Home Blog Page 1504

सेंसर बोर्ड ने फिल्म पास करने के बदले लिए ₹6.5 लाख घूस: एक्टर-डायरेक्टर विशाल का आरोप, मोदी सरकार ने जाँच के लिए अधिकारी को भेजा मुंबई

दक्षिणी फिल्मों में काम करने वाले अभिनेता और डायरेक्टर विशाल ने एक्स (पहले ट्विटर) पर एक वीडियो जारी करके केन्द्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) में भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। केन्द्रीय सूचना प्रसारण मंत्रालय ने अब इस मामले की जाँच के आदेश दे दिए हैं।

अभिनेता विशाल ने 28 सितम्बर 2023 को एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, “फ़िल्मी पर्दे पर घूसखोरी ठीक है, लेकिन असल जिन्दगी में नहीं। विशेष कर सरकारी दफ्तरों में। मुंबई के CBFC दफ्तर में इससे भी बुरा हो रहा है। मुझे अपनी फिल्म मार्क एंटनी हिंदी वर्जन के प्रमाणन के लिए 6.5 लाख रुपए देने पड़े।”

विशाल ने आगे लिखा, “3 लाख रुपए मुझे फिल्म स्क्रीनिंग के लिए और 3.5 लाख रुपए प्रमाण पत्र के लिए देने पड़े। मैंने अपने करियर में कभी भी ऐसी स्थिति का सामना नहीं किया। मेरे पास दलाल को पैसे देने के अलावा और कोई भी विकल्प नहीं था, क्योंकि फिल्म को आज ही रिलीज होना था।”

विशाल ने आगे लिखा, “मैं इस पूरी घटना को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के संज्ञान में लाने के लिए यह ट्वीट लिख रहा हूँ। मैं यह इसलिए कर रहा हूँ, ताकि आगे अन्य किसी भी फिल्म निर्माता को ऐसी स्थिति का सामना ना करना पड़े। मेरा मेहनत से कमाया पैसा घूस में जाए, ये नहीं हो सकता।”

एक्टर-डायरेक्टर विशाल ने दो बैंक खातों की जानकारी भी शेयर किया, जिसमें उन्होंने घूस के पैसे भेज थे। उन्होंने इस घटना से सम्बंधित अपना एक वीडियो भी डाला है। बता दें कि प्रसून जोशी CBFC के चेयरमैन हैं। वहीं विद्या बालान, विवेक अग्निहोत्री, सुश्री वाणी त्रिपाठी टिक्कू, सुश्री जीविता राजशेखर सहित 10 लोग इसके सदस्य हैं।

केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड में व्याप्त भ्रष्टाचार की इस घटना पर अब सूचना प्रसारण मंत्रालय एक्शन मोड में आ गया है। मंत्रालय ने एक ट्वीट करके इस विषय पर की जा रही कार्रवाई की जानकारी दी है और लोगों से भष्टाचार की सूचना देने को कहा है।

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने लिखा, “अभिनेता विशाल द्वारा उठाया गया भ्रष्टाचार का मुद्दा काफी दुर्भाग्यशाली है। सरकार भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टोलरेंस की नीति रखती है और इस मामले से संबंध रखने वाले सभी व्यक्तियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी।”

मंत्रालय ने कार्रवाई के विषय में बताते हुए लिखा, “सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से एक वरिष्ठ अधिकारी को इस मामले की जाँच के लिए मुंबई भेजा गया है। हम आपसे सूचना प्रसारण मंत्रालय के साथ सहयोग की आशा करते हैं और किसी भी घटना को हमें सूचित करने की अपील करते हैं।”

अभिनेता विशाल ने इस मामले पर इंडिया टुडे से बात करते हुए कहा, “हमारे पास विचार करने और 6 लाख रुपए इकट्ठा करने के लिए अधिक समय नहीं था। हमारे पास अन्य कोई विकल्प भी नहीं था। हम फिल्म के रिलीज की तारीख को आगे नहीं बढ़ाना चाहते थे। मैं भ्रष्टाचार से स्क्रीन के पीछे लड़ाई नहीं लड़ना चाहता, बल्कि मैं जब भी समाज में भ्रष्टाचार देखूँगा तो इसे बाहर लाऊँगा।”

पत्थरबाजी, तिरंगे का अपमान, सिर तन से जुदा के नारे: मोहम्मद साहब के जन्मदिन पर निकले जुलूस के दौरान कई जगहों पर उपद्रव

पैगंबर मोहम्मद के जन्मदिन पर गुरुवार (28 सितंबर 2023) को निकले बारावफात जुलूस में कई जगहों पर उपद्रव देखने को मिला। उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में जुलूस में शामिल लोगों ने पत्थरबाजी की। सुल्तानपुर में तिरंगे के अपमान का मामला सामने आया है। बदायूं में का एक वीडियो वायरल है, जहाँ भीड़ ‘सिर तन से जुदा’ के नारे लगाती दिख रही है।

कुशीनगर में पत्थरबाजी

कुशीनगर में बारावफात जुलूस के दौरान पत्थरबाजी हुई। नवीन सब्जी मंडी के नौका टोला से बारावफात का जुलूस नगर भ्रमण के लिए निकला। इसमें एक ट्राली पर नाबालिग हाथ में तख्ती लिए था, जिस पर लिखा हुआ था- 15 मिनट याद आया। उसी ट्राली पर हैदराबाद के विवादित मुस्लिम नेता अकबरूद्दीन ओवैसी की हेट स्पीच का ऑडियो भी बज रहा था।

ये जुलूस वापस जब गोला बाजार पहुँचा तो ओवैसी के ऑडियो पर हिंदू युवकों ने आपत्ति की, इसके बाद जुलूस में शामिल युवकों ने राम जानकी मंदिर के पास पथराव किया। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो वायरल हो गया, जिसके बाद पूरे इलाके में तनाव फैल गया। भारी पुलिस बल और पीएसी की तैनाती करनी पड़ी।

पथराव में राम जानकी नगर की मुस्कान और रितेश घायल हो गए। इस मामले में पुलिस ने पथराव करने वाले 37 ज्ञात और कुछ अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज कर 6 आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है।

बदायूं में सिर तन से जुदा का नारा

बारावफात के दिन ही बदायूं में जुलूस ने ‘सिर तन से जुदा’ के भड़काऊ नारे लगाए। यह घटना बदायूं के शेखूपुर का है। इस मामले में पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। इस घटनाक्रम का वीडियो शेयर करते हुए एडवोकेट विनीत जिंदल ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर सवाल करते हुए लिखा कि क्या इस्लाम को मानने वाले लोग भारत का इस्लीमाकरण करना चाहते हैं?

सुल्तानपुर में तिरंगे का अपमान

बारावफात के जुलूस के दौरान ही सुल्तानपुर के बल्दीराय बाजार में राष्ट्रीय ध्वज के अपमान का मामला सामने आया है। यहाँ तिरंगे पर कुछ आपत्तिजनक बात लिखे जाने की बात सामने आ रही है, जिसमें बल्दीराय थाने के प्रभारी (एसएचओ) अमरेंद्र बहादुर सिंह ने बताया है कि पुलिस ने अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है।

बीफ (गौमांस) नहीं मिलेगा पाकिस्तानी क्रिकेटरों को, वर्ल्ड कप में मुर्गा-मछली-खस्सी से चलाएँगे काम: ‘जिनको रोटी नहीं मिलती’ से लोग कर रहे ट्रोल


वनडे वर्ल्ड कप 2023 के लिए पाकिस्तान क्रिकेट टीम भारत पहुँच चुकी है। पहले अभ्यास मैच में उसका मुकाबला न्यूजीलैंड से है। इस बीच पाकिस्तानी खिलाड़ियों को भारत में परोसे जाने वाले खाने का मेन्यू सामने आया है। इसको लेकर नेटिजन्स पाकिस्तान को ट्रोल कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि जिन्हें दो वक्त की रोटी नहीं मिल रही थी, उन्हें भारत में भरपेट खाने को मिल रहा है, ये क्या कम है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तानी क्रिकेटरों की डाइट में लैंब चॉप, मटन करी, बटर चिकन और भुनी हुई मछली शामिल है। इसके साथ ही बासमती चावल, स्पैगेटी, पुलाव आदि दिया जाएगा। उन्हें भारत की मशहूर हैदराबादी बिरयानी भी दी जा सकती है। बड़ी बात यह है कि पाकिस्तानियों के डाइट चार्ट में बीफ (गौमांस) को जगह नहीं दी गई है।

चूँकि पाकिस्तान गरीबी से जूझ रहा है। वहाँ लोगों को दो वक्त की रोटी भी ढंग से मिलना बड़ी बात है। गैस सिलेंडर से लेकर आटे तक के लिए लंबी-लंबी लाइन लगने के वीडियो सामने आते रहे हैं। वहीं, भारत आए पाकिस्तानी खिलाड़ियों को खाने में कई प्रकार की डिश परोसी जाएँगी। इसको लेकर लोग उन्हें ट्रोल कर रहे हैं। एक एक्स यूजर ने लिखा, “तुम लोग तो वर्ल्ड कप नहीं जीत पाओगे। मगर पाकिस्तान से अच्छा खाना तुम्हें यहाँ मिलेगा, यह कंफर्म है।”

अभिषेक चौधरी नामक यूजर ने लिखा, “पूरा पाकिस्तान अपनी टीम के भारत आने से गदगद है। बोल रहे हैं, दुनिया में कहीं तो 15-20 पाकिस्तानी डेढ़ महीने तक 3 टाइम पेट भर के खाना खाएँगे, ऊपर से उन 15-20 का आटा भी बचेगा।”

पाकिस्तान क्रिकेट ने मेन्यू को लेकर एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट शेयर किया था। इस पर खिलाड़ियों को बीफ न मिलने की बात कही गई थी। इसको लेकर एक यूजर ने लिखा, “पाकिस्तान में तो इन्हें खाना मिल नही रहा और यहाँ पेट भरके खाना दे रहे हैं तो ये नौटंकी।”

पाकिस्तान क्रिकेट नामक एक पैरोडी यूजर ने पाकिस्तानी खिलाड़ियों के भारत पहुँचने का वीडियो शेयर कर लिखा कि उन्हें मुफ्त में खाना मिलेगा। इसलिए चेहरे पर खुशी छाई हुई है।

एक यूजर ने खाने के लिए लगी भीड़ का वीडियो शेयर लिखा कि पाकिस्तानी क्रिकेट टीम भारत आई है और उनके डिनर की स्थिति कुछ इस तरह रही।

अभिषेक त्यागी नामक यूजर ने लिखा, “बहुत दिनों बाद तीनों समय की रोटी मिली है-पाकिस्तान क्रिकेट टीम”

साथ खाई-पीई-सोई, शौहर को 14 साल बाद पता चला कि बीवी है बांग्लादेशी: खुद को UP का बताकर की थी निकाह, कनाडा रिटर्न भी निकली

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के एक व्यापारी ने अपनी पत्नी पर बांग्लादेशी होने का आरोप लगाया है। इस संबंध में उसने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई और कहा कि उसकी पत्नी ने अपनी पहचान छुपाई है। ताबिश एहसान ने पुलिस को दी गई शिकायत में कहा कि जिस नाजिया से 14 साल पहले उसका निकाह हुआ था, वह बांग्लादेशी निकली।

37 वर्षीय ताबिश बंगाल के आसनसोल से संबंध रखते हैं। ताबिश का निकाह वर्ष 2009 में नाजिया अम्बरीन कुरैशी से हुआ था। नाजिया ने खुद को विवाह से पहले उत्तर प्रदेश का बताया था। दोनों परिवारों की रजामंदी से बाद में ताबिश और नाजिया का निकाह हो गया। निकाह के बाद 2022 तक दोनों के बीच सब कुछ सही सही चला।

ताबिश ने बताया, “मैं नाजिया से एक शादी समारोह के दौरान मिला और बाद में परिवारजनों की सहमति से हमने निकाह कर लिया। यह ‘अरेंज्ड मैरिज’ थी। निकाह के समय नाजिया ने बताया था कि वह उत्तर प्रदेश की रहने वाली है। उसकी नागरिकता के बारे में निकाह से पहले कोई शक ही नहीं था।”

ताबिश ने यह भी बताया कि उनके दूसरे बच्चे के पैदा होने के बाद दोनों के रिश्तों में खटास आ गई। नाजिया बच्चे को जन्म देने से कुछ ही समय पूर्व अपनी माँ के घर चली गई और ताबिश से सारे समबन्ध खत्म कर लिए। इसके अलावा वह ताबिश को धमकाने लगी।

नाजिया के परिवार वालों ने ताबिश को फर्जी मुकदमों में फंसाने की धमकी देना शुरू कर दिया। महिला के परिजन कहते कि नाजिया कभी भी उसके पास वापस दुबारा नहीं आएगी। नाजिया के परिवार ने ताबिश पर भारतीय दंड संहिता की धारा 498A (दहेज़ प्रताड़ना) के तहत मुकदमा भी दर्ज करवा दिया।

ताबिश ने इस मुकदमे के पश्चात नाजिया के बारे में जानकारी जुटानी चालू की। ताबिश को नाजिया के एक रिश्तेदार ने बताया कि असल में वह बांग्लादेशी नागरिक है। नाजिया ने बांग्लादेश में भी एक स्कूल शिक्षक के साथ निकाह किया था और झूठे आरोप लगाकर उससे तलाक़ ले लिया था।

नाजिया और उसका परिवार इसके पश्चात अवैध तरीके से भारत आ गए और ताबिश को भारतीय पहचान पाने के लिए उपयोग किया। ताबिश ने बताया कि उसका निकाह बस एक साजिश भर था। ताबिश ने अब कोलकाता के तिलजला थाने में सभी सबूतों के साथ नाजिया और उसके रिश्तेदारों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज करवाया है।

नाजिया और उसके परिवारीजनों पर धारा 120बी, 465, 471, 363 और पासपोर्ट अधिनियम तथा विदेशी नागरिक अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। ताबिश का आरोप है कि पुलिस से नाजिया की शिकायत होने के बाद भी अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है।

ताबिश ने यह भी बताया है कि नाजिया 2007 से 2009 के बीच कनाडा भी पढ़ने गई थी, जबकि उसके पास इस दौरान वैध कागज भी नहीं थे। उन्होंने कहा कि नाजिया का भारतीय पासपोर्ट पहली बार वर्ष 2020 में बना था तो फिर वह 2007 से 2009 के बीच कनाडा कैसे गई? कनाडा ने उसका वीजा बिना पासपोर्ट के कैसे बना दिया?

नाजिया पर कार्रवाई के लिए पीड़ित ताबिश ने राज्य सरकार से लेकर केंद्र सरकार के अलग अलग विभागों को पत्र लिखे हैं। ताबिश ने पासपोर्ट आफिस, पश्चिम बंगाल सरकार, विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय को पत्र लिख कर कार्रवाई की माँग की है।

पैगंबर मोहम्मद के जन्मदिन वाले जुलूस में 52 लोगों की मौत, 50+ घायल: बलूचिस्तान में मस्जिद के पास बम से उड़ाया, बढ़ सकता है आँकड़ा

पाकिस्तान के बलूचिस्तान में 52 लोगों की मौत हो गई। इस घटना में 50 से अधिक घायल हैं। ये लोग पैगंबर मोहम्मद के जन्मदिन के बाद जुलूस में शामिल थे। पुलिस के अनुसार यह आत्मघाती हमले के कारण हुआ। शुक्रवार (29 सितंबर 2023) को बलूचिस्तान के मस्तुंग जिले में एक मस्जिद के पास बम विस्फोट किया गया।

ईद-ए-मिलादुन नबी की जुलूस में शामिल भीड़ को आत्मघाती बम विस्फोट से निशाना बनाया गया। पाकिस्तानी मीडिया डाउन की रिपोर्ट के अनुसार मरने वाले 52 लोगों का आँकड़ा बढ़ सकता है। मरने वाले में DSP रैंक का एक पुलिस अधिकारी भी है।

बलूचिस्तान के मस्तुंग जिले के स्थानीय अस्पताल के डॉक्टर ने पाकिस्तानी मीडिया को जानकारी दी है कि दर्जनों लोगों का इलाज किया जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि 20 से अधिक घायल गंभीर थे, जिन्हें चिकित्सा सहायता के लिए क्वेटा के अस्पताल में रेफर किया गया है। अस्पताल के सीईओ ने कहा, “शवों और घायलों को लाने-ले जाने का सिलसिला अब भी जारी है।”

वहाँ के उप महानिरीक्षक (डीआईजी) मुनीर अहमद ने मीडिया को बताया, “हमलावर ने डीएसपी की गाड़ी के पास विस्फोट कर खुद को उड़ा लिया।” मारे गए डीएसपी का नाम नवाज गिश्कोरी है। इन्हें जुलूस के किनारे रहना था, लेकिन आत्मघाती विस्फोट के शिकार हो गए।

पैंट की जिप खोलकर प्राइवेट पार्ट दिखा रहा था पूर्व कॉन्स्टेबल, पकड़ने को दौड़ी महिला… पीछे से आ रही कार से लगी टक्कर, अस्पताल में तोड़ा दम

गाजियाबाद में मसूरी के पास 9 सितंबर 2023 को एक्सप्रेस-वे पर एक महिला को एक कार ने रौंद दिया था। हालाँकि, उस कार सवार ने महिला को अस्पताल में भर्ती कराया, लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका था। चार दिन बाद उस महिला की मौत हो गई थी।

इस मामले की जाँच में पता चला है कि ये कोई सामान्य दुर्घटना नहीं थी। महिला एक शोहदे को पकड़ने के लिए हाईवे पर पहुँची थी। इसी दौरान धक्का लगने से वो गिर गई और वह कार की चपेट में आ गई। पुलिस ने इस संबंध में 26 सितंबर 2023 को मामला दर्ज किया था और 28 सितंबर को एक शख्स को गिरफ्तार भी कर लिया है।

ये था पूरा घटनाक्रम

इस घटना में सामने आए तथ्य बेहद चौंकाने वाले हैं। घटनास्थल पर दो महिलाएँ थीं, जो नाहल गाँव की रहने वाली थीं। मृतक महिला के साथ मौजूद रही महिला ने बताया कि घटना वाले दिन वह मृतक के साथ हाईवे के किनारे स्थित खेत में घास काट रही थी। तभी गलत दिशा से एक बाइक सवार आया और वहाँ बाइक खड़ी कर दी। इसके बाद बदतमीजी करने लगा।

महिला ने बताया कि उस शख्स ने ट्राउजर से अपना प्राइवेट पार्ट दिखाने लगा और दोनों में से किसी को अपने साथ चलने को कहा। दोनों महिलाओं ने इसका विरोध किया। आरोपित जब नहीं माना तो एक महिला ने उसे दरांती फेंककर मारा भी। तभी दूसरी महिला हाइवे पर आ गई और उसे पकड़ने की कोशिश की।

इनमें से 32 साल उस महिला ने आरोपित को पकड़ भी लिया, लेकिन वह महिला को धक्का देकर फरार हो गया। आरोपित के धक्का देने से महिला सड़क पर गिर गई। इसी बीच पीछे से आ रही कार ने सड़क पर गिरी महिला को रौंद दिया। हालाँकि, कार सवार लोगों ने उस महिला को अस्पताल भी पहुँचाया। यहाँ से उस महिला को जीटीबी अस्पताल रेफर कर दिया गया, जहाँ 4 दिन बाद उसकी मौत हो गई।

आरोपित पूर्व CRPF कॉन्स्टेबल, 15 दिनों तक नहीं दर्ज हुआ FIR

परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने 15 दिनों तक मामला ही दर्ज नहीं किया और जब 26 सितंबर को मामला दर्ज किया, तब जाकर आरोपित की पहचान हुई। इसके दो दिन बाद यानी 28 सितंबर 2023 को उसे गिरफ्तार किया गया।

गाजियाबाद के डीसीपी (ग्रामीण) विवेकचंद्र यादव ने बताया कि इस मामले में पुलिस ने 26 सितंबर 23 को केस दर्ज कर जाँच शुरू की और महज 2 दिनों के भीतर आरोपित को गिरफ्तार कर लिया। इसके लिए सीसीटीवी सर्विलांस कैमरों की मदद ली गई।

डीसीपी यादव ने बताया कि आरोपित का नाम अंकित चौधरी है और वह सीआरपीएफ का पूर्व कॉन्स्टेबल है। उसकी उम्र 34 साल है। पुलिस के मुताबिक, वह उत्तर प्रदेश के मुरादनगर स्थित जलालाबाद गाँव का रहने वाला है। वह साल 2012 से 2020 तक CRPF में था। अब खेती-बाड़ी करता है।

अब बांग्लादेश ने कनाडा को लताड़ा, कहा- अपराधियों को देता है शरण, वहाँ जाकर ऐश की जिंदगी जीते हैं हत्यारे: श्रीलंका भी कर चुका है नंगा

श्रीलंका के बाद अब बांग्लादेश ने कनाडा के दोहरे चरित्र को उजागर किया है। बांग्लादेश के विदेश मंत्री एके अब्दुल मोमन ने कहा है कि कनाडा हत्यारों का गढ़ है। वह अपराधियों को शरण देता है। उनके लिए सुरक्षा कवच की तरह है। हत्यारे वहाँ जाकर ऐश की जिंदगी रहे हैं।

दरअसल, बांग्लादेश के संस्थापक शेख मुजीबुर्रहमान के हत्यारे नूर चौधरी के प्रत्यपर्ण से कनाडा इनकार करता रहा है। इसका जिक्र करते हुए मोमन ने इंडिया टुडे से बातचीत में कहा कि हत्यारा नूर चौधरी कनाडा में ऐश की जिंदगी जी रहा है। बांग्लादेश ने कनाडा सरकार से नूर चौधरी को वापस भेजने की माँग की। लेकिन कनाडा जिद पकड़े बैठा है और बात सुनने की जगह कई तरह के बहाने बना रहा है।

अब्दुल मोमन ने कहा कि नूर चौधरी का प्रत्यपर्ण न करने की असली वजह जानने के लिए उन्होंने कनाडाई अदालत का दरवाजा भी खटखटाया था। साथ ही यह भी जानने की कोशिश की थी कि नूर चौधरी को कनाडा सरकार ने नागरिकता दी है या नहीं। इस पर कोर्ट ने फैसला भी दिया था। लेकिन वहाँ की सरकार न तो कुछ बता रही और न ही नूर चौधरी को वापस बांग्लादेश भेज रही है।

उन्होंने आगे कि कनाडाई सरकार सिर्फ अपने कानून का हवाला देकर कहती है कि यदि किसी व्यक्ति को उसके देश में वापस भेजने पर, मृत्युदंड दिया जा सकता है तो कनाडा उसका प्रत्यर्पण नहीं कर सकता। बेशक कनाडा का अपना कानून है, लेकिन उन्हें किसी हत्यारे का सुरक्षा कवच नहीं बनना चाहिए। उन्होंने बताया कि शेख मुजीबुर्रहमान रहमान का एक हत्यारा राशिद चौधरी अमेरिका में रह रहा है। उम्मीद है कि अमेरिका उसका प्रत्यर्पण कर देगा। वह पहले भी एक हत्यारे को बांग्लादेश भेज चुका है।

अब्दुल मोमन ने कनाडा पर मानवाधिकार की अवधारणा का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि आतंकवादियों और हत्यारों को बचाने के लिए मानवाधिकार एक बहाना बन गया है।

बात दें कि इससे पहले श्रीलंका के विदेश मंत्री अली साबरी ने कहा था कि कनाडा आतंकियों को पनाह देता है। उसके प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के लिए कहा था कि वे बिना सबूत आरोप लगाने में माहिर हैं। खालिस्तानी राग अलापने पर कनाडा को भारत से मिली लताड़ को भी उन्होंने सही बताया था।

साबरी ने कहा था, “कुछ आतंकवादियों को कनाडा में सुरक्षित पनाहगाह मिल गई है। कनाडाई पीएम का यह तरीका है कि बगैर किसी सबूत के कुछ अपमानजनक आरोप लगाए जाएँ।” उन्होंने कहा था कि ट्रूडो ने कहा था कि श्रीलंका में एक भयानक नरसंहार हुआ था। यह सरासर झूठ है। हर कोई जानता है कि हमारे देश में कोई नरसंहार नहीं हुआ था।

ओडिशा के सूर्यवंशी गजपति राजा, जिन्होंने तेलंगाना तक इस्लामी शासन को उखाड़ फेंका: सरदार पटेल से 575 साल पहले राजा कपिलेंद्र देव ने चटाई थी धूल

सरदार वल्लभभाई पटेल की रणनीतिक प्रतिभा को श्रद्धांजलि देते हुए कुछ दिन पहले हमने ‘हैदराबाद मुक्ति दिवस’ मनाया था। वो लौह पुरुष पटेल ही थे, जिन्होंने रजाकारों के उत्पीड़न को खत्म किया था और बहुसंख्यक हिंदुओं इनके उत्पीड़न से बचाया था। रजाकार एक निजी सेना थी, जो हैदराबाद के निजाम मीर उस्मान अली ख़ान के शासन को बनाए रखने और हैदराबाद स्टेट को हाल ही में स्वतंत्र हुए भारत में विलय का विरोध करने के लिए बनाई थी।

यह सेना कासिम रिजवी ने बनाई थी। रजाकारों ने हैदराबाद में हिंदुओं पर अवर्णनीय क्रूरता की थी। लौह पुरुष ने भारतीय सेना की समन्वित एवं निर्णायक कार्रवाई के जरिए बर्बर रजाकारों के उत्पाद को खत्म किया था। इसके साथ ही उस क्षेत्र के बहुसंख्यक हिंदुओं के मन में लंबे वक्त से निज़ाम के शासन से मुक्ति का पल रहा सपना सच हो गया था।

आश्चर्य की बात है कि इसी क्षेत्र में लगभग 575 साल भी ऐसी ही ऐतिहासिक समानता वाली एक घटना सामने आई थी। तब यहाँ अलाउद्दीन अहमद शाह द्वारा शासित दुर्जेय बहमनी सल्तनत हुआ करती थी। ये बहमनी सल्तनत दक्कन का इस्लामी राज्य था। उसके शासनकाल के दौरान सन 1448 तक तेलंगाना का लगभग पूरा क्षेत्र उसके कब्जे में आ गया था। उसकी ये जीत स्थानीय हिंदू प्रमुखों के वहाँ से जबरन खदेड़ने के बाद हुई, जबकि ये लोग इस क्षेत्र के खासे प्रभावशाली लोग थे।

इस दौरान अहमद शाह ने अधिकांश तेलंगाना को अपने कब्जे में रखते हुए संजर खान को इस क्षेत्र का गवर्नर नियुक्त किया। खान स्थानीय हिंदुओं से गहरी नफरत रखता था और उनके लिए एक क्रूर तानाशाह साबित हुआ। उसने हिंदुओं को पकड़ा और उन्हें गुलामी शुरू कर दिया (मुखर्जी प्रभात, उड़ीसा के गजपति राजाओं का इतिहास, पेज 29)। उसकी क्रूरता का खामियाजा अधिकतर औरतों और बच्चों को भुगतना पड़ा। उसके शासनकाल के दौरान हिंदू लगातार गुलामी के डर में जीते थे।

इस बीच ओडिशा साम्राज्य में महत्वपूर्ण घटनाएँ घट रही थीं। यहाँ गजपति राजवंश के सूर्यवंशी क्षत्रिय कपिलेंद्र देव के रूप में एक शक्तिशाली और दूरदर्शी शासक का उदय हुआ। इस्लामी राज्यों के खिलाफ रक्षात्मक रवैया अपनाने वाले अपने कई समकालीनों के उलट कपिलेंद्र देव दुश्मन के इलाके में लड़ने यानी हमला करने में विश्वास करते थे।

ओडिशा में अपनी राजधानी कटक और उसके आसपास के 5-6 जिलों को मिलाकर अपेक्षाकृत मामूली राज्य की स्थापना की थी। लेकिन, सन 1448 ईस्वी तक उन्होंने आज के आंध्र प्रदेश में कृष्णा नदी तक अपने राज्य का विस्तार कर लिया। अपने साम्राज्य का दायरा बढ़ाने के रास्ते में कपिलेंद्र देव ने बंगाल और मालवा की सल्तनत को कुचल डाला और उन्हें अपने क्षेत्र में मिला लिया।

महाराजा कपिलेंद्र देव बहमनियों की सीमा से सटे होने के कारण उनके प्रभुत्व से अनजान नहीं थे और जानते थे कि तेलंगाना में क्या हो रहा है। इसलिए, बहमनियों के साथ संघर्ष केवल समय की बात थी। सुल्तान अहमद शाह दुर्जेय गजपति सेना की सैन्य ताकत से अच्छी तरह परिचित था। उसे पता था की कि इसमें 2 लाख हाथियों को शामिल किया जाता था। (मोहपात्रा आर पी, उड़ीसा का सैन्य इतिहास, पेज 122)।

हालाँकि यह अतिशयोक्ति लग सकती है, लेकिन उड़िया सेना में वास्तव में हाथियों की काफी संख्या थी। यही वजह रही कि इसके राजाओं को “गजपति” उपनाम मिला। सुल्तान अहमद शाह जानता था कि उसका गजपति सेना से कोई मुकाबला नहीं है। इसलिए उसने जिद्दी संजर खान को सलाह दी की कि वह “हाथियों के स्वामी” (इंडियन एंटीक्वेरी वॉल्यूम XXVIII पेज 237) के साथ उलझने से बचे। शाह जानता था कि खान इसके काबिल नहीं है।

घमंडी संजर खान ने सुल्तान की यह सलाह अनसुनी कर दी। उसने गजपति सेना के साथ युद्ध का बिगुल बजा डाला। गजपति सेना तो पहले से ही तैयार थी और बहमनियों पर हमला करने के मौके का बेसब्री से इंतजार कर रही थी। तेलंगाना के आज के खम्मम में भयंकर युद्ध का मंच तैयार हुआ। इस निर्णायक लड़ाई का नेतृत्व राजा कपिलेंद्र देव के बेटे हमवीरा देव ने किया और आखिरकार तानाशाह संजर खान मारा गया (सुब्रमण्यम आर, द सूर्यवंशी गजपति ऑफ उड़ीसा, पेज 49) और अतत: इस क्षेत्र के हिंदुओं ने राहत की साँस ली।

इस जीत ने बहमनी सल्तनत पर राजा कपिलेंद्र के आक्रमणों की एक श्रृंखला की शुरुआत कर दी। राजा कपिलेंद्र देव ने न केवल पूरे तेलंगाना को बहमनियों से मुक्त कराया, बल्कि महाराष्ट्र के आज के नांदेड़ जिले में स्थित माहुर किले को भी उनसे छीन लिया। अन्य महत्वपूर्ण राकाकोंडा, देवरकोंडा, वारंगल (सुब्रमण्यम आर, द सूर्यवंशी गजपति ऑफ उड़ीसा, पेज 54) जैसे और कई किले भी गजपति वंश के कब्जे में आ गए। आखिरकार गजपति सेना ने आज के कर्नाटक में बहमनी साम्राज्य की राजधानी बीदर की घेराबंदी कर दी।

संजर खान के क्रूर शासनकाल को राजा कपिलेंद्र देव के साहसी जवाबी हमलों का सामना करना पड़ा। इसका नतीजा ये हुआ की कि बहमनी राजधानी पर सूर्यवंशी गजपति वंश का कब्ज़ा हो गया (सुब्रमण्यम आर, द सूर्यवम्सी गजपतिस ऑफ़ उड़ीसा, पृष्ठ 58)। यह ऐतिहासिक घटना नव स्वतंत्र भारत की घटनाओं से अद्भुत समानता रखती है। इसी क्षेत्र में रजाकारों ने हिंदू आबादी के खिलाफ जघन्य अत्याचार किए थे। तब सरदार पटेल सामने आए थे और हमने देखा कि कैसे सरदार पटेल की सूझ-बूझ ने रजाकारों का खात्मा कर डाला।

ऐसी ऐतिहासिक घटनाएँ मौजूदा भू-राजनीतिक हालात की गहरी समझ और देश हित के प्रति अटूट प्रतिबद्धता वाले नेताओं की अहमियत की तरफ ध्यान खींचती हैं। हालाँकि, यह याद रखना भी जरूरी है कि ऐसे जवाबी हमलों के लिए सावधानीपूर्वक दीर्घकालिक योजना और वर्षों की तैयारी की जरूरत होती है। हमारा इतिहास अतीत और संभावित रूप से भविष्य में भी ऐसी रणनीतियों को सफलतापूर्वक क्रियान्वयन करने की हमारी काबीलियत का सबूत है।

बदकिस्मती से एक वक्त में पूर्वी तट से उत्तर में पश्चिम बंगाल की हुगली नदी से लेकर दक्षिण में तमिलनाडु के रामेश्वरम तक शासन करने वाले इस महान क्षत्रिय राजा की अहम उपलब्धियों और कामों पर कई वजहों से विद्वानों ने ज्यादा खोजबीन नहीं की। लेखक ने कपिलेंद्र देव की उपलब्धियों को “गजपति कपिलेंद्र देव, 15वीं शताब्दी के भारत के महानतम हिंदू विजेता का इतिहास” नाम की किताब के तौर पर पेश करने की कोशिश की है।

(यह लेख अंग्रेजी में निहार रंजन नंदा ने लिखा है। मूल लेख पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक कर सकते हैं। इसका हिंदी अनुवाद रचना वर्मा ने किया है)

‘G-20 वाले विमान में कोकीन, नशे के कारण भोज से रहे नदारद’: कनाडा का इनकार, जस्टिन ट्रूडो बोले- भारत से बनाना चाहता हूँ अच्छे संबंध

खालिस्तानियों को संरक्षण देने के कारण अलग-थलग पड़ गए कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो का अब कहना है कि वे भारत से अच्छे संबंध चाहते हैं। साथ ही उनके कार्यालय ने उन खबरों को भी नकार दिया है जिनमें उनके विमान में कोकीन मिलने की चर्चा थी। ट्रूडो इसी विमान से G20 शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए नई दिल्ली आए थे।

बीते दिनों भारत के एक पूर्व राजनयिक ने एक टीवी चैनल पर कहा था इस बात की ‘विश्वसनीय अफवाह’ है कि ट्रूडो के विमान में कोकीन पाया गया था। लेकिन कनाडा के प्रधानमंत्री कार्यालय ने कहा है, “यह खबर एकदम निराधार है और दर्शाती है कि कैसे गलत जानकारी मीडिया तंत्र तक अपना रास्ता बना लेती है।” कनाडा के अखबार टोरंटो सन ने इस बात की जानकारी दी है।

जस्टिन ट्रूडो के विमान में कोकीन होने को लेकर भारत के पूर्व राजनयिक दीपक वोहरा ने पत्रकार दीपक चौरसिया को दिए गए साक्षात्कार में कहा था कि इस बात की ‘विश्वसनीय अफवाह’ है कि भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के स्निफ़र डॉग्स ने ट्रूडो के विमान में ड्रग्स पाई थी। दीपक ने यह भी कहा था कि जस्टिन ट्रूडो भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा G20 के सभी मेहमानों के सम्मान में आयोजित किए गए रात्रिभोज में भी नशे में होने के कारण नहीं गए थे।

दीपक वोहरा के इस दावे की भाषा जस्टिन ट्रूडो द्वारा भारत पर आरोप लगाने के दौरान उपयोग की गई भाषा से मेल खाती है। जस्टिन ट्रूडो ने जून 2023 में कनाडा के सरे शहर में हुई खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की मौत का जिम्मेदार भारत को बताया था। इस दौरान उन्होंने कनाडाई संसद में कहा था इस बात के ‘विश्वसनीय सबूत’ हैं कि निज्जर की हत्या में भारतीय एजेंसिया शामिल थीं। ट्रूडो के इस बयान के पश्चात दोनों देशों के राजनयिक रिश्ते रसातल में जा चुके हैं।

कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो भारत पर आरोप लगाने के पश्चात ‘एक कदम आगे-दो कदम पीछे’ की रणनीति अपनाते हुए भी नजर आ रहे हैं। उन्होंने यह बयान देने के पश्चात कहा था कि हम भारत को उकसाना नहीं चाहते हैं। अब ट्रूडो ने कहा है कि वह भारत के साथ अच्छे सम्बन्ध बनाने के लिए तत्पर हैं। हालाँकि उन्होंने निज्जर की हत्या को लेकर अपना पुराना राग फिर दोहराया है। ट्रूडो ने कहा कि भारत के साथ मिलकर हम निज्जर की हत्या के सभी तथ्य सामने लाए।

ट्रूडो ने कहा, “भारत एक उभरती हुई आर्थिक महाशक्ति है। साथ ही महत्वपूर्ण वैश्विक ताकत भी है। हमने पिछले वर्ष ही अपनी हिन्द-प्रशांत क्षेत्र की रणनीति तैयार की है और हम भारत के साथ गहरे संबंध बनाने के लिए भी तत्पर हैं।”

Asian Games 2023: चीन में दनादन मेडल पर निशाना साध रहे भारतीय शूटर्स; 2 और गोल्ड जीते; शूटिंग से अब तक आ चुके हैं 17 पदक

एशियन गेम्स 2023 (Asian Games) में भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन जारी है। गेम्स के छठवें दिन यानी 29 सितंबर की सुबह भारत को 2 गोल्ड और 3 सिल्वर मेडल मिले। इसमें से 4 मेडल शूटर्स के खाते में गए। अब तक भारत 8 गोल्ड, 11 सिल्वर, 11 ब्रॉन्ज सहित 30 मेडल चुका है।

चीन के हांगझोउ में खेले जा रहे 19वें एशियन गेम्स में 10 मीटर एयर पिस्टल में 17 वर्षीय भारतीय शूटर पलक ने गोल्ड मेडल अपने नाम किया है। इससे पहले 50 मीटर राइफल 3 पोजिशन में ऐश्वर्य प्रताप सिंह तोमर, स्वप्निल सुरेश कुसाले और अखिल श्योराण की तिकड़ी ने भी विश्व रिकॉर्ड के साथ गोल्ड मेडल जीता। इसके अलावा 10 मीटर एयर पिस्टल में पलक, ईशा सिंह और दिव्या सुब्बाराजू की तिकड़ी ने सिल्वर मेडल अपने नाम किया।

वहीं 10 मीटर एयर पिस्टल में ईशा सिंह ने सिल्वर मेडल पर अपना कब्जा जमाया। इसके अलावा टेनिस में रामकुमार रामनाथन और साकेत माइनेनी की जोड़ी ने भी सिल्वर मेडल जीतने में कायमाबी हासिल की। टेनिस जोड़ी को गोल्ड का दावेदार माना जा रहा था, लेकिन उन्हें चीन की सू-जुंग की जोड़ी ने 6-4, 6-4 से मात दी।

एशियन गेम्स में 8 गोल्ड भारत के नाम

एशियन गेम्स 2023 में भारतीय खिलाड़ियों ने अब तक 30 मेडल जीते हैं। इसमें से 8 गोल्ड, 11 सिल्वर और 11 ब्रॉन्ज मेडल हैं। भारत को शूटिंग में सबसे अधिक 17 मेडल मिले हैं। इसमें 6 गोल्ड, 6 सिल्वर और 6 ब्रॉन्ज शामिल हैं। इसके साथ ही मेडल टैली में भी बदलाव हुआ है और भारत 2 रैंकिंग आगे बढ़कर चौथे नंबर पर आ गया है। वहीं 93 गोल्ड के साथ चीन पहले, 24 गोल्ड के साथ कोरिया दूसरे और 19 गोल्ड के साथ जापान तीसरे नंबर पर है।