Home Blog Page 1799

JNU के बाद FTII में हुई ‘The Kerala Story’ की स्क्रीनिंग: झूठी कहानी बता विरोध करते रह गए वामपंथी छात्र: फिल्म के निर्माता-निर्देशक भी रहे मौजूद

महाराष्ट्र के पुणे में स्थित फिल्म एंड टेलिविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (FTII) में भारी विरोध और पुलिस की मौजूदगी के बीच फ़िल्म ‘द केरल स्टोरी’ की स्क्रीनिंग हुई। एफटीआईआई में छात्रों का एक गुट जहाँ फिल्म की स्क्रीनिंग का समर्थन कर रहा था वहीं एक अन्य गुट विरोध में ढोल-नगाड़ों के साथ नारेबाजी करता नजर आया।

दरअसल, FTII में MITEE फिल्म सोसाइटी ने ‘द केरल स्टोरी’ की स्क्रीनिंग का आयोजन शनिवार (20 मई 2023) सुबह 9:30 बजे किया था। हालाँकि टेक्निकल समस्या आने के कारण स्क्रीनिंग में एक घण्टे की देरी हुई। FTII स्टूडेंट्स एसोसिएशन (FTIISA) इस स्क्रीनिंग का विरोध कर रहा था। संगठन के छात्रों का कहना है कि उन्हें न तो स्क्रीनिंग की जानकारी दी गई और न ही स्क्रीनिंग के लिए बुलाया गया।

‘द केरल स्टोरी’ की स्क्रीनिंग का विरोध कर रहे FTIISA के छात्रों ने कहना है कि ‘द केरल स्टोरी’ में जो भी दिखाया वह सब झूठ है। धर्मांतरण और लव जिहाद जैसे मुद्दों को फिल्म में गलत तरीके से पेश किया गया है। स्क्रीनिंग के दौरान फ़िल्म के निर्देशक सुदीप्तो सेन और निर्माता विपुल शाह मौजूद रहे। दोनों ने ही फिल्म देखने आए छात्रों से बातचीत की। इस दौरान सुदीप्तो सेन ने कहा है, “कुछ छात्रों को थिएटर में जाने की अनुमति नहीं दी गई। हमने छात्रों से बात की। FTII में कानून व्यवस्था बिगड़ने जैसी कोई बात नहीं हुई। विरोध कर रहे छात्र अगर फ़िल्म देखना चाहते हैं तो उनके लिए अलग से व्यवस्था की जाएगी। हमने फिल्म की स्क्रीनिंग के लिए FTII का चयन नहीं किया था। बल्कि हमें यहाँ आने के लिए आमंत्रण दिया गया था।”

बता दें कि ‘द केरल स्टोरी’ फिल्म में दिखाया गया है कि केरल में कट्टरपंथी मुस्लिम हिंदू लड़कियों को फँसाने के लिए प्रशिक्षण देते हैं। इसके बाद लड़कियों का इस्लाम में धर्मांतरण करा कर उन्हें इस्लामिक आतंकी संगठन ISIS के लिए सेक्स स्लेव बनने के लिए भेजा जाता है। फिल्म में ऐसी ही लड़कियों की कहानी दिखाई गई है। इस फिल्म द्वारा इस्लामवादियों और वामपंथियों को उनका असली चेहरा उजागर होने का डर सता रहा है। ऐसे में फ़िल्म का विरोध किया जा रहा है।

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु सरकार ने ‘द केरल स्टोरी’ पर बैन लगा दिया था। हालाँकि सुप्रीम कोर्ट ने दोनों ही राज्यों को फटकार लगाते हुए बैन हटाने के लिए कहा। साथ ही तमिलनाडु सरकार को फिल्म देखने जाने वालों को सुरक्षा मुहैया कराने का आदेश दिया था।

‘उन लोगों की स्थिति देख लीजिए, जो पार्टी छोड़ कर गए’: कॉन्ग्रेस के प्रभारी ने कर दी सचिन पायलट की ‘बेइज्जती’, बोले – उनकी यात्रा व्यक्तिगत, हमारा लेना-देना नहीं

राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट के बीच खींचतान जारी है। शनिवार (20 मई, 2023) को कॉन्ग्रेस प्रदेश प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा का एक बयान सामने आया है। रंधावा का यह बयान पायलट को लेकर दिया गया बताया जा रहा है। पिछले दिनों पायलट ने भ्रष्टाचार को लेकर अपने ही सरकार के खिलाफ पदयात्रा भी निकाली। बताया जा रहा है कि उनका यह कदम गहलोत के अलावा कई पार्टी नेताओं को नागवार गुजरा है।

एयरपोर्ट पर पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए रंधावा ने कहा कि कॉन्ग्रेस कभी भी असहमति जताने वाले नेताओं को पार्टी से नहीं निकालती। कॉन्ग्रेस ऐसी पार्टी है जो हर व्यक्ति का सम्मान करती है और वे उसे नहीं जाने देना चाहती जो इसके साथ लंबे समय से रहे हों। उन्होंने कहा कि आपको उन लोगों की स्थिति का पता है जो पार्टी छोड़कर गए हैं। रंधावा ने पायलट की ‘जन संघर्ष यात्रा’ को एक व्यक्तिगत यात्रा करार दिया। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस का उससे कोई लेना देना नहीं है।

बता दें कि पायलट ने अजमेर से जयपुर तक 125 किलोमीटर की पदयात्रा निकाली थी। इसके समापन के बाद उन्होंने चेतावनी दी थी कि अगर भ्रष्टाचार के मुद्दे पर उनकी माँगे नहीं मानी गई तो महीने के आखिर में राज्यव्यापी आंदोलन की शुरुआत होगी। पायलट ने राजस्थान पब्लिक सर्विस कमिशन को खत्म करके इसके पुनर्गठन की भी माँग की है। उनकी तीसरी माँग पेपर लीक के कारण प्रभावित नौजवानों को मुआवजा दिए जाने और मामले की हाई लेवल जाँच कराए जाने की भी है।

बता दें कि राजस्थान में इस साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने हैं। उससे पहले मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और कभी उनके डिप्टी रहे सचिन पायलट की लड़ाई अब खुलकर सामने आ गई है। दोनों नेता एक दूसरे पर तंज करने और छींटाकशी का एक भी मौका नहीं छोड़ रहे हैं।

‘दिल्ली पुलिस ने IPL मैच देखने से रोका, टिकटें छीन ली और नहीं जाने दिया अंदर’: पहलवानों का एक और झूठ धराया, जानें क्या है सच्चाई

राजधानी दिल्ली के जंतर मंतर पर धरना दे रहे पहलवान शनिवार (20 मई 2023) को आईपीएल का मैच देखने अरुण जेटली स्टेडियम पहुँचे। पहलवानों ने आरोप लगाया है कि दिल्ली पुलिस ने उनसे टिकटें ले ली लेकिन अंदर जाने नहीं दिया। उधर दिल्ली पुलिस का कहना है कि किसी भी वैध टिकट या पासधारी को मैच देखने से नहीं रोका गया।

दिल्ली में आईपीएल का 67वाँ मुकाबला दिल्ली कैपिटल्स और चेन्नई सुपर किंग्सके बीच खेला गया। इस मैच को देखने के लिए धरना दे रहे विनेश फोगाट, साक्षी मलिक, बजरंग पुनिया सहित कई पहलवान अरुण जेटली स्टेडियम पहुँचे। पहलवानों का दावा है कि उन्हें अंदर जाने नहीं दिया। कुछ ही देर में घटना से संबंधित एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इस वीडियो में विनेश फोगाट, साक्षी मलिक और बजरंग पुनिया के साथ अन्य पहलवान नजर आ रहे हैं। विनेश फोगाट बता रही हैं कि पहलवानों को दिल्ली पुलिस ने मैच देखने नहीं दिया।

मंदीप पुनिया नाम के यूजर ने वीडियो शेयर करते हुए लिखा है कि पहलवानों को आईपीएल मैच देखने से रोका गया। इस वीडियो में विनेश फोगाट कह रही हैं कि दिल्ली पुलिस ने पहले तो सुरक्षा कारणों से उन्हें स्टेडियम में दाखिल नहीं होने दिया। उसके बाद उनकी टिकटें ले ली गईं। विनेश का कहना है कि दिल्ली पुलिस सुरक्षा कारणों से उन्हें वीआईपी सुविधा देने की पेशकश कर रहे थे। विनेश फोगाट और बाकी के पहलवान इसके लिए तैयार नहीं थे।

पहलवानों का कहना था कि उन्हें कोई सुविधा नहीं चाहिए। आरोप के अनुसार, बहस के बाद पहलवान लौटने लगे तो दिल्ली पुलिस के जवानों ने उन्हें अंदर जाने के लिए कहा। वीडियो में विनेश कह रही हैं कि हमें न स्टेडियम में जाने दिया जा रहा है न लौटने दिया जा रहा है। जबकि उसी वीडियो में वे कह चुकी हैं कि बहस के बाद जब वे लौटने लगीं तो पुलिस के लोगों ने उन्हें अंदर आने के लिए कहा।

इसी वीडियो को शेयर करते हुए रामनिवास भाम्भू नाम के यूजर ने लिखा, “दिल्ली जंतर-मंतर पर आंदोलन कर रहे पहलवान आईपीएल मैच देखने के लिए गये थे लेकिन दिल्ली पुलिस ने स्टेडियम के बाहर ही उन्हें रोक लिया व टिकटें छीन लीं और वापिस भेज दिया यह देश में चल क्या रहा है।? क्या आपातकाल लग गया है?

प्रेम सिंह सियाग नाम के यूजर ने भी पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए पहलवानों का वीडियो शेयर किया। यूजर ने भी दावा किया कि पहलवानों को आईपीएल मैच देखने से रोक दिया गया।

इसके अलावा पहलवानों के लिए किए गए झूठे ट्वीट एख दूसरे के कॉपी पेस्ट किए हुए थे।

दिल्ली पुलिस ने बताई सच्चाई

पहलवानों के इस वीडियो को कई सोसल मीडिया हैंडल्स द्वारा शेयर किया जा रहा है और दिल्ली पुलिस पर पहलवानों को मैच देखने से रोकने के इल्ज़ाम लगाए जा रहे हैं। दिल्ली पुलिस ने पहलवानों के आरोपों का खंडन किया है। दिल्ली पुलिस ने इसे लेकर ट्वीट किया है।

दिल्ली पुलिस की तरफ से लिखा गया है, “कुछ सोशल मीडिया हैंडल्स पहलवानों को आईपीएल मैच देखने से रोके जाने संबंधित भ्रामक खबर प्रसारित कर रहे है। किसी भी वैध टिकट या पासधारी को नहीं रोका गया है, सभी को उनके नियत गेटों से प्रवेश दिया गया है।” दिल्ली पुलिस की तरफ से सच्चाई बताए जाने के बाद भी सोशल मीडिया पर इस झूठ को प्रसारित किया जा रहा है।

‘ये मानवता का मुद्दा, समाधान के लिए जो हो सकता है सब करेंगे’: PM मोदी ने यूक्रेन के राष्ट्रपति को दिया आश्वासन, बोले जेलेंस्की – ‘धन्यवाद भारत’

जापान के हिरोशिमा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की के बीच मुलाकात हुई। दोनों देशों के नेता G7 समिट में भाग लेने जापान पहुँचे हैं। इस दौरान उन्होंने PM मोदी ने कहा है रूस-यूक्रेन युद्ध राजनीति या अर्थव्यवस्था का मुद्दा नहीं बल्कि मानवता का मुद्दा है। युद्ध विराम के लिए भारत और उनके द्वारा जो कुछ भी हो सकेगा वह करने के लिए तैयार हैं।

भारतीय प्रधानमंत्री और यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की के बीच यह मुलाकात रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध के बीच हुई है। ऐसे में यह मुलाकात कई मामलों में अहम मानी जा रही है। इस मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा है “बीते एक-डेढ़ साल में हमने कई बार फोन पर बात की है। लेकिन ग्लासगो में हुई मुलाकात के बाद अब यह मुलाकात हो रही है। यूक्रेन में चल रहा युद्ध पूरी दुनिया के लिए बहुत बड़ा मुद्दा है। समूचे विश्व में इस युद्ध के प्रभाव पड़े हैं। लेकिन मैं इसे राजनीतिक या अर्थव्यवस्था का मुद्दा नहीं मानता। मेरे लिए यह मानवता का मुद्दा है, मानवीय मूल्यों का मुद्दा है।”

PM मोदी ने यह भी कहा है, “युद्ध की पीड़ा क्या होती है, यह आप हम सबसे अधिक जानते हैं। गत वर्ष जब हमारे देश के बच्चे यूक्रेन से वापस आए, तब उन्होंने वहाँ की परिस्थितियों के बारे में बताया था। इससे मैं आपकी और यूक्रेन के नागरिकों की पीड़ा को अच्छे से समझ गया था। मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ कि युद्ध के समाधान के लिए भारत और व्यक्तिगत रूप से मैं जो कुछ भी हो सकता है सब करने की कोशिश करेंगे।”

इस मुलाकात को लेकर यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद देते हुए ट्वीट किया है। इस ट्वीट में उन्होंने लिखा, “भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ जापान में बैठक की। मैंने उन्हें यूक्रेन की शांति सूत्र पहल के बारे में विस्तार से जानकारी दी है। कार्यान्वयन में शामिल होने के लिए उन्हें आमंत्रित भी किया। मानवीय समस्याओं और मोबाइल अस्पतालों में यूक्रेन की जरूरतों के बारे में बात की। हमारे देश की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता का समर्थन करने के लिए, विशेष रूप से, अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के मंचों पर और यूक्रेन को मानवीय सहायता प्रदान करने के लिए भारत को धन्यवाद देता हूँ।”

गौरतलब है कि पीएम मोदी और जेलेंस्की के बीच बीते साल कम से कम 4 बार फोन पर बात हुई थी। वहीं, दिसंबर 2022 में यूक्रेन के राष्ट्रपति ने बाली में आयोजित हुए G20 शिखर सम्मेलन में घोषित 10 सूत्री शांति योजना के लिए भारत के समर्थन की माँग की थी। इसके अलावा, ज़ेलेंस्की ने संयुक्त राष्ट्र में मानवीय सहायता और समर्थन के लिए भी गत माह पीएम मोदी को पत्र लिखा था।

‘देबबंदी है मुख़्तार अंसारी का परिवार, बरेलवी मुस्लिमों को बताता है कबरपुजवा’: माफिया के इलाके के हैदर अली का खुलासा, गाँव का दरवाजा अभी भी अब्बा के नाम पर

माफिया मुख़्तार अंसारी को अब कपिलदेव सिंह हत्याकांड में कोर्ट के फैसला के सामना करना है। यह हत्याकांड साल 2009 का है, जब मुख़्तार पर जेल में बैठ कर साजिश रचने का आरोप लगा था। शनिवार (20 मई, 2023) को गाजीपुर की MP/MLA कोर्ट में इस केस पर फैसला आने वाले 13 जून तक टाल दिया है। इस बीच ऑपइंडिया ने मुख़्तार के गृहक्षेत्र गाजीपुर से ग्राउंड रिपोर्ट कर के उसके आपराधिक इतिहास की पड़ताल की थी।

इस पड़ताल में हमारी मुलाकात समाजवादी पार्टी के नेता हैदर अली उर्फ़ टाइगर से हुई। उन्होंने मुख़्तार और अफ़ज़ाल अंसारी को उनके अब्बा के समय से जानने का दावा करते हुए कई नए खुलासे किए।

मुख़्तार नहीं बल्कि शिवपूजन राय के नाम से चर्चित हो मोहम्मदाबाद

हैदर अली उर्फ़ टाइगर गाजीपुर के ही थाना क्षेत्र करीमुद्दीनपुर में गाँव महेन के रहने वाले हैं। यह गाँव मुस्लिम बहुल है। मुख़्तार अंसारी का घर मोहम्दाबाद उनके गाँव के पास ही है। हैदर अली ने मोहम्दाबाद को ऐतिहासिक जगह बताते हुए कहा कि वो जगह स्वतंत्रता संग्राम सेनानी शिवपूजन राय के नाम से चर्चित होनी चाहिए, जिनके नेतृत्व में सभी धर्मों के लोगों ने अंग्रेजों के खिलाफ आज़ादी की लड़ाई लड़ी।

मुख़्तार के वामपंथी अब्बा के नाम पर अभी भी एंट्री गेट

फ़िलहाल मोहम्मदाबाद में इंट्री के समय सुबहानुल्लह अंसारी का बोर्ड लगा है। हैदर अली ने बताया कि सुबहानुल्लह मुख़्तार के अब्बा थे जो कभी एक बार मोहम्मदाबाद नगर पालिका के चेयरमैन थे। बोर्ड को नया बताते हुए हैदर अली ने कहा कि मुख़्तार के अब्बा वामपंथी थे और गेरुए कपड़े में दिखाई देते थे। उन्होंने यह भी बताया कि मुख़्तार के घर से कोई फौजी नहीं और ऐसी खबरें मनगढ़ंत हैं। साथ ही उन्होंने मुख़्तार अंसारी के खानदानी रईस होने जैसी खबरों को भी सरासर झूठ बताते हुए कहा कि अफ़ज़ाल अंसारी सिनेमा हाल पर नौकरी किया करता था।

सुबहानुल्लह अंसारी द्वार, मोहम्मदाबाद, गाज़ीपुर

पत्रकारों ने फैलाया मुख़्तार के बारे में झूठ

हैदर अली ने अपनी बातचीत में हमें आगे बताया कि पत्रकारों ने मुख़्तार के बारे में काफी झूठी बातें फैलाई हैं। अली ने मुख़्तार पर गरीबों का झगड़ा किसानों से करवाने का आरोप लगाते हुए बताया कि इसके बावजूद मीडिया वाले उसे अच्छा बताते रहे। हैदर अली के मुताबिक, पूर्वांचल में हिन्दुओं और मुस्लिमों के बीच फैली वैमनस्यता का सबसे बड़ा जिम्मेदार मुख़्तार अंसारी है। बकौल हैदर अली, मुख़्तार एक सिद्धांतहीन है व्यक्ति है जो जिसकी सत्ता आती है उसी के साथ चल देता है। अली ने यह भी कहा कि उन्हें मुख़्तार से नहीं सिर्फ अल्लाह से डर लगता है।

हैदर अली ने मुख़्तार और अफ़ज़ाल पर गाजीपुर जिले के अन्य मुस्लिम नेताओं के राजनीतिक करियर को खत्म करने का आरोप लगाया। इस आरोप के समर्थन में अली ने खुद के अलावा यूनुस खाँ, हसनू खाँ, खुर्शीद और इश्तियाक अंसारी का नाम लिया। उन्होंने कहा कि यूनुस खाँ से तो अंसारी बंधुओं ने पैसे भी लिए थे, लेकिन उन्हें हरा दिया। अली ने कहा, “मुस्लिमों का राजनीति में सबसे बड़ा दुश्मन यही परिवार है। ये नहीं चाहता कि कोई और मुस्लिम आगे बढ़े।”

‘मैं खुद में मजबूत इसलिए ज़िंदा रहा’

हैदर अली ने हमें बताया कि मुख़्तार ने उनसे भी दुश्मनी की थी लेकिन वो खुद में मजबूत थे इसलिए सलामत रहे। खुद को पठान बताते हुए हैदर ने कहा कि जो भी मुख़्तार का समर्थक हो वो बताए कि क्या उसने पढ़ाई-लिखाई का कोई केंद्र या अस्पताल आदि खोला? उन्होंने आगे कहा कि मुख़्तार पूर्वांचल के मुस्लिमों के लिए सबसे बड़ा नासूर है। अली के मुताबिक, अफ़ज़ाल के कहने पर मुलायम सिंह की सरकार में उनके घर और यहाँ तक कि जानवरों तक की कुर्की करवा दी गई थी। हैदर अली का दावा है कि उनके बुरे समय में भाजपा विधायक कृष्णानंद राय ने उनकी मदद की थी।

हैदर अली ने हमें आगे बताया कि मुख़्तार अंसारी अपने डर का झूठा प्रचार करवाने के लिए खाली बैठे निठल्लों को पैसे देता है। उन्होंने बताया कि वो निठल्ले गली-कूचे के चौराहे पर बैठ कर तम्बाकू बनाते हुए और चाय पीते हुए मुख़्तार अंसारी का महिमामंडन करते हैं। दावा है कि इस झूठे महिमामंडन में योगी आदित्यनाथ से मुख़्तार की बातचीत होना भी शामिल होता है। इन निठल्लों के प्रचार को ‘माउथ मीडिया’ बताते हुए हैदर अली ने कहा कि वही लोग मुख़्तार से दरोगा और SP तक डरने की चर्चा झूठ-मूठ में किया करते हैं जो कि मुख़्तार के बालू की दीवार जैसे साम्राज्य को खड़ा रखी थी।

पीठ पीछे मुस्लिम ही देते हैं गालियाँ

हैदर अली के मुताबिक, पूर्वांचल के मुस्लिमों के लिए मुख़्तार ऐसा कलंक है कि लोग उसे पीठ पीछे गंदी-गंदी गालियाँ देते हैं। उन्होंने हमसे कहा कि अगर आप पत्रकार के अलावा सामान्य रूप में मुस्लिमों के बीच जाएँ तो वो मुख़्तार अंसारी का असली सच बताएँगे। हालाँकि, इसके बावजूद मुख़्तार को ही वोट देना हैदर अली ने मुस्लिमों की मजबूरी बताया। उन्होंने कहा कि मुस्लिमों के मन में भाजपा के खिलाफ इतना जहर भर दिया गया है कि वो सपा या बसपा में ही वोट देते हैं और मुख़्तार जीत जाता है।

अली ने यह भी कहा कि उन्हें मुख़्तार से नहीं सिर्फ अल्लाह से डर लगता है।

मौलवी नहीं हैं सिगबतुल्लाह अंसारी

हैदर अली ने बताया कि सिगबतुल्लाह अंसारी कोई मौलवी नहीं है, बस उनका पहनावा और रूप-रंग उस तरह का है। उन्होंने सिगबतुल्लाह को पहले कहीं क्लर्क की नौकरी करने वाला बताया। अली ने आगे कहा कि ये लोग बस यही चाहते हैं कि पूर्वांचल में कहीं भी मुस्लिमों को ले कर कुछ अच्छी बात हो तो उसमें केवल मुख़्तार अंसारी के कुल-खानदान वालों का ही नाम लिया जाए। अली ने मऊ दंगों में भी मुख़्तार की भूमिका को नकारात्मक बताया।

हैदर अली के अनुसार, अफ़ज़ाल अंसारी की सांसदी खत्म होने पर पूर्वांचल के मुस्लिमों को कोई फर्क नहीं पड़ता। उन्होंने यह भी बताया कि अफ़ज़ाल कोई ‘रहबर’ नहीं है जो उनके लिए कोई दुःख जताएगा। अली ने अंत में अफ़ज़ाल के लिए ‘जैसी करनी वैसी भरनी’ वाली कहावत कही। उन्होंने दावा किया कि मुख़्तार और अफ़ज़ाल को मिली सजा से क्षेत्र के कई मुस्लिम इस बात को ले कर खुश हैं कि अब उन्हें भी राजनीति में आने का मौका मिल सकता है।

देवबंदी मुस्लिम है मुख़्तार, बरेलवियों को कहता है कबरपुजवा

हैदर अली ने मुख़्तार अंसारी के परिवार को देवबंदी मुस्लिम बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख़्तार बरेलवी मुस्लिमों को ‘कबरपुजवा’ (कब्र की पूजा करने वाला) कहता है।

अफ़ज़ाल अंसारी की राजनीति में एंट्री किसी कादरी के किसी कारण से चुनाव से हटने की वजह से बताते हुए हैदर अली ने कहा कि मुख़्तार के खानदान में सारा पैसा अपराध से आया है। उन्होंने मुख़्तार के खानदानी रईस होने की खबरों को सरासर बेबुनियाद बताया। मुख़्तार के अपराध में उन्होंने गुंडागर्दी, टेंडर क़ब्ज़ाना, जमीन हड़पना आदि गैर कानूनी काम मुख्य बताया।

हैदर अली ने कहा कि मुख़्तार अंसारी अपने बच्चो को भी अपनी ही तरह गुंडा बनाना चाहता था। अली का दावा है कि मुख़्तार अपने आपराधिक समय में SC जाति वाले अधिकारियों को इस बात के लिए गुमराह करता था कि अगर वो नहीं रहेगा तो SC या बैकवर्ड समाज के लोगों को भगा दिया जाएगा। अली ने कहा कि ऐसा कह कर वो कुछ अधिकारियों को विश्वास में ले लिया करता था। उन्होंने मुख़्तार द्वारा गरीबों की मदद करने जैसी बातों को बेतुकी बताया।

योगीराज में सिर्फ बुरे लोगों पर एक्शन

योगी आदित्यनाथ के शासन की दिल खोल कर तारीफ करते हुए सपा नेता हैदर अली ने कहा कि इस शासन में केवल उन्ही लोगों पर एक्शन हो रहा है जो गंदे लोग हैं। बकौल अली वो लोग परेशान ही रहेंगे जो अपराध से पैसा कमा रहे हैं। इस कार्रवाई को अली ने संविधान और कानून के तहत हो रहा एक्शन बताया। अली के अनुसार अब समय बदल गया है और कोई अपराधी पहले जैसा अपराध कर के नहीं बच सकता।

मुख़्तार अंसारी के बारे में ‘वो किसी का नहीं’ शब्द प्रयोग करते हुए हैदर अली ने दावा किया कि उसने बीजेपी में घुसपैठ की बहुत कोशिश की। अली के मुताबिक, इस कोशिश में मुख़्तार ने माध्यम के तौर पर ओम प्रकाश राजभर को चुना था। हालाँकि, अली ने बाद में कहा कि अल्लाह ने उसके पापों का घड़ा भर दिया है और उसकी कोशिशें असफल रहीं।

मूक-बधिर लड़की से दरगाह परिसर में 3 साल से बलात्कार, चौकीदार इक़बाल और ड्राइवर सिद्दीकी को पुलिस ने दबोचा: गर्भवती होने के बाद खुला भेद

गुजरात के राजकोट जिले के गोंडल में 33 वर्षीय मूक बधिर युवती से दुष्कर्म कर उसे गर्भवती करने का मामला सुलझा लिया गया है। गुजरात पुलिस ने तीन दिनों के ऑपरेशन के बाद एक दरगाह के चौकीदार इकबाल उर्फ ​​इकू अहमद चौहान (उम्र 52) और एक ट्रक ड्राइवर सिद्दीकी अकारा साद्दीकी (उम्र 50) को गिरफ्तार कर लिया गया है। ये लोग पिछले तीन साल से दरगाह परिसर के खाली कमरे में युवती के साथ रेप कर रहे थे।

गोंडल की ही रहने वाली मूक बधिर लड़की के पेट में दर्द होने के बाद राजकोट सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहाँ उसके गर्भवती होने का पता चला। अविवाहित लड़की के गर्भवती होने के कारण मेडिकल स्टाफ ने इसकी सूचना पुलिस को दी। मामला प्रकाश में आने के बाद राजकोट के एसपी जयपाल सिंह राठौर ने पुलिस अधिकारियों को मामले को सुलझा कर आरोपितों को जल्द से जल्द गिरफ्तार करने के निर्देश दिए।

गुजरात पुलिस ने मामले की जाँच शुरू की। लड़की मूक-बधिर होने के साथ-साथ अनपढ़ भी थी, इसलिए जाँच काफी मुश्किल थी। पुलिस ने लड़की की बात समझने के लिए राजकोट के एक मूक बधिर स्कूल के सांकेतिक भाषा के शिक्षक कश्यप पंचोली और जयसुख कुमार सुरानी की मदद ली। लड़की के परिवार में उसके पिता, भाई और भाभी हैं। युवती की माँ का 2 वर्ष पूर्व ही निधन हो गया था। युवती को सांकेतिक भाषा का भी ज्ञान नहीं है इसलिए विशेषज्ञों को भी उसकी बात समझने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी।

लगातार कोशिशों के बाद आखिरकार पहले आरोपित का प्राथमिक विवरण मिल गया। आरोपितों का अंदाजा लगाने के बाद पुलिस ने पीड़िता को कुछ लोगों की तस्वीर दिखाई जिनसे आरोपितों की पहचान हो गई। पुलिस ने आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया और लड़की को उनके सामने प्रस्तुत कर शिनाख्त कराई। इसके बाद आरोपितों के खिलाफ मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई।

पुलिस की तरफ से दी गई जानकारी के अनुसार, लड़की के घर के पास ही एक दरगाह है। वह नियमित रूप से इस दरगाह में दर्शन के लिए जाया करती थी और अगरबत्ती जलाती थी। दरगाह का चौकीदार इकबाल दरगाह परिसर के एक कमरे में ही रहता था। लड़की रोज दरगाह जाती थी। एक दिन लड़की के मूक-बधिर होने का फायदा उठाकर इकबाल उसे किसी बहाने कमरे में ले गया और वहाँ उसके साथ दुष्कर्म किया।

इकबाल तीन साल से लड़की का बलात्कार कर रहा था। बलात्कार का दूसरा आरोपित ट्रक ड्राइवर सिद्दीकी है जो लड़की के पिता और भाई का भी परिचित था। उसे भी लड़की के मूक बधिर होने की जानकारी थी। सिद्दीकी भी करीब तीन सालों से लड़की पर बुरी नजर रख रहा था। मौका मिलते ही वह लड़की को एक सूनसान स्थान पर ले जाता और उसके साथ बलात्कार करता था। अब पुलिस ने दोनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है और आगे की कार्रवाई की जा रही है।

‘The Kerala Story’ में ‘आसिफा’ को देखा? फिल्म की एक और अभिनेत्री को मिली धमकी, कहा – मैं इस्लामी धर्मांतरण की शिकार 7000 लड़कियों से मिली हूँ

इस्लामी कट्टरपंथियों के सच को उजागर करती फिल्म ‘द केरल स्टोरी’ में आसिफा की भूमिका में नजर आने वाली एक्ट्रेस सोनिया बालानी (Sonia Balani) को धमकियाँ मिल रहीं हैं। हालाँकि, सोनिया का कहना है कि फिल्म को लेकर लोगों का जो प्यार मिल रहा है उसके सामने इस तरह धमकियाँ कुछ भी नहीं हैं। उन्होंने यह भी कहा है कि वह इस्लामी धर्मांतरण का शिकार बन चुकीं 7000 लड़कियों से भी मिल चुकीं हैं।

दरअसल, आगरा के जयपुर हाउस में स्थित झूलेलाल भवन में उनके लिए एक सम्मान समारोह आयोजित किया गया था। इस समारोह में शामिल होने पहुँची सोनिया बालानी ने कहा है कि ‘द केरल स्टोरी’ का उद्देश्य 100-200 करोड़ रुपए कमाना नहीं था। बल्कि इसका उद्देश्य तो केरल की बेटियों के साथ हुई घटनाओं की सच्चाई दिखाना था। भारत में लोग अपनी मर्जी से धर्मांतरण कर सकते हैं, लेकिन ब्रेनवॉश कर या फिर दबाव डालकर धर्मांतरण कराना गलत है।

उन्होंने यह भी कहा है कि घर से दूर या बाहर रहकर पढ़ाई करने वाली लड़कियों को इतना समझना और जागरूक होना चाहिए कि कोई उन्हें बहला-फुसलाकर या ब्रेनवॉश कर धर्मांतरण न करा सके। यह फिल्म किसी धर्म का विरोध करने के लिए नहीं बनाई गई। बल्कि आतंकवाद और आईएसआईएस के विरोध में बनाई गई है। ‘द केरल स्टोरी’ की एक-एक बात सच है इसलिए मुस्लिम लड़कियाँ भी इस फिल्म की तारीफ कर रहीं हैं। उन्होंने जिस तरह का किरदार निभाया उस तरह का काम करने वाले एक्टर्स को धमकियाँ मिलती रहीं हैं। उन्हें भी धमकियाँ मिल रहीं हैं, लेकिन फिल्म पर लोग जिस तरह से प्यार लुटा रहे हैं। उसके सामने ये धमकियाँ कुछ भी नहीं हैं।

सोनिया बालानी ने आगे कहा है कि पहले लोग स्टार कास्ट देखकर मूवी देखने जाते थे। लेकिन, ‘द केरल स्टोरी’ ने यह साबित किया है कि कहानी और किरदार में दम होना चाहिए। सोनिया का कहना है कि आसिफा का किरदार उन्होंने खुद ही चुना था। फिल्म में वह जैसी दिख रहीं हैं रियल लाइफ में उससे एकदम अलग हैं। सोनिया ने कहा है, “मैं उत्तर भारत से हूँ और पूजा करती हूँ। सकारात्मक विचारों को महत्व देती हूँ। लेकिन, ‘द केरल स्टोरी’ की आसिफा मलयालम बोलती है। नमाज पढ़ती है और उसकी सोच भी साजिश के तहत निश्चित उद्देश्य से जुड़ी है। जैसे आप नहीं होते हैं वैसे किरदार को निभाना बहुत कठिन होता है।”

हिंदू युवती को बेचने जा रहे 4 को यूपी पुलिस ने दबोचा, आमिर ने नाम बदल कर फँसाया था

उत्तर प्रदेश के लखनऊ से लव जिहाद का मामला सामने आया है। आमिर नाम के शख्स ने हिंदू युवक बनकर रहीमाबाद की लड़की को प्रेम जाल में फाँसा। इसके बाद उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। सच्चाई पता चलने के बाद आमिर ने उस पर धर्म बदलने का दबाव भी बनाया। जब लड़की ने धर्म बदलने से मना कर दिया तो मौका देखकर उसे अगवा कर लिया गया। युवती ने गुरुवार (19 मई 2023) की रात खुद ही अपने अपरहण की सूचना पुलिस को दी।

अपहरण की सूचना मिलते ही पुलिस की कई टीमें युवती को तलाशने के लिए निकल पड़ीं। इस ऑपरेशन में करीब 125 पुलिसकर्मी शामिल हुए। जानकारी के मुताबिक अपहरण के बाद गुरुवार की रात रात 11 बजे युवती ने किसी तरह अपने फोन से पुलिस कंट्रोल रूम को अपहरण की सूचना दी। लड़की ने हत्या की आशंका जाहिर करते हुए पुलिस वालों से बचाने की गुहार लगाई। पुलिस ने कई टीमें बनाकर देर रात विशेष ऑपरेशन शुरू किया। पीड़िता की लोकेशन को लगातार ट्रेस किया जा रहा था। बदमाश युवती को लेकर दुबग्गा होते हुए ऐशबाग रेलवे स्टेशन की तरफ भागे।

पास की वजीरगंज पुलिस टीम को ऐशबाग रेलवे स्टेशन भेजा गया और जीआरपी से भी मदद माँगी गई। अपहरणकर्ता युवती के साथ ऐशबाग स्टेशन पर खड़ी अवध-असम एक्सप्रेस पर चढ़ गए। पुलिस टीम के पहुँचने से पहले ट्रेन खुल चुकी थी। अवध-असम एक्सप्रेस को हरौनी स्टेशन पर रोक लिया गया। कुछ ही देर में पुलिस की टीम ने पूरा स्टेशन घेर लिया। 45 मिनट तक ट्रेन को खंगालने के बाद सुबह 4 बजे युवती को चार अपहरणकर्ताओं के साथ बरामद कर लिया गया।

आरोपितों की पहचान मोहम्मद आमिर, मोहम्मद जाबिर, मोहम्मद नादिर और मोहम्मद वहाब के तौर पर हुई है। एक आरोपित जीशान पुलिस की गिरफ्त से फरार है जिसकी तलाश की जा रही है। मोहम्मद जाबिर, मोहम्मद आमिर का पिता है। पूछताछ में आरोपितों ने बताया है कि पिता-पुत्र मिलकर युवतियों को बेचने का गिरोह चलाते हैं। पूछताछ में खुलासा हुआ है कि मुस्लिम युवक ग्रामीण इलाकों की युवतियों को प्रेम जाल में फँसाकर घुमाने के लिए मुंबई लेकर जातें हैं। इन लड़कियों का सौदा पहले से ही तय होता था। मुंबई में कुछ दिन रखने के बाद लड़कियों को खरीदने वाले को सौंप दिया जाता था।

आमिर ने हिंदू युवती को फँसाकर बनाया धर्मपरिवर्तन का दबाव

पूछताछ में लड़की ने पुलिस वालों को जानकारी दी कि आमिर ने हिंदू बनकर उससे दोस्ती की थी। जिसके बाद वह कई बार लखनऊ और आस पास के इलाकों में घूमने भी गए। जहाँ आमिर ने उसके साथ संबंध बनाए। युवती को जैसे ही आमिर के मुस्लिम होने की भनक लगी, उस पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया जाने लगा। पुलिस युवती के धर्म परिवर्तन वाले आरोपों की भी जाँच कर रही है।

पूछताछ में पता चला कि आरोपितों ने हिंदू युवती को बेचने के इरादे से बंधक बना लिया था। इसके पहले कि आरोपित अपने मनसूबों में कामयाब हो पाते लड़की ने पुलिस को सूचना दे दी। समय रहते पुलिस की टीम ने चार आरोपितों को दबोच लिया।

‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ की बावरी ने यौन शोषण के आरोपित असित मोदी पर लगाया टॉर्चर का आरोप, कहा- उनका EP सोहिल रहमानी सबसे ज्यादा बदतमीज

सब टीवी के लोकप्रिय कॉमेडी शो ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ को लेकर शुरू हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा। शो में ‘रोशन भाभी’ का किरदार निभाने वाली जेनिफर मिस्त्री बंसीवाल ने प्रोड्यूसर असित मोदी पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था। इसके बाद अब मोनिका भदौरिया ने भी असित मोदी पर कुत्तों की तरह व्यवहार करने और समय पर पेमेंट न देने का आरोप लगाया है।

‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ में बावरी की भूमिका में नजर आ चुकी मोनिका भदौरिया ने साल 2019 में शो छोड़ दिया था। मोनिका ने हिंदुस्तान टाइम्स से बातचीत में कहा कि शो छोड़ने के बाद शो के प्रोड्यूसर ने उन्हें तीन महीने का पेमेंट नहीं दिया था। करीब 5 लाख रुपए के लिए उन्हें एक साल तक संघर्ष करना पड़ा। मोनिका का आरोप है कि शो के प्रोड्यूसर ने लगभग सभी एक्टर्स का पैसा रोक रखा है। प्रोड्यूसर के पास पैसों की कमी नहीं है, लेकिन लोगों को टॉर्चर करने के लिए वह ऐसा करते है।

मोनिका ने ‘तारक मेहता…’ शो में काम करने के समय की तुलना ‘नर्क’ से की है। उन्होंने कहा, “जब मेरी माँ कैंसर के ईलाज के लिए अस्पताल में एडमिट थी तो मुझे पूरी रात वहाँ बितानी पड़ती थी। इसके बाद भी असित मोदी और उनकी टीम मुझे सुबह-सुबह शूटिंग के लिए बुला लेते थे। मैं उनसे कहती थी कि मेरी मानसिक हालत ठीक नहीं है, फिर भी वेे मुझे आने के लिए दबाव डालते थे। सबसे बुरी बात यह थी कि सेट पर पहुँचने के बाद वहाँ मेरा कोई भी काम नहीं होता था। मुझे सिर्फ इंतजार करना होता था।”

उन्होंने आगे कहा है कि जब उनकी माँ का निधन हुआ तब प्रोड्यूसर असित मोदी ने सांत्वना देने के बजाय, उन्हें 7 दिन में शूटिंग के लिए सेट पर आने को कहा। उन्होंने आगे कहा है, “जब मैंने कहा कि मेरी हालत ठीक नहीं है तो उनकी टीम ने कहा कि आपको पैसे दे रहे हैं। जब भी आने के लिए कहा जाएगा आपको आना होगा। चाहे आपकी मम्मी एडमिट हों या कोई और।”

मोनिका ने आगे कहा, “इसके बाद मुझे मजबूरन सेट पर जाना पड़ा। मेरे पास कोई और विकल्प नहीं था। मैं सिर्फ रोती थी, लेकिन इसके बाद भी वे मुझसे बदसलूकी करते। मुझे टॉर्चर किया जा रहा था। वे मुझे शूटिंग से एक घण्टे पहले ही सेट पर बुलाते थे। सेट पर बहुत अधिक गुंडागर्दी है। असित खुद को भगवान कहते हैं।”

मोनिका ने खुलासा करते हुए कहा है कि जब उन्होंने शो जॉइन किया तगा तब उन्हें 30,000 रुपए का मामूली वेतन दिया जा रहा था। असित ने कहा था कि 6 महीने पेमेंट बढ़ा देंगे। मोनिका ने कहा कि सच में वो कुत्ते की तरह व्यवहार करते हैं। असित ने उनके साथ गलत व्यवहार किया।

असित मोदी के पास से जॉब छोड़ने को लेकर मोनिका ने कहा, “मैंने बोला मुझे काम ही नहीं करना ऐसी जगह, जहाँ पर आपको काम करके ऐसा लगे कि इससे बेहतर सुसाइड कर लो। जो कोई आ रहा है बदतमीज़ी से बात कर रहा है। सोहिल रहमानी सबसे बदतमीजी से बात करते हैं।”

शो के मौजूदा कलाकारों के रवैये को लेकर उन्होंने कहा, “जो शो में है वो बोलेंगे भी नहीं। यहाँ तक कि उन्होंने (असित मोदी ने) मुझे मीडिया में उनके बारे में बुरा न बोलने के अनुबंध पर हस्ताक्षर भी करवाए। जेनिफर जी ने भी बात नहीं की, जब दूसरे शो छोड़कर चले गए। जब उनके साथ चीजें हुईं तो वो बोलीं। सबको अपनी जॉब बचानी है।”

PM मोदी की ‘स्वीट क्रांति’ का सिपाही, जिसने खड़ा कर दिया एक देशी ब्रांड: ‘विश्व मधुमक्खी दिवस’ पर मिलिए यूपी के किसान से, दुरुस्त कानून-व्यवस्था का भी मिला लाभ

दुनिया भर में शनिवार (20 मई, 2023) को ‘विश्व मधुमक्खी दिवस’ मनाया जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र ने इस हर साल ‘World Bee Day’ मनाने की घोषणा की, ताकि मधुमक्खियों को विलुप्त होने से बचाया जा सके। दुनिया भर में कई ऐसे पेड़-पौधे हैं, जो मधुमक्खियों और उनके जैसे परागणकर्ता (Pollinators) पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में न सिर्फ शहद, बल्कि पेड़-पौधों के लिए भी मधुमक्खियों का अस्तित्व में रहना बहुत ही जरूरी है।

UN ने लोगों को सलाह दी है कि वो अलग-अलग तरह से फूलों के पौधे लगाएँ और स्थानीय किसानों से कच्चा शहद खरीदें। साथ ही बगीचों में केमिकल के इस्तेमाल के खिलाफ भी नसीहत दी गई है। कहा गया है कि मधुमक्खी के छत्तों को नुकसान न पहुँचाएँ। मधुमक्खी पालकों को भी पेस्टीसाइड का इस्तेमाल न करने की सलाह दी गई है। अलग-अलग किस्म की फसलें उपजने को भी कहा गया है। साथ ही अलग-अलग देशों के सरकारों को अंतरराष्ट्रीय संगठनों से इस विषय में साथ काम करने की अपील भी की गई है।

भारत में मधुमक्खी पालन के दिशा में क्या प्रयास हो रहे हैं? हमारे देश में एक ‘National Bee Board’ भी है, जिससे पता चलता है कि ये कितना महत्वपूर्ण क्षेत्र है। भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत ये विभाग आता है। मधुमक्खी पालन के विकास और फसलों के उत्पादन में वृद्धि के लिए ये बोर्ड काम करता है। ‘Cross Pollination’ फसलों के लिए महत्वपूर्ण है। बोर्ड की वेबसाइट पर भी मधुमक्खी पालन के विभिन्न चरणों के बारे में विस्तार से बताया गया है।

‘FABA Honey’ के संस्थापक मुकेश पाठक ने बताई मधुमक्खी पालन की बारीकियाँ

मधुमक्खी पालन होता क्या है, शहद कैसे निकलता है और भारत में इसका बाजार कैसे काम करता है? इन सवालों के जवाब के लिए हमने ‘FABA Honey’ के संस्थापक मुकेश पाठक से बात की, जो पिछले 7 वर्षों से इस क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं। उन्हें मधुमक्खी पालन की प्रेरणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ‘स्वीट क्रांति’ की बात करने से मिली थी। आज उनके पास ग्राहकों की माँग इतनी ज्यादा है कि किसी तरह डिमांड पूरी कर पाते हैं।

सबसे पहले हमने मुकेश पाठक से पूछा कि आखिर मधुमक्खी पालन के अलग-अलग चरण क्या है और जो शहद हम ग्रहण करते हैं, उन्हें कैसे निकाला जाता है? इस दौरान उन्होंने हमें ‘Bee Keeping’ और ‘Honey Hunting’ का अंतर समझाया। उन्होंने बताया कि मधुमक्खियों द्वारा बनाए गए छत्तों को तोड़ कर जो शहद निकाला जाता है, इसे ‘Honey Hunting’ कहते हैं। ये सही तरीका नहीं होता। जबकि मधुमक्खी पालन शहद पाने का सही तरीका होता है।

मधुमक्खियों के लिए ऐसे बनाए जाते हैं छत्ते

उत्तर प्रदेश के रामपुर के रहने वाले मुकेश पाठक ने बताया कि ‘Honey Hunting’ इसीलिए सही नहीं है, क्योंकि छत्तों को तोड़ कर मधुमक्खियों को उनके हाल पर छोड़ दिया जाता है और उनमें से कई मर जाती हैं। जबकि उनके पालन करने की प्रक्रिया में उनके लिए बक्सा बनाया जाता है, उन्हें उनका घर प्रदान किया जाता है। एक तरह से उनके लिए ‘आर्टिफिसियल छत्ता’ बनाया जाता है। इन्हीं छत्तों में मधुमक्खियाँ शहद बनाती हैं।

फिर इन ‘रेडीमेड छत्तों’ में मधुमक्खियाँ अपना काम करती हैं। वो बाहर निकल कर फूलों पर जाती हैं, फिर नेक्टर लेकर आती हैं। वो शहद पैदा करती हैं। कई सारे छत्तों को मिला कर कॉलोनी कहा जाता है। इसके बाद शुरू होता है मधुमक्खियों का माइग्रेशन। अगर एक जगह के फूल खत्म हो गए तो बक्से लेकर मधुमक्खी पालन कहीं और निकल जाते हैं। कभी राजस्थान तो कभी पश्चिम बंगाल के सुंदरबन जैसे इलाकों में जाकर छत्तों को रखा जाता है।

मुकेश पाठक ने बताया कि एक ही जगह सारे फूलों का पर्याप्त मात्रा में मिलना या उनकी खेती करना इसके लिए संभव नहीं हो पाता, इसीलिए मधुमक्खियों को लेकर कहीं और जाने का विकल्प अपनाया जाता है। अक्टूबर-नवंबर में उत्तर भारत में सरसो की खेती बहुतायत में होती है, तो वहाँ मधुमक्खियों को लेकर जाया जाता है। यही तरीका सौंफ और अजवायन को लेकर भी आजमाया जाता है। नैनीताल के जंगलों में ‘मल्टीफ्लोरा हनी’ प्राप्त हो जाता है।

मुकेश पाठक इस दौरान उन नमी कंपनियों पर भी निशाना साधते हैं, जो शुद्ध शहद देने का दावा करते हैं। उनका मानना है कि इस तरह अलग-अलग किस्मों के शहद मधुमक्खी पालक ही दे सकते हैं, जबकि ब्रांडेड कंपनियों ने आज तक कभी बताया ही नहीं कि ये शहद आता कहाँ से है। बिना किसी कंपनी का नाम लिए उन्होंने कहा कि बिना सबूत के कुछ नहीं कहा जा सकता, लेकिन अब तक के निष्कर्ष यही हैं कि इनके सारे शहद एक जैसे ही होते हैं।

उन्होंने कहा कि इसके उलट उनके अलग-अलग शहद के रंग-रूप और गंध से लेकर उनके गुण-धर्म तक अलग-अलग होते हैं। उन्होंने बड़ी कंपनियों द्वारा अपने शहद में सिरप जैसी कोई चीज मिलाए जाने की भी आशंका जताई। उन्होंने कहा कि हर फ़्लोरा के शहद अलग होते हैं। जैसे, सरसो का शहद काफी मोटा होता है और गर्मियों में जम जाता है। जहाँ मधुमक्खियों को ले जाया जाता है, वो वहाँ के पेड़-पौधों पर जाती हैं।

उन्होंने एक और खास बात बताई कि इन मधुमक्खियों का GPS काफी मजबूत होता है, उन्हें जहाँ भी ले जाया जाता है वहाँ वो परागण के लिए बाहर जाती हैं और फिर वापस अपने छत्ते में लौट आती हैं। हर मधुमक्खी अपने छत्ते में लौटती है और उसे पता होता है कि उसका छत्ता कहाँ है। अगर छत्ता कहीं खो गया, तो वो ढूँढती भी हैं। मुकेश पाठक को मधुमक्खी पालन की प्रेरणा पीएम मोदी द्वारा 2015 में दिए गए एक भाषण से मिली थी।

ऑपइंडिया से बात करते हुए ‘FABA Honey’ के मुकेश पाठक ने बताया, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कुछ भी बोलते हैं तो उसके पीछे उनका गहरा अध्ययन होता है। मेरे दिमाग में ये बात थी। इसके करीब एक वर्ष बाद मेरे एक मधुमक्खी पालक मित्र फिर से मेरे संपर्क में आए, जिन्होंने मुझे इसकी बारीकियाँ समझाईं। मैं सोशल मीडिया पर था, इसीलिए मैंने शहद के बारे में जागरूकता फैलाना शुरू किया। फिर शुद्ध शहद देने के लिए मैंने मधुमक्खी पालन शुरू किया।”

मुकेश पाठक आज भी ऑनलाइन ही अपना कारोबार कर रहे हैं, वो ऑनलाइन ऑर्डर-पेमेंट लेते हैं, फिर डिलीवरी भेजते हैं। डिमांड इतनी है कि महीने में 3000 किलो शहद बिक जाते हैं, फिर भी ग्राहकों की माँग पूरी नहीं हो पाती। उन्हें कई ग्राहक ट्विटर से भी मिले हैं।मुकेश पाठक पूछते हैं कि यहाँ ये हाल है तो बड़ी कंपनियाँ कैसे शहद की डिमांड पूरी कर रही हैं, बिना मधुमक्खी पालन किए गए। इन कंपनियों ने कभी नहीं बताया कि वो शहद ला कहाँ से रहे हैं।

इस तरह शहद को डब्बों में पैक किया जाता है

मुकेश पाठक ने कहा कि मधुमक्खी पालन के लिए कई सरकारी योजनाएँ हैं, लेकिन कई मधुमक्खी पालक इसे ले नहीं पा रहे हैं। वो इसका कारण बताते हैं कि कुछ अहर्ताओं को पूरा करने के कारण इसे नहीं ले पा रहे हैं तो कई जंगल में रहते हैं और कागज-कलम से उनका खास वास्ता नहीं। हालाँकि, कई लोगों को इसका लाभ मिलता भी है। उन्होंने बताया कि सरकारी सहूलियतों का लाभ उन्हें भी मिला, बैंक से आसानी से लोन मिल गया।

PM नरेंद्र मोदी की ‘स्वीट क्रांति’ की पहल का हो रहा है असर

मुकेश पाठक ने बताया कि प्रधानमंत्री द्वारा ‘स्वीट क्रांति’ क्रांति की बात करने से अब निचले स्तर के अधिकारी-कर्मचारी भी मधुमक्खी पालकों को गंभीरता से लेते हैं और उनकी मदद करते हैं, वरना पहले उन्हें इसके बारे में कुछ पता ही नहीं था। कई लोगों को इसका लाभ मिला है। बता दें कि जिस रामपुर से मुकेश पाठक आते हैं, वो कभी आजम खान के कारण जाना जाता था। वहाँ जम कर उनकी माफियागिरी चलती थी।

लेकिन, मुकेश पाठक ने बताया कि योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद से तस्वीर बदल गई है। उनका घर और पंजीकृत दफ्तर भी रामपुर में हैं, लेकिन माइग्रेशन के लिए वो बिहार-बंगाल आते-जाते रहते हैं। उन्होंने कहा कि अब यहाँ काफी सकारात्मक वातावरण है और प्राकृतिक आपदाओं के अलावा कहीं से नुकसान की कोई आशंका नहीं होती। उन्होंने कहा कि कानून व्यवस्था दुरुस्त है और पुलिस-प्रशासन शिकायतों का तुरंत संज्ञान लेता है।

बता दें कि मोदी सरकार भी ‘वीट रेवोलुशन’ को लेकर खासी गंभीर है। ‘National Beekeeping And Honey Mission’ चलाया जा रहा है। 2020-21 से लेकर 2022-23 की अवधि के लिए मधुमक्खी पालन हेतु 500 करोड़ रुपए का आवंटन किया गया है। अब तक 114 परियोजनाओं को मंजूरी मिल चुकी है, जो 139 करोड़ रुपए के हैं। उधर संयुक्त राष्ट्र ने भी दुनिया भर को चेताया है कि हमारा अस्तित्व ही मधुमक्खियों और अन्य Pollinators पर निर्भर है, इसीलिए उनका संरक्षण होना चाहिए।

मुकेश पाठक और उनके ब्रांड ‘FABA Honey’ के साथ एक और अच्छी बात ये है कि वो वेदों की विचारधारा के साथ शहद का प्रचार-प्रसार करते हैं। उनके डब्बे पर ऋग्वेद की पंक्ति ‘मधु॒ वाता ऋतायते मधु क्षरन्ति सिन्धवः। माध्वीर्नः सन्त्वोषधीः॥’ लिखी होती है। साथ ही लिखा होता है कि ये वैदिक मूल्यों पर आधारित है। सोशल मीडिया के जरिए वो शहद के फायदों के बारे में भी लगातार बताते रहते हैं। किस फायदे के लिए शहद को किस प्रक्रिया के तहत किस चीज के साथ ग्रहण करें, इसकी वो जानकारी देते रहते हैं।