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अयोध्या राम मंदिर में लगेंगी 3600 मूर्तियाँ, पत्थरों पर आकार दे रहे मूर्तिकार: शास्त्रों के आधार पर हो रहा निर्माण, देखिए तस्वीरें

अयोध्या में भगवान राम का भव्य मंदिर आकार ले रहा है। जनवरी 2024 में रामलला गर्भगृह में विराजमान हो जाएँगे। अब यह जानकारी सामने आई है कि मंदिर परिसर में 3600 अन्य मूर्तियाँ भी लगाई जाएँगी। इनका निर्माण शास्त्रों के आधार पर हो रहा है।

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट (Ram Janmbhumi Teerth Kshetra Trust) ने ऐसी ही कुछ मूर्तियों के निर्माण की तस्वीरें ट्वीट की है। साथ ही बताया है, “श्री राम जन्मभूमि मंदिर में स्तंभों, पीठिका तथा अन्य स्थानों पर सज्जित होने के लिए शास्त्रीय ग्रंथों में वर्णित कथाओं के आधार पर सुंदर मूर्तियों का निर्माण किया जा रहा है। इन मूर्तियों को निर्माण प्रक्रिया की सारिणी के अनुसार निर्दिष्ट स्थानों पर प्रस्थापित किया जाएगा।” मीडिया रिपोर्टों के अनुसार ऐसी 3600 मूर्तियाँ मंदिर में स्थापित की जाएँगी।

मीडिया रिपोर्ट में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि राम मंदिर 2023 के अंत तक आंशिक रूप से तैयार हो जाएगा। मंदिर का गर्भगृह दिसंबर 2023 तक बनकर तैयार हो जाएगा। रामलला की मूर्ति 51 इंच की होगी, जिसे गर्भगृह में बने चबूतरे पर स्थापित किया जाएगा। जनवरी 2024 में मकर संक्रांति के बाद भक्त गर्भगृह में राम लला के दर्शन कर पाएँगे।

पिछले दिनों यह भी खबर आई थी कि धर्मनगरी अयोध्या को उत्तर प्रदेश पर्यटन स्थल के तौर पर विकसित करने की भी योजना बना रही है। राम मंदिर से लगभग एक किलोमीटर की दूरी पर टेंट सिटी बनाने का फैसला किया है। इनमें अगले साल के अंत से ठहरा जा सकता है। अयोध्या आने वाले पर्यटकों के लिए 15,000 वर्गमीटर के दायरे में बनाया जा रहा टेंट सिटी यह अयोध्या में आने वाले कई नए होटलों की योजना का हिस्सा है। इनमेें प्रमुख पाँच सितारा होटल भी शामिल हैं।

इस साल का 28 मई खास: वीर सावरकर की होगी जयंती, राष्ट्र को नया संसद भवन समर्पित करेंगे PM मोदी; जानिए इसके बारे में सब कुछ

भारत की संसद (Parliament) के नवनिर्मित भवन का लोकार्पण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) 28 मई 2023 को करेंगे। इसी दिन वीर सावरकर के विख्यात विनायक दामोदर सावरकर (Vinayak Damodar Savarkar) की जयंती भी है। सावरकर का जन्म 28 मई 1883 को हुआ था और इस साल 28 मई को उनकी 140वीं जयंती है।

गुरुवार (18 मई 20223) को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला (Om Birla) ने PM मोदी से मुलाकात की थी। इस मुलाकात के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री को भवन के उद्घाटन के लिए आमंत्रित किया था। लोकसभा सचिवालय ने नए संसद भवन को आत्मनिर्भर भारत की एक नई पहचान बताया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों ने 5 अगस्त 2019 में संसद के नए भवन की माँग रखी थी। इसके बाद नए संसद भवन का शिलान्यास पीएम मोदी द्वारा 10 दिसंबर 2020 को किया गया था। यह भवन 4 मंजिला है, जिसमें 1224 सांसदों के बैठने की व्यवस्था है। वर्तमान भवन में लोकसभा में 550 और राज्यसभा में 250 सदस्यों के बैठने की व्यवस्था है।

नया संसद भवन पुरानी बिल्डिंग से 17,000 वर्गमीटर बड़ा है। इस भवन में लोकसभा के 888 और राज्यसभा के 384 सदस्यों के बैठने की व्यवस्था है। लोकसभा चेंबर में ही दोनों सदनों का संयुक्त सत्र भी होगा। नए संसद भवन में अत्याधुनिक तकनीक वाले उपकरण लगाए गए हैं। इसके साथ यहाँ सुरक्षा में तैनात मार्शलों की ड्रेस भी अब दूसरी होगी।

पुराना संसद भवन 47,500 वर्गमीटर में है, जबकि नया भवन 64,500 वर्गमीटर में बनी है। वास्तुकार बिमल पटेल द्वारा बनाए गए नए भवन में 3 दरवाजे हैं, जिन्हें ज्ञान द्वार, शक्ति द्वार और कर्म द्वार के नाम से जाना जाएगा। इसमें सांसदों और वीआईपी के लिए अलग प्रवेश द्वार है। इस पर भूकंप का असर नहीं होगा।

इसमें पुस्तकालय, कैफेटेरिया आदि की भी व्यवस्था है। नए भवन में दिव्यांगों को भी आने में आसानी होगी। सेन्ट्रल लाउंज में भारत का राष्ट्रीय वृक्ष अशोक भी लगाया गया है। कहा जा रहा है कि यह भवन भारत की सांस्कृतिक और परम्पराओं का आईना है। इस भवन के आसपास कई पेड़ लगाए जाएँगे, जो लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूकता का संदेश देंगे।

नए संसद भवन का सबसे बड़ा हॉल संविधान हॉल है। कहा जा रहा है कि इसमें संविधान की मूल प्रति रखी जाएगी। इसके अलावा इसमें महात्मा गाँधी, जवाहरलाल नेहरू, सुभाषचंद्र बोस सहित देश के सभी प्रधानमंत्रियों की बड़ी तस्वीरें भी लगाई गई हैं। बताते चलें कि सेंट्रल विस्टा कॉरिडोर में नए संसद भवन के अलावा प्रधानमंत्री आवास एवं कार्यालय, केंद्रीय सचिवालय और उपराष्ट्रपति का आवास शामिल है।

सितम्बर 2020 में नए संसद भवन को बनाने का ठेका टाटा प्रोजेक्ट को दिया गया था। शुरुआत में नए संसद भवन को बनाने की लागत 861 करोड़ रुपए आँकी गई थी। हालाँकि, बाद में यह लागत बढ़कर 1200 करोड़ रुपए तक पहुँच गई। तिकोने आकार के नए संसद भवन का निर्माण 15 जनवरी 2021 को शुरू हुआ था। इसका अधिकांश काम पूरा हो चुका है।

सन 1927 में बना वर्तमान संसद भवन लगभग 100 साल पुराना है और इसे सरकार ने हेरिटेज बिल्डिंग बताया है। सरकार के मुताबिक, अब सदन में काम करने वाले सदस्यों से लेकर बाहर से आने वाले आगंतुकों की संख्या बढ़ी है। सरकार का यह भी मानना है कि पुराने भवन के आकार और डिजाइन की वजह से उसमें आधुनिक तकनीक के उपकरण लगाने सम्भव नहीं थे।

मार्च 2023 में PM मोदी ने इस संसद का आकस्मिक निरीक्षण किया था। तब उन्होंने इसे बनाने वाले मजदूरों से भी बात की थी। हालाँकि, कॉन्ग्रेस ने सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के तहत बनने वाले इस निर्माण की आलोचना की थी। कॉन्ग्रेस नेता जयराम रमेश ने इसे पैसे की बर्बादी बताया था।

महिलाओं के बीच में बैठ गया दाढ़ी वाला सवाद और करने लगा हस्तमैथुन: केरल के एक बस की स्टोरी एक्टर-मॉडल ने शेयर की

केरल स्टेट रोड ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (KSRTC) की एक बस। एक युवती इसी बस में त्रिशूर में सवार होती है। वह कोच्चि जा रही है। महिलाओं के लिए आरक्षित सीट पर बैठती है। एक और महिला भी उसी सीट पर बैठी है। रास्ते में एक युवक दोनों महिलाओं के बीच आकर बैठ जाता और हस्तमैथुन करने लगता है।

इस युवक की पहचान (Savad Shah) के तौर पर हुई है। कुछ रिपोर्टों में उसे कोझिकोड का रहने वाला सैय्यद केके भी बताया गया है। मॉडल-एक्टर नंदिता शंकर (Nandita Sankara) ने बुधवार (17 मई 2023) को इस घटना की स्टोरी इंस्टाग्राम पर साझा की है। ​कोच्चि जाने के लिए त्रिशूर में इस बस में बैठने वाली महिला वही थीं। उन्होंने बताया है कि उस युवक की अश्लील हरकत का उन्होंने वीडिया बनाया। आवाज उठाई तो उसने भागने की कोशिश। लेकिन बस कंडक्टर और अन्य यात्रियों की मदद से उसे पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया गया।

वीडियो में नंदिता ने कहा है कि वह त्रिशूर से कोच्चि की यात्रा कर रहीं थी। अंगमाली में आरोपित बस में चढ़ा। महिलाओं और गर्भवती के लिए आरक्षित सीट पर उनके और एक अन्य महिला के बीच बैठ गया। उसने खिड़की के पास बैठी नंदिता से बातचीत करने की कोशिश की। उनसे पूछा कि वह कहाँ जा रही हैं और क्या रास्ते में जाम मिल सकता है। नंदिता ने बताया है, “मेरे जवाब देने के करीब दो सेकेंड बाद मैंने महसूस किया कि वह अपने एक हाथ से मेरे कमर को टच कर रहा है। जल्द ही मैंने पाया कि बैग की आड़ लेकर वह दूसरे हाथ से अपने निजी अंगों को सहला रहा है।” उन्होंने कहा है, “इससे मुझे घृणा हो गई। मैंने खिड़की खोला और बाहर देखने लगी। जब मैं दूसरी बार उसकी तरफ मुड़ी तो उसने जिप खोलकर गुप्तांग बाहर निकाल रखा था और हस्तमैथुन कर रहा था।”

घटना के रिकॉर्ड किए गए वीडियो नंदिता को उस युवक से यह कहते हुए सुना जा सकता है कि वह क्या कर रहा है। इसके बाद युवक सीट से उठ जाता। कंडक्टर के आने पर अपना बचाव करने लगता है। नंदिता की रजामंदी के बाद कंडक्टर ड्राइवर को बस लेकर पुलिस स्टेशन चलने को कहता है। इसके बाद आरोपित भागने की कोशिश करता है।

पेशे से एक्टर और मॉडल नंदिता ने दावा किया है कि सवाद ने अन्य महिलाओं के साथ भी बस में अश्लील हरकत की। उन्होंने बताया कि वीडियो शेयर करने के बाद 5 महिलाएँ सामने आई हैं। महिलाओं का कहना है कि आरोपित ने उनके साथ भी बस में अश्लील हरकत की थी। केरल पुलिस ने सवाद के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया। नंदिता ने मदद के लिए बस के चालक और कंडक्टर के साथ-साथ उन लोगों का शुक्रिया अदा किया जिन्होंने सवाद को पकड़ने में मदद की।

त्रयम्बकेश्वर मंदिर को तोड़कर औरंगजेब ने बना दिया था मस्जिद, मराठों ने अपने पराक्रम से किया जीर्णोद्धार: जानिए नासिक के ज्योतिर्लिंग का इतिहास

महाराष्ट्र के नासिक स्थित त्रयम्बकेश्वर मंदिर में 13 मई 2023 की रात करीब 9:15 बजे मुस्लिमों का एक समूह दाखिल होने की कोशिश करता है। त्रयम्बकेश्वर शिवलिंग भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। हिंदू परंपरा के अनुसार इस मंदिर में सिर्फ हिंदुओं को प्रवेश और पूजा का अधिकार है। जिन मुसलमानों ने मंदिर के परिसर में प्रवेश करने की कोशिश की वो लोग गर्भगृह के अंदर शिवलिंग पर चादर चढ़ाना चाहते थे। बाद में मुस्लिम पक्ष के तरफ से बयान आया कि वे महादेव को धूप का धुआँ पेश कर रहे थे।

इस विवाद के बीच आपको त्रयम्बकेश्वर मंदिर का इतिहास भी जान लेना चाहिए। औरंगजेब ने अपने शासन काल में अन्य बड़े मंदिरों के साथ इस मंदिर को भी तुड़वा दिया था। मंदिर की जगह एक मस्जिद बनवा दी गई थी। हिंदुओं ने बाद में मंदिर पर दोबारा कब्जा कर लिया और मस्जिद की जगह मंदिर बनवा दिया था।

मंदिर में मुस्लिमों का जबरन प्रवेश

13 मई की रात को जैसे ही स्थानीय मुस्लिम मंदिर परिसर में दाखिल हुए, वहाँ तैनात सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें गर्भगृह तक जाने से रोक लिया। इसके बाद मंदिर प्रशासन ने मंदिर में घुसे लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई। इस घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए।

पुलिस ने अकील यूसुफ सैय्यद, सलमान अकील सैय्यद, मतीन राजू सैय्यद और सलीम बक्श सैय्यद को त्रयम्बकेश्वर मंदिर में जबरन प्रवेश करने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया। इन लोगों के खिलाफ IPC की धारा 295 और 511 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। राज्य के डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीश के आदेश के बाद मामले की जाँच के लिए एसआईटी का गठन किया गया है।

आरोप है कि उर्स के मौके पर निकाले गए जुलूस में शामिल लोग शिवलिंग पर चादर चढ़ाने की कोशिश कर रहे थे। जुलूस के आयोजक मतीन सैय्यद ने दावा किया कि मुस्लिम समाज के लोग चादर को सीढ़ियों तक ले गए थे, लेकिन उनका इरादा शिवलिंग पर चादर चढ़ाने का नहीं था।

हिंदुओं पर साम्प्रदायिक सद्भाव खराब करने का आरोप

त्रयम्बकेश्वर नगर परिषद के पूर्व अध्यक्ष अवेज़ कोंकणी (Avez Kokni) ने कहा कि मुस्लिमों ने मंदिर में प्रवेश करने या महादेव पर चादर चढ़ाने का कोई प्रयास नहीं किया। यहाँ नजदीकी दरगाह में उर्स के दौरान मुस्लिमों द्वारा पीढ़ियों से मंदिर की सीढ़ियों से धूप या लोबान का धुआँ दिखाने की परंपरा रही है।

नगर परिषद के पूर्व अध्यक्ष ने कहा, “स्थानीय हिंदू समाज ने कभी भी इस प्रथा का विरोध नहीं किया। अब मामले ने साम्प्रदायिक रंग ले लिया है। इससे काफी हैरानी हो रही है।” वैसे हिंदुओं ने ऐसा कब महसूस किया होगा कि उनके देवता को लोबान के इस धुएँ की जरूरत है।

नासिक जिला केंद्रीय सहकारी बैंक (Nashik District Central Cooperative Bank) के पूर्व अध्यक्ष और त्रयम्बकेश्वर के निवासी परवेज़ कोंकणी ने कहा कि सदियों से चली आ रही यह प्रथा मजहबी समन्वय व एकता का प्रतीक है। शहर में मुस्लिमों की आबादी काफी कम है और सभी यहाँ सद्भाव के साथ रहते हैं। उन्होंने कहा, “शहर शांतिपूर्ण और गैर-सांप्रदायिक रहा है। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि हिंदू बहुल इलाके में मुझे सहकारी बैंक का अध्यक्ष चुना गया है।”

परवेज का कहना है कि सदियों पुरानी परंपरा पर सवाल उठाए जाने से वे हैरान हैं। अब यहाँ सवाल उठता है कि क्या साम्प्रदायिक एकता का यह झंडाबरदार किसी मस्जिद, दरगाह या अन्य मजहबी स्थान पर हनुमान चालीसा के पाठ की वकालत करेगा? राज्यसभा सांसद संजय राउत ने भी त्रयम्बकेश्वर में हुई घटना को भी सही ठहराया है।

ऐसी प्रथाओं का रोका जाना क्यों जरूरी?

हिंदू देवता के किसी भी मंदिर में इस तरह से चादर चढ़ाने की कोई परंपरा नहीं है। किसी भी शास्त्र में इसका उल्लेख नहीं है। साथ ही गैर-हिंदुओं को मंदिर में प्रवेश करने और परिसर के अंदर अपने गैर-हिंदू धर्म के अनुष्ठान करने की अनुमति भी नहीं दी जा सकती।

सनातन धर्म में देवी-देवताओं के पूजा और अनुष्ठान की खास प्रक्रिया होती है। ऐसे में साम्प्रदायिक सौहार्द्र के नाम पर पूजा पद्धति को विकृत नहीं किया जाना चाहिए। यदि किसी हिंदू मंदिर में धार्मिक सौहार्द्र के नाम पर इस तरह की प्रक्रियाएँ हो रही हैं तो उन पर तुरंत पाबंदी लगनी चाहिए।

कुछ लोग धार्मिक सौहार्द्र के नाम पर इस तरह के प्रथाओं की वकालत कर सकते हैं। हो सकता है कि देश के कुछ मंदिरों में धार्मिक सौहार्द्र जैसी प्रक्रियाएँ की जा रही हों, लेकिन ज्योतिर्लिंग जैसे प्रमुख मंदिरों का इन सब से अलग रहना उस स्थान की विशेषता के लिए भी आवश्यक है।

हिंदुओं को आवश्यकतानुसार इन चीजों में बदलाव करना चाहिए, जिससे हमारे पौराणिक स्थलों की पूजा पद्धति दूषित न हो। त्रयम्बकेश्वर मामले में मुस्लिम ज्योतिर्लिंग को चादर दिखाने को समन्वय की संस्कृति बता रहे हैं और इस घटना को लेकर हिंदुओं एवं मंदिर अधिकारियों पर धार्मिक बैर और घृणा फैलाने का परोक्ष आरोप लगा रहे हैं।

त्रयम्बकेश्वर मंदिर में धूप का धुआँ दिखाने को धार्मिक सौहार्द्र बताने वाले ये लोग इस तथ्य को छिपा जाते हैं कि धार्मिक एकता की जिम्मेदारी सिर्फ हिंदुओं को दी गई है। क्या हिंदुओं के साथ प्रेम और सद्भाव दिखाने के लिए किसी मस्जिद या ईदगाह में आरती, यज्ञ, हवन या किसी भी तरह के पूजा की इजाजत मिल सकती है? क्या इस देश में ऐसी कोई परंपरा रही है, जहाँ किसी मस्जिद में किसी हिंदू देवता का बड़ा अनुष्ठान आयोजित किया गया हो?

मजहबी प्रेम और सम्मान का बोझ हिंदुओं के कंधों पर ही लाद दिया गया है। हिंदुओं से उम्मीद की जाती है कि वे गैर-हिंदुओं को मंदिरों में देवताओं पर चादर चढ़ाने की अनुमति दें। मुस्लिम हिंदू देवी-देवताओं की कितनी इज्जत करते हैं, इसका उदाहरण काशी विश्वनाथ में देखिए।

ज्ञानवापी परिसर में तथाकथित मस्जिद के वजूखाने में शिवलिंग मिला है। इसी स्थान पर मुस्लिम वजू किया करते थे। शिवलिंग पर कुल्ला किया करते थे, हाथ-पैर धोते थे। इसी मजहब के मानने वाले त्रयम्बकेश्वर मामले में हिंदुओं को सांप्रदायिक सद्भाव की बातें सुना रहे हैं।

मराठों के दम पर त्रयम्बकेश्वर को दोबारा हासिल किया गया

साल 1689 में औरंगजेब ने छत्रपति संभाजी महाराज की हत्या कर दी। राजा की मृत्यु के बाद औरंगज़ेब ने हिंदुओं पर और अधिक अत्याचार शुरू कर दिए। उसने साल 1690 में भारत के अन्य स्थानों की तरह मराठा साम्राज्य के तहत आने वाले धार्मिक स्थलों को अपवित्र और नष्ट करने का आदेश दिया। ऐसा करके वह मराठा योद्धाओं का मनोबल कम करना चाहते था। उस समय युवा छत्रपति राजाराम महाराज के नेतृत्व में हिंदू साम्राज्य की रक्षा के लिए लड़ रहे थे।

जदुनाथ सरकार ने अपनी पुस्तक ‘औरंगजेब का इतिहास'(History of Aurangzeb) और काशीनाथ साने ने अपनी पुस्तक वार्षिक इतिब्रित्ता (वार्षिक समाचार पत्र) में कई स्थानों पर एलोरा, त्र्यंबकेश्वर, नरसिंहपुर, पंढरपुर, जेजुरी और यवत (भूलेश्वर) में औरंगजेब द्वारा मंदिरों को तोड़े जाने का उल्लेख किया है।

मुगल आक्रांता औरंगजेब ने त्रयम्बकेश्वर स्थित भगवान शिव के एक हजार साल पुराने मंदिर को तोड़ दिया था। इसके स्थान पर उसने एक मस्जिद बनवा दी थी। इतना ही नहीं, कुंभ नगरी नासिक का नाम बदलकर गुलशनाबाद रख दिया गया था।

मराठों का नया इतिहास – खंड II (New History of Marathas – Volume II) में जीएस सरदेसाई लिखते हैं, “नवंबर 1754 में त्रयम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर को मराठाओं ने दोबारा बनवाया था। उन्होंने त्रयम्बकेश्वर मंदिर के स्थान पर बनवाए गए मस्जिद को गिरवा दिया था।

अन्य ऐतिहासिक रिकॉर्ड बताते हैं कि मंदिर का निर्माण तीन वर्षों यानी 1751 से 1754 तक चला था। अर्थात छत्रपति राजाराम के शासनकाल में बालाजी बाजीराव भट उर्फ नानासाहेब पेशवा के नेतृत्व में मराठों ने कार सेवा की थी। मंदिर का पुनर्निर्माण बेसाल्ट पत्थर से कराया गया था। यह मंदिर आज भी इसी स्वरूप में है।

त्रयम्बकेश्वर मंदिर के गर्भगृह में स्थापित तीन मुखी शिवलिंग तीन देवताओं- ब्रह्मा, विष्णु और महेश के रूप में है। यह नासिक शहर से 28 किलोमीटर दूर ब्रह्मगिरि पर्वत की तलहटी में स्थित है। मंदिर हेमाद पंथी शैली में बनाया गया है। इस शैली का नाम 13वीं शताब्दी के यादव वंश क्षत्रिय राजा के मंत्री हेमाद्रि पंडित के नाम पर रखा गया है। उन्होंने उस शैली को प्रतिष्ठित किया था।

त्रयम्बकेश्वर मंदिर को प्राप्त करने के लिए असंख्य हिंदू सैनिकों ने लगातार चार पीढ़ियों तक अपने प्राणों की आहुति दी। अपनी भूमि की रक्षा करने, मंदिरों में देवताओं को पुनर्स्थापित करने और धर्म को पुनर्स्थापित करने में हमारे पूर्वजों को बहुत समय लगा।

हिंदुओं को विचार करना चाहिए कि क्या त्र्यंबकेश्वर जैसे उनके देवताओं को वास्तव में किसी इस्लामी पूजा स्थल से कुछ लोबान के धुएँ की आवश्यकता है? इस तथ्य को जानते हुए कि उसी मंदिर को अतीत में उसी आस्था के आक्रमणकारी ने हिंदुओं पर इस्लामिक आस्था थोपने और अत्याचार करने के लिए नष्ट कर दिया गया था।

त्रयम्बकेश्वर विवाद के बाद मुख्य बातें:

  1. त्रयम्बकेश्वर मंदिर में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर पहले से ही प्रतिबंध है। यह प्रतिबंध आज के समय की नहीं है।
  2. मंदिर को वर्ष 1690 में औरंगजेब ने ध्वस्त कर दिया था और इसकी जगह एक मस्जिद बनवाई गई थी। वर्ष 1754 में मराठों ने अपने पराक्रम से मस्जिद को तोड़कर मंदिर का पुनर्निर्माण कराया।
  3. अब, स्थानीय मुस्लिमों का कहना है कि वे किसी गुलाम वली शाह दरगाह के जुलूस के दौरान भगवान को धूप दिखाने के लिए पहले सीढ़ी पर एक पल के लिए रुकते हैं। हम कैसे जान सकते हैं कि यह एक प्रयोग नहीं है? क्योंकि दूसरी तरफ का इतिहास मंदिर को ध्वस्त करने का है। इसलिए ‘मैं सीढ़ियों पर रूक गया, अंदर नहीं आया, चादर चढ़ाने का इरादा नहीं था, बस धूप ही तो दिखाया’ आदि तर्क विश्वसनीय नहीं हैं। स्थानीय दरगाह के खादिम सलीम सैय्यद ने यह भी कहा कि जब वो सीढ़ियों पर रूकते हैं तो ‘हर हर महादेव और ओम नमः शिवाय’ का जाप करते हैं। भले ही यह किसी हिंदू को खुश करने वाली बात हो, लेकिन क्या सलीम सैय्यद को उसका मजहब ऐसा करने की अनुमति देता है?
  4. यदि किसी गैर-हिंदू की त्रयम्बकेश्वर में आस्था है तो उसका हिंदू धर्म में स्वागत है।
  5. क्या किसी इस्लामी तीर्थ स्थल या मस्जिद में हनुमान चालीसा का पाठ करना, मंत्रों का पाठ करना, पूजा करना, यज्ञ, होम-हवन या कम से कम कुमकुम-हल्दी आदि हवा मे उड़ाना ठीक है? यदि नहीं तो सद्भाव बनाए रखने का भार केवल हिंदू समुदाय के कंधों पर ही क्यों?
  6. अंतिम प्रश्न हिंदुओं के लिए है। क्या ज्योतिर्लिंग जैसे विशेष पवित्र पूजा स्थल पर विधर्मियों के पूजा स्थल की धूप, दीप, फूल, कपड़े आदि देवता को चढ़ाना या दिखाना आवश्यक है? क्या इससे उस स्थल की ऊर्जा प्रभावित नहीं होगी? हमारे देवताओं में इनकी कितनी आस्था है, यह समझने के लिए ज्ञानवापी का उदाहरण ही काफी है। तथाकथित मस्जिद में 300 वर्षों तक वजूखाने में शिवलिंग का किस प्रकार सम्मान होता रहा, यह पूरी दुनिया देख चुकी है।

इन तर्कों को किसी भी तरह से कट्टरता की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता, क्योंकि यह गैर-हिंदुओं को अपना धर्म पालन करने के अधिकार से वंचित करने की बात नहीं करता है।

कर्नाटक चुनाव में शिवकुमार के लिए काम कर रही थी पत्रकारों की टीम, खुद किया खुलासा: कॉन्ग्रेस-मीडिया नेक्सस फिर हुआ बेनकाब

कर्नाटक विधानसभा चुनावों में कुछ पत्रकार कॉन्ग्रेस की जीत सुनिश्चित करने के लिए काम कर रहे थे। पत्रकारों का यह गिरोह कर्नाटक कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष डीके शिव कुमार से जुड़ा हुआ था। इसका खुलासा खुद शिवकुमार ने किया है। उनके इस कबूलनामे ने कॉन्ग्रेस और मीडिया गिरोह की साँठगाँठ को फिर से बेनकाब कर दिया है।

16 मई 2023 को इंडिया टुडे की पत्रकार नबीला जमील से बातचीत में शिवकुमार ने चुनाव में कुछ पत्रकारों के अपने लिए काम करने का खुलासा किया। वीडियो में इसे आप 4 मिनट 16 सेकेंड से सुन सकते हैं। शिवकुमार कहते हैं कि उन्होंने कर्नाटक में अकेले दम पर कॉन्ग्रेस की जीत सुनिश्चित की। उनके लिए तीन टीम काम कर रही थी जो एआईसीसी (अखिल भारतीय कॉन्ग्रेस कमेटी) से अलग थी। वे बताते हैं कि उनकी एक टीम पत्रकारों की थी। एक उनके राजनीतिक समर्थकों की। इसके अलावा उनका 10 साल पुराना सिस्टम भी सक्रिय था।

इस तरह से बोलते-बोलते शिवकुमार ने यह उजागर कर दिया उनकी ‘कृपा’ पर कई पत्रकार कॉन्ग्रेस को लेकर जनता की धारणा बदलने के मिशन में जुटे थे। हालाँकि ये पत्रकार कौन हैं, इसका खुलासा उन्होंने नहीं किया है। बावजूद इसके शिवकुमार कर्नाटक का मुख्यमंत्री बनने में नाकामयाब रहे हैं। 20 मई को सिद्धारमैया सीएम पद की शपथ लेने जा रहे हैं। शिवकुमार डिप्टी सीएम होंगे।

सीएम के रेस में शिवकुमार के पिछड़ने की कई वजहें बताई जा रही है। इनमें से एक उनका ‘घनघोर हिंदू’ दिखना भी बताया जा रहा है। इकोनॉमिक्स टाइम्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि वामपंथी पृष्ठभूमि से आने वाले सिद्धारमैया को आरएसएस और बीजेपी के ‘कट्टर’ वैचारिक विरोधी के तौर पर देखा जाता है। इसके उलट दक्षिणपंथी समूहों को लेकर शिवकुमार की ऐसी छवि नहीं है। वे एक ऐसे हिंदू के तौर पर देखे जाते हैं जो अपना धार्मिक झुकाव छिपाने की कोशिश नहीं करते। अक्सर धार्मिक स्थलों पर जाते रहते हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि कर्नाटक का मौजूदा राजनीतिक माहौल स्पष्ट ध्रुवीकरण दिखाता है। यदि ऐसा नहीं होता तो शिवकुमार की यह हिंदुवादी छवि उनके लिए कोई समस्या नहीं होती। रिपोर्ट के अनुसार विधानसभा चुनावों में जेडीएस के मुस्लिम वोटरों ने भी कॉन्ग्रेस का समर्थन किया है। कई लोगों का मानना है कि यह कॉन्ग्रेस के पक्ष में मुस्लिम वोट बैंक के अधिक मजबूती से खड़े होने के संकेत हैं। अगले साल लोकसभा चुनाव से पहले यह ध्रुवीकरण और गहरा हो सकता है। इसे देखते हुए आलाकमान ने एक ऐसे व्यक्ति (सिद्धारमैया) को चुना जो वैचारिक तौर पर बीजेपी-आरएसएस का विरोधी है और जो मुस्लिम वोट बैंक को एकजुट करने के पार्टी के एजेंडे को दृढ़ता से आगे बढ़ा सकता है।

वैसे सिद्धारमैया को सीएम बनाने के फैसले पर पार्टी के भीतर अभी से ही असंतोष दिखने लगा है। कॉन्ग्रेस सांसद और शिवकुमार के भाई डीके सुरेश ने कहा है कि वे इस फैसले से पूरी तरह खुश नहीं हैं। जी परमेश्वर जैसे नेता खुद को डिप्टी सीएम भी नहीं बनाए जाने पर नाखुशी जता चुके हैं। इसके अलावा कर्नाटक वक्फ बोर्ड ने भी मुस्लिम डिप्टी सीएम और गृह, स्वास्थ्य तथा शिक्षा जैसे 5 महत्वपूर्ण मंत्रालय मुस्लिमों के लिए माँग चुका है।

17 सेकेंड में फावड़े से किए 9 वार, जरीफ अंसारी ने PAC के रिटायर्ड दलित दारोगा को दिनदहाड़े काट डाला: हमले का CCTV देख काँप जाएगी रूह

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में पीएसी के जिस रिटायर्ड दलित दारोगा पर फावड़े से हमला किया गया था, उनकी मौत हो गई है। हमले का दिल दहलाने वाले सीसीटीवी फुटेज सामने आया है। इसमें जरीफ अंसारी को दिनदहाड़े रिटायर्ड दारोगा गरीब दास पर फावड़े से ताबड़तोड़ वार करते देखा जा सकता है। हमला 18 मई 2023 को किया गया था।

हमले के बाद जरीफ अंसारी ने खुद को पुलिस के हवाले कर दिया था। सीसीटीवी में दिख रहा है कि वह फावड़े से तब तक हमला करता रहता है जब तक गरीब दास अचेत होकर गिर नहीं जाता है। घटना मुजफ्फरनगर के सिखेड़ा गाँव की है। एक दुकान पर बैठे रिटायर्ड दारोगा पर जरीफ ने अचानक हमला कर दिया था।

हमले की पूरी घटना दुकान के पास लगी सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई थी। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। वीडियो में देखा जा सकता है कि जरीफ अंसारी तब तक हमला करता है, जब तक गरीब दास लहूलुहान होकर गिर नहीं पड़ते। जरीफ ने 17 सेकेंड में गरीबदास पर 9 जानलेवा वार किए। गिरने के बाद भी वह गर्दन और सिर पर वार करता रहा।

हमले के बाद जख्मी गरीबदास को स्थानीय लोगों ने अस्पताल पहुँचाया। जहाँ से उन्हें मेरठ रेफर कर दिया गया। फिर मेरठ से दिल्ली ले जाया गया। बताया जा रहा है कि गरीबदास के सिर और गर्दन पर गंभीर चोटें लगी थीं, इसलिए उन्हें बचाया नहीं जा सका। इधर हमलवार जरीफ अंसारी ने थाने में सरेंडर कर अपना जुर्म कबूल लिया है।

शुरुआती पूछताछ में जरीफ ने पुलिस को बताया है कि उसकी बीवी से गरीब दास के साथ अवैध संबंध था। इसलिए उसने हमला किया। पुलिस को हत्या में और भी लोगों के शामिल होने का शक है। इस संबंध में एक शख्स को हिरासत में लिया गया है, जबकि एक की तलाश की जा रही है। परिजनों की तरफ से दी गई शिकायत के आधार पर केस दर्ज कर मामले की जाँच शुरू कर दी गई है।

4 मुस्लिम युवक, 13 साल की लड़की से चलती कार में कर रहे थे रेप: असम पुलिस की पेट्रोलिंग पार्टी ने पकड़ा, इंस्टाग्राम पर रुबेल रहमान से हुई थी पीड़िता की दोस्ती

असम में 13 साल की लड़की से चलती कार में गैंगरेप की घटना सामने आई है। आरोपितों की पहचान रुबेल रहमान, इमरान हुसैन, अनवर हुसैन और मोमिनुर रहमान के तौर पर हुई है। पुलिस की पेट्रोलिंग पार्टी ने शक के आधार पर इस कार को पकड़ा और उसके बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ।

गैंगरेप की यह वारदात कोकराझार जिले में 16 मई 2023 को हुई। पुलिस ने गुरुवार (18 मई 2023) को इसकी जानकारी दी। आरोपितों में से एक को पीड़िता जानती है। रुबेल रहमान से इंस्टाग्राम पर उसकी दोस्ती हुई थी। पुलिस ने आरोपितों को गिरफ्तार कर कोकराझार की अदालत में पेश किया। अदालत ने इन्हें तीन दिन की रिमांड पर पुलिस को सौंप दिया।

वरिष्ठ पुलिस अधिकारी नूर इस्लाम सरकार ने बताया कि 16 मई की दोपहर पुलिस की पेट्रोलिंग पार्टी डोटमा इलाके के पास नेशनल हाईवे से गुजर रही थी। इसी दौरान उनकी नजर एक संदिग्ध कार पर पड़ी। उन्होंने गाड़ी रुकवाकर जाँच की। गाड़ी में 1 नाबालिग लड़की और चार युवक मिले। पेट्रोलिंग पार्टी सभी को लेकर नजदीकी थाने पहुँची। पूछताछ के दौरन नाबालिग लड़की ने बताया कि कार में उसके साथ चारों युवकों ने बारी-बारी से बलात्कार किया है।

आरोपितों की उम्र 19 से 24 साल के बीच है। सभी धुबरी जिले के रहने वाले हैं। रुबेल और इमरान स्टूडेंट हैं। मोमिनुर ड्राइवर है और अनवर कुछ नहीं करता। पूछताछ के दौरान पता चला कि रुबेल पीड़िता को पहले से जानता था। कुछ महीने पहले ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर दोनों की दोस्ती हुई थी।

वारदात वाले दिन रुबेल अपने तीन दोस्तों के साथ पीड़िता से मिलने धुबरी से कोकराझार के डोटमा पहुँचा था। लड़की को अकेला पाकर चारों ने उसे जबरन गाड़ी में बैठा लिया और गैंगरेप की घटना को अंजाम दिया। चारों के खिलाफ डोटमा पुलिस थाने में भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं और यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम, 2012 (POCSO) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

रूस के एंटोन एंड्रीव बने हिंदू, कुंडलिनी जागरण और अनुष्ठान के बाद नाम मिला अनंतानंद: काशी के इस मठ में 80 देशों के 15 हजार लोग ले चुके हैं दीक्षा

रूस के मनोचिकित्सक (Psychiatrist) एंटोन एंड्रीव (Anton Andreev) हिंदू बन गए हैं। उन्होंने उत्तर प्रदेश के वाराणसी में तंत्र दीक्षा लेकर हिंदू धर्म अपनाया है। कई वर्षों की कोशिशों के बाद एंड्रीव तंत्र दीक्षा पूरी कर पाए हैं। काशी के शिवाला स्थित वाग्योग चेतना पीठम में गुरुवार (18 मई 2023) को खास अनुष्ठान आयोजित किया गया। इस दौरान एंटोन को गुरु मंत्र के साथ नया नाम ‘अनंतानंद नाथ’ मिला। उन्हें कश्यप गोत्र मिला है।

सेंटपीट्सबर्ग में रहने वाले मनोचिकित्सक एंटोन एंड्रीव को शुरुआत से ही हिंदू संस्कृति से लगाव था। उन्होंने तंत्र विद्या की अदृश्य शक्तियों के बारे में पढ़ा था। उन्हें भी कुंडलिनी जागृत कर तंत्र विद्या प्राप्त करने की इच्छा हुई। काफी रिसर्च के बाद एंटोन को वाराणसी के वागीश शास्त्री के बारे में जानकारी मिली। जनवरी 2015 में एंटोन भारत आए और वागीश शास्त्री से तंत्र विद्या की शिक्षा लेने की इच्छा जताई। एंटोन इस दौरान जरूरी मानकों को पूरा नहीं कर पाए और कुंडलिनी जागृत नहीं हो सकी। इसके बाद वे रूस लौट गए।

एंटोन साल 2016 में दोबारा भारत पहुँचे। उनकी कक्षाएँ पूरी नहीं हो सकीं। साल 2022 में गुरु वागीश शास्त्री का निधन हो गया। 25 अप्रैल 2023 को एंटोन अपनी इच्छा लिए पंडित आशापति शास्त्री के पास पहुँचे। यहाँ उन्होंने कुंडलिनी जागृत करने की शिक्षा ली। 10 दिनों के अभ्यास और 5 दिनों के स्वतंत्र ध्यान के दौरान एंड्रीव ने माँ तारा शक्ति (माता काली का एक रूप) का ध्यान किया।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार एंटोन एंड्रीव ने पंडित आशापति से आगे की शिक्षा लेने की इच्छा जाहिर की। पंडित आशापति ने उन्हें अपने इष्ट देव का ध्यान करने के लिए कहा। कई घंटों के ध्यान के बाद तारापीठ में उन्हें देवी की छाया का आभास हुआ। पंडित आशापति ने आगे की गोपनीय बातों की जानकारी नहीं दी। पंडित आशापति के अनुसार आध्यात्मिक रूप से तैयार होने के बाद रूस के मनोचिकित्सक को गुरु दीक्षा दी गई।

पंडित आशापति बताते हैं कि तंत्र विद्या प्राप्त करने के लिए कुंडलिनी जागृत करना आवश्यक है। अलग-अलग लोगों को कुंडलिनी जागृत करने में अलग-अलग समय लगता है। कुछ लोग इसे 10 दिन में जागृत कर लेते हैं तो कुछ को सालों का अभ्यास करना पड़ता है। कुंडलिनी जागृत करने का अर्थ यह नहीं है कि अब वह व्यक्ति सर्वशक्तिमान हो गया है। इसका अर्थ है कि अब वह व्यक्ति तंत्र साधना के लिए तैयार है।

पंडित आशापति शास्त्री की मानें तो दीक्षा लेने वालों में रूस और यूक्रेन के लोगों की संख्या सबसे अधिक है। मुस्लिम और अन्य क्रिश्चियन देशों के भी लोग गुरुदीक्षा लेते रहते हैं। उन्होंने बताया कि मठ से अब तक 80 देशों के 15 हजार विदेशी शिष्य दीक्षा ले चुके हैं।

‘घनघोर हिंदू’ दिखने के कारण डीके शिवकुमार नहीं बने CM: मीडिया ने बताए कारण, मुस्लिम वोट बैंक के लिए कॉन्ग्रेस आलाकमान ने सिद्धारमैया को चुना

20 मई 2023 को सिद्धारमैया कर्नाटक के मुख्यमंत्री (Karnataka CM) पद की शपथ लेंगे। कर्नाटक कॉन्ग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार (DK Shivakumar) डिप्टी सीएम होंगे। सीएम के रेस में शिवकुमार के पिछड़ने की कई वजहें बताई जा रही है। इनमें से एक उनका ‘घनघोर हिंदू’ दिखना भी बताया गया है। इस रिपोर्ट के अनुसार अगले लोकसभा चुनावों से पहले मुस्लिम वोटों के ध्रुवीकरण के लिए कॉन्ग्रेस आलाकमान ने सिद्धारमैया (Siddaramaiah) को उन पर वरीयता दी है।

इकोनॉमिक्स टाइम्स ने ‘कॉन्ग्रेस आलाकमान द्वारा सिद्धारमैया को कर्नाटक का मुख्यमंत्री चुनने के 5 कारण (Five reasons why Congress high command picked Siddaramaiah as Karnataka CM) शीर्षक से एक रिपोर्ट प्रकाशित की है। इसमें जो दूसरा कारण बताया गया है, वह बेहद दिलचस्प है। इसमें कहा गया है कि वामपंथी पृष्ठभूमि से आने वाले सिद्धारमैया को आरएसएस और बीजेपी के ‘कट्टर’ वैचारिक विरोधी के तौर पर देखा जाता है। इसके उलट दक्षिणपंथी समूहों को लेकर शिवकुमार की ऐसी छवि नहीं है। वे एक ऐसे हिंदू के तौर पर देखे जाते हैं जो अपना धार्मिक झुकाव छिपाने की कोशिश नहीं करते। अक्सर धार्मिक स्थलों पर जाते रहते हैं।

ऊपर आप ET की रिपोर्ट का वह हिस्सा देख सकते हैं। इसमें कहा गया है कि कर्नाटक का मौजूदा राजनीतिक माहौल स्पष्ट ध्रुवीकरण दिखाता है। यदि ऐसा नहीं होता तो शिवकुमार की यह हिंदुवादी छवि उनके लिए कोई समस्या नहीं होती। रिपोर्ट के अनुसार विधानसभा चुनावों में जेडीएस के मुस्लिम वोटरों ने भी कॉन्ग्रेस का समर्थन किया है। कई लोगों का मानना है कि यह कॉन्ग्रेस के पक्ष में मुस्लिम वोट बैंक के अधिक मजबूती से खड़े होने के संकेत हैं। अगले साल लोकसभा चुनाव से पहले यह ध्रुवीकरण और गहरा हो सकता है। इसे देखते हुए आलाकमान ने एक ऐसे व्यक्ति को चुना जो वैचारिक तौर पर बीजेपी-आरएसएस का विरोधी है और जो मुस्लिम वोट बैंक को एकजुट करने के पार्टी के एजेंडे को दृढ़ता से आगे बढ़ा सकता है।

उल्लेखनीय है कि कर्नाटक विधानसभा चुनावों के दौरान कॉन्ग्रेस की जीत पर शिवकुमार के मुख्यमंत्री बनने की प्रबल संभावना जताई जा रही थी। उनकी दावेदारी कितनी मजबूत थी इसे इस बात से भी समझा जा सकता है कि कर्नाटक चुनाव के नतीजे 13 मई 2023 को ही आ गए थे। 224 सदस्यीय विधानसभा में कॉन्ग्रेस को 135 सीटें भी मिल गई। लेकिन मुख्यमंत्री का नाम 18 मई को जाकर फाइनल हुआ। उससे पहले शिवकुमार और सिद्धारमैया के साथ कई बार पार्टी आलाकमान की बैठकें हुई।

वैसे सिद्धारमैया को सीएम बनाने के फैसले पर पार्टी के भीतर अभी से ही असंतोष दिखने लगा है। कॉन्ग्रेस सांसद और शिवकुमार के भाई डीके सुरेश ने कहा है कि वे इस फैसले से पूरी तरह खुश नहीं हैं। जी परमेश्वर जैसे नेता खुद को डिप्टी सीएम भी नहीं बनाए जाने पर नाखुशी जता चुके हैं। इसके अलावा कर्नाटक वक्फ बोर्ड ने भी मुस्लिम डिप्टी सीएम और गृह, स्वास्थ्य तथा शिक्षा जैसे 5 महत्वपूर्ण मंत्रालय मुस्लिमों के लिए माँग चुका है।

मेरठ के रेस्टोरेंट पर लव जिहाद के आरोप: बजरंग दल ने छापा मारा, फीडबैक बोर्ड पर लिखे मिले हिंदू लड़कियों-मुस्लिम युवकों के नाम

उत्तर प्रदेश के मेरठ स्थित एक रेस्टोरेंट में मुस्लिम युवकों द्वारा बहला-फुसलाकर हिंदू लड़कियों का ब्रेनवॉश करने का आरोप लगाया गया है। बजरंग दल ने इसको लेकर बुधवार (17 मई 2023) को रेस्टोरेंट में हंगामा किया लव जिहाद का सिंडिकेट चलाने का आरोप लगाया। मामले की जानकारी पुलिस को मिलने के बाद इसकी जाँच शुरू कर दी गई है।

हंगर हेड नाम का यह रेस्टोरेंट नौचंदी इलाके के शास्त्रीनगर में स्थित है। बजरंग दल के कार्यकर्ता बुधवार की रात को अचानक यहाँ पहुँचे और देखा कि रेस्टोरेंट के फीडबैक वॉल पर हिंदू लड़कियों के साथ मुस्लिम लड़कों के नाम लिखे हैं। इसके अलावा, इनको लेकर आपत्तिजनक बातें भी लिखी गई थीं।

इसको देखकर बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि रेस्टोरेंट में दूसरे संप्रदाय के लड़के हिंदू समुदाय की लड़कियों को लाकर उन्हें गुमराह करते हैं। यहाँ सरेआम अश्लीलता की जाती है। बजरंग दल ने इसको लेकर रेस्टोरेंट के संचालक पर भी आरोप लगाकर हंगामा किया। हिंदू संगठनों को देखकर रेस्टोरेंट में बैठे हुए युवक-युवतियाँ भाग गई।

विश्व हिंदू परिषद के महानगर सह धर्म प्रसार प्रमुख अश्वनी गुप्ता ने बताया कि रेस्टोरेंट की दीवारों पर अश्लील स्लोगन लिखे मिले। इसके साथ ही यहाँ काम करने वाले कर्मचारियों के पास से अश्लील सामग्री भी बरामद की गई है। इसके साथ ही पुलिस ने चार लोगों को हिरासत में भी लिया है।

वहीं, रेस्टोरेंट के मालिक अरुण ने बताया, “कैफे में एक बोर्ड लगाया लगाया गया है। यहाँ पर आने वाले इस पर अपना फीडबैक देते हैं।” नौचंदी इंस्पेक्टर सुबोध सक्सेना ने कैफे संचालक को इस तरह के स्लोगन हटाने की चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि इस मामले में जाँच की जा रही है।