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‘जिसने तुझे बनाया उसे ही आउट कर दिया, साँप है तू’: मोहित शर्मा को CSK फैंस दे रहे गाली, विराट फैंस ने शुभमन गिल को बनाया था निशाना

महेंद्र सिंह धोनी की टीम चेन्नई सुपर किंग्स आईपीएल 2023 के फाइनल में पहुँच गई है। चेन्नई सुपर किंग्स ने मंगलवार (23 मई 2023) को आईपीएल 2023 प्लेऑफ के पहले क्वालिफायर में हार्दिक पांड्या की गुजरात टाइटंस को 15 रनों से शिकस्त दी। हालाँकि, चेन्नई में खेले गए मैच में महेंद्र सिंह धोनी का बल्ला खामोश रहा। उन्होंने दो गेंदों का सामना किया और सिर्फ एक रन बनाया। धोनी का विकेट मोहित शर्मा ने लिया।

धोनी के आउट होने के बाद उनके फैंस गुजरात टाइटंस के गेंदबाज मोहित शर्मा से आक्रोशित नजर आए। वे सोशल मीडिया पर उन्हें गालियाँ दे रहे हैं।

फोटो साभार: मोहित शर्मा का इंस्टाग्राम

एक फैंस ने लिखा, “जिसने तुझे बनाया उसे ही आउट कर दिया। साँप है तू साँप।” आर्यन ने लिखा- कुछ शर्म है तो खेलना छोड़ दे फुद्दु प्लेयर।

फोटो साभार: मोहित शर्मा का इंस्टाग्राम

सीएसके के एक अन्य फैंस ने लिखा कि तू फास्ट बॉलर है या फिर स्लो बॉलर बे।

फोटो साभार: मोहित शर्मा का इंस्टाग्राम

वहीं, धोनी के कुछ फैंस ऐसे भी रहे जो मोहित शर्मा के समर्थन में मजबूती से खड़े दिखाई दिए और गाली देने वालों को जवाब देते नजर आए।

मोहित शर्मा की इंस्टाग्राम पोस्ट का स्क्रीनशॉट

इससे पहले ‘गुजरात टाइटंस (GT)’ के बल्लेबाज शुभमन गिल को ‘रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर (RCB)’ टीम के खिलाफ मैच में शतक लगाने के बाद सोशल मीडिया पर गाली सुननी पड़ी थी। आरसीबी के फैन्स ने क्रिकेटर गिल, उनकी बहन को गालियाँ और जान से मारने की धमकियाँ दी थी। दरअसल 21 मई 2023 को गिल ने मात्र 52 बॉल पर 104 रन बनाए थे। उनकी इस पारी ने आरसीबी को मैच में हराने में काफी मदद की, जिसे देखते हुए आरसीबी के फैंस उन पर भड़क गए।

बता दें कि शुभमन गिल के अलावा विजय शंकर को भी आरसीबी के फैन्स ने अपशब्द कहे थे। विजय ने गुजरात टाइटन्स की ओर से आरसीबी के खिलाफ खेले गए मैच में हाफ सेंचुरी जड़ी थी। विजय शंकर के अच्छे प्रदर्शन को लेकर एक यूजर ने लिखा था, “आज क्या खाकर आया है साले”, दूसरे ने लिखा था, “कभी इंडिया के लिए भी अच्छा परफॉर्म कर लिया कर।”

‘कॉन्ग्रेस ने फ्री का वादा किया है, मैं पैसे नहीं दूँगा’: कर्नाटक में बिजली बिल भरने से इनकार कर रहे लोग, कर्मचारियों की हो रही पिटाई

कर्नाटक के कोप्पल जिले में बिजली का मीटर चेक करने गए बिजली विभाग के एक कर्मचारी पर हमला कर दिया गया। कर्मचारी ने बिल नहीं जमा करने पर कनेक्शन काटने की चेतावनी दी थी। इस मामले में कर्नाटक पुलिस ने एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। कॉन्ग्रेस द्वारा फ्री बिजली देने की घोषणा के बाद कर्नाटक में इस तरह की घटनाएँ बढ़ी हैं।

दरअसल, गुलबर्गा इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई कंपनी लिमिटेड (GESCOM) का एक कर्मचारी मंजूनाथ ने कुकनपल्ली निवासी चंद्रशेखर हिरेमत से बिजली का बिल भरने को कहा। हिरेमत पर पिछले छह महीने का 9,999 रुपए का बकाया है। मंजूनाथ के इतना कहते ही हिरेमत ने उन्होंने गाली दी और कई थप्पड़ जड़ दिए।

मंजूनाथ के सहयोगी ने आरोपित की इस हरकत को अपने कैमरे में रिकॉर्ड कर लिया। इसे देखकर आरोपित और बौखला गया। उसने मंजूनाथ के सहयोगी पर भी हमला करने की कोशिश की। बाद में दोनों ने हिरेमत के खिलाफ मुनीराबाद पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज कराया।

सामने आए वीडियो में आरोपित चंद्रशेखर हिरेमत कहता हुआ दिख रहा है, “मैंने GESCOM कर्मियों से बिजली मीटर के पंजीकरण को बदलने के लिए कहा था और उन्होंने ऐसा नहीं किया। मैं भुगतान नहीं करूँगा, जो चाहो करो।

बता दें कि बिजली आपूर्ति अधिकारियों के साथ लोगों के बहस करने की कई घटनाएँ सामने आई हैं। लोगों द्वारा यह कहते हुए बिल देने से इनकार करते देखा गया कि कर्नाटक सरकार ने उन्हें मुफ्त बिजली देने का आश्वासन दिया है। कॉन्ग्रेस ने हर घर को 200 यूनिट तक मुफ्त बिजली देने का वादा किया है।

स्थानीय एक व्यक्ति ने कहा, “हम मौजूदा बिल का भुगतान नहीं करेंगे। चाहे कुछ भी हो। हमें 200 यूनिट मुफ्त बिजली देने का वादा किया गया है और हम इसे लेकर रहेंगे। भले ही अभी मुख्यमंत्री नहीं हैं।”

हाल ही में भाजपा नेता अमित मालवीय ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट किया था। इस वीडियो में चित्रदुर्ग के लोग दावा कर रहे हैं कि वे इस महीने का बिजली बिल नहीं भरेंगे। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस ने लोगों को मुफ्त बिजली देने की बात कही है।

उस वीडियो में लोगों को यह कहते हुए सुना गया, “चित्रदुर्ग के ग्रामीणों ने बिजली बिल का भुगतान करने से इंकार कर दिया। दूसरों को भी भुगतान न करने के लिए प्रेरित करें! वे बिल कलेक्टर को बताते हैं कि कॉन्ग्रेस ने सत्ता में आते ही उन्हें मुफ्त बिजली देने का वादा किया था … जाओ उनसे (कॉन्ग्रेस) ले लो। अगर कॉन्ग्रेस ने जल्द ही मुख्यमंत्री नहीं दिया तो चारों तरफ बवाल हो जाएगा।”

बताते चलें कि लंबे समय तक उहापोह की स्थिति से गुजरने के बाद कॉन्ग्रेस ने सिद्धरमैया को मुख्यमंत्री और डीके शिवाकुमार को उपमुख्यमंत्री बनाया है। शपथ लेने के बाद मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा कि कॉन्ग्रेस सरकार अपनी सभी चुनावी वादे को पूरा करेगी। कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद यह लागू हो जाएगा।

वहीं, कर्नाटक विद्युत नियामक आयोग (KERC) ने बिजली दामों में बढ़ोत्तरी लेने का फैसला लिया है। KERC ने बिजली की दरें 70 पैसे प्रति यूनिट बढ़ाने की मंजूरी दे दी है। नया टैरिफ 1 अप्रैल 2023 से लागू हो गया है।

भारत की स्वतंत्रता से जुड़ा है नंदी: नई संसद में स्थापित होगा Sengol, भारत का वह इतिहास जो नेहरू ने सत्ता पाते ही भुला दिया

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने जानकारी दी है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार (28 मई, 2023) को संसद के नए भवन के लोकार्पण के शुभ अवसर पर भारत की धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर पवित्र ‘सेंगोल’ को ग्रहण कर नए भवन में इसकी स्थापना करेंगे। साथ ही उन्होंने ‘सेंगोल’ को न्याय और निष्पक्षता का प्रतीक बताते हुए एक वीडियो भी शेयर किया। आप ज़रूर सोच रहे होंगे कि ये ‘सेंगोल’ क्या है और भारत सरकार से इसका क्या संबंध है।

‘सेंगोल’ का इतिहास जानने के लिए हमें सबसे पहले स्वतंत्रता के समय जाना होगा, जब भारत आज़ादी की लड़ाई जीत चुका था और सत्ता के हस्तांतरण के लिए कार्यक्रम होने वाला था। उस समय तमिलनाडु ‘मद्रास प्रेसिडेंसी’ के अंतर्गत आता था। पीयूष गोयल ने जो वीडियो शेयर किया, उसमें उस समय कुछ कलाकारों को दिल्ली के लिए कूच करने की तैयारी करते हुए देखा जा सकता है। उन्हें एक महत्वपूर्ण कार्य के लिए बुलाया गया था।

सत्ता के हस्तांतरण को पवित्रता प्रदान करते और उसकी वैधता स्थापित करने के लिए इन लोगों को बुलाया गया था। सत्ता एक शासक से दूसरे के पास जा रही थी, विदेशियों से स्वदेशियों के पास। भारत के अंतिम वायसरॉय लॉर्ड माउंटबेटन को अंग्रेजी सरकार की तरफ से सत्ता हस्तांतरण का कार्य पूरा करने के लिए भेजा गया था। इस दौरान उनके मन में सवाल था कि इस कार्यक्रम, या इस क्षण को कैसे प्रदर्शित किया जाना चाहिए?

हाथ मिलाने से भी काम चल सकता था, लेकिन वो इसे एक विशेष प्रतीकात्मकता देना चाहते थे। इस दौरान उन्होंने पंडित जवाहरलाल नेहरू से भी ये सवाल पूछा। जवाहरलाल नेहरू खुद को सेक्युलर दिखाने में विश्वास रखते थे और शायद यही कारण रहा होगा कि जब लॉर्ड माउंटबेटन ने उनसे पूछा कि सत्ता हस्तांतरण की भारतीय परंपरा क्या है, तो उन्हें कोई जवाब नहीं सूझा। उन्होंने चक्रवर्ती राजगोपालचारी से इस संबंध में प्रश्न किया, जो भारतीय इतिहास और संस्कृति की गहरी समझ रखते थे।

राजाजी तमिलनाडु से ताल्लुक रखते थे और भारतीय संस्कृति-सभ्यता को लेकर उनके ज्ञान का सभी सम्मान करते थे। उन्होंने सत्ता हस्तांतरण की प्रतीकात्मकता की समस्या का हल भी इतिहास में निकाला। चोल राजवंश में, जो भारत के सबसे प्राचीन और सबसे लंबे समय तक चलने वाला शासन था। उस समय एक चोल राजा से दूसरे चोल राजा को ‘सेंगोल’ देकर सत्ता हस्तांतरण की रीति निभाई जाती थी। ये एक तरह से राजदंड था, शासन में न्यायप्रियता का प्रतीक।

चोल राजवंश भगवान शिव को अपना आराध्य मानता था। इस ‘सेंगोल’ को राजपुरोहित द्वारा सौंपा जाता था, भगवान शिव के आशीर्वाद के रूप में। इस पर शिव की सवारी नंदी की प्रतिमा भी है। इसी तरह के समारोह और रिवाज की सलाह राजाजी ने दी, जिस पर नेहरू तैयार हो गए। इसके बाद राजाजी ने मयिलाडुतुरै स्थित ‘थिरुवावादुठुरै आथीनम’ से संपर्क किया, जिसकी स्थापना आज़ादी से 500 वर्ष पूर्व हुई थी। मठ के तत्कालीन महंत अम्बालवाना देशिका स्वामी उस समय बीमार थे, लेकिन उन्होंने ये कार्य अपने हाथ में लिया।

उन्होंने ‘सेंगोल’ के निर्माण के लिए ‘वुम्मिडी बंगारू चेट्टी’ के आभूषण निर्माताओं को दिया। ‘सेंगोल’ के ऊपर नंदी का होना शक्ति, न्यायप्रियता और सत्य का प्रतीक है। वुम्मिडी एथिराजुलू ने ‘सेंगोल’ के निर्माण के बारे में जानकारी देते हुए बताया था कि उनके पास ‘सेंगोल’ की ड्रॉइंग लाई गई थी। ये गोल था और साथ में एक पोल का आकार था। उन्हें काफी सावधानी और उच्च गुणवत्ता के साथ इसे बनाने को कहा गया और बताया गया कि ये बहुत ही महत्वपूर्ण जगह जाने वाला है।

उन्होंने बताया कि स्वतंत्रता के समय वो लोग इसका निर्माण करने में काफी खुश थे। समारोह के आयोजन के लिए महंत ने अपने शिष्य कुमारस्वामी, एक बड़े गायक और ‘नादसुर’ विशेषज्ञ को दिल्ली भेजा। 14 अगस्त, 1947 की रात को कुमारस्वामी श्रीला श्री कुमारस्वामी तम्बीरान ने ‘सेंगोल’ लॉर्ड माउंटबेटन को दिया। इसे जल से पवित्र किया गया था। इस दौरान तमिल संत ‘कोलारु पथिगम’ का गान किया गया, जो शैव कविता ‘थेवारम’ का हिस्सा है।

इसकी रचना तमिल कवि तिरुगन संबंदर ने की थी। संयासियों ने नेहरू को पीतांबर ओढ़ाया और मंत्रोच्चारण किया गया। इस दौरान जो पंक्ति पढ़ी गई, उसका अर्थ है – ‘हमारा आदेश है कि भगवान के अनुयायी राजा उसी तरह से शासन करेंगे, जैसे स्वर्ग के शासक।’ ये समारोह भारत के उत्तरी और दक्षिणी हिस्से के संगम का भी प्रतीक बना। डॉ राजेंद्र प्रसाद भी उस सामरोह में मौजूद थे। अंतरराष्ट्रीय पत्रिका ‘Time’ ने भी इस संबंध में खबर प्रकाशित की थी।

अमेरिका जाने के लिए पासपोर्ट बनवाना चाहते हैं राहुल गाँधी, कोर्ट में सुब्रमण्यम स्वामी ने किया विरोध, कहा- नेशनल हेराल्ड केस की जाँच प्रभावित होगी

‘मोदी’ सरनेम मामले में सांसदी जाने के बाद कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी ने अपना राजनियक पासपोर्ट जमा करवा दिया था। इसके बाद उन्होंने आम पासपोर्ट के लिए आवेदन किया है। इस आवेदन का पूर्व भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने विरोध किया है। बताते चलें कि राहुल गाँधी नेशनल हेराल्ड मामले में आरोपित हैं। इसलिए नया पासपोर्ट बनवाने के लिए उन्हें NOC की जरूरत है।

राहुल गाँधी ने नए पासपोर्ट के लिए दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। अब बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने बुधवार (24 मई 2023) को इस याचिका का विरोध किया है। स्वामी ने कहा कि राहुल गाँधी बार-बार विदेश जाते रहते हैं। उनके विदेश जाने से नेशनल हेराल्ड मामले की जाँच प्रभावित हो सकती है।

अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट वैभव मेहता ने सुब्रमण्यम स्वामी की दलीलों को सुना और उन्हें राहुल गाँधी की अर्जी पर अपना जवाब देने के लिए कहा। इस मामले की अगली सुनवाई शुक्रवार (26 मई 2023) को होगी।

वहीं, राहुल गाँधी के वकील ने कोर्ट से कहा कि उनके मुवक्किल के खिलाफ कोई आपराधिक मामला लंबित नहीं है, इसलिए राहुल गाँधी को एनओसी मिलनी चाहिए। बताते चलें कि राहुल गाँधी अमेरिका की 10 दिन की यात्रा पर जाने वाले हैं। इस दौरान स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में भाषण देने सहित उनके कई कार्यक्रम हैं। इसलिए उन्होंने पासपोर्ट के लिए आवेदन किया है।

गौरतलब है कि राहुल गाँधी पर देश की अलग-अलग अदालतों में कई राजनीतिक मामले दर्ज हैं। इसलिए पासपोर्ट नियमों के मुताबिक उन्हें अपने मामलों में NOC लेनी होगी। राहुल गाँधी नेशनल हेराल्ड और आपराधिक मानहानि से जुड़े मामलों में जमानत पर हैं।  

केसरिया कुर्ते में नमाज पर भड़का इमाम, कहा- इस लिबास में अब मस्जिद न आना, मुस्लिम हुकूमत होती तो तुम्हें ढंग से समझाता

उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद में केसरिया कुर्ते के कारण एक व्यक्ति को चेतावनी देने का मामला सामने आया है। कुंवर आसिफ अली को कथित तौर पर एक मस्जिद के इमाम ने आगे से ऐसे लिबास में मस्जिद न आने को कहा। इमाम महताब हाफिज के खिलाफ पुलिस ने मामला दर्ज किया है। पीड़ित ने ऑपइंडिया को बताया है कि उसके साथ शुक्रवार (19 मई 2023) को यह घटना घटी थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला फर्रुखाबाद के थाना क्षेत्र शमशाबाद का है। यहाँ के मोहल्ला काजी टोला में जामा मस्जिद है। इसके इमाम महताब हाफिज हैं। पुलिस को दी गया शिकायत में पीड़ित कुँवर आसिफ अली ने बताया है कि घटना के दिन वह केसरिया रंग का कुर्ता पहनकर मस्जिद गए थे। जब वे नमाज पढ़कर उठे तो उन्हें इमाम ने रोक लिया। इमाम ने उनसे दोबारा ऐसे रंग के कपड़े पहनकर मस्जिद में नहीं आने को कहा।

पीड़ित ने शिकायत में बताया है कि उनके केसरिया कुर्ते को इमाम ने हिंदुओं का रंग बताया। केसरिया रंग में नमाज अदा नहीं करने को कहा। इमाम की इन बातों पर आसिफ ने कहा कि जब सभी रंग अल्लाह ने बनाए हैं तो केसरिया में नमाज क्यों नहीं पढ़ी जा सकती। इस बात पर इमाम भड़क गया। कथित तौर पर इमाम ने कहा, “अगर आज मुस्लिम हुकूमत होती तो तुम्हे ढंग से समझा दिया जाता। आइंदा इस रंग का लिबास पहन कर मस्जिद में आए तो अंजाम अच्छा नहीं होगा।”

जामा मस्जिद का इमाम महताब फर्रुखाबाद के ही घटियापुर का रहने वाला बताया जा रहा है। आसिफ का कहना है कि इन धमकियों के बाद इमाम ने उसे सबके आगे बेइज्जत कर मस्जिद से भगा दिया। पीड़ित ने इसे अपनी मौलिक स्वतंत्रताका हनन बताते हुए इमाम पर कार्रवाई की माँग की है। उसकी शिकायत पर पुलिस ने इमाम महताब हाफिज के खिलाफ IPC की धारा 506 के तहत FIR दर्ज कर ली। पुलिस के मुताबिक मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

3 बार हो चुका हूँ नफरत का शिकार

ऑपइंडिया को कुंवर आसिफ अली ने बताया कि केसरिया रंग के कपड़े उन्हें अच्छे लगते हैं। लेकिन इसे पहनने की वजह से वे 3 बार अलग-अलग मस्जिदों में कभी इमाम तो कभी मुफ्तियों की नफरत के शिकार हो चुके हैं। आसिफ़ के मुताबिक एक बार तो उनके साथ शमसाबाद की ही एक मस्जिद में मारपीट भी की गई थी। रंगों को धर्म से जोड़ने वालों को आसिफ ने नफरती बताते हुए कहा कि कई हिंदू भी हरे रंग का कपड़ा पहनते हैं। लेकिन उन्हें कोई कुछ नहीं कहता।

मारने निकल पड़ी थी भीड़, योगी के डर से लौट गई

आसिफ़ ने बताया कि जामा मस्जिद के इमाम पर FIR दर्ज करवाने के बाद उन्हें मारने के लिए एक भीड़ निकल पड़ी थी। इस भीड़ में नई उम्र के लड़के शामिल था। लेकिन वे लोग आधे रास्ते से ही लौट गए, क्योंकि उन सभी को पता था कि योगी आदित्यनाथ की सरकार है और घरों पर बुलडोजर चल जाएगा। पीड़ित आसिफ ने खुद को डॉक्टर बताते हुए कहा कि वे भाजपा के टिकट पर सभासद का चुनाव भी लड़ चुके हैं।

क्या आप जानते हैं भारत में चीनी भाषा में भी छप रहा था अखबार, अब बंद हुआ ‘सेओंग पॉव’: कोलकाता में कैसे बसा ‘चाइना टाउन’, जानिए सबकुछ

भारत विविधताओं का देश है। यहाँ हर कुछ किलोमीटर पर भाषा, बोली और रहन-सहन से लेकर खान-पान तक भी बदल जाता है। राज्य तो छोड़ दीजिए, हर एक जिले की अलग विशेषता है। लगभग 800 भाषाओं वाले इस देश में कई भाषाएँ विदेश से भी आई हैं, क्योंकि भारत ने सभी समुदायों को गले लगाया है। मुसीबत के वक्त उन्हें घर दिया है। क्या आपको पता है कि भारत में चीनी भाषा में भी एक अख़बार का संचालन हो रहा था?

हालाँकि, अब खबर ये है कि भारत के एकमात्र चीनी भाषा का अखबार अब बंद हो गया है। ये अख़बार चीन की मंदारिन भाषा में छपता था। ‘सेओंग पॉव’ नामक इस समाचारपत्र को ‘द ओवरसीज चायनीज कॉमर्स ऑफ इंडिया’ के नाम से भी जाना जाता था। ये कोलकाता में प्रकाशित होता था। इसका कारण है कि कोलकाता में एक ऐसे क्षेत्र भी है, जिसे ‘मिनी चीन’ कहते हैं और वहाँ चीनी भाषा जानने वालों की जनसंख्या रही है।

इस अख़बार का सर्कुलेशन लगातार कम हो रहा था और अब ये लगभग बंद हो गया है। मार्च 2020 में जब वैश्विक कोरोना महामारी के कारण लॉकडाउन लगा था, उससे पहले ही इस अख़बार का अंतिम संस्करण प्रिंट हुआ था। कब हुआ था, ये तारीख़ किसी को याद नहीं है। एक तो कोरोना महामारी की इस पर मार पड़ी, ऊपर से इसके संपादक कुओ-त्साई चांग की जुलाई 2020 में मौत हो गई। इस अख़बार की स्थापना सन् 1969 में चीनी समुदाय के नेता ली यूओन चीन द्वारा किया गया था।

इससे पहले ‘चायनीज जर्नल ऑफ इंडिया’ नाम का चीनी अख़बार छपता था। इसकी शुरुआत के 34 वर्ष बाद ‘सेओंग पॉव’ का प्रकाशन शुरू हुआ। इसे 4 पन्नों में प्राकशित किया जाता था। चूँकि खबरों की संख्या कम होती थी, इसीलिए चीन, ताइवान और हॉन्गकॉन्ग के अलावा कोलकाता के अंग्रेजी अख़बारों से खबरें लेकर इसमें डाला जाता था। उनका मंदारिन में अनुवाद किया जाता था। TOI की खबर के अनुसार, एक कचरा कारोबारी दीपू मिस्त्री ने बताया कि अब ये जगह शायद ही भविष्य में खुले।

वो कूड़े-कचरे की खोज में अक्सर अख़बारों के दफ़्तरों तक जाते रहे हैं, जहाँ से उन्हें पुराने अख़बार मिलते हैं। उन्होंने बताया कि इस ‘सेओंग पॉव’ के कार्यालय में कुछ कुर्सियाँ और डेस्क वगैरह थे, साथ ही प्रिंटर और कम्प्यूटर भी था। लेकिन, संपादक की मृत्यु के बाद कर्मचारियों ने यहाँ आना बंद कर दिया और कई फर्नीचर चोरी हो गए। ‘चायनीज एसोसिएशन ऑफ इंडिया’ के अध्यक्ष चेन याओ हुआ इस अख़बार के नियमित ग्राहक थे, जिनके पास हर सुबह कॉपी पहुँचती थी।

उन्होंने बताया कि कोलकाता के तंगरा में चीनी लोगों की संख्या घट रही है, इसीलिए ऐसे योग्य लोग नहीं मिल रहे हैं जो इस अख़बार को चला सकें। उन्होंने बताया कि यहाँ के अधिकतर युवा न तो चीनी पढ़ सकते हैं और न ही लिख सकते हैं। उन्होंने दिवंगत संपादक के अस्सिस्टेंट हेलेन यांग को नए लोगों की भर्ती कर के उन्हें मंदारिन सिखाने को कहा, क्योंकि वो इस भाषा की ट्यूशन भी देती रही हैं। लेकिन, ये योजना सफल नहीं हुई क्योंकि तंगरा में अब हक्का चीनियों की जनसंख्या है जो मंदारिन नहीं समझती।

चीनी मीडिया संस्थान SCMP ने दिसंबर 2020 में प्रकाशित एक लेख में ही बताया था कि ये अख़बार बंद हो रहा है। इसके जो संपादक थे, वो सुबह के 8 बजे साइकिल से दफ्तर पहुँच जाते थे। इसके बाद वो दिन की सभी बड़ी खबरों को खँगालते थे। इसके बाद वो अगले संस्करण की तैयारियों में जुट जाते थे। बता दें कि शुरुआत में इस अख़बार को हस्तलिखित रूप में प्रकाशित किया जाता था। 4-5 लोग मिल कर 2000 कॉपी छापते थे।

महामारी से पहले पाठकों की संख्या कम होने के बावजूद अख़बार चल रहा था, क्योंकि इसके संपादक हमेशा अपने जड़ों से जुड़े रहने पर जोर देते थे। जिन्होंने इस अख़बार की स्थापना की थी, उनके पोते अब कोलकाता में एक रेस्टॉरेंट चलाते हैं। इससे पहले जो भारत में चीनी भाषा का पहला अख़बार छपता था, वो 2001 में कई समस्याओं के कारण बंद हो गया था। ‘सेओंग पॉव’ की भी कभी बहुत ज़्यादा माँग हुआ करती थी।

लॉकडाउन से पहले हालत ऐसी हो गई थी कि मात्र 200 प्रतियाँ ही प्रकाशित होती थीं और 2.50 रुपए में एक बिकती थी। अब भारत में भी चीनी मूल के छात्र मंदारिन की जगह अंग्रेजी को प्राथमिकता देते हैं। बता दें कि भारत में चीनी संख्या के बसने की कहानी भी रोचक है। ये बात अंग्रेजों के जमाने की है। यांग डज़हाओ नाम का एक व्यापारी तब जहाज से यात्रा कर रहा था। इस दौरान वो बंगाल की खाड़ी में एक तूफ़ान में फँस गया।

उसे टोंग अचीव या ‘Achhi’ के नाम से भी जाना जाता है। तूफ़ान में फँसने के बाद उसने कोलकाता हार्बर (तब कलकत्ता) में शरण ली। तब यहाँ के ब्रिटिश गवर्नर जनरल वारेन हेस्टिंगस से उसे सहायता मिली। कोलकाता के अचीपुर में उसे जमीन दी गई। इसमें उसने सुगर प्लांटेशन किया। चीनी मिल के अलावा सूअरों का एक फ़ार्म भी बनाया गया। उसे चीन से मजदूर यहाँ लाने की इजाजत भी मिल गई। कभी यहाँ 30,000 चीनी मजदूर रहा करते थे।

तंगरा और तिरेट्टा बाजार को बंगाल के चाइनाटाउन के रूप में जाना जाता था। कभी यहाँ चीनी भाषा के कई स्कूल भी हुआ करते थे। ‘पेई मेई’ नाम का एक स्कूल छात्रों की संख्या कम होने के कारण बंद हो चुका है। यहाँ से सुप्रीम कोर्ट ने 2002 में चमड़ी बनाने वाली 230 फैक्ट्रियों को कहीं और भेजने का आदेश दिया, जिसके बाद चीनी जनसंख्या घटती चली गई। कइयों ने अपना प्रोफेशन ही बदल लिया। अब ये चाइनाटाउन नहीं रहा।

जो चीनी अख़बार बंद हुआ है, उसके पहले पेज पर अंतरराष्ट्रीय खबरें होती थीं, दूसरे पर चीन और कोलकाता के चीनियों की खबरें, तीसरे पर स्वास्थ्य और बच्चों वाली खबरें होती थीं और अंतिम पेज पर हॉन्गकॉन्ग, मकाउ और ताइवान की खबरें होती थीं। बता दें कि सेन्ट्रल कोलकाता में एक चीनी ब्रेकफास्ट बाजार भी है। वहाँ भी पिछले एक दशक में चीनी रेस्टॉरेंट्स की संख्या घटी है। अब चीनी प्रभाव भी कम हो रहा है।

नई संसद के उद्घाटन का 19 विपक्षी दलों ने किया बहिष्कार: जानिए कौन-कौन सी पार्टी है शामिल, क्यों हो रही ये राजनीति

विपक्षी दलों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) द्वारा 28 मई 2023 को किए जाने वाले नए संसद भवन (New Parliament House) के उद्घाटन का बहिष्कार करने की घोषणा की है। विपक्षी दलों ने भवन का उद्घाटन विनायक दामोदर सावरकर की जयंती पर कराने और उद्घाटन में राष्ट्रपति को नहीं बुलाने को लेकर आलोचना कर रहे हैं।

नेताओं का कहना है कि नए संसद भवन का उद्घाटन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (President Draupadi Murmu) हाथों न कराकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कराना राष्ट्रपति का अपमान है। AAP के नेता संजय सिंह ने कहा कि यह भारत के दलित आदिवासी और वंचित समाज का अपमान है। वहीं, कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी ने कहा कि नए संसद भवन का उद्घाटन राष्ट्रपति जी को ही करना चाहिए।

इस संबंध में कॉन्ग्रेस, शिवसेना (UBT), आम आदमी पार्टी, TMC, राजद, जदयू सहित 19 विपक्षी दलों ने एक संयुक्त बयान भी जारी किया है। अपने बयान में विपक्षी दलों ने कहा है, “जब संसद से लोकतंत्र की आत्मा को चूस लिया गया और सरकार डेमोक्रेसी के लिए खतरा बन गई है तो नए भवन का कोई मूल्य नहीं है।”

अपने संबोधन में विपक्षी दलों ने कहा कि अनुच्छेद 79 में संविधान कहता है कि संघ के लिए एक संसद होगा, जिसमें राष्ट्रपति और दो सदन होंगे। इन सदनों को राज्यसभा और लोकसभा के नाम से जाना जाता है। राष्ट्रपति भारतीय संघ की ना सिर्फ प्रमुख होते/होती हैं, बल्कि संसद के अभिन्न हिस्सा भी होते/होती हैं।

अपने बयान में विपक्षी दलों ने आगे कहा कि राष्ट्रपति के बिना संसद की कार्यवाही नहीं चल सकती। इसके बाद भी प्रधानमंत्री ने इसके भवन का उद्घाटन खुद ही करने का निर्णय लिया है। यह राष्ट्रपति का अपमान है और संविधान की मूल आत्मा का उल्लंघन करता है।

शिवसेना ठाकरे गुट के संजय राउत ने कहा, “सबसे पहले हमने सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट को लेकर कहा था। जब देश की आर्थिक स्थिति खराब है, तब लाखों-करोड़ों… सैकड़ों करोड़ रुपए खर्च करने की क्या जरूरत थी? जिस तरह से इस प्रोजेक्ट को सिर्फ प्रधानमंत्री की इच्छा के लिए बनाया, क्या उसकी जरूरत थी?”

राउत ने कहा, “आज जो देश की इमारत है, पार्लियामेंट हाउस है, वो और 100 साल चल सकती है। इस देश की जो इमारत है, उससे भी पुरानी इमारतें इटली, ब्रिटेन, फ्रांस में हैं और वो अब तक चल रही हैं। इसको बनाने की इसलिए जरूरत पड़ी कि ये संसद भवन ऐतिहासिक है और इस ऐतिहासिक संसद भवन से ना RSS और ना ही बीजेपी का कोई रिश्ता है।”

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और बीजपी पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा, “जो क्रांतिकारी काम हुए हैं, उससे RSS और बीजेपी का कोई रिश्ता नहीं है। एक इमारत बनाकर हम एक वो शिला लगाएँगे कि इनॉगरेटेड बाय प्राइम मिनिस्टर श्री नरेंद्र मोदी। इसके लिए ये खर्चा हो रहा है। इनके हाथों से नए संंसद भवन का उद्घाटन करना, ये प्रोटोकॉल है?”

संजय राउत ने कहा कि राष्ट्रपति सैद्धांतिक रूप से देश के प्रमुख होते हैं। वे संविधान के कस्टोडियन होते हैं और आप उन्हें नहीं बुलाया जा रहा है। यह उनका अपमान है। राउत ने कहा कि इसी आधार पर 19 विपक्षी दलों ने इस समारोह का बहिष्कार किया है।

चंडीगढ़ के सरकारी स्कूल में 7वीं की छात्रा से कई बार रेप: पहले साथ पढ़ने वाले नाबालिग ने की दरिंदगी, फिर 4 सीनियर्स ने भी किया शोषण

चंडीगढ़ के एक सरकारी स्कूल की छात्रा के साथ स्कूल के ही छात्रों द्वारा रेप किए जाने का मामला सामने आया है। पीड़िता और सारे आरोपित नाबालिग हैं। 7वीं कक्षा की पीड़िता से पहले उसके साथ पढ़ने वाले लड़के ने दरिंदगी की। इसके बाद कक्षा 9 के चार और छात्रों ने दुष्कर्म किया। यह मामला 18 मई 2023 को सामने आया। पुलिस ने मामला दर्ज कर सभी आरोपितों को बाल सुधार गृह भेज दिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला चंडीगढ़ के सरकारी मॉर्डन स्कूल का है। पीड़िता की उम्र 13 साल है। गिरफ्तार आरोपितों की उम्र 14 से 15 साल के बीच बताई जा रही है। बताया जा रहा है कि सबसे पहले पीड़िता से रेप उसके क्लासमेट ने किया। उसने चोरी का आरोप लगाकर पीड़िता को ब्लैकमेल किया। दुष्कर्म कर मुँह बंद रखने की धमकी दी। बाद में उसने अपने 4 सीनियर साथियों को भी ये बात बताई। इन्होंने भी ब्लैकमेल कर अलग-अलग दिनों में चंडीगढ़ के अलग-अलग स्थानों पर रेप किया।

आरोप है कि आरोपितों ने पीड़िता से स्कूल के अंदर और बाहर कई बार रेप किया। पीड़िता को मुँह बंद रखने की धमकी भी दी। मामले की जानकारी सबसे पहले स्कूल के ही एक टीचर को हुई। उन्होंने इससे प्रिंसिपल को अवगत करवाया। प्रिंसिपल ने 18 मई को पुलिस को घटना की सूचना दी। पुलिस ने पीड़िता के परिजनों को बुलाया और उनके बयान लिए।

परिजनों के बयान पर पुलिस ने IPC की धारा 376 AB, 506 के साथ पॉक्सो एक्ट में केस दर्ज किया है। पाँचों आरोपितों को हिरासत में लेकर रविवार (21 मई 2023) को बाल सुधार गृह भेज दिया गया। पीड़िता की काउंसिलिंग करवाई जा रही है। चंडीगढ़ बाल संरक्षण आयोग ने इस घटना के बाद स्कूल में एक बाल अदालत का आयोजन किया। इस आयोजन में छात्रों को अपने साथ होने वाले दुर्व्यवहार की शिकायत करने के लिए प्रेरित किया गया।

दुनिया से कहा- पैसे बचाओ, खुद के पास ₹4100 करोड़ का याट, गर्लफ्रेंड की मूर्ति भी लगवाई: चर्चा में है अमेजन फाउंडर का ‘कोरू’

आपने जेफ बेजोस (Jeff Bezos) का नाम सुना ही होगा। वे अमेजन के फाउंडर (Amazon Founder) हैं। दुनिया के तीसरे सबसे अमीर आदमी हैं। उन्होंने नवंबर 2022 में आर्थिक मंदी की आशंका जताते हुए लोगों को फिजूलखर्ची से बचने की सलाह दी थी। कहा था कि क्रिसमस और न्यू ईयर के फेस्टिव सीजन में टीवी, फ्रिज, कार जैसी चीजों को खरीदने से बचिए। पैसा मुश्किल दौर के लिए बचाकर रखिए।

लेकिन बेजोस अभी चर्चा में अपनी पैसे बचाने वाली सलाह को लेकर नहीं हैं। वे सुर्खियों में आए हैं गर्लफ्रेंड लॉरेन सांचेज (Lauren Sanchez) से सगाई करने को लेकर। दुनिया का सबसे ऊँचे याट (Yacht) को लेकर। इसकी कीमत करीब 4100 करोड़ रुपए बताई जा रही है। यह भी कहा जा रहा है कि याट पर उन्होंने अपनी गर्लफ्रेंड की मूर्ति भी लगवाई है।

रिपोर्ट के अनुसार 417 फीट का यह याट 500 मिलियन डॉलर का है। भारतीय मुद्रा में यह कीमत 4100 करोड़ रुपए से भी अधिक है। उन्होंने इसका नाम कोरू रखा है। यह याट सेल पावर यानी हवा से भी चलने में सक्षम है। इसमें पूल, बार, लॉन्ज सबकुछ है। इस तीन मंजिला याट पर बेजोस ने गर्लफ्रेंड सांचेज की मूर्ति भी लगवा रखी है। कान्स फिल्म फेस्टिवल में शामिल होने के लिए यह जोड़ा इसी याट से पहुँचा था।

निजी जिंदगी की बात करें तो 59 साल के बेजोस और 53 साल की लॉरेन दोनों तलाकशुदा हैं। 2005 में लॉरेन ने हॉलीवुड एजेंट पैट्रिक व्हाइटसेल से शादी की थी। 2019 में दोनों का तलाक हो गया। बेजोस ने 1994 में मैकेंजी स्कॉट से शादी की थी। इनका भी 2019 में ही तलाक हुआ था।

बताया जाता है कि बेजोस और लॉरेन 2018 से ही एक-दूसरे को डेट कर रहे हैं। लेकिन बेजोस का तलाक फाइनल होने के बाद दुनिया को इसकी खबर लगी। अभी इनकी शादी की डेट फाइनल नहीं हुई है। लॉरेन को हार्ट शेप्ड डायमंड रिंग के साथ देखे जाने के बाद दोनों की सगाई की खबरें आई है। इस रिंग में 20 कैरेट का हीरा जड़ा हुआ है।

PM मोदी ने खालिस्तानियों को चेताया, कहा- मंदिरों पर हमले बर्दाश्त नहीं: ऑस्ट्रेलियाई समकक्ष को वर्ल्ड कप और दीवाली का दिया न्योता

ऑस्ट्रेलिया दौरे पर गए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खालिस्तानियों को चेताया है। उन्होंने कहा है कि मंदिरों पर हमले स्वीकार्य नहीं है। ऐसे तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। 23 मई 2023 को अपने ऑस्ट्रेलियाई समकक्ष एंथोनी अल्बानीज के साथ बातचीत में उन्होंने मंदिरों पर हमले को लेकर चर्चा की।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “मैंने और पीएम एंथोनी अल्बानीज ने पहले भी ऑस्ट्रेलिया में मंदिरों पर हमले और अलगाववादी गतिविधियों को लेकर बात की है। आज भी हमने इस मामले पर चर्चा की। हम ऐसे किसी भी तत्व को स्वीकार नहीं करेंगे जो भारत-ऑस्ट्रेलिया के मैत्रीपूर्ण और मजबूत संबंधों को अपनी गतिविधियों या विचारों से नुकसान पहुँचाता है। प्रधानमंत्री अल्बानीज ने आज मुझे एक बार फिर आश्वासन दिया है कि वह भविष्य में भी ऐसे तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेंगे।”

उल्लेखनीय है कि बीते कुछ महीनों में ऑस्ट्रेलिया में खालिस्तानियों द्वारा हिंदू मंदिरों को निशाना बनाने की कई घटनाएँ सामने आ चुकी है। अपने ऑस्ट्रेलियाई समकक्ष को पीएम मोदी ने इस साल भारत में होने वाले क्रिकेट वर्ल्ड कप में आने का भी न्योता दिया। उन्होंने कहा, “वर्ल्ड कप के साथ ही भारत में दीवाली का महापर्व भी मनाया जाएगा। मैं चाहता हूँ कि PM अल्बनीज इस दौरान भारत आएँ।” दोनों नेताओं के बीच ऊर्जा, व्यापार और रक्षा क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई।

पीएम मोदी को बताया था ‘बॉस’

23 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में भारतीय समुदाय के लोगों को भी संबोधित किया था। कुडोस बैंक एरिना में हुए इस कार्यक्रम में ऑस्ट्रेलिया के पीएम एंथोनी अल्बानीज भी मौजूद थे। उन्होंने इस दौरान पीएम मोदी को ‘बॉस’ बताया था। वहीं पीएम मोदी ने भारत की संस्कृति और मजबूत अर्थव्यवस्था का जिक्र करते हुए कहा था कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच कितनी भी दूरी हो, हिंद महासागर उन्हें एक-दूसरे से जोड़ता है। उन्होंने कहा कि दशकों तक जो कार्य क्रिकेट ने किया, अब टेनिस और फिल्मों के जरिए भी दोनों देश जुड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के लोगों की जीवनशैली अलग-अलग होने के बावजूद योग उन्हें आपस में जोड़ता है।