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एक हाथ से बाइक ड्राइव, दूसरे हाथ से मास्टरबेशन… ड्रॉप करने के बाद ‘I Love You’ लिख भेज रहा था हार्ट-किस वाली इमोजी

बेंगलुरु पुलिस ने अश्लील हरकत करने और महिला यात्री को परेशान करने के आरोप में एक रैपिडो ड्राइवर को गिरफ्तार किया। महिला का आरोप है कि आरोपित ड्राइवर बाइक चलाते हुए हस्तमैथुन कर रहा था। इसके बाद जब वह घर पहुँची तो व्हाट्सएप पर मैसेज और कॉल करके उसे परेशान करने लगा। महिला की शिकायत पर पुलिस ने आरोपित युवक को गिरफ्तार किया।

पीड़ित महिला ने अपने साथ हुई घटना को लेकर शुक्रवार (21 जुलाई, 2023) को ट्विटर पर एक थ्रेड लिखा। इस थ्रेड में उसने कहा था कि वह मणिपुर में हो रही हिंसा का विरोध करने के लिए बेंगलुरु के टाउन हॉल गई थी। वहाँ से वापस घर आने के लिए वह रैपिडो से ऑटो बुक करना चाहती थी। लेकिन लगातार कैंसिलेशन के बाद उसने बाइक बुक कर ली। लेकिन रैपिडो ड्राइवर दूसरी बाइक पर आया। उसका कहना था कि जो बाइक रैपिडो में रजिस्टर्ड है उसकी सर्विसिंग हो रही है। इसके बाद उसने ऐप से राइड कंफर्न की और उस बाइक में बैठ गई।

महिला ने आगे लिखा कि यात्रा के दौरान रैपिडो ड्राइवर एक हाथ से बाइक ड्राइव कर रहा था। वहीं दूसरे हाथ से वह हस्तमैथुन कर रहा था। इससे वह डर गई और पूरी यात्रा के दौरान चुपचाप बैठी रही। चूँकि रैपिडो ड्राइवर की हरकत से वह पहले ही वाकिफ़ हो चुकी थी। ऐसे में वह रैपिडो ड्राइवर को अपने घर का एड्रेस नहीं देना चाहती थी। इसलिए उसने उसने अपने घर से 200 मीटर पहले ही बाइक रुकवा ली।

इसके बाद जब पीड़िता अपने घर पहुँची तो रैपिडो ड्राइवर ने उसे व्हाट्सएप पर लगातार मैसेज और करना शुरू कर दिया। पीड़िता ने इसका स्क्रीनशॉट भी शेयर किया है। स्क्रीनशॉट में ‘लव यू’ के साथ ही ‘किस’ और ‘हार्ट’ इमोजी भी देखे जा सकते हैं। पीड़ित महिला का कहना है कि लगातार कॉल और मैसेज से परेशान होकर उसने रैपिडो ड्राइवर का नंबर ब्लॉक कर दिया। लेकिन इसके बाद उसने अलग-अलग नंबरों से कॉल करना शुरू कर दिया।

पीड़िता के ट्वीट्स संज्ञान लेते हुए बेंगलुरु पुलिस ने आरोपित रैपिडो ड्राइवर के खिलाफ मुकदमा दर्ज करते हुए जाँच शुरू की। इसके बाद पुलिस ने शनिवार (22 जुलाई, 2023) को आरोपित को गिरफ्तार कर लिया।

भारी पड़ा पहली पत्नी का इंस्टाग्राम रील देखना, दूसरी बीवी ने ब्लेड से काट डाला गुप्तांग: अस्पताल में पति

आंध्र प्रदेश में एक महिला द्वारा अपने पति का गुप्ताँग काटने की खबर है। महिला अपने पति की दूसरी बीवी थी। बताया जा रहा है कि वह अपने पति द्वारा पहली बीवी का इंस्टाग्राम पर बनाया गया रील देखने से नाराज थी। गंभीर रूप से घायल पति को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। पुलिस ने केस दर्ज कर के मामले की जाँच शुरू कर दी है। घटना शुक्रवार (21 जुलाई, 2023) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला नंदीगामा के पास चंदरलापाडु मंडल का है। यहाँ का रहने वाला कोटा आनंद बाबू 5 साल पहले अपनी पत्नी से अलग हो गया था। आनंद बाबू ने वरम्मा नाम की महिला से दूसरी शादी की और पिछले 5 माह से मुप्पल्ला में रह रहा था। घटना के दिन शुक्रवार को आनंद बाबू घर में अपनी पूर्व पत्नी की इंस्टाग्राम पर बनाई रील देख रहा था। यह हरकत उनकी दूसरी बीवी वरम्मा को नागवार गुजरी। बताया जा रहा है कि इस बात को ले कर पति-पत्नी में खूब झगड़ा हुआ।

पीड़ित पति का आरोप है कि उनकी बीवी ने ब्लेड ने उनके गुप्तांग पर वार किया। इस हमले की वजह से आनंद बाबू के प्राइवेट पार्ट में गंभीर चोटें आईं हैं। पीड़ित पति को स्थानीय अस्पताल में भर्ती करवाया गया जहाँ काफी खून बहने की वजह से उसे बेहतर इलाज के लिए विजयवाड़ा शिफ्ट कर दिया गया है। पुलिस घटना की जाँच कर रही है। आरोपित वरम्मा का कहना है कि उनका अपने पति के गुप्तांग पर हमले का कोई इरादा नहीं था और ये घटना गलती से हुई। इस मामले में अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है।

बताते चलें कि बीवी द्वारा अपने पति का गुप्ताँग काटने का यह पहला मामला नहीं है। इस से पहले भी नवंबर 2022 में, राजस्थान के बाड़मेर में एक महिला ने मामूली लड़ाई के बाद अपने पति का प्राइवेट पार्ट काट दिया था। इसके अलावा अक्टूबर 2022 में ओडिशा के जाजपुर जिले में एक 33 वर्षीय महिला ने कथित तौर पर झगड़े के दौरान अपने पति के गुप्तांग को काट कर चाकू मारकर हत्या कर दी थी।

₹15000 करोड़ वाला BikeBot घोटाला याद है… अब इसमें धराया सपा नेता: महिला ठग अब तक फरार

प्रवर्तन निदेशालय को शनिवार (22 जुलाई, 2023) को सपा नेता दिनेश सिंह गुर्जर की 5 दिन की रिमांड की अनुमति मिल गई। उसे PMLA एक्ट, 2002 (मनी लॉन्ड्रिंग) के तहत गिरफ्तार किया गया था। वो समाजवादी पार्टी का स्टेट सेक्रेटरी है। ED के लखनऊ स्थित जोनल ऑफिस में उसके खिलाफ शिकायतें पहुँची थीं। वो ‘बाइक बॉट स्कैम’ के आरोपितों से संपर्क कर-कर के उनसे पैसे ऐंठ रहा था। उस मामले में भी PMLA के तहत जाँच चल रही है।

सपा नेता दिनेश सिंह गुर्जर ED की कस्टडी में

दिनेश सिंह गुर्जर इस घोटाला के आरोपितों से संपर्क करता था और अपनी जान-पहचान की धौंस दिखाते हुए दावा करता है कि वो उनके खिलाफ केस को ‘सेटल’ करवा देगा। साथ ही उनकी जब्त चल-अचल संपत्तियों को भी छुड़ाने के वादे करता था। वो दावा करता था कि ED के अधिकारियों से उसकी अच्छी जान-पहचान है। बता दें कि ‘बाइक बॉट स्कैम’ का मुख्य आरोपित संजय भाटी है, जिससे संबंधों को लेकर भी सपा नेता से पूछताछ की जाएगी

दिनेश सिंह गुर्जर 26 जुलाई तक ED की कस्टडी में रहेगा। अब आपके मन में सवाल आ रहा होगा कि ‘बाइक बॉट स्कैम’ आखिर था क्या? एक लाइन में कहें तो लोगों को ऐसे मोटरसाइकिलों में निवेश करने के लिए कहा गया था, जिनका इस्तेमाल दोपहिया टैक्सी के रूप में किया जाना था, लेकिन सब धोखा निकला। निवेशकों को प्रति बाइक 62,100 रुपए निवेश करने के लिए कहा गया था। कंपनी ने 5175 रुपए प्रति महीने की EMI और 4590 रुपए प्रति महीने की रेंटल फिक्स की थी।

क्या था ‘BikeBot’ स्कैम?

कागज पर तो ये एक बहुत अच्छा आईडिया था – एप पर आधारित बाइक टैक्सी, ताकि नोएडा-गाजियाबाद से लेकर मेरठ-बागपत जैसे जगहों पर भी लोग वहाँ भी आसानी से पहुँच पाएँ जहाँ बड़ी गाड़ियाँ नहीं जा सकतीं या फिर ट्रैफिक ज्यादा हो। कंपनी का नाम रखा गया था ‘BikeBot’, जिसके पीछे एक महिला थी जिसने निवेशकों के साथ 15,000 करोड़ रुपएकी धोखाधड़ी की। आज उत्तर प्रदेश के मोस्ट वॉन्टेड अपराधियों में उसका नाम शुमार है, जो फरार है।

दीप्ति बहल बागपत के एक कॉलेज की प्रिंसिपल थी और गाजियाबाद के लोनी में रहती थी। उसका पति संजय भाटी अपने रिश्तेदारों के साथ मिल कर ‘गर्वित इनोवेशंस प्रमोटर्स लिमिटेड (GIPL)’ नामक रियल एस्टेट कंपनी चलाता था। 2010 में दोनों इस कंपनी के डायरेक्टर बने थे। दावा किया जाता है कि 2017 में महिला ने कंपनी से इस्तीफा देकर ‘BikeBot’ की शुरुआत की। कंपनी ने प्रत्येक बाइक पर 5% मासिक रेंटल इनकम का वादा किया था।

कंपनी ने निवेशकों को भरोसा दिलाने के लिए उनके साथ करारों पर भी हस्ताक्षर किया, वादा किया कि उनके पैसे सुरक्षित हैं। अगस्त 2017 में ये योजना शुरू हुई और 2019 की शुरुआत तक ये चला। नवंबर 2018 में कंपनी ई-बाइक्स की नई स्कीम लेकर आई, जिसमें पेट्रोल बाइक्स के मुकाबले सब्स्क्रिप्शन की राशि दोगुनी कर दी गई। 2019 में बड़ी संख्या में निवेशकों ने पुलिस में शिकायत करते हुए कहा कि उनसे जो रिटर्न देने का वादा किया गया था अब वो मिलने बंद हो गए हैं।

2019 में सूरजपुर स्थित अदालत में संजय भाटी ने तो आत्मसमर्पण कर दिया, लेकिन दीप्ति अभी तक फरार है। लाखों लोगों को 4500 करोड़ रुपए का चूना लगा और 250 केस दर्ज किए गए। इससे पहले जाँच एजेंसियों ने 15,000 करोड़ रुपए के घोटाले की बात कही थी। दीप्ति के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी है। शक है कि वो विदेश भाग गई है। ED ने इस मामले में 103 करोड़ रुपए की चल-अचल संपत्ति जब्त की है।

दीप्ति और उसके पति ने मिल कर इससे पहले भी कई पोंजी स्कीम चलाई थी। इनमें जिनका पैसा डूबा था, ‘BikeBot’ स्कैम में से कुछ पैसे उन्हें दिए गए। इसमें कुल्लू में एक रिजॉर्ट भी शामिल था। लोगों को लगा कि प्रतिवर्ष लगभग 1.7 लाख रुपए उन्हें मिलेंगे और एक बार निवेश करने पर उनके पास आय का अच्छा साधन हो जाएगा। लेकिन, ऐसे लाखों लोगों को चूना लगा। इस तरह के कई अन्य स्कीम्स के चक्कर में भोले-भाले निवेशक फँस जाते हैं, पुलिस को पता चलते-चलते बड़ा नुकसान हो गया रहता है।

‘ऐसे मंदिरों को बंद कर देना चाहिए, जो हिंसा-भेदभाव को बढ़ावा देते’ – उत्सव के लिए माँगने गए थे सुरक्षा, मद्रास हाईकोर्ट से मिली टिप्पणी

मद्रास हाईकोर्ट ने शुक्रवार (21 जुलाई 2023) को एक मंदिर के विवाद पर सुनाए जा रहे फैसले की अपनी टिप्पणी में कहा है कि मंदिरों के उत्सव अब भक्ति के बजाय शक्ति प्रदर्शन तक सीमित रह गए। जज ने ऐसे मंदिरों को बंद करने की सलाह दी है, जहाँ से हिंसा को बढ़ावा मिलता हो।

मद्रास हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी एक याचिका की सुनवाई के दौरान की है, जिसमें मंदिर के अंदर होने वाले उत्सव के लिए सुरक्षा की माँग की गई थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह टिप्प्पणी जस्टिस आनंद वेंकटेश ने थंगारासु उर्फ के थंगाराज की याचिका पर की।

याचिकाकर्ता अरुलमिघु श्री रूथरा महा कलियाम्मन अलयम के ट्रस्टी हैं। उन्होंने अदालत से अपने यहाँ होने वाले उत्सव के लिए सुरक्षा मुहैया कराने की माँग की थी। उन्होंने अदालत को बताया कि उत्सव के दौरान 2 पक्षों में विवाद है। इस विवाद को खत्म करवाने के लिए तहसीलदार की अध्यक्षता में पीस कमिटी की मीटिंग हुई थी, जो अंत में असफल रही थी।

दरअसल 2 पक्ष में यह झगड़ा इस बात को लेकर था कि मंदिर में मूर्तियाँ कौन रखेगा। सरकारी वकील ने कोर्ट को बताया कि आखिरकार स्थानीय तहसीलदार ने उत्सव मनाने की छूट तो दे दी थी लेकिन दोनों में से किसी भी पक्ष को मंदिर के अंदर मूर्ति रखने से रोक दिया था।

इसी मामले की सुनवाई करते हुए जज आनंद वेंकटेश ने कहा कि ऐसे मंदिरों को बंद कर देना चाहिए, जो हिंसा और भेदभाव को बढ़ावा देते हों। उन्होंने कहा कि इस तरह के त्योहारों के आयोजन में भक्ति के बजाय शक्ति प्रदर्शन अहमियत रखने लगा है। मद्रास हाईकोर्ट के जज आनंद वेंकटेश ने टिप्पणी में आगे कहा कि अहंकार को लेकर मंदिर में घुसने से भक्ति की मूल भावना खत्म हो जाती है।

थंगारासु उर्फ के थंगाराज की याचिका के मुताबिक वो मंदिर के वंशानुगत ट्रस्टी हैं। मंदिर में यह आयोजन 23 जुलाई से 1 अगस्त 2023 के बीच आयोजित होना है। याचिकाकर्ता ने किसी अप्रिय घटना को टालने के लिए पुलिस से सुरक्षा की माँग की थी।

हिंदू मंदिर और कोर्ट के फैसले

मद्रास हाईकोर्ट ने पिछले साल सार्वजनिक जमीन पर बनाई गई मंदिर को हटाने पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। तब हाईकोर्ट ने कहा था कि ईश्वर तो सर्वव्यापी हैं और उनकी दैवीय उपस्थिति के लिए किसी विशेष स्थान की आवश्यकता नहीं है।

साल 2021 में दिल्ली की साकेत अदालत ने कुतुब मीनार में 27 हिंदू और जैन मंदिरों को बनाए जाने वाली याचिका को खारिज कर दिया था। कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए जो तर्क दिया, वो था – “अतीत में की गई गलतियाँ वर्तमान या भविष्य की शांति को भंग करने का आधार नहीं हो सकतीं।”

मैतेई लोगों का मिजोरम से पलायन, उनकी दुकानों का बहिष्कार: मिजोरम पुलिस जुटी सुरक्षा में, मणिपुर सरकार करेगी एयरलिफ्ट

मिजोरम से मैतेई समुदाय के लोग पलायन कर रहे हैं। उनकी दुकानों का बहिष्कार किया जा रहा है। ऐसा हुआ है मिजोरम के विद्रोही संगठन मिज़ो नेशनल फ्रंट की एक शाखा पीस एकॉर्ड एमएनएफ रिटर्नीज एसोसिएशन (PAMRA) से मिली धमकी के बाद। इसके बाद राज्य पुलिस ने मैतेई समुदाय के लिए सुरक्षा कड़ी कर दी है।

पीस एकॉर्ड एमएनएफ रिटर्नीज एसोसिएशन (PAMRA) ने शुक्रवार (21 जुलाई 2023) को एक बयान जारी करके मिज़ोरम में रह रहे मैतेई समुदाय के लोगों को धमकाया है। धमकी में मैतेई समुदाय से कहा गया, “अपनी सुरक्षा के लिए जितनी जल्दी हो सके मिजोरम छोड़ कर चले जाओ।”

मिजोरम सरकार ने हालाँकि इस धमकी को सलाह बताया है। इसके साथ ही मैतेई समुदाय के निवासियों से राज्य न छोड़ने की अपील की गई है। मिजोरम सरकार भले ही इस धमकी को सलाह बता रही लेकिन मणिपुर की सरकार पूरे मामले पर नजर रखे हुए है और जरूरत पड़ने पर प्रभावित मैतेई समुदाय के लोगों को एयरलिफ्ट करने का भरोसा दिया है।

मिजोरम की पुलिस ने इस धमकी के बाद चौकसी बढ़ा दी है। उत्तरी क्षेत्र के DIG ने मैतेई लोगों की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करने के निर्देश दिए हैं। वहीं पुलिस के तमाम प्रयासों और भरोसा देने के बावजूद मैतेई लोगों ने मिजोरम छोड़ना शुरू कर दिया है।

एक अनुमान के मुताबिक अकेले मिजोरम की राजधानी आइज़ोल में सरकारी कर्मचारी, छात्र और मजदूर मिला कर लगभग 2000 मैतेई रहते हैं। इसमें पुरुष और महिलाएँ दोनों शामिल हैं। शनिवार (22 जुलाई) तक इसमें से कई लोग मणिपुर चले गए। दावा यह भी किया जा रहा है कि इस धमकी के बाद मिजोरम में मैतेई लोगों की दुकानों का भी बहिष्कार किया गया है।

मैतेई समुदाय को जो धमकी दी गई है, जिसके कारण लोग पलायन करने पर मजबूर हो गए, उसे मिजोरम का गृह विभाग धमकी नहीं बल्कि सद्भावना में भेजा गया संदेश बता रहा। मैतेई लोगों को पूरी तरह से सुरक्षित बताते हुए मिज़ोरम के गृह आयुक्त एच लालेंगमाविया ने बताया कि उन्होंने इस संबंध में मिज़ो नेशनल फ्रंट की एक शाखा पीस एकॉर्ड एमएनएफ रिटर्नीज एसोसिएशन (PAMRA) से बात की है, जो अपने बयान का गलत अर्थ निकाले जाने की सफाई दे रहा है।

मिज़ोरम के गृह आयुक्त ने यह भी बताया कि PAMRA अपने इस बयान को वापस भी लेगा। मिज़ोरम सरकार ने अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की और ऑल मिजोरम-मणिपुर एसोशिएशन के लोगों की मीटिंग बुला कर मैतेई लोगों से राज्य न छोड़ने की अपील की है।

मणिपुर सरकार हालाँकि हालात पर नजर रखे हुए है। राज्य सरकार के प्रवक्ता सपम रंजन सिंह के मुताबिक शुरुआत में तनाव बढ़ा था लेकिन मिज़ोरम सरकार के प्रयासों से वह कम हुआ है। इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि जरूरत पड़ा तो मणिपुर के लोगों को वहाँ से लाने के लिए विमान उपलब्ध करवाए जाएँगे।

‘ईमानदार सैन्य अधिकारी पर कलंक लगाया, अब ₹2 करोड़ दो’: 22 साल बाद तरुण तेजपाल को HC का आदेश, ‘तहलका’ की स्टिंग निकली फर्जी

दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार (21 जुलाई, 2023) को ‘तहलका’ पत्रिका के मुख्य संपादक रहे तरुण तेजपाल को मानहानि के मामले का दोषी पाते हुए 2 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया। उन्हें ये 2 करोड़ रुपए मेजर जनरल MS अहलूवालिया की याचिका पर ये फैसला सुनाया। ये याचिका 2002 में ही दायर की गई थी। 21 साल बाद इस मामले में फैसला आया है। जिस खबर से ये मामला जुड़ा हुआ है, उसे मार्च 2001 में पत्रिका में प्रकाशित किया गया था।

इस खबर में MS अहलूवालिया को ‘मिडलमैन’ बताते हुए लिखा गया था कि नई रक्षा तकनीकों के आयत के लिए हुए करार में भ्रष्टाचार हुआ था। जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने माना कि न सिर्फ मेजर जनरल एमएस अहलूवालिया की प्रतिष्ठा को इससे ठेस पहुँची, बल्कि जनता की नजर में भी उन्हें अपमान का सामना करना पड़ा। साथ ही गंभीर भ्रष्टाचार के आरोपों के कारण उनके चरित्र की भी बदनामी हुई। हाईकोर्ट ने माना कि इसके बाद किसी भी प्रकार के खंडन से इसकी भरपाई संभव नहीं है।

हाईकोर्ट ने इसका जिक्र किया कि कैसे मेजर जनरल एमएस अहलूवालिया ने इस मामले में माफ़ी माँगने के लिए भी कहा, लेकिन ‘तहलका’ पत्रिका ने इनकार कर दिया था। दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि दोषी द्वारा माफ़ी माँगने का अब कोई फायदा नहीं है, क्योंकि इतने वर्षों में याचिकाकर्ता काफी भुगत चुके हैं। अदालत ने कहा कि एक सैन्य अधिकारी के साथ ये सब ठीक नहीं हुआ। इसके बाद 2 करोड़ रुपए जुर्माने के रूप में देने का आदेश दिया।

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि किसी ईमानदार सैन्य अधिकारी की प्रतिष्ठा धूमिल करने का इससे ज्यादा बेशर्म मामला नहीं हो सकता है। साथ ही ये भी माना कि उक्त सैन्य अधिकारी ने किसी भी प्रकार के घुस को स्वीकार करने से इनकार कर दिया, जबकि उन्हें कई बार ऑफर मिला। एक वीडियो टेप में एक रिपोर्टर ने उन्हें 50,000 रुपए घूस की पेशकश की थी। इस खबर को कई मीडिया वालों ने उठाया था, ये टीवी पर चला था और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी काफी अटेंशन इसे मिला था।

इसके बाद भारतीय सेना ने भी इस पर संज्ञान लेते हुए जाँच का आदेश दिया था। इस जाँच में उन्हें क्लीन-चिट मिल गई थी और सिर्फ इस बात पर आपत्ति जताई गई थी कि उन्होंने संदिग्ध चरित्र वाले लोगों से मिलना स्वीकार किया। दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि भारतीय सेना में मेजर जनरल के पद पर रहे याचिकाकर्ता एमएस अहलूवालिया प्रतिष्ठा वाले व्यक्ति हैं। साथ ही कहा कि ऐसे व्यक्ति पर 50,000 रुपए घूस का आरोप लगने से ज्यादा बदनामी वाला आरोप नहीं हो सकता।

कोर्ट ने कहा कि मंशा जो भी रही हो, जिस तरीके से इस मामले की रिपोर्टिंग की गई वो सही नहीं था। ‘तहलका’ ने ‘Operation West End’ नामक इस रिपोर्ट में भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था। आरोप लगाया गया था कि उन्होंने अंडरकवर जर्नलिस्ट से 10 लाख रुपए और ब्लू लेबल व्हिस्की की एक बोतल की माँग की थी। हाईकोर्ट ने कहा कि खोया धन पाया जा सकता है, लेकिन खोई प्रतिष्ठा नहीं। अब ये स्टिंग फर्जी साबित हो गया है।

बता दें कि इस मामले का बड़ा राजनीतिक प्रभाव भी पड़ा था। तब भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे बंगारू लक्ष्मण को भी इस्तीफा देना पड़ा था। 2012 में एक स्पेशल CBI कोर्ट ने उन्हें 4 साल की सज़ा सुनाई थी। 2014 में उनका निधन भी हो गया था। इस स्टिंग के ही अन्य हिस्सों के कारण ये मामले सामने आए थे। ‘तहलका’ का दावा था कि मेजर जनरल एमएस अहलूवालिया ने 50,000 रुपए पेशगी के तौर पर इस स्टिंग में लिए थे।

भारत में EV प्लांट खोलना चाहती थी चीन की इलेक्ट्रिक कार कंपनी BYD मोटर्स, मोदी सरकार ने निवेश प्रस्ताव ठुकराया

भारत में पैर जमाने की कोशिशों में लगी चीन की इलेक्ट्रिक कार कंपनी बीवाईडी (BYD) को तगड़ा झटका लगा है। कंपनी हैदराबाद की मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के साथ मिलकर इलेक्ट्रिक कार (EV) मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाना चाहती थी। लेकिन उसके 1 अरब डॉलर (करीब 81 अरब रुपए) के निवेश के प्रस्ताव को केंद्र की मोदी सरकार ने ठुकरा दिया है। ऐसा सुरक्षा कारणों से किया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दोनों कंपनियों ने उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) को एक आवेदन दिया था। इस आवेदन में कंपनियों की ओर से हैदराबाद में इलेक्ट्रिक व्हीकल प्लांट स्थापित करने का प्रस्ताव दिया गया था। इस प्रस्ताव के तहत चीनी कंपनी BYD भारत में 1 अरब डॉलर का निवेश करना चाहती थी। दोनों कंपनियों के आवेदन पर डीपीआईआईटी ने अन्य विभागों से राय माँगी थी।

ET ने अपनी रिपोर्ट में एक अधिकारी के हवाले कहा है कि इस प्रस्ताव पर विचार-विमर्श के दौरान चीनी कंपनी के भारत में निवेश को लेकर सुरक्षा कारणों पर बात की गई। अधिकारियों ने सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त की। वहीं एक अन्य अधिकारी ने कहा है कि विदेशी निवेश को लेकर मौजूदा नियम इस तरह की अनुमति नहीं देते। बता दें कि चीनी इलेक्ट्रिक कंपनी BYD और मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड ने साथ मिलकर सालाना 10000-15000 इलेक्ट्रिक कारों के निर्माण का प्रस्ताव रखा था। इसमें मुख्य निवेशक मेघा इंजीनियरिंग थी। वहीं बीवाईडी अपनी टेक्नोलॉजी के साथ भारत के कार बाजार में पकड़ मजबूत करना चाहती थी।

गौरतलब है कि बिक्री के मामले में दुनिया की टॉप मोस्ट इलेक्ट्रिक व्हीकल कंपनी BYD पहले ही भारत में इलेक्ट्रिक व्हीकल के 2 मॉडल पेश कर चुकी है। इसके अलावा बीवाईडी ने इलेक्ट्रिक बसों के लिए MEIL की सहायक कंपनी ओलेक्ट्रा ग्रीनटेक को टेक्निकल सहायता दे रही है। आँकड़ों पर नजर डालें तो ओलेक्ट्रा ग्रीन टेक को पहले ही 2000 बसों का ऑर्डर मिल चुका है। इन बसों की कीमत 3000-3500 करोड़ रुपए है। यह ऑर्डर अगले 12-18 महीनों में पूरा हो जाएगा।

बता दें कि अप्रैल 2020 में मोदी सरकार ने देश के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की नीति में बदलाव किया था। इस बदलाव के बाद भारत की जमीन से जुड़ी हुए देश या दूसरे शब्दों में कहें तो भारत के साथ भूमि-सीमा साझा करने वाले देशों को निवेश से पहले सरकार की मंजूरी अनिवार्य हो गई है। अब ऐसे देशों से आने वाले निवेश के प्रस्ताव को देखने और उन्हें मंजूरी देने के लिए गृह सचिव की अध्यक्षता में एक समिति काम करती है। बेशक FDI में हुआ बदलाव किसी एक देश के लिए नहीं है। लेकिन देश की कंपनियों में चीन के बढ़ते दखल और चीन की ‘कर्ज और कब्जा’ (डेट ट्रैप) नीति को रोकने के लिए केंद्र सरकार के इस प्रयास को जरूरी कदम के रूप में देखा जा रहा है।

‘घरों पर लेटर लगा बताते थे आज किसकी होगी हत्या’: अब ‘कश्मीर फाइल्स’ की वेब सीरीज, पीड़ित खुद बताएँगे किस बुजुर्ग की टाँगों में डाली कील, कैसे आयरन प्रेस से किया टॉर्चर

जिस जम्मू कश्मीर को कभी धरती का स्वर्ग कहा जाता था, वो अपनी राजनीतिक भूक्षेत्र के कारण एक युद्ध के क्षेत्र में बदल गया। आखिर कश्मीरी पंडितों के पलायन और अनुच्छेद-370 को हटाए जाने के पीछे क्या-क्या कारण थे? इसी सवाल का जवाब देने ZEE5 नामक OTT प्लेटफॉर्म पर ‘The Kashmir Files: Unreported’ नामक वेब सीरीज आ रही है। ये डॉक्यूमेंट्री की शक्ल में है, जिसमें पीड़ितों और विशेषज्ञों से बात की गई है।

‘द कश्मीर फाइल्स: अनरिपोर्टेड’ के निर्देशक विवेक अग्निहोत्री ही हैं, जिन्होंने ‘द कश्मीर फाइल्स’ बनाई थी। ट्रेलर की शुरुआत में एक महिला की आवाज गूँजती है, “कश्मीर में यश चोपड़ा फ़िल्में बना रहे थे, आप ‘शिकारा’ देखते थे। लेकिन, कश्मीर एक और अलग भी था जिसे हम देख रहे थे।” इसके बाद ‘आज़ादी-आज़ादी’ के नारे लगाती हुई भीड़ को दिखाया गया है। बैकग्राउंड में विवेक अग्निहोत्री की आवाज आती है, “ये कैसी पीड़ा थी, जिसे सहते-सहते आप मर भी जाएँ और उसका कुछ नाम ही न हो।”

इसके बाद वो महिला फिर से बताती हैं कि लाउडस्पीकर से जोर-जोर से आवाजें आती थीं – “हम क्या चाहते, आज़ादी।” एक बुजुर्ग महिला भी बताती हैं कि उस माहौल में डर लगता था, कि हम मरने वाले हैं। फिर लोगों ने बताया कि कैसे वो कहते थे कि हमें कश्मीर चाहिए, लेकिन हिन्दू महिलाओं के साथ, बिना हिन्दू मर्दों के। एक महिला ने बताया कि घर के बाहर लेटर्स लगा दिए जाते थे कि आज किसे मारा जाएगा। एक महिला ने बताया कि एक बुजुर्ग की टाँगों में कील डाल दी गई थी।

आतंकी कह रहे थे कि ये बूढ़े हैं, इन पर गोली क्यों खर्च करनी? एक व्यक्ति ने आयरन प्रेस से टॉर्चर किए जाने की बात कही। एक महिला ने बताया कि हम कश्मीरी कुत्ते-बिल्लियों की तरह मर रहे थे। स्क्रीन पर आकर विवेक अग्निहोत्री कहते हैं, “भारत के इतिहास में शायद ऐसा कभी नहीं हुआ।” फिर आतंकी बिट्टा कराटे का इंटरव्यू दिखाया गया है, जिसमें उसने कहा था कि अगर उसके आका उसकी माँ को मारने के लिए कहते तो भी वो मार देता।

बताया गया है कि कैसे पाकिस्तान द्वारा आतंकियों को हथियारों का प्रशिक्षण दिया जा रहा था। एक महिला ने कहा कि हमें इसीलिए मारा गया क्योंकि हमने भारत का प्रतिनिधित्व किया। एक पीड़ित ने बताया कि अपने देश में डर कर रहना पड़ेगा, ये नहीं पता था। विवेक अग्निहोत्री की पत्नी पल्लवी जोशी भी इसमें दिखाई देती हैं। वो कहती हैं, “इन कश्मीरी पंडितों का सत्य आखिर क्या था?” एक कश्मीरी पंडित ने रोते हुए कहा कि वो रोज घर जाना चाहिए हैं, लेकिन होटल नहीं बल्कि अपने घर में।

निर्देशक विवेक अग्निहोत्री ने कहा कि ये इतिहास का वो चैप्टर है जिसे मिटाने की पूरी कोशिश की गई, लेकिन आपका हक़ बनता है कि आप इसे जानें। उन्होंने से सबसे ज्यादा मानवीय टच वाली वेब सीरीज करार दिया। बता दें कि इसे डॉक्यूमेंट्री स्टाइल में बनाया गया है। इस बारे में अधिकतर रिसर्च विवेक अग्निहोत्री और पल्ल्वी जोशी ने ‘द कश्मीर फाइल्स’ बनाने के दौरान ही कर ली थी। कई कहानियाँ फिल्म में छूट गई थीं, जिन्हें तथ्यों के साथ इसमें दिखाया जाएगा।

बजरंग-विनेश को एशियन गेम्स में बिना ट्रायल सीधी एंट्री: दिल्ली हाईकोर्ट ने IOA के फैसले में हस्तक्षेप करने से किया इनकार, रद्द की याचिका

दिल्ली उच्च न्यायालय ने शनिवार (22 जुलाई, 2023) को पहलवानों बजरंग पूनिया और विनेश फोगाट को बिना ट्रायल एशियन गेम्स में सीधी एंट्री दिए जाने के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद ने इस मामले की सुनवाई की। महिला अंडर-20 वर्ल्ड चैंपियन अंतिम पंघाल और अंडर-23 एशियन चैंपियन सुजीत कलकल ने इस संबंध में याचिका दायर की थी और इस फैसले को चुनौती दी थी, जिसे दिल्ली हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया।

जज ने कहा, “इस याचिका को रद्द किया जाता है।” जहाँ बजरंग पूनिया को 65 किलोग्राम वर्ग में एशियन गेम्स में भेजा जा रहा है, वहीं विनेश फोगाट को महिलाओं के 53 किलोग्राम वाग में भेजा जा रहा है। पंघाल और कलकल ने इस संबंध में 19 जुलाई को दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हालाँकि, अब दिल्ली हाईकोर्ट ने भी ‘भारतीय ओलंपिक संघ (IOA)’ की एड-हॉक समिति के फैसले को जायज ठहराया है

अधिवक्ताओं हृषिकेश बरुआ और अक्षय कुमार के माध्यम से ये याचिका दायर की गई थी। कोर्ट ने कहा कि वो याचिकाकर्ताओं की योग्यता पर सवाल नहीं खड़ा कर रहा है, जिन्होंने पहलवानी की दुनिया में नाम कमाया है। लेकिन, साथ में ये भी कहा कि वो इस फैसले को तर्कविरुद्ध या अव्यवहारिक नहीं कहा जा सकता। हाईकोर्ट ने कहा कि ये नहीं कहा जा सकता कि देश के हित के विरोध में ये फैसला लिया गया है, या फिर किसी को फेवर देने के लिए ये फैसला लिया गया।

वहीं ओलंपिक मेडलिस्ट पहलवान रहे योगेश्वर दत्त ने भी इसका विरोध किया है। कहा है कि कुश्ती की बहुत बदनामी हो रही है। उन्होंने कहा, “पूरा देश कन्फ्यूज है कि ये हो क्या रहा है। चीफ कोच से मैंने बात कि उन्होंने कहा कि उनका इससे कोई लेना-देना नहीं है। कमिटी में कुछ लोग हैं, जिन्होंने ये फैसला लिया है। चीफ कोच की सहमति के बिना फैसले नहीं लिए जा सकते। कोई कैम्प लगा कर फिटनेस टेस्ट भी नहीं लिया गया। कई पहलवान दुःख में हैं, वो ट्रायल के लिए गुहार लगा रहे हैं। कमिटी ने कोई निष्पक्षता नहीं बरती है। अगर बिना ट्रायल भेजना है तो पूरी टीम भेजिए – ऐसा क्यों नहीं हुआ, इसका जवाब देना पड़ेगा।”

‘ऑफिस में बुला कर प्राइवेट अंगों से छेड़खानी करता है’: झारखंड में प्रिंसिपल मोहम्मद शमशाद अली छात्राओं का करता था यौन शोषण, CM सोरेन के क्षेत्र में घटना

झारखंड में एक सरकारी विद्यालय के प्रधानाध्यापक पर छात्राओं के यौन शोषण का आरोप लगा है। लड़कियों ने अपने अभिभावकों को जाकर इस बारे में बताया, जिसके बाद गुस्साए लोगों ने आरोपित की पिटाई भी की। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने भी इस संबंध में ट्वीट किया है। उन्होंने उस पत्र को शेयर किया, जो पीड़ित छात्रों में से एक के पिता ने थाना प्रभारी को लिखा है। इसमें लिखा है कि कैसे प्रधानाध्यापक ने 13 वर्षीय छात्र के प्राइवेट अंगों के साथ छेड़खानी की।

पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने लिखा, “यह पत्र एक लाचार पिता ने थाना प्रभारी बरहेट – साहिबगंज को लिखा है। पत्र पढ़ कर दिल दहल जा रहा है। आरोप है कि उत्क्रमित उच्च विद्यालय, पंचकठिया का प्रधानाध्यापक मोहम्मद शमशाद अली एक छात्रा के साथ यौन शोषण करने का बार-बार प्रयास करता है। जब बेटी ने यह बात घरवालों को बताई और बात आगे बढ़ी तो अन्य छात्राओं ने भी आगे आकर अपनी आपबीती सुनाई।”

उन्होंने ध्यान दिलाया कि ये मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का निर्वाचन क्षेत्र है, ऐसे में उम्मीद है कि मुख्यमंत्री इस मामले में स्वतः संज्ञान लेंगे और पुलिस को कार्रवाई के लिए कहेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षक की जाति या धर्म देखकर कार्रवाई में कोताही नहीं होनी चाहिए। घायल मोहम्मद शमशाद अली का इलाज फ़िलहाल स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में चल रहा है। छात्राओं का कहना है कि किसी ने किसी बहाने से अपने कमरे में बुला कर प्रिंसिपल उनके साथ छेड़खानी करता था।

पीड़िताओं की संख्या एक दर्जन सभी अधिक है। इन सभी ने अपने पैरेंट्स को बताया, जिन्होंने स्कूल पहुँच कर प्रिंसिपल से पूछताछ की। अभिभावकों का कहना है कि प्रिंसिपल ने महिलाओं के साथ भी छेड़खानी की। प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी मोहम्मद अहमद हुसैन ने भी इस मामले की जानकारी अस्पताल पहुँच कर ली है। शमशाद अली ने आरोपों से इनकार किया है। पत्र में छात्र ने लिखा है कि 2 दिनों से उसने स्कूल जाना बंद कर दिया था, जिस पर पिता ने कारण पूछा तो उसने प्रिंसिपल की करतूतों के बारे में बताया।