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‘लोन भुगतान के 30 दिन के भीतर लौटाएँ संपत्ति के कागजात’: बैंकों को RBI का सख्त निर्देश, देरी होने पर प्रतिदिन ₹5000 देना पड़ेगा मुआवजा

‘रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI)’ ने सभी बैंकों को निर्देश दिया है कि जो भी लोग ऋण का भुगतान कर देते हैं, एक महीने के भीतर उनकी संपत्ति के कागजात उन्हें वापस किए जाएँ। बैंकों के अलावा सभी NBFC (नॉन-बैंकिंग फाइनेंसियल कॉर्पोरेशन) को भी यही निर्देश दिया गया है। लोन का भुगतान कर दिया जाता है या उन्हें सेटल करा दिया जाता है तो इसके 30 दिन के भीतर बैंकों को संपत्ति के ऑरिजिनल कागजात वापस करने होंगे। पहले इस प्रक्रिया में कई महीने लग जाने के कारण लोगों को दिक्कत आती थी।

RBI ने बुधवार (13 सितंबर, 2023) को ये आदेश दिया। इतना ही नहीं, देश के सर्वोच्च बैंक ने ये आदेश भी दिया है कि अगर बैंक ऐसा करने में नाकाम रहते हैं तो फिर उसे कर्जदाता संस्थान को कर्जदारों को प्रतिदिन 5000 रुपए के हिसाब से तब तक हर्जाना देना होगा, जब तक कि कागजात वापस नहीं कर दिए जाते। बैंक, NBFC, हाउसिंग फाइनेंस संस्थान, एसेट रीकंस्ट्रक्शन कंपनी और रीजनल के अलावा सहकारिता बैंकों पर भी यही नियम लागू होगा।

अगर बैंक दस्तावेज जारी करने में देर करता है तो उसे इसका उचित कारण बताना पड़ेगा। बता दें कि सामान्यतः बैंक लोन देने के बदले ऋण लेने वालों के संपत्ति के असली कागजात अपने पास रख लेते हैं। RBI पहले ही कह चुका है कि अगर ये कागजात खो जाते हैं तो बैंकों को इसके बदले मुआवजा और हर्जाना भरना पड़ेगा। डाक्यूमेंट्स वापस करने के लिए न सिर्फ ग्राहक का गृह ब्रांच, बल्कि उक्त बैंक के किसी भी ब्रांच से प्रक्रिया पूरी करने की व्यवस्था किए जाने का निर्देश भी दिया गया है।

इसके साथ ही बैंकों को लोन देने के समय ही ये बताना होगा कि ग्राहक को ऋण भुगतान करने के बाद ये डाक्यूमेंट्स वापस कहाँ से मिलेंगे। अगर ऋण लेने वाले व्यक्ति की मौत हो जाती है तो उसके उत्तराधिकारियों को डाक्यूमेंट्स कैसे लौटाए जाएँगे, इसकी पूरी प्रक्रिया भी बैंक तैयार करेगा। 1 दिसंबर, 2023 के बाद जिस भी ऋण का रिपेमेंट होगा, उसमें ये नियम लागू होगा। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि लोन पहले कब लिया गया था।

‘ये नहीं करता अधिकारों का उल्लंघन’: सुप्रीम कोर्ट ने दिवाली पटाखा बैन में हस्तक्षेप करने से किया इनकार, मनोज तिवारी ने दायर की थी याचिका

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार के पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध को बरकरार रखा है। अदालत ने कहा कि पटाखों पर बैन दिल्ली शहर में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए एक उचित उपाय है। इस बैन को भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने चुनौती दी थी। उन्होंने तर्क दिया था कि यह भेदभावपूर्ण है और धर्म की स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन करता है। अदालत ने कहा कि बैन भेदभावपूर्ण नहीं है क्योंकि यह सभी लोगों पर लागू होता है, उनके धर्म की परवाह किए बिना।

‘त्योहार मनाने से नहीं रोकता पटाखों पर बैन’

मनोज तिवारी की याचिका खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रतिबंध धर्म की स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन नहीं करता है, क्योंकि यह लोगों को अपने त्योहारों को मनाने से नहीं रोकता है। अदालत का फैसला पटाखों के उद्योग के लिए एक झटका है, लेकिन यह उन लोगों । ये प्रतिबंध 1 अक्टूबर, 2023 से प्रभावी हो जाएगा।

केजरीवाल सरकार ने लगाया था बैन

बता दें कि अरविंद केजरीवाल सरकार ने दो दिन पहले दिल्ली में इस दीपावली पर भी पटाखों पर बैन लगाने की घोषणा की थी। दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने इसका ऐलान करते हुए कहा था, “मुख्यमंत्री ने निर्णय लिया है कि सर्दियों में सभी पटाखों की बिक्री, और जलाने पर प्रतिबंध रहेगा।” उन्होंने बताया कि दिल्ली पुलिस को पटाखों से सम्बंधित लाइसेंस नहीं देने के निर्देश जारी किए गए।

मनोज तिवारी ने सुप्रीम कोर्ट में किया था चैलेंज

दिल्ली सरकार के इस फैसले के खिलाफ भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। उन्होंने इसे धार्मिक स्वतंत्रता का मुद्दा बताते हुए सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप की अपील की थी। हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट ने मनोज तिवारी की याचिका को खारिज करते हुए पटाखों पर बैन को बरकरार रखा।

भारतीय सेना के कर्नल, मेजर और J&K पुलिस के DSP बलिदान, अनंतनाग में आतंकियों के साथ भीषण मुठभेड़: Pak के आतंकी संगठन ने ली जिम्मेदारी

जम्मू कश्मीर के अनंतनाग में भारतीय सेना और आतंकियों के बीच बड़ी मुठभेड़ हुई है। कई घंटों पर चली मुठभेड़ में 2 आतंकियों को मार गिराया गया है। वहीं भारत के 3 जवान भी वीरगति को प्राप्त हो गए। ये मुठभेड़ कोकरनाग इलाके में कई घंटों तक चली। मंगलवार (12 सितंबर, 2023) की शाम को ही वहाँ आतंकियों के मौजूद होने की खबर के बाद भारतीय सेना ने तलाशी अभियान चलाना शुरू किया। गाडोले क्षेत्र में भी जवान पहुँचे, लेकिन रात हो जाने के कारण अभियान को रोक दिया गया था।

वहीं बुधवार की सुबह फिर से आतंकियों की तलाश के लिए अभियान चलाया गया। इसी बीच जवानों ने खोज निकाला कि आतंकी कहाँ छिपे हुए हैं। इस दौरान भारतीय सेना के एक कर्नल जवानों का नेतृत्व कर रहे थे। उन्होंने आतंकियों पर हमला किया, लेकिन गोलीबारी में बुरी तरह घायल हो गए। भीषण गोलीबारी में भारतीय सेना के मेजर रैंक के एक अधिकारी और जम्मू कश्मीर पुलिस के एक DSP भी गंभीर रूप से जख्मी हो गए। इन तीनों को अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया गया था।

वहीं डॉक्टरों ने इन तीनों को मृत घोषित कर दिया। पाकिस्तान के आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैय्यबा से जुड़े ‘रेसिस्टेंस फ्रंट’ को इस घटना के लिए जिम्मेदार बताया जा रहा है। उसने इस हमले की जिम्मेदारी भी ली है। कर्नल मनप्रीत सिंह भारतीय सेना के 19RR के CO (कमांडिंग ऑफिसर) थे। श्रीनगर में भारतीय सेना के 92 बेस अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। उनके अलावा मेजर आशीष ढोंचक और डीएसपी हुमायूँ भट ने देश के लिए बलिदान दे दिया।

सिर्फ अनंतनाग ही नहीं, बल्कि एक ही दिन पहले राजौरी में भी आतंकियों और भारतीय सेना में मुठभेड़ हुई, जिसमें ‘केंट’ नाम की एक फीमेल डॉगी बलिदान हो गई। कर्नल मनप्रीत सिंह ’19 राष्ट्रीय राइफल्स यूनिट’ के नेतृत्व कर रहे थे। वहीं हुमायूँ भट्ट के शरीर से काफी खून बह गया था, इसी कारण उनकी मृत्यु हो गई। घायलों की मदद के लिए घटनास्थल पर हेलीकॉप्टर भेजा गया है। सेना और पुलिस के कई बड़े अधिकारी ग्राउंड पर मौजूद हैं।

‘मुस्कुराइए… अब आप भारत के नागरिक हैं’: इस्लामी मुल्कों से भागकर आए 108 हिंदुओं को अहमदाबाद में मिली नागरिकता, बोले- यही हमारे लिए स्वर्ग

गुजरात के अहमदाबाद में विभिन्न इस्लामी मुल्कों से प्रताड़ित होकर आए 108 हिन्दू शरणार्थियों को भारत की नागरिकता दी गई है। इस मौके पर गुजरात के गृह राज्यमंत्री हर्ष संघवी ने इन सभी हिन्दुओं को प्रमाण पत्र वितरित किए। बुधवार (12 सितंबर 2023) को आयोजित इस समारोह में नागरिकता पाए हिन्दुओं ने ख़ुशी जाहिर की। संघवी ने भी सभी का भारत में स्वागत करते हुए उनसे देश के विकास में भागीदारी सुनिश्चित करने का आग्रह किया।

यह आयोजन अहमदाबाद के होटल सिल्वर क्लाउड में आयोजित किया गया। नागरिकता पाने वाले लोगों में पाकिस्तान के साथ अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आए हिन्दू भी शामिल हैं। इस कार्यक्रम की तस्वीरें अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर शेयर करते हुए हर्ष संघवी ने लिखा कि भारत की नागरिकता चुनने वाले सभी परिवारों ने देश के प्रति समर्पण दिखाया।

हर्ष संघवी ने यह भी कहा कि नागरिकता मिलने के बाद सभी परिवार बेहद खुश हैं, क्योंकि अब वे भारत के स्थाई नागरिक बन चुके हैं। जिन नागरिकों को प्रमाण पत्र दिए गए हैं, उनमें महिलाएँ और बच्चे भी शामिल हैं। इनमें बुजुर्गों एवं बच्चों सहित सभी उम्र वर्ग के लोग शामिल हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हर्ष संघवी ने कहा कि नागरिकता पाने वाले हिन्दुओं के घर दीपावली जैसा माहौल है। उन्होंने सभी 108 लोगों से भारत के विकास में सक्रिय भागीदारी निभाने का भी आह्वान किया। पहले की बातें याद दिलाते हुए संघवी ने बताया कि कभी नागरिकता पाने के लिए लोगों को दिल्ली के चक्कर लगाने पड़ते थे।

नरेंद्र मोदी की सरकार की तारीफ करते हुए हर्ष संघवी ने कहा कि इन नीतियों को मोदी सरकार ने सरल कर दिया। एक स्वर में सभी को सम्बोधित करते हुए संघवी ने कहा, “मुस्‍कुराइए आप अब भारत के नागरिक हैं।” इस कार्यक्रम को गुजरात के गृह राज्यमंत्री संघवी ने शरणार्थियों के तीसरे जन्म के तौर पर बताया।

आंकड़ों की चर्चा करते हुए कार्यक्रम में मौजूद भाजपा नेता पायल कुकराणी ने बताया कि पिछले 5 वर्षों के अंदर अकेले गुजरात में 1149 लोगों को भारत की नागरिकता मिल चुकी है। डॉक्टर गणेश कुमार नाम के एक पाकिस्तान शरणार्थी ने बताया कि वहाँ रहने वाले हिन्दुओं को नाबालिग बच्चियों के अपहरण, फिरौती और धार्मिक भेदभाव झेलने पड़ते हैं।

डॉक्टर गणेश ने भारत में बसना ही अंतिम विकल्प बताया। नागरिकता पाने वाली कौशल्या ने भारत को अपने लिए स्वर्ग जैसा बताया। डॉक्टर अशोक शेखानी के अनुसार, वो पाकिस्तान में हर दिन प्रताड़ना का शिकार होते थे। 73 साल की खेमी देवी ने भी भारत को अपने लिए स्वर्ग बताया।

कश्मीर में 33 साल बाद आर्य समाज ने फिर से खोला अपना स्कूल: आतंकियों के कारण करना पड़ा था बंद, 370 निरस्त होने के बाद बदल रहे हालात

आर्य समाज ने आखिरकार 35 साल के बाद जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर के डाउनटाउन में अपने सबसे पुराने शैक्षणिक संस्थानों में से एक को फिर से खोल दिया है। यहाँ पुराने शहर के महाराजगंज क्षेत्र में स्थित DAV पब्लिक स्कूल में साढ़े तीन दशकों के बाद फिर से छात्र-छात्राओं की आमद शुरू हो गई है।

धीरे-धीरे इस राज्य में 90 के दशक के आतंकवाद के भयावह दौर का खौफ कम होता जा रहा है। लोग अमन-चैन की तरफ लौटने लगे हैं। साल 2019 में अनुच्छेद 370 के निरस्त होने से यहाँ के हालात में बदलाव आ रहा है। इसका असर अब दिखने भी लगा है। सबूत इस स्कूल के दोबारा से खुलने के तौर पर सामने है।

दरअसल, आर्य समाज ट्रस्ट का ये स्कूल 1990 के दशक की शुरुआत में अलगाववादी आतंकवाद पनपने की वजह से 33 साल से तक बंद पड़ा रहा था। ‘ग्रेटर कश्मीर‘ को स्कूल की प्रिंसिपल और प्रबंधक समीना जावेद ने बताया कि संस्था को उसी जगह पर, उसी इमारत के अंदर, उसी प्रबंधन के तहत फिर से खोल दिया गया है।

अप्रैल से शुरू हुआ पहला सत्र

मूल रूप से लखनऊ के रहने वाले प्रिंसिपल जावेद ने बताया, “भारत भर में आर्य समाज से संबद्ध सभी स्कूलों को दयानंद आर्य विद्यालय या DAV के नाम से जाना जाता है।” उन्होंने ये भी जानकारी दी कि स्कूल ने इस साल अप्रैल में अपना पहला सत्र शुरू किया। इसके तहत कक्षा 7 तक 35 छात्रों का प्रारंभिक नामांकन था।

उन्होंने बताया, “हमें कक्षा 7 से ऊपर के छात्र मिले थे, लेकिन उन्हें JNV रैनावारी भेज दिया गया।” स्कूल जम्मू-कश्मीर बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन से संबद्ध है और जोनल एजुकेशन ऑफिसर (ZEO) रैनावारी के अधिकार क्षेत्र में आता है।

प्रिंसिपल और प्रबंधक जावेद ने इस बात पर जोर दिया कि स्कूल के छात्रों को उचित मार्गदर्शन और दिशा की जरूरत है। इसके लिए शिक्षक और प्रबंधन दोनों सामूहिक तौर से अपने शैक्षिक अनुभव को बढ़ाने के लिए काम कर रहे हैं।

आसान नहीं था स्कूल को फिर से खोलना

इस स्कूल को उस जगह और इमारत में दोबारा से स्थापित करना आसान नहीं था। इसे लेकर प्रिंसिपल ने कहा, “इसके लिए काफी कोशिशें करने की जरूरत थी, क्योंकि हमें इमारत को नया करना था, इसे सही रूप देना था और कक्षाएँ शुरू करनी थीं।”

उन्होंने आगे कहा, “स्कूल को फिर से खोलने में शुरुआती चुनौतियाँ थीं, लेकिन अब हम हर गुजरते दिन के साथ सकारात्मक बदलाव देख रहे हैं। माता-पिता और समुदाय सामान्य तौर पर सहयोगात्मक रहे हैं।”

लक्ष्य है छात्रों को धर्मनिरपेक्ष माहौल देना

स्कूल की प्रिंसिपल ने इस बात पर जोर दिया कि स्कूल प्रबंधन का पहला लक्ष्य छात्रों को धर्मनिरपेक्ष माहौल और उनके पूरे व्यक्तित्व विकास में योगदान देना है। सत्र की शुरुआत के बाद से ही छात्रों ने पर्यावरण दिवस, योग दिवस, शिक्षक दिवस और अन्य पाठ्येतर गतिविधियों जैसे विभिन्न कार्यक्रमों में सक्रिय तौर से शिरकत करवाई जा रही है।

प्रिंसिपल ने कहा, “हमारा ध्यान पाठ्यक्रम से परे भी है और हमारा लक्ष्य इन छात्रों को अन्य क्षेत्रों के लिए भी तैयार करना है। मैं निजी तौर से एक दिन में छह कक्षाएँ लेती हूँ।” उन्होंने आगे बताया कि स्कूल ने सात शिक्षकों की भर्ती की है। ये सभी स्थानीय लोग हैं जो इस स्कूल को चलाने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं। प्रिंसिपल जावेद ने कहा, “मेरा मानना है कि शिक्षक किसी भी स्कूल की रीढ़ होते हैं और हमारे शिक्षक स्कूल के सुचारू संचालन के लिए हर संभव कोशिश कर रहे हैं।”

स्थानीय संस्था का था स्कूल पर कब्जा

एक अधिकारी ने खुलासा किया कि 90 के दशक की शुरुआत में पुराने शहर में स्कूल बंद होने के बाद एक अन्य स्कूल चलाने के लिए इमारत पर एक स्थानीय संस्था ने कब्जा कर लिया था। उन्होंने अपने स्थानीय स्कूल को डीएवी भवन में स्थानांतरित कर दिया क्योंकि डीएवी स्कूल बंद होने के बाद इसका इस्तेमाल कम हो गया था।

अधिकारी ने बताया, “हालाँकि, 2022 से स्कूल प्रबंधन ने इसे फिर से खोलने की कोशिशें शुरू कीं और इसका नतीजा रहा कि पहला सत्र इस साल अप्रैल में शुरू हो पाया।” दरअसल 1992 में स्कूल की इमारत पर एक स्थानीय शख्स ने कब्जा के बाद यहाँ प्राइवेट स्कूल नक्शबंदी पब्लिक खोला था।

हालाँकि, बाद में लंबी कानूनी लड़ाई के बाद आर्य समाज ट्रस्ट की जम्मू-कश्मीर इकाई के अध्यक्ष अरुण चौधरी ने एक स्थानीय कारोबारी की मदद से स्कूल को दोबारा हासिल कर लिया। नक्शबंदी पब्लिक में पढ़ने वाले छात्रों और उनके पेरेंट्स के विरोध के बावजूद आखिरकार अधिकारियों ने 2022 में ट्रस्ट को संपत्ति का कब्जा वापस सौंप दिया।

वंचित परिवारों के बच्चों के मिलती है शिक्षा

एक रिपोर्ट के मुताबिक, आर्य समाज ट्रस्‍ट का ये स्कूल अभी एक जर्जर इमारत में चल रहा है। यहाँ सराफ कदल इलाके में वंचित परिवारों के छात्र शिक्षा पा रहे हैं। इस पढ़ाई के बदले स्कूल कोई फीस नहीं लेता है। हालाँकि, कुछ पेरेंट्स अपनी मर्जी से 500 रुपए हर महीने का योगदान स्‍कूल को देते हैं। ये पैसा अभी इस मिडिल स्कूल को चलाने में मदद करता है, जिसमें आठवीं क्‍लास तक की कक्षाएँ लगाई जा रही है।

बच्चे भी हैं खुश

कश्मीर घाटी में डीएवी प्रबंधन अगले शैक्षणिक कैलेंडर से अपने सभी बंद पड़े स्कूलों को खोलने का प्लान बना रहा है। इससे छात्रों में खुशी की लहर है। पहले के नक्शबंद पब्लिक स्कूल की 10वीं कक्षा की छात्रा जायका ने कहा, “जब से डीएवी के तहत स्कूल फिर से खुला है, हमारी पढ़ाई का स्तर बढ़ गया है।” जायका की तरह अन्य छात्रों और शिक्षकों में उम्मीद जगी है कि स्कूल फिर से खुलने से श्रीनगर के पुराने शहर क्षेत्र में बेहतर शिक्षा मिलेगी और छात्रों को फायदा पहुँचेगा।

नाच रहा चीन अपनी 500 बड़ी कंपनियों के ग्रोथ पर, इंडिया के वामपंथी अभी भी मजदूरों-किसानों का हक मार खुद करते हैं अय्याशी

चीन की टॉप 500 कंपनियों ने साल 2022-23 में 5.46 ट्रिलियन डॉलर का बिजनेस किया। मतलब 452824008000000 रुपए, थोड़े और आसान शब्दों में कहें तो 4,52,824 अरब रुपया का बिजनेस। यह रिपोर्ट ऑल-चाइना फेडरेशन ऑफ इंडस्ट्री एंड कॉमर्स ने जारी की है। चाइनीज प्राइवेट कंपनियों के लिए काम करने वाली इस संस्था के अनुसार वहाँ की टॉप 500 कंपनियों की जो औसत वार्षिक विकास दर है, वो है – 3.94 प्रतिशत।

इस लिस्ट में आम भारतीयों के लिए जानी-पहचानी कंपनियों की बात करें तो ई-कॉमर्स कंपनी JD, अलीबाबा, टेक्नॉलजी कंपनी टेन्सेंट, बायडु आदि ने सबसे ज्यादा बिजनेस किया है। पिछले साल JD ने अकेले 1.05 ट्रिलियन युआन (12128 अरब रुपए) के बिजनेस को पार कर लिया। अलीबाबा भी कुछ ज्यादा पीछे नहीं रहा। 864.53 बिलियन युआन (9981 अरब रुपए) के साथ यह दूसरे नंबर पर रहा।

बिजनेस के इतने बड़े आँकड़े को देख कर चौंकिए मत। चौंकने वाली खबर इससे भी बड़ी है। अनुसंधान एवं विकास मतलब रिसर्च और डेवलपमेंट (R&D) करने के लिए टॉप 500 चायनीज कंपनियों में से 326 ने 3 प्रतिशत से ज्यादा कर्मचारी रखे हैं। जबकि 414 कंपनियाँ तो ऐसी हैं, जिन्होंने अपने उत्पाद से संबंधित मूल तकनीक को खुद ही विकसित किया है।

वामपंथ मतलब लाल सलाम/मजदूर/किसान/हड़ताल/पूंजी का विरोध/उद्योग-धंधों के खिलाफ प्रदर्शन आदि से अगर अपनी समझ बना बैठे हैं तो चौंकाने वाले आँकड़े अभी और हैं। वो आँकड़ा है पंचवर्षीय योजना का। भारत की तरह वहाँ भी पंचवर्षीय योजना बनाई जाती है, उस पर काम किया जाता है। 2021-25 की चीन वाली पंचवर्षीय योजना के तहत वहाँ की सरकार ने रिसर्च और डेवलपमेंट खर्च को 7 प्रतिशत वार्षिक तक ले जाने का लक्ष्य रखा है।

रिसर्च और डेवलपमेंट पर 7 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि खर्च कितना होता है, यह कम है या ज्यादा… इसको वैश्विक स्तर पर समझते हैं। मकिन्ज़ी एंड कंपनी (McKinsey & Company) एक कंसल्टिंग फर्म है। इसके अनुसार रिसर्च और डेवलपमेंट खर्च में 7 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि के लक्ष्य को अगर चीन पा लेता है तो वह आरएंडडी पर दुनिया का सबसे अधिक खर्च करने वाला देश बनने की ओर अग्रसर हो जाएगा।

चायनीज प्राइवेट कंपनियाँ और चीनी सरकार

  • चीन में जो वामपंथी सरकार है, वो वहाँ के मजदूरों-किसानों की सरकार है।
  • बिजनेसमैन के सारे पैसों को कब्जे में लेकर वो आम नागरिकों में बाँट देती है।

ऊपर जो 2 लाइनें लिखी हैं, कुछ ऐसी सोच है अगर आपकी तो आप वामपंथी प्रोपेगेंडा में फँसे हुए हैं। सच्चाई इससे कोसों दूर है। क्यों? क्योंकि चीन की जो पंचवर्षीय योजना बनाई जाती है, वो वहाँ की सरकार बनाती है न की प्राइवेट कंपनी। इस योजना के तहत चीनी सरकार प्राइवेट कंपनियों को भरपूर सपोर्ट करती है। गूगल/ट्विटर/ऐमेजॉन जैसी वैश्विक कंपनियों को चीन में घुसने नहीं देना, उनके टक्कर की पैरेलल कंपनी खड़ी करना… यह चीनी सरकार के सपोर्ट से ही संभव है।

चीन की सरकार अपनी प्राइवेट कंपनियों को कैसे करती है सपोर्ट? ऑल-चाइना फेडरेशन ऑफ इंडस्ट्री एंड कॉमर्स के महासचिव झाओ जियांग के शब्दों से समझते हैं। इस रिपोर्ट के आने के बाद जियांग ने कहा:

“आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच चीन की टॉप 500 प्राइवेट कंपनियों की गुणवत्ता बढ़ी है, इनसे जुड़ी तकनीकी नई और उन्नत हुई है। प्राइवेट कंपनियों के बिजनेस को बढ़ाने के लिए लक्ष्य बनाकर सरकार ने जो योजनाएँ चलाईं, उसका धन्यवाद।”

साल 2022 में चायनीज प्राइवेट कंपनियों को आगे बढ़ाने के लिए चीन की सरकार ने कई प्रयास किए। इनमें से दो प्रमुख प्रयास हैं – (i) प्राइवेट कंपनियों के बिजनेस और उससे जुड़ी अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर टॉप-लेवल दिशा-निर्देश जारी किया गया। (ii) एक विशेष ब्यूरो की स्थापना की गई, जिसका काम सिर्फ यही था कि हर एक प्राइवेट कंपनी को कैसे लक्ष्य बनाकर सहयोग दिया जाए, उनके बिजनेस को आगे बढ़ाया जाए।

इन सबका फायदा क्या हुआ? किसे हुआ? पिछले साल के इन आँकड़ों से समझिए। चीन की जितनी भी बाजार संस्थाएँ हैं, उनमें से 97 प्रतिशत से ज्यादा प्राइवेट ही हैं। मतलब सरकारी संस्थाएँ 3 प्रतिशत से भी कम हैं। और इनसे चीन की सरकार को कितना फायदा होता है? चायनीज उद्योग और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अनुसार उनके देश को मिलने वाला टैक्स से राजस्व इन्हीं प्राइवेट कंपनियों से लगभग 50 प्रतिशत आता है, सकल घरेलू उत्पाद में इनका हिस्सा 60 प्रतिशत है, जबकि तकनीकी नवाचार में इन कंपनियों ने 70 प्रतिशत योगदान दिया है।

वामपंथी चीन की पूंजीवादी नीति, कब से?

9 सितंबर 1976 को माओ जेदोंग (माओ से-तुंग) की मौत होती है। इसके बाद चीन में जो सत्ता आई, उसने माओवादी विचारधारा से तौबा कर लिया। क्यों? क्योंकि इसके एक से अधिक कारण तात्कालिक चायनीज नेताओं ने देखा-समझा।

(i) माओ की नीतियों के कारण साल 1950 से 1973 तक साल-दर-साल चीन की जीडीपी 3 प्रतिशत से भी कम बढ़ी। जबकि आर्थिक विकास दर में इसी दौरान चीन के निकटवर्ती देश जापान, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, ताइवान काफी आगे निकल गए थे।
(ii) 1970 के दशक के अंत तक चीन में खाद्य आपूर्ति और कृषि-उत्पादन इतना कम हो गया था कि सरकारी दस्तावेजों में 1959-61 के भयंकर अकाल की बातें लिखी जाने लगी थीं, सरकारी अधिकारी इसके लिए आवश्यक कदम उठाने की माँग करने लगे थे।
(iii) माओ की नीतियों के कारण चीन में 1959-61 के दौरान जो अकाल आया, उसमें 1.5 करोड़ से लेकर 5.5 करोड़ लोग भूख के कारण मर गए थे।

इन बड़े कारणों के अलावे और भी तात्कालिक कारण थे, जो माओवादी विचारधारा को चीनी सत्ता से दूर ले गए। माओ की मौत की बाद डेंग जियोपिंग या देंग शियाओ पिंग (Deng Xiaoping) ने जब सत्ता संभाली तो उन्होंने चीन के राष्ट्रीय आर्थिक विकास को अपनी राजनीति में सर्वोच्च प्राथमिकता दी। इसके लिए उन्होंने किसी एक राह पर चलने के बजाय अलग-अलग रास्ते चुने। एक तरफ रूस के स्टाइल को कॉपी करते हुए बड़े-बड़े उद्योग-धंधे-कारखानों को प्रोत्साहन दिया तो दूसरी ओर पहली बार चीन में विशेष आर्थिक क्षेत्र (Special Economic Zone) खोला गया। विदेशियों (बिजनेस) के लिए जो चीन पहले बिल्कुल बंद था, 1976 के बाद उसी चीन ने प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को आकर्षित करना शुरू कर दिया।

खेती-किसानी से लेकर उद्योग-धंधों में प्रयोग, दूसरे देशों के सफल बिजनेस मॉडल को देखने के लिए हजारों चीनी अधिकारियों को भेजने से लेकर विदेशी बिजनेसमैन को चीन में पैसा लगाने के लिए पहली बार जॉइंट वेंचर संबंधी कानून के बनाने तक… डेंग जियोपिंग ने कई काम किए। विरोध भी बहुत झेला। लेकिन यह सारे काम किताबी/थ्योरी-बेस्ड न होकर प्रयोग के आधार पर था, इसलिए रिजल्ट जल्द दिखने लगे। साल 1979 से 1984 आते-आते तक चीन की पॉलिसी आर्थिक विकास की पॉलिसी बन चुकी थी।

1984 के बाद से चीन में डेंग जियोपिंग की सत्ता ने आर्थिक व्यवस्था के सुधार पर निर्णय लेना शुरू कर दिया था। इसमें सबसे बड़ा निर्णय था – प्राइवेट कंपनियों पर सरकारी हस्तक्षेप और नियंत्रण कम से कम करना। 1997 में डेंग जियोपिंग की मौत के बाद भी जियांग जेमिन और झू रोन्गजी की सत्ता ने उनकी नीतियों को ही आगे बढ़ाया। 1997-98 में वहाँ बड़े पैमाने पर निजीकरण हुआ। कुछेक बड़े और महत्वपूर्ण राज्य-समर्थित उद्योगों को छोड़कर सभी की संपत्तियों को निजी निवेशकों को बेच दिया गया। यह इतने बड़े स्केल पर किया गया कि 2001 से 2004 आते-आते वहाँ राज्य-समर्थित या स्वामित्व वाले उद्योगों की संख्या में 48 प्रतिशत की कमी आ गई।

2005 में पूरे चीन की GDP का 50 प्रतिशत प्राइवेट कंपनियों से आया। ऐसा पहली बार हुआ था। 2005 में ही क्रय शक्ति समता (purchasing power parity) के आधार पर चीन एशिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका था। इसके पहले जापान एशिया का सुपर पावर था। इसी रास्ते पर चलते हुए 5 साल के बाद 2010 में जापान को पीछे छोड़ चीन दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका था।

प्राइवेट कंपनी के लिए आर्मी कैंट की भी सुविधा

चीता मोबाइल नाम की एक बड़ी कंपनी है चीन में। क्लिन मास्टर नाम का ऐप जिन लोगों ने यूज किया है, वो इस कंपनी के बारे में जानते होंगे। इसने भारत में न्यूज ऐग्रिगेटर बिजनेस में हाथ आजमाया था। इंस्टा न्यूज, न्यूज रिपब्लिक इसी चीता मोबाइल के ऐप थे। मैंने भी लगभग 3 साल यहाँ काम किया है। काम-ट्रेनिंग के सिलसिले में चीन भी जाना हुआ। इस कंपनी का हेड क्वॉर्टर बीजिंग के शाओयांग जिले में है, हमारी ट्रेनिंग यहीं हुई थी।

पहले दिन हेड क्वॉर्टर के कैंपस में खो गया। सड़क से ऑफिस के मेन गेट तक जाने में हाँफ गया। कुछ खाने-पीने के लिए पूछता हुआ मेस गया तो 20 मिनट से ज्यादा लग गए। मेस से आते वक्त ऑफिस का रास्ता ही भूल गया। आखिर एक प्राइवेट कंपनी का कैंपस इतना बड़ा-लंबा-चौड़ा कैसे? हमारे साथ हिंदी बोलने वाला एक चायनीज लड़का काम करता था। अभी भी दोस्ती है। उसने बताया कि जिस जगह पर चीता मोबाइल का ऑफिस है, वो आर्मी की जगह है। लीज पर दी गई है।

इसलिए फिर से ऊपर का 2-3 लाइन लिख रहा हूँ:

  • चीन में जो वामपंथी सरकार है, वो वहाँ के मजदूरों-किसानों की सरकार है।
  • बिजनेसमैन के सारे पैसों को कब्जे में लेकर वो आम नागरिकों में बाँट देती है।

ऊपर जो 2 लाइनें लिखी हैं, कुछ ऐसी सोच है अगर आपकी तो आप वामपंथी प्रोपेगेंडा में फँसे हुए हैं।

उज्ज्वला स्कीम को मोदी सरकार ने दिया विस्तार: 75 लाख महिलाओं को फ्री में मिलेगा LPG गैस कनेक्शन, पेट्रोलियम कंपनियों को ₹1650 करोड़

प्रधानमंत्री नरेंद्र सरकार की सरकार ने बढ़ती महंगाई के बीच देश के लोगों को राहत देने की कोशिश की है। केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने बताया कि मोदी सरकार अगले तीन सालों में 75 लाख लोगों को एलपीजी के मुफ्त कनेक्शन दिए जाएँगे। यह LPG उज्ज्वला योजना के तहत महिलाओं को दिए जाएँगे।

नए मुफ्त कनेक्शन के लिए केंद्र ने बुधवार (13 सितंबर 2023) को कैबिनेट की बैठक में सरकारी पेट्रोलियम कंपनियों को 1,650 करोड़ रुपए जारी करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। यह बैठक पीएम मोदी की अध्यक्षता में बुलाई गई थी। नए मुफ्त कनेक्शन के बाद देश में उज्ज्वला लाभार्थियों की संख्या 9.60 करोड़ से बढ़कर 10.35 करोड़ हो जाएगी।

अनुराग ठाकुर ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में रक्षाबंधन और ओणम के मौके पर एलपीजी गैस की कीमतों में भारी कटौती की गई थी। इसके कारण LPG सिलिंडर का मूल्य 200 घटकर 1100 रुपए से 900 रुपए हो गया। इससे उज्ज्वला योजना के साथ-साथ आम लोगों को भी फायदा होगा।

उन्होंने कहा कि उज्ज्वला योजना की सफलता की कई अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने सराहना की है। उन्होंने कहा कि इस योजना से महिलाओं के जीवन में काफी बदलाव आए हैं और उनके स्वास्थ्य में सुधार हुआ है। इससे पहले अधिकांश महिलाएँ लकड़ी और कोयले पर निर्भर थीं। इससे पर्यावरण भी प्रदूषित होता था।

अनुराग ठाकुर ने कहा कि गैस की कीमतों में कटौती के बाद सबसे ज्यादा फायदा उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि लाभार्थियों को पहले से ही 200 रुपए की सब्सिडी मिल रही थी और अब 400 रुपए की सब्सिडी मिलेगी।

बताते चलें कि प्रधानमंत्री उज्ज्वला य़ोजना की शुरुआत मई 2016 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की थी। इस योजना के तहत गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले परिवारों की महिलाओं को मुफ्त में गैस कनेक्शन दिए जाते हैं। यह कनेक्शन अनिवार्य रूप से महिला के ही नाम से जारी किए जाते हैं।

ई-कोर्ट पर सरकार की पहल

उज्ज्वला के साथ-साथ केंद्र सरकार ने ई-कोर्ट को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अनुराग ठाकुर ने कहा कि कैबिनेट ने ई-कोर्ट परियोजना के तीसरे चरण को मंजूरी दे दी गई है और इसके लिए सरकार ने 7210 करोड़ रुपए की व्यवस्था की है। इसके पीछे ऑनलाइन अदालतों को बढ़ावा देना और न्यायिक प्रणाली को और अधिक पारदर्शी बनाना है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा, “कैबिनेट का एक महत्वपूर्ण निर्णय यह है कि 7,210 करोड़ रुपए की ई-कोर्ट मिशन मोड परियोजना चरण 3 को मंजूरी दी गई है। इसका लक्ष्य ऑनलाइन और पेपरलेस अदालतों की स्थापना करना है। कागज रहित अदालतों के लिए ई-फाइलिंग और ई-भुगतान प्रणाली को सार्वभौमिक बनाया जाएगा। डेटा संग्रहीत करने के लिए क्लाउड स्टोरेज बनाया जाएगा। सभी अदालत परिसरों में 4,400 ई-सेवा केंद्र स्थापित किए जाएँगे।”

जिससे पैसे कमाया, जिसकी मदद से ली जमीन, इंजमाम ने उसकी ही 13 साल की बेटी का किया रेप: मोबाइल में मिली नंगी तस्वीरों से खुला केस, 61 साल की सजा

13 साल की बच्ची से रेप में केरल के कासरगोड की एक फास्ट ट्रैक अदालत ने 28 साल के इंजमाम उल हक उर्फ राजीव को कुल 61 साल जेल की सजा सुनाई है। उसने जिस बच्ची को हवस का शिकार बनाया था, उसके पिता ने उसे घर बनाने का ठेका दिया था। इतना ही नहीं बाद में जमीन खरीदने में भी उसकी मदद की थी।

इंजमाम उल हक मूल रूप से पश्चिम बंगाल का रहने वाला है। 2017 की इस रेप का खुलासा 2019 में हुआ था। दरअसल यौन शोषण की एक अन्य मामले में गिरफ्तार मलयाली के मोबाइल की पुलिस पड़ताल कर रही थी। इसी दौरान पीड़ित बच्ची की नंगी तस्वीरें मिली। इसके बाद बच्ची से जब चाइल्डलाइन के काउंसलर्स ने संपर्क किया तो इंजमाम उल हक की हैवानियत का खुलासा हुआ।

खुलासे के वक्त बच्ची 10वीं की छात्रा थी। इंजमाम ने जब उसे अपनी हवस का शिकार बनाया था, तब वह आठवीं में पढ़ती थी। इंजमाम ने इस घटना का जिक्र करने पर उसे जान से मारने की धमकी भी दी थी। बच्ची के बयान के आधार पर उसके खिलाफ पॉस्को एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था। 12 सितंबर 2023 को फास्ट ट्रैक कोर्ट ने उसे सजा सुनाई।

अलग-अलग मामलों में सुनाई गई सजा के एक साथ चलने के कारण इंजमाम को 25 साल जेल में बिताने में होंगे। उस पर 2 लाख 10 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माने की रकम न अदा करने पर उसे 11 महीने अतिरिक्त जेल में बिताने होंगे।

ऑनमनोरमा की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2019 में केरल की पय्यन्नूर पुलिस ने एक मलयाली को एक अन्य नाबालिग लड़की के यौन शोषण केस में गिरफ्तार किया था। लेकिन उसका फोन चेक करते समय उसमें दूसरी नाबालिग लड़की की नग्न तस्वीरें मिली। जाँच में वह लड़की कासरगोड के चित्तारिक्कल थाना क्षेत्र में रहने वाली कक्षा 10 की छात्रा निकली। इसके बाद जब चाइल्ड हेल्पलाइन के काउंसलर्स ने उस लड़की से संपर्क किया तो 2017 का रेप केस सामने आया।

पीड़िता ने काउंसलर्स को बताया कि उसके पिता ने घर बनाने का ठेका इंजमाम उल हक को दिया था। घर बनने के दौरान लड़की अपने परिवार के साथ एक अन्य जगह पर रहती थी, जबकि मजदूर और इंजमाम निर्माणाधीन इमारत में रहते थे। थोड़े समय बाद लड़की का परिवार भी निर्माणाधीन इमारत में शिफ्ट हो गया। यहाँ इंजमाम ने पीड़िता को कई बार अपनी हवस का शिकार बनाया और उसे जान से मारने की धमकी दी।

नाबालिग के बयान पर पुलिस ने इंजमाम उल हक पर पॉक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया। चित्तारिक्कल थाने के SHO इंस्पेक्टर रंजीत रवींद्रन ने केस की जाँच कर कोर्ट में चार्जशीट पेश की। पुलिस ने मामले को फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाने की माँग की जिसे स्वीकार कर लिया गया। कोर्ट ने IPC की धारा 376 (3) के तहत इंजमाम को 25 साल, पॉक्सो एक्ट के तहत 25 साल , IPC 354 के तहत 9 साल और IPC 506 के तहत 2 साल की सजा सुनाई है।

फ्लाइट के टॉयलेट में सेक्स करता हुआ पकड़ा गया प्रेमी जोड़ा, वीडियो में नंगे कैद हुए दोनों: यात्रियों के कहने पर क्रू मेंबर ने खोला दरवाजा, महिला चिल्लाई – ‘Oh! My F∩cking God’

इंग्लैंड में एक विमान के टॉयलेट में एक कपल सेक्स करता हुआ पाया गया, जिसके बाद उन्हें विमान से उतार कर पुलिस को सौंप दिया गया। उनका वीडियो भी सामने आया है। बताया जा रहा है कि जब फ्लाइट एटेंडेंट ने बाथरूम का दरवाजा खोला, उस दौरान दोनों ही नग्न अवस्था में पाए गए। इसके बाद जल्दी से उन्होंने दरवाजा बंद कर लिया। विमान इस दौरान हवा में था। सोशल मीडिया पर भी ये वीडियो वायरल हो रहा है, जिसे अब तक लाखों लोग देख चुके हैं।

जैसे ही दरवाजा खुला, विमान में बैठे अन्य यात्री उन दोनों को आपत्तिजनक और अश्लील अवस्था में देख कर हँस पड़े। दरवाजा खोलने से पहले केबिल क्रू को लोग ‘कम ऑन, कम ऑन’ बोल रहे थे। वहीं एक अन्य यात्री कपल को सेक्स करते हुए देख कर चिल्लाया, “ओह माय फकिंग गॉड!” EasyJet के एक प्रवक्ता ने बताया कि ये विमान इंग्लैंड के लुटॉन से स्पेन के द्वीप इबिज़ा जा रहा था। घटना शुक्रवार (8 सितंबर, 2023) की है। पुलिस को इस मामले में हस्तक्षेप करना पड़ा।

हालाँकि, UK में ऐसा कोई कानून नहीं है जो विमान में सेक्स करने के संबंध में कुछ कहती हो। हालाँकि, सार्वजनिक रूप से जानबूझकर यौन संबंधों में लिप्त होना अपराध माना गया है। सन् 2004 के ‘सेक्सुअल ऑफेंसेज एक्ट’ की धारा-71 में ये व्यवस्था की गई है। सोशल मीडिया पर इस वीडियो के सामने आने के बाद लोगों ने कहा, “आशा है कि इस हरकत में लिप्त व्यक्ति पायलट नहीं होगा।” वीडियो में यात्री कपल को चीयर करते हुए भी दिखाई दे रहे हैं।

बताया जा रहा है कि जो कपल टॉयलेट में सेक्स करते हुए पकड़ा गया, वो प्रेमी-प्रेमिका थे। जो महिला यात्री उन्हें देख कर चिल्लाती है, वो वीडियो में अपने साथी यात्री से पूछते हुए दिखाई दे रही है कि उसने वीडियो बनाया या नहीं। फिर साथी यात्री बताता है कि उसने सब कुछ कैमरे में कैद कर लिया है। हालाँकि, बेडफॉर्डशायर की पुलिस ने इस संबंध में कपल पर क्या कार्रवाई की है, ये स्पष्ट नहीं है। लेकिन, सोशल मीडिया में लोग वीडियो पर मजे ले रहे हैं।

भारतीय दूतावास पर हमले में NIA की बड़ी सफलता: लंदन के 15 और सैन फ्रांसिस्को के 4 खालिस्तानी हमलावरों की पहचान, लुक आउट सर्कुलर की तैयारी

इंग्लैंड की राजधानी लंदन स्थित भारतीय हाई कमीशन पर हमला करने वाले 15 आरोपितों की राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने पहचान की है। दो महीने पहले NIA ने 45 खालिस्तानी हमलावरों की तस्वीरें जारी की थीं। वहीं, अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में 2 जुलाई को भारतीय वाणिज्य दूतावास को निशाना बनाने वाले चार खालिस्तानियों की भी पहचान की गई है।

इनके खिलाफ लुक आउट सर्कुलर जारी करने की तैयारी की जा रही है। बताते चलें कि इस साल खालिस्तानी समर्थकों ने लंदन स्थित हाईकमीशन पर हमला कर तिरंगे की जगह खालिस्तान का झंडा लहरा दिया था। इसके साथ ही दूतावास की बिल्डिंग में तोड़फोड़ भी की थी। NIA ने मई महीने में घटनास्थल से टूटे हुए शीशे सहित कई सबूत जुटाए थे।

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अप्रैल में NIA को लंदन विरोध प्रदर्शन के संबंध में एक नया मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। दरअसल, इसकी प्रारंभिक जाँच में पाकिस्तान की कुख्यात एजेंसी ISI जुड़े आतंकी लिंक सामने आए थे। मंत्रालय के निर्देश के बाद दिल्ली पुलिस ने इस मामले में गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी, ताकि जाँच NIA को सौंपी जा सके।

जाँच अपने हाथ में लेने के बाद NIA की एक ने मई 2023 में यूनाइटेड किंगडम का दौरा कर सबूत जुटाए थे। भारत लौटकर NIA ने घटना से संंबंधित पाँच वीडियो जारी किए थे। एजेंसी ने लोगों से उन संदिग्धों की पहचान करने में मदद माँगी थी, जिन्होंने उच्चायोग में तोड़फोड़ करने की कोशिश की थी। कहा जा रहा है कि इसके जवाब में एजेंसी को 500 से अधिक कॉल आए।

NIA ने असम के डिब्रूगढ़ जेल में बंद ‘वारिस पंजाब दे’ के मुखिया अमृतपाल सिंह और उसके अन्य सहयोगियों से भी पूछताछ की थी। पूछताछ के दौरान पता चला है कि हमले के लिए इन्होंने ही उकसाया था। इसके बाद 1 अगस्त को NIA ने पंजाब और हरियाणा में कई हमलावरों के ठिकानों पर रेड डालकर महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए थे।

इंडियन एक्सप्रेस ने गृह मंत्रालय के एक सूत्र के हवाले से अपनी रिपोर्ट में कहा है कि रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) ने भी संदिग्धों की पहचान करने में NIA को जाँच में मदद की। एक अधिकारी ने कहा, “सूचना की क्राउडसोर्सिंग और अन्य एजेंसियों की मदद से NIA ने 15 हमलावरों की पहचान की है। उनकी पहचान के बाद वे जल्द ही उनके खिलाफ LOC (लुक आउट सर्कुलर) जारी करने की प्रक्रिया में हैं।”

उच्चायोग में सहायक कार्मिक और कल्याण अधिकारी एवं शिकायतकर्ता किरण कुमार वसंत भोसले ने FIR में तीन व्यक्तियों – अवतार सिंह उर्फ खांडा, गुरचरण सिंह और जसवीर सिंह के नामों का उल्लेख किया है। एक अधिकारी ने कहा, “खांडा की जून में बर्मिंघम में मृत्यु हो गई और NIA अपनी केस फाइल के लिए उसका मृत्यु प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए संबंधित विभाग के संपर्क में है।”

बता दें कि लंदन स्थित हाई कमीशन के सामने 19 मार्च 2023 को खालिस्तान समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन किया था। इस दौरान उन्होंने दूतावास पर हमला कर दिया था। उसी तरह, 2 जुलाई 2023 को अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में भी इंडियन काउंसलेट को खालिस्तान समर्थकों ने निशाना बनाया था और आग लगा दी थी। अगले महीने NIA वहाँ दौरा करने वाली है।