़ाम हो गई। पटना से संवाददाता पलटू चच्चा ने बताया कि 10 सर्कुलर रोड ​के राबड़ी देवी के आवास में बड़ा बवाल मचा हुआ है। बिहार पुलिस फेल। सैप के जवान फेल। केंद्रीय बलों की तैनाती की गुहार लग रही है।

संवाददाता पलटू चच्चा के अनुसार इस बवाल का नेतृत्व रामरतिया कर रही है। रामरतिया वही भैंस है जिसे लालू अपने खटाल में छोड़कर दिल्ली आए हुए हैं। इधर लालू दिल्ली गए उधर उनके मित्र (जिनके पेट में दाँत बताया जाता है) ने जातीय जनगणना के नंबर्स गुपचुप रामरतिया के कान में फूँक दिए। रामरतिया बिदक गई। बोली अब तो जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी भागीदारी पर ही मानूँगी।

रामरतिया ने गुणा-भाग लगाया। पाया कि लालू-राबड़ी से ज्यादा बाल-बुतरू तो उसके हैं। उसे समझ आ गया कि उसका ही दूध पिला-पिलाकर उस पर राबड़ी ने अपना बेटा थोप दिया। वैसे ही जैसे कभी उसके हिस्से का चारा राबड़ी के पतिदेव डकार गए। चाराखोरी पकड़ी गई, सजा हुई, पर बीमारी के बहाने अब भी लौंडा नाच देख रहे।

रामरतिया ने झट से ऐलान किया अब ये शोषण नहीं चलेगा। पूरे नंबर्स के साथ 10 सर्कुलर रोड में धरने पर बैठ गई। रामरतिया को मनाने के लिए मनोज झा भी भेजे गए। उन्होंने ठाकुर का कुआँ भी पढ़ी। लेकिन रामरतिया ने पानी पीने से मना कर दिया।

रामरतिया के समर्थन में बुधनी गाय भी दलबल के साथ पहुँची। उसका दर्द तो अलग ही किसिम का है। उसका कहना है कि सर्वण मानकर जनगणना में उसकी गिनती ही नहीं हुई। अपने हिसाब से गणित फिटकर उसका नंबर बता दिया गया है।

जुम्मन बकरा अलग फाँद रहा है। 18 पर्सेंट होकर भी 14 पर्सेंट से मिले घाव दिखा रहा है। उसकी दाढ़ी सहलाने को सिद्दीकी मियाँ भेजे गए। पर जुम्मन ने अबकी दाढ़ी पर हाथ न रखने दिया। बोला बहुत हुआ। अबकी हम बनाएँगे अपना गंगा-जमुनी समीकरण। रामरतिया और बुधनी को होगा अपन समर्थन।

10 सर्कुलर रोड में बवाल की खबर जंगल में आग की तरह फैली। पटना के 1 अणे मार्ग पर आपात बैठक हुई। तेजू भैया के नेतृत्व में वार्ता के लिए कमिटी बनी। घंटों चली बात के बाद तय हुआ कि अब राजद का नेता राबड़ी नहीं, रामरतिया का बेटा होगा। बाबू जगदानंद की जगह जुम्मन का बिरादर होगा।

सहमति बनते ही पटना में तेजू भैया के आवास से लेकर सिंगापुर में रोहिणी दीदी की कोठी तक पटाखे छूटे। जश्न मन रहा था सारे भाई-बहन जो मलाई तेज भैया और मीसा दीदी से छीन नहीं पाए उसे झटके में जातीय जनगणना से रामरतिया ने चट कर लिया।

अब इधर सुशासन बाबू टेंशन में हैं। जब 14 पर्सेंट वाले रामरतिया-बुधनी-जुम्मन की तिकड़ी से मलाई नहीं बचा सके तो 2.87 पर्सेंट से वे कौन सी मूली उखाड़ लेंगे!

सिक्किम में सेना का कैंप बहा, 23 जवान लापता: बादल फटने से भीषण बाढ़, तीस्ता नदी का जलस्तर 15 से 20 फुट तक बढ़ा

सिक्किम में अचानक बादल बढ़ने से भीषण बाढ़ आ गई है। तीस्ता नदी उफान पर है। सेना का कैंप बहने की खबर है। इसके बाद से 23 जवान लापता हैं। इनकी तलाश में सर्च ऑपरेशन जारी है।

बादल फटने की घटना उत्तरी सिक्किम में ल्होनक झील के ऊपर हुई। इससे लाचेन घाटी में तीस्ता नदी में बाढ़ आ गई। बचाव अभियान के लिए सिक्किम और उत्तरी बंगाल के कुछ हिस्सों में एनडीआरएफ की चार टीमों को तैनात किया गया है। एनडीआरएफ की एक टीम सिक्किम के सिंगतम में है। वहीं एक-एक टीम पश्चिम बंगाल के कलिम्पोंग, कर्सियांग और जलपाईगुड़ी में हैं।

सेना के मुताबिक, ये घटना 3 अक्टूबर 2023 को रात के करीब 1.30 बजे हुई। सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने भी सिंगताम में अचानक आई बाढ़ के बाद हालात का जायजा लिया गई।

सीएम तमांग ने एक्स हैंडल से पोस्ट कर कहा है, “हाल ही में हमारे राज्य में आई प्राकृतिक आपदा से हम सभी परिचित हैं। प्रभावित क्षेत्रों में आपातकालीन सेवाएँ तैनात कर दी गई है। नुकसान का आकलन करने और स्थानीय समुदाय के साथ बातचीत करने के लिए मैंने सिंगताम का दौरा किया है।”

उन्होंने आगे कहा, “मैं विनम्रतापूर्वक सभी नागरिकों से आग्रह करता हूँ कि वे सतर्क रहें और इस अहम वक्त के दौरान गैरजरूरी सफर से बचें। यह जरूरी है कि हम संयम बनाए रखें और अपने क्षेत्र में तेजी से सामान्य हालात लौटने की उम्मीद करें।” जानकारी के मुताबिक अचानक आई बाढ़ से सिंगताम के पास बारदांग में खड़े सेना के वाहन भी बह गए। करीब 41 गाड़ियों के डूबने की खबर है।

सेना को यहाँ बचाव के कार्य करने में चुनौतियाँ का भी सामना करना पड़ रहा है। इस क्षेत्र में इंटरनेट कनेक्टिविटी कम है। इस वजह कमांड स्तर के अधिकारियों को ज़मीनी स्तर पर लोगों से जुड़ने में मुश्किल पेश आ रही है।

रिपोर्ट के मुताबिक, चुंगथांग बाँध से अचानक पानी छोड़े जाने के वजह से नदी में पानी का स्तर 15-20 फीट तक बढ़ गया। सेकेंड बटालियन सिक्किम के डिप्टी कमांडेंट विवेक कुमार ने न्यूज18 को बताया कि 23 जवानों के लापता होने की एनडीआरएफ ने पुष्टि की है।

उन्होंने बताया कि अब तक तीन नागरिकों की लाश मिली है। गंगटोक को जोड़ने वाली सड़कें क्षतिग्रस्त हो गई हैं। वाहनों की आवाजाही रोक दी गई है। मुगुथांग में अचानक आई बाढ़ की वजह से डिकचू और टूंग में दो स्थायी पुल पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं। बीआरओ के कर्मचारी स्थानीय लोगों के बचाव के काम में लगातार लगे हैं।

लेम्बोर्गिनी में सवार थीं हिरोइन गायत्री जोशी, ओवरटेक करने के चक्कर में फरारी से टक्कर: आग लगने से स्विस कपल की मौत

फिल्म स्वदेश में शाहरुख खान की को-स्टार रही एक्ट्रेस गायत्री जोशी इटली में एक भयंकर कार हादसे का शिकार हो गईं। लेम्बोर्गिनी में पति विकास ओबरॉय के साथ सफर कर रही इस एक्ट्रेस की कार एक स्विस कपल की फेरारी से टकरा गई। हादसे में स्विस कपल की मौत हो गई। गायत्री और विकास सुरक्षित हैं। हादसा सार्डिनिया सुपर कार टूर के दौरान हुआ।

गायत्री की कार अन्य वाहनों और कैंपर वैन से टकरा गई थी। टक्कर तब हुई जब लेम्बोर्गिनी और फेरारी सहित कई हाई परफॉर्मेंस वाली कारों ने एक साथ कैंपर वैन को ओवरटेक करने की कोशिश की। इससे कैंपर वैन सार्डिनिया में एक ग्रामीण इलाके की सड़क पर पलट गई। इस दौरान बदकिस्मती से फेरारी में आग लग गई। इस वजह से उसमें बैठे स्विस कपल की जान चली गई। कपल की पहचान स्विट्जरलैंड की 63 साल की मेलिसा क्रौटली और 67 साल मार्कस क्रौटली के रूप में हुई है।

एक्ट्रेस गायत्री जोशी ने द फ्री प्रेस जर्नल को बताया है, “विकास और मैं इटली में हैं। हम यहाँ एक दुर्घटना (कई कारों की टक्कर) का शिकार हो गए। भगवान की कृपा से, हम दोनों बिल्कुल ठीक हैं।” इस दुखद हादसे के कई विजुएल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सामने आए हैं।

सार्डिनिया सुपरकार टूर के दौरान हुआ ये हादसा लग्जरी कारों की परेड के दौरान हुआ। इस टूर में लक्जरी कारें अपने हाई क्वालिटी की परफॉर्मेंस को दिखाते हुए टेउलाडा से ओलबिया तक परेड करती हैं।

गौरतलब है कि गायत्री जोशी ने 2004 में मूवी ‘स्वदेश’ से बॉलीवुड में कदम रखा था। इस फिल्म में वो शाहरुख के साथ मुख्य भूमिका में थी। इस मूवी के बाद उन्होंने एक्टिंग से दूरी बना ली और अपनी पर्सनल लाइफ में बिजी हो गई।

भारत की मशहूर रियल एस्टेट कंपनी ओबेरॉय कंस्ट्रक्शन के मैनेजिंग डॉयरेक्टर विकास ओबेरॉय से शादी के बाद वो किसी भी फिल्म में नजर नहीं आईं। मॉडलिंग को करियर बनाने के लिए गायत्री ने वीडियो जॉकी की नौकरी छोड़ दी थी।

सौंदर्य प्रतियोगिताओं में शिरकत करने के साथ ही उन्होंने कई ब्रांड्स के लिए मॉडलिंग की। इसके साथ ही कई म्यूजिक वीडियो में भी काम किया। इनमें जगजीत सिंह का गाना कागज़ की कश्ती और हंस राज हंस का झांझरिया बेहद चर्चा में रहा था।

AAP सांसद संजय सिंह के घर पर ED की छापेमारी, जारी है तलाशी: दिल्ली के दारू घोटाले से जुड़ा है मामला, पहले से जेल में बंद हैं मनीष सिसोदिया

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बुधवार सुबह (4 अक्टूबर 2023) दिल्ली शराब घोटाला मामले में आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद संजय सिंह के दिल्ली स्थिति घर पर छापेमारी की। खबर लिखे जाने तक उनके घर में एजेंसी की तलाशी जारी थी। दिल्ली में शराब नीति को बदल कर किए गए घोटाले की चार्जशीट में संजय सिंह का भी नाम शामिल है।

समाचार एजेंसी ANI द्वारा X (पहले ट्विटर) पर डाले गए एक वीडियो में कुछ अफसर सांसद संजय सिंह के घर के अंदर जाते हुए दिख रहे हैं। शराब घोटाला मामले में ही दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया जेल में बंद हैं।

दिल्ली शराब घोटाला मामले में संजय सिंह का नाम चार्जशीट में अप्रैल में सामने आया था, जिसके बाद उन्होंने ED पर मानहानि का मुकदमा करने की अनुमति भी माँगी थी। संजय सिंह ने यह भी दावा किया था कि उनको ED ने एक पत्र भेज कर कहा है कि उनका नाम चार्जशीट में गलती से जुड़ गया है।

संजय सिंह ने अपने दावे में यह भी कहा था कि ED ने उनसे माफ़ी माँगी है और कहा है कि वह इस संबंध में बयानबाजी ना करें। हालाँकि, ED ने कहा था कि संजय सिंह का नाम मात्र एक जगह गलती से ‘राहुल सिंह’ के नाम पर लिख दिया गया था बाकी 3 जगह उनका नाम सही था।

गौरतलब है कि दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार नवम्बर 2021 में शराब बिक्री की नई नीति लेकर आई थी। कहा गया था कि इससे सरकार को अधिक राजस्व मिलेगा। सरकार के दावों के उलट इस नीति से राजस्व में तगड़ा नुकसान हुआ था। यह बात भी सामने आई थी कि नीति में बदलाव करके निजी व्यापारियों को फायदा पहुँचाया गया। इस नई नीति पर हुए विवाद के चलते इसे खत्म करके सितम्बर 2022 में पुरानी नीति लागू कर दी गई थी।

यह भी आरोप लगाया गया है कि इस शराब नीति में निजी विक्रेताओं को फायदा पहुँचाने के एवज में आम आदमी पार्टी को ₹100 करोड़ मिले, जिसका उपयोग उसने चुनावों में प्रचार के लिए किया। शराब घोटाले की चार्जशीट में बताया गया था कि आरोपित दिनेश अरोड़ा के साथ दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल की बैठक में संजय सिंह भी मौजूद थे। संजय सिंह से जान-पहचान के चलते ही मनीष सिसोदिया के संपर्क में दिनेश अरोड़ा आया था। अरोड़ा ने आम आदमी पार्टी के लिए फंड भी जुटाया था।

जो पहली बार बने वनडे क्रिकेट के विश्व विजेता, वे इस बार वर्ल्ड कप में खेल भी नहीं रहे: जानिए 1975 से 2019 तक का पूरा इतिहास

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट काउंसिल (ICC) हर साल कई टूर्नामेंट का आयोजन करती है। लेकिन वनडे क्रिकेट का वर्ल्ड कप सबसे बड़ा टूर्नामेंट होता है। चूँकि यह आयोजन 4 साल बाद होता है, इसलिए दुनियाभर के क्रिकेट प्रेमी बेसब्री से इसका इंतजार करते हैं। 1975 में शुरू वनडे क्रिकेट वर्ल्ड कप से लेकर अब तक कई टीमें विश्व विजेता बन चुकी हैं।

इसमें से कई टीमें ऐसी रहीं जिनका लंबे समय तक दबदबा रहा और आज भी जलवा कायम है। लेकिन कुछ टीमें ऐसी हैं जिन्होंने वर्ल्ड कप तो जीता। लेकिन इस बार वर्ल्ड कप के लिए क्वालीफाई भी नहीं कर पाईं। आज हम आपके लिए पहले वनडे वर्ल्ड कप से लेकर साल 2019 में हुए वर्ल्ड कप जीतने वाली टीमों की सूची लेकर आए हैं।

1975: वेस्टइंडीज बना पहली बार विजेता

क्रिकेट इतिहास में वनडे वर्ल्ड कप का पहला आयोजन साल 1975 में हुआ था। इंग्लैंड में हुए इस टूर्नामेंट में 8 टीमों ने हिस्सा लिया था। इसमें ऑस्ट्रेलिया और वेस्टइंडीज फाइनल पहुँचने वाली टीमें थी। क्रिकेट का मक्का कहे जाने वाले लॉर्ड्स में हुआ फाइनल बेहद ही रोमांचक था। हालाँकि वेस्टइंडीज ने ऑस्ट्रेलिया को 17 रनों से हराते हुए क्रिकेट वर्ल्ड कप का पहला विश्व विजेता बनने का खिताब अपने नाम किया था।

1979: वेस्टइंडीज के सिर फिर बंधा ताज

साल 1979 में हुए दूसरे वर्ल्ड कप में टेस्ट क्रिकेट न खेलने वाली टीमों को भी हिस्सा लेने की अनुमति दी गई थी। ऐसे में कनाडा और श्रीलंका जैसी छोटी टीमें (तत्कालीन) भी क्वालीफाई करने में कामयाब हो गईं। पहला वर्ल्ड कप में जीत दर्ज करने के बाद दूसरे में भी वेस्टइंडीज जीत का प्रबल दावेदार माना जा रहा था और हुआ भी यही। फाइनल में वेस्टइंडीज ने इंग्लैंड को 92 रनों के बड़े अंतर से मात देते हुए लगातार दूसरी बार वर्ल्ड कप जीता था।

1983: दुनिया ने जाना हम किसी से कम नहीं

क्रिकेट वर्ल्ड कप में टीम इंडिया की शुरुआत बेहद खराब थी। जहाँ पहले वर्ल्ड कप में भारत को महज एक मैच में जीत मिली थी। वहीं 1979 के वर्ल्ड कप में भारतीय टीम अपने तीनों मैच हारकर बाहर हो गई थी। इंग्लैंड की धरती पर लगातार तीसरे बार हुए वर्ल्ड कप से पहले भारत को बेहद कमजोर टीम माना जा रहा था। हालत यह थी कि अभ्यास मैच में इंग्लैंड की काउंटी टीम ने भारत को हरा दिया था।

लेकिन टूर्नामेंट शुरू होते ही भारतीय खिलाड़ी रंग में आ गए। एक के बाद एक जीत दर्ज करने के बाद जब भारत ने टूर्नामेंट की सबसे मजबूत टीम वेस्टइंडीज को लीग मैच हराया तो पूरी दुनिया चौंक गई थी। टूर्नामेंट की शुरुआत में जिस टीम की खिल्ली उड़ाई जा रही थी। कपिल देव की अगुवाई वाली वही टीम फाइनल में पहुँच गई। यही नहीं वेस्टइंडीज से हुए फाइनल मुकाबले में भारतीय टीम 43 रनों से जीत दर्ज करते हुए विश्व विजेता बन गई थी।

1987: पहली बार इंग्लैंड से बाहर हुआ वर्ल्ड कप

साल 1987 के वर्ल्ड कप में कई बड़े बदलाव देखने को मिले। अव्वल तो यह कि पहली बार यह टूर्नामेंट में इंग्लैंड से बाहर हो रहा था। वहीं दूसरी बात यह था कि इस बार मैच 60 ओवर की जगह 50 ओवर के हुए। साथ ही खास बात यह भी थी कि भारत, पाकिस्तान के साथ इसका सह आयोजक था।

ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों ने टूर्नामेंट की शुरुआत से ही जीत का जज्बा दिखाना शुरू कर दिया था। एक के बाद एक दिग्गज टीमों को मात देते हुए ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड ने फाइनल में जगह बनाई थी। इसके बाद फाइनल में हुए बेहद रोमांचक मुकाबले में इंग्लैंड को 7 रनों से मात देते हुए ऑस्ट्रेलिया पहली बार विश्व विजेता बना था।

1992: पहली बार रंगीन कपड़ों में नजर आए खिलाड़ी

ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में आयोजित इस वर्ल्ड कप में भी महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिले। सबसे बड़ा बदलाव कपड़ों को लेकर 1992 से पहले प्लेयर्स सफेद कपड़ों में खेलते थे। लेकिन इस बार रंगीन कपड़ों में नजर आए। वहीं गेंद का रंग बदलकर लाल से सफेद कर दिया गया। यही नहीं अब तक मैच सिर्फ दिन में होते थे। लेकिन इस बार डे-नाइट मैचों का आयोजन हुआ। फाइनल मैच में पाकिस्तान ने इंग्लैंड को 22 रनों से हराते हुए जीत दर्ज की थी।

1996: भारत फिर बना मेजबान

साल 1996 में एक बार फिर टूर्नामेंट भारत की मेजबानी में हुआ। इस बार भारत, पाकिस्तान और श्रीलंका के साथ सह-आयोजक था। फाइनल में मेजबान श्रीलंका ने ऑस्ट्रेलिया को 7 विकेट से धूल चटाते हुए वर्ल्ड कप जीता था।

1999: 5 देश बने मेजबान

साल 1999 के वर्ल्ड कप का आयोजन इंग्लैंड, नीदरलैंड्स, स्कॉटलैंड, वेल्स और आयरलैंड में हुआ, (बाद में इंग्लैंड और वेल्स क्रिकेट बोर्ड एक हो गए)। फाइनल मुकाबला एक बार फिर लॉर्ड्स में हुआ, जहाँ पाकिस्तान और ऑस्ट्रेलिया आमने-सामने थे। दिवंगत लीजेंड स्पिनर शेन वॉर्न की फिरकी के आगे पाकिस्तान 150 के आँकड़े तक भी नहीं पहुँच पाई। ऑस्ट्रेलिया ने महज 20 ओवरों में ही यह मुकाबला 8 विकेट से जीत लिया।

2003: भारत फिर पहुँचा फाइनल में

सौरव गांगुली की कप्तानी में टीम इंडिया नए जोश के साथ 2003 के वर्ल्ड कप में उतरी थी। यूँ तो क्रिकेट पंडित टीम इंडिया को वर्ल्ड कप का दावेदार नहीं मान रहे थे। लेकिन सचिन, सहवाग, कैफ, गांगुली और द्रविड़ की बल्लेबाजी तथा जहीर खान, नेहरा, श्रीनाथ और भज्जी की बॉलिंग के चलते भारतीय टीम फाइनल में पहुँचने में कामयाब रही। हालाँकि फाइनल में बैटिंग और बॉलिंग दोनों फेल हो गए। इसके चलते टीम इंडिया को 125 रनों से हार का सामना करना पड़ा।

2007: ऑस्ट्रेलिया लगातार तीसरी बार बना विजेता

टीम से भारतीय फैंस को काफी उम्मीदें थीं। लेकिन ग्रुप स्टेज में ही बांग्लादेश के हाथों करारी हार झेलने के बाद टीम इंडिया बाहर हो गई थी। वहीं ऑस्ट्रेलिया और श्रीलंका फाइनल में पहुँच गए थे। जयवर्धने की अगुवाई वाली श्रीलंका को मजबूत दावेदार माना जा रहा था। लेकिन बारिश से बाधित मैच में उसे 53 रनों से हार का सामना करना पड़ा था। इस तरह ऑस्ट्रेलिया लगातार तीसरी बार वर्ल्ड कप जीतने वाली पहली टीम बनी गई।

2011: वानखेड़े में गूँजा ‘इंडिया… इंडिया’

2007 के वनडे वर्ल्ड कप में मिली हार और टी20 वर्ल्ड कप में मिली जीत के बाद धोनी की कप्तानी वाली टीम इंडिया से जीत की उम्मीद की जा रही थी। सचिन, सहवाग, गंभीर, कोहली, युवराज जैसे सितारों से सजी टीम को ग्रुप स्टेज में दक्षिण अफ्रीका के हाथों का सामना करना पड़ा था। भारत ने आखिरी के 9 विकेट महज 29 रनों में ही गँवा दिए थे। इस मैच में हार के बाद भारतीय फैंस निराश हो गए थे।

लेकिन भारतीय टीम का जज्बा बरकरार था। अफ्रीका के हाथों मिली हार टूर्नामेंट की पहली और आखिरी हार साबित हुई। लगातार जीत के बाद भारतीय टीम फाइनल पहुँची, जहाँ उसका मुकाबला श्रीलंका से हुआ। सचिन, सहवाग के सस्ते में आउट होने के बाद गंभीर, कोहली, धोनी और युवराज की पारियों ने भारतीय टीम को जीत दिलाई। आखिरी गेंद में धोनी का हेलीकॉप्टर शॉट आज भी क्रिकेट प्रेमियों की आँखों में ताजा होगा। भारत ने 6 विकेट से मैच जीत दर्ज दूसरी बार विश्व विजेता का खिताब अपने नाम किया था।

2015: ऑस्ट्रेलिया ने फिर जमाई धाक

साल 2015 के वर्ल्ड कप के ऑस्ट्रेलियाई और न्यूजीलैंड मेजबान थे। ऑस्ट्रेलिया 4 बार फाइनल जीत चुकी थी। इस बार भी जीत की उम्मीद जताई जा रही थी और हुआ भी यही। फाइनल में न्यूजीलैंड के साथ हुए मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया ने 7 विकेट से जीत दर्ज की थी। इसके साथ ही ऑस्ट्रेलिया पाँचवी बार वर्ल्ड कप विजेता बना था।

2019: यादगार टूर्नामेंट, विवादित फाइनल

साल 2019 का फाइनल न केवल भारतीय फैंस बल्कि दुनिया भर के क्रिकेट प्रेमियों के लिए यादगार रहा। यादगार इसलिए भी क्योंकि यह एमएस धोनी का आखिरी विश्व कप था। न्यूजीलैंड के खिलाफ हुए सेमीफाइनल में धोनी के रन आउट होते ही भारतीय क्रिकेट फैंस की आँखें भीग गईं थीं। ग्राउंड पर मौजूद कैमरामैन के आँखों में आँसू वाली फोटो भी जमकर वायरल हुई थी।

खैर, बात वर्ल्ड कप जीतने वाली टीम की करें तो यह इंग्लैंड थी। न्यूजीलैंड और इंग्लैंड दोनों ही टीमों ने 241 रन बनाए थे। मैच टाई हो गया था। सुपर ओवर का नियम था नहीं। ऐसे में बाउंड्री से फाइनल के विजेता का फैसला हुआ। इंग्लैंड के प्लेयर्स ने अधिक बाउंड्री लगाई थीं। इसलिए उसे विजेता घोषित किया गया। क्रिकेट इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ था कि रन चेज करने वाली टीम ऑल आउट होने के बाद भी मैच जीत गई।

साल 2023 का वर्ल्ड कप एक बार फिर भारतीय सरजमीं पर खेला जाना है। रोहित शर्मा की कप्तानी वाली टीम इंडिया से भारत को खिताब जिताने की उम्मीदें हैं। फैंस के लिए निराशा की बात है कि पहली बार वर्ल्ड कप विजेता बनी वेस्टइंडीज इस बार क्वालीफाई भी नहीं कर पाई है।

ICC ने सचिन तेंदुलकर को बनाया ग्लोबल एंबेसडर, ट्रॉफी हाथ में लेकर करेंगे वर्ल्ड कप का उद्घाटन

वन डे क्रिकेट वर्ल्ड कप 2023 के शुरू होने में कुछ ही दिन बाकी हैं। इससे पहले अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) ने भारत के पूर्व महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर को अपना ग्लोबल एम्बेसडर घोषित किया है। इसके साथ ही कहा गया है कि उद्घाटन मैच से पहले सचिन ही वर्ल्ड कप ट्रॉफी लेकर टूर्नामेंट शुरू होने की घोषणा करेंगे। ICC के इस ऐलान को लेकर सचिन ने खुशी जाहिर की है।

सचिन को ग्लोबल एंबेसडर बनाने को लेकर आईसीसी ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की है। इसमें कहा है कि अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में उद्घाटन मैच से पहले मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर वर्ल्ड कप ट्रॉफी के साथ बाहर आएँगे और टूर्नामेंट के उद्घाटन का ऐलान करेंगे। ICC के इस फैसले को लेकर सचिन तेंदुलकर ने कहा, “1987 के वर्ल्ड कप में बॉल बॉय बनने से लेकर 6 वर्ल्ड कप में देश का प्रतिनिधित्व करने तक मेरे दिल में वर्ल्ड कप का एक अलग स्थान रहा है। 2011 में विश्व कप जीतना मेरी क्रिकेट करियर का सबसे गौरवपूर्ण क्षण रहा।”

सचिन ने आगे कहा, “इतनी सारी टीमें और खिलाड़ी भारत में आयोजित आईसीसी क्रिकेट विश्व कप 2023 में होने वाले मैचों में खेलने के तैयार हैं। मैं इस शानदार टूर्नामेंट का उत्साह पूर्वक इंतजार कर रहा हूँ। युवा वर्ल्ड कप जैसे बड़े आयोजनों को देखने के सपने देखते हैं। मुझे उम्मीद है कि इस बार का वर्ल्ड कप भी युवा लड़कियों और लड़कों को क्रिकेट चुनने और हाई लेवल पर अपने देश का प्रतिनिधित्व करने के लिए प्रेरित करेगा।”

बता दें कि इस बार का वर्ल्ड कप सबसे बड़ा विश्व कप होने जा रहा है। इसलिए आईसीसी ने एंबेसडर की बड़ी सूची तैयार की है। जहाँ एक ओर सचिन तेंदुलकर को वर्ल्ड कप का ग्लोबल एंबेसडर बनाया है। वहीं, वेस्टइंडीज के दिग्गज क्रिकेटर रहे विवियन रिचर्ड्स, दक्षिण अफ्रीका के एबी डिविलियर्स, इंग्लैंड के विश्व कप विजेता कप्तान इयोन मोर्गन, ऑस्ट्रेलिया के एरोन फिंच, श्रीलंका के महान स्पिनर मुथैया मुरलीधरन, न्यूजीलैंड के रॉस टेलर, भारत के सुरेश रैना और भारतीय महिला टीम की पूर्व कप्तान मिताली राज और पाकिस्तान के ऑलराउंडर मोहम्मद हफीज को एंबेसडर नियुक्त किया गया है।

आईसीसी ने अपनी विज्ञप्ति में यह भी कहा कि क्रिकेट के ये सभी दिग्गज टूर्नामेंट के अधिकांश मैचों में स्टेडियम में ही उपस्थित रहेंगे। इसके अलावा वह फैंस से मिलकर और मैच को लेकर अपना अनुभव शेयर कर दर्शकों का मनोरंजन करेंगे। साथ ही मैच का विश्लेषण करेंगे। इस विश्लेषण को ICC ऑनलाइन मीडिया जोन के जरिए दर्शकों को उपलब्ध कराएगा।

आईसीसी क्रिकेट विश्व कप 2023, 5 अक्टूबर से शुरू होना है। पहला मैच अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में गत विजेता इंग्लैंड और उपविजेता न्यूजीलैंड के बीच के बीच होगा। टूर्नामेंट में कुल 48 मुकाबले 10 अलग-अलग शहरों में खेले जाएँगे। वहीं, फाइनल 19 नवंबर को नरेंद्र मोदी स्टेडियम में ही होगा।

‘एक गुजराती बेटा आया और निजाम से आजादी दिलाई, आज दूसरा गुजराती बेटा आया है, जो आपके तेलंगाना का विकास करेगा’: पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज तेलंगाना के निजामाबाद पहुँचे। यहाँ पीएम मोदी ने राज्य के लोगों को 8,000 करोड़ रुपए से अधिक की परियोजनाओं की सौगात दी है। पीएम मोदी इस कार्यक्रम में लोगों को संबोधित भी किया। बता दें कि इस साल के आखिर में तेलंगाना में विधानसभा चुनाव का आयोजन किया जाना है, जहाँ भाजपा का मुकाबला केसीआर के बीआरएस और कॉन्ग्रेस पार्टी से है।

एक गुजराती ने आजादी दिलाई, दूसरा विकास करेगा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने निजामाबाद में सरदार वल्लभभाई पटेल को याद किया और बताया कि एक गुजराती हैदराबाद आया तो निजाम से आजादी दिलाई और दूसरा गुजराती आया है तो विकास कर रहा है। पीएम मोदी ने कहा कि देश तो आजाद हुआ था, लेकिन हैदराबाद और ये इलाका आजाद नहीं हुआ था। निजाम अड़ंगे लगाकर के बैठा था।

उन्होंने आगे कहा, “उसके बाद एक गुजराती बेटा सरदार वल्लभभाई पटेल अपनी ताकत का परिचय दिया और आप की आजादी को पक्का कर दिया। आज दूसरा गुजराती बेटा आपकी समृद्धि के लिए आया है, आपके विकास के लिए आया है, आपकी भलाई के लिए आया है।”

पीएम मोदी ने केसीआर पर किया बड़ा खुलासा

पीएम मोदी ने इस रैली में केसीआर पर करारा प्रहार किया। उन्होंने कहा, “अब तक केसीआर के खिलाफ मैंने कुछ नहीं बोला था, लेकिन आज आपको एक सीक्रेट बता रहा हूँ। केसीआर हैदराबाद म्यूनिसिपालिटी में बहुमत नहीं मिलने पर मेरे पास आए थे। उसमें भाजपा को 48 सीटें मिली थीं। किसी को बहुमत नहीं मिला। केसीआर को सपोर्ट की जरूरत थी।”

प्रधानमंत्री ने आगे कहा, “उन्होंने (KCR) ने मुझसे कहा कि आपके नेतृत्व में देश विकास कर रहा है। हमें भी एनडीए में शामिल होना है। इसके बदले उन्होंने हैदराबाद म्यूनिसिपालिटी में समर्थन माँगा, मैंने मना कर दिया। मैंने कहा कि केसीआर आपके कारनामे ऐसे हैं कि मोदी आपसे जुड़ नहीं सकता। इसके बाद केसीआर वहाँ से चले गए।”

पीएम मोदी ने कहा, “उन्होंने दूसरी बार कोशिश की और बोले के मैंने बहुत काम कर लिया। अब मैं सारा कारोबार अपने बेटे को सौंप देना चाहता हूँ। मैं भेजूँगा आप आशीर्वाद दे देना। मैंने कहा- केसीआर ये लोकतंत्र है। तुम कौन होते हो बेटे को राजगद्दी देने वाले? राजा-महाराजा हो क्या? ये तेलंगाना की जनता तय करेगी कि गद्दी पर किसको बैठाना है और किसनो नहीं बैठाना है।”

प्रधानमंत्री ने कहा, “बस, वो दिन आखिरी था और उसके बाद एक दिन भी वो मेरे से आँखें नहीं मिला पा रहे हैं। मेरी परछाई भी देखने की हिम्मत नहीं बची उनमें। इसके बाद एक बार भी वो मेरे से आँखें नहीं मिला पा रहे। मेरा परछाया भी देखने की हिम्मत नहीं बची उनकी। आपने देखा, अभी मैं सरकारी कार्यक्रम करके आया। कोई भ्रष्टाचारी मेरे बगल में बैठ कर के मेरा ताप सहन नहीं कर सकता हैं, इसलिए भाग रहे हैं ये।”

कॉन्ग्रेस पर बोला आरक्षण को लेकर हमला

पीएम मोदी ने कॉन्ग्रेस पर आरक्षण को लेकर जोरदार हमला बोला। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस जाति आधारित जनगणना करा कर दक्षिण भारतीय राज्यों का हक मारना चाहती है। उन्होंने कहा, “जब आप कहते हो, जितनी आबादी उतना हक। इसका मतलब ये हुआ कि अब कॉन्ग्रेस घोषणा करे कि आप अल्पसंख्यकों के विरोधी हैं क्या? कॉन्ग्रेस स्पष्ट करे, आप दक्षिण भारत के विरोधी हैं क्या?”

पीएम मोदी ने कहा, “उनकी नई सोच दक्षिण भारत के साथ घोर अन्याय करने वाली सोच है। ये नई सोच माइनॉरिटी के पीठ में भी छुरा भोंकने वाली सोच है। आज कल देश में अगले डीलिमिटेशन की चर्चा हो रही है। आज से 25 साल के बाद संसद की सीटें कितनी होगी, कौन सी क्या होगी, इसका निर्णय ज्यूडिशियरी करती है।”

प्रधानमंत्री ने कहा, “उसके कारण, जहाँ जनसंख्या कम है उसकी सीटें कम हो जाती है। जहाँ जनसंख्या ज्यादा है उनकी सीटें बढ़ जाती है। अब हमारे दक्षिण भारत के सभी राज्यों ने जनसंख्या वृद्धि को रोकने में बहुत बड़ी देश की मदद की है। अब कॉन्ग्रेस का नारा ऐसा है कि जिसकी जितनी आबादी उतना, उसका हक। इसका मतलब अब कॉन्ग्रेस दक्षिण भारत के संसद सदस्यों की संख्या कम करने का नाटक करने जा रही है।”