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चाहिए था सोने से भरा खजाना, 62 साल के कलीमुद्दीन को बीवी ने बेटे और बेटियों के साथ मिलकर जिंदा जलाया: बिहार के किशनगंज की घटना

बिहार के किशनगंज जिले में 62 साल के कलीमुद्दीन उर्फ कलुआ मुल्ला को परिजनों ने जिंदा जलाकर मार डाला। खजाने के लालच में परिजनों ने ऐसा किया। 14 अगस्त 2023 देर रात बहादुरगंज थाना क्षेत्र के दुलाली गाँव में इस घटना को अंजाम दिया गया। हत्या के बाद बीवी और बच्चे रात भर कलीमुद्दीन के शव के पास ही बैठे रहे। सुबह ग्रामीणों को जब इसकी भनक लगी तो उन्होंने पुलिस को सूचना दी।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार बीवी, बेटे परवेज और बेटियों ने खजाना पाने के लिए जादू-टोना करने के फेर में कलीमुद्दीन की हत्या की। जब घर की बहू ने इसका विरोध किया, तो परिजनों ने उसे एक कमरे में बंद कर दिया। सुबह जब ग्रामीणों को हत्या के बारे में पता चला जो आरोपित अजीब हरकतें करने लगे। वे कह रहे थे कि जिन्नात ने घर में खजाने से भरा घड़ा भेजा है। उसमें सोना-चाँदी भरा पड़ा है।

रिपोर्ट के अनुसार, मामले की गंभीरता को समझते हुए ग्रामीणों ने परिवार के लोगों को रस्सी से बाँध दिया था और घटना की सूचना बहादुरगंज पुलिस को दी। सब-इंस्पेक्टर पुष्प कुमारी ने इसे अंधविश्वास का मामला बताया है। पूछताछ में कलीमुद्दीन के बेटे ने बताया कि सोने और कीमती गहनों से घर भर जाने की लालच में उन्होंने इस घटना को अंजाम दिया। सब इंस्पेक्टर ने कहा कि मृतक के परिवार के सभी सदस्य मानसिक रूप से बीमार दिखाई दे रहे हैं।

वहीं एक अन्य पुलिस अधिकारी का कहना है कि मृतक के परिवार के सदस्य जादू-टोना करने वाले के जाल में फँस गए थे। जादू-टोना करने वाले ने परिवार के लोगों को बताया कि कलीमुद्दीन के पास सोने और कीमती गहनों से भरा एक छिपा खजाना है। इसके बाद कलीमुद्दीन पर परिवार के लोग कथित खजाने के बारे में बताने का दबाव डालने लगे। जब कलीमुद्दीन ने बार-बार खजाने के बारे में जानकारी से मना किया, तो परिवार वाले गुस्से में आ गए। इसके बाद परिजनों ने उसे पुराने कपड़ों में लपेटा और पेट्रोल डालकर आग लगा दी।

‘जामा मस्जिद की सीढ़ियों से जल्द बाहर आएँगे भगवान श्रीकृष्ण’: बागेश्वर बाबा का बड़ा ऐलान, कहा- राम मंदिर की तरह खुली रह जाएँगीं आँखें

बागेश्वर धाम के महंत धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा है कि आगरा स्थित जामा मस्जिद की सीढ़ियों से भगवान श्रीकृष्ण जल्द ही बाहर आएँगे। इससे राम मंदिर की तरह ही लोगों की आँखें खुली रह जाएँगी। उन्होंने यह भी कहा कि काशी विश्वनाथ की तर्ज पर मथुरा में भी कॉरिडोर बनाया जाना चाहिए।

दरअसल, धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर द्वारा आयोजित रुद्राभिषेक कार्यक्रम में शामिल होने मथुरा पहुँचे थे। वहाँ उन्होंने कहा है, “हमारे हिसाब से जिस तरह विश्वनाथ जी के मंदिर का कार्य हुआ है, वैसे ही यहाँ भक्तों के लिए बाँके बिहारी का कार्य अगर हो जाए तो बहुत प्रसन्नता होगी।”

इसके बाद उनसे पूछा गया कि कृष्ण भक्तों को और कितना इंतजार करना पड़ेगा? जामा मस्जिद की सीढ़ियों से भगवान कब आएँगे? इस पर उन्होंने कहा, “बहुत जल्द। हमारे दादा भइया लगे हैं। भगवान महादेव के पार्थिव शिवलिंग का यह अनुष्ठान और अष्टोत्तर सद्पाठ श्रीमद्भागवत का मूल पाठ ब्राह्मणों द्वारा इसलिए ही करवाए जा रहे हैं, ताकि भगवान कन्हैया जल्द से जल्द बाहर निकलकर आएँ और सबकी आँखें राम मंदिर की भाँति खुल जाएँ।”

कृष्ण जन्मभूमि में सहयोग को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा है कि वह पूरा सहयोग करेंगे और सबसे आगे रहेंगे। मथुरा में भगवान के संबंधित साक्ष्यों के सवाल पर उन्होंने कहा, “सब ठाकुर जी की लीला है। समय चक्र है। अब हिंदू जाग रहे हैं। सभी कृष्ण भक्त एकत्रित हो रहे हैं। बृजवासी भी एकत्रित हो रहे हैं। पूज्य ज्येष्ठ भ्राताश्री (देवकीनंदन ठाकुर) के नेतृत्व में सब संतों के आशीर्वाद से बहुत जल्द यह इंतजार खत्म होने वाला है।”

गौरतलब है कि इससे पहले 15 अप्रैल 2023 को देवकीनंदन ठाकुर ने कहा था कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि को मुक्त कराने के लिए बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर के साथ मिलकर राष्ट्रव्यापी आंदोलन चलाया जाएगा। इस आंदोलन में युवाओं की भूमिका अहम होगी। आंदोलन ब्रज भूमि से शुरू होकर आगरा, कानपुर, प्रयागराज होते हुए पूरे देश में पहुँचेगा। इसकी रूप रेखा तैयार कर ली गई है।

उन्होंने कहा था कि श्रीकृष्ण का मंदिर तोड़कर उनकी मूर्तियाँ आगरा की शाही जामा मस्जिद लाई गई थीं। इसके बाद प्रतिमाएँ मस्जिद की सीढ़ियों में चुनवा दी गई थीं। यह जानते हुए भी लोग मौन हैं। कोर्ट व नेताओं से अपील करेंगे कि उन सीढ़ियों को खुदवाकर मूर्तियाँ निकलवा ली जाएँ। उन्होंने कहा था कि इस कार्य में मस्जिद को कोई नुकसान नहीं होगा।

ब्रेन डेड मानव के शरीर में लगाई सुअर की किडनी, महीने भर से कर रहा काम: ट्रांसप्लांट की दुनिया बदलने की जगी उम्मीद

चिकित्सा क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। सुअर की किडनी को इंसान के शरीर में प्रत्यारोपित किया गया था और यह सफलतापूर्वक काम कर रहा है। दरअसल, किडनी ट्रांसप्लांट का यह सफल ऑपरेशन 57 वर्षीय एक ब्रेन डेड व्यक्ति में किया गया है। वहीं, चिकित्सा जगत की इस उपलब्धि से किडनी के मरीजों में उम्मीद की नई किरण दिखी है। 

एनवाईयू लैंगोन हेल्थ (NYU Langone Health ) के सर्जनों ने बुधवार (16 अगस्त 2023) को जानकारी दी कि आनुवंशिक रूप से परिवर्तित सुअर की किडनी ब्रेन डेड व्यक्ति में प्रत्यारोपित की गई थी, जो 32 दिनों तक काम करती रही। इस सफल प्रत्यारोपण के बाद मनुष्यों में जानवरों के अंगों के संभावित प्रत्यारोपण की दिशा में एक प्रगति के रूप में देखा जा रहा है।

वाशिंगटन पोस्ट की खबर के अनुसार, डॉक्टरों ने बताया कि सुअर की किडनी प्रत्यारोपित करने के कुछ मिनट बाद ही मानव शरीर ने उसे स्वीकार कर लिया। जैसा कि आमतौर पर ज़ेनोट्रांसप्लांटेशन (जानवरों से मनुष्य में अंगों का प्रत्यारोपण) में समस्या आती है, वैसी समस्या इस मामले में नहीं आई। चिकित्सकों ने बताया कि सुअर की किडनी ने मूत्र का उत्पादन शुरू कर दिया और विषाक्त पदार्थों को छानने जैसे मानव गुर्दे के कार्यों को अपने हाथ में ले लिया।

हालाँकि, इस प्रत्यारोपण को लेकर मीडिया ने सवाल किया, “क्या यह अंग सचमुच मानव अंग की तरह काम करेगा?” इस सवाल के जवाब में एनवाईयू लैंगोन ट्रांसप्लांट इंस्टीट्यूट के निदेशक डॉक्टर रॉबर्ट मॉन्टगोमरी ने एसोसिएटेड प्रेस को बताया, “अभी तक तो ऐसा ही लग रहा है।”

इसके अलावा बुधवार को ही बर्मिंघम हीरसिंक स्कूल ऑफ मेडिसिन (Birmingham Heersink School of Medicine) में अलबामा विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने एक ब्रेन डेड रोगी के समान मामले का अध्ययन प्रकाशित किया, जिसे इस साल की शुरुआत में दो सुअर की किडनी ट्रांसप्लांट किए गए थे।

इन सुअरों में भी 10 जेनेटिक परिवर्तन किए गए थे। इस मामले में भी मानव शरीर ने सुअर की किडनी को अस्वीकार नहीं किया और 7 दिनों तक किडनी सामान्य तरीके से काम करती रही। इस ट्रांसप्लांटेशन के परिणामों को JAMA सर्जरी पत्रिका में प्रकाशित किया गया था।

हालाँकि, यह ट्रांसप्लांटेशन अभी प्रायोगिक चरण में है लेकिन महीने भर से ज़्यादा समय तक किडनी का सामान्य  तरीके से काम करना एक उम्मीद जगाती है। वहीं, चिकित्सा विज्ञानी भी इस नई उपलब्धि से उत्साहित हैं, क्योंकि किडनी के लिए प्रतीक्षा करते मरीजों को की संख्या पूरी दुनिया में बहुत ज़्यादा है। 

इसको ध्यान में रखते हुए दुनिया भर में यह प्रयोग किए जा रहे हैं कि मानव जीवन को बचाने के लिए जानवरों के अंगों का उपयोग कैसे किया जाए। ऐसे में अनुसंधान के लिए दान किए गए मानव शरीरों पर सफलतापूर्वक प्रयोग एक नई उम्मीद जगाते हैं।

‘तुम इंसान हो या जानवर’: मंदिर के पुजारी से बोला यूनुस, भजन बंद करवाने पहुँचा था; बाद में माँगी माफी

सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें मंदिर का पुजारी एक मुस्लिम व्यक्ति से बहस कर रहा है। बाद में आए एक अन्य वीडियो सामने आया, जिसमें वह पुजारी मंदिर के आगे खड़ा होकर सबसे मामले को खत्म करने की अपील करता हुआ दिखाई दे रहा है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में इस वीडियो को आंध्र प्रदेश के कुरनूल का बताया जा रहा है।

पहले वायरल वीडियो में पुजारी मंदिर के आगे पूजा-पाठ करता दिख रहा है। इस बीच पुजारी को एक व्यक्ति बाहर बुलाता है और तेज आवाज में संगीत बजाने से रोकता है। मंदिर से निकल रही आवाज को आसपास के लिए अशांति बताते हुए वह व्यक्ति इसे बंद करने के लिए कहता है। लाउडस्पीकर को उपद्रव पैदा करने वाला बताते हुए वह शख्स पुजारी से पूछता है कि वह इंसान हैं या जानवर?

इस दौरान भी पुजारी उस व्यक्ति से सभ्य तरीके से पेश आते दिख रहा है और तमीज से बात करने की अपील कर रहा है। इसके बावजूद सामने वाला व्यक्ति पुजारी से बहस करता जा रहा है। बहस कर रहे व्यक्ति ने कैमरा घुमाकर अपनी नवजात बेटी को दिखाया और कहा, “देखो, आसपास बच्चे हैं।”

बाद में उस पुजारी का एक और वीडियो वायरल हुआ, जिसमें वह मंदिर के आगे खड़ा दिख रहा है। इस वीडियो में पुजारी लोगों से ‘जय श्री राम’ से अभिवादन करता दिख रहा है। घटना के बारे में बताते हुए पुजारी ने कहा, “जब मैं श्री श्री शक्तिस्वरूपिणी अम्मा मंदिर में पूजा कर रहा था, तब यूनुस नाम का एक मुस्लिम आया और मुझसे बहस करने लगा। वो मुझसे लाउडस्पीकर पर बज रहे भजन को बंद करने के लिए कहने लगा।”

वीडियो में पुजारी आगे कहता है कि वह इस बात से परेशान हो गया और अपना एक वीडियो बनाकर एक ग्रुप में शेयर कर दिया। यह वीडियो थोड़ी देर में वायरल हो गया। पुजारी ने यह भी बताया कि यूनुस ने बाद में पुलिस में शिकायत दर्ज करवा दी।

दावा है कि यूनुस की शिकायत के बाद मंदिर समिति के बुजुर्ग, बजरंग दल के सदस्य और एबीवीपी के स्थानीय कार्यकर्ता पुजारी से मिलने आए। इन सभी ने यूनुस से भी बात की। पुजारी ने बताया कि बातचीत के बाद यूनुस ने पुजारी से अपने पहले के बर्ताव के लिए माफ़ी माँगी।

पुजारी ने बताया कि यूनुस ने अपनी नाराजगी की वजह नींद न पूरी होना बताया। यूनुस ने पुजारी से ये भी कहा कि उसकी बेटी की भी तबियत खराब थी, जिसकी वजह से उसका मूड ठीक नहीं था। पुजारी ने अपने वीडियो के अंत में हर किसी से मामले को वहीं पर खत्म करने की भी अपील की और ‘जय श्री राम’ कहकर वीडियो का समापन किया।

हिमाचल में भारी बारिश और भूस्खलन से तबाही, पर कॉन्ग्रेसी CM ने ‘बिहारियों’ को बताया दोषी: कहा- राजमिस्त्रियों ने बना डाले फ्लोर पर फ्लोर

हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश की वजह से बाढ़ और भूस्खलन से हालात खराब हैं। मौत के आँकड़े में लगातार इजाफा हो रहा है। मॉनसून शुरू होने के बाद से अब तक इस प्राकृतिक आपदा में लगभग 214 लोग अपनी जान गवाँ चुके हैं। भारी बारिश की वजह से भूस्खलन और बाढ़ से हजारों लोगों के घर तबाह हो गए हैं। वहीं, हजारों लोगों को विस्थापित होना पड़ा है।

राज्य के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के सामने अब गंभीर चुनौती खड़ी हो गई है। इस वक्त हिमाचल बीते 50 सालों में सबसे गंभीर प्राकृतिक आपदा का सामना कर रहा है। सीएम सुक्खू ने खुद कहा कि उनके सामने पहाड़ जैसी चुनौती है और इससे उबरने में उन्हें एक साल तक का वक्त लग सकता है। उन्होंने ‘माइग्रेंट आर्टिटेक्ट’ उर्फ ‘बिहारी राजमिस्त्री’ को लेकर नाराजगी जाहिर की।

उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस को दिए इंटरव्यू में राज्य की इमारतों दोषपूर्ण संरचनात्मक डिजाइन, अंधाधुन निर्माण और बिहार से आए राजमिस्त्री को इन सबके लिए दोषी ठहराया है। इसके साथ ही उन्होंने इशारा कर दिया है कि आने वाले वक्त में राज्य में निर्माण से जुड़े नियमों को सख्त किया जा सकता है।

सीएम सुक्खू ने यह भी कहा कि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को सड़कों को चौड़ा करने के बजाय अधिक सुरंग बनाने की जरूरत है और इसके इंजीनियरों को पहाड़ों को अधिक वैज्ञानिक तरीके से काटने की जरूरत है। सीएम की असली नाराजगी बिहारी राजमिस्त्रियों को लेकर दिखी। हालाँकि, बाद में उन्होंने इस पर अपनी सफाई भी दी।

हिमाचल के सीएम सुक्खू के फेसबुक अकाउंड से

‘बिहारी अर्किटेक्ट्स फ्लोर पर फ्लोर बना डालते हैं’

भारी तबाही को लेकर सीएम सुक्खू ने कहा कि अब राज्य में लोग वैज्ञानिक तरीका अपनाए बिना घर बना रहे हैं। हाल ही में बनाई गई इमारतों में पानी निकास की व्यवस्था बेहद खराब है। यहाँ के लोगों को पता नहीं है कि उनके द्वारा बहाया गया पानी कहाँ जा रहा है। ये कहीं और नहीं, बल्कि पहाड़ों में जा रहा है। इसके कारण ये आसानी से दरक रहे हैं।

उन्होंने कहा कि शिमला डेढ़ शताब्दी से भी अधिक पुराना है और इसका निकासी सिस्टम शानदार है, लेकिन अब नालों पर भी इमारतें बना दी गई हैं। जो इमारतें अब ढह रही हैं, वो स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग के मानकों पर खरी नहीं उतर रही हैं। दरअसल, पहाड़ों की रानी कहलाने वाला शिमला इस मानसून में सबसे प्रभावित इलाकों में से एक है। सोमवार (14 अगस्त) को यहाँ बादल फटने के कारण समर हिल्स इलाके में स्थित शिव बोदी मंदिर बह गया।

सीएम सुक्खू ने आगे कहा, “माइग्रेंट अर्किटेक्ट्स (बाहर से आए राजमिस्त्री) ‘बिहारी’ यहाँ आते हैं और फ्लोर पर फ्लोर बना डालते हैं। हमारे पास स्थानीय राजमिस्त्री नहीं है।” उनके कहने का ये मतलब था कि वहाँ के स्थानीय राजमिस्त्री इस क्षेत्र की प्राकृतिक विशेषताओं को जानते हैं और उसी के मुताबिक इमारतें बनाते हैं, लेकिन बाहर से आए राजमिस्त्री ये सब नहीं जानते हैं।

इसके साथ ही उन्होंने प्रदेश की सड़कों के क्षतिग्रस्त होने के लिए खराब निकासी को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि हमारी सेक्रेटिएट की बिल्डिंग नौ मंजिला है। वहीं समर हिल हिमाचल एडवांस स्टडी यूनिवर्सिटी की बिल्डिंग आठ मंजिला है। जब ये इमारतें बनाई गई थीं, तब टेक्नोलॉजी नहीं थी, लेकिन स्ट्रक्चरिंग थी।

उन्होंने आगे कहा, “हमने कभी नहीं सुना कि इन इमारतों को खतरा है।” इस दौरान उन्होंने एनएचआई के फोरलेन सड़क को लेकर कहा कि यहाँ सुरंगें ही वाहनों का दबाव झेलने के सही और सटीक हैं। ये बनाना महंगा है, लेकिन इस क्षेत्र के लिए फायदेमंद है।

‘बिहारी आर्किटेक्ट’ पर दी सफाई

‘बिहारी आर्किटेक्ट’ वाले अपने बयान पर आखिर सीएम सुक्खू ने अपनी सफाई पेश की। उन्होंने कहा, “मैंने ऐसा कुछ इस तरह से नहीं कहा था। बिहार के लोग भी यहाँ फँसे हुए हैं। मैंने उन्हें हेलिकॉप्टर से सुरक्षित निकलवाया। अभी बिहार के 200 लोग यहाँ फँसे हैं। वे हमारे भाइयों जैसे हैं। ये हमारी स्ट्रक्चल इंजियरिंग की फॉल्ट है। वे तो केवल मजदूर हैं।”

‘उनका आई फ्लू दूर हो रहा है’: दिग्विजय सिंह के बयान पर बोले नरोत्तम मिश्रा- बजरंग दल पर बैन लगाना तो दूर कोई सोच भी नहीं सकता

कॉन्ग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने कहा था कि मध्य प्रदेश में सरकार बनने पर बजरंग दल को बैन नहीं किया जाएगा। इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए राज्य के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा है कि अब कुछ लोगों का आई फ्लू ठीक हो रहा है। साथ ही उन्होंने कहा है कि बजरंग दल पर बैन लगाना तो दूर कोई इस बारे में सोच भी नहीं सकता।

नरोत्तम मिश्रा ने कहा है, “मैं पहले ही कह चुका हूँ कि मध्य प्रदेश प्रतिबंध लगाना तो दूर इसके बारे में कोई सोच भी नहीं सकता। किसी का आई फ्लू दूर हो रहा है। धीरे-धीरे उसे राष्ट्रवादी संगठन में अच्छे लोग नजर आ रहे हैं। पूरा आई फ्लू हट जाएगा तो उन्हें समझ आ जाएगा कि बजरंग दल राष्ट्रवादी लोगों का ही संगठन है। जो अभी कुछ-कुछ पर आए हैं, वह पूरे में आ जाएँगे।”

वहीं एएनआई से हुई बातचीत में नरोत्तम मिश्रा ने अपनी बात दोहराते हुए कहा है, “हमने पहले ही कहा था कोई बैन के विषय में सोच नहीं सकता। कॉन्ग्रेस तो झूठ बोलकर वोट लेती है। कर्नाटक में बैन लगा लिया क्या? लेकिन अच्छा है कि उन्हें हिंदू याद आने लगे। हिंदुओं की ताकत समझ आने लगी तो कोई भागवत करा रहा है। कोई महाकाल की सवारी में जा रहा है। कोई काँवड़ यात्रा कर रहा है। कोई कह रहा है कि अच्छे लोग भी हैं। अभी तो कुछ कह है धीरे-धीरे पूरे कहेंगे। देखते चलिए।”

दरअसल, मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिग्विजय सिंह से मध्य प्रदेश में सरकार बनने पर बजरंग दल को बैन करने को लेकर सवाल पूछा गया था। इस सवाल के जवाब में दिग्विजय सिंह ने कहा था, “बैन नहीं करेंगे। बजरंग दल में कुछ अच्छे लोग भी हो सकते हैं। लेकिन जो गुंडा तत्व है, दंगा-फसाद कराता है। ऐसे किसी भी व्यक्ति को नहीं छोड़ा जाएगा।”

गौरतलब है कि कर्नाटक विधानसभा के अपने चुनावी घोषणा पत्र में कॉन्ग्रेस ने राज्य में सरकार बनने पर बजरंग दल पर बैन लगाने का ऐलान किया था। बाद में पार्टी इससे यह कहते हुए पलट गई थी कि किसी भी राज्य सरकार के पास किसी संगठन पर बैन लगाने का अधिकार नहीं होता है।

पहले शौहर से तलाक, दूसरे के होते हुए सना खान ने की तीसरी शादी: सोशल मीडिया के जरिए पप्पू से मिली, अब तक नहीं मिली लाश

महाराष्ट्र की भाजपा नेता सना उर्फ हिना खान की मध्य प्रदेश के जबलपुर में उनके पति अमित साहू उर्फ पप्पू ने हत्या कर दी थी। हत्या के बाद पप्पू ने लाश हिरन नदी में फेंक दी थी। अब तक उनकी लाश बरामद नहीं हो सकी है। हरदा में एक अज्ञात महिला की लाश मिली थी, लेकिन इसकी शिनाख्त सना के रूप में नहीं हो पाई। यह लाश किसकी है, अभी तक यह भी ज्ञात नहीं हो सका है। सना कुल तीन शादियाँ की थीं। उन्होंने हत्या के आरोपित पप्पू से तीसरी शादी अपने दूसरे पति को तलाक दिए बिना की थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मध्य प्रदेश के हरदा जिले में पुलिस को कुएँ से एक लाश मिली थी। ऐसा अंदेशा था कि यह लाश सना की हो सकती है। ऐसे में 9 अगस्त से फ्रीजर में रखी इस लाश की शिनाख्त कराने के लिए सना के भाई मोहसिन को बुलाया। हालाँकि, मोहसिन ने कहा है कि यह लाश उसकी बहन सना खान की नहीं है। ऐसे में सवाल उठने लगा है कि कुएँ में मिली लाश आखिर किसकी है।

सना खान की मर्डर के मामले में महाराष्ट्र पुलिस की एक टीम मध्य प्रदेश के जबलपुर में आकर पहले से ही जाँच कर रही थी। शव की तलाश में जुटी रेस्क्यू टीम ने हिरन नदी में कई किलोमीटर के एरिया में तलाशी अभियान चलाया था, लेकिन शव नहीं मिलने पर तलाशी अभियान बंद कर दिया। अब फॉरेंसिक टीम अमित साहू के घर, ढाबा, कार आदि की फोरेंसिक जाँच करेगी और सबूत जुटाने की कोशिश करेगी। इस मामले में पुलिस को अभी तक कोई पुख्ता सबूत नहीं मिला है।

सना खान ने की थी 3 शादियाँ

सना खान की हत्या की खबर सामने आने के बाद से उनकी दो शादियों की बात कही जा रही थी। हालाँकि, अब सामने आया है कि सना खान ने तीन शादियाँ की थीं। तीसरी शादी उन्होंने हत्या के आरोपित अमित साहू उर्फ पप्पू से की थी। अमित से शादी करने से पहले उन्होंने अपने शौहर को तलाक भी नहीं दिया था।

दैनिक भास्कर ने नागपुर के मनकापुर थाने के एक अधिकारी के हवाले से कहा है कि सना ने साल 2010 में नागपुर के एक व्यक्ति से निकाह किया था। इससे उन्हें 11 साल का एक बेटा भी है। इसका नाम अल्तमस किंग रखा। हालाँकि, शौहर के साथ उनका रिश्ता लंबा नहीं चला। विवाद के चलते दोनों ने तलाक ले लिया।

इसके बाद साल 2013 में उन्होंने एक नामी डॉक्टर इमरान से निकाह कर लिया। निकाह के बाद सना उर्फ हिना खान का इमरान से भी विवाद होने लगा। इसके चलते इमरान गुजरात शिफ्ट हो गया। फिर बाद में वह नागपुर आकर सना और बेटे के साथ ही रह रहा था।

इसी बीच, कोविड के दौरान सोशल मीडिया के जरिए सना खान की मुलाकात जबलपुर में रहने वाले अमित साहू उर्फ पप्पू से हुई। सना ने पप्पू का भाजपा कनेक्शन देखकर उसकी रिक्वेस्ट एक्सेप्ट की थी। इसके बाद दोनों में बातचीत का दौर शुरू हुआ। फिर पप्पू अपने किसी परिजन का इलाज कराने के लिए नागपुर गया था, जहाँ उसकी सना से मुलाकात भी हुई।

मुलाकात के बाद जल्द ही दोनों में प्यार हो गया। सना ने अपने शौहर इमरान से तलाक लिए बिना ही 24 अप्रैल 2023 को अमित साहू से जबलपुर में कोर्ट मैरिज कर ली। यह पप्पू की दूसरी शादी थी। उसकी पहली पत्नी पुलिस में है। अमित की अवैध गतिविधियों के चलते उसने तलाक ले लिया था।

अमित से शादी के बाद सना गर्भवती हो गई, लेकिन दोनों को संतान नहीं चाहिए था। ऐसे में सहमति से सना ने अबॉर्शन करा लिया। सना के परिजनों का दावा है कि सना ने पप्पू को होटल पार्टनर के तौर पर 50 लाख रुपए दिए थे। वहीं, पुलिस की गिरफ्त में आ चुके पप्पू का दावा है कि सना ने उसे 5 लाख रुपए ही दिए थे।

बीजेपी नेता सना खान 1 अगस्त 2023 को अपनी माँ को बताकर जबलपुर के लिए निकली थीं। परिजनों का दावा है कि वह ढेर सारे बेशकीमती जेवरात पहनकर निकली थीं। 2 अगस्त को सना ने अपने इमरान को फोन कर जबलपुर पहुँचने की सूचना दी।

कहा जा रहा है कि इसी दिन शाम को सना ने इमरान से फोन पर बातचीत करते हुए अपने पति अमित द्वारा मारपीट की बात कही। तब से ही उनका फोन बंद आ रहा था। वहीं, इस मामले की जानकारी इमरान ने उनकी माँ को दे दी थी। सना के परिजनों ने जबलपुर में आकर सना की तलाश शुरू कर दी।

हालाँकि, सना का कुछ पता नहीं चला। इसके बाद परिजनों ने उनकी हत्या की आशंका जताते हुए इस मामले में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने पति पर हत्या का आरोप लगाया। इसके आधार पर जबलपुर और नागपुर पुलिस ने मिलकर सना की खोज शुरू की। मोबाइल के लोकेशन के आधार पर सना खान और अमित की तलाश की जा रही थी।

आखिरकार, 11 अगस्त 2023 को पुलिस की तलाश खत्म हो गई। इस पूरे मामले में जबलपुर और नागपुर पुलिस की संयुक्त कार्रवाई कर मामले का पर्दाफाश कर दिया। पुलिस ने इस मामले में बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि सना खान की हत्या हो गई है और मुख्य आरोपित अमित उर्फ पप्पू व उसके सहयोगी राजेश को गिरफ्तार कर लिया गया है।

पुलिस पूछताछ में अमित ने सना खान की हत्या की बात को कबूल कर लिया है। अमित ने पुलिस को बताया कि सना को उसने पहले अपने मकान में ही डंडा मारकर मौत के घाट उतार दिया था। हत्या के बाद सना की लाश को उसने जबलपुर से तकरीबन 45 किलोमीटर दूर हिरन नदी के पुल से नीचे फेंक दिया। 

1500 साल पहले आया इस्लाम, मुस्लिमों के पुरखे भी हिंदू ही: गुलाम नबी आजाद का Video वायरल, कहा- कश्मीर में 600 साल पहले सभी पंडित थे

जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद का एक वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें वे बता रहे हैं कि भारत के मुस्लिमों के पुरखे हिंदू ही थे। साथ ही 600 साल पहले कश्मीर में मुस्लिमों के नहीं होने का जिक्र कर रहे हैं।

कॉन्ग्रेस से अलग होकर डेमोक्रेटिव प्रोग्रेसिव आजाद पार्टी (DPAP) बनाने वाले इस नेता का यह वीडियो 9 अगस्त 2023 का है। वे जम्मू-कश्मीर के डोडा के चिरल्ला गाँव में एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इसमें मुस्लिमों का अच्छा-खासा जुटान था।

वीडियो में आजाद कह रहे हैं, “मैं संसद में भी यह बात कह चुका हूँ। लेकिन बहुत सारी चीजें आप तक नहीं पहुँचती है। चर्चा के दौरान बीजेपी के एक नेता मुझे बता रहे थे कि कौन बाहर से आया है और किसका इस जमीन से ताल्लुक है। मैंने उनसे कहा कि यह अंदर-बाहर का मसला नहीं है। हमारे हिंदुस्तान में इस्लाम तो वैसे भी 15 सौ साल पहले ही आया है। हिंदू धर्म बहुत पुराना है। जो लोग (मुस्लिम) बाहर से आए होंगे, वो केवल 10-20 होंगे और वो भी उस वक्त मुगलों की फौज में थे। बाकी तो सब यहाँ (भारत) हिंदू से कन्वर्ट हुए मुसलमान हैं।”

‘कश्मीर में 600 साल पहले मुस्लिम नहीं थे’

अपने संबोधन के दौरान आजाद ने यह भी बताया कि 600 साल पहले कश्मीर में कोई मुस्लिम नहीं था। सब कश्मीरी पंडित थे। सब इस्लाम अपनाकर मुस्लिम बने हैं। उन्होंने कहा, “मैं आपसे इस 9 अगस्त की अहमियत को देखकर कहना चाहूंगा कि हमने हिंदू, मुसलमान, राजपूत, ब्राह्मण, दलित, कश्मीरी गुर्जर मिलकर सबने इस घर (भारत) को बनाना है। ये हमारा घर है। यहाँ कोई बाहर से नहीं आया। सब यहीं इसी मिट्टी (भारत) की पैदावार हैं इसी मिट्टी में खत्म होना है।”

आजाद ने कहा, “हमारे हिंदू भाई मरते हैं, वो जलते हैं। उनके भाई उन्हें जलाते हैं। उसके बाद उनको दरिया में डालते हैं। वो दरिया का पानी हम पी जाते हैं। बाद में आगे कौन देखता है कि इसमें लाश जली है। इसे घर ले जाकर लोग पीते हैं। ये पानी खेतों में जाता है, तो आखिर वो हमारे पेट में ही जाता है। हमारा मुसलमान तो मरने के बाद सबसे ज्यादा जगह पकड़ता है वो सबसे ज्यादा जमीन पकड़ता है।” उनके ये कहने पर वहाँ मौजूद लोग ठहाके लगाकर हँस पड़े।

उन्होंने आगे कहा, “वो भी इसी जमीन में जाता है। उसका माँस भी हड्डी भी इसी भारत माता की धरती का हिस्सा बन जाता है। तो कहाँ हिंदू, कहाँ मुसलमान, हिंदू भी गया इसी मिट्टी में और मुसलमान में भी इसी में गया और उस जमीन पर अनाज लगाया वो हम सबने खाया। तो ये सब सियासी झगड़े हैं और मैं हमेशा कहता हूँ कि मजहब का सहारा तो ठीक है आप लीजिए, लेकिन राजनीति में जो मजहब का सहारा लेता है वो कमजोर होता है।”

उन्होंने आगे कहा कि जिसको अपने आप पर विश्वास होगा, भरोसा होगा, वो मजहब का सहारा नहीं लेगा। जो ये कहेगा कि मैं ये करूँगा, वो करूँगा, वो कमजोर है। उसे पहले और बाद में भी कुछ करना नहीं है। वो बस कहेगा मैं हिंदू हूँ मुझे वोट दे दो, मैं मुसलमान हूँ मुझे वोट दे दो। अरे हिंदू को वोट से क्या मतलब भाई, सड़क बनानी है, स्कूल बनाने हैं, नौकरी देनी है। मुसलमान का एमएलए और मंत्री बनने से क्या लेना-देना। काबिल है तो कर सकेगा, नहीं तो नहीं, इसके लिए इस्लाम को क्यों बर्बाद करते हो? अपने धर्म को क्यों बदनाम करते हो? जुल्म क्यों करते हो? नफरत क्यों बाँटते हो?

उन्होंने कहा कि मेरा तो ये पैगाम है कि धर्म हम सबका अपनी जगह हैं। हमारी बहनें, साथी नौजवान पूजा -पाठ करें। मुसलमान भाई दुआएँ करें, रोजे रखें इबादत करें, उसमें कोई मना नहीं हैं, लेकिन राजनीति में आएँ तो न धर्म के आधार पर वोट माँगे। न जीत जाने पर धर्म के नाम पर इंसाफ करें।

‘आज सभी हिन्दुओं की गदर बनाएँगे’: गदर 2 की चर्चा कर रहे अमित गुप्ता पर हमला, तौसीफ और युसूफ का एलान- मोहल्ले में इस फिल्म की बात नहीं होगी

उत्तर प्रदेश के बदायूँ जिले में सोमवार (14 अगस्त 2023) को हाल ही में रिलीज हुई बॉलीवुड की फिल्म गदर-2 के बारे में बात करने पर एक युवक पर हमला कर दिया गया। पीड़ित अमित गुप्ता ने मारपीट का आरोप तौफीक और युसूफ पर लगाया है। घटना के दौरान आसपास के लोगों द्वारा बीच-बचाव करने पर हमलावर अमित को धमकाते हुए भाग गए। पुलिस ने दोनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है।

मामला बदायूँ जिले के थानाक्षेत्र मूसाझाग का है। गाँव मनिकापुर कौर के रहने वाले अमित गुप्ता ने 15 अगस्त 2023 को थाने में मारपीट की शिकायत दी। शिकायत में उन्होंने बताया कि एक दिन पहले 14 अगस्त को वो अपने घर के पास खड़े होकर गदर 2 फिल्म के बारे में बात कर रहे थे। अचानक तौफीक नाम का व्यक्ति इससे नाराज होकर उन्हें गालियाँ देने लगा। जब अमित ने गाली देने का विरोध किया तो तौफीक ने अपने भाई युसूफ को बुला लिया। इसके बाद दोनों मिलकर अमित को पीटने लगे।

ऑपइंडिया के पास मौजूद FIR की कॉपी के अनुसार, मारपीट देखकर आसपास के लोग घटनास्थल की तरफ दौड़े। लोगों को आता देखकर तौसीफ और युसूफ मौके से भाग निकले। जाते-जाते उन्होंने अमित को गालियाँ और जान से मारने की धमकी दी। अमित की पिटाई का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

वीडियो में भीड़ दिख रही है, जिसमें महिलाएँ भी शामिल हैं। वीडियो में दिख रहा है कि कुछ लोग दोनों पक्षों को अलग करने का प्रयास कर रहे हैं। पुलिस ने तौफीक और युसूफ पर IPC की धारा 323, 504 और 506 के तहत कार्रवाई की है। पुलिस का कहना है कि मामले में आगे की जाँच और कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

सभी हिंदुओं की गदर बनाता हूँ

ऑपइंडिया ने इस मामले में पीड़ित अमित के भाई बंटी गुप्ता से बात की। बंटी ने बताया कि हमलावरों की संख्या 8 से 10 के बीच थी, लेकिन पुलिस ने तहरीर बदलवाकर सिर्फ तौसीफ और युसूफ पर कार्रवाई की। बंटी ने बताया कि सभी आरोपित छूट चुके हैं।

घटना के दिन का जिक्र करते हुए बंटी ने कहा कि उनका भाई अमित गुप्ता फिल्म गदर-2 देखकर आया था और पड़ोसियों से इसकी चर्चा कर रहा था। आरोप है कि इस दौरान तौसीफ उधर से गुजरा और उसने कहा कि इस मोहल्ले में गदर फिल्म की चर्चा नहीं होगी।

बंटी ने आगे बताया कि जब उसके भाई ने इसका विरोध किया, तब तौसीफ उसे मारने लगा। हालाँकि, कुछ लोगों द्वारा बीच-बचाव करने के बाद मामला वहीं खत्म हो गया। बंटी ने आगे बताया, “थोड़ी देर बाद तौसीफ अपने साथ 8-10 लोगों की भीड़ लाया, जिसमें नवाब आदि थे। इन सभी ने कहा कि आज हिन्दुओं की गदर बनाएँगे। सभी हमलावरों ने हमारे भाई को घर में घुस कर मारा।” बंटी गुप्ता ने अपने गाँव में मुस्लिमों की अच्छी तादाद बताते हुए पुलिस की कार्रवाई को असंतोषजनक बताया।

बताते चलें कि इससे पहले इस फिल्म को लेकर उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में भी मारपीट हुई थी। यहाँ लोगों ने सिनेमाघरों के पर्दे फाड़ दिए थे। अब बदायूँ से यह मामला सामने आया है।

‘जहाँ भगवान राम ने किया विश्राम, वहाँ अब हरे झंडे लहरा रहे’: बोले योगी के मंत्री- निषादराज किले से बाबरी की तरह हटाई जाए मस्जिद

उत्तर प्रदेश के मत्स्यपालन मंत्री डॉ. संजय निषाद ने फिर से श्रृंगवेरपुर धाम के निषादराज किले में बनाई गई मस्जिद को हटाने की माँग की है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार ​गोरखपुर में 16 अगस्त को निषाद पार्टी के स्थापना दिवस समारोह के दौरान उन्होंने यह माँग दोहराई। डॉ. संजय निषाद ही इस पार्टी के अध्यक्ष हैं। समारोह में एनडीए के घटक दलों के नेता भी मौजूद थे।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार डॉ. संजय निषाद ने कहा कि निषादराज किले में भगवान श्रीराम ने रात्रि विश्राम किया था, लेकिन वहाँ मस्जिद बना दी गई है। अब उस जगह पर हरे झंडा लहरा रहे हैं। इस मस्जिद को बाबरी की तरह ही हटाकर किले का निर्माण करवाया जाना चाहिए। उन्होंने जब यह बात कही तब मंच पर यूपी के दोनों उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक भी मौजूद थे।

निषाद पार्टी के मुखिया ने कहा है कि निषादराज का किला हासिल करने के लिए वे लोकतांत्रिक तरीके से कुछ भी करने को तैयार हैं। चाहे मुस्लिमों से मुकदमा लड़ना पड़े या उनसे अपील करनी पड़े। उन्होंने कहा कि निषादराज का किला एक विरासत है। यह विरासत निषाद समाज को सौंपकर वहाँ एक किला बनवाया जाए। संजय निषाद ने कहा है कि जब तक श्रृंगवेरपुर में निषादराज के किले पर ‘जय निषादराज’ का झंडा था और अयोध्या में श्रीराम का झंडा था, तब तक सुख का राज था। यह किला 300 मीटर से अधिक बड़ा था। प्रधानमंत्री भी वहाँ जा चुके हैं। लेकिन अब वहाँ पर चोरी से एक मस्जिद बना दी गई है।

इससे पहले संजय निषाद ने जून 2023 में भी इस मस्जिद का मुद्दा उठाया था। तब उन्होंने कहा था कि यदि मस्जिद नहीं हटाई गई तो उसे मार्च 2024 तक ढाह दिया जाएगा। ‘NISHAD Party’ के मुखिया ने कहा था, “जब इंदिरा गाँधी ने वहाँ खुदाई कराई थी, उस समय तो वहाँ मस्जिद थी ही नहीं। यानी, बाद में इस किले के ऊपर मस्जिद बना दिया गया। फिर धीरे-धीरे बढ़ कर इस मस्जिद को एक एकड़ में फैला लिया गया। निषादराज तो मुस्लिम थे ही नहीं, फिर वहाँ मस्जिद कैसे बन गई? जब हमारा पुरातत्व विभाग कह चुका है कि ये निषादराज की संपत्ति है, फिर मुस्लिमों ने यहाँ मस्जिद कैसे बना ली?”