एशिया कप में भारत से हार के बाद पाकिस्तान के पूर्व कप्तान शाहिद अफरीदी ने अपने दामाद और तेज गेंदबाज शाहीन अफरीदी को लताड़ लगाई है। उन्हें साथी गेंदबाज नसीम शाह से सीख लेने की सलाह दी है। साथ ही कहा है कि भारत 20-25 ओवर में ही मैच जीत गया था।
पाकिस्तानी न्यूज चैनल समा टीवी से बात करते हुए शाहिद अफरीदी ने कहा, “कुछ लोग सोशल मीडिया पर टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने को लेकर सवाल कर रहे हैं। मुझे लगता है कि हमें सही तरीके से गेंदबाजी करनी चाहिए थी। जैसे नसीम शाह ने शुरू की थी। यदि शाहीन भी वैसे ही करता तो अच्छा होता। हम उम्मीद करते हैं कि वह शुरुआती कुछ ओवरों में विकेट निकाले।” (इस बातचीत को वीडियो में 27 सेकंड के बाद से सुना जा सकता है)
This is what Shahid Afridi has to say about Pakistan’s defeat against India. Shaheen Afridi didn’t bowl well like he usually takes early wkts,also bowling first was a right decision by Babar Azam. Listen what @SAfridiOfficial said further spot on#AsiaCup2023#PakvSL#PAKvINDpic.twitter.com/gQlbrrNtJP
शहीद अफरीदी ने शाहीन अफरीदी की लाइन-लेंथ को लेकर कहा, “भारत के खिलाफ मैच में उसकी लाइन और लेंथ बिल्कुल भी ठीक नहीं थी। जिस एरिया पर उसको बॉलिंग करनी चाहिए थी, उस जगह पर वह नहीं कर पाया। शुरुआत के 1-2 ओवर में जब उसे विकेट नहीं मिलती है तो फ्रस्टेशन होता है। उसकी इमेज इस तरह की बन गई है।”
उन्होंने कहा है, “शाहीन अफरीदी को अपनी लाइन और लेंथ पर सुधार करना पड़ेगा। ऐसा नहीं कह सकते कि आपने एक-दो ओवर में अच्छी गेंदबाजी नहीं की तो अपने आप से नाराज हो गए। क्रिकेट में एक्सक्यूज और सॉफ्ट कॉर्नर ढूँढ़े जाते हैं। मुझे लगता है कि उन्हें दोबारा फोकस से गेंदबाजी करनी चाहिए थी। जिस तरह से उसने अपना दूसरा स्पेल शुरू किया वह बहुत अच्छा था। उसी लाइन-लेंथ पर फोकस करें।”
गेंदबाजी में सुधार करने की सलाह देते हुए शाहिद अफरीदी ने कहा, “कभी-कभार जरूरी नहीं है कि आपको विकेट मिल ही जाए। सामने बैट्समैन हैं वो भी तैयारी करके आए हुए हैं। उसे अपनी लाइन और लेंथ पर फोकस करना होगा। दो नई गेंदें होती हैं, आप अच्छी जगह पर गेंद करो, बैट्समैन से थोड़ा दूर करोगे तो आउट कर पाओगे। जितना आप नए बॉल से बैट्समैन को अधिक खिलाएँगे विकेट का उतना ही अधिक चांस बनेगा। आपने बॉलिंग ही अच्छी नहीं की। नसीम शाह वाली लेंथ पर बॉलिंग करते जिस तरह से उसने की है।”
जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग में मंगलवार (12 सितंबर, 2023) को भारतीय सुरक्षा बलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ हुई थी। इस मुठभेड़ में 2 आतंकियों को मार गिराया गया। भारतीय सुरक्षा बल के 3 जवानों को भी वीरगति मिली थी। बलिदान हुए जवानों में सेना के कर्नल मनप्रीत सिंह और मेजर आशीष धोंचक के अलावा जम्मू कश्मीर पुलिस के डिप्टी एसपी हुमायूँ भट्ट शामिल हैं। हुमायूँ का अंतिम संस्कार 13 सितंबर की रात को ही कर दिया गया है।
DSP हुमायूँ सहित अन्य बलिदानी जवानों को जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने श्रद्धांजलि अर्पित की। हुमायूँ का अंतिम संस्कार 13 सितंबर 2023 को बड़गाम जिले में हुआ। उनके जनाजे में कई गणमान्य लोग शामिल हुए और उसे कंधा दिया। गमगीन माहौल में हुए अंतिम संस्कार का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
#WATCH | Jammu and Kashmir: Last rites of DSP of J&K Police Humayun Muzammil Bhat, who lost his life in the Anantnag encounter, performed in Budgam. pic.twitter.com/xwN04vK057
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हुमायूँ जम्मू-कश्मीर पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) में बतौर DSP पिछले 3 साल से तैनात थे। वह मूल रूप से पुलवामा के त्राल इलाके के निवासी थे। फिलहाल हुमायूँ का परिवार श्रीनगर एयरपोर्ट के पास मौजूद VIP कॉलोनी हुमहामा में रहता है। हुमायूँ के पिता ने बताया कि गोली लगने के बाद अधिक खून बन जाना उनके बेटे की मौत की वजह बनी।
हुमायूँ एक देशभक्त परिवार से ताल्लुक रखते थे। उनके पिता गुलाम हसन भी जम्मू-कश्मीर पुलिस में DIG पद से रिटायर हुए थे। हुमायूँ भट्ट की पिछले साल ही एक प्रोफेसर से शादी हुई थी। उनकी एक बेटी है, जिसकी उम्र 2 साल है। हुमायूँ के पिता ने भी अपने बेटे को अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित की।
जम्मू-कश्मीर पुलिस के डिप्टी एसपी शहीद हुमायूं भट्ट को श्रद्धांजलि अर्पित करते उनके पिता. ??
कश्मीर में अनंतनाग क्षेत्र के पत्रकार रोहिल बशीर ने ऑपइंडिया से बात करते हुए बताया कि DSP हुमायूँ भट्ट सहित सेना के 2 अधिकरियों पर हमला करने वाला एक हमलावर जुलाई 2022 में आतंकवाद से जुड़ा था। इसका नाम उज़ैर खान है।
उजैर ने लगभग सवा साल पहले प्रतिबंधित TRF संगठन ज्वॉइन किया था। वह कोकानाग इलाके के नगाम का रहने वाला था। माना जा रहा है कि इसी संगठन ने इसी साल 4 अगस्त को कुलगाम जिले में सेना की एक टुकड़ी पर हमला किया था।
नई दिल्ली में संपन्न हुए जी-20 शिखर सम्मेलन में शामिल होने आए चीनी दल की संदिग्ध हरकतों को लेकर नई जानकारी सामने आई है। इसके अनुसार चीनी दल होटल ताज पैलेस के कमरे में ’20 रहस्यमयी बैग’ ले जाने पर अड़ा था।
इन बैग्स की जाँच से इनकार किए जाने के कारण पैदा हुई टकराव की स्थिति में सुरक्षा अधिकारियों के साथ बहस करने वाले चीनी दल का नेतृत्व एक महिला अधिकारी कर रही थी। इस दल में दिल्ली स्थित चीनी दूतावास के भी दो-तीन अधिकारी शामिल थे।
कई घंटों के विवाद के बाद चीनी दल संदिग्ध बैग अपने देश के दूतावास ले जाने पर सहमत हुआ था। टाइम्स ऑफ इंडिया ने बताया है कि जब ये बैग दूतावास ले जाए जा रहे तो एक विशेष एस्कॉर्ट टीम साथ भेजी गई ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि बैग्स दूतावास की जगह किसी और जगह न ले जाया जा सके।
रिपोर्ट के अनुसार काफी अजीब तरह के होने के कारण इन बैग्स की तरफ सुरक्षाकर्मियों का ध्यान गया था। एक सूत्र के हवाले से बताया गया है, “बैग्स की लंबाई और चौड़ाई करीब 1×1 मीटर थी। यह 10 इंच मोटा दिख रहा था।”
इन बैग्स में किस तरह के उपकरण थे यह स्पष्ट नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार इन संदिग्ध उपकरणों की पहचान के प्रयास अब भी किए जा रहे हैं। खुफिया अधिकारी इस बात की जाँच कर रहे हैं कि क्या ये उपकरण ‘ऑफ-द-एयर’ टाइप के सर्विलांस और जैमर थे। एक चीनी इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी SIG-INT (सिग्नल-इंटेलिजेंस) की जानकारी जुटाने वाले उपकरणों की सप्लाई करने को लेकर दुनिया भर में जानी भी जाती है।
रिपोर्ट के अनुसार विवाद के दौरान भारतीय एजेंसियों की लगातार नजर होटल के छठे फ्लोर पर स्थित उस कमरे पर बनी हुई थी जिसमें ये बैग रखे गए थे। कमरे के बाहर तीन लोगों की तैनाती थी। इन जवानों को हर घंटे बदला जा रहा था। ऐसा करीब 12 घंटे तक चला।
एक सूत्र के हवाले से मीडिया संस्थान ने कहा है कि वियना कन्वेंशन के कारण विमान से उतारने के बाद इन बैग्स की जाँच नहीं की गई थी। वियना कन्वेंशन डिप्लोमेटिक प्रोटोकॉल से संबंधित है।
वैसे जी 20 के लिए चीनी दल का विशेष विमान की जगह चार्टर्ड प्लेन से आना भी भारतीय एजेंसियों के लिए चौंकाने वाला था। चीन के राष्ट्रपति शिखर सम्मेलन में शामिल नहीं हुए थे। उनकी जगह प्रधानमंत्री ली कियांग अपने देश के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे थे। इस पूरे विवाद पर चीन की ओर से अभी तक कोई टिप्पणी नहीं आई है।
संदिग्ध बैग के साथ चीनी दल के नई दिल्ली आने का खुलासा टीओआई ने ही किया था। अपनी पहली रिपोर्ट में मीडिया संस्थान ने बताया था कि यह विवाद 7 सितंबर 2023 को हुआ था।
इसके अनुसार होटल के स्टाफ को रूम विजिट के दौरान बैग में संदिग्ध उपकरण होने का संदेह हुआ। उसने इसकी जानकारी ऊपर के लोगों को दी। इसके बाद चीनी स्टाफ से इस बैग को स्कैनर से गुजारने को कहा गया है। लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया। इसके कारण करीब 12 घंटे तक माहौल तनावपूर्ण बना रहा।
चीन की यह हरकत इसलिए भी संदेह पैदा कर रही है, क्योंकि ताज पैलेस होटल में ही ब्राजील के राष्ट्रपति ठहरे हुए थे। जी-20 के अगले शिखर सम्मेलन की मेजबानी ब्राजील ही करेगा। ताज पैलेस होटल के पास ही आईटीसी मौर्य होटल भी है। इसमें अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन सहित कई अन्य देशों के प्रमुख ठहरे हुए थे।
उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले के एक मिशनरी स्कूल में हिन्दू छात्रों की प्रताड़ना का मामला सामने आया है। टीचरों पर हिन्दू देवी-देवताओं का अपमान करने और छात्रों के माथे पर लगे तिलक हटाने का आरोप है। दावा है कि यहाँ छात्रों को ईसाई बनने का लालच भी दिया जाता है। हिन्दू संगठनों ने बुधवार (13 सितंबर 2023) को घटना पर नाराजगी जताते हुए प्रदर्शन किया है। पीड़ितों के अभिभावकों ने मुख्यमंत्री पोर्टल पर भी मामले की शिकायत की है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना हापुड़ जिले के देहात थाना क्षेत्र के ततारपुर की है। यहाँ स्थित सेंट एंथोनी सीनियर सेकेंडरी स्कूल में बुधवार को कई छात्रों के परिजन शिकायत लेकर पहुँचे। अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल के कुछ टीचरों उनके बच्चों के माथे से तिलक पोछ दिए। हाथों में बँधी राखी काटकर कूड़ेदान में फेंक दी। आरोप यह भी है कि जब छात्रों ने टीचरों की इस हरकत का विरोध किया तब हिन्दू देवी-देवताओं के लिए अपमानजनक शब्द बोले गए।
अभिभावकों का यह भी आरोप है कि छात्रों को धमकी दी गई थी कि अगर उन्होंने इसके बारे में घर में किसी को बताया तो उनके नाम काट दिए जाएँगे। मामले की जानकारी मिलते ही स्कूल में हिन्दू संगठनों का जमावड़ा हुआ। विश्व हिन्दू परिषद नेता गिरीश त्यागी ने आरोप लगाया है कि स्कूल के अंदर ईसाई मिशनरियों से जुड़े लोगों द्वारा छात्रों के धर्मान्तरण का प्रयास किया जाता है। उन्होंने स्कूल के अंदर हिन्दू छात्रों के मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए प्रशासन से आरोपितों पर कार्रवाई की माँग की है।
अभिभावकों और हिन्दू संगठनों के विरोध के बाद स्कूल प्रबंधन ने आरोपित टीचरों को बुलवाया। बताया जा रहा कि दुबारा ऐसा न करने का भरोसा देते हुए आरोपित टीचरों ने माफी माँगी। हिन्दू संगठनों का आरोप है कि स्कूल प्रबंधन मामले को दबाने का प्रयास कर रहा है। पीड़ित छात्रों के परिजनों ने इस घटना की शिकायत मुख्यमंत्री पोर्टल, चाइल्ड वेलफेयर एसोसिएशन और बेसिक शिक्षा अधिकारी से की है। हापुड़ के एडिशनल एसपी मुकेश चंद के मुताबिक शिकायत मिलने पर मामले की सत्यता परख कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
प्रार्थना के बीच में जीजस और अंत में आमीन
हापुड़ के जिस सेंट एंथोनी स्कूल की यह घटना है, उसकी प्रार्थना में सभी छात्रों को जीसस की संतान बताया जाता है। साथ ही प्रार्थना का अंत आमीन के साथ किया जाता है। स्कूल के परिचय में ही क्रॉस को आत्मविश्वास और बलिदान का प्रतीक बताया गया है।
कर्नाटक हाई कोर्ट ने भाई की मृत्यु के बाद अनुकंपा के आधार पर नौकरी पाने की एक बहन के दावे को खारिज कर दिया है। अदालत ने कहा है कि शादीशुदा भाई के परिवार का बहन हिस्सा नहीं होती।
कर्नाटक हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस प्रसन्ना बी वराले और जस्टिस कृष्ण एस दीक्षित की बेंच ने तुमकुरु की रहने वाली 29 साल की पल्लवी जीएम की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह बात कही। पल्लवी के भाई की 2016 में ड्यूटी के दौरान मौत हो गई थी। वे बेंगलुरु इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई कंपनी लिमिटेड यानी बीईएससीओएम (BESCOM) में जूनियर लाइन मैन थे।
पल्लवी की याचिका को खारिज करते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि कर्नाटक सिविल सेवा (अनुकंपा आधार पर नियुक्ति) नियम, 1999 के तहत एक बहन को ‘परिवार’ की परिभाषा में शामिल नहीं किया गया है। लिहाजा बहन को भाई की मौत के बाद उसकी जगह अनुकंपा पर नौकरी पाने का अधिकार नहीं है। कोर्ट ने कहा कि नियम 2(1)(बी) में स्पष्ट किया गया है कि सरकारी नौकरी में रहते हुए यदि किसी पुरुष की मृत्यु होती है तो उसके आश्रित या साथ रह रहे लोगों, मसलन उसकी विधवा, बेटा/बेटी को ही परिवार का सदस्य माना जाएगा।
अदालत ने कहा कि किसी सरकारी कर्मचारी के परिवार का सदस्य किसे माना जाएगा यह पहले से ही कानूनी तौर पर परिभाषित है। ऐसे में अदालत किसी व्यक्ति को परिवार की परिभाषा में न तो जोड़ सकती है और न ही हटा सकती है।
दरअसल इस मामले में याचिकाकर्ता ने सिंगल जज बेंच के 30 मार्च, 2023 के आदेश को चुनौती दी थी। सिंगल बेंच ने भी अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति की माँग वाली याचिका खारिज कर दी थी।
पल्लवी के वकील ने अदालत में तर्क दिया था कि वह अपने भाई पर निर्भर थी। इस आधार पर वह अनुकंपा पर नौकरी पाने की हकदार हैं। बीईएससीओएम के वकील ने कानूनी तौर पर परिवार की परिभाषा का हवाला देते हुए इसका विरोध किया।
हाई कोर्ट ने माना कि मृत कर्मचारी के परिवार का एक सदस्य अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति का दावा कर सकता है। लेकिन उसे भी मृत कर्मचारी पर आश्रित होने का पुख्ता सबूत देना होता है। इस मामले में पल्लवी ऐसा कोई सबूत पेश नहीं कर पाईं जिससे यह साबित हो सके कि वह अपने मृत भाई पर आश्रित थीं। साथ ही अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि मृतक के परिवार के वित्तीय संकट में होने के भी कोई प्रमाण नहीं हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार (14 सितंबर 2023) को मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में होंगे। दोनों राज्यों को करीब 57000 करोड़ रुपए की विकास परियोजनाओं की सौगात देंगे। मध्य प्रदेश में 50 हजार करोड़ रुपए से अधिक लागत की परियोजनाओं की वे आधारशिला रखेंगे।
पीएम मोदी ने एक्स/ट्विटर पर पोस्ट कर कहा है, “मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के मेरे परिवारजनों के लिए कल (गुरुवार) का दिन बेहद महत्वपूर्ण है। दोनों ही राज्यों के चौतरफा विकास के लिए केंद्र सरकार निरंतर प्रतिबद्ध होकर काम कर रही है। इसी कड़ी में कल कई बड़ी परियोजनाओं के शिलान्यास और लोकार्पण का सौभाग्य मिलेगा। इससे यहाँ रहने वाले लोगों के जीवन में खुशहाली और समृद्धि के नए-नए द्वार खुलेंगे।”
मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के मेरे परिवारजनों के लिए कल का दिन बेहद महत्वपूर्ण है। दोनों ही राज्यों के चौतरफा विकास के लिए केंद्र सरकार निरंतर प्रतिबद्ध होकर काम कर रही है। इसी कड़ी में कल कई बड़ी परियोजनाओं के शिलान्यास और लोकार्पण का सौभाग्य मिलेगा। इससे यहां रहने वाले लोगों के…
प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी प्रेसनोट में बताया गया है कि मध्य प्रदेश में PM मोदी 50,700 करोड़ रुपए लागत की परियोजनाओं की आधारशिला रखेंगे। बीना जिले में मौजूद रिफाइनरी के पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स का भूमिपूजन करेंगे। रतलाम जिले में पावर एन्ड एनर्जी रिन्यूवल मैनुफैक्चरिंग जोन (विद्युत एवं नवीकरणीय ऊर्जा विनिर्माण क्षेत्र) के नींव का पत्थर भी रखा जाना प्रस्तावित है। यह निर्माण रतलाम के नर्मदापुरम स्थित मेगा इंडस्ट्रियल पार्क में प्रस्तावित है।
इनके अलावा मध्य प्रदेश के अंदर 2 आईटी पार्कों की भी सौगात दी जाएगी। ये पार्क इंदौर में होंगे। साथ ही पूरे प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में 6 अन्य इंडस्ट्रियल पार्क बनाए जाएँगे। वहीं छत्तीसगढ़ के निवासियों को 6350 करोड़ रुपए की योजनाओं से लाभान्वित किया जाएगा। ये परियोजनाएँ रेलवे क्षेत्र के लिए होंगी।
आदरणीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी के 14 सितंबर को बीना आगमन से पूर्व माननीय मुख्यमंत्री श्री @ChouhanShivraj जी ने आज बीना में कार्यक्रम स्थल का निरीक्षण कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
प्रधानमंत्री जी कल बीना रिफाइनरी परिसर में ₹50 हजार करोड़ की लागत से बनने वाले विशाल… pic.twitter.com/vG7CM0w9RT
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक PM मोदी गुरुवार सुबह लगभग 11:15 पर मध्य प्रदेश के बीना पहुँचेंगे। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के मुताबिक बीना रिफायनरी MP का सबसे बड़ा हब होगा। उन्होंने यहाँ लगभग 15 हजार लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद जताई है। CM शिवराज सिंह ने मोदी के दौरे से पहले बीना रिफायनरी और कार्यक्रम स्थल का का खुद निरीक्षण भी किया।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बिहार के आरा से जेडीयू के एमएलसी राधा चरण साह उर्फ सेठ को गिरफ्तार कर लिया है। कुछ दिन पहले अधिकारियों ने नोटिस दिया था। पूछताछ के बाद अधिकारियों ने बुधवार (13 सितंबर 2023) को उन्हें गिरफ्तार कर लिया। पूरे दिन उनके ठिकानों पर टीम ने छापेमारी की थी और उनके खातों से जुड़े कई सवाल पूछे थे।
गिरफ्तारी के बाद बिगड़ी तबीयत
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ईडी की टीम ने जब राधा चरण सेठ को गिरफ्तार किया, तब उन्होंने अपनी तबीयत खराब होने की जानकारी दी। उनकी तबीयत को देखते हुए सीआरपीएफ की सुरक्षा के बीच उन्हें अस्पताल ले जाया गया और उनका मेडिकल कराया गया।
सुबह 4 बजे से चल रही थी छापेमारी
मीडिया रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि बुधवार की सुबह से ही उनके ठिकानों पर छापेमारी चल रही थी। ईडी की टीम के 20 अफसरों की टीम ने सुबह से ही उनके घर, होटल और अनाईठ स्थित फार्म हाउस पर छापेमारी की। इस दौरान स्थानीय पुलिस और सीआरपीएफ के जवाब भी मौजूद रहे। 8 महीने में यह तीसरी छापेमारी थी।
कई गड़बड़ियों के चलते हुई गिरफ्तारी
जानकारी के मुताबिक, राधा चरण साह उर्फ सेठ के कई व्यवसाय हैं। उन पर बालू के अवैध खनन और वित्तीय गड़बड़ियों से जुड़े आरोप हैं। राधा चरण और उनके बेटे कन्हैया प्रसाद दोनों से ही एक सप्ताह पहले ईडी ने पटना में पूछताछ की थी। उनके पास आय से अधिक संपत्ति मिली है। साथ ही टैक्स चोरी से जुड़े आरोप भी लगे हैं।
लालू प्रसाद के करीबी थे राधाचरण
राधा चरण सेठ जेडीयू में आने से पहले राष्ट्रीय जनता दल में थे। उन्हें लालू प्रसाद यादव का खास माना जाता था। वो पिछले काफी समय से एजेंसी के रडार पर थे और करीब 15 दिनों से ईडी की टीम उनसे पूछताछ कर रही थी। बताया जा रहा है कि फरवरी माह में भी उनके ठिकानों पर छापेमारी हुई थी। उस दौरान काफी अघोषित संपत्ति का पता चला था।
राधा चरण ने बिहार के आरा, पटना सहित विभिन्न जिलों के अलावा उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, झारखंड, मुंबई, बेंगलुरु सहित विभिन्न राज्यों के कई शहरों में प्रॉपर्टी खरीदी है। ईडी का कहना है कि छापेमारी के दौरान कई ऐसे कागजात मिले थे, जिनमेें कोडवर्ड में जानकारी लिखी गई थी।
दिल्ली में विपक्षी दलों के गठबंधन I.N.D.I. Alliance के समन्वय समिति की बैठक शरद पवार के घर पर हुई। इस बैठक में कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। बैठक में TMC नेता अभिषेक बनर्जी को छोड़कर 12 दलों के नेता शामिल हुए। समन्वय समिति की इस बैठक में देश के अलग-अलग हिस्सों में रैलियों के आयोजन पर सहमति बनी, जिसमें पहली रैली मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में आयोजित की जाएगी।
सीट बँटवारे पर हुई अहम चर्चा
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने कहा, “मैंने यह बात रखी है कि I.N.D.I. गठबंधन के दलों के पास जो सीट पहले से ही हैं उन पर चर्चा नहीं की जानी चाहिए, जब तक जिस पार्टी के पास सीट है वह उसे छोड़ना न चाहे। भाजपा, एनडीए और गठबंधन के बाहर के दलों के पास जो सीटें हैं, उनके बँटवारे पर चर्चा करनी चाहिए।”
#WATCH | After the INDIA alliance Coordination Committee meeting, National Conference leader Omar Abdullah says, "…The seats that are already held by members of the INDIA block should not be open for discussion, we should be discussing the seats held by the BJP, NDA or parties… pic.twitter.com/XZb22042EM
कॉन्ग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि कमिटी ने फैसला किया है कि पहली संयुक्त रैली अक्टूबर के पहले सप्ताह में भोपाल में होगी। इसमें महँगाई, बेरोजगारी और भाजपा सरकार के भ्रष्टाचार से जुड़े मुद्दे उठाए जाएँगे। समन्वय समिति ने सीटों का बँटवारा तय करने की प्रक्रिया शुरू करने का फैसला किया है। यह निर्णय लिया गया कि सदस्य दल बातचीत करेंगे और जल्द से जल्द निर्णय लेंगे।
#WATCH | On INDIA alliance Coordination Committee meeting, Congress General Secretary KC Venugopal says, "The Coordination Committee has decided to start the process for determining seat-sharing. It was decided that member parties would hold talks and decide at the earliest. The… pic.twitter.com/JnOmapYJ7Z
इस बैठक में आम चीजें तो शामिल हैं ही, मीडिया को लेकर भी खास रणनीति पर चर्चा हुई है। कोऑर्डिनेशन कमिटी की बैठक में फैसला लिया गया है कि I.N.D.I. गठबंधन की मीडिया सब-कमिटी उन न्यूज एंकरों की सूची बनाए, जिनके शो में गठबंधन की खबर नहीं दिखायी जाती। उनके शो पर I.N.D.I. गठबंधन के दल अपने प्रतिनिधि नहीं भेजेंगे।
I.N.D.I. Alliance की तरफ से जारी संयुक्त बयान
I.N.D.I. गठबंधन की बैठक में शामिल हुए ये नेता
आज की बैठक में एनसीपी की तरफ से शरद पवार, कॉन्ग्रेस के केसी वेणुगोपाल, DMK से टीआर बालू, आरजेडी से तेजस्वी यादव, शिवसेना (यूटी) के संजय राउत, जेडीयू के संजय झा, जेएमएम के हेमंत सोरेन, आम आदमी पार्टी के राघव चड्ढा, सीपीआई के डी राजा, नेशनल कॉन्फ्रेंस के उमर अब्दुल्ला, पीडीपी की महबूबा मुफ्ती और समाजवादी पार्टी के जावेद अली शामिल हुए।
मध्य प्रदेश के ओंकारेश्वर में सनातन धर्म के ध्वजवाहक शंकराचार्य की विशाल प्रतिमा बन कर लगभग तैयार हो गई है। बता दें कि ओंकारेश्वर भगवान शिव के द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से भी एक है। खंडवा जिले में स्थित इस क्षेत्र में मंधाता पर्वत पर शंकराचार्य की ये प्रतिमा तैयार की जा रही है। अष्टधातु से बनी इस प्रतिमा के निर्माण में देश के कई प्रतिभाशाली एवं अनुभवी इंजीनियरों और कलाकारों ने योगदान दिया। सोमवार (18 सितंबर, 2023) को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान इसका लोकार्पण करेंगे।
वहीं 16 सितंबर से ही लोकार्पण कार्यक्रम के लिए धार्मिक आयोजनों का क्रम शुरू हो जाएगा। प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा के अलावा हवन और यज्ञ समेत अन्य धार्मिक कार्य भी किए जाएँगे। बड़ी संख्या में साधु-संत भी पहुँच रहे हैं। केरल में जन्मे शंकराचार्य ने बाल्यावस्था में ही गृह-त्याग कर के ओंकारेश्वर में शरण ली थी। मान्यता है कि वो 4 वर्षों तक यहाँ रहे थे। उनकी इसी स्मृति को सँजोए रखने के लिए मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार ने उनकी 108 फ़ीट ऊँची प्रतिमा यहाँ बनवाई है।
खास बात ये है कि इस प्रतिमा में उनके बाल स्वरूप को ही दिखाया गया है। मध्य प्रदेश के उज्जैन में पहले ही महाकाल कॉरिडोर बन चुका है और श्रद्धालुओं के लिए कई कार्य किए गए हैं। वहीं ओंकारेश्वर में शंकराचार्य की प्रतिमा को ‘Statue Of Oneness’ नाम दिया गया है। इस पूरे क्षेत्र को ‘एकात्म धाम’ के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहाँ पर ‘अद्वैत लोक’ नाम का एक संग्रहालय भी बन रहा है। साथ ही ‘आचार्य शंकर अद्वैत वेदांत संस्थान’ की भी स्थापना की जा रही है।
ओंकारेश्वर में ही शंकराचार्य को गुरु गोविंद भगवत्पाद नाम के गुरु मिले थे। 12 वर्ष की आयु में ही उन्होंने यहाँ से देश भर में हिन्दू धर्म के पुनरुद्धार के लिए प्रस्थान किया था। LNT कंपनी इस मूर्ति का निर्माण कार्य कर रही है। महाराष्ट्र के शोलापुर के प्रसिद्ध मूर्तिकार भगवान राम पुर ने इस मूर्ति को गढ़ा है, वहीं 2018 में चित्रकार वासुदेव कामत ने इसका चित्र तैयार किया था। भाजपा ने तब 2017-18 में ‘एकात्म यात्रा’ भी निकाली थी। 27,000 ग्राम पंचायतों से इसके तहत धातु संग्रहण के लिए अभियान चलाया गया था।
परमपूज्य आदि शंकराचार्य जी की अलौकिक प्रतिमा अपने भव्य स्वरूप में प्रकट होने जा रही है।
ओंकारेश्वर में 'एकात्म धाम' विश्व बंधुत्व एवं एकात्मता के लोकव्यापीकरण की वैश्विक प्रेरणा बनेगा।
‘एकात्म धाम’ में शंकराचार्य से जुड़ी चित्रकथाएँ, लेजर लाइट वॉटर साउंड शो, उनके जीवन पर फिल्म, ‘सृष्टि’ नाम का अद्वैत व्याख्या केंद्र, नर्मदा विहार, अन्नक्षेत्र और शंकर कलाग्राम विकसित किया गया है। एक पारंपरिक गुरुकुल भी यहाँ स्थापित किया जाएगा। इसके साथ ही 36 हेक्टेयर में ‘अद्वैत वन’ भी विकसित किया जा रहा है। 2000 करोड़ रुपए की लागत से इसे बनाया जा रहा है। प्रतिमा के अलावा परियोजना का बाकी कार्य दिसंबर 2024 तक पूरा हो जाएगा।
कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार एक नए विवाद में फँस गई है। इसकी शुरुआत 8 सितंबर 2023 को हुई, जब भाजपा नेता तेजस्वी सूर्या और केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक अखबार में छपे विज्ञापन की कटिंग शेयर की। इस विज्ञापन में कर्नाटक सरकार द्वारा अल्पसंख्यकों के लिए चलाई जा रही योजना के बारे में जानकारी दी गई थी।
इस विज्ञापन को देखकर ये लगता है कि इसे सरकार ने नहीं, बल्कि एआर-रहीम ट्रस्ट नाम के किसी निजी संगठन की ओर से दिया गया था। इसे कर्नाटक अल्पसंख्यक विकास निगम लिमिटेड की ओर से जारी किया गया है। इस विज्ञापन को लेकर ही कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार सवालों के घेरे में आ गई है।
एआर-रहीम ट्रस्ट द्वारा दिया गया विज्ञापन
केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर द्वारा साझा किए गए विज्ञापन में बताया गया है कि कर्नाटक सरकार धार्मिक अल्पसंख्यकों को टैक्सी, ऑटो और मालवाहक वाहन खरीदने के लिए 50 प्रतिशत की सब्सिडी दे रही है। बता दें कि स्वावलंबी सारथी योजना पिछले महीने कर्नाटक सरकार के आवास एवं अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री जमीर अहमद खान ने शुरू की थी।
केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने कहा कि यह योजना विशेष रूप से गैर-हिंदुओं के लिए है। यहाँ तक कि आर्थिक रूप से गरीब हिंदू समुदायों को भी इससे बाहर रखा गया है। मंत्री ने इसे खुलेआम भेदभाव और संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन बताया है।
चंद्रशेखर ने कहा कि इसी पार्टी के नेता विदेश जाकर देश के संविधान के खतरे में होने की बात करते हैं। उन्होंने इसे ‘राज्य प्रायोजित धर्मांतरण प्रलोभन’ कहा। उन्होंने इस योजना को ‘कर्नाटक में राहुल गाँधी की कॉन्ग्रेस द्वारा कुछ समुदायों को रिश्वत देने की बेशर्म नीति और तुष्टिकरण की राजनीति का उदाहरण बताया।
चन्द्रशेखर ने कहा, “सभी कन्नडिगाओं के लिए निर्धारित सार्वजनिक संसाधनों का उपयोग करके एक समुदाय को बेशर्मी से रिश्वत देकर भेदभाव और संविधान की धारा 14 का उल्लंघन किया जा रहा है। धर्मांतरण के लिए राज्य-प्रायोजित प्रलोभन है ये। यह यूपीए/I.N.D.I गठबंधन के वंशवादियों की तुष्टिकरण और भ्रष्ट राजनीति है।”
8 सितंबर को ही AltNews के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर ने राजीव चंद्रशेखर और तेजस्वी सूर्या की पोस्ट का ‘फैक्ट चेक’ करने की कोशिश की। यहाँ ध्यान रखना जरूरी है कि AltNews और मोहम्मद जुबैर ऑफिशियली खबरों के ‘फैक्ट चेक’ के लिए कर्नाटक सरकार के साथ साझेदारी कर रही है। यह जानकारी कर्नाटक सरकार में मंत्री प्रियांक खड़गे दे चुके हैं।
Union Minister @Rajeev_GoI and BJP MP @Tejasvi_Surya are misleading their followers by communalising the welfare schemes. This is ‘Swawalambi Sarathi Scheme’. A similar scheme was available under Karnataka BJP govt too. But both the BJP MPs don't want you to know!
मोहम्मद जुबैर ने राजीव चन्द्रशेखर और तेजस्वी सूर्या के पोस्ट का फैक्ट चेक करने के चक्कर में कुछ दावे भी किए, जिसमें-
1-जुबैर ने दावा किया कि दोनों नेता इस योजना का सांप्रदायिकरण कर रहे हैं और यह योजना एससी/एसटी के लिए भी उपलब्ध है। 2- इस योजना में SC/ST को 75% या अधिकतम 4 लाख तक की सब्सिडी राशि मिल सकती है। 3- अल्पसंख्यक 50% या अधिकतम 3 लाख तक की सब्सिडी राशि के लिए पात्र हैं। 3- भाजपा के तहत भी ऐसी ही योजना थी, इसलिए चंद्रशेखर और सूर्या गलत सूचना फैला रहे थे।
चूँकि जुबैर को अपने हिसाब से तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करने और अपना एजेंडा चलाने की पुरानी आदत है, उसने इस मामले में भी ऐसा ही किया। उसने अपनी बात साबित करने के लिए 2 स्क्रीनशॉट्स शेयर किए। जुबैर ने ‘डिस्ट्रिक्टइंफो‘ वेबसाइट के स्क्रीनशॉट्स को आधिकारिक जानकारी के तौर पर शेयर किया, जबकि वो वेबसाइट निजी है, जिसका सरकार से कोई लेना देना ही नहीं है।
डिस्ट्रिक्ट इंफो वेबसाइट का अबाउट अस सेक्शन, जो ये बताता है कि वेबसाइट थर्ड पार्टी से मिली जानकारियाँ साझा करती है।
जुबैर ने जिस आर्टिकल का इस्तेमाल अपने फैक्ट चेक में किया, वो 19 अगस्त 2023 को पब्लिश हुआ था, कर्नाटक सरकार के सत्ता में आने के ठीक बाद। ये अलग बात है कि उस दिन उस वेबसाइट के एक्स (पूर्व में ट्विटर) हैंडल से एयर फ्रायर और इंडक्शन पर इस्तेमाल होने वाले बर्तनों के विज्ञापन वाले अमेजन के लिंक पोस्ट कर रहा था। उस वेबसाइट के सोशल मीडिया पर महिलाओं के कपड़े और जूतों से जुड़े लिंक भी पोस्ट किए जाते हैं।
डिस्ट्रिक्ट्स इंफो के सोशल मीडिया हैंडल पर अमेजन के सामानों की मार्केटिंग
वैसे, ये वेबसाइट देखने में बिल्कुल साफ है कि वो कोई भरोसेमंद वेबसाइट नहीं है, जिसका इस्तेमाल फैक्ट चेक में किया जाए। हालाँकि जो जानकारी वेबसाइट पर है, वो पूरी तरह से गलत भी नहीं है।
कॉन्ग्रेस सरकार के बजट के अनुसार, वास्तव में इस योजना की घोषणा सरकार ने की थी। हालाँकि महत्वपूर्ण बात ये है कि उक्त वेबसाइट और मोहम्मद जुबैर ने शायद जानबूझकर पूरी बात नहीं रखी और पाठकों को ये पता करने के लिए कि क्या सही है, उन्हीं पर छोड़ दिया।
जुबैर ने इन बातों को पाठकों के विवेक पर छोड़ा
जब कोई व्यक्ति ‘स्वावलंबी सारथी योजना’ के बारे में सर्च करता है, तो वह केएमडी – कर्नाटक अल्पसंख्यक विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर पहुँचता है। इस सरकारी वेबसाइट पर भी इस योजना के बारे में जानकारी दी गई है कि ये सिर्फ अल्पसंख्यकों के लिए है।
कर्नाटक सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर योजना के बारे में जानकारी
योजना का लाभ पाने की शर्तों की जानकारी
वेबसाइट स्पष्ट रूप से कहती है कि इस योजना के लिए आवेदन करने के लिए आवेदक को धार्मिक अल्पसंख्यक समुदाय से संबंधित होना चाहिए। यह योजना अल्पसंख्यक विभाग से जुड़ी है, और चल रही है, जैसा कि “ऑनलाइन आवेदन करें” बटन से साफ पता चला है।
अब, कोई यह तर्क दे सकता है कि चूँकि यह अल्पसंख्यक विभाग की वेबसाइट है, इसलिए यह केवल अल्पसंख्यकों से जुड़ी जानकारी ही देगी। ऐसे में हमने समाज कल्याण विभाग की वेबसाइट को भी देखा और ये जानने की कोशिश की कि क्या ये योजना एससी/एसटी वर्ग के लोगों के लिए भी चल रही है, जैसा कि कर्नाटक सरकार ने अपने बजट में घोषणा की थी?
उस वेबसाइट पर ‘स्वावलंबी सारथी योजना’ नाम की कोई योजना नहीं दिखी और न ही उसके लिए आवेदन करने की कोई जगह मिली। जब ऑपइंडिया ने समाज कल्याण विभाग से बात की तो हमें साफ तौर पर बताया गया है कि इस योजना का लाभ सिर्फ अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को ही मिलेगा। एससी/एसटी समुदाय के लोगों को नहीं।
FIR against Sudhir Chaudhary for asking ‘what about Hindus’ in Karnataka scheme: What happened, Zubair’s misleading claims, Priyank Kharge’s threat and more
हालाँकि, यह सच है कि कर्नाटक सरकार ने अपने बजट में अल्पसंख्यकों और एससी/एसटी समुदाय के लिए इस योजना की घोषणा की थी, लेकिन अभी तक की जानकारी से ऐसा लगता है कि यह योजना अभी तक सिर्फ अल्पसंख्यकों के लिए शुरू की गई है, एससी/एसटी समुदाय के लिए नहीं। यह स्पष्ट है कि अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति समुदाय इस योजना का लाभ तभी प्राप्त कर सकता है, जब इस बारे में सरकार अधिसूचना जारी करे। फिलहाल तो ऐसा कुछ दिख नहीं रहा है।
इस योजना को लेकर आजतक के पत्रकार सुधीर चौधरी ने 12 सितंबर को एक शो किया था। इस शो में उन्होंने अंबेडकर विकास निगम के प्रमुख पी नागेश के हवाले से बताया था कि यह योजना अभी एससी/एसटी समुदाय के लिए लागू नहीं है। हालाँकि इसे इन समुदायों के लिए शुरू करने पर चर्चा चल रही है। उन्होंने पुष्टि की थी कि ये योजना अभी तक एससी/एसटी वर्ग के लोगों के लिए अधिसूचित नहीं की गई है।
जब मोहम्मद जुबैर अमेजन के विज्ञापनों को शेयर करने वाली एक ‘ऐरी-गैरी’ वेबसाइट पर भरोसा कर रहे था, तब भी इस बात की पूरी जानकारी मौजूद थी कि कर्नाटक सरकार ने इस योजना की घोषणा तो अल्पसंख्यकों के साथ ही एससी/एसटी वर्ग के लिए भी की थी। इसे लागू भी कर दिया गया, लेकिन सिर्फ अल्पसंख्यक समुदाय के लिए। एससी/एसटी के लिए इसे अभी तक लागू नहीं किया गया है।
इस बीच एक अन्य ट्वीट में मोहम्मद जुबैर ने एक और भ्रामक दावा किया। जुबैर ने ट्वीट किया, ”बीजेपी सरकार में भी ऐसी ही एक योजना थी। यहाँ अल्पसंख्यक विभाग @DOMGOK के कुछ पुराने ट्वीट हैं, ‘प्रत्येक लाभार्थी को वाहन की कीमत 33% सब्सिडी मिलेगी, जिसमें ऑटो रिक्शा/टैक्सी/माल गाड़ी खरीदने के लिए अधिकतम 2.5 लाख रुपये दिए जाएँगे’।”
जुबैर का ट्वीट
ज़ुबैर ने फिर से चालाकी से सेलेक्टिव जानकारी साझा की, ताकि इस मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट न हो।
हालाँकि, यह भी सच है कि ऐसी ही एक योजना भाजपा सरकार में भी चल रही थी। ये जानकारी कर्नाटक के अल्पसंख्यक विभाग द्वारा 2021-2022 में दी गई थी, जिसमें बताया गया है कि 31 मार्च 2022 तक वाहनों की खरीद के लिए कितनी सब्सिडी दी गई थी। इस रिपोर्ट के अनुसार, अल्पसंख्यक विभाग द्वारा 1,333 वाहनों पर सब्सिडी दी गई थी ।
सरकारी वेबसाइट पर मौजूद जानकारी
हालाँकि, जुबैर द्वारा डाले गए स्क्रीनशॉट भ्रम पैदा करने वाले थे, क्योंकि भाजपा सरकार ने 2022 में इस योजना को होल्ड (रोक) पर रख दिया था।
जुबैर ने जो स्क्रीनशॉट शेयर किए, उनमें से एक कर्नाटक के अल्पसंख्यक मामलों के विभाग का जवाब था। ये जवाब 17 अक्टूबर 2022 को दिया गया था। इसमें विभाग ने लिखा था, “प्रत्येक लाभार्थी को वाहन मूल्य पर 33% सब्सिडी मिलेगी, अधिकतम रु 2.5 लाख रुपए। अगर ऑटो रिक्शा/टैक्सी/माल गाड़ी बैंक लोन पर खरीदा जा रहा है तो उसके लिए बैंक का पत्र भी जमा करना होगा। (1/1)”
कोई भी व्यक्ति ध्यान देगा कि अगर किसी ट्वीट में 1/1 लिखा है, तो इसका मतलब है कि जवाब अभी अधूरा है और वो दूसरे ट्वीट में आ रहा है। कम से कम असली फैक्ट चेकर तो इस बात पर ध्यान देगा ही। चूँकि अगले ट्वीट में पूरा मामला साफ हो जाता, इसलिए जुबैर ने सिर्फ अपने काम का अधूरा ट्वीट ही लगाया।
ट्वीट का दूसरा हिस्सा
मोहम्मद जुबैर ने जिस दूसरे ट्वीट को ‘जानबूझकर’ छोड़ा, उसमें साफ लिखा है कि ये योजना अब बंद हो चुकी है। ये सभी ट्वीट्स अब भी विभाग के सोशल मीडिया हैंडल पर मौजूद हैं।
And Direct Loans for Businesses/Enterprises. Visit https://t.co/p8TE5utXnM for more information. Tackling minorities' slums falls under 11 Municipal Corporations, which are only able to provide basic amenities. (2/2)
— Department of Minority Welfare, Govt of Karnataka (@DOMGOK) December 11, 2022
जुबैर ने दिसंबर 2022 का एक और स्क्रीनशॉट शेयर किया था। ये भी दो हिस्सों में है, लेकिन उसने जानबूझकर पहला हिस्सा ही शेयर किया है।
इस ट्वीट का भी पहला ही हिस्सा जुबैर ने शेयर किया है।
इस ट्वीट में भी साफ लिखा है कि ये योजना लागू की जाएगी। इसका जवाब दिसंबर माह में दिया गया है। इस बात से ये साफ है कि ट्वीट के समय ये योजना बंद थी, चल नहीं रही थी।
अब ये सब कुछ पूरी तरह से साफ है कि किस तरह से जुबैर ने KMDC के जवाबी ट्वीट का महज एक हिस्सा ही शेयर किया, दूसरे को छोड़ दिया (जिसमें साफ साफ लिखा है कि ये योजना उस समय बंद थी)। लोग गुमराह ही रहें, इसलिए उसने एक और स्क्रीनशॉट शेयर कर दिया।
इन सब तथ्यों के आधार पर ये बात साफ है कि जब मई 2023 में कर्नाटक में कॉन्ग्रेस की सरकार आई, तब ये योजना बंद थी। ऐसे में ये कॉन्ग्रेस सरकार की ही योजना है, जिसके बारे में सरकार ने पूरी योजना बनाई और बजट में इसकी घोषणा की। बजट में घोषणा के समय ये कहा गया था कि इस योजना का लाभ एससी/एसटी समुदाय को भी मिलेगा, लेकिन अब तक ये सिर्फ अल्पसंख्यकों के लिए ही चलाई जा रही है।
ऐसे में ये भी संभव है कि कर्नाटक सरकार की अन्य योजनाएँ जो एससी/एसटी/ओबीसी के लिए भी चल रही हैं, उनका भी हश्र ‘स्वावलंबी सारथी योजना’ की तरह ही हुआ हो।
उदाहरण के लिए, कर्नाटक सरकार की एक और योजना है, जिसे ऐरावत योजना कहा जाता है। इस योजना के तहत एससी/एसटी समुदाय के ग्रामीण युवाओं को सब्सिडी वाली गाड़ियाँ पाने की सुविधा देने के लिए ओला और उबेर के साथ पार्टनरशिप की गई है। हालाँकि, ये योजना स्वावलंबी सारथी योजना के बराबर नहीं है, जो सिर्फ अल्पसंख्यकों के लिए थी, बल्कि ये योजना एससी/एसडी समुदाय के ग्रामीण युवाओं के लिए है।
आजतक के सुधीर चौधरी के खिलाफ FIR और जुबैर का फेक न्यूज
जब जुबैर ने भ्रामक जानकारी फैलाना शुरू कर दिया तो प्रियांक खड़गे, जो जुबैर को ‘चीफ’ कहना पसंद करते हैं, ने सुधीर चौधरी को कानूनी परिणाम भुगतने की धमकी दी। इसके बाद उनके के खिलाफ रिपोर्टिंग करने के लिए एफआईआर दर्ज करा दी गई।
बता दें कि सुधीर चौधरी ने एक शो किया था, जिसमें उन्होंने इस योजना के बारे में बताया था कि कैसे इसे हिंदुओं के लिए नहीं बल्कि अल्पसंख्यकों के लिए लागू किया जा रहा है। वीडियो सामने आते ही हिंदू विरोधी बयान देने वाले प्रियांक खड़गे ने ट्वीट किया कि सुधीर गलत सूचना फैला रहे हैं और वह एंकर के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेंगे।
The anchor of @aajtak is deliberately spreading misinformation on Government schemes which was first started by BJP MPs & is being amplified by sections of media.
इन सबके बीच, सुधीर चौधरी ने एक और शो किया, जिसमें उन्होंने ये बातें साफ कीं।
1-बजट में कॉन्ग्रेस सरकार ने घोषणा की थी कि यह योजना अल्पसंख्यकों और एससी/एसटी समुदायों के लिए उपलब्ध होगी
2-अखबार और कॉन्ग्रेस सरकार की अपनी वेबसाइट के विज्ञापन से साबित होता है कि इस योजना के लिए पात्रता की आवश्यकता यह है कि व्यक्ति अल्पसंख्यक समुदाय से संबंधित होना चाहिए।
3-एससी/एसटी समुदाय के लिए योजना की पात्रता अभी तक अधिसूचित नहीं की गई है।
4-इस बात की पुष्टि अंबेडकर विकास निगम के प्रबंध निदेशक ने आजतक से की है।
5-साफ है कि यह योजना सिर्फ अल्पसंख्यक समुदाय के लिए लागू है।
यहाँ ये ध्यान देने लायक बात है कि असल चीजों को अभी तक मोहम्मद जुबैर ने ट्वीट नहीं किया है, जबकि सुधीर चौधरी जब शो कर रहे थे, तब यही जुबैर लगातार ट्वीट पर ट्वीट कर रहा था।
स्व-घोषित फैक्ट चेकर जुबैर ने इन मामले में अपनी पूरी क्षमता के साथ काम नहीं किया। सच्चाई ये है कि उसका हकीकत से कोई लेना-देना नहीं है। इस पूरे मामले में आगे चलकर यह संभव है कि कर्नाटक सरकार अपनी घोषणा पर अमल करते हुए एससी/एसटी वर्ग के लिए भी योजना को अधिसूचित कर दे, लेकिन अभी तथ्य यही है कि ये योजना सिर्फ अल्पसंख्यक समुदाय के लिए लागू है।
साफ है कि इस मामले में सुधीर चौधरी हों या अन्य मीडिया हाउस, उन्होंने कोई फेक न्यूज नहीं फैलाया है। फिर भी कर्नाटक सरकार ने सच्चाई को स्वीकार करने की जगह उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने जैसी कार्रवाई की है।
चूँकि कर्नाटक सरकार की ये योजना अगर एससी/एसटी वर्ग के लिए लागू होती तो वो इसका नोटिफिकेशन सार्वजनिक करते, न कि जुबैर के फर्जी फैक्ट चेक की आड़ में सुधीर चौधरी पर एफआईआर दर्ज करते।
ऐसे में साफ है कि सुधीर चौधरी पर एफआईआर सिर्फ इसलिए की गई है कि अगर कोई सच्चाई बताने का प्रयास करेगा और इससे कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार की असलियत बाहर आएगी, तो वो बच नहीं पाएगा। उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाएगी। उसे प्रताड़ित किया जाएगा।
मूल रूप से यह रिपोर्ट अंग्रेजी में नुपूर जे शर्मा द्वारा लिखी गई है। इसे पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक कर सकते हैं।