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लड़की को अगवा किया, चिल्लाती रही पर गोद में उठा जबरन लिए फेरे: Video से खुली राजस्थान में कानून-व्यवस्था की पोल, BJP बोली- यही है कुख्यात कॉन्ग्रेस का कुशासन

राजस्थान के जैसलमेर से सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है। इस वीडियो में एक व्यक्ति किसी लड़की को गोद में उठाकर जबरन आग के फेरे ले रहा है। हालाँकि, लड़की इस हरकत का विरोध कर रही है। पीड़िता के परिजनों ने घटना के विरोध में प्रदर्शन किया है। भाजपा ने इस घटना को कॉन्ग्रेस सरकार में खराब कानून व्यवस्था का उदाहरण बताया है। पुलिस ने मुख्य आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है। घटना गुरुवार (1 जून 2023) की है।

लगभग 7 सेकेण्ड के इस वीडियो को केंद्रीय मंत्री और बाड़मेर से सांसद कैलाश चौधरी ने ‘कुख्यात कॉन्ग्रेस के कुशासन में बेटियाँ हो रहीं शर्मसार’ कैप्शन के साथ शेयर किया है। इस वीडियो में पीछे से एक महिला भी दिखाई दे रही है। जबरन फेरे लेते मुख्य आरोपित के साथ कुछ अन्य लोग भी दिखाई दे रहे हैं। इस हरकत के विरोध में लड़की रो रही है। कैलाश चौधरी ने इन अपराधियों पर सत्ता का संरक्षण होने का आरोप लगाते हुए राजस्थान में महिलाओं को असुरक्षित बताया है।

क्या है पूरा मामला

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह मामला जैसलमेर जिले के मोहनगढ़ पुलिस थाना क्षेत्र के सांखला गाँव का है। यहाँ की एक युवती की शादी पहले पुष्पेंद्र सिंह नाम के युवक से तय हुई थी। दोनों की सगाई भी हो गई थी, लेकिन थोड़े समय बाद लड़की के माता-पिता ने सगाई तोड़कर अपनी बेटी का रिश्ता कहीं और तय कर दिया। इसी माह 12 जून को होने वाली इस शादी की तैयारियाँ भी शुरू हो गई थीं। इस बात से पुष्पेंद्र नाराज था। उसने 1 जून को अपने साथियों सहित लड़की को उसके घर के आगे से फॉर्च्यूनर कार से अपहरण कर लिया।

अपहरण करके लड़की को आरोपित एक सुनसान जगह ले गए। यहाँ पुष्पेंद्र ने आग के आगे लड़की को गोद में लेकर 7 फेरे लिए और इसका वीडियो भी बनाया। पीड़िता के परिजनों का आरोप है कि लड़की की शादी न हो इस वजह से बदनाम करवाने के लिए पुष्पेंद्र और साथियों ने इस हरकत को अंजाम दिया है। पुलिस ने मामले में कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपित पुष्पेंद्र को गिरफ्तार कर लिया है। लड़की को बरामद करके उनके घर वालों को सौंप दिया गया। फ़िलहाल पुलिस वीडियो में दिख रहे अन्य आरोपितों की तलाश कर रही है।

वहीं, इस घटना के विरोध में लड़की के घर वालों ने जैसलमेर कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया है। पीड़ितों का आरोप है कि आरोपित खुलेआम घूम रहे हैं और दोबारा से लड़की के अपहरण की धमकी दे रहे हैं। आरोपितों पर लड़की की शादी कहीं और न होने देने की भी चुनौती देने का आरोप है। पीड़िता के घर वालों ने फरार चल रहे अन्य आरोपितों की जल्द गिरफ्तारी न होने पर आंदोलन की भी चेतावनी दी है।

भारत से चुराकर ले गए विदेश, अब वापस लाकर 14 मूर्तियों को नई संसद में लगाएगी सरकार: जनजातीय नेताओं और स्वतंत्रता संग्राम की दिखेगी झलक

नए संसद भवन को महिलाओं, अनुसूचित जनजाति नेताओं और स्वतंत्रता संग्राम के योगदान को दर्शाने वाली और कलाकृतियों से सजाया जाएगा। इसके अलावा, हाल ही में विदेश से लाई गई भारत की चोरी हुई 14 मूर्तियों को भी सदन परिसर में विशिष्ट जगहों पर रखा जाएगा। दीर्घाओं में से एक में डिजिटल दीवार होगा, जिसमें लोकसभा की स्थापना के बाद से संसद सदस्यों के बारे में विवरण होगा।

बता दें कि संसद के नए भवन का को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 28 मई 2023 को देश को समर्पित किया था। नए संसद भवन में भारत की संंस्कृति एवं धरोहरों की झलक मिलेगी। इसी के तहत संसद की सजावट के दूसरे चरण का हिस्सा ये कलाकृतियाँ बनने जा रही हैं। यह काम जल्दी ही शुरू होने वाला है।

द न्यू इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, संस्कृति मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि दूसरा चरण एक बड़ी एवं महत्वाकांक्षी अवधारणा है। उन्होंने कहा, “हम प्रागैतिहासिक काल से लेकर स्वतंत्रता संग्राम और देश की 75 पथप्रदर्शक महिलाओं को दिखा रहे हैं। एक दीर्घा देश के लिए महान कार्य करने वाले अनुसूचित जनजाति नेताओं को समर्पित होगी।”

अधिकारी ने आगे कहा, “तब हमारे पास भारत की समृद्ध परंपराओं – प्रकृति, ज्ञान और खेल को प्रदर्शित करने वाली एक दीर्घ होगी। एक बार संसद को सजाने का वर्तमान काम पूरा हो जाए, उसके बाद दूसरा चरण शुरू हो जाएगा। इसके लिए कॉन्सेप्ट तैयार हैं और कलाकारों का चयन कर लिया गया है।”

दूसरे चरण में विदेश से लाई गईं 14 मूर्तियों को संसद में विशिष्ट स्थानों पर रखा जाएगा। ये मूर्तियाँ बेहद प्राचीन हैं और तस्करी के जरिए इन्हें विदेशों में बेच दिया गया था। हालाँकि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयास के इन 14 मूर्तियों को विभिन्न देशों से वापस लाया गया है।

अधिकारियों ने बताया, “पुराने परिसर में कलाकृतियों की योजना कभी नहीं बनाई गई थी। खाली जगह में पेंटिंग बनाने के लिए कलाकारों को आमंत्रित किया जाता था। कोई विषयगत एकरूपता नहीं होती थी। सब कुछ जैसे-तैसे होता था। नई इमारत में हर चीज की योजना बनाई गई है। हमने विदेशों से लाई गईं तस्करी की 14 चोरी मूर्तियों को लगाने का फैसला किया है।”

योजना के अनुसार, एक गैलरी में एक डिजिटल दीवार होगी, जिसमें लोकसभा की स्थापना के बाद से संसद सदस्यों के बारे में विवरण दिखाया जाएगा। इसके अलावा, सरकार संसद की पुरानी इमारत के लिए भी योजना बनाई है।

न्यू इंडियन एक्सप्रेस को अधिकारियों ने बताया कि पुरानी इमारत एक ‘कार्यालय ब्लॉक’ के रूप में काम करेगी। यह आम जनता के लिए खुला रहेगा। इसके अलावा, संस्कृति मंत्रालय पर्यटकों को ‘देखने का एक एकीकृत अनुभव’ देते हुए पुरानी इमारत को प्रधानमंत्री संग्रहालय के साथ जोड़ने की योजना बना रहा है।

कोरोना काल में फेस मास्क के कारण मुस्कुराना ही भूल गए जापानी! अब ‘स्माइल कोच’ सिखा रहे कैसे हँसना है, उँगलियों से खींचने पड़ते हैं होठ

जापान में लोग कोरोना महामारी के दौरान फेस मास्क के इतने आदी हो गए हैं कि अब उन्हें मुस्कुराने के लिए सेशन अटेंड करना पड़ रहा है। वो फिर से मुस्कुरा सकें, इसके लिए वो ‘स्माइलिंग सेशन’ अटेंड कर रहे हैं। दरअसल, पूर्वी एशियाई देशों में चेहरा को ढँका जाना आम बात है। ऐसा इसीलिए, क्योंकि वहाँ मौसमी रोगों और बुखारों के अलावा संक्रमण का भी खासा प्रभाव रहा है। कोरोना के बाद लोगों ने और अच्छे से मास्क पहनना शुरू किया।

कोरोना के दौरान जापान की सरकार ने आधिकारिक रूप से फेस मास्क को अनिवार्य कर दिया था। जापान ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में फेस मास्क बनाने वाली कंपनियों की चाँदी हो गई। अब जापान की सरकार ने भी फेस मास्क की अनिवार्यता को खत्म कर दिया है। इसी बीच कुछ लोगों को अचानक ये एहसास होने लगा कि वो मुस्कुराना भूल गए हैं। एक व्यक्ति ने कहा कि कोरोना के दौरान उसने अपने चेहरे के मसल्स का इस्तेमाल ही नहीं किया।

इसीलिए, जापान में अब ‘स्माइल इंस्ट्रक्टर’ की लोगों को ज़रूरत पड़ रही है। ये ‘स्माइल इंस्ट्रक्टर’ लोगों को हँसना सिखाते हैं। ये इंस्ट्रक्टर लोगों को व्यायाम कराते हैं। युवा भी उनकी सहायता ले रहे हैं, ताकि नौकरियों में इंटरव्यू के दौरान वो मुस्कुरा सकें और उनका इम्प्रेशन अच्छा पड़ सके। इन युवाओं को इंस्ट्रक्टर आईने के सामने जाकर बैठ कर अपनी उँगलियों से अपने होठों को दोनों तरफ खीचने के लिए कहते हैं। इस तरह उन्हें मुस्कुराना सिखाया जाता है।

साथ ही लोग अपने चेहरे की मांशपेशियों का भी अच्छे तरीके से इस्तेमाल करना सीख रहे हैं। स्माइल कोच कोइके कवनो ने बताया कि अब जब जापान में पर्यटन भी लौट रहा है, मुस्कुराना लोगों की ज़रूरत भी बन चुकी है। उन्होंने कहा कि जापान एक द्वीपीय देश है और यहाँ की सुरक्षा भी इसका एक कारण है कि लोग हँसते कम हैं। मास्क से इस ट्रेंड को और बढ़ावा मिला। ये भी सामने आया है कि अनिवार्यता हटने के बावजूद 55% जापानी लोग मास्क पहन रहे हैं।

सिर पर कलश, गंगोत्री से बागेश्वर धाम तक की पदयात्रा… क्या 16 जून को शिवरंजनी के मन की बात बताएँगे ‘प्राणनाथ’ पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री

उनका नाम शिवरंजनी तिवारी (Shivranjani Tiwari) है। उम्र 20 साल बताई जा रही। मीडिया रिपोर्टों में उन्हें एमबीबीएस की छात्रा और भजन गायिका बताया जा रहा है। वे बागेश्वर बाबा पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री (Pandit Dhirendra Krishna Shastri) को अपना ‘प्राणनाथ’ बता रही हैं। दावा कर रही हैं कि 16 जून 2023 को बागेश्वर सरकार उनके साथ लाइव होंगे। उनके मन की बात बताएँगे।

क्यों चर्चा में हैं शिवरंजनी तिवारी

शिवरंजनी तिवारी अपनी पदयात्रा को लेकर चर्चा में हैं। पदयात्रा उन्होंने गंगोत्री धाम से शुरू की है। बागेश्वर धाम तक जाने का संकल्प है। सिर पर गंगाजल से भरा कलश रखकर वह यह यात्रा कर रही हैं। मीडिया रिपोर्टों में दावा किया जा रहा है कि ऐसा वह पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री से शादी की मनोकामना लेकर कर रही हैं। एक मई को गंगोत्री धाम से यात्रा शुरू कर वह 6 जून को चित्रकूट पहुँची। शिवरंजनी का कहना है कि अपने गुरुदेव के आदेश पर वह इस यात्रा पर निकली हैं।

कौन हैं शिवरंजनी तिवारी

शिवरंजनी तिवारी मूल रूप से मध्य प्रदेश के सिवनी की रहने वाली हैं। पैतृक गाँव चंदौरीकला (दिघौरी) है। परिवार करीब 25 साल से हरिद्वार में रहता है। जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के परिवार से उनका ताल्लुक बताया जाता है। आध्यात्म के प्रति बचपन से लगाव रहा है। चार साल की उम्र से भजन गा रही हैं। भागवत कथा भी सुनाती हैं। फिलहाल एमबीबीएस कर रही हैं। लेकिन किस कॉलेज से, यह साफ नहीं है। कहा जा रहा है कि 2021 में NEET की परीक्षा पास की थी।

शिवरंजनी के पिता बैजनाथ तिवारी एक निजी कंपनी में महाप्रबंधक थे। अब नौकरी छोड़ बेटी के भजन कार्यक्रमों में सहयोग करते हैं। उनकी पत्नी कैंसर दवाओं की विशेषज्ञ हैं। फिलहाल अमेरिका के सेंट फ्रांसिस में एक निजी कंपनी कार्यरत हैं।

16 जून को क्या करेंगी शिवरंजनी तिवारी?

शिवरंजनी तिवारी के 16 जून 2023 को बागेश्वर धाम पहुँचने की उम्मीद है। पिता, भाई सहित कई और लोग भी यात्रा में उनके साथ हैं। आज तक से बातचीत में उन्होंने पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री को ‘प्राणनाथ’ कहकर संबोधित किया। शिवरंजनी ने कहा, “जब से गंगा कलश यात्रा गंगोत्री धाम से शुरू की तरह-तरह की बातें हो रही है। लोग कह रहे कि मनचाहा वर पाने के लिए मैंने यह यात्रा शुरू की है। कई लोग कह रहे हैं कि मैं अपने हाथों में फूलों की माला लेकर जा रही हूँ, जिसे धीरेंद्र शास्त्री के गले में डालने वाली हूँ। लोगों को बताना चाहूँगी कि महाराज श्री अंतर्यामी हैं। प्राणनाथ हैं। भगवान हैं। वे मन की बात जान लेते हैं। मैं सभी से कहना चाहती हूँ कि 16 जून तक का इंतजार कीजिए।”

शिवरंजनी ने अपने मन की बात प्रकट करने से इनकार करते हुए बताया है कि वह 2021 से ही बागेश्वर सरकार का हर वीडियो देखती हैं। इससे उनके मन में भक्ति जगी और उन्होंने बागेश्वर धाम तक कलश यात्रा का संकल्प लिया। इस यात्रा से बागेश्वर बाबा के साथ उनकी शादी को लेकर जो अटकलें शुरू हुई हैं अब 16 जून को उससे पर्दा उठेगा।

‘प्रस्ताव पसंद आया तो खाप से सलाह लेकर लेंगे फैसला’:अनुराग ठाकुर के साथ होगी पहलवानों की बैठक, उधर टिकैत ने रद्द किया धरना

केंद्र सरकार ने साफ़ कर दिया है कि वो पहलवानों के साथ बातचीत के लिए पूरी तरह तैयार है। केंद्रीय खेल मंत्री अनुराग ठाकुर ने ट्वीट कर के कहा कि पहलवानों के मुद्दे पर उनसे बातचीत करने के लिए सरकार तैयार है। उन्होंने जानकारी दी कि बातचीत के लिए प्रदर्शनकारी पहलवानों को आमंत्रित किया गया है। ये पहलवान WFI के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। पहलवान अब भी कह रहे हैं कि उन्हें बृजभूषण शरण सिंह की गिरफ़्तारी से कम कुछ भी मंजूर नहीं है।

पहलवान साक्षी मलिक ने कहा, “हमें देखना है कि सरकार क्या प्रस्ताव देती हैहम देखेंगे कि सरकार हमें क्या प्रस्ताव देती है। हमारी प्रमुख माँग है कि बृजभूषण शरण सिंह को गिरफ्तार किया जाए। अगर हमें सरकार का प्रस्ताव पसंद आता है तो हम इसके बाद अपने खाप के नेताओं से सलाह लेंगे। ऐसा नहीं है कि हम सरकार के किसी भी प्रस्ताव को नहीं मान लेंगे। हमारा आंदोलन अभी खत्म नहीं होगा।” बताया गया था कि इससे पहले शनिवार (3 जून, 2023) को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से पहलवानों ने मुलाकात की थी।

मीडिया सूत्रों का कहना है कि बैठक में पहलवान बृजभूषण की गिरफ़्तारी के साथ-साथ WFI के निष्पक्ष चुनाव की भी माँग करेंगे। केंद्र सरकार पहलवानों के साथ विवाद को लंबा खींचने के पक्ष में नहीं है। उधर जंतर-मंतर पर प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन को भारतीय किसान यूनियन और खाप पचायतों ने रद्द कर दिया है। किसान नेता राकेश टिकैत का कहना है कि बातचीत के नतीजों के बाद आगे का निर्णय लिया जाएगा और विरोध प्रदर्शन का प्लान क्या हो।

बताया ये भी जा रहा है कि किसान नेता इस बात से नाराज हैं कि अमित शाह से मुलाकात को लेकर पहलवानों द्वारा उन्हें अँधेरे में रखा गया। राकेश टिकैत 9 जून को दल-बल के साथ जंतर-मंतर पर प्रदर्शन शुरू करने के मूड में थे। हालाँकि, उन्होंने कहा है कि अब भी वो पहलवानों के समर्थन में हैं और आगे भी रहेंगे। उन्होंने ये भी कहा कि पहलवानों की बैठक को लेकर उन्हें कोई जानकारी भी नहीं है। फ़िलहाल उनका दिल्ली का धरना रद्द कर दिया गया है।

हर थिएटर में हनुमान जी के लिए खाली छोड़ी जाएगी एक सीट: ‘आदिपुरुष’ फिल्म के निर्माताओं का फैसला, प्रभास बोले – तिरुपति में ही करूँगा शादी

प्रभास, कृति सेनन और सैफ अली खान स्टारर फिल्म ‘आदिपुरुष’ धूलरवार (16 जून, 2023) को सिनेमाघरों में रिलीज के लिए तैयार है। रामायण की कहानी पर आधारित इस फिल्म में जहाँ प्रभास भगवान श्रीराम का किरदार निभा रहे हैं, वहीं माँ सीता के किरदार में कृति सेनन और रावण के किरदार में सैफ अली खान दिखेंगे। अब ‘आदिपुरुष’ के निर्माताओं ने हनुमान जी के लिए हर थिएटर में एक सीट खाली छोड़ने का फैसला लिया है।

‘आदिपुरुष’ के प्रोमोशंस का अंतिम चरण शुरू हो चुका है। हर थिएटर में ‘आदिपुरुष’ की स्क्रीनिंग के दौरान हनुमान जी के लिए एक सीट खाली छोड़ी जाएगी। लोगों की श्रद्धा को देखते हुए ये फैसला लिया गया है। इन सीटों को इस मान्यता के साथ छोड़ा जाएगा कि भगवान हनुमान के अनन्य भक्त हनुमान जी आकर फिल्म को देखेंगे। बता दें कि रामकथाओं के दौरान ये माना जाता है कि हनुमान जी आकर रामायण की कथा सुनते हैं।

‘आदिपुरुष’ को तेलुगु, तमिल, हिंदी, मलयालम और कन्नड़ में रिलीज किया जाएगा। उधर फिल्म के ट्रेलर लॉन्च के दौरान प्रभास ने कहा कि वो तिरुपति में ही शादी करेंगे। बता दें कि कई अभिनेत्रियों के साथ अब तक प्रभास का नाम जोड़ा जा चुका है। वो बैचलर हैं, ऐसे में उनकी शादी को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म रहता है। इसी तरह ‘आदिपुरुष’ के दूसरे ट्रेलर के लॉन्च के दौरान भी प्रभास से उनकी शादी को लेकर सवाल पूछा गया।

प्रभास ने कहा, “मैं तिरुपति में विवाह करूँगा।” इस दौरान उन्होंने मजाकिया अंदाज़ में ये भी कहा कि वो अब हर साल 2 फ़िल्में करेंगे और ज़रूरत पड़ी तो तीसरी भी करेंगे। उन्होंने फिल्म की टीम के साथ तिरुमला तिरुपति मंदिर जाकर भगवान वेंकटेश्वर का आशीर्वाद भी लिया। बता दें कि ‘आदिपुरुष’ के दूसरे ट्रेलर में इसके एक्शन और VFX वाले दृश्यों को दिखाया गया है। हालाँकि, सैफ अली खान को दोनों ट्रेलरों में कम ही दिखाया गया है।

बजरंग दल कार्यकर्ता के गर्भवती गाय से उस्मान खान ने की रेप की कोशिश, गुप्तांग में मारा ब्लेड: CCTV में कैद हुई घटना

महाराष्ट्र के पुणे में एक गर्भवती गाय से रेप की कोशिश का मामला सामने आया है। आरोपित की पहचान उस्मान खान के तौर पर हुई है। इस संबंध में बजरंग दल कार्यकर्ता नीलेश विजय चास्कर ने पुणे के भोसरी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई है। नंदिनी नाम की यह गाय उनकी ही है।

घटना 4 जून 2023 की रात की है। गाय से रेप की कोशिश अपुलकी नाम के एक होटल के पीछे की गई। चास्कर ने शिकायत में बताया है कि रात के करीब 2 बजे उन्हें फोन आया कि उनकी गाय चिल्ला रही है। वे अपने दोस्त अक्षय शिंदे के साथ गाय को देखने होटल पहुँचे तो उसे दर्द से कराहते हुए पाया। उन्होंने सीसीटीवी कैमरों को चेक किया तो एक व्यक्ति मौके से भागते हुए दिखाई पड़ा। यह व्यक्ति जाना-पहचाना था। तलाश करने पर वह दीवार के पीछे एक खाली प्लॉट में सोता हुआ मिला।

ऑपइंडिया को चस्कर ने बताया कि रेप और यौन शोषण की कोशिश के बाद उस्मान ने कपड़े बदल लिए थे। लेकिन उसके शरीर से गाय के गोबर की गंध आ रही थी। वह सोया हुआ था। चस्कर ने अपने दोस्त के साथ उसके बैग की जाँच की तो गाय के गोबर और खून से लथपथ कपड़े और जूते मिले। उन्होंने उस्मान को पकड़कर घटना के बारे में पूछताछ की। पुलिस को सूचना दी और नंदिनी की जाँच के लिए डॉक्टर को बुलाया।

चास्कर ने शिकायत में बताया है कि गर्भवती नंदिनी जिस शेड में थी, रात के समय उस्मान उसमें घुस गया। उसने नंदिनी के गले को रस्सी से बाँध उसे लटका दिया। उसके साथ दुष्कर्म का प्रयास किया। फिर उसने एक ब्लेड लेकर नंदिनी के गुप्तांग में हाथ डाला और उसके अंगों को बाहर निकालने की कोशिश की। इस दौरान नंदिनी गंभीर रूप से घायल हो गई और उसका काफी खून बह गया। हमले के बाद उस्मान वहाँ से चला गया। कपड़े बदले और एक प्लॉट में छिप गया, जहाँ से चास्कर और उनके दोस्तों ने उसे पकड़ा।

उस्मान को पुलिस को सौंपने के अगले दिन यानी 5 जून को इस संबंध में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई। उस्मान ने अपराध स्वीकार करते हुए बताया है कि वह उस समय शराब के नशे में था। चस्कर ने कहा, “मुझे नहीं पता उसने ऐसा क्यों किया। किसी ने उसे उकसाया, या उसकी मुझसे दुश्मनी थी, मुझे नहीं पता।” नंदिनी की तबीयत के बारे में उन्होंने बताया, “वह खड़ी नहीं हो पा रही है। उसने खाना बंद कर दिया है। मैंने उसे कुछ रोटियाँ खिलाई, लेकिन वह खाना चबा नहीं पाई।” नंदिनी की तबीयत फिलहाल खराब है और उसके चोटों का इलाज चल रहा है।

‘स्कूल में पढ़वाते थे नमाज और दुआ, हिंदी-अंग्रेजी नहीं उर्दू-अरबी पर जोर’: हिजाब वाले स्कूल में जिन 3 शिक्षिकाओं ने किया धर्मांतरण, वो बोलीं – हमारी मर्जी, हमारा अधिकार

मध्य प्रदेश के दमोह के एक स्कूल में हिन्दू छात्राओं को जबरन हिजाब पहना कर उनकी तस्वीरें बोर्ड पर डालने का मामला सामने आया था। इसके बाद उक्त ‘गंगा जमुना स्कूल’ की प्रधानाध्यापिका समेत 3 शिक्षिकाओं के इस्लाम अपना लेने की बात भी जाँच में पता चली। कायस्थ, यादव और जैन समाज से आने वाली तीनों शिक्षिकाएँ अब अपने नाम में ‘खान’ लगाती हैं और मुस्लिम बन गई हैं। भाजपा ने इस प्रकरण में टेरर फंडिंग का भी आरोप लगाया था।

अब ये तीनों शिक्षिकाएँ अपने दस्तावेजों को लेकर डीएम के दफ्तर में पहुँचीं और अपने खिलाफ लग रहे आरोपों पर सफाई दी। तबस्सुम बानो (पहले प्राची जैन), अनीता खान (पहले अनीता यदुवंशी) और अफ़सा शेख (पहले दीप्ती श्रीवास्तव) अपने-अपने पति के साथ कलक्टर के दफ्तर पहुँची थीं। उन्होंने संविधान का हवाला देते हुए दावा किया कि उन्हें किसी भी मजहब को मानने का अधिकार है। साथ ही कहा कि उनके बारे में बोलने का हक़ किसी को नहीं।

उधर स्कूल में पढ़ने वाले छात्रों ने इसकी कट्टरवादी सोच का खुलासा किया है। ‘दैनिक भास्कर’ की खबर के अनुसार, बच्चों ने कहा कि नमाज न पढ़ने पर छात्रों को छड़ी से पीटा जाता था। किसी बच्चे की मौत होने की सूरत में बच्चों से दुआ पढ़ने को कहा जाता था कि वो जहन्नुम में न जाएँ। राज्य बाल आयोग के ओंकार सिंह अपनी टीम के साथ यहाँ जाँच के लिए पहुँचे थे। शिक्षिका अनीता खान ने दावा किया कि स्कुल संचालक इदरीस खान का उनके धर्म-परिवर्तन में कोई रोल नहीं है।

उनकी शादी 2013 में हुई थी और 2021 से उन्होंने पढ़ाना शुरू किया। उन्होंने खुद को मानसिक तनाव में भी बताया। उन्होंने धर्मांतरण को अपना निजी मामला बताते हुए कहा कि इसे स्कूल से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। वहीं अफ़सा शेख ने धर्मांतरण के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि उनका निकाह 2000 में हुआ था और उनकी बेटी 21 साल की है। उन्होंने भी कहा कि वो किस मजहब को मानें वो उनकी मर्जी है।

वहीं पहले प्राची जैन रहीं तबस्सुम बानो ने कहा कि उनका निकाह जनवरी 2004 में हुआ था। उन्होंने अपनी मर्जी से निकाह की बात करते हुए कहा कि इसके बाद उनका नाम बदला गया और उनके ऊपर किसी का दबाव नहीं था। उन्होंने दावा किया कि स्कूल 2012 में खुला। अनीता के पति का नाम तौसीफ है। पॉलिटेक्निक में पढ़ाई के दौरान दोनों मिले। वहीं तबस्सुम की मुलाकात साबिर से मिशन स्कूल में हुई। स्कूली छात्रों ने बताया कि उन्हें हनुमान चालीसा नहीं आती, लेकिन कुरान की आयतें याद हैं।

एक छात्रा ने ये भी बताया कि हर शुक्रवार (जुमा) को स्कूल में नमाज पढ़ना अनिवार्य था। हिंदी-अंग्रेजी से ज्यादा उर्दू-अरबी सिखाया जाता था। प्रार्थना में दुआ पढ़ने को कहा जाता था। घर में डाँट सुनने पर कहा जाता था कि छिप कर ये सब पढ़ो। उधर लोगों ने अपने आक्रोश का प्रदर्शन करते हुए जिले के DEO (जिला शिक्षा पदाधिकारी) पर स्याही फेंक दी। थाने में इसकी शिकायत भी हुई है। हिन्दू कार्यकर्ताओं ने कहा कि सनातन का अपमान करने वालों को जवाब दिया गया है।

‘भारत की 98% रेल पटरी अंग्रेजों के जमाने की’: रेलवे ने TOI की खबर को बताया ‘आधारहीन’, सामने रखे स्वतंत्र भारत में रनिंग ट्रैक के आँकड़े

ओडिशा के बालासोर में हुए ट्रेन हादसे (Odisha’s Balasore train accident) के बाद से भारतीय रेलवे के इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर मीडिया में कई तरह की खबरें आ रही है। इनमें से एक खबर में टाइम्स ऑफ इंडिया (TOI) ने दावा किया कि भारत में जो रेल पटरी हैं, उनमें से 98 प्रतिशत देश को स्वतंत्रता मिलने से पहले 1870 से 1930 के बीच बिछाई गई हैं। 98 प्रतिशत रेल पटरियों के अंग्रेजों के जमाने के होने के इस दावे को भारतीय रेलवे (Indian Railway) ने खारिज कर दिया है।

ट्विटर पर टीओआई के रिपोर्ट को साझा करते हुए भारतीय रेलवे के प्रवक्ता ने कहा है कि हम इस दावे को खारिज करते हैं। यह निराधार और तथ्यों से परे हैं। उन्होंने लिखा है, “इस संवेदनशील परिस्थिति में एक प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान से इस तरह की गैर जिम्मेदार पत्रकारिता की उम्मीद नहीं की जाती है।” प्रवक्ता ने बताया है कि स्वतंत्र भारत में 1950-51 में रनिंग ट्रैक की लंबाई 59315 किलोमीटर थी। 2022-23 में रनिंग ट्रैक की लंबाई 1,07,832 किलोमीटर है।

इन आँकड़ों से जाहिर है कि स्वतंत्र भारत में रेलवे ट्रैक दोगुना हुए हैं। वैसे 2 जून को हुए बालासोर हादसे में 275 लोगों की मौत के बाद से मोदी सरकार को बदनाम करने के लिए गलत आँकड़ों के साथ तथ्य रखने का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले कॉन्ग्रेस ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से दावा किया था कि इस दुर्घटना के बाद से हजारों लोगों ने अपना टिकट कैंसिल करवाया है।

कॉन्ग्रेस नेता भक्त चरण दास ने 4 जून को प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के वीडियो कॉन्ग्रेस ने अपने ऑफिशियल ट्विटर अकाउंट से भी शेयर किया था। वीडियो में भक्त चरणदास ने कहा था, “बीते दिनों में ऐसी रेल दुर्घटना कभी नहीं हुई, बड़ी तादाद में लोगों की मौत हुई है। सरकार आधिकारिक तौर पर 275 लोगों की मौत की बात कह रही है लेकिन अभी भी सैंकड़ों लोग लापता हैं। हजार से ज्यादा लोग जख्मी हुए हैं। इस दुर्घटना के बाद हजारों लोगों ने अपने ट्रेन टिकट कैंसिल किए हैं। उन्हें लगता है कि ट्रेन में सफर सुरक्षित नहीं है।”

कॉन्ग्रेस के इस दावे को भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम (IRCTC) ने गलत करार दिया था। बताया था कि कैंसिलेशन में बढ़ोतरी नहीं, बल्कि कमी हुई है। आईआरसीटीसी ने कॉन्ग्रेस के वीडियो को रीट्वीट करते हुए लिखा था, “तथ्यात्मक रूप से यह गलत है। कैंसिलेशन में बढ़ोतरी नहीं हुई है। इसके उलट कैंसिलेशन घटा है। 1 जून को 7.7 लाख टिकट कैंसिल हुए थे। वहीं, 3 जून को 7.5 लाख टिकट ही कैंसिल हुए।”

‘बंद हो गई ईरान की 75000 में से 50000 मस्जिदें’: इस्लामी मुल्क के बड़े मौलाना ने जताई चिंता, कहा – लोगों में कम हो रही मजहब के प्रति रुचि

हाल ही में ईरान में हुए महिलाओं के आंदोलन ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा। एक मौलाना ने तो यहाँ तक दावा किया है कि मुल्क की 75,000 में से 50,0000 मस्जिदें बंद हो चुकी हैं। ईरान में हाल ही में हिजाब और बुर्का के खिलाफ लाखों महिलाएँ सड़क पर उतरीं। अब मौलाना मोहम्मद अबोलघासीम दौलाबी ने मुल्क में मस्जिदों के बंद होने पर चिंता जाहिर की है। ये सब तब हो रहा है, जब ईरान एक इस्लामी मुल्क है।

जिस मौलाना ने ये जानकारी दी है, वो ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी की सरकार और मुल्क के मौलानाओं के बीच सेतु का काम करते हैं। उन्होंने गुरुवार (1 जून, 2023) को कहा कि नमाजियों की संख्या भी कम होती जा रही है। उन्होंने कहा कि इस मुल्क का निर्माण इस्लाम के इर्दगिर्द हुआ है, ऐसे में इसके लिए नमाज पढ़ने वालों और मस्जिदों की सदस्यता लेने वालों की संख्या कम होता बहुत बड़ी चिंता का विषय होना चाहिए।

दौलाबी विशेषज्ञों की एक समिति के भी सदस्य हैं। यही वो समिति है, जो ईरान के सुप्रीम लीडर का चुनाव करती है। उन्होंने कहा कि ईरान के समाज में मजहब के प्रति कम होती रुचि के कारण मस्जिद बंद हो रहे हैं। उन्होंने मजहबी शिक्षाओं को लेकर फैले मिथक के साथ-साथ लोगों को समृद्धि से वंचित कर के मजहब के नाम पर गरीब बनाए जाने को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि मजहब के नाम पर लोगों को अपमानित भी किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में लोगों के मन में ये भावना बैठ गई है कि ईरान की सत्ता क्रूर है और इसकी तानाशाही का आधार इस्लाम ही है। उन्होंने सितंबर 2022 के बाद मुल्क भर में हुए विरोध प्रदर्शन को भी इसका ही परिणाम बताया। ईरान की लगभग 60% मस्जिदें बंद हो चुकी हैं क्योंकि नमाजी आ ही नहीं रहे। उन्होंने कहा कि जब किसी मजहब के परिणामों की चर्चा होती है, तो लोग उसी आधार पर उसे छोड़ने या उसमें जाने का निर्णय लेते हैं।