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घर में ‘हीरे’ जैसी बीवी, दिल बाहर वाली की G-string (धागे जैसी पतली अंडरवियर) पर: आमिर खान धराए, बॉक्सर ने माना बुरी लत

पाकिस्तानी मूल के ब्रिटिश बॉक्सर आमिर खान को सेक्सटिंग (कामुक भावना से मैसेज भेजना) का लत है। इसको लेकर अब वो थेरेपी का सहारा ले रहे हैं। वो भी तब जब उनकी बीवी ने सेक्सटिंग वाली बात पकड़ ली है और कहा है – “घर में जब हीरा पड़ा है तो बाहर के कंकड़-पत्थर में दिल क्यों लगा रहे हो?”

जिस लड़की के साथ बॉक्सर आमिर खान की सेक्स चैटिंग पकड़ी गई है, उसका नाम सुमायरा है। सुमायरा एक ब्रिटिश मॉडल है। पोल खुलने पर आमिर खान ने अपनी गलती मानी है। उन्होंने सेक्सटिंग को अपनी गंदी आदत बताते हुए इससे उबरने के लिए थेरेपी करवाने की जानकारी दी है।

आमिर खान की वायरल हुई चैट में से एक

‘द सन’ के मुताबिक 1 जुलाई 2023 को आमिर खान और समायरा की चैट वायरल हुई थी। आमिर और सुमायरा की सोशल मीडिया पर बातचीत की शुरुआत 6 मई 2023 से हुई थी। इस चैटिंग में आमिर ने सुमायरा से अश्लील तस्वीरें भेजने के लिए कहा था। इसी के साथ उन्होंने खुद को अपनी पत्नी से असंतुष्ट बताते हुए अपने वैवाहिक रिश्ते को महज बिजनेस अरेंजमेन्ट बताया था।

कुछ ही दिनों की चैटिंग में आमिर और सुमायरा के बीच तस्वीरों का आदान-प्रदान हुआ। इन तस्वीरों में सुमायारा की एक फोटो ऐसी भी थी, जिसमें कमर पर टैटू बने हुए थे। दोनों के बीच फोन पर भी बातें हुईं थीं।

अश्लील संदेशों में पूर्व बॉक्सर आमिर द्वारा सुमायरा के प्राइवेट पार्ट की चर्चा करना और उनके जैसा शरीर पहले कभी नहीं देखना जैसी बातें शामिल थीं। कुछ समय बाद सुमायरा ने आमिर खान से हुई चैटिंग को सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया।

यह मामला सामने आने के बाद आमिर खान की पत्नी फरयाल मकदूम ने एक सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से सुमायरा की आलोचना की थी। फरयाल ने सुमायरा पर अपनी छवि को खराब करने का भी आरोप लगाया है।

आमिर खान की सेक्सटिंग सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर उनकी काफी आलोचना हो रही है। आमिर खान के फैंस ने उनसे इस मामले में सफाई माँगी है। जवाब ने बॉक्सर आमिर ने शर्मिंदा बताते हुए खुद में सुधार की कोशिश की जानकारी दी।

आमिर ने अपने फैंस को बताया कि सेक्सटिंग उनकी बुरी लत है, जिससे उबरने के लिए वो थेरेपी का सहारा ले रहे है। बताते चलें कि आमिर आमिर खान फ़िलहाल 36 साल के हैं। पूर्व में वो बॉक्सिंग चैम्पियन रह चुके हैं।

जिस अदनान की छत से महाकाल की सवारी पर थूका, उसके घर पर शिवराज सरकार ने बुलडोजर चलवाया: उज्जैन में DJ बजा कर मुनादी

मध्य प्रदेश के उज्जैन में महाकाल की सवारी में शामिल भक्तों पर थूकने वालों के घर पर बुलडोजर चला है। ‘मामा के बुलडोजर’ के आरोपितों के अवैध निर्माण को ध्वस्त कर दिया। थूककांड के आरोपित भी गिरफ्तार कर लिए गए हैं। बुलडोजर चलाए जाने से पहले ढोल पीट कर मुनादी भी करवाई गई। बुधवार (19 जुलाई, 2023) को ये कार्रवाई हुई। इस दौरान नगर निगम की टीम के साथ बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी भी पहुँचे हुए थे।

पुलिस ने इस मामले में 1 नाबालिग समेत 3 युवकों को गिरफ्तार किया है। टंकी चौराहे पर स्थित अदनान के घर से ही थूक फेंका गया था। घटना में उसका सगा भाई और एक नाबालिग शामिल है। अब उसके घर को बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया गया है। पुलिस ने बताया है कि सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने के लिए आरोपितों ने ये हरकत की थी। मुनादी के लिए ढोल के साथ-साथ DJ का भी इस्तेमाल किया गया। कार्रवाई खत्म होने के बाद वहाँ की दुकानें खुलीं।

कार्रवाई से पहले पुलिस ने आरोपित अदनान मंसूरी के घर को खली करवाया। आरोपित के मकान के उन हिस्सों को ध्वस्त किया गया, जो अवैध थे। बता दें कि आरोपितों ने न सिर्फ श्रद्धालुओं पर थूक फेंका था, बल्कि कुल्ला कर के भी फेंका था। इस मामले में जो बालिग आरोपित है, उसे मंगलवार को ही भैरवगढ़ स्थित सेन्ट्रल जेल में भेज दिया गया है। जो नाबालिग आरोपित है, उसे ‘बाल संप्रेक्षण गृह’ भेजा गया है।

खाराकुआँ थाने में इस बाबत FIR दर्ज की गई थी। आरोपितों के विरुद्ध धार्मिक भावना को ठेस पहुँचाने और सद्भाव बिगाड़ने का मामला दर्ज किया गया था। वीडियो फुटेज व अन्य सबूतों की जाँच की जाएगी, जिसके बाद पुलिस कोर्ट में रिपोर्ट पेश करेगी। वीडियो में देखा जा सकता है कि कैसे छत पर खड़े लड़कों ने बोतल से पानी लेकर मुँह में भरा। साथ ही थूकते हुए भी देखा जा सकता है। भाजपा नेताओं और ‘बजरंग दल’ कार्यकर्ताओं ने इसके बाद थाने पहुँच कर आपत्ति दर्ज कराई थी।

‘हम खेलना छोड़ दें क्या’: बजरंग-विनेश की डायरेक्ट एंट्री पर रोई महिला पहलवान, कहा- हम सालों से मेहनत कर रहे, उन्होंने 1 साल से प्रैक्टिस भी नहीं की

‘भारतीय ओलंपिक एसोसिएशन (IOA)’ ने निर्णय लिया कि एशियन गेम्स में बजरंग पूनिया और उनकी साली विनेश फोगाट को बिना ट्रायल के ही डायरेक्ट एंट्री दी जाएगी। अब इस पर विवाद खड़ा हो गया है कि अन्य खिलाड़ियों ने न्यायपालिका का दरवाजा खटखटाने की बात कही है। 65 किलोग्राम वर्ग में खेलने वाले विशाल कालीरमन और महिला पहलवान अंतिम पंघाल ने भी इस फैसले पर सवाल उठाए हैं। बजरंग-विनेश ‘पहलवान आंदोलन’ में भी खासा सक्रिय रहे थे।

विशाल कालीरमन ने कहा कि कॉमनवेल्थ गेम्स की जब ट्रायल हुई थी तब वो फाइनल मुकाबले में बजरंग पूनिया से हार गए थे, लेकिन अब बिना ट्रायल के एशियन गेम्स में बजरंग पूनिया का इलेक्शन कर लिया गया है। विशाल कालीरमन ने कहा कि पिछले एक साल से बजरंग पूनिया प्रैक्टिस भी नहीं कर रहे हैं, जबकि वो और बाकी खिलाड़ी लगातार प्रैक्टिस में लगे हुए हैं। उन्होंने अपील की कि कम से कम उनलोगों का ट्रायल तो लिया जाए, वो कोई फेवर या फायदा नहीं माँग रहे।

उन्होंने कहा, “हम ये माँग नहीं कर रहे हैं कि हमें सीधा फाइनल-सेमीफाइनल लड़ा दिया जाए। पिछली बार भी कॉमनवेल्थ ट्रायल में बजरंग पूनिया को सीधा सेमीफाइनल में दिखाया गया था, जबकि हमने 5-5 कुश्तियाँ लड़ी थीं और तब फाइनल हुआ था। इसके लिए हम कोर्ट में भी जा सकते हैं। सोशल मीडिया के माध्यम से हम अपनी बात रख रहे हैं। हम समर्थन की अपील करते हैं। हमारे घर वाले धरना भी कर रहे हैं जगह-जगह। हम भी धरना देंगे।”

उन्होंने कहा कि 15-15 साल हो गए और उन्हें ट्रायल में भी मौका नहीं दिया जाएगा तो भला उनके पहलवानी करने का फायदा ही क्या है? उन्होंने रवि दहिया और दीपक पूनिया जैसे अन्य खिलाड़ियों का भी नाम लिया और कहा कि केवल 2 खिलाड़ियों का नाम ही क्यों डाला गया? उन्होंने कहा कि बजरंग पूनिया मना करेंगे कि वो एशियन गेम्स में नहीं जाएँगे तभी ट्रायल होगा। उन्होंने कहा कि जहाँ ट्रायल लिया जाएगा एशियन गेम्स के लिए, वहीं मैट पर वो लोग धरना करेंगे।

वहीं अंडर-24 चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतने वाली पहलवान अंतिम पंघाल ने भी इस पर आपत्ति जताई कि महिलाओं के 53 किलोग्राम वर्ग में विनेश फोगाट को डायरेक्ट भेजा जा रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले एक साल से विनेश फोगाट ने कोई प्रैक्टिस नहीं की है और उनकी इंजरी भी हुई थी। उन्होंने बड़ा दावा किया कि कॉमनवेल्थ के ट्रायल के समय 3 दिन विनेश फोगाट के साथ उनका मुकाबला हुआ था और उनके साथ चीटिंग हुई थी।

उन्होंने कहा कि तब उन्होंने और मेहनत करने की बात कही थी, लेकिन एक ही खिलाड़ी एशियन गेम्स, वर्ल्ड चैंपियनशिप और ओलंपिक में जाए – ऐसा कैसे हो सकता है? उन्होंने लोगों से अपील कि कि वो उनका साथ दें। उन्होंने कहा कि उनके माँ-पिता उनके लिए गाँव छोड़ कर उनके साथ रह रहे हैं। उन्होंने कहा कि इतने दिनों से जी-जान से वो प्रैक्टिस कर रही हैं, क्या वो पहलवानी छोड़ दें? उन्होंने कहा कि बहुत सी ऐसी लड़कियाँ हैं जो विनेश फोगाट को हरा सकती हैं।

ख्वाब ‘दुल्हा’ बनने के, विपक्ष की बारात से ‘फूफा’ बन निकले नीतीश कुमार: BJP को दगा दिया, फिर भी ‘INDIA’ ने न नाम पर सुना – न बेंगलुरु में दिया भाव

विपक्षी नेताओं ने कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में मंगलवार (18 जुलाई, 2023) को बैठक कर अपने नए गठबंधन का नाम ‘INDIA’ रखा। विपक्षी नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बड़ी-बड़ी बातें की और ‘लोकतंत्र की हत्या’ का आरोप लगाते हुए अगली विपक्षी बैठक मुंबई में होने की बात कही। इसी बीच खबर आई कि नीतीश कुमार नाराज़ हो गए हैं। इन अटकलों को हवा तब मिली जब नीतीश कुमार बिना प्रेस कॉन्फ्रेंस अटेंड किए ही पटना के लिए निकल गए।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में लालू यादव और तेजस्वी यादव भी नहीं दिखाई दिए। राजद ने ‘INDIA’ को लेकर जो ट्वीट किया था, उसे भी डिलीट कर लिया। इसके बाद चर्चा चलने लगी कि आखिर नीतीश कुमार और लालू यादव किस बात से नाराज हैं? सबसे पहली बात तो ये छन कर सामने आई कि गठबंधन का नया नाम रखने को लेकर नीतीश कुमार की सलाह को दरकिनार कर दिया गया। वो नहीं चाहते थे कि ‘INDIA’ इस गठबंधन का नाम हो, वो हिंदी में कुछ नाम रखना चाहते थे।

ANI ने भी अपने सूत्रों के हवाले से कहा है कि नीतीश कुमार ने अंत में जब अन्य नेताओं को उनकी सलाह को दरकिनार करते हुए देखा तो कह दिया कि ठीक है, अगर आपलोगों की यही इच्छा है तो कोई दिक्कत नहीं। लेकिन, सबको पता है कि नीतीश कुमार जैसे नेता के लिए ये एक ‘अपमानजनक’ बात हो गई। नीतीश कुमार 2005 से ही बिहार की सत्ता पर काबिज हैं और 2025 के विधानसभा चुनाव तक सत्ता में उनके 2 दशक हो जाएँगे। उससे पहले वो केंद्र सरकार में मंत्री थे।

आपको ये तो याद ही होगा कि नीतीश कुमार पिछले 11 महीनों से विपक्षी गठबंधन बनाने के लिए पहल कर रहे थे और इसके लिए उन्होंने दिल्ली से लेकर लखनऊ, भुवनेश्वर और चेन्नई तक का दौरा किया था। उन्होंने 11 महीने तक दौरा कर-कर के माहौल बनाया, लेकिन अंत में उन्हें ही किनारे कर दिया गया। पटना में विपक्ष की जो पहली बैठक हुई थी, उसकी मेजबानी भी नीतीश कुमार ने ही की थी। साथ ही उसमें विपक्षी नेता काफी हँसी-ख़ुशी वाले माहौल में मिलते हुए दिखे थे।

लेकिन, बेंगलुरु में हुई दूसरी बैठक में ये नजारा नहीं दिखा। यहाँ प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी अधिकतर नेता मुँह बनाए हुए दिखे। ऊपर से नीतीश कुमार की गैर-मौजूदगी ने सबका ध्यान खींचा। गठबंधन के नाम में सहमति न होने वाली तो एक बात है, दूसरी और सबसे बड़ी बात ये है कि विपक्षी गठबंधन का संयोजक कौन होगा, इस पर कोई एकमत नहीं बन पाया। नीतीश कुमार की इच्छा थी कि वो संयोजक बनाए जाएँ, लेकिन इसके लिए सभी दल राजी नहीं हुए।

बताया जाता है कि अंत में भारत के 4 अलग-अलग हिस्सों का प्रतिनिधित्व करते हुए 4 संयोजक बनाए जाने की चर्चा चली, लेकिन छोटे विपक्षी दलों ने इस पर भी ऐतराज जताया। अंत में घोषणा कर दी गई कि 11 सदस्यों की एक समिति बनेगी जो ‘कॉमन मिनिमम प्रोग्राम’ का ड्राफ्ट तैयार करेगी और साथ ही संयोजक के नाम का ऐलान भी मुंबई की बैठक में किया जाएगा। साफ़ है, ‘संयोजक’ बनने के लिए ही नीतीश कुमार ‘नाराज फूफा’ बन कर मुँह फुलाए हुए हैं।

भाजपा विधायक हरिभूषण ठाकुर का इस संबंध में बयान देखिए। उनका कहना है कि कॉन्ग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने नीतीश कुमार की सारी मेहनत को कॉन्ग्रेस पार्टी के खाते में डाल दिया। जिस तरह से बेंगलुरु में KC वेणुगोपाल सक्रिय दिखे और कॉन्ग्रेस नेताओं की मौजूदगी बड़े पैमाने पर रही, उससे साफ़ है कि नीतीश कुमार को ऐसा लग रहा है कि उनके हिस्से का एटेंशन किसी को मिल रहा है। नीतीश कुमार की बेचैनी के और भी कारण हैं।

उन्हें पता है कि वो मुख्यमंत्री हैं और पुराने नेता हैं, लेकिन ये सच्चाई भी उन्हें मन ही मन पता ही है कि बिहार में उनकी पार्टी तीसरे नंबर की है और सांसदों या विधायकों की संख्या गिनी जाए तो उनका कोई खास महत्व नहीं बनता। हालाँकि, उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश पूरी की। गठबंधन तोड़ कर फिर से राजद के साथ जा मिलने के बाद से ही वो लगातार उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के साथ मिल कर राज्य-राज्य घूमते रहे।

कुछ नेताओं ने कहा है कि नीतीश कुमार की फ्लाइट का समय हो गया था, इसीलिए वो चले गए थे। इस पर भी सवाल उठ सकते हैं कि ये नेता तो चार्टर्ड प्लेन से बेंगलुरु गए थे, फिर कैसा शेड्यूल? चार्टर्ड प्लेन का शेड्यूल तो फिर से तय किया जा सकता है। क्या ऐसे नेताओं के लिए पैसा कोई समस्या है? बिलकुल नहीं। चार्टर्ड प्लेन भी हो तो ये दिन भर में 20 बार टिकट बुक कर सकते हैं। इसीलिए, कॉन्ग्रेस पार्टी का ये बयान बिलकुल ही बचकाना लगता है कि नीतीश कुमार की फ्लाइट का समय हो गया था।

नीतीश कुमार की नाराजगी का तीसरा कारण – बेंगलुरु में ‘The Unstable Prime Ministerial Candidate’ बताते हुए उनके नामों के साथ पोस्टर लगाए गए। साथ ही इन पोस्टरों में बिहार में ध्वस्त हुए पुलों के बारे में भी बताया गया। बता दें कि बिहार में हाल ही में सुल्तानगंज और सहरसा समेत कई इलाकों में पुल ध्वस्त हुए हैं। कॉन्ग्रेस की सरकार के रहते इस तरह के पोस्टर्स का लग्न नीतीश कुमार को रास नहीं आया।

अब राजद और जदयू के नेता डैमेज कंट्रोल में जुटे हुए हैं। जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह ने नीतीश कुमार को विपक्षी एकता का सूत्रधार बताते हुए कह दिया कि जिस व्यक्ति ने सबको साथ लाया हो वो नाराज़ नहीं हो सकता। उन्होंने ‘INDIA’ नाम के पीछे भी सबकी सहमति होने की बात कही। इसी तरह राजद प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने विपक्षी बैठक की सफलता की बात करते हुए कहा कि भाजपा 2024 में साफ़ हो जाएगी। इन पार्टियों के नेता लगातार साबित करने में लगे हुए हैं कि कोई मनमुटाव नहीं है।

यहाँ सवाल ये भी उठता है कि नीतीश कुमार के साथ-साथ लालू यादव और तेजस्वी यादव भी बैठक से क्यों चले गए? असल में लालू यादव की भी यही इच्छा है कि विपक्षी एकता गठबंधन का संयोजक नीतीश कुमार को बनाया जाए। वो चाहते हैं कि इसके बाद नीतीश कुमार CM की कुर्सी तेजस्वी यादव को दे दें। अपने बेटे के लिए मुख्यमंत्री की कुर्सी सुनिश्चित करने में ही लालू का सारा ध्यान है। खुद नीतीश कुमार भी तेजस्वी को भविष्य बता चुके हैं।

अंत में सवाल ये भी उठ सकता है कि क्या नीतीश कुमार ‘संयोजक’ का पद पाने और विपक्षी बैठकों में अटेंशन के लिए इस तरह की पैंतरेबाजी कर रहे हैं? ऐसे नेताओं द्वारा इस तरह के तिकड़म आजमाए जाते हैं, ताकि उनकी महत्ता बनी रहे। इससे मीडिया में चर्चा मिलती है और मनाने की कोशिशें की जाती हैं बाकियों द्वारा। अब नीतीश कुमार को भी मनाने की कोशिश की जाएगी। हो सकता है वो गठबंधन के पक्ष में कोई बयान भी दे दें, लेकिन देखना ये है कि उनकी नाराजगी रहती है या वो संयोजक बनाए जाते हैं।

हत्या के केस में गए जेल, बाहर आए आतंकवादी बनकर: बेंगलुरु में बम ब्लास्ट की साजिश रच रहे 5 गिरफ्तार, हथियार और सैटेलाइट फोन मिले

कर्नाटक के बेंगलुरु से 5 आतंकियों को पकड़ा गया है। 5 अन्य आतंकियों की तलाश की जा रही है। ये बेंगलुरु में बम ब्लास्ट की साजिश रच रहे थे। 19 जुलाई 2023 को केंद्रीय अपराध शाखा (CCB) ने बेंगलुरु पुलिस के साथ एक साझा अभियान चला कर इन आतंकियों को गिरफ्तार किया।

गिरफ्तार आतंकियों की पहचान सैयद सुहेल, उमर, जानिद, मुदस्सिर और जाहिद के तौर पर सामने आई है। ये बेंगलुरु के आरटी नगर इलाके के रहने वाले हैं। रिपोर्ट के अनुसार पकड़े गए आतंकी 2017 में हत्या के एक मामले में जेल में बंद किए गए थे। वहीं ये आतंकियों के संपर्क में आए। इनके पास से हथियार, विस्फोटक और सैटेलाइट फोन मिले हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पुलिस को बेंगलुरु के सुल्तानपाल्या क्षेत्र के कनकनगर में एक मज़हबी स्थल के पास संदिग्धों के जमा होने की सूचना मिली थी। सूचना पर केंद्रीय अपराध शाखा ने दबिश दी। इस छापेमारी में 5 आतंकी पकड़े गए। इनको विस्फोटक बनाने सहित अन्य टेक्निकल ट्रेनिंग दिए जाने की भी आशंका है। सभी आतंकी टीम की तरह काम करते हुए बेंगलुरु में किसी बड़े विस्फोट की साजिश रच रहे थे। ये धमाके शहर के अलग-अलग हिस्सों में होने थे।

पुलिस ने आतंकियों के पास से 4 वॉकी-टॉकी, 7 देशी पिस्तौल, 42 जिंदा गोलियाँ, 2 खंजर, 2 सैटेलाइट फोन, 4 ग्रेनेड और बम बनाने में इस्तेमाल की जाने वाली विस्फोटक सामग्रियाँ बरामद की है। पुलिस को विस्फोट की साजिश में 10 से अधिक लोगों के शामिल होने की आशंका है। अन्य की तलाश जारी है। गिरफ्तार आतंकियों से पूछताछ की जा रही है।

यह भी बताया जा रहा है कि गिरफ्तार आतंकियों में से एक कोरोना काल के समय हुई अपहरण और हत्या के एक केस में भी आरोपित है। 2017 के हत्या मामले में गिरफ्तारी के दौरान परप्पना अग्रहारा सेंट्रल जेल में इनके आतंकवादियों के संपर्क में आने की बात कही जा रही है। इन्हें कट्टरपंथी बनाने में 2008 सीरियल बम ब्लास्ट के आरोपित टी नजीर की भूमिका बताई जा रही है।

न NDA-न INDIA, अकेले लोकसभा चुनाव लड़ेगी BSP: बोलीं मायावती- कॉन्ग्रेस के साथी भी उसके जैसे ही जातिवादी और पूँजीवादी

2024 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी के नेतृत्व वाली एनडीए से मुकाबले के लिए कॉन्ग्रेस विपक्षी दलों को एक साथ लाने के प्रयास कर रही है। इस क्रम में 18 जुलाई 2023 को बेंगलुरु में 26 दलों की बैठक हुई और गठबंधन का नाम INDIA रखा गया। इसी दिन 39 दलों वाले NDA की बैठक भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में नई दिल्ली में हुई।

लेकिन जनता दल (सेक्युलर) JD(S), शिरोमणि अकाली दल (SAD), बहुजन समाज पार्टी (BSP), बीजू जनता दल (BJD), भारत राष्ट्र समिति (BRS), युवजन श्रमिक रायथु कांग्रेस पार्टी (YSRCP), इंडियन नेशनल लोक दल (INLD), ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) और ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) जैसे कुछ दल ऐसे भी हैं जो न तो विपक्ष की बैठक में दिखे और न एनडीए की। इनमें से बसपा ने अब अपना स्टैंड क्लियर कर दिया है। वह न तो एनडीए के साथ जाएगी और न विपक्षी गठबंधन के साथ। उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बसपा सुप्रीमो मायावती ने 19 जुलाई 2023 को बताया कि उनकी पार्टी अकेले लोकसभा चुनाव लड़ेगी।

मायावती ने विपक्षी गठबंधन और एनडीए दोनों के दावों को खारिज करते हुए कहा कि उनकी पार्टी अकेले ही चुनाव लड़ेगी। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस पार्टी अपने जैसी जातिवादी और पूँजीवादी सोच रखने वाली पार्टियों के साथ गठबंधन कर फिर से केंद्र की सत्ता में आने का सपना देख रही है। वहीं बीजेपी भी फिर से सत्ता में आने के लिए एनडीए को मजबूत बनाने में लगी है। साथ ही सत्ता में वापसी के दावे कर रही है। 300 से ज्यादा सीटें जीतने का दावा कर रही है। लेकिन उनकी कथनी और करनी में भी विपक्षी गठबंधन की तरह ही अंतर है।

मायावती ने कहा, “हम अकेले चुनाव लड़ेंगे। हम राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, तेलंगाना में अपने दम पर चुनाव लड़ेंगे। हरियाणा, पंजाब और अन्य राज्यों में वहाँ की क्षेत्रीय पार्टियों के साथ मिलकर चुनाव लड़ सकते हैं।” विपक्षी गठबंधन का हिस्सा नहीं बनने को लेकर बसपा सुप्रीमो ने कहा, “ये पार्टियाँ लोगों के कल्याण के लिए काम नहीं करतीं। उन्होंने दलितों, मुसलमानों और अल्पसंख्यकों के लिए कुछ नहीं किया है। सभी एक जैसे हैं। सत्ता में आते ही अपने वादे भूल जाते हैं। उन्होंने जनता से किया एक भी वादा पूरा नहीं किया। चाहे वह कॉन्ग्रेस हो या बीजेपी। यही सबसे बड़ा कारण है कि बीएसपी ने विपक्ष के साथ हाथ नहीं मिलाया है।”

गौरतलब है कि जैसे 2024 से पहले बीजेपी के खिलाफ एक मजबूत गठबंधन बनाने की कोशिश हो रही है, ऐसा ही प्रयोग 2019 के आम चुनावों से पहले उत्तर प्रदेश में हुआ था। सपा और बसपा ने पुराने मतभेद भूलाकर हाथ मिलाए थे। लेकिन ये चुनावों में बीजेपी को तगड़ी चुनौती देने में नाकाम रहे थे। इसके बाद दोनों दलों के रास्ते अलग हो गए थे।

ट्रेन के फर्स्ट AC से जा रहे थे जज साहब, ट्रेन हो गई लेट… पैंट्री कार वाले नहीं आए देखने… लॉर्डशीप की तकलीफ पर रेलवे को चिट्ठी

एक जज साहब ट्रेन से जा रहे थे।
रास्ते में ट्रेन लेट हो गई।
ट्रेन में जज साहब को थोड़ी दिक्कत-परेशानी हुई।
जज साहब जिला के नहीं थे, हाई कोर्ट के थे।
बवाल मच गया। चिट्ठी-पत्री कर दी गई।

यह सिनेमा की स्क्रिप्ट नहीं बल्कि खबर है। खबर अपने देश की।

इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस गौतम चौधरी को ट्रेन यात्रा के दौरान असुविधा हुई। हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार ने इस असुविधा के लिए दोषी अधिकारियों से स्पष्टीकरण माँगा है। यह यात्रा 8 जुलाई 2023 (शनिवार) को नई दिल्ली से प्रयागराज के बीच पुरुषोत्तम एक्सप्रेस में की गई थी।

हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार के लिखे लेटर के अनुसार इस दिन ट्रेन 3 घंटे लेट थी। लेटर में बताया गया कि न्यायाधीश द्वारा बार-बार बुलाए जाने के बावजूद TTE सहित किसी भी रेलकर्मी द्वारा कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया था। शुक्रवार (14 जुलाई 2023) को जारी इस नोटिस में GRP स्टाफ और पैंट्री कार मैनेजर से स्पष्टीकरण माँगा गया है।

जस्टिस चौधरी ने ट्रेन नंबर 12802 (पुरुषोत्तम एक्सप्रेस) के फर्स्ट AC कोच में यात्रा की थी। नोटिस में यात्रा के दिन ट्रेन 3 घंटे लेट बताते हुए आरोप लगाया गया है कि न्यायाधीश के कोच में कोई भी GRP स्टाफ मौजूद नहीं था। इसी के साथ ट्रेन में अटैच पैंट्री कार वालों को भी कई बार फोन करने के बावजूद कोई भी स्टाफ जस्टिस गौतम चौधरी को खाने-पीने का सामान देने के लिए नहीं आया।

यह नोटिस उत्तर मध्य रेलवे के महाप्रबंधक कार्यालय को इलाहाबाद हाईकोर्ट के प्रोटोकॉल रजिस्ट्रार आशीष श्रीवास्तव द्वारा जारी की गई है। नोटिस के विषय में न्यायाधीश को हुई असुविधा को बताया गया है।

आरोप है कि इस पैंट्री कार के मैनेजर के तौर पर कार्यरत राज त्रिपाठी द्वारा भी न्यायाधीश का फोन नहीं उठाया गया। नोटिस के मुताबिक GRP और पैंट्री कार के स्टाफ की इस हरकत से न्यायाधीश को सफर के दौरान काफी असुविधा का सामना करना पड़ा।

बताया गया है कि इस घटना से जस्टिस चौधरी खुश नहीं हैं। उन्होंने इस हरकत के दोषियों से स्पष्टीकरण माँगा है। हाईकोर्ट रजिस्ट्रार ने रेलवे के उच्च अधिकारीयों को यह भी निर्देश दिया है कि वो GRP और पैंट्री कार स्टाफ द्वारा दिए गए जवाब की कॉपी कोर्ट में भी प्रस्तुत करें।

ज्योति मौर्य की जेठानी की शादी भी झूठ बोल कर, करेंगी FIR: कहा – ‘आलोक का परिवार सिर्फ पैसों का भूखा’

बहुचर्चित PCS अधिकारी ज्योति मौर्य और उनके पति आलोक से संबंधित विवाद में अब एक नया मोड़ आ गया है। ज्योति की जेठानी ने मीडिया से बात करते हुए आलोक के परिवार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। जेठानी शुभ्रा ने भी आलोक के परिवार पर FIR दर्ज करवाने का एलान किया है।

शुभ्रा मौर्य पेशे से सरकारी टीचर हैं। उन्होंने आलोक के भाई (अपने पति) पर नशेड़ी होने और खुद को टॉर्चर करने का आरोप लगाया है। ‘आज तक’ ने ज्योति मौर्य की जेठानी शुभ्रा का इंटरव्यू 19 जुलाई (बुधवार) को प्रकाशित किया है। इस इंटरव्यू में उन्होंने खुद को पीड़िता बताया है।

शुभ्रा आलोक के भाई विनोद मौर्य की बीवी हैं। इन्होंने बताया कि उनके पति विनोद GST विभाग में नौकरी करते हैं। शुभ्रा ने यह भी आरोप लगाया कि उनके पति ने भी शादी से पहले खुद को इंटेलिजेंस ब्यूरो का अधिकारी बताया था।

अपनी शादी से जुड़े झूठ को धोखाधड़ी बताते हुए शुभ्रा ने आलोक की शादी वाले कार्ड का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि खुद को ग्राम विकास अधिकारी बता कर ज्योति से शादी करने वाली बात सही है। हालाँकि ज्योति और आलोक के बीच हो रहे विवाद को शुभ्रा ने पति-पत्नी का झगड़ा बताते हुए आगे कॉमेंट करने से मना कर दिया।

शुभ्रा का दावा है कि आलोक का परिवार सिर्फ पैसों का भूखा है। इन्होंने अपने साथ हो रही प्रताड़ना की वजह 2 बेटियों का जन्म होना बताया। पुलिस की कार्रवाई को भी कटघरे में खड़ा करते हुए ज्योति मौर्य की जेठानी ने कहा कि उन्होंने अपने साथ हुए टॉर्चर की साल 2018 में शिकायत दर्ज करवाई थी लेकिन उस पर कोई एक्शन नहीं हुआ था।

शुभ्रा मौर्य ने आगे बताया कि उनके मायके वालों ने प्रयागराज में एक घर खरीद कर दिया था। इस घर को बिकवाने का दबाव उनके ससुराल वालों द्वारा लगातार बनाया गया। विनोद मौर्य अपनी बीवी शुभ्रा को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के लिए आत्महत्या करने की धमकी भी दिया करता था। शुभ्रा ने कहा है कि अब वो अपने ससुराल वालों के खिलाफ FIR दर्ज करवाने जा रही हैं।

10 जुलाई 2023 को शुभ्रा ने अपने ससुराली जनों के खिलाफ केस दर्ज करवाने का प्रयास किया था लेकिन FIR दर्ज नहीं हो पाई। इसके पाँच दिन बाद 15 जुलाई को शुभ्रा के पति और परिजनों ने हंगामा किया था, जिसके चलते उन्हें पुलिस बुलानी पड़ी थी। शुभ्रा अभी तक अपनी ससुराल में रह रहीं थी लेकिन उनका आरोप है कि ससुराल वालों द्वारा अब इतना टॉर्चर कर दिया गया है कि उनका रहना मुश्किल हो चुका है।

‘INDIA जीत गया… भारत हार गया’ के फेर में उलझाना चाह रहा विपक्ष, INDIA नाम पर चुनाव आयोग तक गई बात

महाराष्ट्र भाजपा के सोशल मीडिया हेड और अधिवक्ता आशुतोष दुबे ने भारत निर्वाचन आयोग को एक पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने INDIA (इंडिया) नाम को राजनैतिक फायदों के लिए प्रयोग किए जाने का आरोप लगाया है। साथ ही उन्होंने इस पर आपत्ति जताते हुए इसे रोकने की माँग की है। मंगलवार (18 जुलाई 2023) को लिखे गए इस पत्र में आशुतोष दुबे ने UPA (संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन) की 2024 लोकसभा चुनाव की तैयारियों के तरीके को आपत्तिजनक बताया।

आशुतोष दुबे ने इस पत्र को अपने ट्वीटर हैंडल पर शेयर किया है। इस ट्वीट में उन्होंने भारत निर्वाचन आयोग और उसके प्रवक्ता को टैग किया है। माँग के तौर पर आशुतोष ने उम्मीद जताई है कि उनके पत्र पर चुनाव आयोग ध्यान देगा।

भाजपा नेता ने प्रतीक और नाम (अनुचित उपयोग की रोकथाम) अधिनियम, 1950 का हवाला दिया। इस अधिनियम में भारत के राष्ट्रीय प्रतीकों और नामों की गरिमा की रक्षा जरूरी बताई गई है। उन्होंने UPA पर इसके उल्लंघन का आरोप लगाया है।

अपने पत्र में एडवोकेट आशुतोष दुबे ने 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) का नाम बदल कर भारतीय राष्ट्रीय जनतांत्रिक समावेशी गठबंधन (INDIA: Indian National Developmental Inclusive Alliance) करना चिंता का विषय बताया है।

आशुतोष दुबे ने दावा किया है कि UPA के इस कदम से बड़े स्तर पर असंतोष पैदा हुआ है। असंतोष की वजह उन्होंने देश के नाम को राजनैतिक फायदों में प्रयोग करने की विपक्ष की सोच को बताया। साथ ही उन्होंने INDIA नाम से गठबंधन बनाना देश के नागरिकों का अपमान भी बताया।

भारतीय राष्ट्रीय जनतांत्रिक समावेशी गठबंधन (INDIA: Indian National Developmental Inclusive Alliance) की सोच में आशुतोष दुबे ने मौलिकता की कमी बताया। उनका मानना है कि विपक्ष द्वारा अपने समूह का नाम INDIA रखना सिर्फ देश की सत्ता हासिल करने का हथकंडा है।

INDIA जीत गया… भारत हार गया

पत्र में विपक्ष के कुछ नेताओं द्वारा दिए जा रहे बयान जैसे – “यदि पार्टी जीतती है तो लोग कहेंगे INDIA जीत गया, लेकिन यदि पार्टी हार जाती है तो लोग कहेंगे भारत हार गया” को आशुतोष दुबे ने राष्ट्रीय अपमान की भावना बताई। उन्होंने विपक्ष पर लोकतंत्र को कमजोर करने और जनता की भावनाओं से खेलने का भी आरोप लगाया।

पत्र के अंत में भारत निर्वाचन आयोग से मामले की निष्पक्ष जाँच की माँग की गई। शिकायतकर्ता ने चुनावी नारों को बनाते हुए मानकों का पालन करवाने की भी अपील की है। आयोग से INDIA नाम के दुरूपयोग को रोकने की माँग करते हुए आशुतोष ने उम्मीद जताई कि आयोग पारदर्शी और निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए इस मामले में हस्तक्षेप करेगा।

बताते चलें कि बेंगलुरु में 17 जुलाई 2023 (सोमवार) को 26 विपक्षी पार्टियों की बैठक हुई। इस मीटिंग में साल 2024 के लोकसभा चुनावों को लेकर चर्चा हुई। यहीं पर बने इस विपक्षी समूह को INDIA नाम दिया गया है। सच्चाई यह है कि इस नाम को लेकर विपक्ष कानूनी पचड़े में फँस सकता है। क्योंकि अगर सिर्फ बोलचाल के लिए ही गठबंधन बनाया गया है तो वो ‘INDIA’ इसका नाम रख सकते हैं या फिर कहने-सुनने के लिए इसका इस्तेमाल कर सकते हैं, लेकिन जैसे ही बात रजिस्ट्रेशन वगैरह की आएगी तो ये संभव नहीं हो पाएगा।

‘अंग्रेजों ने रखा हमारे देश का नाम इंडिया’: CM सरमा, उधर विपक्ष के ‘INDIA’ में ‘D’ को लेकर नेताओं में कन्फ्यूजन, कोई कह रहा ‘डेमोक्रेटिक’ तो कोई ‘डेवलपमेंटल’

बेंगलुरु में हुई 26 विपक्षी दलों की बैठक के बाद गठबंधन के नए नाम का ऐलान हुआ। अब गठबंधन का नाम यूपीए की जगह इंडिया होगा। विपक्ष का दावा है कि इस नए नाम के साथ बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन को हराया जा सकता है। हालाँकि गठबंधन के नामकरण को लेकर बीजेपी नेता विपक्ष पर तंज कस रहे हैं।

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा है, “हमारा संघर्ष इंडिया और भारत के इर्द-गिर्द केंद्रित है। अंग्रेजों ने हमारे देश का नाम इंडिया रखा। हमें खुद को औपनिवेशिक विरासतों से मुक्त करने की कोशिश करनी चाहिए। हमारे पूर्वज भारत के लिए लड़े और हम भारत के लिए काम करते रहेंगे। भारत के लिए भाजपा।”

BJP ने अपने ऑफिशियल ट्विटर अकाउंट पर कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का वीडियो शेयर कर लिखा, “जिस ‘INDIA’ को दुनियाभर में बदनाम करते फिरते हैं, अपने अस्तित्व और परिवारों को बचाने के लिए उसके नाम का ही सहारा लेना पड़ा। और तो और, वो नाम भी सही से नहीं ले पा रहे हैं।” वीडियो में मल्लिकार्जुन खड़गे को INDIA का INDIL बोलते सुना जा सकता है।

बीजेपी के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने कहा है, “D का मतलब डेमोक्रेटिक या डेवलपमेंटल है? जो लोग इस जैसी सरल और छोटी सी बात पर आम सहमति नहीं बना पा रहे हैं। वे देश चलाने की उम्मीद कर रहे हैं। यह उन लोगों के लिए एक मजाक की तरह है, जो खुद की सेवा में लगे राजनीतिक उत्तराधिकारियों के इस समूह को गंभीरता से लेते हैं।”

दरअसल, गठबंधन के नए नाम को लेकर विपक्षी नेता के एक के बाद एक ट्वीट तो किए जा रहे थे। लेकिन उनमें INDIA के D को लेकर भारी कन्फ्यूजन दिखा। जैसे कि कॉन्ग्रेस के आधिकारिक ट्विटर अकाउंट से किए गए ट्वीट में D का मतलब डेवलपमेंटल लिखा था। वहीं अखिलेश यादव ने डेमोक्रेटिक लिखा था। 

वहीं, भाजपा सांसद सुशील मोदी ने कहा है कि भ्रष्ट और परिवारवादी विपक्षी दलों के मंच का नाम ‘इंडिया’ रखने से इनकी खोटी नियत छिपने वाली नहीं है। इनके एलीट, पश्चिम प्रभावित और हिंदू विरोधी ‘इंडिया’ को करोड़ों गरीबों, पिछड़ों का संस्कृतिनिष्ठ भारत 2024 में मुँहतोड़ जवाब देगा। इंडिया बनाम भारत मैच में जीत भारत की होगी। चारा घोटाला में सजायाफ्ता लालू प्रसाद और चिटफंड घोटाले में लिप्त ममता बनर्जी जैसे दागी लोग जहाँ जुटे हैं, उस नए मॉल का नाम बदल लेने से खोटा माल खरा सोना नहीं हो जाएगा।