Home Blog Page 1811

बेटे ने गुरुद्वारे में महिला को मारी गोली, माँ-बाप का SGPC ने किया सम्मान: पेशी के वक्त हत्यारे पर भीड़ ने बरसाए फूल

पंजाब के पटियाला के गुरुद्वारे में 14 मई 2023 को एक महिला की गोली मारकर हत्या कर दी गई। बताया गया कि वो परिसर में बैठकर शराब पी रही थी इसलिए एक आदमी ने तैश में आकर उसे ताबड़तोड़ गोली मार दी। आरोपित का नाम निर्मलजीत सिंह सैनी है। वह एक प्रॉपर्टी डीलर है। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है। वहीं शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी द्वारा उसके माता-पिता को घर जाकर सम्मानित किया गया है और कोर्ट में पेशी के दौरान सैनी पर फूल बरसाए गए।

गुरुद्वारे में महिला की हत्या

बता दें कि महिला की हत्या की घटना रविवार रात 8 बजे के आसपास की है। पुलिस ने बताया कि गुरुद्वारा दुख निवारण साहिब में रविवार को जिस महिला पर गोली चलाई गई उसका नाम कुलविंदर कौर (40) था। वो 2016 के बाद से तलाकशुदा थी और जिराकपुर के सैलून में काम करके अकेले गुजारा करती थी। घटना के दिन वह बस पकड़कर मोहाली से पटियाला अकेले आई थी। 

पुलिस की छानबीन में ये भी सामने आया कि महिला को शराब पीने की लत लगी हुई थी और ये लत छुड़ाने के लिए उसका इलाज आदर्श अस्पताल में चल रहा था। डॉक्टर ने लिखित में दिया है महिला को मूड स्विंग की दिक्कत थी, वह डिप्रेशन में थी और बहुत जल्दी उसे नेगेटिव ख्याल आ जाते थे।

पुलिस ने बताया कि रविवार को गुरुद्वारे के परिसर में एक सरोवर के पास वो शराब ही पी रही थी, जब सेवादारों ने उसे रोका तो वो झगड़ने लगी। इसके बाद उसे गुरुद्वारे के मैनेजर के पास ले जाने लगे। वहीं आरोपित निर्मलजीत सिंह सैनी खड़ा था। उसने लगातार 5 गोलियाँ चलाईं। महिला की वहीं मौत हो गई। एक और गोली सागर नाम के श्रद्धालु को लगी उसका ईलाज करवाया जा रहा है।

पुलिस ने इस मामले में अनाज मंडी थाने में केस दर्ज किया है। आरोपित एक प्रॉपर्टी डीलर है। उसके ऊपर दहेज के लिए प्रताड़ना देने के आरोप में पहले से एक केस दर्ज है। पुलिस का कहना है कि आरोपित और मृतक दोनों एक दूसरे को नहीं जानते थे। आरोपित एक श्रद्धालु था जो दिन में दो बार गुरुद्वारे आता था। जब उसे पता चला कि महिला परिसर में बैठ शराब पी रही थी तो उसने वहीं उसे अपने लाइसेंसी बंदूक से गोली मार दी।

SGPC ने आरोपित के माता-पिता को दिया सम्मान, गोली चलाने वाले पर लोगों ने फूल बरसाए

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस से जब पूछा गया कि आखिर कोई गुरुद्वारे में बंदूक लेकर कैसे गया तो इस पर एसएसपी ने बताया कि  गुरुद्वारे के बाद 4 पीसीआर खड़ी होती हैं, पैरामिलिट्री फोर्स होती हैं, लेकिन अंदर की सुरक्षा मैनेजमेंट देखती है। वहीं गुरुद्वारे के ग्रंथी ने कहा कि वो लोग श्रद्धालुओं को कुछ नहीं टोंकते। ये उनकी (श्रद्धालुओं) नैतिकता होनी चाहिए कि वो गुरुद्वारे में शराब-हथियार न लाएँ। शिरोमणित गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने अध्यक्ष हरजिंदार इस मामले में हाई लेवल मीटिंग का आदेश दिया है। उन्होंने कहा कि इस तरह गुरुद्वारे में शराब पीना किसी साजिश के तहत किया गया कृत्य है।

वह बोले “सिख विरोधी ताकतें सोची समझी साजिश के साथ गुरुद्वारों को निशाना बना रही हैं और सरकार मूक दर्शक बनी हुई है। गुरुद्वारे के अंदर शराब पीने की हरकत एक साजिश थी।” घटना के बाद जहाँ पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार किया है । वहीं सैनी के माता-पिता को गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी द्वारा सिरोपा से सम्मानित किया गया है। ये सम्मान उन्हें ज्ञानी प्रीतपाल सिंह, गुरुद्वारे के प्रमुख ग्रंथि दुखनिवारण सिंह साहिब समेत कई लोगों की मौजूदगी में दिया गया। इसके अलावा कुछ सिख समूह के लोग कोर्ट भी पहुँचे जहाँ निर्मलजीत सिंह सैनी को पेश किया जा रहा था, इस दौरान उस पर फूल बरसाए गए।

3 महीने में उत्तराखंड में 330+ मजार ध्वस्त, बोले CM धामी- समान नागरिक संहिता पर जून तक पूरा हो जाएगा कमिटी का काम

समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने के लिए उत्तराखंड की सरकार ने सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत न्यायाधीश रंजना देसाई की अध्यक्षता में एक कमिटी का गठन किया। इस कमिटी का काम जून 2023 के अंत तक पूरा हो जाएगा। यह जानकारी मुख्यमंत्री
पुष्कर सिंह धामी ने दी है। इस बीच राज्य में मुख्यमंत्री धामी के निर्देश पर वन विभाग अवैध मजारों पर बुलडोजर चला रहा है। बीते 3 महीनों में 330 से अधिक ऐसे मजार ध्वस्त किए गए हैं।

उत्तराखंड में ‘मजहबी अतिक्रमण’ पर खुफिया रिपोर्ट के बाद अवैध मजारों को हटाने की कार्रवाई में तेजी आई है। इसके लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने भी अभियान छेड़ रखा है। अवैध मजार हटाने की कार्रवाई सोमवार (15 मई 2023) को भी जारी रही। इस कार्रवाई में जिम कॉर्बेट टाइगर रिजर्व प्रशासन जंगल के अंदर बनी 9 अवैध मजारों पर बुलडोजर चलाया। 

गौरतलब है कि किसी भी टाइगर रिजर्व में मानवी गतिविधियाँ पूरी तरह से प्रतिबंधित होती हैं। हालाँकि पर्यटकों को घूमने की अनुमति होती है। लेकिन इसमें भी एक निश्चित दायरा तय किया जाता है। फिर भी जिम कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में मजार बन गए और वहाँ बिना किसी रोक-टोक के आवाजाही हो रही थी। मामला उजागर होने के बाद वन विभाग सक्रियता दिखाते हुए अवैध मजारों को तोड़ते हुए जमीन अतिक्रमण मुक्त कराने की कोशिश में जुटा हुआ है।

इस मामले में जिम कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के डायरेक्टर धीरज पांडे ने न्यूज18 से हुई बातचीत में कहा है कि सरकार के निर्देशों के अनुसार उन्होंने अवैध अतिक्रमण के खिलाफ सख्त कदम उठाए हैं। मजारों का मालिकाना हक साबित करने के लिए एक सप्ताह पहले नोटिस जारी किया गया था। लेकिन कोई भी सामने नहीं आया। इसके बाद, इन अवैध कब्जों को हटा दिया गया। पिछले तीन महीनों में 330 से अधिक मजारों को हटाया गया है। इससे वन विभाग की 91 हेक्टेयर जमीन अतिक्रमण मुक्त हुई। अतिक्रमण हटाने को लेकर की गई इस कार्रवाई पर सीएम धामी ने कहा है, “देवभूमि में अतिक्रमण हटाने का प्रयास जारी रहेगा। उत्तराखंड में किसी भी तरह के लैंड जिहाद की अनुमति नहीं दी जाएगी।”

UCC पर कमिटी का 90 फीसदी काम पूरा

देश में समान नागरिक संहिता को लेकर उठ रही माँगों के बीच उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि राज्य सरकार इसके लिए तैयारियाँ कर रही है। उधमसिंह नगर जिले के काशीपुर में मीडिया से बात करते हुए सीएम ने कहा, “समान नागरिक संहिता का ड्राफ्ट तैयार करने के लिए हमने एक कमिटी बनाई थी। इस कमिटी का लगभग 90 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। कमिटी 30 जून तक काम पूरा लेगी। इसके बाद हम समान नागरिक संहिता को लागू करने की दिशा में आगे बढ़ेंगे। हमें उम्मीद है कि देश के सभी राज्य समान नागरिक संहिता को लागू करने की दिशा में आगे बढ़ेंगे।”

गौरतलब है कि अप्रैल 2022 में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा था कि CAA, अनुच्छेद 370, राम मंदिर और तीन तलाक के बाद अब समान नागरिक संहिता की बारी है। उन्होंने कहा था कि उत्तराखंड की तर्ज पर ही भाजपा शासित अन्य राज्यों में भी समान नागिरक संहिता लागू किया जाएगा।

मुस्लिम औरतों का ‘दर्द’ लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुँची मोहम्मद शमी की बीवी, खुद को बताया- शरीयत पीड़ित: कहा- सनक में छोड़ देते हैं मर्द

भारतीय क्रिकेटर मोहम्मद शमी की बीवी हसीन जहाँ ने सुप्रीम कोर्ट में खुद को शरीयत से पीड़ित बताया है। एक समान तलाक कानून की माँग की है। कहा है कि इस्लामी कानून की वजह से मर्द सनक और मर्जी से बीवियों को छोड़ देते हैं। इसलिए तलाक-उल-हसन और न्यायिक दायरे के बाहर तलाक देने की मुस्लिमों में परिपाटी को खत्म करने की अपील की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हसीन जहाँ ने वकील दीपक प्रकाश के जरिए सुप्रीम कोर्ट में यह याचिका दायर की है। याचिका में कहा गया है कि हसीन जहाँ शरीयत कानून के तहत मिलने वाले तलाक की एकतरफा प्रक्रिया तलाक-उल-हसन की पीड़ित हैं। शमी ने उन्हें 23 जुलाई 2022 को पहली बार तलाक का नोटिस भेजा था। यह नोटिस तलाक-उल-हसन के तहत ही भेजा गया था।

याचिका में यह भी कहा गया है कि शरीयत कानून में तलाक-उल-हसन और तलाक-ए-बिद्दत के अलावा तलाक देने की कई प्रक्रिया हैं। इन प्रक्रियाओं के तहत मर्द अपनी मर्जी या सनक के चलते बीवियों को छोड़ देते हैं। शरीयत के इन नियमों को चलते मर्द तलाक से पहले महिलाओं को सुलह करने का मौका नहीं देते। बिना किसी बातचीत के ही उन पर फैसला लाद दिया जाता है।

हसीन जहाँ ने कहा है कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड शरीयत एक्ट-1937 की धारा 2 भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 21 और 25 के तहत मिले मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करती है। इसलिए इस धारा को असंवैधानिक घोषित किया जाए। साथ ही तलाक को लेकर धर्म या लिंग का भेदभाव किए बिना देश के सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून होना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली पीठ ने इस याचिका को स्वीकार करते हुए केंद्र को नोटिस भेजा है। साथ ही कहा है कि वह ‘तलाक-ए-हसन’ को चुनौती देने वाली पहले से लंबित याचिकाओं पर सुनवाई के साथ ही इस याचिका पर सुनवाई करेगा।

बता दें कि मोहम्मद शमी और उनकी पत्नी हसीन जहां के बीच तलाक नहीं हुआ है। लेकिन 4 साल से अधिक समय से दोनों अलग रह रहे हैं। कोर्ट के आदेश के तहत शमी हसीन जहां को हर महीने 1 लाख 30 हजार रुपए का गुजारा भत्ता देते हैं। इसमें से 80000 रुपए उनकी बेटी की पढ़ाई-लिखाई व अन्य खर्चों के लिए दिया जा रहा है।

प्रोफेसर कमाल ने किया ब्रेनवॉश, जाकिर नाइक ने धर्मांतरण: ओवैसी के कॉलेज का ‘आतंकी प्रोफेसर’ कैसे बना मुस्लिम, माँ-बाप ने बताया

मध्यप्रदेश एटीएस द्वारा हिज्ब-उत-तहरीर के आतंकियों को गिरफ्तार किए जाने के बाद जो धर्मांतरण के खेल का भंडाफोड़ हुआ है…उसे जान सब हैरान हैं। पूछताछ में सामने आया कि भोपाल में संगठन का सरगना मोहम्मद सलीम पहले कभी खुद सौरभ राजवैद्य हुआ करता था। लेकिन बाद में उसे मुस्लिम बन गया। उसमें ऐसी कट्टरता भरी गई कि वो खुद युवकों को कट्टरपंथ की ट्रेनिंग देने लगा। माता-पिता बताते हैं कि सलीम उर्फ सौरभ की शिक्षा बहुत सामान्य ढंग से हुई थी। लेकिन भोपाल के कॉलेज में प्रोफेसरी के दौरान एक साथी शिक्षक ने उसे इस्लाम की ओर रुख करवाया और उसके बाद जाकिर नाईक की वीडियो देखते-देखते कुछ समय बाद वह परिवार सहित मुसलमान बन गया।

सलीम के माता-पिता भोपाल के बैरसिया इलाके के निवासी हैं। वह सौरभ से सलीम बने अपने बेटे के बात करते हुए मीडिया के सामने काफी भावुक हो गए। पिता डॉ अशोक राजवैद्य ने जहाँ मीडिया से खुलकर बताया कि ये सब इंटरनेशनल साजिश के तहत हो रहा है। वहीं माँ फफक कर रोते हुए बस ये कहती रहीं कि उनका बेटा आतंकी नहीं बन सकता। उसे फँसाया गया है।

प्रोफेसर कमाल ने किया ब्रेनवॉश, जाकिर नाईक ने धर्मांतरण कराया

मीडिया को सौरभ की कई पुरानी तस्वीरें दिखाते हुए माता-पिता ने बताया कि 4 बेटियों के बाद सौरभ बड़ी मुश्किल से हुआ था और बचपन से ही पढ़ाई करने में बहुत तेज था। वह डॉक्टर बनना चाहता था। लेकिन मेडिकल में नंबर न आने की वजह से उसने एम.फार्मा के बाद पीएचडी की। इसके बाद वह भोपाल के एक कॉलेज में पढ़ाने लगा।

पिता के अनुसार, वीआईटी कॉलेज में पढ़ाने के दौरान सौरभ की मुलाकात प्रोफेसर कमाल से हुई। उसी कमाल ने बेटे का ब्रेनवॉश किया और फिर उसकी मुलाकात मुंबई में जाकिर नाईक से करवाई। पिता राजवैद्य के अनुसार, नाईक ने भोपाल में कई लोगों को कन्वर्ट किया था। उनके बेटे के धर्मांतरण में भी नाईक का हाथ है।

रक्षा बंधन मनाने से मना किया, बीवी-बच्चों का धर्मांतरण कराया

मीडिया में आए सौरभ के पिता के बयान के अनुसार, कट्टरपंथियों के संपर्क में आने के बाद सौरभ बदल गया था। वह हर बात पर उलझता था, रक्षा बंधन मनाने से मना करता था, भारतीय संस्कृति का विरोध करता था… घरवालों को एक दिन पता चला कि उसने इस्लाम कबूल कर लिया है। जब उससे इस संबंध में सामने से पूछा गया तो उसने हाँ में जवाब दिया। इसके बाद उन्होंने सौरभ को घर से निकाल दिया और पुलिस को सूचना दी कि उसने धर्मांतरण कर लिया है। अब उनका सौरभ से कोई लेना-देना नहीं है।

एटीएस की हालिया कार्रवाई पर उन्होंने कहा कि वो ऐसा एक्शन पहले ही चाहते थे। लेकिन ये अब जाकर हुआ है। मध्य प्रदेश एटीएस ने सलीम को पकड़ा है। उससे पूछताछ और जाँच चल रही है। लेकिन जो खबरें आ रही हैं कि उनका बेटा कैंप में गन ट्रेनिंग देता था, उस पर उन्हें यकीन नहीं है। पिता कहते हैं कि ये सब कुछ अंतरराष्ट्रीय साजिश के तहत हुआ है। इंटेलिजेंट लड़कों पर उनकी (कट्टरपंथियों) नजर होती है। उनको वह हिंदू से मुस्लिम बनाते हैं। यह डॉक्टर जाकिर नाइक की साजिश है। वे लोग ऐसा नशा पिलाते हैं कि ऑरिजनल इस्लाम एक तरफ हो जाता है और लोग कट्टर-हिंसक बन जाते हैं।

डॉ अशोक राजवैद्य बताते हैं कि कैसे सौरभ पहले खुद इस्लाम कबूल करके सलीम बना। उसके बाद उसकी बीवी मानसी को मुसलमान बनाया और दो पोते जिनका नाम उन्होंने अनुनय और वत्सल रखा था उन्हें बदलकर युसूफ और इस्माइल कर दिया। पिता ने यह भी जानकारी दी कि सलीम के हैदराबाद जाने के बाद उसके बेटे उसके साथ नहीं रहना चाहते थे। वे घर से भागकर भोपाल आना चाहते थे, लेकिन सलीम उन्हें पकड़ लेता था। ये बात खुद दोनों पोतों ने उन्हें बताई 6 महीने पहले बताई थी। हैदराबाद में सलीम ओवैसी के कॉलेज में प्रोफेसर था। धर्मांतरण के बाद उसे यहाँ नौकरी मिली थी।

‘अम्मा हमें बचा लेना’: माँ से कहता था सौरभ

सौरभ की माँ ने मीडिया से बात करते हुए बार-बार गुहार लगाई कि किसी तरह उनका बेटा उन्हें लौटा दिया जाए। माँ बसंती जैन ने कहा कि उनका बेटा उन लोगों से बहुत चीजें छिपाने लगा था। जब आखिरी बार सौरभ ने बात की थी तो उन्हें लगा ही था कि वो किसी दिक्कत में है। मगर, बहुत पूछने पर कुछ बताया नहीं। बाद में उसकी बीवी मानसी से बात हुई तो वह बहुत रोई। उसने कहा कि गिरफ्तारी के बारे में सौरभ ने माता-पिता को बताने से मना किया था। इस पर बसंती जैन ने कहा पहले अगर वे लोग उनके पास लौट आते तो यह सब नहीं होता। माँ का मानना है कि उनके बेटे से कोई ये सब जबरदस्ती ब्लैकमेल करके करवा रहा है। उनका बेटा ये सब नहीं कभी नहीं कर सकता।

बसंती जैन के मुताबिक अगर सौरभ उनके साथ रहता तो कभी कट्टरपंथ की चीजों में नहीं फँसता। उसे पहले उनसे दूर किया गया और फिर इन चीजों में फँसाया गया। उसके बर्ताव के कारण डॉ अशोक राजवैद्य कभी उससे बात नहीं करते थे। लेकिन बसंती जैन उसे फोन करती थीं। उसके बच्चों के लिए तोहफे भिजवाती थीं…सिर्फ इसलिए ताकि सौरभ का कनेक्शन परिवार से बिलकुल न कटे। कभी-कभी वो फोन पर कहती भी थीं- “बेटा वापस आजा” पर वो जवाब देता था- “आखिर में तो मरना ही है, ऐसे ही मर जाएगें।” बसंती जैन यह भी बताती हैं कि सौरभ ने एक बार उन्हें कहा था- “अम्मा अगर हम फँसें तो बचा लेना।” अपने बेटे की पुरानी बातें याद करते हुए माँ कहती है- मेरा बेटा निर्दोष है, वो आतंकी नहीं हो सकता, उसे फँसाया जा रहा है।

ATS की कार्रवाई

गौरतलब है कि मध्यप्रदेश और तेलंगाना की एटीएस ने भोपाल-छिंदवाड़ा में हिज्ब उत- तहरीर के आतंकियों को पकड़कर उनके मनसूबों का खुलासा किया था। जाँच में इनके पास से कई आपत्तिजनक मिलीं थी। इनका मकसद भारत को इस्लामी देश बनाने का था। हालाँकि पूछताछ में धर्मांतरण की ऐसी कहानी सामने आई जिसने सबको हैरान कर दिया। सीएम शिवराज ने आतंकियों के खुलासे के बाद सामने आकर कहा कि वो राज्य में ‘द केरल स्टोरी’ नहीं बनने देंगे। यहाँ आतंकवाद को नेस्तनाबूद किया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट का स्टे मेरिट वाले प्रमोशन पर नहीं, राहुल गाँधी को सजा सुनाने वाले जज भी दायरे में नहीं: ​जस्टिस शाह, गुजरात के जजों की पदोन्नति पर लगी थी रोक

पिछले दिनों मीडिया में खबर आई थी कि सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने गुजरात (Gujarat) की निचली अदालत के 68 न्यायिक अधिकारियों के जिला जज के रूप में प्रमोशन पर रोक लगा दी है। इनमें हरीश वर्मा का नाम भी बताया गया था। उन्होंने मानहानि केस में राहुल गाँधी को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई थी। लेकिन प्रमोशन पर स्टे लगाने वाले जस्टिस एमआर शाह का कहना है कि मीडिया ने आदेश को गलत तरीके से रिपोर्ट किया है। साथ ही यह भी बताया है कि इस आदेश के दायरे में राहुल गाँधी को सजा सुनाने वाले जज नहीं आएँगे।

बार ऐंड बेंच ने जस्टिस शाह के हवाले से कहा है कि यह स्टे योग्यता के आधार पर होने वाले प्रमोशन पर लागू नहीं होगी। उन्होंने कहा, “जजों के प्रमोशन पर रोक लगाने वाले आदेश का किसी एक व्यक्ति से लेना-देना नहीं है। मामला यह था कि प्रमोशन का पैमाना योग्यता सह वरिष्ठता हो या फिर वरिष्ठता सह योग्यता। सोशल मीडिया पर चल रही खबरों में कहा जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने सभी 68 जजों के प्रमोशन पर रोक लगा दी है। लेकिन ऐसे लोगों ने आदेश नहीं पढ़ा है। केवल ऐसे प्रमोशन पर रोक लगाई गई है जिन्हें मेरिट लिस्ट में नहीं होने के बाद भी केवल वरिष्ठता के आधार पर प्रमोशन दिया गया था।”

जस्टिस शाह के अनुसार जज हरीश वर्मा रोक के इस पैमाने के दायरे में नहीं आते। उन्होंने कहा, “मैंने पढ़ा है कि सज्जन (राहुल गाँधी केस में सूरत कोर्ट के जज) को प्रमोशन नहीं मिल रहा है। यह भी सच नहीं है। उन्हें मेरिट के आधार पर प्रमोशन मिल रहा है। वह योग्यता के मामले में 68 में पहले स्थान पर हैं।”

बता दें कि शुक्रवार (12 मई, 2023) को सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस सीटी रविकुमार की बेंच ने जजों के प्रमोशन पर रोक लगाई थी। फैसले में जस्टिस कहा गया था, “राज्य सरकार ने याचिका लंबित रहने के दौरान अधिसूचना जारी की है। हम हाई कोर्ट की सिफारिश और राज्य सरकार की अधिसूचना पर रोक लगाते हैं और जजों को उनके मूल पद पर वापस भेजते हैं।”

क्या है मामला

बता दें कि 68 जजों के प्रमोशन को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी। सीनियर सिविल जज कैडर के दो अधिकारियों ने अपनी याचिका में कहा था कि 65 प्रतिशत कोटा नियम के तहत इन जजों का प्रमोशन किया गया, जो कि अवैध है। याचिका में दलील दी गई थी कि प्रमोशन मेरिट कम सीनियरिटी के सिद्धांत पर की जानी चाहिए।

याचिका दाखिल करने वाले न्यायिक अधिकारी रवि कुमार मेहता और सचिन प्रजापराय मेहता ने अपनी अर्जी में कहा था कि कई ऐसे जज हैं, जिन्होंने पदोन्नति के लिए हुई परीक्षा में ज्यादा अंक हासिल किए हैं। इसके बावजूद उनका सिलेक्शन नहीं किया गया और उनसे कम अंक पाने वाले जजों को प्रमोट किया गया।

कॉन्ग्रेस के लिए अब दिल्ली कितनी दूर?

भाजपा हमें ताना मारती थी कि हम कॉन्ग्रेस मुक्त भारत बनाएँगे। अब यह सच्चाई है कि दक्षिण भारत भाजपा मुक्त हो गया है।

कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने यह बात कर्नाटक विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद कही। 2014 से चमत्कार की आस में प्रतीक्षारत विपक्ष को इन नतीजों में 2024 की जीत दिख रही है। बीजेपी की हर पराजय में ‘कॉन्ग्रेस उदय’ देखने वाले पत्रकारों/प्रोपेगेंडाबाजों के लिए यह 2024 से पहले नरेंद्र मोदी के ‘मिशन दक्षिण’ की बुनियाद दरकना है।

तो क्या दिल्ली अब कॉन्ग्रेस की मुट्ठी में है? क्या 2024 अब कॉन्ग्रेस की है?

दक्षिण भारत के राज्य

  • कर्नाटक
  • केरल
  • तमिलनाडु
  • आंध्र प्रदेश
  • तेलंगाना

दक्षिण भारत के राज्यों में किसकी सरकार

  • कर्नाटक: कॉन्ग्रेस
  • केरल: वाम दल
  • तमिलनाडु: डीएमके
  • आंध्र प्रदेश: वाईएसआर कॉन्ग्रेस
  • तेलंगाना: भारत राष्ट्र समिति

तेलंगाना में इसी साल विधानसभा चुनाव होंगे। आंध्र प्रदेश में अगले साल आम चुनावों के साथ चुनाव होंगे।

दक्षिण भारत में लोकसभा की सीटें

  • कर्नाटक: 28
  • केरल: 20
  • तमिलनाडु: 39
  • आंध्र प्रदेश: 25
  • तेलंगाना: 17

इस तरह ​दक्षिण भारत में लोकसभा की कुल सीटें 129 हैं। 2019 में इनमें से केवल 29 सीटों पर बीजेपी को जीत मिली थी। इनमें चार सीटें तेलंगाना से आई थी और 25 कर्नाटक से। मतलब, दक्षिण भारत के तीन राज्यों में तो बीजेपी का खाता भी नहीं खुला था।

अब क्या हो सकता है?

पिछली बार भी जब आम चुनाव हुए थे तो कर्नाटक में कॉन्ग्रेस और जेडीएस की सरकार चल रही थी। फिर भी बीजेपी 25 सीटें जीतने में कामयाब रही। 2019 के लोकसभा चुनावों से ठीक पहले राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में भी कॉन्ग्रेस सरकार बनाने में कामयाब हुई थी। लेकिन जब लोकसभा के चुनाव हुए तो छत्तीसगढ़ की 11 में से 9, मध्य प्रदेश की 29 में से 28 और राजस्थान की 25 में से 25 सीट बीजेपी को मिली। 2017 में गुजरात के विधानसभा चुनावों में भी बीजेपी को टक्कर देने में कॉन्ग्रेस सफल रही थी। लेकिन 2024 के लोकसभा में कॉन्ग्रेस का गुजरात में खाता तक नहीं खुला।

जाहिर है राज्यों के विधानसभा और लोकसभा के चुनाव अलग-अलग होते हैं। फिर भी कॉन्ग्रेस के लिए घोर आशावादी होकर भी सोचा जाए तो कर्नाटक विधानसभा चुनाव के मौजूदा गणित के हिसाब से बीजेपी को 18 सीटों का नुकसान हो सकता है।

दक्षिण भारत में बीजेपी की ताकत

कर्नाटक विधानसभा चुनाव की मुश्किल डगर का एहसास बीजेपी को पहले से था। हालाँकि यह उम्मीद नहीं रही होगी कि जेडीएस के वोट बैंक में इतना बिखराव होगा और कॉन्ग्रेस को स्पष्ट बहुमत मिल जाएगा। कर्नाटक के अलावा दक्षिण में बीजेपी की उम्मीदों के हिसाब से तेलंगाना महत्वपूर्ण राज्य है। वहाँ पार्टी 2019 के बाद से खुद को कितना मजबूत कर पाई है, ​इसके संकेत राज्य में इस साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनावों में मिल जाएँगे। लोकसभा चुनाव के लिहाज से देखें तो कर्नाटक और तेलंगाना के अलावा दक्षिण के किसी और राज्य में 2024 में बीजेपी के चमत्कार कर जाने की अपेक्षा उसके घोर समर्थक को भी न होगी। वैसे आंध्र और तमिलनाडु में भी पूर्व में बीजेपी खाता खोलने में सफल रही है। लेकिन उसमें बीजेपी की खुद की मजबूती से अधिक गठबंधन साथियों का योगदान रहा है।

दक्षिण भारत में कॉन्ग्रेस का हाल

कर्नाटक की सत्ता हासिल करने में कामयाब रही कॉन्ग्रेस को 2019 के आम चुनावों में दक्षिणी राज्यों से 27 सीटों पर जीत मिली थी। इनमें से एक कर्नाटक से, तीन तेलंगाना से, 15 केरल से और 8 तमिलनाडु से थे। अब तेलंगाना में बीजेपी के उभार ने कॉन्ग्रेस को हाशिए पर धकेल रखा है। आंध प्रदेश में वाईएसआर कॉन्ग्रेस पहले की तरह मजबूत दिखती है। ऐसी कोई संभावना नहीं दिखती कि जगन मोहन रेड्डी विपक्षी एकता के नाम पर कॉन्ग्रेस की छतरी के नीचे जाएँगे। 2019 के आम चुनावों से पहले एनडीए छोड़ विपक्षी एका बनाने चले चंद्रबाबू नायूड की टीडीपी आंध्र की दूसरी प्रमुख क्षेत्रीय पार्टी है। राष्ट्रीय राजनीति में खुद को अप्रसांगिक कर चुके नायडू ने भी इस बार अब तक ऐसी किसी मुहिम से खुद को दूर ही कर रखा है। केरल में कॉन्ग्रेस गठबंधन और वाम दलों के गठबंधन के बीच ही इस बार भी कमोबेश मुकाबला रहेगा। तमिलनाडु में आज भी कॉन्ग्रेस सत्ताधारी डीएमके की सहयोगी है। मुकाबला डीएमके और एआईडीएमके गठबंधन के बीच होगा।

यानी ऐसी कोई संभावना नहीं दिखती जिससे लगे कि दक्षिणी राज्यों में कॉन्ग्रेस को कोई नया और मजबूत पाटर्नर मिलने जा रहा है। न ही इस बात की संभावना दिखती कि वह दक्षिण भारत की 129 लोकसभा सीटों में 2019 के मुकाबले अपनी सीटों में भारी इजाफा कर पाएगी। तेलंगाना और आंध्र में उसकी जमीन खिसक चुकी है। तमिलनाडु में वह डीएमके की कृपा पर है। कर्नाटक और केरल में ही उसके लिए बेहतर करने की संभावना बचती है। इन दोनों राज्यों की यदि सभी सीटें भी कॉन्ग्रेस जीत ले (जिसकी संभावना नाममात्र है) और अन्य दक्षिणी राज्यों में 2019 में हासिल की गई सीटों को वह बरकरार रख लेती है तो भी उसके पास खुद की 59 सीटें ही होंगी। दक्षिण भारत के अलावा अन्य राज्यों में भी कॉन्ग्रेस ऐसी स्थिति में नहीं है कि वह खुद के दम पर 41 सीटें लाकर लोकसभा में अपने सदस्यों की संख्या तीन डिजिट में पहुँचा सके।

… तो इस जीत से क्या होगा

कर्नाटक की जीत कॉन्ग्रेस के लिए लोकसभा चुनावों से पहले चुनावी संसाधन जुटाने के लिहाज से महत्वपूर्ण है। इसने उसे वह नंबर्स दिए हैं जिससे वह 2024 के आम चुनावों तक राहुल गाँधी नाम के प्रोडक्ट को बेचने की कोशिश कर सके। वह ताकत दी है, जिससे काल्पनिक मुद्दे गढ़ सके, जैसे 2019 से पहले राफेल का गढ़ा गया था। उम्मीदों का वह लॉलीपॉप दिया है, जिससे अपने सहयोगियों को भागने से रोक सके।

वैसे भाड़े के सैनिकों से युद्ध जीतने की कई कहानियाँ हैं। पर ये युद्ध तभी जीते गए जब सेनापति खुद भी सक्षम थे। कॉन्ग्रेस की सबसे बड़ी दिक्कत यही है। वह भानुमती का कितना भी बड़ा कुनबा जोड़ ले, उसका स्वयंभू सेनापति (भले आज कर्नाटक जीत में भारत जोड़ो यात्रा का प्रभाव भी बताया जा रहा) निस्तेज और सामर्थ्यहीन है। खासकर जब मुकाबला नरेंद्र मोदी नाम के राजनीतिक बाहुबली से हो। फिलहाल जो कानूनी स्थिति है वह भी कॉन्ग्रेस के स्वयंभू सेनापति को चेहरा बनने की अनुमति नहीं देता है। यानी पार्टी को 2024 के लिए चेहरे की तलाश भी करनी है। हमें यह भी ध्यान रखना चाहिए कि 2019 के आम चुनावों से पहले कई विधानसभा चुनावों में अच्छे प्रदर्शन के बाद भी कॉन्ग्रेस लोकसभा में ट्रिपल डिजिट में अपने सीटों को ले जाने के आसपास भी नहीं पहुँच पाई थी। उस समय पप्पूपना की उम्र भी 5 साल कम थी।

त्रयंबकेश्वर मंदिर में घुस कर शिवलिंग पर चादर चढ़ाने की कोशिश, सतर्क सुरक्षाकर्मियों ने मुस्लिमों को रोका: मंदिर के पास ही चल रहा था उर्स का मजहबी आयोजन

कुछ मुस्लिमों ने महाराष्ट्र के नासिक स्थित त्रयम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में घुस कर शिवलिंग पर चादर चढ़ाने की कोशिश की, लेकिन सतर्क सुरक्षा गार्ड्स ने उनके इस कुत्सित प्रयास को विफल कर दिया। वो जबरन मंदिर के भीतर घुसना चाह रहे थे। इस घटना के बाद से इलाके में तनाव बढ़ गया है और ‘ब्राह्मण महासभा’ ने इसकी गहरी जाँच की माँग की है। बता दें कि भगवान शिव का ये मंदिर द्वादश ज्योतिर्लिंगों में आता है।

सुरक्षकर्मियों ने इन मुस्लिमों को मंदिर के अंदर प्रवेश करने से रोक दिया। जो मुस्लिम भीतर घुसने का प्रयास कर रहे थे, वो अपने मजहबी कार्यक्रम उर्स में शामिल होने के लिए आए थे। लेकिन, सतर्क सुरक्षाकर्मियों और मुस्तैद मंदिर प्रशासन ने उनकी मंशा पर पानी फेर दिया। फिर स्थिति को नियंत्रित भी कर लिया गया। आरोपितों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की माँग की जा रही है। पुलिस द्वारा कार्रवाई न होने पर पुजारियों ने विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी है।

इस संबंध में मंदिर प्रशासन ने स्थानीय पुलिस थाने को पत्र भी लिखा है। इसमें शनिवार (13 मई, 2023) को रात में 9:41 बजे हुई इस घटना के संबंध में बताया गया है। मंदिर के उत्तरी द्वार से कुछ ही दूरी पर उर्स का आयोजन चल रहा है। वहीं से कुछ मुस्लिमों ने मंदिर में एंट्री लेने की कोशिश की। इस पत्र में लिखा है कि सदियों से ये परंपरा चली आ रही है कि मंदिर में सिर्फ हिन्दुओं को ही प्रवेश देने की अनुमति रही है, जिनकी हिन्दू धर्म में आस्था नहीं है उन्हें नहीं।

देवस्थान ट्रस्ट ने पुलिस से इस मामले में जाँच शुरू कर कार्रवाई करने के लिए कहा है। लिखा है कि इस घटना से सामाजिक तानेबाने को नुकसान पहुँच सकता है। आगे इस तरह की घटना न हो, इसके लिए व्यवस्था करने के लिए भी निवेदन किया गया है। ये मंदिर नीलगिरि, ब्रह्मगिरि और कलागिरि की पहाड़ियों के बीच में स्थित है। मंदिर में ब्रह्मा, विष्णु और महेश का प्रतिनिधित्व करते हुए 3 लिंग स्थापित हैं। मुग़ल बादशाह औरंगजेब द्वारा ध्वस्त किए जाने के बाद पेशवा बालाजी बाजीराव ने इसका पुनर्निर्माण करवाया था।

सुप्रीम कोर्ट ने जिस वकील को हाईकोर्ट का जज बनाने के लिए 4 बार की सिफारिश, कर्नाटक चुनाव में उसकी जमानत जब्त: JDS ने दिया था टिकट

सुप्रीम कोर्ट ने नागेंद्र नाइक नामक वकील को कर्नाटक हाई कोर्ट का जज बनाने के लिए केंद्र सरकार से 4 बार सिफारिश की थी। हालाँकि केंद्र ने हर बार शीर्ष अदालत को पुनर्विचार करने के लिए कहा। जज बनने का सपना पूरा न होता देख नागेंद्र नाइक ने विधायक बनने का सपना देखा और यह भी अधूरा रह गया। दरअसल, नागेंद्र ने जेडीएस के टिकट पर कर्नाटक विधानसभा का चुनाव लड़ा। लेकिन, उनकी जमानत जब्त हो गई।

जनता दल (सेक्युलर) ने नागेंद्र नाइक को भटकल विधानसभा क्षेत्र से अपना प्रत्याशी बनाया था। लेकिन न तो वह पार्टी की उम्मीदों पर खरे उतरे और न ही मतदाताओं की नजर में आ सके। यही कारण है कि उन्हें 1% से भी कम वोट मिला और 1502 वोटों के साथ तीसरे नंबर पर रहे। नाइक को मिले वोट उनकी पार्टी के प्रदर्शन को समझने के लिए काफी है। वास्तव में कर्नाटक की 224 सीटों में से जेडीएस को महज 19 सीटें ही मिलीं।

कर्नाटक विधानसभा चुनाव परिणाम 2023 (फोटो साभार: ECI)

‘इंडियन एक्सप्रेस’ से बात करते हुए नागेंद्र नाइक ने कहा, ‘मेरा चुनाव प्रचार बहुत देर से शुरू हुआ और वैसे भी लोगों ने कॉन्ग्रेस को भारी वोट दिया। जनता भाजपा को बाहर रखना चाहती थी।”

सुप्रीम कोर्ट चाहता था हाई कोर्ट के जज बने नागेंद्र नाइक

भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली कॉलेजियम ने पहली बार 3 अक्टूबर, 2019 को नागेंद्र नाइक का नाम हाई कोर्ट के जज के लिए प्रस्तावित किया था। हालाँकि, केंद्र सरकार ने आपत्ति जताई और कॉलेजियम से अपने फैसले पर पुनर्विचार करने के लिए कहा। इसके बाद 2 मार्च, 2021 को तत्कालीन सीजेआई एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली कॉलेजियम कमेटी ने एक बार फिर नागेंद्र नाइक का नाम हाई कोर्ट के जज के रूप में आगे बढ़ाया।

यही नहीं, सितंबर 2021 में भी तत्कालीन सीजेआई एनवी रमन्ना की अध्यक्षता वाले कॉलेजियम ने भी नागेंद्र नाइक को जज बनाने का प्रस्ताव केंद्र को भेजा था। इसके बाद जनवरी 2023 में एक बार फिर मौजूदा सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस एसके कौल और जस्टिस केएम जोसेफ की सदस्यता वाले कॉलेजियम ने नागेंद्र नाइक के नाम की सिफारिश की।

आमतौर पर होता यह है कि यदि सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम व्यवस्था के तहत किसी जज का दो बार नाम भेजता है तो केंद्र सरकार उसके नाम को स्वीकार कर लेता है। लेकिन नागेंद्र नाइक के मामले में ऐसा नहीं हुआ। केंद्र सरकार हर बार सुप्रीम कोर्ट को उसकी सिफारिश पर विचार करने के लिए कहती रही।

इस साल मार्च में एनडीटीवी ने सूत्रों के हवाले से कहा था कि नागेंद्र नाइक एक राजनीतिक दल के करीबी हैं और उनके खिलाफ आपराधिक शिकायतें हैं। इसलिए, केंद्र उन्हें हाई कोर्ट का जज बनाने के लिए तैयार नहीं है। कथित तौर पर, कॉलेजियम ने केंद्र सरकार के सख्त रुख पर आपत्ति जताई थी। साथ ही कहा था कि इस तरह की देरी व्यक्तिगत रूप से पेशेवर वकील और संस्थान दोनों को प्रभावित करती है।

जज बनने के दरवाजे हो गए बंद: नाइक

केंद्र सरकार पर आरोप लगाते हुए नागेंद्र नाइक ने दावा किया था कि उन्होंने जज बनने के लिए 4 साल का इंतजार किया है। लेकिन अब और इंतजार नहीं करना चाहते। उन्होंने कहा, “मैं हमेशा से ही सार्वजनिक सेवा करना चाहता था। एक बार जब मुझे एहसास हुआ कि अब मैं जज नहीं बन पाऊँगा। इसके बाद मैंने राजनीति में कदम रखने का फैसला किया। और एक महीने पहले चुनाव लड़ने का फैसला किया था।”

नागेंद्र नाइक से जब यह पूछा गया कि जेडीएस की टिकट पर कर्नाटक विधानसभा चुनाव लड़ने से पहले उन्होंने जज बनने के लिए अपनी सहमति वापस ली थी या नहीं। इस पर उन्होंने कहा है कि उन्होंने ऐसा कुछ भी नहीं किया। जब भी उनके जज बनने को लेकर चर्चा होती है तो उनके कानूनी करियर को झटका लगता है। ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ से बात करते हुए उन्होंने स्वीकार किया है कि चुनावी राजनीति में उतरने के बाद उनके जज बनने के सभी दरवाजे अब बंद हो गए हैं।

‘सबसे ज्यादा यादवों को ही मरवाया, फिर भी मिला सपा का संरक्षण’: मुख़्तार अंसारी के इलाके के जिला पंचायत सदस्य ने याद किया माफिया का दौर

माफिया मुख़्तार अंसारी लगभग 4 दशक तक पूर्वांचल के अपराध जगत की धुरी रहा। उसके बारे में तमाम कही-सुनी बातों की जमीनी पड़ताल के लिए ऑपइंडिया की टीम अप्रैल के अंतिम व मई के पहले हफ्ते में पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में गई। इस दौरान हमें बताया गया कि मुख़्तार अंसारी को सबसे अधिक संरक्षण समाजवादी पार्टी की सरकार में मिला था। कुछ स्थानीय लोगों ने मुख़्तार को M+Y (मुस्लिम यादव) समीकरण के लिए मुलायम सिंह की पहली पसंद बताया।

हालाँकि, इस दौरान हमें यादव समाज के कई ऐसे लोग भी मिले जिन्होंने खुद को मुख़्तार से पीड़ित बताया। कुछ ने तो खुल कर हमसे कैमरे पर बात भी की जबकि कई डर से चुप रहे। मुख़्तार अंसारी के गुनाहों पर हमसे खुल कर बात करने वालों में मऊ जिले के भाजपा नेता प्रिंस यादव भी हैं। प्रिंस यादव वर्तमान समय में मऊ के वार्ड नंबर 22 बोझी क्षेत्र से जिला पंचायत सदस्य हैं।

मऊ दंगों में मुख़्तार ने कराया यादवों का कत्लेआम

भाजपा नेता प्रिंस यादव ने हमें बताया कि भले ही मुख़्तार को M+Y समीकरण के लिए किसी ने प्रयोग किया हो लेकिन मुख़्तार ने सबसे ज्यादा हत्याएँ यादवों की ही की। प्रिंस ने साल 2005 के मऊ दंगों की याद दिलाते हुए मुख़्तार अंसारी को उसका मुख्य गुनहगार बताया। प्रिंस यादव ने हमें बताया, “दंगे के दिन यादव बिरादरी के कई लोग दूध बेचने शहर गए थे, जो आज तक वापस नहीं लौटे। उन सभी को मार दिया गया। इसकी जाँच आज तक नहीं हुई। मैं चाहता हूँ कि इस घटना की जाँच हो।”

बकौल प्रिंस, मृतक के घर वालों में इतना डर है कि वो चाह कर भी मुख़्तार के खिलाफ मुँह नहीं खोल सकते।

पर्दा पड़ा है हमारे समाज के कुछ लोगों की आँख पर

प्रिंस यादव ने हमें आगे बताया कि उनके यादव समाज के कुछ लोगों की आँखों पर पर्दा पड़ा हुआ है। उन्होंने कहा, “मैं यादव समाज की बात कर लूँ तो जब मऊ दंगों की जाँच होगी तो हमारे समाज की आँखों से पर्दा हटेगा। यादव समाज का बड़ा तबका अखिलेश यादव को ही अपना नेता मानता है। अखिलेश यादव और मुख़्तार अंसारी की साठ-गाँठ शुरू से ही रही है। हमारे यादव समाज के कुछ लोग बस एक व्यक्ति या पार्टी के अंदर ही रहना चाहते हैं। हो न तो हिंदुत्व समझ पा रहे और न ही एकता। “

खुद मेरी जमीन कब्जाई है मुख़्तार ने

जिला पंचायत सदस्य प्रिंस यादव ने हमें बताया कि वो खुद मुख़्तार अंसारी द्वारा प्रताड़ित और पीड़ित हैं। प्रिंस के मुताबिक, मुख़्तार अंसारी ने समाजवादी पार्टी के शासन काल में उनकी कीमती जमीन जबरन कब्ज़ा कर ली थी जिसे योगी सरकार आने के बाद वो जैसे-तैसे छुड़ा पा रहे हैं। हालाँकि, प्रिंस का ये भी कहना है कि उनकी जमीन का एक बड़ा हिस्सा अभी भी मुख़्तार के गुर्गों के कब्ज़े में है जिसके लिए वो कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं।

प्रिंस के अनुसार, मुख़्तार अंसारी अपनी कब्जाई जमीनों पर एक स्थानीय हिन्दू वकील के नाम पर बोर्ड लगा दिया करता था। बाद में कब्जाई जमीन का ही पीड़ित मालिक मजबूरी में मुख़्तार से आधे-आधे पर समझौता करता था।

हिन्दू को हिन्दू से लड़ा कर करता है राज

प्रिंस यादव का दावा है कि मुख़्तार अंसारी ने हिन्दुओं को ही हिन्दुओ से भिड़ा कर अपने अपराध के साम्राज्य को इतना बड़ा किया है। उन्होंने बताया कि मुख़्तार अंसारी की नजर सिर्फ सांसदी या विधायकी पर नहीं बल्कि कॉलेज के छात्र संघ चुनाव और गाँव के प्रधानी के चुनाव पर भी रहती है। बकौल प्रिंस यादव मुख़्तार, मऊ और गाजीपुर के हर चुनाव में अपना दखल और अपने गुलामों को जिताना चाहता है।

प्रिंस के अनुसार, “हर गाँव में मुख़्तार के गुर्गे सैलरी पर नियुक्त हैं। उन्हें 5 साल फ्री की सैलरी मिलती है। अंत में उन्हें गॉंव के सभी वोट दिलाने का टारगेट मिलता है भले ही वो साम, दाम, दंड, भेद कैसे भी हो। मुख़्तार अंसारी की पार्टी कौमी एकता दल को गुंडों का समूह बताते हुए प्रिंस ने राजनैतिक रूप से भी खुद को भी मुख़्तार अंसारी से पीड़ित बताया। उन्होंने कहा, “मुख़्तार अंसारी ने मेरे खिलाफ ही एक अन्य यादव को छात्र संघ चुनाव में इसलिए खड़ा कर दिया क्योंकि मैंने उसकी गुलामी कबूल नहीं की।”

छोटे-छोटे बच्चों पर भी रखता है नजर

जिला पंचायत सदस्य प्रिंस यादव के अनुसार, मुख़्तार अंसारी अपने इलाके में छोटे-छोटे बच्चों पर भी नजर रखता है। उन्होंने बताया कि मुख़्तार नहीं चाहता कि भविष्य में भी उसको चैलेन्ज देने वाला कोई उभर कर सामने आए, इसलिए उसने कई हत्याएँ ऐसे लोगों की भी करवा दीं जिन्होंने उसकी गुलामी नहीं कबूली। मुख़्तार की गुंडागर्दी वाले समय को फिल्मों जैसा बताते हुए प्रिंस ने बताया कि जिस भी ठेके, काम या जमीन पर वो हाथ रख देता था वो उसकी ही हो जाया करती थी।

उन्होंने बताया कि किसी भी तरह से पैसा कमाने की चाह रखने वाले व्यक्ति को मुख़्तार से मिल कर चलना मजबूरी बन जाती थी।

मीडिया में भी था मुख़्तार का खौफ

मुख़्तार अंसारी को ब्रिगेडियर के परिवार और बेहद सम्मानित कुल-खानदान वाला बताने वाली खबरों को प्रिंस यादव ने मीडिया में मुख़्तार का खौफ बताया। उन्होंने कहा कि मुख़्तार के गुर्गे ही उसके बारे में अच्छी-अच्छी बातें चौराहों पर किया करते थे और स्थानीय मीडिया की उन खबरों को छापना मजबूरी होती थी। प्रिंस का दावा है कि बिर्गेडियर उस्मान का मुख़्तार के परिवार से कोई वास्ता नहीं था।

कम काम को ज्यादा बता रहे अधिकारी

वर्तमान समय में जिले में तैनात अधिकारियों की कार्यशैली पर भी जिला पंचायत सदस्य प्रिंस यादव ने सवाल खड़े किए। उन्होंने बताया कि लखनऊ में बैठे शासन को खुश करने के लिए मुख़्तार के खिलाफ कम किए गए काम को भी बढ़ा-चढ़ा कर बताया जाता है। प्रिंस ने दावा किया कि मुख़्तार की जब्त जमीनों की कीमत जितना प्रशासन बताता है वो असल में उतने की होती नहीं है। जिला पंचायत सदस्य का कहना है कि ऐसी रिपोर्ट कहीं न कहीं मुख़्तार को फायदा पहुँचा रहीं हैं क्योंकि शासन में बैठे लोग ये सोचते हैं कि स्थानीय प्रशासन मुख़्तार पर कड़ी कार्रवाई कर रहा है जबकि ऐसा असल में है नहीं।

प्रिंस यादव ने दावा किया कि अगर सच में मुख़्तार अंसारी की जमीनों का आँकलन करवाया जाए तो अभी बहुत सारी कार्रवाई अधूरी मिलेगी। उन्होंने इस बाबत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक पत्र भी जल्द प्रेषित करने की बात कही।

भारत का सबसे गुप्त रहस्य… भगवान श्रीकृष्ण के बाद अब नेताजी बोस के रहस्यों को ढूँढने निकले ‘कार्तिकेय 2’ वाले हीरो, ‘कर्तव्य पथ’ पर प्रतिमा के सामने लॉन्च हुआ SPY का टीजर

आपको फिल्म ‘कार्तिकेय 2’ याद होगी, जिसमें निखिल सिद्धार्थ मुख्य अभिनेता थे। मूल रूप से तेलुगु में बनी इस फिल्म ने दुनिया भर में 118 करोड़ रुपए का कारोबार किया था। फिल्म में भगवान श्रीकृष्ण और उनसे जुड़े रहस्यों के बारे में दिखाया गया था। वहीं आप निखिल सिद्धार्थ अपनी अगली पैन-इंडिया फिल्म लेकर आ रहे हैं। SPY नाम की इस फिल्म को नेताजी सुभाष चंद्र बोस के इर्दगिर्द बना गया है। इसका टीजर सोमवार (15 मई, 2023) को जारी किया गया।

SPY का टीजर जारी करने के लिए जिस लोकेशन को चुना गया, वो भी खास है। ‘कार्तिकेय 2’ के लिए पूरी फिल्म की टीम द्वारका गई थी, जबकि SPY फिल्म की टीम ने इसके लिए दिल्ली को चुना। दिल्ली के इंडिया गेट पर स्थित नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा के पास फिल्म की टीम ने मीडिया के सामने SPY का टीजर जारी किया। इस जगह पर पहली बार किसी फिल्म का टीजर जारी हुआ है। इस दौरान निर्देशक गैरी और अभिनेता निखिल सिद्धार्थ के अलावा अभिनेत्री एश्वर्या मेनन भी मौजूद रहीं।

‘कर्तव्य पथ’ पर SPY के टीजर को हिंदी और तेलुगु समेत अन्य भाषाओं में भी रिलीज किया गया। टीजर रिलीज से पहले बॉलीवुड और साउथ के कई बड़े अभिनेताओं को एक वीडियो के जरिए ट्रिब्यूट भी दिया गया, जिन्होंने समय-समय पर जासूस का किरदार अदा किया था। टीजर में नेताजी सुभाष चंद्र बोस को ‘India’s Best Kept Secret’ बताया गया है। उनके द्वारा ‘आज़ाद हिंद फ़ौज’ के गठन का जिक्र करते हुए उन्हें दूरद्रष्टा बताया गया है।

फिल्म में निखिल सिद्धार्थ को देश-विदेश में एक्शन करते हुए देखा जा सकता है। साथ ही विमान दुर्घटना में सुभाष चंद्र बोस की मृत्यु को ‘कवर-अप स्टोरी’ भी कहा गया है। टीजर से साफ़ है कि फिल्म में कई रहस्यों से पर्दा उठाने की कोशिश करते हुए उसके इर्दगिर्द कहानी बुनने की कोशिश की गई है। ‘बहुत सी बात है जो तुम नहीं जानते जय’ – एक किरदार ये डायलॉग बोलता हुआ भी दिखता है। बैकग्राउंड में ‘तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूँगा’ गाना भी बजता रहता है।

फिल्म के लोगो में नेताजी बोस के जन्म का साल तो लिखा है, लेकिन निधन के जगह को ब्लैंक रखा गया है। फिल्म 29 जून, 2023 को सिनेमघरों में रिलीज होगी और कार्तिक आर्यन-कियारा आडवाणी की ‘सत्यप्रेम की कथा’ से टकराएगी। ये फिल्म तेलुगू और हिंदी के अलावा मलयालम, कन्नड़ और तमिल में भी रिलीज होगी। फिल्म को ‘नेशनल थ्रिलर’ के रूप में भी पेश किया जा रहा है। ‘स्पाई’ साथ-साथ एक एडवेंचर फिल्म भी होगी।