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₹1 करोड़ के पर्दे, वियतनाम से मार्बल… केजरीवाल ने बँगले को चमकाने पर सरकारी खजाने से खर्चे ₹45 करोड़: राघव चड्ढा बोले – वो फकीर नहीं, छत से पानी टपकता था

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को लेकर ‘Times Now Navbharat’ ने बड़ा खुलासा किया है। ‘ऑपरेशन शीशमहल’ नामक शो में ये खुलासा किया गया। चैनल ने बताया है कि AAP के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कोरोना काल के दौरान राष्ट्रीय राजधानी स्थित अपने सरकारी बँगले के सौंदर्यीकरण पर 44.78 करोड़ रुपए खर्च कर दिए। यानी, बने-बनाए बँगले को चमकाने और उसे सुंदर बनाने के लिए इतने रुपए फूँक दिए गए।

मंगलवार (25 अप्रैल, 2023) की शाम को प्रसारित किए गए शो में ‘टाइम्स नाउ नवभारत’ ने जानकारी दी कि CM आवास में 8-8 लाख रुपए के पर्दे लगाए गए। केवल पर्दों पर ही 1 करोड़ रुपए खर्च कर दिए गए। कुल 23 पर्दों का ऑर्डर दिया गया था, जिनमें से कुछ अभी लगने बाकी हैं और कुछ लगाए दिए गए हैं। शुरुआत में 8 पर्दे लगाए गए, जिनकी कीमत 45 लाख रुपए थी। दूसरे चरण में 15 पर्दों का ऑर्डर दिया गया, जो 51 लाख रुपए के थे।

इतना ही नहीं, मुख्यमंत्री आवास में लगाने के लिए वियतनाम से मार्बल मँगाया गया। इसे ‘डियोर पर्ल मार्बल’ बोला जाता है, जो सुपीरियर क्वालिटी का होता है। इसकी कीमत 15 लाख रुपए होती है। साथ ही इसे लगाने के लिए भी अलग तरीके से फिटिंग की जाती है। AAP के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने इस पर सफाई देते हुए कहा कि अरविंद केजरीवाल आंदोलन से निकले नेता हैं और कोई फकीर नहीं है। उन्होंने कहा कि वो बँगला 1942 का बना है, वहाँ छत से पानी टपकती थी और बुजुर्गों को परेशानी होती थी।

राघव चड्ढा ने सफाई दी कि इसे सरकारी बँगला बताते हुए पीएम आवास के बारे में बात करने की सलाह दी। दिल्ली में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने कहा, “खुद को आम आदमी कहने वाले अरविंद केजरीवाल ने अपने घर पर रिनोवेशन के नाम पर जनता के 44.78 करोड़ रुपए बर्बाद कर डाले। अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी को शर्म आनी चाहिए। ऐसे ढोंगी आम आदमी और भ्रष्टाचारी व्यक्ति को दिल्ली का मुख्यमंत्री बने रहने का कोई हक नहीं है।”

अयोध्या के मंदिर में होंगे दो-दो रामलला, नई भव्य मूर्ति और 1949 में प्रकट हुए भगवान भी होंगे विराजमान: जानिए कौन होंगे ‘विश्वकर्मा’, कब होगी प्राण-प्रतिष्ठा

अयोध्या में भव्य राम मंदिर का कार्य तेज़ी से आगे बढ़ रहा है और समय के साथ ही भक्तों के बीच उत्सुकता भी बढ़ती जा रही है। ‘श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ निर्माण कार्य से लेकर अन्य व्यवस्थाओं में लगा हुआ है। ट्रस्ट में एक से बढ़ कर एक विद्वान और अनुभवी लोग हैं, जिनका सीधा सरोकार अयोध्या और भगवान श्रीराम के मंदिर से रहा है। इनमें अधिकतर लंबे समय तक आंदोलन में सक्रिय रहे हैं। ऐसे में उनका भी प्रयास है कि इस कार्य में कोई कोताही न रह जाए।

हाल ही में राम मंदिर की प्रतिमा को लेकर कुछ खबरें सामने आई हैं, जिसके बाद लोगों के मन में तरह-तरह के सवाल उठ रहे हैं। वर्तमान में रामलला की वहाँ पूजा हो रही है, जो लंबे समय से टेंट में थे। ये प्रतिमा सन् 1949 से वहाँ है। ये प्रतिमा वहाँ कैसे आई थी, इसकी भी एक अलग कहानी है। अब राम मंदिर के गर्भगृह में नई मूर्ति की स्थापना की बात। इसके बाद ये सवाल उठ रहा है कि पुरानी मूर्ति का क्या होगा और नई मूर्ति कौन बनाएगा।

दिसंबर 1949 में बाबरी ढाँचे में प्रकट हुए थे रामलला

इन सभी सवालों के जवाब हम जानेंगे, लेकिन उससे पहले बात करते हैं कि रामलला की जो वर्तमान प्रतिमा है और जिसका दर्शन लोग पिछले 74 वर्षों से कर रहे हैं, वो वहाँ कैसे प्रकट हुई थी। वो 23 दिसंबर, 1949 का दिन था जब लोगों ने दरवाजा खोला तो पाया कि अंदर रामलला की मूर्ति रखी हुई थी। इससे पहले बाहर चबूतरे पर पूजा-पाठ होता था। इसके बाद वहाँ हजारों लोग जुटे थे और ‘भए प्रकट कृपाला, दींन दयाला, कौशल्या हितकारी’ से पूरी अयोध्या गूँज उठी थी।

इस घटना को ‘रामलला का प्राकट्य’ के नाम से जाना गया। उस समय केंद्र में जवाहरलालर नेहरू प्रधानमंत्री थे, जो खासे सेक्युलर थे। यूपी में भी केंद्र की तरह ही कॉन्ग्रेस की ही सरकार थी। ऐसे में अयोध्या में पुलिस ने अभयराम दास, सकल दास और सुदर्शन दास और 50-60 अन्य लोगों को ‘दंगाई’ बताते हुए FIR भी दर्ज की। 29 दिसंबर को बाबरी ढाँचे को विवादित संपत्ति का हिस्सा मान कर प्रशासन ने ताला जड़ दिया। जिस चबूतरे का यहाँ हमने जिक्र किया, वहाँ सैकड़ों वर्षों से भगवान् श्रीराम की पूजा होती आ रही थी।

1951 में श्रद्धालुओं की याचिका पर अदालत ने फैसला सुनाया कि मुक़दमे की समाप्ति तक वहाँ से मूर्तियों को न हटाया जाए। मुस्लिमों ने तब आरोप लगाया था कि किसी ने अंदर घुस कर चुपचाप मूर्ति रख दी है। जहाँ मूर्ति प्रकट हुई थी, वो बाबरी ढाँचे, जिसे मुस्लिम मस्जिद कहते थे, उसके मुख्य गुंबद के नीचे वाला कमरा था। उस दौरान गोरखपुर मंदिर के महंत दिग्विजयनाथ भी साधु-संतों के साथ कीर्तन के लिए अयोध्या में ही मौजूद थे।

राम मंदिर में नई मूर्ति को लेकर तैयारियाँ जोरों पर

हाल ही में पूरे देश ने वो दृश्य देखा, जब नेपाल से 6 करोड़ वर्ष पुरानी शिलाएँ सड़क मार्ग से अयोध्या पहुँचीं। रास्ते में जहाँ-जहाँ से शिला गुजरी, काफिला बनता गया। क्या बच्चे-बुजुर्ग और क्या महिलाएँ, शिला के दर्शन और पूजन के लिए भीड़ जुटती रही। 127 क्विंटल वजन के दो शालिग्राम शिलाओं को जनकपुर की गंडकी नाड से लाया गया। जनकपुर वही जगह है, जहाँ माँ सीता के पिता जनक राज करते थे। इन शिलाओं का धूमधाम से अयोध्या में स्वागत किया गया। हालाँकि, बाद में कई जगह की शिलाओं के परीक्षण के बाद कर्नाटक के शिलाओं के इस्तेमाल पर सहमति बनी।

फ़िलहाल भगवान राम की प्रतिमा के निर्माण के लिए तीन नाम सबसे ज्यादा चर्चा में चल रहे हैं – राम वनजी सुतार, अरुण योगीराज और वासुदेव कामथ। राम वनजी सुतार ने सरदार वल्लभ भाई पटेल की ‘स्टेचू ऑफ यूनिटी’ प्रतिमा का निर्माण किया है, जो गुजरात के केवडिया का मुख्य आकर्षण है। 99 साल के राम वनजी सुतार ने 1950 के दशक में अजंता-एलोरा की गुफाओं में मूर्तियों की मरम्मत में बड़ी भूमिका निभाई थी।

पद्म भूषण से सम्मानित राम वनजी सुतार को ‘आज का विश्वकर्मा’ भी कहा जाता है। इसके बाद आते हैं अरुण योगीराज पर। केदारनाथ धाम में जगद्गुरु शंकराचार्य की जो प्रतिमा स्थापित हुई है, उसका निर्माण उन्होंने ही किया है। उनके पूर्वज भी पत्थर की मूर्तियाँ तराशने में दक्ष थे और उन्हें ये कला विरासत में भी मिली है। इस प्रतिमा के लिएअरुण योगीराज ने 9 महीने रोज 14-15 घंटे की मेहनत की। 39 वर्षीय अरुण योगीराज के पूर्वजों को मैसूर राजघराने का संरक्षण प्राप्त था।

उन्होंने 23 मार्च को एक तस्वीर शेयर की थी, जिसमें उन्होंने अपनी बनाई भगवान श्रीराम की एक प्रतिमा का सूक्ष्म अवलोकन करते हुए समझाया था। प्रतिमा के हर एक भाग के बारे में उन्होंने बताया था, जिसे ‘Iconography’ भी कहते हैं। उनकी रिसर्च तगड़ी होती है। आते हैं तीसरे नाम पर, जो चर्चा में है। वासुदेव कामथ के बारे में मीडिया में आया कि उन्होंने जो तस्वीर बना कर दी, उससे ट्रस्ट के सदस्य खुश हैं। उन्होंने ट्रस्ट की एक बैठक में अपनी डिजाइन का प्रदर्शन किया था।

रामलला की मूर्ति पहले से, ऐसे में नई प्रतिमा क्यों? – जानें कारण

ऐसे में लोगों के मन में ये सवाल उठ रहे हैं कि जब प्रतिमा पहले से है ही, तो फिर नई प्रतिमा की क्या आवश्यकता है? हमने इस पूरे मामले पर कामेश्वर चौपाल से बातचीत की, जो ‘श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ के सदस्य हैं। कामेश्वर चौपल के बारे में बता दें कि वो बिहार विधान परिषद के सदस्य रह चुके हैं। उन्होंने ही अयोध्या में राम जन्मभूमि मंदिर के नींव की पहली ईंट 9 नवंबर, 1989 को रखी थी। वो ‘विश्व हिंदू परिषद (VHP)’ (दक्षिण बिहार) के प्रांतीय अध्यक्ष का दायित्व भी सँभाल रहे हैं।

नई प्रतिमा के संबंध में उन्होंने बताया कि अभी तक जितनी चर्चाएँ हुई हैं, वो ट्रस्ट के सामने रखी जाएँगी और ट्रस्ट द्वारा स्वीकृत किए जाने के बाद ही मीडिया को इस संबंध में सब कुछ बताया जाएगा। उन्होंने ये स्वीकारा कि जिन मूर्तिकारों के नाम पर चर्चा चल रही है, उनमें अरुण योगीराज का भी नाम है। उन्होंने कहा कि इस कार्य के लिए सीधे किसी एक व्यक्ति का चयन नहीं होता, बल्कि सभी को अपना प्रेजेंटेशन दिखाने का मौका दिया जाता है।

उन्होंने बताया कि पद्म भूषण से सम्मानित वासुदेव कामत का नाम भी सूची में शामिल है। इतना साफ़ है कि शास्त्रों में जैसा वर्णित है, उस हिसाब से रामलला की प्रतिमा तैयार करवाई जा रही है। कामेश्वर चौपाल ने बताया कि कई कलाकारों के नाम पर विचार चल रहा है। उन्होंने बताया कि इन सभी कलाकारों ने अपने-अपने चित्र प्रस्तुत किए हैं। ट्रस्ट की पूर्ण बैठक में जिस कलाकार पर सहमति बन जाएगी, मीडिया को सूचित कर दिया जाएगा।

दो मूर्तियों का कारण क्या है? क्या गर्भगृह में दोनों ही रहेंगी? इस सवाल के जवाब में कामेश्वर चौपाल कहते हैं कि अधिकतर मंदिरों में 2 प्रतिमाएँ होती हैं। उन्होंने समझाया कि इनमें से एक को ‘उत्सव मूर्ति’ के रूप में जाना जाता है तो दूसरी ‘प्राण प्रतिष्ठित मूर्ति’ कहलाती है। प्राण प्रतिष्ठित मूर्ति को कहीं खिसकाया नहीं जा सकता, वो वहीं पर विराजमान रहती हैं जहाँ उन्हें स्थापित किया जाता है। वहीं झाँकी या शोभा यात्रा जैसे आयोजनों में ‘उत्सव मूर्ति’ को निकाला जाता है।

‘श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ के सदस्य कामेश्वर चौपाल ने इसकी पुष्टि की है कि अयोध्या में बन रहे भव्य एवं दिव्य राम मंदिर में भी एक मूर्ति प्राण प्रतिष्ठित होगी और एक उत्सव के लिए। उन्होंने इसकी भी जानकारी दी कि जनवरी 2024 में प्राण प्रतिष्ठा का कार्य संपन्न कर लिया जाएगा। ऐसे में, साफ़ है कि वर्तमान में जो रामलला की मूर्ति है, उसे ही ‘उत्सव मूर्ति’ के रूप में विराजमान किया जाएगा। वो प्रतिमा छोटी भी है।

नवंबर 1989 में दलित कामेश्वर चौपाल ने ही रखी थी राम मंदिर की पहली ईंट

कामेश्वर चौपाल ने बताया कि बड़ी मूर्तियों को बहार नहीं निकाला जा सकता, इसीलिए उन्हें वहीं पर विराजमान रखा जाता है। प्रतिमा कैसे दिखेगी? – इस संबंध में मई के अंतिम सप्ताह में ट्रस्ट की बैठक में सब साफ़ हो जाएगा। उन्होंने कहा कि फ़िलहाल चर्चाएँ ही चल रही हैं, इसीलिए कुछ स्पष्ट बताना ठीक नहीं है। प्राण प्रतिष्ठा के संबंध में उन्होंने कहा कि फिलहाल इसकी तारीख़ तय नहीं की गई है। उन्होंने समझाया कि शादी-विवाह से लेकर अन्य सभी शुभ अवसरों पर विद्वान आचार्य बताते हैं कि कब मुहूर्त है।

इसी तरह, राम मंदिर के लिए भी आचार्य गण बैठेंगे और ये निर्णय लेंगे कि नई प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा के लिए कौन सी तारीख़ और कौन सा समय तय रहेगा। कामेश्वर चौपाल ने उदाहरण दिया कि कितना भी बड़ा घर बन कर तैयार हो जाए, पंडित द्वारा शुभ मुहूर्त बताने जाने के पश्चात ही घरवास का कार्यक्रम होता है। उन्होंने कहा कि आचार्यों से विमर्श कर के शुभ मुहूर्त में राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा का समय तय किया जाएगा। ये तारीख़ जनवरी 2024 की ही होगी, इस पर फ़िलहाल सहमति बन गई है।

साबरमती जेल से गुजरात में भी एम्पायर खड़ा करने का अतीक अहमद ने बनाया था प्लान, कपड़ा मिल की जमीन पर थी नजर: विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए सीट भी चुनी थी

माफिया अतीक अहमद को लेकर लगभग हर रोज नया खुलासा हो रहा है। गुजरात के साबरमती जेल में रहने के दौरान अतीक फोन का इस्तेमाल किया करता था। उमेश पाल की हत्या की साजिश भी साबरमती जेल से ही रची गई थी। हत्या की साजिश के अलावा अतीक ने मोबाइल फोन का इस्तेमाल किन कामों के लिए किया, अब उसके बारे में भी जानकारी सामने आ रही है। पता चला है कि अतीक की नजर अहमदाबाद में एक जमीन पर थी। वह अपने साथियों संग अहमदाबाद में जमीन खरीदने की फिराक में था। इतना ही नहीं वह अहमदाबाद की एक सीट से विधानसभा चुनाव भी लड़ना चाहता था।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार जून 2019 से साबरमती सेंट्रल जेल में बंद अतीक अहमद अलग-अलग मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल करता था। सिम कार्ड उपलब्ध कराने और बदलने में बापूनगर के रहने वाले अल्ताफ पठान ने अतीक की काफी मदद की थी। दरअसल, अल्ताफ पुलिस का मुखबिर था और उसने एक बार AIMIM और दूसरी बार समाजवादी पार्टी की टिकट पर विधानसभा चुनाव भी लड़ा था। यह वही अल्ताफ है, जिसने गुजरात विधानसभा चुनाव 2022 के दौरान वोटर्स से रोते हुए वोट देने की अपील की थी। उसका यह वीडियो खूब वायरल हुआ था। वह समाजवादी पार्टी की टिकट पर चुनाव लड़ रहा था।

अतीक अहमद का अहमदाबाद कनेक्शन सामने आने के साथ ही खुलासा हुआ है कि अतीक अहमद बापूनगर स्थित कपड़ा मिल की जमीन खरीदना चाहता था। इसके लिए अतीक ने अल्ताफ पठान, एक अज्ञात नेता और रियल स्टेट कारोबारियों के साथ बात की थी। दावा यह भी किया जा रहा है कि अतीक के एक अन्य गुर्गे मेहराज ने उसे जेल में ऐश-ओ-आराम की कई चीजें उपलब्ध कराई थीं।

रिपोर्टों के अनुसार अतीक अहमद गुजरात में विधानसभा चुनाव लड़ना चाहता था। इसके लिए उसने एक सीनियर नेता से बापूनगर सीट के लिए टिकट भी माँगी थी। सूत्रों के हवाले से बताया जा रहा है कि अतीक और अशरफ की हत्या से पहले ही पठान दुबई भाग गया था।

जिस दलित DM की हुई हत्या, उनकी विधवा ने बताया आनंद मोहन की रिहाई का जाति कनेक्शन: छोटन शुक्ला का ‘बदला’, मार डाले गए कृष्णैया

बिहार सरकार ने 27 अपराधियों को रिहा करने की एक सूची जारी की है। इसमें एक नाम पूर्व सांसद आनंद मोहन सिंह का भी है। वे गोपालगंज के डीएम रहे जी कृष्णैया की हत्या में आजीवन कारावास की सजा काट रहे थे। उनकी रिहाई के लिए राज्य सरकार ने 10 अप्रैल 2023 को को जेल नियमावली, 2012 के नियम 481 में संशोधन किया था। आनंद मोहन के बेटे चेतन बिहार की महागठबंधन सरकार के साझीदार राजद के विधायक हैं।

आनंद मोहन की रिहाई पर जी कृष्णैया की विधवा उमा देवी ने निराशा जताई है। उन्होंने कहा है, “मुझे अच्छा नहीं लग रहा है। उसने एक ईमानदार अधिकारी को मारा था। उसको जैसी सजा मिलनी चाहिए, वो नहीं मिली। उसकी रिहाई का सबको विरोध करना चाहिए।” साथ ही उन्होंने इस फैसले के लिए बिहार की जातीय राजनीति को भी जिम्मेदार बताया है। उन्होंने कहा, “बिहार में जाति की राजनीति है। वह (आनंद मोहन) राजपूत है। राजपूतों का वोट पाने के लिए उसे जेल से छोड़ा जा रहा है। यदि ऐसा नहीं होता तो एक अपराधी को बाहर लाने की क्या जरूरत थी।”

क्यों हुई थी जी कृष्णैया की हत्या

आनंद मोहन और जी कृष्णैया की हत्या की कहानी जानने से पहले आपको गैंगस्टर कौशलेंद्र शुक्ला उर्फ छोटन शुक्ला के बारे में जानना चाहिए। छोटन शुक्ला को इस दुनिया से गए 28 साल से भी अधिक समय हो चुका है। उसकी हत्या किसने की यह आज भी कोई नहीं जानता

दरअसल, 4 दिसंबर 1994 की रात मुजफ्फरपुर में छोटन शुक्ला की गोलियों से भून कर हत्या कर दी गई थी। छोटन के साथ उसकी कार में सवाल 4 अन्य लोग भी मारे गए थे। माना जाता है कि छोटन शुक्ला की हत्या लालू यादव और आनंद मोहन के बीच छिड़ी जंग की वजह से हुई थी। इसलिए छोटन की हत्या का बिहार की राजनीति पर बहुत बड़ा असर हुआ। आनंद मोहन की BPP (बिहार पीपुल्स पार्टी) से छोटन शुक्ला केसरिया से विधानसभा चुनाव भी लड़ने वाला था।

छोटन शुक्ला की हत्या के अगले ही दिन यानी 5 दिसंबर 1994 को लोग मुजफ्फरपुर की सड़कों पर उतर आए। उसके समर्थक शव के साथ ही प्रदर्शन कर रहे थे। इस दौरान मुजफ्फरपुर के रास्ते पटना से गोपालगंज जा रहे थे दलित अधिकारी जी. कृष्णैया। वे उस समय गोपालगंज के कलेक्टर होते थे। भीड़ ने मुजफ्फरपुर के खबड़ा गाँव में उनकी गाड़ी पर हमला कर दिया। पहले भीड़ ने कृष्णैया को कार से बाहर निकाला। फिर उनकी जमकर पिटाई की। इसके बाद कथित तौर पर भुटकुन शुक्ला ने गोली मारकर उनके जिंदा रहने की संभावना पर विराम लगा दिया।

छोटन शुक्ला की शव यात्रा का नेतृत्व आनंद मोहन, उनकी पत्नी और वैशाली की पूर्व सांसद लवली आनंद, छोटन शुक्ला का भाई और विधायक मुन्ना शुक्ला, विक्रमगंज का पूर्व विधायक अखलाक अहमद, शशिशेखर और अरुण कुमार सिन्हा कर रहे थे। इन लोगों पर डीएम की हत्या के लिए भीड़ को उकसाने का आरोप था। हाजीपुर पहुँचने से पहले आनंद मोहन और उनकी पत्नी लवली आनंद को गिरफ्तार कर लिया गया।

कलेक्टर की हत्या के आरोप में पटना की निचली अदालत ने साल 2007 में आनंद मोहन को फाँसी की सजा सुनाई थी। लेकिन इसके बाद पटना हाई कोर्ट ने उनकी सजा को उम्र कैद में बदल दिया। उम्र कैद काटने की सजा होने के बाद भी आनंद मोहन पेरोल पर जेल से बाहर आते रहे हैं। अभी भी वे पेरोल पर ही बाहर हैं।

अब जेल से रिहाई पर बिहार सरकार के फैसले को लेकर आनंद मोहन का जवाब भी सुन लीजिए। न्यूज एजेंसी एएनआई के पत्रकार ने उनसे पूछा कि जो पहले वाले आनंद मोहन थे और बाहर निकलने वाले आनंद मोहन में क्या कोई बदलाव देखने को मिलेगा। आनंद मोहन का जवाब था, “देखिए नेचर और सिग्नेचर…”

16 सेकेंड में अतीक-अशरफ को मारी 34 गोली, मूसेवाला मर्डर का Video देखकर आए थे शूटर: असद के अकाउंट से पैसा निकालने वाला जफर पकड़ा गया

यूपी पुलिस ने माफिया अतीक अहमद के गुर्गे आतिन जफर को गिरफ्तार किया है। आतिन वही शख्स है, जिसने अतीक के बेटे असद के अकाउंट से पैसे निकाले थे। पैसा निकालने के दौरान एटीएम में लगे सीसीटीवी कैमरे में उसकी तस्वीर कैद हो गई थी। पुलिस उससे पूछताछ कर रही है। दूसरी तरफ पता चला है कि माफिया अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की हत्या करने से पहले तीनों शूटर्स ने सिद्धू मूसेवाला मर्डर के वीडियो देखे थे। इसके बाद शूटर्स ने सिर्फ 16 सेकेंड में अतीक और अशरफ पर 34 गोलियाँ दाग दी थी।

असद को बचाने की साजिश जो नाकाम रही

उमेश पाल हत्याकांड में असद का नाम न आए इसकी पूरी प्लानिंग की गई थी। असद का स्मार्टफोन और एटीएम कार्ड आतिन जफर को दे दिया गया था। तय हुआ कि जिस समय प्रयागराज में उमेश पाल पर हमला किया जाएगा, उस वक्त आतिन लखनऊ में असद के एटीएम कार्ड से रुपए निकालेगा। इससे बाद में यह साबित हो सकेगा कि उमेश पाल की हत्या के समय असद मौके पर मौजूद नहीं था। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार उमेश पाल की हत्या वाले दिन असद को गाड़ी से न निकलने की सलाह दी गई थी। कहा गया था कि यदि गाड़ी से निकलना पड़े तो मंकी कैप लगाकर निकले।

अपना नाम कमाना चाहता था असद

उमेश पाल हत्याकांड के समय के वायरल हुए वीडियो में असद गोली चलाता नजर आ रहा है। इस दौरान उसने मंकी कैप भी नहीं पहनी हुई थी। पुलिस की जाँच में सामने आया है कि असद क्राइम की दुनिया में अपना नाम कमाना चाहता था। पिता अतीक और चाचा अशरफ की नजर में वह भी अपने आप को साबित करना चाहता था। दावा है कि इसके लिए उसे गुड्डू मुस्लिम ने उकसाया था। उमेश पाल की हत्या के बाद असद फरार हो गया था। 13 अप्रैल को झाँसी में शूटर गुलाम के साथ वह एनकाउंटर में वह ढेर हो गया था।

16 सेकेंड में अतीक-अशरफ को दागी 34 गोलियाँ

असद के एनकाउंटर के 2 ही दिन बाद यानी 15 अप्रैल 2023 की रात तीन शूटर्स लवलेश तिवारी, सनी सिंह और अरुण मौर्य ने अतीक अहमद और अशरफ अहमद को गोलियों से भून दिया था। रिपोर्टों के मुताबिक हत्याकांड वाली जगह पर लगे सीसीटीवी कैमरों की जाँच से पता चला है कि तीनों आरोपितों ने 16 सेकेंड में 34 गोलियाँ फायर की थीं। एसआईटी के अनुसार देसी पिस्टल से कई राउंड फायरिंग के बाद पिस्टल में गोली फँस गई थी। जिगाना पिस्टल से फायरिंग जारी रही। जाँच में पता चला है कि शूटर्स गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई से प्रभावित थे। तीनों ने सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड की खबरें और वीडियो कई बार देखी थीं।

बता दें कि जितेंद्र गोगी नाम के गैंगस्टर ने सनी को जिगाना पिस्टल दी थी। उसने सनी को अपने दुश्मन टिल्लू ताजपुरिया को खत्म करने का टारगेट दिया था। जितेंद्र गोगी की सितंबर 2021 में दिल्ली के रोहिणी कोर्ट में गोली मार कर हत्या कर दी गई थी।

शाइस्ता को उसके ही परिवार वालों ने उतार दिया मौत के घाट, बृजेश से करती थी प्यार: पुलिस ने भी माना ये प्रेम-प्रसंग का मामला, अब्बा बता रहे आत्महत्या

गुजरात के सूरत से सटे नवसारी से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। यहाँ शाइस्ता और बृजेश एक-दूसरे से बेहद प्यार करते थे। दोनों पाँच सालों से रिलेशनशिप में थे। लेकिन, मजहब के कारण इस प्रेम कहानी का ऐसा खौफनाक अंत कर दिया गया। बृजेश का आरोप है कि शाइस्ता को उसके परिवार वालों ने पीट-पीटकर मार डाला और फिर उसे दफना दिया। उसने अपनी प्रेमिका को 20 अप्रैल, 2023 को आखिरी बार देखा था। बृजेश ने पुलिस थाने में इसकी शिकायत दर्ज कराई है और शाइस्ता के पोस्टमार्टम की माँग की है।

इस पूरी घटना में कुछ कुख्यात आरोपितों के शामिल होने की जानकारी भी सामने आई है। इनमें से एक जुआ का अड्डा भी चलाता है। ब्रिजेश ने पुलिस को दी शिकायत में मोहम्मद कामू शेख, सादिक मोहम्मद शेख, रमजान सिंधी, सिद्दीकी शेख और शोएब शेख पर शाइस्ता की हत्या का आरोप लगाया गया है। साथ ही खुद की जान का खतरा बताते हुए पुलिस से कार्रवाई की माँग की है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, बृजेश नवसारी के अब्रामा गाँव का रहने वाला है। शाइस्ता भी इसी गाँव में रहती थी। बृजेश का कहना है कि 20 अप्रैल को उसकी शाइस्ता से मुलाकात हुई थी। उसे नहीं पता था कि यह उसकी आखिरी मुलाक़ात होगी। वह उससे मिलने के बाद अपने घर चली गई। बीते दिनों जब दोनों के रिश्ते की भनक शाइस्ता के परिवारवालों को लगी तो वो बृजेश के घर पहुँचे और उसे पीटने की धमकी दी। शाइस्ता के परिवार वालों ने ब्रजेश से कहा कि वह उनकी लड़की को उसे सौंप दे।

इसी बीच वलसाड पहुँची शाइस्ता का फोन बृजेश के पास आया। उसने कहा कि वह उसे आकर ले जाए। बृजेश शाइस्ता को लेने के लिए जब वलसाड गया तो शाइस्ता के परिवार ने पुलिस में शिकायत नहीं करने का हवाला देते हुए उससे कहा कि वह उन्हें शाइस्ता को झील के पास सौंप दे। इसके बाद बृजेश ने अपनी प्रेमिका को तलवाड़ा चौक के पास उसके परिजनों को सौंप दिया फिर सादिक नाम के एक व्यक्ति ने लड़की को अपनी कार में बिठा लिया। इस दौरान शाइस्ता के घर वालों ने बृजेश को भरोसा दिलाया कि वे पुलिस में शिकायत दर्ज नहीं कराएँगे।

‘नवभारत टाइम्स’ ने सूरत के आईजी पीयूष पटेल के हवाले से अपनी रिपोर्ट में बताया, “यह घटना प्रेम प्रसंग की है। शुरुआती जाँच में लड़की के अब्बा ने सुसाइड की बात कही है। अब्बा का दावा है कि शाइस्ता ने एक सुसाइड नोट भी छोड़ा है। पुलिस सभी पहलुओं से इस मामले की जाँच कर रही है।”

मातृ सेवा का संकल्प ऐसा, कर ली 67412 किलोमीटर की यात्रा: नौकरी छोड़ी, दिवंगत पिता से मिला स्कूटर उठाया और माँ को मंदिर-मंदिर दर्शन करा रहा बेटा

यह यात्रा एक बेटे के मातृ सेवा संकल्प की यात्रा है। 2018 से चल रही इस यात्रा में बेटे ने माँ को लेकर हजारों किलोमीटर की दूरी नापी है। देश के कई मंदिर माँ-बेटे की इस यात्रा के पड़ाव रहे हैं। यह यात्रा है कर्नाटक के मैसूर के दक्षिणामूर्ति कृष्ण कुमार (Dakshinamurthy Krishna Kumar) और उनकी माँ की।

44 वर्षीय कृष्ण कुमार सॉफ्टवेयर इंजीनियर रहे हैं। लेकिन माँ की इच्छा पूरी करने के लिए मोटी कमाई वाली नौकरी छोड़ दी। नौकरी छोड़ने के बाद उन्होंने दिवंगत पिता से उपहार में मिला स्कूटर उठाया और माँ को देश के सभी मंदिरों का दर्शन कराने की यात्रा पर निकल पड़े। उनकी यह यात्रा जनवरी 2018 में शुरू हुई थी। इस दौरान उन्होंने स्कूटर से कन्याकुमारी से लेकर कश्मीर तक कई मंदिरों के दर्शन किए।

वह अपनी माँ के साथ स्कूटर पर भूटान, म्यांमार और नेपाल भी जा चुके हैं। 2015 में उनके पिता का निधन हो गया था। अब वह इस स्कूटर को ही पिता का प्रतिरूप मानते हैं। सोशल मीडिया पर बीते कई सालों से उनके कई वीडियो वायरल हुए हैं, जिनमें वह अपनी माँ के साथ स्कूटर से यात्रा करते हुए नजर आए।

अक्टूबर 2019 में भी उनका एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें उन्हें अरुणाचल प्रदेश में देखा गया था। इसमें उन्होंने अपनी माँ को पूरे भारत के मंदिरों के दर्शन कराने का कारण बताया था। वीडियो में वह कहते हैं, “मेरा नाम डी कृष्ण कुमार है। मेरी माता जी का नाम चूड़ारत्ना है। हम कर्नाटक के मैसूर में रहते हैं। ये मातृ सेवा संकल्प यात्रा है। पहले हम 10 लोगों के संयुक्त परिवार में रहते थे। उस समय मेरी माँ सुबह से लेकर शाम तक पूरे घर का काम करती थीं। रसोई पकाना, कपड़े धोना, बर्तन साफ करना और जमीन पोछना। इन्हीं कामों में उनका समय बीत गया। वह कभी घर से बाहर नहीं निकलीं। चार साल पहले (2015) मेरे पिता का निधन हो गया। उस समय मैं मंगलोर में काम करता था।”

अपनी बात को जारी रखते हुए वे आगे कहते हैं, “एक दिन बातों-बातों में मैंने माँ से मंदिरों के बारे में पूछा और कहा कि क्या आप यहाँ गई हैं? इस पर उन्होंने कहा कि मैं तो आज तक अपने घर के पास वाले मंदिर तक नहीं गई। यह सुनकर मुझे बहुत दुख हुआ कि मुझे जन्म देने वाली माँ अभी तक घर के पास वाले मंदिर के दर्शन भी नहीं कर पाई हैं। उस समय मैंने दृढ़ संकल्प लिया और कसम खाई कि माँ मैं आपको घर के पास ही नहीं, बल्कि पूरे भारत के मंदिरों के दर्शन करवाऊँगा। 16 जनवरी 2018 को मैंने मातृ सेवा संकल्प यात्रा शुरू की, वो भी अपने 20 साल पुराने स्कूटर से। इस स्कूटर को मेरे पिता जी ने मुझे उपहारस्वरूप दिया था। मुझे ऐसे लगता है कि जैसे स्कूटर के रूप में मेरे पिता जी हमारे साथ-साथ चल रहे हैं। मैं उनकी एक ही संतान हूँ। ऐसा लगता है कि जैसे हम तीनों साथ में तीर्थ यात्रा कर रहे हैं।”

एएनआई से बात करते हुए कुमार ने कहा, “मैंने अपनी माँ के साथ स्कूटर पर 67,412 किलोमीटर की दूरी तय की है। मेरे पिता की सरकारी नौकरी थी। 2015 में उनका निधन होने के बाद मैं अपनी माँ के साथ बेंगलुरु चला गया और एक कंप्यूटर इंजीनियर के रूप में काम किया। मैंने शादी नहीं करने और अपनी माँ के साथ रहने का फैसला किया है।” वहीं, अपने बेटे दक्षिणामूर्ति के बारे में बात करते हुए 73 साल की चूड़ारत्ना कहती हैं, “मेरे बेटे ने स्कूटर से मुझे पूरा देश घुमाया है। मेरा बेटा आज का श्रवण कुमार है। भगवान सबको ऐसा बेटा दे, जो अपने माता-पिता की सेवा करे। मैं इस यात्रा से बहुत खुश हूँ और मेरी तबीयत भी बिल्कुल ठीक है।”

‘हमें बदनाम करने के लिए बनाया विज्ञापन’: सूटकेस निर्माता VIP ने ‘लव जिहाद’ वाले वीडियो से झाड़ा पल्ला, मुस्लिम पुरुष को हिन्दू महिला बिंदी हटाते हुए दिखाया गया था

बैग और सूटकेस निर्माता कंपनी वीआईपी इंडस्ट्रीज के ब्रांड स्काई बैग का विज्ञापन सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। विज्ञापन में मलयाली एक्ट्रेस सुमी राशिक (Sumi Rashik) और एक्टर विष्णु के विजयन (Vishnu K Vijayan) हैं। विष्णु इसमें मुस्लिम पुरुष और सुमी एक हिंदू महिला बनी हैं। मुस्लिम पुरुष वीडियो में हिन्दू महिला के पहनावे में अपने हिसाब से बदलाव करते हुए दिखाई दे रहा है। उसे महिला के माथे से बिंदी हटाते हुए भी देखा जा सकता है।

वायरल विज्ञापन के अंत में स्काई बैग के कई ट्रॉली बैग्स को भी दिखाया गया है, जिस पर ‘स्काई बैग मूव इन स्टाइल’ लिखा हुआ है।

सोशल मीडिया पर कुछ लोगों द्वारा VIP के इस ऐड के जरिए ‘लव जिहाद’ को बढ़ावा देने का आरोप लगाया गया है। वहीं बैग कंपनी VIP ने इस वायरल विज्ञापन का खंडन किया है और इसे लेकर केरल और मुंबई पुलिस में मामला भी दर्ज कराया है। उन्होंने वीआईपी विज्ञापन होने का दावा करने वाले इस वीडियो को पूरी तरह से फेक और दुर्भावनापूर्ण बताया है।

कंपनी ने इस संबंध में सोमवार (24 अप्रैल, 2023) को बयान जारी कर कहा, “फेक वीडियो के निर्माता ने हमारी कंपनी, व्यवसाय और ब्रांड नाम वीआईपी और स्काई बैग की छवि को धूमिल करने के लिए वीआईपी इंडस्ट्रीज व स्काई बैग ब्रांड नामों का गैर-कानूनी रूप से इस्तेमाल किया है। हमारी कंपनी का फर्जी वीडियो जारी करने वाले से कोई संबंध नहीं है।”

कंपनी ने यह भी कहा, “हम अपने सभी स्टेकहोल्डर्स को भरोसा दिलाना चाहते हैं कि हमने यह वीडियो जारी नहीं किया है और इस वीडियो को जारी करने वाले व्यक्ति के साथ हमारा कोई संबंध नहीं है। एक कंपनी के रूप में वीआईपी इंडस्ट्रीज ने फर्जी विज्ञापन के मुद्दे को गंभीरता से लिया है। हमने VIP ब्रांड नामों (VIP और स्काई बैग्स) के गलत इस्तेमाल के लिए मुंबई और केरल की पुलिस में मामला भी दर्ज कराया है।” इसके अलावा VIP ने Facebook और Instagram के मालिक से वीडियो को तत्काल प्रभाव से हटाने का भी अनुरोध किया है।

बता दें कि मलयाली एक्ट्रेस सुमी राशिक और एक्टर विष्णु के विजयन ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर ईद के मौके पर इस विज्ञापन को शेयर किया था।

मनपसंद मछली खाने के लिए खुदवा दी तालाब, बैडमिंटन खेलने के लिए आते थे अधिकारी: कभी गाजीपुर जेल में दरबार लगाता था माफिया मुख्तार अंसारी

माफिया अतीक अहमद की हत्या के बाद से मुख्तार अंसारी के भी खौफ में होने की बात कही जा रही है। बीजेपी विधायक रहे कृष्णानंद राय की हत्या से जुड़े मामले में उसके खिलाफ 29 अप्रैल 2023 को गाजीपुर एमपी-एमएलए कोर्ट फैसला सुनाएगी। लेकिन कहा जा रहा है कि मुख्तार को गाजीपुर कोर्ट आने से डर लग रहा है। वह बेचैन है। इस समय मुख्तार यूपी की ही बांदा जेल में बंद है।

आज मुख्तार अंसारी UP के एक जिले से दूसरे जिले तक जाने में खौफ खा रहा है। लेकिन एक समय ऐसा था जब उसके आतंक से पूरा पूर्वांचल खौफ खाता था। जेल में रहते हुए भी वह आलीशान जिंदगी गुजारता था। नियम-कायदे भी उसके हिसाब से होते थे। राय की हत्या के समय उत्तर प्रदेश पुलिस में आईजी लॉ एंड ऑर्डर रहे बृजलाल के अनुसार, “गाजीपुर जेल मुख्तार अंसारी का घर हुआ करती थी। मनपसंद मछली खाने के लिए उसने जेल में ही तालाब खुदवा लिया था। शाम को जेल के भीतर ही उसका दरबार लगता था। जेल में उसने बैडमिंटन कोर्ट बना रखा था। बड़े-बड़े अधिकारी उसके साथ खेलने आते थे।”

केवल गाजीपुर जेल ही नहीं, मुख्तार की यूपी की जिस जेल में रहता वहां उसका ही कानून चलता था। उससे लोग बेरोकटोक जेल में मिलने आते थे। ऐसा ही एक वाकया लखनऊ जेल का है। शिव कुमार अवस्थी 2002-2003 में एक साल इस जेल के जेलर रहे थे। एक बार मुख्तार से मुलाकात करने आए किसी व्यक्ति को उन्होंने रोक दिया तो माफिया ने उन पर ही बंदूक ही तान दी थी। इस मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मुख्तार को 7 साल की सजा सुनाई थी। जनवरी 2023 में सर्वोच्च न्यायालय ने इस पर रोक लगा दी थी। अवस्थी बताते हैं कि जेल में रहते हुए भी मुख्तार विरोधियों की हत्या करवा देता था।

पंजाब के जेल में भी कर रहा था मौज

उत्तर प्रदेश में वर्ष 2017 में भाजपा की सरकार बनी तो माफियाओं और गैंगस्टर्स के खिलाफ कार्रवाई होने लगी। जेल में मिलने वाली सुविधाओं पर नकेल कसा जाने लगा। इस बीच मुख्तार अंसारी पर पंजाब में रंगदारी का एक मामला दर्ज किया गया था और इसी आधार पर उसे पंजाब की जेल में बंद कर दिया गया। पंजाब जेल में भी मुख्तार मौज उड़ा रहा था। इसका खुलासा पंजाब के मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने किया था। उन्होंने बताया था कि फर्जी FIR दर्ज कर मुख्तार को 2 साल 3 महीने पंजाब की जेल में रखा गया। इस दौरान उसने बेल के लिए भी कोई अर्जी नहीं दी।

बैंस ने यह भी बताया था कि रोपड़ जेल में मुख्तार अपनी बीवी आफशाँ अंसारी के रहता था और उसे VIP ट्रीटमेंट दिया जाता था। UP सरकार ने 26 बार प्रोडक्शन वारंट निकाले, लेकिन उसे पंजाब से उत्तर प्रदेश नहीं भेजा गया। हालाँकि बाद में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर अप्रैल 2021 में उसे पंजाब से उत्तर प्रदेश पुलिस ले गई थी।

‘जो भी मोदी भक्त होगा, मारा जाएगा’: कॉन्ग्रेस नेता उदित राज ने खुले मंच से लोगों को हिंसा के लिए भड़काया, मनरेगा मजदूरों के बहाने दिखाई घृणा

अक्सर विवादित बयानों के कारण सुर्ख़ियों में रहने वाले कॉन्ग्रेस नेता उदित राज ने एक बार फिर से भड़काऊ बातें की हैं। पार्टी ने उन्हें नवंबर 2023 में ‘अखिल भारतीय असंगठित कामगार और कर्मचारी कॉन्ग्रेस’ का अध्यक्ष बनाया था। उदित राज ने ट्विटर पर अपनी एक तस्वीर शेयर की, जिसमें वो भाषण देते हुए दिख रहे हैं। साथ ही कैप्शन में लिखा, “जो भी मोदी भक्त होगा, मारा जाएगा।” लोग उनके इस बयान की आलोचना कर रहे हैं।

2014 में भाजपा के ही टिकट पर नॉर्थ-वेस्ट दिल्ली से सांसद चुने गए उदित राज का 2019 में टिकट कट गया, जिसके बाद उन्होंने कॉन्ग्रेस का दामन थाम लिया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ उलूल-जलूल बकने लगे। भाजपा ने उनका टिकट काट कर गायक हंस राज हंस को उम्मीदवार बनाया था, जिन्हें जीत भी मिली। इसके बाद वो उदित राज भाजपा के खिलाफ हर एक विरोध प्रदर्शन का समर्थन करते हैं और भड़काऊ बयान देते हैं।

हालिया बयान उन्होंने मनरेगा मजदूरों के समर्थन में आयोजित एक विरोध प्रदर्शन में दिया है। उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार पर भी टिप्पणी करते हुए कहा है कि यूपी न तो दंगा मुक्त हुआ है और न ही गुंडा मुक्त हुआ है। माफिया अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की हत्या पर उदित राज ने यूपी सरकार को भला-बुरा कहा था। हाल ही में वो हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला पहुँचे थे और वहाँ भी मोदी सरकार के खिलाफ बयान दिया था।

जंतर-मंतर पर आयोजित हालिया प्रदर्शन में उन्होंने ‘मनरेगा मजदूर भूखा है, मोदी का वादा झूठा है’ का नारा भी दिया। बता दें कि सरकार पर मनरेगा बजट में कटौती का आरोप लगाते हुए ये विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है। कई कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए। बैनर पर ‘मनरेगा बचाओ, ग्रामीण भारत बचाओ’ लिखा हुआ था। हाल ही में उदित राज में फ़्रांस और इजरायल में दंगों के हवाला देते हुए भारत में भी ऐसा होने का डर दिखाया था।