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दरगाह के खादिम ने कान पकड़कर माँगी माफी, कहा- माफ कर दो, अब ऐसा नहीं होगा: त्रयम्बकेश्वर मंदिर में मुस्लिम भीड़ के साथ की थी घुसने की कोशिश

महाराष्ट्र के नासिक स्थित त्रयम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में 13 मई 2023 की रात मुस्लिमों की भीड़ दाखिल हो गई। कहा जा रहा है कि मुस्लिम गर्भगृह में शिवलिंग पर चादर चढ़ाना चाहते थे। बाद में मंदिर में प्रवेश करने वालों और अन्य स्थानीय मुसलमानों ने दावा किया कि पास स्थित सैय्यद गुलाम शाह वली बाबा दरगाह पर उर्स का कार्यक्रम था। इस सिलसिले में जुलूस निकाला गया था। जुलूस जब मंदिर के पास पहुँचा तो मुस्लिमों ने मंदिर की सीढ़ी से भगवान शिव को लोबान का धुआँ पेश किया। मुस्लिमों के अनुसार यह प्रथा सौ सालों से चली आ रही है। दरगाह के खादिम सलीम सैयद ने इस हरकत के लिए माफी माँगी है और कहा है कि सौ सालों से चली आ रही इस प्रथा को अब बंद कर देंगे।

सलीम सैयद उन चार आरोपितों में शामिल हैं जिनपर मंदिर प्रशासन की शिकायत पर एफआईआर दर्ज किया गया है। 16 मई 2023 को एबीपी माझा से बात करते हुए सलीम ने लोबान के धुएँ को त्र्यंबकेश्वर यानी भगवान शिव को चढ़ाने की कथित प्रथा के बारे में जानकारी दी। सलीम ने कहा, “दरगाह में सालाना उर्स के बाद जुलूस निकाला जाता है। जब जुलूस मंदिर के पास से गुजरता है, तो मैं वहाँ जाता हूँ और मंदिर की पहली सीढ़ी से भगवान त्र्यंबकेश्वर को लोबान की धूनी पेश करता हूँ।

सलीम ने आगे कहा, “हम (स्थानीय मुस्लिम) उन्हें त्र्यंबक राजा कहते हैं। वह इस स्थान के राजा हैं। यह मेरा विश्वास है कि उनकी वजह से हम यहाँ सुरक्षित और समृद्ध हैं। सीढ़ी पर खड़ा होने के बाद मैं ओम नमः शिवाय और हर हर महादेव का जाप करता हूँ। इस दौरान मेरे साथ दो-तीन लोग फूलों की टोकरी या अन्य चीजें अपने सिर पर रखे होते हैं। मैं अपने सिर पर चादर की टोकरी रखता हूँ।”

बातचीत के दौरान सलीम ने कहा, “मेरी उम्र 66 वर्ष है। मेरे वालिद का इंतकाल साल 1994 में हो गया था। तब से मैं इस अनुष्ठान का नेतृत्व करता हूँ। जब मैं दस साल का था तब से मुझे चीजें अच्छी तरह याद हैं। मुझे नहीं पता कि इस साल मंदिर के अधिकारियों ने हमारे खिलाफ शिकायत क्यों दर्ज की। अगर उन्हें लगता है कि ऐसा करके हमने गलती की है तो मैं माफी माँगता हूँ। मैं फिर कभी त्र्यंबकेश्वर राजा को लोबान का धुआँ नहीं चढ़ाऊँगा।” सलीम के अनुसार वे लोग कभी गर्भगृह में प्रवेश नहीं करते। लेकिन पहली सीढ़ी पर खड़े होते हैं। राजा त्र्यंबक को चादर नहीं चढ़ाया जाता। जुलूस पूरा कर उनके सम्मान में धुएँ की पेशकश करते हैं। सलीम के दादाजी भी ऐसा करते थे।

बता दें कि मुस्लिमों के जबरन त्रयम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में दाखिल होने की घटना से मंदिर प्रशासन समेत कई हिंदू संगठन नाराज हो गए। हिंदू महासंघ समेत कई संगठन के लोगों ने मंदिर पहुँचकर अपना विरोध जताया। कार्यकर्ताओं ने मंदिर के द्वार और परिसर का शुद्धिकरण किया और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की माँग की। स्थानीय हिंदुओं का कहना है कि वे लोग चादर दिखाने या धुआँ पेश करने जैसे रिवाजों की कोई जानकारी नहीं है। ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। बता दें इससे पहले त्रयम्बकेश्वर महादेव को दूर से चादर दिखाने की बात सामने आई थी। अब धूप धुआँ दिखाने की बात कही जा रही है। त्रयम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल है। सदियों से जारी परंपरा के अनुसार मंदिर में सिर्फ हिन्दुओं को ही प्रवेश देने की अनुमति रही है, जिनकी हिन्दू धर्म में आस्था नहीं है उनका मंदिर में प्रवेश वर्जित है।

जारी रहेगा जल्लीकट्टू: सुप्रीम कोर्ट ने बताया- तमिल सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा, कर्नाटक-महाराष्ट्र में भी गोवंश से जुड़े पारंपरिक खेलों की अनुमति

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) की संविधान पीठ ने गुरुवार (18 मई 2023) को तमिलनाडु द्वारा पशु क्रूरता निवारण अधिनियम में किए गए संशोधनों की वैधता को बरकरार रखा। इसके साथ ही सर्वोच्च न्यायालय ने कोर्ट ने कर्नाटक और महाराष्ट्र में कंबाला और बुल कार्ट रेसिंग की अनुमति देने वाले कानूनों को भी बरकरार रखा। इस तरह तमिलनाडु, कर्नाटक और महाराष्ट्र में जल्लीकट्टू (Jallikattu) और इससे जुड़े खेल को भी अनुमति दे दी गई।

जस्टिस केएम जोसेफ, जस्टिस अजय रस्तोगी, जस्टिस अनिरुद्ध बोस, जस्टिस हृषिकेश रॉय और जस्टिस सीटी रविकुमार की संविधान पीठ ने कहा कि गोवंश के दर्द और पीड़ा को कम करने और खेल को जारी रखने की अनुमति देने के लिए संशोधन पेश किए गए हैं। कोर्ट ने कहा कि जब विधायिका मान चुकी है कि जल्लीकट्टू तमिलनाडु की सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है तो न्यायपालिका इससे अलग दृष्टिकोण नहीं रख सकती है।

पीठ ने कहा, “राज्य की कार्रवाई में कोई दोष नहीं है… यह एक गोजातीय खेल है और नियमों के अनुसार भागीदारी की अनुमति दी जाएगी। अधिनियम संविधान के अनुच्छेद 48 से संबंधित नहीं है। कृषि गतिविधि को प्रभावित करने वाले कुछ प्रकार के सांडों पर आकस्मिक प्रभाव पड़ सकता है, लेकिन यह सारगर्भित रूप से भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची की प्रविष्टि 17, सूची III के संदर्भ में है।”

न्यायालय ने कहा कि राज्यों के ये कानून धारा 51ए(जी) और 51ए(एच) का उल्लंघन नहीं करते हैं और इस प्रकार ये भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का भी उल्लंघन नहीं करते हैं। कोर्ट ने कहा, “तीनों संशोधन अधिनियम वैध कानून हैं और हम निर्देश देते हैं कि सभी कानूनों को सख्ती से लागू किया जाए और डीएम एवं सक्षम अधिकारी संशोधित कानून के सख्त कार्यान्वयन के लिए जिम्मेदार होंगे।”

PETA एवं अन्य एनीमल राइट ग्रुप जैसे याचिकाकर्ताओं के वकील ने सर्वोच्च न्यायालय में तर्क दिया कि रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री से पता चलता है कि जल्लीकट्टू एक खूनी खेल है। तर्क दिया गया था कि अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) लागू होगा क्योंकि केवल कुछ खेलों को जानवरों के प्रति क्रूरता की अनुमति दी गई है।

इसके पहले, सुप्रीम कोर्ट ने साल 2014 में कहा था कि तमिलनाडु में लोकप्रिय जल्लीकट्टू खेल जानवरों के अधिकारों के साथ-साथ क्रूरता निवारण (पीसीए) अधिनियम का भी उल्लंघन करता है। सर्वोच्च न्यायालय ने साल 2014 में माना था कि जल्लीकट्टू तमिलनाडु की संस्कृति या परंपरा का कभी भी नहीं रही है। इस आधार पर जल्लीकट्टू को अनुमति देने वाले 2009 के तमिलनाडु जल्लीकट्टू विनियमन अधिनियम (टीएनजेआर अधिनियम) को रद्द कर दिया था।

दक्षिण के राज्यों में जल्लीकट्टू के प्रति लोगों के जुड़ाव को देखते हुए केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने जनवरी 2016 में पीसीए अधिनियम के दायरे से जल्लीकट्टू और बैलगाड़ी दौड़ को अपवाद के रूप में शामिल करते हुए एक नई अधिसूचना जारी की थी। इसके तहत इन खेलों को पशु क्रूरता अधिनियम के दायरे से बाहर कर दिया गया था। इसके बाद उस अधिसूचना को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई।

बाद में तमिलनाडु सरकार ने साल 2017 के पशुओं के प्रति क्रूरता की रोकथाम (तमिलनाडु संशोधन) अधिनियम बनाया। इसके जरिए जल्लीकटू जैसे सांडों को काबू में करने वाले खेलों और सांडों के दौड़ के लिए मार्ग प्रशस्त करने का काम किया गया था।

मोदी कैबिनेट में बदले विभाग: साइकिल से संसद आने वाले अर्जुन राम मेघवाल अब कानून मंत्री, किरेन रिजिजू देखेंगे भूविज्ञान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने गुरुवार (18 मई 2023) को अपनी कैबिनेट में बड़ा फेरबदल किया। कानून मंत्रालय सँभाल रहे किरेन रिजिजू (Kiren Rijiju) को हटा दिया गया है। रिजिजू की जगह अब अर्जुन राम मेघवाल को कानून मंत्रालय का प्रभार सौंपा गया है। वहीं, रिजिजू को भू-विज्ञान मंत्रालय सौंपा गया है।

इस संबंध में राष्ट्रपति कार्यालय से विज्ञप्ति जारी की गई है। विज्ञप्ति में कहा गया है कि प्रधानमंत्री की सलाह पर राष्ट्रपति ने यह फैसला लिया है। अर्जुन राम मेघवाल अपने वर्तमान पोर्टफोलियो के अलावा, कानून मंत्रालय के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) होंगे।

दरअसल, किरेन रिजिजू से पहले रविशंकर प्रसाद कानून मंत्री थे। जुलाई 2021 में रविशंकर प्रसाद से कानून मंत्रालय लेकर रिजिजू को सौंपा गया था। कानून एवं न्याय मंत्री के रूप में किरेन रिजिजू न्यायपालिका में कॉलेजियम सिस्टम के सख्त विरोधी थे। जजों की नियुक्ति को लेकर कई बार कानून मंत्रालय और सुप्रीम कोर्ट आमने-सामने आ गया था।

किरेन रिजिजू ने यहाँ तक कहा था कि देश में कोई किसी को चेतावनी नहीं दे सकता है। देश में सभी लोग संविधान के हिसाब से काम करते हैं। उन्होंने यहाँ तक कह दिया था कि मंत्रियों को चुनाव लड़ना पड़ता है, लेकिन जजों को चुनाव नहीं लड़ना पड़ता। बता दें कि साल 2015 में मोदी सरकार जजों की नियुक्ति के लिए नेशनल ज्यूडिशियल अपॉइंटमेंट कमीशन एक्ट (NJAC) लाई थी। हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट ने इसे अवैध बताकर खारिज कर दिया था।

कैबिनेट में इस बदलाव के बाद किरेन रिजिजू ने ट्वीट कर अपनी प्रतिक्रिया दी है। रिजिजू ने कहा, “माननीय पीएम मोदी के मार्गदर्शन में केंद्रीय कानून और न्याय मंत्री के रूप में सेवा करना सौभाग्य की बात रहा। मैं सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़, सुप्रीम कोर्ट के जजों, हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस और सभी लॉ अधिकारियों को हमारे नागरिकों के लिए कानूनी सेवाएँ प्रदान करने में भारी समर्थन के लिए धन्यवाद देता हूँ।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद देते हुए किरेन रिजिजू ने अपने ट्वीट में आगे कहा, “मैं पीएम मोदी के दृष्टिकोण को पूरा करने के लिए तत्पर हूँ। एक बीजेपी कार्यकर्ता के रूप में मैंने जिस उत्साह और जोश के साथ काम किया था, वैसे ही भू विज्ञान मंत्रालय में जिम्मादारी सँभालूँगा।” 

19 नवंबर, 1971 को अरुणाचल प्रदेश के वेस्ट कामेंग जिले में जन्मे किरेन रिजिजू अरुणाचल पश्चिम लोकसभा क्षेत्र से भाजपा के सांसद हैं। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से कानून की डिग्री भी ली है। साल 2004 में उन्होंने पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ा और जीत हासिल की थी।

हालाँकि, साल 2009 के लोकसभा चुनाव में वे हार गए, लेकिन साल 2014 के चुनाव में जीत हासिल करने के बाद पीएम मोदी के मंत्रिमंडल में उन्हें गृह राज्यमंत्री बनाया गया। साल 2019 में उन्हें खेल मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया गया था। उसके बाद जुलाई 2021 के कैबिनेट विस्तार में उन्हें कानून मंत्री बनाया गया था। 

वहीं, अर्जुन राम मेघवाल राजस्थान से आते हैं और भाजपा के बड़े दलित चेहरों में से एक हैं। वे 2009 से राजस्थान के बीकानेर से सांसद हैं। साल 2013 में उन्हें सर्वश्रेष्ठ सांसद के पुरस्कार से नवाजा गया था। मई 2019 में मेघवाल संसदीय मामलों और भारी उद्योग एवं सार्वजनिक उद्यम राज्यमंत्री बने थे। 

अर्जुन राम मेघवाल का जन्म बीकानेर के किस्मिदेसर गाँव में हुआ। उन्होंने बीकानेर के डूंगर कॉलेज से स्नातक और एलएलबी की। इसके बाद उन्होंने इसी कॉलेज से मास्टर्स डिग्री (M.A) की। इसके बाद वे फिलीपींस विश्वविद्यालय से एमबीए भी किया। वे राजस्थान कैडर के आईएएस अधिकारी रहे हैं और अक्सर साइकिल पर चलते देखे जाते हैं।

26/11 के आरोपित तहव्वुर राणा को भारत लाने का रास्ता साफ: प्रत्यर्पण पर अमेरिकी अदालत की मुहर, भारतीय एजेंसियों पर जताया भरोसा

साल 2008 में हुए मुंबई आतंकी हमले के आरोपितों में से एक तहव्वुर राणा के भारत प्रत्यर्पण का रास्ता साफ हो चुका है। अमेरिका के कैलिफोनर्निया की अदालत ने उसके प्रत्यर्पण को मंजूरी दे दी है। मुंबई 26/11 हमलों में पाकिस्तानी मूल के कनाडाई नागरिक तहव्वुर की भूमिका सामने आने के बाद भारत ने उसके प्रत्यर्पण की माँग की थी। अमेरिका के बाइडन सरकार ने तहव्वुर के भारत प्रत्यर्पण का समर्थन किया था।

कैलिफोर्निया की मजिस्ट्रेट जज जैकलीन चूलजियान ने मंगलवार (16 मई 2023) को 48 पन्नों का आदेश दिया। इसमें कहा गया कि दस्तावेजों की समीक्षा करने और दी गई दलीलों को सुनने के बाद अदालत तहव्वुर राणा को भारत प्रत्यर्पण के योग्य समझती है। अब NIA अमेरिकी सरकार से संपर्क करेगी और तहव्वुर को भारत लाए जाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

बता दें कि मुंबई के आंतकी हमले को पाकिस्तानी आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा ने अंजाम दिया था। इस हमले का मास्टरमाइंड आतंकी डेविड हेडली था। तहव्वुर राणा, हेडली के बचपन का दोस्त है। मुंबई हमलों में उसने लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों और हेडली को मदद दी थी। उसे हमले के हर साजिश की जानकारी थी। उसी सिलसिले में नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) तहव्वुर की भूमिका को लेकर पड़ताल कर रही है।

अमेरिकी कोर्ट द्वारा तहव्वुर के प्रत्यर्पण के पक्ष में फैसला दिए जाने के बाद मुंबई 26/11 आतंकी महले के पब्लिक प्रॉसिक्यूटर उज्ज्वल निकम ने इसे भारत की बड़ी जीत करार दिया है। उन्होंने न्यूज एजेंसी एएनआई से कहा है कि यह पहली बार है जब अमेरिकी सरकार ने भारतीय जाँच एजेंसी के सबूतों पर भरोसा किया है। बता दें तहव्वुर के वकील ने इस प्रत्यर्पण का विरोध किया था।

बता दें कि 26 नवंबर 2023 को मुंबई में हुए आतंकी हमले में 6 अमेरिकी नागरिक समेत 166 लोग मारे गए थे। इन हमलों में अजमल कसाब नाम का आतंकवादी जीवित पकड़ा गया था, जिसे 21 नवंबर 2012 को फाँसी दे दी गई थी। बाकी आतंकवादियों को भारतीय सुरक्षाबलों ने हमले के दौरान ही ढेर कर दिया था।

बम गिर रहे थे, लूट रही थी सूडान की मिलिट्री, फिर भी हमवतनों को नहीं छोड़ा: फैक्ट्री का डीजल दे सबके साथ भारत आए संतोष जैन

अफ्रीकी देश सूडान (Sudan) में गृहयुद्ध छिड़ा हुआ है। मारकाट मची हुई है। खाने-पीने तक की किल्लत है। ऑपरेशन कावेरी (Operation Kaveri) के जरिए मोदी सरकार ने वहाँ फँसे भारतीयों का रेस्क्यू किया है। घर लौटने वालों में एक संतोष जैन भी हैं जो अभी दिल्ली से सटे फरीदाबाद में रहते हैं।

सूडान के हालात, वहाँ से भारतीयों को निकाले जाने के अभियान संतोष जैन ने दैनिक भास्कर के नीरज झा से विस्तार से बातचीत की है। उन्होंने बताया है कि कैसे उनकी कंपनी में घुसकर सूडान की मिलिट्री ने लूट मचाई। कैसे घरों पर बम गिर रहे थे। कैसे उन्होंने कंपनी में काम करने वाले भारतीयों के बिना सूडान नहीं छोड़ा। कैसे रेस्क्यू अभियान के दौरान डीजल की कमी होने पर अपनी कंपनी का डीजल तक दे दिया।

संतोष जैन अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ सूडान में रहते थे। स्टील की बर्तन बनाने वाली एक भारतीय कंपनी में फाइनेंस हेड थे। इस कंपनी में 162 लोग काम करते थे। ज्यादातर भारतीय थे। उन्होंने दैनिक भास्कर को बताया, “वर्कर्स को न ठीक से इंग्लिश आती थी। न ही वहाँ की स्थानीय भाषा। मैंने सोचा जाएँगे तो साथ में ही। एक रोज देर रात इंडियन एम्बेसी का कॉल आया कि सुबह के तीन बजे गाड़ियाँ आ जाएँगी, लेकिन हमारे पास ऑयल नहीं है। हमारी फैक्ट्री के टैंक में डीजल भरा हुआ था। मैंने बिना कुछ सोचे-समझे कहा- मेरे पास तेल है। आप बस गाड़ी भेज दीजिए। गाड़ी सुबह 8 बजे आई। हम लोग बस से करीब 12 घंटे की दूरी तय करके पोर्ट सूडान पहुँचे और फिर भारत…।”

पर ये सफर इतना भी आसान नहीं था। खौफ को समझना है तो संतोष की पत्नी ज्योति के इस बयान से समझिए। वे कहती हैं, “जो हालात थे, हमें भारत लौटने की उम्मीद नहीं थी। अपनी छोटी बहन से आखिरी बातचीत में मैंने कहा था यदि दो-तीन दिन फोन न करूँ तो समझना बिजली नहीं है। यदि उससे ज्यादा दिन हो जाए तो समझना अब हम जिंदा नहीं हैं।” वे कहती हैं, “मार्केट में कुछ नहीं था। जो कुछ घर में स्टोर था उससे ही हमारा खाना-पीना हो रहा था। करीब एक सप्ताह तक हम चावल-दाल ही खाते रहे थे। बिजली नहीं थी और गर्मी ऐसी मानो हम उबल जाएँगे। मेरी बेटी कहती थी बिना बिजली के मर जाऊँगी, या बम-गोली से। घुट-घुटकर मरने से अच्छा है कि एक बार में मर जाऊँ।”

जैन परिवार के लिए त्रासदी का ये सिलसिला 15 अप्रैल 2023 को शुरू हुआ था। संतोष फैक्ट्री जा चुके थे। बच्चे स्कूल। वे कहते हैं, “उस दिन भी हमेशा की तरह हमारा सामान्य रूटीन ही था। मैं ऑफिस में काम कर रहा था अचानक बम-बारूद के गिरने की आवाज आने लगी। बाहर फायरिंग हो रही थी। सड़को और गलियों में टैंक दिख रहे थे। फैक्ट्री के सारे वर्कर लाइट बंदकर छिप गए। घंटों फायरिंग चलती रही। सामने की एक बिल्डिंग पर बम गिरा और वह ध्वस्त हो गई। इस बीच सूडान की मिलिट्री उनके फैक्ट्री में घुस गई। मोबाइल,पैसा सब कुछ छीनकर ले गई। उनके जाने के बाद भी करीब 24 घंटे तक वे लोग फैक्ट्री में ही कैद रहे।”

इधर संतोष फैक्ट्री में फँसे थे। उधर उनके बच्चे स्कूल में। एक टीचर उनके दोनों बच्चों को अपने साथ ले गए। अगले दिन फिर वे अपने बच्चे को घर लाए। अब संतोष नए सिरे से अपनी गृहस्थी बसाने के प्रयास में हैं। बच्चों का फरीदाबाद के ही एक स्कूल में दाखिला कराया है। वे कहते हैं, “सूडान की मिलिट्री और पारा मिलिट्री की चेंकिग से बच-बचकर हम पोर्ट सूडान पहुँचे। मात्र दो जोड़ी कपड़े लेकर आए हैं। सब कुछ खत्म हो गया है। 10 साल में जो कुछ भी हमने सूडान में बनाया घर-परिवार, दोस्त-रिश्तेदार… सब खत्म हो गया है।” पर उम्मीद का ही नाम जिंदगी है। संतोष और उनकी पत्नी ने एक स्टार्टअप शुरू किया है।

बुर्के में रखा, 1 महीने तक करता रहा रेप, नमाज पढ़ने का दबाव: बंधक रही महिला ने बताया अभय मिश्रा बने आरिफ खान की दरिंदगी

उत्तर प्रदेश की एक विवाहिता को हरियाणा के अंबाला में करीब एक महीने तक बंधक बनाकर रखा गया। उसके साथ रेप किया गया। बुर्का पहनने को मजबूर किया गया। नमाज पढ़ने का दबाव डाला गया। किसी तरह भागने में कामयाब रही पीड़िता ने मंगलवार (16 मई 2023) को मिर्जापुर पुलिस में आरिफ खान के खिलाफ शिकायत दी।

उसने बताया है कि आरिफ खान ने अभय मिश्रा बनकर उससे जान पहचान की थी। अंबाला ले जाकर उसने रेप कर अश्लील वीडियो बनाया। फिर ब्लैकमेल कर महीने भर उसके साथ दुष्कर्म किया। आरिफ खान पर पीड़ित महिला और उसके पति को धमकी देने का भी आरोप है।

आरिफ भी मिर्जापुर के पड़री थना इलाके का रहने वाला बताया जा रहा है। वह अंबाला में रहता है। पीड़िता और उसके पति ने पुलिस अधीक्षक संतोष मिश्रा से मुलाकात कर जान बचाने की गुहार लगाई। एसपी को दी गई शिकायत में पति ने कहा है कि अभय मिश्रा बनकर आरिफ उसकी पत्नी से बात करता था। अब उसे और उसकी पत्नी को जान से मारने की धमकी दे रहा है।

क्या है पूरा मामला?

जानकारी के अनुसार अप्रैल 2023 में महिला के नंबर पर एक अंजान शख्स का फोन आया। इसके दोनों के बीच बातचीत का सिलसिला शुरू हुआ। शख्स ने महिला को अपना नाम अभय मिश्रा बताया। दोनों के बीच दोस्ती हो गई। इसके बाद महिला अपने मायके पहुँची। अभय बना आरिफ भी मिर्जापुर आ गया। एक दिन महिला को लेकर अंबाला चला गया। अंबाला जाने के बााद महिला को उसके असली नाम आरिफ खान का पता चला। सच्चाई पता चलने के बाद आरिफ महिला को डराने धमकाने लगा। उसने महिला के साथ रेप कर अश्लील वीडियो बना लिए।

अश्लील वीडियो वायरल करने की धमकी देकर वह महीने भर तक बलात्कार करता रहा। वह महिला को बुर्का पहनाकर रखता था। जबरन नमाज पढ़वाना चाहता था। इस बीच पीड़िता मौका देखकर अंबाला से भाग निकली और अपने पति के पास मिर्जापुर पहुँच गई। इसके बाद भी अब आरिफ कथित तौर पर महिला के पति को गाँव में आकर गोली मारने की धमकी दे रहा है। वह विवाहिता का अश्लील वीडियो वायरल करने और जबरन अपने साथ ले जाने की धमकी दे रहा है। पुलिस मामले की जाँच कर रही है।

‘मुस्लिम होने के कारण पाकिस्तान चुना, पर यह दादा-दादी की सबसे बड़ी गलती’: अली ने तिरंगा लहराकर साझा किया दर्द

पाकिस्तान के सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर मोहम्मद शायन अली (Shayan Ali) को अपना मुल्क छोड़ना पड़ा है। पाकिस्तान की कुख्यात खुफिया एजेंसी ISI के इशारों पर नाचने से इनकार करने के बाद उन्हें अपनी हत्या का डर सता रहा था। सोशल मीडिया के जरिए वे लगातार अपना दर्द साझा कर रहे हैं। ऐसे ही एक पोस्ट में उन्होंने कहा है उनके दादा-दादी ने भारत की जगह पाकिस्तान को चुनकर सबसे बड़ी गलती की थी।

शायन ने ट्विटर लिखा है, “दुनिया में ‘पाकिस्तान’ जैसी कोई चीज ही नहीं है। पाकिस्तान की स्‍थापना मजहब के आधार पर की गई थी न कि इसलिए कि दुनिया को इसकी जरूरत थी। मेरे दादा-दादी ने भारत के बजाय पाकिस्तान को सिर्फ इसलिए चुना क्योंकि वे मुसलमान थे। पाकिस्तान जाना मेरे दादा-दादी की सबसे बड़ी गलती थी।”

इस पोस्ट के साथ शायन ने तिरंगे के साथ अपनी तस्वीर भी साझा की है। लिखा है, “यदि मैं पाकिस्तान के बजाय भारत में होता तो मुझे सुरक्षा मसलों की वजह से अपना देश नहीं छोड़ना पड़ता। मुसलमान और हिंदू कभी दुश्मन नहीं थे। कुछ असामाजिक लोग थे जो इन दोनों समुदायों को अलग करना चाहते थे। कुछ बाहरी ताकतें ‘अखंड भारत’ को देखकर डर गईं। दुर्भाग्य से, वे एक सुंदर और शायद सबसे शक्तिशाली राष्ट्र को विभाजित करने में सफल भी रहीं।”

शायन ने देश के तौर पर भी पाकिस्तान के अस्तित्व को खारिज कर दिया है। कहा है कि एक देश की अपनी संस्कृति होती है। लेकिन 1947 में विभाजन के बाद पाकिस्‍तान की पूरी संस्‍कृति सिर्फ भारतीय संस्कृति की नकल थी। जिन्होंने जमीन के टुकड़े किए उनमें अपनी संस्कृति का निर्माण की काबिलियत नहीं थी। वे सिर्फ हिंदुओं और मुस्लिमों के बीच द्वेष फैलाना चाहते थे।

शायन अली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फैन हैं। हनुमान चालीसा भी उन्हें कंठस्थ है। इससे पहले उन्होंने ट्विटर पर ‘पाकिस्तान छोड़ने की मेरी कहानी’ शीर्षक से एक पोस्ट साझा कर अपनी आपबीती बताई थी। इसमें उन्होंने कहा था, “मैंने पाक आर्मी के पीआर विंग के कश्मीर से संबंधित एक म्यूजिक वीडियो (भारत के खिलाफ नफरत वाला) में जब काम करने से मना कर दिया तो उन्होंने मुझ पर मेरे सुनहरे बालों के कारण भारत की खुफिया एजेंसी रॉ का जासूस और यहूदी एजेंट होने का आरोप लगाया। मैं भाग्यशाली था कि मैंने पाकिस्तान को सुरक्षित छोड़ दिया, लेकिन फिर भी आतंकवादी इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) के खिलाफ मेरा संघर्ष कभी समाप्त नहीं हुआ।”

दादा जी ने वाट लगा दी

पाकिस्तान चुनने के अपने पुरखों के फैसले पर अफसोस जताने वाला शायन अली अकेले नहीं हैं। हाल ही में पाकिस्तानी पत्रकार आरजू काजमी (Arzoo Kazmi) ने भारत छोड़ पाकिस्तान में बसने के पूर्वजों के फैसले पर अफसोस जताते हुए कहा था कि दादा जी ने वाट लगा दी। अपने ट्वीट में काजमी ने कहा था, “मेरे भाइयों और परिवार के अन्य सदस्यों को लगता है कि उनका पाकिस्तान में कोई भविष्य नहीं है। मेरे दादाजी और उनका परिवार बेहतर भविष्य के लिए प्रयागराज और दिल्ली से पाकिस्तान चला आया था। वाट लगा दी दादा जी।”

कर्नाटक में 20 मई को शपथ ग्रहण: सिद्धारमैया होंगे मुख्यमंत्री, डीके शिवकुमार डिप्टी CM

सिद्धारमैया (Siddaramaiah) कर्नाटक के अगले मुख्यमंत्री (Karnataka CM) होंगे। डीके शिवकुमार (DK Shivakumar) डिप्टी सीएम की भूमिका में होंगे। 20 मई को बेंगलुरु में शपथ ग्रहण समारोह होगा। लगातार बैठकों के बाद बुधवार (18 मई 2023) कॉन्ग्रेस यह फैसला लेने में सफल रही। 224 सदस्यीय कर्नाटक विधानसभा चुनाव के नतीजे 13 मई को आए थे। कॉन्ग्रेस को 135 सीटों पर जीत मिली है।

वैसे सीएम की रेस में शिवकुमार के पिछड़ने के संकेत बुधवार दिन से ही मिलने लगे थे। एक तरफ शिवकुमार के क्षेत्र में उनके समर्थन प्रदर्शन शुरू हो गए, दूसरी तरफ सिद्धारमैया के समर्थक जश्न मनाने लग गए थे। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार गुरुवार (18 मई 2023) को कर्नाटक कॉन्ग्रेस विधायक दल की बैठक बुलाई गई है। बैठक शाम 7 बजे बेंगलुरु में होगी। सिद्धारमैया को इस बैठक में विधायक दल का नेता चुना जाएगा।

कहा जा रहा है कि मंत्रिमंडल की रूपरेखा भी तैयार कर ली गई है। इस पर सिद्धारमैया और शिवकुमार दोनों तैयार हैं। रिपोर्टों में दावा किया जा रहा है कि कर्नाटक में सीएम पद को लेकर आम सहमति बनाने के लिए मल्लिकार्जुन खड़गे बुधवार देर रात तक कोशिश करते रहे। इसके पहले कॉन्ग्रेस में बुधवार पूरे दिन कर्नाटक सीएम पद को लेकर बैठकें होती रही। सिद्धारमैया और शिवकुमार को ढाई-ढाई साल मुख्यमंत्री बनाने पर चर्चा हुई थी। डीके शिवकुमार चाहते थे कि पहला कार्यकाल उन्हें दिया जाए। रिपोर्टों के अनुसार बैठक में उन्होंने कहा था, “मुझे पहला कार्यकाल मिले अन्यथा कुछ नहीं मिले। हर हाल में मैं चुप रहूँगा।” दिन में हुई बैठक में डीके शिवकुमार ने डिप्टी सीएम पद का ऑफर ठुकरा दिया था।

देर रात तक चली पार्टी हाईकमान के साथ बैठक में डीके शिवकुमार को मना लिया गया। खबरों के अनुसार शपथ ग्रहण समारोह के लिए बेंगलुरु के कांतिरावा स्टेडियम में तैयारी चल रही है। सिद्धारमैया दूसरी बार कर्नाटक के सीएम बनेंगे। इसके पहले वे 2013 से 2018 तक राज्य के मुख्यमंत्री रह चुके हैं।

साधु की वेशभूषा, बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम पर आपत्तिजनक टिप्पणी: वीडियो वायरल होने के बाद उत्तराखंड पुलिस ने दर्ज किया मामला

उत्तराखंड पुलिस ने बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम के विषय में अभद्र और भ्रामक टिप्पणी करने को लेकर एक तथाकथित साधु के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। सोशल मीडिया पर तथाकथित साधु का वीडियो वायरल होने के बाद चमोली पुलिस ने यह कार्रवाई की है। इस संबंध में उत्तराखंड पुलिस की तरफ से सोशल मीडिया पर जानकारी साझा की गई है।

यूट्यूब रोहित पहाड़ी ने अपने यूट्यूब चैनल रोहित पहाड़ी वीलॉग (Rohit Pahadi Vlog) पर उत्तराखंज के माणा इलाके में एक साधु से बातचीत का वीडियो अपलोड किया था। यह तथाकथित साधु भगवान बद्रीनाथ और केदारनाथ के बारे में भ्रामक टिप्पणी कर रहा था। शख्स ब्रदीनाथ और केदारनाथ के नाम का उच्चारण भी गलत कर रहा था। ऐसे में वीलॉगर उस साधु से उलझ पड़ता है। साधु की पहचान शानन्तु विश्वास के तौर पर हुई है।

वीडियो वायरल होने के बाद नेटिजन्स में नाराजगी है। नेटिजन्स ने साधु का भेष धरे इस शख्स को मौलवी करार देते हुए इसके खिलाफ सख्त एक्शन की माँग की। बदरीनाथ में निवास कर रहे स्वामी अदृश्यानंद ने धार्मिक टिप्पणी करने वाले साधु के खिलाफ बदरीनाथ कोतवाली में तहरीर दी। इसके बाद कोतवाली पुलिस ने संबंधित साधु के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया।

उत्तराखंड पुलिस ने इस संबंध में ट्वीट कर जानकारी दी। उत्तराखंड पुलिस द्वारा ट्विटर पर लिखा गया, “सोशल मीडिया पर श्री बद्रीनाथ व श्री केदारनाथ धाम के विषय में तथाकथित साधु द्वारा अभद्र टिप्पणी करने विषयक प्रसारित वीडियो का संज्ञान लेते हुए चमोली पुलिस द्वारा इस संबंध में कोतवाली श्री बद्रीनाथ में शानन्तु विश्वास के विरुद्ध अभियोग पंजीकृत कर वैधानिक कार्यवाही की जा रही है।” साधु ने बद्रीनाथ धाम को बदरुद्दीन और केदारनाथ धाम को केदारुद्दीन बताते हुए कहा था कि वहाँ नमाज होता था।

यूट्यूबर रोहित पहाड़ी ने विवादित वीडियो को अपलोड करने को लेकर माफी माँगी है। रोहित पहाड़ी ने अपने यूट्यूब और फेसबुक चैनल से विवादित वीडियो को हटा दिया है। उन्होंने लोगों से भी अपील की है कि उस वीडियो को प्रसारित न करे। चमोली पुलिस ने भी लोगों से वीडियो को शेयर न करने की अपील की है। फिलहाल आरोपित साधु शानन्तु विश्वास की तलाश की जा रही है।

कभी निकाह, तलाक और दूसरी शादी, अब शरणार्थी हिन्दुओं का घर ध्वस्त करने का आदेश… IAS टीना डाबी फिर सुर्ख़ियों में, पति भी फँसे थे रिश्वत केस में

मंगलवार (16 मई, 2023) को राजस्थान के जैसलमेर में प्रशासन ने पाकिस्तानी हिंदू शरणार्थियों के घरों को गिरा दिया है। कहा जा रहा है कि जैसलमेर की कलेक्टर टीना डाबी के आदेश पर ही पाकिस्तानी हिंदुओं के घरों को तोड़ा गया है। इसके बाद से ही टीना डाबी चर्चा में हैं। सोशल मीडिया पर भी वे ट्रेंड कर रही हैं। यह पहली बार नहीं है जब टीना डाबी सुर्खियों में हैं इसके पहले भी अपनी निकाह और शादी को लेकर उन्होंने खूब सुर्खियाँ बटोरी हैं।

टीना डाबी ने पहले तो अपनी पहचान 2015 बैच की आईएएस टॉपर के रूप में बनाई। आईएएस टॉप करने के बाद उनकी जमकर तारीफ हुई। कई लड़कियों ने उन्हें अपना रोल मॉडल माना। उसके बाद डाबी तब चर्चा में आई जब उन्होंने अपने ही बैच के आईएएस अतहर आमिर खान से निकाह किया। मार्च 2018 में आईएएस टीना डाबी ने जम्मू-कश्मीर के आईएएस अतहर आमिर खान से निकाह किया था।

टीना और अतहर का रिश्ता मसूरी स्थित ‘लाल बहादुर शास्त्री अकादमी फॉर एडमिनिस्ट्रेशन’ से शुरू हुआ था। दोनों के प्यार और फिर शादी में बदलने की चर्चा पूरे देश में हुई थी। कॉन्ग्रेस एमपी राहुल गाँधी समेत कई राजनेताओं और पत्रकारों ने इस निकाह का खूब डंका बजाया था और इसे ‘सेक्युलर इंडिया की पहचान’ से लेकर सांप्रदायिक सद्भाव का प्रतीक तक बताया था। राहुल गाँधी ने दोनों को बधाई देते हुए यहाँ तक कामना की थी कि ‘असहिष्णुता और सांप्रदायिक घृणा के इस बढ़ते दौर में’ इन दोनों का प्यार और परवान चढ़े और सभी भारतीयों के लिए प्रेरणा बने। शादी के बाद टीना डाबी ने अपने सरनेम के आगे खान लगा लिया था।

नवंबर 2020 आते-आते दोनों ने अपनी मर्जी से तलाक की अर्जी दाखिल कर दी, जिसे अगस्त 2021 में मंजूर कर लिया गया। इस तरह सांप्रदायिक एकता की मिसाल बनी शादी अधिक समय तक नहीं टिक सकी। तलाक की अर्जी से कुछ समय पहले टीना ने सोशल मीडिया अकाउंट में अपने नाम से खान सरनेम हटा दिया था। तलाक के बाद अतहर कैडर बदलकर अपने गृह राज्य जम्मू कश्मीर वापस लौट गए थे।

अप्रैल 2022 में टीना ने अपने से 13 साल बड़े आईएएस अफसर प्रदीप गवांडे से शादी का फैसला कर सबको चौंका दिया। तलाक के साल भर बाद ही टीना ने दूसरी शादी कर ली। इस शादी को लेकर टीना ने मीडिया से कहा था कि कोविड के समय में दोनों नजदीक आए थे। एक दूसरे को जानने के बाद जब प्रदीप ने टीना के सामने शादी का प्रस्ताव रखा तो उन्होंने इसे स्वीकार कर लिया। यह प्रदीप गवांडे की भी दूसरी शादी थी। RSLDC में MD रहते हुए गावंडे का नाम रिश्वत केस में भी आया था।

जुलाई 2022 में राज्य सरकार ने 29 आईएएस के तबादले किए। टीना डाबी और उनके पति प्रदीप गवांडे का नाम भी इस लिस्ट में शामिल था। आईएएस अफसर टीना डाबी को जैसलमेर जिला कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट बनाया गया तो उनके पति आईएएस अफसर डॉ. प्रदीप गवांडे को उदयपुर भेजा गया है। गवांडे को राजस्थान राज्य खान एवं खनिज निगम लिमेटड का प्रबंध निदेशक और पेट्रोलियम का निदेशक बना दिया गया।