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कभी एक्टर पीछे हट गए, कभी डिस्ट्रीब्यूटर ही नहीं मिले… ’72 हूरें’ के डायरेक्टर से जानिए फिल्म को रिलीज़ करने में क्यों लग गए 11 साल

आतंकवाद और इस्लामी कट्टरपंथ की समस्या पर बनी फिल्म ’72 हूरें’ शुक्रवार (7 जुलाई, 2023) को रिलीज हो गई है। गुलाब सिंह तँवर द्वारा निर्मित इस फिल्म को संजय पूरन सिंह चौहान ने निर्देशित किया है। उन्हें इस दौरान 11 वर्षों में कई दौर के संघर्षों से गुजरना पड़ा, तब जाकर ये फिल्म आज थिएटरों में आई है और इसे अच्छी समीक्षाओं के साथ-साथ दर्शकों का प्यार भी मिल रहा है। ऑपइंडिया ने ’72 हूरें’ के डायरेक्टर संजय पूरन सिंह चौहान से इन्हीं मुद्दों पर बातचीत की और जाना कि इस फिल्म को बनाने के दौरान उन्हें किन-किन चुनौतियों का सामना करना पड़ा।

संजय पूरन सिंह चौहान के बारे में बता दें कि वो फिल्म निर्देशक होने के साथ-साथ स्क्रीनराइटर भी हैं। वो 2010 में आई फिल्म ‘लाहौर’ के लिए जाने जाते हैं। उन्हें सर्वश्रेष्ठ डेब्यू फिल्म डायरेक्टर का नेशनल अवॉर्ड भी मिल चुका है। ICFT-UNESCO ने उन्हें गाँधी मेडल से नवाजा। गोवा में आयोजित IIFA में उन्हें स्पेशल मेंशन मिला। 1983 में भारत की क्रिकेट वर्ल्ड कप जीत पर बनी फिल्म ’83’ के लिए उन्हें IIFA में बेस्ट अडाप्टेड स्टोरी का अवॉर्ड मिला। वो फिल्मफेयर से लेकर स्टारडस्ट अवॉर्ड्स तक में नॉमिनेट हो चुके हैं। राष्ट्रीय पुरस्कारों और IFFI की जूरी में भी वो शामिल रहे हैं।

प्रश्न 1: फिल्म ’72 हूरें’ को बनने और रिलीज होने में 11 साल लग गए। आखिर इसका कारण क्या है? एक दशक से भी अधिक समय तक आपको संघर्षों के दौर से गुजरना पड़ा।

जवाब: हमलोग इसके ऊपर लंबे समय से काम कर रहे थे – आईडिया से लेकर लेकर कहानी लिखने तक, सही प्रक्रिया में एक लंबा समय लगा। अक्सर ऐसा होता है कि जब हम कुछ नॉन-कन्वेंशनल काम करते हैं तो फंड्स की समस्या आती है। हमारे जो निर्माता थे, वो पहली बार किसी इस तरह की चीज पर काम कर रहे थे। गुलाब सिंह इस फिल्म का निर्माण कर रहे थे, फिर अशोक पंडित इसमें आकर जुड़े। गुलाब सिंह इस फिल्म को फंड कर रहे थे। बीच-बीच में किसी न किसी कारण से काम रुक जाता था। कई बार अभिनेता भी पीछे हट जाते थे, क्योंकि उन्हें डर होता था कि उनका विरोध होगा, उनके ऊपर समस्या आ जाएगी क्योंकि फिल्म का चेहरा तो वही होंगे। एक-दो बार ऐसा हुआ। हमने इसे जल्दी-जल्दी पूरा करने की सोची, लेकिन उस जल्दी में भी वक्त लग गया। इसके बाद पवन मल्होत्रा के पास हमलोग गए। वो उस समय दूसरे कामों में व्यस्त थे। उन्होंने कहा कि वो इस फिल्म में काम करना तो चाहते हैं, लेकिन थोड़ा इंतजार करना पड़ेगा। ये 2014-15 के आसपास की बात रही होगी। पवन मल्होत्रा पूर्व से निश्चित फिल्मों में व्यस्त थे। फिल्म पूरा शूट ही नहीं हो पाता था, कोई हिस्सा शूट कर लेते थे, फिर समस्या आ जाती थी। लेकिन, शूटिंग से भी ज्यादा समस्या पोस्ट-प्रोडक्शन में आई। फिल्म तैयार हो गई थी। काफी सारी चुनौतियाँ थीं। इनसे निपटने में भी काफी समय लगा। गुलाब सिंह अपने ही पैसों से फिल्म बना रहे थे, कोई स्टूडियो वगैरह की बैकिंग इसे नहीं थी। जो बड़े प्रोडक्शन हाउस हैं, वो तो इस तरह की हार्ड हीटिंग कंटेंट में हाथ डालते नहीं हैं। हम आउटसोर्सिंग से काम चला रहे थे – किसी से एक काम करवाया, किसी से दूसरा। अंततः, 2019 में हमारी फिल्म तैयार थी और ‘इंडियन पैनोरमा फिल्म फेस्टिवल’ में भी इसे दिखाया जाना था। हमलोग जुलाई 2019 तक तैयार थे, लेकिन दुर्भाग्य से जब हम तैयार हुए तो कोविड-19 महामारी ने दुनिया को अपनी चपेट में ले लिया। दुनिया भर में कई फिल्म फेस्टिवल्स में हमें जाना था। कोरोना के दौरान और उसके बाद भी कुछ समय तक लोग इतने परेशान हो चुके थे कि इस तरह की हार्ड हीटिंग फिल्म के लिए तैयार नहीं थे। फिर जब थिएटर वापस खुलने लगे और दर्शकों की संख्या भी बढ़ने लगी, फिर हमने डिस्ट्रीब्यूटर्स और एक्सहिबीटर्स ढूँढ़ने शुरू किए। लेकिन, हमें कोई मिला नहीं। फिर हमने इसे छोटे स्तर पर खुद ही डिस्ट्रीब्यूट करने का निर्णय लिया। तभी ‘The Kerala Story’ के निर्माता विपुल अमृतलाल शाह सामने आए और उन्होंने डिस्ट्रीब्यूशन का बीड़ा उठाया। उनकी कंपनी और उनका दफ्तर इसमें इन्वॉल्व हुआ। वो चाहते हैं कि इस तरह की फ़िल्में दर्शकों के बीच जाएँ। इसके बाद अशोक पंडित भी हमसे जुड़े, जिन्होंने पोस्ट-प्रोडक्शन को आगे बढ़ाने में हमारी काफी मदद की। उन्होंने अपने संपर्कों का इस्तेमाल किया। इस साल के शुरू से ही हम रिलीज के लिए सोच रहे थे, लेकिन विशेषज्ञों से सलाह ली जाती है कि फिल्म को कब रिलीज किया जाए। इन्हीं सब में इतना वक्त लग गया।

प्रश्न 2: आपने बताया कि कई एक्टर्स इस फिल्म से बैकआउट कर गए। जो बॉलीवुड के तथाकथित A लिस्टर एक्टर्स हैं या फिर कभी-कभी स्क्रिप्ट विशेष एक्टर्स को ध्यान में रख कर लिखी जाती है। इस पर प्रकाश डालिए कि ये चुनौतियों किस तरह की थीं?

जवाब: एक बात तो स्पष्ट थी कि जो फिल्म इंडस्ट्री के टॉप एक्टर्स कहे जाते हैं वो तो इस तरह की फ़िल्में करेंगे नहीं। उनकी अपनी एक सोच होती है और वो एक खास तरह का सिनेमा करते हैं, कमर्शियल फ़िल्में करते हैं। उनकी एक छवि होती है, जिस हिसाब से वो प्रोजेक्ट्स चुनते हैं। इसके बाद आते हैं बेहतर एक्टर्स, जो किरदार को उम्दा तरीके से निभाते हैं और लोगों के बीच छाप छोड़ते हैं, लेकिन उनमें से भी कई इस फिल्म को करने के लिए तैयार नहीं थे, क्योंकि उन्हें अपने करियर का ख़तरा लग रहा था। जो लोग तैयार भी हुए, उनमें से कुछ ने अंत समय में बैकआउट कर दिया। वो कहने लगे कि इस फिल्म को करने में वो सहज नहीं हैं, उनका परिवार सहज नहीं है। उनका कहना था कि कल को कोई बात न हो जाए, धमकियाँ मिलने लगेंगी।

प्रश्न 3: 2014 के बाद देश में सरकार बदल गई। क्या अपनी फिल्म बनाने के दौरान आपने दोनों दौर में कोई अंतर महसूस किया? क्या माहौल कुछ बदला?

जवाब: हमने तो बहुत पहले ही ’72 हूरें’ पर काम शुरू कर दिया था, 2014 से बहुत पहले। लेकिन, हमें वक्त लग गया। हमारा संघर्ष लगातार चलता ही रहा, एक दशक से भी अधिक समय तक चला। 2014 के बाद थोड़ा-बहुत फर्क तो आया है, जिसका फायदा ‘द कश्मीर फाइल्स’ या ‘द केरल स्टोरी’ को मिला। ये भी फर्क आया कि लोगों में उत्साह दिखा, लोग इस तरह की फिल्म देखने के लिए जाने लगे। कन्वेंशनल प्रोडक्शन हाउस या स्टूडियो तो ऐसी फिल्मों को नॉन-कमर्शियल बता कर इन्हें बैक करते नहीं, न ही वो इन मुद्दों पर फिल्म बनाना चाहते हैं। हालाँकि, लोगों ने ये कहा कि अगर आप सच दिखाओगे तो हम आपकी फिल्म देखने आएँगे। इससे कहीं न कहीं हमारे डिस्ट्रीब्यूटर्स हैं, उनमें भी आत्मविश्वास जगा कि लोग इस फिल्म को देखने आएँगे।

प्रश्न 4: फिल्म ’72 हूरें’ को लेकर तो चर्चा चलती रहेगी, लेकिन इस दौरान लोग ये भी जानना चाहेंगे कि आपने जब ये फिल्म बनाना शुरू किया और अब तक 11 वर्षों का जो संघर्ष है, इस दौरान परिवार को धमकियाँ वगैरह मिलीं या परिवार में किसी ने कुछ डर जताया?

जवाब: मैं मुंबई में अपनी पत्नी के साथ रहता हूँ, मेरे माता-पिता का निधन हो चुका है। पहले तो इस फिल्म के बारे में किसी को मालूम ही नहीं था कि क्या हो रहा है। जैसे ही ये रिलीज होने आई, वैसे ही धमकियों का दौर शुरू हो गया। मेरी पत्नी को फिल्म के बारे में बहुत डिटेल्स में पता नहीं था कि किस तरीके से चीजें हो रही हैं। अब जब धमकियाँ आ रही हैं तो परेशानी होना स्वाभाविक बात है, चिंता होती ही है।

प्रश्न 5: फिल्म को ब्लैक एन्ड व्हाइट रखने का क्या कारण है? ये साधारण बात नहीं लग रही, ऐसा सुन कर ही लग रहा है कि इसके पीछे कोई बौद्धिक विमर्श रहा होगा?? इस बारे में हम अधिक जानना चाहेंगे।

जवाब: फिल्म की कहानी या फिर नैरेटिव को कहने का ये तरीका है। 2 आत्माओं, 2 मृत लोग जिनके पास शरीर नहीं है… दुनिया और रंग देखने के आँखें चाहिए, शरीर चाहिए। बारिश या ऐसी किसी चीज को महसूस करने के लिए त्वचा चाहिए। लेकिन, जब आपके पास कोई बायोलॉजिकल बॉडी नहीं है और आप बिना इसके घूम रहे हैं तो आप कुछ देख ही नहीं पा रहे हैं। आपके जीवन से रंग चले गए, एहसास चले गए, फीलिंग्स चली गईं। क्योंकि ये जो दुनिया है, वो बहुत खूबसूरत है और ये आँखें खोलने पर पता चलता है, जन्नत यहीं है, आँखें बंद करने पर नहीं। जिनके पास शरीर नहीं है, तो ब्लैक एन्ड व्हाइट में उनके नजरिए से इसे कहने की कोशिश की गई है… जिनके जीवन में कोई रस और रंग बाकी नहीं है।

प्रश्न 6: हिन्दू धर्म को लेकर कई ऐसी फ़िल्में बनी हैं, जिनमें तरह-तरह के सन्देश दिए जाते हैं। सुधारवादी फ़िल्में बनती हैं और धर्म को लेकर अच्छा-बुरा बताया जाता है। खास बात ये है कि अधिकतर हिन्दू निर्माता-निर्देशकों ने ही ऐसी फ़िल्में बनाई हैं। लेकिन, इस्लाम में जो कुरीतियाँ हैं उन पर कोई मुस्लिम निर्माता या निर्देशक फिल्म बनाने की कोशिश क्यों नहीं करता? वो भी तब, जब बॉलीवुड में कई मुस्लिम निर्देशक शीर्ष पर हैं।

जवाब: इस पर अशोक पंडित और गुलाब सिंह के साथ मेरी चर्चा भी हुई। उन दोनों ने भी कहा कि समाज में जो कुरीतियाँ होती हैं, समय के साथ उन पर फ़िल्में बनती हैं, चर्चा होती है, लोग बात करते हैं। अगर ये समस्या है मेरे देश में, आतंकवाद की, तो मैं इस पर बात क्यों नहीं कर सकता? आप इससे मुझे कैसे रोक सकते हैं? हमारे ही फिल्मकारों ने बाल विवाह से लेकर सती प्रथा और जाति प्रथा के अलावा कई चीजों पर बात की है। लेकिन, ये कैसा अलग कानून बना दिया आपने कि इस पर बात नहीं हो सकती? ये बार-बार दोहराया जाता है कि आतंकवाद का कोई मजहब नहीं होता, फिर अचानक से मजहब को निशाना बनाने की बातें करने लग जाते हैं। हम तो शुरू से स्पष्ट हैं कि हम सिर्फ आतंकवाद की ही बात कर रहे हैं, आप फिल्म देखिए और इस पर रिएक्ट करिए। हम आपके मामलों के विशेषज्ञ नहीं हैं। आपको 32 मिलें, 72 मिलें, 94 मिलें, हमें कोई ऐतराज नहीं है। लेकिन, आप ये जो कर रहे हैं उसके लिए ये तरीका गलत है। यही बात इस फिल्म में दिखाई गई है, मानवता की बात की गई है। ये फिल्म देशहित को लेकर है। एक राष्ट्रीय समस्या है, उस पर बात की गई है।

प्रश्न 7: युवाओं में कट्टरपंथ का प्रसार एक बड़ी समस्या है। ’72 हूरें’ फिल्म के ट्रेलर से भी पता चलता है कि इसमें इस समस्या को छुआ गया है। आपकी नजर में युवाओं को कट्टरपंथी बनाए जाने की समस्या का कारण और निदान क्या है? आपने फिल्म बनाने के दौरान काफी रिसर्च किया है, इसीलिए हम आपका अनुभव जानना चाहेंगे।

जवाब: मुझे ये लगता है कि जब आप किसी को बरगला देते हैं, बहका देते हैं, समाज में किसी भी परिस्थिति को बहाना बना कर कुछ लोग अपने मंसूबों को पूरा करने के लिए एक साजिश का इस्तेमाल करते हैं, जोड़-तोड़ करते हैं। किसी के भी हाथ में AK-47 आने से पहले उसके जेहन में एक विचार डाला जाता है। जन्नत और शहादत के कॉन्सेप्ट उनमें प्लांट कर दिए जाते हैं। बहुत सारे लोग रहे हैं जो कसाब का जो या फिर अन्य आतंकी रहे हों, पूछताछ के दौरान सामने आता है कि कई आतंकियों ने ’72 हूरों’ का जिक्र किया। उन्हें एक खास ट्रेनिंग दी जाती है, जिसमें बताया जाता है कि मौत के बाद उन्हें क्या-क्या मिलेगा। इस बारे में उन्होंने खुद पूछताछ में बताया है।

प्रश्न 8: फिल्म ’72 हूरें’ के ट्रेलर को सेंसर बोर्ड से सर्टिफकेट मिलने में काफी परेशानी हुई और इस दौरान फिल्म के कुछ दृश्य हटाने को कहे गए। इस विवाद को लेकर आप क्या कहना चाहेंगे?

जवाब: असल में पिक्चर को 2019 में ही सेंसर बोर्ड से पास कर दिया गया था और हमें A सर्टिफिकेट मिला था। फिल्म में कुछ बदलाव करने और काट-छाँट करने के बाद एक तय प्रक्रिया के तहत सब काम हुआ था। हमें फिल्म फेस्टिवल्स में जाना था, इसीलिए इसे सेंसर से पास कराया गया। मुझे लगता है कि काम खत्म हो गया था। उस समय रिलीज के लिए हम तैयार नहीं थे तो ट्रेलर बनाया ही नहीं गया था। अब जब रिलीज की योजना बनी तो ट्रेलर पर काम शुरू हुआ। हमने एक अच्छा ट्रेलर बनाया। फिर हमने 18 जून, 2023 को दिल्ली में सेंसर बोर्ड में इसे पास करने के लिए अप्लाई कर दिया, क्योंकि फिल्म भी दिल्ली से सेंसर हुई थी। फिर हमें बताया गया कि फिल्म स्क्रीन हो गई है। फिल्म की रिलीज से तो सामान्यतः एक महीने पहले ट्रेलर जारी कर दिए जाते हैं, 10 दिन तो बहुत कम समय है। इसीलिए, हमें ट्रेलर की रिलीज की तारीख़ बदलनी पड़ी। 26 जून को PVR में इसे रिलीज किया जाना था, लेकिन फिर 28 को करने का निर्णय लिया गया। ये खबर मीडिया में भी आई थी। उस दिन दोपहर में सेंसर बोर्ड ने हमें चिट्ठी भेजी कि हम आपको पास कर देंगे, लेकिन आप इन-इन चीजों को काट दीजिए (जैसे लाश के पाँव वाला सीन और कुरान शब्द)। हमारा तर्क ये था कि ट्रेलर में तो वही चीजें हैं, जिन्हें फिल्म में पहले ही सेंसर की जा चुकी हैं। फिर काट-छाँट करने को क्यों कहा गया? दूसरी बात, जब ट्रेलर रिलीज के लिए तैयार था तो अंतिम समय में हमें ये क्यों बताया गया, पहले भी बताया जा सकता था। हमारे पास पहले से ही कम समय था। आप 1 दिन पहले बोलोगे तो कैसे एक दिन में एडिट कर के इसे सब्मिट किया जा सकता है? इसमें कई प्रक्रियाएँ होती हैं। इन्हें पूरा करने में तो फिल्म की रिलीज डेट ही निकल जाती। ऐसे में हमने डिजिटल पर ट्रेलर रिलीज किया और हम इसे थिएटरों में नहीं ले जा सके। इससे पता चलता है कि कुछ चीजों को इस तरह से करना चाहिए कि कम से कम परेशानी लोगों को हो। एक फिल्म बनाने में पहले से ही काफी संघर्ष होता है, ऊपर से परेशानियाँ और बढ़ा दी जाएँ तो ये ठीक नहीं है।

प्रश्न 9: फिल्म ’72 हूरें’ के बाद आप किस प्रोजेक्ट पर काम करेंगे? आपके दिमाग में अगला प्रोजेक्ट क्या है, क्या तैयारियाँ शुरू हैं?

जवाब: मैं कुछेक चीजों पर काम कर रहा हूँ, लेकिन मैंने अभी कुछ फाइनल नहीं किया है कि किस प्रोजेक्ट को लेकर आगे बढ़ा जाएगा। जैसे ही कुछ फाइनल हो जाएगा, मैं खुद इसके बारे में बताऊँगा।

फिल्म ’72 Hoorain’ की ट्रेलर में ही दिखाया गया था कि कैसे एक मौलाना कह रहा होता है कि ‘तुमने नेकी और जिहाद का रास्ता चुना है, ये तुम्हें जन्नत की तरफ लेकर जाएगा’। जैसा कि फिल्म के डायरेक्टर संजय पूरन सिंह ने बताया, फिल्म आतंकवाद की समस्या पर बात करती है। ये नई बात नहीं है कि कई तकरीरों में मौलानाओं ने अक्सर लोगों को भड़काते हुए ये कहा है कि अगर वो इस्लाम के लिए ‘जिहाद’ का रास्ता अपनाएँगे तो उन्हें ’72 हूरें’ मिलेंगी। कई तो इन हूरों की विशेषताएँ बता कर लालच देते हैं।

‘अब जे भी बनारस आई…’: वाराणसी को ₹12110 करोड़ की 29 परियोजनाओं का PM मोदी ने दिया उपहार, कहा- सब बाबा की कृपा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार (7 जुलाई 2023) को गोरखपुर में गीता प्रेस के शताब्दी महोत्सव समारोह में हिस्सा लेने के बाद रेलवे स्टेशन से दो वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इसके बाद वे अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी पहुँचे। यहाँ पर उन्होंने 12,110 करोड़ रुपए की लागत वाली 29 परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया।

वाराणसी पहुँचकर प्रधानमंत्री ने मणिकर्णिका घाट पर पुनर्विकास मॉडल का निरीक्षण किया। इसके बाद हरिश्चंद्र घाट का दौरा किया। इस दौरान पीएम मोदी के साथ यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ और राज्यपाल आनंदीबेन भी थीं। यहाँ से वे जनसभा स्थल पर पहुँचे।

वाजिदपुर में जनसभा स्थल पर पहुँचकर पीएम मोदी ने सरकारी योजनाओं के 20 लाभार्थियों से बातचीत की और उनका कुशलक्षेम पूछा। वाजिदपुर स्थित जनसभा स्थल को पूरा परिसर वाटर प्रूफ है। जर्मन हैंगर से कवर है। इसलिए इसके अंदर बारिश में भी कोई परेशानी नहीं है।

वाराणसी में प्रधानमंंत्री नरेंद्र मोदी ने ₹12,110 करोड़ की 29 परियोजनाओं का लोकार्पण/शिलान्यास, लाभार्थियों को PVC कार्ड वितरण, PM स्वनिधि योजना के लाभार्थियों को ऋण वितरण व PM आवास योजना (ग्रामीण) के 4.51 लाख आवासों का गृह प्रवेश व चाबी वितरित किया। इसको लेकर यूपी सीएम के कार्यालय ने ट्वीट किया।

जनसभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “सावन महीने की शुरुआत हो, बाबा विश्वनाथ एवं माँ गंगा का आशीर्वाद हो और बनारस के लोगों का साथ हो तो फिर जीवन बिल्कुल धन्य हो जाता है। इस बार सावन में बाबा का दर्शन करने रिकॉर्ड श्रद्धालुओं के आने की संभावना है।”

पीएम मोदी ने भोजपुरी में शुरुआत करते हुए आगे कहा, “अब जे भी बनारस आई, ऊ खुश होके ही जाई। मुझे इस बात की ज्यादा चिंता नहीं होती की इतने सारे लोग आएँगे। बनारस में ये सब कैसे मैनेज होगा, काशी के लोग मुझे सीखा देते हैं। मुझे पता है कि काशी के लोग सब संभाल लेंगे। काशी के लोगों ने बाबा का दरबार ऐसा बना दिया कि यहाँ जो भी आता है, गदगद होकर जाता है।”

पीएम मोदी ने आगे कहा, “ये बाबा की इच्छा ही थी कि हम निमित्त बन पाए। ये मेरा सौभाग्य है। आज काशी की पूरी दुनिया में चर्चा हो रही है। हमने काशी की आत्मा को बनाए रखते हुए इसके नूतन काया का जो संकल्प लिया है, ये उसका विस्तार है। इसमें ट्रेन, रोड, पानी, शिक्षा, नगर विकास से जुड़े 12000 करोड़ रुपए से अधिक के प्रोजेक्ट हैं।”

अपने पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना सहित विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों से मुलाकात की। पहले की सरकारों में योजनाएँ दिल्ली में बैठकर बनाई जाती थीं और जमीनी स्तर पर क्या हो रहा है, इसका उन्हें पता ही नहीं होता था। भाजपा सरकार में लाभार्थियों से संवाद की परंपरा शुरू की। इससे हर विभाग और अधिकारी अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं।

पीएम मोदी ने कॉन्ग्रेस सरकार पर कटाक्ष करते हुए कहा, “सही मायने में लोकतंत्र अभी है। पहले लोकतंत्र के नाम पर गिने-चुने लोगों के हित साधे जाते थे। गरीब की कहीं पूछ नहीं रहती थी। भाजपा सरकार सच्ची सामाजिक न्याय और सेक्युलरिज्म का उदाहरण बन गई है। इससे कमीशन खाने वालों, दलाली करने वालों की दुकानें बंद हो गई हैं।” उन्होंने कहा कि दशकों तक शासन करने वालों के मूल में ही बेईमानी रही है।

पीएम मोदी ने कहा कि उन्होंने योजनाएँ सिर्फ एक पीढ़ी को देखकर नहीं बनाई हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी ध्यान में रखकर ऐसी योजनाएँ बनाई गई हैं। इसका उदाहरण पक्का मकान है। पीएम आवास योजना महिलाओं के नाम पर मिल रही हैं। इसमें कई महिलाएँ तो ऐसी हैं, जिनके नाम पर पहली बार कोई प्रोपर्टी रजिस्टर्ड हुई है।

पीएम मोदी ने कहा कि 1.60 करोड़ लाभार्थियों को आयुष्मान कार्ड बँटना शुरू हुआ है। गंभीर बीमारी हो जाने पर एक परिवार की आर्थिक स्थिति बिगड़ जाती है और परिवारों मेें बच्चों की पढ़ाई तक बंद हो जाती है। वह कर्ज के जाल में फँस जाता है। घर-जमीन बेचने के लिए बाध्य हो जाता है। इसको देखते हुए भाजपा सरकार ने आयुष्मान योजना शुरू की, ताकि उन्हें ऐसी स्थिति से ना गुजरना पड़े।

कॉन्ग्रेस शासन पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि देश में तेज ट्रेनों को चलाने के लिए करीब 50 साल पहले राजधानी एक्सप्रेस चलाई गई थी। इतने सालों में भी राजधानी एक्सप्रेस सिर्फ 16 रूटों में चल पाई है। इसी तरह 30-35 साल पहले शताब्दी एक्सप्रेस चलाई गई। ये भी इतने सालों में सिर्फ 19 रूटों पर सेवा दे रही है। इससे अलग, 4 साल में वंदे भारत 25 रूट पर चलनी शुरू हो गई है।

इस दौरान वाराणसी समेत पूर्वांचल को 12,110 हजार करोड़ रुपकी परियोजनाओं की सौगात दिया। इनमें लगभग 1800 करोड़ रुपए की लागत वाली योजनाओं का उन्होंने शिलान्यास किया और करीब 10,000 करोड़ रुपए की लागत वाली योजनाओं का लोकार्पण किया। उन्होंने कहा कि 35 लाख लोगों को स्वनिधि लोन दिए गए हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने सिपेट करसड़ा के वोकेशनल ट्रेनिंग सेंटर का लोकार्पण किया। इसमें 13.78 करोड़ रुपए से छात्रावास बन रहा है। इसके अलावा, इन योजनाओं में मणिकर्णिका घाट का कायाकल्प, अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम, तीन रेलवे ओवरब्रिज, काशी हिंदू विश्वविद्यालय में 10 मंजिला अंतरराष्ट्रीय छात्रावास, 96 सड़कों की मरम्मत और उनका निर्माण कार्य शामिल है।

इसके अलावा, पीएम मोदी ने डेडिकेटेड फ्रेट कारिडोर की दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन-सोन नगर नई रेलवे लाइन का निर्माण, औडि़हार-जौनपुर सेक्शन रेलवे लाइन का दोहरीकरण, औडिहार-गाजीपुर सेक्शन रेलवे लाइन का दोहरीकरण एवं विद्युतीकरण, भटनी-औडिहार सेक्शन रेलवे लाइन का विद्युतीकरण, राष्ट्रीय राजमार्ग 56 वाराणसी-जौनपुर फोरलेन परियोजनाओं का लोकार्पण किया। 

पीएम ने जनकल्याणकारी योजना के लाभार्थियों से भी संवाद किया। इसके लिए वाराणसी सहित आसपास के जिलों से 14,000 लाभार्थी बुलाए गए थे। नौ वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 41वीं बार वाराणसी के दौरे पर हैं। वे रात्रि यहीं विश्राम करेंगे।

बालासोर ट्रेन एक्सीडेंट में 3 रेलवे कर्मचारियों को CBI ने किया गिरफ्तार, सबूत मिटाने और गैर इरादतन हत्या की लगाई धारा

ओडिशा के बालासोर में हुए ट्रेन एक्सीडेंट की जाँच कर रही सीबीआई ने तीन रेलवे कर्मचारियों को गिरफ्तार किया है। इन कर्मचारियों की पहचान अरुण कुमार मोहंता, मोहम्मद अमीर खान और पप्पू कुमार के तौर पर बताई गई है। मोहंता सीनियर सेक्शन इंजीनियर और खान सेक्शन इंजीनियर हैं। कुमार टेक्नीशियन के तौर पर रेलवे में कार्यरत हैं।

तीनों पर गैर इरादतन हत्या और सबूतों को मिटाने के आरोप में केस दर्ज किया गया है। इन पर आईपीसी की धारा 304 और 201 के तहत मामला दर्ज किया गया है। बालासोर में 2 जून को हुए रेल हादसे में 292 लोगों की मौत हुई थी। करीब 1000 लोग घायल हुए थे। मृतकों में से कई के शव की पहचान अब तक नहीं हो पाई है।

आपको बता दें कि आईपीसी की 201 के तहत केस सबूत नष्ट करने पर दर्ज किया जाता है। वहीं धारा 304 के तहत गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज होता है। आईपीसी की धारा 304 में सजा का प्रावधान अपराध की गंभीरता पर निर्भर करता है। आजीवन कारावास और जुर्माना का प्रावधान इसमें शामिल है।

इस हादसे की CRS जाँच पूरी हो चुकी है। इसमें हादसे के पीछे किसी भी साजिश से इनकार किया गया है। सिग्नल और ट्रैफिक ऑपरेशन विभाग में तैनात कर्मचारियों की गलती को हादसे की वजह बताया गया है। हालाँकि सीबीआई जाँच के कारण यह रिपोर्ट अभी सार्वजनिक नहीं की गई है। रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा था, “बालासोर में हुए ट्रेन हादसे की CRS रिपोर्ट रेलवे द्वारा सार्वजनिक नहीं की जाएगी। चूँकि इस मामले की जाँच सीबीआई भी कर रही है। ऐसे में सीआरएस रिपोर्ट से सीबीआई जाँच प्रभावित हो सकती है। दोनों रिपोर्ट के आधार पर एक रिपोर्ट तैयार की जाएगी।”

सीआरएस ने 28 जून 2023 को अपनी रिपोर्ट रेलवे बोर्ड को सौंपी थी। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि सिग्नल मेंटनेंस करने वाले अधिकारी ने नियम के तहत काम किया। उसने मेंटनेंस करने से पहले और उसके बाद क्रमशः डिस्कनेक्शन और रीकनेक्शन मेमो स्टेशन मास्टर को सौंपा था। इसका मतलब है कि इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिग्नलिंग सिस्टम पूरी तरह सही था। लेकिन रेलवे ट्रैक से ट्रेन को निकलने की अनुमति देने से पहले सिग्नलिंग सिस्टम की जाँच के लिए सेफ्टी प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया गया था।

यही नहीं, मेंटेनेंस अधिकारी द्वारा रीकनेक्शन मेमो जारी किए जाने के बाद बाद भी सिग्नलिंग स्टाफ काम कर रहा था। ऐसे में दुर्घटना के लिए स्टेशन के सिग्नलिंग विभाग के साथ ही ट्रैफिक ऑपरेशन विभाग भी जिम्मेदार है। रिले रूम में जाने के लिए बने प्रोटोकॉल में भी खामियाँ पाई गईं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि रिले रूम इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिग्नलिंग सिस्टम का सेंटर होता है। सारी चीजें यहीं से ऑपरेट होती हैं। इसकी जवाबदेही सिग्नलिंग विभाग और स्टेशन मास्टर दोनों की होती है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कोरोमंडल एक्सप्रेस को मेन लाइन से जाने के लिए ग्रीन सिग्नल दिया गया था। लेकिन ट्रेन की दिशा बताने वाला ट्रैकिंग सिस्टम ट्रेन को लूप लाइन में जाने का सिग्नल दे रहा था। इसी वजह से यह हादसा हो गया। गौरतलब है कि 2 जून, 2023 की शाम करीब 6:55 मिनट पर ओडिशा के बालासोर जिले के महानगा गाँव के पास कोरोमंडल एक्सप्रेस पटरियों से उतर गई थी। इसके बाद वह ट्रेन लूप लाइन पर खड़ी मालगाड़ी से टकरा गई। मालगाड़ी से टक्कर होने के बाद कोरोमंडल एक्सप्रेस के कुछ डिब्बे बगल वाली पटरी पर चले गए। इस पटरी पर दूसरी दिशा से यशवंतपुर-हावड़ा सुपरफास्ट ट्रेन आ गई और कोरोमंडल एक्सप्रेस के डिब्बों में जाकर टकरा गई। 

₹1.2 करोड़ का फ्लैट, बैंक में जमा है ₹7 करोड़, फिर भी मुंबई में भीख माँगते हैं भारत जैन: दुनिया के सबसे ‘अमीर भिखारी’ की कहानी सोशल मीडिया में छाई

‘भिखारी’ एक ऐसा शब्द है कि कोई भी शख्स इसे सुनकर अपनी एक धारणा बना ले कि उस व्यक्ति पर शायद संपत्ति के नाम पर कुछ भी न हो। लेकिन हकीकत में ये धारणाएँ सही नहीं होती। मुंबई में भारत जैन नाम के एक भिखारी अपने भीख माँगने के काम से आज दुनिया के सबसे भिखारियों में से एक हैं।

सोशल मीडिया पर अक्सर भारत के भिखारी होने के बावजूद इतना अमीर होने की बातें लोगों को अचंभित करती हैं। हैरान होकर लोग इस खबर को शेयर करते हैं। लेकिन तमाम मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो सच यही है कि भारत जैन मुंबई के ही नहीं दुनिया के अमीर भिखारियों में से एक हैं। उनके पास 7.5 करोड़ रुपए की संपत्ति है। वह हर महीना 60 हजार से 75000 रुपए तक कमा लेते हैं।

इतना ही नहीं उनके ठाणे में 2 प्रॉपर्टी हैं जिनसे महीने का 30000 रुपए महीना किराया आ जाता है। इसी तरह मुंबई में एक फ्लैट है जो 1.2 करोड़ रुपए का है। हर साल जैसे जैसे रियल स्टेट क्षेत्र में दाम बढ़ रहे हैं। वैसे ही भारत जैन की संपत्ति की कीमत में भी बढौतरी हो रही है।

रिपोर्ट्स बताती हैं कि लगातार सबसे अमीरों में नाम होने के बावजूद जैन ने सड़कों पर भीख माँगना बंद नहीं किया है। लोग जहाँ मुंबई जैसे शहर में पैसे कमाने के लिए दिन रात मेहनत करते हैं, भारत जैन हर दिन माँग-माँग के 2000 से 2500 रुपए 10-12 घंटे में कमा लेते हैं।

उन्होंने भीख माँग-माँगकर ही बच्चों की पढ़ाई पूरी करवाई वो भी कॉन्वेंट स्कूल से। उनके रिश्तेदार स्टेशनरी आदि की दुकान चलाते हैं और उन्हें सलाह भी देते हैं कि वो भीख माँगना बंद कर दें। लेकिन भारत उनकी एक नहीं सुनता। उन्हें भीख माँगना पसंद हैं इसलिए वो आजाद मैदान और छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनल पर जा जाकर भीख माँगते हैं।

उनके परिवार में उनकी पत्नी, दो लड़के, उसका भाई और पिता हैं। बताया जाता है कि शुरूआत में आर्थिक स्थिति के कारण भारत जैन अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर पाए थे, इसी वजह से उन्होंने भीख भी माँगनी शुरू की। हालाँकि अब स्थिति पूरी तरह से बदल चुकी है और भारत तब भी भीख माँगना नहीं छोड़ रहे।

गौरतलब है कि ये पहली बार नहीं है जब भारत जैन नाम का ये भिखारी अमीर भिखारियों की लिस्ट में होने की वजह से चर्चा में आया हो। साल 2015 से ही इसका नाम मीडिया में नजर आता रहा है। उसकी तरह और भी कई भिखारी हैं जो भीख माँग-माँगकर अमीर हुए। जैसे एक बुर्जू चंद्र आजाद नाम का भिखारी था। रेलवे ट्रैक पार करते हुए उसकी मौत 2019 में हुई थी। जब पुलिस ने छानबीन की तो उसके पास 1.5 लाख के सिक्के ही सिक्के थे। वहीं बैंक में उसके 8 लाख से ज्यादा कैश था।

हमारी बीवी बदबूदार, जन्नत में मिलेगी 100 मर्दों की ताकत… सवाल फिल्म ’72 हूरें’ पर, जवाब में अपनी बीवियों को खींच लाए निजामुद्दीन के दुकानदार

7 जुलाई 2023 को फिल्म ’72 हूरें’ रिलीज हो गई। इस्लामी आतंकवाद से पर्दा उठाती इस फिल्म से जुड़े लोगों को धमकी भी मिली है। इस बीच एक वीडियो वायरल है जिसमें दिल्ली के हजरत निजामुद्दीन इलाके के दुकानदार इस फिल्म से जुड़े सवालों का जवाब दे रहे हैं। इस चर्चा में दुकानदार अपनी बीवियों को भी घसीट लाते हैं। किसी ने दावा किया कि जन्नत में अल्लाह 70 बीवी देगा तो किसी ने कहा कि जन्नत में 100 मर्दों की ताकत मिलेगी।

BGT न्यूज़ ने यह वीडियो 3 जुलाई 2023 को शेयर किया था। फिल्म 72 हूरें को लेकर महिला पत्रकार के सवाल के जवाब में अब्दुल अजीज नाम का एक बुजुर्ग बताता है कि हूरें इस दुनिया की औरतों से 70 गुना बेहतर हैं। उन्हें अल्लाह ने जन्नत के लिए बनाया है। वे यहाँ नहीं मिल सकती हैं। ​जन्नत की हूरों के कसीदे पढ़ते हुए अजीज कहता है, “वे नेठी-बोडी और बदबूदार बीवी नहीं होती। हमारी बीवी बदबूदार हैं। उसके बालों में भी बदबू, उसके पसीने में भी बदबू। हर चीज में बदबू है।”

अजीज बताता है कि जो अल्लाह की इबादत कर जन्नत जाता है उसे इनाम में 70 बीवी मिलती है। उसके अनुसार इसे पाने के लिए धरती पर 5 टाइम की नमाज़, सच बोलना, किसी की बुराई न करना, किसी से मारपीट न करना, खाना और खिलाना आदि शर्तें हैं। फिल्म 72 हूरें को झूठ और ढकोसला बताते हुए अजीज ने कहा कि हूरें पाने के लिए नबी की सुन्नत पर चलना जरूरी है।

वीडियो के एक अन्य व्यक्ति ले जन्नत की हूरों को धरती के इंसानों जैसा ही बताया है। उसके अनुसार बस खूबसूरती में फर्क होगा। पास खड़े बिरयानी बेचने वाले एक एक अन्य मुस्लिम दुकानदार मोबीन ने कहा कि जन्नत हर मुसलमान को मिलेगी, लेकिन सजा भुगतने के बाद। इस दौरान जन्नत के हर इंसान की ताकत 100 मर्दों के बराबर उसने बताई। मोबीन के मुताबिक, “काम हो या न हो पर नमाज़ पढ़ना जरूरी है।”

वहीं बिरयानी की दुकान चलाने वाली परवीन नाम की एक महिला ने कहा कि हूरों के बारे में उसको ही पता चल सकता है जो दुनिया से चला गया हो। हदीस में हूरों का जिक्र होने की बात कबूल करते हुए इस महिला ने कहा कि तमाम लोग तमाम तरह की बातें अपने मन से बनाते हैं।

MP के सीधी पेशाब कांड की आड़ में किसी ने RSS तो किसी ने तिरंगे के लिए दिखाई घृणा, स्वयंभू लोकगायिका नेहा सिंह राठौर पर भी FIR

स्वयंभू लोकगायिका नेहा सिंह राठौर और ट्विटर हैंडल @Shafeeq2.0 पर मध्य प्रदेश की पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है। दोनों पर सीधी पेशाब कांड की आड़ में घृणास्पद पोस्ट करने का आरोप है। एक ने आरएसएस के लिए तो दूसरे ने तिरंगे के लिए अपनी घृणा दिखाई है।

मध्य प्रदेश के सीधी का एक वीडियो वायरल हुआ था। इसमें जनजातीय समाज के एक व्यक्ति पर प्रवेश शुक्ला पेशाब करता दिखा था। प्रवेश शुक्ला को गिरफ्तार कर एनएसए लगाया गया है। बुलडोजर चलाकर उसके घर का अवैध निर्माण ढाह दिया गया है। पीड़ित को मुख्यमंत्री आवास बुलाकर स्वयं मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान माफी माँग चुके हैं।

इसी घटना पर 6 जुलाई 2023 को नेहा सिंह राठौर ने एक पोस्ट किया। इस पोस्ट में उन्होंने लिखा है, “एमपी में का बा…? कमिंग सून।” इससे ऐसा लगता है कि ‘का बा’ फेम नेहा सिंह अब मध्य प्रदेश पर केंद्रित गाना लॉन्च करने वाली हैं। लेकिन इस पोस्ट के साथ उन्होंने एक तस्वीर भी लगाई है। तस्वीर में एक व्यक्ति को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के गणवेश जैसे कपड़े पहने दिखाया गया है। उसके मुँह में सिगरेट है और पैंट उतारकर वह एक व्यक्ति के ऊपर पेशाब कर रहा है।

भोपाल निवासी सूरज खरे ने इस ट्वीट को लेकर पुलिस में तहरीर दी है। भोपाल के हबीबगंज थाने में नेहा सिंह राठौर पर 2 समुदायों के बीच वैमन्सयता फैलाने के आरोप में IPC 153- A के तहत FIR दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि नेहा सिंह राठौर को नोटिस जारी कर पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा और जरूरी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

ट्विटर यूजर @Shafeeq2.0 पर भी FIR

वहीं भोपाल के ही कमला नगर थाने में बुधवार (5 जुलाई 2023) को ट्विटर यूजर @Shafeeq2.0 पर भी राष्ट्रीय ध्वज के अपमान का केस दर्ज हुआ है। शिकायत के मुताबिक @Shafeeq2.0 द्वारा किए गए एक ट्वीट में राष्ट्रध्वज पर एक व्यक्ति को पेशाब करते दिखाया गया है। पुलिस के अनुसार इस चित्र को सीधी मध्य प्रदेश की घटना के संदर्भ में एडिट किया गया है। शिकायतकर्ता सब इंस्पेक्टर नितिन ने इस ट्वीट को अपने साथ तमाम अन्य जनता की भावनाओं को आहत करने वाला बताया है। आरोपित हैंडल को चलाने वाले पर IPC की धारा 465, 469, 153 A(1)(b) भादवि एवं धारा 02 राष्ट्र गौरव अपमान निवारण अधिनियम 1971 के तहत कार्रवाई की गई है।

पुलिस ने इस ट्वीट को राष्ट्रीय एकता और अखंडता के खिलाफ माना है। फ़िलहाल इस मामले की भी जाँच की जा रही है।

गीता प्रेस वाले गोरखपुर से PM मोदी ने जोधपुर और अयोध्या को दिया वंदे भारत, रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास की आधारशिला भी रखी, ₹498 करोड़ होंगे खर्च

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने शुक्रवार (7 जुलाई 2023) को गोरखपुर पहुँचकर गीता प्रेस के कार्यक्रम में शामिल हुए। इसके बाद उन्होंने गोरखपुर रेलवे स्टेशन पहुँचकर दो वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों का उद्घाटन किया। इसके अलावा, उन्होंने लगभग 498 करोड़ रुपए की परियोजनाओं की आधारशिला रखी।

गीता प्रेस से निकल गोरखपुर रेलवे स्टेशन जाने तक पीएम मोदी ने रोड शो किया। इस दौरान उनके साथ यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) और राज्यपाल आनंदीबेन पटेल (Anandiben Patel) भी मौजूद रहे। सड़क के दोनों ओर खड़े लोगों का पीएम मोदी ने अभिवादन किया और गोरखपुर रेलवे स्टेशन पहुँचे।

गोरखपुर रेलवे स्टेशन पहुँचकर पीएम मोदी ने दो वंदे भारत एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। योगी आदित्यनाथ और आनंदीबेन पटेल की उपस्थित में उन्होंने गोरखपुर-लखनऊ को हरी झंडी दिखाई। वहीं, राजस्थान में जोधपुर-अहमदाबाद (साबरमती) रूट पर चलने वाली वंदे भारत को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गोरखपुर रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास की आधारशिला रखी। लगभग 498 करोड़ रुपए की लागत से गोरखपुर रेलवे स्टेशन का पुनर्विकास किया जाएगा। इस स्टेशन से अब लखनऊ तक वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन का संचालन भी शुरू हो गया है। यह अयोध्या होते हुए लखनऊ तक जाएगी।

अधिकारियों ने बताया कि रेलवे ने गोरखपुर-लखनऊ वंदे भारत ट्रेन के लिए गुरुवार (6 जुलाई 2023) से टिकटों की बुकिंग शुरू कर दी है। इसमें IRCTC यात्रियों को शताब्दी एक्सप्रेस की तरह वैकल्पिक खानपान सेवाओं के तहत चाय नाश्ता, दोपहर का भोजन और रात के खाने की सुविधा प्रदान करेगा।

गोरखपुर रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष एवं CEO अनिल कुमार लाहोटी ने कहा कि इस मार्ग पर जो सबसे तेज़ ट्रेन है, उसकी तुलना में वंदे भारत से लगभग 2 घंटे की बचत होगी। यह ट्रेन सुबह 6:05 पर गोरखपुर से चलकर 10:20 बजे पर लखनऊ पहुँचेगी और शाम को 7:15 से लखनऊ से वापस गोरखपुर आएगी।

IRCTC की वेबसाइट के मुताबिक, इस ट्रेन का लखनऊ से गोरखपुर का चेयर कार का किराया 1005 रुपए है। वहीं, एग्जीक्यूटिव क्लास का किराया 1755 रुपए है। गोरखपुर से लखनऊ तक की यात्रा के लिए चेयर कार का किराया 890 रुपए है और एग्जीक्यूटिव क्लास का किराया 1670 रुपए है।

जोधपुर-अहमदाबाद रूट पर वंदे भारत के उद्घाटन के दौरान राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़े। अहमदाबाद के साबरमती से राजस्थान से जोधपुर के बीच चलने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन का नियमित परिचालन 9 जुलाई 2023 से किया जाएगा। यह दूरी 6 घंटे 10 मिनट में पूरी होगी और सप्ताह में मंगलवार को छोड़कर ये सभी 6 दिन चलेगी।

वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन का अहमदाबाद (साबरमती) से जोधपुर तक के लिए चेयर कार का किराया 1280 रुपए और एक्जीक्यूटिव क्लास का किराया 2325 रुपये होगा। वापसी में जोधपुर से साबरमती के लिए किराया 1,115 रुपए और एक्जीक्यूटिव क्लास का किराया 2,130 रुपए होगा।

स्कूल का नाम- डीवाई पाटिल, प्रिंसिपल- एलेक्जेंडर: छात्राओं के बाथरूम में लगवाया CCTV, ईसाई प्रार्थना थोपा; अभिभावकों ने पीटा तो लिबरल फैलाने लगे हिंदूफोबिया

महाराष्ट्र के पुणे में गुरुवार (6 जुलाई) को डीवाई पाटिल हाई स्कूल के प्रिंसिपल अलेक्जेंडर कोट्स रीड और कुछ ईसाई शिक्षकों पर छेड़छाड़, हिन्दू धर्म के अपमान और धर्मान्तरण के प्रयास का आरोप लगा था। बताया गया कि इन आरोपितों ने लड़कियों के टॉयलेट में CCTV कैमरे लगाए थे जिसकी सूचना किसी को नहीं दी गई। आरोपों के बाद इन सभी को उनके पद से हटा दिया गया है। स्थानीय हिंदू संगठनों द्वारा आरोपित प्रिंसिपल की पिटाई भी की गई थी।

इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में कॉन्वेंट स्कूल के प्रिंसिपल भागते दिखाई दे रहे हैं जिनका पीछा हिंदू संगठन के सदस्य कर रहे हैं। इस वीडियो को इस्लामी और वामपंथ समर्थक भारत में अल्पसंख्यक लोगों को असुरक्षित बता कर शेयर कर रहे हैं। इन्ही में से कुछ का कहना है कि मुस्लिमों के बाद अब हिंदूवादियों की लिस्ट में ईसाई दूसरे नंबर पर हैं।

कुछ लोग भ्रामक खबरें फैला कर बता रहे हैं कि प्रिंसिपल की पिटाई स्कुल में ईसाई प्रार्थना करवाने के बाद हुई। हालाँकि ये आरोप पूरी तरह से सही नहीं हैं।

ऑपइंडिया ने मामले की पड़ताल की तो पता चला कि विवाद की मुख्य वजह स्कूल में पढ़ने वाली छात्राओं के वाशरूम में CCTV लगवाना है। इस घटना की जानकारी होने के बाद लड़कियों के माता-पिता पहले से ही नाराज थे। VHP नेता संतोष दभाड़े के मुताबिक बाद में यह भी पता चला कि स्कूल में ईसाईयत के अनुसार जीने के लिए बढ़ावा दिया जाता है। इसी क्रम में छात्रों को बाइबिल से प्रार्थनाएँ पढ़ने के लिए मजबूर किया जाना शामिल था। आरोप है कि स्कूल के अंदर हिंदू त्योहारों का अपमान भी होता था।

आषाढ़ी एकादशी को बताया ‘बेवकूफी’

VHP नेता संतोष दभाड़े ने ऑपइंडिया को आगे बताया कि स्कूल प्रशासन आषाढ़ी एकादशी और गुड़ी पड़वा जैसे हिंदू त्योहारों में छुट्टियाँ नहीं देता था। उन्होंने कहा कि कुछ छात्र एकादशी के अवसर पर पालकी (जुलूस) का आयोजन करना चाहते थे, लेकिन स्कूल प्रशासन ने इसे मूर्खतापूर्ण प्रथा बता कर इसकी अनुमति देने से इंकार कर दिया था। बकौल विहिप नेता स्कूल में 90% छात्र हिन्दू हैं लेकिन फिर भी उनसे ईसाई प्रार्थना करवाई जाती है। हालाँकि खुद को ईसाई प्रार्थनाओं से कोई दिक्कत न बताते हुए संतोष ने हिंदू संस्कृति के अपमान पर सवाल खड़ा किया।

प्रिंसिपल द्वारा महिला अभिभावक से छेड़छाड़

मिली जानकारी के मुताबिक 4 जुलाई को स्कूल के प्रिंसिपल की लोगों द्वारा हुई पिटाई की वजह एक महिला अभिभावक से की गई छेड़छाड़ थी। बताया जा रहा है कि छेड़छाड़ के दौरान आरोपित प्रिंसिपल ने पीड़िता को हेकड़ी भी दिखाई। विरोध के दौरान जमा अभिभावक स्कूल प्रशासन की तमाम दिक्क्तों को प्रधानाचार्य के आगे रख रहे थे। इस दौरान एक महिला गार्जियन ने स्कूल में होने वाली ईसाई प्रार्थना पर सवाल किया तो प्रिंसिपल ने न उनका अपमान किया बल्कि उन्हें गलत ढंग से छुआ भी। VHP नेता संतोष के मुताबिक इसी वजह से घटनास्थल पर मौजूद लोगों ने प्रिंसिपल की पिटाई की।

मुस्लिम टीचर जिन्ना को चाहता था भारत का पहला PM

VHP नेता संतोष के मुताबिक उन्हें इस बात की जानकारी मिली है कि स्कूल में छात्रों को न सिर्फ हिन्दू विरोधी बातें सिखाई जाती है बल्कि अन्य धर्मों को अच्छा भी बताया जाता है। मुस्लिम टीचर समीना पटेल का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने मुस्लिमों को शुद्ध और हिन्दुओं को हमलावर बताया। समीना पर यह भी आरोप है कि उन्होंने मोहम्मद अली जिन्ना को जवाहर लाल नेहरू से बेहतर बताया। बताया गया कि समीना ने बच्चों को सिखाते हुए कहा कि अगर जिन्ना भारत के पहले प्रधानमंत्री बने होते तो भारत और अधिक विकसित होता।

स्कूल प्रबंध को नहीं है जानकारी

ऑपइंडिया से बातचीत के दौरान विहिप सदस्यों ने कहा कि डीवाई पाटिल हाई स्कूल के तीन टीचरों को सस्पेंड कर दिया गया है। इनमें समीना पटेल भी शामिल हैं। ऑपइंडिया ने स्कूल का पक्ष जानने के लिए वहाँ के प्रशासनिक विभाग के शुबर्ट डिसुजा को फोन किया तो उन्होंने मामले की जाँच के बाद निकले निष्कर्ष पर ही कोई टिप्पणी करने की बात कही। डिसूजा ने छात्राओं के टॉयलेट में कैमरे लगाए जाने की घटना से खुद को अनजान बताया।

हिन्दू प्रार्थना को बताया बकवास

स्कूल में अपने बच्चे को पढ़ने वाले एक अभिभावक से ऑपइंडिया ने बात की। उन्होंने बताया कि स्कूल के अंदर होनी वाली तमाम हरकतों की एक शिकायत थाने में दी गई है लेकिन उस पर अभी तक कोई एक्शन नहीं लिया गया है और न ही FIR दर्ज की गई। महिला अभिभावक दीप्ति करमाले ने स्कूल में छात्राओं को तंग करने और उनके वॉशरूम में सीसीटीवी कैमरे लगाने का आरोप लगाया। दीप्ति ने यह भी बताया कि वहाँ पढ़ने वाले छात्रों को न सिर्फ ईसाई मत का पालन करवाया जाता है बल्कि हिंदू संस्कृति और इस से जुडी परंपराओं से दूर रखा जाता है।

पहले कभी हुए एक कार्यक्रम का जिक्र करते हुए महिला अभिभावक ने कहा कि तब कुछ छात्रों ने प्रसिद्ध हिंदू प्रार्थना ‘ऐ गिरी नंदिनी’ गाया था जिसे वहाँ के टीचरों ने बकवास बता दिया था। साथ ही भविष्य में ऐसे गाने स्कूल में न बजाने या गाने की हिदायत भी दी थी। छात्रों को ईसा मसीह की प्रार्थना के लिए मजबूर करने के साथ उन्हें हिंदू त्योहारों पर छुट्टियाँ न मिलने का भी आरोप दीप्ति ने लगाया। उन्होंने स्कूल के टीचरों में हिन्दू समाज के प्रति इतनी नफरत की वजह जाननी चाही है।

एक अन्य घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि छात्रों को मिले एक प्रोजेक्ट में मंदिरों में जाने रोकने पर नोट लिखने के लिए भी दिया गया था। उन्होंने बताया कि स्कूल की मंशा छात्रों द्वारा नोट में मस्जिद, चर्चा या गुरुद्वारा जाने और मंदिर न जाने का लेख लिखने की थी। महिला का आरोप है कि उसके बाद उन्होंने अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजा।

राष्ट्रगान का अपमान

अपने बच्चे को पढ़ाने वाले एक अभिभावक ने आरोप लगाया है कि वहाँ के प्रिंसिपल भारत के राष्ट्रगान का सम्मान नहीं करते। वह ‘जन गण मन’ के दौरान अक्सर घूमते-टहलते रहते हैं। प्रिंसिपल पर यह भी आरोप है कि वो उन छात्रों से काफी नाराज रहते थे जो स्कूल में हिंदी या मराठी भाषा में बात किया करते थे। अभिभावक इस बात से भी काफी चिंतित दिखीं कि उन वीडियो का क्या हुआ होगा जो छात्राओं के वाशरूम में लगे कैमरे में रिकॉर्ड हुई होंगी।

शिकायत कॉपी

फिलहाल छात्रों के नाराज अभिभावकों ने पुलिस में शिकायत दी है और उन्हें मामले में FIR दर्ज होने का इंतजार है। स्कूल मैनेजमेंट इस आरोपित प्रिंसिपल की भी जाँच करवा कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई का भरोसा दे रहा है। ऑपइंडिया ने मामले में पुलिस से बात करने का प्रयास किया तो उनकी तरफ से कोई उत्तर नहीं दिया गया। फिलहाल मिली जानकारी के मुताबिक पूरे केस की जाँच चल रही है।

बता दें कि इस पूरे मामले पर जहाँ ऑपइंडिया ने आपको हर पक्ष के साथ ये बताया था कि कैसे इस स्कूल में हिंदू घृणा को बढ़ावा दिया जा रहा था और स्कूल में सीसीटीवी लगवाने के कारण अभिभावकों ने प्रिंसिपल को पीटा, वहीं दूसरी ओर द वायर ने इस मामले पर झूठी रिपोर्ट प्रकाशित की है। हिंदू घृणा फैलाने के लिए उन्होंने रिपोर्ट में ये दिखाया कि वॉशरूम में कोई कैमरे लगे ही नहीं थे।

इस पूरे प्रकरण पर सिद्धि सोमानी की मूल रिपोर्ट अंग्रेजी में प्रकाशित हुई है, जिसे आप यहाँ क्लिक कर पढ़ सकते हैं। वायर के झूठ की पोल खोलती रिपोर्ट को पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।

नाम में गीता, काम में गीता: गीता प्रेस शताब्दी वर्ष समापन समारोह में बोले PM मोदी, कहा- ऐसी संस्थाएँ देश को जोड़ती हैं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) शुक्रवार (7 जुलाई 2023) को गोरखपुर पहुँचकर गीता प्रेस की शताब्दी महोत्सव के समापन समारोह में शामिल हुए। उनके साथ यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) और राज्यपाल आनंदीबेन पटेल भी मौजूद हैं। गीता प्रेस के प्रांगण में पहुँचते ही छात्रों ने वेद मंत्र से उनका स्वागत किया। उन्होंने अवलोकन किया और इस्तेमाल की गई पहली छपाई मशीन को भी देखा।

गीताप्रेस में प्रधानमंत्री ने दो किताबों का विमोचन भी किया। इनमें एक शिवपुराण और एक तुलसीदास कृत ग्रंथ शामिल है। बताते चलें कि गीता प्रेस की स्थापना जयदयाल गोयंदका और हनुमान प्रसाद पोद्दार ने सन 1923 में की थी। तब से तमाम उतार-चढ़ाव को देखते हुए अपने 100 वर्ष को पूरा किया।

पीएम मोदी ने कहा, “गीता प्रेस विश्व का इकलौता ऐसा प्रिंटिंग प्रेस है, जो एक संस्था नहीं एक जीवंत आस्था है। इसका कार्यालय करोड़ों लोगों के लिए किसी मंदिर से कम नहीं है। इसके नाम में भी गीता है और काम में भी गीता है। जहाँ गीता है, वहाँ कृष्ण हैं। वहाँ गीता है तो ज्ञान है। ज्ञान है तो बोध है। बोध है तो शोध है।”

महात्मा गाँधी का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, “गाँधी जी का गीता प्रेस से भावनात्मक संबंध था। वे गीता प्रेस की कल्याण पत्रिका के माध्यम से लिखा करते थे। उन्होंने ही कहा था कि इसमें विज्ञापन नहीं छापा जाए। आज भी इसमें विज्ञापन नहीं छापा जाता है।”

प्रधानमंत्री ने कहा, “यह भारत को उनकी जीवन शैली से परिचित कराकर राष्ट्र सेवा का काम करता रहा है। संतों की तपस्या कभी निष्फल नहीं होती। यही कारण है भारत नित नई सफलता हासिल कर रहा है। आज भारत विकास और विरासत दोनों को साथ लेकर चल रहा है।”

प्रधानमंत्री ने आगे कहा, “यहाँ लागत से भी कम मूल्य पर धार्मिक किताबें लोगों को घर-घर तक पहुँचाई जाती हैं। गीता प्रेस से जैसी संस्था सिर्फ धर्म-कर्म से ही नहीं जुड़ी हैं, यह भारत को भी जोड़ती हैं। देश भर में इसकी 20 शाखाएँ हैं। अलग-अलग भाषाओं में यह भारत की मूल चिंतन को लोगों तक पहुँचाती है। यह एक भारत श्रेष्ठ भारत के चिंतन को आगे बढ़ाती है।”

प्रकाशन की उपयोगिता को बोलते हुए कहा, “विदेशी आक्रांताओं ने हमारे पुस्तकालयों को जलाया था। अंग्रेजों ने हमारी गुरुकुल परंपरा को नष्ट कर दिया। हमारे पूज्य ग्रंथ लोप होने के कगार पर थे। ऐसे में ऐसी संस्थाओं ने ही उन्हें बचाने का काम किया। ये ग्रंथ फिर से घर-घर पहुँचने लगे है। इन ग्रंथों से हमारी नई पीढ़ियाँ जुड़ने लगे हैं।

वहीं, योगी आदित्यनाथ ने कहा, “गीता प्रेस ने अपनी शानदार 100 वर्ष पूरे किए और पिछले 75 साल में कोई भी प्रधानमंत्री यहाँ नहीं आया, क्योंकि यह भारत की आत्मा को झंकृत करता है। उन्होंने पीएम मोदी ने गीता प्रेस को गाँधी शांति पुरस्कार देकर सम्मान दिया।”

उन्होंने कहा कि गीता प्रेस भारत की हर भाषा में लगभग 100 करोड़ प्रकाशन करने की ओर अग्रसर है। इस दौरान सीएम योगी ने भाजपा सरकार की नीतियों के कारण गोरखपुर के हुए विकास को भी रेखांकित किया।

बताते चलें कि गीता प्रेस गीता प्रेस भगवद्गीता की 18 करोड़ प्रतियाँ और तुलसीदास से संबंधित ग्रंथ की 12 करोड़ प्रतियाँ भी प्रकाशित कर चुकी हैं। इस प्रेस में रोजाना 16 भाषाओं में 1800 किताबों की 70,000 किताबें प्रिंट होती हैं। यहाँ से प्रकाशित हनुमान चालीसा की कीमत दो रुपए से भी सस्ती है।

कॉन्ग्रेस का शराबबंदी का था वादा, सरकार बनते ही किया दारू घोटाला: मोदी ने बघेल सरकार को करप्शन पर घेरा, छत्तीसगढ़ को ₹7 हजार करोड़ की परियोजनाएँ भी दी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छत्तीसगढ़ पहुँचकर आज (7 जुलाई 2023) दो कार्यक्रमों में भाग लिया। एक वहाँ की सरकार के साथ। एक जनता के बीच। पहले कार्यक्रम में पीएम ने 7 हजार करोड़ रुपए से अधिक परियोजनाओं का उपहार प्रदेश को दिया। वहीं दूसरे कार्यक्रम में उन्होंने जनता के बीच जाकर बताया कि कैसे कॉन्ग्रेस सरकार 5 सालों में अपने वादे पूरे करने में विफल रही और जिस शराब को बंद करने की बात की थी उसी में 2 हजार करोड़ का घोटाला कर डाला।

पीएम के पहले कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी उनके साथ ही थे। यहाँ पीएम ने 7 हजार करोड़ की परिजयोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण करने के साथ बताया कि अब धान किसानों, खनिज संपदा से जुड़े उद्यमियों और टूरिज्म को भी इन प्रोजेक्ट्स से बहुत लाभ मिलेगा।

उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी बात यह है कि इनसे आदिवासी क्षेत्रों में सुविधा और विकास की नई यात्रा शुरू होगी। इसके अलावा छत्तीसगढ़ राज्य 2-2 इकोनोमिक कॉरिडोर से जुड़ेगा। एक रायपुर-धमबाद कॉरिडोर। दूसरा रायपुर-विशाखापट्टनम कॉरिडोर। उन्होंने यह भी बताया कि भारत सरकार छत्तीसगढ़ के ग्रामों में 700 से अधिक टॉवर लगवा रही हैं जिनमें से 300 चालू हो चुके हैं। पीएम ने ये भी बताया 2010-2014 की अवधि के दौरान, छत्तीसगढ़ को रॉयल्टी भुगतान के रूप में 1,300 करोड़ रुपए की राशि प्राप्त हुई थी जबकि एमएमडीआर अधिनियम के तहत  2015-16 से 2020-21 की अवधि के दौरान यह राशि 2,800 करोड़ रुपए थी।

वहीं रायपुर में हुई विजय संकल्प महारैली में वह जनता के बीच पहुँचकर बोले कि छत्तीसगढ़ में सरकार बनाने के लिए कॉन्ग्रेस ने 36 वादे किए थे, इनमें एक था कि वो राज्य में शराब बैन करेंगे। लेकिन 5 साल बीत जाने के बाद भी ऐसा नहीं हुई। उलटा राज्य में हजारों करोड़ का शराब घोटाला कर दिया गया।

पीएम ने कहा कि छत्तीसगढ़ में बीते 4 वर्षों में जो हुआ वो सबूत है इस बात का कि कॉन्ग्रेस के कोर-कोर में करप्शन है। भ्रष्टाचार के बिन कॉन्ग्रेस सांस भी नहीं ले सकती। करप्शन ही उनकी विचारधारा है। पीएम ने छत्तीसगढ़ के विकास में कॉन्ग्रेस को रोड़ा बताया और कहा, “ये लोग मेरे पीछे पड़े रहेंगे, मेरी कब्र खोदने की धमकी देंगे, साजिशें रचेंगे। लेकिन उन्हें नहीं पता जो डर जाए वो मोदी नहीं। पिछले 9 साल में केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ के धान किसानों को 1 लाख करोड़ रुपये से भी अधिक दिए हैं। इस साल भी यहां के धान किसानों को 22 करोड़ रुपये से अधिक दिए गए हैं।”