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दरभंगा में माँ दुर्गा मंदिर पर हमला तो बरेली में काँवड़ियों पर पत्थरबाजी: दोनों जगह जमा हुई मुस्लिम भीड़, यूपी में हिन्दू संगठन बोले – मस्जिद से निकले हमलावर

देश के 2 अलग-अलग हिस्सों से हिन्दू धर्मस्थल व धार्मिक यात्रा पर मुस्लिम भीड़ द्वारा पत्थरबाजी की खबर है। पहले मामले में बिहार के दरभंगा जिले में मुस्लिम भीड़ ने एक दुर्गा मंदिर पर पत्थरबाजी की है। वहीं दूसरी घटना उत्तर प्रदेश के बरेली जिले की है जहाँ काँवड़ यात्रियों पर मुस्लिमों द्वारा पथराव किए जाने की खबर है। पुलिस दोनों ही मामलों में मौके पर पहुँच कर जाँच कर के आरोपितों की गिरफ्तारी के प्रयास कर रही है। दोनों ही घटनाएँ रविवार (23 जुलाई 2023) की हैं।

दरभंगा में मंदिर पर हमला, पत्थरबाजी

पहला मामला बिहार के दरभंगा जिले का है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यहाँ रविवार को मोहर्रम का झंडा लगाने के चलते 2 गुटों में विवाद हो गया है। इस दौरान पत्थरबाजी की भी खबर है। झगड़ा तब शुरू हुआ जब मुस्लिम समुदाय के कुछ लोग मंदिर के सामने मोहर्रम का झंडा लगा रहे थे। मंदिर में मौजूद श्रद्धालुओं ने इसका विरोध किया। कुछ देर की बहस के बाद दोनों तरफ से लोग जमा होने लगे। आरोप है कि इस बीच विवाद बढ़ता चला गया और पत्थरबाजी शुरू हो गई। दोनों तरफ से 2 अलग-अलग गुट बँट गए।

हालत की जानकारी मिलते ही भारी संख्या में पुलिस बल मौके पर पहुँचा। पुलिस ने बल प्रयोग करते हुए भीड़ को तितर-बितर किया। इस दौरान मज़हबी नारेबाजी की भी खबरें हैं। आरोप है कि पत्थरबाजी की चपेट में दुर्गा माता मंदिर भी आया है। फिलहाल हालत नियंत्रण में बताए जा रहे हैं।

बरेली में काँवड़ियों पर पत्थरबाजी

दूसरा मामला उत्तर प्रदेश के बरेली जिले का है। यहाँ रविवार को काँवड़ ले जा रहे शिव भक्तों पर पत्थरबाजी की गई है। घटना बारादरी थाना क्षेत्र की बताई जा रही है जिसका एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वायरल हो रहे वीडियो में एक गली से कुछ लोग पत्थर बरसाते दिखाई दे रहे हैं। ‘हिन्दू जागरण मंच’ के मुताबिक, घटना बालखंडी नाथ मंदिर के पास की है। यहाँ एक मस्जिद भी बताते हुए वहीं से पत्थरबाजी का आरोप लगाया गया है।

इस घटना से नाराज कावंड़ियों में प्रदर्शन कर के पत्थरबाजों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है। बरेली पुलिस के मुताबिक, मौके पर फ़ोर्स मौजूद है और शांति व्यवस्था कायम है। बताते चलें कि बरेली जिले में ही तैनात DSP दीपशिखा पर 3 दिन पहले काँवड़ियों की हरकत आतंकी जैसा बताने का आरोप लगा था। तब हिन्दू संगठनों ने धरना दे कर उन पर कार्रवाई की माँग की थी।

दीदी अमीन… TMC ने बनाया PM मोदी पर पोस्टर तो भाजपा ने भी दिया करारा जवाब, युगांडा के क्रूर तानाशाह के गेटअप में दिखीं ममता बनर्जी

आजकल जमीन के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भी राजनीतिक दल लड़ते-भिड़ते रहते हैं। इसी क्रम में मणिपुर में दो समुदायों के बीच हो रही हिंसा के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को घसीटते हुए पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी TMC (तृणमूल कॉन्ग्रेस) ने अपने आधिकारिक हैंडल से एक पोस्टर जारी किया। ये पोस्टर क्रिस्टोफर नोलन की हलियाँ फिल्म ‘Oppenheimer’ पर बना हुआ है। बता दें कि ये फिल्म परमाणु बम के जनक कहे जाने वाले रॉबर्ट जे ओपेनहाइमर पर आधारित है।

इस पोस्टर में फिल्म के लीड एक्टर सिलियन मर्फी वाले गेटअप में एडिट कर के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर लगा दी गई है। साथ ही उनके अलावा केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों और महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, मणिपुर के मुख्यमंत्री N बीरेन सिंह और राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) की अध्यक्ष रेखा शर्मा का नाम लिखा हुआ है। पोस्टर में बैकग्राउंड में बम फूटते हुए दिखाए गए हैं। साथ ही इसे ‘Modenheimer’ नाम दिया गया है।

टैगलाइन के रूप में लिखा है – “मणिपुर को तबाह करने के पीछे यही व्यक्ति है।” साथ ही लिखा है – “NDA द्वारा एक फिल्म।” हालाँकि, इस पर पलटवार करने में भाजपा ने भी देर नहीं लगाई। ‘डॉ श्यामा प्रसाद मुर्खजी रिसर्च फाउंडेशन’ के चेयरमैन एवं ट्रस्टी अनिर्बन गांगुली ने तुरंत एक पोस्टर ट्वीट किया, जिसमें ममता बनर्जी को युगांडा के क्रूर तानाशाह ईदी अमीन के रूप में दिखाया गया है। इसमें उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी, कुणाल घोष, भ्रष्टाचार के आरोप में जेल में बंद मंत्री पार्था चटर्जी, सोआकत मोल्ला और अराबुल इस्लाम का नाम है।

इस पोस्टर में TMC की संस्थापक और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को उसी सेना वाले गेटअप में दिखाया गया है, जो ईदी अमीन पहना करता था। साथ ही लिखा है, “I.N.D.I.A. द्वारा एक फिल्म, TMC के साथ कोलैबोरेशन में।” फिल्म का नाम रखा गया है – “दीदी अमीन।” बता दें कि 1971-79 तक युगांडा का राष्ट्रपति रहा ईदी अमीन के बारे में कहा जाता है कि उसके शासनकाल में मरने वालों की संख्या 3 लाख के आसपास थी।

‘इसने हमारे मजहब के खिलाफ पोस्ट किया’: बृजेश यादव के खिलाफ थाने पर जमा हुई मुस्लिम भीड़ ने किया बवाल, कहा – बुलडोजर चलाओ

मध्य प्रदेश के विदिशा में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने सोशल मीडिया पर डाली गई एक पोस्ट के खिलाफ थाने पर हंगामा किया है। मुस्लिम समुदाय के लोगों ने इस पोस्ट को इस्लाम विरोधी बताया है। सैकड़ों की संख्या में मुस्लिमों ने अपनी धार्मिक भावनाओं को आहत करने का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन किया है। पुलिस ने केस दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है। घटना गुरुवार (20 जुलाई, 2023 ) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला विदिशा के थाना क्षेत्र सिंरोज का है। यहाँ बुधवार की रात बृजेश यादव की एक पोस्ट को मुस्लिम समाज के लोगों ने अपने समुदाय के खिलाफ बताया। उन्होंने इस अपनी मज़हबी भावनाओं को आहत करने वाला कहा तो पुलिस ने बृजेश यादव से पोस्ट को डिलीट करने को कहा। बृजेश ने फ़ौरन ही वह पोस्ट डिलीट कर ली। पुलिस ने सुसंगत धाराओं में FIR भी दर्ज कर लिया और जाँच शुरू कर दी। बावजूद इसके मुस्लिम समुदाय के लोग अगले दिन थाने पर जमा हो गए। भीड़ में तमाम लोग बृजेश यादव के घर पर बुलडोजर चलाने की माँग कर रहे थे।

हिंसक रूप ले रही इस भीड़ का नेतृत्व शिकायतकर्ता शेरू खान कर रहा था। यह भीड़ बृजेश को सिंरोज थाने से छोड़ देने का आरोप लगाते हुए मामले में कड़ी कार्रवाई की माँग कर रही थी। पुलिस ने इन सभी को बताया कि आरोपित पर नियमानुसार कार्रवाई की गई है। हालाँकि, पुलिस के समझाने का कोई असर भीड़ पर नहीं पड़ा। सड़कों की तरफ जमा हो रही भीड़ ने अपना हंगामा जारी रखा। इस दौरान उन्मादी नारे भी लगाए गए। आख़िरकार पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा। हलके लाठीचार्ज के साथ मुस्लिम भीड़ पर आँसू गैस के गोले भी छोड़ने पड़े। आखिरकार भीड़ तितर-बितर हुई।

इस घटना पर जिले के SDPO सौरभ तिवारी ने बताया कि केस दर्ज कर के जरूरी कार्रवाई की जा रही है।

‘त्रिपुण्ड-रुद्राक्ष देख कर स्कूल ने निकाल दिया, टॉर्चर किया’: मेरठ की हिन्दू छात्रा का दर्द, स्कूल बोला – माहौल खराब कर रही थी

उत्तर प्रदेश के मेरठ में माथे पर त्रिपुंड और हाथ में रुद्राक्ष पहनने के चलते एक स्कूल पर छात्रा को निकालने का आरोप लगा है। पीड़ित छात्रा का कहना है कि त्रिपुंड और रुद्राक्ष पहनने के चलते उसे स्कूल से निकाला गया है। वहीं स्कूल प्रबंधन का कहना है कि छात्रा से त्रिपुंड छोटा करने के लिए कहा गया था। लेकिन वह नहीं मान रही थी। स्कूल का माहौल खराब कर रही थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मामला मेरठ के मोदीपुरम इलाके में स्थित सुभाष इंटर कॉलेज का है। यहाँ पढ़ने वाली 11वीं क्लास की छात्रा का कहना है कि वह माथे पर त्रिपुंड और हाथ में रुद्राक्ष पहनकर स्कूल जाती थी। इस पर क्लास टीचर और प्रिंसिपल ने आपत्ति जताते हुए उसे स्कूल से निकालने की धमकी दी थी। साथ ही माथे पर लगे त्रिपुंड छोटा करने के लिए कहा गया था।

इस पर वह छोटा त्रिपुंड लगाकर स्कूल जाने लगी थी। लेकिन इसके बाद भी प्रिंसिपल ने उसे जमकर फटकार लगाई और अभद्र व्यवहार कहते हुए स्कूल से बाहर निकाल दिया। पीड़िता का यह भी कहना है कि वह अपने क्लास के अन्य छात्रों को ‘द कश्मीर फाइल्स’ और ‘द केरल स्टोरी’ जैसी फिल्मों के बारे में बात कर जागरूक कर रही थी। इसलिए स्कूल मैनेजमेंट ने उसे निष्कासित किया है।

पीड़ित छात्रा का कहना है, “सावन के कारण मैं त्रिपुंड लगाकर स्कूल जाती थी। इस पर मैम ने मुझे ऑफिस में बुलाकर डाँटा। मैंने कहा कि सावन में मैं बिना त्रिपुंड लगाए घर से बाहर नहीं निकलती। तो उन्होंने स्कूल आने से मना कर दिया और मुझे टॉर्चर किया गया।” पीड़ित छात्रा की माँ का कहना है कि स्कूल मैनेजमेंट ने उनकी बेटी से परिजनों को साथ लाने के लिए कहा था। इस पर वह स्कूल गई थीं। जहाँ त्रिपुण्ड लगाने को लेकर हिंदू रीति-रिवाजों का हवाला देने के बाद भी प्रिसिंपल ने उनकी बात नहीं सुनी और नाम काटने की बात कहकर स्कूल से जाने के लिए कह दिया।

वहीं इस पूरे मामले में स्कूल की प्रिंसिपल भावना चौहान का कहना है कि छात्रा को त्रिपुंड लगाने से नहीं रोका गया था। वह तो पूरे माथे पर तिलक लगाकर आती थी। उसे त्रिपुंड छोटा करने के लिए कहा गया था। लेकिन उसने ऐसा करने से मना कर दिया था। उसे कई बार समझाने की कोशिश की गई। लड़की के परिजनों को भी इस बारे में बताया गया तो उन्होंने भी त्रिपुंड छोटा करने से मना कर दिया था।

प्रिसिंपल का यह भी कहना है कि एक लड़की के त्रिपुंड लगाकर आने से अन्य धर्म के लोग भी अपने धार्मिक कार्य करने की इजाजत माँगते हैं। इसके अलावा वह स्कूल में दूसरे धर्म के बच्चों पर कमेंट करती थी। इससे स्कूल का माहौल खराब हो रहा था। वहीं, मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक ओंकार शुक्ला का कहना है कि किसी की धार्मिक भावनाओं को लेकर पढ़ाई करने से नहीं रोका जा सकता। अगर त्रिपुंड लगाने के चलते स्कूल आने से रोका गया है तो यह उचित नहीं है। मामले की जाँच की जा रही है। इसके बाद कार्रवाई होगी।

बंगाल में कपड़ा कारोबारी को दिन-दहाड़े मौत की नींद सुला दिया, TMC के गुंडों पर आरोप: BJP कार्यकर्ता थे असीम साहा, पार्टी ने किया बंद का ऐलान

पश्चिम बंगाल में एक और भाजपा कार्यकर्ता की हत्या कर दी गई है। ये वारदात कैमरे पर भी कैद हो गई। बताया जा रहा है कि ये घटना उत्तरी दिनाजपुर की है, जहाँ सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के कार्यकर्ताओं ने दिन-दहाड़े कारोबारी को मौत की नींद सुला दिया। पिछले कई दिनों से हमलावर उक्त कारोबारी से रंगदारी की माँग कर रहे थे। शनिवार (22 जुलाई, 2023) को भी वो वसूली के इरादे से ही आए थे, लेकिन उसके बाद हत्या कर दी।

इस घटना के CCTV फुटेज में 3-4 बदमाशों को कारोबारी पर झपट्टा मारते हुए देखा जा सकता है। उन्होंने दुकान में घुस कर उस पर हमला कर दिया। फिर उन्होंने चाकू निकाल लिया और घोंपने लगे। एक दूसरे कारोबारी ने अपने साथी को बचाने की कोशिश भी की, लेकिन वो असफल रहा। वो भी इसमें घायल हो गया। दोनों को सिलीगुड़ी स्थित अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहाँ उनमें से एक की मौत हो गई, जिनकी पहचान असीम साहा के रूप में हुई है।

इस हत्याकांड के बाद इस्लामपुर में भाजपा ने 12 घंटे के बंद और विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है। BJYM के प्रदेश अध्यक्ष इंद्रनील खान ने कहा कि मृतक भाजपा की युवा विंग का कार्यकर्ता था। वहीं पुलिस का कहना है कि व्यक्तिगत दुश्मनी के कारण ये हत्याकांड हुआ है। पुलिस ने बताया कि सूचना मिलने पर वो इस्लामपुर बाजार पहुँची। CCTV में अज्ञात लोगों को हमला करते हुए देखा गया। असीम साहा कूच बिहार एरिया के रहने वाले थे।

जिस समय ये वारदात हुई, उस समय वो अपने मामा की साड़ी की दुकान पर गए हुए थे। पुलिस का कहना है कि पीड़ित पक्ष की तरफ से कोई शिकायत नहीं मिली है। एक आरोपित को गिरफ्तार किए जाने की बात भी कही गई है। इस्लामपुर में भाजपा के विरोध प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। असीम साहा कपड़ों का व्यापार करते थे। पश्चिम बंगाल पंचायत चुनाव के दौरान और उसके बाद हुई हिंसा से अब तक जल रहा है। महिलाओं के साथ क्रूरता की घटनाएँ भी सामने आई हैं।

पश्चिम बंगाल के मालदा में पाकुआहाट नामक जगह पर 2 महिलाओं के ऊपर अत्याचार किया गया। ये इलाका बामनगोला थाना क्षेत्र की पुलिस के अंतर्गत आता है। दोनों महिलाओं को पॉकेटमार होने के संदेह पर पकड़ लिया गया। इसके बाद वहाँ भीड़ जुट गई और उन्होंने इन महिलाओं को बुरी तरह पीटा। लोगों के सामने ही उनकी साड़ियाँ फाड़ डाली गईं और उन्हें नग्न कर दिया गया। इतना ही नहीं, उनके बाल खींचे गए और जूतों से भी उनकी पिटाई की गई।

जंगल, आग, खून, मास्क, अँधेरा, चिंघाड़… सूर्या के जन्मदिन पर ‘Kanguva’ का टीजर देख पागल हुए फैंस, VFX-बैकग्राउंड संगीत ने चौंकाया

साउथ के सुपरस्टार सूर्या के फैंस उनकी फिल्म ‘कंगुवा’ का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इस बीच फिल्म मेकर्स ने सूर्या के जन्मदिन पर ‘कंगुवा’ का टीजर रिलीज किया है। फ़िल्म के टीजर और इसमें सूर्या के लुक को फैंस काफी पसंद कर रहे हैं। सूर्या और दिशा पटानी स्टारर यह फिल्म 12 अप्रैल, 2024 को रिलीज होगी।

ग्रीन के.ई. ज्ञानवेलराजा स्टूडियो और यूवी क्रिएशंस के बैनर तले ये फिल्म मशहूर डायरेक्टर शिवा के डायरेक्शन में बन रही है। टीजर बेहतरीन बैकग्राउंड म्यूजिक, शानदार VFX और लाजवाब कर देने वाले डॉयलॉग से भरपूर है। टीजर से ही फिल्म के एक्शन से भरपूर होने के कयास लगाए जा रहे हैं। ‘कंगुवा’ का टीजर यूट्यूब, ट्विटर समेत अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ट्रेंड कर रहा है। नेटिजेन्स की भी बेहतरीन प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।

टीजर की शुरुआत में फिल्म के स्टार ‘कंगुवा’ की तारीफ करते हुए उसकी कई पीढ़ियों के बारे में बताया गया है। इसके बाद घने जंगल में जंगल के बीच में सूर्या की पहली झलक दिखाई देती है। हालाँकि, उनका चेहरा एक जानवर की खोपड़ी जैसे मास्क ढँका हुआ है। इसके बाद एक शक्तिशाली योद्धा के रूप में ‘कांगुवा’ यानि सूर्या का पहला लुक दिखाई पड़ता है। सूर्या का पूरा गेटअप किसी जनजातीय योद्धा की तरह लग रहा है।

आँखों और चेहरे का एक्सप्रेशन फैंस को रोमांचित कर देने वाला है। फिल्म का टीजर यूट्यूब, ट्विटर समेत अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ट्रेंड कर रहा है। नेटिजेन्स की भी बेहतरीन प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।

फिल्म में सूर्या के साथ दिशा पाटनी के अलावा योगी बाबू, किंग्सले, कोवई सरला, आनंद राज समेत कई टैलेंटेड एक्टर नजर आने वाले हैं। तमिल में बन रही ‘कंगुवा’ को हिंदी, तेलुगू, कन्नड़ मलयालम समेत 10 भाषाओं में एक साथ रिलीज होगी। बड़े बजट वाली इस फिल्म को 3D में रिलीज किया जाएगा। फिल्म के डायरेक्टरन का जिम्मा सिरुथई, वीरम, वेदालम, विवेगम, विश्वासम और अन्नाथे जैसे सुपरहिट फिल्में देने वाले शिवा को सौंपा गया है।

रेखा को लेस्बियन बताए जाने वाली खबरों पर भड़के लेखक यासीर उस्मान, कहा – किताब में ऐसा कुछ नहीं लिखा: मीडिया में दावा – सेक्रेटरी के साथ लिव-इन में अभिनेत्री

जिस यासीर उस्मानी की किताब का हवाला देकर अभिनेत्री रेखा को लेस्बियन बताया जा रहा था, अब उन्होंने इस पर चुप्पी तोड़ी है। अभिनेत्री की बायोग्राफी ‘Rekha: The Untold Story’ के लेखक ने बयान जारी कर इन मीडिया खबरों की निंदा की है। उन्होंने कहा कि उनकी जिस पुस्तक का हवाला देकर ‘लिव इन रिलेशनशिप’ की बात की जा रही है, वो पूर्णरूपेण मनगढंत है, फर्जीवाड़ा है और ऐसे लिख कर अर्थ का अनर्थ किया जा रहा है।

रेखा को लेस्बियन बताने वाली रिपोर्ट्स पर भड़के लेखक

उन्होंने कहा कि स्पष्ट है कि ये सब सनसनी पैदा करने के इरादे के साथ किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वो पूरा जोर देकर ये कहना चाहते हैं कि मीडिया की खबरों में जो उद्धरण वर्णित किए जा रहे हैं, वो मेरी किताब में पूरी तरह अनुपस्थित हैं। उन्होंने कहा कि न तो किताब में ‘लिव-इन रिलेशनशिप’ शब्द का प्रयोग किया गया है, न ही इस रिश्ते को ‘सेक्सुअल’ बताया गया है और न ही अभिनेत्री के ‘बंद कमरों में रहने’ की बात कही गई है।

यासीर उस्मान ने कहा कि ये सब असत्य कथन हैं जिनका इस्तेमाल घटिया ‘क्लिकबेट पत्रकारिता’ के लिए किया जा रहा है। साथ ही उन्होंने कहा कि हर कुछ साल बाद ऐसी रिपोर्ट्स फिर से मीडिया में आ जाती हैं। उन्होंने कहा कि अगर उनके या उनकी पुस्तक ‘रेखा: द अनटोल्ड स्टोरी’ को आधार बना कर लिखे गए कंटेंट को अगर तुरंत नहीं सुधारा जाता है तो वो ऐसे प्रकाशनों के खिलाफ कानूनी एक्शन लेने के लिए बाध्य होंगे।

मीडिया रिपोर्ट्स में रेखा के सेक्रेटरी से संबंधों का दावा

मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि लेखक यासीर उस्मानी ने ‘रेखा: द अनटोल्ड स्टोरी’ में लिखा है कि बॉलीवुड की वरिष्ठ अभिनेत्री अपनी महिला सेक्रेटरी फरजाना के साथ लाइव-इन रिलेशनशिप में रह रही हैं। यासीर उस्मानी इससे पहले राजेश खन्ना, संजय दत्त और गुरुदत्त जैसे बड़े अभिनेताओं की जीवनी भी लिख चुके हैं। मीडिया में कहा गया था कि उन्होंने अपनी पुस्तक में ये भी दावा किया है कि रेखा अपनी जिस सेक्रेटरी फरजाना के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में हैं, वही उनके पति की आत्महत्या का कारण भी थीं।

बता दें कि रेखा की लव लाइफ को लेकर पिछले 50 वर्षों से तरह-तरह की चर्चा चलती रही हैं। जितेंद्र, विनोद मेहरा, किरण कुमार, मुकेश अग्रवाल, संजय दत्त और यहाँ तक कि अक्षय कुमार के साथ भी उनका जाम जुड़ चुका है। बताया जाता है कि बिजनेस टाइकून मुकेश अग्रवाल की तरफ रेखा ने ही हाथ बढ़ाया था। जान-पहचान के एक महीने के भीतर उन्होंने शादी कर ली। हालाँकि, इसके मुकेश मुकेश अग्रवाल को कारोबार में घाटा हुआ और वो बिना कारण रेखा के शूटिंग सेट्स पर मँडराते रहते थे। मुकेश ने आत्महत्या कर ली थी।

दवा लेने गया था दलित युवक, असगर के 3 बेटों ने चाकू घोंप कर मार डाला: बॉडी पर तेजाब डाल नहर में फेंक दिया, गुस्साई महिलाओं ने घर तोड़ा

उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में एक दलित युवक के हत्या की खबर है। मृतक का नाम राम अकबाल है। हत्या का आरोप असगर नाम के एक व्यक्ति के 3 बेटों पैरू, महेंदी और इकबाल पर लगा है। बताया जा रहा है कि बुधवार (19 जुलाई, 2023) को तीनों ने पहले चाकुओं से घोंप कर पीड़ित की हत्या की फिर शव पर तेज़ाब डाल कर नहर में फेंक दिया। पुलिस ने तीनों आरोपितों को हिरासत में ले लिया है। वहीं घटना के विरोध में महिलाओं की एक भीड़ ने आरोपितों के घर पर हमला कर के तोड़फोड़ की है। पुलिस ने हमला करने वालों पर भी FIR दर्ज कर ली है।

यह मामला सीतापुर के थानाक्षेत्र बिसवाँ का है। यहाँ गाँव जगन्नाथपुर के खुशीराम नाम के एक व्यक्ति ने पुलिस में 22 जुलाई, 2023 को शिकायत दर्ज करवाई। शिकायत में खुशीराम ने बताया कि 19 जुलाई को राम अकबाल नाम का व्यक्ति घर से दोपहर 2 बजे बाजार दवाएँ लेने गया था। इस दौरान असगर के 3 बेटे पैरू, इकबाल और मेहँदी ने रास्ते में मिल कर राम अकबाल की चाकुओं से गोद कर हत्या कर दी। हत्या के बाद तीनों ने मृतक के शव पर तेजाब डाला और नहर में फेंक दिया। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है।

राम अकबाल का शव नहर में नूरपुर के पास मिला। पुलिस ने पैरू, मेहँदी और इकबाल के खिलाफ IPC की धारा 302, 201 और SC/ST के तहत केस दर्ज कर लिया। तीनों अरोपितों को हिरासत में ले कर पूछताछ की जाने लगी। मृतक के शव को भी पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। इस बीच हत्या से नाराज महिलाओं का एक समूह आरोपितों के घर पहुँच गया जहाँ तोड़फोड़ की गई।

आरोप है कि तोड़फोड़ के दौरान आरोपितों के घर में तेजाब की बोतलें और तमंचा भी मिला। पुलिस ने आरोपितों के घर तोड़फोड़ करने वालों पर भी FIR दर्ज कर ली है। मामले की जाँच की जा रही है।

सीतापुर के स्थानीय पत्रकार अभिमन्यु कुमार द्वारा भेजे गए वीडियो में आरोपितों के गिरे हुए घर दिखाई दे रहे हैं। इन घरों में तमंचे और बोतलों में कुछ द्रव जैसा भरा दिखाई दे रहा है। अभिमन्यु ने ऑपइंडिया को बताया कि मौके पर पुलिस पर लगातार पेट्रोलिंग कर रही है। वहीं हम से बात करते हुए सीतापुर के महंत बजरंग मुनि ने बताया कि आरोपितों के घर से मिला तेजाब और तमंचा इस बात का इशारा कर रहा है कि उनके संबंध कहीं बाहरी आतंकी तत्वों से होंगे। बजरंग मुनि ने सीतापुर प्रशासन से आरोपितों की भविष्य की साजिश का खुलासा करने की भी माँग की।

महंत ने कहा कि यदि असगर का घर गिराने वाली महिलाओं के खिलाफ कोई प्रशासनिक एक्शन होगा तो जनांदोलन खड़ा होगा। उन्होंने दावा किया कि तीनों आरोपित आपराधिक सोच के हैं और इस से पहले भी अपने क्षेत्र में हिन्दुओं को प्रताड़ित करते आए हैं। दलित की हत्या के इस मामले में भीम आर्मी जैसे संगठनों की चुप्पी को बजरंग मुनि ने दुर्भाग्यपूर्ण बताया।

कॉलेज के बाथरूम में कैमरा से रिकॉर्ड करती थी लड़कियों के वीडियो, अपने मजहब के लड़कों को भेजती थी: हिन्दू संगठनों का प्रदर्शन, 3 छात्राएँ सस्पेंड

कर्नाटक के उडुपी में स्थित एक प्राइवेट कॉलेज के महिला टॉयलेट में मोबाइल कैमरा मिलने का मामला सामने आया। आरोप है कि कॉलेज में पढ़ने विशेष समुदाय की 3 लड़कियों ने यह मोबाइल कैमरा रखा था। इस कैमरे में अन्य समुदाय की लड़कियों के प्राइवेट वीडियो रिकॉर्ड करने के बाद ये लड़कियाँ अपने समुदाय के लड़कों के साथ वीडियो शेयर कर देतीं थीं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मामला उडुपी के अंबलपाडी बाईपास में स्थित नेत्र ज्योति कॉलेज का है। यहाँ एक समुदाय की छात्राओं पर आरोप है कि दूसरे समुदाय की छात्राओं के प्राइवेट वीडियो रिकॉर्ड करने के लिए टॉयलेट में कैमरा छिपाया था। इसके बाद आरोपित छात्राएँ व्हाट्सएप्प के जरिए ये वीडियो अपने ही समुदाय के लड़कों को भेज देती थीं। कहा जा रहा है कि विशेष समुदाय के लड़कों ने कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया था। इसके बाद मामले का खुलासा हुआ।

यही नहीं, जानकारी सामने आने के बाद वीडियो रिकॉर्ड करने वाली लड़कियों और अन्य छात्राओं के बीच कॉलेज में जमकर बहस हुई। इसके बाद कॉलेज मैनेजमेंट ने मामला शांत कराते हुए तीनों आरोपित छात्राओं को कॉलेज से सस्पेंड कर दिया है। इस मामले की सूचना हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं को मिली तो उन्होंने कॉलेज पहुँचकर आरोपितों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की।

वहीं दूसरी ओर कॉलेज के छात्रों ने भी आरोपित छात्राओं के खिलाफ कार्रवाई की माँग की है। इसके अलावा सर्व कॉलेज छात्र शक्ति संगठन ने एसपी अक्षय हाके से मिलकर इस मामले में कार्रवाई की माँग की है। बताया जा रहा है कि कॉलेज प्रशासन ने कार्रवाई के नाम पर छात्राओं को सस्पेंड तो कर दिया है। लेकिन अब तक मुकदमा दर्ज नहीं कराया गया।

बता दें कि ऐसा ही मामला सितंबर 2022 में चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी से सामने आया था। तब एक लड़की पर कॉलेज की अन्य छात्राओं के प्राइवेट वीडियो बनाने और उसे अपने बॉयफ्रेंड को भेजने का आरोप लगा था। पुलिस पूछताछ में सामने आया था कि लड़की को अन्य आरोपितों द्वारा वीडियो बनाने के लिए ब्लैकमेल किया जा रहा था। इसलिए वह लड़कियों के वीडियो बना आरोपित लड़कों को भेज रही थी। बाद में पुलिस ने सभी आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया था। 

दम्बूक-दम्बूक… जब एक छोटे से बच्चे ने अटका दी थी बड़े-बड़े क्रांतिकारियों की साँसें, चंद्रशेखर आज़ाद ने ऐसे होशियारी से सँभाला मामला

सर्दी की दोपहर के करीब 12-1 बजे का समय होगा जब आज़ाद, सदाशिव, विश्वनाथ और माहौर किले की दीवार से लगी चट्टान पर पड़े धूप के साथ चने-चबेले खा कर सुस्ता रहे थे। 

“कल खबर आई है कि सामान आ गया है।” आज़ाद बोले।

“पुराना है?” सदाशिव ने मूँगफली का छिलका उतारते हुए पूछा।

“नया सामान है इस बार।” आज़ाद ने बताया।

“अभी कहाँ है सामान?” यह माहौर की आवाज़ थी।

“मास्टर जी के यहाँ कल देर रात देकर गया है एजेंट।” आज़ाद ने अँगड़ाई ली।

“दिखाइए तो कभी।” विश्वनाथ ने कहा।

“तुम्हारे घर पर आजकल क्या सीन है सद्दू?”

“कुछ नहीं दाऊ, पड़ोस वाली जीजी के यहाँ शादी है तो सब उसी में लगे रहते है।”

“कब है शादी?”

“कल है शादी, आज तो मंडप है।”

“ठीक, तो फिर आज शाम चार बजे सब पहुँचो। तुम लोगों को दिखाता भी हूँ और सिखाता भी हूँ।” आज़ाद ने जेब से चने निकाल कर मुँह में डाल लिए।

थोड़ी देर में चारों उठे और अपने-अपने रास्ते निकल गए। शाम को चार बजे के आसपास सभी सदाशिव की छत पर बने कमरे में फिर इकट्ठे बैठे थे।

“कौन-कौन है घर में?” आज़ाद ने पूछा।

“कोई ना दाऊ।” सदाशिव ने पानी का गिलास आज़ाद को देते हुए कहा।

“बल्ब जला दे कैलाश।” आज़ाद ने थैला खटिया पर रखते हुए कहा।

“हओ दाऊ।” माहौर ने बल्ब जला दिया।

“साँकर लगा दे सद्दू।”

“हओ।” सदशिव ने साँकर लगा दी। तभी आज़ाद की नज़र कोने में ज़मीन पर चाक से खेलते हुए एक डेढ़-दो साल के बच्चे पर पड़ी।

“ये कौन है?” आज़ाद ने पूछा।

“भांजा है दाऊ।” सदशिव ने जवाब दिया।

“इसको बाहर करो पहले।”

“अरे जे तो बच्चा है दाऊ। इसे क्या पता अपन के बारे में?”

“तुम लोग समझते नहीं। अपने काम में ज़रा सी भी चूक महँगी पड़ सकती है।”

“जे तो ठीक ढंग से बोल भी नहीं पाता।” माहौर ने खींसे निपोरी अपनी।

“मत मानो, तुम लोग। सुनते नहीं हो कभी-कभी भाई तुम लोग।”

“आप सामान दिखाओ।” सब में उत्सुकता थी नए सामान को देखने की।

आज़ाद ने थैला उठाया, बच्चे की तरफ देखा, बच्चा अपने खेलने में व्यस्त था।

“लो देखो।” आज़ाद ने थैला खटिया पर उड़ेल दिया।

“का बात है दाऊ?” माहौर ख़ुशी में उछल गए।

“जे तो भौतई भैरन्ट है दाऊ।” सदाशिव ने सामान को हाथ में लिया।

“कितेक को हेगो दाऊ जे?” विश्वनाथ ने पूछा।

“दाम का तो पता नहीं, मास्टर जी ने किसी से चेक करने को मँगाया है। अगर फटा नहीं तो और आएँगे।” 

“देखो इसको ऐसे खोलते हैं, यहाँ ये लॉक है…..” 

“दम्बूक-दम्बूक” अचानक बच्चे की आवाज़ आई। वो ना बोल पाने वाला नन्हा बच्चा ख़ुशी से उछलता हुआ सामने खड़ा था।

आज़ाद के एक हाथ में रिवॉल्वर थी, दूसरे हाथ में कारतूस थे और वो भौंचक्का हुए उस नन्हे से ना बोल पाने वाले बालक तो देखे जा रहे थे।

तभी दरवाज़े पर सांकर बजी और सभी झटके से खड़े हो गये।

“तुम तो कह रहे थे कि घर पर कोई नहीं है दोपहर में?” आज़ाद ने सदशिव को घूरा।

दरवाज़े पर सांकर फिर बजी। आज़ाद ने फटाफट कारतूस और रिवॉल्वर खटिया पर रखी तकिये के नीचे दबाई और वहीं पाट पर बैठ गए। माहौर तुरंत बच्चे के पास बैठ गए और विश्वनाथ एक किताब खोल कर कुछ पढ़ने लगे। सदशिव ने दरवाज़ा खोला तो सामने उसके जीजा खड़े थे।

“अरे दाऊ जू आप? आप का कर रये इते? पंगत में ना गये?” दरवाज़े पर खड़े-खड़े सदाशिव ने पूछा।

“लुगाइयाँ हैंगी उते। हमें ना रओ मजो सो निकस आये।”  जीजा जी ने कमरे में उड़ती सी नजर डाली।

“अरे हरिसंकर दाऊ हैंगे इते।” जीजाजी ने सदशिव के दरवाज़े पर से हाथ हटाया और धड़धड़ाते हुए कमरे में चले आए।

“ए, तुम का कर राये इते?” अब जीजा की नज़र बच्चे पर आ गई। सब की जान सूखी हुई थी।

“काका दम्बूक–काका दम्बूक!” बच्चे ने आज़ाद की और इशारा किया। जीजा जी ने आज़ाद की और अचरज में देखा, माहौर ने माथे पर से पसीना पोंछा, सदशिव कमरे से बाहर निकल कर खड़े हो गए और विश्वनाथ किताब लिए ज़मीन पर ही बैठ गए। बवाल होने ही वाला था अब।    

“काका दम्बूक-काका दम्बूक।” बच्चे ने जैसे ही फिर दोहराया आज़ाद ने तुरंत अपने बाएँ हाथ की मुट्ठी से बन्दूक की नली बना ली और दाएँ हाथ की तर्जनी से बाएँ हाथ के अंगूठे में अंटा देकर उसको बन्दूक के आकार में बना कर खड़े हो गये। उसके बाद आज़ाद ने मध्यमा और अंगूठे से चुटकी बजाई और मुँह से आवाज़ निकाली “ढूम-ढूम-ढूम”।

“अब तुम मारो चोर को।” आज़ाद ने कहते हुए बच्चे को गोद में बिठाया और उसी तकिये पर बैठ गए जिसके नीचे कारतूस और रिवॉल्वर रखे थे। बच्चे का मुँह अब अपने काका की तरफ था। आज़ाद ने बच्चे की मुट्ठी से बन्दूक बनवाई और काका पर निशाना लगाकर आवाज़ निकाली “ढूम-ढूम-ढूम”।

काका को भी एक्टिंग दिखने का मौका मिल गया और वो ज़मीन पर गिरने की एक्टिंग करने मशगूल हो गये।

बच्चे ने इसके बाद सभी पर अपनी ‘दम्बूक’ से निशाना साधा और सभी ज़मीन पर गिरने लगे। आज़ाद गोदी में लिए बच्चे को बाहर आ गए और जीजाजी के हवाले कर दिया। जीजा जी अब छत पर ज़मीन पर पड़े अपनी एक्टिंग दिखा रहे थे और बच्चा पूरी छत पर अपनी “दम्बूक” से गोलीबारी किए जा रहा था।

तभी नीचे से आवाज़ आई।

“पंगत है गयी सुरु दाऊ।” काका ने बच्चे को लिया और सीढ़ी से नीचे उतर गए।

“दाऊ तुम ना आ रए?” मुड़ते हुए काका ने पूछा।

“आप जाओ, मुझे इनको कुछ सिखाना है।” आज़ाद कमर पर हाथ रखे हुए तीनों तिलंगो को घूर रहे थे। तीनों तिलंगो को आज गाली वाली पंगत जीमने का मौका मिलने वाला था।

आज़ाद अंदर आए तो तीनों सामने लाइन लगा कर खड़े हो गये। ऐसे देख कर आज़ाद की हँसी छूट गयी, बोले,

“देखो भाई, कितनी बार कहा है कि अपने काम में सावधानी बहुत ज़रूरी है। चौकन्नापन नहीं दिखाओगे तो किसी दिन छोटी सी गलती से भी लम्बे नप जाओगे।” 

“गलती है गई दाऊ।”

“महँगी पड़ सकती थी सद्दू।”

“हओ दाऊ।”

“और जे बिल्ली जैसा मुँह बना कर क्यूँ खड़े हो जाते हो सब, जब ऐसा कुछ होता है।”

“ऐसो ना है।” माहौर बोले।

“ऐसो ना है, कैसो ना है कैलास? तुमाई सकल तो ऐसी है रइ थी जैसे डकैती डार केर आ रये।” आज़ाद ने माहौर को हड़काया।

“अब ना हुइए दाऊ।”

“देखो इसमें कारतूस इस तरह फिट होता है।” आज़ाद की क्लास फिर शुरू हो गई थी और तीनों छात्र बड़े गौर से सीख रहे थे।

(भारत के स्वतंत्रता संग्राम एक ऐसे ही कुछ गुमनाम क्रांतिकारियों की गाथाएँ आप ‘क्रांतिदूत’ शृंखला में पढ़ सकते हैं जो डॉ. मनीष श्रीवास्तव द्वारा लिखी गई हैं।)