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‘बंगाल पुलिस ने 33 साल के युवा की गोली मारकर हत्या की’: शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को घेरा, कहा- नीरो की तरह मौज में हैं CM

पश्चिम बंगाल (West Bengal) के नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी (Suvendu Adhikari) ने ममता बनर्जी (CM Mamata Banerjee) की सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका आरोप है कि बंगाल पुलिस ने उत्तर दिनाजपुर में मृत्युंजय वर्मन नाम के शख्स को गोली मार दी है। उन्होंने ममता सरकार पर हमला बोला।

भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने ट्वीट करके कहा कि पुलिस की टीम बीजेपी कार्यकर्ता विष्णु वर्मन की तलाश में कालियागंज पहुँची थी, लेकिन विष्णु अपने घर पर नहीं मिले। उन्होंने आरोप लगाया कि बंगाल पुलिस ने मृत्युंजय को गोली मार दी। इससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने ट्विटर पर लिखा, “कालियागंज में ममता की पुलिस ने 33 साल के राजबंशी युवक की बेरहमी से हत्या कर दी।” शुभेंदु ने इसके बाद घटना की जानकारी देते हुए लिखा, “बंगाल की पुलिस 26 और 27 अप्रैल 2023 की रात करीब 2.30 बजे कलियागंज स्थित बीजेपी पंचायत समिति सदस्य विष्णु वर्मन के घर पर छापा मारने पहुँची। विष्णु घर पर नहीं मिले। पुलिस ने मृत्युंजय वर्मन नाम के राजबंशी युवक की गोली मारकर हत्या कर दी।”

शुभेंदु अधिकारी के ट्वीट का स्क्रीन शॉट

शुभेंदु के अनुसार, मृतक युवक स्थानीय रविंद्रनाथ वर्मन का 33 वर्षीय बेटा था। भाजपा नेता ने कहा कि राज्य में अत्याचार चरम पर है। राज्य जल रहा है और डरे हुए लोगों में अशांति फैल रही है। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी सम्राट नीरो की तरह मौज में हैं। बता दें कि नीरो रोम का एक क्रूर सम्राट था। कहते हैं कि जब रोम जल रहा था तो नीरो वाद्ययंत्र बजा रहा था।

नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी पर आरोप लगाया कि उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कलियागंज के लोगों के खिलाफ युद्ध छेड़ने की बात कही थी। कुछ ही घंटों बाद पुलिस ने ममता के आदेश का पालन कर दिया। उन्होंने कहा कि राज्य पुलिस द्वारा की गई इस निर्मम हत्या की जिम्मेदारी ममता बनर्जी को लेनी चाहिए। शुभेंदु अधिकारी ने आम लोगों से हिंसा और खून-खराबे के खिलाफ लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाने की अपील की।

क्या है कालीगंज का मामला?

बता दें कि उत्तर दिनाजपुर के कलियागंज में पिछले दिनों एक स्कूली छात्रा की दुष्कर्म के बाद हत्या कर दी गई थी। इस घटना के बाद स्थानीय लोगों ने अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई की माँग करते हुए प्रदर्शन किया। पुलिस ने प्रदर्शन को रोकने की कोशिश की जिससे पुलिस और स्थानीय लोगों में झड़प हो गई।

पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज भी किया था। कुछ ऐसे वीडियो भी सामने आए जिसमें स्थानीय लोग पुलिस की पिटाई करते दिखे। इसके बाद राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कह दिया कि भाजपा बिहार से गुंडों को बुला कर ये सब करवा रही है। उन्होंने कहा था कि राज्य में सोची समझी साजिश के तहत ये सब किया जा रहा है।

तिलक हटाओ, हिंदी मत बोलो, बुर्का मतलब महिला सशक्तिकरण… एआर रहमान के परिवार को कितना जानते हैं आप

बॉलीवुड के मशहूर गायक और म्यूजिक कंपोजर एआर रहमान (A R Rahman) को हाल ही में चेन्नई में हुए एक अवॉर्ड शो के दौरान बीवी सायरा बानो (Saira Banu) से ‘हिंदी में मत बोलो, तमिल में बोलो’ कहते हुए सुना गया। सोशल मीडिया पर उनका वीडियो वायरल होने के बाद से सायरा बानो चर्चा में हैं। एआर रहमान और सायरा बानो का निकाह 1995 में हुआ था। लेकिन संगीतकार की अम्मी करीमा बेगम ने अपने बेटे के लिए सायरा को नहीं, बल्कि उनकी छोटी बहन मेहर को पसंद किया था।

बानो के अब्बा कारोबारी रहे हैं। उन्होंने रहमान की अम्मी से साफ कह दिया था कि वह पहले अपनी बड़ी बेटी का निकाह करेंगे और फिर छोटी के बारे में सोचेंगे। तब जाकर उन्होंने सायरा को अपनी बहू बनाया। सायरा की बहन मेहर ने साउथ के मशहूर एक्टर राशिन रहमान (Rashin Rahman) के साथ निकाह किया है। सायरा और एआर रहमान के एक बेटा और दो बेटियाँ हैं। बेटे का नाम एआर आमीन है। वह प्लेबैक सिंगर हैं। बड़ी बेटी खातिजा है, जो अपने अब्बा की तरह संगीतकार हैं। छोटी बेटी का नाम रहीमा है।

खातिजा बुर्के को लेकर विवादों में रह चुकी है। बुर्के में उनकी एक तस्वीर पोस्ट कर प्रख्यात लेखिका तस्लीमा नसरीन ने खातिजा पर तंज कसा था। तस्लीमा ने 11 फरवरी 2020 को ट्वीट किया था, “मुझे एआर रहमान का संगीत बहुत पसंद है, लेकिन जब भी उनकी प्यारी बेटी को मैं देखती हूँ तो मेरा दम घुटने लगता है। यह जानकर निराशा हुई कि एक शिक्षित महिला का भी ‘सांस्कृतिक परिवार’ में बड़ी आसानी से ब्रेनवॉश किया जा सकता है।”

तस्लीमा नसरीन के ट्वीट पर भारी बवाल हुआ था। खातिजा ने बुर्के का बचाव करते हुए कहा था कि वह अपनी स्वेच्छा से बुर्का पहनती हैं। उन्होंने यहाँ तक कह दिया था कि इससे लड़कियाँ सशक्त होती हैं। वहीं अपनी बेटी के बुर्के का बचाव करते हुए एआर रहमान ने कहा था कि अगर संभव होता तो वे भी बुर्का पहन लेते। इसे उन्होंने महिलाओं के लिए अच्छी चीज बताई थी। खातिजा रहमान (Khatija Rahman) ने ऑडियो इंजीनियर रियासदीन शेख मोहम्मद से 5 मई 2022 को निकाह किया था।

बता दें कि तमिल गीतकार पिरईसूदन (Piraisoodan) ने 2020 में एआर रहमान (A R Rehman) के परिवार को लेकर एक हैरान करने वाला खुलासा किया था। उन्होंने कहा था कि एक बार जब वह रहमान के घर पर गए तो उनकी अम्मी ने उन्हें घर में विभूति और तिलक न लगाकर आने को कहा था। इसे सुनते ही पिरईसूदन ने अपने माथे से धार्मिक चिह्नों को हटाने से मना कर दिया था। पिरई के लिए रहमान की अम्मी के शब्द किसी धक्के से कम नहीं थे।

‘इस्लाम कबूलो वरना दर्द सहो’ : ब्रिटेन की जेलों में ‘मुस्लिम बंदी’ चला रहे गैंग, रिपोर्ट में बताया- कैदियों के सिरहाने रख दते हैं कुरान, धर्मांतरण का डालते हैं दबाव

ब्रिटेन सरकार द्वारा नियुक्त स्वतंत्र ‘फेथ एडवाइजर’ कॉलिन ब्लूम ने 25 अप्रैल 2023 को एक चौंकाने वाली रिपोर्ट ‘द ब्लूम रिव्यू’ जारी की। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि ब्रिटेन की जेल में रह रहे कैदियों को उनके साथ रह रहे मुस्लिम कैदी इस्लाम में परिवर्तित करवा रहे हैं और साथ ही उन्हें धर्मांतरण पर ‘सुरक्षा’ भी मिल रही है।

रिपोर्ट में लिखा है कि नए कैदियों के बिस्तर पर कुरान रखी जाती है और उन्हें विकल्प दिया जाता है कि या तो वो इस्लाम कबूल कर लें वरना दर्द सहें। ब्लूम की रिपोर्ट के अनुसार अगर जेल में कोई मुस्लिम के रूप में नहीं पहचाना जाता तो फिर उसे मुस्लिमों की गैंग कोई सुरक्षा नहीं देती और उसी कैदी को उसी गैंग की हिंसा और धमकियों का शिकार होना पड़ता है।

उन्होंने कहा कि सरकार को कट्टरपंथी इस्लामवाद और इस्लाम व इस्लामी कट्टरपंथी और मुस्लिमों के बीच अंतर देखने के अपने प्रयासों को मजबूत करना होगा। 

ब्लूम की रिपोर्ट में बताया गया है कि कैसे जेल में तेजी से धर्मांतरण करवाया जा रहा है। 2021 तक जेल में मुस्लिमों की आबादी में 18% थी। 2002 के मुकाबले यह 8% बढ़ी हुई है।

रिपोर्ट कहती है, “लंदन की जेलों में मुस्लिम पुरुष कैदियों की आबादी कथिततौर पर लगभग 30% है जो कि लंदन की सामान्य आबादी में उनकी 15% से बहुत अधिक है।”

कॉलिन ने सरकार से ऐसे दावों की तत्काल समीक्षा करने की सिफारिश की, जिसमें कैदियों को जबरन कट्टरपंथी और जेल में परिवर्तित किए जाने की बात है। साथ ही कहा कि ये मजहब आधारित गैंग से जुड़ा मुद्दा है।

इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जेलों में किसी भी धर्म के कैदियों के मुकाबले हिंदू निम्न स्तर पर हैं, लेकिन रोजगार के मामले में ये सबसे ज्यादा हैं।

रिपोर्ट के 159 पेज में ब्लूम ने कहा कि अभी तक मामले में ‘अपर्याप्त कार्रवाई’ की गई है। सरकार को ‘जबरन निकाह’ जैसे मुद्दों में हो रहे अन्याय को रोकने से पीछे नहीं हटना चाहिए। इसके अलावा इस रिपोर्ट में कॉलिन ब्रिटेन में बढ़ रहे खालिस्तानी समर्थकों का मुद्दा भी सरकार के सामने लेकर आए।

रिपोर्ट में कहा गया, “नफरत और विभाजन को बढ़ाना, युवाओं का ब्रेनवॉश करना ताकि भारत में नफरत फैले, बहुत दुखदायी है। कुछ सिख कट्टरपंथी समूह धार्मिक स्थलों को फंड इकट्ठा करने के लिए प्रयोग कर रहे हैं ताकि घृणा फैला सकें। इस तरह के संगठनों को हमारे महान देश में रहने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।”

बबलू, सुरेंद्र, संदीप… हिंदू नाम रखकर फरारी काट रहा है बमबाज गुड्डू मुस्लिम, पहचान छिपाने के लिए बढ़ा ली है दाढ़ी: रिपोर्ट

प्रयागराज के उमेश पाल हत्याकांड (Umesh Pal Murder Case) का आरोपित गुड्डू मुस्लिम (Guddu Muslim) पुलिस और STF की नजरों से लगातार भाग रहा है। सुरक्षा एजेेंसियों की नजरों से छिपते हुए उसे 62 दिन हो चुके हैं। वह अपनी पहचान बदलकर अलग-अलग जगहों पर भागा फिर रहा है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सुरक्षा एजेंसियों की नजर से बचने के लिए वह अपना हुलिया और स्थान लगातार बदल रहा है। इतना ही नहीं, वह हिंदू नाम रखकर लोगों की आँखों में धूल झोंकने की कोशिश कर रहा है। बता दें कि गुड्डू मुस्लिम पर उत्तर प्रदेश की सरकार ने 5 लाख रुपए का ईनाम रखा है।

मारा गया गैंगस्टर अतीक अहमद का सबसे खास बमबाज गुड्डू मुस्लिम को खोजने के लिए पुलिस दर-दर की खाक छान रही है। उसकी तलाश में पुलिस और STF उत्तर प्रदेश के अलावा कई और राज्यों तक पहुँची। हर संभावित ठिकानों पर छापेमारी की, लेकिन पुलिस अभी भी अतीक और भगोड़ी शाइस्ता परवीन के राजदार गुड्डू मुस्लिम का पता नहीं लगा पाई है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, गुड्डू मुस्लिम की अंतिम लोकेशन ओडिशा के बाड़गढ़ में मिली थी। वह लगभग 12 दिन तक वहाँ रहा था। जब तक STF वहाँ पहुँचती, उससे पहले ही वह फरार हो गया। उसने अपना कपड़ों वाला बैग भी वहीं छोड़ दिया है। वह कभी बबलू, कभी सुरेंद्र तो कभी संदीप नाम रख रहा है।

पुलिस को आशंका है कि वह छत्तीसगढ़ में छिपा हो सकता है। वह बम बनाने के साथ-साथ वेश बदलने में भी माहिर है। वह लगातार वेश रहा है। इससे उसकी पहचान में मुश्किल आ रही है। हालाँकि, पुलिस ने उसके एक सहयोगी राजा खान को गिरफ्तार किया है। उसने पुलिस को बताया कि है गुड्डू मुस्लिम ने दाढ़ी रख ली है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, जब अतीक और अशरफ जेल में थे तो वह शाइस्ता के साथ मिलकर अतीक के सारे बिजनेस और गैंग को सँभालता था। उसने अतीक की बीवी शाइस्ता परवीन के साथ मिलकर अतीक के बेटे असद तथा अन्य शूटरों के साथ उमेश पाल की हत्या कर दी थी।

फिल्म फेयर अवॉर्ड को विवेक अग्निहोत्री ने ठुकराया, 7 केटेगरी में ‘द कश्मीर फाइल्स’ को नॉमिनेशन: कहा- बाॅलीवुड की इस भ्रष्ट व्यवस्था का अंत होना चाहिए

बहुचर्चित फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ और उससे जुड़े लोगों को फिल्म फेयर की सात केटेगरी में पुरस्कार के लिए नाॅमिनेट किया गया है। 68वें फिल्म फेयर पुरस्कारों (Filmfare Awards) के लिए कश्मीर फाइल्स को बेस्ट फिल्म, बेस्ट डायरेक्टर और बेस्ट स्क्रीनप्ले के लिए विवेक अग्निहोत्री, बेस्ट एक्टर के लिए अनुपम खेर, बेस्ट एक्टर सपोर्टिंग रोल के लिए दर्शन कुमार और मिथुन चक्रवर्ती, बेस्ट एडिटिंग के लिए शंख राज्याध्यक्ष को नॉमिनेट किया गया है। लेकिन फिल्म के डायरेक्टर विवेक रंजन अग्निहोत्री ने इन पुरस्कारों से खुद को अलग कर लिया है।

इसकी जानकारी विवेक ने सोशल मीडिया पर एक लंबे पोस्ट के जरिए दी है। उन्होंने इन पुरस्कारों को सिनेमा विरोधी और अनैतिक करार देते हुए इसमें शामिल नहीं होने की बात कही है। साथ ही बताया है कि धीरे-धीरे एक दूसरा हिंदी फिल्म उद्योग उभर रहा है। उन्होंने लिखा है, “मुझे मीडिया से पता चला कि ‘द कश्मीर फाइल्स’ को 68वें फिल्मफेयर अवॉर्ड्स के लिए 7 कैटेगरी में नॉमिनेट किया गया है। लेकिन मैं विनम्रतापूर्वक इन अनैतिक और सिनेमा विरोधी पुरस्कारों का हिस्सा बनने से इनकार करता हूँ।”

विवेक ने कहा है कि फिल्म फेयर के लिए सितारों का चेहरा ही मायने रखता है। इसलिए उसकी चापलूसी वाली दुनिया में संजय लीला भंसाली या सूरज बड़जात्या जैसे निर्देशक चेहरा नहीं हैं। संजय भंसाली को आलिया भट्ट तो सूरज को मिस्टर बच्चन और अनीस बज्मी के नाॅमिनेशन को कार्तिक आर्यन के चेहरे के साथ प्रस्तुत किया जाता है। इसलिए बॉलीवुड के भ्रष्ट, अनैतिक और चापलूस पुरस्कार समारोह से विरोध जताते हुए मैंने अलग होने का फैसला किया है। मैं ऐसे पुरस्कारों को स्वीकार नहीं करूँगा।

विवेक ने कहा है कि वे ऐसे किसी भी संस्था या समारोह का हिस्सा नहीं बनेंगे जो फिल्म में काम करने वाले डायरेक्टर, लेखक, एचओडी और अन्य क्रू मेंबर्स को अहमियत नहीं देते। जहाँ फिल्म से जुड़े अन्य लोगों के साथ सितारों के गुलामों जैसा व्यवहार किया जाता है। फिल्म फेयर पुरस्कारों से फिल्म निर्माताओं को शोहरत या मान नहीं मिलता, बल्कि उनके काम से मिलता है। इस अपमानजनक व्यवस्था को समाप्त होना चाहिए।

विवेक रंजन अग्निहोत्री ने फिल्मफेयर पुरस्कारों से खुद को अलग कर लिया है। उन्होंने कहा कि बॉलीवुड में सितारों के अलावा किसी की अहमियत नहीं है।
साभार- फिल्मफेयर

अपने पोस्ट के साथ विवेक अग्निहोत्री ने फिल्म फेयर के ट्विटर अकाउंट से पोस्ट कुछ स्क्रीनशॉट भी शेयर किए हैं। इसमें बेस्ट डायरेक्टर के लिए किन लोगों को नामित किया गया है, उसका विवरण है। डायरेक्टर्स अवॉर्ड कैटेगरी में नॉमिनेशन के लिए किए गए इस पोस्ट में कहीं भी फिल्म के डायरेक्टर की तस्वीर नहीं लगी है। उनकी जगह फिल्म में काम करने वाले सितारों की फोटो नजर आ रही है।

कश्मीर फाइल्स के डायरेक्टर ने पोस्ट में कहा है कि अच्छी बात यह है कि वे अकेले नहीं हैं। धीरे-धीरे ही सही लेकिन बॉलीवुड के समकक्ष एक अन्य हिंदी फिल्म इंडस्ट्री खड़ी हो रही है। आखिर में उन्होंने दुष्यंत कुमार की पक्तियाँ लिखी हैं,

सिर्फ हँगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं,
मेरी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए।
मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही,
हो कहीं भी आग, लेकिन आग जलनी चाहिए।

बता दें कि फिल्मफेयर अवॉर्ड का आयोजन 27 अप्रैल 2023 को जियो वर्ल्ड कन्वेंशन सेंटर, बीकेसी, मुंबई में हो रहा है। इस साल अवॉर्ड फंक्शन को सलमान खान होस्ट करेंगे और उनका साथ आयुष्मान खुराना, मनीष पॉल जैसे स्टेज एंकर देंगे।

युवा काॅन्ग्रेस अध्यक्ष श्रीनिवास BV के खिलाफ FIR रद्द करने से हाई कोर्ट का इनकार, असम की महिला नेत्री ने खोली थी लैंगिक भेदभाव की पोल

यूथ कॉन्ग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीनिवास बीवी (Srinivas BV) को राहत देने से गुवाहाटी हाई कोर्ट ने इनकार कर दिया है। उन्होंने अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द करने की माँग की थी। जस्टिस अजीत बोरठाकुर बुधवार (26 अप्रैल 2023) को सुनवाई करते हुए कहा कि पीड़िता के बयान और केस डायरी का अवलोकन किए बिना राहत देना उचित नहीं होगा। असम युवा काॅन्ग्रेस की अध्यक्ष रहीं डॉ. अंगकिता दत्ता (Angkita Dutta) ने उनके खिलाफ मामला दर्ज कराया था। दुर्व्यवहार और खुद को अपमानित करने का आरोप लगाया था।

अंगकिता दत्ता ने लिंग के आधार पर भेदभाव, उत्पीड़न और प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने 19 अप्रैल को गुवाहाटी के दिसपुर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई थी। उनकी शिकायत पर कॉन्ग्रेस नेता श्रीनिवास के खिलाफ आईपीसी की धारा 509/294/341/352/354/354 ए (iv)/506 के तहत मामला दर्ज किया गया था।

श्रीनिवास ने इसे हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। कोर्ट से अपील की थी कि असम पुलिस को उनके खिलाफ कठोर कदम उठाने या कार्रवाई से रोका जाए। इस पर हाई कोर्ट के जस्टिस अजीत बोरठाकुर ने कहा कि वे पहले केस डायरी देखेंगे और उसके बाद ही इस पर कोई निर्णय लेंगे। कोर्ट ने असम पुलिस को 2 मई 2023 तक केस डायरी जमा कराने के निर्देश दिए हैं।

गौरतलब है कि अंगकिता ने यूथ काॅन्ग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीवी श्रीनिवास (Srinivas BV) और  यूथ कॉन्ग्रेस के सेक्रेटरी इंचार्ज वर्धन यादव पर लैंगिक भेदभाव तथा बदजुबानी का आरोप लगाया था। कहा था कि राहुल गाँधी ने भी उनकी शिकायतों पर गौर नहीं किया और प्रताड़ना का सिलसिला चलता रहा। उन्होंने कहा था, “श्रीनिवास पिछले छह महीनों से उन्हें परेशान और प्रताड़ित कर रहे हैं। लैंगिक टिप्पणी करते हैं। अपशब्दों का इस्तेमाल करते हैं। पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों से इसकी शिकायत करने पर उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दे रहे हैं।”

अंगकिता दत्ता की मानें तो करीब छह महीने से उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा था। ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरान राहुल गाँधी को भी इसकी जानकारी दी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। उनका आरोप है कि स्त्री होने के कारण उनके साथ भेदभाव हुआ। इन आरोपों के बाद असम काॅन्ग्रेस ने पहले अंगकिता को कारण बताओ नोटिस जारी किया, फिर उन्हें 6 साल के लिए पार्टी से निकाल दिया। वहीं श्रीनिवास को कर्नाटक के लिए जो स्टार प्रचारकों की सूची जारी की उसमें जगह दी।

आजाद हुआ आनंद मोहन, सुबह सबेरे जेल से रिहाई: अशोक यादव भी बाहर निकला, बोला- सरकार बढ़िया काम किया हमलोगों के लिए

पूर्व सांसद आनंद मोहन आजाद हो गया है। 27 अप्रैल 2023 की सुबह उसे सहरसा जेल से रिहा कर दिया गया। गोपालगंज के डीएम रहे जी कृष्णैया की हत्या में उसे आजीवन कारावास हुई थी। वह 16 साल से जेल में बंद था। बिहार सरकार ने 10 अप्रैल 2023 को जेल नियमावली, 2012 के नियम 481 में संशोधन कर उसकी रिहाई का रास्ता साफ किया था।

सहरसा जेल अधीक्षक अमित कुमार ने उसकी रिहाई की पुष्टि की है। आनंद मोहन की रिहाई को लेकर नियमों में जो बदलाव किया गया है, उस पर कृष्णैया के परिजन निराशा जता चुके हैं। मीडिया में भी इस फैसले पर सवाल उठ रहे हैं। इसका असर रिहाई के समय भी दिखा। जब आनंद मोहन जेल से बाहर निकला तो समर्थकों का कोई जमावड़ा नहीं था। न उसने रोड शो कर अपनी शक्ति दिखाई।

बेटे चेतन आनंद की सगाई के सिलसिले में आनंद मोहन 15 दिन के पेरोल पर बाहर था। 26 अप्रैल को पेरोल खत्म होने के बाद वह वापस सहरसा जेल लौट गया था। आनंद मोहन की रिहाई को लेकर बिहार में सियासी पारा चढ़ा हुआ है। राजनीतिक दलों के अलावा आईएएस एसोसिएशन और डीएम जी कृष्णैया की पत्नी उमा देवी ने भी उसकी रिहाई पर सवाल उठाए थे। उन्होंने बिहार सरकार के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने पर विचार करने की बात कही है।

पटना हाईकोर्ट में याचिका

आनंद मोहन की रिहाई के खिलाफ सामाजिक कार्यकर्ता अमर ज्योति ने पटना हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। इस याचिका में बिहार सरकार द्वारा जारी अधिसूचना को निरस्त करने की माँग की गई है। याचिकाकर्ता के अनुसार बिहार सरकार द्वारा जेल नियमावली में संशोधन के समय ‘ड्यूटी पर तैनात लोक सेवक की हत्या’ वाक्य को हटा दिया गया था। इस संशोधन को गैरकानूनी बताया गया है। याचिका में कहा गया है कि इस तरह के निर्णयों से लोक सेवकों और आम जनता का मनोबल कम होगा।

अशोक यादव भी रिहा

बिहार सरकार ने आनंद मोहन के साथ साथ आजीवन कारावास काट रहे 26 अन्य अपराधियों की रिहाई का भी फैसला लिया था। इस सूची में एक मृत कैदी का भी नाम शामिल कर दिया गया था। अन्य लोगों में से कुछ रिहा हो चुके हैं। कुछ की रिहाई प्रक्रिया में है। रिहा होने वालों में हत्या के मामले में सजा काट रहा अशोक यादव भी है।

अशोक यादव को उम्र कैद की सजा सुनाई गई थी। उसने करीब 18 साल जेल में गुजारे हैं। रिहाई के बाद मीडिया से बात करते हुए उसने बिहार सरकार के फैसले की तारीफ की। यादव ने कहा, “सरकार ने बढ़िया काम किया है हमलोगों के लिए।”

बंगाल में क्लास में घुस गया शख्स, बंदूक की नोंक पर छात्रों को बनाया बंधक: CM ममता बनर्जी ने बताया षड्यंत्र, स्थानीय लोगों का प्रदर्शन

पश्चिम बंगाल के एक स्कूल में एक हथियारबंद व्यक्ति द्वारा जबरन घुसने का मामला सामने आया है। उसने क्लास में घुसकर कक्षा में बैठे विद्यार्थियों को बंधक बनाने की कोशिश की। हालाँकि, बाद में पुलिस ने बच्चों को बचाते हुए उस शख्स को हिरासत में लिया। इस घटना में किसी विद्यार्थी को चोट लगने की खबर नहीं है।

घटना मालदा जिले के मुचिया अंचल स्थित चंद्रमोहन हाईस्कूल का है। बुधवार (26 अप्रैल) को हाथ में रिवॉल्वर लिए एक शख्स सातवीं-आठवीं कक्षा में घुस गया और विद्यार्थियों को डराने की कोशिश की। घटना को लेकर स्थानीय लोगों ने स्कूल में जमकर प्रदर्शन किया। हालाँकि, बाद में पुलिस ने उन्हें समझा-बुझाकर शांत कर दिया।

मालदा के एसपी प्रदीप कुमार यादव ने कहा, “हमारे पास सूचना आई कि एक बाहरी व्यक्ति स्कूल में घुस गया है। बाद में पता चला कि उसके पास हथियार भी हैं। हमें पता चला कि उसकी पत्नी और बच्चों को लेकर कोई समस्या है, जिसको लेकर उसने ये किया है।” आरोपित की उम्र लगभग 40 वर्ष है।

पुलिस के मुताबिक, आरोपित का कहना है कि उसका बेटा और पत्नी एक साल से लापता हैं। प्रशासन पर दबाव बनाने के लिए ऐसा किया था। पंजाब केशरी के मुताबिक आरोपी के पड़ोसियों ने बताया कि वह अपनी पत्नी से अलग रहता है और उसका बेटा भी उसकी पत्नी के साथ रहता है।

एक अन्य अधिकारी ने कहा कि वह हाथ में हथियार लेकर बच्चों और शिक्षक को मारने की धमकी दे रहा था। अधिकारी ने यह भी बताया कि व्यक्ति ने कहा कि ‘अगर कोई उसे गोली मारेगा तो वह गोली चला देगा।’ आरोपित की पहचान देब बल्लभ के रूप में की गई है। उसके पास से पुलिस ने बंदूक, अनजान पदार्थ से भरे हुए दो बोतल और एक चाकू को जब्त किया गया। 

एसपी यादव ने कहा कि सारे बच्चों को सुरक्षित निकाल लिया गया है। वहीं, पत्नी और बच्चों को लेकर आरोपित के दावों की पुलिस पुष्टि कर रही है। बता दें कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पुलिस कार्रवाई की प्रशंसा की है। जिस समय यह घटना हुई, उस समय वह कोलकाता में एक प्रशासनिक बैठक कर रही थीं। हालाँकि, उन्होंने इसे षडयंत्र भी बताया।

एक और एयर स्ट्राइक के डर से सहमा पाकिस्तान: पूर्व राजनयिक ने भी जताया अंदेशा – भारत कभी भी कर सकता है हमला

पाकिस्तान को एक बार फिर सर्जिकल स्ट्राइक का डर सताने लगा है। जम्मू-कश्मीर के पूँछ में आतंकियों द्वारा किए गए हमले में 5 सैनिकों के बलिदान होने के बाद पड़ोसी देश के पूर्व राजनयिक अब्दुल बासित ने यह डर जाहिर की है। बासित ने कहा कि फिलहाल ऐसा डर नहीं है, लेकिन अगले साल चुनावों से पहले ऐसा हो सकता है।

अब्दुल बासित ने कहा, “पाकिस्तान में लोग भारत द्वारा एक और सर्जिकल स्ट्राइक या एयर स्ट्राइक के बारे में बात कर रहे हैं। मुझे नहीं लगता कि अब वह ऐसा करेगा, क्योंकि वह इस साल SCO की बैठक और जी-20 की अध्यक्षता कर रहा है

उन्होंने आगे कहा, “जब तक भारत अध्यक्षता कर रहा है, तब तक ऐसा खतरा नहीं दिख रहा, लेकिन अगले साल चुनावों के दौरान भारत फिर से ऐसा कर सकता है। यह भारत में चुनावों से ठीक पहले हो सकता है। भारत जानता है कि हम कहाँ खड़े हैं।” बासित यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

इस दौरान अब्दुल बासित ने आतंकी हमले को सही ठहराने की भी कोशिश की। उन्होंने कहा कि जिसने भी हमला किया, चाहे वह मुजाहिदीन हो या कोई भी, उन्होंने नागरिकों को नहीं, बल्कि सेना को निशाना बनाया है। वे एक वैध संघर्ष में लगे हुए हैं। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून भी इसकी अनुमति देता है।

बता दें कि 20 अप्रैल 2023 को संगयोट में सेना की ओर से इफ्तार पार्टी का आयोजन किया गया था। इस इफ्तार पार्टी के लिए सेना के जवान सामान लेकर लौट रहे थे। उसी दौरान आतंकियों ने ग्रेनेड हमला कर दिया, जिससे गाड़ी में आग लग गई और पाँच जवान जिंदा जल गए।

इस हमले की जिम्मेदारी पीपुल्स एंटी फासिस्ट फ्रंट (PAFF) ने ली थी। पीएएफएफ पाकिस्तानी आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से जुड़ा है। यह आतंकी संगठन अंसार गजवात-उल-हिंद के मारे गए कमांडर जाकिर मूसा से प्रेरित है। यह आतंकी संगठन वैश्विक आतंकी संगठन अल कायदा के लिए भी वफादार माना जाता है। हाल की कई आतंकी घटनाओं में इसका नाम सामने आया है।

बता दें कि 14 फरवरी 2019 को जम्मू कश्मीर के पुलवामा में सेना के काफिले पर हुए हमले का भारतीय वायुसेना ने जिस तरह से जवाब दिया था, उससे आज भी पाकिस्तान डरा हुआ है। वह इस मामले पर सार्वजनिक तौर पर इस मसले पर कुछ भी बोलने से बचता है, ताकि बदनामी ना हो।

सीआरपीएफ के काफिले पर हुए हमले के ठीक 12 दिन बाद 26 फरवरी को भारतीय वायुसेना ने बालाकोट में जैश के ठिकानों एयर स्ट्राइक किया था, जिसमें 300 से ज्यादा आतंकियों के मारे जाने का दावा किया गया। मगर पाकिस्तान इसे नकारता रहा। हालाँकि, कई मौकों पर उसने दबे स्वर में इस घटना को स्वीकार भी किया है।

TMC नेता अनुब्रत मंडल की बेटी सुकन्या को ED ने पशु तस्करी मामले में गिरफ्तार किया: कहने को सरकारी शिक्षक, लेकिन दो-दो कंपनियों की डायरेक्टर

प्रवर्तन निदेशालय ने पशु तस्करी के मामले में TMC (तृणमूल कॉन्ग्रेस) नेता अनुब्रत मंडल की बेटी सुकन्या को गिरफ्तार किया है। उनके पिता को भी CBI और ED दोनों गिरफ्तार कर चुकी है। सुकन्या से पहले पूछताछ की गई थी, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया। बेहिसाब संपत्ति और बैंक खातों से जुड़े डिटेल्स को लेकर उनसे जवाब माँगे गए थे। सुकन्या फ़िलहाल राज्य सरकार द्वारा संचालित प्राथमिक विद्यालय में बतौर शिक्षिका कार्यरत हैं।

केंद्रीय जाँच एजेंसी ने उन्हें इससे पहले भी बुलाया था, लेकिन वो पेश नहीं हुई थीं। उन्हें पहली बार 15 मार्च को दिल्ली बुलाया गया था। उन्हें 15 मार्च को नई दिल्ली तलब किया गया था। हालाँकि, हर बार उन्होंने अपनी खराब तबीयत का बहाना बनाते हुए उपस्थिति में असमर्थता जताई थी। ED ने 17 नवंबर, 2022 को बीरभूम जिले में TMC के जिला अध्यक्ष अनुब्रत मंडल को गिरफ्तार किया था। उनका सहयोगी मनीष कोठरी भी गिरफ्तार हुआ था।

कई बार समन ठुकराने के बाद आखिरकार मंगलवार (25 अप्रैल, 2023) को ED के समक्ष पेश हुई थी। सुकन्या मंडल 2 कंपनियों की डायरेक्टर हैं, जिन्हें फर्जी बताया जा रहा है। वो फ़िलहाल अपने परिवार के साथ बीरभूम के बोलपुर में रहती हैं। इस मामले में हवाला से लेनदेन के भी सबूत मिले हैं। कई फंड्स सुकन्या के नाम पर हैं, जिनका कोई हिसाब-किताब नहीं है। वो ‘ANM Agrochem Private Limited’ और ‘Neer Developer Private Limited’ की डायरेक्टर हैं।

पशु तस्करी का ये मामले कई करोड़ो रुपयों का है। CBI ने बताया था कि सुकन्या मंडल की मासिक आय 2013-14 में 3.10 लाख रुपए प्रति महीने से बढ़ कर 2020-21 में 1.45 करोड़ रुपए हो गया था। मंडल के नाम पर 3 करोड़ रुपए की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) है। अनुब्रत मंडल फ़िलहाल आसनसोल स्थित जेल में बंद हैं। वो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के करीबी हैं। TMC सुप्रीमो उनके और उनके परिवार को निर्दोष बताते हुए ये कहती रही हैं कि राजनीतिक बदले के लिए उन्हें फँसाया जा रहा है।