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‘कॉन्ग्रेस का नाश कर दिया सुरजेवाला ने’: हरियाणा में कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं की भीड़ ने साथी को ही पीटा, ‘मोहब्बत की दुकान’ का लात-घूँसों वाला वीडियो

हरियाणा में कॉन्ग्रेस पार्टी की आंतरिक कलह खुल कर सामने आई है। यहाँ 2 हिस्सों में बँटी पार्टी को एकजुट करने गए कॉन्ग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला को ही भारी विरोध का सामना करना पड़ा है। मीटिंग में मौजूद एक व्यक्ति ने माइक का तार खींच कर सुरजेवाला पर पार्टी को 2 धड़ों में बाँटने का आरोप लगाया। बाद में सभा में मौजूद कॉन्ग्रेसियों ने उस व्यक्ति की लात-घूँसों से पिटाई की। घटना रविवार (23 जुलाई, 2023) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रविवार को कॉन्ग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला पार्टी कार्यकर्ताओं को एकजुटता का संदेश देने के लिए हरियाणा के जींद गए थे। यहाँ सफीदों रोड स्थित श्याम गार्डन में एक रैली का आयोजन हुआ था। मुख्य वक्ता के तौर पर रणदीप सुरजेवाला ने मंच से भाषण देना शुरू किया। थोड़ी ही देर में एक व्यक्ति भीड़ से खड़ा हुआ। उसने जोर-जोर से नारे लगाते हुए कहा, “कॉन्ग्रेस का नाश कर दिया सुरजेवाला ने” और माइक का तार खींच लिया। इस हरकत से अचानक ही रैली में अफरातफरी मच गई।

थोड़े समय बाद रैली के अन्य कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने माइक का तार खींचने वाले व्यक्ति को पकड़ कर पीटना शुरू कर दिया। भीड़ बना कर विरोध कर रहे व्यक्ति को मंच से दूर ले जाने का प्रयास किया गया। हालाँकि, पिटाई के बावजूद भी विरोध कर रहे व्यक्ति ने सुरजेवाला के खिलाफ नारा लगाना जारी रखा। इस पूरी घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

जिस व्यक्ति को पीटा गया है उसका नाम सज्जन सिंह रेढू बताया जा रहा है। वह गाँव ईगराह का रहने वाला है। सज्जन सिंह ने खुद को किसी नेता के बजाय सिर्फ कॉन्ग्रेस पार्टी का सिपाही बताया है। थाना प्रभारी सिविल लाइन्स दीवान सिंह के मुताबिक, कोई शिकायत मिलने के बाद उस पर जाँच और जरूरी कार्रवाई की जाएगी। बताते चलें कि कुछ ही समय पहले राहुल गाँधी ने ‘मोहब्बत की दुकान’ खोलने का नारा देते हुए पूरे देश की परिक्रमा की थी। जबकि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे पी नड्डा ने उन्हें नफरत का मेगा मॉल चलाने वाला बताया था।

HAL के शेयरों के भाव में 5 गुना उछाल, ₹1.30 ट्रिलियन को पार कर गया मार्केट कैप: राहुल गाँधी को पसंद नहीं आएँगे आँकड़े, कहा था – मोदी सरकार ने तबाह कर दिया

कॉन्ग्रेस पार्टी के अध्यक्ष रहे राहुल गाँधी अक्सर भारत और भारतीय संस्थाओं को बदनाम करने के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने कई बार ‘हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL)’ की भी जम कर आलोचना की है। साथ ही इसके खत्म होने की भविष्यवाणी करते हुए उन्होंने इसके लिए मोदी सरकार को जिम्मेदार तक ठहरा दिया था। जबकि सच्चाई ये है कि HAL के शेयरों में पिछले 5 वर्षों से भारी उछाल जारी है और कंपनी की मार्किट वैल्यू भी लगातार बढ़ती ही चली जा रही है।

केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं टेक्नोलॉजी मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने भी पिछले 5 वर्षों में HAL के शेयरों के भाव का चार्ट शेयर किया है। 27 जुलाई, 2018 को HAL के शेयरों के भाव 789.30 रुपए थे। वहीं HAL के शेयरों के ताज़ा भाव सोमवार (24 जुलाई, 2023) को खबर लिखे जाने तक 3908 रुपए पर ट्रेंड हो रहे थे। इस तरह से 5 वर्षों में HAL के शेयरों में 4.95 गुना की उछाल आई है। खास बात ये है कि शेयरों के भाव बढ़ने में निरंतरता बनी हुई है।

अगर कंपनी के मार्किट कैप की बात करें तो ये भारतीय रुपए में 1.31 ट्रिलियन पहुँच गया है। इसके अलावा कंपनी के स्वदेशी तकनीक वाले फाइटर एयरक्राफ्ट्स और मिसाइलों का निर्माण भी कर रही है। विदेशी कंपनियों के साथ डील भी साइन हो रहे हैं। पिछले ही महीने अमेरिकी कंपनी ‘GE एरोनॉटिक्स’ और HAL ने F414 इंजन के लिए डील किया। 716 मिलियन डॉलर (5868.58 करोड़ रुपए) के इस डील के बाद भारत में उच्च तकनीकी क्षमता वाली इंजनों का निर्माण होगा।

अब चलते हैं जनवरी 2019 में। राहुल गाँधी ने तब बयान देते हुए कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने ‘सूट-बूट वाले दोस्तों’ के लिए HAL को कमजोर कर दिया है। ये अलग बात है कि विदेश में भारत विरोधी ज़हर उगलते हुए राहुल गाँधी खुद सूट-बूट में नजर आते हैं। राहुल गाँधी ने यहाँ तक दावा कर दिया था कि HAL के पास कर्मचारियों को वेतन तक देने के लिए पैसे नहीं हैं। तब कॉन्ग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला समेत अन्य नेताओं ने भी उनके इस बयान को आगे बढ़ाया था।

उससे पहले अक्टूबर 2018 में राहुल गाँधी HAL के कर्मचारियों से मुलाकात करने पहुँच गए थे और कहा था कि ‘हमलोग’ कंपनी के मौजूदा और पूर्व स्टाफ का ध्यान रखेंगे। उन्होंने दावा किया था कि कंपनी को तबाह किया जा रहा है। ट्रेड यूनियनों के साथ मिल कर उन्होंने विरोध प्रदर्शन में भी हिस्सा लिया था और HAL को नुकसान पहुँचा कर अनिल अंबानी को फायदा पहुँचाए जाने का आरोप लगाया था। राहुल गाँधी को अब HAL की सफलता का आँकड़े शायद ही पसंद आएँ।

सावन का पवित्र सोमवार और ज्ञानवापी में ASI की टीम ने शुरू किया सर्वे… भागा मुस्लिम पक्ष, पूरे वाराणसी में हाई अलर्ट

अदालत के आदेश पर भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण (ASI) की 24 सदस्यीय टीम वाराणसी में ज्ञानवापी का सर्वेक्षण करने करने पहुँच गई है। प्रशासन शहर में हाई अलर्ट पर है और सुरक्षा के इंतजाम चाक-चौबंद हैं। जहाँ हिन्दू पक्ष ने सोमवार (24 जुलाई 2023) से हो रहे इस सर्वे में सहयोग का भरोसा दिया है तो वहीं मुस्लिम पक्ष ने सर्वे की तारीख आगे बढ़ाने की माँग की है। शुक्रवार (21 जुलाई 2023) को जिला जज की अदालत ने परिसर ने वैज्ञानिक सर्वेक्षण के आदेश दिए थे।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ASI की टीम वाराणसी में रविवार को ही पहुँच चुकी थी। वाराणसी के जिला प्रशासन ने इसी दिन हिन्दू और मुस्लिम दोनों पक्षों आमने-सामने बिठा कर अगले दिन शुरू हो रहे सर्वे के बारे में जानकारी दे दी थी। हिन्दू पक्ष हो रहे इस सर्वे को अपनी जीत बता रहा है। हिन्दू पक्ष की वादिनी मंजू व्यास, रेखा पाठक, सीता साहू और लक्ष्मी देवी ने इस समय को कभी न भूलने और सावन माह में बाबा की कृपा बताया।

इनके वकील सुभाष नंदन चतुर्वेदी ने पूरे सर्वे में मौके पर मौजूद रहने की जानकारी दी। वायरल हो रह वीडियो में ASI की टीम को ज्ञानवापी परिसर में भारी सुरक्षा के बीच प्रवेश करते देखा जा सकता है। इनके साथ हिन्दू याचिकाकर्ता और उनके वकील भी हैं।

फिलहाल सर्वे शुरू हो चुका है। मुस्लिम पक्ष ने इस सर्वे में न शामिल होने का फैसला किया है। इस मामले की सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई का हवाला देते हुए मुस्लिम पक्ष ने सर्वे की तिथि आगे बढ़ाने की माँग की है। बताते चलें कि 21 जुलाई को वाराणसी के जिला जज ने ज्ञानवापी के वैज्ञानिक सर्वेक्षण का आदेश दिया था। यह आदेश हिन्दू पक्ष द्वारा दायर याचिका पर दिया गया है। आदेश के मुताबिक वजूखाना छोड़ कर बाकी स्थानों का सर्वे किया जाएगा।

मुस्लिम पक्ष की तरफ से पैरवी कर रही अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी ने जिला जज की कोर्ट में भी परिसर के वैज्ञानिक सर्वेक्षण की माँग का विरोध किया था।

सैकड़ों लड़कियों के 5500 पॉर्न वीडियो, ड्रग्स-सेक्स पार्टियाँ… इस्लामिया यूनिवर्सिटी की छात्राओं-महिला कर्मचारियों का इस्तेमाल कर रहा था गिरोह

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के बहावलपुर स्थित इस्लामिया यूनिवर्सिटी की सैकड़ों छात्राओं के 5500 पॉर्न वीडियो सामने आए हैं, जिसके बाद इलाके में बवाल खड़ा हो गया है। पंजाब प्रांत के कार्यवाहक मुख्यमंत्री सैयद मोहसिन रज़ा नकवी ने इसका संज्ञान लिया है और पुलिस इस पॉर्न वीडियो स्कैंडल को दबाने में जुट गई है। यूनिवर्सिटी के डायरेक्टर ऑफ फाइनेंस डॉ अबुज़र, चीफ सिक्योरिटी ऑफिसर सैयद एजाज शाह और ट्रांसपोर्ट ऑफिसर अल्ताफ को गिरफ्तार किया गया है।

हालाँकि, संस्थान के प्रशासन का कहना है कि ये सब यूनिवर्सिटी के खिलाफ साजिश के तहत किया जा रहा है। एजाज शाह के पास से न सिर्फ सैकड़ों लड़कियों के अश्लील वीडियो मिले हैं, बल्कि 8 गम ‘आइस ड्रग’ भी बरामद किया गया है। बताया जा रहा है कि यूनिवर्सिटी में 113 ऐसे छात्र-छात्राएँ हैं, जो ड्रग की आदी हो चुके हैं। पुलिस का कहना है कि उनका निशाना यूनिवर्सिटी नहीं है, बल्कि ड्रग्स तस्करों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।

एजाज शाह पिछले 7 वर्षों से इस पद पर है। बताया जा रहा है कि शराब पीने के बाद वो कार में एक लड़की को लेकर जा रहा था, लेकिन पुलिस को देखते ही उसने रॉन्ग साइड में गाड़ी लेकर भागना शुरू कर दिया। पुलिस ने जाँच की तो पाया कि उसकी कार से कई ड्रग्स बरामद हुए। पूछताछ में पता चला कि वो यूनिवर्सिटी की लड़की को उसके घर छोड़ने जा रहा था। पुलिस ने लड़की के अभिभावकों को बुला कर उसे सौंप दिया।

एजाज शाह के 2 फोन से 5500 पॉर्न वीडियो मिले हैं, जो यूनिवर्सिटी की लड़कियों के ही हैं। मोबाइल फोनों को जब्त कर लिया गया है। खुलासा हुआ है कि लड़कियों को मार्क्स देने के बदले उनसे नंगी होकर वीडियो बनाने और उसे भेजने के लिए कहा जाता है। यूनिवर्सिटी में किसी पद पर भर्ती के लिए भी ऐसा किया जाता था। पुलिस का कहना है कि शिक्षकों का एक पूरा समूह ड्रग्स की खरीद-बिक्री और लड़कियों के यौन उत्पीड़न में शामिल था।

इतना ही नहीं, यूनिवर्सिटी की छात्राओं को डांस और सेक्स पार्टी का हिस्सा बनने के लिए भी मजबूर किया जाता था। बड़ी मात्रा में चरस भी बरामद हुआ है। कैम्पस के भीतर ही छात्राओं और कॉलेज की महिला कर्मचारियों के साथ अश्लील पार्टियाँ होती थीं। इस मामले की जाँच के लिए एक उच्च-स्तरीय समिति बनाई गई है। साउथ पंजाब का शिक्षा विभाग इसकी जाँच करेगा। 3 दिन में जाँच रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है।

‘दुःखद खबर, नहीं रहे वृन्दावन वाले संत प्रेमानंद जी महाराज’: सोशल मीडिया पर आग की तरह फैलने लगी खबर, जान लीजिए क्या है वास्तविकता

सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने शेयर करना शुरू कर दिया कि वृन्दावन वाले प्रेमानंद महाराज का निधन हो गया है। बता दें कि संत श्री हित प्रेमानंद गोविन्द शरण जी महाराज वृन्दावन के एक लोकप्रिय संत हैं, जिनके वीडियो YouTube से लेकर अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी वायरल होते हैं। उनकी दोनों किडनियों में समस्या है, जिस कारण उन्हें नियमित डायलिसिस की ज़रूरत पड़ती है। अब कुछ लोग उनके निधन की बात कर रहे हैं।

वृन्दावन वाले प्रेमानंद महाराज के निधन की अफवाह

‘सत्यम सिंह कनौजिया’ नामक ट्विटर हैंडल ने लिखा, “बेहद ही दुःखद खबर हम सब के लिए। पूजनीय प्रेमानंद जी महाराज ने आज दुनिया को अलविदा कह दिया। परमात्मा उनकी पुण्य आत्मा को चरणों में स्थान दे। ॐ शांति! शत शत नमन।”

इसी तरह खुद को पत्रकार बताने वाले सुशील त्यागी ने भी ऐसा ही दावा किया:

कृष्ण राज नामक व्यक्ति ने भी अपने ट्विटर हैंडल पर तस्वीर शेयर करते हुए संत प्रेमानंद महाराज के निधन की बात कही।

सिर्फ ट्विटर ही नहीं, बल्कि फेसबुक और इंस्टाग्राम पर भी ये अफवाह आग की तरह फैलने लगी। चूँकि संत प्रेमानंद महाराज के वीडियो लाखों लोग देखते हैं, इसीलिए अधिकतर भक्त दुःखी हो गए थे। वहीं कइयों ने बात मानते हुए श्रद्धांजलि अर्पित करनी शुरू कर दी।

वृन्दावन वाले प्रेमानंद महाराज के निधन वाले पोस्ट्स की सचाई

इस अफवाह के उड़ने के बाद वृन्दावन स्थित ‘श्री हित राधा केलि कुँज परिकर’ आश्रम ने बयान जारी कर के स्पष्ट किया है कि पूज्य महाराज जी पूर्णतः स्वस्थ हैं। आश्रम ने अपील की है कि आप सब एकदम निश्चिंत रहें और अफवाहों पर ध्यान न दें। साथ ही उनके बारे में कोई भी जानकारी आश्रम के आधिकारिक मीडिया प्लेटफॉर्म से ही लेने की सलाह दी गई है, अन्य स्रोतों की जानकारियों पर ध्यान न देने के लिए कहा गया है।

YouTube पर संत प्रेमानंद महाराज के चैनल ‘भजन मार्ग’ पर देखा जा सकता है कि उन्होंने रविवार (23 जुलाई, 2023) को भी भक्तों के साथ बातचीत की है और अपने प्रवचन से उन्हें अनुग्रहित किया है। इतना ही नहीं, वो उस दिन शाम को माँ राधा, जिन्हें वो लाड़ली जी कहते हैं, उनकी संध्या आरती में भी वो उपस्थित रहे। बाढ़ के कारण वो परिक्रमा पर नहीं निकल रहे हैं। अफवाह फैलने का एक ये कारण भी हो सकता है।

हमने कुछ भक्तों से भी बातचीत की, जिन्होंने बताया कि आश्रम में श्रद्धालुओं की भीड़ लगी हुई है और बाबा जी भी वहीं उपस्थित हैं। वृन्दावन पहुँचे लोगों ने भी आश्रम में पता किया तो निधन वाली खबर का खंडन किया गया।

किसी भी वक्त गिरफ्तार हो सकते हैं भोजपुरी अभिनेता खेसारी लाल यादव! पत्नी के नाम पर जमीन खरीद में गड़बड़ी, बार-बार डेट देने के बावजूद नहीं हुए पेश

भोजपुरी एक्टर खेसारी लाल यादव पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है। चेक बाउंस मामले में छपरा की एक कोर्ट ने उनके खिलाफ गैर-जमानती वॉरंट जारी किया है। आरोप है कि खेसारी लाल यादव ने अपनी पत्नी चंदा देवी के नाम जमीन खरीदी थी। इसके भुगतान के लिए उन्होंने चेक दिया था, जो कि बाउंस हो गया था। इस मामले में खेसारी अंतरिम जमानत पर थे।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मामले की सुनवाई करते हुए छपरा के न्यायिक दंडाधिकारी प्रियांशु शर्मा ने शत्रुघ्न कुमार उर्फ खेसारी लाल यादव के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया है। चेक बाउंस के इस मामले में खेसारी ने अंतरिम जमानत ले ली थी। लेकिन सुनवाई की डेट जारी होने के बाद भी वह कोर्ट नहीं आ रहे थे। ऐसे में कोर्ट ने खेसारी की अंतरिम जमानत भी रद्द कर दी।

4 साल पुराना है मामला

रसूलपुर थाना क्षेत्र के असहनी गाँव में खेसारी लाल यादव ने अपनी पत्नी चंदा देवी के नाम से मृत्युंजय नाथ पांडे से जमीन खरीदी थी। जमीन का यह सौदा 22 लाख 7 हजार रुपए में तय हुआ था। इसके बाद 4 जून 2019 को जमीन की रजिस्ट्री हुई थी। इस जमीन की कीमत के रूप में खेसारी ने मृत्युंजय को 18 लाख रुपए का चेक दिया था। यह चेक उन्होंने 20 जून 2019 को अपने खाते में जमा किया था। हालाँकि, 4 दिन बाद ही यानी 24 जून को बैंक ने चेक वापस कर दिया। इसके बाद 27 जून को चेक बाउंस हो गया।

इस मामले में मृत्युंजय का कहना है कि उन्होंने खेसारी लाल यादव से बात की थी। लेकिन विवाद बढ़ने की स्थिति में कानून का सहारा लेते हुए 16 अगस्त, 2019 को FIR दर्ज कराई थी। इस मामले की जाँच करते हुए पुलिस ने 22 अगस्त, 2020 को चार्जशीट दायर की। इसमें खेसारी लाल पर धारा 406, 138 NI एक्ट के तहत आरोप लगाए गए थे। चार्जशीट के आधार पर कोर्ट ने 22 जनवरी, 2021 को खेसारी लाल यादव के खिलाफ समन जारी किया था। इसके बाद 25 फरवरी 2021 को जमानती वारंट जारी किया। 

हालाँकि, कोर्ट की डेट देने के बाद भी पेश न होने पर दिसंबर 2021 में उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी हुआ था। लेकिन तब खेसारी ने कोर्ट में पेश होकर 21 जनवरी, 2022 को जमानत ले ली थी। इसके बाद से वह कोर्ट में पेश नहीं हो रहे हैं। ऐसे में कोर्ट ने उनकी जमानत रद्द करते हुए गैर-जमानती वॉरंट जारी किया है। ऐसे में खेसारी लाल यादव की गिरफ्तारी के कयास लगाए जा रहे हैं।

‘अकेले में आओ, वरना फेल कर दूँगा’: लड़कियों का यौन शोषण करता था शिक्षक नफीस मोहम्मद, मुस्लिम बन जाने का भी बनाता था दबाव

उत्तराखंड के उधमसिंह नगर जिले में नफीस अहमद नामक शिक्षक पर स्कूल की जनजातीय छात्राओं के साथ छेड़छाड़ का आरोप लगा है। आरोपित शिक्षक के खिलाफ कार्रवाई न होने से नाराज परिजनों ने स्कूल के बाहर इकट्ठा होकर प्रदर्शन किया। बताया जा रहा है कि आरोपित शिक्षक पर दो महीने पहले भी छेड़छाड़ का आरोप लगा था। लेकिन तब प्रिसिंपल ने कार्रवाई करने की बजाए पीड़ित पक्ष पर दबाव बनाकर समझौता करा दिया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मामला उधमसिंह नगर जिले के खटीमा में स्थित राजकीय इंटर कॉलेज झनकट का है। यहाँ कई छात्राओं ने इंग्लिश टीचर नफीस मोहम्मद पर छेड़छाड़ का आरोप लगाया है। छात्राओं के आरोप के बाद उनके परिजनों ने प्रिसिंपल से मुलाकात कर आरोपित नफीस के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कहा था। हालाँकि इसके बाद भी प्रिसिंपल ने किसी प्रकार की कोई कार्रवाई नहीं की।

इससे गुस्साए परिजन और शिक्षक-अभिभावक संघ के सदस्य स्कूल पहुँचे। छात्राओं के परिजनों का आरोप है कि नफीस मोहम्मद आए दिन उनकी बेटियों से छेड़छाड़ करता था। लेकिन इसके बाद भी उसके खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई। स्कूल का घेराव करते हुए छात्राओं के परिजनों ने स्कूल में ताला जड़ दिया। हंगामा बढ़ता देख पुलिस प्रशासन और एसडीएम ने मौके पर पहुँचकर मामला शांत कराया। वहीं मौके पर मौजूद थारू जनजाति की 13 छात्राओं ने एसडीएम और एएसआई के सामने अपना पक्ष रखा।

एक पीड़ित लड़की के अभिभावक का कहना है कि नफीस मोहम्मद ने दो महीने पहले भी उनकी बेटी से छेड़छाड़ की थी। लेकिन तब प्रिंसिपल और ग्राम प्रधान ने मिलकर उन पर समझौता करने के लिए दबाव बनाया था। बाद में समझौता हो गया था।

छेड़छाड़ और धर्मांतरण समेत कई तरह के हैं आरोप

बता दें कि पीड़ित छात्राओं की ओर से महिला अभिभावकों ने कोतवाली पुलिस को लिखित शिकायत दी है। इस शिकायत में अंग्रेजी शिक्षक नफीस मोहम्मद पर छेड़छाड़, लड़कियों को अकेले बुलाने, धर्मांतरण, बात न मानने पर फेल करने की धमकी समेत कई तरह के गंभीर आरोप लगाए हैं।

वहीं इस पूरे मामले में एसडीएम रवींद्र सिंह बिष्ट ने आरोपित शिक्षक के खिलाफ कार्रवाई न होने पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा है कि प्रिंसिपल ने शिक्षा विभाग को पत्र लिखकर आरोपित शिक्षक नफीस मोहम्मद को सस्पेंड करने के लिए कहा गया है। छेड़छाड़ के मामले को हल्केपन में लेने वाले प्रिंसिपल के खिलाफ यदि शिकायत मिलती है तो उसे भी इस स्कूल से हटाने की कार्रवाई की जाएगी।

‘मणिपुर वीडियो काण्ड के आरोपितों को उनके कपड़ों से पहचानिए’: वामपंथी पूर्व सांसद एन्ड लॉबी वायरल कर रही तस्वीर, जानें क्या है सच

हाल ही में मणिपुर का एक वीडियो वायरल हुआ। 2 महिलाओं को नग्न कर उनका जुलूस निकाले जाने और गैंगरेप की घटना का ये वीडियो वायरल होते ही देश भर में सनसनी मच गई। हालाँकि, वीडियो वायरल होने से ढाई महीने पहले ये घटना हुई थी, लेकिन आरोपितों की गिरफ़्तारी वीडियो सामने आने के बाद हुई। विपक्षी दलों ने भी इस पर खूब राजनीति की। वहीं अब एक और प्रोपेगंडा फैलाते हुए बताया जा रहा है कि आरोपित RSS से संबंध रखते हैं।

‘RSS की पोशाक में मणिपुर वीडियो के आरोपित’: सोशल मीडिया पर वायरल

एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है, जिसमें एक अधेड़ उम्र का व्यक्ति और एक युवक RSS की पोशाक में एक मैदान में खड़े हैं। उन्होंने सफ़ेद शर्ट और खाकी रंग की पैंट पहन रखी है। पीछे RSS के कुछ अन्य लोगों का भी जमावड़ा देखा जा सकता है। इस फोटो के साथ दावा किया जा रहा है कि वही वही आरोपित हैं, जिन्होंने महिलाओं को नग्न कर उनका जुलूस निकाला और उनके साथ गैंगरेप की घटना को अंजाम दिया।

दक्षिण भारतीय भाषाओं में भी ये ट्वीट वायरल हो रहा है। JNU छात्र संघ की अध्यक्ष और वामपंथी नेता आईसी घोष ने भी इसी पर आधारित एक तस्वीर शेयर की, जिसमें संघ की वेशभूषा में एक व्यक्ति को लाठी के साथ देखा जा सकता है और एक लड़की को क्रॉस पर लटकाया गया है। साथ ही इसमें ‘हिन्दू राष्ट्र’ लिख कर तंज कसा गया है। इसी तरह, कई वामपंथी हैंडल इस तरह की तस्वीरों को शेयर करने में लगे हुए हैं।

इसी तरह, सुभाषिनी अली कानपुर से सांसद रहीं वामपंथी नेता सुभाषिनी अली ने भी तस्वीर शेयर करते हुए लिखा कि ये मणिपुर के आरोपित हैं, इन्हें इनकी कपड़ों से पहचानिए। हालाँकि, जब लोगों ने उन्हें सच्चाई के बारे में बताया तो उन्होंने बाद में लिखा कि ये सही नहीं है। साथ ही माफ़ी माँगने की भी बात कही। लोगों ने पूछा कि आखिर ये वामपंथी नेता इतना झूठ फैलाने में क्यों लगे हुए हैं?

इतना ही नहीं, ये दावा व्हाट्सएप्प पर भी तेजी से वायरल होने लगा। इसके बाद कई जागरूक लोगों ने इस बारे में सच्चाई दिखाने का भी बीड़ा उठाया और बताया कि कैसे एक झूठा दावा शेयर किया जा रहा है।

व्हाट्सएप्प पर फेक दावे पर रोक लगाने के लिए अपील

मणिपुर के आरोपितों और RSS को साथ जोड़ने वाला दावा झूठा

बता दें कि ये दावा एकदम झूठा है। मणिपुर वायरल वीडियो काण्ड के आरोपितों का RSS से दूर-दूर तक कोई संबंध नहीं है। अब सवाल उठता है कि फिर तस्वीर में दिख रहे व्यक्ति कौन हैं? असल में ये फोटो मणिपुर के प्रदेश उपाध्यक्ष चिदानंद सिंह की है। साथ में दिख रहा व्यक्ति उनका बेटा है। उन्होंने वायरल तस्वीरों पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि उनके या उनके परिवार का इस घृणित अपराध, या इस तरह के किसी भी अपराध से कोई लेनादेना नहीं है।

इस झूठ को बढ़ावा देने वालों में अधिकतर वामपंथी शामिल हैं। मणिपुर के भाजपा उपाध्यक्ष के बेटे को नाबालिग बताया जा रहा है। कुछ फैक्ट-चेक हैंडलों ने अपील की है कि लोगों को अपने-अपने राज्यों में ऐसा झूठ फैलाने वालों के खिलाफ FIR दर्ज करानी चाहिए।

अतः, ये दावा पूरी तरह झूठा है। मणिपुर में महिलाओं को नग्न कर जुलूस निकाले जाने और उनका गैंगरेप किए जाने की घटना के आरोपितों से RSS का कोई संबंध नहीं है। इस संबंध में मणिपुर के DGP को भी पत्र लिख कर ऐसा झूठ फैलाने वालों पर कार्रवाई की माँग की गई है।

आंध्र प्रदेश में भगवान श्रीराम की 108 फ़ीट ऊँची प्रतिमा, 10 एकड़ में फैला होगा प्रोजेक्ट: अमित शाह ने किया शिलान्यास, बोले – फैलेगा सनातन का सन्देश

आंध्र प्रदेश के कुर्नूल में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने 108 फ़ीट ऊँची भगवान रामचंद्र की प्रतिमा का शिलान्यास किया है, जो भारत में उनकी सबसे ऊँची प्रतिमा होगी। उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए इस प्रतिमा का शिलान्यास किया। कुर्नूल के मंत्रालयम में इस प्रतिमा को स्थापित किया जाएगा। 500 करोड़ रुपए की लागत से इसका निर्माण किया जा रहा है। ये प्रतिमा आने वाले कई वर्षों तक सनातन धर्म का सन्देश देह-दुनिया को देगा।

इसकी स्थापना के पीछे एक उद्देश्य ये भी है कि वैष्णव परंपरा का भी भारत और दुनिया भर में आने वाले समय में और प्रसार हो सके। ‘मंत्रालयम दास साहित्य प्रकल्प’ के तहत कई सामाजिक कार्य किए जा रहे हैं, जैसे – अन्न दान और विद्या दान। साथ ही लोगों को पीने का स्वच्छ जल भी मुहैया कराया जाता है। उन्हें रहने को घर दिए जाते हैं। इसके अलावा गायों की भी रक्षा की जिम्मेदारी उठाई जाती है। इस दौरान अमित शाह ने याद दिलाया कि कैसे महान विजयनगर साम्राज्य भी तुंगभद्र नदी के किनारे ही स्थित था।

इसी नदी के किनारे 10 एकड़ में ये प्रोजेक्ट फैला होगा और इसका निर्माण कार्य पूरा होने में ढाई वर्ष का समय लगेगा। इस दौरान अमित शाह ने ध्यान दिलाया कि राघवेंद्र स्वामी के मंदिर के लिए मंत्रालयम गाँव पहले से ही काफी लोकप्रिय रहा है। उन्होंने याद दिलाया कि कैसे विजयनगर साम्राज्य ने पूरे दक्षिण भारत से विदेशी आक्रांताओं को खदेड़ कर स्वदेश और स्वधर्म का शासन स्थापित किया।

इस दौरान केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री ने ये भी ध्यान दिलाया कि कैसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राम मंदिर का शिलान्यास कर इसके निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया, जबकि ये कई सौ सालों से अटका हुआ था। सैकड़ों वर्षों बाद भगवान श्रीराम अपने जगह पर पहुँचेंगे। इस दौरान अमित शाह ने दक्षिण भारत में वैष्णव परंपरा को आगे ले जाने वाले संतों को भी याद किया। बता दें कि कुर्नूल एक ऐतिहासिक शहर है, अक्टूबर 1953 से लेकर अक्टूबर 1956 तक आंध्र की राजधानी भी रहा है।

‘आंबेडकर नहीं, कोर्ट परिसर में सिर्फ गाँधी और तिरुवल्लुवर की तस्वीरें’: मद्रास हाईकोर्ट का आदेश, कहा – बाकी सब हटाओ

मद्रास हाई कोर्ट ने एक सर्कुलर जारी कर तमिलनाडु और पुडुचेरी की अदालत परिसर से महात्मा गाँधी और संत तिरुवल्लुवर के अलावा लगी बाकी सभी तस्वीरें और मूर्तियाँ हटाने के लिए कहा है। इस फैसले के साथ कोर्ट ने अलंदुर के संयुक्त न्यायालय परिसर पर लगी भीमराव अंबेडकर की फोटो हटाने के अपने पुराने आदेश का उल्लेख किया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मद्रास हाई कोर्ट के जनरल रजिस्ट्रार ने 7 जुलाई 2023 को निचली अदालतों को एक सर्कुलर जारी किया है। इस सर्कुलर में पुराने आदेशों का हवाला देते हुए कहा गया है कि कोर्ट परिसर में सिर्फ महात्मा गाँधी और संत तिरुवल्लुवर की ही तस्वीरें लगेंगी। इसके अलावा लगी अन्य सभी तस्वीरें या मूर्तियाँ हटा दी जाएँ।

दरअसल, विभिन्न बार एसोसिएशन ने भीमराव अंबेडकर तथा एसोसिएशन के वरिष्ठ वकीलों के चित्रों के अनावरण के लिए कोर्ट से अनुमति माँगी थी। इस माँग को लेकर मद्रास हाई कोर्ट की फुल बेंच ने 11 अप्रैल 2023 को एक बैठक की। इस बैठक के बाद फुल बेंच ने पुराने आदेशों का हवाला देते हुए ऐसी सभी माँग खारिज कर दी थी। हाई कोर्ट का कहना है कि इससे पहले इसी तरह के मामलों को लेकर साल 2008, 2010, 2011, 2013, 2019 और हाल ही में अप्रैल 2023 में भी विचार किया गया था।

हाई कोर्ट द्वारा जारी सर्कुलर को देखें तो इसमें कहा गया है, “हाल ही में 11 अप्रैल, 2023 को फुल बेंच ने इसी तरह के अनुरोध पर विचार किया। पहले के सभी प्रस्तावों को दोहराते हुए सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया है कि महात्मा गाँधी और संत तिरुवल्लुवर की मूर्तियों और चित्रों को छोड़कर, अदालत परिसर के अंदर कहीं भी कोई अन्य चित्र और मूर्ति नहीं लगाई जाएगी।”

तमिलनाडु बीआर अंबेडकर एडवोकेट एसोसिएशन ने तमिलनाडु के सभी कोर्ट हॉल में राष्ट्रीय नेताओं की फोटो लगाने को लेकर याचिका दायर की थी। लेकिन, कोर्ट ने 22 अक्टूबर 2008 को यह याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद, राष्ट्रीय नेताओं की मूर्तियों को क्षतिग्रस्त करने की घटनाओं के साथ ही इनको लेकर कानून-व्यवस्था भंग होने की स्थिति उत्पन्न होने की स्थितियाँ सामने आईं थीं।

इनको देखते हुए 11 मार्च 2010 को हाई कोर्ट की फुल बेंच ने कहा था कि अदालत परिसर में किसी की भी मूर्ति का निर्माण नहीं होने दिया जाएगा। इसके अलावा 20 अप्रैल, 2011 को भी फुल बेंच ने कहा था कि अदालत परिसर के अंदर किसी की भी मूर्ति लगाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसी तरह, 27 अप्रैल 2013 को कांचीपुरम के मुख्य जिला जज को अलंदूर कोर्ट में लगी अंबेडकर की तस्वीर को हटाने के निर्देश दिए थे।