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केजरीवाल के बंगले में 15 बाथरूम, बिजली का खर्च ₹2.60 करोड़, किचन में लगे ₹1.10 करोड़: 5 बार निकाला ₹10 Cr से कम का टेंडर, ताकि न पड़े किसी की नजर

खुद को आम आदमी कहने वाले और कभी गाड़ी-बँगला नहीं लेने की बात कहने वाले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के बँगले को लेकर लगातार खुलासे हो रहे हैं। नए खुलासे में पता चला है कि सीएम केजरीवाल के मुख्यमंत्री आवास में एक-दो नहीं, बल्कि 15 बाथरूम हैं और हर बाथरूम को सजाने-सँवारने में एक-एक लाख रुपए खर्च किए गए हैं।

न्यूज चैनल टाइम्स नाऊ नवभारत की ‘शीशमहल’ के नाम से किए गए ऑपरेशन में इसका खुलासा किया है। यह ऑपरेशन का 2 पार्ट है। दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) के संयोजक अरविंद केजरीवाल के सरकारी आवास में 10 लाख से अधिक रकम सिर्फ सैनिट्री फिटिंग पर खर्च की गई।

चैनल के मुताबिक, सीएम केजरीवाल के आवास में बिजली के विभिन्न सामान पर 2.58 करोड़ रुपए, किचन एवं अप्लायंस पर 1.10 करोड़ रुपए, इंटीरियर डेकोरेशन (वुडेन फ्लोर, वुडन डोर और यूपीवीसी डोर पर) पर 11.30 करोड़ रुपए, हॉट वॉटर जनरेटर पर 25 लाख रुपए और सुपीरियर कंसल्टेंसी (सिर्फ बताने के लिए) के लिए एक करोड़ रुपए खर्च किए गए।

चैनल के मुताबिक, सीएम के सरकारी आवास के रेनोवेशन के लिए जो 45 करोड़ रुपए का खर्च किए गए, वे पैसे पाँच हिस्सों में आवंटित की गई थी। रेनोवेशन के लिए किसी तरह का टेंडर भी नहीं निकाला गया था। नियम के मुताबिक, सरकारी काम के लिए अगर 10 करोड़ रुपए से अधिक की रकम की जरूरत होती है, उससे जुड़ी फाइल वरिष्ठ अधिकारियों के पास जाती हैं।

इसके लिए बकायदा सार्वजनिक टेंडर निकाला जाता है। टेंडर में काम को पूरा करने के लिए जो सबसे कम बोली लगाता है, उसे टेंडर मिलता है। हालाँकि, 10 करोड़ रुपए से कम राशि की जरूरत है तो उसके लिए टेंडर निकालने की जरूरत नहीं होती है। सीएम केजरीवाल के घर को सँवारने के लिए 10 करोड़ रुपए से कम रकम पाँच बार आवंटित की गई। इसलिए फाइल को अधिकारियों को भेजने की जरूरत नहीं पड़ी। ऐसे में भ्रष्टाचार की भी गुंजाइश है।

टाइम्स नाऊ नवभारत के अनुसार, पहली बार 7.92 करोड़ रुपए, दूसरी बार 1.64 करोड़ रुपए, तीसरी बार 9 करोड़ रुपए, चौथी बार 8.17 करोड़ रुपए और पाँचवीं बार 9.34 करोड़ रुपए आवंटित किए गए। चूँकि, हर बार रकम 10 करोड़ रुपए से कम है, इसलिए टेंडर निकालने की जरूरत नहीं पड़ी।

अपने ऑपरेशन के पहले पार्ट में टाइम्स नाऊ नवभारत ने खुलासा किया था कि AAP के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कोरोना काल के दौरान राष्ट्रीय राजधानी स्थित अपने सरकारी बँगले के सौंदर्यीकरण पर 44.78 करोड़ रुपए खर्च कर दिए। यानी, बने-बनाए बँगले को चमकाने और उसे सुंदर बनाने के लिए इतने रुपए फूँक दिए गए।

मंगलवार (25 अप्रैल, 2023) की शाम को प्रसारित किए गए शो में ‘टाइम्स नाउ नवभारत’ ने जानकारी दी कि CM आवास में 8-8 लाख रुपए के पर्दे लगाए गए। केवल पर्दों पर ही 1 करोड़ रुपए खर्च कर दिए गए। कुल 23 पर्दों का ऑर्डर दिया गया था, जिनमें से कुछ अभी लगने बाकी हैं और कुछ लगाए दिए गए हैं।

शुरुआत में 8 पर्दे लगाए गए, जिनकी कीमत 45 लाख रुपए थी। दूसरे चरण में 15 पर्दों का ऑर्डर दिया गया, जो 51 लाख रुपए के थे। इतना ही नहीं, मुख्यमंत्री आवास में लगाने के लिए वियतनाम से मार्बल मँगाया गया। इसे ‘डियोर पर्ल मार्बल’ बोला जाता है, जो सुपीरियर क्वालिटी का होता है। इसकी कीमत 15 लाख रुपए होती है। साथ ही इसे लगाने के लिए भी अलग तरीके से फिटिंग की जाती है।

AAP के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने इस पर सफाई देते हुए कहा कि अरविंद केजरीवाल आंदोलन से निकले नेता हैं और कोई फकीर नहीं है। उन्होंने कहा कि वो बँगला 1942 का बना है, वहाँ छत से पानी टपकती थी और बुजुर्गों को परेशानी होती थी।

बिहारियों को बार-बार गुंडा बतातीं ममता बनर्जी, घृणा फैलाते DMK नेता, इनके सामने नतमस्तक नीतीश-तेजस्वी: गाली सुन-सुन कर विपक्षी एकता की कीमत चुकाएँ बिहारी?

बिहार एक पिछड़ा राज्य है, गरीब राज्य है। यहाँ न तो उद्योग-धंधे हैं और न ही रोजगार। JDU नेता नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री हैं और RJD नेता तेजस्वी यादव उप-मुख्यमंत्री। यानी, इन दोनों पर जिम्मेदारी है कि वो बिहार को आगे ले जाएँ। लेकिन, ये दोनों कर क्या रहे हैं? ये विपक्षी एकता के लिए देशाटन कर रहे हैं, जनता जाए भाड़ में। जिन नेताओं से ये मिल रहे हैं, वो तक इनकी बात नहीं मान रहे। लेकिन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विरोध के चक्कर में दोनों भटक रहे हैं।

एक YouTuber को गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया, लग गया NSA

कुछ ही हफ्ते बीते हैं, जब तमिलनाडु में बिहारियों के खिलाफ हिंसा की खबरें आई थीं। हालाँकि, इसके बाद सोशल मीडिया पर कई फेक वीडियो और दावे भी सर्कुलेट हो गए। लगभग सभी बड़े मामलों में ऐसा होता है। बिहार के YouTuber मनीष कश्यप ने ‘सच तक न्यूज़’ के माध्यम से बिहारियों का दर्द दिखाना शुरू किया। उन पर फर्जी खबरें फ़ैलाने का आरोप लगा कर कई मामले दर्ज किए गए और गिरफ्तार कर लिया गया।

इतना ही नहीं, उन्हें गिरफ्तार के उनके बैंक खातों को जब्त कर दिया गया। फिर उन्हें तमिलनाडु पुलिस को सौंप दिया गया। अब उन पर ‘राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA)’ के तहत कार्रवाई की जा रही है। वो वीडियो भी आपको याद ही होगा, जिसमें मनीष कश्यप से पूछताछ करने बिहारी आई तमिलनडु की पुलिसकर्मी मीडिया के सवाल पर कहती है कि उसे हिंदी नहीं आती। तमाम विरोधों के बावजूद मनीष कश्यप के साथ ऐसा व्यवहार किया गया, जैसे वो आतंकवादी हों।

लेकिन, जो सजायाफ्ता अपराधी हैं, अर्थात जिन पर न्यायालय द्वारा आरोप सिद्ध कर के सज़ा दी जा चुकी है, उनके प्रति बिहार सरकार का क्या रवैया? ऐसे 27 सजायाफ्ता अपराधियों को अब रिहा किया जा रहा है, जिनमें DM की हत्या में शामिल आनंद मोहन सिंह भी शामिल हैं। उनके बेटे चेतन आनंद राजद के विधायक हैं, शिवहर से। बाकी 26 अपराधियों में आधे ऐसे हैं, जो राजद के कथित MY समीकरण में फिर बैठते हैं।

ममता बनर्जी कई बार बिहारियों को बता चुकी हैं गुंडा

चलिए, सबसे ताज़ा मामले से ही शुरू करते हैं। पश्चिम बंगाल के पूर्वी दिनाजपुर में एक लड़की की मौत हो गई, जिसके बाद पुलिस उसके शव को घसीटती हुई दिखी। वीडियो वायरल हुआ, ग्रामीण आक्रोशित हुए। आरोप है कि नाबालिग लड़की का बलात्कार कर के उसकी हत्या कर दी गई है। लोगों ने थाने में आग लगा दी, पत्थरबाजी की, विरोध प्रदर्शन किया और पुलिसकर्मियों को पीटा। ममता बनर्जी ने बिहारियों पर ठीकरा फोड़ दिया।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने कह दिया कि भाजपा बिहार से गुंडों को बुला कर ये सब करवा रही है। क्या बिहार गुंडों की फैक्ट्री है? ये पहली बार नहीं है जब ममता बनर्जी ने इस तरह का बयान दिया हो। इसी महीने के पहले सप्ताह में भी उन्होंने रामनवमी के दौरान हुई हिंसा को लेकर कहा था कि भाजपा बिहार से गुंडों को लेकर आई और वो हावड़ा में घुस गए। क्या एक बार भी नीतीश कुमार ये तेजस्वी यादव ने इस बयान पर आपत्ति जताई?

अब ज़रा 3 साल पीछे चलिए। पश्चिम बंगाल में तब विधानसभा चुनाव हो रहे थे। तब भी ममता बनर्जी ने कहा था कि पश्चिम बंगाल में यूपी-बिहार से गुंडे बुलाए जा रहे हैं। बिहार में इसके खिलाफ शिकायत भी दर्ज कराई गई थी। इसके बावजूद नीतीश-तेजस्वी कोलकाता जाकर ममता बनर्जी से मिलते हैं, उनसे मिन्नतें माँगते हैं कि वो विपक्षी गठबंधन में शामिल हों और बदले में बंगाल सीएम कहती हैं कि बिहार में बैठक बुलाइए सभी दलों की, फिर आगे देखेंगे।

क्या ममता बनर्जी बिहारियों को गुंडा बोलती रहेंगी और बिहारी अपमान का घूँट सिर्फ इसीलिए पीता रहे क्योंकि नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव उनके सामने नतमस्तक हैं? क्या विपक्षी एकता की कीमत बिहारियों का अपमान है? इसका अर्थ है कि ममता बनर्जी के बयान पर कोई आपत्ति न जताने वाले बिहार के सत्ताधीश इन बातों से सहमत हैं। अब वो भी अपने राज्य की जनता को ‘गुंडा’ बुलाना ही शुरू कर दें फिर तो।

जिस DMK सुप्रीमो के जन्मदिन पर भज खाने गए नीतीश-तेजस्वी, उस पार्टी के नेता भी बिहारियों के खिलाफ फैलाते हैं घृणा

जिस तमिलनाडु की पुलिस को मनीष कश्यप को सौंप दिया गया, वहाँ की सत्ताधारी पार्टी की बिहारियों को लेकर क्या सोच है ये भी तो जान लीजिए। याद हो कि जब तमिलनाडु में बिहारियों के खिलाफ हिंसा की खबरें आ रही थीं, तब नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव चेन्नई में वहाँ के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की 70वीं सालगिरह की पार्टी एन्जॉय कर रहे थे। क्या उन्होंने इस मुद्दे को वहाँ उठाया? उन्हें लगता है कि बिहारी जाट-पात में बँटे रह कर उन्हें जिताते रहेंगे, भले ही वो उनके खिलाफ हिंसा ही क्यों न होने दें।

तमिलनाडु में तो राज्यपाल तक को नहीं छोड़ा गया। भारत के डिप्टी NSA रह चुके पटना के RN रवि तमिलनाडु के राज्यपाल हैं। DMK के संगठन महामंत्री आरएस भारती ने कह दिया कि तमिलनाडु में बिहारी पानी-पूरी और सोनपापड़ी बेचने आते हैं, राज्यपाल भी उन्हीं में से एक हैं। उन्होंने राज्यपाल को पिटाई तक की धमकी देते हुए उनकी तुलना बिहार के प्रवासी मजदूरों के साथ कर दी। क्या नीतीश-तेजस्वी ने इस पर आपत्ति जताई?

DMK संगठन तो छोड़ दीजिए, तमिलनाडु सरकार में बैठे इनके नेताओं की सोच भी देख लीजिए। तमिलनाडु के नगरपालिका प्रशासन मंत्री केएन नेहरू ने कह दिया कि बिहारियों के पास तमिल लोगों के मुकाबले कम बुद्धि होती है। उन्होंने बिहारियों पर तमिल लोगों की नौकरी छीनने के आरोप तक मढ़ दिए। उन्होंने कहा था कि बिहारियों को तमिल या अंग्रेजी नहीं आती है, फिर भी वो बैंकों में नौकरियाँ कर के तमिल लोगों के रोजगार छीन रहे हैं।

इन सबके बावजूद नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव एमके स्टालिन के यहाँ भोज खाने पहुँचे। इसी तरह वो हाल ही में विपक्षी एकता की कवायद में अरविंद केजरीवल से भी मिले। एक अस्पताल के उद्घाटन कार्यक्रम में पहुँचे दिल्ली के सीएम ने कहा था कि बिहारी 500 रुपए का टिकट कटा कर दिल्ली आते हैं और 5 लाख रुपए का इलाज मुफ्त में करा के चले जाते हैं। कोरोना काल में किस तरह बिहारी मजदूरों को दिल्ली से भगाया गया था, ये बात भी नीतीश-तेजस्वी ने जेहन से निकाल दी।

नीतीश-तेजस्वी के विपक्षी गठबंधन में बिहारी विरोधी उद्धव भी होंगे?

नीतीश-तेजस्वी के विपक्षी गठबंधन की योजना में महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की शिवसेना भी होगी ही। शिवसेना का तो बिहारियों के खिलाफ घृणा का पूरा का पूरा इतिहास रहा है। उद्धव ठाकरे तो यहाँ तक कह चुके हैं कि मुंबई में घुसने के लिए बिहारियों के लिए परमिट सिस्टम होना चाहिए। तब उन्होंने नीतीश को भी भला-बुरा कहा था। लॉकडाउन के बाद जब बिहारी मजदूर महाराष्ट्र लौटे थे, तब भी शिवसेना मुखपत्र ‘सामना’ में उनकी आलोचना की गई थी।

अंत में, सीधी बात ये है कि नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव अगर चाहते हैं कि बिहारी गाली सुनता रहे और वो दोनों विपक्षी गठबंधन बनाते रहें, तो उन्हें खुल कर ये बात कहनी चाहिए। उन्हें खुल कर ऐलान कर देना चाहिए कि बिहारी अपमानित होने की आदत डाल लें। जहाँ तक बिहार के विकास की बात है, चाचा-भतीजे के कार्यकाल में वो तो होने से रहा। माइग्रेशन होता रहेगा, बिहारी अपमानित होते रहेंगे और जदयू-राजद जाति वाली राजनीति कर के सत्ता पाने की कोशिश करती ही रहेगी।

जज ने खुद को राहुल गाँधी मामले की सुनवाई से अलग किया, 2 साल की सज़ा के खिलाफ हाईकोर्ट पहुँचे हैं पूर्व कॉन्ग्रेस अध्यक्ष: अब दूसरी बेंच सुनेगी मामला

राहुल गाँधी मानहानि मामले में याचिका पर सुनवाई से गुजरात हाईकोर्ट की जज गीता गोपी ने खुद को अलग कर लिया है। इसके पहले राहुल ने सूरत कोर्ट द्वारा 2 साल की सजा के खिलाफ सूरत सेशन कोर्ट में याचिका दी थी जो खारिज हो गई थी। इसके बाद राहुल ने हाईकोर्ट का रुख किया था। गुजरात हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई अब दूसरी बेंच करेगी।

दरअसल, राहुल गाँधी ने सूरत सेशन कोर्ट में याचिका दायर कर मानहानि मामले में 2 साल की सजा पर रोक की गुहार लगाई थी। 20 अप्रैल 2023 को इस पर सुनवाई हुई। सेशन कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी। जिससे मानहानि मामले में उनकी दो साल की सजा बरकरार है। साथ ही उनकी संसद सदस्यता भी बहाल नहीं होगी। अब इस मामले में राहत के लिए उन्होंने मंगलवार (25 अप्रैल) को हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

इस मामले पर सुनवाई से पहले ही जज गीता गोपी ने खुद को सुनवाई से अलग कर लिया। अब गुजरात हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश (Acting Chief Justice) एजे देसाई तय करेंगे कि मामले की सुनवाई कौन करने वाले हैं।

क्या है पूरा मामला ?

13 अप्रैल 2019 को राहुल गाँधी ने कर्नाटक की एक रैली में कहा था, “नीरव मोदी, ललित मोदी, नरेंद्र मोदी इन सभी के नाम में मोदी लगा हुआ है। सभी चोरों के नाम में मोदी क्यों लगा होता है।” इस बयान के बाद भाजपा नेता पूर्णेश मोदी ने कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष के खिलाफ सूरत में मामला दर्ज कराया था। राहुल गाँधी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 499 और 500 के तहत केस दर्ज करवाया था, जो आपराधिक मानहानि से संबंधित है।

करीब 4 साल बाद मजिस्ट्रेट कोर्ट ने राहुल गाँधी को दोषी पाते हुए सजा सुनाई थी। सूरत की मजिस्ट्रेट कोर्ट ने इसी साल 23 मार्च को कॉन्ग्रेस नेता को इस मामले में 2 साल की सजा सुनाई थी। इसके बाद उनकी लोकसभा सदस्यता भी चली गई थी।

नाबालिग लड़की की मौत से भड़के ग्रामीणों ने बंगाल पुलिस को पीटा, ममता बनर्जी ने बिहारियों पर फोड़ा ठीकरा: रेप-हत्या का आरोप, शव घसीटती दिखी थी पुलिस

पश्चिम बंगाल के पूर्वी दिनाजपुर में एक नाबालिग लड़की के बलात्कार और हत्या के बाद उग्र ग्रामीणों ने पुलिस की पिटाई की। इसके बाद राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कह दिया कि भाजपा बिहार से गुंडों को बुला कर ये सब करवा रही है। उन्होंने सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुँचाए जाने और पुलिस की पिटाई को गुंडागिरी करार देते हुए कहा कि नाबालिग लड़की के मामले के साथ-साथ इस मामले की भी जाँच चलेगी।

TMC सुप्रीमो ने कहा कि इससे पहले शव सौंपने के दौरान भी बंगाल पुलिस पर पत्थरबाजी की गई थी। उन्होंने ऐसा करने वालों की संपत्ति जब्त करने और उन्हें गिरफ्तार करने का आदेश पुलिस को दिया है। हालाँकि, कालियागंज में हुई लड़की के रेप-हत्या की घटना के संबंध में उन्होंने कहा कि वो इसे सुनियोजित नहीं बता सकतीं, लेकिन इसके बाद जो कुछ हुआ सब प्लान बना कर हुआ। उन्होंने पीड़िता के परिवार के साथ खड़े होने का भी दावा किया।

हिंसा की घटना का वीडियो भी सामने आया है, जहाँ गुस्साए ग्रामीणों को कोने में दुबके हुए पुलिसकर्मियों की डंडे से पिटाई करते हुए देखा जा सकता है। प्रदर्शनकारियों ने थाने का भी घेराव किया। पुलिस के लाठीचार्ज के बाद भीड़ उग्र हो गई और उन्होंने थाने में ही आग लगा दी। इससे पहले भी प्रदर्शनकारियों ने कई दुकानों में आग लगा दी थी। बता दें कि 17 वर्षीय किशोरी का शव शुक्रवार (21 अप्रैल, 2023) को मिला था।

एक वीडियो सामने आने के बाद लोग उग्र हो गए थे, जिसमें पुलिस को लड़की के शव को घसीटते हुए देखा जा सकता सकता है। पुलिस कह रही है कि किशोरी की मौत ज़हरीले पदार्थों के कारण हुई है। मृतका की माँ की शिकायत पर POCSO के तहत केस दर्ज किया गया है। शव घसीटे जाने की घटना के बाद 4 पुलिसकर्मी निलंबित किए गए थे। अब TMC कह रही है कि भाजपा इस मामले को राजनीतिक रंग दे रही है। इससे पश्चिम बंगाल में बिगड़ती कानून-व्यवस्था का भी पता चलता है।

‘डंडे दिखाकर कुत्तों को डराने वाले सुरक्षाकर्मियों पर कार्रवाई करे सोसायटी’: बॉम्बे हाईकोर्ट ने दिया निर्देश, कहा- यह पशु क्रूरता है

बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोमवार (24 अप्रैल 2023) को मुंबई की एक आवासीय सोसाइटी को सुरक्षा गार्डों को लेकर अपने सदस्यों की शिकायतों को दूर करने का निर्देश दिया, जो जानवरों को डराने-धमकाने के लिए लाठी का इस्तेमाल करते हैं। जस्टिस जीएस कुलकर्णी और जस्टिस आरएन लड्डा की खंडपीठ ने कहा कि समाज को ऐसी शिकायतों का तुरंत समाधान करना चाहिए, क्योंकि जानवरों पर लाठी का इस्तेमाल उनके प्रति क्रूरता का एक रूप माना जा सकता है।

खंडपीठ ने कहा, “जहाँ तक सुरक्षा गार्डों द्वारा लाठियों का उपयोग करके जानवरों को डराने/धमकाने का संबंध है, हम समाज को याचिकाकर्ता और समाज के अन्य सदस्यों से इस संबंध में शिकायतों पर विचार करने का निर्देश देते हैं, ताकि ऐसे कार्यों में लिप्त सुरक्षाकर्मियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जा सके।”

उच्च न्यायालय ने कहा, “हम स्पष्ट राय रखते हैं कि इस तरह के जबरदस्ती के तरीके निश्चित रूप से जानवरों के प्रति क्रूरता का कार्य होगा। इसके अलावा, सुरक्षा गार्ड या किसी अन्य व्यक्ति द्वारा इस तरह के तरीकों का इस्तेमाल करने से जानवरों के प्रति क्रूरता के अलावा जानवरों के व्यवहार में वृद्धि होगी।”

आरएनए रॉयल पार्क CHSL की निवासी पारोमिता पुथरान द्वारा दायर एक याचिका पर कोर्ट सुनवाई कर रही थी। इसमें आवारा कुत्तों को खिलाने के लिए समाज के भीतर निर्दिष्ट क्षेत्रों के बारे में असहमति थी। पुथरान ने हाउसिंग सोसाइटी पर परिसर में आवारा कुत्तों को खिलाने के लिए एक स्थान सुनिश्चित करने के साथ-साथ उन्हें खिलाने से रोकने का भी आरोप लगाया।

उच्च न्यायालय के आदेशों के अनुपालन में ‘द वेलफेयर ऑफ स्ट्रे डॉग्स’ संगठन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के रूप में अबोध अरास ने सोसायटी का सर्वेक्षण किया। इसके साथ ही उन्होंने आवारा कुत्तों को खिलाने के लिए उपयुक्त क्षेत्रों की पहचान करते हुए एक रिपोर्ट तैयार की।

रिपोर्ट की जाँच करने के बाद सोसायटी और पुथरान, दोनों ने विचाराधीन क्षेत्रों का पुनर्मूल्यांकन करने और रिपोर्ट में दिए गए सुझावों को ध्यान में रखते हुए कुत्तों को खिलाने के लिए स्थानों को चिन्हित करने के लिए एक आपसी सहमति पर पहुँचे। पुथरान ने कुत्तों को पानी पीने की व्यवस्था की, जिसे अदालत ने सोसायटी से स्वीकार करने का आग्रह किया।

हाईकोर्ट ने कहा कि दोनों पक्षों को विवाद को सौहार्द्रपूर्ण ढंग से हल करने की आवश्यकता है, क्योंकि ऐसा नहीं होना चाहिए कि कुत्तों को पीने का पानी उपलब्ध नहीं कराया जाता है। कोर्ट ने आगे कहा कि यह सोसायटी के निवासियों का दायित्व होगा कि वे गर्मी के मौसम की शुरुआत को देखते हुए पशुओं को पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने का प्रावधान करें।

पुथरान ने आरोप लगाया कि कुत्तों को परिसर में प्रवेश करने से रोकने के लिए सोसायटी ने बाउंसरों को काम पर रखा था। हालाँकि, सोसायटी ने अदालत को आश्वासन दिया कि ये केवल सुरक्षाकर्मी थे, न कि बाउंसर, जैसा कि पुथरन ने आरोप लगाया था। इसके बाद पीठ ने याचिकाकर्ता को कानून के किसी भी उल्लंघन के मामले में सुरक्षाकर्मियों के खिलाफ उपयुक्त कानूनी उपाय करने की स्वतंत्रता देते हुए याचिका को खारिज कर दिया।

भंग कर दिया जाएगा राष्ट्रीय वक्फ विकास निगम लिमिटेड? स्मृति ईरानी का बड़ा ऐलान, नूपुर शर्मा पर बोलीं – एक महिला को घर में कैद हो जाना पड़ा, क्योंकि…

केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने इशारा किया है कि आने वाले समय में ‘राष्ट्रीय वक्फ विकास निगम लिमिटेड (NAWADCO)’ को भंग किया जा सकता है। स्मृति ईरानी ने रिपब्लिक समिट में हिस्सा लेते हुए कहा कि अल्पसंख्यक समुदाय खतरे में नहीं है बल्कि अल्पसंख्यक तुष्टीकरण की राजनीति अब खतरे में है। स्मृति ईरानी ने कहा कि कॉन्ग्रेस अल्पसंख्यकों खासकर मुस्लिमों में डर फैलाकर उन्हें अलग थलग करने की कोशिश की।

यह पूछे जाने पर कि क्या आने वाले समय में NAWADCO को खत्म कर दिया जाएगा? स्मृति ईरानी ने NAWADCO के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इसकी स्थापना मनमोहन सरकार में आम चुनाव से पहले जनवरी 2014 में की गई थी। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि NAWADCO देश की अकेली सेक्शन 25 कंपनी है, जिसे टैक्सपेयर्स से रुपए प्राप्त करने का अधिकार दिया गया ताकि वक्फ की संपत्तियों का विकास और देखभाल हो सके। देश में दूसरी ऐसी कोई भी सेक्शन 25 संस्था नहीं है जो टैक्सपेयर्स के पैसों का इस्तेमाल किसी खास मजहब की निजी संपत्तियों की देखभाल करती हो।

स्मृति ईरानी ने कहा कि हम जानते हैं कि एक समिट में प्रशासनिक फैसले नहीं लिए जाते। लेकिन आपको इतना भरोसा दे सकती हूँ कि यदि किसी कारण से देश के दूसरे धर्म के मानने वालों के साथ भेदभाव होगा तो हम इसे निष्क्रिय करने का काम करेंगे। हम समानता स्थापित करेंगे। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मैं यह सुनिश्चित करना चाहती हूँ कि सभी भारतीय कानून के नजर में समान हैं।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कॉन्ग्रेस ने हमेशा इस देश में धर्म के नाम पर राजनीति की है। उन्होंने कहा कि यदि कॉन्ग्रेस के इस तरह के निर्णयों से जनता खुश होती तो लोग कभी भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना समर्थन नहीं देते। लोगों ने दो बार उन्हें बदलावों के लिए ही अपना समर्थन दिया है और बदलाव किए जा रहे हैं।

भाजपा नेत्री ने इस दौरान नूपुर शर्मा का भी जिक्र किया। अर्णब की बात पर जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि देश में ऐसे मौके भी आए हैं जब एक महिला को अपने घर में कैद हो जाना पड़ा क्योंकि वो एक टीवी डिबेट का हिस्सा थीं। इसलिए आप इस तरह की बातें न करें जिससे मेरे खिलाफ भी इस तरह का वातावरण तैयार हो। इस पर शो को होस्ट कर रहे अर्णब गोस्वामी ने कहा कि आप के खिलाफ पहले से ही ऐसी बातें हो रही हैं। आपको धमकियाँ दी जाती रही हैं।

इसके अलावा स्मृति ईरानी ने अल्पसंख्यक के नाम पर हो रही राजनीति और अवधारणा पर बात की। उन्होंने कहा कि देश में मुस्लिमों को ही अल्पसंख्यक माना जाता है। सिख, पारसी और दूसरे धर्मों की चर्चा ही नहीं होती। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मुझे गर्व है कि मैं एक ऐसी पार्टी का हिस्सा हूँ जो इस धारणा को दूर करती है।

जानिए कौन है भारत का वो कारोबारी, जिसने UK में मंदिर बनाने के लिए दान कर दिए ₹250 करोड़: 500 गरीब बच्चियों की पढ़ाई-लिखाई का भी उठाया है जिम्मा

ब्रिटेन में रहने वाले भगवान जगन्नाथ के लाखों भक्तों के लिए एक अच्छी खबर है। यहाँ जल्द ही जगन्नाथ मंदिर का निर्माण किया जाएगा। भारतीय बिजनेसमैन बिश्वनाथ पटनायक (Biswanath Patnaik) ने ब्रिटेन में भगवान जगन्नाथ के पहले मंदिर के निर्माण के लिए करीब 250 करोड़ रुपए का दान दिया है। इस मंदिर के निर्माण में यूके की संस्था श्री जगन्नाथ सोसायटी अहम रोल निभा रही है। इंग्लैंड में चैरिटी कमीशन में पंजीकृत श्री जगन्नाथ सोसायटी (एसजेएस) यूके ने अक्षय तृतीया के मौके पर ब्रिटेन में आयोजित पहले जगन्नाथ सम्मेलन के दौरान यह घोषणा की थी।

जगन्नाथ सोसायटी ने अपने ट्विटर हैंडल पर भी इससे जुड़ी कई जानकारी साझा की है। अगले साल के अंत तक मंदिर का पहला चरण पूरा होने की उम्मीद जताई जा रही है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, लंदन में ‘श्री जगन्नाथ मंदिर’ के लिए लगभग 15 एकड़ जमीन खरीदने के लिए 250 करोड़ रुपए में से 70 करोड़ रुपए अलग रखे गए हैं। चैरिटी ने एक बयान में कहा कि एक उपयुक्त भूमि की पहचान कर ली गई है। पटनायक का कहना है, “यह भगवान जगन्नाथ का आशीर्वाद है कि हम मंदिर के निर्माण के लिए उपयुक्त भूमि की पहचान करने में कामयाब रहे हैं और मैं दान देने में सक्षम रहा। हम इसे जल्द से जल्द पूरा करेंगे।”

कौन हैं विश्वनाथ पटनायक

ओडिशा के रहने वाले बिश्वनाथ पटनायक एक सफल बिजनेसमैन हैं। पटनायक ‘फिननेस्ट ग्रुप ऑफ कंपनीज’ के अध्यक्ष और संस्थापक हैं। वह नवीकरणीय, इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी), हाइड्रोजन लोकोमोटिव आदि में निवेश करते हैं। उन्होंने उत्कल विश्वविद्यालय से एमबीए और कानून की डिग्री ली है। कई वर्षों तक बैंकिंग क्षेत्र में काम करने के बाद पटनायक ने 2009 में बिजनेस की दुनिया में कदम रखा था। पटनायक ने हाल ही में ओडिशा में ईवी-हाइड्रोजन ट्रक और वाणिज्यिक भारी वाहन विनिर्माण संयंत्र में 500 करोड़ रुपए का निवेश करने की योजना साझा की।

पटनायक का निवेश हेल्थकेयर, फिनटेक, रिन्यूएबल एनर्जी से लेकर दुबई में गोल्ड रिफाइनरी और बुलियन ट्रेडिंग तक के विविध पोर्टफोलियो में है। वह धार्मिक कामों में भी काफी सक्रिय रहते हैं। बिश्वनाथ पटनायक इससे पहले भी कई चैरिटेबल ट्रस्ट को दान दे चुके हैं। उन्होंने यूनेस्को में भी दान दिया है। इसके अलावा पटनायक ने 500 गरीब बच्चियों को पढ़ाने का फैसला भी किया है।

‘हिंदी में नहीं, तमिल में बोलो’: खुले मंच पर AR रहमान ने बीवी सायरा से कहा, वीडियो आया सामने – पहले भी लग चुका है हिंदी भाषा के अपमान का आरोप

बॉलीवुड सिंगर और संगीतकार एआर रहमान (A R Rahman) का सोशल मीडिया पर एक वीडियो क्लिप वायरल हो रहा है। यह वीडियो चेन्नई में हुए एक अवॉर्ड शो का है। इस दौरान एआर रहमान को बीवी सायरा बानो (Saira Banu) से कहते हुए सुना गया, “हिंदी में मत बोलो, तमिल में बोलो।” ये सुनने के बाद वहाँ मौजूद दक्षिण भारतीय फिल्मों के कलाकार जोर-जोर से हँसने लगते हैं।

दरअसल, एआर रहमान चेन्नई में आयोजित विकटन अवॉर्ड शो में बीवी सायरा बानो के साथ पहुँचे थे। इस दौरान एंकर ने सायरा को बोलने के लिए इनवाइट किया। जैसे ही उन्होंने बोलने के लिए माइक पकड़ा, रहमान ने उनसे कहा, “हिंदी में मत बोलो, तमिल में बोलो।” हालाँकि, सायरा तमिल में अपनी बात नहीं रख पाईं, क्योंकि उन्हें तमिल भाषा अच्छे से नहीं आती है। इसके लिए उन्होंने माफी भी माँगी। सायरा ने स्टेज पर कहा, “माफ करें, मैं तमिल भाषा में अच्छे से नहीं बोल सकती हूँ। मैं बहुत खुश और उत्साहित हूँ। इनकी (शौहर) आवाज मेरी फेवरेट आवाज है। मुझे उनकी आवाज से प्यार है। मैं बस इतना ही कह सकती हूँ।”

इसके बाद एआर रहमान अपनी तारीफ सुनने के बाद मुस्कुराने लगते हैं।

एआर रहमान मणिरत्नम की फिल्म ‘पोन्नियिन सेलवन: भाग 2’ की रिलीज का इंतजार कर रहे हैं। यह फिल्म 28 अप्रैल, 2023 को पाँच भाषाओं में सिनेमाघरों में रिलीज की जाएगी। फिल्म के एंथम सॉन्ग को हिंदी में अरिजीत सिंह और बेनी दयाल ने अपनी आवाज में गाया है। वहीं, एआर रहमान ने इसका म्यूजिक दिया है।

बता दें इससे पहले 2021 में एआर रहमान पर एंकर के हिंदी बोलने पर उसका मजाक उड़ाने का आरोप लग चुका है। दरअसल, एक प्रमोशन इवेंट में एंकर्स तमिल भाषा में सवाल पूछ रहे थे। इस दौरान एक एंकर ने हिंदी में बात की। हिंदी सुनकर रहमान चौंक गए और स्टेज से उतरकर चले गए। हालाँकि, स्टेज से उतरते हुए उन्होंने ये साफ कर दिया कि वो सिर्फ मज़ाक कर रहे हैं, लेकिन सोशल मीडिया पर उनका ये मज़ाक लोगों को बिल्कुल भी पसंद नहीं आया और उन्होंने इसे हिंदी भाषा का अपमान बताया था।

‘BJP नेता और पत्रकारों पर अरविंद केजरीवाल ने अपने गुंडों से डंडे से करवाया हमला’: वीडियो आया सामने, घर को चमकाने में खर्चे थे ₹45 करोड़

कोरोना में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने राष्ट्रीय राजधानी स्थित अपने सरकारी बँगले के सौंदर्यीकरण पर 44.78 करोड़ रुपए खर्च कर दिए। यानी, बने-बनाए बँगले को चमकाने और उसे सुंदर बनाने में इतने रुपए फूँक दिए गए। इस खुलासे के बाद भाजपा ने सीएम आवास के बाहर प्रदर्शन किया। इस दौरान सुरक्षाकर्मियों ने धक्का-मुक्की की।

दिल्ली भाजपा के महासचिव कुलजीत चहल इस खुलासे के बाद सीएम हाउस पहुँचे। उन्होंने कहा कि वे इसका हिसाब माँगने आए थे। इस दौरान सीएम हाउस के बाहर तैनात सुरक्षाकर्मियों ने उनके साथ धक्का-मुक्की की। उनके साथ ही नहीं, मीडिया के साथ भी धक्का-मुक्की की गई। सुरक्षाकर्मियों द्वारा लाठियों से हमले का भी आरोप लगाया जा रहा है।

दरअसल, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को लेकर ‘Times Now Navbharat’ ने बड़ा खुलासा किया है। ‘ऑपरेशन शीशमहल’ नामक शो में ये खुलासा किया गया। चैनल ने बताया है कि AAP के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कोरोना काल के दौरान राष्ट्रीय राजधानी स्थित अपने सरकारी बँगले के सौंदर्यीकरण पर 44.78 करोड़ रुपए खर्च कर दिए।

मंगलवार (25 अप्रैल, 2023) की शाम को प्रसारित किए गए शो में ‘टाइम्स नाउ नवभारत’ ने जानकारी दी कि CM आवास में 8-8 लाख रुपए के पर्दे लगाए गए। केवल पर्दों पर ही 1 करोड़ रुपए खर्च कर दिए गए। कुल 23 पर्दों का ऑर्डर दिया गया था, जिनमें से कुछ अभी लगने बाकी हैं और कुछ लगाए दिए गए हैं।

शुरुआत में 8 पर्दे लगाए गए, जिनकी कीमत 45 लाख रुपए थी। दूसरे चरण में 15 पर्दों का ऑर्डर दिया गया, जो 51 लाख रुपए के थे। इतना ही नहीं, मुख्यमंत्री आवास में लगाने के लिए वियतनाम से मार्बल मँगाया गया। इसे ‘डियोर पर्ल मार्बल’ बोला जाता है, जो सुपीरियर क्वालिटी का होता है। इसकी कीमत 15 लाख रुपए होती है। साथ ही इसे लगाने के लिए भी अलग तरीके से फिटिंग की जाती है।

AAP के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने इस पर सफाई देते हुए कहा कि अरविंद केजरीवाल आंदोलन से निकले नेता हैं और कोई फकीर नहीं है। उन्होंने कहा कि वो बँगला 1942 का बना है, वहाँ छत से पानी टपकती थी और बुजुर्गों को परेशानी होती थी। चड्ढा ने सीएम हाउस को सरकारी बँगलाो बताते हुए पीएम आवास के बारे में बात करने की सलाह दी।

दिल्ली में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने कहा, “खुद को आम आदमी कहने वाले अरविंद केजरीवाल ने अपने घर पर रिनोवेशन के नाम पर जनता के 44.78 करोड़ रुपए बर्बाद कर डाले। अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी को शर्म आनी चाहिए। ऐसे ढोंगी आम आदमी और भ्रष्टाचारी व्यक्ति को दिल्ली का मुख्यमंत्री बने रहने का कोई हक नहीं है।”

‘इतनी हाय-तौबा क्यों? कोई पहला मर्डर है क्या?’: पप्पू यादव ने DM की हत्या को बता दिया ‘हादसा’, पत्नी से बोले – आनंद मोहन को माफ़ कर दो

बिहार में बाहुबली नेता आनंद मोहन की रिहाई को लेकर सियासी घमासान मचा हुआ है। आईएएस एसोसिएशन (IAS Association) ने भी नीतीश सरकार के फैसले की आलोचन की थी और इसपर निराशा जताई थी। अब ‘जन अधिकार पार्टी (JAP)’ सुप्रीमो पप्पू यादव ने आनंद मोहन की रिहाई का समर्थन किया है। इस मुद्दे पर उन्होंने आईएएस एसोसिएशन की जमकर आलोचना की।

हत्या के आरोपित पूर्व सांसद के रिहाई पर सवाल उठाए जाने पर पप्पू यादव ने आईएएस एसोसिएशन से पूछा कि क्या यह पहला मर्डर है, जो इतनी हाय-तौबा मची हुई है? जन अधिकार पार्टी प्रमुख यहीं नहीं रुके उन्होंने गोपालगंज के डीएम जी कृष्णैया की हत्या को महज एक हादसा करार दिया। पप्पू यादव ने कहा कि जी कृष्णैया को किसी दुश्मनी, बदले की भावना या अन्य मकसद से नहीं मारा गया।

सोशल मीडिया पर भी पप्पू यादव ने आईएएस एसोसिएशन पर निशाना साधा। पप्पू यादव ने ट्विटर पर लिखा, “IAS एसोसिएशन को तब लकवा मार गया था जब गुजरात के IAS प्रदीप शर्मा को जबरदस्ती जेल में कैद कर रखा गया। बस डर यह कि वह PM की कलई न खोल दे। ऐसे एसोसिएशन की औकात तब क्यों गुम हो जाती है जब IPS संजीव भट्ट को गुजरात दंगों का राज खोलने के कारण वर्षों से जेल में प्रताड़ित किया जा रहा है।”

दरअसल, आईएएस एसोसिएशन ने आनंद मोहन को रिहा किए जाने के फैसले की निंदा की थी। आईएएस एसोसिएशन ने ट्वीट कर फैसले को निराशाजनक बताया। एसोसिएशन की तरफ से लिखा गया कि आनंद मोहन ने जी कृष्णैया की नृशंस हत्या की थी। ऐसे में उसकी रिहाई दुखद है। जी कृष्णैया की विधवा उमा देवी ने भी बिहार सरकार के फैसले पर निराशा जताई है। उन्होंने कहा कि उसने एक ईमानदार अधिकारी को मारा था। उसको जैसी सजा मिलनी चाहिए, वो नहीं मिली। उसकी रिहाई का सबको विरोध करना चाहिए।

JAP सुप्रीमो ने जी कृष्णैया की विधवा उमा देवी से भी अपील की है कि वे आनंद मोहन को माफ कर दें। बता दें कि साल 1994 में तेलंगाना में जनमें आईएसएस अधिकारी जी कृष्णैया की मुजफ्फरपुर में भीड़ ने हत्या कर दी थी। उस वक्त वे गोपालगंज के डीएम थे। बाहुबली आनंद मोहन पर भीड़ को उकसाने का आरोप लगा था। रिपोर्टों में दावा किया जाता है कि डीएम की मॉब लिंचिंग के बाद उन्हें गोली भी मार दी गई थी।