मणिपुर का एक वीडियो शुक्रवार (21 जुलाई, 2023) को सोशल मीडिया में वायरल हुआ, जिसमें 2 महिलाओं को नग्न कर भीड़ द्वारा उनका परेड निकाले जाते हुए देखा गया। पता चला कि ये घटना वीडियो वायरल होने से ढाई महीने पहले की है। 3 महिलाओं के साटन ज्यादतियाँ हुई थीं, उनका गैंगरेप भी किया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने मामला का संज्ञान लिया। प्रधानमंत्री ने कार्रवाई का आश्वासन दिया। संसद में विपक्ष ने इस पर हंगामा किया। वहीं अब बिहार और पश्चिम बंगाल से महिलाओं के साथ ज्यादतियाँ की खबरें आई हैं।
पश्चिम बंगाल: मालदा में 2 महिलाओं को पॉकेटमार बता कर पीटा
ये घटना 19 जुलाई, 2023 की है। पश्चिम बंगाल के मालदा में पाकुआहाट नामक जगह पर 2 महिलाओं के ऊपर अत्याचार किया गया। ये इलाका बामनगोला थाना क्षेत्र की पुलिस के अंतर्गत आता है। दोनों महिलाओं को पॉकेटमार होने के संदेह पर पकड़ लिया गया। इसके बाद वहाँ भीड़ जुट गई और उन्होंने इन महिलाओं को बुरी तरह पीटा। लोगों के सामने ही उनकी साड़ियाँ फाड़ डाली गईं और उन्हें नग्न कर दिया गया। इतना ही नहीं, उनके बाल खींचे गए और जूतों से भी उनकी पिटाई की गई।
इस दौरान दोनों महिलाओं किसी तरह अपने तन को ढँकने का प्रयास करती रहीं। वीडियो में देखा जा सकता है कि उन्हें बचाने के लिए भी कोई नहीं आया। ये महिलाएँ मानिकचक गाँव की रहने वाली हैं। भाजपा नेता अमित मालवीय ने बताया है कि ये दोनों महिलाएँ जनजातीय समाज से थीं। उन्होंने कहा कि महिलाओं के साथ क्रूरता होती रही और पुलिस देखती रही। उन्होंने याद दिलाया कि ममता बनर्जी राज्य की मुख्यमंत्री होने के साथ-साथ गृह मंत्री भी हैं, ऐसे में उन्हें इस पर एक्शन लेना चाहिए था।
उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी ने इसकी बजाए चुप रहना पसंद किया, घटना की निंदा तक नहीं की। अमित मालवीय ने कहा कि इससे मुख्यमंत्री के रूप में उनकी विफलता का पता चलता, इसीलिए उन्होंने ऐसा नहीं किया। भाजपा नेता प्रेम शुक्ला ने भी ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए कहा कि वो मणिपुर को लेकर चिंता जता रही हैं, जबकि पश्चिम बंगाल में बहन-बेटियाँ सुरक्षित नहीं हैं। इससे पहले हावड़ा के दक्षिण पाँचला में 40 TMC कार्यकर्ताओं द्वारा एक महिला को नग्न कर उसका जुलूस निकाले जाने के आरोप लगे थे।
बिहार: बेगूसराय में में लड़की के साथ ज्यादतियाँ, नग्न कर पीटा
बिहार के बेगूसराय में भी एक दलित नाबालिग लड़की के साथ क्रूरता की घटना सामने आई। उसे निर्वस्त्र कर के उसी पिटाई की गई, जबकि वो गुहार लगाती रही और मिन्नतें करती रही। पुलिस ने इसके बाद मामला दर्ज किया है। बिहार पुलिस ने पॉक्सो एक्ट के तहत कार्रवाई की बात कही है। तेघड़ा थाना क्षेत्र के पकठौल गाँव की इस घटना का वीडियो भी वायरल हुआ है। लोगों का कहना था कि उन्होंने संगीत शिक्षक और इस लड़की को आपत्तिजनक अवस्था में पकड़ा है।
#BiharPolice पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए वचनबद्ध है! बेगूसराय वायरल वीडियो के मामले में पुलिस अधीक्षक बेगूसराय द्वारा निरंतर प्रेस वार्ता कर पुलिस द्वारा किए जा रहे प्रयास एवं अपराधियों की गिरफ्तारी को लेकर अद्यतन जानकारी दी जा रही है। . .#HainTaiyaarHum#viralvideopic.twitter.com/804zSd1pBy
उक्त गायक को भी गिरफ्तार कर लिया गया है। भीड़ ने गायक और लड़की, दोनों की पिटाई की। लड़की गुहार लगाती रही, लेकिन लोग लात-घूसे बरसाते रहे। लड़की के साथ अभद्रता की गई। उसके कपड़ों को फाड़ डाला गया। महिला थानाध्यक्ष के जरिए पीड़िता का बयान रिकॉर्ड कराया गया है। पीड़िता ने बताया कि गायक किशुनदेव चौरसिया ने इसके साथ रेप किया। पुलिस ने बताया कि हमलावरों की पहचान कर ली गई है।
केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने ऐसी घटनाओं पर आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा है, “देश के कुछ राज्यों में महिलाओं के खिलाफ अपराध की घटनाएँ बढ़ी हैं और कई राज्यों में इसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। बेगूसराय में जो हुआ वह हमारे सामने है, लेकिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस पर एक शब्द भी नहीं बोला। महिलाओं के खिलाफ अपराध में राजस्थान नंबर वन राज्य बन गया है।”
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) ने शनिवार (22 जुलाई 2023) को अपने पूरे परिवार के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) से मुलाकात की। उनके साथ पिता, पत्नी, बेटा, बहु और पोता थे। सीएम शिंदे ने रायगढ़ में भूस्खलन के चलते अनाथ हुए बच्चों को गोद लेने की घोषणा भी की है। इन बच्चों की शिक्षा समेत अन्य सभी चीजों की व्यवस्था श्रीकांत शिंदे फाउंडेशन करेगी।
पीएम मोदी से मुलाकात के दौरान सीएम एकनाथ शिंदे के साथ उनके पिता संभाजी शिंदे, पत्नी लता शिंदे, शिवसेना सांसद और बेटा श्रीकांत शिंदे, बहु रुषाली शिंदे और पोता रुद्राक्ष मौजूद रहे। मुलाकात का समय देने के लिए सीएम शिंदे ने प्रधानमंत्री मोदी के प्रति आभार जताया है। साथ ही कहा है कि कई विकासकारी परियोजनाओं पर इस दौरान बात हुई। सीएम एकनाथ शिंदे ने कहा, “पिताजी व पूरे परिवार के साथ आदरणीय प्रधानमंत्री मोदी जी से हमने मुलाकात की है। इस मुलाकात के दौरान उन्होंने काफी समय हमारे परिवार को दिया। इसके लिए मैं उनका आभार व्यक्त करता हूँ।”
#WATCH | Delhi: "My family and I met PM Modi. He gave us a lot of his time and I would like to thank him for it. In between all this, we discussed the rain situation, the Raigad incident, ongoing projects in the state, and the redevelopment projects in Mumbai. We held serious… https://t.co/Lbefjuyqcspic.twitter.com/4xiaj6BgrC
उन्होंने आगे कहा है, “इस सबके बीच राज्य की जो परिस्थिति है, बारिश हो रही है और रायगढ़ में जो हादसा हुआ, उसकी चर्चा हुई। इसके अलावा राज्य में चल रही परियोजनाओं को लेकर बात हुई। धारावी और मुंबई की अटकी हुई पुनर्विकास परियोजनाओं पर भी चर्चा की। लोगों को घर देना प्रधानमंत्री जी का अहम प्रकल्प है। इसे उन्होंने प्राथमिकता दी हुई है।”
रायगढ़ में अनाथ हुए बच्चों को लेंगे गोद
रायगढ़ जिले के इरशालवाड़ी गाँव में 19 जुलाई, 2023 की रात हुए भूस्खलन में 25 लोगों की मौत हो चुकी है। 84 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। कई ऐसे परिवार हैं जिनके एक से अधिक सदस्यों की मौत हो गई है। कुछ बच्चों के माता-पिता दोनों की मौत हो गई है। ऐसे में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने अनाथ हुए बच्चों को गोद लेने का ऐलान किया है। 2 साल से लेकर 14 साल तक के ऐसे सभी बच्चे अब श्रीकांत फाउंडेशन की जिम्मेदारी होंगे।
शिवसेना (शिंदे गुट) की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है, “इरशालवाड़ी भूस्खलन में कई बच्चों ने अपने माता-पिता दोनों को खो दिया है। सीएम एकनाथ शिंदे ने इन बच्चों को गोद लेने और उनके अभिभावक बनने की घोषणा की है। सीएम ने घोषणा की है कि 2 साल से 14 साल की उम्र के इन अनाथ बच्चों की देखभाल श्रीकांत शिंदे फाउंडेशन द्वारा की जाएगी।” वहीं, सीएम शिंदे के ओएसडी मंगेश चिवटे ने कहा है, “शिक्षा और अन्य चीजों पर सभी खर्च सीएम एकनाथ शिंदे के बेटे द्वारा संचालित श्रीकांत शिंदे फाउंडेशन के माध्यम से किया जाएगा। प्रत्येक बच्चे की शिक्षा के लिए एक एफडी की जाएगी।”
गौरतलब है कि सीएम एकनाथ शिंदे ने हादसे की जानकारी सामने आने के बाद 20 जुलाई को मौके पर पहुँचकर राहत और बचाव कार्य का जायजा लिया था। मृतकों के परिजनों को 5-5 लाख रुपए की सहायता राशि देने का ऐलान किया था।
दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व जज गौरांग कंठ ( Justice Gaurang Kanth) का एक पत्र सोशल मीडिया में वायरल है। ये पत्र उन्होंने दिल्ली पुलिस के ज्वाइंटकमिश्नर को लिखा है। इसमें अपने आवास पर तैनात पुलिसकर्मियों को सस्पेंड करने को कहा है। बताया है कि इन पुलिसकर्मियों की लापरवाही के कारण उन्होंने अपना पालतू कुत्ता खो दिया है।
यह पत्र 12 जून 2023 को लिखा गया था। लेकिन वायरल सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) डीवाई चंद्रचूड़ की एक नसीहत के बाद हुआ है। इसमें सीजेआई ने जजों को अपने प्रोटोकॉल का उचित तरीके से इस्तेमाल करने को कहा था। जस्टिस गौरांग का तबादला कलकत्ता हाई कोर्ट में हो चुका है।
वायरल चिट्ठी में जस्टिस गौरांग कंठ ने दिल्ली पुलिस के संयुक्त आयुक्त से कहा है, “मैं यह चिट्ठी बहुत दर्द और पीड़ा के साथ लिख रहा हूँ। मेरे सरकारी आवास पर सुरक्षा में तैनात अधिकारियों में निष्ठा की कमी और अक्षमता के कारण, मैंने अपना पालतू कुत्ता खो दिया है। बार-बार दरवाजा बंद रखने के लिए कहने के बावजूद, मेरे आवास पर तैनात सुरक्षा अधिकारी मेरे निर्देशों का पालन करने और अपने पेशेवर कर्तव्य को पूरा करने में विफल रहे हैं। कर्तव्य के प्रति ऐसी लापरवाही और अक्षमता पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है, क्योंकि इससे मेरे जीवन और स्वतंत्रता को गंभीर खतरा हो सकता है।”
Judge seeks suspension of police officers who failed to keep the door of his residence locked resulting in the loss of his pet dog.
Ex-Delhi HC Judge J Gaurang Kanth (now transferred to Calcutta HC) wrote to Delhi JCP seeking disciplinary action against officers. pic.twitter.com/MS0QauV6H7
पत्र में आगे जस्टिस गौरांग कंठ ने अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता जताते हुए कहा है कि इन पुलिसकर्मियों को तुरंत सस्पेंड किया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने दिल्ली पुलिस से इस मामले में तीन सप्ताह में रिपोर्ट भी तलब की थी। यह स्पष्ट नहीं है कि जस्टिस की इस चिट्ठी पर दिल्ली पुलिस ने क्या कार्रवाई की है।
इससे पहले इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस गौतम चौधरी इसी तरह के कारणों से चर्चा में आए थे। उन्हें ट्रेन यात्रा के दौरान असुविधा हुई थी। इसके बाद हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार ने इस असुविधा के लिए दोषी अधिकारियों से स्पष्टीकरण माँगा था। इसके बाद सीजेआई चंद्रचूड़ ने घटना पर नाराजगी जताई थी। उन्होंने जजों को नसीहत देते हुए कहा था कि प्रोटोकॉल के तहत मिलने वाली सुविधा पर विशेषाधिकार नहीं है। इन सुविधाओं के इस्तेमाल इस तरह से होना चाहिए जिससे किसी को तकलीफ नहीं हो।
क्रिस्टोफर नोलन की फिल्म ‘Oppenheimer’ सिनेमघरों में आ गई है। ये फिल्म परमाणु बम का अविष्कार करने वाले अमेरिकन थ्योरेटिकल फिजिसिस्ट रॉबर्ट जे ओपेनहाइमर के जीवन पर आधारित है, जिन्हें अमेरिका ने ‘प्रोजेक्ट Y’ का निदेशक बनाया था। उनके द्वारा बनाए गए बम को ही जापान में गिराया गया था। अब इस फिल्म के कुछ दृश्यों में हिन्दू धर्म ग्रन्थ भगवद्गीता का अपमान किए जाने की खबर सामने आई है।
Oppenheimer: सेक्स सीन, गीता पढ़ती नंगी लड़की
फिल्म में एक सेक्स वाले दृश्य में दिखाया गया है कि अभिनेता लड़की को भगवद्गीता पढ़ने के लिए देता है। युवती पूछती है कि ये क्या है? इस पर वो बताता है कि ये संस्कृत में है। इसके बाद वो इसे पढ़ने के लिए कहता है। इसके बाद वो ग्रन्थ का वो हिस्सा पढ़ती है, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण अपने विष्णु के रूप में अर्जुन को अपना विकराल स्वरूप दिखाते हैं। इसके बाद अभिनेता युवती को आगे पढ़ने के लिए कहता है।
इस दृश्य में अभिनेता और अभिनेत्री, दोनों ही बिस्तर पर नंगे हैं। युवती को पूरी तरह न्यूड दिखाया गया है और उसके स्तन पर्दे पर दिख रहे होते हैं। आगे वो भगवद्गीता का वो श्लोक पढ़ती है, जिसे रॉबर्ट ओपेनहाइमर दोहराया करते थे। हालाँकि, ‘जेम्स ऑफ बॉलीवुड’ ने भी इस दृश्य को लेकर ये कहते हुए आलोचना की है कि इतिहास में ऐसा कहीं नहीं लिखा कि सेक्स करते समय वो गीता पढ़ते थे। साथ ही सवाल दागा कि भारत इस चीज के साथ इतना सहज क्यों है?
There is no historical evidence that J Robert #Oppenheimer used to receive Bhagvad Geeta Paath lessons from his sex-partners during sex.
Woke Hollywood has no reason to give any more value to Geeta than a petty prop.
— Gems of Bollywood बॉलीवुड के रत्न (@GemsOfBollywood) July 21, 2023
लोग पूछ रहे हैं कि आखिर भारत में सेंसर बोर्ड ने इस दृश्य को कैसे पास कर दिया? लोगों ने सवाल किया है कि क्या जिस तरह से सेक्स सीन में गीता को दिखाया गया है, वैसे किसी अन्य मजहब की पुस्तक दिखाई जा सकती है? हालाँकि, दृश्य में गीता का नाम नहीं लिया गया है, सिर्फ इसे संस्कृत पुस्तक कहा गया है। इस दृश्य में वैज्ञानिक को एक कम्युनिस्ट लड़की के साथ सेक्स करते हुए दिखाया गया है। लोग पूछ रहे हैं कि आखिर हिन्दुओं के धैर्य और सहिष्णुता को ही बार-बार क्यों जाँचा जा रहा है?
अमेरिकी वैज्ञानिक रॉबर्ट ओपेनहाइमर ने पढ़ा था गीता का श्लोक
बता दें कि रॉबर्ट जे ओपेनहाइमर ने कहा था कि जब दुनिया का पहला परमाणु ब्लास्ट सफल रहा, तब उनके मन में भगवद्गीता से भगवान श्रीकृष्ण के ये शब्द गूँजे – “अब मैं मृत्यु बन गया हूँ, संसारों का विध्वंस करने वाला।” भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण अपने प्रिय मित्र अर्जुन की शंकाओं का जवाब देते हैं, उन्हें युद्ध करने के लिए प्रेरित करते हैं। इसी दौरान वो अपना विकराल रूप प्रकट करते हैं और विष्णु के रूप में बताते हैं कि वो कौन हैं। उक्त श्लोक इस प्रकार है:
इसका हिंदी अर्थ कुछ इस प्रकार होगा, “मैं प्रलय का मूल कारण और महाकाल हूँ जो जगत का संहार करने के लिए प्रवृत्त हुआ हूँ। तुम्हारे युद्ध में भाग लेने के बिना भी युद्ध की व्यूह रचना में खड़े विरोधी पक्ष के योद्धा मारे जाएँगे।” फिल्म ‘Oppenheimer’ के मुख्य अभिनेता सिलियन मर्फी ने भी गीता को एक उत्तम और प्रेरक ग्रन्थ बताते हुए कहा था कि रोल की तैयारी के लिए उन्होंने इसे पढ़ा। हालाँकि, सेक्स वाले दृश्यों में गीता का चित्रण किए जाने से लोग नाराज़ हैं।
महाराष्ट्र का कोल्हापुर शहर अपनी विशाल सांस्कृतिक विरासत, हिंदू मंदिरों और छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा बनवाए गए ऐतिहासिक किलों के लिए मशहूर है। कोल्हापुर में प्राचीन महालक्ष्मी मंदिर और पहाड़ चोटी पर बने ज्योतिबा मंदिर जैसे कई हिंदू मंदिरों हैं। इन सभी मंदिरों में दर्शन के लिए बड़ी संख्या में भक्त यहाँ आते हैं। लेकिन, ऐतिहासिक महत्व होने के बाद भी यहाँ के पवनगढ़ और पन्हालगढ़ जैसे क्षेत्रों को आमतौर पर नजरअंदाज कर दिया जाता है। ऐसे में गैर-हिंदुओं को कब्जा करने के लिए यह जगह सबसे बेहतर दिखाई देती है।
ऐसी ही एक घटना छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा साल 1673 में बनवाए गए पवनगढ़ किले से सामने आई है। स्थानीय हिंदुओं का आरोप है कि इस किले के क्षेत्र में स्थित सरकारी जमीन पर ‘मदरसा अर्बिया ज़िनातुल-कुरान’ नामक मदरसा ‘अवैध तरीके से’ बनाया गया है। बताया जा रहा की इस मदरसे को सोसायटी रजिस्ट्रेशन अधिनियम, 1860 के तहत रजिस्टर्ड भी किया गया है।
‘मदरसा अर्बिया ज़िनातुल-कुरान’
बड़ी बात यह है कि मदरसे में आने वाले छात्र स्थानीय नहीं हैं। ये दिल्ली, बिहार और पश्चिम बंगाल समेत देश के अन्य हिस्सों से आकर यहाँ रह रहे हैं। इस मामले में ‘बजरंग दल’ ने जिला और राज्य सरकार को एक पत्र लिखा था। इस पत्र में कहा गया था, “पवनगढ़ के ऐतिहासिक किले पर बना मदरसा अवैध है। यहाँ पढ़ने वाले छात्र महाराष्ट्र के नहीं हैं। इस तरह के अवैध कब्जों से किले का ऐतिहासिक महत्व खराब हो रहा है। कई मुस्लिमों ने किले पर अपना घर भी बना लिया है। हम इस तरह के अवैध कब्जे के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग करते हैं। साथ ही ऐतिहासिक किले की पवित्रता बनाए रखने के लिए मदरसे समेत अन्य अवैध निर्माण को हटाने की भी माँग करते हैं।”
‘बजरंग दल’ द्वारा जनवरी 2023 में लिखा गया पत्र
इसके बाद जिला प्रशासन ने संज्ञान लेते हुए जाँच के बाद कहा है कि ‘मदरसा अर्बिया ज़िनातुल-कुरान’ सरकारी जमीन पर बनाया गया है। पन्हालगढ़ की तहसीलदार मानवी शिंदे ने ऑपइंडिया से हुई खास बातचीत में कहा है, “यह सरकारी बंजर भूमि है जो सरकार के नियंत्रण में आती है। हमने मामले की जाँच शुरू कर दी है। किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी।”
पवनगढ़ और हिंदू मंदिरों का इतिहास
पवनगढ़ का किला छत्रपति शिवाजी महाराज ने साल 1673 में पन्हालगढ़ के मुख्य किले के साथ बनावाया था। इस किले में कब्जे के उद्देश्य से अंग्रेजी आक्रांताओं ने भी यहाँ हमला किया था। पन्हालगढ़ किले की रक्षा के लिए तीन खड़ी चट्टान के साथ प्रवेश द्वार था। इनमें से दो चट्टानों को साल 1844 में हुए आक्रमण के दौरान अंग्रेजों ने नष्ट कर दिया था। इसके बाद पन्हालगढ़ के किले को भी ध्वस्त कर दिया गया था। आज यह पूरी जमीन सरकार के नियंत्रण में आती है। पवनगढ़ किले और पन्हालगढ़ किले के बीच एक छोटी सी खाई है। यह खाई इन दोनों किलों को अलग करती है। वर्तमान समय में पन्हाला शहर में करीब 4200 लोग रहते हैं।
किले की मुख्य रक्षा के लिए यहाँ करीब 25 फीट ऊँची एक चटपटी चट्टान है। पवनगढ़ किले पर मौजूद चट्टानों में खूबसूरती से उकेरे गए कई प्राचीन हिंदू मंदिरों को देखना आकर्षण का केंद्र रहा है। समय-समय पर यहाँ के शिव मंदिर, हनुमान मंदिर, नरसिम्हा मंदिर और लक्ष्मी मंदिर में देवताओं की पूजा करने के लिए बड़ी संख्या में लोग आते हैं।
पवनगढ़ पर बना भगवान शिव का प्राचीन मंदिर
इसी साल फरवरी में, पावनगढ़ पर बने पुराने शिव मंदिर में हिंदुओं ने महाशिवरात्रि के अवसर पर भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया था। चूँकि यह मंदिर मदरसे से महज 45-50 मीटर की दूरी पर ही है, इसलिए हिंदुओं का कहना है कि किसी भी समस्या से बचने के लिए यह कार्यक्रम पुलिस की सुरक्षा में आयोजित किया गया था।
मदरसे में रहते हैं40 बच्चे
इस मामले का पूरा सच जानने के लिए ऑपइंडिया की टीम ने पवनगढ़ किले का दौरा किया। यहाँ पता चला कि इस क्षेत्र में कई मुस्लिम परिवार रहते हैं। इन लोगों ने भगवान शिव के प्राचीन मंदिर के आसपास अपने घर बना लिए हैं। किले के दक्षिणी द्वार पर एक मस्जिद भी बनाई गई है। स्थानीय हिंदुओं का कहना है कि मस्जिद भी अवैध तरीके से कब्जा कर मार्कण्डेय ऋषि की प्राचीन गुफा पर बनाई गई है।
‘मदरसा अर्बिया ज़िनातुल-कुरान’
इस मदरसे के संचालकों से बात करने पर पता चला कि मदरसा सोसायटी रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1860 के तहत रजिस्टर्ड है। मदरसे के अधिकारियों ने इसके सरकारी जमीन पर बनाए जाने के आरोपों से इनकार किया। उन्होंने कहा, “यह एक रजिस्टर्ड मदरसा है और यह पूरी तरह से वैध है। मदरसा बहुत पुराना है। किसी भी प्रकार से सरकारी जमीन पर कब्जा नहीं किया गया। हम इसे यहाँ पिछले 50 सालों से चला रहे हैं।”
ऑपइंडिया ने मदरसे के यूसुफ मुजावर और भाई दाऊद से भी बात की। इन लोगों का कहना है कि मदरसे का रजिस्ट्रेशन साल 1979 में कराया गया था। तब से ही यह पवनगढ़ पर बना हुआ है। अन्य जानकारियाँ हासिल करने की कोशिश में हमारे सामने आया कि यहाँ करीब 40 नाबालिग बच्चे पढ़ते हैं। इन 40 में से कोई भी लड़का कोल्हापुर या महाराष्ट्र का नहीं है।
मदरसे में शिक्षक अरबी और कुरान के अलावा कुछ और भाषा नहीं पढ़ाते
सूत्रों का कहना है कि इस मदरसे में छात्रों को इस्लामी जीवन शैली और केवल अरबी भाषा ही सिखाई जाती है। हिंदी, अंग्रेजी जैसी कोई अन्य भाषा, यहाँ तक कि स्थानीय भाषा मराठी भी नहीं पढ़ाई जाती है। मदरसे से ज्यादे यूसुफ मुजावर का कहना है, “करीब 40 छात्र यहाँ रहते हैं। मदरसे से जुड़े कुछ बड़े लोग संसाधनों से हमारी मदद करते हैं। यहाँ तीन शिक्षक पढ़ाते हैं। ये सभी राज्य के बाहर के हैं। यहाँ पढ़ने वाले छात्र अनाथ हैं और हम सिर्फ बुनियादी जरूरतों के साथ उनकी सेवा कर रहे हैं।”
मदरसे के रजिस्ट्रेशन के बारे में पूछने पर युसूफ ने कहा कि रजिस्ट्रेशन अब तक नहीं किया गया था। अब्बा की मृत्यु के कारण इसमें देरी हुई। हालाँकि, उसके भाई दाऊद ने कहा कि मदरसा शिक्षा विभाग के तहत रजिस्टर्ड है और इसे वैध जमीन पर बनाया गया है। इसके बाद ऑपइंडिया की टीम की मदरसे के कार्यालय में बैठने के लिए कहा गया। वहाँ मदरसे का रजिस्ट्रेशन सार्टिफिकेट दिखाया गया। इस रजिस्ट्रेशन के अनुसार, मदरसे को साल 1969 में सोसायटी रजिस्ट्रेशन अधिनियम, 1860 के तहत सोसायटी के रूप में रजिस्टर्ड किया गया है।
मदरसे के छात्रों ने कहा- हमें अच्छा खाना मिलता है, अरबी ही पढ़ाई जाती है
इसी दौरान ऑपइंडिया ने मदरसे के एक कर्मचारी से यहाँ पढ़ने वाले बच्चों की सेहत के बारे में सवाल किया। इसके बाद यह भी पूछा कि क्या इन बच्चों को यहाँ लाने के लिए इनके माता-पिता से अनुमति ली जाती है। इस पर कर्मचारी ने दावा करते हुए कहा है कि हाँ, बच्चों के माता-पिता की अनुमति से ही बच्चों को यहाँ लाया जाता है।
यह बेहद दिलचस्प है कि इससे पहले मदरसा चलाने वाले यूसुफ़ ने कहा था कि यहाँ अनाथ बच्चों को पढ़ाई कराई जा रही है। लेकिन वहीं कर्मचारी माँ-बाप से बात करने की बात कह रहा है। ऑपइंडिया को मदरसे में पढ़ने वाले छात्रों का एक वीडियो भी मिला है। वीडियो में छात्रों ने पुष्टि की है कि उन्हें केवल अरबी ही सिखाई जा रही है।
कोल्हापुर पुलिस ने लिया संज्ञान, कहा- जाँच जारी है
बताया जा रहा है कि कोल्हापुर पुलिस ने इस मामले में संज्ञान लेते हुए पन्हाला पुलिस को मामले को तुरंत देखने का निर्देश दिया है। कोल्हापुर पुलिस द्वारा 17 जुलाई को किए गए ट्वीट में कहा गया, “इस संबंध में, पन्हाला पुलिस स्टेशन को उचित कार्रवाई करने के लिए सूचित किया गया है।”
कोल्हापुर पुलिस द्वारा किए गए ट्वीट का स्क्रीनशॉट
इस मुद्दे पर अधिक जानकारी के लिए 20 जुलाई को ऑपइंडिया ने कोल्हापुर पुलिस से भी संपर्क किया गया था। इस पूरे मामले को देख रहे अधिकारी गणेश पाटिल ने कहा कि मामले की जाँच चल रही है। पुलिस का कहना है, “यह मामला हाल ही में सामने आया है। सोशल मीडिया पर कुछ लोग पोस्ट कर रहे हैं कि मदरसा अवैध है। लेकिन यह अभी तक साबित नहीं हुआ है कि वैध या अवैध। पुलिस ने मामले की जाँच के निर्देश दिए हैं और जाँच जारी है। जमीन की माप की गई है। रिपोर्ट सामने होने के बाद ही सब कुछ स्पष्ट होगा।”
तहसीलदार ने की सरकारी जमीन की पुष्टि, कहा- जमीन मापी गई, टीएलआर रिपोर्ट का इंतजार
ऑपइंडिया ने इस मामले में तहसीलदार मानवी शिंदे से भी बात की। उन्होंने कहा है, ‘मामला 17 जुलाई को हमारे संज्ञान में आया था। कार्यालय ने तुरंत जमीन की नाम की है। हालाँकि, रिपोर्ट अभी तक नहीं आई है। यदि निर्माण अवैध मिला तो कार्रवाई होगी। जब हमने 17 जुलाई को पूछताछ की, तो मदरसा के सदस्यों ने हमारा सहयोग किया और कहा कि अगर कोई अवैधता साबित होती है तो वे मदरसा हटा देंगे।” हालाँकि, शिंदे ने इस बात की पुष्टि की दस कि जिस भूमि पर मदरसा बनाया गया है, वह एक सरकारी बंजर भूमि है और सरकार के नियंत्रण में आती है।
तहसीलदार कार्यालय, पन्हाला
सीधे तौर पर ‘लैंड जिहाद’ का मामला: बजरंग दल
ऑपइंडिया से खास बातचीत में ‘बजरंग दल’ के जिला अध्यक्ष सुरेश रोकड़े ने कहा है कि पवनगढ़ के ऐतिहासिक किले पर किसी भी तरह के अवैध अतिक्रमण को हटाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा है, “यह सीधे तौर पर ‘लैंड जिहाद’ का मामला है। पवनगढ़ और पन्हालगढ़ छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा बनवाए गए ऐतिहासिक किले हैं। इन लोगों को यहाँ मदरसा बनाने की अनुमति किसने दी, यह एक बड़ा सवाल है। मदरसा बंजर जमीन सर्वेक्षण संख्या 128 पर बनाया गया है जो सरकारी नियंत्रण में आता है। मदरसा कानूनी रूप से नहीं बनाया गया है।”
उन्होंने आगे कहा है, “हमने इस साल जनवरी में इस तरह के अवैध अतिक्रमण को हटाने की माँग करते हुए पत्र दिया था। लेकिन, इस मामले में विभाग द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई है। हमने मामले पर दो बार फॉलोअप करने की कोशिश की, लेकिन हमें बताया गया कि मामले में जाँच चल रही है। यहाँ का हिंदू मंदिर वन विभाग की जमीन पर है और मदरसा इसके करीब बंजर जमीन पर है। यहाँ लगभग 40 छात्र पढ़ते हैं और कोई भी महाराष्ट्र से नहीं है।”
इसके अलावा, यहाँ मुस्लिमों ने रूफिंग शीट वाले कई घर बना लिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि घर बनाने के लिए अनुमति नहीं ली गई है।
पवनगढ़ के दक्षिणी द्वार के किनारे पर बनी दरगाह (दाएँ), रूफिंग शीट से बना घर (बाएँ)
ऑपइंडिया ने ग्राउंड रिपोर्ट में क्या पाया:
पवनगढ़ किले के दौरे पर ऑपइंडिया ने पाया कि मदरसा, ‘मदरसा अरबी ज़िनातुल-कुरान’ रजिस्टर्ड है। लेकिन, सरकारी जमीन पर रूफिंग शीट का उपयोग कर इसे बनाया गया है। मदरसा संचालकों के विरोधाभासी बयान भी कई तरह के सवाल खड़े करते हैं। एक अधिकारी ने कहा है कि यहाँ पढ़ने वाले बच्चे अनाथ हैं। वहीं दूसरे ने कहा कि इन बच्चों को यहाँ लाने के लिए उनके माता-पिता से अनुमति ली गई थी। मदरसे के एक अधिकारी ने कहा कि मदरसा चलाने के लिए अनुमति ली गई थी।
वहीं दूसरे ने कहा कि अब्बा की मृत्यु के चलते अब तक रजिस्ट्रेशन नहीं हो पाया है। इसके अलावा सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जमीन की माप रिपोर्ट आने से पहले ही तहसीलदार ने इस बात की पुष्टि कर दी है कि मदरसा सरकारी जमीन में बना है।
नोट: इस मामले से संबंधित सभी आवश्यक दस्तावेज, ऑडियो व वीडियो रिकॉर्डिंग ऑपइंडिया के पास उपलब्ध है।
(ये लेख मूल रूप से OpIndia पर अंग्रेजी में प्रकाशित की गई है, जिसे आप यहाँ क्लिक कर के पढ़ सकते हैं। आकाश शर्मा नयन ने इसका हिंदी में अनुवाद किया है।)
जहाँ एक तरफ मणिपुर में पिछले कई महीनों से हिंसा जारी है, वहीं अब मिजोरम में मैतेई समाज को धमकी मिली है। मणिपुर हाईकोर्ट ने राज्य की सबसे बड़ी जनसंख्या वाले मैतेई समाज को ST (अनुसूचित जनजाति) का दर्जा देने के लिए प्रस्ताव भेजने के लिए राज्य सरकार को कहा था, जिसके बाद कुकी समुदाय भड़क गए। अब मिजोरम में मैतेई समाज को धमकी मिली है कि अगर उन्हें अपनी जान प्यारी है तो वो राज्य को छोड़ कर चले जाएँ।
सार्वजनिक रूप से दी गई इस धमकी में कहा गया है कि मैतेई समाज मिजोरम छोड़ कर चला जाए। इसके बाद मिजोरम सरकार ने राजधानी आइजोल में रहने वाले मैतेई लोगों की सुरक्षा में बढ़ोतरी कर दी है। ‘पीस एकॉर्ड MNF रिटर्नीज एसोसिएशन (PAMRA)’ नामक एक संगठन ने ये धमकी भरा बयान जारी करते हुए कहा है कि अगर मिजोरम में रहने वाले मैतेई समाज को अपनी सुरक्षा प्यारी है तो वो जल्द से जल्द इस राज्य को छोड़ कर कहीं और चले जाएँ।
संगठन ने कहा है कि पड़ोसी राज्य मणिपुर में महिलाओं को नग्न घुमाए जाने और उनके गैंगरेप का वीडियो सामने आने के बाद मिजोरम के युवाओं में आक्रोश है। PAMRA के बारे में बता दें कि ये आतंकियों का संगठन हुआ करता था, जिन्होंने हथियार त्यागने का दावा किया था। ये खुद को गैर-राजनीतिक संगठन बताता है। उसने माँग की है कि शांति समझौते के सभी धाराओं को लागू किया जाए। संगठन ने कहा कि मणिपुर में कुकी समाज के खिलाफ हिंसा हुई है और इससे मिजो युवकों को ठेस पहुँची है।
"PAMRA appeals to all Meitei people in Mizoram to leave for their home state" https://t.co/H1K748gi0H
साथ ही धमकाया कि अगर मिजोरम में रहने वाले मैतेई लोगों को कुछ भी होता है तो इसके जिम्मेदार वो खुद होंगे। बताया जा रहा है कि मिजोरम के मुख्यमंत्री जोरमथांगा ने मणिपुर के अपने समकक्ष और केंद्र सरकार से भी बातचीत की है। पूर्व-उग्रवादी संगठन ने मिजो लोगों को कुकी वंश का बताते हुए कहा है कि राज्य छोड़ने के लिए सिर्फ मणिपुर के मैतेई लोगों को कहा गया है, और किसी को नहीं। इधर मणिपुर में विपक्ष सर्वदलीय बैठक बुलाने की माँग कर रहा है।
रेखा की बायोग्राफी से एक बड़ा खुलासा हुआ है। मीडिया में दावा किया जा रहा है कि लेखक यासीर उस्मानी ने ‘रेखा: द अनटोल्ड स्टोरी’ में लिखा है कि बॉलीवुड की वरिष्ठ अभिनेत्री अपनी महिला सेक्रेटरी फरजाना के साथ लाइव-इन रिलेशनशिप में रह रही हैं। यासीर उस्मानी इससे पहले राजेश खन्ना, संजय दत्त और गुरुदत्त जैसे बड़े अभिनेताओं की जीवनी भी लिख चुके हैं। उन्होंने अपनी पुस्तक में ये भी दावा किया है कि रेखा अपनी जिस सेक्रेटरी फरजाना के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में हैं, वही उनके पति की आत्महत्या का कारण भी थीं।
बता दें कि रेखा की लव लाइफ को लेकर पिछले 50 वर्षों से तरह-तरह की चर्चा चलती रही हैं। जितेंद्र, विनोद मेहरा, किरण कुमार, मुकेश अग्रवाल, संजय दत्त और यहाँ तक कि अक्षय कुमार के साथ भी उनका जाम जुड़ चुका है। बताया जाता है कि बिजनेस टाइकून मुकेश अग्रवाल की तरफ रेखा ने ही हाथ बढ़ाया था। जान-पहचान के एक महीने के भीतर उन्होंने शादी कर ली। हालाँकि, इसके मुकेश मुकेश अग्रवाल को कारोबार में घाटा हुआ और वो बिना कारण रेखा के शूटिंग सेट्स पर मँडराते रहते थे।
अंततः 2 अक्टूबर, 1990 को उन्होंने अपने कमरे के पंखे से फाँसी लगा कर आत्महत्या कर ली। मुकेश के भाई अनिल गुप्ता ने इस दौरान रेखा पर कई आरोप लगाते हुए कहा था कि उनके भाई सच्ची मोहब्बत करते थे। फ़िल्मकार सुभाष घई ने इस घटना के बाद यहाँ तक कहा था कि रेखा ने जो किया है उसके बाद कोई भी सम्मानित खानदान किसी अभिनेत्री से रिश्ता करने से पहले कई बार सोचेगा। अमिताभ बच्चन के साथ अफेयर से निकलने के बाद रेखा ने ये शादी की थी।
वहीं बायोग्राफी में पहली बार रेखा का नाम किसी महिला के साथ जुड़ा, वो भी अफेयर के मामले में। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसमें बताया गया है कि फरजाना के अलावा किसी को भी रेखा के बेडरूम में जाने की इजाजत नहीं होती। यहाँ तक कि रेखा के घर काम करने वाली मेड भी उनके कमरे में नहीं जा सकती। किताब में लिखा है, “फरजाना, रेखा की परफेक्ट पार्टनर हैं। वो उनकी सलाहकार हैं, दोस्त हैं, उनकी सपोर्टर हैं और सीधे शब्दों में कहें तो रेखा उनके बिना नहीं रह सकती।”
मीडिया की मानें तो पुस्तक में आगे लिखा है, “रेखा की विश्वासपात्र सेक्रेटरी फरजाना, जिन्हें कुछ लोग उनकी प्रेमिका भी बताते हैं, वो अभिनेत्री के बेडरूम में जा सकती हैं। रेखा की ज़िन्दगी और उनके घर में एक-एक चीज पर फरजाना का कड़ा नियंत्रण रहता है। वो एक तरह से एक मजबूत गेटकीपर भी हैं। साथ ही हर फोन कॉल भी वही उठाती हैं और रेखा के जीवन के हर एक मिनट का निर्णय वही लेती हैं।” बता दें कि रेखा के पति मुकेश अग्रवाल ने अपने सुसाइड नोट में लिखा था कि वो इसके लिए किसी को जिम्मेदार नहीं ठहराते, रेखा को तो बिलकुल भी नहीं।
इससे पहले रेखा अपनी सेक्रेटरी फरजाना को अपनी ‘Soul Sister’ बता चुकी हैं, लेकिन किताब में दावा किया गया है कि दोनों के रिश्ते सेक्सुअल हैं। साथ ही ये भी बताया गया है कि रेखा का जीवन बंद कमरों में रहता है, इसका कारण फरजाना ही हैं। फरजाना लगभग 3 दशक से रेखा के साथ हैं। रेखा राज्यसभा सांसद भी रही हैं। मालविका सांघवी ने भी अपनी एक पुस्तक में दावा किया था कि रेखा और फरजाना लेस्बियन रिलेशनशिप में हैं।
Veteran actress Rekha's biography makes shocking claims about her relationship with her secretary, Farzana. Read on!#REKHAhttps://t.co/D5HWhgpsE8
रेखा का करियर बॉलीवुड में काफी लंबा रहा है और उन्हें कई अवॉर्ड्स मिले हैं। रेखा के पिता जेमिनी गणेशन खुद तमिल सिनेमा के सबसे बड़े कलाकारों में से एक थे। उनकी भी लव लाइफ खासी चर्चा में रहती थी, खासकर तब के जमाने की अभिनेत्री सावित्री के साथ उनका अफेयर खासा चर्चा में रहा था। सावित्री की अवसाद और शराब के कारण मौत हो गई थी। उन्हें ‘घर (1978)’, ‘जुदाई (1980)’, ‘उमराव जान (1981)’, ‘खून भरी माँग (1988)’ और ‘फूल बने अंगारे (1991)’ जैसी फिल्मों के लिए जाना जाता है।
रेखा की जोड़ी सबसे ज्यादा अमिताभ बच्चन के साथ पसंद की जाती थी और दोनों ने ‘दो अनजाने (1976)’, ‘अलाप (1977)’, ‘खून पसीना (1977)’, ‘गंगा की सौगंध (1978)’, ‘मुकद्दर का सिकंदर (1978)’, ‘मिस्टर नटवरलाल (1979)’, ‘सुहाग (1979)’ और ‘राम बलराम (1980)’ जैसी फिल्मों में काम किया था। लेकिन, दोनों की साथ में अंतिम ‘ सिलसिला (1981)’ की सबसे ज़्यादा चर्चा हुई, जिसमें अमिताभ बच्चन की पत्नी जया भी थीं। यश चोपड़ा ने इसका निर्देशन किया था।
22 जुलाई 2023 को केंद्र सरकार के सातवें रोजगार मेला का आयोजन हुआ। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 70 हजार से ज्यादा लोगों को नियुक्ति-पत्र सौंपे। देश के 20 राज्यों में 44 जगहों पर हुए इस आयोजन से पीएम मोदी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़े। इस दौरान उन्होंने देश की मजबूत बैंकिंग सेक्टर का जिक्र करते हुए कॉन्ग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार पर फोन बैंकिंग घोटाले का आरोप लगाया।
युवाओं को नौकरी का लेटर देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आज का दिन काफी ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण है। 1947 में 22 जुलाई को ही संविधान सभा ने तिरंगे के वर्तमान स्वरुप को स्वीकार किया था। ऐसे दिन पर आपको नौकरी मिलना प्रेरणादायक है। सरकारी नौकरी में रहते हुए आपको कोशिश करनी है कि तिरंगे की आन-बान-शान पर कोई आँच न आए।
प्रधानमंत्री ने कहा, “आजादी के अमृत महोत्सव के दौरान जब देश विकास के पथ पर चल रहा है, सरकारी कर्मचारी के रूप में काम करने का अवसर मिलना बहुत सम्मान की बात है। इस देश के लोगों ने भारत को एक विकसित देश बनाने का संकल्प लिया है। अगले 25 साल भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। आजादी के इस अमृतकाल में सभी देशवासियों ने अगले 25 वर्ष में भारत को विकसित भारत बनाने का संकल्प लिया है। जैसे आपके जीवन में अगले 25 साल महत्वपूर्ण हैं, वैसे ही भारत के लिए अगले 25 साल बहुत ही अहम हैं।”
Rozgar Mela is an attempt to empower the youth and encourage their active engagement in the nation's progress. https://t.co/SIcjs5DlkB
इस मौके पर उन्होंने देश के बैंकिंग सेक्टर पर भी बात की। पीएम ने कहा कि अर्थव्यवस्था के विस्तार में बैंकिंग सेक्टर की बहुत बड़ी भूमिका होती है। आज भारत उन देशों में से एक है जहाँ का बैंकिंग सेक्टर सबसे मजबूत माना जाता है। उन्होंने कहा कि इसके लिए उनकी सरकार ने सरकारी बैंकों के मैनेजमेंट को सशक्त किया। छोटे-छोटे बैंकों को जोड़कर बड़े बैंकों का निर्माण किया। यह सुनिश्चित किया कि बैंक में सामान्य लोगों की 5 लाख रुपए तक की राशि कभी न डूबे।
पीएम मोदी ने कहा, “जिन सरकारी बैंकों की चर्चा कभी हजारों करोड़ के नुकसान के लिए होती थी। NPA के लिए होती थी। आज उनकी चर्चा रिकॉर्ड प्रॉफिट के लिए हो रही है।” इस दौरान उन्होंने पिछली सरकार के फोन बैंकिंग घोटाले का भी उल्लेख किया। कहा कि इसने बैंकिंग सेक्टर की कमर तोड़ दी थी। जो सरकार के करीबी थे उन्हें एक फोन कॉल पर बैंकों से हजारों करोड़ों के लोन दिए जाते थे। उनका भुगतान आजतक नहीं हुआ है। बदहाल बैंकिंग इंड्रस्टी को हमने 2014 में फिर से खड़ा करने की कोशिश शुरू की और आज भारत का मजबूत बैंकिंग सिस्टम सबके लिए गर्व का विषय है।
जिन सरकारी बैंकों की चर्चा हज़ारों करोड़ के नुकसान के लिए होती थी, NPA के लिए होती थी, आज उनकी चर्चा रिकॉर्ड प्रॉफिट के लिए हो रही है: PM @narendramodipic.twitter.com/gobKERHME9
गौरतलब है कि 22 अक्टूबर 2022 को प्रधानमंत्री ने रोजगार मेले की शुरुआत की थी। तब 2023 के अंत तक 10 लाख सरकारी नौकरियां देने का लक्ष्य रखा गया था। बीते 8 महीने में 6 रोजगार मेलों के जरिए 4 लाख 33 हजार से ज्यादा लोगों को नियुक्ति पत्र दिया जा चुका है। सातवें मेले में 70 हजार से अधिक लोगों को सरकारी नौकरी का लेटर मिला है।
बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं पर हमले की घटनाएँ बढ़ती जा रही हैं। अब यहाँ के ब्राह्मणबरिया जिले में खलील मियाँ नामक व्यक्ति ने दुर्गा मंदिर में घुसकर तोड़फोड़ की। इससे मंदिर की मूर्तियाँ खंडित हो गईं। बताया जा रहा है कि मूर्तियाँ तोड़ते समय खलील मियाँ ‘अल्लाहु अकबर’ के नारे लगा रहा था। इसी दौरान स्थानीय लोगों ने उसे पकड़कर पुलिस को सौंप दिया। घटना गुरुवार (20 जुलाई, 2023) की है।
Local Muslims attacked Durga temple in Niamatpur village of Shahzadapur union of Sarail upazila in Brahmanbaria. Local Muslims have given a 24-hour ultimatum to Hindus to leave the country and go to India. pic.twitter.com/nx2d04LtZW
— Voice of Bangladeshi Hindus ?? (@VoiceofHindu71) July 21, 2023
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, घटना ब्राह्मणबरिया जिले में सरायल उपजिला के नियामतपुर गाँव की है। यहाँ गुरुवार रात करीब 9:30 बजे एक युवक मंदिर में घुसकर तोड़फोड़ करनी शुरू कर दी। युवक के हमले से मंदिर की कई मूर्तियाँ टूट गईं। इसकी कुछ फोटो, वीडियो भी सामने आईं हैं। इनमें माँ दुर्गा की मूर्तियों को खंडित अवस्था में देखा जा सकता है। स्थानीय लोगों का दावा है कि आरोपित खलील मियाँ मंदिर की मूर्तियाँ तोड़ते हुए ‘अल्लाहु अकबर’ के नारे लगा रहा था।
#Bangladesh Jihadists attacked Niamatpur Sarvajanin Durga temple in Niamatpur village of Shahjadapur union of Sarail upazila of Brahmanbaria district at 9.15 pm today and broke all the idols of the temple. #SaveBangladeshiHinduspic.twitter.com/Xkg7igft74
मंदिर में तोड़फोड़ करने के बाद आरोपित ने मौके से भागने की कोशिश की। हालाँकि, स्थानीय लोगों ने पीछा करते हुए उसे पकड़कर पुलिस को सौंप दिया। इस मामले में ब्राह्मणबरिया जिले के पुलिस अधीक्षक मोहम्मद शखावत हुसैन ने कहा है कि मंदिर में तोड़फोड़ करने के आरोपित खलील मियाँ को गिरफ्तार कर किया गया है। हालाँकि, उसने मंदिर पर हमला क्यों किया इस बारे में कोई जानकारी नहीं मिल पाई है।
अधिकारियों का कहना है कि मामले की कर आरोपित युवक के खिलाफ़ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। शुरुआती जाँच में सामने आया है कि आरोपित खलील मियाँ नियामतपुर गाँव में अपनी बहन से मिलने आया था। इसी दौरान उसका स्थानीय लोगों से झगड़ा हो गया। इस कारण उसने मंदिर के भीतर स्थापित 5-6 मूर्तियाँ खंडित कर दी।
वहीं इस मामले में नियामतपुर सार्वजनिक दुर्गा मंदिर के अध्यक्ष जगदीश दास ने आरोपित खलील मियाँ के खिलाफ धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने और स्पीडी ट्रायल एक्ट के मुकदमा दर्ज कराया। जगदीश दास का कहना है कि मंदिर में हुई इस घटना से हिंदू काफी गुस्से में हैं। समाज में असंतोष की भावना बढ़ रही है।
दिल्ली की दो बड़ी मस्जिदों को रेलवे ने नोटिस भेजा है। इनमें से एक मस्जिद दिल्ली की बंगाली मार्केट में है। दूसरी आईटीओ की तकिया बब्बर शाह मस्जिद है। उत्तर रेलवे ने 15 दिन के भीतर दोनों मस्जिद के प्रशासन से अतिक्रमण हटाने को कहा है। ऐसा नहीं होने पर एक्शन लेने की चेतावनी दी है।
22 जुलाई 2023 को उत्तर रेलवे प्रशासन की तरफ जारी नोटिस में कहा गया है, “सर्व साधारण को सूचित किया जाता है कि रेलवे भूमि को अनाधिकृत रूप से अतिक्रमित किया गया है। आप लोग अनाधिकृत रूप से रेलवे की जमीन पर बने अनाधिकृत भवन/मंदिर/ मस्जिद/मजार को इस सूचना के 15 दिन के अंदर स्वेच्छा से हटा दें। अन्यथा रेलवे प्रशासन एक्शन लेगा। रेलवे अधिनियम के प्रावधान के तहत अनाधिकृत कब्जे को हटा दिया जाएगा। इस प्रक्रिया में होने वाले नुकसान के लिए आप स्वयं जिम्मेदार होंगे। रेलवे प्रशासन जिम्मेदार नहीं होगा।”
आज तक की रिपोर्ट के अनुसार तकिया बब्बर शाह मस्जिद के बगल में स्थित एमसीडी के मलेरिया दफ्तर को भी खाली करने का नोटिस दिया गया है। यहाँ भी रेलवे का नोटिस चिपका दिया गया है। एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली वक्फ बोर्ड का कहना है कि इन मस्जिदों को जमीन 1945 में कानूनी तौर पर एग्रीमेंट के जरिए ट्रांसफर की गई थी।
इससे पहले इसी साल अप्रैल में भूमि और विकास कार्यालय (L&DO), नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (NDMC) और केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (CPWD) ने एक संयुक्त अभियान में बंगाली मार्केट की मस्जिद के एक हिस्से को ध्वस्त कर दिया था। इस कार्रवाई के दौरान एक दीवार हटाई गई थी। अधिकारियों ने बताया था कि कुछ महीने पहले अतिक्रमण कर कंक्रीट की यह दीवार खड़ी की गई थी। वहीं मस्जिद के अधिकारियों का कहना था कि कार्रवाई से पहले उन्हें कोई सूचना नहीं दी गई थी।
वहीं 2 जुलाई 2023 को उत्तर-पूर्वी दिल्ली के भजनपुरा में एक सड़क को चौड़ा करने के लिए फुटपाथ पर बने दो धार्मिक स्थलों को हटाया गया था। लोक निर्माण विभाग (PWD) ने इस दौरान एक हनुमान मंदिर और एक दरगाह को हटाया था। अभियान के दौरान भारी संख्या में बलों की तैनाती की गई थी। साथ ही ड्रोन से पूरे इलाके की निगरानी हो रही थी।