Sunday, July 14, 2024
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एक मर्डर का राज दबाने के लिए पुलिसकर्मी सहित गवाह की भी हत्या… फिर बिहारी मजदूरों पर बरसाई गोलियाँ: मुख्तार अंसारी ऐसे पैदा करता था खौफ

29 अगस्त 2009 को मुख़्तार अंसारी ने मन्ना सिंह की हत्या करवा दी। फिर चश्मदीद गवाह राम सिंह मौर्य को UP पुलिस के कॉन्स्टेबल सतीश के साथ 19 मार्च 2010 को मरवा दिया। मन्ना सिंह के परिवार खौफ में रहें, इसके लिए बिहारी मजदूरों पर गोलियाँ बरसा दीं।

कभी अपराध ही नहीं भय और आतंक का दूसरा नाम रहे माफिया मुख़्तार अंसारी के आपराधिक जीवन की पड़ताल में ऑपइंडिया की टीम लगभग 1 सप्ताह पूर्वांचल के विभिन्न जिलों में रही। इस दौरान हमने कही-सुनी बातों पर ध्यान न देकर सीधे उन परिवारों से भी सम्पर्क साधा, जो कहीं न कहीं किसी न किसी रूप में मुख़्तार अंसारी के अपराध से प्रभावित हुए हैं।

मुख़्तार अंसारी द्वारा सताए गए लोगों की तादाद हमें सैकड़ों में बताई गई लेकिन पीड़ित होने के बाद भी अपनी व्यथा बताने का साहस काफी कम लोग ही कर पा रहे थे। उन तमाम पीड़ितों में एक नाम है अशोक सिंह का, जो मऊ जिले के रहने वाले हैं। मुख़्तार अंसारी ने अशोक सिंह के चचेरे भाई अजय उर्फ़ मन्ना सिंह की हत्या मऊ जिले में ही करवा दी थी।

2009 में हुई थी मन्ना सिंह की हत्या

अशोक सिंह ने हमें बताया कि उन्होंने मुख़्तार अंसारी के खिलाफ अपनी आवाज तब भी बुलंद रखी, जब वह आज की तमाम विपक्षी पार्टियों की सरकारों में पूरे रुतबे में हुआ करता था। भाई की हत्या का जिक्र करते हुए अशोक सिंह ने बताया कि 29 अगस्त 2009 को मुख़्तार अंसारी ने उनके भाई अजय उर्फ़ मन्ना सिंह की मऊ शहर में गोली मरवा कर हत्या करवा दी थी। हत्या की वजह उन्होंने अजय द्वारा अपनी मेहनत की कमाई से गुंडा टैक्स न देना बताया।

हत्या के बाद गवाह का भी पुलिसकर्मी सहित कत्ल

अशोक सिंह ने आगे बताया कि उनके भाई मन्ना सिंह की हत्या के चश्मदीद गवाह राम सिंह मौर्य थे। राम सिंह मौर्य की भी 19 मार्च 2010 को मऊ शहर में हत्या करवा दी गई। गवाह राम सिंह मौर्य को सुरक्षा के लिए गनर तौर पर UP पुलिस के कॉन्स्टेबल सतीश मिले थे, जो इस हमले में बलिदान हो गए। इस मामले में भी मुख़्तार अंसारी को आरोपित किया गया था, जिसका केस फ़िलहाल चल रहा है।

जिस शब्बीर को दी नौकरी, उसी ने दिया धोखा

अशोक सिंह के मुताबिक उनके भाई की हत्या के दौरान 2 लोग घायल भी हुए थे। इन घायलों में पहले राजेश राय थे और दूसरे मृतक अजय सिंह उर्फ़ मन्ना के ड्राइवर शब्बीर उर्फ़ राजा। राजेश राय की कुछ दिनों बाद मृत्यु हो गई थी जबकि ड्राइवर शब्बीर ‘पक्षद्रोही’ हो गया था।

पक्षद्रोही मतलब गवाह शब्बीर ने कोर्ट में मुख़्तार अंसारी का पक्ष ले लिया। मतलब जिसकी गोलियों से घायल हुआ, उसी के पक्ष में गवाही दी। अशोक सिंह बताते हैं कि अब शब्बीर अपना निजी इलेक्ट्रिक रिक्शा आदि चलाता है, जो सम्भवतः उसे मुख़्तार अंसारी ने खरीद कर दिया है।

बिहारी मजदूरों पर बरसाई गोलियाँ

अशोक सिंह आगे बताते हैं कि जब उन्होंने अपने भाई के लिए न्याय की लड़ाई में पीछे न हटने का एलान किया, तब उन्हें मुख़्तार फर्जी मामलों में फँसाने की साजिश रचने लगा। बकौल अशोक सिंह मुख़्तार अंसारी ने इस साजिश को अंजाम देने के लिए साल 2014 में आज़मगढ़ के थानाक्षेत्र तरवाँ में अपने ही सहयोगियों के यहाँ काम कर रहे बिहारी मजदूरों पर गोलियाँ बरसा दीं।

इस हमले में एक मजदूर की मौत हो गई थी, जबकि दूसरा घायल हुआ था। बाद में इस केस में अशोक सिंह और उनके चचेरे भाई हरेंद्र सिंह को हत्या का आरोपित बनाया गया था।

इस मामले में तत्कालीन एसएसपी आज़मगढ़ IPS अनंतदेव त्रिपाठी की तारीफ करते हुए अशोक सिंह ने बताया कि उन्होंने सही से जाँच करवाई तो उल्टा केस खुद मुख़्तार पर दर्ज हुआ और वो तथा उनके भाई केस से बरी हुए। अशोक सिंह के अनुसार मुख़्तार अंसारी इसी प्रकार अपने ही लोगों को मरवा कर दूसरों को फँसाने में माहिर है।

अतीक, शहाबुद्दीन ही नहीं विदेशों तक कनेक्शन

अशोक सिंह ने माफिया मुख़्तार अंसारी का आपराधिक नेटवर्क अतीक अहमद और शहाबुद्दीन के साथ जुड़ा बताया। उन्होंने दावा किया कि सही से जाँच होने पर अंसारी गैंग का विदेशी नेटवर्क भी मिलेगा। VHP नेता रूंगटा की हत्या की याद दिलाते हुए अशोक सिंह ने बताया कि मुख़्तार किसी की हत्या करने से पहले उसे अपने विश्वास में लेता था। उन्होंने मुख़्तार की फितरत पीठ में छुरा घोंपने वाली बताया। अशोक सिंह के मुताबिक मऊ दंगों में भी मुख़्तार का बड़ा हाथ था।

गौरतलब है कि मुख्तार अंसारी के आपराधिक कुकर्मों का चिट्ठा खोलने ऑपइंडिया के पत्रकार राहुल पांडेय कई दिनों तक ग्राउंड पर थे। वहाँ उन्होंने मुख्तार के खौफ की कई कहानियाँ दंगों के चश्मदीदों से जानीं। इस दौरान यह भी पता चला कि कैसे मुख्तार के डर से पुलिस सूअर पकड़ने पानी में घुस जाती थी, थाने से फाइलें गायब करवा दी जातीं थी, पत्रकारों को पीटा जाता था, मंदिरों की जमीन कब्जाई जाती थी और उसके द्वारा गोतस्करी जैसे अपराध करवाए जाते थे। आप लिंक पर क्लिक करके उनकी रिपोर्ट पढ़ सकते हैं।

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राहुल पाण्डेय
राहुल पाण्डेयhttp://www.opindia.com
धर्म और राष्ट्र की रक्षा को जीवन की प्राथमिकता मानते हुए पत्रकारिता के पथ पर अग्रसर एक प्रशिक्षु। सैनिक व किसान परिवार से संबंधित।

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