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गोल्डन टेम्पल के बाहर सिख नेता ने युवक पर ताबड़तोड़ बरसाए थप्पड़, बीड़ी रखने का आरोप लगा कर पीटा: वीडियो वायरल

पंजाब के अमृतसर में स्थित हरमंदिर साहिब (स्वर्ण मंदिर) में आस्था के नाम पर एक व्यक्ति के साथ मारपीट की गई। पीड़ित व्यक्ति हरमंदिर साहिब के बाहर खड़ा था। इसी दौरान, वहाँ मौजूद एक सिख व्यक्ति उस पर जेब में बीड़ी रखने का आरोप लगाते हुए उसके साथ मारपीट करने लगा। मारपीट करने वाला व्यक्ति खालिस्तान समर्थक सिमरनजीत सिंह मान की पार्टी शिरोमणि अकाली दल (ए) का महासचिव हरपाल सिंह है।

स्वर्ण मंदिर में हुई इस मारपीट का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। कहा जा रहा है कि मारपीट करने वाले व्यक्ति के साथ मौजूद लोगों ने ही वीडियो बनाकर वायरल किया है। वायरल वीडियो की शुरुआत में ही हरपाल सिंह को पीड़ित व्यक्ति के साथ मारपीट करते देखा जा सकता है।

हरपाल पीड़ित के जेब में बीड़ी होने की बात कहता है। लेकिन पीड़ित व्यक्ति इस बात से लगातार इनकार करता दिखाई दे रहा है। इसके बाद हरपाल के कहने पर पीड़ित अपने जेब से तम्बाकू का पैकेट निकालता दिखाई देता है। हालाँकि पीड़ित तंबाकू खाने की बात से भी इनकार कर रहा है। लेकिन इसके बाद भी हरपाल उसे थप्पड़ मारकर वहाँ से भगा देता है।

अपने ऊपर लगे आरोपों पर हरपाल सिंह का कहना है कि उन्होंने मंदिर में माथा टेकने आए व्यक्ति को हाथ में तंबाकू रगड़ते देखा था। इसके बाद उन्होंने उसे मंदिर के अंदर जाने से रोक दिया। यही नहीं, हरपाल ने यह भी कहा है कि उसने दूसरों को सबक सिखाने के लिए पीड़ित व्यक्ति को धीरे-धीरे थप्पड़ मारे थे। वहीं, वीडियो वायरल होने के बाद शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) ने इस घटना की निंदा की है। साथ ही कहा है कि मारपीट करने वाला व्यक्ति SGPC का कर्मचारी नहीं है।

बता दें कि इससे पहले 17 अप्रैल 2023 को अपने चेहरे पर तिरंगा लगाकर आई एक लड़की को भी स्वर्ण मंदिर में घुसने से रोक दिया गया था। इसका एक वीडियो भी सामने आया था। वीडियो में सेवादार ने कहा था कि यह इंडिया नहीं पंजाब है। इसलिए लड़की को स्वर्ण मंदिर के अंदर जाने से रोक दिया। यह वीडियो सामने आने के बाद देशभर में यह मुद्दा चर्चा का विषय बन गया था। विवाद बढ़ने पर SGPC को इस मामले में माफी भी माँगनी पड़ी थी।

राजस्थान में सरकारी दफ्तर से ‘घूस’ का ₹2.32 करोड़ कैश बरामद, अलमारी से निकली सोने की ईंट: जॉइंट डायरेक्टर ठेका देने के बदले लेता था कमीशन, 8 हिरासत में

राजस्थान की राजधानी जयपुर में स्थित सरकार के योजना भवन के बेसमेंट से करोड़ों रुपए नकद और एक किलोग्राम सोना बरामद हुआ है। इस मामले में 8 लोगों को हिरासत में लिया गया है। DOIT के जॉइंट डायरेक्टर और स्टोर के इंचार्ज वेदप्रकाश यादव इस पूरी रकम का मालिक निकला है। मामले को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो को सौंप दिया गया है।

शनिवार (20 मई 2023) को योजना भवन के सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग के बेसमेंट में रखी अलमारी में से 2 करोड़ 31 लाख 49 हजार 500 रुपए नकद और एक बैग से 1 किलोग्राम वजन की सोना की एक ईंट जब्त की गई। राज्य की मुख्य सचिव उषा शर्मा और पुलिस महानिदेशक (DGP) उमेश मिश्रा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि विभाग से जुड़े 8 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया है।

इस रकम का पता लगाने के लिए पुलिस ने 30 दिन की सीसीटीवी फुटेज खंगाला था। इसके आधार पर पुलिस वेदप्रकाश तक पहुँची। कड़ी पूछताछ में वेदप्रकाश ने स्वीकार किया कि यह रकम उसी की है। वह अलमारी को लॉकर के तौर पर इस्तेमाल करता था और कमीशन का जो भी पैसा उसे मिलता थी, इसी अलमारी में रखता था।

दरअसल, योजना भवन स्थित सूचना और प्रौद्योगिकी विभाग की फाइलों के डिजिटलीकरण का काम चल रहा है। इसी दौरान बेसमेंट में कई दिनों से बंद पड़ी एक अलमारी का ताला तोड़कर जाँच की गई तो यह रकम बरामद हुई। अलमारी में रखे ट्रॉली सूटकेस में 2,000 रुपए और 500 रुपए के नोट थे। बता दें कि यह रकम ऐसे समय में जब्त की गई है, जब RBI ने 2,000 रुपए के नोट को चलन से बाहर करने का निर्देश जारी किया है।

राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ और भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता कर्नल राज्यवर्द्धन सिंह राठौड़ ने कहा कि सरकारी कार्यालय में नकद रकम मिलना दिखाता है कि राज्य की कॉन्ग्रेस सरकार में भ्रष्टाचार कितने चरम पर है। उन्होंने राज्य के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को भी निशाने पर लिया। कॉन्ग्रेस सरकार को घिरता देख राजस्थान सरकार में मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने आरोपितों पर सख्त कार्रवाई की बात कही है।

प्रताप सिंह खाचरियावास (Pratap Singh Khachariyawas) ने कहा, “इसमें शामिल अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। राजस्थान पुलिस ने नकदी जब्त कर ली है। अगर कोई गलत कर रहा है, चाहे केंद्र में हो या राजस्थान सरकार में, उसे परिणाम भुगतने होंगे।”

प्रारंभिक जाँच में सामने आया है कि यह रकम ठेके देने के बदले में वसूली गई थी। कमीशन की राशि को वेदप्रकाश यादव बेसमेंट में रखी अलमारी में रखता था। पहले रिश्वत में वसूली गई रकम से वेदप्रकाश यादव ने गोल्ड की बिस्किट खरीदे थे। यादव को हिरासत में लेकर उसे भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के सौंप दिया है। इस मामले में एसीबी रिपोर्ट दर्ज कर उसे गिरफ्तार करेगी।

लंदन में रहने वाली अंग्रेजन पत्रकार ने भी समझा The Kerala Story का दर्द, फिल्म को प्रोपेगंडा बताने वालों को धो डाला

‘द केरल स्टोरी’ फिल्म के रिलीज होने के बाद भारत में भले ही वामपंथी और कट्टरपंथी गिरोह इसे प्रोपेगेंडा बताकर खारिज करने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन हकीकत में यह फिल्म विदेशों तक में सराही जा रही है। इस फिल्म को देखने के बाद लंदन की पत्रकार ने फिल्म की तारीफ की है। साथ ही जिन्होंने इसे प्रोपेगेंडा बताया है उन्हें भी खरी-खरी सुनाई है।

नाओमी कैंटन नाम की पत्रकार ने लिखा, “यूके सिनेमा में अभी द केरल स्टोरी फिल्म देखी। ये एक शानदार फिल्म हैं जो बताती है कि आखिर एक महिला के साथ क्या होता है जब वो ISIS आतंकी से शादी करती है। मैंने ऐसी फिल्म पहले नहीं देखी। इस फिल्म को प्रोपेगेंडा कहना सरासर गलत है, अगर कोई कहता है तो ये खुद एक प्रोपेगेंडा है। ISIS आतंकी से निकाह करने वाली मुस्लिम-गैर मुस्लिम हो सकती है। सबका एक ही हश्र होता है। जन्नत के सपने दिखाकर सीरिया ले जाते हैं। वहाँ रेप होता है। आजादी छिनती है और पासपोर्ट ले लिया जाता है। वह ऐसा फँसती हैं कि उन्हें पछतावा होने लगता है (बशर्ते वह शमीमा बेगम जितनी कट्टरपंथी न हों और ISIS में खुद न घुसना चाहें।)”

पत्रकार कहती हैं, “फिल्म दिखाती हैं कि कैसे ISIS सबके लिए खतरा है। इसमें दिखाया है कि ये हिंदू और ईसाई लड़कियों को फँसाकर कट्टरपंथी बनाते हैं। ये सब चीज वो लोग कैसे करते हैं ये जानना जरूरी है। ये फिल्म है कोई डॉक्यूमेंट्री नहीं। केरल में तीन लड़कियों के साथ घटित घटना पर फिल्म आधारित है। फिल्म ये दावा नहीं करती कि ये उन लड़कियों की सटीक कहानी है। उम्मीद है कि कुछ पत्रकार केरल में इन लड़कियों के परिवारों से मिलकर इंटरव्यू लिए होंगे। ये भी उम्मीद है कि महिलाओं को कट्टरपंथी बनाने वाले लोगों को गिरफ्तार करने के प्रयास पुलिस कर रही होगी। इनमें एक तो केरल में ही रहकर अपना पिज्जा पार्लर चला रहा है।

कैंटन कहती हैं, “मुझे नहीं पता अगर एक महिला भी भारत से ISIS गई। लेकिन अगर एक भी गई है तो ये हैरान करने वाला है। फिल्म की अच्छाई है कि ये फिल्म बताती है कि जब कोई भारत से ISIS या आतंकी समूह में जाता है तो क्या होता है। इस फिल्म में प्रोपेगेंडा नहीं हैं। केवल ये दिखाया गया है कि ISIS कैसे लोगों को कट्टरपंथी बनाता है। ये अच्छा है कि फिल्म को यूके में रिलीज किया गया। इसे 18 रेटिंग देकर भी सही हुआ क्योंकि इसमें बहुत हिंसा है। “

बता दें कि लंदन पत्रकार नाओमी कैंटन इस समय में टाइम्स ऑफ इंडिया के लिए लंदन बीट कवर करती हैं। वह पहले भारत में रहती थीं और हिंदुस्तान टाइम्स से जुड़ी हुई थीं। उन्होंने द केरल स्टोरी देखने के बाद ‘खोरासन फाइल्स’ नाम से एक यूट्यूब वीडियो भी शेयर किया है।

अब विमान से FREE में तीर्थयात्रा: CM शिवराज सिंह चौहान ने बुजुर्गों को संगम स्नान के लिए रवाना किया, अगले 2 महीने में ऐसी 25 फ्लाइट्स

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ‘मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना’ के अंतर्गत ‘वायुयान से तीर्थयात्रा’ का शुभारंभ किया। पहले चरण में बुजुर्ग तीर्थयात्रियों को रविवार (21 मई, 2023) को भोपाल से प्रयागराज के लिए भेजा गया। इस घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें विमान में बैठे महिला-पुरुष बुजुर्ग तीर्थयात्रियों से CM चौहान कह रहे हैं कि वो आराम से दर्शन कर के आएँ। साथ ही उन्हें बुजुर्गों से गले मिलते हुए भी देखा जा सकता है।

राजा भोज एयरपोर्ट पर आयोजित कार्यक्रम में 32 बुजुर्ग तीर्थयात्रियों को प्रयागराज संगम दर्शन के लिए रवाना किया गया। शॉल-श्रीफल भेंट कर के इन तीर्थयात्रियों को सम्मानित किया गया। खास बात ये है कि इस तीर्थयात्रा का सारा खर्च सरकार वहन कर रही है – यात्रा और रहने-खाने सबका। सीएम चौहान ने इस दौरान कहा कि ये एक अद्भुत और पवित्र दिन है, जब बुजुर्ग साथियों का विमान से यात्रा करने का सपना भी पूरा हो रहा है।

उन्होंने कहा,  “व्यक्ति आध्यात्मिक शांति चाहता है आज मेरा संकल्प पूरा हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कहते थे कि हवाई चप्पल करने वालों को भी हवाई यात्रा का अवसर मिलना चाहिए। आज इनकी बात सच साबित हो रही है, हमारे बुजुर्ग पवित्र प्रयागराज जा रहे हैं। राम की कृपा से आप तीर्थों के दर्शन करेंगे और हमें व प्रदेश को आपका आशीर्वाद मिलेगा। अब जोड़े से बुजुर्गों को तीर्थ यात्रा कराई जाएगी। अभी एक परिवार से एक ही जाता है। अगली फ्लाइट में दादा भी जाएँगे और दादी भी जाएँगी।”

उन्होंने राज्य की पर्यटन व संस्कृति मंत्री उषा ठाकुर को निर्देश दिया कि अगली बार इस यात्रा पर पति-पत्नी दोनों को भेजने की व्यवस्था करें, क्योंकि जोड़े के साथ यात्रा सफल मानी जाती है। इस साल 19 जुलाई तक 25 जिलों के बुजुर्ग तीर्थयात्रियों को 25 फ्लाइट्स से प्रयागराज, शिर्डी, मथुरा-वृंदावन और गंगासागर धाम की यात्रा कराई जाएगी। बता दें कि 2012 से अब तक 782 स्पेशल ट्रेन चला कर 7.82 लाख बुजुर्गों को तीर्थयात्रा कराई जा चुकी है।

कलावा काट डाला, भगवान के पोस्टर फाड़े, ‘जय श्री राम’ बोलने पर छात्रों को 10 चक्कर लगवा कर सस्पेंड किया… दिल्ली के इस स्कूल में टीका लगाना भी ‘अपराध’

देश की राजधानी दिल्ली के एक स्कूल में बच्चों के हाथों से कलावा काटने की खबर सामने आई है। आरोप यह भी है कि स्कूल में न सिर्फ भगवान राम के पोस्टर फाड़े गए बल्कि उनकी जय बोलने वाले छात्रों को सस्पेंड कर के परीक्षा देने से भी रोक दिया गया। इस मामले में हिन्दू संगठनों ने स्कूल के बाहर विरोध प्रदर्शन किया है। हालात काबू में रखने के लिए पुलिस को मौके पर पहुँचना पड़ा। हंगामे के बाद छात्रों का निलंबन वापस ले लिया गया है।

छात्रों का कलावा 16 मई, 2023 को काटा गया और बाद में पोस्टर 19 मई को फाड़े गए। इसी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शनिवार (20 मई, 2023) को हुआ है।

यह मामला मयूर विहार के फेज 3 स्थित वनस्थली पब्लिक स्कूल का है। यहाँ के कई हिन्दू बच्चों ने सामूहिक रूप से एकजुट हो कर स्कूल के अध्यापक अनूप रावत पर अपने हाथ में बँधा कलावा काटने का आरोप लगाया है। कटे कलाओं को डस्टबिन में डाल दिया गया। छात्रों का आरोप है कि एक अन्य टीचर रवि ने क्लास में लगा भगवान राम का पोस्टर भी फाड़ दिया और बाद में ‘जय श्री राम’ बोलने वाले छात्रों को सस्पेंड भी करवा दिया।

सस्पेंड किए गए छात्रों की संख्या 9 बताई जा रही है। छात्रों की इस सामूहिक शिकायत का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

एक छात्र का आरोप है कि ‘जय श्री राम’ बोलने वाले छात्रों को पहले बुलवा कर स्कूल के 10 चक्कर कटवाए गए, फिर उन्हें अगले दिन सस्पेंड किया गया। एक छात्र ने खुद को भगवान राम का भक्त बताया। इस घटना से संबंधित कुछ चैट भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। वायरल चैटिंग छात्रों की आपस में बातचीत बताई जा रही है, जिसमें वो स्कूल में हुए इस घटनाक्रम के बारे में चर्चा कर रहे हैं। छात्रों को स्कूल के चक्कर लगवाने वाली टीचर का नाम रितु बताया जा रहा है।

इस घटना की जानकारी होते ही हिन्दू संगठनों और छात्रों के अभिभावकों ने स्कूल के गेट पर हंगामा शुरू कर दिया। सभी लोग आरोपित टीचरों पर कार्रवाई और छात्रों का निलंबन वापस लेने की माँग कर रहे थे। घटना की सूचना मिलते ही मौके पर पुलिस टीम पहुँची। पुलिस ने हिन्दू संगठनों सहित अभिभावकों को समझाने के प्रयास किए। इस दौरान दोनों पक्षों में नोकझोंक भी हुई। वनस्थली स्कूल साल 2002 में स्थापित हुआ है। इसके मैनेजिंग डायरेक्टर रोहित जैन और प्रिंसिपल अनुराधा जैन हैं।

3 टीचर मौखिक रूप से सस्पेंड

ऑपइंडिया ने इस मामले में एक पीड़ित छात्र से बात की। छात्र ने बताया कि उनका कलावा 16 मई को खेल टीचर रवि द्वारा काटा गया और 19 मई को एक अन्य खेल टीचर अनूप ने क्लास में घुस कर भगवान राम का पोस्टर फाड़ा। इसके बाद तीसरी खेल टीचर रितु ने ‘जय श्री राम’ बोलने वाले छात्रों को प्रताड़ित किया और कॉलेज के चक्कर लगवाए। छात्र ने आगे बताया कि स्कूल की प्रिंसिपल ने मौखिक तौर पर इन तीनों टीचरों को सस्पेंड कर दिया है जिसका कोई लिखित आदेश नहीं है। छात्र का ये भी दावा है कि निलंबित छात्रों को बहाल कर दिया गया है।

स्कूल के अंदर से वायरल हो रहे एक वीडियो में निगम पार्षद मुनेश ने भी किसी टीचर को स्कूल से निकाले जाने की बात कही है। जब ऑपइंडिया ने इस निलंबन आदि की पुष्टि के लिए स्कूल के नम्बरों पर फोन किया तो किसी ने कॉल नहीं उठाई। स्कूल का आधिकारिक मोबाइल नंबर भी सेवा से बाहर बताया। स्कूल का वर्जन आने पर उसे खबर में अपडेट किया जाएगा।

ईसाई हैं रितु मैडम

राम के नाम पर स्कूल के 5 छात्रों को प्रताड़ित करने और उनके कलावे काटने वाले टीचरों रितु, रवि और अनूप में से रितु को पीड़ित छात्र ने ईसाई बताया। छात्र का दावा है कि क्लास में लगा पोस्टर पेंटिंग प्रतियोगिता में किसी ने बनाया था। बताया यह भी गया कि बाकी अन्य पोस्टरों और चित्रों को छोड़ दिया गया और राम के चित्र की अनुमति न होने की बात कह कर टीचर अनूप द्वारा उसे फाड़ कर डस्टबिन में डाल दिया गया।

पीड़ित छात्र के मुताबिक कलावे क्लास 10 में पढ़ने वाले बच्चों के कलावा काटे गए और भगवान राम का पोस्टर कक्षा 9 में फाड़ा गया था। हमें आरोपित टीचरों को पहले भी कुछ छात्रों से ऐसी हरकतें करने का आदी बताया गया। साथ ही छात्र ने दावा किया कि रितु, रवि और अनूप मिल कर उन्हें टीका लगाने से भी मना किया करते थे।

‘बजरंग दल’ वालों ने दी है शिकायत

स्कूल के 3 खेल टीचरों द्वारा खुद से किए गए व्यवहार से दुखी छात्र ने ऑपइंडिया को बताया कि इस मामले में ‘बजरंग दल’ ने पुलिस में शिकायत दी है। हालाँकि, शिकायत की जाँच में क्या निकला ये छात्र को मालूम नहीं था। छात्र का आरोप है कि स्कूल के स्टाफ पुलिस, मीडिया और हिन्दू संगठनों को देख कर अपनी बातचीत का रंग-ढंग बदल लेते हैं जबकि छात्रों से वो किसी और ही रूप में पेश आते हैं। स्कूल की प्रिंसिपल ने बयान दिया है कि उन्हें घटना के बारे में जानकारी नहीं थी।

उनके बयान को भी छात्र ने संदेहास्पद बताया और कहा कि बिना उनकी जानकारी के बच्चों को सस्पेंड कैसे कर दिया गया था। ऑपइंडिया ने पुलिस कार्रवाई की जानकारी लेने के लिए DCP ईस्ट को कॉल किया तो उनके द्वारा फोन नहीं उठाया गया। पुलिस का वर्जन आने पर उसे खबर में अपडेट किया जाएगा।

प्रिंसिपल ने छात्रों को दोबारा बाँधे कलावे

पीड़ित छात्र के मुताबिक हंगामा होने के बाद मामले को दबाने के लिए स्कूल की प्रिंसिपल ने छात्रों को दोबारा कलावे बाँधे हैं और फिर ऐसा न होने का भरोसा दिया था। छात्र का ये भी कहना है कि माहौल गर्म देख कर स्कूल मैनेजमेंट ने फ़िलहाल के लिए स्कूल में ऑनलाइन क्लास शुरू कर दी है।

‘तेरी तो जिंदगी बर्बाद कर दूँगा…’: AAP मंत्री सौरभ भारद्वाज के खिलाफ 8 नौकरशाहों ने LG से की शिकायत, केजरीवाल सरकार पर लगाया ‘घोर उत्पीड़न’ का आरोप

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में नौकरशाही पर नियंत्रण के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) द्वारा दिल्ली सरकार के पक्ष में फैसला सुनाए जाने के बाद आम आदमी पार्टी (AAP) की सरकार नौकरशाहों और DANICS अधिकारियों को परेशान करने लगी थी। इसको लेकर अधिकारियों ने उपराज्यपाल वीके सक्सेना से दिल्ली सरकार और उनके मंत्री सौरभ भारद्वाज (Saurabh Bharadwaj) की शिकायत की है।

इसके बाद केंद्र सरकार ने एक अध्यादेश लाकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलट दिया। इस अध्यादेश में अधिकारियों की ट्रांसफर-पोस्टिंग एवं सेवाओं का अधिकार फिर से उपराज्यपाल को दिया गया है। इसके पहले सुप्रीम कोर्ट के पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने पुलिस, भूमि और सार्वजनिक व्यवस्था को छोड़कर सेवाओं के प्रशासन में नौकरशाहों पर दिल्ली सरकार का नियंत्रण दे दिया था।

उपराज्यपाल कार्यालय के अधिकारियों ने शनिवार (20 मई 2023) को दावा किया कि दिल्ली सरकार और दिल्ली नगर निगम (MCD) में तैनात कम-से-कम आठ अधिकारियों ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (CM Arvind Kejariwal) की सरकार पर ‘घोर उत्पीड़न’ का आरोप लगाया है। रिपब्लिक के अनुसार, मुख्य सचिव नरेश कुमार ने अपनी शिकायत में लिखा कि AAP के मंत्री ने उनसे कहा, “ऐसे कैसे साइन नहीं करेगा… तेरे को करना ही पड़ेगा। इसके बाद तेरा करियर खत्म। तेरी तो जिंदगी बर्बाद करके रखूँगा।”

उपराज्यपाल कार्यालय के अधिकारियों ने कहा कि इस साल की शुरुआत में दो शिकायतें प्राप्त हुई थीं, जबकि छह शिकायतें 11 मई के बाद प्राप्त हुई थीं। 11 मई को ही सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया था। शिकायत करने वाले अधिकारियों में IAS, IPS, IRS और DANICS (दिल्ली, अंडमान और निकोबार, लक्षद्वीप, दमन और दीव तथा दादरा और नगर हवेली (सिविल) सेवा कैडर) के अधिकारी शामिल हैं।

अरविंद केजरीवाल सरकार के खिलाफ शिकायत करने वालों में पाँच IAS अधिकारी शामिल हैं। जिन IAS अधिकारियों ने शिकायत की है, वे हैं- मुख्य सचिव नरेश कुमार, पूर्व सेवा सचिव आशीष मोरे, विशेष सचिव किन्नी सिंह और सतर्कता के विशेष सचिव वाईवीवीजे राजशेखर और ऊर्जा सचिव शूरबीर सिंह हैं।

शूरबीर सिंह ने एलजी कार्यालय को सूचित किया है कि उन्होंने AAP की सत्ता वाली पंजाब में अपने परिवार के उत्पीड़न के खिलाफ उन्होंने पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। हालाँकि, इन आरोपों को दिल्ली सरकार ने खारिज करते हुए फर्जी बताया और कहा है कि यह ‘गंदी राजनीति’ का हिस्सा है।

वहीं, IPS अधिकारी एवं भ्रष्टाचार निरोधी शाखा के प्रमुख मधुर वर्मा, IRS अधिकारी एवं मुख्य मूल्यांकनकर्ता एवं MCD के गृह कर विभाग में कलेक्टर कुणाल कश्यप और सेवा विभाग में तदर्थ DANICS अधिकारी एवं उपसचिव अमिताभ जोशी भी शिकायतकर्ताओं में शामिल हैं। पंजाब के रहने वाले मधुर वर्मा और शूरबीर सिंह ने आरोप लगाया है कि उनके गृह राज्य में उनके परिवारों को निशाना बनाया जा रहा है।

बताते चलें कोर्ट के फैसले के बाद AAP सरकार के मंत्री सौरभ भारद्वाज ने सेवा सचिव आशीष मोरे को हटा दिया था। इतना ही नहीं, सौरभ भारद्वाज ने विशेष सचिव सतर्कता वाईवीवीजे राजशेखर को भी हटा दिया था। उन्होंने AAP के भ्रष्टाचार के कई मामलों की जाँच की थी। भारद्वाज ने दावा किया था कि राजशेखर पर भ्रष्टाचार और जबरन वसूली के आरोप थे।

इस बीच दिल्ली के सेवा मंत्री सौरभ भारद्वाज ने शुक्रवार (19 मई 2023) को आरोप लगाया था कि मुख्य सचिव नरेश कुमार ने 16 मई 2023 को उन्हें जान से मारने की धमकी दी थी। इस संबंध में उन्होंने दिल्ली पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। उधर, सेवा विभाग से हटाए गए सचिव आशीष मोरे ने सौरभ भारद्वाज पर आरोप लगाया था कि कि 16 मई को मंत्री ने उन्हें अपने चेंबर में बुलाकर बदसलूकी की और धमकी दी।

‘हिन्दू पलायन को मजबूर… कॉन्ग्रेस पार्षद फरीद कुरैशी जिम्मेदार’ : जयपुर में घरों के बाहर पोस्टर लगाने वालों पर राजस्थान पुलिस ने की FIR, कहा- ऐसी कोई घटना नहीं हुई

राजस्थान की राजधानी जयपुर में हिन्दुओं के पलायन के पोस्टर लगे पाए गए। इन पोस्टरों में पलायन का जिम्मेदार स्थानीय कॉन्ग्रेस पार्षद फरीद कुरैशी को बताया गया। इस विवाद की शुरुआत कॉन्ग्रेस पार्षद के एक रिश्तेदार द्वारा कॉलोनी के एक हिंदू का घर खरीदने से हुई। भाजपा ने इन पोस्टरों पर राज्य की गहलोत सरकार को आड़े हाथों लेते हुए तुष्टिकरण का आरोप लगाया। कॉन्ग्रेस ने ये पोस्टर लगाने वाले पर ही कार्रवाई की बात कर रही है। वहीं पुलिस ने किसी भी तरह के पलायन से इंकार करते हुए पोस्टर लगाने वालों के खिलाफ FIR दर्ज की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला जयपुर के किशनपोल इलाके का है। यहाँ वार्ड नंबर 69 में ओम प्रकाश पारीक अपने परिवार के साथ रहते थे। कुछ समय पहले उन्होंने स्थानीय पार्षद फरीद कुरैशी के रिश्तेदारों को अपना मकान बेच दिया था। वार्ड के अन्य स्थानीय लोगों ने इसका विरोध किया। हालाँकि बताया जा रहा है कि ओम प्रकाश पारीक को इसके लिए अच्छी कीमत मिली थी। ओम प्रकाश का मकान फरीद के रिश्तेदारों को बिकने के बाद ये पोस्टर वार्ड में लगा दिए गए। हालाँकि अभी ये तय नहीं हो पाया है कि ऐसा किसने किया।

जहाँ पलायन के पोस्टर लगे हैं उस जगह का नाम पुरोहित जी का मोहल्ला है। इस मोहल्ले में अधिकतर हिन्दू रहते हैं। आस-पास ज्यादातर मुस्लिम आबादी बताई जा रही है। मोहल्ले वालों का आरोप है कि धीरे-धीरे उनके आस-पास मुस्लिम आबादी जानबूझ कर बढ़ाई जा रही है। इसका आरोप उन्होंने कॉन्ग्रेस पार्षद फरीद कुरैशी पर लगाया है। कॉन्ग्रेस पार्षद फरीद पर मारपीट और गाली-गलौज के साथ लोगों पर झूठे केस लगवाने का भी आरोप है। स्थानीय लोगों ने सबसे अधिक फ़िक्र अपनी बहन-बेटियों की बताई।

एक स्थानीय महिला के मुताबिक, “कारण ये है कि यहाँ दिन ब दिन गंदगी फैलना शुरू हो जाएगी। यहाँ की बहन बेटियॉं खतरे में आ जाएँगी। गंदी-गंदी गालियाँ बकते हैं ये। आज सुबह ही मेरी जेठानी को गली बकी है। जातिवाद को ले कर गालियाँ बकी हैं। गालियाँ सुनने के लिए थोड़ी न है औरतें। इन लोगों का कहना है कि हम लोग यहाँ से हिन्दुओं को हटाएँगे।” स्थानीय लोगों ने कॉन्ग्रेस पार्षद पर इस समस्या का सूत्रधार बताया। महिला ने आगे कहा, “पहले बच्चे आराम से रात में घूमते थे लेकिन अब आज़ादी छिन गई। अब हम लोग नहीं घूम सकते।”

एक अन्य महिला का कहना है कि पहले हम स्वतंत्र हो कर रहते थे और अपने हिसाब से मंदिर आदि जाते थे लेकिन अब हमें परेशांनी हो जाएगी। महिला का आरोप है कि ये लोग हमारी तरफ देख कर ये कहते हैं कि ये हमें देख रहा है। एक अन्य महिला का कहना है, “आने से पहले ही ये लोग गाली-गलौज करने लगे है। आने के बाद क्या स्थिति होगी।” मोहल्ले में अभी तक 4 घर पहले से ही मुस्लिमों के बताए जा रहे हैं और हिन्दुओ के 50 घर। महिलाओं का कहना है कि जो 4 घर पहले से है उनसे उन्हें कोई दिक्कत नहीं है।

इस पोस्टर में लिखा है, “स्थानीय निवासी- पलायन को मजबूर। किशनपोल क्षेत्र से हिन्दुओं का पलायन जारी। जिम्मेदार कॉन्ग्रेस पार्षद फारिद कुरैशी। वार्ड नंबर 69। ये पोस्टर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं जिसके बाद भाजपा विधायक रामलाल शर्मा ने कॉन्ग्रेस की गहलोत सरकार को आड़े हाथों लिया है। भाजपा विधायक के मुताबिक राजस्थान सरकार तुष्टिकरण की राह चल रही है। रामलाल शर्मा ने इस घटना के असल दोषियों पर कार्रवाई की भी माँग की है।

हालाँकि भाजपा के इन आरोपों पर कॉन्ग्रेस ने इसे प्रदेश भर में चल रही भाजपा की ध्रुवीकरण की राजनीति बताया है। कॉन्ग्रेस प्रवक्ता आरसी चौधरी ने पलायन के पोस्टर लगाने वाले के खिलाफ ही कार्रवाई की माँग कर डाली है। उनका कहना है कि ऐसे लोगों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाना चाहिए।

जयपुर के DCP उत्तरी क्षेत्र के मुताबिक मामले में FIR दर्ज कर ली गई है और आरोपितों की तलाश की जा रही है। उन्होंने दावा किया कि इस प्रकार की कोई घटना नहीं है और केवल असामाजिक तत्वों द्वारा भ्रांति फैलाई जा रही है। फ़िलहाल मामले में अभी तक किसी गिरफ्तारी की कोई सूचना नहीं है। मामले की जाँच की जा रही है।

हनीट्रैप में पहले हिंदू युवकों को फँसाती, फिर ISIS में धकेलती: पूर्व कॉन्ग्रेस MLA की बहू ‘मरियम’ का पूरा चिट्ठा, कर्नाटक में 10 का करवा चुकी है धर्मांतरण

पिछले साल जनवरी में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने दीप्ति मरला उर्फ मरियम को कुख्यात आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट (ISIS) से कथित संबंधों के आरोप में गिरफ्तार किया था। कर्नाटक के कोडागु की रहने वाली दीप्ति बीएम बाशा के बेटे अनस अब्दुल रहमान की पत्नी हैं। इनके पिता इदिनब्बा कभी कॉन्ग्रेस के विधायक थे। इदीनाबा की 2009 में मृत्यु हो गई।

NIA के अधिकारियों ने दीप्ति से मरियम बनी युवती के बारे में संदेह के आधार पर जाँच की थी। जाँच के दौरान पता चला कि मरियम इस्लामिक स्टेट (ISIS) नेटवर्क में युवाओं को भर्ती करने के रैकेट में शामिल थी। उसे गिरफ्तार करने के लिए सुरक्षा एजेंसी ने पाँच महीनों तक उसके खिलाफ सबूत जुटाए थे।

उल्लेखनीय है कि NIA ने अगस्त 2021 में उसके घर पर छापा मारा था और अनस अब्दुल रहमान के चचेरे भाई अम्मार को ISIS लिंक के लिए गिरफ्तार किया था। NIA ने उस वक्त मरियम से पूछताछ की थी। हालाँकि, उस वक्त उसे हिरासत में नहीं लिया गया था। सबूत मिलने के बाद उसे जनवरी 2022 में गिरफ्तार कर लिया गया।

पेशे से दंत चिकित्सक दीप्ति मरला, अनस से निकाह करने से पहले हिंदू थीं। जब वह UAE में पढ़ती थी, उस दौरान वह इस्लाम की ओर ‘आकर्षित’ हो गई। बाद में मैंगलोर के डेरलकट्टे के एक कॉलेज में बीडीएस की पढ़ाई के दौरान उसे अनस से प्यार हो गया। उसने इस्लाम धर्म अपना लिया और अपना नाम मरियम रख लिया। इसके बाद उसने अनस से निकाह कर ली।

हिंदुओं को हनीट्रैप में फँसाती थी मरियम

पूछताछ के दौरान दीप्ति मरला उर्फ मरियम ने NIA को बताया कि वह हनीट्रैप के जरिए हिंदुओं को फँसाती थी और इस्लाम में धर्मांतरित करती थी। इसके बाद वह उन्हें ISIS में भर्ती करने की कोशिश करती थी। उसने पूरे कर्नाटक में 10 से अधिक हिंदू युवकों को इस्लाम में धर्मांतरित करने की बात कबूल की।

मरियम ने फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और टेलीग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर हिंदू और मुस्लिम नामों से 15 से ज्यादा अपनी ID बना रखी थी। वह अपने शौहर के कहने पर ISIS के लिए इंस्टाग्राम पेज क्रॉनिकल फाउंडेशन को हैंडल करती थी।

मरियम अश्लील चैट के जरिए युवाओं को फँसाती थी। जान-पहचान बढ़ाने के बाद मरियम ने हिंदू युवकों को वीडियो कॉल किया। उसकी यौन उत्तेजक बातचीत युवकों को लुभाती थी और उन्हें प्यार के जाल में फँसा लेती थी। फिर वह उनसे शादी करने का वादा करती थी।

एक बार जब हिंदू युवक उसकी जाल में पूरी तरह से फँस जाते थे तो वह उन्हें इस्लाम कबूल करने और फिर आईएसआईएस में शामिल होने के लिए मजबूर करती थी। अगर उसका संभावित निशाना कोई मुस्लिम युवक होता तो वह प्यार का नाटक करती और उन्हें आईएसआईएस में शामिल होने के लिए उकसाती थी।

NIA ने कहा कि मरियम के बहकावे में आकर 2020 और 2021 में चार से पाँच युवक केरल से सीरिया चले गए। गिरफ्तारी से पाँच महीने पहले बेंगलुरू में गिरफ्तार मदेश पेरुमल उर्फ अब्दुल भी मरियम के झाँसे में आ गया था। उसने धर्म परिवर्तन करके इस्लाम अपना लिया था।

मदेश पेरुमल ने कथित तौर पर आतंकवादी संगठन के संचालकों को देश में बम विस्फोट करने का वादा किया था। एजेंसी ने बताया कि मरियम ने मदेश पेरुमल को लुभाने के लिए 10 लाख रुपए खर्च किए हैं। ISIS के साथ संबंध होने के अलावा दीप्ति मरला उर्फ मरियम के जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी संगठनों के साथ भी संबंध थे।

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, NIA ने कहा, “जाँच के दौरान यह पता चला है कि सीरिया/ईराक में ISIS खिलाफत खत्म होने के बाद दीप्ति मरला और मोहम्मद अमीन ने जनवरी और मार्च 2020 में हिजरा (धार्मिक प्रवास) के तहत कश्मीर का दौरा किया था। वह कश्मीर में आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने और ISIS की गतिविधियों का समर्थन करने के लिए के लिए वहाँ गए थे।

जाँच के दौरान यह भी पता चला है कि मोहम्मद अमीन के साथ-साथ दीप्ति मरला भी ISIS की साजिश का सरगना थी। मार्च 2021 में दर्ज मामले के संबंध में NIA द्वारा गिरफ्तार किए गए लोगों में मोहम्मद अमीन उर्फ ​​अबू याहया और उसके दो सहयोगी- डॉ. रहीस रशीद और मुसहब अनवर भी शामिल थे।

कुख्यात इस्लामी आतंकी संगठन ISIS के साथ संबंधों को लेकर दीप्ति मरला उर्फ मरियम की गिरफ्तारी होने के बाद उसके माता-पिता ने उससे संबंध तोड़ लिए। कहा जाता है कि इसके लिए उसके माता-पिता ने एक समाचार पत्र में विज्ञापन देकर अपने संबंध खत्म करने की घोषणा की।

पटना में 2 बदमाशों ने पुलिस वाले को सरेआम मारी गोली: पिस्टल लहराते फरार हुए, दावा- बड़ी घटना को देने जा रहे थे अंजाम

बिहार की राजधानी पटना में 2 बदमाशों ने एक पुलिस कॉन्स्टेबल को गोली मार दी। घटना उस समय की है जब पुलिस वाहनों की चेकिंग कर रही थी। हमले के बाद दोनों संदिग्ध फरार हो गए। घायल कॉन्स्टेबल को अस्पताल ले जाया गया जहाँ उसकी हालात खतरे से बाहर है। इस हमले के बाद पुलिस ने अब तक 6 संदिग्धों को हिरासत में लिया और 4 बाइकों को सीज कर दिया है। हालाँकि अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। घटना शनिवार (20 मई 2023) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह मामला पटना के थानाक्षेत्र पत्रकार नगर का है। पटना के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक IPS राजीव मिश्रा ने इस मामले की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि शनिवार को काली मंदिर के पास पुलिस टीम संदिग्ध लोगों और वाहनों की चेकिंग कर रही थी। इस दौरान बाइक सवार 2 लोगों ने सिपाही को गोली मार दी और फरार हो गए। पुलिस का कहना है कि दोनों बदमाशों के पास पिस्टल थी। आशंका है कि दोनों किसी बड़ी घटना को अंजाम देने के लिए आए थे। उन्होंने जानकारी दी कि मामले में आगे की जाँच जा रही है।

मिली जानकारी के मुताबिक घायल सिपाही का नाम राम अवतार है। घटना के समय कॉन्स्टेबल राम अवतार के साथ अन्य पुलिसकर्मी भी चेकिंग में मौजूद थे। इस दौरान बजाज पल्सर बाइक से 2 संदिग्ध आते दिखे। पुलिस ने दोनों को रोका और तलाशी शुरू कर दी। दोनों की हरकतों को संदिग्ध देखते हुए पुलिस ने दोनों को काबू करना चाहा। इसी प्रयास में राम अवतार ने एक संदिग्ध को पकड़ भी लिया। साथी को पकड़ा देख कर दूसरे संदिग्ध ने पिस्टल निकाल लिया और सिपाही राम अवतार पर गोली चला दी।

गोली लगने से राम अवतार सड़क पर गिर पड़े। इस दौरान मौके का फायदा उठा कर दोनों बदमाश पैदल भी भाग निकले। बताया जा रहा है कि फरार होने के दौरान बदमाशों ने हवाई फायरिंग भी की। उनकी पल्सर गाड़ी को पुलिस ने जब्त कर लिया है। बाकी पुलिसकर्मियों ने अपने घायल साथी रामावतार को नजदीकी अस्पताल पहुँचाया जहाँ उनकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है। गोली सिपाही के घुटने में लगी है जिसका इलाज चल रहा है। वहीं जब्त गाड़ी व आस-पास लगे CCTV फुटेज के आधार पर पुलिस टीमें घटना को अंजाम देने वाले बदमाशों की तलाश में जुटी हैं। बदमाशों की बाइक पर लगा नंबर प्लेट भी फर्जी बताया जा रहा है।

SC ने हटाया बैन, फिर भी बंगाल में एक भी जगह नहीं चल रही ‘द केरल स्टोरी’: BJP नेता का दावा- थिएटर मालिकों को प्रशासन ने दे रखी है धमकी

भाजपा IT सेल के प्रमुख अमित मालवीय (Amit Malviya) ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (West Bengal CM Mamata Banerjee) पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा राज्य में ‘द केरल स्टोरी (The Kerala Story)’ से प्रतिबंध हटाने के बाद तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) सरकार फिल्म ना दिखाने के लिए थिएटर मालिकों को धमका रही है।

बता दें कि बंगाल सरकार ने फिल्म को तथ्यहीन और समाज में वैमनस्य फैलाने का हवाला देकर राज्य में फिल्म को दिखाने पर प्रतिबंध लगा दिया था। इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट द्वारा पलटने के बाद फिल्म वितरकों और थिएटर मालिकों ने फिल्म में दिलचस्पी दिखाई थी। हालाँकि, शनिवार (20 मई 2023) को फैसले के दो दिन बीत जाने के बाद भी किसी सिनेमाघर में ‘द केरला स्टोरी’ का प्रदर्शन नहीं किया।

अमित मालवीय ने इसके लिए ममता बनर्जी और तृणमूल कॉन्ग्रेस की सरकार को दोषी ठहराया है। उन्होंने कहा कि ममता सरकार ने इस फिल्म को दिखाने वाले थिएटरों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करने की धमकी दी है। इसके कारण फिल्म को बंगाल में नहीं दिखाया जा रहा है। इसको लेकर मालवीय ने ट्वीट किया है।

अपने ट्वीट में अमित मालवीय ने लिखा, “सुप्रीम कोर्ट द्वारा पश्चिम बंगाल में द केरला स्टोरी पर प्रतिबंध हटाने के बाद कोलकाता में एक भी थिएटर फिल्म की स्क्रीनिंग नहीं कर रहा है, जबकि ममता बनर्जी द्वारा प्रतिबंध लगाने से पहले वे सभी हाउसफुल चल रहे थे। सिनेमा हॉल मालिकों को स्थानीय प्रशासन द्वारा दंडात्मक कार्रवाई, बिल्डिंग और फायर लाइसेंस रद्द करने और इससे भी बदतर की धमकी दी गई।”

मालवीय ने आगे कहा, “यह कोर्ट की अवमानना नहीं तो और क्या है? सुप्रीम कोर्ट को पश्चिम बंगाल की सीएम की अवमानना का स्वत: संज्ञान लेना चाहिए। अगर सुश्री बनर्जी इस तरह की दंडमुक्ति के साथ सुप्रीम कोर्ट के आदेश की धज्जियाँ उड़ा सकती हैं तो कोई भी कल्पना कर सकता है कि यहाँ कानून का शासन कितना कमजोर है।”

बताते चलें कि सुप्रीम कोर्ट ने जब फिल्म पर प्रतिबंध लगाने की वजह पूछा तो बंगाल सरकार की ओर पेश अधिवक्ता ने तर्क दिया था कि केरल की इस कहानी में अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया है और यह फिल्म हेरफेर किए गए तथ्यों पर आधारित है। इससे राज्य में सांप्रदायिक वैमनस्य और कानून व्यवस्था से संबंधित स्थिति खड़ी हो सकती है।

इस फिल्म के निर्माता ने राज्य में इस फिल्म को ना दिखाने के सरकार के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दी थी। अपनी याचिका में निर्माता ने पश्चिम बंगाल सिनेमा (विनियमन) अधिनियम, 1954 की धारा 6 (1) की संवैधानिकता को भी चुनौती दी है, जिसके तहत पश्चिम बंगाल सरकार ने फिल्म पर प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी किया था।

इस पर राज्य सरकार ने कहा कि फिल्म पर प्रतिबंध खुफिया सूचनाओं पर आधारित एक नीतिगत निर्णय है। इससे याचिकाकर्ताओं के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं हुआ है। याचिकाकर्ता के वित्तीय नुकसान को मौलिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं बताया जा सकता है। इसके अलावा, राज्य सरकार ने यह भी तर्क दिया कि पश्चिम बंगाल सिनेमा (विनियमन) अधिनियम के रूप में संवैधानिकता की एक धारणा है, जो उन फिल्म प्रदर्शनियों के लिए एक अपवाद बनाती है, जो शांति भंग कर सकती है।