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युवा काॅन्ग्रेस अध्यक्ष श्रीनिवास BV के खिलाफ FIR रद्द करने से हाई कोर्ट का इनकार, असम की महिला नेत्री ने खोली थी लैंगिक भेदभाव की पोल

यूथ कॉन्ग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीनिवास बीवी (Srinivas BV) को राहत देने से गुवाहाटी हाई कोर्ट ने इनकार कर दिया है। उन्होंने अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द करने की माँग की थी। जस्टिस अजीत बोरठाकुर बुधवार (26 अप्रैल 2023) को सुनवाई करते हुए कहा कि पीड़िता के बयान और केस डायरी का अवलोकन किए बिना राहत देना उचित नहीं होगा। असम युवा काॅन्ग्रेस की अध्यक्ष रहीं डॉ. अंगकिता दत्ता (Angkita Dutta) ने उनके खिलाफ मामला दर्ज कराया था। दुर्व्यवहार और खुद को अपमानित करने का आरोप लगाया था।

अंगकिता दत्ता ने लिंग के आधार पर भेदभाव, उत्पीड़न और प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने 19 अप्रैल को गुवाहाटी के दिसपुर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई थी। उनकी शिकायत पर कॉन्ग्रेस नेता श्रीनिवास के खिलाफ आईपीसी की धारा 509/294/341/352/354/354 ए (iv)/506 के तहत मामला दर्ज किया गया था।

श्रीनिवास ने इसे हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। कोर्ट से अपील की थी कि असम पुलिस को उनके खिलाफ कठोर कदम उठाने या कार्रवाई से रोका जाए। इस पर हाई कोर्ट के जस्टिस अजीत बोरठाकुर ने कहा कि वे पहले केस डायरी देखेंगे और उसके बाद ही इस पर कोई निर्णय लेंगे। कोर्ट ने असम पुलिस को 2 मई 2023 तक केस डायरी जमा कराने के निर्देश दिए हैं।

गौरतलब है कि अंगकिता ने यूथ काॅन्ग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीवी श्रीनिवास (Srinivas BV) और  यूथ कॉन्ग्रेस के सेक्रेटरी इंचार्ज वर्धन यादव पर लैंगिक भेदभाव तथा बदजुबानी का आरोप लगाया था। कहा था कि राहुल गाँधी ने भी उनकी शिकायतों पर गौर नहीं किया और प्रताड़ना का सिलसिला चलता रहा। उन्होंने कहा था, “श्रीनिवास पिछले छह महीनों से उन्हें परेशान और प्रताड़ित कर रहे हैं। लैंगिक टिप्पणी करते हैं। अपशब्दों का इस्तेमाल करते हैं। पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों से इसकी शिकायत करने पर उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दे रहे हैं।”

अंगकिता दत्ता की मानें तो करीब छह महीने से उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा था। ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरान राहुल गाँधी को भी इसकी जानकारी दी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। उनका आरोप है कि स्त्री होने के कारण उनके साथ भेदभाव हुआ। इन आरोपों के बाद असम काॅन्ग्रेस ने पहले अंगकिता को कारण बताओ नोटिस जारी किया, फिर उन्हें 6 साल के लिए पार्टी से निकाल दिया। वहीं श्रीनिवास को कर्नाटक के लिए जो स्टार प्रचारकों की सूची जारी की उसमें जगह दी।

आजाद हुआ आनंद मोहन, सुबह सबेरे जेल से रिहाई: अशोक यादव भी बाहर निकला, बोला- सरकार बढ़िया काम किया हमलोगों के लिए

पूर्व सांसद आनंद मोहन आजाद हो गया है। 27 अप्रैल 2023 की सुबह उसे सहरसा जेल से रिहा कर दिया गया। गोपालगंज के डीएम रहे जी कृष्णैया की हत्या में उसे आजीवन कारावास हुई थी। वह 16 साल से जेल में बंद था। बिहार सरकार ने 10 अप्रैल 2023 को जेल नियमावली, 2012 के नियम 481 में संशोधन कर उसकी रिहाई का रास्ता साफ किया था।

सहरसा जेल अधीक्षक अमित कुमार ने उसकी रिहाई की पुष्टि की है। आनंद मोहन की रिहाई को लेकर नियमों में जो बदलाव किया गया है, उस पर कृष्णैया के परिजन निराशा जता चुके हैं। मीडिया में भी इस फैसले पर सवाल उठ रहे हैं। इसका असर रिहाई के समय भी दिखा। जब आनंद मोहन जेल से बाहर निकला तो समर्थकों का कोई जमावड़ा नहीं था। न उसने रोड शो कर अपनी शक्ति दिखाई।

बेटे चेतन आनंद की सगाई के सिलसिले में आनंद मोहन 15 दिन के पेरोल पर बाहर था। 26 अप्रैल को पेरोल खत्म होने के बाद वह वापस सहरसा जेल लौट गया था। आनंद मोहन की रिहाई को लेकर बिहार में सियासी पारा चढ़ा हुआ है। राजनीतिक दलों के अलावा आईएएस एसोसिएशन और डीएम जी कृष्णैया की पत्नी उमा देवी ने भी उसकी रिहाई पर सवाल उठाए थे। उन्होंने बिहार सरकार के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने पर विचार करने की बात कही है।

पटना हाईकोर्ट में याचिका

आनंद मोहन की रिहाई के खिलाफ सामाजिक कार्यकर्ता अमर ज्योति ने पटना हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। इस याचिका में बिहार सरकार द्वारा जारी अधिसूचना को निरस्त करने की माँग की गई है। याचिकाकर्ता के अनुसार बिहार सरकार द्वारा जेल नियमावली में संशोधन के समय ‘ड्यूटी पर तैनात लोक सेवक की हत्या’ वाक्य को हटा दिया गया था। इस संशोधन को गैरकानूनी बताया गया है। याचिका में कहा गया है कि इस तरह के निर्णयों से लोक सेवकों और आम जनता का मनोबल कम होगा।

अशोक यादव भी रिहा

बिहार सरकार ने आनंद मोहन के साथ साथ आजीवन कारावास काट रहे 26 अन्य अपराधियों की रिहाई का भी फैसला लिया था। इस सूची में एक मृत कैदी का भी नाम शामिल कर दिया गया था। अन्य लोगों में से कुछ रिहा हो चुके हैं। कुछ की रिहाई प्रक्रिया में है। रिहा होने वालों में हत्या के मामले में सजा काट रहा अशोक यादव भी है।

अशोक यादव को उम्र कैद की सजा सुनाई गई थी। उसने करीब 18 साल जेल में गुजारे हैं। रिहाई के बाद मीडिया से बात करते हुए उसने बिहार सरकार के फैसले की तारीफ की। यादव ने कहा, “सरकार ने बढ़िया काम किया है हमलोगों के लिए।”

बंगाल में क्लास में घुस गया शख्स, बंदूक की नोंक पर छात्रों को बनाया बंधक: CM ममता बनर्जी ने बताया षड्यंत्र, स्थानीय लोगों का प्रदर्शन

पश्चिम बंगाल के एक स्कूल में एक हथियारबंद व्यक्ति द्वारा जबरन घुसने का मामला सामने आया है। उसने क्लास में घुसकर कक्षा में बैठे विद्यार्थियों को बंधक बनाने की कोशिश की। हालाँकि, बाद में पुलिस ने बच्चों को बचाते हुए उस शख्स को हिरासत में लिया। इस घटना में किसी विद्यार्थी को चोट लगने की खबर नहीं है।

घटना मालदा जिले के मुचिया अंचल स्थित चंद्रमोहन हाईस्कूल का है। बुधवार (26 अप्रैल) को हाथ में रिवॉल्वर लिए एक शख्स सातवीं-आठवीं कक्षा में घुस गया और विद्यार्थियों को डराने की कोशिश की। घटना को लेकर स्थानीय लोगों ने स्कूल में जमकर प्रदर्शन किया। हालाँकि, बाद में पुलिस ने उन्हें समझा-बुझाकर शांत कर दिया।

मालदा के एसपी प्रदीप कुमार यादव ने कहा, “हमारे पास सूचना आई कि एक बाहरी व्यक्ति स्कूल में घुस गया है। बाद में पता चला कि उसके पास हथियार भी हैं। हमें पता चला कि उसकी पत्नी और बच्चों को लेकर कोई समस्या है, जिसको लेकर उसने ये किया है।” आरोपित की उम्र लगभग 40 वर्ष है।

पुलिस के मुताबिक, आरोपित का कहना है कि उसका बेटा और पत्नी एक साल से लापता हैं। प्रशासन पर दबाव बनाने के लिए ऐसा किया था। पंजाब केशरी के मुताबिक आरोपी के पड़ोसियों ने बताया कि वह अपनी पत्नी से अलग रहता है और उसका बेटा भी उसकी पत्नी के साथ रहता है।

एक अन्य अधिकारी ने कहा कि वह हाथ में हथियार लेकर बच्चों और शिक्षक को मारने की धमकी दे रहा था। अधिकारी ने यह भी बताया कि व्यक्ति ने कहा कि ‘अगर कोई उसे गोली मारेगा तो वह गोली चला देगा।’ आरोपित की पहचान देब बल्लभ के रूप में की गई है। उसके पास से पुलिस ने बंदूक, अनजान पदार्थ से भरे हुए दो बोतल और एक चाकू को जब्त किया गया। 

एसपी यादव ने कहा कि सारे बच्चों को सुरक्षित निकाल लिया गया है। वहीं, पत्नी और बच्चों को लेकर आरोपित के दावों की पुलिस पुष्टि कर रही है। बता दें कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पुलिस कार्रवाई की प्रशंसा की है। जिस समय यह घटना हुई, उस समय वह कोलकाता में एक प्रशासनिक बैठक कर रही थीं। हालाँकि, उन्होंने इसे षडयंत्र भी बताया।

एक और एयर स्ट्राइक के डर से सहमा पाकिस्तान: पूर्व राजनयिक ने भी जताया अंदेशा – भारत कभी भी कर सकता है हमला

पाकिस्तान को एक बार फिर सर्जिकल स्ट्राइक का डर सताने लगा है। जम्मू-कश्मीर के पूँछ में आतंकियों द्वारा किए गए हमले में 5 सैनिकों के बलिदान होने के बाद पड़ोसी देश के पूर्व राजनयिक अब्दुल बासित ने यह डर जाहिर की है। बासित ने कहा कि फिलहाल ऐसा डर नहीं है, लेकिन अगले साल चुनावों से पहले ऐसा हो सकता है।

अब्दुल बासित ने कहा, “पाकिस्तान में लोग भारत द्वारा एक और सर्जिकल स्ट्राइक या एयर स्ट्राइक के बारे में बात कर रहे हैं। मुझे नहीं लगता कि अब वह ऐसा करेगा, क्योंकि वह इस साल SCO की बैठक और जी-20 की अध्यक्षता कर रहा है

उन्होंने आगे कहा, “जब तक भारत अध्यक्षता कर रहा है, तब तक ऐसा खतरा नहीं दिख रहा, लेकिन अगले साल चुनावों के दौरान भारत फिर से ऐसा कर सकता है। यह भारत में चुनावों से ठीक पहले हो सकता है। भारत जानता है कि हम कहाँ खड़े हैं।” बासित यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

इस दौरान अब्दुल बासित ने आतंकी हमले को सही ठहराने की भी कोशिश की। उन्होंने कहा कि जिसने भी हमला किया, चाहे वह मुजाहिदीन हो या कोई भी, उन्होंने नागरिकों को नहीं, बल्कि सेना को निशाना बनाया है। वे एक वैध संघर्ष में लगे हुए हैं। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून भी इसकी अनुमति देता है।

बता दें कि 20 अप्रैल 2023 को संगयोट में सेना की ओर से इफ्तार पार्टी का आयोजन किया गया था। इस इफ्तार पार्टी के लिए सेना के जवान सामान लेकर लौट रहे थे। उसी दौरान आतंकियों ने ग्रेनेड हमला कर दिया, जिससे गाड़ी में आग लग गई और पाँच जवान जिंदा जल गए।

इस हमले की जिम्मेदारी पीपुल्स एंटी फासिस्ट फ्रंट (PAFF) ने ली थी। पीएएफएफ पाकिस्तानी आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से जुड़ा है। यह आतंकी संगठन अंसार गजवात-उल-हिंद के मारे गए कमांडर जाकिर मूसा से प्रेरित है। यह आतंकी संगठन वैश्विक आतंकी संगठन अल कायदा के लिए भी वफादार माना जाता है। हाल की कई आतंकी घटनाओं में इसका नाम सामने आया है।

बता दें कि 14 फरवरी 2019 को जम्मू कश्मीर के पुलवामा में सेना के काफिले पर हुए हमले का भारतीय वायुसेना ने जिस तरह से जवाब दिया था, उससे आज भी पाकिस्तान डरा हुआ है। वह इस मामले पर सार्वजनिक तौर पर इस मसले पर कुछ भी बोलने से बचता है, ताकि बदनामी ना हो।

सीआरपीएफ के काफिले पर हुए हमले के ठीक 12 दिन बाद 26 फरवरी को भारतीय वायुसेना ने बालाकोट में जैश के ठिकानों एयर स्ट्राइक किया था, जिसमें 300 से ज्यादा आतंकियों के मारे जाने का दावा किया गया। मगर पाकिस्तान इसे नकारता रहा। हालाँकि, कई मौकों पर उसने दबे स्वर में इस घटना को स्वीकार भी किया है।

TMC नेता अनुब्रत मंडल की बेटी सुकन्या को ED ने पशु तस्करी मामले में गिरफ्तार किया: कहने को सरकारी शिक्षक, लेकिन दो-दो कंपनियों की डायरेक्टर

प्रवर्तन निदेशालय ने पशु तस्करी के मामले में TMC (तृणमूल कॉन्ग्रेस) नेता अनुब्रत मंडल की बेटी सुकन्या को गिरफ्तार किया है। उनके पिता को भी CBI और ED दोनों गिरफ्तार कर चुकी है। सुकन्या से पहले पूछताछ की गई थी, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया। बेहिसाब संपत्ति और बैंक खातों से जुड़े डिटेल्स को लेकर उनसे जवाब माँगे गए थे। सुकन्या फ़िलहाल राज्य सरकार द्वारा संचालित प्राथमिक विद्यालय में बतौर शिक्षिका कार्यरत हैं।

केंद्रीय जाँच एजेंसी ने उन्हें इससे पहले भी बुलाया था, लेकिन वो पेश नहीं हुई थीं। उन्हें पहली बार 15 मार्च को दिल्ली बुलाया गया था। उन्हें 15 मार्च को नई दिल्ली तलब किया गया था। हालाँकि, हर बार उन्होंने अपनी खराब तबीयत का बहाना बनाते हुए उपस्थिति में असमर्थता जताई थी। ED ने 17 नवंबर, 2022 को बीरभूम जिले में TMC के जिला अध्यक्ष अनुब्रत मंडल को गिरफ्तार किया था। उनका सहयोगी मनीष कोठरी भी गिरफ्तार हुआ था।

कई बार समन ठुकराने के बाद आखिरकार मंगलवार (25 अप्रैल, 2023) को ED के समक्ष पेश हुई थी। सुकन्या मंडल 2 कंपनियों की डायरेक्टर हैं, जिन्हें फर्जी बताया जा रहा है। वो फ़िलहाल अपने परिवार के साथ बीरभूम के बोलपुर में रहती हैं। इस मामले में हवाला से लेनदेन के भी सबूत मिले हैं। कई फंड्स सुकन्या के नाम पर हैं, जिनका कोई हिसाब-किताब नहीं है। वो ‘ANM Agrochem Private Limited’ और ‘Neer Developer Private Limited’ की डायरेक्टर हैं।

पशु तस्करी का ये मामले कई करोड़ो रुपयों का है। CBI ने बताया था कि सुकन्या मंडल की मासिक आय 2013-14 में 3.10 लाख रुपए प्रति महीने से बढ़ कर 2020-21 में 1.45 करोड़ रुपए हो गया था। मंडल के नाम पर 3 करोड़ रुपए की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) है। अनुब्रत मंडल फ़िलहाल आसनसोल स्थित जेल में बंद हैं। वो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के करीबी हैं। TMC सुप्रीमो उनके और उनके परिवार को निर्दोष बताते हुए ये कहती रही हैं कि राजनीतिक बदले के लिए उन्हें फँसाया जा रहा है।

केजरीवाल के बंगले में 15 बाथरूम, बिजली का खर्च ₹2.60 करोड़, किचन में लगे ₹1.10 करोड़: 5 बार निकाला ₹10 Cr से कम का टेंडर, ताकि न पड़े किसी की नजर

खुद को आम आदमी कहने वाले और कभी गाड़ी-बँगला नहीं लेने की बात कहने वाले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के बँगले को लेकर लगातार खुलासे हो रहे हैं। नए खुलासे में पता चला है कि सीएम केजरीवाल के मुख्यमंत्री आवास में एक-दो नहीं, बल्कि 15 बाथरूम हैं और हर बाथरूम को सजाने-सँवारने में एक-एक लाख रुपए खर्च किए गए हैं।

न्यूज चैनल टाइम्स नाऊ नवभारत की ‘शीशमहल’ के नाम से किए गए ऑपरेशन में इसका खुलासा किया है। यह ऑपरेशन का 2 पार्ट है। दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) के संयोजक अरविंद केजरीवाल के सरकारी आवास में 10 लाख से अधिक रकम सिर्फ सैनिट्री फिटिंग पर खर्च की गई।

चैनल के मुताबिक, सीएम केजरीवाल के आवास में बिजली के विभिन्न सामान पर 2.58 करोड़ रुपए, किचन एवं अप्लायंस पर 1.10 करोड़ रुपए, इंटीरियर डेकोरेशन (वुडेन फ्लोर, वुडन डोर और यूपीवीसी डोर पर) पर 11.30 करोड़ रुपए, हॉट वॉटर जनरेटर पर 25 लाख रुपए और सुपीरियर कंसल्टेंसी (सिर्फ बताने के लिए) के लिए एक करोड़ रुपए खर्च किए गए।

चैनल के मुताबिक, सीएम के सरकारी आवास के रेनोवेशन के लिए जो 45 करोड़ रुपए का खर्च किए गए, वे पैसे पाँच हिस्सों में आवंटित की गई थी। रेनोवेशन के लिए किसी तरह का टेंडर भी नहीं निकाला गया था। नियम के मुताबिक, सरकारी काम के लिए अगर 10 करोड़ रुपए से अधिक की रकम की जरूरत होती है, उससे जुड़ी फाइल वरिष्ठ अधिकारियों के पास जाती हैं।

इसके लिए बकायदा सार्वजनिक टेंडर निकाला जाता है। टेंडर में काम को पूरा करने के लिए जो सबसे कम बोली लगाता है, उसे टेंडर मिलता है। हालाँकि, 10 करोड़ रुपए से कम राशि की जरूरत है तो उसके लिए टेंडर निकालने की जरूरत नहीं होती है। सीएम केजरीवाल के घर को सँवारने के लिए 10 करोड़ रुपए से कम रकम पाँच बार आवंटित की गई। इसलिए फाइल को अधिकारियों को भेजने की जरूरत नहीं पड़ी। ऐसे में भ्रष्टाचार की भी गुंजाइश है।

टाइम्स नाऊ नवभारत के अनुसार, पहली बार 7.92 करोड़ रुपए, दूसरी बार 1.64 करोड़ रुपए, तीसरी बार 9 करोड़ रुपए, चौथी बार 8.17 करोड़ रुपए और पाँचवीं बार 9.34 करोड़ रुपए आवंटित किए गए। चूँकि, हर बार रकम 10 करोड़ रुपए से कम है, इसलिए टेंडर निकालने की जरूरत नहीं पड़ी।

अपने ऑपरेशन के पहले पार्ट में टाइम्स नाऊ नवभारत ने खुलासा किया था कि AAP के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कोरोना काल के दौरान राष्ट्रीय राजधानी स्थित अपने सरकारी बँगले के सौंदर्यीकरण पर 44.78 करोड़ रुपए खर्च कर दिए। यानी, बने-बनाए बँगले को चमकाने और उसे सुंदर बनाने के लिए इतने रुपए फूँक दिए गए।

मंगलवार (25 अप्रैल, 2023) की शाम को प्रसारित किए गए शो में ‘टाइम्स नाउ नवभारत’ ने जानकारी दी कि CM आवास में 8-8 लाख रुपए के पर्दे लगाए गए। केवल पर्दों पर ही 1 करोड़ रुपए खर्च कर दिए गए। कुल 23 पर्दों का ऑर्डर दिया गया था, जिनमें से कुछ अभी लगने बाकी हैं और कुछ लगाए दिए गए हैं।

शुरुआत में 8 पर्दे लगाए गए, जिनकी कीमत 45 लाख रुपए थी। दूसरे चरण में 15 पर्दों का ऑर्डर दिया गया, जो 51 लाख रुपए के थे। इतना ही नहीं, मुख्यमंत्री आवास में लगाने के लिए वियतनाम से मार्बल मँगाया गया। इसे ‘डियोर पर्ल मार्बल’ बोला जाता है, जो सुपीरियर क्वालिटी का होता है। इसकी कीमत 15 लाख रुपए होती है। साथ ही इसे लगाने के लिए भी अलग तरीके से फिटिंग की जाती है।

AAP के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने इस पर सफाई देते हुए कहा कि अरविंद केजरीवाल आंदोलन से निकले नेता हैं और कोई फकीर नहीं है। उन्होंने कहा कि वो बँगला 1942 का बना है, वहाँ छत से पानी टपकती थी और बुजुर्गों को परेशानी होती थी।

बिहारियों को बार-बार गुंडा बतातीं ममता बनर्जी, घृणा फैलाते DMK नेता, इनके सामने नतमस्तक नीतीश-तेजस्वी: गाली सुन-सुन कर विपक्षी एकता की कीमत चुकाएँ बिहारी?

बिहार एक पिछड़ा राज्य है, गरीब राज्य है। यहाँ न तो उद्योग-धंधे हैं और न ही रोजगार। JDU नेता नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री हैं और RJD नेता तेजस्वी यादव उप-मुख्यमंत्री। यानी, इन दोनों पर जिम्मेदारी है कि वो बिहार को आगे ले जाएँ। लेकिन, ये दोनों कर क्या रहे हैं? ये विपक्षी एकता के लिए देशाटन कर रहे हैं, जनता जाए भाड़ में। जिन नेताओं से ये मिल रहे हैं, वो तक इनकी बात नहीं मान रहे। लेकिन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विरोध के चक्कर में दोनों भटक रहे हैं।

एक YouTuber को गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया, लग गया NSA

कुछ ही हफ्ते बीते हैं, जब तमिलनाडु में बिहारियों के खिलाफ हिंसा की खबरें आई थीं। हालाँकि, इसके बाद सोशल मीडिया पर कई फेक वीडियो और दावे भी सर्कुलेट हो गए। लगभग सभी बड़े मामलों में ऐसा होता है। बिहार के YouTuber मनीष कश्यप ने ‘सच तक न्यूज़’ के माध्यम से बिहारियों का दर्द दिखाना शुरू किया। उन पर फर्जी खबरें फ़ैलाने का आरोप लगा कर कई मामले दर्ज किए गए और गिरफ्तार कर लिया गया।

इतना ही नहीं, उन्हें गिरफ्तार के उनके बैंक खातों को जब्त कर दिया गया। फिर उन्हें तमिलनाडु पुलिस को सौंप दिया गया। अब उन पर ‘राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA)’ के तहत कार्रवाई की जा रही है। वो वीडियो भी आपको याद ही होगा, जिसमें मनीष कश्यप से पूछताछ करने बिहारी आई तमिलनडु की पुलिसकर्मी मीडिया के सवाल पर कहती है कि उसे हिंदी नहीं आती। तमाम विरोधों के बावजूद मनीष कश्यप के साथ ऐसा व्यवहार किया गया, जैसे वो आतंकवादी हों।

लेकिन, जो सजायाफ्ता अपराधी हैं, अर्थात जिन पर न्यायालय द्वारा आरोप सिद्ध कर के सज़ा दी जा चुकी है, उनके प्रति बिहार सरकार का क्या रवैया? ऐसे 27 सजायाफ्ता अपराधियों को अब रिहा किया जा रहा है, जिनमें DM की हत्या में शामिल आनंद मोहन सिंह भी शामिल हैं। उनके बेटे चेतन आनंद राजद के विधायक हैं, शिवहर से। बाकी 26 अपराधियों में आधे ऐसे हैं, जो राजद के कथित MY समीकरण में फिर बैठते हैं।

ममता बनर्जी कई बार बिहारियों को बता चुकी हैं गुंडा

चलिए, सबसे ताज़ा मामले से ही शुरू करते हैं। पश्चिम बंगाल के पूर्वी दिनाजपुर में एक लड़की की मौत हो गई, जिसके बाद पुलिस उसके शव को घसीटती हुई दिखी। वीडियो वायरल हुआ, ग्रामीण आक्रोशित हुए। आरोप है कि नाबालिग लड़की का बलात्कार कर के उसकी हत्या कर दी गई है। लोगों ने थाने में आग लगा दी, पत्थरबाजी की, विरोध प्रदर्शन किया और पुलिसकर्मियों को पीटा। ममता बनर्जी ने बिहारियों पर ठीकरा फोड़ दिया।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने कह दिया कि भाजपा बिहार से गुंडों को बुला कर ये सब करवा रही है। क्या बिहार गुंडों की फैक्ट्री है? ये पहली बार नहीं है जब ममता बनर्जी ने इस तरह का बयान दिया हो। इसी महीने के पहले सप्ताह में भी उन्होंने रामनवमी के दौरान हुई हिंसा को लेकर कहा था कि भाजपा बिहार से गुंडों को लेकर आई और वो हावड़ा में घुस गए। क्या एक बार भी नीतीश कुमार ये तेजस्वी यादव ने इस बयान पर आपत्ति जताई?

अब ज़रा 3 साल पीछे चलिए। पश्चिम बंगाल में तब विधानसभा चुनाव हो रहे थे। तब भी ममता बनर्जी ने कहा था कि पश्चिम बंगाल में यूपी-बिहार से गुंडे बुलाए जा रहे हैं। बिहार में इसके खिलाफ शिकायत भी दर्ज कराई गई थी। इसके बावजूद नीतीश-तेजस्वी कोलकाता जाकर ममता बनर्जी से मिलते हैं, उनसे मिन्नतें माँगते हैं कि वो विपक्षी गठबंधन में शामिल हों और बदले में बंगाल सीएम कहती हैं कि बिहार में बैठक बुलाइए सभी दलों की, फिर आगे देखेंगे।

क्या ममता बनर्जी बिहारियों को गुंडा बोलती रहेंगी और बिहारी अपमान का घूँट सिर्फ इसीलिए पीता रहे क्योंकि नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव उनके सामने नतमस्तक हैं? क्या विपक्षी एकता की कीमत बिहारियों का अपमान है? इसका अर्थ है कि ममता बनर्जी के बयान पर कोई आपत्ति न जताने वाले बिहार के सत्ताधीश इन बातों से सहमत हैं। अब वो भी अपने राज्य की जनता को ‘गुंडा’ बुलाना ही शुरू कर दें फिर तो।

जिस DMK सुप्रीमो के जन्मदिन पर भज खाने गए नीतीश-तेजस्वी, उस पार्टी के नेता भी बिहारियों के खिलाफ फैलाते हैं घृणा

जिस तमिलनाडु की पुलिस को मनीष कश्यप को सौंप दिया गया, वहाँ की सत्ताधारी पार्टी की बिहारियों को लेकर क्या सोच है ये भी तो जान लीजिए। याद हो कि जब तमिलनाडु में बिहारियों के खिलाफ हिंसा की खबरें आ रही थीं, तब नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव चेन्नई में वहाँ के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की 70वीं सालगिरह की पार्टी एन्जॉय कर रहे थे। क्या उन्होंने इस मुद्दे को वहाँ उठाया? उन्हें लगता है कि बिहारी जाट-पात में बँटे रह कर उन्हें जिताते रहेंगे, भले ही वो उनके खिलाफ हिंसा ही क्यों न होने दें।

तमिलनाडु में तो राज्यपाल तक को नहीं छोड़ा गया। भारत के डिप्टी NSA रह चुके पटना के RN रवि तमिलनाडु के राज्यपाल हैं। DMK के संगठन महामंत्री आरएस भारती ने कह दिया कि तमिलनाडु में बिहारी पानी-पूरी और सोनपापड़ी बेचने आते हैं, राज्यपाल भी उन्हीं में से एक हैं। उन्होंने राज्यपाल को पिटाई तक की धमकी देते हुए उनकी तुलना बिहार के प्रवासी मजदूरों के साथ कर दी। क्या नीतीश-तेजस्वी ने इस पर आपत्ति जताई?

DMK संगठन तो छोड़ दीजिए, तमिलनाडु सरकार में बैठे इनके नेताओं की सोच भी देख लीजिए। तमिलनाडु के नगरपालिका प्रशासन मंत्री केएन नेहरू ने कह दिया कि बिहारियों के पास तमिल लोगों के मुकाबले कम बुद्धि होती है। उन्होंने बिहारियों पर तमिल लोगों की नौकरी छीनने के आरोप तक मढ़ दिए। उन्होंने कहा था कि बिहारियों को तमिल या अंग्रेजी नहीं आती है, फिर भी वो बैंकों में नौकरियाँ कर के तमिल लोगों के रोजगार छीन रहे हैं।

इन सबके बावजूद नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव एमके स्टालिन के यहाँ भोज खाने पहुँचे। इसी तरह वो हाल ही में विपक्षी एकता की कवायद में अरविंद केजरीवल से भी मिले। एक अस्पताल के उद्घाटन कार्यक्रम में पहुँचे दिल्ली के सीएम ने कहा था कि बिहारी 500 रुपए का टिकट कटा कर दिल्ली आते हैं और 5 लाख रुपए का इलाज मुफ्त में करा के चले जाते हैं। कोरोना काल में किस तरह बिहारी मजदूरों को दिल्ली से भगाया गया था, ये बात भी नीतीश-तेजस्वी ने जेहन से निकाल दी।

नीतीश-तेजस्वी के विपक्षी गठबंधन में बिहारी विरोधी उद्धव भी होंगे?

नीतीश-तेजस्वी के विपक्षी गठबंधन की योजना में महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की शिवसेना भी होगी ही। शिवसेना का तो बिहारियों के खिलाफ घृणा का पूरा का पूरा इतिहास रहा है। उद्धव ठाकरे तो यहाँ तक कह चुके हैं कि मुंबई में घुसने के लिए बिहारियों के लिए परमिट सिस्टम होना चाहिए। तब उन्होंने नीतीश को भी भला-बुरा कहा था। लॉकडाउन के बाद जब बिहारी मजदूर महाराष्ट्र लौटे थे, तब भी शिवसेना मुखपत्र ‘सामना’ में उनकी आलोचना की गई थी।

अंत में, सीधी बात ये है कि नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव अगर चाहते हैं कि बिहारी गाली सुनता रहे और वो दोनों विपक्षी गठबंधन बनाते रहें, तो उन्हें खुल कर ये बात कहनी चाहिए। उन्हें खुल कर ऐलान कर देना चाहिए कि बिहारी अपमानित होने की आदत डाल लें। जहाँ तक बिहार के विकास की बात है, चाचा-भतीजे के कार्यकाल में वो तो होने से रहा। माइग्रेशन होता रहेगा, बिहारी अपमानित होते रहेंगे और जदयू-राजद जाति वाली राजनीति कर के सत्ता पाने की कोशिश करती ही रहेगी।

जज ने खुद को राहुल गाँधी मामले की सुनवाई से अलग किया, 2 साल की सज़ा के खिलाफ हाईकोर्ट पहुँचे हैं पूर्व कॉन्ग्रेस अध्यक्ष: अब दूसरी बेंच सुनेगी मामला

राहुल गाँधी मानहानि मामले में याचिका पर सुनवाई से गुजरात हाईकोर्ट की जज गीता गोपी ने खुद को अलग कर लिया है। इसके पहले राहुल ने सूरत कोर्ट द्वारा 2 साल की सजा के खिलाफ सूरत सेशन कोर्ट में याचिका दी थी जो खारिज हो गई थी। इसके बाद राहुल ने हाईकोर्ट का रुख किया था। गुजरात हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई अब दूसरी बेंच करेगी।

दरअसल, राहुल गाँधी ने सूरत सेशन कोर्ट में याचिका दायर कर मानहानि मामले में 2 साल की सजा पर रोक की गुहार लगाई थी। 20 अप्रैल 2023 को इस पर सुनवाई हुई। सेशन कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी। जिससे मानहानि मामले में उनकी दो साल की सजा बरकरार है। साथ ही उनकी संसद सदस्यता भी बहाल नहीं होगी। अब इस मामले में राहत के लिए उन्होंने मंगलवार (25 अप्रैल) को हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

इस मामले पर सुनवाई से पहले ही जज गीता गोपी ने खुद को सुनवाई से अलग कर लिया। अब गुजरात हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश (Acting Chief Justice) एजे देसाई तय करेंगे कि मामले की सुनवाई कौन करने वाले हैं।

क्या है पूरा मामला ?

13 अप्रैल 2019 को राहुल गाँधी ने कर्नाटक की एक रैली में कहा था, “नीरव मोदी, ललित मोदी, नरेंद्र मोदी इन सभी के नाम में मोदी लगा हुआ है। सभी चोरों के नाम में मोदी क्यों लगा होता है।” इस बयान के बाद भाजपा नेता पूर्णेश मोदी ने कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष के खिलाफ सूरत में मामला दर्ज कराया था। राहुल गाँधी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 499 और 500 के तहत केस दर्ज करवाया था, जो आपराधिक मानहानि से संबंधित है।

करीब 4 साल बाद मजिस्ट्रेट कोर्ट ने राहुल गाँधी को दोषी पाते हुए सजा सुनाई थी। सूरत की मजिस्ट्रेट कोर्ट ने इसी साल 23 मार्च को कॉन्ग्रेस नेता को इस मामले में 2 साल की सजा सुनाई थी। इसके बाद उनकी लोकसभा सदस्यता भी चली गई थी।

नाबालिग लड़की की मौत से भड़के ग्रामीणों ने बंगाल पुलिस को पीटा, ममता बनर्जी ने बिहारियों पर फोड़ा ठीकरा: रेप-हत्या का आरोप, शव घसीटती दिखी थी पुलिस

पश्चिम बंगाल के पूर्वी दिनाजपुर में एक नाबालिग लड़की के बलात्कार और हत्या के बाद उग्र ग्रामीणों ने पुलिस की पिटाई की। इसके बाद राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कह दिया कि भाजपा बिहार से गुंडों को बुला कर ये सब करवा रही है। उन्होंने सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुँचाए जाने और पुलिस की पिटाई को गुंडागिरी करार देते हुए कहा कि नाबालिग लड़की के मामले के साथ-साथ इस मामले की भी जाँच चलेगी।

TMC सुप्रीमो ने कहा कि इससे पहले शव सौंपने के दौरान भी बंगाल पुलिस पर पत्थरबाजी की गई थी। उन्होंने ऐसा करने वालों की संपत्ति जब्त करने और उन्हें गिरफ्तार करने का आदेश पुलिस को दिया है। हालाँकि, कालियागंज में हुई लड़की के रेप-हत्या की घटना के संबंध में उन्होंने कहा कि वो इसे सुनियोजित नहीं बता सकतीं, लेकिन इसके बाद जो कुछ हुआ सब प्लान बना कर हुआ। उन्होंने पीड़िता के परिवार के साथ खड़े होने का भी दावा किया।

हिंसा की घटना का वीडियो भी सामने आया है, जहाँ गुस्साए ग्रामीणों को कोने में दुबके हुए पुलिसकर्मियों की डंडे से पिटाई करते हुए देखा जा सकता है। प्रदर्शनकारियों ने थाने का भी घेराव किया। पुलिस के लाठीचार्ज के बाद भीड़ उग्र हो गई और उन्होंने थाने में ही आग लगा दी। इससे पहले भी प्रदर्शनकारियों ने कई दुकानों में आग लगा दी थी। बता दें कि 17 वर्षीय किशोरी का शव शुक्रवार (21 अप्रैल, 2023) को मिला था।

एक वीडियो सामने आने के बाद लोग उग्र हो गए थे, जिसमें पुलिस को लड़की के शव को घसीटते हुए देखा जा सकता सकता है। पुलिस कह रही है कि किशोरी की मौत ज़हरीले पदार्थों के कारण हुई है। मृतका की माँ की शिकायत पर POCSO के तहत केस दर्ज किया गया है। शव घसीटे जाने की घटना के बाद 4 पुलिसकर्मी निलंबित किए गए थे। अब TMC कह रही है कि भाजपा इस मामले को राजनीतिक रंग दे रही है। इससे पश्चिम बंगाल में बिगड़ती कानून-व्यवस्था का भी पता चलता है।

‘डंडे दिखाकर कुत्तों को डराने वाले सुरक्षाकर्मियों पर कार्रवाई करे सोसायटी’: बॉम्बे हाईकोर्ट ने दिया निर्देश, कहा- यह पशु क्रूरता है

बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोमवार (24 अप्रैल 2023) को मुंबई की एक आवासीय सोसाइटी को सुरक्षा गार्डों को लेकर अपने सदस्यों की शिकायतों को दूर करने का निर्देश दिया, जो जानवरों को डराने-धमकाने के लिए लाठी का इस्तेमाल करते हैं। जस्टिस जीएस कुलकर्णी और जस्टिस आरएन लड्डा की खंडपीठ ने कहा कि समाज को ऐसी शिकायतों का तुरंत समाधान करना चाहिए, क्योंकि जानवरों पर लाठी का इस्तेमाल उनके प्रति क्रूरता का एक रूप माना जा सकता है।

खंडपीठ ने कहा, “जहाँ तक सुरक्षा गार्डों द्वारा लाठियों का उपयोग करके जानवरों को डराने/धमकाने का संबंध है, हम समाज को याचिकाकर्ता और समाज के अन्य सदस्यों से इस संबंध में शिकायतों पर विचार करने का निर्देश देते हैं, ताकि ऐसे कार्यों में लिप्त सुरक्षाकर्मियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जा सके।”

उच्च न्यायालय ने कहा, “हम स्पष्ट राय रखते हैं कि इस तरह के जबरदस्ती के तरीके निश्चित रूप से जानवरों के प्रति क्रूरता का कार्य होगा। इसके अलावा, सुरक्षा गार्ड या किसी अन्य व्यक्ति द्वारा इस तरह के तरीकों का इस्तेमाल करने से जानवरों के प्रति क्रूरता के अलावा जानवरों के व्यवहार में वृद्धि होगी।”

आरएनए रॉयल पार्क CHSL की निवासी पारोमिता पुथरान द्वारा दायर एक याचिका पर कोर्ट सुनवाई कर रही थी। इसमें आवारा कुत्तों को खिलाने के लिए समाज के भीतर निर्दिष्ट क्षेत्रों के बारे में असहमति थी। पुथरान ने हाउसिंग सोसाइटी पर परिसर में आवारा कुत्तों को खिलाने के लिए एक स्थान सुनिश्चित करने के साथ-साथ उन्हें खिलाने से रोकने का भी आरोप लगाया।

उच्च न्यायालय के आदेशों के अनुपालन में ‘द वेलफेयर ऑफ स्ट्रे डॉग्स’ संगठन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के रूप में अबोध अरास ने सोसायटी का सर्वेक्षण किया। इसके साथ ही उन्होंने आवारा कुत्तों को खिलाने के लिए उपयुक्त क्षेत्रों की पहचान करते हुए एक रिपोर्ट तैयार की।

रिपोर्ट की जाँच करने के बाद सोसायटी और पुथरान, दोनों ने विचाराधीन क्षेत्रों का पुनर्मूल्यांकन करने और रिपोर्ट में दिए गए सुझावों को ध्यान में रखते हुए कुत्तों को खिलाने के लिए स्थानों को चिन्हित करने के लिए एक आपसी सहमति पर पहुँचे। पुथरान ने कुत्तों को पानी पीने की व्यवस्था की, जिसे अदालत ने सोसायटी से स्वीकार करने का आग्रह किया।

हाईकोर्ट ने कहा कि दोनों पक्षों को विवाद को सौहार्द्रपूर्ण ढंग से हल करने की आवश्यकता है, क्योंकि ऐसा नहीं होना चाहिए कि कुत्तों को पीने का पानी उपलब्ध नहीं कराया जाता है। कोर्ट ने आगे कहा कि यह सोसायटी के निवासियों का दायित्व होगा कि वे गर्मी के मौसम की शुरुआत को देखते हुए पशुओं को पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने का प्रावधान करें।

पुथरान ने आरोप लगाया कि कुत्तों को परिसर में प्रवेश करने से रोकने के लिए सोसायटी ने बाउंसरों को काम पर रखा था। हालाँकि, सोसायटी ने अदालत को आश्वासन दिया कि ये केवल सुरक्षाकर्मी थे, न कि बाउंसर, जैसा कि पुथरन ने आरोप लगाया था। इसके बाद पीठ ने याचिकाकर्ता को कानून के किसी भी उल्लंघन के मामले में सुरक्षाकर्मियों के खिलाफ उपयुक्त कानूनी उपाय करने की स्वतंत्रता देते हुए याचिका को खारिज कर दिया।