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गाँधी शांति पुरस्कार लेगा गीता प्रेस, पर ₹1 करोड़ नहीं: वामपंथी करते रहे बदनाम, 100 साल में 41 करोड़ किताबें छाप घर-घर में बनाई जगह

100 साल से धार्मिक ग्रंथों का प्रकाशन कर उन्हें देश-विदेश तक पहुँचाने का माध्यम बनने वाली गीता प्रेस को साल 2021 के लिए गाँधी शांति पुरस्कार मिला। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसके लिए उन्हें बधाई भी दी। लेकिन कॉन्ग्रेसी नेता जयराम रमेश समेत कई अन्य इससे किलस गए और उन्होंने गीता प्रेस को अवार्ड मिलने को कहा कि ये बिलकुल ऐसा है जैसे सावरकर या गोडसे को सम्मान मिला हो।

जयराम रमेश के ट्वीट पर उन्हें सोशल मीडिया यूजर्स खूब लताड़ लगा रहे हैं। भाजपा नेता शहजाद जय हिंद ने कहा कि हैरानी नहीं हो रही कि कॉन्ग्रेसियों को गीता प्रेस से दिक्कत है। अगर ये कोई और प्रेस होती तो इसकी प्रशंसा होती है लेकिन गीता प्रेस के कारण इन्हें समस्या है। कॉन्ग्रेस को मुस्लिम लीग सेकुलर लगती है मगर गीता प्रेस कम्युनल है। जाकिर नाइक शांति का मसीह है पर गीता प्रेस सांप्रदायिक है। कॉन्ग्रेस को चाहिए कर्नाटक में गाय कटे। ये गीता को जिहाद से जोड़ते हैं। प्रभु श्रीराम और राम मंदिर का विरोध करते हैं।

इसी तरह राजद प्रवक्ता मनोज झा ने भी गीता प्रेस को गाँधी पीस प्राइज दिए जाने पर सवाल खड़े किए और कहा कि सरकार पूर्ण रूम से गाँधी विरोधी है। सरकार को चाहिए कि वो गीता प्रेस को जितना मन हो उतना पैसा दें। लेकिन गाँधी के नाम पर न दें। राजद प्रवक्ता का ऐसा भ्रामक बयान तब आया है जब गीता प्रेस ये बात स्पष्ट कर चुका है कि उन्हें गाँधी शांति पुरस्कार-2021 स्वीकार है लेकिन वो इसके साथ मिलने वाली एक करोड़ रुपए की राशि नहीं लेंगे

बता दें कि गीता प्रेस को वर्ष 2021 का गाँधी शांति पुरस्कार दिया गया है। यहाँ धार्मिक किताबें प्रकाशित होती हैं और एक बार इनपर जिल्द चढ़ने के बाद इन्हें कभी जमीन पर नहीं रखा जाता। इन्हें रखने के लिए लकड़ी के फट्टे हैं। इसके अलावा इन्हें मशीन से नहीं हाथों से चिपकाया जाता है क्योंकि बाजार में बिकने वाली गोंद में जानवरों से जुड़ी चीजें मिली होती हैं। गीताप्रेस सालाना 2 करोड़ से ज्यादा पुस्तक छापकर देश विदेश भेजती है। 100 सालों में प्रेस ने 41 करोड़ से ज्यादा पुस्तकें छापी हैं।

घर-घर गीता प्रेस पहुँचाने वाले हनुमान प्रसाद पोद्दार

उल्लेखनीय है कि आज गीता प्रेस द्वारा करोड़ों की तादाद में प्रकाशित की जा रही किताबें हर साल बिकती हैं। लोग केवल गीता प्रेस लिखा होने भर से उसे खरीद लेते हैं। मगर इसके प्रति इतना विश्वास लोगों में यूँ ही नहीं बना। साल 1923 में इसकी शुरुआत होने के बाद ये धीरे-धीरे लोगों तक पहुँची और इसे घर-घर तक पहुँचाने का श्रेय अगर किसी को जाता है तो वो हनुमान प्रसाद पोद्दार हैं। जिन्होंने अलीपुर जेल में श्री ऑरोबिंदो (उस समय बाबू ऑरोबिंदो घोष) के साथ बंद रहते हुए जेल में ही गीता का अध्ययन शुरू कर दिया था।

वहीं से छूटने के बाद उनका ध्यान इस बात पर गया कि कैसे कलकत्ता ईसाई मिशनरी गतिविधियों का केंद्र बना हुआ था, जहाँ बाइबिल के अलावा ईसाईयों की अन्य किताबें भी, जिनमें हिन्दुओं की धार्मिक परम्पराओं के लिए अनादर से लेकर झूठ तक भरा होता था, सहज उपलब्ध थीं। लेकिन गीता- जो हिन्दुओं का सर्वाधिक जाना-माना ग्रन्थ था, उसकी तक ढंग की प्रतियाँ उपलब्ध नहीं थीं। इसीलिए बंगाली तेज़ी से हिन्दू से ईसाई बनते जा रहे थे।

1926 में हुए मारवाड़ी अग्रवाल महासभा के दिल्ली अधिवेशन में पोद्दार की मुलाकात सेठ घनश्यामदास बिड़ला से हुई, जिन्होंने आध्यात्म में पहले ही गहरी रुचि रखने वाले पोद्दार को सलाह दी कि जन-सामान्य तक आध्यात्मिक विचारों और धर्म के मर्म को पहुँचाने के लिए आम भाषा (आज हिंदी, उस समय की ‘हिन्दुस्तानी’) में एक सम्पूर्ण पत्रिका प्रकाशित होनी चाहिए। पोद्दार ने उनके इस विचार की चर्चा जयदयाल गोयनका से की, जो उस समय तक गोबिंद भवन कार्यालय के अंतर्गत गीता प्रेस नामक प्रकाशन का रजिस्ट्रेशन करा चुके थे।

गोयनका ने पोद्दार को अपनी प्रेस से यह पत्रिका निकालने की ज़िम्मेदारी दे दी, और इस तरह ‘कल्याण’ पत्रिका का उद्भव हुआ, जो तेज़ी से हिन्दू घरों में प्रचारित-प्रसारित होने लगी। आज कल्याण के मासिक अंक लगभग हर प्रचलित भारतीय भाषा और इंग्लिश में आने के अलावा पत्रिका का एक वार्षिक अंक भी प्रकाशित होता है, जो अमूमन किसी-न-किसी एक पुराण या अन्य धर्मशास्त्र पर आधारित होता है।

गीता प्रेस की स्थापना के पीछे का दर्शन स्पष्ट था- प्रकाशन और सामग्री/जानकारी की गुणवत्ता के साथ समझौता किए बिना न्यूनतम मूल्य और सरलतम भाषा में धर्मशास्त्रों को जन-जन की पहुँच तक ले जाना। हालाँकि गीता प्रेस की स्थापना गैर-लाभकारी संस्था के रूप में हुई, लेकिन गोयनका-पोद्दार ने इसके लिए चंदा लेने से भी इंकार कर दिया, और न्यूनतम लाभ के सिद्धांत पर ही इसे चलाने का निर्णय न केवल लिया, बल्कि उसे सही भी साबित करके दिखाया। 5 साल के भीतर गीता प्रेस देश भर में फ़ैल चुकी थी, और विभिन्न धर्मग्रंथों का अनुवाद और प्रकाशन कर रही थी। गरुड़पुराण, कूर्मपुराण, विष्णुपुराण जैसे महत्वपूर्ण ग्रंथों का प्रकाशन ही नहीं, पहला शुद्ध और सही अनुवाद भी गीता प्रेस ने ही किया।

बम्बई से आई गोरखपुर, गोरखधाम बना संरक्षक

गीता प्रेस ने श्रीमद्भागवत गीता और रामचरितमानस की करोड़ों प्रतियाँ प्रकाशित और वितरित की हैं। इसका पहला अंक वेंकटेश्वर प्रेस बम्बई से प्रकाशित हुआ, और एक साल बाद इसे गोरखपुर से ही प्रकाशित किया जाने लगा। उसी समय गोरखधाम मन्दिर के प्रमुख और नाथ सम्प्रदाय के सिरमौर की पदवी को प्रेस का मानद संरक्षक भी नामित किया गया- यानी आज उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और नाथ सम्प्रदाय के मुखिया योगी आदित्यनाथ गीता प्रेस के संरक्षक हैं।

गीता प्रेस की सबसे खास बात है कि इतने वर्षों में कभी भी उस पर न ही सामग्री (‘content’) की गुणवत्ता के साथ समझौते का इलज़ाम लगा, न ही प्रकाशन के पहलुओं के साथ- वह भी तब जब 60 करोड़ से अधिक प्रतियाँ प्रेस से प्रकाशित हो चुकीं हैं। 96 वर्षों से अधिक समय से इसका प्रकाशन उच्च गुणवत्ता के कागज़ पर ही होता है, छपाई साफ़ और स्पष्ट, अनुवाद या मुद्रण (printing) में शायद ही कभी कोई त्रुटि रही हो, और subscription लिए हुए ग्राहकों को यह अमूमन समय पर पहुँच ही जाती है- और यह सब तब, जबकि पोद्दार ने इसे न्यूनतम ज़रूरी मुनाफे के सिद्धांत पर चलाया, और यही सिद्धांत आज तक गीता प्रेस गोरखपुर में पालित होता है। न ही गीता प्रेस पाठकों से बहुत अधिक मुनाफ़ा लेती है, न ही चंदा- और उसके बावजूद गुणवत्ता में कोई कमी नहीं।

‘भाई जी’ कहलाने वाले पोद्दार ने ऐसा सिस्टम बना और चला कर यह मिथक तोड़ दिया कि धर्म का काम करने में या तो धन की हानि होती है (क्योंकि मुनाफ़ा कमाया जा नहीं सकता), या फिर गुणवत्ता की (क्योंकि बिना ‘पैसा पीटे’ उच्च गुणवत्ता वाला काम होता नहीं है)। उन्होंने मुनाफ़ाखोरी और फकीरी के दोनों चरम छोरों पर जाने से गीता प्रेस को रोककर, ethical business और धर्म-आधारित entrepreneurship का उदाहरण प्रस्तुत किया।

महाराष्ट्र में रुकवाया ‘आदिपुरुष’ का शो, छत्तीसगढ़ के मॉल में हनुमान चालीसा: अयोध्या, काशी और हरिद्वार के संत भी विरोध में उतरे

फिल्म ‘आदिपुरुष’ का विरोध तेज हो गया है। वीकेंड के बाद बॉक्स ऑफिस पर भी फिल्म गिरती हुई दिख रही है। महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई के नालासोपारा में हिन्दू कार्यकर्ताओं ने ‘आदिपुरुष’ के शो को रुकवा दिया। हिन्दू संगठनों के कार्यकर्ताओं ने थिएटर में जाकर नारेबाजी की और दर्शकों को बाहर जाने के लिए कहा। इसके बाद शो को रद्द करना पड़ा। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में भी हिन्दू कार्यकर्ताओं ने फिल्म के विरोध में रैली निकाली।

बिलासपुर में भी हिन्दू कार्यकर्ताओं ने सिनेमा हॉल में घुस कर नारेबाजी की। मॉल के भीतर भी हिन्दू संगठन के कार्यकर्ता नारेबाजी करते हुए घुस गए। पुलिस ने इन्हें रोकने के लिए बैरिकेडिंग भी लगाई थी, लेकिन आक्रोशित लोग इसे भी तोड़ते हुए आगे बढ़ गए। मॉल के सामने बैठ कर हनुमान चालीसा का पाठ कर रहे कई हिन्दू कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हटाया भी। इनमें से कुछ को गिरफ्तार भी किया गया। सोशल मीडिया पर भी लोगों ने फिल्म के डायलॉग लेखक मनोज मुंतशिर को जम कर सुनाया।

उधर अयोध्या और काशी के संत भी ‘आदिपुरुष’ के विरोध में उतर आए हैं। ‘अखिल भारतीय संत समिति’ के महामंत्री जितेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि संतों को फिल्म के डायलॉग्स पच नहीं रहे हैं, मनोज मुंतशिर ने ‘शुक्ला’ बनने की कोशिश की है। उन्होंने इसे सनातन धर्म के साथ छेड़छाड़ करार देते हुए अक्षम्य अपराध बताया। वाराणसी में भी मल्टीप्लेक्स के बाहर प्रदर्शन हुआ। पोस्टर फाड़ कर हनुमान ध्वसज फहराया गया। लखनऊ में ‘अखिल भारतीय हिन्दू महासभा’ ने कोतवाली थाने में शिकायत दर्ज कराई।

संगठन ने कहा कि बच्चों के मन में भगवान राम के प्रति अपमानजनक छवि बनाने की कोशिश की गई है। फिल्म को यूपी में बैन करने की माँग हुई। हरिद्वार का अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद, शंकराचार्य परिषद, महामंडलेश्वर, जूना अखाड़ा और बड़ा अखाड़ा भी फिल्म के विरोध में उतर आया है। भाजपा सांसद हरनाथ यादव ने फिल्म का विरोध किया। केंद्रीय मंत्री रेणुका सिंह ने इसे छत्तीसगढ़ में बैन किए जाने की माँग की। महाराष्ट्र के पालघर में भी फिल्म के खिलाफ प्रदर्शन हुआ।

दलित लड़की को राशिद ने किया अगवा, पीड़ित परिवार को घर में घुसकर दी धमकी- केस वापस लो नहीं तो दूसरी बेटी को भी उठा लेंगे

उत्तर प्रदेश के शामली की एक दलित लड़की को अगवा करने का मामला सामने आया है। पीड़ित पिता ने राशिद के पर बेटी को धर्मांतरण की नीयत से अगवा करने का आरोप लगाया है। लड़की बागपत में अपने रिश्तेदार के घर गई थी। वहीं से 11 जून 2023 को लापता हो गई। इसकी पुलिस से शिकायत किए जाने के बाद राशिद के परिजन 15 जून को पीड़ित परिवार के घर पहुँच गए। केस वापस लेने की धमकी दी। धमकी देने के मामले में 2 आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस दोनों मामलों की जाँच में जुटी है।

जानकारी के मुताबिक मूल रूप से शामली जिले के बाबरी थाना क्षेत्र की रहने वाली 19 वर्षीय दलित लड़की 28 मई 2023 को बागपत जिले के छपरौली थाना क्षेत्र स्थित एक रिश्तेदार के घर गई थी। यहाँ से वह 11 जून को गायब हो गई। जब को उसका एक पत्र मिला। इसमें लड़की ने लिखा था, “मैं घर छोड़ कर जा रही हूँ। प्लीज मुझे ढूँढने की कोशिश न करना। आपको खाटू श्याम की कसम।”

इस मामले में पुलिस ने IPC की धारा 363 में अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ केस दर्ज कर जाँच शुरू की। इस बीच मामले में लड़की के ही गाँव के राशिद का नाम सामने आया। पुलिस राशिद और पीड़िता की तलाश में लगी थी। इसी बीच 15 जून 2023 की रात पीड़ित परिवार के घर राशिद के परिजन रात के लगभग 11 बजे पहुँच गए। इनमें परवेज, नदीम, शहजाद और नौशाद शामिल थे। इन सभी ने लड़की को मुस्लिम बना कर उसका निकाह राशिद से कराने की बात कही। पीड़ित परिवार को चुप होने और शिकायत वापस लेने को कहा।

इस मामले में दर्ज कराई गई शिकायत में परवेज, नदीम, शहजाद और नौशाद पर पीड़ित परिवार की दूसरी बेटी को भी उठा ले जाने और पत्नी तथा बच्चों की हत्या करने की धमकी देने का भी आरोप है। लड़की के पिता ने खुद को दहशत में बताते हुए गाँव से पलायन की बात कही है। इस मामले में पुलिस ने IPC की धारा 452, 504 और 506 के तहत केस दर्ज किया है। शामली पुलिस ने अब तक 2 आरोपितों परवेज और शहजाद की गिरफ्तारी की पुष्टि की है। ऑपइंडिया के पास बागपत और शामली में दी गई शिकायत की कॉपी मौजूद है।

ऑपइंडिया ने इस मामले में पीड़िता के भाई से बात की। उन्होंने हमें बताया गया कि आरोपित राशिद उनकी बहन से उम्र से लगभग दोगुनी उम्र का है। उसने पीड़ित के गाँव के पास एक दलित व्यक्ति के मकान में जनता फर्नीचर नाम से दुकान खोली थी। लड़की के भाई का दावा है कि इसी जगह राशिद से उसकी बहन की जान पहचान हुई थी। पीड़िता के भाई ने राशिद को 4 बच्चों का भी अब्बा बताया है।

राम या श्याम… हिंदू हैं तो इस्लाम पर कुछ लिखने-बोलने से पहले सोच लें: नौकरी-बिजनेस होगा चौपट, सर तन से जुदा का रहेगा खतरा

इस्लामी कट्टरपंथियों ने शनिवार (17 जून, 2023) को सोशल मीडिया पर गिरोह बना कर भारत के एक हिन्दू कारोबारी राम चरण (बदला हुआ नाम, सुरक्षा के कारण) को धमकी देना शुरू कर दिया। राम चरण की बस इतनी गलती थी कि उन्होंने भाजपा की निलंबित नेता नूपुर शर्मा का समर्थन कर दिया था। राम एक कंपनी में CEO के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने भारत में बढ़ते इस्लामी कट्टरपंथ को लेकर चिंता जताई थी, जिसके बाद इस्लामवादी उनके पीछे पड़ गए।

राम चरण (बदला हुआ नाम, सुरक्षा के कारण) ने नमाज की आड़ में हिन्दुओं और सरकार की जमीन पर अतिक्रमण किए जाने का विरोध किया था। स्कूलों-कॉलेजों में जिस तरह से हिजाब का प्रचलन बढ़ाने की कोशिश हो रही है, उस पर भी उन्होंने आपत्ति जताई थी।

इस्लामवादियों ने जैसे ही उनकी कुछ ट्वीट्स में लोकेशन दुबई देखा, वो अरब मुल्क से उन पर कार्रवाई करने और उन्हें भारत को प्रत्यर्पित करने की माँग करने लगे। अपनी ट्वीट्स में उन्होंने ‘लव जिहाद’ से लेकर खाने में थूकने की कट्टर इस्लामी ट्रेंड का भी विरोध किया था।

भारत के साथ-साथ विदेश के भी कई मुस्लिम उनका विरोध करने लगे और उन्हें इस्लामॉफ़ोबिक बताने लगे। स्तम्भकार अब्दुल्ला अलमदी ने तो उन पर ईशनिंदा तक का आरोप मढ़ दिया। उन्होंने मुस्लिमों के खिलाफ घृणा फ़ैलाने का आरोप लगाते हुए राम चरण को देश से निकाल बाहर किए जाने की माँग की। एक इस्लामी कट्टरपंथी ने उनका लिंक्डइन प्रोफाइल वायरल कर दिया। उसने दुबई पुलिस से कार्रवाई की माँग की।

एक अन्य इस्लामी कट्टरपंथी ने राम चरण (बदला हुआ नाम, सुरक्षा के कारण) का विरोध करते हुए लिखा कि इस्लामी मुल्क में रहने के बावजूद वो इस तरह की चीजें शेयर कर रहे हैं। उसने उनका कारोबार तबाह किए जाने और उन्हें मुल्क से निकाले जाने की माँग की। उसने दावा किया कि लोग मुस्लिमों को गाली देकर मुस्लिमों से ही फायदा उठा रहे हैं, ये नहीं चलेगा।

कॉन्ग्रेस की ट्रॉल रिया ने भी दुबई पुलिस को टैग करते हुए हिन्दू कारोबारी को सज़ा देने की माँग की। पत्रकार अशरफ हुसैन ने दावा किया कि UAE ने इस मामले में जाँच भी शुरू कर दी है। 2018 में इसी तरह एक हिन्दू कारोबारी को सऊदी अरब में गिरफ्तार किया गया था।

खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह की हत्या, कनाडा में मारी गोली: 4 दिन पहले ही ब्रिटेन में मरा था आतंकी अवतार सिंह, जहर थी वजह?

कनाडा में भारत के वॉन्टेड खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की गोली मार कर हत्या कर दी गई है। हरदीप सिंह भारत की मोस्ट वॉन्टेड लिस्ट में शामिल था। राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने उस पर 10 लाख रुपए का इनाम भी घोषित कर रखा था।

सिख फॉर जस्टिस संगठन से जुड़े हरदीप को कनाडा के एक गुरूद्वारे के आगे गोली मारी गई है। हमलावरों की संख्या 2 बताई जा रही है, जो मौके से फरार हो गए हैं। भारतीय जाँच एजेंसियों ने इस मामले में कनाडा की सुरक्षा एजेंसियों से सम्पर्क साधा है। घटना सोमवार (19 जून 2023) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक हरदीप सिंह पर हमला सरे (Surrey) शहर में हुआ है। हमलावरों की पहचान अभी तक नहीं हो पाई है। हमले के दौरान हरदीप सिंह निज्जर एक कार में मौजूद था। कार के शीशे गोलियों से टूट गए हैं। वहीं वायरल हो रहे एक अन्य वीडियो में एक दूसरी कार जलते हुए दिख रही है। माना जा रहा है कि वो कार हमलावरों की हो सकती है।

बताते चलें कि खालिस्तानी हरदीप सिंह निज्जर भारत सरकार की डेजिगनेटेड आतंकियों की लिस्ट में शामिल था। अभी हाल ही में भारत सरकार ने जिन 41 आतंकियों की सूची जारी की थी, उसमें भी निज्जर का नाम था। मूल रूप से पंजाब में जालंधर का निवासी निज्जर पिछले कई वर्षों से कनाडा में रह रहा था। कुछ माह पहले उसके 2 साथी फिलीपींस और मलेशिया से गिरफ्तार हुए थे। निज्जर पर गैंगस्टर लॉरेंस विश्नोई गैंग को भी अपराध के सामान विदेशों से सप्लाई करने के आरोप हैं।

वायरल हो रहे एक वीडियो में हरदीप सिंह के अंतिम संस्कार में खालिस्तान के समर्थन और भारत विरोधी नारे भी लगे हैं।

खालिस्तानी हरदीप सिंह निज्जर कनाडा में अक्सर भारत विरोधी बयानबाजी करने वाले सिख फॉर जस्टिस समूह से जुड़ा था। वह भारत में खालिस्तान टाइगर फ़ोर्स (KTF) का संचालक था। इस समूह ने साल 2022 में पंजाब के जालंधर में एक मंदिर के पुजारी की हत्या की साजिश रची थी। निज्जर का नाम किसान आंदोलन के दौरान विदेशों में भारतीय दूतावासों पर हुए प्रदर्शनों में भी सामने आया था। तब NIA की FIR में हरदीप सिंह निज्जर का भी नाम था। NIA को उसकी देशविरोधी फंडिंग जमा करने, भारत विरोधी प्रचार आदि मामलों में तलाश थी।

निज्जर की मौत के बाद भारत की जाँच एजेंसियों ने कनाडा के प्रशासन से सम्पर्क साधा है। बताते चलें कि इसी सप्ताह ब्रिटेन में खालिस्तानी अवतार सिंह खांडा की मौत हो गई थी। वह खालिस्तानी अमृतपाल सिंह (Amritpal Singh) का हैंडलर भी था और उसे 37 दिनों तक छिपने में मदद की थी। खांडा भी NIA की मोस्ट वॉन्टेड लिस्ट में शामिल था। पिछले कुछ दिनों से उसकी हालत नाजुक बनी हुई थी। उसे पहली स्टेज का ब्लड कैंसर था। उसकी मौत पर यह भी संदेह जाहिर किया गया कि खांडा को जहर दिया गया था।

‘आदिपुरुष’ पर माफी माँगने से मनोज मुंतशिर का इनकार, बोले- ‘मुझसे मत करो सवाल, ओम राउत से पूछो’

आदिपुरुष में लिखे गए डॉयलाग्स के कारण ट्रोल हो रहे मनोज मुंतशिर ने संवाद के साथ की गई छेड़छाड़ के लिए माफी माँगने से इनकार कर दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार उन्होंने कहा कि वो माफी नहीं माँगेंगे बल्कि फिल्म में जिन डॉयलाग्स पर विवाद हुआ है, उसको बदलेंगे।

उन्होंने जी न्यूज को दिए इंटरव्यू में कहा, “मैं माफी बिलकुल नहीं माँगता। माफी से भी बड़ा कुछ होता है… जब आप माफी माँगते हैं तो आप अगली गलती की तैयारी शुरू कर देते हैं। मैं क्षमा माँगने की बजाय इसे एक्शन (डॉयलाग) में बदल रहा हूँ।”

उनसे जब एंकर राम शर्मा ने पूछा कि आखिर लक्ष्मण को जब शक्ति लगती है तो वो उन्हें संजीवनी बूटी की जानकारी विभीषण की पत्नी देती है… ऐसा किस जगह से रेफरेंस लेकर दिखाया गया है?

इस पर मनोज ने कहा, “इन किरदारों के लिए आपको ओम राउत से बात करनी होगी। हमारी कहानी रामायण से प्रेरित है। हमारी कहानी रामयण के कुछ हिस्से से है। पूरी रामायण नहीं दिखाई गई है। स्क्रीनप्ले के अडॉप्शन के लिए मुझसे सवाल नहीं होना चाहिए। आपको तो खुली बांह से स्वागत करना चाहिए कि लेखक-निर्माता इस बात को कह रहे हैं कि फिल्म के वो संवाद बदल दिए गए जो आपको पसंद नहीं थे।”

मनोज मुंतशिर ने सवालों का जवाब देने की जगह एंकर को कहा- “आप मुद्दे से भटक रहे हैं।” वो कहते हैं कि वो फिल्म के डॉयलाग्स के लिए जिम्मेदार है अगर स्क्रीनप्ले या किरदारों पर बात करनी है तो फिर इसके लिए ओम राउत से बात करनी चाहिए। जब एंकर ने पूछा कि क्या ऐसे किरदारों का भी डॉयलाग आप लिखते हैं जो होते ही नहीं। इस पर मनोज ने कहा कि आपके सवालों का जवाब आपको अच्छे से ओम राउत देंगे। एक एक चीज का रेफरेंस वो आपको देंगे, लेकिन इसके लिए आपको बात उन्हीं से करनी होगी। उन्होंने सिर्फ कथानक पर यकीन किया और उनके लिखे चरित्रों पर भी संवाद को लिखा।

मदरसे का औचक निरीक्षण करने गए थे अधिकारी, सुल्तान अहमद ने दी ‘अंजाम भुगतने’ की धमकी: कहा- ‘मेरा ही मदरसा मिला चेक करने को?’

उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले में एक मदरसा संचालक द्वारा जाँच करने पहुँचे अधिकारी को धमकाने का मामला सामने आया है। यह धमकी मदरसा जलालुल उलूम, महदेइया के प्रबंधक सुल्तान अहमद द्वारा बस्ती मंडल के अल्पसंख्यक कल्याण उपनिदेशक विजय प्रताप यादव को दी गई है। पीड़ित अधिकारी ने 18 जून 2023 (रविवार) को आरोपित सुल्तान अहमद के खिलाफ FIR दर्ज करवाई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह मामला सिद्धार्थनगर जिले के थानाक्षेत्र सिद्धार्थनगर का है। यहाँ सुल्तान अहमद मिनी आईटीआई मदरसा जलालुल उलुम महदेइया का संचालन करते हैं। 14 जून 2023 को बस्ती मंडल के अल्पसंख्यक कल्याण उपनिदेशक विजय प्रताप यादव इसी मदरसे का निरीक्षण करने पहुँचे थे। इस निरीक्षण में अधिकारी ने तमाम कमियाँ मिलने का दावा किया।

बताया गया कि मदरसे में नियुक्त 3 में से 1 कर्मचारी बिना किसी अनुमित के गैर हाजिर था। इसी के साथ 3 टीचरों में से 2 मौके पर नहीं मिले। उन दोनों की भी अनुपस्थिति की कोई लिखित सूचना नहीं पाई गई।

अल्पसंख्यक कल्याण उपनिदेशक ने बताया कि मदरसे में साफ-सफाई की हालात बेहद खराब थी। परिसर में फैली गंदगी को उन्होंने खुद झाड़ू से साफ किया। इस निरीक्षण में उपनिदेशक विजय प्रताप यादव के साथ जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी तन्मय पांडेय भी मौजूद थे। इन तमाम खामियों को देखते हुए तन्मय पांडेय ने मदरसा संचालक को नोटिस जारी करते हुए 17 जून 2023 तक जवाब माँगा।

आरोप है कि लिखित जवाब देने के बजाय अंतिम दिन 17 जून को मदरसा संचालक सुल्तान अहमद ने फोन कर के उपनिदेशक विजय प्रताप यादव को फोन कर के अंजाम भुगतने की धमकी दी। इस दौरान सुल्तान ने कहा, “मेरा ही मदरसा मिला था चेक करने को ?”

इस मामले में सिद्धार्थनगर पुलिस ने FIR दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है। वहीं खुद पर लगे आरोपों के बाद मदरसा संचालक सुल्तान ने सारा दोष अधिकारियों पर थोपने का प्रयास किया। उन्होंने उपनिदेशक विजय प्रताप पर बिना अनुमति मदरसे की छात्राओं का वीडियो वायरल करने का आरोप लगाया।

परिसर में फैली गंदगी को तेज हवा से गिरी पत्तियाँ बताते हुए सुलतान का कहना है कि वो भी अधिकारी विजय प्रताप यादव के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज करवाएँगे। फिलहाल पुलिस मामले की जाँच कर रही है।

‘हिंदू-मुस्लिम में आएगी दूरी’ : जमीयत के मौलाना अरशद मदनी ने UCC का किया विरोध, बोले- हमें सिर्फ मुस्लिम लॉ के हिसाब से जीना है

यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) पर चल रही देशव्यापी बहस के दौरान जमीयत उलेमा के चीफ अरशद मदनी का बड़ा बयान सामने आया है। मदनी का एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें वो UCC को हिन्दू-मुस्लिम के बीच दरार डालने वाला कदम बताते हैं। इस दौरान उन्होंने UCC के विरोध का भी ऐलान किया है। हालाँकि मदनी ने मुस्लिमों से सड़कों पर न उतरने की भी अपील की है। मदनी का कहना है कि फिरकापरस्त ताकतें मुस्लिमों के 1300 साल पुराने कायदों और कानूनों को बदलने की साजिश रच रहीं हैं।

मदनी द्वारा UCC के विरोध में दिए गए बयान का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस बयान में उन्होंने 1300 सालों से खासतौर पर भारत के मुस्लिमों द्वारा पर्सनल लॉ के मुताबिक जीवन बिताने की बात कही है। अरशद मदनी ने बताया कि वो पुराने कानून को ही बरकरार रखना चाहते हैं। हालाँकि मदनी ने इसके खिलाफ सड़कों पर बिलकुल भी नहीं उतरने की सलाह दी। UCC को उन्होंने फिरकापरस्त लोगों द्वारा शुरू किया गया राजनैतिक मसला बताया। साथ ही इसे वास्तविकता से परे बताया।

मदनी का कहना है कि UCC लागू करने की सोच रखने वाले असल में देश के हिन्दू-मुस्लिम वोटों को आपस में बाँटना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि मंशा सिर्फ यही है कि देश को ये दिखाया जा सके कि आज़ादी के बाद अब तक मुसलामानों के खिलाफ जो कोई नहीं कर सका तो अब कर दिया गया। मदनी के मुताबिक जितना ही विरोध किया जाएगा उतना ही हिन्दू-मुस्लिम में दूरी बनेगी और साम्प्रदायिक ताकतों की सफलता उतनी ही पक्की हो जाएगी। यूनिफॉर्म सिविल कोड को मदनी ने मुस्लिमों की पर्सनल आजादी खत्म करने की साजिश बताया।

अपने बयान में मदनी ने किसी चौहान साहब की रिपोर्ट का जिक्र किया। उन्होंने वह रिपोर्ट अपने पास होने का दावा भी किया। मदनी का कहना है कि उस रिपोर्ट में यूनिफॉर्म सिविल कोड को भारत में एक गैरजरुरी चीज करार दिया गया है। गौरतलब है कि विधि आयोग ने बुधवार (14 जून 2023) को कहा कि 22वें विधि आयोग ने समान नागरिक संहिता के बारे में मान्यता प्राप्त धार्मिक संगठनों के विचारों को जानने के लिए फिर से निर्णय लिया है। आयोग ने कहा है कि जिन लोगों को इसमें रुचि है और अपनी राय देना चाहते हैं, वे राय दे सकते हैं।

‘जैसे सावरकर या गोडसे को सम्मान मिला हो…’ : गाँधी शांति पुरस्कार मिलने पर PM ने दी गीता प्रेस को बधाई, कॉन्ग्रेसी चिढ़े

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (18 जून) को गीता प्रेस गोरखपुर को गाँधी शांति पुरस्कार-2021 से सम्मानित किए जाने पर बधाई दी है। पीएम मोदी ने गीता प्रेस द्वारा पिछले 100 वर्षों में किए गए उनके कार्यों के लिए उनकी सराहना की।

उन्होंने कहा, “लोगों के बीच सामाजिक और सांस्कृतिक परिवर्तन को आगे बढ़ाने की दिशा में गीता प्रेस ने पिछले 100 वर्षों में सराहनीय काम किया है। मैं गीता प्रेस, गोरखपुर को गाँधी शांति पुरस्कार 2021 से सम्मानित किए जाने पर बधाई देता हूँ।”

बता दें कि गीता प्रेस को साल 2021 के लिए गाँधी शांति पुरस्कार दिया जाना है। उन्हें इस अवार्ड से सम्मानित अहिंसक और अन्य गाँधीवादी तरीकों से सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिवर्तन की दिशा में उत्कृष्ट योगदान के लिए दिया जाएगा।

संस्कृति मंत्रालय ने इस संबंध में बताया कि पीएम मोदी ने गीता प्रेस को उसकी स्थापना के 100 साल पूरे होने पर गाँधी शांति पुरस्कार से सम्मानित किया जाना संस्थान की ओर से सामुदायिक सेवा में किए गए कार्यों की पहचान है।

कॉन्ग्रेसी नेता ने उठाए सवाल

पीएम मोदी द्वारा गीता प्रेस को अवार्ड मिलने पर बधाई दी गई तो वही कॉन्ग्रेस के जयराम रमेश ने ये सम्मान मिलने पर सवाल उठाए। उन्होंने इसे एक उपहास बताते हुए कहा कि गीता प्रेस को ये अवार्ड देना ऐसा है जैसे सावरकर या गोडसे को पुरस्कार दिया जा रहा हो।

रमेश ने ट्वीट किया, “2021 के लिए गाँधी शांति पुरस्कार गोरखपुर में गीता प्रेस को प्रदान किया जा रहा है, जो इस वर्ष अपनी शताब्दी वर्ष मना रहा है। अक्षय मुकुल ने 2015 में इस संस्थान की एक बहुत अच्छी जीवनी लिखी है। इसमें उन्होंने इस संस्थान के महात्मा के साथ उतार-चढ़ाव वाले संबंधों और राजनीतिक, धार्मिक और सामाजिक एजेंडे पर उनके साथ चली लड़ाइयों का खुलासा किया गया है।” कॉन्ग्रेस नेता ने कहा, “यह फैसला वास्तव में एक उपहास है और सावरकर तथा गोडसे को पुरस्कार देने जैसा है।”

गीता प्रेस की शुरुआत और किताबों का प्रकाशन

उल्लेखनीय कि गीता प्रेस, सोसायटीज रजिस्ट्रेशन ऐक्ट 1860 के अंतर्गत स्थापित गोबिन्द भवन कार्यालय की एक इकाई है, जो वर्तमान में पश्चिम बंगाल सोसायटी ऐक्ट 1960 के तहत संचालित होती है। गीता प्रेस की स्थापना श्रीजयदयालजी गोयन्दका ने सन् 1923 में की थी। गीता प्रेस का मुख्य उद्देश्य ही सस्ते से सस्ते साहित्य के माध्यम से धर्म का प्रचार करना है। गीता प्रेस के अनुसार उनके द्वारा पुस्तकों के मूल्य प्रायः लागत से भी कम रखे जाते हैं लेकिन फिर भी कभी भी गीता प्रेस पर कोई आर्थिक संकट नहीं आया।

गीता प्रेस की वेबसाइट में दी गई जानकारी के अनुसार प्रेस के द्वारा मार्च 2019 तक लगभग 68 करोड़ 28 लाख पुस्तकों का प्रकाशन किया जा चुका है। इनमें से सर्वाधिक लगभग 14 करोड़ से अधिक श्रीमद्भगवतगीता और लगभग 10 करोड़ से अधिक श्रीरामचरितमानस की पुस्तकों का प्रकाशन किया गया। पुस्तक प्रकाशन के अलावा संस्था कई आश्रम, सेवा संस्थान, आयुर्वेद चिकित्सालय और प्रवचन स्थल भी चलाती है।यहाँ लोगों के न केवल शारीरिक अपितु मानसिक शांति के लिए भी क्रियाकलाप आयोजित किए जाते हैं। वहीं पीआईबी की रिपोर्ट के अनुसार, गीता प्रेस द्वारा 14 भाषाओं में 41 करोड़ पुस्तकें प्रकाशित की गई हैं। इनमें भगवद् गीता की 16.21 करोड़ प्रतियाँ शामिल हैं।

धर्म प्रचार में गीता प्रेस का योगदान

मालूम हो कि आज भारत भर में यदि सनातन के वेद, पुराणों और ग्रंथों का ज्ञान सुलभता से सभी तक पहुँच सका है तो इसमें गीता प्रेस का योगदान अभूतपूर्व है। स्टेशन स्टॉल, किताब की दुकानों और गीता प्रेस के आधिकारिक थोक एवं फुटकर विक्रेताओं के माध्यम से अनेकों धर्म पुस्तकें आज भारत के घर-घर में प्रचलित हैं। अब तो गीता प्रेस के ऑनलाइन स्टोर से भी ये पुस्तकें खरीदी जा सकती हैं। जब भी कभी पौराणिक सत्यता और प्रमाणिकता की बात आती है तो सभी को एक ही नाम पर भरोसा समझ आता है, गीता प्रेस।

कुछ दिन पहले गीता प्रेस के बंद होने की खबरें सोशल मीडिया पर खूब चली थी। हालाँकि हर बार गीता प्रेस ने ही इन खबरों को निराधार बताया और कहा कि गीता प्रेस पर कोई संकट नहीं है। गीता प्रेस ने कई बार यह स्पष्टीकरण दिया कि धार्मिक पुस्तकों के प्रकाशन का कार्य पूरे सामर्थ्य के साथ चल रहा है। गीता प्रेस ने यह भी बताया कि प्रेस न तो सरकारी और न ही गैर-सरकारी सहायता स्वीकार करती है।

अब यहाँ जर्मनी,जापान और इटली से आई मशीनें हैं जिनकी कीमत 5 से 15 करोड़ तक की है। इनसे रोजाना 1800 के करीब किताबें की 50,000 प्रति रोज इस प्रेस में प्रकाशित होती है। पिछले वर्ष गीता प्रेस ट्रस्ट में ट्रस्टी देवी दयाल अग्रवाल ने इस संबंध में बताया था- आज गीता प्रेस की पहुँच हर घर तक है। तब तक हम 71.77 करोड़ कॉपियाँ बेच चुके हैं। इसमें 1 लाख श्रीमद भगवत गीता, 1139 लाख रामचरित मानस, 261 लाख पुराण उपनिषद, महिलाओं और बच्चों के लिए उपयोगी पुस्तकें 261 लाख, 1740 भक्ति चैत्र और भजन माला और अन्य पुस्तकें 1373 लाख शामिल हैं।”

दिल्ली यूनिवर्सिटी में दिन-दिहाड़े हत्याकांड: कॉलेज के गेट पर छात्र के सीने में मारी चाकू, गर्लफ्रेंड से बदसलूकी का किया था विरोध

दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस में चाकू से हमला कर एक छात्र की हत्या कर दी गई। मृतक की पहचान निखिल चौहान के रूप में हुई। आरोपित कॉलेज के ही छात्र हैं। बताया जा रहा है कि कुछ दिन पहले निखिल का उसकी गर्लफ्रैंड को लेकर आरोपितों से झगड़ा हुआ था। इसी को लेकर इस वारदात को अंजाम दिया गया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मृतक निखिल चौहान दिल्ली यूनिवर्सिटी के आर्यभट्ट कॉलेज का छात्र था। रविवार (18 जून, 2023) दोपहर करीब 12:30 बजे वह कॉलेज पहुँचा था। इस दौरान आरोपित छात्र अपने 3 अन्य दोस्तों के साथ कॉलेज के गेट पर खड़ा था और उसने निखिल को वहीं रोक दिया। आरोपित छात्रों और निखिल के बीच बहस हुई।

इसी बीच एक आरोपित ने उसके सीने पर चाकू से हमला कर दिया। इससे वह बुरी तरह जख्मी हो गया। आनन-फानन में उसे स्थानीय चरक पालिका हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। जहाँ इलाज के दौरान डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

इस मामले में दिल्ली पुलिस का कहना है कि मृतक निखिल चौहान आर्यभट्ट कॉलेज में बीए (ऑनर्स) पॉलिटिकल साइंस फर्स्ट ईयर का छात्र था। करीब 7 दिन पहले एक लड़के ने निखिल की गर्लफ्रेंड से बदसलूकी की थी। इसको लेकर दोनों के बीच बहस हुई थी। इसी मामले को लेकर मृतक और आरोपितों के बीच रविवार (18 जून, 2023) को फिर से बहस हुई। इसी दौरान निखिल की चाकू मारकर हत्या कर दी गई। घटना वाली जगह पर CCTV कैमरे लगे हैं। सीसीटीवी फुटेज की सहायता से आरोपितों की पहचान कर तलाश की जा रही है।

‘मेरे बेटे के हत्यारों मिले सजा’- निखिल के पिता

बेटे की मौत को लेकर निखिल के पिता संजय चौहान ने कहा है कि उन्हें किसी ने फोन कर बताया था कि उनके लड़के पर चाकू से हमला किया गया है। जब वह मौके पर पहुँचे तब तक निखिल की मौत हो चुकी थी। उन्हें पता चला है कि पिछले हफ्ते निखिल से किसी का झगड़ा हुआ था। उसी ने 6-7 लोगों को बुलाया था। निखिल की कोई गर्लफ्रैंड नहीं थी। किसी दोस्त के झगड़े में उसने बीच में बोला था। उन्होंने आगे कहा है कि वह इतना चाहते हैं कि जिसने भी उनके बेटे की हत्या की है, उसे कड़ी से कड़ी सजा मिले।