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6 राज्य, 100+ ठिकाने: गैंगस्टर-आतंकी-तस्कर नेटवर्क पर एनआईए की रेड, नशे और हथियारों की तस्करी के मिले थे इनपुट

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने बुधवार (17 मई 2023) को 6 राज्यों में 100 से अधिक स्थानों पर छापेमारी की। आतंकवाद, नशे के तस्करों और गैंगस्टर्स के नेटवर्क पर यह एक्शन लिया गया है। जाँच एजेंसी के अधिकारी राज्य पुलिस बलों के साथ मिलकर सुबह से ही छापेमारी कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि एनआईए द्वारा पिछले साल दर्ज तीन अलग-अलग मामलों में यह छापेमारी की गई है।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक राष्ट्रीय जाँच एजेंसी ने हरियाणा, दिल्ली, पंजाब, राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में 100 से ज्यादा स्थानों पर छापेमारी की है। दिल्ली-एनसीआर में 32 स्थानों पर छापा मारा गया। पंजाब के अलग-अलग इलाकों और चंडीगढ़ मिलाकर टीम ने 67 जगहों पर तलाशी अभियान चलाया। उत्तर प्रदेश में प्रतापगढ़, बरेली और लखीमपुर में छापेमारी हुई है। मध्य प्रदेश में भी दो स्थानों पर एनआईए ने छापा मारा है।

उत्तराखंड के बाजपुर में रतनपुरा गाँव के रहने वाले गुरविंदर सिंह के घर भी एनआईए की टीम ने छापा मारा। एजेंसी के ऑफिसर्स को शक है कि गुरविंदर सिंह खालिस्तान समर्थकों के संपर्क में है। जानकारी के मुताबिक गुरविंदर अपने घर पर नहीं मिला। गुरविदंर के अलावा प्रतिबंधित संगठन सिख फॉर जस्टिस (SFJ) के सदस्य जसविंदर सिंह मुल्तानी के सहयोगियों के ठिकानों पर भी तलाशी अभियान चलाया गया। जसविंदर सिंह मुल्तानी को एसएफजे के संस्थापक गुरपतवंत सिंह पन्नू का करीबी माना जाता है।

आतंकी-गैंगस्टर-ड्रग तस्कर नेटवर्क के खिलाफ NIA ने पिछले साल तीन मामले (आरसी 37, 38, 39/2022/एनआईए/डीएलआई) दर्ज किए थे। पहले मामले यानी 37/2022/एनआईए/डीएलआई में ही NIA ने 25 जनवरी 2023 को दीपक राँगा नाम के शूटर को गिरफ्तार किया था। राँगा ने ही मई 2022 में मोहाली में पंजाब पुलिस के मुख्यालय पर आरपीजी अटैक किया था। पता चला है कि दीपक राँगा आतंकी लखबीर सिंह संधू उर्फ ​​लाँडा और पाकिस्तान स्थित आतंकवादी हरविंदर सिंह संधू उर्फ ​​रिंदा का करीबी है।

एनआईए को मिले इनपुट्स के अनुसार आतंकी-गैंगस्टर-ड्रग तस्कर नेटवर्क देश में अवैध हथियारों और गोला-बारूद की तस्करी का काम भी करते हैं। यह नेटवर्क सरहद पर पाकिस्तान से हथियार हासिल कर देश के अन्य राज्यों में पहुँचाने का भी काम करता है। हथियारों के अलावा इस नेटवर्क का इस्तेमाल नशे के सामान की आपूर्ति के लिए भी किया जाता है।

‘कश्मीर पर ISI ने घृणा फैलाने को कहा, मना करने पर बोला रॉ एजेंट’: हत्या के डर से Pak इन्फ्लुएंसर ने छोड़ा मुल्क; PM मोदी का है फैन, हनुमान चालीसा भी जुबानी याद

सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर मोहम्मद शायन अली (Shayan Ali) ने भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ का जासूस और यहूदी एजेंट होने का आरोप लगाए जाने के बाद अपने मुल्क पाकिस्तान को हमेशा के लिए छोड़ दिया है। उन्होंने मंगलवार (16 मई, 2023) को अपना देश छोड़ने से पहले एक तस्वीर शेयर करते हुए अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर ‘पाकिस्तान छोड़ने की मेरी कहानी’ शीर्षक से एक पोस्ट साझा कर अपनी आपबीती बताई।

शायन ने लिखा, “मैंने पाक आर्मी के पीआर विंग के कश्मीर से संबंधित एक म्यूजिक वीडियो (भारत के खिलाफ नफरत वाला) में जब काम करने से मना कर दिया तो उन्होंने मुझ पर मेरे सुनहरे बालों के कारण भारत की खुफिया एजेंसी रॉ का जासूस और यहूदी एजेंट होने का आरोप लगाया। मैं भाग्यशाली था कि मैंने पाकिस्तान को सुरक्षित छोड़ दिया, लेकिन फिर भी आतंकवादी इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) के खिलाफ मेरा संघर्ष कभी समाप्त नहीं हुआ।”

अली ने अपने लंबे पोस्ट में लिखा, “जब मैंने सार्वजनिक रूप से ISI का पर्दाफाश किया, तो मेरे पास पाकिस्तान से माफी माँगने के अलावा और कोई विकल्प नहीं था। ऐसा मैंने इसलिए किया, ताकि मैं पाकिस्तान को सुरक्षित छोड़ सकूँ, क्योंकि उन्होंने मुझे जान से मारने की योजना पहले ही बना ली थी। जो लोग मुझे जानते हैं, वे जानते हैं कि जब मैंने डीजी-आईएसपीआर के एक म्यूजिक वीडियो में काम करने से इनकार कर दिया, जिसका नाम ‘कश्मीर हूँ मैं’ था, तो उन्होंने मेरे सुनहरे बालों की वजह से मुझ पर रॉ और यहूदी एजेंट होने का आरोप लगाना शुरू कर दिया।”

इन्फ्लुएंसर मोहम्मद शायन अली ने बताया कि वह म्यूजिक वीडियो भी फिलहाल यूट्यूब पर है। जब आप ‘कश्मीर हूँ मैं’ लिखेंगे तो आप इसे आसानी से देख सकते हैं। यह वीडियो तथाकथित ‘कश्मीरियों पर भारतीय सेना के अत्याचार’ के बारे में था, जिसमें उन्होंने काम करने से मना कर दिया था।

उन्होंने लिखा, “एक फैशन मॉडल और इन्फ्लुएंसर के रूप में आईएसआई आमतौर पर मुझसे पाकिस्तानी सेना के पक्ष में प्रचार और कई फेक वीडियो बनाने के लिए कहती थी। इस म्यूजिक वीडियो के लिए मुझे छोड़कर मेरे लगभग सभी इन्फ्लुएंसर साथी आईएसआई से सहमत हो गए थे। जब मैंने उन्हें बताया कि आप लोग जो दिखा रहे हैं, वह गलत है और वास्तविकता के बिल्कुल विपरीत है, तो मेरी यह बात उन्हें बहुत बुरी लगी। यही वह चीज थी, जिसने उन्हें मेरे खिलाफ सबसे ज्यादा उत्तेजित किया।”

ISI ने रची थी मेरी हत्या की साजिश: शायन अली

उन्होंने कहा, “मैंने हमेशा ISI और पाकिस्तानी सरकार के नकली अभियानों का हिस्सा बनने से इनकार किया है और जब भी वे मुझसे संपर्क करते थे तो मैं हर बार उन्हें मना कर देता था। चूँकि यह कश्मीर के बारे में था और यह एक बहुत बड़ा मुद्दा था, इसलिए मेरे मना करने पर उन्हें मुझ पर शक होने लगा। इसके बाद वे मेरे साथ रॉ एजेंट की तरह व्यवहार करने लगे।”

अली ने कहा कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI ने उन्हें मारने की भी साजिश रची थी। उन्होंने बताया, “मैंने सितंबर 2019 में पाकिस्तान छोड़ दिया, लेकिन पाकिस्तान की स्थिति उस वक्त अभी जैसी नहीं थी। दिसंबर 2019 में, जब पीटीए (पाकिस्तान दूरसंचार प्राधिकरण) को पाकिस्तान के खिलाफ मेरे सोशल मीडिया पोस्ट के बारे में पता चला, तो उन्होंने सिंध पुलिस को मुझे गिरफ्तार करने के लिए भेजा और यही वह समय था जब उन्हें पता चला कि मैं अब पाकिस्तान में नहीं रह रहा हूँ।”

शायन अली के अनुसार, पाकिस्तानी सेना को यह जानकर झटका लगा कि वह उनकी पहुँच से बहुत दूर हैं। इसके बाद उन्हें लगातार जान से मारने की धमकी और सेंसरशिप का सामना करना पड़ता है। शायन अली भारत और हिंदुओं से बहुत प्यार करते हैं। उनके ट्विटर अकाउंट पर कई ऐसे वीडियो हैं, जो इस बात को साबित करते हैं। उन्होंने हनुमान चालीसा पढ़ते हुए भी अपनी एक वीडियो साझा की है। इसके अलावा वह भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी बहुत पसंद करते हैं।

इन्फ्लुएंसर को आईएसआई, पाकिस्तानी सेना को बेनकाब करने पर मिली धमकी

इन्फ्लुएंसर ने जोर देकर यह भी कहा, “आईएसआई और पाकिस्तानी सेना का मानना है कि वे भगवान से ऊपर हैं लेकिन वे भूल गए हैं कि भगवान हमेशा सच के साथ होता है। भगवान सच बोलने वाले और बुराई का पर्दाफाश करने वाले की हमेशा रक्षा करता है।

उन्होंने आगे कहा, “आईएसआई ने मेरी आवाज को चुप कराने की पूरी कोशिश की, लेकिन भगवान भी चाहता था कि मैं पाकिस्तान के आतंकवादी मंसूबों का पूरी दुनिया के सामने पर्दाफाश करूँ। इसलिए उन्होंने मुझे धमकी भरे संदेश भेजकर और मेरी वेबसाइट पर प्रतिबंध लगाना जारी रखा। लेकिन भगवान ने मुझे आईएसआई और पाकिस्तानी सेना के हर जुल्म से बचाया। मैं अकेले यह लड़ाई लड़ रहा था और दूसरी तरफ पूरा पाकिस्तान था। सत्यमेव जयते।”

‘The Kerala Story हेरफेर वाले तथ्यों पर आधारित, इससे राज्य में हिंसा की आशंका’: सुप्रीम कोर्ट में बंगाल सरकार ने बैन को ठहराया जायज

लव जिहाद और धर्मांतरण पर आधारित फिल्म ‘द केरल स्टोरी (The Kerala Story)’ को लेकर विवाद जारी है। इस फिल्म को पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी की सरकार ने राज्य में बैन कर रखा है। इसको लेकर यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुँच गया है। सर्वोच्च न्यायालय में राज्य सरकार ने तर्क दिया कि केरल की इस कहानी में अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया है और यह फिल्म हेरफेर किए गए तथ्यों पर आधारित है। इससे राज्य में सांप्रदायिक वैमनस्य और कानून व्यवस्था से संबंधित स्थिति खड़ी हो सकती है।

ममता बनर्जी की सरकार ने जवाबी हलफनामे में अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा, “यह फिल्म हेरफेर किए गए तथ्यों पर आधारित है और इसमें कई दृश्यों में अभद्र भाषा है, जो सांप्रदायिक भावनाओं को आहत कर सकती है और समुदायों के बीच वैमनस्य पैदा कर सकती है। खुफिया सूचनाओं से पता चला है कि इससे कानून और व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न होगी।”

भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने शुक्रवार (12 मई 2023) को मौखिक रूप से टिप्पणी की थी कि यह फिल्म देश के बाकी हिस्सों में रिलीज हो चुकी है और पश्चिम बंगाल अलग नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने इस संबंध में पश्चिम बंगाल की सरकार से जवाब माँगा है। इसके बाद राज्य सरकार ने अपना जवाब पेश किया था। इस मामले की सुनवाई कल गुरुवार (18 मई 2023) को भी जारी रहेगी।

इस फिल्म के निर्माता ने राज्य में इस फिल्म को ना दिखाने के सरकार के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दी थी। अपनी याचिका में निर्माता ने पश्चिम बंगाल सिनेमा (विनियमन) अधिनियम, 1954 की धारा 6 (1) की संवैधानिकता को भी चुनौती दी है, जिसके तहत पश्चिम बंगाल सरकार ने फिल्म पर प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी किया था।

इस पर राज्य सरकार ने कहा कि फिल्म पर प्रतिबंध खुफिया सूचनाओं पर आधारित एक नीतिगत निर्णय है। इससे याचिकाकर्ताओं के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं हुआ है। याचिकाकर्ता के वित्तीय नुकसान को मौलिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं बताया जा सकता है। इसके अलावा, राज्य सरकार ने यह भी तर्क दिया कि पश्चिम बंगाल सिनेमा (विनियमन) अधिनियम के रूप में संवैधानिकता की एक धारणा है, जो उन फिल्म प्रदर्शनियों के लिए एक अपवाद बनाती है, जो शांति भंग कर सकती है।

बताते चलें कि पश्चिम बंगाल की तरह ही तमिलनाडु की एमके स्टालिन सरकार ने भी इस फिल्म को राज्य में दिखाने पर प्रतिबंध लगा दिया है। फिल्ममेकर्स ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी, जिस पर मंगलवार (16 मई 2023) को सुनवाई हुई। तमिलनाडु सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कहा है कि राज्य में ‘द केरल स्टोरी’ की स्क्रीनिंग पर कोई बैन नहीं लगाया गया है। 

तमिलनाडु सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में पेश किए गए अपने हलफनामे में कहा था कि यह फिल्म 5 मई 2023 को 19 मल्टीप्लेक्स में रिलीज की गई थी, लेकिन फिल्म में जाने-पहचाने कलाकारों के न होने, कलाकारों के खराब प्रदर्शन और दर्शकों की संख्या में कमी के कारण मल्टीप्लेक्स मालिकों ने खुद ही 7 मई 2023 को फिल्म की स्क्रीनिंग बंद कर दी थी।

हलफनामे में आगे दावा किया गया है कि राज्य में फिल्म की स्क्रीनिंग करने वाले सभी सिनेमाघरों के लिए सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए गए थे। रिलीज से पहले शहरों में जिला पुलिस अधीक्षकों और पुलिस आयुक्तों को राज्य की कानून व्यवस्था पर नजर रखने के लिए अलर्ट जारी किया था। 25 डीएसपी सहित 965 से ज्यादा पुलिसकर्मियों को फिल्म दिखाने वाले 21 सिनेमाघरों की सुरक्षा के लिए तैनात किया गया था।

अंधेरे में देवी बन प्रकट होता था अल्ताफ, रुपयों का ढेर लगाने का आशीर्वाद देकर चला जाता: तांत्रिक बन मूसा चला रहा था ठगी का गिरोह, 10 गिरफ्तार

गुजरात के गिर सोमनाथ में तांत्रिक बनकर लोगों को लाखों रुपए का चूना लगाने वाले गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। गुजरात पुलिस ने अल्ताफ और मूसा समेत 10 ठगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस अब भी गिरोह के 4 सदस्यों की तलाश कर रही है। जानकारी के मुताबिक बहरूपिए अल्ताफ और मूसा तंत्र विद्या से पैसा बढ़ा देने का लालच देकर लोगों से ठगी करते थे। ठगों के पास से काफी मात्रा में सोना, नकदी और कई सामान बरामद हुए हैं।

पुलिस के अनुसार पूरा गिरोह फिल्मी अंदाज में ठगी की घटना को अंजाम देता था। लोगों को विश्वास में लेने के लिए अंधेरे और छल का सहारा लिया जाता था। अल्ताफ मूसा देवी का रूप धरकर अंधेरे में प्रकट होता था और रुपयों का ढेर लगा देने का आशीर्वाद देता हुआ चला जाता था। गैंग के ही कुछ लोग नकली पुलिस बन जाते थे और फर्जी छापेमारी कर रकम हजम कर जाते थे।

दी गई शिकायत के अनुसार 2 साल पहले अल्ताफ मूसा ने राजकोट में हरीशभाई साधु (हरकिशन गोस्वामी) से मित्रता की। भगवा कपड़ों को देखकर अल्ताफ ने हरीशभाई से पूछा कि क्या वो कोई आश्रम चला रहे हैं। इस पर हरीशभाई ने कहा कि पैसों की कमी की वजह से वे आश्रम नहीं चला पा रहे हैं। पैसों की कमी की बात सुनते ही अल्ताफ ने उन्हें झाँसे में लेना शुरू किया। उसने कहा कि उसके पिता मूसा बापू बहुत बड़े तांत्रिक हैं, जो तंत्र विद्या से 500 करोड़ रुपए तक जमा करा सकते हैं। उसने दावा किया कि मूसा को माताजी खुद दर्शन देती हैं।

दी गई जानकारी के अनुसार हरीश भाई को झाँसे में लेकर अल्ताफ अपने गाँव पहुँचा। रात के अंधेरे में अल्ताफ के अब्बू मूसा ने एक कुंड बनाकर हरीश भाई को उसमें प्रवेश करा दिया और मंत्र जाप के बाद माताजी के प्रकट होने का दावा करने लगा। अंधेरे का फायदा उठाकर अल्ताफ ने लंबे बाँस की मदद से अपना शरीर 8 फीट से भी ऊँचा कर लिया। उसने अपने सिर पर हेलमेट पहन लिया और काले कपड़े पहनकर सामने प्रकट हुआ।

मूसा ने कहा कि माता उसे 500 करोड़ रुपए का आशीर्वाद दे सकती हैं, लेकिन इसके लिए उन्हें कुछ विधि और प्रक्रियाओं से होकर गुजरना पड़ेगा। बाप-बेटे ने हरीश भाई से प्रक्रिया पूरी करने के लिए सामाग्री के नाम पर 5 लाख रुपए ऐंठ लिए। इसके बाद उसने और पैसों की माँग की। इस दौरान विश्वास बनाए रखने के लिए हरीश भाई को अल्ताफ माता जी बनकर दर्शन देता रहा। अल्ताफ और मूसा ने हरीश भाई से कहा कि आपके घर पर अनुष्ठान पूरा हो पाएगा और तभी 500 करोड़ रुपए मिल सकेंगे।

उन्होंने हरीश भाई से लिए पैसों में कुछ रकम मिला कर उन्हें लौटा दिया और घर पर होने वाले अनुष्ठान की तैयारी के लिए कहा। अनुष्ठान वाले दिन हरीश भाई के घर पहुँचे मूसा ने प्रक्रिया के लिए लाए गए सामान की जाँच करने के लिए कहा। जाँच के दौरान ‘चमत्कारिक तेल’ की शीशी खाली थी। इस पर मूसा ने कहा कि इस तेल को संभवत: रास्ते में किसी डायन ने पी लिया है। तेल दोबारा मँगवाने के लिए 5.5 लाख रुपए की आवश्यकता होगी। हरीश भाई ने किसी तरह 5.5 लाख रुपए जुटाए और मूसा को दे दिया।

इस घटना के बाद मूसा ने हरीश भाई को फिर से अपने गाँव में बुलाया, जहाँ एक बार फिर से माताजी प्रकट हुईं। इस बार माता जी बनी अल्ताफ ने समारोह के अंतिम चरण में प्रवेश के लिए कुँवारी कन्या की खोपड़ी (कलिकुल) माँगी। 3 लाख रुपए लेकर उसी व्यक्ति ने कुँवारी कन्या की खोपड़ी दे दी, जिसने चमत्कारी तेल का इंतजाम किया था। मूसा ने खोपड़ी पर पानी छिड़क कर इसकी जाँच की और इसे सही पाया।

इसके बाद सभी हरीश भाई के घर बाकी की रस्म अदा करने के लिए रवाना हुए। रास्ते में पुलिस ने छापा मारा और मूसा को गिरफ्तार कर लिया गया। कुछ दिनों के बाद हरीश भाई को तांत्रिक बने मूसा का फोन आया। मूसा ने कहा कि प्रक्रिया पूरी न होने की वजह से माता नाराज हो गई हैं। अब अनुष्ठान पूरा नहीं हो सकता और फोन काट दिया। दरअसल, रास्ते में छापा मारने वाली पुलिस भी इस फर्जी तांत्रिक के गिरोह के लोग ही थे। तांत्रिक ने अपनी झूठी गिरफ्तारी दिखाई थी। गिरोह ने अलग-अलग तरीके से हरीश भाई से करीब 15 लाख रुपए लूट लिए थे।

इसके बाद हरीश भाई ने पुलिस की मदद ली। पुलिस की तरफ से दी गई जानकारी के मुताबिक तांत्रिक क्रिया के नाम पर मूसा और उसे गिरोह ने लोगों से अब तक 90 लाख रुपए से ज्यादा की रकम ऐंठी है। उसने बिना जहर वाले साँप से कटवाकर अपने ही दोस्त को चुना लगाया और माता जी को चढ़ाने के नाम पर सोने का साँप बनवा लिया।

पुलिस हिरासत में मूसा ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। दोस्तों के अलावा उसने राजकोट के कुवड़वा के रहने वाले एक शख्स को 700 करोड़ रुपए बरसाने के बहाने 25 लाख रुपए नकद और 11 तोले से अधिक के सोने का साँप ऐंठ लिया।इससे पहले मूसा ने 2500 करोड़ रुपये जमा करने का लालच देकर राजकोट के ही एक व्यक्ति से 35 लाख नकद और 32 तोले वजनी सोने का साँप खरीदवा लिया।

इनके अलावा मूसा और उसके गिरोह ने अहमदाबाद के भी कई लोगों से लाखों की ठगी की है। पुलिस ने इनके पास से नकली खोपड़ी, साँप, तांत्रिक क्रिया में प्रयोग होने वाले सामान, मोबाइल और नगदी बरामद किया। पुलिस ने मूसा के पास 6.46 लाख रुपए की नगदी, 21 तोला सोना समेत 19 लाख की संपत्ति जब्त की है। मूसा के अलावा पुलिस ने अल्ताफ मूसा, सिकंदर शमदार, अब्दुल उर्फ ​​वकील बलोच, अब्दुल मजगुल, इम्तियाज उर्फ ​​यूसुफ समा, नजीम रफाई, जगदीश तिलावत, दीपक चौहान और वाजेसिंह उर्फ ​​कालू जाला नाम के लोगों को गिरफ्तार किया है।

घटना सामने आने के बाद गुजरात पुलिस ने लोगों से ऐसे ठगों से सावधान रहने और उनके बहकावे में न आने की अपील की है। पुलिस ने कहा है कि यदि कोई इस तरह की ठकी का शिकार हुआ है तो बिना डरे पुलिस के पास आ सकता है ताकि पुलिस पीड़ित की मदद कर सके।

हिंदुओं के मंदिर, हिंदुओं का ही कंट्रोल: मध्य प्रदेश में शिवराज सरकार का ऐतिहासिक फैसला, कैबिनेट की लगी मुहर

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्य के हिन्दू मंदिरों को लेकर किए गए अपने वादे को निभाया है। अप्रैल 2023 में उन्होंने ऐलान किया था कि मंदिरों की गतिविधियों पर सरकार का कोई नियंत्रण नहीं रहेगा। मंदिर की जमीनों को नीलाम कलेक्टर नहीं बल्कि पुजारी कर सकेंगे। साथ ही उन्होंने निजी मंदिरों के पुजारियों को भी सम्मानजनक मानदेय देने की बात कही थी। लगभग एक महीने बाद उनकी सरकार ने इन फैसलों पर मुहर लगा दी है।

भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल ने मध्य प्रदेश की कैबिनेट द्वारा लिए गए फैसले की जानकारी देते हुए बुधवार (17 मई, 2023) को बताया कि ऐसे मंदिर जिनके प्रबंधन का कार्य सरकार देख रही है, वहाँ 10 एकड़ तक की कृषि क्षेत्र वाली जमीन से होने वाली आय पुजारियों की होगी। बाक़ी जमीनों को खेती के लिए नीलम किया जाएगा और उनसे आने वाले रुपए को मंदिर के बैंक खाते में डाला जाएगा। मंदिर की जमीन को अतिक्रमण मुक्त बनाने के लिए भी अभियान शुरू होगा।

हिन्दू मंदिरों के लिए मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार लगातार काम कर रही है। पिछले साल पुजारियों को बढ़ा हुआ मानदेय देने के आदेश जारी किए गए थे। जिन मंदिरों या पुजारियों के पास कृषि योग्य भूमि नहीं है, उन्हें 5000 रुपए का मासिक भत्ता दिया जा रहा है। जिन मंदिरों या पुजारियों के पास 5 एकड़ कृषि भूमि है, उन्हें भी ढाई हजार रुपए हर महीने मिलेंगे। गरीब पुजारियों के जीवन-यापन के लिए राज्य सरकार ने ये निर्णय लिया है।

इसके अलावा मध्य प्रदेश की कैबिनेट ने और भी बड़े फैसले लिए हैं। ‘मुख्यमंत्री लाड़ली बहन योजना’ के तहत राज्य की महिलाओं को हर महीने 1000 रुपए दिए जाने के लिए बजट का आवंटन भी कर दिया गया है। सीएम चौहान ने बताया कि ‘मुख्यमंत्री सीखो-कमाओ योजना’ के तहत युवक-युवती काम सीखेंगे और साथ में ₹8 हजार से ₹10 हजार तक प्रतिमाह कमाएँगे भी। उन्होंने बेरोजगारी भत्ता की जगह स्किल डेवलपमेंट करने और उसके बदले पैसे देने पर जोर दिया।

‘बंगाल की अवैध पटाखा फैक्ट्री में पंचायत चुनाव के लिए बन रहे थे बम’: BJP नेता शुभेंदु अधिकारी ने ममता सरकार को बताया जिम्मेदार, NIA जाँच को लेकर हाई कोर्ट में याचिका

पश्चिम बंगाल के पूर्व मेदिनीपुर जिले में मंगलवार (16 मई, 2023) को एक फैक्ट्री में हुए धमाके को लेकर भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने सनसनीखेज आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि इस अवैध फैक्ट्री में बम बनाए जाते थे। बताते चलें कि विस्फोट में अब तक 9 लोगों की मौत हो चुकी है। बंगाल BJP इसकी NIA से जाँच कराने की माँग की है।

इन बमों का आगामी पंचायत चुनाव में इस्तेमाल की आशंका की बात करते हुए शुभेंदु अधिकारी ने कहा, “TMC और फैक्ट्री मालिक की मिलीभगत है। भानु बाग एक स्थानीय टीएमसी नेता है और 2013-18 में पंचायत सदस्य था। उसे ममता बनर्जी से सुरक्षा प्राप्त है।”

राज्य की मुख्यमंत्री सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) की सर्वेसर्वा ममता बनर्जी से उन्होंने इस्तीफे की माँग कही। उन्होंने कहा, “सीएम को अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। मैंने इस मामले की एनआईए जाँच के लिए याचिका दायर की है।”

बताते चलें कि इस विस्फोट की NIA जाँच की माँग वाली याचिका को बंगाल विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी और बंगाल भाजपा के अध्यक्ष सुकांत मजूमदार की अगुवाई में पार्टी ने कलकत्ता हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिलि की है। इस मामले में हाईकोर्ट गुरुवार (18 मई 2023) को सुनवाई करेगा। मेदिनीपुर के एगरा स्थित पटाखा फैक्ट्री में हुए विस्फोट में 9 लोगों की जान चली गई है।

शुभेंदु अधिकारी ने इस विस्फोट के लिए राज्य की ममता बनर्जी सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। इसके साथ ही उन्होंने मरने वालों के लिए मुआवजे की माँग की है। शुभेंदु अधिकारी ने कहा, “पुलिस और राज्य सरकार इस घटना के लिए जिम्मेदार है। हमने पटाखे फैक्टरी में जान गँवाने वाले लोगों के लिए राज्य सरकार से प्रत्येक के लिए 10 लाख रुपए मुआवजे की माँग की है।”

इस संबंध में मजूमदार ने केंद्रीय गृहमंत्रालय को भी एक पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने लिखा है कि पूर्वी मेदिनीपुर के एगरा में हुए बम धमाके की जाँच NIA से कराई जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके। सुकांत मजूमदार ने आगे लिखा है कि घटनास्थल के आसपास कई अवैध पटाखे बनाने वाली फैक्ट्रियाँ हैं। इस तरह की घटनाएँ इलाके के लोगों की सुरक्षा के लिए चिंताजनक हैं।

बीजेपी नेता ने आगे लिखा है कि घटना के संदर्भ में यह जानना जरूरी है कि यह किसी ऐसे नेटवर्क का हिस्सा तो नहीं, जो गैरकानूनी गतिविधियों में संलिप्त है। सुकांत मजूमदार का कहना है कि राज्य में पंचायत चुनाव नजदीक आ रहे हैं, ऐसे में अवैध गतिविधियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार से दखल देने और एनआईए जाँच की अपील की है।

बता दें घटनास्थल का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक धमाका इतना शक्तिशाली था कि जिस रिहायशी इमारत में यह फैक्ट्री चलाई जा रही थी वह पूरी तरह ढह गई। वीडियो में धमाके के बाद जली हुई फैक्ट्री और खेतों व आस पास के इलाके में पड़े अधजले शव देखे जा सकते हैं। सीएम ममता ने मृतकों के परिजनों को ढाई-ढाई लाख रुपए की आर्थिक सहायता देने का ऐलान किया है।

इस्लामी ब्रेनवॉश और प्रेमियों की शादी में फर्क भूला दैनिक भास्कर, ‘केरल स्टोरी’ से की बरेली में 79 मुस्लिम लड़कियों के हिंदू बनने की तुलना: पंडित शंखधार को किया बदनाम

फिल्म ‘The Kerala Story’ ने 13 दिनों में भारत में 157 करोड़ रुपए की कमाई कर ली है। फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे हिन्दू लड़कियों को पहले प्यार के जाल में फँसाया जाता है, फिर उनका इस्लामी धर्मांतरण करा कर उनसे निकाह किया जाता है, इसके बाद उनकी तस्करी कर के आतंकी संगठन ISIS के पास भेज दिया जाता है। उनका ब्रेनवॉश किया जाता है। उन्हें आतंकियों का सेक्स स्लेव बना दिया जाता है। अब ‘दैनिक भास्कर‘ ने इस घटना की तुलना पंडित शंखधार के कार्यों से कर दी है।

56 वर्षीय पंडित शंखधार उत्तर प्रदेश के बरेली के मढ़ीनाथ स्थित ‘अगस्त्य मुनि आश्रम’ में रहते हैं। उनका असली नाम कृष्ण कुमार शर्मा है। वो ऐसे प्रेमी जोड़ों की शादी कराते हैं, जिनमें लड़के हिन्दू होते हैं और लड़की मुस्लिम। ‘दैनिक भास्कर’ ने दावा किया है कि अब तक वो ऐसी 78 शादियाँ करा चुके हैं (अब ये आँकड़ा 79 हो गया है)। अख़बार ने इसे ये कह कर पेश किया है कि वहाँ मुस्लिम लड़कियों को पहले हिन्दू बना दिया जाता है, फिर मुस्लिम लड़के से उनकी शादी करवा दी जाती है।

पहली नजर में पढ़ कर ऐसा लगता है कि मुस्लिम लड़कियों को फँसाने का कोई धंधा चल रहा हो। ये सब इसके बावजूद लिखा गया है, जब अख़बार में ही इसका जिक्र है कि एक मुस्लिम लड़की ने 2013 में खुद उनसे संपर्क किया था और उसके द्वारा जोर दिए जाने के बाद ही उन्होंने वो शादी करवाई थी। उन्हें हत्या की धमकियाँ मिल रही हैं, इसके बावजूद ‘दैनिक भास्कर’ उनके खिलाफ दुष्प्रचार में लगा है। उन्होंने खुद बताया है कि शादी के लिए उनसे मुस्लिम लड़कियाँ या हिन्दू लड़के संपर्क करते हैं, सबसे पहले दस्तावेज जाँचा जाता है कि वो बालिग हैं या नहीं।

‘दैनिक भास्कर’ को पता होना चाहिए कि व्यवस्थित ढंग से मौलानाओं द्वारा मुस्लिम युवाओं को हिन्दू लड़कियों को फँसाने के लिए तैयार करना और स्वेच्छा से किसी प्रेमी जोड़े द्वारा शादी के लिए किसी पंडित से संपर्क करना – इन दोनों में अंतर है। ‘The Kerala Story’ एक ऐसे ही नेटवर्क का पर्दाफाश करती है, जबकि पंडित कृष्ण कुमार शर्मा उर्फ़ शंखधार कट्टरपंथियों की धमकी के बावजूद कानूनी प्रक्रिया का पालन करवाते हुए उन प्रेमी जोड़ों की मदद कर रहे हैं जिनका कोई नहीं है।

ऑपइंडिया ने पंडित शंखधार से की बात, ‘दैनिक भास्कर’ के प्रोपेगंडा का पर्दाफाश

ऑपइंडिया ने बरेली के पंडित शंखधार से बात कर के उनके पक्ष को जाना। उन्होंने बताया कि 2013 से उन्होंने ये कार्य शुरू किया था। इसका कारण था एक मुस्लिम लड़की द्वारा उनसे संपर्क करना। उक्त मुस्लिम लड़की ने उस समय उनसे कहा था कि एक हिन्दू लड़के ने प्यार कर के उसे धोखा दे दिया। लड़के के परिवार से बात करने पर पता चला कि वो लोग लड़की के मुस्लिम होने के कारण शादी के लिए राज़ी नहीं थे।

ऐसे में पंडित शंखधार ने उन्हें समझाने का प्रयास किया। इसके बाद उस लड़की ने पुलिस में शिकायत कर दी। जबकि लड़की कह रही थी कि वो जब भी शादी करेगी तो अपनी प्रेमी से ही, वरना मौत को भी गले लगा सकती है। लड़की ने पुलिस को दी गई शिकायत में यौन शोषण कर शादी से मुकरने का आरोप लड़के पर लगाया। इसके बाद लड़के के घर वालों ने पंडित कृष्ण कुमार शर्मा उर्फ़ पंडित शंखधार से संपर्क किया। लड़की भी राज़ी थी, ऐसे में उन्होंने शादी करा दी।

उसी समय से ये सिलसिला शुरू हो गया और फेसबुक पर इस प्रकरण को लेकर डाले जाने के बाद ऐसे प्रेमी जोड़ों ने उनसे संपर्क करना शुरू कर दिया। जो शादी कराने के लिए आते थे, ना चाहते हुए भी उनकी समस्याओं को सुन कर पंडित शंखधार को विवश होकर उनकी शादी करानी पड़ती थी। पंडित शंखधार बताते हैं कि कैसे काफी हिन्दू लड़कियाँ भी मुस्लिमों से शादी करने के लिए इस्लाम अपना रही हैं और निकाह कर रही है, फिर मुस्लिम लड़कियों के मामले में ऐसा क्यों नहीं हो सकता अगर चीजें स्वेच्छा से हो रही हों?

पंडित शंखधार बताते हैं कि कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए ये काम तब से आसानी से होने लगा है, जब से उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार बनी। उनका कहना है कि इससे लोगों के मन से अपराधियों का भय निकलना शुरू हुआ मुस्लिम लड़कियाँ भी सोचने लगीं कि सीएम योगी की दुरुस्त कानून व्यवस्था वाली सरकार में कोई अनहोनी नहीं होगी और कोई उनका कुछ बिगाड़ नहीं सकता, तो वो भी आगे आने लगीं।

पंडित शंखधार कहते हैं कि लोगों ने सपने में भी नहीं सोची थी कि यूपी में कानून व्यवस्था इतनी चुस्त-दुरुस्त हो सकती है। वो बताते हैं कि रात के समय भी लड़कियाँ यूपी में कहीं घूमने निकल सकती हैं, उनके साथ कोई छेड़छाड़ नहीं कर सकता। वो कहते हैं कि इसी कारण मुस्लिम लड़कियों का भी मनोबल बढ़ा और उन्हें लगने लगा कि हिन्दू धर्म में जाकर वो बहुविवाह की प्रथा से बच जाएँगी, तीन तलाक-हलाला जैसी शर्मनाक चीजों से उन्हें नहीं गुजरना होगा।

उन्होंने कहा कि वो अधिकतर ऐसे मामलों में मना ही करते हैं, लेकिन कुछ मामलों में विवश होकर उन्हें शादी करानी पड़ती है क्योंकि लड़का-लड़की कहने लगते हैं कि उनका पास कोई और विकल्प नहीं है और वो आत्महत्या के लिए मजबूर हो जाएँगे। पंडित शंखधार ऐसी शादियाँ कराने से पहले वकीलों से सलाह-मशवरा करते हैं और सारे कागजात जाँचते हैं। उन्हें सौ-हजार में दक्षिणा मिल जाती है। कभी उनके पैसे भी लग जाते हैं।

उन्होंने बताया कि उनके पास कई ऐसे प्रेमी जोड़े और मुस्लिम लड़कियाँ आईं, जो घर छोड़ चुके थे और इधर-उधर कई दिनों से ठोकर खा रहे थे। कुछ को वकीलों ने भी धोखा दे दिया। जिनकी-जिनकी शादी हुई है, उन सभी के शपथ-पत्र की प्रतियाँ उनके पास हैं। उन्होंने बताया कि अधिकतर मामलों में मुस्लिम लड़की और उनके हिन्दू प्रेमी साथ ही आते हैं। ‘बजरंग दल’ और ‘हिन्दू युवा वाहिनी’ जैसे संगठनों से वो संपर्क करते हैं, संगठन के लोग उन्हें लेकर पंडित शंखधार के पास आ जाते हैं।

पंडित शंखधार ‘विश्व हिन्दू परिषद (VHP)’ के महानगर प्रवर्तक प्रमुख के रूप में कार्यरत हैं। पहले वो ‘हिन्दू युवा वाहिनी’ के जिला प्रभारी थे। ये संगठन लंबे समय तक गोरखपुर के सांसद रहे योगी आदित्यनाथ का था, जिन्होंने मुख्यमंत्री बनने के बाद इसे निष्क्रिय कर दिया। पंडित शंखधार, हिन्दू नेता कमलेश तिवारी से भी जुड़े थे। याद दिला दें कि इस्लामी कट्टरपंथियों ने पैगंबर मुहम्मद के अपमान का आरोप लगा कर कमलेश तिवारी की लखनऊ में हत्या कर दी थी।

पंडित शंखधार फेसबुक के माध्यम से भी कमलेश तिवारी से जुड़े हुए थे। दोनों की आपस में बातचीत भी होती रहती थी। पंडित शंखधार कहते हैं कि हिंदुत्व से उनका जुड़ाव शुरू से रहा है और वो देखते आ रहे हैं कि कैसे तुष्टिकरण के कारण हिन्दुओं के साथ कीड़े-मकौड़ो जैसा व्यवहार होता है। उन्होंने कहा कि जब पीड़ित हिन्दू होते हैं तो उन्हें कोई पूछता ही नहीं, लेकिन किसी मुस्लिम के साथ कुछ हो जाए तो कॉन्ग्रेसी-वामपंथी हल्ला मचा देते हैं, कैंडल मार्च होने लगता है।

पंडित शंखधार ने कहा, “ये हिन्दुओं का ही देश है और हिन्दुओं को ही कोई सुनने वाला नहीं। ऐसी परिस्थितियों से मुझे बड़ा दुःख होता था। लोकतंत्र में सभी को समानता का अधिकार होना चाहिए।” ‘दैनिक भास्कर’ ने इन चीजों की तुलना ‘The Kerala Story’ से कर दी, जहाँ अंत में हिन्दू लड़कियों की काफी दुर्दशा होती है। जबकि पंडित शंखधार के मामले में मुस्लिम लड़कियाँ खुश रहती हैं, हिन्दू प्रेमी से शादी कर के शरिया के बंधनों से मुक्त हो जाती हैं।

पंडित शंखधार कहते हैं कि इस्लामी आतंकवादी की भट्ठियों में हिन्दू लड़कियों को झोंका जा रहा है, उन्हें बहला-फुसला कर, उनका ब्रेनवॉश कर के और उन पर दबाव बना कर एक षड्यंत्र के तहत उन्हें फँसाया जाता है। यही ‘The Kerala Story’ में होता है। जबकि पंडित शंखधार जो कर रहे, उससे इसका जमीन-आसमान का अंतर है। वो कहते हैं कि उनके यहाँ ऐसा कुछ नहीं होता। यहाँ कोई ब्रेनवॉश नहीं होता, लड़कियाँ अपनी मर्जी से यहाँ आती हैं, वो इस्लामी रीति-रिवाजों से त्रस्त होकर यहाँ आती हैं।

वहाँ आतंकवादियों द्वारा पोषित तत्व ऐसे कांडों को अंजाम देते हैं, जबकि इधर लड़कियाँ अच्छे जीवन की चाह में आती हैं। पंडित शंखधार इसका उदाहरण देते हुए कहते हैं कि कई ऐसी लड़कियाँ हैं जो नृत्य-संगीत का भी प्रशिक्षण ले रही हैं, जो इस्लाम में हराम है और मुस्लिम परिवार में रहते हुए ये सब संभव नहीं है। ये मुस्लिम लड़कियाँ नाचती-जाती हैं, आनंद करती हैं और अपनी आज़ादी का लुत्फ़ उठाती हैं। सभी सुखी जीवन जी रही हैं, जबकि ‘The Kerala Story’ वाली लड़कियों के लिए मौत या बदतर ज़िन्दगी ही विकल्प बचता है।

‘दैनिक भास्कर’ ने पंडित शंखधार द्वारा किए जा रहे कार्य को ऐसे पेश किया जैसे वही हिन्दू लड़कों को भेज रहे हों कि जाओ मुस्लिम लड़कियों का ब्रेनवॉश करो। यहाँ न कोई आतंकी संगठन है, न कोई व्यवस्थित नेटवर्क। वो चुनौती देते हैं कि एक भी ऐसा प्रेमी जोड़ा निकल जाए जिसे पहले से उन्होंने कुछ सिखाया हो, तो वो ये काम छोड़ देंगे। उन्होंने बताया कि कई बार हवन सामग्रियों से लेकर अन्य चीजों के लिए उन्हें अपनी जेब से पैसे खर्च करने पड़ते हैं।

क्या उन्हें पुलिस-प्रशासन का सहयोग मिलता है? पंडित शंखधार इसका जवाब देते हुए कहते हैं – कतई नहीं। उनका कहना है कि पुलिस-प्रशासन तो इस फ़िराक में रहता है कि कब कोई गड़बड़ी निकले और उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। पंडित शंखधार पर एक नाबालिग की शादी कराने का मामला भी चल रहा है, लेकिन उन्होंने बताया कि लड़की ने आधार कार्ड, वोटर आईडी और श्रम कार्ड दिया था उसमें वो बालिग थी। लेकिन, उसके परिजनों ने 10वीं की मार्कशीट के आधार पर उसे नाबालिग साबित करने की कोशिश की। उससे पहले लड़के को मुस्लिम बनने के लिए धमकाया गया।

लड़के ने मना कर दिया तो केस कर दिया गया। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में जब से धर्मांतरण के खिलाफ कानून बना है, तब से वो लड़की को सबसे पहले जिलाधिकारी के पास भेजते हैं। वो वकीलों से जाकर लिखवाती हैं कि वो हिन्दू धर्म में आना चाहती हैं, फिर डीएम से अनुमति मिलने के बाद शादी होती है। धमकियों पर पंडित शंखधार कहते हैं कि जो लोग मानवता में विश्वास नहीं रखते उनसे उन्हें खतरा तो है। उन्होंने कहा कि वो महीने में 1 प्रतिशत ही घर से निकलते हैं और भगवान पर विश्वास रख कर अपना काम कर रहे हैं।

इस्लामी ब्रेनवॉश कितना खतरनाक? सौरव को पहले सलीम बनाया, फिर ‘आतंकी प्रोफेसर’; बीवी कह रही- मेरा रब लाएगा उन्हें बाहर

इस्लामी कट्टरपंथियों का ब्रेनवॉश कितना खतरनाक होता है, यह फिल्म द केरल स्टोरी (The Kerala Story) में दिखाया गया है। केरल में गैर मुस्लिम लड़कियों ने ब्रेनवॉश के बाद न केवल धर्म बदला, बल्कि इस्लामिक स्टेट जैसे खतरनाक आतंकी संगठन का हथियार भी बन गईं। इस खतरनाक ब्रेनवॉश का एक रूप मध्य प्रदेश में हिज्ब-उत-तहरीर (HUT) के पर्दाफाश के बाद भी सामने आया है। भोपल के सौरभ राजवैद्य को पहले मोहम्मद सलीम बनाया गया। फिर वह भारत को इस्लामिक मुल्क बनाने के मिशन पर चल निकला। अब उसके गिरफ्तार होने के बाद उसकी बीवी रायला कह रही है कि उसके शौहर को उसका रब बाहर लाएगा।

रायला का धर्मांतरण शादी के बाद सौरभ ने ही करवाया था। पहले उसका नाम मानसी हुआ करता था। HUT के कट्‌टरपंथी सरगना सौरभ उर्फ मोहम्मद सलीम की गिरफ्तारी के बाद से उसकी बीवी और दोनों बेटे (यूसुफ और इस्माइल) भी हैदराबाद में ATS की निगरानी में हैं। रायला का कहना है कि उसे इस्लाम कबूल करने का कोई मलाल नहीं है। इस समय वह मुश्किल में है, लेकिन उसे अल्लाह पर पूरा भरोसा है।

रायला मध्य प्रदेश के बुरहानपुर की रहने वाली है। भोपाल में कम्यूटर साइंस में ग्रेजुएट है और एमबीए भी किया। 2010 में एक प्राइवेट कॉलेज में नौकरी करने के दौरान उसकी पहचान सौरभ से हुई थी। फिर दोनों ने शादी कर ली। दैनिक भास्कर से बातचीत में रायला ने सलीम पर देशद्रो​ह के आरोप को लेकर कहा, “पहली बात तो उन्हें सलीम नहीं, डॉक्टर सलीम कहिए। वह पीएचडी हैं और एक कॉलेज में नौकरी करते थे। उनके पास दूसरी चीजों के लिए वक्त ही नहीं था। एटीएस वाले सोच रहे हैं कि कुछ मिल जाए तो हम केस बना देंगे। क्या मिला मेरे घर से? बच्चों की बंदूकें उठाकर ले गए। आपने किसी का पूरा करियर बर्बाद कर दिया, कभी सोचा उसके छोटे-छोटे बच्चे हैं उनका क्या होगा?”

सलीम की देश विरोधी गतिविधियों को लेकर जाँच एजेंसी के पास सबूत होने पर वह कहती है, “अगर ऐसा होता, तो मेरे शौहर मुझे कभी बताते नहीं? क्या मुझे उनकी गतिविधियों पर संदेह नहीं होता। हम केवल एक नॉर्मल सिटीजन की लाइफ जी रहे थे। केवल इस्लाम कबूल करने के कारण एटीएस हमें परेशान कर रही है। एटीएस ने मेरे शौहर की पीएचडी दाँव पर लगा दी, उनकी जॉब दाँव पर लगा दी। बताइए क्या हम अपने घर में सुरक्षित हैं? किताबें भी क्या हम उनसे पूछकर पढ़ें कि हमें क्या पढ़ना है और क्या नहीं पढ़ना है?”

शौहर सलीम पर लगे आरोपों को झूठा बताते हुए रायला ने कहा, “उनके पास पॉवर है, तो क्या वे किसी भी आम इंसान की जिंदगी बर्बाद कर देंगे? अल्लाह के यहाँ क्या जवाब दोगे? लानत होगी इनको? औलादें इनकी भी हैं, जवाब इनको भी देना है।” उसने आगे कहा, “इन लोगों को मेरे बच्चों की बद्दुआ लगेगी। अल्लाह पर भरोसा है कि वो इस मुश्किल दौर उन्हें (सलीम) बाहर निकालेगा।”

कमाल ने किया ब्रेनवॉश, जाकिर नाईक ने धर्मांतरण

इससे पहले मीडिया को सौरभ के माता-पिता ने बताया था कि वीआईटी कॉलेज में पढ़ाने के दौरान सौरभ की मुलाकात प्रोफेसर कमाल से हुई थी। कमाल ने ही उसका ब्रेनवॉश किया और उसकी मुलाकात मुंबई ले जाकर जाकिर नाईक से करवाई। पिता के अनुसार, नाईक ने भोपाल में कई लोगों को कन्वर्ट किया था। उनके बेटे के धर्मांतरण में भी नाईक का हाथ था।

‘मंत्री सौरभ भारद्वाज के इशारे पर ऑफिस तोड़ा, संवेदनशील रिकॉर्ड की फोटोकॉपी हुई’: CM केजरीवाल के खिलाफ भ्रष्टाचार की जाँच कर रहे सतर्कता अधिकारी का दावा

सतर्कता (Vigilance) के विशेष सचिव वाईवीवीजे राजशेखर ने केंद्रीय गृह मंत्रालय, दिल्ली के भ्रष्टाचार निरोधक शाखा और उपराज्यपाल कार्यालय को एक पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने अपने कार्यालय में रात में तोड़ने, आबकारी नीति की जाँच, मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के आवास के नवीनीकरण और संवेदनशील फाइलों की फोटोकॉपी किए जाने की शिकायत की है।

दरअसल, अरविंद केजरीवाल के मंत्री सौरभ भारद्वाज ने पिछले सप्ताह राजशेखर को हटा दिया था। इसके बाद 15-16 मई की रात 3 बजे दिल्ली सचिवालय में विशेष सचिव (सतर्कता) के कमरा नंबर 403 को तोड़ दिया गया था। पत्र में यह भी आशंका व्यक्त की गई है कि उनके कार्यालय की जासूसी की गई हो सकती है।

अपने पत्र में राजशेखर ने कहा कि दिल्ली सरकार के मंत्री (सतर्कता) सौरभ भारद्वाज ने सहायक निदेशकों को भ्रष्टाचार के मामलों से संबंधित फाइलों को सतर्कता अधिकारी को जमा नहीं करने का निर्देश दिया था। यह पत्र उनके पुरानी रिपोर्ट का अगला हिस्सा है।

पत्र में कहा गया है, “माननीय मंत्री के ये निर्देश जब दिनांक 15.05.2023 को पूर्वाह्न 11.30 बजे प्राप्त हुए, उस समय अधोहस्ताक्षरी के गोपनीय खंड में लगभग 76 फाइलें थीं। इन फाइलों को माननीय मंत्री (सतर्कता) के निर्देशानुसार जाँच किए बिना केवल रिकॉर्ड करने के लिए सचिव (सतर्कता) को भेज दिया गया था। ये ऐसा इसलिए किया गया, क्योंकि माननीय मंत्री ने अधोहस्ताक्षरी को फाइलों की जाँच नहीं करने का निर्देश दिया।”

राजशेखर का कहना है कि ‘principle of arms length’ के तहत किसी भी परिस्थिति में मंत्री को फाइलें स्थानांतरित करने का मानदंड नहीं है। इसका अनिवार्य रूप से मतलब है कि मंत्री को सतर्कता अधिकारी की जाँच से दूरी बनाए रखनी चाहिए, ताकि निष्पक्षता सुनिश्चित हो सके। हालाँकि, अपने-अपने काम को पूरा करने के सिद्धांत का उल्लंघन किया गया।

सतर्कता अधिकारी का कहना है कि सहायक निदेशक (सतर्कता) बुनियाद सिंह ने 15 मई की रात 9:14 बजे उन्हें फोन किया और कहा कि अधिकारियों को कुछ रिकॉर्ड निकालने के लिए सतर्कता अधिकारी के कमरे को खोलने का निर्देश दिया गया है। राजशेखर का कहना है कि उन्होंने फोन पर ही सौरभ भारद्वाज द्वारा दिए गए इन निर्देशों का और फाइलों को ले जाने का कड़ा विरोध किया।

पत्र में कहा गया है, “हालाँकि, प्रारंभिक जाँच से समझा जा सकता है कि श्री मनीष (मल्टी टास्क स्टाफ) ने अधोहस्ताक्षरी का कमरा खोला है और कथित तौर पर 15 मई 2023 की रात से 16 मई 2023 की सुबह 3:00 बजे तक के सभी रिकॉर्ड की फोटोकॉपी की है। अधोहस्ताक्षरी निश्चित नहीं है कि क्या कोई रिकॉर्ड/फाइल ले ली गई थी या अन्यथा उसके साथ छेड़छाड़ की गई थी या फोटोकॉपी की गई थी। वर्तमान परिदृश्य में यह एक गंभीर चूक है।”

राजशेखर का कहना है कि ऑफिस में निम्नलिखित फाइलें थीं:

(1) आबकारी मामलों और नीति में पीओसी अधिनियम 1998 की धारा 17 ए के तहत मंजूरी देने के लिए सीबीआई की प्रस्ताव फाइल।

(2) 6 फ्लैग स्टाफ, सिविल लाइंस की निविदा फाइलें और नियम एवं शर्तें।

(3) 6 फ्लैग स्टाफ, सिविल लाइंस की अनुवर्ती परिवर्तन और अतिरिक्त फाइलें।

(4) ठेकेदारों द्वारा 6 फ्लैग स्टाफ से संबंधित जमा किए गए चालानों के संबंध में पीडब्ल्यूडी द्वारा किए गए भुगतानों के संबंधित पुस्तिकाएँ।

(5) 6 फ्लैग स्टाफ, सिविल लाइंस की निविदा आमंत्रित करने की सूचना संबंधी फाइलें।

(6) 6 फ्लैग स्टाफ, सिविल लाइंस की डेविएशन फाइलें।

(7) 6 फ्लैगस्टाफ, सिविल लाइंस के बेहतर विनिर्देशों के लिए संशोधित अतिरिक्त मद।

(8) 6 फ्लैग स्टाफ, सिविल लाइंस के निर्माण का पर्यवेक्षण करने वाले व्यक्तियों की तस्वीरें।

(9) “Talk to A.K. File” (DIP)

(10) सामान्य कारण से संबंधित सुप्रीम कोर्ट के फैसले और बिलों के अवैध भुगतान के संबंध में डीआईपी मामले।

(11) विभागों से संबंधित कुछ फाइलें, जहाँ मामला मौजूदा प्रावधानों/नियमों के तहत केंद्रीय जाँच एजेंसियों को भेजा गया था।

(12) आबकारी नीति के संदर्भ में आबकारी विभाग के अधिकारियों के अभियोजन स्वीकृति आदि से संबंधित अन्य विभिन्न फाइलें/दस्तावेज।

पत्र में आगे कहा गया है, “अधोहस्ताक्षरी आशंकित है कि रिकॉर्ड नष्ट कर दिए जाएँगे या समय के साथ आगे नष्ट हो सकते हैं।” राजशेखर ने कहा कि उन्होंने सभी सतर्कता निदेशकों को इस तरह के निर्देशों का पालन नहीं करने का निर्देश दिया था, क्योंकि उन्हें मंत्री से मौखिक आदेश नहीं लेना चाहिए जब तक कि वे आपातकाल की स्थिति में न हों।

पत्र में कानून का हवाला देते हुए सतर्कता अधिकारी का कहना है कि जब तक लिखित में निर्देश नहीं दिए जाते, तब तक सतर्कता विभाग के अधिकारियों को जाँच की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए मंत्री को कोई फाइल/दस्तावेज उपलब्ध नहीं करानी चाहिए।

पत्र में आगे लिखा गया है, “मुझे गंभीर आशंका है कि हमारे कमरों में सेंध लगी हो सकती है और गोपनीयता भंग होने, अभिलेखों में छेड़छाड़, रिकॉर्ड में हेरफेर आदि की पूरी आशंका है। मैं वरिष्ठ अधिकारियों से जल्द से जल्द उचित कार्रवाई करने का अनुरोध करता हूँ। इस दौरान अधोहस्ताक्षरी ने दिल्ली सचिवालय के सहायक निदेशक (केयर टेकिंग) और दिल्ली पुलिस प्रभारी निरीक्षक को कड़ी हिदायत दी थी कि अधोहस्ताक्षरी की अनुमति के बिना उसके कमरे और गोपनीय अनुभाग, जहाँ सिस्टम मौजूद हैं, में किसी को छुने या प्रवेश करने नहीं दिया जाए।”

दिल्ली सरकार का कहना है कि संबंधित अधिकारी को उसके कर्तव्यों से वंचित कर दिया गया था, क्योंकि उसके खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप थे। सरकार ने कुछ फाइलों को अपने पास रखने में राजशेखर की ‘रुचि’ पर सवाल उठाया। इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने यह भी कहा कि इसके बावजूद ब्रेक-इन के आरोपों की गहन जाँच की जाएगी।

दिल्ली सरकार ने अपने बयान में कहा, “उनके खिलाफ कई शिकायतें मिली हैं कि वह प्रोटेक्शन मनी की माँग करते हैं। आधिकारिक तौर पर 13 मई को उनसे काम छीन लिया गया…। अगर उनसे आधिकारिक तौर पर काम वापस ले लिया गया है… तो फिर भी उनके पास सभी फाइलें कैसे हैं? जब उसका काम अन्य अधिकारियों को सौंपा जाता है तो कार्यालय प्रक्रिया की माँग होती है कि उसे आधिकारिक रूप से सभी फाइलों को नए अधिकारियों को सौंप देना चाहिए।”

दिल्ली सरकार ने आगे कहा, “उन्हें हटाए जाने के बावजूद कुछ फाइलों को रखने में उनकी क्या दिलचस्पी है? उनके इस आरोप के बारे में कि किसी ने रात में उनके कार्यालय में घुसने की कोशिश की, सरकार इसकी पूरी जाँच करवाएगी कि यह सच है या नहीं। अगर यह सच है तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।”

मंत्री सौरभ भारद्वाज ने अधिकारी से उनके सभी कर्तव्यों को ‘वापस’ ले लिया था

आप मंत्री सौरभ भारद्वाज ने विशेष सचिव सतर्कता वाईवीवीजे राजशेखर को हटा दिया था। उन्होंने शराब घोटाले और भ्रष्टाचार के मामले की जाँच की थी, जिसमें मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अपनी निजी हवेली बनाने के लिए करदाताओं का करोड़ों का पैसा खर्च किया था। भारद्वाज ने दावा किया था कि अधिकारी पर भ्रष्टाचार और जबरन वसूली के आरोप थे।

13 मई के एक नोट में, भारद्वाज ने कहा, “ऐसी शिकायतें हैं कि वाईवीवीजे राजशेखर जबरन वसूली का रैकेट चला रहे हैं और सुरक्षा के लिए पैसे की माँग कर रहे हैं। यह आरोप काफी गंभीर है, जिसकी जाँच किए जाने की जरूरत है… वाईवीवीजे राजशेखर को सौंपे गए सभी काम एतदद्वारा वापस लिए जाते हैं।”

भारद्वाज ने सतर्कता विभाग को यह कहते हुए अतिरिक्त निदेशकों (एडी) के बीच राजशेखर द्वारा जाँच किए जा रहे मामलों और कार्यों को वितरित करने का निर्देश दिया है कि एडी सीधे सचिव (सतर्कता) को रिपोर्ट करेंगे। आदेश में आगे कहा गया है: “एडी को सीधे सचिव (सतर्कता) के सामने फाइलें रखनी चाहिए।”

वहीं, राजशेखर के करीबी अधिकारियों का कहना है कि उनके खिलाफ दर्ज मामलों में जाँच एजेंसियों ने उन्हें बरी कर दिया था। इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारी ने दावा किया, “उसे निशाना बनाया जा रहा है, क्योंकि वह पिछले एक दशक से विभिन्न सरकारी संगठनों में प्रवर्तन और सतर्कता विभागों में तैनात हैं और उन्होंने कई अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की है।” जब राजशेखर को उनके कर्तव्यों से वंचित किया गया था तो उन्होंने कहा था कि AAP सरकार द्वारा उठाया गया कदम अवैध है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, अपने जवाब में राजशेखर ने कहा कि उन्हें विभाग से ‘अवैध रूप से स्थानांतरित’ करना ‘शीर्ष अदालत के निर्देशों को पलटने के अलावा कुछ नहीं है, क्योंकि अधिकारियों को केवल सिविल सेवा बोर्ड के विचार-विमर्श के माध्यम से स्थानांतरित किया जा सकता है’।

गृहमंत्रालय और एलजी को भेजे गए पत्र में कहा गया है, “अधोहस्ताक्षरी (राजशेखर) को कर्तव्यों का पालन करने से रोका जा रहा है और मुझे आबकारी मामले, 6 फ्लैग स्टाफ रोड, सिविल लाइंस, डीआईपी (सूचना और प्रचार विभाग) जैसे संवेदनशील मामलों से संबंधित रिकॉर्ड के गंभीर खतरे और हेरफेर की आशंका है … अनुरोध है कि मंत्री (सतर्कता) द्वारा जारी आदेश पर रोक लगाने के लिए इस मामले को उच्च न्यायालय के संज्ञान में लाया जाए।” बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री आवास के जीर्णोद्धार की रिपोर्ट तैयार कर ली गई है और कथित रूप से एलजी को भेजी जाने वाली है।

AAP सरकार के खिलाफ राजशेखर द्वारा जाँच किए जाने वाले मामले

राजशेखर कई अन्य मामलों की जाँच कर रहे थे, जिनमें आबकारी विभाग की चार्जशीट और पीओसी (भ्रष्टाचार निवारण) अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों के तहत उनकी मंजूरी, एक अलग खुफिया इकाई की स्थापना से संबंधित एफबीयू मामला, राजनीतिक विज्ञापनों पर अधिक खर्च एवं भ्रष्टाचार के आरोप शामिल हैं।

दिल्ली की AAP सरकार द्वारा मोहल्ला क्लीनिकों के लिए किराए के स्थानों में AAP कार्यकर्ताओं का फेवर, शराब घोटाला और अरविंद केजरीवाल द्वारा करदाताओं के पैसे से अपनी महलनुमा हवेली के निर्माण आदि मामले भी इसमें शामिल हैं।

टी राजा सिंह की BJP में होगी वापसी? किशन रेड्डी के सिग्नल से गदगद हुए MLA , कहा- ओवैसी को उसकी ही भाषा में मिलेगा जवाब

तेलंगाना के गोशमहल से विधायक टी राजा सिंह की बीजेपी में वापसी हो सकती है। उन्हें अगस्त 2022 में पार्टी ने निलंबित कर दिया था। केंद्रीय मंत्री जी किशन रेड्डी ने उनकी पार्टी में वापसी के संकेत दिए हैं। ऑपइंडिया से बातचीत में टी राजा ने इस पर खुशी जताई है। साथ ही असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM और तेलंगाना की सत्ताधारी दल को उनकी भाषा में ही जवाब देने की बात कही है।

समाचार चैनल ABN आंध्रा को दिए गए एक इंटरव्यू के दौरान रेड्डी से राजा सिंह के निलंबन पर सवाल पूछा गया था। इसके जवाब में केंद्रीय मंत्री ने कहा, “निलंबन नियमों के तहत किया गया था। 100% निलंबन हटाएँगे। ये फैसला केंद्रीय पदाधिकारी लेंगे। इसमें हम भी बात कर रहे हैं और केंद्रीय पदाधिकारियों को सारी बात बता रहे हैं। जल्द से जल्द सस्पेंशन हटेगा।”

ऑपइंडिया से बात करते हुए टी राजा सिंह ने कहा कि वे किशन रेड्डी के उस बयान का स्वागत करते हैं जिसमें उनके निलंबन को समाप्त करने की बात कही गई है। निलंबित होते हुए भी वे बीजेपी की मजबूती के लिए काम कर रहे हैं। निलंबन समाप्त होने के बाद खुलकर पार्टी को मजबूत करेंगे। उन्होंने जल्द बीजेपी में अपनी वापसी की उम्मीद जताई है।

BJP को कायम रहना होगा हिंदुत्व पर

बताते चलें कि टी राजा सिंह हैदराबाद की गोशमहल विधानसभा सीट से लगातार दूसरी बार भाजपा के सिंबल पर चुनाव जीत चुके हैं। जिस वीडियो को लेकर उनपर FIR दर्ज हुई थी, उसको लेकर उन्होंने कहा है, “मैंने जो कहा सत्य कहा। कुछ गलत नहीं कहा।” उन्होंने बताया, “मुख्यमंत्री KCR का जो बेटा म्युनिसिपल कार्पोरेशन मंत्री है, उसने मुनव्वर फारुखी का कार्यक्रम जान-बूझकर करवाया था। इस कार्यकम का मकसद हिन्दुओं की भावनाओं को ठेस पहुँचाना था।”