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‘आराध्या बच्चन को गंभीर बीमारी, दुआओं की जरूरत’: अमिताभ की 11 साल की पोती पर फेक न्यूज फैलाने वालों को हाईकोर्ट की फटकार, कहा- तुरंत हटाएँ सारे वीडियो

अभिषेक बच्चन व ऐश्वर्या राय बच्चन की बेटी और अमिताभ बच्चन की 11 साल की पोती आराध्या बच्चन की तबीयत को लेकर भ्रामक खबरें फैलाने के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने आज (20 अप्रैल 2023) बच्चन परिवार की याचिका पर सुनवाई की। दिल्ली हाईकोर्ट ने इस दौरान यूट्यूब चैनलों को आराध्या से जुड़े आपत्तिजनक कंटेंट को हटाने का निर्देश दिया। इसके अलावा इन चैनलों को समन भी जारी किया गया। इनके साथ गूगल LLC को भी समन जारी किया गया।

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, कोर्ट ने गूगल से कहा कि बच्चन परिवार को उन लोगों की पहचान उजागर की जाए जिन्होंने आराध्या को लेकर गलत खबरें फैलाईं। साथ ही ऐसी वीडियो के यूआरएल डिएक्टिवेट करने को भी कहा जिनमें बच्ची को लेकर झूठी खबर है। कोर्ट ने कहा कि ऐसा पहली बार नहीं है कि इस तरह की किसी सेलीब्रिटी को लेकर इस तरह की भ्रामक खबरें यूट्यूब पर फैलाई गई हों।

कोर्ट के मुताबिक, “हर बच्चे को आदर सम्मान मिलना चाहिए चाहे वो सेलीब्रिटी हो या फिर कोई आम बच्चा। बच्चों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य से जुड़ी गलत खबरें दिखाना बिलकुल अस्वीकार्य है।” इस मामले में कोर्ट ने गूगल से ऐसी वीडियोज को अपने प्लेटफॉर्म से तुरंत हटाने को कहा है। वहीं केंद्र सरकार से भी कहा है कि ऐसे कंटेंट, समान वीडियो या संबंधित कंटेंट के एक्सेस को ब्लॉक किया जाए।

बच्चन परिवार ने हाईकोर्ट में बताई आराध्या की स्थिति

बता दें कि आराध्या को लेकर फैलाई जा रही फेक खबरों के खिलाफ बच्चन परिवार ने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया था। उन्होंने कहा था कि ऐसी खबरों से उनके परिवार का नाम बदनाम हो रहा है। उन लोगों की फोटो एडिट करके गलत इस्तेमाल किया जा रहा है। आराध्या का स्वास्थ्य एकदम भला है। वो अस्पताल में भी भर्ती नहीं है।

कोर्ट में सुनवाई के दौरान जस्टिस शंकर बोले, “अगर आप कुछ ऐसा कर रहे हैं जिससे आप पैसा कमाएँ तो ये आपकी सामाजिक जिम्मेदारी है कि आप अपने प्लेटफॉर्म पर ऐसी चीजें न पोस्ट करें। ऐसी कुछ चीजें होती हैं जिन्हें बिलकुल बर्दाश्त किया ही नहीं जा सकता। ऐसी चीजें उस कैटेगरी में क्यों न आएँ।”

क्या फैलाई गई खबर

जानकारी के मुताबिक, जिन यूट्यूब चैनलों ने आराध्या बच्चन पर गलत खबर फैलाई उसमें उन्होंने दिखाया था कि कैसे आराध्या की सेहत बहुत खराब है और अब उसे दुआओं की जरूरत है। आराध्या की एक बीमार सी लगने वाली तस्वीर भी दिखाई गई थी। एक में तो ये भी कहा गया था कि वो अब इस दुनिया में नहीं रहीं। बच्चन परिवार की गलती से ऐसा हुआ।

इन्हीं वीडियोज में किए गए दावों पर बच्चन परिवार ने आपत्ति जताई। याचिका में कहा गया था कि आराध्या एक नाबालिग हैं। इस तरह की खबरों का उस पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। ऐसी खबरें परेशान करने वाली हैं।

कोर्ट में याचिका

इसी के बाद दिल्ली उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने इस मामले पर 20 अप्रैल 2023 को सुनवाई की। आराध्या द्वारा दायर याचिका में 10 संस्थाओं को आराध्या से जुड़े सभी वीडियो को हटाने के लिए कहा गया। Google LLC और इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (शिकायत सेल) को भी मामले में पक्षकार बनाया गया।

बच्चन परिवार की तरफ से लॉ फर्म आनंद एंड नाइक की तरफ से याचिका दायर कर कहा गया कि इस तरह की झूठी खबरें फैलाने का मकसद बच्चन परिवार की प्रतिष्ठा से लाभ कमाना है। इससे परिवार पर पड़ने वाले असर को नजरअंदाज कर दिया जाता है।

उल्लेखनीय है कि आराध्या को सोशल मीडिया पर कई बार ट्रोल किया जा चुका है। जिसे लेकर बच्चन परिवार खासकर अभिषेक बच्चन कई मंचो पर नाराजगी भी जता चुके हैं। अभिषेक और ऐश्वया की साल 2007 में शादी हुई थी। आराध्या का जन्म 16 नवम्बर 2011 को हुआ था। आराध्या अक्सर फिल्मी इवेंट्स में अपने पिता और माँ के साथ नजर आती रहती हैं।

ईसाई बने दलितों को भी मिले SC कोटा का लाभ, तमिलनाडु विधानसभा में प्रस्ताव पारित: कहा- केंद्र करे संविधान संशोधन, धर्म बदलने से खत्म नहीं होता आदि द्रविड़ों का विशेषाधिकार

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन (Tamil Nadu CM MK Stalin) ने बुधवार (19 अप्रैल 2023) को विधानसभा में आरक्षण से संबंधित एक प्रस्ताव पेश किया। इस प्रस्ताव में स्टालिन ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार (Narendra Government) से ईसाई धर्म अपनाने वाले आदि द्रविड़ों को आरक्षण देने के लिए संविधान में संशोधन करने का आग्रह किया।

प्रस्ताव में कहा गया है, “यह सम्मानित सदन भारत सरकार से आग्रह करता है कि भारतीय संविधान के तहत अनुसूचित जातियों के लोगों को प्रदान किए गए आरक्षण सहित वैधानिक संरक्षण, अधिकारों और रियायतों का विस्तार उन अनुसूचित जातियों के लिए भी करने के लिए संविधान में आवश्यक संशोधन करे, जो ईसाई धर्म में परिवर्तित हो गए हैं, ताकि वे सभी सामाजिक न्याय के लाभों का फायदा उठा सकें।”

मुख्यमंत्री स्टालिन ने कहा कि संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश 1950 के अनुसार, केवल हिंदुओं को अनुसूचित जाति के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है। हालाँकि, इसे 1956 में सिखों को शामिल करने के लिए और 1990 में बौद्धों को शामिल करने के लिए संशोधित किया गया था। उन्होंने कहा कि ईसाई धर्म अपनाने वाले आदि द्रविड़ भी इसी तरह के संशोधन की उम्मीद करते हैं।

उन्होंने कहा कि कि धर्मांतरित लोग ऐतिहासिक रूप से अनुसूचित जाति के थे और उन्हें अनुसूचित जाति का दर्जा देना उचित रहेगा। इससे उन्हें शिक्षा, रोजगार आदि में सामाजिक न्याय का लाभ उठाने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि वे दूसरे धर्म में परिवर्तित हो गए, इसलिए उनके अधिकारों से उन्हें वंचित नहीं किया जा सकता है।

द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) के इस प्रस्ताव का मुख्य विपक्षी अन्नाद्रमुक (AIADMK) सहित अन्य दलों ने स्वागत किया। वहीं, भाजपा (BJP) विधायकों ने इसका विरोध किया सदन से वॉकआउट कर गए। इसके बाद सदन में इस प्रस्ताव को पारित कर दिया गया।

कोयम्बटूर दक्षिण से भाजपा विधायक वनथी श्रीनिवासन ने कहा कि भाजपा विधायक प्रस्ताव के विरोध में विधानसभा से बाहर चले गए, क्योंकि उनका मानना ​​था कि इसे राजनीतिक कारणों से लाया गया था। प्रस्ताव को आदि द्रविड़ की मदद करने के इरादे से नहीं लाया गया था।

श्रीनिवासन ने कहा कि केंद्र सरकार ने 2022 में इस मुद्दे की जाँच करने के लिए भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश केजी बालकृष्णन की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय एक आयोग का गठन किया है। इस संबंध में सर्वोच्च न्यायालय जुलाई 2023 में याचिकाओं पर सुनवाई करेगा।

भाजपा विधायक ने कहा, “केंद्र सरकार द्वारा उपाय किए जाने और मामला न्यायपालिका में विचाराधीन होने के बाद यह प्रस्ताव लाने की आवश्यकता क्यों है? हम मुख्यमंत्री स्टालिन से पूछते हैं कि क्या प्रस्ताव का तात्पर्य यह है कि ईसाई धर्म और इस्लाम में परिवर्तित होने वाले आदि द्रविड़ अभी भी छुआछूत का सामना कर रहे हैं।”

बता दें कि 2011 जनगणना के अनुसार, तमिलनाडु की कुल जनसंख्या 7.21 करोड़ है, जिसमें से लगभग 20 प्रतिशत यानी 1.44 करोड़ जनसंख्या आदि द्रविड़ हैं। अगले साल लोकसभा का चुनाव होना है। ऐसे में आयोग के गठन और मामले की सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई तय होने के बावजूद स्टालिन द्वारा इस तरह का प्रस्ताव पेश करना राजनीतिक प्रतीत होता है।

साल 1950 में पंडित जवाहरलाल नेहरू की सरकार ने अनुसूचित जाति का वर्गीकरण सिर्फ हिंदू धर्म के लोगों तक ही सीमित किया था। हालाँकि, 1956 में सिख और 1990 में बौद्ध समुदाय को भी इसमें जोड़ा गया।

संविधान में इन दोनों संशोधनों के बाद अनुसूचित जाति की परिभाषा बदल गई। अब संविधान के पैरा तीन (अनुसूचित जाति) में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि कोई भी व्यक्ति जो हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म के अलावा किसी और धर्म को मानता है, उसे अनुसूचित जाति का सदस्य नहीं माना जाएगा।

साल 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसले में कहा था कि जब कोई व्यक्ति हिंदू धर्म छोड़कर ईसाई बनता है तो हिंदू धर्म के कारण हो रही सामाजिक और आर्थिक अक्षमता खत्म हो जाती है। इसलिए सुरक्षा देना आवश्यक नहीं रहता।

इसी तरह, पूर्व कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने राज्य सभा में एक बार कहा था कि भारत का संविधान कहता है कि हिंदू धर्म से ईसाई या इस्लाम धर्म में धर्मांतरण कर लेने के बाद वह व्यक्ति हिंदुओं जातियों के बनाए गए आरक्षण का लाभ नहीं ले सकता है।

मानहानि मामले में राहुल गाँधी को राहत नहीं, 2 साल की सजा सूरत कोर्ट ने रखी बरकरार: ‘हर चोर का मोदी सरनेम क्यों’ कहने पर ठहराए गए थे दोषी

काॅन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी (Rahul Gandhi) को सूरत की सेशन कोर्ट से भी राहत नहीं मिली है। 20 अप्रैल 2023 को कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी। इसका मतलब है कि मानहानि मामले में उनकी दो साल की सजा बरकरार रहेगी। साथ ही उनकी संसद सदस्यता भी बहाल नहीं होगी। अब इस मामले में राहत के लिए उन्हें हाई कोर्ट जाना होगा।

काॅन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी को सूरत की सेशन कोर्ट से भी राहत नहीं मिली है। 20 अप्रैल 2023 को सेशन कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी। याचिका में उन्होंने मानहानि मामले में 2 साल की सजा पर रोक की गुहार लगाई थी। राहुल गाँधी ने 2019 में कर्नाटक की एक रैली को संबोधित करते हुए कहा था ‘सभी चोरों का सरनेम मोदी क्यों होता है’। इसके बाद बीजेपी नेता पूर्णेश मोदी ने उनके खिलाफ केस दर्ज कराया था। सूरत की मजिस्ट्रेट कोर्ट ने इसी साल 23 मार्च को काॅन्ग्रेस नेता को इस मामले में 2 साल की सजा सुनाई थी। इसके बाद उनकी लोकसभा सदस्यता भी चली गई थी।

13 अप्रैल 2019 को राहुल गाँधी ने कहा था, “नीरव मोदी, ललित मोदी, नरेंद्र मोदी इन सभी के नाम में मोदी लगा हुआ है। सभी चोरों के नाम में मोदी क्यों लगा होता है।” इस बयान के बाद भाजपा नेता पूर्णेश मोदी ने कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष के खिलाफ सूरत में मामला दर्ज कराया था। राहुल गाँधी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 499 और 500 के तहत केस दर्ज करवाया था, जो आपराधिक मानहानि से संबंधित है। करीब 4 साल बाद मजिस्ट्रेट कोर्ट ने राहुल गाँधी को दोषी पाते हुए सजा सुनाई थी। हालाँकि उन्हें तुरंत जमानत देते हुए ऊपरी अदालत में अपील के लिए 30 दिनों का समय दिया था।

मजिस्ट्रेट कोर्ट के फैसले के विरुद्ध सत्र न्यायालय में अपील दायर की गई थी। इसकी पहली सुनवाई पर राहुल दलबल के साथ कोर्ट पहुँचे थे। पहली सुनवाई पर सेशन कोर्ट ने उन्हें जमानत देते हुए 10 अप्रैल तक मानहानि मामले में सभी पक्षों से जवाब दाखिल करने को कहा था।

सेशन कोर्ट में राहुल गाँधी की तरफ से दी गई दलीलों में से एक में कहा गया था कि न्यायाधीश को उनके कद को उचित श्रेय देना चाहिए था। राहुल गाँधी ने अपने सब्मिशन में कहा था, “उम्मीद की जाती है कि ट्रायल जज दो साल की सजा देने के परिणामों से अवगत होंगे, अर्थात् अनिवार्य अयोग्यता को लेकर। इस तरह की अयोग्यता एक ओर मतदाताओं के जनादेश की अस्वीकृति और दूसरी ओर राजकोष पर भारी बोझ डालती है। इसलिए यह उम्मीद की जाती है कि जज सजा के आदेश में इस प्रकृति के परिणाम का उल्लेख करेंगे।”

दरअसल, राहुल गाँधी का कहना था कि न्यायाधीश ने उन्हें जो सजा सुनाई वह लोकतंत्र के खिलाफ था, क्योंकि इससे राहुल गाँधी को लोकसभा से अयोग्य घोषित कर दिए। न्यायाधीश को इस परिणाम के बारे में ‘जानना’ चाहिए था। राहुल गाँधी का तर्क यह कहने जैसा था कि एक उद्योगपति को उचित सजा नहीं दी जानी चाहिए, क्योंकि इससे उसके व्यवसाय को नुकसान होगा।

परेशानियों से छुटकारा चाहता था सज्जाद हुसैन, मजार के मौलाना ने कहा- जुमे को महिलाओं पर करो हमला: 4 को मार दिया ब्लेड

उत्तर प्रदेश के बरेली में पुलिस ने महिलाओं पर ब्लेड से हमला करने वाले शख्स को गिरफ्तार कर लिया है। पता चला है कि मजार के एक मौलाना के कहने पर वह युवतियों पर ब्लेड अटैक कर रहा था। आरोपित की पहचान सज्जाद हुसैन के तौर पर हुई है। वह मोहल्ला बासमंडी का रहने वाला है। उसकी गिरफ्तारी के बाद बुधवार (19 अप्रैल 2023) को बरेली पुलिस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पूरे मामले का खुलासा किया।

बरेली के एसपी सिटी राहुल भाटी ने बताया कि 20 दिनों से सज्जाद युवतियों का पीछा कर उन पर ब्लेड से हमला कर रहा था। शहर के किला थाना क्षेत्र में तीन और प्रेमनगर इलाके में उसने 1 युवती को जख्मी कर दिया था। इन घटनाओं के बाद अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज किया गया था। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर जाँच शुरू की और सज्जाद पकड़ा गया। सज्जाद युवतियों को निशाना बनाने के लिए बिना नंबर प्लेट वाली मोटरसाइकिल और सनमाइका काटने वाले ब्लेड का इस्तेमाल करता था।

पूछताछ में सज्जाद ने बताया कि वह मुकदमे और घरेलू कलह से परेशान था। इससे छुटकारा पाने के लिए एक मजार के मौलाना से मिला। मौलाना ने सज्जाद से कहा कि यदि वह जुमेरात (गुरुवार) और जुमे (शुक्रवार) के दिन कामकाजी युवतियों को ब्लेड मारकर जख्मी करेगा तो उसे परेशानियों से छुटकारा मिल जाएगा। मौलाना की बात मानकर सज्जाद ने युवतियों को जख्मी करना शुरू किया। पुलिस ने मौलाना को भी आरोपित बनाया है। जल्दी ही मौलाना को भी गिरफ्तार करने की बात कही है।

बता दें कि आरोपित सज्जाद पेशे से बढ़ई है और उसने तीन निकाह किए हुए हैं। तीसरी निकाह के बाद दूसरी पत्नी रवीना से सज्जाद का विवाद हुआ। रवीना ने सज्जाद के खिलाफ दुराचार का मुदकमा दर्ज कराया हुआ है। इन सबसे छुटकारा पाने के लिए सज्जाद किले के पास वाले मजार के मौलाना के संपर्क में आया था।

यमन में ₹1641 के लिए मर गए 85, 300 घायलः रमजान में जकात के लिए जुटे लोगों को कंट्रोल करने के लिए फायरिंग, घबराए लोगों ने एक-दूसरे को कुचला

यमन की राजधानी सना में रमजान के महीने में मची भगदड़ में 85 लोगों की मौत होने की खबर है। 300 से अधिक घायल हैं। मृतकों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। मिली जानकारी के अनुसार 20 अप्रैल 2023 को ईद से पहले जकात लेने के लिए भारी भीड़ जुटी थी। इस पर काबू पाने के लिए हाउती विद्रोहियों ने फायरिंग की। इसके बाद घबराए लोगों ने एक-दूसरे को ही कुचल दिया।

जकात दो कारोबारी बाँट रहे थे। जकात हासिल करने के लिए पहले धक्का-मुक्की हुई जो बाद में भगदड़ में तब्दील हो गई। हादसे के बाद दोनों कारोबारियों को हिरासत में लिए जाने की खबर है। जकात के तौर पर हरेक व्यक्ति को 5 हजार यमनी रियाल दिया जा रहा था। यह भारतीय मुद्रा में करीब 1641 रुपए होता है।

यमन की सरकार के अनुसार दोनों कारोबारी प्रशासन को जानकारी दिए बिना जकात बाँट रहे थे। इस कार्यक्रम में गरीबों को आर्थिक मदद दी जा रही थी। बड़ी संख्या में लोग जकात लेने को जुटे थे। चश्मदीदों अब्देल रहमान अहमद और याहिया मोहसिन ने स्थानीय मीडिया को जानकारी दी कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए हाउती विद्रोहियों ने हवा में फायरिंग की। गोलियाँ बिजली के तार से टकराई और पास के ट्रांसफॉर्मर में धमाका हो गया।

ब्लास्ट के बाद लोग घबरा गए और एक-दूसरे को कुचलते हुए भागने लगे। हादसे में कई लोगों के गंभीर रूप से घायल होने की भी खबर है। बताया जा रहा है कि मरने वालों की संख्या और बढ़ सकती है। नजदीकी अस्पतालों में 300 से ज्यादा घायल लोगों का इलाज जारी है। रिपोर्टों के मुताबिक जकात का यह कार्यक्रम एक स्कूल में आयोजित हो रहा था। सोशल मीडिया पर घटना से संबंधित कई वीडियो वायरल हैं। इसमें दर्जनों शव और चीखते लोगों को देखा जा सकता है। वीडियो में लोग पीड़ितों की मदद करते हुए भी दिखाई दे रहे हैं। हादसे वाली जगह पर खून के धब्बे, जूते और पीड़ितों के कपड़े जमीन पर बिखरे हुए हैं।

बता दें कि जकात एक तरह का दान होता है, जो अमीर मुस्लिम रमजान के महीने में गरीबों को देते हैं। कहते हैं कि अमीर मुस्लिमों को हर साल अपनी संपत्ति का कुछ हिस्सा गरीबों को दान करना फर्ज होता है। हादसे के बाद जकात बाँटने वाले व्यापारियों को हिरासत में लेकर उनसे पूछताछ की जा रही है। बता दें यमन पर साल 2014 से ईरान समर्थित हाउती विद्रोहियों का कब्जा है।

बंगाल में बड़ी मात्रा में जला डाले गए दस्तावेज, बिहार के मामले से संबंधित निकले कागजात: CBI ने मौके पर पहुँच कर की छानबीन, रसीद से लेकर बैंक चेक तक शामिल

पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में कुछ दस्तावेजों को जलाने की सूचना मिलने के बाद पहुँची सीबीआई की टीम ने बचे हुए दस्तावेजों के नमूने जब्त कर लिए। घटना मंगलवार (18 अप्रैल, 2023) की है। इन नमूनों की जाँच के बाद ही पता चल सकेगा कि जलाए गए कागजात किस मामले से जुड़े हुए हैं। हालाँकि, शुरुआती जाँच में यह बताया जा रहा है कि दस्तावेज बिहार के खनन मामले से संबंधित हैं।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार भंडार के अंदुल गरिया इलाके में अज्ञात लोग कुछ दस्तावेजों को जला रहे थे। पुलिस और सीबीआई की टीम को जैसे ही इस बात की जानकारी मिली तो अधिकारी तुरंत मौके पर पहुँचे। इसके बाद उन्होंने आग बुझाने की कोशिश की। कई दस्तावेज पूरी तरह जल चुके थे जबकि कुछ को अधजली अवस्था में जब्त कर लिया गया। इसकी जाँच की जा रही है।

बरामद किए गए कागजों में कैश रसीदें, फाइलें, प्रोजेक्ट रिपोर्ट, कैश मेमो, बैलेंस शीट, बैंक के चेक औऱ सरकारी स्टंप लगे अन्य पेपर्स शामिल हैं। सुनसान इलाके में ऐसे समय में कागजात जलाए गए हैं जब सीबीआई द्वारा राज्य में एसएससी घोटाले की जाँच की जा रही है। फिलहाल केंद्रीय एजेंसी इस बात का पता लगा रही है कि कागजों को क्यों जलाया जा रहा था?

दस्तावेजों को लेकर सीबीआई के ऑफिसर्स ने स्थानीय लोगों से पूछताछ की। इस दौरान पता चला है कि सोमवार (17 अप्रैल) की रात ही इन कागजात को खुले में फेंक दिया गया था। मंगलवार की सुबह इन दस्तावेजों में आग लगा दिया गया था। जिसके बाद स्थानीय लोगों ने पुलिस को इस बात की जानकारी दी। लोगों ने बताया कि कागजों को लॉरी ट्रक में लाया गया था।

केंद्रीय एजेंसी को शक है कि कागजात किसी ऐसे मामले से संबंधित हैं जिसकी जाँच की जा रही है और सबूतों को नष्ट करने के मकसद से इनको आग के हवाले किया गया है। जिस जमीन पर कागजात को जलाया गया वह राजेश सिंह नाम के व्यक्ति है। राजेश बिहार के रहने वाले हैं। उन्होंने यह जमीन कुछ समय पहले इसे भारतीय वायु सेना के एक पायलट से खरीदी थी। सीबीआई ने राजेश सिंह को पूछताछ के लिए बुलाया है।

जावेद ने मॉल में मेडिकल की छात्रा के पीछे खड़े होकर की अश्लील हरकत, जींस कर दिया गंदा: जैन समाज की पीड़िता ने पकड़ कर किया पुलिस के हवाले

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में जावेद नाम का एक शख्स शॉपिंग मॉल में बिलिंग करा रही एक युवती के साथ अश्लील हरकत की। उसने युवती के पीछे खड़े होकर उसके जिंस को गंदा कर दिया। इसके बाद आसपास के लोगों ने उसे पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया।

पुलिस को दी गई शिकायत में 23 साल की युवती ने बताया कि वह हरियाणा के सोनीपत के एक कस्बा की रहने वाली है और मुरादाबाद के निजी विश्वविद्यालय TMU से डॉक्टर ऑफ फार्मेसी (D.Pharma) की पढ़ाई कर रही है।

ऑपइंडिया के पास मौजूद शिकायत की कॉपी में युवती ने आगे बताया कि वह 16 अप्रैल को अपनी बहन के साथ दोपहर में V मार्ट में शॉपिंग के लिए गई थी। जब वह बिलिंग कराने लगी तो एक आदमी उसके पीछे आकर अश्लील हरकत करने लगा और पीछे से जिंस गंदी करके भागने लगा।

इसके बाद युवती ने अपनी बहन और वहाँ पर मौजूद मैनेजर प्रवीण कुमार की मदद से जावेद को पकड़ लिया। इस दौरान आसपास के और भी लोग जमा हो गए। जब लोगों ने आरोपित से उसका नाम पूछा तो उसने अपना नाम जावेद पुत्र मकसूर बताया। उसने बताया कि वह मुरादाबाद के कोतलवाली थाना के लाल मस्जिद चौक इलाके का रहने वाला है।

पीड़िता लोगों की मदद से उसे पकड़ कर थाना कोतवाली ले गई और पुलिस के हवाले कर दिया। युवती की शिकायत के आधार पर पुलिस ने जावेद के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 354 के खिलाफ मामला दर्ज कर आरोपित को गिरफ्तार कर लिया।

‘PM मोदी देश को आगे लेकर जाएँगे’: प्रधानमंत्री के कायल हुए रैपर यो यो हनी सिंह, बोले – वो नाटक नहीं करते बल्कि असली आदमी हैं, आज की जनरेशन ये समझती है

रैपर यो यो हनी सिंह ने एक नए एल्बम के साथ वापसी की है। उनका नया एल्बम हनी 3.O (Honey 3.O) आ चुका है। इस एल्बम को लेकर हनी सिंह ने कई इंटरव्यू भी दिए हैं। वापसी को लेकर हनी सिंह ने कहा कि पहले के मुकाबले अब ऑडियंस का टेस्ट बदला है। इसलिए गाने उसी हिसाब से बनाने होंगे। हनी सिंह का कहना है कि इस बुरे दौर से गुजरने के बाद अब उन्हें अपनी पुरानी शोहरत हासिल करनी है। अलग-अलग लोगों को दिए गए साक्षात्कार के दौरान रैपर ने पीएम नरेंद्र मोदी की जमकर तारीफ की।

सिद्धार्थ कनन को दिए इंटरव्यू में रैपर यो यो हनी सिंह आज के समय के ऑडियंस की बात करते हैं। हनी सिंह कहते हैं, “आज की जेनरेशन बहुत समझदार है। उनको नाटक और असल में फर्क पता है। आज हिंदु्स्तान में जितने पॉलिटिशियन हैं, पॉलिटिशियन नहीं कहूँगा, मैं लीडर कहूँगा – जैसे मोदी जी। आज की जनरेशन को पता है ये असली आदमी है ये कोई नाटक नहीं करता।” सिद्धार्थ कनन ने अपने यूट्यूब चैनल पर इस इंटरव्यू को अपलोड किया है। लगभग 16 मिनट के इस इंटरव्यू में 12 मिनट 20 सेकेंड के बाद यह बातें सुनी जा सकती हैं।

इसी तरह का इंटरव्यू सिंगर और रैपर ने राज शमानी को भी दिया है। सवालों का जवाब देते हुए हनी सिंह कहते हैं कि हम ग्लोबल लोग हैं और अपने देश के लोगों के पसंद के हिसाब से काम करते हैं। काम अच्छा हुआ तो दुनिया भर के लोग सुनेंगे ही। उन्होंने इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उदाहरण दिया। हनी सिंह ने कहा, “मोदी जी आ गए हैं हिंदुस्तान को आगे लेकर जाएँगे अपने आप। हमें थोड़ी न गोरों कालों की तक पहुँचना है। मोदी जी हमेशा हिंदी में बात करते हैं। वो कोई ब्रिटिश एक्सेंट में बात नहीं करते। सिंपल आदमी हैं। यही गणित है।”

इस दौरान हनी सिंह ने सिद्धू मुसेवाला का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सिद्धू मूसेवाला ने सिर्फ पंजाबी और देसी स्टाइल में गाया, लेकिन विदेशों तक अपनी पहचान बनाई। हनी सिंह ने कहा कि उनके गानों में अपशब्दों का इस्तेमाल नहीं किया गया है। उनके एल्बम का पहला गाना नागन (Naagan Song) हाल ही में रिलीज हुआ है। जिसे यूट्यूब पर 2 मिलियन से ज्यादा बार देखा जा चुका है। लिरिक्स में भले ही अपशब्दों का इस्तेमाल नहीं किया गया हो लेकिन इस वीडियो में बिकनी गर्ल्स का इस्तेमाल किया गया है।

जिस कॉन्ग्रेस नेता पर लगे महिला उत्पीड़न और बदजुबानी के आरोप, उसे पार्टी ने बनाया स्टार प्रचारक: कर्नाटक में रैलियाँ करेंगे श्रीनिवास BV

महिला उत्पीड़न के आरोपों के बावजूद कॉन्ग्रेस ने अपने नेता श्रीनिवास BV को कर्नाटक विधानसभा चुनाव में पार्टी के स्टार प्रचारकों की सूची में जगह दी है। ‘यूथ कॉन्ग्रेस (IYC)’ के अध्यक्ष श्रीनिवास BV पर असम की प्रदेश अध्यक्ष डॉ अंगकिता दत्ता ने उत्पीड़न और बदजुबानी के आरोप लगाए थे। इसके बावजूद पार्टी ने उन्हें ये जिम्मेदारी दी है। राहुल गाँधी अब तक भाषणों में ‘महिला सुरक्षा’ की बातें करते आए हैं, हालाँकि, पार्टी में ऐसा कुछ भी नहीं दिख रहा।

बता दें कि कर्नाटक में बुधवार (10 मई, 2023) को विधानसभा चुनाव होने हैं, जबकि नतीजे 13 मई को जारी किए जाएँगे। राज्य में भाजपा सत्ता में है और कॉन्ग्रेस मुख्य विपक्षी पार्टी है। स्टार प्रचारकों की सूची में पार्टी ने नंबर-1 पर राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को रखा है। इसके बाद क्रमशः सोनिया गाँधी, राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी वाड्रा का नाम है। पाँचवें और छठे नंबर पर राज्य में कॉन्ग्रेस के बड़े नेताओं प्रदेश अध्यक्ष डीके शिवकुमार और पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दरमैया का नाम है।

इस सूची में 33वें नंबर पर महिला उत्पीड़न और बदजुबानी के आरोपित श्रीनिवास BV का नाम है। बता दें कि डॉ अंगकिता दत्ता ने आरोप लगाया है कि पिछले 6 महीने से लगातार श्रीनिवास BV और यूथ कॉन्ग्रेस के सेक्रेटरी इंचार्ज वर्धन यादव लगातार उनका उत्पीड़न कर रहे थे। राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने भी इसका संज्ञान लिया है। दत्ता ने बताया कि पार्टी आलाकमान को सूचित किए जाने के बावजूद उन दोनों के विरुद्ध कोई इन्क्वायरी कमिटी गठित नहीं की गई है।

दत्ता ने कहा कि जब वो रायपुर प्लैनेरी सेशन में गई थीं, तब श्रीनिवास BV ने उन्हें कहा, “तुम क्या पीकर मैसेज करती हो? क्या पीती हो तुम? वोडका पीती हो क्या?” डॉ अंगकिता दत्ता ने कहा कि वो काफी हैरान थीं कि IYC का अध्यक्ष एक प्रदेश अध्यक्ष के साथ कैसे इस तरह से बात कर सकता है। डॉक्टर अंगकिता दत्ता ने कहा, “वो हमें बाहर निकाल कर फेंकना चाहते हैं। हमलोग पार्टी से प्यार करते हैं, लेकिन श्रीनिवास BV और वर्धन यादव जैसे लोगों ने पार्टी को बर्बाद करने का काम किया है।”

‘समलैंगिक विवाह शहरी एलिट कॉन्सेप्ट है – ये साबित करने के लिए सरकार के पास डेटा नहीं’: बोले CJI चंद्रचूड़ – यौन पहचान को लेकर शहरी ज़्यादा मुखर

समलैंगिक विवाह (Same Sex Marriage) को लेकर सुप्रीम कोर्ट में बहस जारी है। केंद्र सरकार ने समलैंगिक विवाह का विरोध करते हुए इसे ‘अर्बन एलिटिस्ट कॉन्सेप्ट’ (शहरों में रहने वाले अभिजात वर्गों की अवधारणा) बताया था। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दूसरे दिन यानी बुधवार (19 अप्रैल 2023) को कहा कि इसे एलिट कॉन्सेप्ट बताने के लिए सरकार के पास कोई डेटा नहीं है।

मामले की सुनवाई कर रहे सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा, “राज्य किसी व्यक्ति के खिलाफ उसकी किसी ऐसी विशेषता के आधार पर भेदभाव नहीं कर सकता, जिस पर उसका कोई वश न हो। जब आप इसको जन्मजात गुण के रूप में देखते हैं तो ये खुद ही अर्बन एलिटिस्ट कॉन्सेप्ट को काउंटर करता है।”

CJI ने कहा कि शहरी क्षेत्रों में रहने वाले अधिक लोग अपनी यौन पहचान को लेकर मुखर हो रहे हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि ये माँगे संभ्रांत शहरी लोगों तक ही सीमित है। इसे साबित करने के लिए सरकार के पास कोई डेटा है।

दरअसल, सरकार ने अपने हलफनामे में कहा है कि समलैंगिक विवाह को मान्यता देने की माँग करने वाली याचिकाएँ ‘सामाजिक स्वीकृति के उद्देश्य के लिए केवल शहरी अभिजात्य विचारों’ का प्रतिनिधित्व करती हैं। केंद्र ने यह भी कहा था है कि विधायिका को समाज के सभी वर्गों के व्यापक दृष्टिकोण पर विचार करना होगा।

केंद्र सरकार ने यह भी कहा कि भागीदारों के रूप में एक साथ रहना और समान लिंग वाले व्यक्तियों द्वारा यौन संबंध बनाने को भारतीय परिवार इकाई की अवधारणा के साथ तुलना नहीं की जा सकती। ऐसे विवाह से पैदा हुए बच्चों के साथ जैविक पुरुष और जैविक महिला शामिल हैं।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ समलैंगिक विवाहों को कानूनी मान्यता देने की माँग वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है। इस पीठ में CJI चंद्रचूड़ के अलावा जस्टिस संजय किशन कौल, एस रवींद्र भट, पीएस नरसिम्हा और हिमा कोहली शामिल हैं। इसमें 20 याचिकाओं पर सुनवाई हो रही है।

इस मौके पर वरिष्ठ अधिवक्ता केवी विश्वनाथन ने पीठ को बताया कि उनकी मुवक्किल ज़ैनब पटेल एक ट्रांसजेंडर महिला हैं, जिन्हें उनके परिवार ने अस्वीकार कर दिया था। इसके बाद उन्होंने सड़कों पर भीख माँगा और केपीएमजी की निदेशक बनने तक का सफर तय किया। उनके लिए शहरी अभिजात्य वर्ग कहना ठीक नहीं है।

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की तरफ से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इस पर सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को पक्षकार बनाने की माँग की है। वहीं, याचिकाकर्ताओं की तरफ से पेश सीनियर ऐडवोकेट मुकुल रोहतगी ने उनके समर्थन में खजुराहो के मंदिर की मूर्तियों का हवाला दिया और कहा कि समलैंगिकता हजारों वर्ष से भारत में मौजूद है। उन्होंने कहा कि यह तब से मौजूद है, जबसे समाज अस्तित्व में आया। 

सुनवाई के दौरान इस बात पर भी उठाया गया कि अगर समलैंगिक विवाह को मान्यता मिली तो यह कैसे तय होगा कि कौन-सा पार्टनर 18 साल की उम्र में है और कौन-सा 21 वर्ष का। दरअसल, देश ने लड़कों की शादी की उम्र 21 साल और लड़कियों की 18 साल तय किया गया है।

इस पर याचिकाकर्ता की तरफ से कहा गया कि अगर दो लड़कियाँ शादी कर रही हों तो उम्र 18 साल रखा जा सकता है और अगर दो पुरुष शादी कर रहे हों तो उम्र 21 साल तय की जा सकती है। हालाँकि, इस पर कोर्ट सहमत नहीं दिखा और कहा कि याचिकाकर्ता के जेंडर न्यूट्रल की माँग पर ही सवाल उठेगा।

बता दें कि समलैंगिक विवाह पर पहले दिन सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से प्रस्तुुत एसजी तुषार मेहता ने कहा था कि केस पर सरकार अपनी आरंभिक आपत्तियाँ बताना चाहती है। इन आपत्तियों को पहले सुना जाना चाहिए, इसके बाद याचिकाकर्ताओं की याचिका पर सुनवाई होनी चाहिए।

इसके बाद CJI चंद्रचूड़ ने कहा, “मैं कोर्ट का इंचार्ज हूँ। यह फैसला मैं करूँगा। पहले याचिकाकर्ता को सुना जाएगा। इस अदालत में सुनवाई की प्रक्रिया क्या होगी यह बताने की अनुमति मैं किसी को नहीं दूँगा।”

सुनवाई के दौरान ही मंगलवार (18 अप्रैल 2023) को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि पुरुष या महिला की पूर्ण अवधारणा केवल जननांगों के बारे में नहीं हो सकता। कोर्ट ने यह टिप्पणी उस समय की, जब केंद्र ने दलील दी कि विवाह केवल एक जैविक पुरुष और एक जैविक महिला के बीच ही हो सकता है। इसमें विशेष विवाह अधिनियम भी शामिल है।