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‘पोस्टर फाड़ सकते हो, लेकिन लोगों के दिल से कैसे निकालोगे’: बागेश्वर धाम के महंत धीरेंद्र शास्त्री ने कहा- हिंदुओं को माला के साथ भाला रखने की जरूरत

तमाम विवादों के बीच मध्य प्रदेश के बागेश्वर के महंत धीरेंद्र शास्त्री का बिहार की राजधानी पटना में आयोजन हनुमंत कथा का बुधवार (17 मई 2023) को समापन हो गया। इस बीच पटना में उनके पोस्टर्स पर कालिख पोत दी गई और उस पर 420 और चोर लिख दिया गया है। हालाँकि, ऐसा करने वालों को जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि ‘दिल से कैसे निकालोगे’।

पटना में आयोजित पाँच दिवसीय कार्यक्रम के अंतिम दिन उन्होंने कथा सुनने आए श्रद्धालुओं से ‘माला और भाला’ साथ रखने का आह्वान किया। भगवान हनुमान को शास्त्र और अंगद को शस्त्र बताते हुए उन्होंने कहा, “सनातन धर्म में शास्त्र और शस्त्र दोनों की जरूरत है। शास्त्र और शस्त्र दोनों में ज्यादा अंतर नहीं है। एक डंडा निकाला तो शास्त्र भी शस्त्र बन जाता है, लेकिन सनातन धर्म की रक्षा के लिए माला और भाला दोनों होना जरूरी है।”

पटना में पोस्टर फाड़े जाने को लेकर धीरेंद्र शास्त्री ने कहा, “पोस्टर तो फाड़ा जा सकता है, लेकिन लोगों के दिल से कैसे निकालोगे।” इस दौरान उन्होंने शायरी भी सुनाई। उन्होंने कहा, “सितारों को आँखों में महफूज रखना, क्योंकि बहुत देर तक रात ही रात होगी। मुसाफिर हो तुम भी… मुसाफिर हैं हम भी, बालाजी ने चाहा तो किसी मोड़ पर फिर मुलाकात होगी।।”

अंतिम में धीरेंद्र शास्त्री के कार्यक्रम में भोजपुरी फिल्मों की अभिनेत्री अक्षरा सिंह भी पहुँचीं और उनसे मुलाकात की। इस दौरान केंद्रीय राज्यमंत्री अश्विनी चौबे भी पास बैठे हुए थे। कथा सुनाने के बाद धीरेंद्र शास्त्री पटना एयरपोर्ट पहुँचे और वहाँ से चार्टर्ड प्लेन में सवार होकर मध्य प्रदेश के लिए निकल गए। पटना में उनकी कथा में जुटे लोगों की संख्या को देखते हुए प्रशासन ने एयरपोर्ट पर सुरक्षाबलों की संख्या बढ़ा दी थी।

कहा जा रहा है कि पटना के नौबतपुर के तरेत पाली मठ के बाद अब धीरेंद्र शास्त्री की हनुमंत कथा गया में आयोजित की जाएगी। उन्होंने 15 मई 2023 को ऐलान किया था कि 29 सितंबर 2023 को गया में हनुमंत कथा का आयोजन होगा और दरबार लगेगा।

राष्ट्रीय लोक जनता दल के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने धीरेंद्र शास्त्री के हिंदू राष्ट्र वाले बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि देश संविधान से चलता है, न कि धर्म से। उन्होंने कहा कि बिहार में बाबा बागेश्वर ने जिस तरह से हिंदू राष्ट्र बनाने की बात कही गई है, यह ठीक नहीं है। 

धीरेंद्र शास्त्री के पोस्टर पर कालिख पोतने और चोर लिखने पर भाजपा और लोजपा (रामविलास) भड़क गई है। भाजपा ने कहा कि यह काम राजनीतिक प्रवृत्ति के लोगों ने किया है और वोट की राजनीति को लेकर किया है। वहीं, चिराग पासवान ने भी इसकी निंदा की है।

बताते चलें कि हिंदू जागरण मंच के क्षेत्रीय संगठन मंत्री डॉक्टर सुमन ने दिसंबर 2022 में झारखंड में जनजाति समुदाय के खिलाफ लव जिहाद और लैंड जिहाद को लेकर यही बात कही थी। उन्होंने कहा था कि हिन्दू एक हाथ में माला ले तो दूसरे हाथ में भाला ले, ताकि धर्मांतरण करने वाले सचेत हो जाएँ।

मुख्तार अंसारी पर हत्या का केस… 30-40 पुलिस वालों से भरे कोर्ट में गाली सुनने वाले जज की कहानी, 5 करोड़ रुपए लेकर लिखा गया था फैसला?

उत्तर प्रदेश में दशकों तक अपराध जगह की रीढ़ रहे माफिया मुख़्तार अंसारी के आपराधिक इतिहास की पड़ताल में ऑपइंडिया की टीम अप्रैल व मई माह में पूर्वांचल के अलग-अलग जिलों में गई। इस दौरान हमें मुख़्तार द्वारा प्रताड़ित किए गए तमाम पीड़ितों ने अपने अलग-अलग अनुभव बताए। हत्या, हत्या के प्रयास, जमीन कब्ज़ाने, गुंडा टैक्स उगाही के अलावा मुख़्तार अंसारी पर अपने खिलाफ दर्ज केस की फाईलें भी गायब करवा देने का आरोप है।

इस दौरान कुछ पीड़ितों ने यह भी आरोप लगाया कि मुख़्तार अंसारी का दबाव न्यायपालिका पर भी था। पीड़ितों और वकील ने जजों पर मुख़्तार के खिलाफ फैसले से पहले छुट्टी पर चले जाने और अनुचित फैसला सुनाने का भी आरोप लगाया।

4 वर्षों तक कोर्ट में पेश ही नहीं हुआ मुख़्तार

जिन अजय सिंह उर्फ़ मन्ना की हत्या का आरोप 2009 में मुख़्तार अंसारी पर लगा था, उनके भाई अशोक सिंह ने ऑपइंडिया से बात की। अशोक सिंह ने हमें बताया कि 2009 में उनके भाई मन्ना की हत्या के बाद 2010 में इसी केस के गवाह राम सिंह मौर्य और उनके सरकारी गनर को भी मार डाला गया था। अशोक सिंह ने आगे बताया कि 4 साल तक मुख़्तार अंसारी इस केस में मऊ कोर्ट में हाजिर ही नहीं हुआ था।

उन्होंने कहा कि मुख़्तार दूसरे मामलों में अपनी गैर-हाजिरी लगवा लेता था। ऐसा करते हुए मुख़्तार ने 4 साल बिता दिए और साल 2014 आ गया। अशोक ने बताया कि इन 4 सालों तक मुख़्तार केस में जजों से अपनी सेटिंग भिड़ाता रहा।

फैसले के दिन ही केस से हट गए थे जिला जज

अशोक सिंह ने आगे बताया कि 4 साल तक मुख़्तार अंसारी ने उनके भाई के हत्याकांड केस को लगातार गैर-हाजिर रह कर टाला। अशोक ने आगे बताया, “4 साल बाद 2014 में केस की सुनवाई हुई और इसी साल मऊ के तत्कालीन जिला जज अनिरुद्ध सिंह की कोर्ट में मुख़्तार अंसारी को सजा सुनाने का दिन आया।” उस दिन का जिक्र करते हुए अशोक सिंह ने कहा, “फैसले की डेट पड़ी। शाम के समय केस से वास्ता रखने या न रखने वाले कचेरी के तमाम लोग वहीं थे। सारे मुल्जिम बुला लिए गए। हथकड़ियाँ मँगा ली गईं। ये लगा कि जज साहब फैसला सुनाने जा रहे हैं।”

अशोक सिंह ने कहा कि इसी दिन मुख़्तार अंसारी ने जिला जज अनिरुद्ध सिंह की कोर्ट से अपना केस हटवाने की हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी, लेकिन वो ख़ारिज हो गई थी। घटनाक्रम बताते हुए अशोक ने कहा, “थोड़ी देर बाद अंदर जब जज साहब अंदर गए तो वहाँ से निकले ही नहीं। अंदर से ही इन्होंने फाइल ADJ के यहाँ ट्रांसफर कर दी। ये दबाव मुख़्तार अंसारी का रहा।” अशोक सिंह ने बताया कि उन्हें कहीं से सुनाई दिया था कि जज अनिरुद्ध सिंह पर कोई बड़ा दबाव आया था।

जज आदिल आफताब का न्याय संदिग्ध: पीड़ित

अशोक सिंह ने बताया कि साल 2014 में जिला जज ने जब उनके भाई मन्ना के हत्याकांड केस में फैसले के दिन खुद को अलग कर लिया तब वह केस सेशन जज आदिल आफ़ताब की कोर्ट में गया। उन्होंने कहा कि साल 2014 से 2017 तक आदिल आफ़ताब ने इस केस की सुनवाई की। साल 2017 में आदिल आफ़ताब ने मुख़्तार अंसारी को मन्ना सिंह हत्याकांड में बरी कर दिया।

फैसले के दिन का जिक्र करते हुए अशोक सिंह ने कहा, “हमारे वकील आदिल आफ़ताब की कोर्ट से केस ट्रांसफर करवाने जिला जज के यहाँ प्रार्थना पत्र देने जा रहे थे। कोर्ट में उस दिन न मुल्जिम आए थे और न ही विपक्ष वाले लेकिन आदिल आफ़ताब ने फैसला सुना दिया।”

जज आदिल आफ़ताब की शिकायत हाईकोर्ट में

सेशन जज आदिल आफ़ताब के फैसले से अशोक सिंह ने खुद को असंतुष्ट बताया। उन्होंने कहा कि उनके द्वारा इसकी शिकायत हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस और रजिस्टार को लिखित तौर पर की गई है। इस शिकायत में जज आदिल आफ़ताब के सुनाए गए फैसले की पूरी जाँच की माँग की गई है। अशोक सिंह ने कहा कि अगर उनके भाई मन्ना सिंह के हत्यारों को भाड़े का शूटर बता कर मुख़्तार को बरी किया गया है तो ये भी बताया जाए कि उन कातिलों को खरीदा किसने था? अशोक सिंह ने सवाल किया कि फैसला सुनाते समय इस गहराई तक कोर्ट क्यों नहीं गई ?

हालाँकि, अशोक सिंह को जज आदिल आफ़ताब के खिलाफ भेजी शिकायत पर हुई जाँच के निष्कर्ष के बारे में कुछ नहीं पता। उन्होंने कहा कि 2 बार उन्होंने शिकायत की है लेकिन संभवतः जजों की जाँच गोपनीय होती है इसलिए क्या हुआ इसकी जानकारी उन्हें नहीं है।

भरी कोर्ट में जज पर लगा था रिश्वत का आरोप

अशोक सिंह के सहयोगी और मऊ जिला न्यायालय में वकील सुनील सिंह ने ऑपइंडिया से बात की। उन्होंने बताया कि जब मन्ना सिंह हत्याकांड में जज आदिल आफताब ने मुख़्तार अंसारी को बरी किया तब सजा पाए एक अन्य मुल्जिम ने उन पर भरी कोर्ट में रिश्वत लेने का आरोप लगाया। एडवोकेट सुनील सिंह ने कहा, “जब फैसला हो गया तो उसमें एक अभियुक्त राजू कनौजिया जिसे सजा हो गया उसने भरी अदालत में कहा कि जब 5 करोड़ लिए थे फैसला करने के लिए, तो हम लोगों को क्यों सज़ा कर दिए?”

अधिवक्ता सुनील सिंह सिंह का दावा है कि राजू कन्नौजिया ने ये बातें 30 से 40 पुलिस वालों के आगे भरी कोर्ट में कही।

मुल्जिम ने जज को दी थी गाली

एडवोकेट सुनील सिंह का यह भी दावा है कि सजा पाए राजू कनौजिया ने कोर्ट में जज को गाली भी दी। अधिवक्ता सुनील सिंह ने आगे कहा, “यहाँ एक जिले में जज 3 साल से ज्यादा नहीं रहता है लेकिन किस कारण से उन्हें 5 साल यहाँ फैमिली कोर्ट में रखा गया? फिर आदिल आफ़ताब को फैमिली कोर्ट अम्बेडकरनगर ट्रांसफर हुआ जबकि उन्हें सीनियारिटी के आधार पर जिला जज बनना चाहिए था।” सुनील सिंह ने भी सेशन जज आदिल आफ़ताब की शिकायत हाईकोर्ट में किए जाने की बात दोहराई।

मारे जाते रहे गवाह, कोर्ट ने नहीं लिया संज्ञान

अधिवक्ता सुनील सिंह मन्ना सिंह हत्याकांड में वादी मुकदमा हरेंद्र सिंह के वकील हैं। उन्होंने कहा कि मन्ना सिंह के बाद इस केस के गवाह की भी उनके गनर सहित कत्ल हो गया था लेकिन, इसका संज्ञान कभी अदालत ने नहीं लिया।

अशोक सिंह और उनके वकील सुनील सिंह ने बताया कि मन्ना सिंह हत्याकाण्ड में मुख़्तार अंसारी को बरी किए जाने के सेशन जज आदिल आफताब फैसले को उन्होंने हाईकोर्ट में चुनौती दी है। उन्होंने यह भी बताया कि इस फैसले के खिलाफ न सिर्फ वो बल्कि प्रदेश सरकार भी हाईकोर्ट गई है। बकौल अशोक सिंह हाईकोर्ट में दोनों अपीलों को स्वीकार कर लिया गया है और उस पर सुनवाई लंबित है।

मन्ना सिंह हत्याकांड के बारे में विस्तार से जानने के लिए यहाँ पढ़ें।

मुख़्तार ही तय करता था जिले के DM और SP

मऊ के जिला पंचायत सदस्य प्रिंस यादव ने समाजवादी पार्टी की सरकार के समय का जिक्र करते हुए बताया कि तब मुख़्तार अंसारी का असर जजों पर भी हुआ करता था। प्रिंस ने कहा, “जब अन्य पार्टियों की सरकारें हुआ करती थीं तब इनके (मुख़्तार) के डर से जज फैसला नहीं सुनाते थे। जब फैसला आने को होता था उस दिन जज छुट्टी पर चले जाते थे।” योगी सरकार में हुए बदलाव का जिक्र करते हुए प्रिंस यादव ने कहा कि आज वही जज खुल कर मुख़्तार के खिलाफ फैसला सुना रहे हैं।

प्रिंस यादव ने आगे बताया कि मुख़्तार अंसारी ही जिसे चाहता था वही DM और SP बन कर आता था। उन्होंने बताया, “जिस DM या SP को उनका (मुख़्तार) का फोन चला जाता था वो किसी और की सुनता ही नहीं था।” प्रिंस यादव ने माँग की है कि मुख़्तार अंसारी के उस समय में तैनात रहे सभी जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षकों की जाँच करवाई जाए।

राह कई, पर किधर जाएँगे DK शिवकुमार: कर्नाटक में CM बने कोई भी, पिसना कॉन्ग्रेस को ही

कर्नाटक में विधानसभा चुनाव परिणाम आए 4 दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक थाह-पता नहीं है कि मुख्यमंत्री कौन बनेगा। CM पद की रेस में 2 नाम आगे हैं, ये किसी से छिपा नहीं है – नेता प्रतिपक्ष रहे सिद्धारमैया और प्रदेश अध्यक्ष DK शिवकुमार। सिद्धरमैया 1983 से ही विधायक बनते रहे हैं और 5 साल CM भी रह चुके हैं, जबकि DK शिवकुमार कॉन्ग्रेस के संकटमोचक हैं जो 8 बार MLA बन चुके हैं। कॉन्ग्रेस की रिजॉर्ट पॉलिटिक्स अक्सर अरबपति शिवकुमार के इर्दगिर्द ही घूमती रही है।

सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार, दोनों ने ही नई दिल्ली पहुँच कर राहुल गाँधी से मुलाकात की है। कई दौर की बैठकें हो चुकी हैं। मीडिया सूत्र कह रहे हैं कि DK शिवकुमार को उप-मुख्यमंत्री का पद ऑफर किया गया, जिसके लिए वो तैयार नहीं हैं। सिद्धारमैया के सीएम पद के लिए चुने जाने की अफवाह फैलने के बाद उनके समर्थकों ने खूब जश्न भी मनाया, लेकिन पार्टी ने साफ़ किया है कि अभी कोई निर्णय नहीं लिया गया है।

ये कर्नाटक का दुर्भाग्य ही होगा कि वहाँ की सत्ताधारी पार्टी कलह में व्यस्त रहे और पूर्ण बहुमत के बावजूद राज्य विकास से वंचित रह जाए। यहाँ हम उन विकल्पों पर विचार कर रहे हैं, जो DK शिवकुमार के पास हैं, अगर वो मुख्यमंत्री नहीं बनाए जाते हैं तो। ये विकल्प कहीं और नहीं, बल्कि उनकी पार्टी में ही मौजूद हैं या रहे हैं। कुर्सी पर गाँधी परिवार से धोखा मिलने के बाद DK शिवकुमार क्या-क्या कर सकते हैं, आइए जानते हैं।

या तो दो तिहाई विधायक तोड़ दें, या ज्योतिरादित्य सिंधिया की तरह कॉन्ग्रेस को अल्पमत में कर दें

DK शिवकुमार के पास पहला विकल्प ये हो सकता है कि अगर उनकी राजनीतिक हैसियत कॉन्ग्रेस में बहुत ज्यादा है तो वो पार्टी के दो तिहाई विधायक तोड़ कर एक अलग पार्टी बना लें, जैसा कि महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे ने किया और भाजपा के समर्थन से मुख्यमंत्री बने। या फिर, वो इतना विधायक तोड़ दें कि कॉन्ग्रेस सरकार अल्पमत में चली जाए। इसका सबसे बड़ा उदाहरण उनकी पार्टी में ही रहे हैं। मार्च 2020 में ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बगावत कर के मध्य प्रदेश में कमलनाथ की सरकार गिरा दी थी।

मध्य प्रदेश में कॉन्ग्रेस की जीत के बाद गाँधी परिवार के पुराने सिपहसालार कमलनाथ को तरजीह दी गई थी और युवा ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ धोखा हुआ। उन्होंने 22 विधायकों के साथ पार्टी छोड़ दी। वो भाजपा में शामिल हुए। उप-चुनाव में भाजपा के ज़्यादा विधायक जीते और कमलनाथ की सरकार चली गई। ‘महाराज’ की तरह बगावत के लिए DK शिवकुमार के पास वैसा ही करिश्मा और जनस्वीकार्यता होनी चाहिए। क्या वो इस रिस्की रास्ते पर जाना पसंद करेंगे?

सचिन पायलट की तरह अपनी ही सरकार का विपक्ष बन जाएँ

राजस्थान में कुछ ऐसा ही हो रहा है। सचिन पायलट को राजस्थान में प्रदेश अध्यक्ष और उप-मुख्यमंत्री का पद मिला था। 2020 में उन्होंने बगावत तो की, लेकिन उलटे उनके दोनों पद चले गए और कॉन्ग्रेस में कद भी घटा दिया गया। सचिन पायलट फ़िलहाल शांति प्रदर्शन कर रहे हैं। राजस्थान में अशोक गहलोत अपने विधायकों को एकजुट रखने में कामयाब रहे। सचिन पायलट की हालिया ‘जन संघर्ष पदयात्रा’ खत्म हो गई है, लेकिन उन्होंने अपनी ही सरकार पर जम कर हमला बोला और भीड़ जुटाई। पायलट तो कह भी चुके हैं कि बाद में CM बनाने के वादे से कुछ नहीं होता।

पूरे 5 वर्षों तक अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच जुबानी जंग चलती रही। गहलोत ने तो उन्हें ‘नालायक’ तक बता दिया। उन्होंने अशोक गहलोत और भाजपा नेता वसुंधरा राजे की मिलीभगत का आरोप लगाया। अब वो जनता के बीच जाकर अपना अगला रुख तय करेंगे। क्या DK शिवकुमार भी अगले 5 साल अपनी ही सरकार का विपक्ष बन कर बिताएँगे? जन-समर्थन से ऐसा संभव तो है। अगर विधायक उनके साथ नहीं हैं तो उनके लिए ये रास्ता हो सकता है, क्योंकि इससे वो खबरों में बने रहेंगे और सक्रिय रहेंगे।

बाबा की तरह मंत्रिमंडल में रह कर कुढ़ते रहें

छत्तीसगढ़ में जीत के बाद कॉन्ग्रेस ने भूपेश बघेल को CM बनाया था। TS सिंह देव, जो सरगुजा राजघराने से आते हैं, उन्हें ढाई साल बाद ये पद देने का आश्वासन मिला। हालाँकि, भूपेश बघेल पद पर बने रहे। टीएस सिंह देव कभी गुस्सा कर विधानसभा से लौट गए तो कभी कुढ़न में बयान देते रहे। अब उन्होंने कह दिया है कि चुनाव लड़ने की उनकी कोई इच्छा नहीं है। उन्होंने हार मान ली है या फिर ये उनकी राजनीति है, भगवान जाने।

अगर DK शिवकुमार भी TS सिंह देव के रास्ते जाते हैं तो उनके पास विकल्प होगा कि वो उप-मुख्यमंत्री का पद और कुछ मलाईदार विभाग ले लें और खुद को सरकार में नंबर-2 मान ही लें। हाँ, बीच-बीच में मीडिया के बयानों में उनकी चिढ़न सामने आ सकती है। सिंह देव को दो मंत्रालय दिए गए थे, लेकिन उन्होंने अचानक से पंचायती राज मंत्री से त्याग-पत्र दे दिया। वो स्वाथ्य मंत्री बने रहे। क्या डीके शिवकुमार इस रास्ते जाएँगे और सिद्धारमैया के सामने हार मानते हुए जो मिला उसी में खुश रहेंगे?

हिमाचल प्रदेश की प्रतिभा सिंह की तरह परिवार को आगे बढ़ाएँ

भाजपा ने 2022 में हिमाचल प्रदेश में बड़ी जीत दर्ज की। प्रदेश अध्यक्ष थीं प्रतिभा सिंह, लेकिन मुख्यमंत्री के रूप में सुखविंदर सिंह सुक्खू को चुना गया। प्रतिभा सिंह का नाम भी चर्चा में था, लेकिन CM पद छोड़ने की एवज में उनके बेटे विक्रमादित्य सिंह को मंत्री बनाने का सौदा तय हुआ। विक्रमंदितया को पब्लिक वर्क्स विभाग दिया गया है। वो 33 वर्ष के हैं, ऐसे में प्रतिभा सिंह ने अपने बेटे के राजनीतिक भविष्य के लिए समझौता कर लिया।

अगर DK शिवकुमार अपनी प्रतिष्ठा भी बचाना चाहते हैं और खुद को नंबर-2 नहीं बनाना चाहते, तो उनके पास विकल्प है कि अपने परिवार के किसी सदस्य को मंत्री बनवा दें, या फिर अगली पीढ़ी को आगे बढ़ाएँ। आज भी प्रतिभा सिंह गाहे-बगाहे चर्चा करती रहती हैं कि हिमाचल प्रदेश में वीरभद्र सिंह के नाम पर आज भी वोट पड़ते हैं। अब उन्हें अध्यक्ष पद से हटाए जाने की भी खबरें घूम रही हैं। भले ही वो इसमें कुछ न कर पाएँ, उनके बेटे के राजनीतिक भविष्य सुरक्षित ही दिख रहा।

सिद्धू की तरह बन जाएँ: कॉन्ग्रेस के लिए न उगलते बने, न निगलते

DK शिवकुमार के पास एक और अजीब सा विकल्प है और वो है नवजोत सिंह सिद्धू जैसा। ये वो नाम है, जो कॉन्ग्रेस को न उगलते बनता है और न निगलते। उन्हें भी उप-मुख्यमंत्री का पद दिया गया था पंजाब में। उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के खिलाफ विद्रोह कर दिया। बाद में कैप्टन सीएम पद से हटाए गए और चरणजीत सिंह चन्नी पर कॉन्ग्रेस ने भरोसा जताया, लेकिन प्रदेश अध्यक्ष रहे सिद्धू के तेवर ढीले नहीं पड़े।

नवजोत सिंह सिद्धू एक पुराने मामले में एक वर्ष के लिए जेल गए। फ़िलहाल वो जेल से बाहर आ चुके हैं और पंजाब कॉन्ग्रेस में फिर राजनीतिक अस्थिरता पैदा हो रही है। एक तरफ वो बगवात करते हैं, दूसरी तरफ सोनिया-राहुल-प्रियंका की शान में कसीदे पढ़ते हैं। DK शिवकुमार के पास ये सबसे अजीब विकल्प है, जिस पर वो शायद ही विचार करें। लेकिन हाँ, ऐसा रुख अपनाने से अगले चुनाव में कॉन्ग्रेस की बुरी हार तय हो जाएगी।

2 केरल, एक मनोरम-दूसरा आतंकी हब: द केरल स्टोरी के डायरेक्टर ने बताया 100% साक्षर स्टेट का ‘काला सच’

लव जिहाद और धर्मांतरण के बाद महिलाओं को इस्लामी आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (ISIS) में सेक्स स्लेव के रूप में भेजने की वास्तविक घटनाओं पर आधारित ‘द केरल स्टोरी (The Kerala Story)’ चर्चा में बनी हुई है। एक तरफ ब्रिटेन में इसे दिखाने की इजाजत मिल गई तो दूसरी तरफ फिल्म निर्माता ने कुछ लव जिहाद पीड़ितों को भी पत्रकारों से रू-ब-रू करवाया।

पत्रकार वार्ता में फिल्म के निर्देशक सुदिप्तो सेन ने कहा, “केरल में दो केरल विद्यमान है। एक केरल- जो फिल्म की तरह है, पोस्टकार्ड, बैकवॉटर्स, खूबसूरत लैंडस्केप, कलरीपयट्टू, डांस, मार्शल आर्ट आदि। दूसरा केरल बसता है उसके उत्तरी भाग में, जहाँ मलप्पुरम, कासरगोड, कोझिकोड है, जो मंगलुरु सहित दक्षिण कर्नाटक से जुड़ता है। ये आतंकी नेटवर्क का हब है।”

केरल के बारे में बताते हुए सुदिप्तो सेन ने कहा, “यहाँ जाकर जितनी आप सुनेंगे, जानेंगे तो आपको पता चलेगा कि महिला साक्षरता में सबसे आगे रहने वाला राज्य में पर्दे के पीछे क्या हो रहा है। अगर सच्चाई जानना हो तो कासरगोड, मल्लपुरम में जाना चाहिए और पता करना चाहिए कि ये कहानी (फिल्म की) सही है या गलत।”

फिल्म निर्माताओं में शामिल एक अन्य व्यक्ति ने कहा, “CNN इंटरनेशनल की एक डॉक्यूमेंट्री है, जहाँ पे केरल के कुछ गाँवों में शरिया कानून लागू है। ये हम उस 100 परसेंट साक्षर राज्य की बात कर रहे हैं, जहाँ गाँव-गाँव शरिया लॉ से चलते हैं। इस फिल्म को बनाने से पहले मुझे भी बहुत कुछ नहीं पता था।”

प्रेस वार्ता में आईं लव जिहाद पीड़ित महिलाओं में से एक ने कहा, “केरल से ऐसी केसेज आए हैं, जिनमें महिला ISIS में शामिल होने गई हैं। हाल ही में केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने खुलासा किया था कि प्रजरू, जिसने धर्मांतरण करने के बाद अपना नाम मोहम्मद अमीन रख लिया था। मैं एक न्यूज क्लिप का हिस्सा पढ़कर सुना रही हूँ।”

उस महिला ने आगे कहा, “मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने नारकोटिक्स जिहाद के संदर्भ बोलते हुए कहा था कि बालूशेरी का रहने वाला प्रजरू का नाम उन मलयाली लोगों की सूची में शामिल किया गया है, जिन्होंने ISIS ज्वॉइन की है। प्रजरू एक हत्या के मामले में भी वांछित था और उस पर भारी कर्ज था। प्रजरू की पत्नी ने कहा कि उसे यह जानकर आश्चर्य नहीं हुआ कि उसका पति आतंकी संगठन में शामिल हो गया, क्योंकि पैसे के लिए वह कुछ भी कर सकता था।”

फिल्म निर्माताओं के साथ आई महिला ने सीएम विजयन के बयान को आगे बढ़ाते हुए कहा, “प्रजरू ने चार शादियाँ कीं। शादी करने के लिए तीन साल पहले उसने इस्लाम अपना लिया था। बाद में वह रेडिकल हो गया था। मर्डर केस में सबूतों के अभाव में उसे रिहा कर दिया गया था।” महिला ने कहा कि ये सारी बातें केरल के मुख्यमंत्री ने खुद बताई हैं।

बताते चलें कि केरल स्टोरी फिल्म को लेकर देश ही नहीं, विदेशों में भी बवाल हो गया है। एक तरफ ममता बनर्जी की नेतृत्व वाली पश्चिम बंगाल सरकार और एमके स्टालिन के नेतृत्व वाले तमिलनाडु सरकार ने उनके राज्यों में फिल्म के प्रदर्शन पर रोक लगा दी है। वहीं, यूपी, मध्य प्रदेश जैसे राज्यों ने इस फिल्म को टैक्स-फ्री कर दिया है।

वहीं, ब्रिटेन में इस फिल्म को 12 मई को रिलीज किया जाने वाला था। कई हाउसफुल शो होने के बावजूद ब्रिटेन में इसकी स्क्रीनिंग रद्द कर दी गई थी। इसकी वजह थी कि ब्रिटेन की सेंसर बोर्ड ने फिल्‍म को रिलीज करने का सर्टिफिकेट जारी नहीं किया था। बोर्ड ने सर्टिफिकेट देने से मना कर दिया था। हालाँकि, फिल्म के डायरेक्टर सुदिप्तो ने खुद ट्वीट कर जानकारी दी कि अब उन्हें रिलीज करने की अनुमति मिल गई है और इसे जल्दी ही रिलीज किया जाएगा।

सुदिप्तो सेन के इस ट्वीट को फिल्म की अभिनेत्री अदा शर्मा ने भी रिट्वीट कर बधाई दी है। बताते चलें कि ब्रिटेन भी लव जिहाद से बुरी तरह प्रभावित है। वहाँ पर एशियाई, खासकर पाकिस्तानी मुस्लिमों का गैंग है जो ब्रिटेन की नाबालिग लड़किों को फँसा कर उनका शोषण करता है। इस आतंक को खत्म करने के लिए ब्रिटेन ने टास्क फोर्स भी बनाया है।

नाबालिग हिन्दू लड़की की ID पर डासना मंदिर में घुस रहा था मोहसिन, साथ में एक मुस्लिम लड़की: यति नरसिंहानंद बोले – रेकी करने की थी मंशा

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद स्थित डासना मंदिर में 2 नाबालिग लड़कियों के साथ एक संदिग्ध के पकड़े जाने की खबर है। संदिग्ध का नाम मोहसिन बताया जा रहा है। कहा जा रहा है कि हिरासत में लिए गए मोहसिन सहित 2 अन्य लड़कियों में एक हिन्दू समाज की है, जिसने अपने आधार कार्ड पर एंट्री की कोशिश की थी। दूसरी नाबालिग लड़की भी मुस्लिम समुदाय से बताई जा रही है। मंदिर के महंत यति नरसिंहानंद का आरोप है कि मोहसिन मंदिर में घुस कर रेकी करना चाह रहा था।

मंदिर की तरफ से अभी तक पुलिस को कोई तहरीर नहीं दी गई है। फ़िलहाल पुलिस संदिग्ध को हिरासत में ले कर पूछताछ कर रही है। घटना बुधवार (17 मई, 2023) की है।

ऑपइंडिया इस इस मामले में डासना शक्तिपीठ मंदिर के महंत यति नरसिंहानंद से बात की। उन्होंने कहा कि लड़के का नाम मोहसिन है, जिसकी उम्र लगभग 24-25 साल के बीच की है। महंत के मुताबिक, वह लगभग हर दिन परिवार के साथ मंदिर पर आने वाली हिन्दू लड़की के आधार कार्ड पर मंदिर में घुस चुका था। बकौल यति नरसिंहानंद, मोहसिन मंदिर में सुरक्षा के पुलिस वाले चक्र को पार कर चुका था लेकिन उनके व्यक्तिगत सुरक्षा गार्डों की चेकिंग में पकड़ा गया। महंत ने बताया कि उन्होंने पुलिस को कोई शिकायती पत्र नहीं दिया है।

यति नरसिंहानंद ने हमें आगे बताया कि तलाशी के दौरान तीनों में से किसी के पास कोई हथियार आदि नहीं मिला। उन्होंने आरोप लगाया कि मोहसिन और नाबालिग मुस्लिम लड़की ने अपनी पहचान छिपाने के लिए अपने आधार कार्ड की एंट्री नहीं करवाई थी। इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में पुलिस कुछ संदिग्धों को हिरासत में ले कर ले जा रही है। वीडियो में स्कूल के ड्रेस में एक लड़की भी दिखाई दे रही है।

इसी मंदिर की भक्त डॉक्टर उदिता त्यागी ने घटनास्थल से एक वीडियो जारी किया है। उन्होंने लड़की की उम्र 13 साल बताई है। उदिता का आरोप है कि मोहसिन के साथ हिरासत में ली गई 2 नाबालिग लड़कियों में से एक मुस्लिम है।

डासना मंदिर के सेवादार ने बताया कि मोहसिन डासना क्षेत्र का ही है और वो मंदिर में रेकी के मकसद से आया था। इस घटना पर गाजियाबाद पुलिस के ACP वेब सिटी ने 1 आधार कार्ड पर मंदिर में 3 लोगों की एंट्री की बात स्वीकारी है। उन्होंने बताया कि तीनों से पूछताछ कर के कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

पहले भी पकड़े जा चुके हैं संदिग्ध

गौरतलब है कि मई 2021 में ऑपइंडिया से बात करते हुए यति नरसिंहानंद ने खुद को कट्टरपंथियों के निशाने पर बताया था। इस से पहले भी डासना मंदिर में घुसपैठ की कोशिश में कुछ संदिग्ध पकड़े जा चुके हैं। 2 जून 2021 की रात काशिफ़ और विपुल नाम के दो व्यक्ति घातक ड्रग सायनाइड और सर्जिकल ब्लेड के साथ घुस गए थे। इन दोनों ने मंदिर के प्रमुख द्वार के बाहर एंट्री रजिस्टर में अपना नाम डॉक्टर विपुल विजय वर्गीय नागपुर और काशी गुप्ता के रूप में कराई थी। दोनों संदिग्धों पर आरोप था कि वो महंत पर शाम की पूजा के दौरान हमला करने की फिराक में थे।

इसके अलावा मंगलवार (10 अगस्त, 2021) को तड़के सुबह 4 बजे डासना मंदिर में 2 साधुओं को किसी संदिग्ध द्वारा चाकू घोंपी गई थी। इस हमले में दोनों साधु बुरी तरह से घायल हो गए।

नारियल फोड़ा, जल छिड़का… नासिक के त्र्यंबकेश्वर मंदिर का हिंदुओं ने किया शुद्धिकरण, चादर चढ़ाने घुस गए थे मुस्लिम

महाराष्ट्र के नासिक स्थित त्रयम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर परिसर का बुधवार (17 मई, 2023) को शुद्धिकरण किया गया। कई हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं ने मंदिर के प्रवेश द्वार और परिसर में नारियल फोड़ा व जल छिड़क कर शुद्धिकरण की प्रक्रिया पूरी की। दरअसल, 13 मई को कुछ मुस्लिम मंदिर में दाखिल होने की कोशिश कर रहे थे। हालाँकि, सुरक्षा में तैनात जवानों ने उन लोगों को शिवलिंग के पास नहीं पहुँचने दिया।

मुस्लिमों के जबरन त्रयम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में दाखिल होने की घटना से कई हिंदू संगठन के लोग भी नाराज हैं। हिंदू महासंघ समेत कई संगठन के लोगों ने मंदिर पहुँचकर अपना विरोध जताया। कार्यकर्ताओं ने मंदिर के द्वार और परिसर का शुद्धिकरण किया और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की माँग की। बता दें कि मंदिर से कुछ ही दूरी पर मुस्लिमों के उर्स का प्रोग्राम चल रहा था। इसके लिए जुलूस निकाला गया था।

विवाद बढ़ने के बाद जुलूस के आयोजकों ने सफाई दी है कि उनके पूर्वज भी बाहर से ही भोलेनाथ को चादर दिखाते थे। उर्स आयोजकों का कहना है कि उन्होंने पूर्वजों की परंपरा का पालन करने की कोशिश की। उनका उद्देश्य मंदिर में दाखिल होना या शिवलिंग पर चादर चढ़ाना नहीं था। हालाँकि, हिन्दू संगठन के लोग इस जवाब से संतुष्ट नहीं हैं। लोगों का कहना है कि इस तरह के रिवाज के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है।

बता दें कि महाराष्ट्र सरकार ने पूरे मामले की जाँच के लिए एसआईटी का गठन किया है। राज्य के उप-मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि एसआईटी ताजा मामले के साथ-साथ इस तरह के पुराने मामलों की भी जाँच करेगी।

इसके पहले मंदिर प्रशासन ने मंदिर में जबरन दाखिल होने वाले मुस्लिमों के खिलाफ FIR दर्ज कराई। पुलिस ने मामले में चार लोगों को गिरफ्तार भी कर लिया था। मंदिर प्रशासन द्वारा दी गई शिकायत में लिखा गया है कि त्रयम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल है। सदियों से जारी परंपरा के अनुसार मंदिर में सिर्फ हिन्दुओं को ही प्रवेश देने की अनुमति रही है, जिनकी हिन्दू धर्म में आस्था नहीं है उनका मंदिर में प्रवेश वर्जित है।

देवस्थान ट्रस्ट का कहना है कि इस तरह की घटना से सामाजिक तानेबाने को नुकसान पहुँच सकता है। आगे इस तरह की घटना न हो इसके लिए प्रशासन से व्यवस्था करने की अपील की। महादेव का यह मंदिर नीलगिरि, ब्रह्मगिरि और कलागिरि की पहाड़ियों के बीच में स्थित है। मंदिर में ब्रह्मा, विष्णु और महेश का प्रतिनिधित्व करते हुए 3 लिंग स्थापित हैं। मुग़ल बादशाह औरंगजेब द्वारा ध्वस्त किए जाने के बाद पेशवा बालाजी बाजीराव ने इसका पुनर्निर्माण करवाया था।

पंच केदारों में शामिल दुनिया के सबसे ऊँचे शिव मंदिर में झुकाव, मूर्तियाँ 10 डिग्री तक झुकीं: संरक्षित स्मारक घोषित करने की कार्रवाई शुरू, मंदिर समिति का विरोध

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के अध्ययन में दुनिया के सबसे ऊँचे तुंगनाथ शिव मंदिर को लेकर चौंकाने वाले नतीजे सामने आए हैं। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण अध्ययन में यह बात सामने आई है कि उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में 12 हजार 800 फीट की ऊँचाई पर स्थित पंच केदारों में से एक तुंगनाथ शिव मंदिर (Tungnath Shiva Shrine) झुक रहा है। मंदिर में 5 से 6 डिग्री तक का झुकाव आया है। वहीं, मूर्तियों और छोटे स्ट्रक्चर में 10 डिग्री तक का झुकाव देखने को मिला है।

एएसआई के अधिकारियों ने टाईम्स ऑफ इंडिया को बताया कि उन्होंने निष्कर्षों के बारे में केंद्र सरकार को अवगत कराया है और सुझाव दिया है कि मंदिर को संरक्षित स्मारक के रूप में शामिल किया जाए। एक अधिकारी ने मंगलवार (16 मई 2023) को कहा, “सरकार ने इसे राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस प्रक्रिया के तहत जनता से उनकी राय माँगने के लिए एक अधिसूचना जारी भी की गई है। एएसआई नुकसान की मुख्य वजह का पता लगाएगा, ताकि इसकी तुरंत मरम्मत की जा सके।”

ASI की देहरादून सर्किल के सुपरिटेंडेंट आर्कियोलॉजिस्ट मनोज कुमार सक्सेना ने बताया, “सबसे पहले हम तुंगनाथ मंदिर में झुकाव और डैमेज के कारणों का पता लगाएँगे और अगर संभव हुआ तो तुरंत इसकी मरम्मत का काम शुरू करेंगे। इसके अलावा मंदिर परिसर के निरीक्षण के बाद एक विस्तृत कार्यक्रम तैयार किया जाएगा।”

वहीं, एएसआई के अधिकारी इस बात को भी देख रहे हैं कि कहीं मंदिर की जमीन नीचे की तरफ तो नहीं धँस रही है, जिसके कारण मंदिर में झुकाव हुआ है। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ी तो विशेषज्ञों से विचार-विमर्श कर क्षतिग्रस्त नींव के पत्थरों को बदला जाएगा। फिलहाल एएसआई ने मुख्य मंदिर की दीवारों पर ग्लास स्केल को फिक्स कर दिया, जो मंदिर की दीवार पर मूवमेंट को माप सकता है।

बता दें कि तुंगनाथ को दुनिया का सबसे ऊँचा शिव मंदिर माना जाता है, जिसे 8वीं शताब्दी में कत्यूरी शासकों ने बनवाया था। यह बद्री केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) के प्रशासन के तहत आता है। इस संबंध में बीकेटीसी को भी एक पत्र भेजा गया है।

बीकेटीसी के अध्यक्ष अजेंद्र अजय ने कहा कि इस मैटर को हाल ही में संपन्न हुए बोर्ड की मीटिंग में उठाया गया, जहाँ सभी लोगों ने एएसआई के प्रस्ताव को खारिज कर दिया। हम सभी इस मंदिर को उसके वास्तविक स्वरूप में वापस लाने के लिए एसआई की सहायता करने को तैयार हैं, लेकिन इसे उन्हें पूरी तरह से सौंपने के पक्ष में नहीं है।

कभी था ‘सुंदर दास पार्क’, हिंदुओं के थे बड़े-बड़े घर: लाहौर के जिस जमान पार्क में है इमरान खान का घर, उसका बीता कल जानते हैं आप

लाहौर का जमान पार्क (Zaman Park Lahore) फिर से चर्चा में है। पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान (Imran Khan) का यहाँ घर है। इस घर को पुलिस ने घेर रखा है। कहा जा रहा है कि इस घर में 30 से 40 आतंकियों ने शरण ले रखी है। पंजाब सरकार ने इन्हें सौंपने के लिए 24 घंटे का अल्टीमेटम इमरान खान की पार्टी को पाकिस्तान तहीरक-ए-इंसाफ (PTI) को दिया है।

लाहौर पाकिस्तान के पंजाब प्रांत का हिस्सा है। जनसंख्या के मामले में लाहौर दुनिया का 26वाँ सबसे बड़ा शहर है और पाकिस्तान में दूसरा। कभी सिख साम्राज्य के रणजीत सिंह की राजधानी लाहौर ही हुआ करती थी। आज इस शहर के जमान पार्क पर पठानों का कब्जा है। लेकिन कभी यह इलाका सुंदर दास पार्क कहलाता था। समृद्ध हिन्दुओं के बड़े-बड़े घर यहाँ बने थे।

माजिद शेख ने ‘The Dawn’ में 16 सितंबर, 2018 को प्रकाशित एक लेख में पुराने नक्शों का हवाला देकर बताया था कि आज जिसे जमान पार्क कहते हैं, वो क्षेत्र अंग्रेजों के समय में ‘PLH (पंजाब लाइट हॉर्स)’ ग्राउंड हुआ करता था। वहाँ एक फायरिंग रेंज भी था। ये क्षेत्र एचिसन कॉलेज के पीछे और मायो गार्डन्स के दक्षिण में स्थित है। 1857 के आसपास के नक़्शे में यहाँ किसी प्रकार का निर्माण कार्य नहीं दिखता। PLH की स्थापना सन् 1867 में हुई थी।

लाहौर में फ़ौज की त्वरित तैनाती के लिए इसकी ज़रूरत अंग्रेजों को महसूस हुई थी। ब्रिटिश काल के समय पंजाब के लाहौर और अमृतसर सहित कई इलाकों में निगरानी के लिए इसका इस्तेमाल किया गया। 1947 में पाकिस्तान बनने के बाद इस रेजिमेंट को खत्म कर दिया गया। मायो गार्डन्स के दक्षिण में एक ‘सुंदर दास रोड’ भी है। असल में 1936 में इसका नाम ‘सुंदर दास पार्क’ था। इस कॉलोनी के मध्य में एक वृत्ताकार क्रिकेट ग्राउंड 1936 के नक़्शे में दिखता है।

माजिद खान, जावेद बुर्की और इमरान खान इस मैदान में अपने करियर के शुरुआती दौर में खेल चुके हैं। फिर पता चलता है कि असल में 1942 में यहाँ 6 समृद्ध हिन्दू परिवारों के घर थे, जो आपस में रिश्तेदार भी हुआ करते थे। इनमें से एक सूरी परिवार था, जिसके मुखिया का नाम था- राय बहादुर सुंदर दास सूरी। वे पंजाब के स्कूलों के चीफ इंस्पेक्टर थे और बच्चों की शैक्षिक ज़रूरतों को पूरा करने की जिम्मेदारी उनकी ही थी।

लाहौर स्थित गवर्नमेंट कॉलेज के प्रोफेसरों लाला लाजपत राय और रुचिराम साहनी के साथ वो काम कर चुके थे। ‘Aitchison College’ के परिसर को विस्तार देने में भी उनकी बड़ी भूमिका थी। लाहौर में ‘सेन्ट्रल मॉडल स्कूल’ और ‘ल्यालपुर स्कूल एंड कॉलेज’ की स्थापना का श्रेय उन्हें ही जाता है। ये बाद में कृषि विश्वविद्यालय बन गया। विभाजन के समय यहाँ 15 समृद्ध हिन्दू परिवार रहते थे। विभाजन के बाद जनरल बुर्की ने पठानों को यहाँ बसाया।

मुग़ल काल में ये पठान वजीरिस्तान से जालंधर में बस गए थे और विभाजन के बाद फिर पाकिस्तान चले गए। जालंधर पठान परिवार के मुखिया के नाम पर इसका नाम ज़मान पार्क पड़ा। 1935 के नक़्शे से पता चलता है कि जेल रोड-लाहौर कैनाल-फिरोजपुर रोड वाला इलाका सरकारी अस्पतालों, जेलों और सरकारी इमारतों का था। इसमें मेन्टल हॉस्पिटल, महिला जेल और सेन्ट्रल जेल था। बाबा शाह जमाल की एक मजार भी यहाँ दिखती है।

सिख साम्राज्य के समय सिख सरदार शोबा सिंह की फ़ौज यहाँ रहती थी। शोबा सिंह लाहौर के शासक थे, रणजीत सिंह के 1799 में गद्दी सँभालने से पहले। इस परिसर में कई ईंट-भट्टे भी थे। पकिस्तान के लोग आज अपने सिख और हिन्दू इतिहास की सच्चाई से पीछा छुड़ाना चाहते हैं। ज़मान पार्क के पठान परिवारों में से पाकिस्तान को कई क्रिकेटर, सैन्य अधिकारी और डॉक्टर मिले हैं। खुद ज़मान खान के बेटों हुमायूँ, जावेद और फवाद ने भी क्रिकेट खेला था। पाकिस्तान में इसे सबसे शांत और समृद्ध लोगों का रिहायशी इलाका माना जाता है।

इमरान खान के लाहौर वाले घर में हैं 40 आतंकी, पुलिस ने घेरा: पंजाब सरकार ने सौंपने के लिए दिए 24 घंटे का अल्टीमेटम

पाकिस्तान में रस्साकशी जारी है। एक तरफ पूर्व क्रिकेटर एवं प्रधानमंत्री इमरान खान की पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) और सुप्रीम कोर्ट है तो दूसरी तरफ पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार और सेना है। इमरान खान ने दावा किया था कि शहबाज शरीफ ने सेना के इशारे पर उनके खिलाफ 145 मामलेे दर्ज किए हैं। इस्लामाबाद हाईकोर्ट (IHC) ने इमरान खान को सभी मामलों में 31 मई 2023 तक गिरफ्तारी से राहत दी है।

वहीं, हाईकोर्ट ने PTI के मलीका बुखारी और अली मुहम्मद खान की रिहाई का आदेश दिया है। बता दें कि पिछले हफ्ते IHC की बेंच ने अल-कादिर ट्रस्ट मामले में इमरान की जमानत याचिका को दो सप्ताह के लिए स्वीकार कर लिया था। इसके एक दिन पहले पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने मामले में इमरान की गिरफ्तारी को अवैध और गैरकानूनी बताया था।

वहीं, कई पत्रकारों ने न्यायमूर्ति मियांगुल हसन औरंगज़ेब द्वारा की गई सुनवाई का बहिष्कार किया। पत्रकारों का यह फैसला औरंगजेब के उस फैसले के बाद लिया गया, जिसमें उन्होंने अदालत में सुनवाई के दौरान पाँच पत्रकारों तक ही उपस्थित रहने का आदेश दिया था।

उधर, पंजाब की अंतरिम सरकार ने इमरान खान के लाहौर स्थित आवास जमान पार्क में छिपे 30-40 आतंकवादियों को सौंपने के लिए इमरान खान को कहा है। पंजाब सरकार के सूचना मंत्री ने कहा कि अगर इमरान इन आतंकियों को नहीं सौंपते हैं तो कानून अपना काम करेगा। पुलिस ने पूरे इलाके को घेर रखा है।

मंत्री ने कहा कि इमरान खान ने गिरफ्तारी से पहले हमले की योजना बनाई थी। 9 मई को गिरफ्तारी के दौरान निर्धारित योजना के तहत हिंसक प्रदर्शन किया गया और सैन्य प्रतिष्ठानों पर हमले किए गए। इस दौरान सरकार ने रक्तपात से बचने के लिए पुलिस को हथियारों के इस्तेमाल से रोक दिया था। उन्होंने कहा कि इमरान खान देश के खिलाफ काम कर रहे हैं और आतंकियों को अपने यहाँ छिपाकर रखा है।

उन्होंने कहा कि सैन्य प्रतिष्ठानों पर हमला करने वालों पर सैन्य अदालतों में मुकदमा चलाया जाएगा। उन्होंने कहा कि हिंसा में शामिल लोगों की पहचान कर ली गई है। सूचना मंत्री ने चेतावनी देने वाले लहजे में कहा, “सरकार के आदेश को चुनौती देने वालों को इस तरह दौड़ाया जाएगा कि वे ओलंपिक में भाग ले सकें।” इसके बाद इमरान खान ने कहा कि इसको लेकर गुरुवार (18 मई 2023) को नई योजना की घोषणा की जाएगी।

बतातेे चलें कि 9 मई 2023 को पाकिस्तान की नेशनल अकाउंटिबिलिटी ब्यूरो ने इमरान खान को इस्लामाबाद हाईकोर्ट से गिरफ्तार कर लिया था। इसके बाद PTI के समर्थकों ने देश भर में हंगामा किया था। कई जगहों पर सैन्य प्रतिष्ठानों को भी नुकसान पहुँचाया गया और सेना के अधिकारियों को कुछ समय के लिए बंधक बनाने की स्थिति हो गई थी।

‘बजरंग बली का नारा सांप्रदायिक कैसे?’: गोरक्षक मोहम्मद फैज खान ने न्यूज 24 के पत्रकार को धोया, ‘जय श्रीराम’ को आक्रामक बताने पर कहा – श्री मतलब नारी शक्ति

चुनाव नतीजों के बहाने मीडिया का एक धड़ा भाजपा के विरोध में माहौल बनाने का बीड़ा भी उठा कर चलता है। हाल ही में कर्नाटक में हुए विधानसभा चुनाव के नतीजों में कॉन्ग्रेस की जीत के बाद ‘News 24’ का एक पत्रकार भी ऐसा करते हुए धरा गया, लेकिन उसे करारा जवाब भी मिला। इसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। उक्त पत्रकार का नाम राजीव रंजन है, जो ‘माहौल क्या है’ शो को होस्ट करते हैं।

इस शो के दौरान वो जगह-जगह जाकर लोगों से बातचीत करते हैं। रविवार (14 मई, 2023) को वो दिल्ली के कनॉट प्लेस पर थे। इंट्रोडक्शन के दौरान ही उन्होंने भाजपा के खिलाफ बातें करनी शुरू कर दी। उन्होंने भाजपा नेताओं पर धर्म की राजनीति खेलने का आरोप मढ़ दिया। उन्होंने अंदाज़ा लगा लिया कि कर्नाटक में भाजपा की हार बता रही है कि देश का मूड बदल रहा है, लेकिन जब उन्होंने जनता से सवाल पूछना शुरू किया तो लोगों ने ही इसे नकार दिया।

एक व्यक्ति ने करारा जवाब देते हुए कहा कि पिछले साढ़े 9 वर्षों से देश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कामकाज पर भरोसा दिखा रहा है। उसने कहा कि लोकतंत्र है और हार-जीत चलता रहता है, कर्नाटक अगर भाजपा हारी है तो बाकी राज्य जीतेगी भी और 2024 लोकसभा चुनाव में जीत दर्ज कर नरेंद्र मोदी इसी तरह देश को नेतृत्व प्रदान करते रहेंगे। उसने इस बात को नकार दिया कि कर्नाटक से देश का भविष्य तय हो रहा है।

इसके बाद राजीव रंजन कहने लगे कि भाजपा ने पूरा जोर लगाते हुए ‘जय बजरंग बली’ का उद्घोष किया और टीपू सुल्तान के खिलाफ भी नफरत फैलाई, ऐसे में क्या ये न माना जाए कि नरेंद्र मोदी का करिश्मा कम हो रहा है। इस पर उक्त व्यक्ति ने कहा कि यहाँ चावल वाला उदाहरण नहीं चलता है कि एक चावल देख कर पता चल जाए कि सारा चावल पका है या नहीं। उसने कहा कि इसी तरह एक राज्य से पूरे देश का मूड नहीं बताया जा सकता।

उक्त व्यक्ति ने स्पष्ट किया कि भाजपा ‘सबका साथ, सबका विकास’ नारे पर विश्वास रखती है और ऐसा नहीं करती है कि किसी धर्म को प्रश्रय दिया जाए और किसी के खिलाफ घृणा फैलाई जाए। उसने कहा कि ‘जय बजरंग बली’ हो या ‘अल्लाहु अकबर’, ये सियासी नहीं बल्कि धार्मिक नारे हैं। इस पर ‘पत्रकार’ राजीव रंजन कहने लगे कि ‘जय श्रीराम’ में आक्रामकता है। इस पर उस व्यक्ति ने समझाया कि ‘श्री’ का अर्थ यहाँ लक्ष्मी से है।

उसने बताया कि ‘श्री’ नारी शक्ति का द्योतक है। इसके बाद ‘News 24’ का प्रोपेगंडाबाज पत्रकार कहने लगा कि ‘जय श्रीराम’ का नारा 90 के दशक में आया। फिर उस व्यक्ति ने पूछा कि फिर ‘श्री नारायण’ कब से है? पत्रकार को सबसे ज्यादा झटका तब लगा, जब उस व्यक्ति ने अपना नाम बताया। असल में उस व्यक्ति का नाम मोहम्मद फैज खान है। उसने स्पष्ट कहा कि वो गौसेवक हैं। उसने कहा कि नाम सुन कर आपको कुछ और लगा होगा, लेकिन उल्टा हो गया क्योंकि मैं निष्पक्ष बात करता हूँ।