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नेताजी बोस से जुड़े रहस्यों को खोलने के लिए आ रही है ‘SPY’: आ गई फिल्म की रिलीज डेट, एक्शन और सस्पेंस से भरी थ्रिलर में दिखेंगे ‘कार्तिकेय 2’ वाले हीरो

नेताजी सुभाष चंद्र बोस के रहस्यों पर आधारित अभिनेता निखिल सिद्धार्थ की फिल्म ‘SPY’ का रिलीज डेट आ गया है। ये फिल्म तेलुगू के अलावा हिंदी में भी रिलीज होगी। खुद अभिनेता निखिल सिद्धार्थ ने पोस्टर ट्वीट कर के जानकारी दी है कि उनकी फिल्म ‘SPY’ 29 जून, 2023 (गुरुवार) को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। पोस्टर में नेताजी सुभाष चंद्र बोस के अलावा कई अन्य क्रांतिकारियों को भी देखा जा सकता है। ये एक पैन-इंडिया फिल्म होगी।

निखिल सिद्धार्थ को ‘कार्तिकेय 2’ फिल्म से आंध्र प्रदेश और तेलंगाना से बाहर पहचान मिली थी। हालाँकि, इससे पहले भी उनकी कई हिंदी डब्ड फ़िल्में यूट्यूब पर धमाल मचा चुकी थी। ‘कार्तिकेय 2′ के बाद उनकी एक लव स्टोरी फिल्म ’18 पेजेज’ आई थी, लेकिन उसे पैन-इंडिया स्तर पर रिलीज नहीं किया गया था। वहीं, ‘SPY’, जिसमें वो ‘जय’ नाम का किरदार निभा रहे हैं, उसे पूरे भारत में कई भाषाओं में रिलीज किया जाएगा।

फिल्म ‘SPY’ के ताजा पोस्टर में निखिल सिद्धार्थ को मशीनगन हाथों में थामे हुए देखा जा सकता है। हाल के कुछ दिनों में ‘SPY’ को लेकर कोई अपडेट नहीं आया था, ऐसे में उनके फैंस इसकी प्रतीक्षा कर रहे थे। अब निखिल सिद्धार्थ ने चुप्पी तोड़ते हुए नया धमाका किया है। हिंदी बेल्ट से भी फिल्म की अच्छी कमाई की उम्मीद है। चूँकि एक बड़ी तेलुगू फिल्म ‘आदिपुरुष’ पहले से थिएटरों में चल रही है, ऐसे में ‘SPY’ की रिलीज डेट को लेकर संशय था।

इस फिल्म के निर्देशक गैरी हैं, जबकि ईश्वरा मेनन इसमें मुख्य अभिनेत्री के किरदार में दिखेंगी। नए पोस्टर में एक सिक्का भी दिख रहा है, जिसमें नेताजी सुभाष चंद्र बोस की तस्वीर बनी हुई है। ये फिल्म एक सस्पेंस थ्रिलर होगी। तेलुगू और हिंदी के अलावा इसे मलयालम, तमिल और कन्नड़ में भी रिलीज किया जाएगा। प्रोड्यूसर संगीता अहीर ने बताया कि ये एक एक्शन थ्रिलर होगी। इसका ट्रेलर दिल्ली स्थित इंडिया गेट पर स्थापित नेताजी बोस की प्रतिमा के सामने रिलीज किया गया था।

पैगंबर मुहम्मद का दामाद (बेटी-नातिन दोनों का पति) जिसकी कब्र तक मुस्लिमों ने जला दी, बेटे का सिर काट खलीफा को पेश किया: सुन्नी आज भी करते हैं नफरत

अली – ये एक ऐसा नाम है जिसे इस्लाम में आपने बार-बार सुना होगा। असल में अली उन पहले लोगों में शामिल थे, जिन्होंने पैगंबर मुहम्मद के मार्गदर्शन में इस्लाम अपनाया। इस्लाम के विस्तार से लेकर इसके आंतरिक कलह तक, सब कहीं न कहीं पैगंबर मुहम्मद के निधन और अली के खलीफा बनने से जुड़े हुए हैं। ये सन् 610 की बात है, जब माना जाता है कि अल्लाह का दूत बन कर आए गैब्रिएल (फरिश्ता) ने 40 वर्षीय पैगंबर मुहम्मद को सन्देश दिया कि वो इस्लाम को फैलाएँ।

इस्लाम ने तब के अरब में फैली मूर्तिपूजा और बहुदेववाद को चुनौती दी। इस्लाम में माना जाता है कि मुहम्मद ही इस धरती पर अंतिम पैगंबर थे। अली को पैगंबर मुहम्मद का दाहिना हाथ माना जाता है। कहा जाता है कि जब उन्हें प्रताड़ित गया, तब अली उनके साथ थे। पैगंबर मुहम्मद जब नमाज पढ़ते थे तो अली उनका अनुसरण करते हुए ऐसा ही करते थे। अली के बारे में कहा जाता है कि एक बार उसने पर लेटे हुए ऐसा दिखाया जैसे वो ही पैगंबर मुहम्मद हो, ताकि हमलावर चकमा खा जाएँ।

यानी, पैगंबर मुहम्मद को बचाने के लिए उसने अपनी जान भी दाँव पर लगा दी। पैगंबर मुहम्मद ने खुद कहा था कि उनके लिए अली का वही स्थान है, जो हारून के लिए मूसा का था। इन दोनों का जिक्र कुरान और बाइबिल में मिलता है। शिया मुस्लिम खुद को अली का ही अनुयायी मानते हैं। उनका मानना है कि पैगंबर मुहम्मद का उत्तराधिकारी अली ही था, इस्लाम का पहला खलीफा उसे ही होना चाहिए था। शिया मानते हैं कि अली को न चुन कर उसके साथ अन्याय किया गया। पैगंबर मुहम्मद के निधन के बाद उनके ससुर अबूबकर को पहला खलीफा बनाया गया था।

जिन मुस्लिमों ने पैगंबर मुहम्मद के निधन के बाद जो हो रहा था उसी का अनुसरण करना ठीक समझा, उन्हें सुन्नी मुस्लिम कहा गया। उनका मानना है कि खलीफा न्यायपूर्ण तरीके से चुने गए। कई सूफी सुन्नी मुस्लिम अली का सम्मान तो करते हैं, लेकिन वो राजनीतिक उत्तराधिकारी के मामले में अली का समर्थन नहीं करते। पैगंबर मुहम्मद ने अपने निधन के कुछ सप्ताह पहले अपने अनुयायियों के बीच अली को लेकर कुछ कहा था, जिसका शिया और सुन्नी अलग-अलग मतलब निकालते हैं।

शिया मानते हैं कि पैगंबर मुहम्मद ने अली को अपना उत्तराधिकारी चुना, जबकि सुन्नी मानते हैं कि ये उत्तराधिकार को लेकर नहीं था बल्कि अली को सम्मान दिए जाने को लेकर था। सुन्नी मुस्लिमों का मानना है कि अली उन 3 खलीफाओं से बढ़ कर नहीं है, जिन्होंने सन् 632 से 656 तक इस्लाम का नेतृत्व किया। अली इस दौरान कभी अकेले रहा तो कभी इस्लाम का सन्देश फैलाता रहा। वो इन खलीफाओं का राजनीतिक सलाहकार भी बना।

हालाँकि, अली को जब खलीफा का पद सन् 656 से 661 तक मिला, ये 4 साल बगावत, गृह युद्ध और कबीलाई राजनीति के उभार से निपटने में ही गुजर गए। एक नमाज का नेतृत्व करते समय अली को मार डाला गया। हत्यारे ने खुद को कट्टर मुस्लिम बताया। इसे इस्लाम के इतिहास में एक बड़ा मोड़ माना जाता है। ये घटना कूफ़ा में हुई, जो इराक के नजफ़ प्रांत में फ़ुरात नदी के किनारे बसा हुआ है। शिया मानते हैं कि अली को बदनाम करने की साजिश की गई।

अली की बदनामी का आलम ये था कि एक सदी से भी ज्यादा समय तक इराक के नजफ़ में उसकी कब्र को गुप्त रखा गया, क्योंकि उसके परिवार वालों को लगता था कि उससे घृणा करने वाले किसी भी स्तर तक जा सकते हैं। वो सही थे। जब अली की कब्र को लेकर राज खुल गया, तो कम से कम 2 बार उसे जला कर पूरी तरह तबाह किए जाने की घटना हुई। कब्र पर कई बार हमले हुए। नमाज के बाद अली को गाली देना अनिवार्य कर दिया गया।

ये नियम अली के प्रतिद्वंद्वी मुआविया ने लगवाया, जो अली के निधन के कुछ महीनों बाद खलीफा बना। वो अबू सुफियान का बेटा था। अबू सुफ़यान पहले पैगंबर मुहम्मद का विरोधी हुआ करता था, लेकिन बाद में साथी बन गया। उसकी बेटी रमला की शादी पैगंबर मुहम्मद से हुई थी। उसका बेटा पहला उमय्यद खलीफा बना। उमय्यद खलीफाओं के अंतर्गत अली के अनुयायियों पर अत्याचार किया गया। इसी दौरान कर्बला का नरसंहार भी हुआ।

इसमें अली के बेटे और पैगंबर मुहम्मद के नाती हुसैन को मार डाला गया। इतना ही नहीं, उसके 72 परिवार वालों को भी क्रूरता से खत्म कर दिया गया। ये सब मुआविया के बेटे यजीद के कार्यकाल में हुआ। ऐसे समय में जब इस्लाम जम कर फ़ैल रहा था और मुस्लिमों की संख्या बढ़ रही थी, पैगंबर मुहम्मद के अनुयायियों में भयंकर युद्ध छिड़ा हुआ था। अली के बारे में कहा जाता है कि पैगंबर मुहम्मद का उत्तराधिकारी न चुने के बावजूद उसने अगले तीनों खलीफाओं से विवाद नहीं छेड़ा, क्योंकि वो इस्लाम में एकता देखना चाहता था।

शिया इस्लाम से जन्मे नुसैरी (Alawites) तो यहाँ तक मानते हैं कि अली को अल्लाह का रूप मानते हैं, जो इस्लाम के सिद्धांतों के खिलाफ जाता है। ये भी जानने लायक बात है कि हजरत मुहम्मद का कोई बेटा नहीं था। अली, उनकी बेटी फातिमा का शौहर था। इस्लाम में पैगंबर मुहम्मद के निधन के बाद से ही खून-खराबे शुरू हो गए थे। दूसरे खलीफा उमर को नमाज पढ़ने के दौरान मार डाला गया। सन् 644 में एक मजदूर ने ही इस हत्याकांड को अंजाम दिया।

इसके बाद उस्मान खलीफा बना, लेकिन उसकी भी हत्या ही हुई। खुद अली की हत्या हुई। उसका बेटा हसन भी ज्यादा दिन तक खलीफा नहीं रहा। तभी सीरिया का शासक मुआविया परिस्थिति का फायदा उठा कर खलीफा बन बैठा। इसके बाद मदीना की जगह सीरिया का दमिश्क इस्लाम का मुख्य स्थल बन गया। 700 का पहला दशक बीतते ही भारत में भी इस्लामी आक्रमण शुरू हो गए थे और सिंध में राजा दाहिर को हरा कर मोहम्मद बिन कासिम ने इस्लाम को स्थापित किया।

अली की शादी मुहम्मद की बेटी फातिमा से हुई थी। फातिमा मात्र 5 साल की थी, जब उसकी माँ खदीजा का निधन हो गया था। पैगंबर मुहम्मद और खदीजा की एक और बेटी थी – ज़ैनब। ज़ैनब की बेटी थी उमामा। कहा जाता है कि फातिमा ने अपने अंतिम समय में उमामा से आग्रह किया कि वो उसके पति अली से शादी कर ले। फातिमा की मौत के बाद अली ने उमामा ने शादी की और उनके दो बेटे भी हुए। इस तरह अली ने पैगंबर मुहम्मद की बेटी और नातिन, दोनों से शादी की।

फ़िलहाल दुनिया भर में 85% मुस्लिम सुन्नी हैं, जबकि बाकी के 15% शिया हैं। ईरान, इराक, बहरीन और अजरबैजान और लेबनान – ये वो 5 मुल्क हैं जहाँ शिया बहुसंख्यक हैं। वहीं 40 ऐसे देश हैं, जहाँ सुन्नी मुस्लिम बहुतायत में हैं। पैगंबर मुहम्मद के निधन के वक्त तक अरब के लगभग सभी कबीले उनके साथ आ गए थे और यहीं से वैश्विक इस्लामी मुल्क ‘उम्माह’ का कॉन्सेप्ट आया। खलीफा के पद के लिए मारामारी इसीलिए भी थी कि न सिर्फ शक्ति, बल्कि अकूत धन भी इस्लाम के नाम पर खलीफा के पास आता था।

तभी सन् 681 में कर्बला में यजीद और हुसैन के बीच युद्ध हुआ। वहाँ एक विशाल सुन्नी सेना थी, जबकि अली के साथ केवल उसके 72 अनुयायी थे जो मक्का से कर्बला (इराक में) आए थे। कर्बला के युद्ध में न सिर्फ हुसैन की हत्या की गई, बल्कि उसके शव को क्षत-विक्षत कर दिया गया और उसका सिर काट कर खलीफा को पेश किया गया। पैगंबर मुहम्मद के परिवार वालों के नरसंहार के दिन शिया ‘आशूरा’ के दिन शोक दिवस के रूप में मनाते हैं।

गोलीबारी से फिर दहला अमेरिका: त्योहार मना रही भीड़ पर अंधाधुंध फायरिंग, 29 लोगों को गोली लगने की खबर

अमेरिका एक बार फिर गोलीबारी की घटना से दहल उठा। यहाँ के शिकागो शहर में एक व्यक्ति ने भीड़ पर अंधाधुंध फायरिंग कर दी। इस घटना में 1 व्यक्ति की मौत हो गई। वहीं 19 अन्य घायल बताए जा रहे हैं। घायलों को इलाज के लिए हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। घटना रविवार (18 जून, 2023) की है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, गोलीबारी की यह घटना शिकागो के विलोब्रुक में स्थित एक शॉपिंग मॉल की पार्किंग में हुई। डुपेज काउंटी शेरिफ ऑफिस के उपाध्यक्ष एरिक स्वानसन ने मीडिया से बात करते हुए कहा है कि यहाँ मौजूद कर्मचारियों ने कई गोलियाँ चलने की आवाज सुनी। प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और पीड़ितों की शुरुआत रिपोर्ट से पता चला है कि कम से कम 20 लोगों को गोली लगी थी। इनमें से एक की मौत हो गई।

स्वानसन ने यह भी कहा है कि गोलीबारी क्यों हुई, इसकी जानकारी अब तक सामने नहीं आ पाई है। घायलों में से 2 की हालत गंभीर बनी हुई है। बता दें कि कुछ रिपोर्ट्स में 29 लोगों को गोली लगने की बात भी कही जा रही है।

बताया जा रहा है कि शॉपिंग मॉल की पार्किंग में जुनेहवें त्यौहार मनाने के लिए बड़ी संख्या में लोग जुटे थे। इसी दौरान किसी ने गोलीबारी कर दी। एक प्रत्यक्षदर्शी ने कहा है, “पहले तो हमने सिर्फ गोलियों की आवाज सुनी। लेकिन फिर लगातार गोलियाँ चलती जा रहीं थीं। इसके बाद हमने तेजी से भागना शुरू किया। गोलियों के बीच हम सभी पागलों की तरह भाग रहे थे।”

इस घटना के बाद का एक वीडियो भी सामने आया है। वीडियो में चारों ओर सब कुछ अस्त-व्यस्त देखा जा सकता है।

बता दें कि अमेरिका में ‘गन कल्चर’ के चलते फायरिंग की घटनाएँ सामने आती रहती हैं। इससे पहले इसी साल 28 अप्रैल 2023 को अमेरिका के टेक्सास प्रांत के क्लीवलैंड में हुई फायरिंग में 8 साल के बच्चे समेत 5 लोगों की मौत हो गई थी। इसके अलावा, 7 मई 2023 को टेक्सास में ही गोलीबारी हुई थी। इस घटना में 9 लोगों की मौत हो गई थी। वहीं, 7 लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे।

वहीं, फरवरी में टेनेसी राज्य के मिसिसिपी के ग्रामीण इलाके अर्काबुतला काउंटी में एक शख्स ने अंधाधुंध फायरिंग कर 6 लोगों को मौत के घाट उतार दिया था। आरोपित ने पहले अपनी पूर्व पत्नी की हत्या की इसके बाद अपने सौतेले पिता और उनके घर पर मौजूद एक महिला की हत्या कर दी। इसके बाद उसने चर्च के पास 2 और लोगों की हत्या कर दी थी।

अमेरिका के कैलिफोर्निया में 21-22 जनवरी 2023 की रात मास शूटिंग की घटना में 10 लोगों की मौत हो गई थी। मोंटेरी पार्क इलाके में चीनी नववर्ष को लेकर जश्न मनाया जा रहा था, तभी एक हमलावर ने आंधाधुन गोलियाँ चला दीं। नवंबर 2022 में वर्जीनिया के वालमार्ट के एक स्टोर में हुई फायरिंग में 10 लोगों की मौत हो गई थी।

इसके पहले टेक्सास में 18 साल एक युवक ने AK-47 से अपनी दादी को गोली मारी। फिर स्कूल पहुँचकर अंधाधुंध फायरिंग की। अमेरिका को हिला देने वाली यह घटना 24 मई 2022 को हुई थी। जिसमें 22 लोगों की मौत हो गई थी। अमेरिका में मास शूटिंग जैसी घटनाओं के पिछे यहाँ के गन कल्चर को दोषी ठहराया जाता रहा है। जिसे बदलने के लिए खास प्रयास नहीं किए जा रहे हैं।

आग लग जाएगी, नाक रगड़ कर माँगनी पड़ेगी माफ़ी… सत्यपाल मलिक ने जातिवादी बातें कर के मोदी सरकार को धमकाया, बोले – मृत्युभोज पर मत खर्च करो पैसे

पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने एक बार फिर से मोदी सरकार को धमकाया है। राजस्थान के अलवर जिले में आयोजित जाट समाज के एक कार्यक्रम में पहुँचे सत्यपाल मलिक ने कहा कि अगर मुझे बंद किया गया तो आग लग जाएगी। उन्होंने धमकाया कि आज हमारी सरकार 4 राज्यों में है, उन्होंने कहा कि जो कभी हमें घोड़ी पर भी नहीं बैठने देते थे, वो हमारी RAS लड़की को देख कर ‘खम्मा घणी’ कहते हैं। उन्होंने मृत्युभोज, घरवास और दहेज़ पर पैसे न खर्च करने की अपील भी की।

साथ ही उन्होंने बच्चों की शिक्षा पर खर्च करने की अपील की। उन्होंने जातिवादी राजनीति करते हुए कहा कि राजस्थान में ‘हम’ इतनी संख्या में हैं फिर भी जाट मुख्यमंत्री नहीं बना सके। उन्होंने कहा कि जाट CM की हमारी माँग जारी रहेगी। पहलवान आंदोलन के मुड़े पर भी राजनीति खेलते हुए उन्होंने कहा कि पहलवान जब जीतते हैं तो उन्हें बहन-बेटी कहा जाता है और सम्मानित किया जाता है। उन्होंने मणिपुर हिंसा की बात करते हुए कहा कि देश जल रहा है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिका जा रहे हैं।

सत्यपाल मलिक ने धमकाया कि अगर राजस्थान में पहलवानों ने बैठक की तो केंद्र सरकार को नाक रगड़ कर माफ़ी माँगनी पड़ेगी। सत्यपाल मलिक ने इस दौरान न किसी पार्टी में जाने और न ही कोई चुनाव लड़ने का ऐलान किया, लेकिन कहा कि वो ‘अच्छे उम्मीदवारों’ के समर्थन में प्रचार करेंगे। उन्होंने मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान विधानसभा में भाजपा की हार की भविष्यवाणी करते हुए कहा कि अमेरिका में ऐसा क्या रखा है कि पीएम मोदी वहाँ जा रहे हैं, जबकि मणिपुर पर चुप हैं।

सत्यपाल मलिक ने कहा कि मणिपुर में लोगों को मारा जा रहा है और घरों को जलाया जा रहा है, लेकिन पीएम मोदी एक बार भी वहाँ नहीं गए। उन्होंने कॉन्ग्रेस को अशोक गहलोत और सचिन पायलट का मुद्दा सुलझाने को कहा। वहीं भाजपा को लेकर उन्होंने कहा कि पार्टी वसुंधरा राजे को लेकर नहीं आएगी और उनके बिना कोई काम होगा भी नहीं। पूर्व राज्यपाल ने कहा कि MSP के मुद्दे को सरकार हल नहीं करना चाहती है, क्योंकि अडानी जैसे बड़े उद्योगपतियों को इससे नुकसान होगा।

‘हमें कोई धमकी नहीं मिली’: बृजभूषण सिंह पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने वाली नाबालिग लड़की के पिता ने साक्षी मलिक के दावों को नकारा

कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष बृज भूषण शरण सिंह (Brij Bhushan Sharan Singh) के खिलाफ यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने वाली महिला पहलवान के पिता ने साक्षी मलिक के दावों का खंडन किया है। उन्होंने कहा है कि उनके परिवार को किसी प्रकार की धमकी नहीं दी गई। साक्षी मलिक (Sakshi Malik) ने दावा किया था कि नाबालिग पहलवान के घरवालों को धमकी दी गई। इसलिए उसने अपने बयान बदल लिए।

‘इंडिया टुडे’ ने साक्षी मलिक के दावों को लेकर नाबालिग महिला पहलवान से बात की है। इस बातचीत में नाबालिग पहलवान के पिता ने कहा है कि उनके परिवार को किसी प्रकार की धमकी नहीं मिली। उन्होंने कहा है, “हमें जो करना था हमने किया। हमारे परिवार के खिलाफ धमकी के ऐसे दावों में कोई सच्चाई नहीं है।” यही नहीं, उन्होंने साक्षी मलिक से उनके बयान को स्पष्ट करने का भी आग्रह किया। 

दरअसल, साक्षी मलिक ने अपने पति सत्यव्रत कादियान के साथ शनिवार (18 जून, 2023) को एक वीडियो शेयर किया था। इस वीडियो में उन्होंने दावा किया था कि नाबालिग महिला पहलवान ने दो बार बयान दिए थे। पहले धारा 161 के तहत पुलिस के सामने व फिर धारा 164 के तहत कोर्ट में मजिस्ट्रेट के सामने। लेकिन नाबालिग महिला पहलवान के परिवार को डराया, धमकाया जा रहा था। इसलिए, डर के कारण महिला पहलवान ने अपने बयान बदल दिए।

गौरतलब है कि साक्षी मलिक ने यह दावा ऐसे समय किया है जब नाबालिग महिला पहलवान के यौन उत्पीड़न के आरोपों की जाँच कर रही दिल्ली पुलिस ने बृज भूषण के खिलाफ केस रदद् करने की सिफारिश की थी। पुलिस ने चार्जशीट में कहा था कि बृज भूषण के खिलाफ पॉस्को एक्ट के तहत दर्ज शिकायत को लेकर कोई सबूत नहीं मिला है। इसे बृजभूषण को मिली क्लीन चिट के रूप में देखा जा रहा है। हालाँकि केस रदद् करना है या नहीं इस पर कोर्ट 4 जुलाई को अपना फैसला सुनाएगी। 

महिला पहलवान ने बदले अपने बयान

बता दें कि महिला पहलवान के पिता ने ने दावा किया था कि बृज भूषण शरण सिंह और भारतीय कुश्ती संघ ने एशियाई चैंपियनशिप के सलेक्शन के दौरान पक्षपातपूर्ण फैसले लिए थे। इससे उनकी बेटी गुस्से में आ गई थी। इसके चलते उसने बृज भूषण शरण सिंह के खिलाफ यौन उत्पीड़न का केस दर्ज कराया था।

‘…वो मूर्ख हैं या झूठ बोल रहे हैं’: ‘आदिपुरुष’ की आलोचना पर बोले निर्देशक ओम राउत, कहा – बॉक्स ऑफिस पर अच्छा कर रही हमारी फिल्म

प्रभास और कृति सेनन स्टारर ‘आदिपुरुष’ (Adipurush) विवादों से घिरी हुई है। फिल्म के विवादित डायलॉग और एक्टर्स की वेशभूषा के चलते फिल्म को बायकॉट से लेकर बैन करने तक की माँग हो रही है। इस बीच फिल्म डायरेक्टर ओम राउत (Om Raut) ने कहा है कि रामायण को समझना असंभव है। जो लोग रामायण को समझ लेने की बात करते हैं वो मूर्ख हैं या फिर झूठ बोल रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आदिपुरुष के डायरेक्टर ओम राउत ने कहा है कि लोग फिल्म देखते हुए जय श्री राम के नारे लगा रहे हैं। इसके अलावा सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि फिल्म बढ़िया कमाई कर रही है। नेगेटिव रिव्यू के बाद भी फिल्म की स्क्रीनिंग के दौरान सिनेमाघरों में दर्शक ‘जय श्री राम’ के नारा लगा रहे हैं। दर्शकों की ऐसी प्रतिक्रिया से उन्हें गर्व हो रहा है और खुशी मिल रही है।

ओम राउत ने कहा है, “सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि फिल्म बॉक्स ऑफिस पर किस तरह से चल रही है। मुझे यह कहते हुए बहुत खुशी हो रही है कि हम दुनिया भर के बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। ‘आदिपुरुष’ ने ओपनिंग डे पर दुनियाभर में 140 करोड़ रुपए की कमाई की। हालाँकि, फिल्म का बजट 600 करोड़ रुपए है। इतने बड़े बजट को देखते हुए अभी फिल्म को लंबा सफर तय करना होगा।”

उन्होंने आगे कहा है, “अगर मैं यही बैठकर यह कहूँ कि मैंने रामायण को समझ लिया है तो मुझे लगता है कि यह एक बड़ी गलती होगी। मुझे लगता है कि किसी भी व्यक्ति में रामायण को समझने की क्षमता नहीं है। मैंने जो भी रामायण समझी है और जो कुछ आप भी जानते हैं, वह किसी गिलहरी के योगदान की तरह है। मैंने रामायण के बारे में जो थोड़ा सा समझा है, उसे मैंने फिल्म पर दिखाने की कोशिश की है।”

ओम राउत ने आगे कहा है कि टीवी पर जो रामायण देखते हुए लोग बड़े हुए हैं, उसमें बहुत बड़ी कहानी है। वहीं, आदिपुरुष रामायण के एक भाग पर केंद्रित है। सीधे शब्दों में कहें तो यह ‘युद्ध कांड’ पर बनाई गई फिल्म है। उन्होंने आगे कहा है, “रामायण इतनी बडी है किसी के लिए भी इसे समझना असंभव है। अगर कोई कहता है कि उसने रामायण को समझ लिया है तो वह मूर्ख है या फिर वो झूठ बोल रहा है।”

बदले जाएँगे आदिपुरुष के डायलॉग…

बता दें कि आदिपुरुष के डायलॉग और गीत लिखने वाले मनोज मुंतशिर ने फिल्म को लेकर मचे बवाल के बीच डायलॉग बदलने का ऐलान किया है। उन्होंने कहा है, “मैंने और फ़िल्म के निर्माता-निर्देशक ने निर्णय लिया है, कि वो कुछ संवाद जो आपको आहत कर रहे हैं, हम उन्हें संशोधित करेंगे, और इसी सप्ताह वो फ़िल्म में शामिल किए जाएँगे।”

2 मंदिरों में चोरी, त्रिशूल, कलश, दान पेटी सब गायब… यूपी पुलिस ने नईम को दबोचा, पहले से दर्ज हैं गैंगस्टर एक्ट, आर्म्स एक्ट और लूटपाट के मामले

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले में पुलिस ने एक साथ 2 मंदिरों में चोरी के आरोप में नईम नाम के व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। नईम पर मंदिरों का गेट तोड़ कर कीमती सामान सहित दान पात्र भी चुरा लेने का आरोप है। आरोपित पहले ही 5 केसों में नामजद है और जेल काट चुका है। पुलिस ने मंदिर से चोरी हुए सामान को बरामद भी कर लिया है। घटना गुरुवार (15 जून, 2023) की है।

यह मामला मुरादाबाद के थाना क्षेत्र सिविल लाइन्स का है। 16 जून (शुक्रवार) को सुरेंद्र सिंह नामक व्यक्ति ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई। इस शिकायत में शिकायतकर्ता ने बताया कि उनके गाँव मुस्तकम में ग्राम समाज के 2 मंदिर हैं। इन दोनों मंदिरों में 15 जून की रात एक साथ चोरी हुई थी। चोरी हुए सामान में कलश, नाग, रुपए, त्रिशूल और तिजोरी आदि शामिल थे। सुरेंद्र ने पुलिस से इस मामले में कार्रवाई की उम्मीद जताई थी। पुलिस ने तुरंत IPC की धारा 380 के तहत केस दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी थी।

ऑपइंडिया के पास मामले की शिकायत कॉपी मौजूद है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुलिस ने तत्काल CCTV फुटेज खँगालने शुरू किए और साथ ही मुखबिरों को भी अलर्ट कर दिया गया। आखिरकार पुलिस को मामले में नईम के शामिल होने की टिप मिली। जब पुलिस ने नईम से पूछताछ की तो उसने दोनों मंदिरों में चोरी की बात कबूली। पुलिस ने नईम से दोनों मंदिरों से चोरी किए गया सभी सामान जिसमें तांबे के कलश, तांबे के शेषनाग, मंदिर में लगी हुई पीतल की घंटियां, मंदिर के दान पत्र में से निकले नोट और लगभग 20 हजार रुपए का फुटकर पैसा बरामद कर लिया।

पुलिस प्रेसनोट

नईम के अब्बा का नाम फ़िदा हुसैन है। जब पुलिस ने आरोपित नईम के आपराधिक रिकॉर्ड को खंगाला तो वह गैंगस्टर एक्ट, आर्म्स एक्ट, लूट सहित 5 मामलों में वांछित मिला। DSP देशदीपक सिंह ने बताया कि नईम पहले भी जेल जा चुका है। फ़िलहाल उसे मंदिर से चोरी के नए केस में भी जेल भेज दिया गया है। पुलिस द्वारा महज 24 घंटों में न सिर्फ आरोपित की गिरफ्तारी की गई है बल्कि सामान को भी बरामद किया गया है।

बतातें चलें कि नईम को गिरफ्तार करने वाली पुलिस टीम ने इसी माह 10 जून, 2023 को इसी इलाके से गुलफाम, जावेद, सैफुद्दीन सहित कुल 4 लोगों को चोरी के आरोप में गिरफ्तार किया था। इन आरोपितों के तार उत्तर प्रदेश के कई जिलों सहित दिल्ली तक जुड़े पाए गए थे।

बीमारी ठीक करने के बहाने हकीम ने किया हिन्दू महिला से दुष्कर्म, बंधक बनाकर गैंगरेप करवाया: चंगुल से छूटी पीड़िता ने बताया- हाशिम हिन्दू बनकर देता था दवाई

उत्तर प्रदेश के एटा जिले में यादव समुदाय की एक हिन्दू महिला से गैंगरेप का मामला सामने आया है। आरोपित मुजफ्फरनगर का हासिम है जो हकीम के तौर पर इलाके में झाड़फूँक का काम करता है। हाकिम पर आरोप है कि उसने पीड़िता का इलाज के नाम पर अपहरण किया और अलग-अलग जगहों पर बंधक बना कर साथियों संग गैंगरेप किया। हिन्दू संगठनों ने आरोपित की गिरफ्तारी में देरी होने से नाराजगी जताई है। कोर्ट के आदेश पर 11 जून 2023 को पुलिस ने हाशिम सहित 2 अन्य अज्ञात पर FIR दर्ज की है। 17 जून (शनिवार) को पीड़िता ने मजिस्ट्रेट के आगे बयान दर्ज करवाए।

यह मामला एकता के जलेसर थानाक्षेत्र का है। मूल रूप से मुरादाबाद के कटघर थानाक्षेत्र की रहने वाली महिला एटा के जलेसर में किराए का कमरा ले कर अपने बच्चे को पढ़ाती है। पीड़िता को काफी समय से ल्यूकोरिया नाम की बीमारी थी जिसका इलाज वो काफी समय से करा रही थी लेकिन उस से कोई फायदा नहीं हुआ। इस बीच उसे पास-पड़ोस की महिलाओं ने कहीं हाशिम के बारे में बताया। अक्टूबर 2022 में महिला हकीम हाशिम से मिली जिसने बीमारी को किसी के द्वारा कराया गया काला जादू बता कर जल्द ठीक करने का भरोसा दिया।

शिकायत में आगे बताया गया है कि 8 जनवरी 2023 को हकीम हाशिम पीड़िता से फिर जलेसर में मिला। यहाँ उसने काला जादू ठीक करने के लिए पीड़िता को अपने साथ गाजियाबाद के लोनी चलने को कहा। तब तक हाशिम ने महिला से खुद को हिन्दू बताया था। आखिरकार महिला हाशिम पर विश्वास कर के उसके साथ चली गई। लोनी में महिला को हाशिम के मुस्लिम होने की जानकारी हुई। अपनी पोल खुलने पर हाशिम ने महिला के जेवर और मोबाइल छीन लिया और चुपचाप साथ साथ रहने को कहा।

आरोप है कि लोनी से हाशिम महिला को अपने पैतृक घर मुजफ्फरनगर के खतौली ले गया। यह घर मस्जिद के पास बताया गया है। यहाँ हाशिम ने महिला का रेप किया। पीड़िता का आरोप है कि उसे कमरे में बंद कर के इस्लाम कबूलने का भी दबाव बनाया गया। काफी दिन पीड़िता को कमरे में बंद रखने के बाद 13 फरवरी 2023 को हाशिम महिला को अपने साथ ले कर फिर गाजियाबाद के लोनी आया। यहाँ हाशिम के साथ 2 अन्य संदिग्धों ने पीड़िता से गैंगरेप किया। गैंगरेप के दौरान महिला के प्राइवेट पार्ट में चोट भी आई।

आरोप है कि लोनी में भी पीड़िता को एक कमरे में बंद रखा जाता था। जब आरोपित कहीं बाहर जाते तो कमरे में बाहर से ताला लगा देते थे। शिकायत में बताया गया है कि 13 मार्च को हाशिम गेट में ताला लगाना भूल गया था और इसी वजह से महिला को निकल भागने का मौका मिल गया। महिला का आरोप है कि उसने 13 अप्रैल 2023 को जिले के SP को लेटर भेज कर अपने साथ हुई अनहोनी को बताया था लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई थी। आखिरकार पीड़िता ने आरोपित के खिलाफ कोर्ट से केस दर्ज करवाया।

पुलिस ने महिला की शिकायत पर IPC की धारा 392, 342, 506 और 376 D के तहत FIR दर्ज की है। केस में हाशिम को नामजद करते हुए 2 अज्ञात का भी नाम दिया गया है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। हिन्दू संगठनों ने आरोपितों की जल्द गिरफ्तारी की माँग की है। पुलिस मामले की जाँच कर रही है। ऑपइंडिया से बात करते हुए 41 वर्षीया पीड़िता ने बताया कि हाशिम की उम्र लगभग 55 साल है तो मोहल्ले में दवाएँ बाँटने आता है। महिला का कहना है कि अक्सर उसे नशीली दवाएँ खिला दी जाती थी जिस से वो बेसुध हो जाया करती थी। 17 जून (शनिवार) को महिला के मजिस्ट्रेट के आगे बयान हो गए हैं। पीड़िता ने आरोपित के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की माँग की।

PM मोदी का US में विरोध करने के लिए पूरा टूलकिट हुआ तैयार: ISI और खालिस्तानी समर्थक देंगे साथ, अमेरिका में धरना प्रदर्शन की तैयारी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) की अगले सप्ताह होने वाली अमेरिका यात्रा में बाधा पहुँचाने पाकिस्तान की कुख्यात खुफिया एजेंसी ISI ने सक्रिय हो गई है। ISI अमेरिका में कई खालिस्तानी संगठनों के साथ बैठक की है। इसके तहत पीएम मोदी की यात्रा के दौरान उनका विरोध करने की साजिश रची है।

जानकारी के मुताबिक, ISI ने पीएम मोदी की अमेरिका यात्रा का विरोध करने के लिए अमेरिका में पिछले कई दिनों से सक्रिय है और भारत विरोधी संगठनों के साथ मिलकर काम कर रही है। भारत के खिलाफ साजिश को अंजाम देने के लिए वह कई संगठनों को फंडिंग भी कर रही है।

साभार: आजतक

पीएम मोदी की अमेरिका यात्रा की चर्चा जिस तरह पूरी दुनिया में हो रही है और अमेरिकी नेता उनका स्वागत करने के लिए तैयार हैं, उससे पाकिस्तान चिढ़ा हुआ है। भारत का बढ़ता कद उसे परेशान कर रहा है। इसलिए वह पीएम मोदी का विरोध कराने के लिए एक टूलकिट भी तैयार की है। इसमें भारत का कहाँ और किस तरह से विरोध करना है, इसकी योजना बनाई गई है।

पीएम मोदी और भारत की छवि खराब करने के लिए धरना-प्रदर्शन की रूपरेखा तैयार की गई है। इस दौरान किस तरह के पोस्टर का इस्तेमाल करना है और उस पर क्या-क्या लिखना है, इसकी तैयारियाँ कर ली गई हैं। धरना प्रदर्शन में लोगों को ले जाने की जिम्मेदारी भी तय की गई है। लोगों को प्रदर्शन वाली जगह तक ले जाने के लिए बसों का इंतजाम किया गया है।

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भारत विरोध के लिए एक वेबसाइट भी बनाई गई है। इस वेबसाइट पर अपना पंजीकरण कराने के लिए लोगों से कहा गया है, ताकि भारत के खिलाफ माहौल बनाया जा सके। इतना ही नहीं विरोध के लिए सोशल मीडिया का खूब इस्तेमाल करने के लिए भी कहा गया है। इसके लिए खास तौर पर #ModiNotWelcome नाम से हैशटैग का इस्तेमाल किया जाएगा।

सोशल मीडिया पर भारत में मानवाधिकार हनन जैसे प्रोपेगेंडा के जरिए भारत को बदनाम करने की कोशिश की तैयारी की गई है। ISI ने भारत के खिलाफ जो साजिश तैयार की है, उसके तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिका में जिन रास्तों से गुजरेंगे, उन रास्तों पर विरोध में पोस्टर्स लगाए जाएँगे। भारत विरोधी तत्व प्रदर्शन करेंगे। 

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बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 21 जून से 24 जून तक अमेरिका यात्रा पर जाने वाले हैं। इस दौरान पीएम मोदी व्हाइट हाउस विजिट करेंगे और अमेरिकी कॉन्ग्रेस को संबोधित भी करेंगे। पीएम मोदी पहले ऐसे भारतीय प्रधानमंत्री होंगे, जो अमेरिकी कॉन्ग्रेस को दो बार संबोधित करेंगे।

‘औरंगजेब ने 50 साल हुकूमत की, इसे कोई नहीं भूल सकता’: बी आर आंबेडकर के पोते ने औरंगजेब की कब्र पर टेका माथा, BJP बोली- ये छत्रपति संभाजी का अपमान

महाराष्ट्र की राजनीति में औरंगजेब को लेकर सियासी बवाल मचा हुआ है। सूबे के कई जिलों में हिंसक घटनाएँ भी हुईं हैं। इस बीच महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे के सहयोगी और वंचित बहुजन आघाडी के अध्यक्ष प्रकाश आंबेडकर ने औरंगजेब की कब्र पर सिर झुकाया है। ऐसे में महाराष्ट्र की सियासत में नया विवाद बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बाबा साहेब आंबेडकर के पोते प्रकाश आंबेडकर शनिवार (17 जून, 2023) को छतरपुर संभाजी नगर जिले में आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल होने पहुँचे थे। इस कार्यक्रम के बाद वह अपने सहयोगियों के साथ औरंगजेब की कब्र पर पहुँचे। यहाँ उन्होंने कब्र पर फूल चढ़ाकर सिर झुकाते नजर आए। औरंगजेब की मजार पर पहुँचने को लेकर प्रकाश आंबेडकर ने कहा है, “मैं पर्यटन स्थल के तौर पर यहाँ आया हूँ। औरंगजेब के नाम पर जिस तरह लड़ाइयाँ लड़ने का काम चल रहा है, उनसे मैं कहना चाहता हूँ औरंगजेब ने 50 साल राज किया। यह किसी से मिटाते नहीं बनेगा।”

वहीं, इस मुद्दे पर BJP ने प्रकाश आंबेडकर पर हमला बोला है। बीजेपी प्रवक्ता अजित चव्हाण ने कहा है, “प्रकाश आंबेडकर ने पापी औरंगजेब की कब्र पर जाकर सलाम ठोंका है। यह धर्मवीर छत्रपति संभाजी महाराज के बलिदान का अपमान है। काश उन्होंने बाबासाहेब आंबेडकर की किताब ‘थॉट्स ऑन पाकिस्तान’ पढ़ी होती।” 

महाराष्ट्र के सीएम एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के प्रवक्ता कृष्णा हेगड़े ने कहा है, “प्रकाश आंबेडकर के इस कदम पर कोई आश्चर्य नहीं है। इससे पहले वह ‘औरंगजेबी’ पार्टी AIMIM के सहयोगी रहे हैं। वे ऐसा ही करते रहे तो बचे हुए समर्थक भी उन्हें छोड़कर चले जाएँगें।” ज्ञात हो कि महाराष्ट्र की भाजपा नीत एकनाथ शिंदे सरकार ने औरंगाबाद का नाम बदलकर छत्रपति संभाजी नगर किया है। 

बता दें कि औरंगजेब को लेकर महाराष्ट्र में न केवल सियासी पारा सातवें आसमान पर है। बल्कि राज्य के कई जिले हिंसा की आग में जल रहे हैं। औरंगजेब को लेकर सोशल मीडिया पोस्ट करने पर महाराष्ट्र के अहमदनगर से लेकर कोल्हापुर, बीड और लातूर जिलों में हिंसक घटनाएँ हुईं थीं। इन घटनाओं में कई लोग घायल भी हुए थे। शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करने से लेकर धारा 144 तक लगानी पड़ी थी। ऐसे गर्म माहौल में प्रकाश आंबेडकर का औरंगजेब की कब्र पर जाना वोट बैंक की राजनीति और सियासी हित साधने के लिए की गई हरकत को दर्शाता है।