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4 दिन की पुलिस रिमांड में अतीक-अशरफ को गोली मारने वाले शूटर, SIT की रिपोर्ट पर 5 पुलिसकर्मी सस्पेंड

प्रयागराज में अतीक और अशरफ की हत्या करने वाले तीनों शूटरों को बुधवार (19 अप्रैल 2023) को कोर्ट में पेश किया गया। इस दौरान पुलिस ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। पुलिस ने कोर्ट से तीनों की 14 दिनों की कस्टडी माँगी थी। लेकिन अदालत ने 4 दिनों का रिमांड पुलिस को दिया। अतीक और अशरफ हत्याकांड की जाँच के लिए शासन ने SIT का गठन किया है। इसकी प्रारम्भिक जाँच के आधार पर पाँच पुलिसकर्मी सस्पेंड किए गए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अतीक और अशरफ की हत्या के आरोपित शूटर लवलेश तिवारी, अरुण मौर्य और सनी सिंह को कोर्ट ले जाने के लिए पुलिस के कई वाहनों का काफिला सुबह नैनी जेल पहुँचा। यहाँ से उन्हें रास्ते में कड़ी सुरक्षा के बीच अदालत में लाया गया। अदालत में भी जिस रास्ते से तीनों को ले जाया गया, उसमें बैरिकेडिंग की गई थी। इसके भीतर वकीलों और मीडियाकर्मियों को भी घुसने की इजाजत नहीं थी। तीनों शूटरों को देखने के लिए अदालत में भीड़ जमा थी। कोर्ट में बहस के बाद लवलेश, अरुण और सनी को चीफ जुडिशियल मजिस्ट्रेट (CJM) ने 4 दिनों की पुलिस रिमांड में भेज दिया है।

गौरतलब है कि 15 अप्रैल 2023 को लवलेश तिवारी, अरुण मौर्य और सनी सिंह ने अतीक और अशरफ की उस समय गोली मार कर हत्या कर दी थी, जब उन्हें मेडिकल के लिए लाया गया था। हत्या के दौरान दोनों पुलिस कस्टडी में थे। मामले में SIT द्वारा शासन को भेजी गई रिपोर्ट के बाद प्रयागराज पुलिस के 5 स्टाफ सस्पेंड कर दिए गए हैं। इन सभी पर अतीक व अशरफ की सुरक्षा में ढील बरतने का आरोप है। सस्पेंड होने वाले पुलिसकर्मियों में थाना प्रभारी शाहगंज अश्वनी सिंह, सब इंस्पेक्टर प्रीत पांडेय, सब इंस्पेक्टर शिव प्रसाद मौर्या, कॉन्स्टेबल जयमेश और कॉन्स्टेबल संजय प्रजापति शामिल हैं।

‘ऐ लड़की, वोडका पीती हो…’: असम की महिला नेता ने बताया कितना बदजुबान है युवा कॉन्ग्रेस का अध्यक्ष और प्रभारी, NCW ने लिया संज्ञान

असम में यूथ कॉन्ग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष डॉ अंगकिता दत्ता ने यूथ कॉन्ग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीनिवास BV पर उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। अब राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने इसका संज्ञान लिया है। डॉ अंगकिता दत्ता ने आरोप लगाया है कि पिछले 6 महीने से लगातार श्रीनिवास BV और यूथ कॉन्ग्रेस के सेक्रेटरी इंचार्ज वर्धन यादव लगातार उनका उत्पीड़न कर रहे थे। उन्होंने बताया कि पार्टी आलाकमान को सूचित किए जाने के बावजूद उन दोनों के विरुद्ध कोई इन्क्वायरी कमिटी गठित नहीं की गई है।

उन्होंने कहा कि वर्धन यादव को महिलाओं का सम्मान करना नहीं आता है। उन्होंने बताया कि वर्धन यादव उन्हें हमेशा ‘ऐ लड़की’ कह कर संबोधित करता है, उनके पद या नाम से नहीं। दत्ता ने कहा कि जब वो रायपुर प्लैनेरी सेशन में गई थीं, तब श्रीनिवास BV ने उन्हें कहा, “तुम क्या पीकर मैसेज करती हो? क्या पीती हो तुम? वोडका पीती हो क्या?” डॉ अंगकिता दत्ता ने कहा कि वो काफी हैरान थीं कि IYC का अध्यक्ष एक प्रदेश अध्यक्ष के साथ कैसे इस तरह से बात कर सकता है।

ANI से बातचीत करते हुए अंगकिता ने आगे बताया कि उन्हें उस समय काफी हैरानी हुई थी और इस संबंध में AICC के जनरल सेक्रेटरी को भी सूचित किया। उन्होंने कहा कि कई बार शिकायत के बावजूद कोई एक्शन नहीं लिया गया। उन्होंने सोशल मीडिया पर स्क्रीनशॉट्स शेयर कर के आरोप लगाया कि वर्धन यादव उनके खिलाफ पोस्टर्स बना कर ये दुष्प्रचारित कर रहे हैं कि वो मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा को खुश करना चाहती हैं।

साथ ही उनके भाजपा में जाने की झूठी खबरें भी व्हाट्सएप्प ग्रुप्स में फैलाई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि जब एक महिला आत्मसम्मान और प्रतिष्ठा की बात कर रही है, प्रताड़ना और उत्पीड़न झेलने के बाद इसकी बात कर रही है, ऐसे में इस प्रतिक्रिया का क्या औचित्य है? उन्होंने बताया कि उनके पिता अंजन दत्ता बीमार थे और बिस्तर पर थे, तब भी उन्होंने असम में कॉन्ग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में कार्य किया था। उनके दादा भी कॉन्ग्रेस में थे।

डॉक्टर अंगकिता दत्ता ने कहा, “वो हमें बाहर निकाल कर फेंकना चाहते हैं। हमलोग पार्टी से प्यार करते हैं, लेकिन श्रीनिवास BV और वर्धन यादव जैसे लोगों ने पार्टी को बर्बाद करने का काम किया है। उन्होंने राज्य की राजनीति को बर्बाद किया है। जब मैं कॉन्फ्रेंस रूम में बैठी थी, मैंने उन्हें स्पष्ट रूप से सब कहा। मैंने वर्धन यादव को बाहर भेजने को कहा, फिर राहुल गाँधी को इस बारे में बताया। मैंने उन्हें बताया कि वर्धन यादव मेरे बारे में ‘ये लड़की बदनाम हो चुकी है’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल करता है।”

उन्होंने कहा कि आज वो लोग CBI-ED की बातें कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि ये सब अगस्त 2022 में ही शुरू हो गया था और तब से वो अकेले इन सबका सामना कर रही हैं। बकौल दत्ता, अगर उन्हें भाजपा का ही हिस्सा बनना होता तो वो अगस्त में ही चली जातीं। उन्होंने कहा कि उनके न पिता हैं न पति, उनकी माँ और 3 बहनें र में हैं। डॉ अंगकिता दत्ता ने बताया कि कॉन्ग्रेस संगठन में उन्हें बार-बार अपमानित किया गया, नीचा दिखाया गया।

मध्य प्रदेश के मैहर माता मंदिर से हटाए जाएँगे मुस्लिम कर्मचारी: धर्मस्व विभाग का आदेश, मांस और शराब की बिक्री पर भी लगेगी रोक

मध्य प्रदेश के सतना जिले (Satna, Madhya Pradesh) में स्थित मैहर माता मंदिर (Maihar Mata Mandir) से मुस्लिम कर्मचारियों को हटाए जाने का आदेश धर्मस्व विभाग ने दिया गया है। विभाग द्वारा जारी पत्र में मैहर शहर में मांस और शराब की बिक्री पर भी रोक लगाने के लिए कहा गया है। यह चिट्ठी सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है।

यह पत्र मध्य प्रदेश के धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग की उप-सचिव पुष्पा कुलेश ने जिलाधिकारी को लिखी है। इसमें मंत्री उषा ठाकुर के निर्देश का हवाला दिया गया है। पत्र में कार्रवाई के बाद जिलाधिकारी से तीन दिन में रिपोर्ट भेजने के लिए भी कहा गया है।

5 अप्रैल 2023 को जारी इस पत्र में शहर से मांस और शराब की दुकान हटाने के साथ-साथ प्रबंध समिति से मुस्लिम कर्मचारियों को हटाने के लिए आदेश देने के लिए कहा गया है। जिलाधिकारी ने पत्र मिलने की पुष्टि की है और कहा है कि जाँच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

शासन द्वारा जारी पत्र (साभार: भास्कर)

मंदिर प्रबंधन समिति में 3 मुस्लिम कर्मचारी हैं। ये कर्मचारी नियमित हैं और साल 1988 से कार्यरत हैं। एक कर्मचारी का नाम आबिद हुसैन है और वह विधिक सलाहकार की भूमिका में हैं। वहीं, दूसरे कर्मचारी अयूब खान हैं, जिन्हें जल व्यवस्था संभालने की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं, तीसरे कर्मचारी का नाम यूसूफ खान है।

यहाँ तक कहा जा रहा है कि कोर्ट मैटर और वाहनों की व्यवस्था देखने वाले आबिद हुसैन का मंदिर के प्रति निष्ठा नहीं है। लोगों का कहना है कि आज तक किसी भी अदालती मामले में मंदिर प्रबंध समिति को जीत हासिल नहीं हो पाई है। आबिद के कामकाज और समिति के प्रति निष्ठा पर लगातार सवाल उठ रहे हैं।

मैहर के एसडीएम एवं मां शारदा प्रबंध समित के प्रशासक धर्मेंद्र मिश्रा ने बताया कि सरकार का पत्र मिला है। इस संबंध में अब मंदिर प्रबंधन समिति की बैठक बुलाकर विचार-विमर्श किया जाएगा। इसके बाद दोनों मुस्लिम कर्मचारियों को हटाया जा सकता है।

बता दें कि 17 जनवरी 2023 को सतना जिले के हिंदू संगठन की ओर से मंत्री उषा ठाकुर को एक ज्ञापन सौंपा गया था। इसमें माँ शारदा प्रबंध समिति से मुस्लिम कर्मचारियों को बाहर करने के साथ-साथ शहर से मांस और शराब की दुकानों को बंद कराने की माँग की गई थी। मंत्री ऊषा ठाकुर ने इसको लेकर विभागीय अधिकारियों से जवाब माँगा था।

इस आदेश को लेकर हिंदू संगठन अपनी जीत बता रहे हैं। वहीं, इसको लेकर अब विवाद खड़ा हो रहा है, क्योंकि मांँ शारदा देवी मंदिर प्रबंध समिति के नियमों में कर्मचारियों की नियुक्ति में धर्म को आधार बनाए जाने का प्रावधान नहीं है।

डेमोग्राफी बदलने के प्लान पर काम कर रहा था अतीक अहमद, शाइस्ता के अंडरवर्ल्ड कनेक्शन से लेकर आत्महत्या करने तक के चर्चे

प्रयागराज में 15 अप्रैल 2023 को मारे गए माफिया अतीक अहमद को लेकर चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। वह प्रयागराज के एक खास इलाके की डेमोग्राफी बदलने के प्लान पर काम कर रहा था। इसके लिए वह कमजोर लोगों की जमीन पर कब्जा कर मुस्लिम बस्तियाँ बसाने की तैयारी में लगा था। वहीं उसकी भगोड़ी बीवी शाइस्ता परवीन को लेकर भी मीडिया में कई तरह के चर्चे चल रहे हैं। ये चर्चे अंडरवर्ल्ड कनेक्शन की मदद से फरार होने से लेकर आत्महत्या करने तक जुड़े हुए हैं।

बताया जा रहा है कि प्रयागराज के करेली में अतीक अहमद मुस्लिम बस्तियाँ बसाने की तैयारी में था। माना जा रहा है कि ऐसा विधानसभा चुनावों में समर्थक वोटों की तादाद बढ़ाने और अपना दबदबा बढ़ाने के इरादे से वह कर रहा था। बस्तियाँ बसाने के लिए कई कमजोर लोगों की जमीन हड़पी गई थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फाॅर्स (STF) के ADG आईपीएस अमिताभ यश ने अतीक अहमद की इस साजिश का खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि अतीक अहमद की साजिश माइनॉरिटी कॉलोनी बसाने की थी जो कोई और आपराधिक गैंग सोच भी नहीं सकता। यह कॉलोनी बसाने के लिए प्रयागराज शहर में करेली इलाके के पास एक गाँव को चुना गया था। बकौल अमिताभ यश माइनॉरिटी टाउनशिप के नाम पर कई गरीब और कमजोर लोगों की जमीनों पर बलपूर्वक कब्ज़ा किया गया था।

बताया जा रहा है कि मुस्लिम कॉलोनी बसाने की साजिश के पीछे अतीक द्वारा अपनी सुरक्षा घेरे को मजबूत करने की भी सोच थी। अतीक की गैंग से जुड़े लोग और उसके शूटर भी इसी माइनॉरिटी टाउनशिप में बसने वाले थे। अमिताभ यश ने बताया कि अतीक गैंग द्वारा मुस्लिम कॉलोनी के नाम पर रची गई राजनैतिक घुसपैठ की साजिश को STF ने नाकाम कर दिया है। गुड्डू मुस्लिम को उन्होंने अब स्पेशल टास्क फ़ोर्स का प्राइम टारगेट बताया। उन्होंने आगे कहा कि गुड्डू मुस्लिम जैसे लोग सभ्य समाज के लिए खतरा हैं।

पुलिस वाले की बेटी है फरार शाइस्ता

एक रिपोर्ट के मुताबिक अतीक अहमद की 51 वर्षीय बीवी 50 हजार की इनामी शाइस्ता परवीन के अब्बा मोहम्मद हारून UP पुलिस में कॉन्स्टेबल थे। शाइस्ता 12वीं तक पढ़ी है। निकाह से पहले वह अपने परिवार के साथ पुलिस क्वार्टर में ही रहा करती थी। फ़िलहाल शाइस्ता पर 4 केस दर्ज हैं। इनमें 1 हत्या व 3 धोखाधड़ी से संबंधित हैं। शाइस्ता के नाम पर अतीक ने कई कम्पनियाँ खोल पैसे लगा रखे हैं। इसमें से एक का नाम मेसर्स जाफरी स्टेट बताया गया है। शाइस्ता के साथ उसके भाइयों के नाम से भी गुरुग्राम में कम्पनियाँ खोले जाने की जानकारी सामने आई है। प्रयागराज में भी शाइस्ता के नाम अतीक ने जमीन का कारोबार खोल रखा था। फ़िलहाल पुलिस अतीक, शाइस्ता और उनके तमाम रिश्तेदारों से जुड़ी कंपनियों की तलाश कर उन्हें सील करने की तैयारी में है।

बताया जाता है कि यूपी एसटीएफ से बचने के लिए शाइस्ता अतीक के स्थानीय संपर्कों की जगह अंडरवर्ल्ड कनेक्शन का इस्तेमाल कर रही है। उल्लेखनीय है कि बेटे असद के एनकाउंटर में ढेर होने के बाद से शाइस्ता के सरेंडर करने को लेकर कई बार मीडिया में अटकलें लग चुकी हैं। अब अटकलों का दौर उसकी आत्महत्या से लेकर गुड्डू मुस्लिम के साथ उसकी करीबियों तक पहुँच चुका है। लेकिन अब तक उसको लेकर कोई पुष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। अतीक की हत्या के बाद से शाइस्ता के मायके वाले भी गायब बताए जा रहे हैं।

पुणे के एक स्कूल में चलती थी PFI की पाठशाला, मुस्लिम युवकों को दी जाती थी हिंदू नेताओं को मारने की ट्रेनिंग: NIA ने बिल्डिंग का दो फ्लोर किया सील

महाराष्ट्र के पुणे के एक स्कूल में प्रतिबंधित इस्लामी कट्टरपंथी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) का ट्रेनिंग सेंटर चलता था। इसमें मुस्लिम युवकों को हिंदू नेताओं को मारने की ट्रेनिंग दी जाती थी। राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने इस बहुमंजिला स्कूल के उन दो फ्लोर को सील कर दिया है, जिनका इस्तेमाल पीएफआई करता था।

सील करने की कार्रवाई 16 अप्रैल 2023 को की गई। एनआईए ने 17 अप्रैल को ट्वीट कर इसकी जानकारी दी है। एजेंसी की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि पुणे के ‘ब्लू बेल स्कूल’ की चौथी और 5वीं मंजिल का इस्तेमाल पीएफआई करता था। इसका इस्तेमाल मुस्लिम युवकों को कट्टरपंथी बनाने और उन्हें एक समुदाय के नेताओं और संगठनों को टारगेट कर हमले को अंजाम देने की ट्रेनिंग देने के लिए किया जाता था।

बयान के अनुसार पीएफआई मुस्लिम युवकों को संगठन में ‘भर्ती’ कर उन्हें ‘मिशन 2047’ का विरोध करने वालों पर हमला करने और उन्हें खत्म करने का प्रशिक्षण देता था। धारदार हथियार चलाने का प्रशिक्षण भी यहीं दिया जाता है। उल्लेखनीय है कि पीएफआई ने 2047 तक भारत को इस्लामी मुल्क बनाने का लक्ष्य रखा था। इसके लिए वह सुनियोजित तरीके से काम कर रहा था। इसके बाद सितंबर 2022 में मोदी सरकार ने पीएफआई पर प्रतिबंध लगाते हुए इस ‘गैर कानूनी संगठन’ घोषित कर दिया था।

NIA की ओर से जारी बयान से पता चलता है कि पुणे के ब्लू बेल स्कूल परिसर के दो मंजिल की तलाशी सितंबर 2022 में ली गई थी। इस दौरान आपत्तिजनक दस्तावेज जब्त किए थे। इनसे पता चला था कि इन फ्लोर का इस्तेमाल पीएफआई से जुड़े लोग अपने कैडर को हथियार चलाने की ट्रेनिंग देने के लिए करते थे। मुस्लिम युवाओं को सरकार और एक समुदाय के खिलाफ भड़काया जाता था। जाँच से यह बात सामने आई है कि प्रमुख हिंदू नेताओं पर हमले और उनकी हत्या करने के लिए चाकू, दरांती जैसे खतरनाक हथियारों के इस्तेमाल का प्रशिक्षण दिया गया था।

एनआईए ने ताजा कार्रवाई गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के प्रावधानों के तहत की है। यह कार्रवाई पिछले साल अप्रैल में पीएफआई के खिलाफ दर्ज एक प्राथमिकी से संबंधित है। इस साल मार्च में एनआईए ने दिल्ली की एक अदालत में आरोप पत्र दायर करते हुए 20 को नामजद किया था।

घर के सामने की झोपड़पट्टी में मस्जिद-मजारों पर 19 माइक, तेज आवाज से जीना मुहाल: हाई कोर्ट पहुँचे पूर्व नौसैनिक, 500 कंप्लेन पर भी पुलिस ने नहीं की कार्रवाई

मस्जिदों की लाउडस्पीकर से होने वाली शोर का मुद्दा फिर से चर्चा में है। मुंबई में एक पूर्व नौसैनिक ने इसके खिलाफ हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उनका कहना है कि पुलिस में करीब 500 बार कंप्लेन करने के बावजूद इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं हुई। यही कारण है कि अब उन्हें अदालत जाना पड़ा है।

75 साल के पूर्व नौसैनिक महेंद्र सप्रे ने बताया है कि उनके घर के सामने बसी झोपड़पट्टी की मस्जिद और मजारों पर लगे लाउडस्पीकरों से आने वाली तेज आवाज से उनकी तबीयत बिगड़ चुकी है। उन्हें दवाइयाँ लेनी पड़ती है। कोर्ट में उनकी याचिका पर 12 जून 2023 को सुनवाई होनी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह मामला मुंबई के वडाला क्षेत्र का है। यहाँ की फैकल्टी बिल्डिंग में नौसेना से रिटायर होने के बाद 75 वर्षीय महेंद्र सप्रे अपनी पत्नी के साथ रहते हैं। उनकी पत्नी भी इंडियन केमिकल्स टेक्नोलॉजी (ICT) में प्रोफेसर हैं। उनकी बिल्डिंग के सामने बंगालीपुरा स्लम एरिया है। पूर्व नौसैनिक का कहना है कि इस स्लम की मस्जिद-मजारों पर 19 से अधिक लाऊडस्पीकर अवैध तरीके से लगाए गए हैं। इन सभी से निकलने वाले शोर से वे बेहद परेशान हैं।

महेंद्र सप्रे के मुताबिक उनके हृदय का इलाज चल रहा है। डॉक्टरों ने उनको अधिक आराम और ज्यादा से ज्यादा नींद लेने की सलाह दी है। लेकिन मस्जिदों की माइक से आने वाली तेज आवाज उन्हें सोने नहीं देती। सप्रे ने इसकी शिकायत स्थानीय पुलिस से कई बार की। लेकिन उसका कोई नतीजा नहीं निकला। आखिरकार उन्हें बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दायर करनी पड़ी। सप्रे के वकील प्रेरक चौधरी ने बताया है कि ध्वनि प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उनके क्लाइंट के क्षेत्र में उल्लंघन हो रहा है।

पूर्व नौसैनिक के वकील के मुताबिक उनके क्लाइंट की याचिका किसी मजहब के खिलाफ नहीं है। उन्होंने इस समस्या को इलाके में सभी लोगों की दिक्कत करार दिया है। इस याचिका पर 12 अप्रैल 2023 को हाई कोर्ट ने सुनवाई की थी। अगली सुनवाई के लिए 12 जून की तारीख दी गई है। सप्रे साल 2017 में नौसेना से रिटायर हुए थे। शिकायतकर्ता ने यह भी बताया कि उन्होंने अपनी शिकायत को पीएमओ से ले कर गृहमंत्रालय तक भी ट्विटर पर टैग किया, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला।

गौरतलब है कि 2020 में एक फैसले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने माना था कि लाउडस्पीकर से अजान पर प्रतिबंध वैध है, क्योंकि यह इस्लाम का हिस्सा नहीं है। हाई कोर्ट ने कहा था कि अजान इस्लाम का हिस्सा है, लेकिन लाउडस्पीकर से अजान देना इस्लाम का हिस्सा नहीं हो सकता। इसके लिए कोर्ट ने तर्क दिया था कि लाउडस्पीकर के आने से पहले मस्जिदों से मानव आवाज में अजान दी जाती थी। मानव आवाज में मस्जिदों से अजान दी जा सकती है।

कार्ति चिदंबरम की ₹11 करोड़ की 4 संपत्तियाँ जब्त, INX घोटाला मामले में ED की कार्रवाई: मनी लॉन्ड्रिंग में जा चुके हैं जेल भी

पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सांसद कार्ति चिदंबरम और अन्य से जुड़ी 11.04 करोड़ की संपत्ति कुर्क कर दी है। यह कार्रवाई INX मीडिया प्राइवेट लिमिटेड मामले में की गई है।

दी गई जानकारी के मुताबिक ईडी ने कर्नाटक के कूर्ग जिले में 11.04 करोड़ रुपए की 4 संपत्तियाँ (तीन चल व एक अचल) कुर्क की हैं। ईडी की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि पूर्व केंद्रीय मंत्री के बेटे के खिलाफ ‘प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट, 2002 (PMLA 2002)’ के तहत प्रोविजनल ऑर्डर जारी किया गया है। मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कार्ति को CBI और ED दोनों ने गिरफ्तार किया था।

कार्ति चिदंबरम तमिलनाडु की शिवगंगा से सांसद हैं। उनपर आईएनएक्स मीडिया प्राइवेट लिमिटेड से प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से मिले अवैध रुपयों को प्राप्त करने का आरोप है। इस लेन-देन को यूपीए की तत्कालीन सरकार में केंद्रीय वित्त मंत्री के रूप में कार्ति के पिता पी चिदंबरम के कार्यकाल (2010-2014) के दौरान विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआईपीबी) की मंजूरी मिली थी।

इसके अलावा एयरसेल मैक्सिस डील मामले में भी पी चिदंबरम पर घूस लेकर विदेशी निवेश की मंजूरी देने का आरोप लगा था। साल 2019 में इन्हीं आरोपों के चलते पूर्व वित्त मंत्री 21 अगस्त, 2019 को अरेस्ट भी किया गया था, जिसके बाद उन्हें 106 दिन जेल में गुजारने पड़े थे और 4 दिसंबर को जाकर उन्हें जमानत मिली। इस बीच उनके दिन तिहाड़ में बीते थे।

इसके अलावा कार्ति चिदंबरम पर 50 लाख रुपए घूस लेकर 250 चीनी नागिरकों को भारत का वीजा दिलाने में मदद का भी आरोप है। सारे चीनी पंजाब में चल रहे एक प्रोजेक्ट के लिए भारत आए थे। मामले में सीबीआई ने कार्ति चिदंबरम और चेन्नई स्थित सहयोगी एस. भास्कररमन समेत 5 के खिलाफ मामला दर्ज किया हुआ है।

‘मैं हूँ सुप्रीम कोर्ट का इंचार्ज, मैं करूँगा फैसला’: समलैंगिक शादी वाली याचिका पर उठे सवाल तो बोले CJI चंद्रचूड़, कहा – प्रक्रिया क्या होगी ये बताने की अनुमति किसी को नहीं दूँगा

सुप्रीम कर्ट में समलैंगिग विवाह (Same Sex Marriage) को मान्यता देने के याचिकाओं पर सुनवाई शुरू हो गई है। केंद्र सरकार ने याचिकाओं की सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट के राजी होने पर सवाल उठाया। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि शादी विवाह को लेकर सुप्रीम कोर्ट नई संस्था नहीं बना सकता। कोर्ट रूम में उपस्थित वकील और जज देश का प्रतिनिधित्व नहीं करते। इसलिए इन मसलों पर विचार के लिए संसद सही जगह है।

हालाँकि, चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ ने सरकार की आपत्ति को खारिज कर दिया और सुनवाई जारी रखने का फैसला किया। याचिकाकर्ता का पक्ष वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने अदालत के सामने रखा।

सेम सेक्स मैरेज को मान्यता देने के लिए दी गई अर्जियों पर सुप्रीम कोर्ट की 5 जजों की बेंच ने सुनवाई शुरू की। इनमें चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़, जस्टिस संजय किशन कौल, एस रविंद्र भट, पी एस नरसिम्हा और हिमा कोहली शामिल हैं। सुनवाई के दौरान एसजी तुषार मेहता ने कहा कि केस पर सरकार अपनी आरंभिक आपत्तियाँ बताना चाहती है। जिसे सुना जाना चाहिए। इस पर सीजेआई ने कहा कि पहले याचिकाकर्ता को सुन लेते हैं।

इसपर एसजी ने कहा कि पहले याचिकाकर्ता को सरकार की आपत्तियों पर जवाब देना चाहिए। इसके बाद CJI चंद्रचूड़ ने कहा, “मैं कोर्ट का इंचार्ज हूँ। यह फैसला मैं करूँगा। पहले याचिकाकर्ता को सुना जाएगा। इस अदालत में सुनवाई की प्रक्रिया क्या होगी यह बताने की अनुमति मैं किसी को नहीं दूँगा।”

सीजेआई के जवाब के बाद सॉलिसिटर जनरल मेहता ने कहा कि फिर सरकार भी मामले की सुनवाई में शामिल होने पर विचार करेगी। इस पर बेंच में शामिल जस्टिस संजय कौल ने कहा कि यह एक महत्वपूर्ण मुद्दा है और सरकार का यह कहना कि ‘सुनवाई में शामिल होने पर विचार करेगी’ ठीक नहीं है। इसके बाद बहस शुरू हो सकी। याचिकाकर्ताओं की तरफ से अदालत में पेश वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि समलैंगिक भी दूसरे नागरिकों की तरह अधिकार रखते हैं।

उन्होंने कहा कि एक समय में कानून की धारा 377 के तहत उनके बीच संबंध अपराध की श्रेणी में आते थे पर आज ऐसा नहीं है। यदि समलैंगिक लोग साथ रह सकते हैं तो उनकी शादी को भी मान्यता मिलनी चाहिए।

याचिका पर जमियत उलेमा हिंद ने भी आपत्ति जताई है। जमीयत की तरफ से वरिष्ठ वकील और कॉन्ग्रेस नेता कपिल सिब्बल सेम सेक्स मैरेज का विरोध करने के लिए अदालत में पहुँचे। उन्होंने कहा कि समलैंगिक यदि किसी बच्चे को गोद लेते हैं तो किसे माँ और किसे बाप माना जाएगा? उन्होंने पूछा कि गुजारा भत्ता की जिम्मेदारी किसकी होगी? कपिल सिब्बल ने कहा कि शादी विवाह से जुड़े मामले संविधान की समवर्ती सूची (Concurrent List of the Constitution) में आते हैं। इसलिए इस विषय पर राज्य सरकारों की भी राय ली जानी चाहिए।

समलैंगिक विवाह के पक्ष में याचिका दाखिल करने वाले लोगों की तरफ से वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी, अभिषेक मनु सिंघवी, मेनका गुरुस्वामी और के वी विश्वनाथन ने भी अपनी शुरुआती दलीलें दीं। मेनका गुरुस्वामी ने कहा कि समलैंगिक विवाह को मान्यता न मिल पाने की वजह से समलैंगिक जोड़े कई कानूनी अधिकार हासिल नहीं कर पा रहे हैं। मुकुल रोहतगी ने कहा कि कानून की हल्की व्याख्या से समलैंगिक जोड़ों को राहत मिल जाएगी।

उन्होंने कहा कि 31 देशों ने समलैंगिग विवाह को मान्यता दी हुई है, इसलिए भारत में भी प्रगतिशील नजरिए को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। मामले की सुनवाई बुधवार (18 अप्रैल) को भी जारी रहेगी।

‘पुरुष कमाने वाले रहे, इसीलिए उन्होंने ज़्यादा आज़ादी का आनंद लिया’: बोलीं प्रियंका चोपड़ा – महिलाओं का सफल होना कई पुरुषों को लगता है ‘वर्चस्व को चुनौती’

बॉलीवुड अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा ने समाज में स्त्री और पुरुष को लेकर टिप्पणी की है। कई अंग्रेजी फिल्मों और टीवी सीरीज में काम कर चुकीं अभिनेत्री ने कहा कि पुरुषों को लंबे समय तक आज़ादी और गौरव का आनंद लेने का मौका मिला, क्योंकि वो परिवार में कमाने वाले और परिवार का पालन-पोषण करने वाले हैं, वो परिवार के मुखिया रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर कोई महिला ऐसा करने लगती है तो ये पुरुषों के वर्चस्व के लिए चुनौतीपूर्ण बन जाता है।

उन्होंने कहा कि ऐसा तब भी होता है जब महिला, पुरुष से ज़्यादा सफल हो जाए और पुरुष घर पर रहे, महिला काम के लिए बाहर जाने लगे। उन्होंने कहा कि हमें अपने बेटों को सिखाना चाहिए कि रोने में कोई शर्म महसूस नहीं करनी चाहिए, अपनी पत्नी/गर्लफ्रेंड, माँ या बहन के साथ चीजें साझा करने और उन्हें ध्यान का केंद्र बनाने में भी कोई शर्म नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि उनके पिता ने भी उनकी माँ के साथ ऐसा ही किया था। उन्होंने पुरुषों को सन्देश दिया, “सबको सक्सेसफुल होने दो।”

बकौल प्रियंका चोपड़ा, अब जब वो अपने पति निक जोनास के साथ रेड कार्पेट पर वॉक करती हैं और वो अलग हट कर उन्हें आकर्षण का केंद्र बनने देते हैं, उन्हें इस बात पर काफी फ़ख्र होता है कि उन्होंने खुद को ऐसे लोगों के घेरे में रखा है जो इन चीजों को लेकर असुरक्षित (Insecure) नहीं हैं। प्रियंका चोपड़ा फ़िलहाल रूसो ब्रदर्स की वेब सीरीज ‘Citadel’ को लेकर सुर्ख़ियों में हैं, जिसके बारे में उनका कहना है कि 22 साल के करियर में उन्हें पहली बार पुरुषों के समान पैसे मिले हैं।

हालाँकि, उन्होंने कहा कि उनके जीवन में कुछ ऐसे लोग भी हैं जो उनकी सफलता को लेकर काफी इनसेक्योर महसूस करते हैं। प्रियंका चोपड़ा ने बताया कि उनके पिता जब सेना में थे, तभी उनकी माँ ने प्राइवेट नौकरी शुरू कर दी थी। उन्होंने कहा कि इन दोनों के बीच कोई ईगो नहीं था क्योंकि उनकी माँ ने भले चीजों का ज्यादा ध्यान रखना शुरू कर दिया था लेकिन वो साथ में एक यूनिट की तरह थे, सोचते थे आखिर पैसा घर में ही तो आ रहा है।

अफ्रीका के तीसरे सबसे बड़े देश में सेना और अर्धसैनिक बलों के बीच सत्ता-युद्ध: 185 की मौत, समझें कैसे 2 जनरलों के संघर्ष में पिस रहा सूडान

अफ्रीकी देश सूडान (Sudan) में सत्ता के लिए सेना (Military) और अर्धसैनिक बल (Paramilitary force) के बीच लड़ाई जारी है। रिपोर्टों के मुताबिक शनिवार (15 अप्रैल, 2023) से शुरू हुई लड़ाई में अब तक 185 से अधिक लोगों की मौत हो गई है जबकि 1800 से ज्यादा घायल बताए जा रहे हैं। बताया यह भी जा रहा है कि राजधानी खार्तूम समेत कई शहरों में लड़ाई की वजह से अस्पतालों को भी नुकसान पहुँचा है जिससे घायलों और बीमारों का इलाज करने में परेशानी हो रही है।

सूडान में खार्तूम,ओम्दुर्मान, बहरी और कई शहर जंग के मैदान में बदल चुके हैं। CNN के रिपोर्ट के मुताबिक, शनिवार को संघर्ष शुरू होने के बाद से सोमवार (17 अप्रैल) का दिन सबसे ज्यादा विध्वंसक रहा। स्थानीय लोगों के अनुसार छोटे से युद्ध विराम के बाद राजधानी खार्तूम में आर्मी कमांड बिल्डिंग और प्रेसिडेंशियल पैलेस जैसे स्थानों पर कब्जे के लिए लड़ाई शुरू हो गई। इतना ही नहीं खार्तूम और आसपास के इलाकों में मंडरा रहे लड़ाकू वीमानों को ग्राउंड एंटी-एयरक्राफ्ट डिफेंस के जरिए निशाना बनाया गया। बहरी में भी भारी बमबारी हुई। ज्यादातर लोग अपने घरों में ही दुबके रहे।

लड़ाई की वजह से खाने-पीने के चीजों की कमी होने लगी है। कई इलाकों में बिजली गुल है। डॉक्टर जख्मी मरीजों तक नहीं पहुँच पा रहे हैं और परिजन मरे हुए लोगों का अंतिम संस्कार नहीं कर पा रहे हैं। अस्पताल के डॉक्टरों का कहना है कि शनिवार से ही अस्पतालों पर मिसाइलों से हमला किया जा रहा है।

दो जनरलों के बीच सत्ता का संघर्ष

यह गृह युद्ध सूडान की आर्मी के जनरल अब्देल फतेह अल बुरहान (Abdel Fattah al-Burhan) और सूडानी अर्धसैनिक बल रैपिड सपोर्ट फोर्सेस (Rapid Support Forces) के प्रमुख जनरल मोहम्मद हमदान दागलो (Mohamed Hamdan Daglo) बीच चल रहा है। दोनों सूडान पर नियंत्रण पाने के लिए लड़ रहे हैं। सीएनएन के साथ बातचीत में सूडानी सेना के चीफ और RSF के जनरल ने एक दूसरे पर लड़ाई छेड़ने और आम लोगों पर हमले का आरोप लगाया है।

फोटो साभार: CNN

क्या है विवाद की जड़?

सूडान में जारी मौजूदा संघर्ष की जड़ें 2019 के विद्रोह से जुड़ी हुई हैं। दरअसल सूडान के तात्कालिक राष्ट्रपति उमर अल बशीर के खिलाफ जनता ने विद्रोह कर दिया था। जिसके बाद सेना और अर्धसैनिक बल ने मिलकर तख्ता पलट कर दिया और अल बशीर को सत्ता से बेदखल कर दिया। सेना ने प्रदर्शन कर रहे लोगों को आश्वासन दिया कि 2023 के आखिर तक हालात सुधरने के बाद चुनाव कराए जाएँगे। एक सोवरेनिटी काउंसिल बनाई गई और तब तक के लिए अबदल्ला हमडोक को प्रधानमंत्री बना दिया गया।

इसके बावजूद देश में संघर्ष थमने का नाम नहीं ले रही थी। सूडानी आर्मी के जनरल बुरहान और आरएसएफ के जनरल डगालो ने मिलकर अक्टूबर 2021 में फिर से तख्तापलट कर दिया। इस बार बुरहान सोवरेनिटी काउंसिल के अध्यक्ष बन गए और जनरल डगालो को उपाध्यक्ष बनाया गया। इसके बाद तय हुआ कि आरएसएफ का आर्मी में विलय कर दिया जाएगा। फिर सवाल उठा कि पैरामिलिट्री के आर्मी में मिला देने के बाद नई फोर्स का प्रमुख कौन होगा? इस बात को लेकर दोनों जनरलों के बीच विवाद शुरू हो गया।

बता दें कि आरएसएफ का गठन उमर अल बशीर ने साल 2013 में किया था। इसके बाद से इसका इस्तेमाल सरकार के खिलाफ होने वाले विरोध प्रदर्शनों को कुचलने के लिए किया जाता था। देखते-देखते जनरल डगालो ने इसे एक शक्तिशाली संगठन बना दिया।

सूडान का इतिहास

सूडान 1956 में आजाद हुआ। आजादी के बाद से ही सूडान में सेना वर्चस्व रहा है। सूडान ने अब तक कई गृह युद्धझेले हैं। यहाँ सेना बार-बार तख्तापलट करती रही है। अस्थिरता की वजह से देश में कई विद्रोही गुट बनते रहे और देश में स्थिरता नहीं आ सकी। दशकों के गृहयुद्ध के बाद 2011 में दक्षिण सूडान (South Sudan) सूडान से अलग हो गया। एक जनमत संग्रह के बाद यह अलग देश बना था।

यूरोप और अमेरिका ने की सीज़फायर की अपील

इस बीच संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने सूडानी सशस्त्र बलों और रैपिड सपोर्ट फोर्सेज के जनरलों से लड़ाई खत्म करने की अपील की है। अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने दोनों कमांडर जनरल से अलग-अलग बात की और संघर्ष खत्म करने के लिए बातचीत को आगे आने के लिए कहा। उन्होंने देश में मानवीय सहायता पहुँचाने की भी इजाजत माँगी। यूरोप के देशों ने भी बातचीत के जरिए मसले का हल निकालने की अपील की है।