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‘इतनी कट्टर हो गई थी, कोई इस्लाम न कबूलता तो हत्या भी कर देती’ : ‘द केरल स्टोरी’ की असल कहानी, पीड़िता की जुबानी

‘द केरल स्टोरी’ फिल्म की रिलीज के बाद कई लोग सामने आकर जबरन करवाए जा रहे इस्लामी धर्मांतरण के मुद्दे पर अपनी कहानियाँ साझा कर रहे हैं। ऐसे में ऑपइंडिया ने कट्टरपंथी इस्लामी संगठनों का शिकार हुई कुछ पीड़िताओं से मुलाकत की। इनमें एक श्रुति भी हैं जो कासरगोड की रहने वाली हैं।

श्रुति ने ऑपइंडिया से बातचीत में बताया कि उन्हें इस हद तक कट्टरपंथी बना दिया गया था कि अगर कोई उनकी विचारधारा नहीं मानता और इस्लाम में कन्वर्ट करने से मना करता तो वह उसकी हत्या भी कर सकती थीं।

उनका कथिततौर पर केरल के मल्लापुरम के सेंटर में ब्रेनवॉश किया गया था। उनके भीतर न सिर्फ हिंदू धर्म के बारे में उल-जुलूल भरा गया था बल्कि देश को लेकर भी गलत सिखाया जाता था। उन्हें कहा जाता था – “भारत तुम्हारा मुल्क नहीं है। ये काफिरों का देश है। तुम्हारा देश वो है जहाँ से पैगंबर थे।”

श्रुति के अनुसार, उन्हें समझाया जाता था कि कैसे पूरे देश में इस्लाम का प्रसार करना चाहिए और देश को दारुल इस्लाम बनाना चाहिए। वे इतने सफाई से ऐसा करते हैं कि जो उनको सुनता है वे उनकी बातों पर विश्वास करने लगता है। आप यह मानने लगते हैं कि काफिरों के साथ जीना असंभव है।

श्रुति हैरान करने वाला खुलासा करते हुए कहती हैं, “मैं इतना कट्टरपंथी बन गई थी कि मैं हर उस व्यक्ति को इस्लाम में परिवर्तित करना चाहती थी जिसे मैं जानती था। मैं वास्तव में उन लोगों को मारने के लिए भी तैयार थी, जिन्होंने इस्लाम में परिवर्तित होने से इनकार कर दिया था।”

उन्होंने समझाया कि कैसे एक सुनियोजित ढंग से पूरा सिंडिकेट काम करता है। इन्हें कई इस्लामी समूह सपोर्ट देते हैं। इसके बद यह लोग उन लोगों को निशाना बनाते हैं जो अपनी धार्मिक जड़ों से कमजोर होते हैं।

श्रुति के अनुसार, पहले ऐसी लड़कियों को तलाशा जाता है जिन्हें हिंदू धर्म के बारे में ज्यादा न पता हो। इसके बारे में इन्हें इनके धर्म के बारे में भड़काया जाता है जिसका जवाब उन लड़कियों पर नहीं होता। पीड़िता बताती हैं कि ब्रेनवॉश करने की प्रक्रिया में ये लोग पूछते हैं कि भगवान राम को तुम पूजते हो? बताओ उन्होंने अपनी पत्नी को क्यों छोड़ा? महिलाओं को उन्होंने क्या इज्जत दी? तुम कृष्ण को पूजते हो जिनकी इतनी पत्नियाँ थीं? तुम बंदरों को मानते हो।

श्रुति ये बताने का प्रयास करती हैं कि कैसे ये लोग धार्मिक प्रथाओं और उसकी सामग्री पर सवाल खड़ा करते हैं और जब जवाब न दो तो वो धर्म को और बुरा बताते जाते हैं। जब पीड़िता उस स्तर पर पहुँच जाती है कि उसके मन में सवाल खड़े हो तो वो अपने मजहब, अपनी विचारधारा का महिमामंडन करते हैं। एक समय आता है कि पीड़िता को उसकी आदत हो जाती है। उनकी विचारधारा धीमे जहर की तरह काम करती है। श्रुति उस पूरे सिस्टम के बारे में बात करती हैं जिससे देश भर में ऐसे अपराध अंजाम दिए जा रहे हैं।

बता दें कि श्रुति ने इस इंटरव्यू में जो खुलासे किए वही कहानी सुदीप्तो सेन ‘द केरल स्टोरी’ के जरिए दिखा चुके हैं। इसमें उन्होंने बताया कि कैसे लड़कियों को निशाना बनाकर इस्लाम कबूल करवाया जाता है फिर ISIS में शामिल होने भेज दिया जाता है। ये फिल्म सत्य घटनाओं पर आधारित है। कॉन्ग्रेस समेत कई इस्लमी समूहों ने इसे नकारने का प्रयास किया। उन्होंने इसे प्रोपेगेंडा बताया। इसकी स्क्रीनिंग होने से रोकी। इसके बावजूद तमाम लोग आगे बढ़कर आए जिन्होंने इसे सराहा। हिंदू महिलाएँ सामने आईं जिन्होंने अपने निजी अनुभवों को मीडिया में बताया और दावा किया कि द केरल स्टोरी बिलकुल निराधार नहीं है-समाज में ऐसा होता है।

नोट: इंटरव्यू को अंग्रेजी में आप इस लिंक पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं।

दूसरे राज्यों के 63 बच्चों को ट्रक में लादकर भेजा जा रहा था महाराष्ट्र के मदरसे: पुलिस ने पकड़ा, ड्राइवर फरार

महाराष्ट्र पुलिस ने बुधवार (17 मई 2023) को कोल्हापुर शहर में 63 नाबालिग मुस्लिम लड़कों को ले जा रहे एक ट्रक को रोक कर पकड़ लिया। इन मुस्लिम लड़कों की उम्र 7 से 13 साल के बीच है। ये सारे बच्चे बिहार, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के हैं। इन्हें बिहार से ट्रेन के जरिए शहर में लाया गया था।

जानकारी के अनुसार, इन लड़कों को तालीम के लिए कोल्हापुर जिले के अजरा स्थित एक मदरसे में भेजा जा रहा था। यह घटना तब सामने आई, जब एक हिंदू संगठन के सदस्य विजयेंद्र माने ने शहर के रुईकर कॉलोनी में ट्रक को देखकर संदेह जताया। ट्रक चालक से पूछने पर वे मौके से फरार हो गए। इसके बाद माने का शक और गहरा गया।

विजयेंद्र माने ने पुलिस और हिंदू संगठनों के अन्य सदस्यों को मौके पर बुलाया। हिंदू संगठन के लोगों ने इस मामले में पुलिस से कड़ी कार्रवाई की माँग की। पुलिस ने बच्चों को हिरासत में लिया और कुछ अज्ञात व्यक्तियों द्वारा उन्हें सौंपे गए ट्रेन टिकटों की जाँच की। पूछताछ के दौरान नाबालिग लड़कों ने खुलासा किया कि उनमें से कुछ बिहार से, कुछ उत्तर प्रदेश से और कुछ पश्चिम बंगाल से हैं।

हिंदूवादी संगठनों ने इस घटना को लेकर कई सवाल उठाए हैं। उन्होंने कई प्रासंगिक सवाल पूछे- ये बच्चे कौन हैं, कोल्हापुर क्यों आए थे, क्या उन्हें मजबूर किया गया था, ट्रक में क्यों ले जाया जा रहा था आदि। संगठनों ने बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता व्यक्त की।

ट्रक को रोकने में पुलिस की मदद करने वाले हिंदू संगठन के सदस्यों में विजयेंद्र माने, विजय खाड़े, विवेक वोरा, नितिन मिसाल, अनिकेत पाटिल, अनिकेत मोदकी, सुनील पाटिल, प्रसाद पटोले, अमेय भालकर, बजरंग दल के बांदा सालुंखे, प्रशांत कागले, अनिल चौगुले, सुजीत पाटिल और अवधूत भाटे प्रमुख हैं। बीजेपी से जुड़े विजयेंद्र माने ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि छात्रों के पास कोई पहचान पत्र या दस्तावेज नहीं थे।

विजयेंद्र माने ने कहा, “मैंने ट्रक को आज सुबह रुइकर कॉलोनी में देखा, क्योंकि यह महाराजा होटल नाम के एक होटल के सामने खड़ा था। मैंने बच्चों से पूछा कि वे कौन हैं, वे यहाँ क्यों आए हैं। लेकिन उनके पास कोई ठोस जवाब नहीं था। बाद में पता चला कि उन्हें कोल्हापुर के अजरा के एक मदरसे में ले जाया जा रहा था। उनके पास कोई पहचान पत्र भी नहीं है।”

कोल्हापुर पुलिस स्टेशन के अधिकारी मंगेश चव्हाण ने पुष्टि की है कि छात्रों को आगे की प्रक्रिया के लिए बाल कल्याण समिति को सौंप दिया गया है। उन्होंने कहा, “हमने इस मामले में जाँच की। हमें पता चला कि ये छात्र लंबे समय से अज़रा मदरसा में पढ़ रहे हैं। उन्हें छुट्टियों में उनके घर बिहार, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल भेजा गया था। अब उन्हें वापस लाया गया है।”

हालाँकि, पुलिस ने यह भी कहा कि मामले की विस्तृत जाँच की जाएगी और छात्रों को राज्य बाल कल्याण संघ द्वारा गठित समिति के समक्ष पेश किया जाएगा। कुछ मीडिया संगठनों का दावा है कि कुल 69 नाबालिग मुस्लिम लड़के थे, जबकि अन्य ने कहा है कि 63 नाबालिग मुस्लिम छात्रों को हिरासत में लिया गया है।

जैसलमेर में पाकिस्तानी हिंदुओं की बस्ती में लगाई गई थी आग भी, उजाड़ने का आदेश देने के बाद अब बसाने का एक्शन प्लान बना रहीं IAS टीना डाबी

16 मई 2023 को राजस्थान के जैसलमेर के अमर सागर इलाके में पाकिस्तानी हिंदू शरणार्थियों की बस्ती को उजाड़ दिया गया था। इसका एक वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है। इससे पता चलता है कि शरणाथिर्यों के घरों पर बुलडोजर ही नहीं चलाया गया था, बल्कि आग भी लगाई थी ताकि लोग दहशत से भाग जाएँ। इस बस्ती पर कार्रवाई जैसलमेर की कलेक्टर टीना डाबी के आदेश के बाद हुई थी। अब मीडिया रिपोर्टों में बताया गया है कि आईएएस टीना डाबी प्रभावित शरणार्थियों के पुनर्वास को लेकर एक्शन प्लान बना रही हैं।

पत्रकार स्वाति गोयल शर्मा ने एक वीडियो ट्विटर पर पोस्ट किया है। इसमें एक झोपड़ीनुमा घर में लगी आग और बस्ती के लोगों को देखा जा सकता है। आग के कारण महिलाओं और बच्चे दहशत में दिख रहे है। उन्होंने लिखा है, “यह वीडियो जैसलमेर में पाकिस्तानी हिंदू शरणार्थियों की बस्ती उजाड़ने के दिन का है। कथित तौर पर अधिकारियों ने बस्ती के मंदिर की बगल की एक झोपड़ी में आग लगा दी थी। इससे बस्ती में अफरातफरी मच गई। महिलाएँ बेहोश हो गईं। प्रताड़ना से बचकर भागे लोगों को आग के इस्तेमाल से हटाना हैरतंगेज है।”

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इस कार्रवाई के बाद विवादों में घिरीं कलेक्टर टीना डाबी ने बुधवार (17 मई 2023) की शाम विस्थापित लोगों के लिए खाने-पीने की व्यवस्था करवाई। इस कार्रवाई से करीब 50 परिवार प्रभावित हुए हैं। उनके रहने को वैकल्पिक व्यवस्था की गई है। आज तक ने डाबी के हवाले से कहा है कि अमर सागर तालाब क्षेत्र के केचमेंट एरिया में अतिक्रमण नहीं होने दिया जा सकता है। यहाँ से लोगों को हटाने के लिए कई बार समझाया गया था। इससे बात नहीं बनी तो एक्शन लिया गया। उन्होंने कहा है कि बेघर परिवारों के पुर्नवास के लिए जिला प्रशासन ने कई कदम उठाए हैं। जिला प्रशासन, यूआईटी और पाकिस्तानी विस्थापितों की एक सर्वे टीम बनाई जाएगी। यह टीम उस जमीन का चयन करेगी, जहाँ इनलोगों को बसाया जा सके। तब तक बेघर लोग रैन बसेरे में रहेंगे।

गौरतलब है अमर सागर जैसलमेर शहर से केवल 5 किमी दूर है। कलेक्टर के आदेश के बाद यूआईटी की टीम ने भारी पुलिस बल की मौजूदगी में पाकिस्तानी शरणार्थियों की बस्ती को उजाड़ दिया था। बुलडोजर से उनके घर तोड़ दिए थे। इससे पहले राजस्थान के जोधपुर में भी इसी तरह की कार्रवाई की गई थी। 24 अप्रैल 2023 को चोखा गाँव में जोधपुर विकास प्राधिकरण ने अतिक्रमण विरोधी अभियान के नाम पर शरणार्थी हिन्दुओं के घरों पर बुलडोजर चलाया था। इस कार्रवाई के शिकार हुए अधिकतर लोगों के पास भारत में रहने के लिए लॉन्ग टर्म वीजा तो है, लेकिन अब तक उन्हें भारत की नागरिकता नहीं मिली है।

सुप्रीम कोर्ट में भी ‘जाति जनगणना’ पर बिहार सरकार को झटका, कहा- अभी सर्वे पर लगी रोक नहीं हटाई जाएगी

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने गुरुवार (18 मई 2023) को बिहार सरकार द्वारा की जा रही जाति जनगणना पर पटना उच्च न्यायालय (Patna High Court) द्वारा लगाई गई रोक को हटाने से इनकार कर दिया। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि पटना उच्च न्यायालय ने केस की अंतिम सुनवाई के लिए 3 जुलाई 2023 को सूचीबद्ध किया है।

न्यायमूर्ति अभय एस ओका और न्यायमूर्ति राजेश बिंदल की खंडपीठ ने कहा कि पटना हाईकोर्ट 3 जुलाई को इस पर सुनवाई करने वाली है। यदि किसी कारण से उच्च न्यायालय द्वारा रिट याचिका पर सुनवाई नहीं की जाती है तो सुप्रीम कोर्ट 14 जुलाई 2023 को दलीलों पर विचार करेगी।

जस्टिस ओका ने कहा, “हम इस स्तर पर हस्तक्षेप क्यों करें? उच्च न्यायालय 3 जुलाई को इस पर विचार करेगा… उच्च न्यायालय ने प्रथम दृष्ट्या निष्कर्ष दर्ज किया है। हम यह नहीं कह रहे हैं कि हम निष्कर्षों की पुष्टि करेंगे या हम हस्तक्षेप करेंगे। हम केवल इतना कह रहे हैं कि आज इस पर विचार मुश्किल है। हम यह नहीं कह रहे हैं कि हम इसे नहीं सुनेंगे।”

सुप्रीम कोर्ट में बिहार सरकार ने अपील में कहा कि उच्च न्यायालय ने अंतरिम स्तर पर मामले की योग्यता की गलत जाँच की और राज्य की विधायी क्षमता को छुआ है। इसके अलावा, उच्च न्यायालय ने इस तर्क को भी गलत तरीके से स्वीकार कर लिया कि सर्वेक्षण एक जनगणना है और लोगों की व्यक्तिगत जानकारी विधायकों के साथ साझा की जाएगी।

बिहार सरकार ने तर्क दिया कि अगर इस स्तर पर सर्वेक्षण बंद किया जाता है तो राज्य को भारी वित्तीय लागत को सहन करना पड़ेगा। बिहार सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने कोर्ट से जनगणना और सर्वेक्षण के बीच अंतर करने की भी माँग की। उन्होंने कहा कि वर्तमान अभ्यास जनगणना नहीं, बल्कि केवल एक स्वैच्छिक सर्वेक्षण है।

जाति सर्वेक्षण को लेकर अधिवक्ता ने कहा कि जहाँ तक डेटा और उनकी गोपनीयता का सवाल है तो यह डेटा सिर्फ बिहार सरकार के सर्वर में इकट्ठा किया जाएगा, किसी अन्य क्लाउड पर नहीं। यह फुलप्रूफ सिस्टम है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोर्ट कोई सुझाव देता है तो वह उस पर विचार करने के लिए तैयार हैं।

दरअसल, यह मामला बुधवार (17 मई 2023) को सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस संजय करोल की बेंच के समक्ष आया था, लेकिन जस्टिस करोल से इस केस से खुद को अलग कर लिया। जस्टिस करोल ने कहा कि उन्होंने इस मामले को उच्च न्यायालय में निपटाया था। बता दें कि जस्टिस करोल 6 फरवरी 2023 को सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नत होने से पहले पटना उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश थे।

बता दें कि इस साल जनवरी में न्यायमूर्ति गवई के नेतृत्व वाली शीर्ष अदालत की एक पीठ ने जातिगत जनगणना शुरू करने के राज्य के फैसले को चुनौती देने वाली तीन जनहित याचिकाओं (PIL) पर विचार करने से इनकार कर दिया था। उन्होंने याचिकाकर्ताओं को पटना उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की स्वतंत्रता दी थी।

इसके बाद यह मामला पटना उच्च न्यायालय में गया। पटना उच्च न्यायालय ने इस पर तुरंत निर्णय लेने से इनकार कर दिया। इसके बाद याचिकाकर्ता फिर से सुप्रीम कोर्ट गए। तब सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट से अंतरिम राहत आवेदन को शीघ्रता से निपटाने के लिए कहा था। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के 6 दिन बाद पटना हाईकोर्ट ने इस पर अपना फैसला सुना दिया।

पटना हाईकोर्ट ने 4 मई 2023 को राज्य सरकार द्वारा की जाने वाली जातिगत जनगणना पर 3 जुलाई 2023 तक रोक लगा दी। हाईकोर्ट ने कहा कि जातिगत आँकड़े इकट्ठा करने का अधिकार राज्य सरकार को नहीं है। अपने आदेश में हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के विनोद चंद्रन और न्यायमूर्ति मधुरेश प्रसाद की पीठ ने कहा कि सर्वेक्षण वास्तव में एक जनगणना है, जिसे केवल केंद्र सरकार ही कर सकती है।

पटना हाईकोर्ट ने बाद में यह भी स्पष्ट किया कि जातिगत सर्वेक्षण पर रोक केवल जनगणना को लेकर नहीं, बल्कि डेटा संग्रह के साथ-साथ इसे राजनीतिक दलों के साथ साझा करने को लेकर भी है। बता दें कि बिहार की नीतीश कुमार की सरकार ने जातिगत सर्वे का काम 7 जनवरी 2023 को शुरू किया था, जिसको लेकर बिहार में राजनीतिक बवाल हो गया था।

द केरल स्टोरी ने ‘आर्ष विद्या समाजम’ को दिए ₹51 लाख, लव जिहाद पीड़िताओं का सहारा बनकर उभरी है संस्था: सारे संसार में सनातन की ज्योति फैलाना है लक्ष्य

‘द केरल स्टोरी’ की अपार सफलता के बाद खबर आई है कि इस फिल्म की टीम ने एक संस्था को 51 लाख रुपए दान में दिए हैं। संस्था का नाम आर्ष विद्या समाजम है। ये संस्था लव जिहाद पीड़िताओं को वापस से हिंदू धर्म में लाने और उनके पुनर्वास के लिए काम करती है।

इस संबंध में फिल्म की अभिनेत्री ने ट्वीट किया। उन्होंने कहा, “हमारी तरफ से छोटा सा योगदान, द केरल स्टोरी ने आर्ष विद्या समाजम को 51 लाख रुपए डोनेट किए। इसकी पहल विंजना भारतीय एड्यूकेशनल एंड चैरिटेबल सोसायटी फॉर कंस्ट्रक्शन ऑफ आश्रम द्वारा की गई है।”

अदा शर्मा ने बताया कि ये संस्था हमारी बेटियों के पुनर्वास के लिए लगातार और निस्वार्थ रूप से काम कर रही है, जिन्हें कट्टरता के जरिए प्यार के नाम पर परिवर्तित किया गया था।

बता दें कि ” ‘द केरल स्टोरी’ की टीम ने जिस संस्था को उनका काम देख 51 लाख रुपए दान दिए, उसका उद्देश्य धर्म का प्रचार-प्रसार है। पिछले दिनों एक लव जिहाद पीड़िता श्रुति ने इसका जिक्र करते हुए बताया था कि कैसे इस संस्था ने उन्हें बचाया और साथ में उनके घरवालों को यकीन दिलाया कि उन्होंने घरवापसी कर ली है।

श्रुति ने बताया कि जब उन्होंने इस्लाम अपनाया, तब उनके परिवार वालों के लिए ये हैरानी भरा फैसला था और वो इसे बर्दाश्त नहीं कर पा रहे थी, उनकी स्थिति दयनीय हो गई थी। हालाँकि, जब उन्होंने घर-वापसी की, तो उनके पिता को फिर भी भरोसा नहीं हो रहा था कि उन्होंने इस्लाम को मानना छोड़ा है या नहीं। मगर तब संस्था के योगाचार्य मनोज ने उनके पिता और परिवार के अन्य सदस्यों को ये भरोसा दिलाया कि श्रुति हिन्दू धर्म में वापस आ चुकी हैं।

गुरु ने परिवार को बताया कि श्रुति को उसके किए का पछतावा है और वो अपनी तरह की अन्य पीड़ित लड़कियों की भी मदद कर रही है, उन्हें अँधेरे से निकालने में, उन्हें हिंदू धर्म में वापस लाने में। योगाचार्य मनोज ने परिवार को आश्वस्त किया कि वो अब चिंता न करें, वो सिर उठा कर चलें क्योंकि उनकी बेटी अच्छा कार्य कर रही है।

बता दें कि आर्ष संस्था गुरु परंपरा पर विश्वास रखती है। ‘आर्ष विद्या समाजम’ का मानना है कि दुनिया में आजकल जितनी भी बुराइयाँ फ़ैल रही हैं, उसका मुख्य कारण है युवाओं में धर्म के प्रति जागरूकता का अभाव। संस्था का लक्ष्य है कि दुनिया में एक व्यक्ति भी ऐसा न हो, जिसने ‘सनातन धर्म’ का नाम न सुना हो।

भगवान राम का भजन बजाने पर बारात पर हमला, लगाए ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे: महाराष्ट्र पुलिस ने 15 लोगों को किया गिरफ्तार

महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले के चिखली में बुधवार को एक विशेष समुदाय के लोगों के एक समूह ने जुलूस के दौरान डीजे सिस्टम पर बजने वाले एक गाने पर आपत्ति जताते हुए एक हिंदू विवाह जुलूस पर पथराव किया। डीजे पर बज रहे भगवान राम के भजन को सुनने के बाद जुलूस पर पथराव शुरू हो गया। पथराव करने से पहले उपद्रवियों द्वारा ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगाए जाने की बात भी कही जा रही है।

दंगाइयों की भीड़ ने सबसे पहले डीजे पर बज रही संगीत पर आपत्ति जताई। उन्होंने जुलूस में शामिल लोगों से भगवान राम के गीत बंद करने के लिए कहा और उस पर नाचने से रोका। यह घटना उस समय की बताई जा रही है जब बारात बुलढाणा जिले के चिखली शहर के सैलानी नगर इलाके से गुजर रही थी। इसके बाद दोनों समुदायों के लोग आपस में भिड़ गए।

इस हमले के कारण जुलूस में शामिल कुल 13 लोग घायल हो गए। पथराव शुरू होते ही इसके बारे में पुलिस को सूचना दी गई। आनन-फानन में पुलिस मौके पर पहुँची और लोगों को हटाने की कोशिश करने लगी। इस दौरान पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। इस बीच 13 घायलों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

पुलिस ने घटना का संज्ञान लेते हुए करीब 30 लोगों के खिलाफ दंगा करने का मामला दर्ज किया है। पुलिस ने 15 लोगों को गिरफ्तार भी किया है। रिपोर्टों में कहा गया है कि चिखली से भाजपा विधायक श्वेता महाले, शिंदे गुट के सदस्य संजय गायकवाड़ और बुलढाणा के सांसद प्रतापराव जाधव ने हिंसास्थल का दौरा किया और नागरिकों से शांति की अपील की।

विधायक संजय गायकवाड़ (शिंदे गुट) ने स्थानीय मीडिया से बात करते हुए कहा कि जुलूस पर पथराव करने से पहले समुदाय विशेष के लोगों द्वारा ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगाए गए थे। उन्होंने कहा, “डीजे में तोड़फोड़ की गई और हिंदू माली समुदाय के लोगों पर पथराव किया गया। पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाने की घटना अगर सच है तो हम इन लोगों को नहीं बख्शेंगे।”

कहने को तांत्रिक, नाम शीबा बानो: 2 बिजनेसमैन को ₹600 करोड़ का ‘पता’ बता दोस्त का ही घर लूटने भेज दिया, पैसे की तलाश में टाइल्स तक उखाड़ ली

गुजरात में पिछले दिनों एक ऐसे गिरोह का खुलास हुआ था जो ‘तंत्र’ के नाम पर ठगी करता था। इस गिरोह को चला रहा था ‘तांत्रिक’ मूसा और उसका बेटा अल्ताफ। अब राजस्थान में ऐसी ​ही एक ‘महिला तांत्रिक’ पकड़ी गई है। शीबा बानो नाम की इस महिला ने राजस्थान के जयपुर के दो प्रॉपर्टी डीलर को 600 करोड़ रुपयों का लालच देकर उन्हें अपने ही परिचित प्रॉपर्टी डीलर के घर लूट के लिए भेज दिया।

बानो के झाँसे में आकर दोनों प्रॉपर्टी डीलर ने दोस्त के घर ने केवल डाका डालने के लिए प्लान बनाया, बल्कि इसके लिए लूटेरों के गिरोह की भी मदद ली। गैंग के लोग करणी विहार इलाके के धाबास में 12 मई 2023 की रात करीब 2 बजे प्रॉपर्टी डीलर यादराम मौर्य के घर में घुस गए। यादराम मौर्य और उसके परिवार वालों को बंधक बनाया और पैसे की तलाश करने लगे। शीबा बानो के कहे अनुसार, उन्होंने दो कमरों की फर्श में लगी टाइल्स भी तोड़ दी। लेकिन उन्हें वहाँ भी पैसे नहीं मिले। इसके बाद वे घर में पड़े कीमती गहने और कैश लूटकर फरार हो गए। पुलिस ने बुधवार (17 मई 2023) को शीबा बानो सहित सभी 15 आरोपितों को गिरफ्तार कर मामले का खुलासा किया।

पीड़ित कारोबारी लूट की घटना के बाद पुलिस से शिकायत की थी। कुछ साथी प्रॉपर्टी डीलर से जमीनी विवाद का जिक्र करते हुए उन पर शक जताया था। इसके बाद पुलिस ने रामेश्वर राठी और रामदयाल मीणा को गिरफ्तार किया। उन्होंने पूछताछ में अपने अन्य साथियों का नाम बताया। इसके बाद पुलिस ने महिला तांत्रिक शीबा बानो, शहजाद, नदीम सैफी, रवि, जितेंद्र कुमार, रमेश भोजवानी, पूर्णमल सैनी, रोहिताश जाट, प्रकाश सैनी, सुनील सेन, बाबूलाल, किशोर सिंह व बादल कौशिक को गिरफ्तार किया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, लुटेरे पिकअप लेकर डकैती करने प्रॉपर्टी डीलर के घर पहुँचे थे। गिरफ्तार किए गए आरोपितों में से 9 जयपुर के, दो टोंक, दो अजमेर, एक सीकर और एक बागपत (उत्तर प्रदेश) का रहने वाला है। डीसीपी वेस्ट वंदिता राणा ने बताया कि पुलिस ने महिला तांत्रिक समेत सभी 15 आरोपितों को बुधवार को गिरफ्तार किया था।

डीसीपी के अनुसार, यादराम मौर्य का अपने परिचित रामदयाल और रामेश्वर राठी से जमीन को लेकर विवाद था। दोनों ने उससे बदला लेने के लिए कथित तांत्रिक शीबा बानो से सलाह ली। शीबा ने उन्हें यादराम के घर में करीब 600 करोड़ रुपए होने की जानकारी दी। इसके बाद रामदयाल और रामेश्वर राठी ने लुटेरों के साथ मिलकर यादराम के घर में डकैती की साजिश रची।

गुजरात में तांत्रिक बन मूसा करता था ठगी

गुजरात के गिर सोमनाथ में भी बीते दिनों तांत्रिक बनकर लोगों को लाखों रुपए का चूना लगाने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया गया था। गुजरात पुलिस ने अल्ताफ और मूसा समेत 10 ठगों को गिरफ्तार किया था। बहरूपिए अल्ताफ और मूसा तंत्र विद्या से पैसा बढ़ाने का लालच देकर ठगी करते थे। ठगों के पास से काफी मात्रा में सोना, नकदी और कई सामान बरामद हुए थे।

एक कश्मीरी पंडित महिला पत्रकार अपने बुजुर्ग माँ-बाप को 33 साल बाद लेकर गईं कश्मीर, फिर वही हुआ जिसका उन्हें था ‘डर’

कश्मीर की घाटी में हिंदुओं पर हुए अत्याचारों की कहानी अक्सर दुनिया के सामने लेकर आने वाली कश्मीरी पत्रकार आरती टिकू सिंह के साथ कश्मीर में हैरान करने वाले घटना घटी है। उन्होंने अपने ट्विटर पर साझा करते हुए बताया कि वो 33 साल बाद अपने माता-पिता को लेकर कश्मीर गईं, ये सोचकर कि शायद पुराने जख्म के दर्द कम होंगे। लेकिन यहाँ उनके साथ ऐसा कुछ हुआ जिसके बाद वो और असुरक्षित महसूस करने लगीं।

आरती टिकू ने बताया कि कश्मीर में जाने के बाद वह जब अपने पेट को घुमाने बाहर निकलीं तो वहाँ एक ट्रेन्ड खूँखार पालतू कुत्ता आया और उसने उनके पेट पर हमला कर दिया। आरती बताती हैं कि उनके सामने उनके पेट को जबड़ों में दबाकर वो कुत्ता भागा और उसे बुरी तरह मारने का प्रयास किया। हालाँकि पत्रकार और उनके माता-पिता ने भागकर किसी तरह अपने Pet को उस कुत्ते से छुड़ाया।

पत्रकार कहती हैं कि इस घटना के बाद उन्हें कश्मीर में कोई सुरक्षा महसूस नहीं हो रही। जब उनके Pet पर हमला किया गया तब कोई उसे बचाने नहीं आया। वो खुद उसको लहूलुहान हालत में डॉक्टर के पास लेकर गईं। सिर्फ उनकी बहन उनके साथ थी। सरकारी वेटनेरी डॉक्टर ने 7 घंटे उसको ऑब्जर्वेशन में रखा । यहाँ उसकी 2 सर्जरी हुई और शरीर पर 30 टाँके आए।

आरती कहती हैं कि इस घटना के बाद वो असुरक्षित महसूस कर रही है क्योंकि कुछ ही दिन पहली की बात है जब एक संदिग्ध ने दिल्ली में अचानक आकर उनके उनके Pet की तस्वीर लेने की गुजारिश की थी। उन्हें ये बहुत अजीब लगा था। वो सोच ही रही थीं कि वो आदमी कुछ तो गलत था और अब यह घटना हो गई।

श्रीनगर में हुई घटना ने आरती टिकू को झकझोर दिया है। उनका कहना है कि ऐसा तब हुआ जब वो 33 साल में पहली बार अपने माता-पिता को लेकर गृहराज्य गईं। उन्होंने पीएम मोदी और अमित शाह को टैग करते हुए बताया कि वो काफी असुरक्षित महसूस कर रही हैं।

उन्होंने ये भी जानकारी दी कि ये कोई पहली घटना नहीं है। उनके भाई और उनके साथ पहले भी ऐसा हुआ है। बता दें कि साल 2021 में आरती टिकू सिंह और उनके भाई साहिल टिकू सिंह को ट्विटर पर खुलेआम धमकियाँ आई थीं। उन्होंने इस संबंध में गृह मंत्रालय से सुरक्षा की माँग भी की थी। टिकू के भाई के ‘एजेंट’ और न जाने क्या-क्या कहा गया था। इसके बाद जब आरती ने इन कट्टरपंथियों के विरुद्ध आवाज उठाई तो ट्विटर ने उन पर कार्रवाई की। उनके उन ट्विट्स को हटा दिया गया जिसमें उन्होंने इस संबंध में बात की थी।

शिया वक्फ बोर्ड की कई बीघा जमीन पर अतीक अहमद और मुख्तार अंसारी का कब्जा, मुक्त कराने के लिए CM योगी को लिखा पत्र

मृतक माफिया अतीक अहमद और जेल में बंद मुख्तार अंसारी ने वक्फ बोर्ड की जमीन पर भी कब्जा कर रखा है। उत्तर प्रदेश शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड (UPSCWB) ने इस संबंध में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखा है। उनसे इनके कब्जे वाली जमीनों को मुक्त कराने के लिए हस्तक्षेप का आग्रह किया है।

लाइव हिन्दुस्तान की एक रिपोर्ट के मुताबिक बोर्ड ने यूपी सरकार को पत्र लिखकर दोनों माफियाओं और उनके परिवारों के कब्जे वाली जमीन और संपत्तियों के बड़े हिस्से को मुक्त करने का आग्रह किया है। पत्र में कहा है कि गैंगस्टर अतीक अहमद के गुर्गों ने प्रयागराज के इमामबाड़ा गुलाम हैदर के छोटी कर्बला की कई बीघा जमीन पर अवैध रूप से कब्जा कर रखा है। लखनऊ के सआदतगंज क्षेत्र में अलल औलाद वक्फ के मुतवल्ली ने शिकायत की है कि वक्फ की 10-12 बीघा जमीन में से कई बीघे पर अवैध रूप से कब्जा है।

मुतवल्ली के हवाले से यह भी कहा गया है कि माफिया मुख्तार अंसारी की बीवी अफशां अंसारी उस फर्म की निदेशक हैं, जिसने अवैध रजिस्ट्री के जरिए जमीनों पर प्लॉटिंग कराई थी। शिया वक्फ बोर्ड के अधिकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि प्रयागराज में छोटा कर्बला की जमीन से अवैध कब्जा हटवाने के लिए स्थानीय प्रशासन को कई बार पत्र लिखे, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।

दिलचस्प बात यह है कि वक्फ बोर्ड से संबंधित जमीनों को हड़पने में अतीक अहमद और उसके गिरोह की भूमिका उसकी मौत के बाद सामने आई है। यह मामला तब सामने आया जब उत्तर प्रदेश पुलिस अवैध रूप से अर्जित की गई संपत्तियों की जाँच कर रही है। जाँच में सामने आया है कि मारे गए माफियाओ-गैंगस्टर ने अपने व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए वक्फ की संपत्तियों को हड़प लिया।

बता दें कि यूपी पुलिस ने इससे पहले 2016 में प्रयागराज में जीरो रोड पर चक इलाके में वक्फ की संपत्ति हड़पने के आरोप में अतीक के एक करीबी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी। उसके रिश्तेदार ने वक्फ की संपत्ति पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया था। वर्तमान में उस जमीन का इस्तेमाल कंस्ट्रक्शन मैटेरियल को बेचने के लिए किया जा रहा है।

पिछले दिनों शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष अली जैदी ने वक्फ संपत्ति पर माफियाओं के कब्जे का खुलासा करते हुए ​कहा था, “वक्फ संपत्ति पर कब्जा करना माफियाओं के लिए सबसे आसान है। अतीक अहमद ने वक्फ संपत्ति पर एक कॉम्प्लेक्स बनाया था। हमारे वक्फ की एक संपत्ति पर फर्जी दस्तावेज बनाकर अवैध रूप से कंपनी रजिस्टर कराकर प्लॉट किया गया था, जिसमें मुख्तार अंसारी की बीवी अफशा अंसारी निदेशक थी। यह जमीन करोड़ों रुपए की है। हमने प्रशासन को इसके बारे में लिखा है और इन मुद्दों को हल करने के लिए सरकार से मदद माँगी है।”

माफियाओं की जब्त की गई जमीन पर गरीबों के लिए घर

हाल ही में ऐसी खबरें सामने आई थीं कि उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार राज्य में माफियाओं से जब्त की गई जमीन पर गरीबों के लिए घर बना रही है। इसकी शुरुआत प्रयागराज में मृतक माफिया अतीक अहमद के कब्जे से खाली की गई जमीन से की गई है।

‘द केरल स्टोरी’ पर ममता बनर्जी ने मुँह की खाई: सुप्रीम कोर्ट ने बैन हटाया, तमिलनाडु सरकार को भी सुरक्षा इंतजाम के दिए निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (18 मई 2023) को लव जिहाद और धर्मांतरण के बाद लड़कियों को आतंकी गतिविधियों में धकेलने पर बनी फिल्म द केरल स्टोरी (The Kerala Story) पर पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा लगाए गए प्रतिबंध पर रोक लगा दी। इतना ही नहीं, कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार के उस बयान को भी सुना, जिसमें कहा गया कि तमिलनाडु में फिल्म के प्रदर्शन पर प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से कोई प्रतिबंध नहीं है।

तमिलनाडु सरकार के एडवोकेट जनरल के बयान को रिकॉर्ड करने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार को आदेश दिया कि जिन सिनेमाघरों में यह फिल्म दिखाई जा रही है, उसे और उसमें फिल्म देखने आने वाले लोगों को वह सुरक्षा मुहैया कराए।

इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से भी कहा कि फिल्म ‘द केरला स्टोरी’ में उचित डिस्क्लेमर होना चाहिए। फिल्म निर्माताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने कहा कि 20 मई की शाम 5 बजे तक डिस्क्लेमर जोड़ा जाएगा।

हरीश साल्वे ने कहा कि फिल्म में डिस्क्लेमर – “इस बात को साबित करने के लिए कोई प्रामाणिक डेटा उपलब्ध नहीं है कि धर्मांतरण के 32,000 या कोई अन्य आँकड़ा हैं” और “फिल्म इस मुद्दे के काल्पनिक संस्करण का प्रतिनिधित्व करती है” – जोड़ा जाएगा।

भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस जीबी परदीवाला की बेंच ने इस मामले को जुलाई 2023 में होने वाली अगली सुनवाई तक के लिए टाल दिया है। अंतरिम आदेश में पीठ ने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार का निर्णय प्रथम दृष्टया व्यापकता से ग्रस्त है।

इससे पहले बुधवार (17 मई 2023) को सुनवाई के दौरान पश्चिम बंगाल की ओर पेश अधिवक्ता ने सर्वोच्च न्यायालय में तर्क दिया कि केरल की इस कहानी में अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया है और यह फिल्म हेरफेर किए गए तथ्यों पर आधारित है। इससे राज्य में सांप्रदायिक वैमनस्य और कानून व्यवस्था से संबंधित स्थिति खड़ी हो सकती है।

इस फिल्म के निर्माता ने राज्य में इस फिल्म को ना दिखाने के सरकार के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दी थी। अपनी याचिका में निर्माता ने पश्चिम बंगाल सिनेमा (विनियमन) अधिनियम, 1954 की धारा 6 (1) की संवैधानिकता को भी चुनौती दी है, जिसके तहत पश्चिम बंगाल सरकार ने फिल्म पर प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी किया था।

इस पर राज्य सरकार ने कहा कि फिल्म पर प्रतिबंध खुफिया सूचनाओं पर आधारित एक नीतिगत निर्णय है। इससे याचिकाकर्ताओं के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं हुआ है। याचिकाकर्ता के वित्तीय नुकसान को मौलिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं बताया जा सकता है। इसके अलावा, राज्य सरकार ने यह भी तर्क दिया कि पश्चिम बंगाल सिनेमा (विनियमन) अधिनियम के रूप में संवैधानिकता की एक धारणा है, जो उन फिल्म प्रदर्शनियों के लिए एक अपवाद बनाती है, जो शांति भंग कर सकती है।

वहीं, तमिलनाडु सरकार ने बुधवार को दिए गए अपने हलफनामे में कहा था कि राज्य में ‘द केरल स्टोरी’ की स्क्रीनिंग पर कोई बैन नहीं लगाया गया है। एमके स्टालिन सरकार ने निर्माताओं के दावों का खंडन करते हुए कहा कि ये दलील गलत है कि तमिलनाडु में फिल्म दिखाने पर रोक लगाई गई है।

तमिलनाडु ने कहा था कि ये फिल्म 5 मई 2023 को 19 मल्टीप्लेक्स में रिलीज की गई, लेकिन फिल्म में जाने-पहचाने कलाकारों के न होने, कलाकारों के खराब प्रदर्शन और दर्शकों की संख्या में कमी के कारण मल्टीप्लेक्स मालिकों ने खुद ही 7 मई 2023 को फिल्म की स्क्रीनिंग बंद कर दी थी। उन्होंने कहा कि फिल्म निर्माताओं ने जानबूझकर झूठा बयान दिया है कि राज्य सरकार ने फिल्म की स्क्रीनिंग पर बैन लगाया है।

हलफनामे में आगे दावा किया गया था कि राज्य में फिल्म की स्क्रीनिंग करने वाले सभी सिनेमाघरों के लिए सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए गए थे। रिलीज से पहले शहरों में जिला पुलिस अधीक्षकों और पुलिस आयुक्तों को राज्य की कानून व्यवस्था पर नजर रखने के लिए अलर्ट जारी किया था। 25 डीएसपी सहित 965 से ज्यादा पुलिसकर्मियों को फिल्म दिखाने वाले 21 सिनेमाघरों की सुरक्षा के लिए तैनात किया गया था।