गुजरात के अहमदाबाद में वाल्मीकि समाज के लोग पलायन को मजबूर हो गए हैं। समाज के लोगों का आरोप है कि स्थानीय मुस्लिमों ने इलाके में उत्पात मचा रखा है। वे आए दिन लड़के व लड़कियों को छेड़ते हैं और विरोध करने पर मारपीट और गाली गलौज पर उतर आते हैं। पिछले दिनों ही विरमगाम के पास स्थित मांडल में वाल्मीकि समाज के 2 युवकों पर मुस्लिम नौजवानों ने जानलेवा हमला कर दिया था। वाल्मीकि समाज के लोगों ने जान का खतरा बताते हुए स्थानीय तालुका विकास पदाधिकारी (TDO) को पत्र लिखकर पलायन की इजाजत माँगी है।
2 मई 2023 को मांडल में वाल्मीकि समुदाय के लड़के से भद्दे मजाक का विरोध करने पर समीर, सलीम और एक नाबालिग ने वाल्मीकि समाज के युवकों की पिटाई कर दी थी। पिटाई के दौरान एक युवक के सिर में गंभीर चोट आई जबकि दूसरे का हाथ टूट गया। मामले में पुलिस ने दोनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। घटना सामने आने के बाद स्थानीय हिंदू समाज के लोग दोषियों को सख्त सजा देने की माँग कर रहे हैं।
गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने आरोपित मुस्लिम नौजवानों को अदालत में पेश किया। अदालत ने मामले में नाबालिग आरोपित को जमानत दे दी। वहीं पीड़ित पक्ष ने कोर्ट में समीर और सलीम की जमानत पर आपत्ति जताई। आरोप है कि इसके बाद से ही मुस्लिमों द्वारा वाल्मीकि समुदाय के लोगों को धमकियाँ दी जा रही हैं। टीडीओ को लिखे पत्र में बताया गया है कि वाल्मीकि समाज की बस्ती के सामने मुस्लिम समुदाय के लोगों ने अवैध रूप से दुकानें खड़ी कर ली हैं। इन दुकानों में चोरी का सामान बेचा जाता है।
पत्र में आगे लिखा गया है कि स्थानीय मुस्लिम वाल्मीकि समाज के लोगों से उलझने की कोशिश करते रहते हैं। मौका मिलते ही वे लोग लड़ाई पर उतर आते हैं। उनके मुस्लिमों के अत्याचार से बस्ती के वाल्मीकि समाज के लोगों के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है। मुस्लिमों द्वारा शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना से बचने के लिए उन्हें सामूहिक पलायन के लिए विवश होना पड़ेगा।
गाड़ी से ठोकर मारकर हत्या की धमकी
मामले में और जानकारी हासिल करने के लिए ऑपइंडिया ने वाल्मीकि समाज के लोगों से संपर्क किया। स्थानीय भाविन सिरेसिया ने जानकारी दी कि पिछले दिनों हुए मारपीट की घटना के बाद मुस्लिमों द्वारा पीड़ितों पर शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया जा रहा है। पीड़ित युवकों में से एक राहुल सिरोसिया ने बताया कि केस वापस न लेने पर हर दूसरे दिन अलग-अलग लोगों को भेजकर जान से मारने की धमकी दी जाती है।
पीड़ित परिवार के लोगों को रास्ते पर कार से टक्कर मार कर हत्या की धमकी मिल रही है। धमकियाँ मिलने के बाद परिवार के लोग भयभीत हैं और घर से नहीं निकल रहे हैं। लिहाजा समाज के लोग टीडीओ से पलायन की अनुमति माँग रहे हैं। टीडीओ को भेजे गए पत्र की कॉपी ऑपइंडिया के पास भी उपलब्ध है।
क्या है पूरा मामला?
2 मई की शाम करीब 6 बजे वाल्मीकि समाज का एक 10 वर्षीय बालक बस्ती की गेट के सामने की एक दुकान पर गया। दुकान पर मौजूद मुस्लिम युवकों ने लड़के का मजाक उड़ाना शुरू कर दिया। इसमें सलीम, समीर और महबूब भाई नाम के शख्स का नाबालिग बेटा शामिल था। पास ही खड़े दलित समुदाय के दो युवकों ने मजाक उड़ा रहे नौजवानों से बच्चे को परेशान न करने की बात कही। इसे लेकर दोनों पक्षों में कहासुनी हुई और जमकर मारपीट हुई।
सलीम, समीर और नाबालिग लड़के ने वाल्मीकि समाज के दोनों युवकों को जातिसूचक शब्द कहकर पीटना शुरू कर दिया। तीनों ने पत्थर और लकड़ी के हथियारों से दोनों युवकों को गंभीर रूप से घायल कर दिया। इसके बाद भीड़ का फायदा उठाकर तीनों धमकी देते हुए फरार हो गए। पीड़ितों की शिकायत पर पुलिस ने मामले में एफआईआर दर्ज कर ली है। एफआईआर की कॉपी ऑपइंडिया के पास भी उपलब्ध है। मामले की जाँच जारी है।
भारत सनातन की भूमि है। ये वेदों की भूमि है। ये धरती है भगवान श्रीराम की, श्रीकृष्ण की, रामायण-महाभारत की। ये वो भूमि है जहाँ वेद व्यास और वाल्मीकि जैसे विद्वान ऋषि एवं लेखक हुए। जिस महाराज भरत के नाम पर इस देश का नामकरण हुआ, उनका जिक्र भी पुराणों से ही आया है। आजकल इनकी चर्चा करने पर कह दिया जाता है कि ये सब तो हिन्दू धर्म की बातें हैं, इनसे भय का माहौल बनता है और एक सेक्युलर देश में ऐसी बातें नहीं करनी चाहिए।
हम ये क्यों नहीं सोचते कि ये चीजें भारतीय पहले है, बाद में धार्मिक। क्या इस देश का नाम सिर्फ इसीलिए बदल दिया जाए क्योंकि ये पुराणों में वर्णित एक राजा के नाम पर है? रामायण-महाभारत भारत भूमि की कथाएँ हैं, इतिहास हैं, बाद में इसमें हिन्दू धर्म आता है। यहाँ रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति को मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम और जगद्गुरु श्रीकृष्ण पर गौरव होना चाहिए, क्योंकि वो इसी भूमि पर मानवता के नए मूल्य स्थापित कर के गए, जीवन की कई समस्याओं का समाधान बता कर गए।
ये कितना बेहूदा तर्क है कि ‘जय श्री राम’ या ‘जय श्री कृष्ण’ नहीं बोलना चाहिए, क्योंकि इस देश में अन्य मजहबों के लोग भी रहते हैं। अमेरिका का राष्ट्रपति बाइबिल पर हाथ रख कर शपथ लेता है, इंग्लैंड के राजा का राज्याभिषेक ईसाई पादरियों की निगरानी में होता है और मलेशिया जैसे लोकतांत्रिक मुल्क का भी आधिकारिक मजहब इस्लाम वहाँ के संविधान में वर्णित है। फिर भारत में यहाँ के इतिहास, संस्कृति, सभ्यता और परंपराओं का पालन करना, इसकी चर्चा करना और इस पर गौरव करना कैसे ‘सेक्युलर’ विचारधारा के विपरीत हो गया?
‘सेंगोल’: भारतीय परंपरा का ऐसा प्रतीक जिसे नेहरू ने भुला दिया
उदाहरण के लिए, ‘सेंगोल’ को ही ले लीजिए। ये शब्द आजकल काफी चर्चा में है। ‘सेंगोल’ अर्थात, चोल वंश का राजदंड। इसे मुख्य पुरोहित द्वारा एक शासक को सौंपा जाता था, जिसके साथ ही उसके शासन का शुभारंभ हो जाता था। चोल साम्राज्य भारत के सबसे प्राचीन और सबसे लंबे समय तक राज करने वाले राजवंशों में से एक रहा है। 300 ईसापूर्व में भी इसका वर्णन मिलता है। 1500 से भी अधिक वर्षों तक इस राजवंश ने शासन किया।
11वीं शताब्दी में इस साम्राज्य ने अपने शिखर को छुआ। चेरा और पंड्या के अलावा चोल राजवंश ने दक्षिण भारत में अपनी प्रभुता स्थापित की और कई मंदिर बनवाए। सामान्यतः, चोल राजा शिवभक्त होते थे। यही कारण है कि ‘सेंगोल’ में सबसे ऊपर भगवान शिव के वाहन वृषभ की, नंदी की प्रतिमा है। तंजावुर का बृहदेश्वर मंदिर चोल राजवंश की निर्माण कला का सबसे उत्कृष्ट नमूना है। राजेंद्र चोल को इस राजवंश का सबसे महान शासक माना जाता है।
ऐसा दिखता है ‘सेंगोल’, जो था चोल वंश का राजदंड
जब से ये सामने आया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इस ‘सेंगोल’ को ग्रहण किया जाएगा और इसे नए संसद भवन में स्थापित किया जाएगा, तब से एक बार फिर से ‘सेक्युलरिज्म’ का नाम लेकर रोना-धोना शुरू हो गया है। न तो वेद विदेशी है और न ही ‘सेंगोल’, जब दोनों ही भारतीय परंपरा और सभ्यता का हिस्सा रहे हैं तो फिर ऐसी चर्चा क्यों हो रही है कि इससे ‘सेक्युलरिज्म’ को नुकसान पहुँचेगा? ‘सेंगोल’ तो न्यायप्रियता, सत्य और शक्ति का प्रतीक है।
वेदों की धरती पर अगर वैदिक मंत्रोच्चार नहीं होने तो क्या फिर अरब और यूरोंप की परंपराएँ उधार ली जाएँगी? हाल ही में हम सबने देखा कि कैसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रेलिया के पीएम एंथोनी अल्बानीज सिडनी स्थित कुडोस बैंक एरिना में प्रवासी भारतीयों के कार्यक्रम में पहुँचे तो वहाँ वैदिक मंत्रोचार के साथ उनका स्वागत किया। जब आसट्रेलिया में इससे कोई समस्या नहीं है तो फिर वेदों की धरती पर वेद से किसी को दिक्कत क्यों?
आगे बढ़ने से पहले ‘सेंगोल’ के बारे में थोड़ा और जान लेते हैं। इसके लिए हमें चलना होगा तब के ज़माने में, जब इस देश को आज़ादी मिल गई थी और बस इसकी औपचारिकता बाक़ी थी। इस देश का दुर्भाग्य है कि जब पंडित जवाहरलाल नेहरू से अंग्रेजों के अंतिम गवर्नर-जनरल लॉर्ड माउंटबेटन ने पूछा कि आपके देश में सत्ता हस्तांतरण को लेकर क्या रीति-रिवाज हैं, तो नेहरू को कुछ जवाब नहीं सूझा। आखिर वो ‘सेक्युलर’ जो ठहरे!
जवाहर लाल नेहरू ने भले ही ‘भारत: एक खोज’ लिखी, लेकिन ये आश्चर्य की बात है कि इस धरती की परंपराओं को आगे बढ़ाने में उन्हें शर्म महसूस होती थी। उन्होंने ‘स्वतंत्रता पार्टी’ के संस्थापक रहे चक्रवर्ती राजगोपालचारी से इस बारे में पूछा, जो भारतीय संस्कृति की गहरी समझ रखते थे। चक्रवर्ती राजगोपालचारी बाद में भारत के गवर्नर-जनरल और गृह मंत्री भी बने। उन्होंने इस समस्या का समाधान ‘सेंगोल’ के रूप में किया।
जवाहरलाल नेहरू से ज्यादा चिंता तो लॉर्ड माउंटबेटन को थी कि इस सत्ता हस्तांतरण की प्रतीकात्मकता क्या हो और इस समारोह को विशेष बनाने के लिए क्या किया जाए। इस तरह चोल राजाओं का एक विधि अनुष्ठान भारत की आज़ादी के सबसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम का हिस्सा बना। प्राचीन काल में गैर-ब्राह्मण ‘आधीनम्’ पुरोहितों द्वारा इस अनुष्ठान को संपन्न कराया जाता था। ये शैव संप्रदाय में आते थे। थिरुवावदुथुरई मठ से राजाजी के आग्रह पर स्वतंत्रता समारोह में परंपराओं के वहन का कार्य संभाला।
इस दौरान तमिल कवि संत थिरुज्ञानसंबंधर द्वारा रचित ‘कोलारु पदिगम’ का गायन किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच 14 अगस्त, 1947 को सेंगोल को जवाहर लाल नेहरू को सौंपा गया, पुरोहितों द्वारा इसे शुद्ध जल से पवित्र किए जाने के बाद। जिस ‘सेंगोल’ का उस समय इस्तेमाल हुआ था, उसे मद्रास के स्वर्णकार वुम्मिडि बंगारू चेट्टी ने हस्तशिल्प कारीगरी द्वारा बनवाया था। दुर्भाग्य है कि जवाहरलाल नेहरू और फिर कॉन्ग्रेस ने दशकों तक इस देश पर राज करने के बावजूद ‘सेंगोल’ को कभी याद नहीं किया। आखिर ‘सेकुलरिज्म’ जो खतरे में आ जाता।
सबसे दुर्भाग्यपूर्ण बात तो ये है कि तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी DMK भी नए संसद भवन के उद्घाटन के बॉयकॉट कर रही है। उन्हें तो खुश होना चाहिए, जिस तमिलनाडु की जनता ने उन्हें चुना है उस तमिल संस्कृति को दिल्ली में अपना कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ का ध्येय लेकर चल रहे हैं। जो लोग दक्षिण भारत में क्षेत्रीय कट्टरवादी विचारधारा को पोषण देते हैं और आर्य-द्रविड़ वाले खेल से भारतीय समाज को विभाजित करने का उपक्रम चलाते हैं, उन्हें भला ‘सेंगोल’ का दिल्ली में स्थापित किया जाना कैसे पसंद आएगा?
‘सेंगोल’ तमिलनाडु को दिल्ली से जोड़ रहा है। ‘सेंगोल’ चोल राजवंश की अनुष्ठान परंपरा को जीवंत कर रहा है। ‘सेंगोल’ भारत के इतिहास, प्राचीन सभ्यता और संस्कृति का प्रतीक बन कर सामने आ रहा है। ‘सेंगोल’ की स्थापना वेदों की इस भूमि पर वैदिक रीति-रिवाजों का सम्मान है। ‘सेंगोल’ हजारों वर्ष पुरानी इस जीवंत सभ्यता की समृद्धि का प्रतीक है। ‘सेंगोल’ सत्ता को शिव से जोड़ता है। ‘सेंगोल’ सत्ताधीशों को सत्य और न्याय की याद दिलाता रहेगा।
जिस संविधान की देते हैं दुहाई, उसमें भी भगवान श्रीराम
आपने अक्सर ‘सेक्युलर’ ब्रिगेड को बात-बार पर संविधान की चर्चा करते हुए देखा होगा। भारतीय संस्कृति के हर प्रदर्शन को वो संविधान से जोड़ कर कहने लगते हैं कि इसकी अनुमति नहीं दी जा सकती है। लेकिन, ये लोग भूल जाते हैं कि उसी संविधान की मूल प्रति में भगवान श्रीराम की तस्वीर है। आज ‘जय श्री राम’ को असंवैधानिक ठहराने की हर कोशिश हो रही है। संविधान भारतीय कलाकृति का भी एक उत्कृष्ट उदाहरण है, आइए बताते हैं कैसे।
रवीन्द्रनाथ टैगोर के ‘विश्व भारती’ के कलाकारों ने इसे बनाया था, जिसमें 5 वर्ष लगे थे। भारत के संविधान की मूल प्रति में कलाकारी की शुरुआत सिंधु घाटी सभ्यता के प्रतीक वृषभ से होती है, अर्थात साँड़। इसे उस समय के सील पर देखा गया था, जो आज तक इतिहासकारों में चर्चा का विषय है। भारत के वैदिक युग को भी हमारे संविधान की मूल प्रति में दर्शाया गया है, एक गुरुकुल के रूप में। इसी तरह ‘मूलभूत अधिकारों’ वाला हिस्सा भगवान श्रीराम से शुरू होता है।
रामायण से जो तस्वीर ली गई है, उसमें भगवान श्रीराम, उनके भाई लक्ष्मण और पत्नी सीता को वनवास के लिए जाते हुए दिखाया गया है। भगवान राम को अदालत द्वारा ‘संवैधानिक देवता’ भी घोषित किया जा चुका है और उनकी इस तस्वीर का इस्तेमाल अयोध्या के एक जजमेंट में भी हुआ था। इसी तरह ‘राज्य नीति के निर्देशक सिद्धांत’ वाले हिस्से में श्रीकृष्ण और अर्जुन हैं। युद्ध भूमि में श्रीकृष्ण के अर्जुन को भगवद्गीता का ज्ञान दिया था, उसी तस्वीर को यहाँ उकेरा गया है।
युद्ध भूमि में अर्जुन को गीता का ज्ञान देते श्रीकृष्ण – संविधान की मूल प्रति में ये तस्वीर
इतना ही नहीं, महात्मा बुद्ध और महावीर भी हमारे संविधान की मूल प्रति में मौजूद हैं। यहाँ भी चोल राजवंश का कलेक्शन दिखता है। चोल राजवंश की नटराज प्रतिमा की तस्वीर उकेरी गई है। भाग-13, जिसमें व्यापार एवं वाणिज्य के बारे में बताया गया है, उसमें महाबलीपुरम में अर्जुन को तपस्या करते हुए दिखाया गया है। इसी तरह छत्रपति शिवाजी महाराज और गुरु गोविंद सिंह की भी तस्वीर है। क्या राम, कृष्ण, अर्जुन, तपस्या और नटराज की बात करना ‘सेक्युलर’ नहीं है? वामपंथी अब भी ऐसा कहेंगे।
हाल के समय में देश के अलग-अलग हिस्सों में ऐसी कई घटनाएँ हुईं है, जब मुस्लिम लड़कियों के साथ दिखने पर हिंदुओं को इस्लामी कट्टरपंथी समूह ने निशाना बनाया है। अब मध्य प्रदेश के इंदौर में एक मस्जिद के पास हिंदू विरोधी पर्चे बाँटे जाने का मामला सामने आया है। इसमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और बजरंग दल पर मुस्लिम लड़कियों को मुर्तद (काफिर) बनाने की साजिश रचने का आरोप लगाया गया है। इस साजिश को ‘भगवा लव ट्रैप’ का नाम पर्चे में दिया गया है।
पर्चे में मुस्लिम लड़कियों से कहा गया है, “तेरे ईमान की कीमत 7 जमीन और 7 आसमानों से ज्यादा है। तेरी इज्जत सारी दुनिया के मुसलमानों की जान से ज्यादा कीमती है। तू अपने वालिद का फक्र है, तू अपने भाई का गुरूर है। तू अपने खानदान की इज्जत है। तू कोई मामूली नहीं है बहन, बल्कि तू इस्लाम की शहजादी है।” इसके बाद आरोप लगाया गया है कि आरएसएस और बजरंग दल हर साल 10 लाख मुस्लिम लड़कियों को मुर्तद (काफिर) बनाकर उनकी इज्जत को तार-तार करना चाहते हैं। साथ ही महाराष्ट्र के अमरावती में 800 से ज्यादा मुस्लिम लड़कियों के काफिर हो जाने का दावा किया गया है।
पर्चे में कहा गया है कि सोशल मीडिया (फेसबुक, इंस्टाग्राम आदि) के जरिए, स्कूल और कॉलेज में मुस्लिम लड़कियों को फँसाया जाता है। इसमें आगे कहा गया है, “बहन तू अपना शिकार ना बनना। तू भगवा लव ट्रैप में ना फँसना। थोड़े दिनों की झूठी खुशी, तोहफे और पैसों के लालच में आकर अपनी दुनिया और आखिरत को खराब ना कर। अगर तुझसे कोई गलती हो गई हो तो वापस आ जा, तेरा भाई तेरी मदद के लिए तैयार है। अल्लाह तेरे ईमान, इज्जत और आबरु की हिफाजत करें, आमीन।”
दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार मंगलवार 23 मई 2023 की रात एक महिला हिंदू संगठन के लोगों के साथ पर्चा लेकर रावजी बाजार थाने पहुँची थी। उन्होंने पुलिस को बताया कि हिंदुओं को काफिर बताते हुए रावजी बाजार क्षेत्र में कलालकुई मस्जिद के पीछे ये पर्चे बाँटे गए हैं। पुलिस मामले की जाँच कर रही है।
पर्चे पर न तो इसे छपवाने वाले और न ही इसे छापने वाले प्रिंटिंग प्रेस का जिक्र है। पुलिस इसका लगाने में जुटी हुई है। पुलिस के मुताबिक 10 अज्ञात लोगों के IPC की धारा 153- A के तहत FIR दर्ज की गई है। आरोपितों को चिन्हित करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
28 मई 2023 को देश की नई संसद भवन का उद्घाटन होना है। लेकिन कॉन्ग्रेस सहित कई विपक्षी दलों ने इसे भी सियासी मौका बना दिया है। ‘विपक्षी एका’ के नाम पर 19 दलों ने उद्घाटन समारोह के बहिष्कार का ऐलान किया है। लेकिन कई गैर एनडीए दलों ने इस कार्यक्रम में शामिल होने की घोषणा करते हुए विपक्षी एका के राजनीतिक स्टंट पर पानी फेर दिया है।
रिपोर्टों के मुताबिक चंद्रबाबू नायडू की तेलुगू देशम पार्टी, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री जगनमोहन रेड्डी की वाईएसआर कॉन्ग्रेस, ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की बीजू जनता दल, मायावती की बहुजन समाज पार्टी, सुखबीर सिंह बादल की शिरोमणि अकाली दल इस कार्यक्रम में शिकरत करेगा। तमिलनाडु की विपक्षी पार्टी एआईडीएमके भी उद्घाटन में शामिल होगा।
पंजाब की विपक्षी पार्टी और भाजपा की पूर्व सहयोगी पार्टी शिरोमणि अकाली दल ने नए संसद भवन के उद्घाटन समारोह में शामिल होने का फैसला किया है। शिअद नेता दलजीत चीमा ने बुधवार (24 मई 2023) को एएनआई से बातचीत करते हुए कहा कि उनकी पार्टी विपक्षी दलों द्वारा उठाए गए मुद्दों से सहमत नहीं है। नए संसद भवन का उद्घाटन देश के लिए गर्व की बात है। इसलिए पार्टी ने उद्घाटन समारोह में शामिल होने का फैसला किया है।
#WATCH | The inauguration of the new Parliament building is a matter of pride for the country, so we have decided that the SAD party will attend the inauguration ceremony on 28th May. We do not agree with the issues raised by opposition parties: SAD leader Daljit Singh Cheema pic.twitter.com/5vZCvzZshW
वाईएसआर कॉन्ग्रेस (YSRCP) ने भी नए संसद भवन के उद्घाटन कार्यक्रम में शामिल होने का फैसला लिया है। पार्टी नेता और राज्य सभा सांसद विजयसाई रेड्डी ने नए संसद भवन के उद्घाटन का समर्थन किया है। एक ट्वीट में उन्होंने कहा है कि देश का नया संसद भवन आधुनिक, आत्मनिर्भर और गौरवान्वित करने वाला है। आखिरकार देश के पास ऐसी इमारत है, जिसे लोकतांत्रिक देश की संसद के रूप में काम करने के लिए तैयार किया गया है।
The inauguration of the New Parliament Building on May 28 by PM @narendramodi ji is a welcome step. The new building is a depiction of an India that is modern, self-reliant and proud. We finally have a building that is made to serve as the Parliament of a democratic country.
चंद्रबाबू नायडू की तेलगु देशम पार्टी ने भी साफ कर दिया है कि पार्टी नए संसद भवन के उद्घाटन समारोह का हिस्सा बनेगी। उसके अलावा एआईडीएमके, बीजेडी और बीएसपी जैसी पार्टियाँ भी कार्यक्रम में शामिल होंगी।
TDP (Telugu Desam Party) will attend the new Parliament building inauguration in Delhi on 28th May, confirms party's top leadership pic.twitter.com/HhaIXCrufX
28 मई 2023 को दोपहर 12 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नए संसद भवन का उद्घाटन करेंगे। कॉन्ग्रेस, शिवसेना (UBT), आम आदमी पार्टी, TMC, राजद, जदयू सहित 19 विपक्षी दलों ने एक संयुक्त बयान जारी कर उद्घाटन समारोह का बहिष्कार करने की बात कही है। AAP के नेता संजय सिंह ने कहा है कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से नए संसद भवन का उद्घाटन नहीं कराया जाना भारत के दलित आदिवासी और वंचित समाज का अपमान है। कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी ने कहा है कि नए संसद भवन का उद्घाटन राष्ट्रपति जी को ही करना चाहिए। अपने बयान में विपक्षी दलों ने कहा है, “जब संसद से लोकतंत्र की आत्मा को चूस लिया गया और सरकार डेमोक्रेसी के लिए खतरा बन गई है तो नए भवन का कोई मूल्य नहीं है।”
इन सब के बीच एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा है कि संसद भवन का उद्घाटन लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से कराया जाना चाहिए। यदि ओम बिरला से उद्घाटन नहीं कराया गया तो AIMIM इस कार्यक्रम का हिस्सा नहीं बनेगी।
तमिलनाडु के मदुरै मेडिकल कॉलेज (MMC) में एनेस्थिसियोलॉजी विभाग के सहायक प्रोफेसर सैयद ताहिर हुसैन को यौन उत्पीड़न के आरोपों के चलते शुक्रवार (19 मई, 2023) को सस्पेंड कर दिया गया है। ताहिर हुसैन के खिलाफ कॉलेज से जुडी 23 महिलाओं ने 6 मई, 2023 को यौन शोषण की शिकायत दर्ज करवाई थी। इन शिकायतकर्ताओं में प्रोफेसर, नर्स और पोस्ट ग्रेजुएट छात्राएँ भी शामिल हैं। कॉलेज की आंतरिक जाँच में ये आरोप सही पाए गए। हुसैन पर ऑपरेशन थिएटर में मरीजों से भी बदसलूकी के आरोप हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ताहिर हुसैन पर लगे आरोपों की जाँच चिकित्सा शिक्षा निदेशालय (DME) ने विशाखा समिति से करवाई थी। जाँच के बाद पीड़िताओं के आरोपों को सही पाया गया था। विशाखा समिति मुखिया के डीन डॉ धनलक्ष्मी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए प्रोफेसर सैयद ताहिर हुसैन के निलंबन की पुष्टि की। इसी प्रेस कॉन्फ्रेंस में ताहिर की करतूतों का भी खुलासा किया गया। शिकायतकर्ताओं में ऑपरेशन थिएटर कोर्स की 18 छात्राएँ, एनेस्थिसियोलॉजी विभाग के 2 पोस्ट ग्रेजुएट, 1 नर्स और 2 प्रोफेसर शामिल हैं। इन सभी ने खुद को ताहिर हुसैन के यौन उत्पीड़न का शिकार बताया।
ताहिर पर लगे आरोपों की जाँच करने वाली विशाखा समिति की प्रमुख डॉ धनलक्ष्मी ने बताया कि सर्जरी के दौरान ताहिर हुसैन के साथ रहने से उनके सहयोगी डरते थे। वह छात्राओं को अश्लील उपनामों से बुलाया करता था। वहीं ताहिर पर आरोप लगाने वाली छात्राओं का आरोप है कि वो उन्हें गलत तरीके से छुआ करता था। साथ ही ताहिर छत्राओं को ऑपरेशन थिएटर में मुखौटे हटाने के लिए कहता था। इसके लिए वह छात्राओं के चेहरे अच्छी तरह से देख पाने की दलील देता था।
मेडिकल कॉलेज की पीड़िताओं का यह भी आरोप है कि वह लड़कियों के रंग पर भी टिप्पणी किया करता था। ‘गोरी’ लड़कियों को प्रोफ़ेसर ताहिर उनके माता-पिता के पुण्य से पैदा हुआ बताता था। पीड़िताओं का यह भी आरोप है कि ताहिर उनके बाल सुंदर होने की बात कहते हुए बालों को खींचा करता था। इस दौरान वह लड़कियों की भौहें सुंदर होने जैसी अनुचित टिप्पणी किया करता था। आरोप यह भी है कि अपने रिश्तेदार की मौत पर रो रही एक लड़की को उसने सांत्वना देने के बहाने गलत तरीके से गले भी लगाया था।
ताहिर पर अपनी महिला मरीजों से भी छेड़छाड़ का आरोप है। मीडिया रिपोर्ट्स में ताहिर के यौन शोषण की शिकार पीड़िताओं की सँख्या 23 से 41 के बीच बताई जा रही है। आरोप यह भी है कि 6 मई 2023 को शिकायत होने के बाद भी प्रोफेसर ताहिर की लड़कियों के प्रति हरकतें ज्यों की त्यों बनी रहीं और वो छेड़खानी करता रहा। उस पर छात्राओं का यौन उत्पीड़न ऑपरेशन थिएटर के अंदर और बाहर दोनों स्थानों पर करने का आरोप है।
बताया यह भी जा रहा है कि साल 2017 में भी प्रोफेसर ताहिर हुसैन पर कॉलेज में यौन शोषण के आरोप लगे थे तब उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई थी। हालाँकि ताहिर हुसैन ने खुद पर लगे आरोपों को गलत बताया है। उनका कहना है कि उन्होंने राज्य में सरकारी डॉक्टरों के प्रमोशन, तबादले और पोस्टिंग में गड़बड़ी का पर्दाफाश करने की वजह से उन्हें फर्जी शिकायतों के जरिए उन्हें घेरा जा रहा है। ताहिर ने खुद को हर जाँच का सामना करने के लिए तैयार बताया।
पश्चिम बंगाल (West Bengal) में पुलिस ने छापेमारी करके 34,000 किलोग्राम (किसी-किसी रिपोर्ट में 1.14 लाख किलोग्राम की बात कही गई है) अधिक विस्फोट (Explosive) बरामद किया है। इसके साथ ही 100 से अधिक लोगों को भी गिरफ्तार किया गया है। राज्य के पुलिस अधिकारी के अनुसार के इस मामले में 132 मामले दर्ज किए गए हैं।
राज्य पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मंगलवार (23 मई 2023) को बताया कि पुलिस ने ग्रामीण पश्चिम बंगाल में विभिन्न जगहों पर छापेमारी की। इस दौरान भारी मात्रा में विस्फोटक और अवैध पटाखे बरामद किए गए। इन्हें विभिन्न कारखानों में अवैध रूप से बनाया जा रहा था।।
छापेमारी की यह कार्रवाई सोमवार (22 मई 2023) को शुरू हुई और मंगलवार की रात तक जारी रही। पुलिस ने जिन इलाकों में छापेमारी की, उनमें नदिया, उत्तर और दक्षिण 24 परगना जैसे जिले शामिल हैं। छापेमारी के साथ ही पुलिस ने पटाखों पर भी प्रतिबंध लगा दिया।
पुलिस अधिकारी ने कहा, “अब तक हमने लगभग 34,000 किलोग्राम विस्फोटक जब्त किए हैं और पटाखों पर प्रतिबंध लगा दिया है। कम-से-कम 100 लोगों को कथित तौर पर उन्हें स्टोर करने और अपना व्यवसाय चलाने के लिए गिरफ्तार किया है।” इन जगहों पर पटाखा बनाने का काम होता था।
उन्होंने कहा कि विभिन्न जिलों की पुलिस को जब्त किए गए विस्फोटकों और पटाखों की बरामदगी और गिरफ्तारियों पर रिपोर्ट दर्ज करने के लिए कहा है। दरअसल, पिछले 8 दिनों के भीतर ग्रामीण बंगाल में अवैध पटाखा निर्माण इकाइयों में विस्फोट की कई घटनाएँ सामने आई थीं।
बंगाल में विस्फोट की तीन घटनाओं और एक गोदाम में आग लगने से 17 लोगों की मौत हो गई थी। वहीं, 16 मई को पुरबा मेदिनीपुर के एगरा में हुए विस्फोट में मुख्य आरोपित सहित 12 लोगों की मौत हो गई थी। वहीं, 22 मई को दक्षिण 24 परगना के बजबज में एक परिवार के तीन सदस्यों की मौत हो गई थी।
इस बीच पश्चिम बंगाल सरकार ने मंगलवार (22 मई 2023) को दक्षिण 24 परगना जिले के बारुईपुर इलाके के हराल में ‘बाजी (पटाखे) बाजार’ को बंद करने का फैसला किया। अधिकारी ने कहा कि वहाँ के सभी व्यापारियों को कच्चे माल को स्थानीय पुलिस स्टेशन में जमा करने के लिए कहा गया है।
राजस्थान के जैसलमेर में पाकिस्तानी हिंदुओं के लिए 40 बीघा जमीन आवंटित की जाएगी। इस जमीन की पहचान कर ली गई है। इसे समतल करने का काम शुरू कर दिया गया है। कलेक्टर IAS टीना डाबी ने पाकिस्तानी हिंदुओं की बस्ती पर बुलडोजर कार्रवाई के बाद इनके पुनर्वास का भरोसा दिलाया था।
रिपोर्ट के अनुसार इस जमीन का चयन जिला मुख्यालय से करीब 5 किलोमीटर दूर मूलसागर के पास किया गया है। जमीन समतल करने का काम शुरू करने से पहले पूजा-अर्चना भी की गई। नगरीय सुधार न्यास (UIT) को बिजली और पानी की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। इस जमीन पर करीब 200 परिवारों को बसाने की योजना है।
जमीन तय किए जाने के बाद शरणार्थी भी खुश हैं। उन्होंने टीना डाबी का आभार जताया है। बताया जा रहा है कि पाकिस्तानी हिंदू शरणार्थियों के पुनर्वास के लिए यूआईटी द्वारा अलग से जमीन चिन्हित करने का यह शायद राजस्थान में पहला मामला है। फिलहाल 50 शरणार्थी परिवार रैन बसेरे में रह रहे हैं। टीना डाबी के निर्देश पर इनके लिए भोजन-पानी का इंतजाम भी किया गया है। जिला प्रशासन ने इन शरणार्थियों की मदद के लिए एक कमेटी का भी गठन किया है। इन्हें नागरिकता दिलाने का प्रयास भी किया जाएगा।
गौरतलब है कि 16 मई 2023 को राजस्थान के जैसलमेर के अमर सागर इलाके में पाकिस्तानी हिंदू शरणार्थियों की बस्ती को उजाड़ दिया गया था। कलेक्टर के आदेश के बाद यूआईटी की टीम ने भारी पुलिस बल की मौजूदगी में यहाँ बुलडोजर चलाया था। इसके बाद टीना डाबी विवादों में घिर गईं थी। इसके बाद जिला प्रशासन ने प्रभावित लोगों के रहने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की थी। जमीन के चयन के लिए सर्वे टीम बनाई गई थी।
इससे पहले राजस्थान के जोधपुर में भी इसी तरह की कार्रवाई की गई थी। 24 अप्रैल 2023 को चोखा गाँव में जोधपुर विकास प्राधिकरण ने अतिक्रमण विरोधी अभियान के नाम पर शरणार्थी हिन्दुओं के घरों पर बुलडोजर चलाया था। इस कार्रवाई के शिकार हुए अधिकतर लोगों के पास भारत में रहने के लिए लॉन्ग टर्म वीजा तो है, लेकिन अब तक उन्हें भारत की नागरिकता नहीं मिली है।
भारत सरकार के खिलाफ प्रोपेगेंडा फैलाने वाला संगठन ‘एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया’ एक बार फिर चर्चा में है। एमनेस्टी इंडिया ने मंगलवार (23 मई 2023) को कर्नाटक में नव-निर्वाचित कॉन्ग्रेस सरकार के लिए हिंदू विरोधी माँगों की एक सूची जारी की। इसमें हिजाब पर लगे प्रतिबंध को हटाने, गोहत्या की अनुमति देने और मुस्लिम दुकानों का बहिष्कार करने वाले हिंदुओं के खिलाफ कार्रवाई की अपील की है।
एमनेस्टी इंडिया ने सिलसिलेवार कई ट्वीट कर कर्नाटक में कॉन्ग्रेस सरकार से मानवाधिकारों को बनाए रखने के लिए तीन प्रमुख कार्रवाई का आह्वान किया। एमनेस्टी इंडिया ने अपनी पहली माँग में शैक्षणिक संस्थानों में महिलाओं के हिजाब पहनने पर लगे प्रतिबंध को हटाने को कहा। उसने कहा, “यह प्रतिबंध मुस्लिम लड़कियों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, धर्म की स्वतंत्रता और शिक्षा के अधिकार के बीच चयन करने के लिए मजबूर करता है। इससे समाज में सार्थक रूप से भाग लेने की उनकी क्षमता बाधित होती है।”
?? Immediately revoke the ban on women wearing hijabs in educational institutions. The ban forces Muslim girls to choose between their rights to freedom of expression and religion, and their right to education, hindering their ability to meaningfully participate in society. 2/5
दरअसल, प्रत्येक शैक्षणिक संस्थान फिर चाहे वह सरकारी हो या निजी, सबका एक निश्चित ड्रेस कोड होता है। खासतौर पर स्कूलों में। कर्नाटक में दिसंबर 2021 में मुस्लिम लड़कियों के एक समूह ने क्लास में हिजाब पहनकर आना शुरू किया। रोके जाने पर उन्होंने सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। इसके बाद सरकार ने राज्य में शैक्षणिक संस्थानों में हिजाब पर प्रतिबंध लगाने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए।
सरकार के इस कदम का मुस्लिमों ने विरोध किया और अदालत का दरवाजा तक खटखटाया। हालाँकि, कर्नाटक हाईकोर्ट ने माना था कि हिजाब इस्लाम धर्म के अनिवार्य धार्मिक प्रथा का हिस्सा नहीं है। इसलिए कोर्ट ने कक्षाओं में सरकार द्वारा लगाए हिजाब पर प्रतिबंध के फैसले को बरकरार रखा।
हाईकोर्ट के इस फैसले को मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। फिलहाल यह मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। ऐसे में इस तरह की माँग करके एमनेस्टी इंटरनेशनल भारत के न्यायिक मामलों में दखल देने की कोशिश कर रहा है। इसे शीर्ष अदालत में परिणाम को प्रभावित करने के प्रयास के रूप में देखा जा सकता है।
एमनेस्टी इंडिया ने अपनी दूसरी माँग में पशु क्रूरता (रोकथाम) अधिनियम, 2020 और कर्नाटक धार्मिक स्वतंत्रता अधिकार संरक्षण विधेयक, 2022 के प्रावधानों की समीक्षा करने और उन्हें निरस्त करने के लिए कहा। दूसरे शब्दों में, एमनेस्टी इंडिया ने कर्नाटक में गोहत्या की अनुमति और हिंदू विरोधी ताकतों को राज्य में धर्मांतरण रैकेट (लव जिहाद) चलाने की माँग की है।
?? Review and repeal discriminatory provisions in the Karnataka Prevention of Slaughter and Preservation of Cattle Act, 2020 and the Karnataka Protection of Right to Freedom of Religion Bill, 2022, which can be misused and weaponized against minorities. 3/5
एमनेस्टी इंडिया ने अपने ट्वीट में आगे कहा कि गोवध और धर्मांतरण पर बने कानून का दुरुपयोग हो सकता है और इसे अल्पसंख्यकों के खिलाफ हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके अलावा, एमनेस्टी इंडिया ने मुस्लिम विक्रेताओं का बहिष्कार करने वाले हिंदुओं के खिलाफ कार्रवाई का आह्वान किया।
उसने अपने ट्वीट में कहा, “राज्य में चुनावों से पहले मुस्लिम के आर्थिक बहिष्कार और उनके खिलाफ हिंसा का आह्वान किया गया था। धर्म-जाति आधारित भेदभाव से प्रेरित घृणा और घृणित अपराधों को समाप्त करने के लिए जवाबदेही सुनिश्चित करें।” दिलचस्प बात यह है कि ऐसी कई रिपोर्ट आई हैं, जिनमें मुस्लिमों ने हिंदू व्यवसायों का बहिष्कार करने का आह्वान किया है, लेकिन एमनेस्टी ने इसे कभी भी घृणित नहीं कहा।
This is an opportunity for the state authorities to fulfill their obligations to respect, protect, and fulfill human rights. @AIIndia calls on the authorities to demonstrate their commitment by taking these effective and immediate steps to guarantee rights.
एमनेस्टी इंडिया स्पष्ट रूप से भारत में कट्टरपंथी इस्लामवादियों के घृणित अपराधों की आलोचना करने में विफल रहा है। उदाहरण के लिए, राजस्थान के उदयपुर में हिंदू दर्जी कन्हैया लाल की हत्या की निंदा की, लेकिन इस संगठन ने एक बार भी यह उल्लेख नहीं किया कि उनकी हत्या दो कट्टरपंथी इस्लामवादियों ने की थी। यहाँ तक कि उसने गिरफ्तार किए गए आरोपितों- रियाज और गौस मोहम्मद का नाम तक नहीं लिया।
एमनेस्टी के इस ट्वीट पर कॉन्ग्रेस ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। कर्नाटक कॉन्ग्रेस के एमएलसी प्रकाश राठौड़ से इन माँगों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, “सरकार ने कुछ दिन पहले ही अपना कामकाज शुरू किया है। मुझे पूरा यकीन है कि बहुत जल्द एक उचित निर्णय लिया जाएगा।”
#WATCH | "…The government started its functioning only a few days ago. I am quite sure an appropriate decision will be taken very soon," says Karnataka Congress MLC Prakash Rathod when asked about Amnesty India's tweet asking the State Govt to take three priority actions for… pic.twitter.com/lwJxUbhI2f
एमनेस्टी इंटरनेशनल का हिंदू विरोधी और भारत विरोधी गतिविधियों का इतिहास रहा है। साल 2019 में ऑपइंडिया में प्रकाशित एक रिपोर्ट में एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया, ब्रिटिश सरकार और कट्टरपंथी इस्लामवादियों के बीच संबंधों का पर्दाफाश किया गया था। यह संगठन लगातार भारत को मानवाधिकारों का उल्लंघन करने वाला और मुस्लिम विरोधी बताने की कोशिश करता रहा है।
यही नहीं, एमनेस्टी इंडिया ने अगस्त 2020 में दिल्ली दंगों की रिपोर्ट के नाम पर जमकर प्रोपेगेंडा फैलाया था और दिल्ली पुलिस के क्रिया-कलापों को गलत तरीके से पेश किया था। ‘एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया’ ने सितंबर 2020 में भारत में अपने सभी क्रियाकलापों को रोक दिया था।
उस दौरान संस्था ने कहा था कि अब वो भारत में ‘मानवाधिकार की रक्षा’ के सारे क्रिया-कलापों को रोक रही है। ‘एमनेस्टी’ ने इसके पीछे भारत सरकार की ‘बदले की कार्रवाई’ को जिम्मेदार ठहराया था। उसने कहा था कि भारत सरकार ने उसके सभी बैंक खातों को पूरी तरह सीज कर दिया है।
बॉलीवुड अभिनेता आमिर खान (Aamir Khan) और फातिमा सना शेख (Fatima Sana Shaikh) की नजदीकियों को लेकर लंबे समय से अटकलें लग रही है। ‘दंगल’ फिल्म में दोनों ने बाप-बेटी किरदार निभाया था। अब आमिर और फातिमा का पिकलबॉल खेलते हुए एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। योगेन शाह ने इस वीडियो को अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर शेयर किया है। पिकलबॉल खेलने के दौरान आमिर ने ब्लैक ट्रैक पैंट और रेड टी-शर्ट पहनी हुई है, जबकि फातिमा ने कैजुअल ग्रे टी-शर्ट और ब्लैक शॉर्ट्स पहने हैं। दोनों एक टीम में खेलते हुए दिखाई दे रहे हैं।
इस वीडियो के सामने आने के बाद एक बार फिर दोनों के रिश्तों को लेकर यूजर्स सवाल उठा रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, “मम्मी नंबर 3 आने वाली हैं।” दिनेश भार्गव लिखते हैं, “बहुत लड़कियों के साथ खेल चुका है ये पिकलबॉल। चार-चार शादियाँ करके भी इसका मन नहीं भरा। अब बेटी की उम्र की लड़की से शादी कर सकता है? ढोंगी हैं ये सब।”
योगेन शाह की इंस्टाग्राम पोस्ट का स्क्रीनशॉट
दूसरा यूजर लिखता है कि ये सबसे बड़ा गलत इंसान है और अय्याश इंसान है। अपने फायदे के लिए यूज करता है। धोखेबाज इंसान ने दोनों धर्म से खिलवाड़ किया है।
योगेन शाह की इंस्टाग्राम पोस्ट का स्क्रीनशॉट
एक और यूजर ने लिखा, “ये आमिर लाल सिंह अब इंडिया का सेलिब्रिटी नहीं रहा। वो अब एक आम मुस्लिम नागरिक है, जो संविधान को दरकिनार कर शरिया के मुताबिक चौथी शादी अपनी बेटी की उम्र की लड़की से करने को आमादा है। फ़ातिमा अभी पिकलबॉल खेल रही हैं, जल्दी ही पिकल खाने की नौबत आ जाएगी।”
योगेन शाह की इंस्टाग्राम पोस्ट का स्क्रीनशॉट
बता दें कि 2021 में जब आमिर खान और उनकी दूसरी बीवी किरण राव ने अपनी 15 साल की शादी को ख़त्म कर तलाक लेने का फैसला लिया, तब भी सोशल मीडिया पर ‘दंगल’ फेम अभिनेत्री फातिमा सना शेख ट्रेंड होने लगी थीं। लोग आमिर खान के साथ उनका नाम जोड़ने लगे थे। यहाँ तक की लोगों ने फातिमा सना शेख को आमिर खान और किरण राव की तलाक की वजह तक बता दिया था। एक सोशल मीडिया यूजर ने तो फातिमा सना शेख और आमिर खान को बधाई देते हुए ये कामना तक कर डाली कि उनका रिश्ता लंबा चले।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2024 के में अपने कार्यकाल का 10 वर्ष पूरा कर लेंगे। इसके बावजूद उनकी सरकार के खिलाफ न तो कहीं कोई एंटी-इंकम्बेंसी दिखती है और न ही भ्रष्टाचार के एक भी पुख्ता आरोप लगे हैं। उधर राहुल गाँधी ने ‘भारत जोड़ो यात्रा’ की और उनकी कॉन्ग्रेस पार्टी को कर्नाटक में भी जीत मिली। मीडिया फिर से उनकी छवि बनाने में लग गया है। लेकिन, NDTV के पोल में साफ़ दिखता है कि अभी भी आम जनता की पसंद कौन है।
मीडिया संस्थान NDTV के ‘पब्लिक ओपिनियन’ में पता चला है कि प्रधानमंत्री के पद के लिए नरेंद्र मोदी अब भी आम जनता की सबसे बड़ी पसंद हैं। इस स्पेशल सर्वे को मीडिया संस्थान ने लोकनीति-सेंटर और स्टडी ऑफ़ डेवलपिंग सोसाइटीज’ के साथ मिल कर किया है। मोदी पीएम के रूप में 9 साल पूरे कर चुके हैं और अगले साल लोकसभा चुनाव होना है। ताज़ा पोल 10 मई से लेकर 19 मई तक 19 राज्यों में किया गया।
खास बात ये है कि ये कर्नाटक में विधानसभा चुनाव संपन्न होने के बाद हुआ। इस सर्वे से जनता के मूड को भाँपने का प्रयास किया गया। 43% लोगों ने कहा कि NDA को लगातार तीसरी बार सत्ता में आना चाहिए, जबकि 38% का ऐसा नहीं मानना है। 39% लोगों का कहना है कि अगर अभी लोकसभा चुनाव हो जाते हैं तो वो भाजपा को वोट देंगे। वहीं कॉन्ग्रेस के पक्ष में मतदान करने की बात मात्र 29% लोगों ने ही की। नरेंद्र मोदी को 43%, जबकि राहुल गाँधी को 27% लोग प्रधानमंत्री बनते देखना चाहते हैं।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल 4% लोगों की पसंद हैं। जबकि 3% लोग सपा प्रमुख अखिलेश यादव और 1% बिहार के सीएम नीतीश कुमार को पीएम बनते देखना चाहते हैं। 25% लोगों ने कहा कि वो पीएम मोदी के बोलने के अंदाज़ के कारण उन्हें पसंद करते हैं, जबकि 25% ने उनकी विकास योजनाओं के कारण उन्हें अपनी पसंद बताया। 13% ने उनकी मेहनत के कारण उन्हें अपनी पसंद करार दिया।
खास बात ये है कि मात्र 23% लोग ऐसे हैं, जिन्होंने कहा कि उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पसंद नहीं हैं। 34% ने कहा कि राहुल गाँधी 2024 लोकसभा चुनाव में पीएम मोदी के मजबूत विरोधी के तौर पर रह सकते हैं, जबकि 11% ने अरविंद केजरीवाल और 4% ने अखिलेश यादव का नाम लिया। 55% लोग केंद्र सरकार के कामकाज से संतुष्ट हैं, 17%जिनमें अति पूर्ण रूप से संतुष्ट हैं। 37% लोगों ने कहा कि ED-CBI सही तरीके से काम कर रही है। 2019 के 37% के मुकाबले भाजपा का वोट शेयर 39% दिख रहा है, जबकि कॉन्ग्रेस का 19% के मुकाबले 29% हो गया है, ऐसे इस सर्वे में पता चला।