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PM किसान निधि के साथ-साथ अब ‘नमो किसान निधि’: महाराष्ट्र के किसानों को हर साल ₹6000 एक्स्ट्रा सीधे बैंक खाते में, CM एकनाथ शिंदे का ऐलान

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने राज्य के किसानों के लिए बड़ा ऐलान किया है। ‘नमो शेतकारी महा सम्मान निधि योजना’ के तहत किसानों को हर साल 6000 रुपए दिए जाएँगे। ये पहले से चल रही ‘पीएम किसान सम्मान निधि योजना’ के अतिरिक्त होगा। इस तरह महाराष्ट्र के किसानों को अब केंद्र और राज्य सरकार से सालाना 12,000 रुपए मिलेंगे। ताज़ा योजना की राशि भी 3 किस्तों में किसानों के बैंक खाते में सीधे भेजी जाएगी।

महाराष्ट्र कैबिनेट की बैठक में इस फैसले पर मुहर लगाई गई। बता दें कि महाराष्ट्र में फ़िलहाल ‘बाळासाहेबांची शिवसेना’ और भाजपा की गठबंधन सरकार चल रही है। भाजपा नेता देवेंद्र फडणवीस राज्य के उप-मुख्यमंत्री होने के साथ-साथ वित्त मंत्री भी हैं। ताज़ा योजना का लाभ उठाने के लिए किसानों के पास मूल निवास प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, बैंक खाता का विवरण, आय प्रमण पत्र, जमीनी दस्तावेज, मोबाइल नंबर होना आवश्यक है।

‘नमो शेतकारी महा सम्मान निधि योजना’ का लाभ उन्हीं किसानों को मिलेगा, जो महाराष्ट्र के स्थायी निवासी हैं। किसानों के पास खुद की जमीन भी होनी चाहिए, जिस पर वो खेती करते हों। जो महाराष्ट्र के कृषि विभाग में रजिस्टर्ड नहीं हैं, उन्हें रजिस्ट्रेशन कराना होगा। जो बैंक खाता आधार कार्ड से जुड़ा होगा, पैसा उसमें ही जाएगा। महाराष्ट्र में कपास का उत्पादन करने वाले इलाकों में निवेश को बढ़ावा देने के लिए नई टेक्सटाइल नीति को भी मंजूरी दे दी गई है।

इसके जरिए 25,000 करोड़ रुपए का निवेसन आकर्षित करने की योजना बनाई गई है। नए श्रम नियम को भी मंजूरी दी गई है, जिसके तहत मजदूरों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्यों को लेकर उनके हित में नियम बनाए गए हैं। सिल्लोड तालुका में मक्का अनुसंधान केंद्र स्थापित करने का निर्णय भी लिया गया है। महिला केंद्रित पर्यटन नीति बनाई गई है। नई सूचना प्रौद्योगिकी समर्थन सेवा नीति भी लागू हो गई है, जिसके तहत 95,000 करोड़ का निवेश लाया जाएगा।

शुरू से एक्शन लेती रही सरकार, फिर भी राजनीति की गंगा में बहे पहलवान: बृजभूषण बनाम हुड्डा की लड़ाई में मेडल भी दाँव पर लगाया, खेल संघों में दखल नहीं दे सकता मंत्रालय

भारत में पहलवानों के एक वर्ग द्वारा चलाया जा रहा कथित आंदोलन के लिए ज़्यादा से ज़्यादा सुर्खियाँ बटोरने की कोशिश तेज़ हो गई हैं। पहले तो नए संसद भवन के उद्घाटन के दिन उस तरफ मार्च करने की कोशिश की गई, विफल होने पर गंगा दशहरा के दिन हरिद्वार में मेडल्स बहाने की कोशिश की। आंदोलन ये कह कर किया जा रहा है कि ‘भारतीय कुश्ती संघ (WFI)’ के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह ने महिला पहलवानों का यौन शोषण किया।

कोई व्यक्ति अगर एक भी महिला का यौन शोषण करता है तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए और उसे सज़ा दिलाने के लिए पुलिस से लेकर अदालत तक को देर नहीं करनी चाहिए। पुलिस की जाँच में अगर भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह दोषी पाए जाते हैं तो वो कार्रवाई से नहीं बचेंगे। लेकिन, यौन शोषण के आरोप को राजनीति का मुद्दा बनाना भी ठीक नहीं है। ऐसे गंभीर मसले को जंतर-मंतर से नहीं, बल्कि कार्यपालिका और न्यायपालिका द्वारा देखा जाता है।

इस मुद्दे को राजनीति का मसला बना कर केंद्र सरकार के खिलाफ बयान देना ये बताता है कि पहलवानों के एक समूह को देश की व्यवस्था में भरोसा ही नहीं है। उन्हें तय कानूनी प्रक्रिया में कोई विश्वास ही नहीं है। खिलाड़ियों ने इस आंदोलन को एकदम राजनीतिक रंग दे दिया है, ऊपर से ‘किसान आंदोलन’ वाले राकेश टिकैत ने भी इनके पक्ष में धरना दे दिया। प्रियंका गाँधी से लेकर भूपेंद्र सिंह हुड्डा और पप्पू यादव तक को पहलवानों के मंच पर जाकर राजनीतिक बयानबाजी करने का मौका दिया गया।

पहलवानों का आंदोलन: केंद्रीय खेल मंत्रालय ने लिया हरसंभव एक्शन

आइए, आगे बढ़ने से पहले बात कर लेते हैं कि ये सब कब से शुरू हुआ। 18 जनवरी, 2023 को पहलवान पहली बार जंतर-मंतर पर जुटे। विनेश फोगाट ने तो WFI अधिकारियों द्वारा हत्या की धमकी मिलने तक की बात कर डाली। उन्होंने तो WFI को भंग करने की माँग करते हुए ये तक कह दिया कि सारे राष्ट्रीय कोच मिले हुए हैं। ऐसा नहीं है कि केंद्र सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी रही, बल्कि हर आरोप को गंभीरता से लिया गया।

अनुराग ठाकुर के केंद्रीय खेल मंत्रालय ने WFI से 72 घंटे में जवाब तलब किया। अगले ही दिन पहलवानों की केंद्रीय खेल मंत्री अनुराग ठाकुर के साथ उनके आवास पर 5 घंटे तक बैठक हुई। बैठक के बाद बजरंग पूनिया ने कहा भी कि सरकार ने हमारे बातें सुनी है। उसी दिन पहलवान से नेता बनीं बबीता फोगाट ने भी प्रदर्शनकारियों से मुलाकात कर सरकार तक उनकी बात पहुँचाने का आश्वासन दिया। 20 जनवरी को ‘भारतीय ओलंपिक संघ (IOA)’ की अध्यक्ष PT उषा को पत्र लिखा गया।

21 जनवरी को पहलवानों की अनुराग ठाकुर के साथ फिर बैठक हुई और आंदोलन को खत्म करने का निर्णय लिया गया। इसके बाद सरकार ने न सिर्फ WFI को सारी गतिविधियों पर रोक लगाने का आदेश जारी कर दिया, बल्कि संस्था के अस्सिस्टेंट सेक्रेटरी विनोद तोमर को भी पद से हटा दिया। WFI ने मंत्रालय को अपना जवाब भी सौंपा। 23 जनवरी को कमिटी गठित कर दी गई और बॉक्सर मैरी कॉम को इसका अध्यक्ष बनाया गया।

इस समिति में पहलवान बबीता फोगाट और योगेश्वर दत्त भी शामिल थे। इन्हें 4 हफ़्तों में जाँच रिपोर्ट सबमिट करने को कहा गया। अब प्रदर्शनकारी पहलवान कहने लगे कि जाँच समिति भी उनके हिसाब से होनी चाहिए। यानी, सरकार जाँच करने के लिए किन लोगों को चुने ये भी वही तय करेंगे। उधर 23 फरवरी को जाँच समिति को 2 हफ़्तों का समय और दिया गया। इधर 23 अप्रैल को पहलवानों ने अपना प्रदर्शन जंतर-मंतर पर फिर से शुरू कर दिया।

केंद्रीय खेल मंत्रालय इस दौरान भी पहलवानों के आरोपों पर गौर कर के कार्रवाई करता रहा। IOA को कहा गया कि वो WFI को चलाए और अगला चुनाव कराए। साथ ही WFI के आंतरिक चुनाव को भी रद्द कर दिया गया। इस बीच देश भर से कई विपक्षी नेता आंदोलन में पहुँच कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ बयान देते रहे। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर FIR भी दर्ज हो गई। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने भी पहलवानों को लौटा दिया।

अब सवाल उठता है कि इन सबके बावजूद आंदोलनकारी पहलवानों ने नए संसद भवन के उद्घाटन समारोह को बाधित करने और हरिद्वार में गंगा नदी में मेडल बहाने की योजना क्यों बनाई? इससे तो हमें ‘अवॉर्ड वापसी गैंग’ की याद आने लगी। कॉन्ग्रेस सरकार द्वारा नवाजे गए कई तथाकथित बुद्धिजीवियों ने 2016 में अवॉर्ड लौटाने शुरू कर दिया थे। नौटंकी इतनी बढ़ गई थी कि टीवी न्यूज़ शो में अवॉर्ड लौटाए जाने लगे थे।

WFI की चुनावी राजनीति: दीपेंद्र हुड्डा बनाम बृजभूषण शरण सिंह

WFI की चुनावी राजनीति की बात करनी भी यहाँ ज़रूरी है। आपने प्रदर्शनकारी पहलवानों का वो वीडियो देखा होगा, जिसमें वो कहते हैं कि वो नेशनल्स नहीं खेलेंगे बल्कि सीधा ओलंपिक में जाएँगे। साथ ही आपने भूपेंद्र हुड्डा को भी इस आंदोलन में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेते देखा होगा। 2011 में हुए संस्था के चुनाव में जम्मू कश्मीर के दुष्यंत सिंह अध्यक्ष बने थे, लेकिन हरियाणा की कुश्ती संघ ने इसके खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में लड़ाई लड़ी और फिर से चुनाव हुए।

इस बार कॉन्ग्रेस नेता दीपेंद्र हुड्डा (तब रोहतक से सांसद, अब राज्यसभा MP) और तब समाजवादी पार्टी के सांसद रहे सांसद बृजभूषण शरण सिंह के बीच मुख्य लड़ाई थी। अंततः हुड्डा को पीछे हटने को मजबूर होना पड़ा और बरिसजभूषण शरण सिंह तब से लेकर अब तक लगातार 3 बार संस्था के अध्यक्ष बन चुके हैं। वो 6 बार सांसद भी रह चुके हैं। उनका एक बेटा भी विधायक हैं। उनकी पत्नी भी एक बार सांसद रह चुकी हैं।

उधर 2011, 2015 और 2019 में दीपेंद्र सिंह हुड्डा हरियाणा कुश्ती संघ के अध्यक्ष बनते रहे। बृजभूषण शरण सिंह के कार्यकाल में कई मेडल भारतीय पहलवानों को मिले। उधर दीपेंद्र सिंह हुड्डा को हटा कर रोहतास सिंह को हरियाणा कुश्ती संघ का अध्यक्ष बनाया गया। हर राज्य का कोटा तय होने और नई सिलेक्शन नीति बनने से हरियाणा के कुछ पहलवान नाराज़ हो गए। हरियाणा में अगले साल ही विधानसभा चुनाव भी होने हैं, ऐसे में इस आंदोलन को लेकर राज्य में राजनीति और तेज हो जाए तो इसमें आश्चर्य नहीं होना चाहिए।

खेल संघों में दखल नहीं दे सकती केंद्र सरकार, उनका अपना प्रबंधन

अब सवाल ये उठता है कि आखिर केंद्र सरकार WFI में कितना दखल दे सकती है? देश भर के 27 प्रदेशों में WFI से सम्बद्ध संस्थाएँ हैं। इसे केंद्रीय खेल मंत्रालय और IOA की मान्यता प्राप्त है। संस्था ने ‘प्रो रेसलिंग लीग’ की भी शुरुआत की, जिससे भारत में इस खेल को लेकर लोकप्रियता बढ़ी। WFI पहलवानों के लिए देश-विदेश से कोच की व्यवस्था करता है। TATA मोटर्स संस्था की स्पॉन्सर है। WFI को ‘समिति रजिस्ट्रेशन अधिनियम’ के तहत मान्यता मिली हुई है, जिसके तहत चैरिटेबल और अव्यवसायिक संस्थाएँ पंजीकृत की जाती हैं।

सबसे पहले तो आप ये जान लीजिए कि खेल संघों के प्रबंधन में केंद्र सरकार का कोई दखल नहीं होता है। वो स्वतंत्र होते हैं। वो देश भर में टूर्नामेंट आयोजित करते हैं और पुरस्कार देते हैं। जैसे क्रिकेट का काम BCCI देखता है, वैसे ही बाकी ऐसे संघ भी गैर-सरकारी स्वायत्त निकाय हैं। इनमें नेशनल और स्टेट फेडरेशंस होते हैं। किसी संघ को निलंबित कर देने से घाटा खिलाड़ियों का है, क्योंकि फिर वो भारत के झंडे के तले नहीं खेल पाएँगे।

सरकार ज़्यादा से ज़्यादा इन संघों को फंडिंग और सहायता रोक सकती है, लेकिन इससे भी खिलाड़ियों को ही नुकसान होगा। कोई भी खेल संघ बना सकता है, बशर्ते वो उस खेल की अंतरराष्ट्रीय संस्था से संबद्ध हो। अधिकतर खेल ‘इंटरनेशनल ओलंपिक संघ (IOC)’ से जुड़े हैं, ऐसे में उसकी मान्यता ज़रूरी होती है। ऐसे में पहलवान ये माँगें क्यों कर रहे हैं कि WFI को भंग कर दिया जाए? केंद्र सरकार अपनी शक्तियों से बाहर जाकर ये सब कैसे कर सकती है?

ऐसे में पहलवानों को IOC के पास जाना चाहिए और उन्हें कहना चाहिए कि वो WFI की मान्यता रद्द कर दे। केंद्र सरकार से ये सब माँगें करने का कोई फायदा नहीं है। उदाहरण के लिए, भारतीय मुक्केबाजी महासंघ को साल 2012 में उसके अंतर्राष्ट्रीय महासंघ ने निलंबित कर दिया था। वहीं, IOA ने साल 2008 में भारतीय हॉकी महासंघ को निलंबित कर दिया था। सरकार खेलों के लिए नियम-कानून बना सकती है। अमेरिका में तो कोई खेल मंत्रालय ही नहीं है, भारत में भी 1982 से पहले नहीं था।

जो पहलवान आज आंदोलन में लगे हुए हैं, उनमें से अधिकतर ने बृजभूषण शरण सिंह की पहले तारीफ की थी। 2022 के एक वीडियो में साक्षी मलिक को मेडल जीतने के बाद बृजभूषण शरण सिंह की तारीफ़ करते हुए देखा गया। विनेश फोगाट ने 2018 में कहा था कि उनके खेल में किसी प्रकार के यौन शोषण की उन्हें कोई जानकरी नहीं है। साक्षी मलिक ने बृजभूषण शरण सिंह को 2017 में अपने शादी समारोह में भी आमंत्रित किया था और परिवार के साथ तस्वीरें क्लिक करवाई थीं।

‘इमरान खान को नॉटी वाइफ की जरूरत, मैं बनूँगी चौथी बीवी’: मुश्किलों में घिरे पाकिस्तान के पूर्व PM के इश्क में टिकटॉकर जिया खान, देखिए Video

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान (Imran Khan) मुश्किलों में घिरे हुए हैं। उन पर और उनकी बेगम बुशरा बीवी (Bushra Biwi) पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है। ऐसे माहौल में भी पूर्व पीएम को एक और निकाह का ऑफर मिला है। यह प्रस्ताव ब्रिटेन की टिकटॉकर जिया खान (Jia Khan) ने दिया है। जिया ने कहा है कि उन्हें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि इमरान खान 70 साल के हैं। वे उनकी चौथी बीवी बनना चाहती हैं। इसके लिए बुशरा बीवी से उनका तलाक करवाने को भी तैयार हैं।

दरअसल, जिया खान ब्रिटेन में आयोजित मिस कॉन्टिनेंटल यूके 2023 के फाइनल में पहुँच गई हैं। लेकिन उनको यहाँ से जीतने के लिए वोट की आवश्यकता है। ऐसे में एक इंटरव्यू के दौरान अपने लिए पाकिस्तानियों से वोटिंग की अपील करते हुए उन्होंने इमरान खान के लिए अपने इश्क़ का इजहार किया। उन्होंने कहा, “प्लीज एक वोट दे दो यार। नवाज शरीफ को इतने वोट देते हैं आप। इमरान खान को आप बचाते हैं। जिया खान को भी बचा लें। यदि मुझे बचा लेंगे तो मैं इमरान खान की चौथी बीवी बन जाऊँगी।”

जिया खान ने आगे कहा है, “प्लीज इमरान खान की होने वाली बीवी को वोट करें। मैं यह बताना चाहती हूँ कि पाकिस्तान तरक्की करेगा। मैं सभी पाउंड (ब्रिटेन की मुद्रा) लेकर उड़ा दूँगी। इसलिए प्लीज एक वोट का सवाल है, मुझे वोट कर दें।” जिया से जब यह कहा गया कि इमरान खान अपनी शादी से खुश हैं तो उन्होंने कहा, “मुझे उसकी शादी तोड़नी है। उसकी पहली पत्नी जेमिमा थी। इसके बाद उसने खूबसूरत पत्रकार से शादी कर ली। अब तीसरी बीवी मजहबी टाइप की है। अब उसकी लाइफ में थोड़ा सा ब्रेक चाहिए। अब उसको एक नॉटी बीवी चाहिए।”

जिया ने आगे कहा है, “हर इंसान को मनोरंजन की जरूरत है। इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि उसकी उम्र 70 साल से अधिक है। मैं 70 साल से अधिक के लोगों को पसंद करती हूँ। मैं बाकी चीजें अभी नहीं बताऊँगी। लेकिन अगर इमरान खान हाँ करेगा तो उसकी लाइफ शॉर्टआउट हो जाएगी और मेरी भी हो जाएगी। मैं अभी सिंगल हूँ इमरान खान के लिए मिंगल होने को तैयार हूँ।”

3 निकाह कर चुके हैं इमरान खान

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान अब तक 3 शादियाँ कर चुके हैं। इमरान खान ने पहली शादी साल 1995 में 42 साल की उम्र में इंग्लैंड के अरबपति व्यवसायी जेम्स गोल्ड स्मिथ की बेटी जेमिमा गोल्डस्मिथ से की थी। जेमिमा स्क्रिप्ट राइटर, पत्रकार, तथा टेलीविजन शो और फिल्म प्रोड्यूसर हैं। साल 2004 में जेमिमा और इमरान खान को तलाक हो गया था।

इमरान खान की दूसरी बीवी रेहम खान भी ब्रिटिश-पाकिस्तानी पत्रकार हैं। इसके अलावा वह लेखक और फिल्म प्रोड्यूसर भी हैं। जनवरी 2015 में इमरान और रेहम का निकाह हुआ था। हालाँकि 9 महीने के भीतर ही यानी अक्टूबर 2015 में यह शादी टूट गई। इमरान खान की तीसरी बेगम का नाम बुशरा बीवी है। दोनों ने साल 2018 में निकाह किया था। यह बुशरा की दूसरी शादी थी। बुशरा बीवी पर काला जादू करने तथा टोना-टोटका करने के आरोप लगते रहे हैं। फिलहाल, इमरान खान के साथ ही उनके भी जेल जाने के कयास लगाए जा रहे हैं।

पिता-भाई नेत्रहीन, पत्नी गर्भवती… जिस दीपू की आतंकियों ने गोली मारकर की हत्या, वह सर्कस में काम कर पालता था 6 लोगों का परिवार

जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग में आतंकियों ने सोमवार (29 मई 2023) की शाम दीपू कुमार की गोली मारकर हत्या कर दी। वे उधमपुर के रहने वाले थे। सर्कस में काम करते थे। उनकी हत्या के बाद आतंकी फरार हो गए। उनकी तलाश जारी है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक दीपू सर्कस में काम कर 6 लोगों का परिवार पालते थे। उनके पिता और भाई नेत्रहीन हैं। भाई की पत्नी और बच्चों की जिम्मेदारी भी उन पर ही थी। खुद दीपू की पत्नी गर्भवती हैं। दीपू अनंतनाग के जंगलात मंडी इलाके में रह रहे थे। यहाँ एक मेले में सर्कस चल रहा था। सर्कस कंपनी के साथ वे तीन महीने पहले ही अनंतनाग आए थे। सोमवार की रात बाइक सवार आतंकियों ने उन्हें गोली मारी और फरार हो गए। दीपू को अस्पताल ले जाया गया जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। वारदात के बाद पूरे इलाके को सील कर हमलावरों की तलाश की जा रही है।

दीपू घर का इकलौता कमाने वाला था। उधमपुर में रह रहे दीपू के भाई का कहना है, “हम बर्बाद हो गए हैं। चार साल से मेरी आँखें खराब हैं। मेरे पिता पहले से नेत्रहीन हैं। हम दोनों काम नहीं कर सकते। हमें न्याय चाहिए। आखिर हमारी क्या गलती थी?”

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस घटना की कड़ी निंदा की। उन्होंने ट्विटर पर लिखा है, “उधमपुर के दीपू की हत्या की जानकारी पाकर स्तब्ध हूँ। अनंतनाग में काम कर वह परिवार के लिए 2 वक्त की रोटी जुटा रहा था। कश्मीर में टारगेट किलिंग्स पर अंकुश लगाना जरूरी हो गया है। भाजपा (BJP) कार्यकर्ता उधमपुर स्थित दीपू के घर में पहुँच गए हैं। उनके परिवार की पूरी सहायता की जाएगी।”

बता दें हाल का महीनों में कश्मीर में टारगेट किलिंग की यह दूसरी घटना है। इससे पहले 26 फरवरी को कश्मीर के पुलवामा में संजय शर्मा नाम के हिंदू को मार दिया गया था। इस हत्या की जिम्मेदारी कश्मीर फ्रीडम फाइटर्स ग्रुप ने ली थी। पाकिस्तानी आतंकी संगठनों के इशारे पर काम करने वाले इस टेरर ग्रुप ने हत्या की जिम्मेदारी लेते हुए पत्र जारी किया था। इसमें कहा था कि कश्मीर में गैर मुस्लिमों को रहने नहीं दिया जाएगा। कश्मीरी पंडित, अन्य हिंदू चाहे वो पर्यटक ही क्यों न हो, मार दिया जाएगा।

मुस्लिम भीड़ ने जलाकर मार डाले 59 रामभक्त… अब पर्दे पर आएगी गोधरा की कहानी, टीजर आउट: नानावती आयोग की रिपोर्ट बनी फिल्म का आधार

तारीख थी 27 फरवरी 2002। गुजरात के गोधरा में अयोध्या से लौट रहे 59 रामभक्तों को मुस्लिम भीड़ ने साबरमती एक्सप्रेस की S-6 बोगी में जिन्दा जला दिया था। इनमें 10 बच्चे और 27 महिलाएँ भी थीं। इसके बाद गुजरात में दंगे भड़क गए थे। अब इस घटना पर ‘एक्सीडेंट ऑर कॉन्सपिरेसी गोधरा’ (Accident or Conspiracy Godhra) नाम से फिल्म आ रही है।

इस फिल्म का टीजर मंगलवार (30 मई 2023) को जारी किया गया। फिल्म नानावती-मेहता आयोग की रिपोर्ट के तथ्यों पर आधारित है। इसकी रिलीज डेट अभी घोषित नहीं की गई है। एमके शिवाक्ष फिल्म के डायरेक्टर हैं। बीजे पुरोहित और रामकुमार पाल प्रोड्यूसर हैं। फिल्म का टीजर ऐसे वक्त में आया है जब गैर मुस्लिम लड़कियों को लव जिहाद का शिकार बनाकर आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (ISIS) में भेजने की घटनाओं पर बनी फिल्म द केरल स्टोरी (The Kerala Story) चर्चा में है। इससे पहले कश्मीर में हिंदू नरसंहार पर बनी द कश्मीर फाइल्स (The Kashmir Files) भी काफी चर्चित हुई थी।

​टीजर देखने से लगता है कि 2002 के गोधरा कांड की पृष्ठभूमि पर बनी यह फिल्म दंगों के कारणों की गहराई से पड़ताल करने की कोशिश करती है। टीजर में उल्लेख किया गया है कि फिल्म सच्ची घटनाओं पर आधारित है। साबरमती एक्सप्रेस की भयावह घटना के बारे में बताती है। यह भी बताने की कोशिश करती है कि क्या यह घटना एक सुनियोजित साजिश थी जिसके परिणामस्वरूप सांप्रदायिक दंगे हुए थे।

निर्देशक एमके शिवाक्ष ने 27 मई 2023 को मुंबई में टीजर लॉन्च करने के मौके पर बताया था, “इस विषय पर फिल्म बनाने के लिए हम पिछले चार वर्षों से काम कर रहे हैं। इन वर्षों में रिसर्च के दौरान हमें जो जानकारी मिली, उसी के आधार पर हमने यह फिल्म बनाई है। ट्रेन पर हुए हमले की योजना पूर्व निर्धारित थी या नहीं, अगर पूर्व निर्धारित थी तो वह किस स्तर पर की गई? इन तमाम सवालों के जवाब इस फिल्म ‘एक्सीडेंट ऑर कॉन्सपिरेसी गोधरा’ में देखने को मिलेंगे।” वहीं इस मौके पर फिल्म के निर्माता बीजे पुरोहित ने कहा था, “लोग गोधरा कांड को 2002 में हुए हिन्दू और मुस्लिम दंगे के रूप में जानते हैं। इसके पहले का गोधरा क्या था? ऐसा कौन सा सच है, जिसे गुजरात दंगों तले दबाया गया है? ऐसा करने के पीछे किस तरह की मानसिकता रही होगी, यह सब फिल्म में दिखाया गया है।”

क्या है गोधरा कांड

2002 में साबरमती एक्सप्रेस ट्रेन में आग लगाने की घटना की जाँच के लिए जस्टिस नानावटी कमेटी का गठन किया गया। कमेटी की रिपोर्ट में इस घटना के बारे में कहा गया था, “ट्रेन सुबह 7:43 पर प्लेटफार्म पर लगभग 5 घंटे देरी से आई। ट्रेन को गोधरा में लगभग 5 मिनट रुकना था। ट्रेन पर हमला घांची मुस्लिम भीड़ ने किया। ये अनधिकृत रूप से स्टेशन पर कोल्ड ड्रिंक और अन्य खाने के सामान बेचते थे। गोधरा स्टेशन की बॉउंड्री से सटा एक इलाका है, जिसे सिग्नल फलिया कहा जाता है। यहाँ घांची मुस्लिम अच्छी संख्या में रहते हैं।”

जैसे ही ट्रेन गोधरा स्टेशन से रवाना होने लगी उसकी चेन खींच दी गई। ट्रेन पर 1000-2000 लोगों की भीड़ ने हमला किया। भीड़ ने पहले पत्थरबाजी की फिर पेट्रोल डालकर उसमें आग लगा दी। इसमें 27 महिलाओं, 22 पुरुषों और 10 बच्चों की जलने से मृत्यु हो गई। इस रिपोर्ट में इस घटना को साजिश बताया गया। प्रमुख साजिशकर्ता मौलवी हुसैन हाजी इब्राहिम उमर और ननूमियाँ थे। इन पर भीड़ को भड़काने का आरोप लगा। आरोपित रज्जाक कुरकुर के गेस्ट हाउस पर 140 लीटर पेट्रोल जमा किया गया। इसी पेट्रोल से ट्रेन जलाई गई थी।

जाँच के दौरान यह भी पता चला कि हिंसक भीड़ को उकसाने के लिए लाऊडस्पीकरों का प्रयोग किया गया था। अली मस्जिद यहीं पास में थी थी। इस दौरान ‘काफिरों को मार डालो, इस्लाम खतरे में है, काट दो, मार दो’ जैसे नारे लगाए गए। हमलावरों के हाथों में तलवारें और अन्य घातक हथियार थे। वो पत्थरबाजी भी कर रहे थे। ये सभी ट्रेन को घेरने की कोशिश कर रहे थे।”

मोदी से हुआ मुमकिन: डिफेंस एक्सपोर्ट 9 साल में 23 गुना बढ़ा, 85 देशों को हथियार बेच रहा भारत; 100 कंपनी कर रही निर्यात

मोदी सरकार के नौ साल में भारत के रक्षा निर्यात (Defence Exports) में जबर्दस्त इजाफा हुआ है। वित्त वर्ष 2022-23 में रक्षा निर्यात करीब 16000 करोड़ रुपए रहा। यह 2013-14 के मुकाबले 23 गुना ज्यादा है। उस समय देश का रक्षा निर्यात 686 करोड़ रुपए ही था। यह सफलता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी योजना ‘मेक इन इंडिया’ के बलबूते मुमकिन हो पाई है। इस समय देश की 100 से ज्यादा कंपनी रक्षा उत्पादों का निर्यात कर रही हैं।

भारत सरकार के पत्र सूचना कार्यालय की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में यह जानकारी दी गई है। इसमें कहा गया है, “भारत का रक्षा निर्यात अब तक के उच्चतम स्तर पर पहुँच गया है। देश का रक्षा निर्यात वित्तीय वर्ष 2013-2014 में 686 करोड़ रुपए था। वहीं, वित्तीय वर्ष 2022-2023 में यह करीब 16000 करोड़ रुपए हो गया है। रक्षा निर्यात में हुई 23 प्रतिशत की बढ़ोतरी दुनियाभर में रक्षा निर्माण क्षेत्र में भारत की उन्नति को दर्शाती है।”

विज्ञप्ति में बताया गया है, “भारत अब दुनियाभर के 85 से अधिक देशों को रक्षा उपकरण निर्यात कर रहा है। देश के रक्षा उद्योग ने पूरी दुनिया के सामने अपनी डिजाइन और क्षमता का प्रदर्शन किया है। फिलहाल देश में 100 कंपनियाँ रक्षा उपकरणों का निर्माण कर रहीं हैं। रक्षा निर्यात को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने बीते 9 वर्षों में कई नीतिगत पहल की है और इसमें सुधार किए हैं। निर्यात प्रक्रिया को सरल बनाया गया है। निर्यात प्रक्रिया में लगने वाले समय को कम करने के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया का भी पालन किया जा रहा है।”

रक्षा निर्यात में देश की तरक्की में आत्मनिर्भर भारत का भी बड़ा योगदान रहा है। इसको लेकर प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है, “आत्मनिर्भर भारत पहल ने देश में रक्षा उपकरणों के स्वदेशी डिजाइन, विकास और निर्माण को प्रोत्साहित करके देश की मदद की है। इससे आयात पर निर्भरता कम हुई है। रक्षा उपकरणों व सुरक्षा से संबंधित अन्य समानों के आयात में भी गिरावट आई है। साल 2018-19 में यह कुल व्यय का 46% था। वहीं, अब यह साल 2022 के अंत में यह घटकर 36.7% रह गया।”

गौरतलब है कि देश लंबे समय तक रक्षा सामग्री के लिए विदेशों पर ही निर्भर था। हालाँकि अब यह निर्भरता कम होती जा रही है। रक्षा सामग्री के आयात में हुए कुल खर्च में 10 प्रतिशत की बड़ी गिरावट देखी गई है। विदेशों पर कम होती निर्भरता को लेकर विज्ञप्ति में कहा गया है, “भारत को कभी रक्षा उपकरणों के आयातक के रूप में जाना जाता था। लेकिन अब भारत प्रमुख रक्षा उपकरणों को निर्यात कर रहा है। इसमें, डोर्नियर -228, आर्टिलरी गन, ब्रह्मोस मिसाइल, पिनाका रॉकेट और लॉन्चर, रडार, सिमुलेटर, बख्तरबंद वाहन आदि शामिल हैं। वैश्विक एलसीए-तेजस, लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर, एयरक्राफ्ट कैरियर और एमआरओ जैसे भारत के स्वदेशी उत्पादों की माँग भी बढ़ रही है।”

अल्लाह के सिवा किसी का डर शिर्क (मूर्तिपूजा, गुनाह) समझते हैं: साक्षी को 16 बार चाकू मारने वाले साहिल का नया वीडियो

दिल्ली के रोहिणी इलाके में स्थित शाहबाद डेयरी के पास साहिल नाम के युवक ने हिन्दू लड़की साक्षी को चाकुओं से लगातार गोद कर मार डाला और पत्थर से उसका चेहरा कुचल दिया। उसकी आँतें तक बाहर निकल आई थीं। घटना का CCTV वीडियो भी सामने आया है। साहिल को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से गिरफ्तार किया गया। अब साहिल का इस्टाग्राम हैंडल भी सामने आया है। ये भी पता चला है कि कई लड़कियों से उसके रिश्ते थे।

उसका इंस्टाग्राम हैंडल ‘sahi.lkhan3600’ है, जिस पर हुक्का पार्टी से लेकर सिद्धू मूसेवाला के गाने तक कई तस्वीरें और वीडियोज हैं। उसके इंस्टाग्राम हाइलाइट्स में भी एक वीडियो है, जो बताता है कि वो कट्टर इस्लामी है। उसने अपने ‘इंस्टाग्राम हाइलाइट्स’ में जिस स्टोरी को डाल रखा है, वो एक रील वीडियो है। उक्त वीडियो में एक व्यक्ति को बंदूक के साथ चलते हुए देखा जा सकता है। इस वीडियो को ‘Sameer6000’ नामक इंस्टाग्राम हैंडल ने अपलोड किया था।

फिर साहिल खान ने इसे अपने ‘इंस्टाग्राम हाइलाइट्स’ में लगाया। इस लिंक पर जाकर आप साहिल के इंस्टाग्राम हैंडल पर इस वीडियो को देख सकते हैं। इसमें बड़ी बंदूक के साथ चल एक रहा व्यक्ति दिखता है। साथ ही बैकग्राउंड में आवाज़ आ रही होती है, “और हम, अल्लाह के सिवा किसी का डर शिर्क समझते हैं।” बता दें कि इस्लाम में मूर्तिपूजा को ‘शिर्क’ कहा गया है और इसे हराम माना गया है। साक्षी की एक दोस्त आरती ने भी बताया है कि वो साहिल खान को हिन्दू समझती थीं।

इंस्टाग्राम पर साक्षी के हत्यारे साहिल खान का हैंडल

इंस्टाग्राम पर एक अन्य वीडियो में वो हुक्का गुड़गुड़ाता भी नजर आ रहा है और बैकग्राउंड में ‘दिल्ली में करता बदमाशी’ गाना बज रहा है। साहिल ने कुछ दिन पहले ही एक लंबा चाकू खरीदा था। कई लोग साहिल को ‘सन्नी’ नाम से भी जानते थे। साहिल ने रिठाला में हत्या में इस्तेमाल किया हुआ हथियार फेंका है। साहिल अपने अम्मी-अब्बू और 3 बहनों के साथ किराये के मकान में रहता था। हत्या के बाद उसने पुलिस से बचने के लिए फोन स्विच ऑफ कर लिया था और अब वो जाँच को भटकाने का प्रयास कर रहा है।

आनंद बन कोचिंग आता, हाथ में कलावा बाँधता था मोहम्मद आलिम: हिंदू लड़की को मंदिर ले जा माँग में भरी सिंदूर, फिर रेप-गर्भपात-धर्मांतरण का दबाव

उसका नाम मोहम्मद आलिम है। कथित तौर पर पर वह कोचिंग में कंप्यूटर सीखने आनंद बनकर आता था। हाथ में कलावा बाँधता था। कोचिंग की ही एक हिंदू लड़की से पहले उसने दोस्ती की और फिर उसे प्यार के जाल में फँसाया। इसके बाद रेप, गर्भपात, धमकी, धर्मांतरण के दबाव का वही सिलसिला चल पड़ा जो आम तौर पर ऐसे मामलों में देखने को मिलते हैं। लव जिहाद का यह केस उत्तर प्रदेश के बरेली का है। पीड़िता की शिकायत के बाद पुलिस मामले की जाँच कर रही है।

पीड़ित लड़की ने पुलिस को दी शिकायत में कहा है कि वह बरेली जिले के देवरनिया थाना क्षेत्र की निवासी है। वह कम्प्यूटर सीखने के लिए एक कोचिंग सेंटर में जाती थी। जादोपुर निवासी एक लड़का भी इसी कोचिंग में आता था। उसने लड़की को अपना नाम आनंद बताया था। वह हाथ में कलावा भी बाँधता था। धीरे-धीरे दोनों में दोस्ती हो गई।

शिकायत के अनुसार बाद में लड़के ने शादी की बात कही। पीड़िता उसके बहकावे में आ गई। 13 मार्च 2022 को वह पीड़िता को लेकर बरेली के राधा स्वामी मंदिर गया। जल्द ही शादी करने की बात कहते हुए वहीं उसकी माँग में सिंदूर भर दी। फिर वह पीड़िता को अपने दोस्त तालीम के घर ले गया। जहाँ उसने उसके साथ संबंध बनाए और इसका वीडियो भी बना लिया। 

पीड़िता के अनुसार इसके बाद आरोपित अश्लील फोटो, वीडियो वायरल करने की धमकी देकर ब्लैकमेल करने लगा। डर की वजह से पीड़िता उसकी बात मानने को मजबूर हो गई। आरोपित पीड़ित लड़की को कई बार होटल ले गया। उसके साथ जबरन संबंध बनाए। गर्भवती होने के बाद पीड़िता जब उसके घर पहुँची तो पता चला कि जिसे वह आनंद समझ रही है, वह साबिर का बेटा मोहम्मद आलिम है।

पीड़िता के अनुसार जब वह लड़के के घर गई थी तो आलिम के परिजन भी मौजूद थे। उन्होंने आलिम से उसका गर्भपात कराकर धर्मांतरण करवाने और निकाह को कहा। इसके बाद आलिम ने उसे गर्भनिरोधक गोलियाँ देकर घर भेज दिया। गोलियाँ खाने के बाद पीड़िता की तबियत बिगड़ गई तो आलिम उसे एक नर्सिंग होम ले गया और वहाँ उसका गर्भपात करा दिया।

पीड़िता का आरोप है कि आरोपित मोहम्मद आलिम ने उसे इस बारे में किसी को कुछ भी बताने पर जान से मारने की धमकी भी दी। आरोपित की धमकियों से परेशान होकर पीड़िता ने स्थानीय देवरनियाँ थाने में शिकायत दर्ज कराई। पीड़िता की शिकायत पर आरोपित के खिलाफ मामला दर्ज कर पुलिस ने जाँच शुरू कर दी है।

‘साक्षी की हत्या करते वक्त अकेला नहीं था साहिल, नशेड़ी साथी भी थे मौजूद’: चश्मदीद ने बताया- देखकर भी क्यों चुप रहे लोग, इंस्टाग्राम से कई लड़कियों से रिश्ते का खुलासा

दिल्ली के रोहिणी स्थित शाहबाद डेयरी इलाके में साहिल नामक के एक युवक ने साक्षी नाम की लड़की की चाकू से लगातार गोद कर हत्या कर दी। उसने एक भारी पत्थर उठा कर साक्षी का चेहरा भी कुचल डाला। अब इस घटना से पहले का एक CCTV फुटेज सामने आया है, जिसमें साहिल को घटनास्थल पर पहले से मौजूद देखा जा सकता है। साथ ही वो इस वीडियो में किसी लड़के से बात भी कर रहा है। फिर दोनों फोन में कुछ देख रहे होते हैं।

ABP न्यूज़ की खबर के अनुसार, साक्षी का एक दोस्त भी पुलिस द्वारा पूछताछ की सूची में शामिल किया गया है, जिसका नाम आकाश है। हत्या से पहले मौका-ए-वारदात पर आकाश और साहिल बात करते हुए दिखे थे। साहिल उस समय साक्षी का इंतजार कर रहा था। पुलिस जाँच में पता लगाएगी कि आकाश को इस बारे में क्या-क्या जानकारी थी। साक्षी की अन्य दोस्तों नीतू, आरती, झबरू और प्रवीण से भी पूछताछ होनी है।

उधर हत्यारे साहिल की पहचान करने वाले चश्मदीद ने बताया है कि लड़की को चाकू से गोदते समय साहिल अकेला नहीं था, बल्कि उसका पूरा गिरोह उसके साथ था। उसका कहना है कि इसी गिरोह के डर से आसपास से गुजर रहे लोगों ने कुछ नहीं किया। चश्मदीद ने बताया कि उसने साहिल को कई बार देखा है और हत्या वाले दिन उसका गैंग घटनास्थल से कुछ ही दूरी पर मौजूद था। गैंग के लड़कों के साथ वो नशा भी करता था।

उधर ये भी सामने आया है कि इंस्टाग्राम पर साहिल की कई लड़कियों से दोस्ती और रिलेशनशिप था। वो एक साथ कई लड़कियों के साथ रिश्ते में था। कई लड़कियों के साथ उसके चैट सामने आए हैं। साहिल और साक्षी के झगड़े की एक बड़ी वजह ये भी हो सकती है। साहिल बड़े आराम से लॉकअप में सो रहा है और पूछताछ में जाँच को भटकाने की कोशिश कर रहा है, जिससे पता चलता है कि वो शातिर था। हो सकता है कि पुलिस को भटकाने के लिए साहिल अन्य किरदारों के नाम ले रहा हो।

महाराष्ट्र सरकार से सचिन तेंदुलकर का समझौता, बने ‘स्माइल एंबेसडर’: जानिए क्या है स्वच्छ मुख अभियान

सचिन तेंदुलकर (Sachin Tendulkar) को महाराष्ट्र सरकार ने ‘स्माइल एंबेसडर’ बनाया है। वे स्वच्छ मुख अभियान को प्रमोट करेंगे। इस संबंध में महाराष्ट्र सरकार और दिग्गज क्रिकेटर के बीच मंगलवार (30 मई 2023) को समझौता ज्ञापन (एमओयू) हुआ। इस दौरान उप मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी मौजूद थे।

सचिन तेंदुलकर अगले 5 वर्षों के लिए इस अभियान के लिए ‘स्माइल एंबेसडर’ रहेंगे। उन्होंने लोगों से गुटखा और तंबाकू जैसी चीजों से दूर रहने की अपील की है। उनका मानना है कि स्वच्छ मुख अभियान दूर-दूर तक फैलेगा और इसे लोगों की अच्छी प्रतिक्रिया मिलेगी।

एमओयू साइन होने से पहले डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस (Deputy CM Devendra Fadnavis) ने मीडियाकर्मियों से कहा, “चिकित्सा शिक्षा विभाग के माध्यम से ‘ओरल हेल्थ मिशन’ के तहत स्वच्छ मुख अभियान चलाया जाता है। इस मिशन के ब्रांड एंबेसडर के रूप में सचिन तेंदुलकर ने अपनी स्वीकृति दी है। अगले 5 वर्षों के लिए सचिन तेंदुलकर ब्रांड एंबेसडर के रूप में ओरल हेल्थ मिशन को प्रमोट करेंगे। आज जब कई बड़े सेलिब्रिटीज कैंसर पैदा करने वाले तंबाकू, गुटखा और सुपारी का प्रचार कर रहे हैं, सचिन कभी भी ऐसे किसी विज्ञापन में नहीं दिखते। उन्होंने युवाओं में जागरूकता पैदा करने का यह अहम फैसला लिया है।”

स्वच्छ मुख अभियान (SMA) इंडियन डेंटल एसोसिएशन (आईडीए) का एक राष्ट्रीय अभियान है, जो भारतीयों को ओरल हेल्थ और ओरल स्वच्छता के महत्व के बारे में जागरूक करता है। यह अभियान न केवल महाराष्ट्र, बल्कि पूरे भारत में लागू किया जाएगा। दरअसल, पिछले कुछ समय से प्रदेश में मुँह के रोग काफी बढ़ रहे हैं। इसे रोकने के लिए सरकार ने नेशनल ओरल हेल्थ कार्यक्रम के तहत स्वास्थ्य संबंधी योजनाओं को लागू करने के लिए ‘महाराष्ट्र मौखिक स्वास्थ्य अभियान’ यानी ‘स्वच्छ मुख अभियान’ लागू करने का निर्णय लिया है।

बता दें कि यह अभियान राज्य सरकार की ओर से जनवरी 2023 से शुरू किया गया है। शिविर के माध्यम से समाज में ओरल हेल्थ के प्रति जागरूकता पैदा करने के लिए बड़े पैमाने पर यह अभियान चलाया जा रहा है।