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‘ग्वाला बढ़ गए, बाकी कम कैसे हो गए?’: बिहार की जाति जनगणना पर माँझी ने उठाए सवाल, बोले- यादव ने नाम पर 10 जातियों को मिला दिया

बिहार में नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव की गठबंधन सरकार ने जातिगत आँकड़े जारी किए, इसको लेकर सवाल उठने लगे हैं। कई राजनेताओं द्वारा सवाल उठाने के बाद अब पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम माँझी ने इन आँकड़ों पर सवाल उठाए हैं।

हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) के संस्थापक जीतनराम माँझी ने कहा, “… 1931 में ग्वाला जाति का प्रतिशत 4 से कुछ अधिक था। अब जबकि 2022 की जनगणना हुई है तो उसमें वो 14 प्रतिशत से कुछ अधिक हैं। इतना कैसे उनमें बढ़ोतरी हो गई और दूसरी जातियों की जनसंख्या में कमी क्यों हुई है।

अब चुनाव नहीं लड़ने का प्रण लेने वाले जीतनराम माँझी ने कहा कि यादव के नाम पर बिहार सरकार ने 8-10 जातियों को एक साथ मिला दिया है। उन्होंने कहा, “हमारे भूइयाँ जाति को अलग कर दिया गया। दो के बजाय एक होना चाहिए था। हमने तो लिखकर भी दिया था माननीय मुख्यमंत्री जी को। मुख्यमंत्री जी आपने ही कहा था कि भूइयां और मुसहर दोनों एक हैं।”

माँझी ने सवाल किया कि नीतीश कुमार की सरकार के वर्तमान मंत्रीमंडल को बर्खास्त किया जाए और संख्या आधारित मंत्रिपरिषद का गठन करें। इससे समाज के हर तबके को प्रतिनिधित्व का मौका मिल पाए। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि दरी बिछाने वाला जमाना गया, जो बिछाएगा वही बैठेगा। 

हिंदुओं की जाति आधारित संख्या की बात करे तो सबसे अधिक जनसंख्या यादव लिखने वाले अहीर/गोप/ग्वाला जाति की है। उनकी जनसंख्या 14 प्रतिशत है। वहीं, दूसरे स्थान पर 4.21 प्रतिशत आबादी के साथ कुशवाहा (कोइरी) दूसरे स्थान पर हैं। तीसरे स्थान पर ब्राह्मण, चौथे स्थान पर क्षत्रिय यानी राजपूत और पाँचवे स्थान पर मुसहरों की आबादी है।

महत्वपूर्ण बात यह है कि जो बात जीतनराम माँझी कह रहे हैं, वही बात सरकारी दस्तावेज में भी दिख रहा है। सरकारी द्वारा जारी किए गए आँकड़े में साफ दिख रहा है कि यादव के नाम पर बिहार सरकार ने अहीर, ग्वाला, गोरा, घासी, मेहर, सदगोप और लक्ष्मी नारायण गोला जैसी जातियों को जोड़ा गया है।

बताते चलें कि जातिगत आँकड़े जारी होने के बाद से ही बिहार में सियासत चरम पर है। आँकड़ों में फर्जीवाड़ों के आरोप लग रहे हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री और पटना साहिब से भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद ने भी कहा कि जातीय गणना की रिपोर्ट के आँकड़ों में फर्जीवाड़ा किया गया है। उन्होंने कहा कि उनके घर जनगणना के लिए एक टीम ने न उनसे मुलाकात की और न ही उनका हस्ताक्षर नहीं लिया।

बंगाल पुलिस को हाईकोर्ट का झटका: हिन्दुओं की यात्रा को मिली अनुमति, VHP-बजरंग दल करेंगे ‘शौर्य जागरण’ का शंखनाद

पश्चिम बंगाल पुलिस ने विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल की राष्ट्रव्यापी यात्रा के पश्चिम बंगाल हिस्से को मंजूरी नहीं दी थी, जिसके बाद हिंदू संगठनों ने कलकत्ता हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। कलकत्ता हाई कोर्ट ने पूरे मामले की सुनवाई की और विहिप-बजरंग दल के ‘शौर्य जागरण यात्रा’ को मंजूरी दे दी।

पश्चिम बंगाल पुलिस की ओर से राज्य के कुछ जिलों में रैली को आगे बढ़ाने की अनुमति देने से इनकार करने के बाद वीएचपी और बजरंग दल के सदस्यों द्वारा तीन अलग-अलग याचिकाएँ दायर की गईं। राष्ट्रव्यापी रैली 4 अक्टूबर से 8 अक्टूबर तक पश्चिम बंगाल से गुजरने वाली है। वकील अनामिका पांडे और फिरोज एडुल्जी के माध्यम से विहिप और बजरंग दल के तीन सदस्यों चंदन कैटी, अमित प्रमाणिक और देबजीत भर द्वारा याचिकाएँ दायर की गईं।

याचिकाकर्ताओं ने पश्चिम बंगाल पुलिस की ओर से अनुमति न मिलने के बारे में हाई कोर्ट में अपनी बात रखी। इन संगठनों की तरफ से कहा गया, “इस यात्रा का उद्देश्य ‘हिंदू धर्म’ से संबंधित विभिन्न मुद्दों के बारे में जागरूकता फैलाना है। इसका उद्देश्य विभिन्न स्वतंत्रता सेनानियों को सम्मानित करना भी है, जिन्होंने हिंदू धर्म और हिंदू संस्कृति की रक्षा करते हुए देश के लिए अपना जीवन लगा दिया। यह धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व वाले विभिन्न स्थलों से होकर गुजरेगा। इस यात्रा के दौरान किसी तरह का अस्त्र-शस्त्र नहीं रहेगा।”

आजादी की लड़ाई के बारे में जागरुकता पैदा करना है लक्ष्य

याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट से कहा है कि यात्रा में वीएचपी और बजरंग दल का कोई भी सदस्य हथियार नहीं रखेगा। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि नागरिकों के बीच राष्ट्रवाद की अलख जगाने के लिए इस यात्रा का आयोजन किया जा रहा है। अपनी दलील में याचिकाकर्ताओं ने कहा, “लोगों को यह याद दिलाना ज़रूरी है कि 15 अगस्त 1947 की आजादी के पीछे लड़ाइयों, विद्रोहों और आंदोलनों का लंबा इतिहास रहा है, जिसे भूलना नहीं चाहिए।” इस बीच, पश्चिम बंगाल में इस यात्रा की शुरुआत हो गई है।

विहिप ने अपने एक्स (पूर्व में ट्विटर) हैंडल पर इस यात्रा के पश्चिम बंगाल में शुरू होने की जानकारी दी गई है। पोस्ट में लिखा गया है, “आज उत्तर बंगाल प्रांत के अलीपुरद्वार जिले के जयगांव प्रखंड भूटान बॉर्डर से बजरंग दल शौर्य जागरण यात्रा का शुभारंभ विश्व हिन्दू परिषद् के अखिल भारतीय संगठन महामंत्री श्री विनायक राव देशपांडे जी के द्वारा हुआ। इस यात्रा में हजारों की संख्या में नवयुवक और मातृ शक्ति ने हिस्सा लिया।”

कलकत्ता हाई कोर्ट में याचिकाकर्ताओं ने कहा है कि इस ‘शौर्य जागरण यात्रा’ में भारी भीड़ नहीं बुलाई जाएगी, बल्कि इसमें सिर्फ 3 ट्रक और करीब 20 मोटरसाइकिलें ही शामिल होंगी। इस दौरान विहिप और बजरंग दल के अधिकतम 200 सदस्य ही मौजूद होंगे।

मुस्लिमों को राहुल गाँधी पर एतबार, नरेंद्र मोदी को PM के रूप में देखना चाहते हैं आम भारतीय: India TV-CNX के सर्वे में खुलासा, समझिए कैसे हुआ कॉन्ग्रेस का इस्लामीकरण

अप्रैल-मई 2024 के बीच अगले आम चुनाव (India General Election 2024) होने के आसार हैं। उससे पहले 2024 के लोकसभा (Lok Sabha) चुनावों को लेकर इंडिया टीवी-सीएनएक्स (India TV-CNX) ने एक ओपिनियन पोल किया है।

इससे पता चलता है कि 61% मतदाता फिर से नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री के तौर पर देखना चाहते हैं। अगड़ी जाति के 70% मतदाता चाहते हैं कि मोदी सरकार फिर से आए। लेकिन, 52 फीसदी मुस्लिम मतदाता कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी को अगले पीएम के तौर पर देखना चाहते हैं।

यह सर्वे 12 राज्यों की 48 लोकसभा सीटों पर किया गया है। गौर करने वाली बात यह भी है कि बिहार की जातीय जनगणना के बाद इसे किया गया है। इंडिया टीवी-सीएनएक्स के सर्वे के मुताबिक, 14 फीसदी मुस्लिमों का मानना है कि अरविंद केजरीवाल को देश के प्रधानमंत्री होने चाहिए। ममता बनर्जी के लिए ऐसा मानने वाले मुस्लिम वोटर 8 प्रतिशत हैं। वहीं 8 प्रतिशत अखिलेश यादव, 6 प्रतिशत नीतीश कुमार और 5 प्रतिशत मुस्लिम मतदाता असदुद्दीन ओवैसी को पीएम के तौर पर देखना चाहते हैं।

आश्चर्यजनक तौर पर केवल 3 प्रतिशत मुस्लिम ही चाहते हैं कि अगले चुनावों के बाद भी नरेंद्र मोदी ही इस पद पर बने रहें। लेकिन जब बात अगड़ी जाति के मतदाताओं की आती है तो 70 प्रतिशत फिर से मोदी को पीएम के तौर पर देखना चाहते हैं। राहुल गाँधी का समर्थन करने वाले केवल 12 प्रतिशत ही हैं।

अगड़ी जाति के वोटरों में 6 प्रतिशत अरविंद केजरीवाल, 4 प्रतिशत ममता बनर्जी और 1 प्रतिशत नीतीश कुमार को पीएम के तौर पर देखना चाहते हैं। सर्वे में शामिल अगड़ी जाति के वोटरों में से कोई भी समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव या ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहाद-उल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रधान ओवैसी को पीएम पद पर नहीं देखना चाहते।

सर्वे के अनुसार, मतदाताओं में से पीएम पद के लिए 61 प्रतिशत का समर्थन नरेंद्र मोदी को हासिल है। राहुल गाँधी 21, ममता बनर्जी तथा अरविंद केजरीवाल तीन-तीन, मायावती तथा नीतीश कुमार दो-दो प्रतिशत लोगों की पसंद इस पद के लिए हैं। 6 प्रतिशत ऐसे भी मतदाता हैं जिन्होंने अगले प्रधानमंत्री के तौर पर अन्य नेताओं का भी नाम लिया है।

कर्नाटक और तेलंगाना में कॉन्ग्रेस के साथ मुस्लिम

उल्लेखनीय है कि कॉन्ग्रेस ने मुस्लिमों का हमेशा से इस्तेमाल किया है। वे भी चुनावों में वोट बैंक की तरह उसके पक्ष में मतदान करते रहे हैं। यह हालिया कर्नाटक विधानसभा चुनावों में भी दिखा है। इसी वोट बैंक की मदद से वह कर्नाटक में 135 के बहुमत के आँकड़े को पार करते हुए सबसे बड़ी पार्टी बनी और सरकार गठन में सफल रही।

चुनाव के दौरान मुस्लिम वोटों को गोलबंद करने के इरादे से ही विपक्षी दलों ने हिजाब का मुद्दा उठाया था। कॉन्ग्रेस ने चुनाव के दौरान हिंदूवादी संगठन ‘बजरंग दल’ को प्रतिबंधित करने का वादा किया था। इसका नतीजा यह रहा कि मई में हुए इन चुनावों में मुस्लिमों ने कॉन्ग्रेस को एकमुश्त वोट दिया, जबकि हिंदू वोट बँट गए।

इसे देखते हुए कहा जा सकता है कि अपने धार्मिक हितों की रक्षा के लिए मुस्लिम समुदाय भी कॉन्ग्रेस पार्टी के पीछे एकजुट हो गया और इस पुरानी पार्टी के उम्मीदवारों के लिए सामूहिक तौर पर वोट दिए। चुनाव अभियानों के दौरान प्रतिबंधित PFI के राजनीतिक मुखौटे SDPI ने कॉन्ग्रेस पार्टी के लिए प्रचार करने का अपना इरादा साफ जाहिर किया था। यही वजह रही कि पहले SDPI ने 100 उम्मीदवार उतारने का फैसला किया था।

लेकिन, चुनाव से कुछ दिन पहले ही उसने कहा कि वह सिर्फ 16 सीटों पर उम्मीदवार खड़े करेगी। यही नहीं, एसडीपीआई ने बाद में अपने कार्यकर्ताओं से घर-घर जाकर कॉन्ग्रेस के लिए प्रचार करने को भी कहा।

वहीं तेलंगाना में मुस्लिम मज़बूती से कॉन्ग्रेस पार्टी का समर्थन कर रहे हैं। इस साल जून में कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता एमडी अली शब्बीर ने कहा था कि तेलंगाना के मुस्लिम पूरी ताकत के साथ पार्टी का समर्थन कर रहे हैं और AIMIM उस वोट बैंक में सेंध लगाने में नाकाम रहेगी।

राहुल गाँधी दुनिया में भारत विरोधी रुख को देते रहे हैं हवा

पूरी कॉन्ग्रेस पार्टी का देश में चुनाव जीतने का फंडा ही मुस्लिम वोटरों के इस्तेमाल का रहा है फिर चाहे वो आम चुनाव हो या विधानसभा चुनाव। हमेशा से ही पार्टी के नेता राहुल गाँधी ने खास तौर पर मुस्लिम समुदाय का पक्ष लिया और उन्हें समर्थन दिया है।

उन्होंने कई बार वैश्विक मंचों पर यह झूठ फैलाकर भारत और हिंदुओं को बदनाम किया है कि ‘भारत में अल्पसंख्यक समुदायों पर हमला हो रहा है।’ उन्होंने वाशिंगटन, कैंब्रिज यूनिवर्सिटी और हाल ही में सितंबर में नई दिल्ली में भी भारत के खिलाफ ऐसे बयान दिए थे। जहाँ देश की हर एक राजनीतिक पार्टी पीएम मोदी के समाज के सभी वर्गों के व्यापक समर्थन की ताकत वाली बाजीगरी से मुकाबला करने के लिए खुद का वोट बैंक बनाने की कोशिश कर रही है, वहीं राहुल गाँधी और कॉन्ग्रेस पार्टी लंबे वक्त से ‘अल्पसंख्यक खतरे में हैं’ की बयानबाजी के जरिए तेज़ी से बँटे हुए विपक्ष में अल्पसंख्यक वोटों को अपने पक्ष में करने की कोशिश में रहते हैं।

देश के राजनीतिक माहौल को बाँटने के अलावा कॉन्ग्रेस ‘अल्पसंख्यक खतरे में हैं’ वाले नजरिए का इस्तेमाल केंद्र सरकार को सांप्रदायिक दिखाने के लिए भी करती रही है। कॉन्ग्रेस की रणनीति में केंद्र को बदनाम करने और नीचा दिखाने या अल्पसंख्यक वोट बैंक को मजबूत करने के लिए मामूली अपराधों को सांप्रदायिक मोड़ दिया जाता है।

उदाहरण के लिए हरियाणा के मुस्लिम बहुल क्षेत्र मेवात के नूहं संघर्ष को लिया जाए तो इस दौरान मारे गए लोगों में 80 फीसदी से अधिक गैर-मुस्लिम थे। नूहं में जलाभिषेक यात्रा में हिंदू तीर्थयात्रियों पर इस्लामवादियों के हमले के बाद यहाँ हिंसा शुरू हुई थी। इस साल जुलाई के आखिर और अगस्त की शुरुआत में नूहं और आसपास के इलाकों में हुए मौत के भयावह तांडव के शिकार वे हिंदू भी हुए, जिन्होंने परेड में हिस्सा नहीं लिया था।

इसमें घटना में भी अपने सुव्यवस्थित पारिस्थितिकी तंत्र और ऑनलाइन ट्रॉल और समर्थक पत्रकारों की सेना से लैस कॉन्ग्रेस ने केंद्र सरकार और हिन्दुओं को दोषी ठहराने में कोई कसर नहीं छोड़ी। कॉन्ग्रेस की इस सेना में कई पत्रकार ऐसे थे जो सच्ची और ईमानदार पत्रकारिता की आड़ में प्रचार में लगे रहते थे। ये संस्थानों से निकाले जाने के बाद यूट्यूबर बन गए। नूहं की हिंसा के लिए इन्होंने कॉन्ग्रेस के नजरिए को फैलाने में अहम योगदान दिया था।

कॉन्ग्रेस ऐतिहासिक रूप से मुस्लिम समर्थक पार्टी रही है

भले ही अपनी सहूलियत के हिसाब से समय-समय पर कॉन्ग्रेस ‘हिंदुत्व समर्थक’ टोपी पहन लेती थी, लेकिन पार्टी ऐतिहासिक तौर पर मुस्लिम समर्थक रही है। इस पार्टी की प्राथमिकताओं में तुष्टिकरण कार्यक्रम सबसे ऊपर हैं।

ये नेहरू की ही ‘दूरदर्शिता’ थी जिसने कॉन्ग्रेस का इस्लामीकरण किया और इससे ‘मुस्लिम अल्पसंख्यक’ नामक बोझ पैदा हो गया। बड़े पैमाने पर इस्लामवाद कॉन्ग्रेस की राजनीति में आज़ादी के बाद 1950 के आसपास शुरू हुआ। तब कॉन्ग्रेस ने पाकिस्तान नहीं जाने वाले मुस्लिम लीग के नेताओं, सदस्यों और समर्थकों को अपने में शामिल करना शुरू किया था। उनमें से कई पूर्व मुस्लिम नेता बाद में कॉन्ग्रेस के शासन में केंद्रीय और राज्य स्तर पर कैबिनेट मंत्री तक पहुँचे।

ये कॉन्ग्रेस का ही राज था जब ‘वक्फ अधिनियम’ पहली बार 1954 में भारत में अस्तित्व में आया। इसी के तहत 1964 में केंद्रीय वक्फ परिषद का गठन किया गया। अगस्त 2022 में ये खुलासा हुआ कि कॉन्ग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने लुटियंस दिल्ली में 123 सरकारी संपत्तियाँ वक्फ को तोहफे में दे डाली थीं।

1986 में राजीव गाँधी ने जिस तरह से मौलवियों को खुश करने के लिए शाहबानो मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला पलट दिया, उसने कॉन्ग्रेस के इस्लामीकरण में एक नया अध्याय जोड़ा। शाहबानो मामले में राजीव गाँधी ने भारतीय न्यायपालिका के ऊपर शरिया को चुना। हालिया अतीत में इस पार्टी की इस्लामवाद के समर्पण की पराकाष्ठा 2019 चुनावी घोषणापत्र में देखी जा सकती है। इसमें कॉन्ग्रेस ने सत्ता में आने पर ‘सशस्त्र बल (विशेषाधिकार) अधिनियम (AFSPA)’ की समीक्षा का वादा किया था।

खास तौर से कट्टरपंथी इस्लामी संगठनों और भारतीय हितों के लिए शत्रुतापूर्ण रवैया रखने वाले वामपंथी संस्थानों की लंबे वक्त से AFSPA को हटाने की माँग रही है। इन संगठनों ने सबसे घिनौना प्रचार किया है, जिसने केवल कश्मीर के युवाओं को कट्टरपंथी बनाने के लिए एक औजार के तौर पर इस्तेमाल करने का काम किया है।

इसके अलावा कॉन्ग्रेस के 2019 के घोषणापत्र में मुस्लिम समुदाय से अन्य वादे भी किए गए। इसके पेज 42वें पर कहा गया कि ‘वक्फ संपत्ति (अनधिकृत कब्जेदारों की बेदखली) विधेयक, 2014’ को फिर से पेश कर उसे पारित किया जाएगा। वक्फ संपत्तियों के कानूनी ट्रस्टियों को बहाल किया जाएगा। इसके अलावा कॉन्ग्रेस ने अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों के तौर पर अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय और जामिया मिलिया इस्लामिया की विशेषताओं को बनाए रखने का वादा भी किया था।

इसके अलावा वायनाड में कॉन्ग्रेस का समर्थन इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) से आता है। ये जमात-ए-इस्लामी और सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) से जुड़ा हुआ है।

इन दोनों पर राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) का आरोप है कि स्वास्थ्य जागरूकता शिविरों के बहाने राज्य भर में हथियार प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए। साल 2014 में केरल में PFI और SDPI के कार्यालयों में कई पुलिस छापों में हथियार और हथियारों का जखीरा जब्त किया गया। इन छापों में गिरफ्तार किए गए 24 आरोपी इन दोनों पार्टियों के थे।

इन सभी घटनाओं को देखते हुए ये साफ जाहिर होता है कि क्यों लगभग 52 फीसदी मुस्लिम कॉन्ग्रेस के राहुल गाँधी को भारत के अगले प्रधानमंत्री के रूप में देखना चाहते हैं और इनमें से महज 3 फीसदी क्यों सोचते हैं कि पीएम मोदी को इस पद पर बने रहना चाहिए। 18वीं लोकसभा के सदस्यों का चुनाव करने के लिए भारत में अगला भारतीय आम चुनाव अप्रैल और मई 2024 के बीच होने की उम्मीद है।

अब ₹603 में गैस सिलेंडर, मोदी सरकार ने बढ़ाई पीएम उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों के लिए सब्सिडी

मोदी सरकार ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों के लिए सब्सिडी राशि 200 रुपए से बढ़ाकर 300 रुपए प्रति एलपीजी सिलेंडर कर दिया है। उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को मौजूदा समय में प्रति 14.2 किलोग्राम सिलेंडर के लिए 703 रुपए का भुगतान करना पड़ता है, जबकि बाजार मूल्य 903 रुपए है। केंद्रीय मंत्रिमंडल के फैसले के बाद, उन्हें अब 603 रुपए का भुगतान करना होगा।

केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में ये फैसला लिया गया। कैबिनेट बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा कि उज्ज्वला लाभार्थियों के लिए एलपीजी सिलेंडर पर सब्सिडी राशि 100 रुपए बढ़ा दी गई है। उन्होंने कहा कि पिछले माह रक्षाबंधन के समय जब घरेलू रसोई गैस की कीमतों में 200 रुपए प्रति सिलेंडर की कमी की थी।

उज्ज्वला योजना पर सरकार पहले से 200 रुपए की सब्सिडी दे रही थी। अब 100 रुपए की सब्सिडी बढ़ा दी गई है। इस तरह से 1103 रुपए में मिलने वाला सिलेंडर उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को 603 रुपए में मिलेगा।

वहीं सामान्य उपभोक्ताओं को घरेलू गैस के सिलेंडर 903 रुपए में मिलते रहेंगे। पहले ये कीमतें 1103 रुपए प्रति सिलेंडर थी, लेकिन रक्षाबंधन के समय सरकार ने सिलेंडर की कीमतों में 200 रुपए प्रति सिलेंडर की कमी की थी

बता दें कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पिछले महीने वित्तीय वर्ष 2023-24 से 2025-26 तक तीन वर्षों में 75 लाख एलपीजी कनेक्शन जारी करने के लिए पीएमयूवाई के विस्तार को मंजूरी दी थी। 75 लाख अतिरिक्त उज्ज्वला कनेक्शन से पीएमयूवाई लाभार्थियों की कुल संख्या 10.35 करोड़ हो जाएगी।

साल 2016 में पीएम मोदी ने की थी शुरुआत

बताते चलें कि प्रधानमंत्री उज्ज्वला य़ोजना की शुरुआत मई 2016 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की थी। इस योजना के तहत गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले परिवारों की महिलाओं को मुफ्त में गैस कनेक्शन दिए जाते हैं। यह कनेक्शन अनिवार्य रूप से महिला के ही नाम से जारी किए जाते हैं।

नीरज चोपड़ा ने गोल्ड तो किशोर जेना ने सिल्वर पर मारा भाला, एशियन गेम्स में भारत का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन: जानिए मिले कितने मेडल

चीन के हांगझाऊ में चल रहे 19वें एशियाई खेलों में भारत ने अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दर्ज किया है। भारत ने अब तक कुल 83 पदक जीते हैं, जिसमें 17 स्वर्ण पदक हैं। इससे पहले वर्ष 2018 में इंडोनेशिया में आयोजित एशियाई खेलों में भारत ने कुल 70 पदक जीते थे जिसमें 16 स्वर्ण पदक थे।

वहीं भाला फेंक (Javelin Throw) में नीरज चोपड़ा ने स्वर्ण पदक अपने नाम किया है। वहीं दूसरे स्थान पर भी भारतीय खिलाड़ी किशोर जेना का नाम रहा, जिन्होंने रजत पदक अपने नाम किया। जहाँ नीरज चोपड़ा ने 88.88 मीटर दूर भाला मारा, वहीं किशोर जेना ने 87.54 मीटर दूर भाला फेंका। इसके साथ ही किशोर जेना भी पेरिस में होने वाले ओलंपिक में क्वालीफाई कर गए हैं।

अभी हांगझाऊ खेलों में 4 दिन और बाकी हैं इसलिए यह संख्या आगे और बढ़ेगी। हांगझाऊ खेलों का समापन 8 अक्टूबर 2023 होगा। इसकी भी पूरी पूरी संभावना है कि भारत खेलों के समापन से पहले स्वर्ण पदक के मामले में भी नया रिकॉर्ड बना सकता है।

भारत ने इन खेलों में अब तक 17 स्वर्ण, 34 रजत और 32 कांस्य पदक जीत लिए हैं। भारत के लिए रिकॉर्ड तोड़ने वाला पदक तीरंदाजी की टीम ने झटका। ओजस प्रवीन डोताले और ज्योति सुरेखा वेन्नम ने 4 अक्टूबर को सुबह तीरंदाजी प्रतियोगिता में यह पदक दक्षिण कोरिया के तीरंदाजों को हरा कर जीता।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत की इस उपलब्धि पर खिलाड़ियों को बधाई दी है और इसे पूरे देश के लिए एक गर्व का पल बताया है। प्रधानमंत्री ने कहा है कि हर एक पदक कड़ी मेहनत और खेल के प्रति समर्पण को दर्शाता है।

युवा एवं खेल तथा सूचना प्रसारण मामलों के मंत्री अनुराग ठाकुर ने भी इस उपलब्धि को ऐतिहासिक बताया है। उन्होंने कहा है कि हमारे टैलेंटेड एथलीट ने यह उपलब्धि पाने में सफलता प्राप्त की है। उन्होंने कहा है कि जब तक इन खेलों की समाप्ति होने तक यह गिनती जारी है।

हांगझाऊ खेलों में भारत पदक तालिका में चौथे स्थान पर है। चीन 304 पदक के साथ पहले, जापान 135 पदक के साथ दूसरे और कोरिया 144 पदक के साथ तीसरे स्थान पर है। चीन ने 66 जबकि जापान और कोरिया ने क्रमशः 35 तथा 33 स्वर्ण पदक जीते हैं।

भारत का वर्ष 2018 तथा 2023 हांगझाऊ एशियन खेलों में पुराने सभी प्रदर्शनों को पीछे छोड़ना दिखाता है कि देश में खेलों पर बीते वर्षों में किए गए काम जैसे कि खेलो इंडिया और खिलाड़ियों के लिए नई सुविधाएँ तैयार करना अपना प्रभाव दिखा रहे हैं।

दिल्ली शराब घोटाले में AAP सांसद संजय सिंह गिरफ्तार, छापेमारी-पूछताछ के बाद ED ने की कार्रवाई

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बुधवार (04 अक्टूबर 2023) को आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद संजय सिंह को गिरफ्तार कर लिया। दिल्ली के चर्चित शराब घोटाले में दो दिनों से चल रही छापेमारी और पूछताछ के बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया। संजय सिंह की गिरफ्तारी के समय उनके घर के सामने मौजूद आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन की भी कोशिश की।

संजय सिंह को शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के केस में ईडी ने गिरफ्तार किया है। दिल्ली शराब नीति मामले में ही ईडी और सीबीआई उपमुख्यमंत्री रहे मनीष सिसोदिया को भी गिरफ्तार कर चुकी है। मनीष सिसोदिया फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। आम आदमी पार्टी ने ईडी की इस कार्रवाई को राजनीतिक कार्रवाई करार दिया है।

ईडी के मुख्यालय में रात बिताएँगे संजय सिंह

आज तक की रिपोर्ट के मुताबिक, गिरफ्तारी से पहले ईडी ने संजय सिंह से करीब 10 घंटे तक पूछताछ की थी। बताया जा रहा है कि ईडी की टीम उन्हें रात में अपने मुख्यालय में रखेगी। इसके बाद गुरुवार (5 अक्टूबर 2023) की सुबह उन्हें कोर्ट में पेश किया जाएगा। ईडी कोर्ट में संजय सिंह की रिमांड माँगेगी।

महबूबा मुफ्ती ने ईडी की कार्रवाई को बताया गलत

जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कहा कि ईडी भाजपा के दाहिने हाथ की तरह काम कर रही है। ये सरकार की नाकामी को छिपाने की कोशिश से ज्यादा कुछ नहीं है। मुफ्ती ने कहा कि ईडी का इस्तेमाल विपक्षी नेताओं को डराने में किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि एक दिन पहले दिल्ली में मीडिया हाउस पर भी छापेमारी की थी।

केमिस्ट्री में नोबेल पुरस्कार की घोषणा: क्वांटम डॉट्स की खोज के लिए मौंगी जी बावेंडी, लुईस ई ब्रूस और एलेक्सी आई को संयुक्त रूप से मिला अवॉर्ड

वर्ष 2023 के लिए रसायन विज्ञान का नोबेल पुरष्कार तीन वैज्ञानिकों को संयुक्त रूप से दिया गया है। इन लोगों को यह पुरस्कार क्वांटम डॉट्स की खोज और संश्लेषण के लिए के लिए दिया गया है। पुरस्कार पाने वाले वैज्ञानिकों के नाम मौंगी जी बवेंडी, लुइस ई ब्रुईस और एलेक्साई आई एकीमोव है।

रॉयल स्वीडिश अकादमी ने इन पुरस्कारों की घोषणा 4 अक्टूबर, 2023 को की। रॉयल स्वीडिश अकादमी द्वारा जारी किए गए बयान के अनुसार, एकीमोव ने वर्ष 1980 में शीशे पर, एलेक्सी एकिमोव रंगीन काँच में आकार-निर्भर क्वांटम प्रभाव बनाने में सफल रहे। इसके पश्चात लुइस ब्रुईस ने किसी तरल में बहने वाले कणों पर आकार-आधारित क्वांटम डॉट्स का प्रभाव बताने में सफल रहे।

वर्ष 1993 में बवेंडी ने इस पूरी प्रकिया का निर्माण में उपयोग करने के लिए खोज की। इन तीनों वैज्ञानिकों की खोज के कारण ही LED और QLED कम्प्यूटर और टीवी की स्क्रीनों पर अब क्वांटम डॉट्स से चमक आती है।

मानवता की भलाई के लिए की गई इस खोज के कारण ही इन तीनों वैज्ञानिकों को नोबेल पुरस्कार दिया गया है। इन्हें पुरष्कार के साथ ही 11 लाख क्रोनर (स्वीडिश मुद्रा)/ लगभग ₹82.73 लाख मिलेंगे।

इनमें से मौगी जी बवेंडी फ़्रांस, लुईस ई ब्रुईस अमेरिकी, एलेक्साई ई एकीमोव रूसी नागरिक हैं। इससे पहले वर्ष 2022 में भी रसायन विज्ञान का नोबेल तीन वैज्ञानिकों को संयुक्त रूप से दिया गया था।

इसके अतिरिक्त, 3 अक्टूबर को भौतिक विज्ञान के क्षेत्र में नोबेल पुरष्कार का ऐलान किया गया। यह पुरुष्कार भी तीन वैज्ञानिकों को संयुक्त रूप से दिया गया है।

यह पुरष्कार पियरे अगोस्तिनी, ऐनी एल हूलिफर और फेरेंक क्रासुज को दिया गया है। इन्हें यह पुरस्कार परमाणुओं और नाभिकों के भीतर की हलचल के सम्बन्ध में नई तरह की खोज को आसान बनाने के लिए दिया गया है। वर्ष 2023 के लिए चिकित्सा के क्षेत्र के नोबेल का ऐलान भी कर चुकी है।

रॉयल स्वीडिश अकादमी 5 अक्टूबर को साहित्य, 6 को शान्ति के क्षेत्र में और 9 को आर्थिक क्षेत्र में काम करने वालों के लिए दिए जाने वाले नोबेल का ऐलान होगा।

वर्ल्ड कप की कमेंट्री के नाम पर इस्लाम का प्रमोशन: मैथ्यू हेडन बोले – यही है पाकिस्तानी टीम के अनुशासन का कारण, रोज पढ़ते हैं मोहम्मद रिजवान की दी हुई कुरान

इस बार ODI वर्ल्ड कप का आयोजन भारत में हो रहा है। अंतरराष्ट्रीय टीमें यहाँ पहुँच भी चुकी हैं और मेन टूर्नामेंट से पहले वार्मअप मैच खेले जा रहे हैं। इसी में एक कमेंट्री के दौरान ऑस्ट्रेलिया के पूर्व दिग्गज बैट्समैन मैथ्यू हेडन इस्लाम का प्रमोशन करते हुए दिखे। उन्होंने पाकिस्तानी टीम की प्रशंसा करते हुए इस्लाम के समर्थन में बातें कहीं। मैथ्यू हेडन पाकिस्तानी क्रिकेट टीम के मेंटर भी रह चुके हैं। मैथ्यू हेडन ने कमेंट्री के दौरान कहा कि पाकिस्तानी खिलाड़ियों के आहार-व्यायाम के अनुशासन का कारण इस्लाम है।

बता दें कि मंगलवार (3 अक्टूबर, 2023) को हैदराबाद में पाकिस्तान और ऑस्ट्रेलिया के बीच वार्मअप मैच खेला गया। 51 वर्षीय ऑस्ट्रेलियाई दिग्गज ने इस दौरान कहा, “हाँ, ये इस्लाम के इर्दगिर्द केंद्रित है, जो कि पाकिस्तानी टीम का सबसे महत्वपूर्ण और केंद्रीय हिस्सा है। क्रिकेट अनुशासन का खेल है और पाकिस्तानी टीम जिस तरह से काफी अनुशासन के साथ नेतृत्व करती है, उसका मैं बड़ा प्रशंसक हूँ। आपको हमेशा प्रतिबद्ध रहना चाहिए, इसमें जुटे रहना चाहिए और लगातार मेहनत करनी चाहिए।”

साथ ही उन्होंने जोड़ा कि इस्लाम संस्कृति में इन्हीं चीजों का प्रतिनिधित्व करता है। बता दें कि इस मैच में ऑस्ट्रेलिया ने पाकिस्तान को 14 रनों से मात दे दी। ICC वर्ल्ड कप 2023 5 अक्टूबर, 2023 से शुरू हो रहा है। भारत और पाकिस्तान का मुकाबला 14 अक्टूबर को गुजरात के अहमदाबाद स्थित ‘नरेंद्र मोदी स्टेडियम’ में खेला जाएगा। लीग स्टेज में कुल 45 मैच होंगे, जिनमें सभी टीमें एक-दूसरे से भिड़ेंगी। 10 मैदानों पर ट्रॉफी के लिए 10 टीमें मुकाबला करेंगी।

बता दें कि मैथ्यू हेडन 2021 और 2022 के T20 वर्ल्ड कप के दौरान पाकिस्तानी टीम के साथ थे। जहाँ 2021 में वो टीम के बैटिंग कंसल्टेंट बने थे, वहीं अगले साल उन्हें मेंटर बना दिया गया। नवंबर 2021 में मैथ्यू हेडन ने बताया था कि वो कुरान पढ़ते हैं और पाकिस्तानी खिलाड़ी मोहम्मद रिजवान ने उन्हें कुरान का अंग्रेजी अनुवाद गिफ्ट किया था। मैथ्यू हेडन ने बताया था कि वो इस्लाम को लेकर जिज्ञासु थे, जिसके बाद उन्हें कुरान दी गई। हेडन पाकिस्तानी खिलाड़ियों की जम कर तारीफ करते रहे हैं।

शिवानी बन शिवभक्त शबाना ने अरविंद संग लिए 7 फेरे, कहा- इस्लाम में महिलाएँ बच्चा पैदा करने की मशीन, तलाक-हलाला जैसी कुरीति

उत्तर प्रदेश के बरेली की रहने वाली शबाना ने हिंदू धर्म अपनाकर अपने प्रेमी अरविंद से शादी कर ली है। शबाना ने इस्लाम त्यागने के बाद अपना नाम बदलकर शिवानी कर लिया है। शिवानी ने बरेली के मढ़ीनाथ स्थित अगस्त्य मुनि आश्रम में हिंदू रीति-रिवाज से सात फेरे लिए। पंडित केके शंखधार ने शुद्धिकरण के बाद मंत्रोच्चार के साथ विवाह संपन्न करवाया।

इस्लाम में महिलाएँ बच्चा पैदा करने की मशीन

अरविंद से विवाह के बाद शिवानी ने इस्लाम के बारे में खुलकर बात की। शिवानी बनी शबाना ने कहा कि इस्लाम में महिलाओं को बच्चा पैदा करने की मशीन माना जाता है। उसकी माँ भी बच्चे पैदा करते करते मर गई थी। वो खुद 8 भाइयों की इकलौती बहन है।

21 साल की शबाना ने कहा कि तीन तलाक, बहु विवाह, बुर्का, हिजाब, हलाला जैसी कुरीतियाँ खराब हैं और ये इस्लाम का हिस्सा हैं। महिलाओं को हिजाब और बुर्का पहनना पड़ता है, जबकि हिंदू धर्म में ऐसी कोई पाबंदी नहीं है। शिवानी का कहना है कि हिंदू धर्म में महिलाओं को सम्मान मिलता है।

शिवानी ने बताया कि वह हिंदू धर्म से उनका लगाव है और वह भगवान शंकर की भक्त हैं। वह ओम नमः शिवाय मंत्र का जाप भी करती हैं। शिवानी का कहना है कि वह साल भर पहले अरविंद से मिली थी। उसके बाद दोनों में प्यार हो गया। शिवानी के माता-पिता, दोनों की मौत हो चुकी है।

शादी के लिए मान नहीं रहे थे शिवानी के परिजन

शिवानी ने कहा कि अरविंद के घर वाले शादी के लिए तैयार थे, लेकिन उसके परिवार वाले नहीं मान रहे थे। अरविंद से प्यार की बात जब उसके भाइयों को पता चली तो वे नाराज हो गए और शिवानी के घर से निकलने पर प्रतिबंध भी लगा दिया। हालाँकि, इस दौरान भी शिवानी अपने प्रेमी अरविंद से चुपके से मिलती थी।

जानकारी के मुताबिक, शिवानी मूल रूप से फरीदपुर के भगवंतापुर की निवासी है। वहीं, अरविंद सागर पड़ोस के कैरुआ गाँव के रहने वाले हैं। दोनों के गाँवों की दूरी करीब एक किलोमीटर ही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शिवानी भगवान शिव की भक्त हैं और रोजाना भगवान शिव का जलाभिषेक करती हैं।

रणबीर कपूर को ED ने तलब किया, ₹5000 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग का है मामला: रामायण पर नई फिल्म में ‘राम’ बनेंगे बीफ प्रेमी अभिनेता, रावण के किरदार में दिखेंगे यश

बॉलीवुड अभिनेता रणबीर कपूर हाल ही में रिलीज हुए फिल्म ‘Animal’ के टीजर के कारण चर्चा में हैं। ये फिल्म 1 दिसंबर, 2023 को रिलीज होने वाली है। वहीं उधर जहाँ एक तरफ उन्हें पूछताछ के लिए जाँच एजेंसियों द्वारा तलब किए जाने की खबर आई है, वहीं दूसरी तरफ दावा किया जा रहा है कि रामायण पर आधारित एक फिल्म में वो भगवान श्रीराम के किरदार में दिखने वाले हैं। रणबीर कपूर खुद को बीफ प्रेमी बताए जाने के कारण भी आलोचकों के निशाने पर रहे हैं।

‘महादेव’ बेटिंग एप: रणबीर कपूर को ED ने पूछताछ के लिए बुलाया

रणबीर कपूर को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पूछताछ के लिए तलब किया है। ऑनलाइन सट्टेबाजी के घोटाले को लेकर उनसे पूछताछ की जानी है। जल्द ही ED इस मामले में फिल्म इंडस्ट्री के कुछ अन्य टॉप सेलेब्स को भी पूछताछ के लिए बुला सकती है। ये मामला ‘महादेव’ ऑनलाइन बेटिंग एप से जुड़ा है। इस एप के प्रोमोटर सौरभ चंद्राकर की फरवरी 2023 में शादी हुई थी, जिसमें बॉलीवुड के गई अभिनेता-अभिनेत्रियों और गायक-गायिकाओं ने परफॉर्मेंस दी थी। रणबीर कपूर भी इसमें पहुँचे थे।

इनमें टाइगर श्रॉफ, सनी लियोनी, नेहा कक्कर, आतिफ असलम, राहत फ़तेह अली खान, अली असगर, विशाल डडलानी, एली अवराम, भारती सिंह, भाग्यश्री, कीर्ति खरबंदा, नुसरत भरूचा, कृष्णा अभिषेक और सुखविंदर सिंह शामिल हैं। ED के अलावा कई राज्यों की पुलिस भी इस मामले की जाँच कर रही है। ED ने पाया है कि हवाला के जरिए 112 करोड़ रुपए का पेमेंट किया गया था। वहीं 42 करोड़ रुपए का पेमेंट कैश के जरिए किया गया था।

सट्टेबाजी से होने वाली कमाई को कई बैंक खातों में भेजा गया। भारत में इसके विज्ञापन और फ्रेंचाइजी आमंत्रित करने के लिए भी बड़ी मात्रा में पैसे खर्च किए गए। इस कंपनी के प्रमोटर्स छत्तीसगढ़ के भिलाई के रहने वाले हैं। इस एप के जरिए सट्टेबाजी के कई प्लेटफॉर्म्स को एक साथ जोड़ा गया था। कुल मिला कर 5000 करोड़ रुपए के मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है। बॉलीवुड सितारों को 7 सितारा होटलों में रुकवाया जाता था। इस एप को 30 सेंटरों के जरिए संचालित किया जा रहा था।

रामायण पर बन रही है नई फिल्म, रणबीर कपूर बनेंगे ‘राम’

वहीं रणबीर कपूर से भी जुड़ी एक और खबर आ रही है कि ‘दंगल’ (2016) के निर्देशक नितेश तिवारी द्वारा रामायण पर आधारित एक नई फिल्म बनाई जा रही है। हाल ही में इसी विषय पर आई ‘आदिपुरुष’ फ्लॉप हो गई थी और इसकी खूब आलोचना हुई थी। इसमें प्रभास भगवान श्रीराम, कृति सेनन माँ सीता और सैफ अली खान रावण के रूप में दिखे थे। नई फिल्म में माँ सीता के किरदार में साई पल्लवी और रावण के किरदार में कन्नड़ अभिनेता यश दिखाई देंगे।

यश ‘KGF’ सीरीज के बाद पूरे देश में लोकप्रिय हो चुके हैं। हालाँकि, रणबीर कपूर खुद को ‘बिग बीफ गाय’ बता चुके हैं, ऐसे में उनके श्रीराम का किरदार अदा करने को लेकर विवाद खड़े हो सकते हैं। ये तीन फिल्मों की सीरीज होगी। 2024 की पहली तिमाही में इसकी शूटिंग शुरू होगी। पहली फिल्म में यश का एक्सटेंडेड कैमियो होगा। ऑस्कर विजेता कंपनी DNEG इसका VFX डिजाइन करेगी। फरवरी 2024 से लेकर अगस्त तक इसकी शूटिंग चलेगी, जुलाई में यश शूटिंग में शामिल होंगे।