मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद आम आदमी पार्टी (AAP) नेता और केजरीवाल सरकार के पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन (Satyendra Jain) ‘कंकाल’ हो गए हैं। उनका 35 किलो वजन घट गया है। सुप्रीम कोर्ट से जमानत की गुहार लगाते हुए उनके वकील ने ये दलीलें दी है। उनकी याचिका पर गुरुवार (18 मई 2023) को सुनवाई करते हुए जस्टिस एएस बोपन्ना और हिमा कोहली की पीठ ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) को नोटिस जारी कर जवाब माँगा है।
जैन की ओर से वरिष्ठ वकील अभिषेक सिंघवी शीर्ष अदालत में पेश हुए। गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का हवाला देते हुए अदालत से वैकेशन बेंच में सुनवाई की छूट माँगी। वरिष्ठ वकील ने कहा, “जेल में रहने के दौरान वो आदमी कंकाल हो गया है। जेल में उसका 35 किलो वजन घट गया है। वह कई बीमारियों से ग्रस्त है। जैन की सेहत लगातार बिगड़ रही है और उनका केस वेटिंग लिस्ट में 416 नंबर पर है।” इस पर सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री को राहत देते हुए वैकेशन बेंच में अपील करने की इजाजत दी।
वहीं, प्रवर्तन निदेशालय की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू पेश हुए। उन्होंने कहा, “हम इस याचिका का विरोध करते हैं।” फिलहाल अदालत ने अगली सुनवाई की कोई तारीख तय नहीं की है।
दिल्ली हाई कोर्ट ने नहीं दी थी जमानत
सत्येंद्र जैन मई 2022 से तिहाड़ जेल में बंद हैं। दिल्ली हाई कोर्ट से 6 अप्रैल 2023 को जमानत याचिका खारिज होने के बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हाई कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जैन को जमानत देने से इनकार कर दिया था। अदालत ने कहा था कि सत्येंद्र जैन एक प्रभावशाली व्यक्ति हैं। वह जेल से बाहर आकर सबूतों से छेड़छाड़ कर सकते हैं। इसलिए जमानत याचिका खारिज की जाती है।
जेल में मालिश कराते आया था वीडियो
बता दें कि सत्येंद्र जैन के तिहाड़ जेल के भीतर से कई वीडियो सामने आ चुके हैं। इनमें से कुछ वीडियो में वह मालिश कराते, कुछ में ‘दरबार’ लगाते तो कुछ में बाहर का खाना खाते दिखाई दिए थे। एक वीडियो में तो वह निलंबित जेल अधीक्षक के साथ बैठे हुए भी दिखाई दिए थे। वीडियो सामने आने और कोर्ट की सख्ती के बाद जब जेल में वीआईपी ट्रीटमेंट बंद हो गया तो सत्येंद्र जैन ने जेल अधिकारियों पर धमकी देने का आरोप लगाया था। अभी हाल में जैन ने अकेलेपन का हवाला देते हुए अपने सेल में कैदी शिफ्ट करने का आग्रह किया था। इसके बाद नियमों को ताक पर रखते हुए दो कैदी उनके बैरक में शिफ्ट कर दिए गए थे। मामला सामने आने के बाद तिहाड़ जेल अधीक्षक को शो कॉज नोटिस जारी किया गया था।
पाकिस्तान के लोकतंत्र को अपने बूट से रौंदने वाली सेना और राजनीति को अपनी अंगुली पर नचाने वाली ISI से सीधा-सीधा पंगा लेना पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के मुखिया इमरान खान के लिए मुश्किल खड़ा कर दिया है। खतरा महसूस कर सेना ने इमरान खान को पाकिस्तान छोड़कर दूसरे देश में पनाह लेने का विकल्प दिया है। उनके खिलाफ बड़े ऐक्शन की तैयारी चल रही है।
दरअसल, पाकिस्तान की पंजाब सरकार ने इमरान खान पर लाहौर के जमां पार्क स्थित अपने घर में 30-40 आतंकियों को छिपाने का आरोप लगाते हुए उन्हें सौंपने के लिए 24 घंटे का समय दिया था। यह अल्टीमेटम आज गुरुवार (18 मई 2023) को दोपहर 2 बजे खत्म हो गया है। इसके बाद पंजाब सरकार ने उनके घर की तलाशी लेने का आदेश दिया है।
हालाँकि, इमरान खान को इसका अंदेशा है। इसलिए उन्होंने अपने घर पर पाकिस्तान के मीडिया को आमंत्रित कर लिया है। PTI ने ट्वीट कर लिखा, “अवैध कार्यवाहक सरकार द्वारा दिए गए तलाशी अभियान आदेश को कवर करने के लिए फिर से सभी मीडिया को ज़मां पार्क में आमंत्रित किया है।”
पार्टी ने मीडियाकर्मियों को आमंत्रित करते हुए आगे लिखा, “मीडिया को आना चाहिए। लोगों को हकीकत दिखानी चाहिए, क्योंकि कल की योजना को खुद पीएमएल-एन (विरोध शहबाज शरीफ की पार्टी) के प्रतिनिधियों ने लाइव टीवी पर उजागर किया था।”
All media is once again invited to Zaman Park to cover the search operation order given by illegal caretaker government.
Media should come, see and let people see the reality as yesterday’s plan was exposed by PMLN’s representatives themselves on live tv. https://t.co/hc1oWlxRnS
जमां पार्क की ओर जाने वाली लाहौर के सभी सड़कों को बंद कर दिया गया है और इलाके में भारी पुलिस बल को तैनात किया गया है। पंजाब पुलिस के महानिरीक्षक और राजधानी शहर के पुलिस अधिकारी (CCPO) ने पुलिस को “सतर्क” रहने के लिए कहा है। इसके पहले इमरान खान ने खुद की फिर गिरफ्तारी की आशंका जाहिर की है। हालाँकि, पंजाब सरकार ने इससे इनकार किया है।
कहा जा रहा है कि इमरान खान भी अपने घर में ही मौजूद हैं। इस दौरान उन्होंने एक ट्वीट भी किया है। इमरान खान ने अपने ट्वीट में लिखा है, “राष्ट्र को बदमाशों, अपराधियों, किसी भी नैतिकता या नैतिकता से रहित मूर्खों के झुंड ने अपने कब्जे में ले लिया है। देश अपने सबसे खराब आर्थिक संकट, महंगाई और बेरोजगारी में डूब रहा है। सत्ता में बैठे लोग इस बात पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं कि आतंक के शासन को उजागर करके सबसे बड़ी और एकमात्र संघीय पार्टी को कैसे कुचला जाए। बहुत देर होने से पहले सभी नागरिकों के लिए अपनी आवाज उठाने का समय आ गया है।”
Nation has been taken over by a bunch of crooks, criminals, duffers devoid of any ethics or morality.
While the country sinks into its worst economic crisis esp unprecedented inflation and unemployment, all those in power are concentrating on how to crush the biggest and the… pic.twitter.com/j6LktOHxQJ
इमरान खान ने कहा, “यह अहम समय है, जब सत्ता में बैठी ताकतों को संवेदनशील होकर सोचना चाहिए, वरना देश में एक बार फिर से ईस्ट पाकिस्तान जैसी स्थिति पैदा हो सकती है।” बता दें कि बांग्लादेश पहले पाकिस्तान का हिस्सा था और उसे ईस्ट पाकिस्तान के नाम से जाना जाता था। साल 1971 की लड़ाई में भारत ने पाकिस्तान को हराकर बांग्लादेश बनाने में मदद की थी।
सेना भी PTI के कार्यकर्ताओं के हिंसक प्रदर्शनों को देखते हुए सतर्क है। सेना ने इमरान खान को पाकिस्तान छोड़ देने का ऑफर दिया है। इमरान खान को दुबई और लंदन जाने का ऑफर दिया गया है। सेना ने कहा कि अगर उन्होंने ऐसा नहीं किया तो उनके खिलाफ आर्मी एक्ट के तहत सैन्य अदालत में मुकदमा चलाया जाएगा। अगर इमरान पाकिस्तान छोड़ देगें तो उन पर किसी तरह का केस नहीं चलाया जाएगा।
पाकिस्तान की सेना द्वारा दिए गए इस ऑफर को पूर्व प्रधानमंत्री और PTI चीफ इमरान खान ने मानने से इनकार कर दिया है। उन्होंने कहा कि अगर पाकिस्तान छोड़ना ही होता तो वे पहले ही छोड़ चुके होते। PTI चीफ ने साफ कह दिया कि चाहे जो कुछ भी हो जाए, लेकिन वे पाकिस्तान नहीं छोड़ेंगे। आर्मी ऐक्ट को ऑफिशियल सीक्रेट ऐक्ट भी कहा जाता है और इस केस में सेना आरोपित को उम्र से लेकर मौत की सजा तक देती है।
इससे पहले पाकिस्तानी आर्मी चीफ जनरल असीम मुनीर ने इमरान खान और उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं को खुलेआम धमकी देते हुए कहा कि अगर 9 मई जैसी घटना दोबारा होती है तो सेना बर्दाश्त नहीं करेगी। जनरल ने यह बयान सियालकोट गैरिसन की अपनी यात्रा के दौरान कहा कि पाकिस्तान अपने जवानों का अपमान बर्दाश्त नहीं करेगा।
‘द हीरो ऑफ रानीगंज’ के नाम से मशहूर अमृतसर के इंजीनियर जसवंत सिंह गिल (Jaswant Singh Gill) की बायोपिक में बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार (Akshay Kumar) उनका किरदार निभाते हुए नजर आएँगे। अभिनेता ने 2022 में ट्वीट कर खुद इसकी जानकारी दी थी। फिल्म की शूटिंग पिछले साल शुरू हो चुकी है। जसवंत सिंह गिल ने अपनी जान की परवाह किए बिना 6 घंटे में 65 लोगों की जिंदगी बचाई थी। सरदार जसवंत सिंह गिल को कैप्सूल गिल के नाम से भी पुकारा जाता था। इसलिए फिल्म का नाम ‘कैप्सूल गिल’ (Capsule Gill) रखा गया है। अक्षय कुमार की फिल्म को वासु भगनानी और जैकी भगनानी प्रोड्यूस कर रहे हैं। वहीं फिल्म का निर्देशन टीनू सुरेश देसाई कर रहे हैं।
अक्षय कुमार के ट्वीट का स्क्रीनशॉट
दरअसल, जसवंत सिंह गिल कोल इंडिया लिमिटेड (Coal India Limited) के इंजीनियर हुआ करते थे। आज से करीब 33 साल (13 नवंबर 1989) पहले उनके कार्यकाल के दौरान पश्चिम बंगाल के रानीगंज स्थित एक कोयला खदान (Coal Mines) में बाढ़ का पानी भर गया था। इस कारण वहाँ काम कर रहे 220 लोगों में से 6 की मौके पर ही मौत हो गई थी। जो लोग लिफ्ट के पास थे, उनको खींचकर बाहर निकाल लिया गया, लेकिन वहाँ 65 लोग फँसे रह गए थे। जब चीफ इंजीनियर जसवंत सिंह गिल को इस हादसे की खबर लगी, तो उन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना तुरंत उस पानी से भरी खदान में जाने का फैसला किया। उन्होंने अपनी कुशलता दिखाते हुए टीम के साथियों की मदद से रेस्क्यू ऑपरेशन किया।
गिल ने सबसे पहले वहाँ मौजूद अफसरों की मदद से पानी को पम्प के जरिए बाहर निकालने की कोशिश की, लेकिन ये तरीका कारगर साबित नहीं हुआ। इसके बाद उन्होंने वहाँ कई बोर खोदे, जिससे खदान में फँसे मजदूरों को जिंदा रहने के लिए खाना-पीना पहुँचाया जा सके। उस दौरान उन्होंने एक 2.5 मीटर का लंबा स्टील का एक कैप्सूल बनाया और उसे एक बोर के जरिए खदान में उतारा। जसवंत राहत और बचाव की ट्रेनिंग ले चुके थे। इसलिए उन्होंने खदान में उतरने का फैसला किया।
उस वक्त कई लोगों ने और सरकार ने उनकी इस बात का विरोध भी किया, लेकिन जसवंत ने अपने रेस्क्यू को जारी रखा। उनके इस कदम से खदान में से एक-एक करके लोगों को उस कैप्सूल के जरिए 6 घंटे में बाहर निकाल लिया गया। जब तक सभी 65 लोगों को खदान से बाहर नहीं निकाल लिया गया, तब तक जसवंत खुद बाहर नहीं आए। यह हादसा अब तक के कोयला खदानों में हुए सबसे बड़े हादसों में से एक था।
जसवंत सिंह को उनकी बहादुरी के लिए 2 साल बाद 1991 में भारत सरकार की तरफ से प्रेसिंडेट रामास्वामी वेंकटरमन के हाथों सिविलियन गेलेन्ट्री अवार्ड ‘ सर्वोंत्तम जीवन रक्षक पदक’ दिया गया। 29 नवंबर, 2009 को, उन्हें नई दिल्ली में ISMAA द्वारा भारत का पहला ‘लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड फॉर माइनिंग’ दिया गया। साथ ही कोल इंडिया ने उनके सम्मान में 16 नवंबर को ‘रेस्क्यू डे’ डिक्लेयर किया। गिल के बनाए कैप्सूल मैथड को इसके बाद कई देशों ने इस्तेमाल किया। 2010 में चिली में इस कैप्सूल का इस्तेमाल हुआ था।
बता दें कि 22 नवंबर, 1939 को पंजाब के अमृतसर के सठियाला में जन्मे जसवंत सिंह गिल ने 1959 में खालसा कॉलेज से ग्रेजुएशन की थी। गिल ने झारखंड के धनबाद स्थित आईआईटी में खनन की बारीकियाँ सीखीं। एशिया के सबसे बड़े खनन इंस्टीट्यूट का नाम तब इंडियन स्कूल ऑफ माइंस (आईएसएम) हुआ करता था। जसवंत सिंह गिल का 26 नवंबर, 2019 को उनका निधन हो गया था।
खाने की मेज। बैठे हैं कर्नाटक कॉन्ग्रेस अध्यक्ष डीके शिव कुमार। कर्नाटक के मुख्यमंत्री बनने जा रहे सिद्धारमैया। कर्नाटक कॉन्ग्रेस के प्रभारी रणदीप सुरजेवाला। कॉन्ग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल।
तस्वीर 2
बीच में कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे। उनकी बाईं ओर शिवकुमार। दाईं ओर सिद्धारमैया। दोनों का हाथ उठाए गंभीर खरगे। खिलखिलाते शिवकुमार। मंद मंद मुस्कुराते सिद्धारमैया।
सियासी तस्वीरों के भी अपने मायने होते हैं। 13 मई 2023 को कर्नाटक की जनता ने कॉन्ग्रेस को जनादेश दिया। पर मुख्यमंत्री का नाम तय होते-होते 18 मई आ गया। इस बीच इतनी बैठकें हुईं, इतने दावे हुए, इतनी बयानबाजी हुई, अपने नेता के समर्थन में प्रदर्शन हुए कि 224 सदस्यीय विधानसभा में 135 सीट पाने के जश्न पर पानी फिरने लगा। ऐसे में इन तस्वीरों का मीडिया में आना कॉन्ग्रेस के लिए जरूरी हो गया था। वैसे ही जैसे हिंदी फिल्मों की हैप्पी एंडिंग जरूरी है। इन तस्वीरों से बताने की कोशिश हो रही है कि कॉन्ग्रेस एकजुट है। सब कुछ आम सहमति से हुआ है। पर क्या सच में ऐसा ही है? इसका जवाब तलाशने से पहले कॉन्ग्रेस के आधिकारिक ऐलान पर लौटते हैं।
कॉन्ग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने बताया कि सिद्धारमैया कर्नाटक के मुख्यमंत्री होंगे। डीके शिवकुमार इकलौत डिप्टी सीम होंगे। शिवकुमार 2024 के लोकसभा चुनाव तक कर्नाटक कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष भी बने रहेंगे। साथ ही बताया कि कर्नाटक कैबिनेट का शपथ ग्रहण समारोह 20 मई को होगा। वैसे आधिकारिक ऐलान से पहले ही ये सब जानकारी मीडिया में आ चुकी थी। शिवकुमार के रेस में पिछड़ने के संकेत तो 17 मई को तभी मिल गए थे जब सिद्धारमैया का समर्थकों ने जश्न मनाना शुरू कर दिया था।
#WATCH | Siddaramaiah will be the Chief Minister of Karnataka and DK Shivakumar will be the only deputy CM, announces KC Venugopal, Congress General Secretary -Organisation. pic.twitter.com/q7PinKYWpG
डीके शिवकुमार के भाई डीके सुरेश कर्नाटक से ही कॉन्ग्रेस के सांसद हैं। उन्होंने कहा है, “मुझे नहीं लगता है कि मैं पूरी तरह से खुश हूँ। मगर कर्नाटक के हित के लिए पार्टी और डीके शिवकुमार और सभी को ये स्वीकार करना होगा। हम कर्नाटक के हित में अपनी प्रतिबद्धता को पूरा करना चाहते थे, इसलिए डीके शिवकुमार को यह स्वीकार करना पड़ा। भविष्य में हम देखेंगे, अभी एक लंबा रास्ता तय करना है। काश यह (डीके शिवकुमार के लिए सीएम पद) होता। लेकिन ऐसा नहीं हुआ, हम इंतजार करेंगे और देखेंगे।”
#WATCH | I am not fully happy but in the interest of Karnataka we wanted to fulfil our commitment…That is why DK Shivakumar had to accept. In future we will see, there is a long way to go. …I wish it (CM post for DK Shivakumar) but it didn't happen, we will wait and see:… pic.twitter.com/DGbiSIUeJk
कर्नाटक में कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता जी परमेश्वर ने कहा है, “राज्य में दलित सीएम की डिमांड काफी ज्यादा थी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। सिद्धारमैया के सीएम और शिवकुमार को डिप्टी सीएम बनाने के ऐलान से दलित समुदाय आहत हुआ है। मैं भी सरकार चला सकता था। अगर सीएम नहीं तो कम से कम मुझे डिप्टी सीएम तो बनाना चाहिए था।” सिद्धारमैया की पूर्व की सरकार में परमेश्वर डिप्टी सीएम रह चुके हैं।
कॉन्ग्रेस के भीतर से आलाकमान के फैसले पर असंतोष का भाव दिखाते ये दो बयान भी उसी समय आए हैं, जब कॉन्ग्रेस ने दो तस्वीरों के जरिए ‘ऑल इज वेल’ का संदेश देने की कोशिश की है। इनके अलावा कुछ डिमांड पहले से भी कॉन्ग्रेस नेतृत्व के पास हैं। मसलन, बेलगावी उत्तर के विधायक आसिफ सैत ने कर्नाटक कॉन्ग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष सतीश जारकीहोली को डिप्टी सीएम बनाने की माँग की थी। कर्नाटक रेड्डी जनसंघ अपने नेता रामलिंगा रेड्डी को डिप्टी सीएम देखना चाहते हैं। जमीर अहमद खान को डिप्टी सीएम बनाने के लिए कोप्पल जिले के गंगावती में मुस्लिमों का प्रदर्शन भी हो चुका है। कर्नाटक वक्फ बोर्ड के चेयरमैन शफी सादी भी उपमुख्यमंत्री पद पर मुस्लिम की दावेदारी जता चुके हैं। इतना ही नहीं वे गृह, राजस्व, स्वास्थ्य जैसे 5 खास विभाग के मंत्री भी मुस्लिम चाहते हैं।
विधानसभा चुनाव में कॉन्ग्रेस की सफलता की एक बड़ी वजह जेडीएस के वोटरों का टूटना है। कर्नाटक में वोक्कालिगा (vokkaliga community) दूसरा सबसे प्रभावशाली समुदाय है। शिवकुमार भी इसी समुदाय से आते हैं। वैसे वोक्कालिगा परंपरागत तौर पर जेडीएस के समर्थक रहे हैं। लेकिन इस बार अपने समुदाय के शिवकुमार के मुख्यमंत्री बनने की संभावना देख वे कॉन्ग्रेस की तरफ मुड़ गए। ऐसे में जब शिवकुमार मुख्यमंत्री नहीं बनने जा रहे हैं, क्या यह समुदाय आने वाले चुनावों में भी कॉन्ग्रेस के साथ रहेगा? या फिर वह उधर मुड़ जाएगा जहाँ उसे सत्ता में वांछित हिस्सेदारी की उम्मीद दिखेगी?
कॉन्ग्रेस के लिए संकट केवल दलितों, मुस्लिमों और वोक्कालिगा को ही संतुष्ट करने का नहीं है। कर्नाटक के सबसे प्रभावशाली समुदाय लिंगायत ने भी सीएम पद पर दावेदारी जताई थी। अखिल भारतीय वीरशैव महासभा (All India Veerashaiva Mahasabha) ने कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को पत्र लिखकर ये माँग की थी। वीरशैव महासभा कलबुर्गी के अध्यक्ष अरुण कुमार पाटिल ने कहा था, “लिंगायत समुदाय की मदद से कॉन्ग्रेस जीती है। 39 विधायक लिंगायत हैं। लिंगायत समुदाय से आने वाले कई नेता मुख्यमंत्री पद के योग्य हैं। ऐसे में हमने अपने समुदाय के किसी नेता को मुख्यमंत्री बनाने का आग्रह किया है।”
कर्नाटक की राजनीति में येदियुरप्पा के उभार के बाद से लिंगायत बीजेपी समर्थक माने जाते थे। लेकिन इस बार लिंगायत प्रभाव वाली कुछ सीटों पर भी बीजेपी को पराजय मिली है। ऐसे में कॉन्ग्रेस सरकार में शीर्ष स्तर पर हिस्सेदारी पाने में नाकाम रही इस समुदाय को पार्टी कैसे संतुष्ट करेगी?
कॉन्ग्रेस की परिपाटी के अनुसार जब आप इन सवालों का जवाब तलाशने की कोशिश करते हैं तो आपको पंजाब, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ जैसे हाल के कई उदाहरण मिलते हैं। इन राज्यों में भी कर्नाटक जैसा ही संकट था। भले शिवकुमार आज कह रहे हैं कि वे ब्लैकमेल नहीं करेंगे। पीठ में छूरा नहीं घोपेंगे। लेकिन हम जानते हैं कि नवजोत सिंह सिद्धू ने भी कुछ किए बिना ही पंजाब में कॉन्ग्रेस को साफ कर दिया था। राजस्थान में सचिन पायलट साफ कर रहे हैं।
महाराष्ट्र के नासिक स्थित त्रयम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में 13 मई 2023 की रात मुस्लिमों की भीड़ दाखिल हो गई। कहा जा रहा है कि मुस्लिम गर्भगृह में शिवलिंग पर चादर चढ़ाना चाहते थे। बाद में मंदिर में प्रवेश करने वालों और अन्य स्थानीय मुसलमानों ने दावा किया कि पास स्थित सैय्यद गुलाम शाह वली बाबा दरगाह पर उर्स का कार्यक्रम था। इस सिलसिले में जुलूस निकाला गया था। जुलूस जब मंदिर के पास पहुँचा तो मुस्लिमों ने मंदिर की सीढ़ी से भगवान शिव को लोबान का धुआँ पेश किया। मुस्लिमों के अनुसार यह प्रथा सौ सालों से चली आ रही है। दरगाह के खादिम सलीम सैयद ने इस हरकत के लिए माफी माँगी है और कहा है कि सौ सालों से चली आ रही इस प्रथा को अब बंद कर देंगे।
सलीम सैयद उन चार आरोपितों में शामिल हैं जिनपर मंदिर प्रशासन की शिकायत पर एफआईआर दर्ज किया गया है। 16 मई 2023 को एबीपी माझा से बात करते हुए सलीम ने लोबान के धुएँ को त्र्यंबकेश्वर यानी भगवान शिव को चढ़ाने की कथित प्रथा के बारे में जानकारी दी। सलीम ने कहा, “दरगाह में सालाना उर्स के बाद जुलूस निकाला जाता है। जब जुलूस मंदिर के पास से गुजरता है, तो मैं वहाँ जाता हूँ और मंदिर की पहली सीढ़ी से भगवान त्र्यंबकेश्वर को लोबान की धूनी पेश करता हूँ।
सलीम ने आगे कहा, “हम (स्थानीय मुस्लिम) उन्हें त्र्यंबक राजा कहते हैं। वह इस स्थान के राजा हैं। यह मेरा विश्वास है कि उनकी वजह से हम यहाँ सुरक्षित और समृद्ध हैं। सीढ़ी पर खड़ा होने के बाद मैं ओम नमः शिवाय और हर हर महादेव का जाप करता हूँ। इस दौरान मेरे साथ दो-तीन लोग फूलों की टोकरी या अन्य चीजें अपने सिर पर रखे होते हैं। मैं अपने सिर पर चादर की टोकरी रखता हूँ।”
बातचीत के दौरान सलीम ने कहा, “मेरी उम्र 66 वर्ष है। मेरे वालिद का इंतकाल साल 1994 में हो गया था। तब से मैं इस अनुष्ठान का नेतृत्व करता हूँ। जब मैं दस साल का था तब से मुझे चीजें अच्छी तरह याद हैं। मुझे नहीं पता कि इस साल मंदिर के अधिकारियों ने हमारे खिलाफ शिकायत क्यों दर्ज की। अगर उन्हें लगता है कि ऐसा करके हमने गलती की है तो मैं माफी माँगता हूँ। मैं फिर कभी त्र्यंबकेश्वर राजा को लोबान का धुआँ नहीं चढ़ाऊँगा।” सलीम के अनुसार वे लोग कभी गर्भगृह में प्रवेश नहीं करते। लेकिन पहली सीढ़ी पर खड़े होते हैं। राजा त्र्यंबक को चादर नहीं चढ़ाया जाता। जुलूस पूरा कर उनके सम्मान में धुएँ की पेशकश करते हैं। सलीम के दादाजी भी ऐसा करते थे।
बता दें कि मुस्लिमों के जबरन त्रयम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में दाखिल होने की घटना से मंदिर प्रशासन समेत कई हिंदू संगठन नाराज हो गए। हिंदू महासंघ समेत कई संगठन के लोगों ने मंदिर पहुँचकर अपना विरोध जताया। कार्यकर्ताओं ने मंदिर के द्वार और परिसर का शुद्धिकरण किया और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की माँग की। स्थानीय हिंदुओं का कहना है कि वे लोग चादर दिखाने या धुआँ पेश करने जैसे रिवाजों की कोई जानकारी नहीं है। ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। बता दें इससे पहले त्रयम्बकेश्वर महादेव को दूर से चादर दिखाने की बात सामने आई थी। अब धूप धुआँ दिखाने की बात कही जा रही है। त्रयम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल है। सदियों से जारी परंपरा के अनुसार मंदिर में सिर्फ हिन्दुओं को ही प्रवेश देने की अनुमति रही है, जिनकी हिन्दू धर्म में आस्था नहीं है उनका मंदिर में प्रवेश वर्जित है।
सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) की संविधान पीठ ने गुरुवार (18 मई 2023) को तमिलनाडु द्वारा पशु क्रूरता निवारण अधिनियम में किए गए संशोधनों की वैधता को बरकरार रखा। इसके साथ ही सर्वोच्च न्यायालय ने कोर्ट ने कर्नाटक और महाराष्ट्र में कंबाला और बुल कार्ट रेसिंग की अनुमति देने वाले कानूनों को भी बरकरार रखा। इस तरह तमिलनाडु, कर्नाटक और महाराष्ट्र में जल्लीकट्टू (Jallikattu) और इससे जुड़े खेल को भी अनुमति दे दी गई।
जस्टिस केएम जोसेफ, जस्टिस अजय रस्तोगी, जस्टिस अनिरुद्ध बोस, जस्टिस हृषिकेश रॉय और जस्टिस सीटी रविकुमार की संविधान पीठ ने कहा कि गोवंश के दर्द और पीड़ा को कम करने और खेल को जारी रखने की अनुमति देने के लिए संशोधन पेश किए गए हैं। कोर्ट ने कहा कि जब विधायिका मान चुकी है कि जल्लीकट्टू तमिलनाडु की सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है तो न्यायपालिका इससे अलग दृष्टिकोण नहीं रख सकती है।
पीठ ने कहा, “राज्य की कार्रवाई में कोई दोष नहीं है… यह एक गोजातीय खेल है और नियमों के अनुसार भागीदारी की अनुमति दी जाएगी। अधिनियम संविधान के अनुच्छेद 48 से संबंधित नहीं है। कृषि गतिविधि को प्रभावित करने वाले कुछ प्रकार के सांडों पर आकस्मिक प्रभाव पड़ सकता है, लेकिन यह सारगर्भित रूप से भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची की प्रविष्टि 17, सूची III के संदर्भ में है।”
न्यायालय ने कहा कि राज्यों के ये कानून धारा 51ए(जी) और 51ए(एच) का उल्लंघन नहीं करते हैं और इस प्रकार ये भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का भी उल्लंघन नहीं करते हैं। कोर्ट ने कहा, “तीनों संशोधन अधिनियम वैध कानून हैं और हम निर्देश देते हैं कि सभी कानूनों को सख्ती से लागू किया जाए और डीएम एवं सक्षम अधिकारी संशोधित कानून के सख्त कार्यान्वयन के लिए जिम्मेदार होंगे।”
PETA एवं अन्य एनीमल राइट ग्रुप जैसे याचिकाकर्ताओं के वकील ने सर्वोच्च न्यायालय में तर्क दिया कि रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री से पता चलता है कि जल्लीकट्टू एक खूनी खेल है। तर्क दिया गया था कि अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) लागू होगा क्योंकि केवल कुछ खेलों को जानवरों के प्रति क्रूरता की अनुमति दी गई है।
इसके पहले, सुप्रीम कोर्ट ने साल 2014 में कहा था कि तमिलनाडु में लोकप्रिय जल्लीकट्टू खेल जानवरों के अधिकारों के साथ-साथ क्रूरता निवारण (पीसीए) अधिनियम का भी उल्लंघन करता है। सर्वोच्च न्यायालय ने साल 2014 में माना था कि जल्लीकट्टू तमिलनाडु की संस्कृति या परंपरा का कभी भी नहीं रही है। इस आधार पर जल्लीकट्टू को अनुमति देने वाले 2009 के तमिलनाडु जल्लीकट्टू विनियमन अधिनियम (टीएनजेआर अधिनियम) को रद्द कर दिया था।
दक्षिण के राज्यों में जल्लीकट्टू के प्रति लोगों के जुड़ाव को देखते हुए केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने जनवरी 2016 में पीसीए अधिनियम के दायरे से जल्लीकट्टू और बैलगाड़ी दौड़ को अपवाद के रूप में शामिल करते हुए एक नई अधिसूचना जारी की थी। इसके तहत इन खेलों को पशु क्रूरता अधिनियम के दायरे से बाहर कर दिया गया था। इसके बाद उस अधिसूचना को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई।
बाद में तमिलनाडु सरकार ने साल 2017 के पशुओं के प्रति क्रूरता की रोकथाम (तमिलनाडु संशोधन) अधिनियम बनाया। इसके जरिए जल्लीकटू जैसे सांडों को काबू में करने वाले खेलों और सांडों के दौड़ के लिए मार्ग प्रशस्त करने का काम किया गया था।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने गुरुवार (18 मई 2023) को अपनी कैबिनेट में बड़ा फेरबदल किया। कानून मंत्रालय सँभाल रहे किरेन रिजिजू (Kiren Rijiju) को हटा दिया गया है। रिजिजू की जगह अब अर्जुन राम मेघवाल को कानून मंत्रालय का प्रभार सौंपा गया है। वहीं, रिजिजू को भू-विज्ञान मंत्रालय सौंपा गया है।
इस संबंध में राष्ट्रपति कार्यालय से विज्ञप्ति जारी की गई है। विज्ञप्ति में कहा गया है कि प्रधानमंत्री की सलाह पर राष्ट्रपति ने यह फैसला लिया है। अर्जुन राम मेघवाल अपने वर्तमान पोर्टफोलियो के अलावा, कानून मंत्रालय के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) होंगे।
Arjun Ram Meghwal, Minister of State assigned the independent charge as Minister of State in the Ministry of Law and Justice in addition to his existing portfolios, in place of Kiren Rijiju. The portfolio of Ministry of Earth Sciences be assigned to Kiren Rijiju: Rashtrapati…
दरअसल, किरेन रिजिजू से पहले रविशंकर प्रसाद कानून मंत्री थे। जुलाई 2021 में रविशंकर प्रसाद से कानून मंत्रालय लेकर रिजिजू को सौंपा गया था। कानून एवं न्याय मंत्री के रूप में किरेन रिजिजू न्यायपालिका में कॉलेजियम सिस्टम के सख्त विरोधी थे। जजों की नियुक्ति को लेकर कई बार कानून मंत्रालय और सुप्रीम कोर्ट आमने-सामने आ गया था।
किरेन रिजिजू ने यहाँ तक कहा था कि देश में कोई किसी को चेतावनी नहीं दे सकता है। देश में सभी लोग संविधान के हिसाब से काम करते हैं। उन्होंने यहाँ तक कह दिया था कि मंत्रियों को चुनाव लड़ना पड़ता है, लेकिन जजों को चुनाव नहीं लड़ना पड़ता। बता दें कि साल 2015 में मोदी सरकार जजों की नियुक्ति के लिए नेशनल ज्यूडिशियल अपॉइंटमेंट कमीशन एक्ट (NJAC) लाई थी। हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट ने इसे अवैध बताकर खारिज कर दिया था।
कैबिनेट में इस बदलाव के बाद किरेन रिजिजू ने ट्वीट कर अपनी प्रतिक्रिया दी है। रिजिजू ने कहा, “माननीय पीएम मोदी के मार्गदर्शन में केंद्रीय कानून और न्याय मंत्री के रूप में सेवा करना सौभाग्य की बात रहा। मैं सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़, सुप्रीम कोर्ट के जजों, हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस और सभी लॉ अधिकारियों को हमारे नागरिकों के लिए कानूनी सेवाएँ प्रदान करने में भारी समर्थन के लिए धन्यवाद देता हूँ।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद देते हुए किरेन रिजिजू ने अपने ट्वीट में आगे कहा, “मैं पीएम मोदी के दृष्टिकोण को पूरा करने के लिए तत्पर हूँ। एक बीजेपी कार्यकर्ता के रूप में मैंने जिस उत्साह और जोश के साथ काम किया था, वैसे ही भू विज्ञान मंत्रालय में जिम्मादारी सँभालूँगा।”
It has been been a privelege and an honour to serve as Union Minister of Law & Justice under the guidance of Hon’ble PM Shri @narendramodi ji. I thank honble Chief Justice of India DY Chandrachud, all Judges of Supreme Court, Chief Justices and Judges of High Courts, Lower… pic.twitter.com/CSCT8Pzn1q
19 नवंबर, 1971 को अरुणाचल प्रदेश के वेस्ट कामेंग जिले में जन्मे किरेन रिजिजू अरुणाचल पश्चिम लोकसभा क्षेत्र से भाजपा के सांसद हैं। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से कानून की डिग्री भी ली है। साल 2004 में उन्होंने पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ा और जीत हासिल की थी।
हालाँकि, साल 2009 के लोकसभा चुनाव में वे हार गए, लेकिन साल 2014 के चुनाव में जीत हासिल करने के बाद पीएम मोदी के मंत्रिमंडल में उन्हें गृह राज्यमंत्री बनाया गया। साल 2019 में उन्हें खेल मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया गया था। उसके बाद जुलाई 2021 के कैबिनेट विस्तार में उन्हें कानून मंत्री बनाया गया था।
वहीं, अर्जुन राम मेघवाल राजस्थान से आते हैं और भाजपा के बड़े दलित चेहरों में से एक हैं। वे 2009 से राजस्थान के बीकानेर से सांसद हैं। साल 2013 में उन्हें सर्वश्रेष्ठ सांसद के पुरस्कार से नवाजा गया था। मई 2019 में मेघवाल संसदीय मामलों और भारी उद्योग एवं सार्वजनिक उद्यम राज्यमंत्री बने थे।
अर्जुन राम मेघवाल का जन्म बीकानेर के किस्मिदेसर गाँव में हुआ। उन्होंने बीकानेर के डूंगर कॉलेज से स्नातक और एलएलबी की। इसके बाद उन्होंने इसी कॉलेज से मास्टर्स डिग्री (M.A) की। इसके बाद वे फिलीपींस विश्वविद्यालय से एमबीए भी किया। वे राजस्थान कैडर के आईएएस अधिकारी रहे हैं और अक्सर साइकिल पर चलते देखे जाते हैं।
साल 2008 में हुए मुंबई आतंकी हमले के आरोपितों में से एक तहव्वुर राणा के भारत प्रत्यर्पण का रास्ता साफ हो चुका है। अमेरिका के कैलिफोनर्निया की अदालत ने उसके प्रत्यर्पण को मंजूरी दे दी है। मुंबई 26/11 हमलों में पाकिस्तानी मूल के कनाडाई नागरिक तहव्वुर की भूमिका सामने आने के बाद भारत ने उसके प्रत्यर्पण की माँग की थी। अमेरिका के बाइडन सरकार ने तहव्वुर के भारत प्रत्यर्पण का समर्थन किया था।
कैलिफोर्निया की मजिस्ट्रेट जज जैकलीन चूलजियान ने मंगलवार (16 मई 2023) को 48 पन्नों का आदेश दिया। इसमें कहा गया कि दस्तावेजों की समीक्षा करने और दी गई दलीलों को सुनने के बाद अदालत तहव्वुर राणा को भारत प्रत्यर्पण के योग्य समझती है। अब NIA अमेरिकी सरकार से संपर्क करेगी और तहव्वुर को भारत लाए जाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
US court allows extradition of 26/11 terror attack accused Pakistani-origin Canadian businessman Tahawwur Rana to India
बता दें कि मुंबई के आंतकी हमले को पाकिस्तानी आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा ने अंजाम दिया था। इस हमले का मास्टरमाइंड आतंकी डेविड हेडली था। तहव्वुर राणा, हेडली के बचपन का दोस्त है। मुंबई हमलों में उसने लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों और हेडली को मदद दी थी। उसे हमले के हर साजिश की जानकारी थी। उसी सिलसिले में नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) तहव्वुर की भूमिका को लेकर पड़ताल कर रही है।
अमेरिकी कोर्ट द्वारा तहव्वुर के प्रत्यर्पण के पक्ष में फैसला दिए जाने के बाद मुंबई 26/11 आतंकी महले के पब्लिक प्रॉसिक्यूटर उज्ज्वल निकम ने इसे भारत की बड़ी जीत करार दिया है। उन्होंने न्यूज एजेंसी एएनआई से कहा है कि यह पहली बार है जब अमेरिकी सरकार ने भारतीय जाँच एजेंसी के सबूतों पर भरोसा किया है। बता दें तहव्वुर के वकील ने इस प्रत्यर्पण का विरोध किया था।
#WATCH | "The order of the American court extraditing Tahawwur Rana (26/11 Mumbai terror attack accused) is a great victory for India. It is for the first time according to my knowledge, American govt has heavily relied upon Indian investigation agency's evidence…": Ujjwal… pic.twitter.com/R8SEvxZoO7
बता दें कि 26 नवंबर 2023 को मुंबई में हुए आतंकी हमले में 6 अमेरिकी नागरिक समेत 166 लोग मारे गए थे। इन हमलों में अजमल कसाब नाम का आतंकवादी जीवित पकड़ा गया था, जिसे 21 नवंबर 2012 को फाँसी दे दी गई थी। बाकी आतंकवादियों को भारतीय सुरक्षाबलों ने हमले के दौरान ही ढेर कर दिया था।
अफ्रीकी देश सूडान (Sudan) में गृहयुद्ध छिड़ा हुआ है। मारकाट मची हुई है। खाने-पीने तक की किल्लत है। ऑपरेशन कावेरी (Operation Kaveri) के जरिए मोदी सरकार ने वहाँ फँसे भारतीयों का रेस्क्यू किया है। घर लौटने वालों में एक संतोष जैन भी हैं जो अभी दिल्ली से सटे फरीदाबाद में रहते हैं।
सूडान के हालात, वहाँ से भारतीयों को निकाले जाने के अभियान संतोष जैन ने दैनिक भास्कर के नीरज झा से विस्तार से बातचीत की है। उन्होंने बताया है कि कैसे उनकी कंपनी में घुसकर सूडान की मिलिट्री ने लूट मचाई। कैसे घरों पर बम गिर रहे थे। कैसे उन्होंने कंपनी में काम करने वाले भारतीयों के बिना सूडान नहीं छोड़ा। कैसे रेस्क्यू अभियान के दौरान डीजल की कमी होने पर अपनी कंपनी का डीजल तक दे दिया।
संतोष जैन अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ सूडान में रहते थे। स्टील की बर्तन बनाने वाली एक भारतीय कंपनी में फाइनेंस हेड थे। इस कंपनी में 162 लोग काम करते थे। ज्यादातर भारतीय थे। उन्होंने दैनिक भास्कर को बताया, “वर्कर्स को न ठीक से इंग्लिश आती थी। न ही वहाँ की स्थानीय भाषा। मैंने सोचा जाएँगे तो साथ में ही। एक रोज देर रात इंडियन एम्बेसी का कॉल आया कि सुबह के तीन बजे गाड़ियाँ आ जाएँगी, लेकिन हमारे पास ऑयल नहीं है। हमारी फैक्ट्री के टैंक में डीजल भरा हुआ था। मैंने बिना कुछ सोचे-समझे कहा- मेरे पास तेल है। आप बस गाड़ी भेज दीजिए। गाड़ी सुबह 8 बजे आई। हम लोग बस से करीब 12 घंटे की दूरी तय करके पोर्ट सूडान पहुँचे और फिर भारत…।”
पर ये सफर इतना भी आसान नहीं था। खौफ को समझना है तो संतोष की पत्नी ज्योति के इस बयान से समझिए। वे कहती हैं, “जो हालात थे, हमें भारत लौटने की उम्मीद नहीं थी। अपनी छोटी बहन से आखिरी बातचीत में मैंने कहा था यदि दो-तीन दिन फोन न करूँ तो समझना बिजली नहीं है। यदि उससे ज्यादा दिन हो जाए तो समझना अब हम जिंदा नहीं हैं।” वे कहती हैं, “मार्केट में कुछ नहीं था। जो कुछ घर में स्टोर था उससे ही हमारा खाना-पीना हो रहा था। करीब एक सप्ताह तक हम चावल-दाल ही खाते रहे थे। बिजली नहीं थी और गर्मी ऐसी मानो हम उबल जाएँगे। मेरी बेटी कहती थी बिना बिजली के मर जाऊँगी, या बम-गोली से। घुट-घुटकर मरने से अच्छा है कि एक बार में मर जाऊँ।”
जैन परिवार के लिए त्रासदी का ये सिलसिला 15 अप्रैल 2023 को शुरू हुआ था। संतोष फैक्ट्री जा चुके थे। बच्चे स्कूल। वे कहते हैं, “उस दिन भी हमेशा की तरह हमारा सामान्य रूटीन ही था। मैं ऑफिस में काम कर रहा था अचानक बम-बारूद के गिरने की आवाज आने लगी। बाहर फायरिंग हो रही थी। सड़को और गलियों में टैंक दिख रहे थे। फैक्ट्री के सारे वर्कर लाइट बंदकर छिप गए। घंटों फायरिंग चलती रही। सामने की एक बिल्डिंग पर बम गिरा और वह ध्वस्त हो गई। इस बीच सूडान की मिलिट्री उनके फैक्ट्री में घुस गई। मोबाइल,पैसा सब कुछ छीनकर ले गई। उनके जाने के बाद भी करीब 24 घंटे तक वे लोग फैक्ट्री में ही कैद रहे।”
इधर संतोष फैक्ट्री में फँसे थे। उधर उनके बच्चे स्कूल में। एक टीचर उनके दोनों बच्चों को अपने साथ ले गए। अगले दिन फिर वे अपने बच्चे को घर लाए। अब संतोष नए सिरे से अपनी गृहस्थी बसाने के प्रयास में हैं। बच्चों का फरीदाबाद के ही एक स्कूल में दाखिला कराया है। वे कहते हैं, “सूडान की मिलिट्री और पारा मिलिट्री की चेंकिग से बच-बचकर हम पोर्ट सूडान पहुँचे। मात्र दो जोड़ी कपड़े लेकर आए हैं। सब कुछ खत्म हो गया है। 10 साल में जो कुछ भी हमने सूडान में बनाया घर-परिवार, दोस्त-रिश्तेदार… सब खत्म हो गया है।” पर उम्मीद का ही नाम जिंदगी है। संतोष और उनकी पत्नी ने एक स्टार्टअप शुरू किया है।
उत्तर प्रदेश की एक विवाहिता को हरियाणा के अंबाला में करीब एक महीने तक बंधक बनाकर रखा गया। उसके साथ रेप किया गया। बुर्का पहनने को मजबूर किया गया। नमाज पढ़ने का दबाव डाला गया। किसी तरह भागने में कामयाब रही पीड़िता ने मंगलवार (16 मई 2023) को मिर्जापुर पुलिस में आरिफ खान के खिलाफ शिकायत दी।
उसने बताया है कि आरिफ खान ने अभय मिश्रा बनकर उससे जान पहचान की थी। अंबाला ले जाकर उसने रेप कर अश्लील वीडियो बनाया। फिर ब्लैकमेल कर महीने भर उसके साथ दुष्कर्म किया। आरिफ खान पर पीड़ित महिला और उसके पति को धमकी देने का भी आरोप है।
आरिफ भी मिर्जापुर के पड़री थना इलाके का रहने वाला बताया जा रहा है। वह अंबाला में रहता है। पीड़िता और उसके पति ने पुलिस अधीक्षक संतोष मिश्रा से मुलाकात कर जान बचाने की गुहार लगाई। एसपी को दी गई शिकायत में पति ने कहा है कि अभय मिश्रा बनकर आरिफ उसकी पत्नी से बात करता था। अब उसे और उसकी पत्नी को जान से मारने की धमकी दे रहा है।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार अप्रैल 2023 में महिला के नंबर पर एक अंजान शख्स का फोन आया। इसके दोनों के बीच बातचीत का सिलसिला शुरू हुआ। शख्स ने महिला को अपना नाम अभय मिश्रा बताया। दोनों के बीच दोस्ती हो गई। इसके बाद महिला अपने मायके पहुँची। अभय बना आरिफ भी मिर्जापुर आ गया। एक दिन महिला को लेकर अंबाला चला गया। अंबाला जाने के बााद महिला को उसके असली नाम आरिफ खान का पता चला। सच्चाई पता चलने के बाद आरिफ महिला को डराने धमकाने लगा। उसने महिला के साथ रेप कर अश्लील वीडियो बना लिए।
अश्लील वीडियो वायरल करने की धमकी देकर वह महीने भर तक बलात्कार करता रहा। वह महिला को बुर्का पहनाकर रखता था। जबरन नमाज पढ़वाना चाहता था। इस बीच पीड़िता मौका देखकर अंबाला से भाग निकली और अपने पति के पास मिर्जापुर पहुँच गई। इसके बाद भी अब आरिफ कथित तौर पर महिला के पति को गाँव में आकर गोली मारने की धमकी दे रहा है। वह विवाहिता का अश्लील वीडियो वायरल करने और जबरन अपने साथ ले जाने की धमकी दे रहा है। पुलिस मामले की जाँच कर रही है।