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दारू पीकर बस चला रहा था दानिश शेख, जलकर मरे थे 25 यात्री: बुलढाणा हादसे में फोरेंसिक रिपोर्ट से खुलासा, टायर ब्लास्ट का कर रहा था दावा

महाराष्ट्र के बुलढाणा में 1 जुलाई 2023 को भीषण बस हादसा हुआ था। 25 यात्री जलकर मर गए थे। फोरेंसिक रिपोर्ट से पता चला है कि बस का ड्राइवर शराब के नशे में था। हादसे के बाद ड्राइवर दानिश शेख इस्माइल ने टायर ब्लास्ट के कारण दुर्घटना का दावा किया था। लेकिन इसके सबूत नहीं मिलने के बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया था।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार अब फोरेंसिक टेस्ट से ड्राइवर के नशे में होने का सबूत मिला है। न्यूज एजेंसी पीटीआई ने एक पुलिस अधिकारी के हवाले से बताया है कि रीजनल फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी से जो केमिकल एनालिसिस रिपोर्ट आई है, उससे पता चलता है कि ड्राइवर के खून में 0.30% एल्कोहल था। हादसे के समय उसके खून में एल्कोहल की मात्रा और भी ज्यादा रही होगी, क्योंकि उसका ब्लड सैंपल दुर्घटना के 12-13 घंटे बाद लिया गया था।

इससे पहले अमरावती रीजनल ट्रांसपोर्ट ऑफिस के अधिकारियों ने जब मौके पर जाँच की थी तो उन्हें भी टायर फटने के सबूत नहीं मिले थे। आरटीओ अधिकारियों ने बताया था कि टायर फटने का ड्राइवर का दावा झूठा है। घटनास्थल से रबड़ का कोई टुकड़ा नहीं मिला है। उस समय संदेह जताया गया था कि नींद आने के कारण ड्राइवर ने बस पर अपना नियंत्रण खो दिया होगा।

दुर्घटना में बचे लोगों में से एक ने बताया था कि ड्राइवर के नियंत्रण खाने के बाद बस की दाहिनी साइड एक स्टील के खंभे से लड़ी थी। इसके बाद बस पोल और डिवाइडर से टकरा कर पलट गई। उस समय जो लोग बस में आगे की तरफ थे वो एक्जिट दरवाजे से फौरन निकल गए। इसके कुछ ही देर बाद बस में आग लग गई। इसके बाद कुछ लोग खिड़की तोड़कर भी बाहर निकले थे।

हादसे के बाद महाराष्ट्र के मंत्री गिरीश महाजन ने कहा था, “बस के ड्राइवर और कंडक्टर को खरोंच भी नहीं आई। वे बाहर कूद गए। कहा जा रहा है कि ड्राइवर को थोड़ी नींद लग गई, इसलिए हादसा हुआ। ड्राइवर का कहना है कि टायर फट गया था। देखना पड़ेगा कि सच में क्या हुआ है।” अब फोरेंसिक रिपोर्ट से साफ है कि ड्राइवर नशे की हालत में था और खुद को बचाने के लिए वह झूठे दावे कर रहा था।

बता दें कि 1 जुलाई 2023 को विदर्भा ट्रैवल्स की बस 33 लोगों को लेकर नागपुर से पुणे के लिए सुबह के 4 बजे रवाना हुई थी। यवतमाल जिले में करंजा बस स्टॉप पर रुकने के बाद एक्सीडेंट हुआ था। ड्राइवर और क्लीनर समेत 8 लोग बस से निकलने में कामयाब हुए थे। वहीं 25 यात्रियों की बस में आग लगने से मौत हो गई थी।

आप पर 10 क्रिमिनल केस, वीर सावरकर के पोते भी गए हैं कोर्ट… गुजरात हाईकोर्ट ने कहा, जानिए राहुल गाँधी पर चल रहे हैं कौन-कौन से केस

गुजरात हाईकोर्ट (Gujarat High Court) ने मोदी सरनेम मामले में कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी (Rahul Gandhi) की पुनर्विचार याचिका को खारिज कर दिया और सूरत की कोर्ट द्वारा दी गई सजा को बरकरार रखा। इस दौरान उच्च न्यायालय ने राहुल गाँधी पर बेहद गंभीर टिप्पणी भी की।

गुजरात हाईकोर्ट के जस्टिस हेमंत प्रच्छक ने 7 जुलाई 2023 को फैसला सुनाते हुए कहा कि सजा पर रोक नहीं लगाना राहुल गाँधी के साथ किसी तरह का अन्याय नहीं होगा। उन्होंने कॉन्ग्रेस नेता के खिलाफ चल रहे अन्य आपराधिक मामलों का जिक्र करते हुए कहा कि राजनीति में शुचिता जरूरी है। 

जस्टिस प्रेच्छक ने कहा, “उनके खिलाफ कम से कम 10 आपराधिक मामले लंबित हैं। इस मामले के बाद भी उनके खिलाफ कुछ और केस दर्ज हुए हैं। एक मामला वीर सावरकर के पोते ने दायर किया है। सजा पर रोक लगाने से इनकार करना उनके साथ कोई अन्याय नहीं होगा। उनकी दोषसिद्धि न्यायसंगत एवं उचित है। इस आदेश में हस्तक्षेप करने की आवश्यकता नहीं है।”

इस पूरे मामले में जस्टिस प्रेच्छक की टिप्पणी बेहद महत्वपूर्ण है। जस्टिस ने कहा कि राहुल गाँधी के खिलाफ 10 आपराधिक मामले चल रहे हैं। आइए देखते हैं कि राहुल गाँधी पर कौन-कौन से मामले चल रहे हैं और क्यों चल रहे हैं।

  1. आरएसएस को महात्मा गाँधी की हत्या से जोड़ने पर: राहुल गाँधी ने मार्च 2014 में ठाणे जिले में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए कहा था कि आरएसएस के लोगों ने गाँधीजी की हत्या कर दी थी। इस बयान से विवाद खड़ा हो गया और आरएसएस की भिवंडी इकाई के प्रमुख राजेश कुंटे ने संघ को बदनाम करने के लिए राहुल गाँधी पर मुकदमा दायर किया। इस मामले में महाराष्ट्र की भिवंडी की अदालत ने उन्हें बेल दी है।
  2. आरएसएस के लोगों ने मुझे मंदिर में प्रवेश नहीं करने दिया: दिसंबर 2015 में असम में प्रचार करते समय राहुल गाँधी को बारपेटा सत्र मठ का दौरा करना था, लेकिन बाद में उन्होंने दावा किया कि आरएसएस के लोगों ने उन्हें मंदिर में प्रवेश करने से रोक दिया था। इसके बाद संघ कार्यकर्ता अंजन बोरा ने राहुल गाँधी के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गाँधी ने महिला श्रद्धालुओं का अपमान किया। इस मामले में भी राहुल गाँधी जमानत पर हैं।
  3. संघ को पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या से जोड़ा: पत्रकार गौरी लंकेश की 2017 में बेंगलुरु स्थित उनके घर के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इसके कुछ ही घंटों के भीतर राहुल गाँधी ने प्रेस वार्ता में कहा था, “जो कोई भी भाजपा की विचारधारा के खिलाफ, आरएसएस की विचारधारा के खिलाफ बोलता है उस पर दबाव डाला जाता है, पीटा जाता है, हमला किया जाता है और यहाँ तक कि उसे मार दिया जाता है।” इसके बाद उन पर आपराधिक मानहानि मुकदमा दायर किया गया। इस मामले में मुंबई की कोर्ट ने उन्हें जमानत दी है।
  4. नोटबंदी को लेकर अमित शाह पर टिप्पणी: जून 2018 में राहुल गाँधी ने एक ट्वीट पोस्ट कर अमित शाह पर अहमदाबाद जिला सहकारी बैंक के निदेशक होने का आरोप लगाया था। उन्होंने आरोप लगाया कि बैंक ने पाँच दिनों के भीतर 750 करोड़ रुपए के पुराने नोट बदले हैं। इसके लिए एक RTI जवाब का हवाला दिया गया था। इस मामले में भी राहुल गाँधी जमानत पर हैं।
  5. मोदी ‘कमांडर-इन-थीफ’ टिप्पणी: सितंबर 2018 में राफेल विमान सौदे को लेकर फ्रांसिस प्रकाशन की रिपोर्ट को शेयर करते हुए राहुल गाँधी ने ट्वीट किया था, “भारत के कमांडर-इन-थीफ के बारे में दुखद सच्चाई।” इसमें उन्होंने रिलायंस को फायदा पहुँचाने के लिए सौदे में बदलाव करने का आरोप लगाया था। इसके बाद गुरुग्राम में राहुल गाँधी के खिलाफ एक और मानहानि की याचिका दायर की गई।
  6. अमित शाह के खिलाफ टिप्पणी: साल 2019 में मध्य प्रदेश के जबलपुर में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए राहुल गाँधी ने तत्कालीन बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह को हत्या का आरोपित बताया था। उन्होंने कहा था, “हत्यारोपित भाजपा प्रमुख अमित शाह, वाह, क्या शान है…”
  7. बीजेपी की तरह कॉन्ग्रेस हत्यारे को पार्टी अध्यक्ष नहीं स्वीकारेगी: साल 2019 में राहुल गाँधी ने झारखंड में पार्टी अधिवेशन के दौरान अमित शाह पर हत्या का आरोपित होने का एक बार फिर आरोप लगाया था। इसको लेकर उन पर मानहानि के दो मानहानि के मामले दायर किए गए थे। एक झारखं के चाईबासा जिले में और दूसरा राँची में दर्ज कराया गया था।
  8. सभी चोरों का सरनेम मोदी क्यों होता है: साल 2019 में कर्नाटक के कोलार में एक चुनावी रैली के दौरान राहुल गाँधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा था और उनकी तुलना भगोड़े नीरव मोदी और ललित मोदी से की थी। इस पर उनके खिलाफ तीन मामले दर्ज किए गए थे। इसमें गुजरात की अदालत के अलावा पटना की अदालत ने भी उन्हें जमानत पर रिहा किया है।
  9. सावरकर ने स्वतंत्रता सेनानियों को धोखा दिया, अंग्रेजों से माफी माँगी: साल 2022 में राहुल गाँधी ने विनायक दामोदर सावरकर पर ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरान स्वतंत्रता सेनानियों को धोखा देने का आरोप लगाया था। उन्होंने यह भी कहा था कि सावरकर ने अंग्रेजों से माफी माँगी थी। इसलिए उन्हें अंडमान जेल से रिहा किया गया।
  10. नेशनल हेराल्ड केस: नेशनल हेराल्ड केस में भी राहुल गाँधी जमानत पर बाहर हैं। भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी द्वारा दायर मामले में सोनिया गाँधी और राहुल गाँधी को कोर्ट ने दिसंबर 2015 में जमानत दी थी। यह मामला नेशनल हेराल्ड अखबार चलाने वाली कंपनी एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड द्वारा यंग इंडियन का अधिग्रहण और उसके बाद का लेनदेन से संबंधित है।

विपक्ष का बनेंगे ‘दुल्हा’ या जाएँगे जेल: गुजरात हाईकोर्ट के फैसले के बाद राहुल गाँधी के पास क्या है विकल्प

लालू यादव (Lalu Yadav) बार-बार कह रहे हैं कि कॉन्ग्रेस (Congress) नेता राहुल गाँधी (Rahul Gandhi) को अब शादी कर लेनी चाहिए और वे सब बारात में जाने के लिए तैयार हैं। लालू ने यहाँ तक कह दिया कि बिना पत्नी के प्रधानमंत्री आवास में रहना अच्छा नहीं लगेगा। लेकिन, अब लगता है कि राहुल गाँधी को दुल्हा के रूप में देखने के विपक्ष का सपना बस सपना ही रह जाएगा।

राजनीति में प्रतीकों एवं उपमा-उपमानों का बड़ा महत्व होता है और लालू यादव इसके सिकंदर माने जाते हैं। लालू यादव राहुल गाँधी को दुल्हा बनने की सलाह देकर भले ही उनकी शादी कर लेने की अभिभावजन्य सलाह देते नजर आ रहे हों, लेकिन वे राहुल गाँधी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार भी बताते रहे हैं। साथ ही यह भी दर्शाने की कोशिश करते रहे हैं कि पूरा विपक्ष बाराती के रूप में इसका समर्थन करेगा।

हालाँकि, गुजरात हाईकोर्ट के फैसले ने लालू यादव और राहुल गाँधी सहित उनके चाहने वालों के इरादे पर पानी फेर दिया है। विपक्षी एकजुटता में पहले ही प्रधानमंत्री पद के लिए हर कोई स्वघोषित उम्मीदवार है। ऐसे में राहुल गाँधी के रूप में ‘रास्ते का काँटा’ हटने पर कुछ लोग खुश हो सकते हैं, लेकिन सबको एक साथ जोड़ने में कॉन्ग्रेस की भूमिका मानने वाले इससे जरूर दुखी होंगे।

दरअसल, ‘मोदी सरनेम’ के आपराधिक मामले में गुजरात हाईकोर्ट ने सूरत कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए राहुल गाँधी को राहत देने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट का दोषी ठहराने का आदेश उचित है और उक्त आदेश में हस्तक्षेप करने की कोई जरूरत नहीं है। हाईकोर्ट ने यह। भी कहा कि राहुल गाँधी के खिलाफ कम से कम 10 आपराधिक मामले लंबित हैं।

सूरत कोर्ट ने कॉन्ग्रेस नेता को आपराधिक मानहानि केस में दोषी मानते हुए सजा सुनाई थी। इसके बाद उनकी लोकसभा की सदस्यता चली गई थी। इस फैसले को राहुल गाँधी ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। गुजरात हाईकोर्ट के जस्टिस हेमंत प्रच्छक ने 7 जुलाई 2023 को फैसला सुनाते हुए कहा कि सजा पर रोक नहीं लगाना राहुल गाँधी के साथ किसी तरह का अन्याय नहीं होगा। उन्होंने कॉन्ग्रेस नेता के खिलाफ चल रहे अन्य आपराधिक मामलों का जिक्र करते हुए कहा कि राजनीति में शुचिता जरूरी है। 

जस्टिस प्रेच्छक ने कहा, “उनके खिलाफ कम से कम 10 आपराधिक मामले लंबित हैं। इस मामले के बाद भी उनके खिलाफ कुछ और केस दर्ज हुए हैं। एक मामला वीर सावरकर के पोते ने दायर किया है। सजा पर रोक लगाने से इनकार करना उनके साथ कोई अन्याय नहीं होगा। उनकी दोषसिद्धि न्यायसंगत एवं उचित है। इस आदेश में हस्तक्षेप करने की आवश्यकता नहीं है। इसलिए आवेदन खारिज किया जाता है।”

कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी निम्नलिखित मामले दर्ज हैं। इनमें से अधिकतर मामलों में सुनवाई जारी है और राहुल गाँधी जमानत पर बाहर हैं।

  1. आरएसएस को महात्मा गाँधी की हत्या से जोड़ने पर: राहुल गाँधी ने मार्च 2014 में ठाणे जिले में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए कहा था कि आरएसएस के लोगों ने गाँधीजी की हत्या कर दी थी। इस बयान से विवाद खड़ा हो गया और आरएसएस की भिवंडी इकाई के प्रमुख राजेश कुंटे ने संघ को बदनाम करने के लिए राहुल गाँधी पर मुकदमा दायर किया।
  2. आरएसएस के लोगों ने मुझे मंदिर में प्रवेश नहीं करने दिया: दिसंबर 2015 में असम में प्रचार करते समय राहुल गाँधी को बारपेटा सत्र मठ का दौरा करना था, लेकिन बाद में उन्होंने दावा किया कि आरएसएस के लोगों ने उन्हें मंदिर में प्रवेश करने से रोक दिया था। इसके बाद संघ कार्यकर्ता अंजन बोरा ने राहुल गाँधी के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गाँधी ने महिला श्रद्धालुओं का अपमान किया।
  3. संघ को पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या से जोड़ा: पत्रकार गौरी लंकेश की 2017 में बेंगलुरु स्थित उनके घर के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इसके कुछ ही घंटों के भीतर राहुल गाँधी ने प्रेस वार्ता में कहा था, “जो कोई भी भाजपा की विचारधारा के खिलाफ, आरएसएस की विचारधारा के खिलाफ बोलता है उस पर दबाव डाला जाता है, पीटा जाता है, हमला किया जाता है और यहाँ तक कि उसे मार दिया जाता है।” इसके बाद उन पर आपराधिक मानहानि मुकदमा दायर किया गया।
  4. नोटबंदी को लेकर अमित शाह पर टिप्पणी: जून 2018 में राहुल गाँधी ने एक ट्वीट पोस्ट कर अमित शाह पर अहमदाबाद जिला सहकारी बैंक के निदेशक होने का आरोप लगाया था। उन्होंने आरोप लगाया कि बैंक ने पाँच दिनों के भीतर 750 करोड़ रुपए के पुराने नोट बदले हैं। इसके लिए एक RTI जवाब का हवाला दिया गया था।
  5. मोदी ‘कमांडर-इन-थीफ’ टिप्पणी: सितंबर 2018 में राफेल विमान सौदे को लेकर फ्रांसिस प्रकाशन की रिपोर्ट को शेयर करते हुए राहुल गाँधी ने ट्वीट किया था, “भारत के कमांडर-इन-थीफ के बारे में दुखद सच्चाई।” इसमें उन्होंने रिलायंस को फायदा पहुँचाने के लिए सौदे में बदलाव करने का आरोप लगाया था। इसके बाद गुरुग्राम में राहुल गाँधी के खिलाफ एक और मानहानि की याचिका दायर की गई।
  6. अमित शाह के खिलाफ टिप्पणी: साल 2019 में मध्य प्रदेश के जबलपुर में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए राहुल गाँधी ने तत्कालीन बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह को हत्या का आरोपित बताया था। उन्होंने कहा था, “हत्यारोपित भाजपा प्रमुख अमित शाह, वाह, क्या शान है…”
  7. बीजेपी की तरह कॉन्ग्रेस हत्यारे को पार्टी अध्यक्ष नहीं स्वीकारेगी: साल 2019 में राहुल गाँधी ने झारखंड में पार्टी अधिवेशन के दौरान अमित शाह पर हत्या का आरोपित होने का एक बार फिर आरोप लगाया था। इसको लेकर उन पर मानहानि के दो मानहानि के मामले दायर किए गए थे। एक झारखं के चाईबासा जिले में और दूसरा राँची में दर्ज कराया गया था।
  8. सभी चोरों का सरनेम मोदी क्यों होता है: साल 2019 में कर्नाटक के कोलार में एक चुनावी रैली के दौरान राहुल गाँधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा था और उनकी तुलना भगोड़े नीरव मोदी और ललित मोदी से की थी। इस पर उनके खिलाफ तीन मामले दर्ज किए गए थे।
  9. सावरकर ने स्वतंत्रता सेनानियों को धोखा दिया, अंग्रेजों से माफी माँगी: साल 2022 में राहुल गाँधी ने विनायक दामोदर सावरकर पर ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरान स्वतंत्रता सेनानियों को धोखा देने का आरोप लगाया था। उन्होंने यह भी कहा था कि सावरकर ने अंग्रेजों से माफी माँगी थी। इसलिए उन्हें अंडमान जेल से रिहा किया गया।
  10. नेशनल हेराल्ड केस: नेशनल हेराल्ड केस में भी राहुल गाँधी जमानत पर बाहर हैं। भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी द्वारा दायर मामले में सोनिया गाँधी और राहुल गाँधी को कोर्ट ने दिसंबर 2015 में जमानत दी थी। यह मामला नेशनल हेराल्ड अखबार चलाने वाली कंपनी एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड द्वारा यंग इंडियन का अधिग्रहण और उसके बाद का लेनदेन से संबंधित है।

मोदी सरनेम ही नहीं, ऊपर के मामलों में भी राहुल गाँधी पर तलवार लटकी हुई है। हालाँकि, मोदी सरनेम में फैसला सबसे पहले आ गया। दरअसल, लोकसभा चुनाव के दौरान 13 अप्रैल 2019 को दौरान राहुल गाँधी ने कर्नाटक की एक सभा में कहा था कि ‘सभी चोरों का उपनाम मोदी क्यों होता है?’ राहुल गाँधी ने कहा था, “नीरव मोदी, ललित मोदी, नरेंद्र मोदी इन सभी के नाम में मोदी लगा हुआ है। सभी चोरों के नाम में मोदी क्यों लगा होता है।”

इसको लेकर गुजरात और झारखंड के जगहों पर राहुल गाँधी के खिलाफ आपराधिक मानहानि का मुकदमा किया गया था। इस बयान के बाद भाजपा नेता पूर्णेश मोदी ने कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष के खिलाफ सूरत में मामला दर्ज कराया था। राहुल गाँधी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 499 और 500 के तहत केस दर्ज करवाया था, जो आपराधिक मानहानि से संबंधित है। 

सजा सुनाए जाने के तुरंत बाद उन्हें जमानत भी दे दी गई। हालाँकि, सूरत की अदालत ने उन्हें अपील करने के लिए 30 दिनों का समय दिया था, लेकिन उन्होंने ना ही ऊपरी अदालतों में अपील की और ना ही माफी माँगी। आखिरकार 30 दिन बीतने के बाद उनकी संसद सदस्यता चली गई। सजा सुनाए जाने के दौरान राहुल गाँधी केरल में वायनाड से सांसद थे।

20 अप्रैल 2023 को मजिस्ट्रेट अदालत ने सजा निलंबित करने की राहुल गाँधी की याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद गुजरात हाईकोर्ट ने भी उन्हें राहत देने से इनकार कर दिया था। अब उनकी पुनर्विचार याचिका को भी खारिज करके राहत देने से साफ इनकार कर दिया। राहुल गाँधी के पास अब सिर्फ सुप्रीम कोर्ट जाने का रास्ता बचा है। कॉन्ग्रेस ने कहा है कि वह सुप्रीम कोर्ट जाएगी।

अगर सुप्रीम कोर्ट सूरत कोर्ट द्वारा दी गई सजा पर रोक लगा देता है तो उनकी सांसदी बहाल हो सकती है और वे अगला चुनाव लड़ेंगे वर्ना वे प्रधानमंत्री तो दूर, विधानसभा का चुनाव भी नहीं लड़ पाएँगे। कानून के मुताबिक, दो साल और उससे अधिक की सजा होने पर अगले 6 साल के लिए दोषी चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य हो जाता है। ऐसे में राहुल गाँधी अभी तक अगले 6 साल तक चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य हैं।

ऐसे में राहुल गाँधी के साल 2024 का लोकसभा चुनाव लड़ने पर तलवार लटका हुआ है। लालू यादव द्वारा उन्हें दुल्हा बनाने का ख्वाब सफल होता नहीं दिख रहा है। इसका असर विपक्षी एकता गठबंधन पर भी पड़ेगा, जो पहले से ही धाराशायी होती दिख रही है। अब राहुल गाँधी की अंतिम उम्मीद सुप्रीम कोर्ट ही है।

फ्रांस में मुस्लिम भर जाएँगे, बनेगा इस्लामी मुल्क: दंगों के बीच मौलाना का पुराना वीडियो वायरल, 2050 तक मिशन पूरा करने के बताए थे 3 तरीके

फ्रांस में पिछले दिनों भड़की हिंसा के कारण वहाँ का माहौल अब तक ठीक नहीं है। इस बीच एक मौलाना की वीडियो वायरल हुई थी जिसमें वो कह रहे थे कि कैसे पश्चिमी देशों ने मुस्लिम देशों का ‘कचड़ा’ उठा-उठाकर अपनी स्थिति बिगाड़ी। वहीं एक मौलाना की वीडियो सामने आई है जिसमें वो कह रहे हैं कि 2050 तक फ्रांस एक मुस्लिम देश बन जाएगा।

ये वीडियो मार्च 2019 की है। इस वीडियो में अल-अक्सा के मौलवी अबू ताकी अल-बिन-अल-दारी कहते नजर आ रहे हैं कि साल 2050 तक फ्रांस में मुस्लिम भर जाएँगे।

इस वीडियो वो कहते नजर आ रहे हैं कि जो हम गिनती कर रहे हैं वो यही है कि मुस्लिमों का अपना ही देश होना चाहिए जो इस्लाम लाए, उसका प्रकाश, संदेश और दया पश्चिमी देशों में अल्लाह के करम से जिहाद के जरिए फैलाए।

मौलवी आगे कहता है, “मुस्लिमों ने पोलैंड और ऑस्ट्रिया पर विजय प्राप्त कर ली है। इस्लामिक स्टेट ऑस्ट्रिया की राजधानी वियना तक भी पहुँच गए हैं। वहाँ उन्होंने नमाज करवाई।”

मौलाना कहता है कि इस्लाम पूरे विश्व में तीन तरीके से फैलेगा। एक तो इस्लाम का प्रचार करके, दूसरा जजिया ले लेकर और तीसरा अल्लाह के करम से लड़ाई लड़के।” उनके मुताबिक ऐसा तब तक करें जब तक कि पूरे जहां में इस्लाम काबिज न हो जाए।

इसी तरह दुबई के एक मुस्लिम नेता ने भी फ्रांस दंगों को लेकर भविष्यवाणी की थी। उन्होंने कहा था कि वो दिन ज्यादा दूर नहीं जब यूरोप से अधिक कट्टरपंथी और आतंकी दिखाई देंगे। ऐसा सिर्फ इसलिए होगा क्योंकि वो लोग निर्णय नहीं लेना जानते या फिर पॉलिटिकली करेक्ट होने की कोशिश कर रहे हैं। या शायद ये समझ रहे हैं कि वो मिडिल ईस्ट से ज्यादा इस्लाम को और लोगों को जानते हैं। लेकिन माफ करिए ये सिर्फ और सिर्फ अज्ञानता है।

इससे पहले मौलाना तौहिदी ने समझाया था कि कैसे पश्चिमी देश मुस्लिम देशों से निकाले गए कट्टरपंथियों को अपने यहाँ पनाह दे रहा है, जिसका अंजाम उन्हें भुगतना होगा।

राहुल गाँधी की सजा पर रोक से गुजरात हाई कोर्ट का इनकार: कहा- उन पर चल रहे हैं 10 क्रिमिनल केस, राहत नहीं देना उनके साथ अन्याय नहीं

कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी को गुजरात हाई कोर्ट से भी राहत नहीं मिली है। हाई कोर्ट ने उनकी सजा पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। मामला ‘सभी चोरों का सरनेम मोदी’ वाले बयान से जुड़ा हुआ है। सूरत कोर्ट ने कॉन्ग्रेस नेता को आपराधिक मानहानि केस में दोषी मानते हुए सजा सुनाई थी। इसके बाद उनकी लोकसभा की सदस्यता चली गई थी। इस फैसले को राहुल गाँधी ने हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।

गुजरात हाई कोर्ट के जस्टिस हेमंत प्रच्छक ने 7 जुलाई 2023 को फैसला सुनाते हुए कहा कि सजा पर रोक नहीं लगाना राहुल गाँधी के साथ किसी तरह का अन्याय नहीं होगा। उन्होंने कॉन्ग्रेस नेता के खिलाफ चल रहे अन्य आपराधिक मामलों का जिक्र करते हुए कहा कि राजनीति में शुचिता जरूरी है। जस्टिस प्रेच्छक ने कहा, “उनके खिलाफ कम से कम 10 आपराधिक मामले लंबित हैं। इस मामले के बाद भी उनके खिलाफ कुछ और केस दर्ज हुए हैं। एक मामला वीर सावरकर के पोते ने दायर किया है। सजा पर रोक लगाने से इनकार करना उनके साथ कोई अन्याय नहीं होगा। उनकी दोषसिद्धि न्यायसंगत एवं उचित है। इस आदेश में हस्तक्षेप करने की आवश्यकता नहीं है। इसलिए आवेदन खारिज किया जाता है।”

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक राहुल गाँधी की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता और कॉन्ग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी हाई कोर्ट में पेश हुए थे। वहीं शिकायतकर्ता पूर्णेश मोदी का पक्ष सीनियर एडवोकेट निरुपम नानावटी ने रखा। 2 जून 2023 को हुई सुनवाई में गुजरात हाई कोर्ट ने राहुल गाँधी को अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया था। तब कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। 7 जुलाई को सुनाए फैसले में उच्च न्यायालय ने सूरत मेट्रोपोलिटिन कोर्ट के फैसले को सही पाया। इस फैसले के बाद स्पष्ट है कि राहुल गाँधी की लोकसभा सदस्यता निरस्त ही रहेगी। हालाँकि अभी उनके पास सुप्रीम कोर्ट जाने के विकल्प खुले हुए हैं।

गौरतलब है कि साल 2019 में राहुल गाँधी ने लोकसभा चुनाव के दौरान कर्नाटक में एक आपत्तिजनक भाषण दिया था। इस भाषण में उन्होंने ललित और नीरव का नाम लेते हुए कहा था कि सभी चोरों के सरनेम में मोदी क्यों होता है। गुजरात से भारतीय जनता पार्टी के विधायक पूर्णेश मोदी ने इसे पूरे समाज का अपमान बता कर सूरत की मेट्रोपोलिटन कोर्ट में राहुल गाँधी के खिलाफ मानहानि का आपराधिक केस दर्ज करवाया था। 23 मार्च 2023 को सूरत के मेट्रोपोलिटिन मजिस्ट्रेस्ट ने राहुल गाँधी को दोषी ठहराते हुए 2 साल की सजा सुनाई थी। सजा सुनाए जाने के दौरान राहुल गाँधी केरल में वायनाड से सांसद थे। सजा के बाद नियमानुसार उनकी संसद सदस्यता समाप्त हो गई थी। 20 अप्रैल को मजिस्ट्रेट अदालत ने भी सजा निलंबित करने की राहुल गाँधी की याचिका खारिज कर दी थी।

तारों से बाँध डिक्की में डाला, गले पर लगाए चीरे, फिर जिंदा ही गाड़ दिया: भारतीय छात्रा से ऑस्‍ट्रेलिया में पूर्व प्रेमी ने लिया भयावह ‘बदला’

2021 में ऑस्ट्रेलिया में जसमीन कौर की हत्या कर दी गई थी। अब इसका भयावह विवरण सामने आया है। नर्सिंग की छात्रा 21 वर्षीय जसमीन की हत्या उसके ही पूर्व प्रेमी तारिकजोत सिंह ने की थी। रिश्ता टूटने का बदला लेने के लिए उसने जसमीन को जिंदा ही गाड़ दिया गया था। 5 जुलाई 2023 को ऑस्ट्रेलिया की सुप्रीम कोर्ट ने ताकिरजोत को उम्र कैद की सजा सुनाई।

जसमीन और तारिकजोत दोनों मूल रूप से भारत के पंजाब के रहने वाले हैं। मृतका एडिलेड शहर में रहकर नर्सिंग की पढ़ाई कर रही थी। तारिकजोत को अदालत ने फरवरी 2023 में ही हत्या का दोषी ठहरा दिया था। लेकिन 5 जुलाई को जब उसे सजा सुनाई गई तो हत्या के खौफनाक विवरण सामने आए।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जसमीन और तारिकजोत के बीच थोड़े समय के लिए प्रेम संबंध रहे थे। बाद में किसी वजह से रिश्ता टूट गया। रिश्ता टूटने के बाद तारिकजोत इस बर्दाश्त नहीं कर पाया। वह जसमीन को लगातार मैसेज भेजता था। फिर से रिश्ता जोड़ने की धमकी देता था। लेकिन उसकी धमकियों का जसमीन पर कोई असर नहीं पड़ा।

इसके बाद 5 मार्च 2021 को तारिकजोत सिंह ने जसमीन कौर का अपहरण कर लिया। तार से बाँध उसे अपनी कार की डिक्की में डाल दिया और उसे एडिलेड से लगभग 644 किलोमीटर दूर फ्लिंडर्स रेंज नाम की जगह पर ले गया। यहाँ उसने सुनसान जगह देखकर जसमीन के गले पर चीरे लगाए। फिर उसे जमीन में जिंदा गाड़ दिया। जाँच के दौरान पुलिस ने पाया कि हत्या से पहले तारिकजोत ने पूरी तैयारी की थी। उसने अपनी सिम दूसरे मोबाइल में लगा कर कहीं और छोड़ दिया था, जिस से उसकी लोकेशन घटनास्थल पर न मिले। साथ ही अपहरण के लिए उसने अपने फ्लैटमेट की कार का प्रयोग किया था।

पुलिस के हाथ एक CCTV फुटेज भी लगा जिसमें तारिकजोत घटना के दिन एक हार्डवेयर की दुकान से केबल खरीद रहा था। घटना के अगले दिन 6 मार्च की रात को तारिकजोत को गिरफ्तार कर लिया गया। पहले उसने पुलिस को गुमराह किया और बताया कि जसमीन ने आत्महत्या की थी जिसके शव को उसने दफना दिया। लेकिन बाद में उसने अपना गुनाह कबूल कर लिया। कोर्ट में चले ट्रायल में पुलिस ने पर्याप्त सबूत दिए जिससे फरवरी 2023 में तारिकजोत को दोषी करार दे दिया गया।

मृतका के वकील ने कोर्ट से कड़ी सजा की माँग की थी। उन्होंने उस तकलीफ के बारे में कल्पना करने को कहा था जो जसमीन ने मौत से पहले झेली होगी। ऑस्ट्रेलिया की सुप्रीम कोर्ट ने घटना को बर्बर मानते हुए तारिकजोत सिंह को जीवन भर जेल में रहने की सजा सुनाई।

‘मोदी-योगी मुस्लिम बन जाएँ तो बहुत कुछ सुधर जाएगा’: तबलीगी जमात के मौलाना ने दी इस्लाम कबूलने की दावत, कहा- भारत में भी आएगा शरिया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को इस्लाम कबूलने की दावत तबलीगी जमात के एक मौलाना ने दी है। मौलाना तौकीर अहमद का कहना है कि यदि ये दोनों मुस्लिम बन गए तो बहुत कुछ सुधर जाएगा। एक इंटरव्यू में मौलाना ने धर्मांतरण के लिए इस्लामी मुल्कों से पैसा आने की बात कबूली है। साथ ही अफगानिस्तान की तरह भारत में भी एक दिन शरिया राज स्थापित होने की बात कही है।

मौलाना तौकीर अहमद ने टाइम्स नाउ नवभारत से बातचीत में उपरोक्त बातें कही है। 4 जुलाई 2023 को उसका 8 मिनट लंबा यह इंटरव्यू प्रकाशित हुआ है। इसमें मौलाना तौकरी ने बताया है कि उसका मुख्य मकसद योगी आदित्यनाथ और नरेंद्र मोदी को इस्लाम कबूल करवाना है। इन दोनों को हिंदुओं की मुख्य शख्सियत बताते हुए कहा कि ये दोनों अगर कन्वर्ट हो गए तो बहुत कुछ सुधर जाएगा। मौलाना तौकीर ने कहा, “मैं तो योगी जी को भी यही समझाना चाहूँगा कि एक बार बैठें और समझें कि दीन और इस्लाम क्या है। इंशाअल्लाह वो जरूर ईमान लाएँगे।” नीचे वीडियो में 4 मिनट 57 सेकेंड के बाद आप ये बात सुन सकते हैं

मौलाना तौकीर ने इस दौरान इस्लामी धर्मांतरण, समान नागरिक संहिता (UCC), विदेशी फंडिंग सहित कई अन्य मसलों पर भी बात की। बताया कि देश में हो रहे इस्लामी धर्मांतरण के 99% मामलों के लिए अकेला तबलीगी जमात जिम्मेदार है। जमात के दाई लोगों का जिक्र करते हुए उसने कहा कि ये वो लोग हैं जो गैर मुस्लिमों को दीन इस्लाम की दावत देते हैं। उसने कहा कि दावत देने के दौरान गैर मुस्लिमों को कुरान की आयतें, हदीसों और गुजरे समय में नबियों द्वारा लोगों को समझाई गई चीजों के बारे में बताया जाता है।

उसने बताया कि दाई का मुख्य काम युवाओं को अपनी तरफ खींचना है। वे लोगों को बताते हैं कि पहले जिन लोगों ने नबियों की बातें नहीं मानी उनको सजा भुगतनी पड़ी थी। तौकीर ने खुद को भी दाई बताते हुए कहा कि वो अभी भी लोगों को इस्लाम कबूलने की दावत दे रहे हैं। अपनी मजहबी किताब का हवाला देते हुए मौलाना तौकीर ने कहा कि दुनिया के पहले इंसान आदम और उनकी जात से खुदा ने सिर्फ खुद को पूजने और बुतपरस्ती (मूर्ति न पूजने) का वादा लिया था। मूर्ति पूजने वालों को भटका हुआ बताते हुए मौलाना ने कहा कि उन्हें अल्लाह की इबादत की तरफ लाने की जरूरत है।

तौकीर ने दावा किया कि साल 2014 से अब तक देश भर में लगभग 20 लाख गैर मुस्लिम इस्लाम कबूल कर चुके हैं। उसने कहा कि तबलीगी जमात के सदस्य अधिक से अधिक लोगों को इस्लाम कबूल करवाने का प्रयास करते हैं। बकौल तौकीर UCC से मुस्लिमों को कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए क्योंकि वो अपने मुख्य टारगेट शरिया कानून को लागू करने के प्रयास में लगे हुए हैं। मौलाना ने कहा, “इंशाअल्लाह शरिया कानून आएगा। आप अफगानिस्तान में देख लीजिए वहाँ शरिया कानून लागू हुआ। अमेरिका था वहाँ। सबको भगा दिया।”

धर्मांतरण को जरूरी बताते हुए हुए मौलाना ने कहा कि सबको अल्लाह के एक रास्ते पर लाना है। धर्मांतरण नेटवर्क को ऑपरेट करने वाले मुख्य व्यक्ति के तौर पर उसने मौलाना साद, उनके बेटे और हाल ही में जेल से छूटकर आए कलीम सिद्दीकी का नाम लिया। उसने बताया कि इस्लामी धर्मांतरण का नेटवर्क पूरे देश में सक्रिय है। इसके लिए पैसे अरब देशों और अफगानिस्तान से आते हैं। तौकीर के मुताबिक विदेश से मिले इन पैसों से हिन्दुओं को लुभाया जाता है जो घर से किसी कारण से बेघर कर दिए जाते हैं। मौलाना तौकीर अहमद ने क़ुरान का हवाला देते हुए कहा कि 72 हूरों को अल्लाह ने इंसानों को बुराइयों से दूर रखने के लिए बनाया है।

गीता प्रेस के लीला मंदिर जाएँगे PM मोदी, चित्रमय शिव पुराण का करेंगे विमोचन: धार्मिक पुस्तकों को घर-घर पहुँचाने वाली संस्था के बारे में जानिए सब कुछ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज (7 जुलाई 2023) उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में होंगे। वे गीता प्रेस के शताब्दी वर्ष समारोह के समापन कार्यक्रम में शामिल होंगे। पिछले दिनों ही गीता प्रेस को वर्ष 2021 का गाँधी शांति पुरस्कार देने की घोषणा हुई थी। प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट कर कहा है, “गोरखपुर में गीता प्रेस के शताब्दी समारोह के समापन कार्यक्रम में शामिल होने को लेकर अत्यंत उत्सुक हूँ। इसके साथ ही मुझे वहाँ कई विकास परियोजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास की भी बेसब्री से प्रतीक्षा है।”

वहीं गोरखपुर के सांसद रवि किशन ने बताया है कि प्रधानमंत्री गीता प्रेस के ‘चित्रमय शिव पुराण ग्रंथ’ का विमोचन करेंगे। उन्होंने ट्वीट कर कहा है, “प्रधानमंत्री अपनी इस यात्रा में गीता प्रेस परिसर के भीतर लीला चित्र मंदिर भी जाएँगे। यह मंदिर एक पवित्र स्थान होने के साथ साथ कला और भक्ति के मिश्रण का उदाहरण है, जो यहाँ आने वालों को आध्यात्मिक तथा शांत वातावरण प्रदान करता है।”

गीता प्रेस की शुरुआत 1923 में हुई थी। घर-घर गीता पहुँचाने के उद्देश्य से हनुमान प्रसाद पोद्दार ने इसकी नींव रखी थी। गीता प्रेस सालाना 2 करोड़ से ज्यादा पुस्तक छापकर देश-विदेश में भेजती है। 100 सालों में प्रेस ने 41 करोड़ से ज्यादा पुस्तकें छापी हैं। यहाँ धार्मिक किताबें प्रकाशित होती हैं और एक बार जिल्द चढ़ने के बाद किताबों को कभी जमीन पर नहीं रखा जाता। इन्हें रखने के लिए लकड़ी के फट्टे हैं। इसके अलावा इन्हें मशीन से नहीं हाथों से चिपकाया जाता है, क्योंकि बाजार में बिकने वाली गोंद में जानवरों से जुड़ी चीजें मिली होती हैं।

घर-घर गीता प्रेस पहुँचाने वाले हनुमान प्रसाद पोद्दार

आज गीता प्रेस द्वारा करोड़ों की तादाद में प्रकाशित की जा रही किताबें हर साल बिकती हैं। लोग केवल गीता प्रेस लिखा होने भर से उसे खरीद लेते हैं। मगर इसके प्रति इतना विश्वास लोगों में यूँ ही नहीं बना। साल 1923 में इसकी शुरुआत होने के बाद ये धीरे-धीरे लोगों तक पहुँची और इसे घर-घर तक पहुँचाने का श्रेय अगर किसी को जाता है तो वो हनुमान प्रसाद पोद्दार हैं। जिन्होंने अलीपुर जेल में श्री ऑरोबिंदो (उस समय बाबू ऑरोबिंदो घोष) के साथ बंद रहते हुए जेल में ही गीता का अध्ययन शुरू कर दिया था।

वहीं से छूटने के बाद उनका ध्यान इस बात पर गया कि कैसे कलकत्ता ईसाई मिशनरी गतिविधियों का केंद्र बना हुआ था, जहाँ बाइबिल के अलावा ईसाईयों की अन्य किताबें भी, जिनमें हिन्दुओं की धार्मिक परम्पराओं के लिए अनादर से लेकर झूठ तक भरा होता था, सहज उपलब्ध थीं। लेकिन गीता- जो हिन्दुओं का सर्वाधिक जाना-माना ग्रन्थ था, उसकी तक ढंग की प्रतियाँ उपलब्ध नहीं थीं। इसीलिए बंगाली तेज़ी से हिन्दू से ईसाई बनते जा रहे थे।

1926 में हुए मारवाड़ी अग्रवाल महासभा के दिल्ली अधिवेशन में पोद्दार की मुलाकात सेठ घनश्यामदास बिड़ला से हुई, जिन्होंने आध्यात्म में पहले ही गहरी रुचि रखने वाले पोद्दार को सलाह दी कि जन-सामान्य तक आध्यात्मिक विचारों और धर्म के मर्म को पहुँचाने के लिए आम भाषा (आज हिंदी, उस समय की ‘हिन्दुस्तानी’) में एक सम्पूर्ण पत्रिका प्रकाशित होनी चाहिए। पोद्दार ने उनके इस विचार की चर्चा जयदयाल गोयनका से की, जो उस समय तक गोबिंद भवन कार्यालय के अंतर्गत गीता प्रेस नामक प्रकाशन का रजिस्ट्रेशन करा चुके थे।

गोयनका ने पोद्दार को अपनी प्रेस से यह पत्रिका निकालने की ज़िम्मेदारी दे दी, और इस तरह ‘कल्याण’ पत्रिका का उद्भव हुआ, जो तेज़ी से हिन्दू घरों में प्रचारित-प्रसारित होने लगी। आज कल्याण के मासिक अंक लगभग हर प्रचलित भारतीय भाषा और इंग्लिश में आने के अलावा पत्रिका का एक वार्षिक अंक भी प्रकाशित होता है, जो अमूमन किसी-न-किसी एक पुराण या अन्य धर्मशास्त्र पर आधारित होता है।

गीता प्रेस की स्थापना के पीछे का दर्शन स्पष्ट था- प्रकाशन और सामग्री/जानकारी की गुणवत्ता के साथ समझौता किए बिना न्यूनतम मूल्य और सरलतम भाषा में धर्मशास्त्रों को जन-जन की पहुँच तक ले जाना। हालाँकि गीता प्रेस की स्थापना गैर-लाभकारी संस्था के रूप में हुई, लेकिन गोयनका-पोद्दार ने इसके लिए चंदा लेने से भी इंकार कर दिया, और न्यूनतम लाभ के सिद्धांत पर ही इसे चलाने का निर्णय न केवल लिया, बल्कि उसे सही भी साबित करके दिखाया। 5 साल के भीतर गीता प्रेस देश भर में फ़ैल चुकी थी, और विभिन्न धर्मग्रंथों का अनुवाद और प्रकाशन कर रही थी। गरुड़पुराण, कूर्मपुराण, विष्णुपुराण जैसे महत्वपूर्ण ग्रंथों का प्रकाशन ही नहीं, पहला शुद्ध और सही अनुवाद भी गीता प्रेस ने ही किया।

बम्बई से आई गोरखपुर, गोरखधाम बना संरक्षक

गीता प्रेस ने श्रीमद्भागवत गीता और रामचरितमानस की करोड़ों प्रतियाँ प्रकाशित और वितरित की हैं। इसका पहला अंक वेंकटेश्वर प्रेस बम्बई से प्रकाशित हुआ, और एक साल बाद इसे गोरखपुर से ही प्रकाशित किया जाने लगा। उसी समय गोरखधाम मन्दिर के प्रमुख और नाथ सम्प्रदाय के सिरमौर की पदवी को प्रेस का मानद संरक्षक भी नामित किया गया- यानी आज उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और नाथ सम्प्रदाय के मुखिया योगी आदित्यनाथ गीता प्रेस के संरक्षक हैं।

गीता प्रेस की सबसे खास बात है कि इतने वर्षों में कभी भी उस पर न ही सामग्री (‘content’) की गुणवत्ता के साथ समझौते का इलज़ाम लगा, न ही प्रकाशन के पहलुओं के साथ- वह भी तब जब 60 करोड़ से अधिक प्रतियाँ प्रेस से प्रकाशित हो चुकीं हैं। 96 वर्षों से अधिक समय से इसका प्रकाशन उच्च गुणवत्ता के कागज़ पर ही होता है, छपाई साफ़ और स्पष्ट, अनुवाद या मुद्रण (printing) में शायद ही कभी कोई त्रुटि रही हो, और subscription लिए हुए ग्राहकों को यह अमूमन समय पर पहुँच ही जाती है- और यह सब तब, जबकि पोद्दार ने इसे न्यूनतम ज़रूरी मुनाफे के सिद्धांत पर चलाया, और यही सिद्धांत आज तक गीता प्रेस गोरखपुर में पालित होता है। न ही गीता प्रेस पाठकों से बहुत अधिक मुनाफ़ा लेती है, न ही चंदा- और उसके बावजूद गुणवत्ता में कोई कमी नहीं।

‘भाई जी’ कहलाने वाले पोद्दार ने ऐसा सिस्टम बना और चला कर यह मिथक तोड़ दिया कि धर्म का काम करने में या तो धन की हानि होती है (क्योंकि मुनाफ़ा कमाया जा नहीं सकता), या फिर गुणवत्ता की (क्योंकि बिना ‘पैसा पीटे’ उच्च गुणवत्ता वाला काम होता नहीं है)। उन्होंने मुनाफ़ाखोरी और फकीरी के दोनों चरम छोरों पर जाने से गीता प्रेस को रोककर, ethical business और धर्म-आधारित entrepreneurship का उदाहरण प्रस्तुत किया।

‘तेरी अम्मा है बार बाला ह₹!मखोर, तेरी अम्मा’: चलते डिबेट शो में कॉन्ग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत बकने लगे गाली, झुँझलाने का Video वायरल

महाराष्ट्र में राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (NCP) में मचे घमासान के बीच एक न्यूज चैनेल के डिबेट में कॉन्ग्रेस के प्रवक्ता के अल्फाज बिगड़ गए। उन्होंने शब्दों की गरिमा और स्थान की मर्यादा को तोड़ते हुए भाजपा के प्रवक्ता पर आपत्तिजनक टिप्पणी कर दी। इसको लेकर कॉन्ग्रेस नेता और भाजपा नेता, दोनों की आलोचना हो रही है।

दरअसल, महाराष्ट्र के सियासी हालात को लेकर न्यूज24 नाम के हिंदी चैनल पर एक डिबेट हो रहा था। इस डिबेट को मानक गुप्ता होस्ट कर रहे थे। इसी डिबेट में जब भाजपा नेता प्रेम शुक्ला ने कॉन्ग्रेस को ‘बार बाला की पार्टी’ कहा था तो कॉन्ग्रेस नेता सुरेंद्र राजपूत उखड़ गए और प्रेम शुक्ला के लिए आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल कर डाला।

वरिष्ठ पत्रकार विनोद अग्निहोत्री, एनसीपी प्रवक्ता बृजमोहन श्रीवास्तव और शिवसेना (UBT) के प्रवक्ता आनंद दुबे भी इस डिबेट में अपना-अपना पक्ष रख रहे थे। इस दौरान सुरेंद्र राजपूत ने प्रेम शुक्ला को कहा, “तेरी अम्मा है बार बाला हरामखोर, तेरी अम्मा है बार बाला।” इस पर प्रेम शुक्ला भी उखड़ गए, लेकिन म्यूट होने की वजह से उनकी आवाज नहीं आई। हालाँकि, उनकी भाव-भँगिमा इसकी ओर साफ इशारा कर रही थीं।

बात दरअसल ईडी, इनकम टैक्स और सीबीआई के इस्तेमाल को लेकर हो रही थी। इस दौरान सुरेंद्र राजपूत कह रहे थे कि इन सरकारी एजेेंसियों का डर दिखाकर लोगों को भाजपा में आने के लिए बाध्य किया जा रहा है। यही कारण है कि अलग-अलग दलों के नेता भाजपा में शामिल हो रहे हैं।

सुरेंद्र राजपूर ने डिबेट के दौरान कहा, आज के डेट में ED हो गई, सीबीआई हो गई… ये सब नरेंद्र मोदी से बड़ी नेता हैं। आज ईडी, सीबीआई और इनकम टैक्स मानक गुप्ता (डिबेट के एंकर) को मिल जाएँ तो मानक गुप्ता जी नरेंद्र मोदी को कॉन्ग्रेस ज्वॉइन करा देंगे 24 घंटे में और खुद प्रधानमंत्री बन जाएँगे।ठ

बिहार के उपमुख्यमंत्री और राजद नेता तेजस्वी यादव का हवाला देते हुए कॉन्ग्रेस प्रवक्ता ने आगे कहा, “तेजस्वी ने बड़ा बढ़िया नारा लगाया जा कि भाजपा के तीन जँवाई- ED, IT, CBI… किसी को ED का डर दिखाया जाता है, किसी को इनकम टैक्स का डर दिखाया जाता है और किसी को सीबीआई का डर दिखाया जाता है।”

सुरेंद्र राजपूत के ‘तीन जँवाई’ यानी ‘तीन दामाद’ वाली बात पर भाजपा के प्रेम शुक्ला भड़क गए और उन्होंने सुरेंद्र राजपूत से कहा, “शब्दों का अभद्रतापूर्ण प्रयोग हो रहा है। मैं अभद्रतापूर्ण शब्दों का प्रयोग करूँगा तो आप चीखेंगे।” इसके बाद शो के एंकर मानक गुप्ता से कहा, “आपके शो पर अभद्रापूर्ण शब्दों का प्रयोग हो रहा है और आप होने दे रहे हैं।”

इस पर मानक गुप्ता ने प्रेम शुक्ला से पूछा, “आपको कौन से शब्द पर आपत्ति है?” इस पर उन्होंने कहा, “ये 420 जो है… 420 जो बार बाला की पार्टी है ऐसे ही बकवास करती है।” इसके बाद मर्यादा को ध्वस्त करते हुए सुरेंद्र राजपूत ने कहा, “अरे तेरी अम्मा है बार बाला हरामखोर।”

‘इंडियाज गॉट टैलेंट’ के जज नहीं होंगे मनोज मुंतशिर: पत्रकार का दावा- आदिपुरुष के बाद Sony चैनल ने किया किनारा, कई प्रोजेक्ट से भी नाम कटा

आदिपुरुष में घटिया डॉयलॉग्स देने के कारण भारत भर में फजीहत झेल रहे मनोज मुंतशिर इस बार ‘इंडियाज गॉट टैलेंट’ में जज नहीं होंगे। ये जानकारी पत्रकार दीपक चौरसिया ने अपने ट्विटर पर साझा की है। इससे पहले खबर आई थी कि वही इस शो में जज के तौर पर नजर आएँगे। हालाँकि दीपक चौरसिया का ये ट्वीट अलग दावा कर रहा है।

उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा, “सोनी चैनल के बहुचर्चित शो ‘इंडियाज़ गॉट टेलेंट’ में इस बार मनोज मुंतशिर जज नहीं होंगे। चैनल ने आदिपुरुष को लेकर हो रहे बवाल के चलते मनोज मुंतशिर से किनारा कर लिया। मनोज को उम्मीद थी की उन्हें इस शो में फिर से जज रखा जाएगा।”

चौरसिया ने आगे यह भी बताया कि इंडियाज गॉट टैलेंट से पहले केंद्र सरकार और यूपी सरकार के कई विभागों ने कई प्रोजेक्ट से मुंतशिर का नाम काट दिया है। सुनने में आ रहा है कि ख़ुद योगी आदित्यनाथ ने विभागों को ऐसा करने को कहा।

वरिष्ठ पत्रकार मुंतशिर के लिए लिखते हैं, “कलयुग में कर्मों का फल तुरंत मिल जाता है। फिर से कह रहा हूँ अब भी मौक़ा है भगवान से क्षमा माँग लो मनोज, बजरंगबली आज भी चिरंजीवी हैं। श्रीराम तुम्हें सद्बुद्धि दें।”

गौरतलब है कि आदिपुरुष फिल्म की रिलीज के बाद से मनोज मुंतशिर को लेकर लगातार सवाल खड़े किए जा रहे हैं। उन्होंने बीते दिनों मामले के तूल पकड़ने के बाद इस मामले में माफी माँगने से इनकार कर दिया था। उन्होंने कहा था कि उन्होंने आज के हिसाब से फिल्म के डॉयलॉग्स लिखे हैं और इसमें कुछ भी गलत नहीं है। जबकि सोशल मीडिया यूजर्स से लेकर हर हस्ती को इस फिल्म में दर्शाए दृश्यों पर आपत्ति थी। हर कैरेक्टर में कमी दिखाई दे रही थी। इसी बीच मुंतशिर ने अपने इंटरव्यूज में हनुमान जी को भगवान मानने से इनकार कर दिया तो उसपर अलग से बवाल हुआ। मुंतशिर ने कहा था हनुमान जी भक्त थे, न कि भगवान। हमने उनको भगवान बना दिया।

याद रहे कि आदिपुरुष फिल्म को लेकर मनोज मुंतशिर शुरू से बचाव कर रहे थे। जब शुरू में फिल्म का ट्रेलर आया था तब भी लोगों ने रावण के लुक पर सवाल खड़े किए थे। ऐसे में मुंतशिर ने लिखा था, “दूसरी बात कि हर युग की बुराई का अपना चेहरा होता है। रावण मेरे लिए बुराई का चेहरा है, अलाउद्दीन खिलजी इस दौर के बुराई का चेहरा है और अगर वो मिलता-जुलता भी है, हमने इंटेंशनली ऐसा नहीं किया है, लेकिन अगर मिल भी गया तो मुझे लगता नहीं कि कोई ऐतराज की बात है। अलाउद्दीन खिलजी तो कोई नायक ही नहीं है, वो बुरा है और अगर रावण का चेहरा उससे मिलता है और उससे इसलिए ज्यादा नफरत है, क्योंकि वो खिलजी जैसा दिखता है तो कोई बुराई नहीं है इसमें।”