Home Blog Page 189

मस्जिद के बाहर माँगता है भीख, करना चाहता है तीसरा निकाह: भिखारी की दूसरी बीवी पहुँची केरल कोर्ट, अदालत ने कहा- सबका पेट पाल सको तो कर लो

केरल हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ में एक से ज़्यादा निकाह की इजाजत है, लेकिन एक शर्त है। मियाँ को अपनी हर बीवी के साथ न्याय करना होगा। उसे अपनी सभी पत्नियों का ख्याल रखना होगा। कोर्ट ने यह टिप्पणी एक ऐसे व्यक्ति के मामले में की जो भीख माँगकर गुजारा करता है। वह तीसरा निकाह करने की तैयारी में था। कोर्ट ने सामाजिक कल्याण विभाग को निर्देश दिया कि उस व्यक्ति की काउंसलिंग की जाए ताकि उसे तीसरी निकाह करने से रोका जा सके।

क्या था पूरा मामला?

रिपोर्ट के अनुसार, यह मामला तब सामने आया जब एक व्यक्ति की दूसरी बीवी ने फैमिली कोर्ट से गुज़ारा भत्ता माँगा था। मियाँ भीख माँगता है और बीवी का दावा था कि वह शुक्रवार (19 सितंबर 2025) को मस्जिदों के बाहर भीख माँगकर लगभग 25,000 रुपए महीने कमाता है।

हालाँकि, फैमिली कोर्ट ने बीवी की गुज़ारा भत्ता की माँग यह कहकर खारिज कर दी थी कि एक भिखारी को यह देने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।

हाई कोर्ट की टिप्पणी

बीवी ने इस फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील की और बताया कि उसका मियाँ उसे तलाक की धमकी दे रहा है और तीसरी शादी करने वाला है। केरल हाई कोर्ट के जस्टिस पीवी कुन्हीकृष्णन ने फैमिली कोर्ट के फैसले को तो सही ठहराया, लेकिन तीसरी शादी के मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाया। जस्टिस ने कहा कि जो व्यक्ति अपनी बीवियों का खर्चा नहीं उठा सकता, उसे एक और निकाह करने का कोई हक नहीं है।

कुरान का हवाला और पॉलिगामी की शर्तें

कोर्ट ने कुरान की आयतों का हवाला देते हुए समझाया कि पॉलिगामी यानि बहुविवाह की इजाजत इस शर्त पर दी गई है कि पुरुष अपनी सभी बीवियों के साथ न्याय कर सके। कोर्ट ने साफ तौर पर कहा कि एक ऐसा व्यक्ति जो अपनी दूसरी या तीसरी बीवी का भरण-पोषण नहीं कर सकता, उसे दोबारा निकाह करने का कोई अधिकार नहीं है।

कोर्ट का यह फैसला मुस्लिम पर्सनल लॉ में पॉलिगामी (बहुविवाह) के अधिकार को स्पष्ट करता है, लेकिन इसे जिम्मेदारी और न्याय की कसौटी पर परखता है।

कानपुर में सिर्फ ‘I Love Muhammad’ के बैनर पर नहीं है विवाद, हिंदुओं के धार्मिक पोस्टर फाड़ने की छिपाई जा रही बात: जानें FIR में क्या निकला

उत्तर प्रदेश के कानपुर में कथित तौर पर ‘I Love Muhammad’ के बैनर हटाने को लेकर हुए विवाद की चपेट में पूरा देश आता जा रहा है। बिहार से लेकर हैदराबाद तक देश के अलग-अलग हिस्सों में मुस्लिम समुदाय के लोग प्रदर्शन कर रहे हैं। गुजरात के गोधरा में तो इस मामले को लेकर हिंसा भी हुई है और कट्टरपंथियों ने थाने में तोड़फोड़ कर दी है।

इसके अलावा सोशल मीडिया पर इसे लेकर एक संगठित अभियान चलाया जा रहा है और मुस्लिम युवा ‘I Love Muhammad’ के हैशटेग के साथ अपने पोस्ट शेयर कर रहे हैं। इस पूरे प्रदर्शन के पीछे प्रदर्शनकारियों का दावा है, “पैगंबर साहब की शान में गुस्ताखी की जा रही है।”

पुलिस ने इससे जुड़े मामले में करीब एक दर्जन युवकों के खिलाफ केस दर्ज किया है। इसके बाद से ही ऐसा माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है कि यह विवाद सिर्फ ‘I Love Muhammad’ के पोस्टर को लेकर है।

क्या है असली कहानी?

यह बात सही है कि ‘I Love Muhammad’ के बैनर लगाने को लेकर विवाद हुआ था लेकिन पूरी कहानी इस विवाद से आगे की है। ऑपइंडिया द्वारा ऐक्सेस की गई FIR को पढ़ने के बाद असली बात सामने आ गई।

इस विवाद की शुरुआत हुई 4 सितंबर को रावतपुर थाना क्षेत्र के सैयद नगर मोहल्ले में जफर वाली गली के सामने मुस्लिम समुदाय द्वारा बारावफात की रोशनी के कार्यक्रम में सजावट के लिए ‘I Love Muhammad’ का लाइट बोर्ड लगाया गया। पुलिस द्वारा दर्ज FIR में लिखा गया है, “ऐसा पहले नहीं हुआ था और यह मुस्लिम समुदाय के बारावफात कार्यक्रम के आयोजकों द्वारा नई परंपरा की शुरुआत की जा रही थी।”

इस बोर्ड का स्थानीय लोगों ने विरोध किया तो दोनों पक्षों के बीच बहस शुरू हो गई और पुलिस ने वहाँ से हटवाकर वो बोर्ड थोड़ी दूरी पर लगवा दिया। इसके बाद मामला शांत हो गया। यानी FIR में यह बात स्पष्ट तौर पर लिखी गई है कि जब मामला शांत कराया गया तो बोर्ड वहाँ लगा हुआ था। तो फिर विवाद कैसे हुआ?

असल में विवाद की शुरुआत हुई इसके अगले दिन यानी 5 सितंबर को इस दिन बारावफात का जुलूस निकाला जाना था। FIR के मुताबिक, “जुलूस निकाले जाने पर रावतपुर गाँव में हिंदू बस्ती से जुलूस निकाल रहे मुस्लिम समुदाय के कुछ अज्ञात मुस्लिम युवकों के द्वारा रास्ते में लगे हिंदू समुदाय के धार्मिक पोस्टर को जानबूझकर जुलूस में शामिल गाड़ी…में सवार मुस्लिम युवको द्वारा डंडों की मदद से फाड़ दिया गया।”

पुलिस को 10 सितंबर को इन घटनाओं की CCTV फुटेज भी प्राप्त हो गई। FIR में कहा गया है, “CCTV रिकॉर्डिंग से स्पष्ट हो रहा है कि घटना वाले दिनजुलूस में शामिल मुस्लिम समुदाय के युवकों द्वारा जानबूझकर सांप्रदायिक माहौल खराब करने को लेकर ऐसे कृत्य किए गए जिससे क्षेत्र में अराजकता फैल सके तथा सांप्रदायिक विवाद उत्पन्न हो सके।”

पुलिस द्वारा दर्ज की गई FIR का एक हिस्सा

आप इन शब्दों पर भी ध्यान दें तो स्पष्ट हो जाता है कि यह मामला केवल ‘I Love Muhammad’ के बैनर से जुड़ा हुआ नहीं है। वो बस इस पूरे विवाद का एक हिस्सा है जबकि असली कहानी मुस्लिम युवकों द्वारा हिंदुओं के धार्मिक पोस्टर को मुस्लिम द्वारा फाड़ने की है।

क्या कह रही है पुलिस?

वहीं, इस मामले में रावतपुर थाने के SHO कृष्ण मिश्रा ने भी ऑपइंडिया से बातचीत में इस बात की पुष्टि की है यह FIR ‘I Love Muhammad’ के बैनर लगाने को लेकर नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि जिन युवकों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है, उन्होंने सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश की थी।

इस जानकारी से स्पष्ट है कि यह FIR सिर्फ उस वजह से नहीं लिखी गई है जिसके चलते देशभर में प्रदर्शन किए जा रहे हैं। प्रदर्शनों के दौरान इसके असली पक्ष को छिपा लिया जा रहा है और विवाद को हवा देने के लिए अधूरी जानकारी का इस्तेमाल हो रहा है। जिस तरह गुजरात में इसे लेकर हिंसा की गई है तो आने वाले वक्त में ऐसे प्रदर्शनों को लेकर और सावधानी बरतने की जरूरत है।

‘चिप से शिप तक का भारत में करेंगे निर्माण’: गुजरात को PM मोदी ने दी ₹34200 करोड़ की सौगात, बोले- 2047 तक हर कीमत पर बनना होगा आत्मनिर्भर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के भावनगर में ‘समुद्र से समृद्धि’ कार्यक्रम में हिस्सा लिया। यहाँ पीएम मोदी ने 34,200 करोड़ रुपए से अधिक की विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। ये परियोजनाएँ समुद्री क्षेत्र, ऊर्जा, राजमार्ग, स्वास्थ्य और शहरी विकास से संबंधित हैं, जो न केवल गुजरात बल्कि पूरे देश के समग्र विकास को गति प्रदान करेंगी। पीएम मोदी ने भावनगर से जनता को संबोधित किया।

पीएम मोदी ने कहा, “ये कार्यक्रम तो भावनगर में हो रहा है, लेकिन ये कार्यक्रम पूरे हिंदुस्तान का है। पूरे भारत में समुद्र से समृद्धि से जाने की ओर हमारी दिशा क्या है, उसके लिए आज इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम का केंद्र भावनगर को चुना गया है। गुजरात और भावनगर के लोगों को बहुत बहुत बधाई।”

पीएम मोदी ने अपने जन्मदिन पर मिली शुभकामनाओं पर आभार जताते हुए कहा, “17 सितंबर को आप सबने अपने नरेन्द्र भाई को जो शुभकामनाएँ भेजी हैं, देश और दुनिया से जो मुझे शुभकामनाएँ मिली हैं… व्यक्तिगत तौर पर सबका धन्यवाद करना संभव नहीं है, लेकिन भारत के कोने-कोने से, विश्वभर से ये जो प्यार मिला है, आशीर्वाद मिले हैं। ये मेरी बहुत बड़ी संपत्ति है, ये मेरी बहुत बड़ी ताकत है। इसलिए मैं आज सार्वजनिक रूप से देश और दुनिया के सभी महानुभावों का हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ।”

दुनिया में हमारा सबसे बड़ा दुश्मन, दूसरे देशों पर निर्भरता

पीएम मोदी ने कहा, “भारत आज वैश्विक बंधुत्व की भावना के साथ आगे बढ़ रहा है। दुनिया में कोई भी बड़ा दुश्मन नहीं है। हमारा असली दुश्मन दूसरे देशों पर हमारी निर्भरता है। हम सभी को इस निर्भरता को दूर करने के लिए प्रयास करना चाहिए, क्योंकि हम विदेशी देशों पर जितना अधिक निर्भर होंगे, हमारा देश उतना ही अधिक असुरक्षित होगा।”

पीएम मोदी ने कहा, “आज मैं ऐसे समय में भावनगर आया हूँ, जब नवरात्रि का पर्व शुरू होने वाला है। इस बार GST में कमी की वजह से बाजारों में रौनक भी ज्यादा रहने वाली है। और ये उत्सव के इसी माहौल में आज हम समुद्र से समृद्धि का महा-उत्सव मना रहे हैं। 21वीं सदी का भारत आज समुद्र को बहुत बड़े अवसर के रूप में देख रहा है। थोड़ी देर पहले यहाँ port led development को गति देने के लिए हजारों करोड़ रुपए का शिलान्यास और उद्धाटन किया गया है।”

पीएम मोदी ने कहा, “भारत आज विश्वबंधु की भावना से आगे बढ़ रहा है। दुनिया में हमारा कोई बड़ा दुश्मन नहीं है। सच्चे अर्थ में अगर हमारा कोई दुश्मन है तो वो है दूसरे देशों पर हमारी निर्भरता…। यही हमारा सबसे बड़ा दुश्मन है और हमें मिलकर भारत के इस दुश्मन को हराना ही होगा।

कॉन्ग्रेस ने देश के युवाओं को नुकसान पहुँचाया

पीएम मोदी ने कहा, “भारत में क्षमता की कभी कोई कमी नहीं रही। लेकिन कॉन्ग्रेस ने देश की क्षमता को लगातार नजरअंदाज किया। यही कारण है कि आजादी के छह-सात दशक बाद भी भारत वह हासिल नहीं कर पाया जिसका वह हकदार था। इसके दो प्रमुख कारण थे। कॉन्ग्रेस ने लंबे समय तक देश को लाइसेंस राज में फँसाए रखा और वैश्विक बाज़ारों से अलग-थलग रखा।

बाद में, जब वैश्वीकरण का दौर शुरू हुआ, तो उसने सिर्फ आयात का रास्ता अपनाया और फिर भी हजारों करोड़ रुपए के घोटाले किए। ऐसी नीतियों के जरिए कॉन्ग्रेस ने हमारे देश के युवाओं को बहुत नुकसान पहुँचाया।”

पीएम मोदी ने कहा, “भारत में सामर्थ्य की कोई कमी नहीं है, लेकिन आजादी के बाद कॉन्ग्रेस ने भारत के हर सामर्थ्य को नजरअंदाज किया, इसलिए आजादी के 6-7 दशकों बाद भी भारत वो सफलता हासिल नहीं कर पाया, जिसके हम हकदार थे। इसके दो बड़े कारण रहे- लंबे समय तक कॉन्ग्रेस सरकार ने देश को लाइसेंस कोटा राज में उलझाए रखा। दुनिया के बाजार से अलग-थलग रखा। कॉन्ग्रेस सरकार की नीतियों ने देश के नौजवानों का बहुत नुकसान किया।”

40% का व्यापार 5% तक ले आई कॉन्ग्रेस

पीएम मोदी ने कहा, “भारत में जहाज निर्माण को मजबूत करने के बजाय, कॉन्ग्रेस ने विदेशी जहाजों को किराये पर लेना बेहतर समझा। परिणामस्वरूप, भारत का जहाज निर्माण तंत्र ध्वस्त हो गया और विदेशी जहाजों पर निर्भरता हमारी मजबूरी बन गई। इसके परिणाम गंभीर थे: पचास साल पहले, हमारा लगभग 40% व्यापार भारतीय जहाजों पर होता था, लेकिन आज यह आँकड़ा मुश्किल से 5% रह गया है। इसका मतलब है कि हमारे लगभग 95% व्यापार के लिए हम विदेशी जहाजों पर निर्भर हो गए, जिसकी देश को भारी कीमत चुकानी पड़ी।”

‘2047 तक होना होगा आत्मनिर्भर’

पीएम मोदी ने कहा, “2047 तक हमें विकसित होना है तो भारत को आत्मनिर्भर होना ही होगा… इसके अलावा कोई विकल्प नहीं है। 140 करोड़ देशवासियों का एक ही संकल्प होना चाहिए- Chip हो या Ship… हमें भारत में ही बनाने होंगे। इसी सोच के साथ आज भारत Maritime Sector भी नेक्स्ट जेनरेशन रिफॉर्म करने जा रहा है। देश के Maritime Sector को मजबूती देने के लिए एक बहुत ऐतिहासिक निर्णय हुआ है… अब सरकार ने बड़े जहाजों को Infrastructure के रूप में मान्यता दे दी है।”

पीएम मोदी ने कहा, “आज भारत एक अलग मिजाज के साथ आगे बढ़ रहा है। हम जो लक्ष्य तय करते हैं उसे अब समय से पहले पूरा करके भी दिखाते हैं। सोलर सेक्टर में भारत अब अपने लक्ष्यों को चार-चार, पाँच-पाँच साल पहले हासिल कर रहा है। हमने समुद्री क्षेत्र में सुधारों की एक श्रृंखला शुरू की है। हमारी सरकार ने राष्ट्र के समक्ष पाँच समुद्री कानूनों को नए रूप में प्रस्तुत किया है। ये कानून शिपिंग क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव लाएँगे।”

गुजरात में ‘समुद्र से समृद्धि’ कार्यक्रम

कार्यक्रम के दौरान समुद्री क्षेत्र से जुड़े कुछ बड़े प्रोजेक्ट्स में 7870 करोड़ रुपए से भी अधिक का निवेश शामिल है। इनमें मुंबई में नया क्रूज टर्मिनल, कोलकाता और पारादीप में नए कंटेनर टर्मिनल और कांडला में नया कार्गो बर्थ शामिल हैं। ये सभी काम भारत के बंदरगाहों को और बेहतर बनाएँगे और समुद्री व्यापार को बढ़ावा देंगे।

इसके अलावा, पटना और वाराणसी में जहाज मरम्मत की सुविधाएँ भी बनाई जाएँगी। इससे न सिर्फ समुद्री व्यापार में मदद मिलेगी, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी और रोजगार के नए मौके बनेंगे। इन परियोजनाओं से भारत के प्रमुख बंदरगाहों में बदलाव आएगा और इससे भारत में व्यापार को और बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, समुद्री सुरक्षा भी मजबूत होगी।

विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास

प्रधानमंत्री मोदी ने गुजरात में 26354 करोड़ रुपए की परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास भी किया, जिसमें समुद्री परियोजनाओं के अलावा कई और महत्वपूर्ण योजनाएँ शामिल हैं। इनमें ग्रीन बायो-मेथनॉल और नवीकरणीय ऊर्जा से जुड़ी परियोजनाएँ हैं, जो भारत को ग्रीन एनर्जी की दिशा में मदद करेंगी। इसके अलावा, सड़कों, अस्पतालों और शहरी परिवहन के लिए भी कई परियोजनाएँ शुरू की जाएँगी, जैसे भावनगर और जामनगर में अस्पतालों का विस्तार और 70 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्गों को चार लेन में बदलना।

प्रधानमंत्री मोदी गुजरात में नवीकरणीय ऊर्जा और स्वास्थ्य सेवाओं के विकास के लिए कुछ महत्वपूर्ण योजनाओं का उद्घाटन भी किया। इनमें 600 मेगावाट की ग्रीन शू पहल, 475 मेगावाट की पीएम-कुसुम सोलर परियोजना और किसानों के लिए सौर ऊर्जा से जुड़े नए कार्यक्रम शामिल हैं। इसके साथ ही, स्वास्थ्य क्षेत्र में भी कई नई योजनाएँ शुरू की जाएँगी, जैसे भावनगर में सर टी जनरल अस्पताल और जामनगर में गुरु गोविंद सिंह सरकारी अस्पताल का विस्तार।

धोलेरा और राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर का दौरा

प्रधानमंत्री मोदी धोलेरा में बन रहे हरित औद्योगिक शहर का हवाई सर्वेक्षण करेंगे। यहाँ एक नया स्मार्ट शहर बनाया जा रहा है, जो पर्यावरण के अनुकूल होगा। इसके बाद, वे लोथल में बन रहे राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर का दौरा करेंगे।

इस परिसर को भारत की पुरानी समुद्री धरोहर को बचाने और बढ़ावा देने के लिए 4500 करोड़ रुपए से बनाया जा रहा है। यह एक बड़ा पर्यटन और शिक्षा का केंद्र बनेगा, जहाँ लोग समुद्री इतिहास के बारे में जान सकेंगे।

ऑपरेशन सिंदूर से डरे जैश-हिजबुल आतंकी, बदलने लगे अपना ठिकाना: PAK एजेंसियाँ कर रहीं शिफ्टिंग में मदद, अफगान बॉर्डर पर बनाया ट्रेनिंग सेंटर

भारतीय सेना के ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान में पल रहे आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद और हिजबुल मुजाहिदीन अपने ठिकानों को बदल रहे हैं। अब ये संगठन पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) से हटकर खैबर पख्तूनख्वा इलाके में जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि इस काम में पाकिस्तान की सरकारी एजेंसियाँ भी इनकी मदद कर रही हैं।

खैबर पख्तूनख्वा का इलाका पहाड़ी और दुर्गम है। इससे वहाँ किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई को अंजाम देना मुश्किल होता है। यह क्षेत्र अफगानिस्तान की सीमा के पास है।ऐसे में यह इलाका आतंकियों के लिए एक ‘सुरक्षित पनाहगाह’ बन जाता है। इसीलिए आतंकी इस इलाके में अब अपना जखीरा तैयार करने की सोच रहे हैं।

जैश-ए-मोहम्मद ने बहावलपुर से अपना ट्रेनिंग कैंप मंसेहरा जिले के गढ़ी हबीबुल्लाह कस्बे में शिफ्ट किया है। वहीं हिजबुल मुजाहिदीन ने लोअर दिर जिले के बंदाई इलाके में नया ट्रेनिंग सेंटर शुरू किया है, जिसका नाम ‘HM 313’ रखा गया है। इन जगहों पर नए लड़ाकों को तैयार करने के साथ-साथ कट्टरपंथी सोच फैलाने का काम भी हो रहा है।

313 नाम बद्र गजवा (एक बड़ा इस्लामी युद्ध) और अलकायदा की ब्रिगेड 313 को एक तरह से श्रद्धांजलि है। ये दुनिया में जिहादी को सही ठहराने के हिज़्ब के इरादे को दर्शाता है।

14 सितंबर 2025 को जैश ने गढ़ी हबीबुल्लाह में एक धार्मिक सभा रखी थी। खास बात ये है कि इसमें हथियारबंद लोगों के साथ पाकिस्तान की स्थानीय पुलिस भी मौजूद थी। इस सभा के जरिए युवाओं को आतंकी संगठन से जोड़ने की कोशिश की गई।

25 सितंबर को जैश-ए-मोहम्मद पेशावर के मरकज शहीद मकसूदाबाद में ऑपरेशन सिंदूर में मारे गए मसूद अजहर के भाई यूसुफ अजहर की याद में एक भर्ती अभियान आयोजित करने की योजना बना रहा है।

यहीं पर संगठन के लिए एक नया नाम ‘अल-मुराबितुन’ की घोषणा भी की जा सकती है। ‘अल-मुराबितुन’ का मतलब इस्लाम की धरती के रक्षक है। ये पश्चिमी अफ्रीका के अलकायदा समूह जैसा होगा।

रिपोर्ट्स के मुताबिक इन गतिविधियों में पाकिस्तान की सेना, पुलिस और कुछ राजनीतिक संगठन भी शामिल हैं और पूरी मदद कर रहे हैं। हाल ही में जैश के एक कमांडर मसूद इलियास कश्मीरी ने सार्वजनिक रूप से यह माना है कि ऑपरेशन सिंदूर में मसूद अजहर के परिवार के कई लोग मारे गए हैं। इससे आतंकी संगठन को काफी नुकसान हुआ है।

ऑपरेशन सिंदूर से डरे आतंकी

जम्मू-कश्मीर में पहलगाम की बैसारन घाटी में 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकी हमले के जवाब में भारतीय सेना ने अपनी पूरी तैयारी के साथ 7 मई 2025 को ऑपरेशन सिंदूर की एक बड़ी और सटीक कार्रवाई की।

इस कार्रवाई के तहत पाकिस्तान में सक्रिय आतंकवादी संगठनों के ठिकानों को निशाना बनाकर उन्हें ध्वस्त कर दिया गया। सेना ने बहावलपुर, मुरीदके, मुजफ्फराबाद समेत कई आतंकी और सैन्य ठिकानों पर अपनी कार्रवाई की।

इसके बाद जैश, हिजबुल और लश्कर-ए-तैयबा समेत पाकिस्तान में बसे कई आतंकी संगठनों को तगड़ा नुकसान पहुँचा। साथ ही उन्हें ये संदेश भी मिला कि भारतीय सेना के निशाने पर वो कभी भी आ सकते हैं।

इस ऑपरेशन के बाद ही आतंकियों ने अपने ठिकानों को भारत की रेंज से दूर शिफ्ट करने का फैसला किया है। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर से हटकर अब वे खैबर पख्तूनख्वा जैसे इलाकों में शरण ले रहे हैं और इसमें पाकिस्तान की सरकारी एजेंसियों की भूमिका भी सामने आ रही है।

चुनाव आयोग ने 474 पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों का रजिस्ट्रेशन किया रद्द, पिछले 6 वर्षों से नहीं लड़ा था चुनाव: 359 अन्य दलों को भी भेजा शो-कॉज नोटिस

भारत के चुनाव आयोग (ECI) ने देश की चुनावी व्यवस्था को साफ-सुथरा बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। शुक्रवार (19 सितंबर 2025) को चुनाव आयोग ने 474 पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों (RUPPs) को डीलिस्ट कर दिया क्योंकि ये पिछले 6 सालों से कोई चुनाव नहीं लड़ रहे थे।

इससे पहले 9 अगस्त 2025 को ऐसे ही 334 दल हटाए गए थे। यानी सिर्फ दो महीनों में कुल 808 दलों को बाहर किया गया है। जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29ए के तहत राजनीतिक दलों को अपना पंजीकरण बनाए रखने के लिए चुनावों में सक्रिय रूप से भाग लेना आवश्यक है। 

चुनाव आयोग का कहना है कि जो पार्टियाँ लगातार 6 साल तक कोई चुनाव नहीं लड़तीं, उन्हें एक्ट के मुताबिक हटाया जा सकता है। इसके पीछे मकसद यह है कि सिर्फ नाम की पार्टियाँ जो चुनावी प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लेतीं, लेकिन चुनाव चिन्ह और टैक्स जैसी सुविधाएँ लेती हैं, उन्हें हटाया जाए।

इस बार सबसे ज्यादा असर उत्तर प्रदेश पर पड़ा जहाँ 121 पार्टियाँ हटाई गईं जबकि महाराष्ट्र में 44, तमिलनाडु में 42, दिल्ली में 40, पंजाब में 21 और राजस्थान में 17 पार्टियों को हटाया गया।

ECI यहीं नहीं रुका। अब तीसरे चरण में 359 और पार्टियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू हो गई है। ये वे पार्टियाँ हैं, जिन्होंने भले ही पिछले 6 सालों में चुनाव लड़ा है लेकिन उन्होंने अपने ऑडिटेड अकाउंट्स और चुनाव खर्च की रिपोर्ट तीन सालों (2021-22, 2022-23 और 2023-24) से नहीं दी है।

इन सभी को अब शो-कॉज नोटिस भेजा गया है और जवाब मिलने के बाद उन पर भी फैसला लिया जाएगा। यहाँ भी उत्तर प्रदेश सबसे आगे है, जहाँ 127 पार्टियाँ इस जाँच के घेरे में हैं, इसके बाद दिल्ली (41), तमिलनाडु (39) और बिहार (30) हैं। फिलहाल भारत में 6 राष्ट्रीय पार्टियाँ, 67 राज्य पार्टियाँ और आज की कार्रवाई के बाद 2046 RUPPs बाकी हैं।

इस पूरी मुहिम का मकसद है कि जो पार्टियाँ न तो चुनाव लड़ती हैं और न ही पारदर्शिता बरतती हैं, उन्हें हटाकर भारत की चुनावी लिस्ट को साफ किया जाए, ताकि लोकतंत्र मजबूत हो और चुनावी प्रक्रिया में गंभीर पार्टियाँ ही बनी रहें।

चुनाव आयोग की यह सख्त कार्रवाई भारतीय लोकतंत्र को मजबूत बनाने की दिशा में एक अहम कदम है। इससे चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी।

अकबर की क्रूरता का सच किताबों में आने पर नाराज हुए SC के पूर्व जज, बोले- ‘तोड़ा-मरोड़ा जा रहा इतिहास’: जानें कैसे मुगल तानाशाह ने करवाया था 30000 हिंदुओं का नरसंहार

पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस रोहिंटन नरिमन ने हाल ही में इतिहास की पाठ्यपुस्तकों में मुगल शासक अकबर को ‘क्रूर शासक’ (tyrant) के रूप में दिखाए जाने पर नाराजगी जताई है। उन्होंने इसे इतिहास का ‘तोड़-मरोड़’ कर प्रस्तुत करना बताया है।

1 सितंबर 2025 को त्रिवेंद्रम के प्रेस क्लब में आयोजित केएम बशीर स्मृति व्याख्यान (KM Bashir Memorial Lecture) में बोलते हुए उन्होंने अपने एक निजी अनुभव को साझा किया। उन्होंने कहा कि एक बच्चे ने उन्हें एक इतिहास की किताब से कुछ पढ़कर सुनाया, जिसे सुनकर वे चौंक गए।

जस्टिस नरिमन ने कहा, “मैं हैरान रह गया जब बच्चे ने पढ़कर सुनाया कि अकबर को उस किताब में एक ऐसा व्यक्ति बताया गया है जो अत्याचारी था और उसने चित्तौड़ में बड़े पैमाने पर हत्याएँ कराई थी, जहाँ कई महिलाओं ने जौहर किया था। किताब में बस इतना ही लिखा था और महान मुगलों के बारे में लगभग कुछ भी नहीं बताया गया।”

उन्होंने आरोप लगाया कि यह न केवल इतिहास को मिटाने की कोशिश है बल्कि पूरी तरह से तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत करना है।

जस्टिस नरीमन ने लोगों को कथित ‘इतिहास के विरूपण’ के खिलाफ कोर्ट जाने के लिए किया प्रोत्साहित

जस्टिस रोहिंगटन नरिमन ने कहा कि मुगल शासकों, खासकर अकबर ने, भारत की ‘संयुक्त  संस्कृति’ को बनाने में बहुत बड़ा योगदान दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि हमारा कर्तव्य है कि हम अपनी इस समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को सँभाल कर रखें और उसका सम्मान करें।

अगर इस साझा संस्कृति को तोड़ा जाता है या हमारे इतिहास को तोड़ा-मरोड़ा या मिटाया जाता है, तो नागरिक इसके खिलाफ कोर्ट जा सकते हैं। जस्टिस नरिमन ने माना कि इतिहास जैसे विषयों में कोर्ट के पास खुद विशेषज्ञता नहीं होती। लेकिन ऐसी स्थिति में कोर्ट विशेषज्ञों की एक समिति बना सकती हैं, जो मामले की जाँच कर सही सुझाव दे और असली इतिहास को बहाल करे।

उन्होंने साफ कहा, “कोर्ट खुद यह काम नहीं कर सकती लेकिन विशेषज्ञों की मदद से सच्चाई सामने लाई जा सकती है। यह सिर्फ मेरी एक सलाह है लेकिन रोकथाम इलाज से बेहतर होता है।”

भारतीय इतिहास की सटीक तस्वीर प्रस्तुत करने के लिए इतिहास की पुस्तकों को किया गया है संशोधित

जस्टिस नरिमन की टिप्पणी हाल ही में कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक में किए गए बदलाव के संदर्भ में आई है। यह बदलाव राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा 2023 (NCFSE 2023) की सिफारिशों के अनुसार किया है।

इतिहास की यह संशोधित पुस्तक लंबे समय से पेश की जा रही एक एकतरफा और सुंदर रूप में दिखाए गए मध्यकालीन भारत के इतिहास को संतुलित रूप से प्रस्तुत करने की कोशिश करती है। इसका उद्देश्य ऐतिहासिक घटनाओं और कालखंडों की सकारात्मक और नकारात्मक दोनों पहलुओं को सामने लाना है, यानी यह बदलाव किसी कल्पनात्मक या भावनात्मक इतिहास पर नहीं, बल्कि ठोस ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित है।

नई किताब में यह बताया गया है कि जहाँ एक ओर जहाँगीर और शाहजहाँ जैसे मुगल शासकों ने कला और स्थापत्य का संरक्षण किया, वहीं दूसरी ओर यह भी उल्लेख किया गया है कि बाबर जैसे शासकों ने पूरे शहरों की जनता का नरसंहार किया था।

औरंगजेब को एक ऐसा सैनिक शासक बताया गया है जिसने गैर-इस्लामी परंपराओं पर पाबंदी लगाई और गैर-मुसलमानों पर जजिया कर फिर से लगाया। वहीं अकबर के शासन को ‘उदारता और कठोरता का मिश्रण’ कहा गया है।

चित्तौड़गढ़ की घेराबंदी के बाद अकबर ने 30 हजार हिंदुओं के नरसंहार का दिया था आदेश

पहले के इतिहास की किताबों में मुगल शासक अकबर को धार्मिक सहिष्णुता (tolerance) का प्रतीक बताकर दिखाया गया था। इसमें खास तौर पर यह बताया गया कि अकबर ने जजिया कर (जो गैर-मुस्लिमों पर लगाया जाता था) हटा दिया था। लेकिन इन किताबों में यह बात छुपा ली गई कि चित्तौड़गढ़ की घेराबंदी के दौरान अकबर ने हिंदुओं के खिलाफ जिहाद छेड़ा था और करीब 30,000 हिंदुओं का नरसंहार (massacre) करवाया था।

चार महीने तक चले इस युद्ध के अंत में अकबर ने इसे ‘इस्लाम की काफिरों पर जीत’ बताया था। युद्ध के बाद न केवल पुरुषों की हत्या की गई बल्कि महिलाओं और बच्चों को गुलाम बना लिया गया। ऐसे में जब जस्टिस नरिमन ने नई इतिहास की किताबों को लेकर अपनी राय दी, तो लगता है कि उनकी जानकारी अधूरी या गलतफहमी पर आधारित थी।

छात्रों को इतिहास का पूरा और संतुलित चित्र दिखाना जरूरी है। शासकों के अच्छे और बुरे दोनों पहलुओं को जानना चाहिए। लेकिन यह भी जरूरी है कि जो इतिहास उन्हें पढ़ाया जा रहा है, वह तथ्यों पर आधारित हो, न कि कल्पना या एकतरफा सोच पर। आखिरी फैसला छात्रों पर छोड़ देना चाहिए कि वे किसी ऐतिहासिक व्यक्ति या काल के बारे में क्या राय बनाते हैं।

गोधरा में ‘I Love Muhammad’ से जुड़े पोस्ट को लेकर इस्लामी कट्टरपंथियों का हंगामा, पुलिसकर्मियों पर पथराव और थाने में तोड़फोड़: वडोदरा में भी पुलिस पर फेंके गए पत्थर

गुजरात के गोधरा और वडोदरा के जूनीगढ़ी इलाके में बीती रात सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट को लेकर कट्टरपंथियों ने पुलिस थानों को निशाना बनाया है। गोधरा में तो कट्टरपंथियों ने थाने में तोड़फोड़ तक कर दी जिसके बाद पुलिस को हालात काबू में करने के लिए लाठीचार्ज का सहारा लेना पड़ा है।

गोधरा में I Love Muhammad से जुड़े पोस्ट को लेकर हंगामा

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस मामले की जड़ कानपुर से शुरु हुए ‘I Love Muhammad’ के प्रदर्शनों से जुड़ी हुई हैं। गोधरा में पिछले कुछ दिनों से इसी हैशटेग के साथ वायरल वीडियो बनाए जा रहे थे। इन वीडियोज के जरिए सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की साजिश की जा रही थी।

सोशल मीडिया पर लगातार भड़काऊ पोस्ट डालने वाले एक इन्फ्लुएंसर को गोधरा सिटी बी डिवीजन थाने द्वारा बुलाया गया और पुलिस उसे समझाने की कोशिश कर रही थी कि ऐसी पोस्ट से नवरात्रि पर्व से पहले तनाव फैले सकता है। इसके चलते युवक को ऐसे पोस्ट करने से बचना चाहिए।

इस बीच कुछ लोगों द्वारा अफवाह फैला दी गई कि पुलिस युवक को धमका रही है और उसके खिलाफ गलत तरीके से कार्रवाई की जा रही है। इस अफवाह के सामने आते ही करीब आधे घंटे में भीड़ थाने पर उमड़ी और जमकर तोड़फोड़ मचाई गई। इसके बाद कट्टरपंथियों की भीड़ आती गई और थाने पर लगातार हमला होता रहे।

थाने में जमकर तोड़फोड़ की गई और फर्नीचर, खिड़कियाँ और पुलिस के वाहनों को भी नुकसान पहुँचाया गया। साथ ही, भीड़ ने पुलिस कर्मियों पर पथराव भी शुरू कर दिया। जब हालात बेकाबू होने लगे तो पुलिस ने पहले चेतावनी दी और फिर भी लोग नहीं माने तो लाठीचार्ज कर दिया। पुलिस को आंसू गैस के गोले तक छोड़ने पड़े जिसके बाद घंटों की मशक्कत के बाद भीड़ को हटाया जा सका।

जूनीगढ़ी में भी सोशल मीडिया पोस्ट पर बवाल

वहीं, वडोदरा के संवेदनशील जूनीगढ़ी इलाके में एक विवादित सोशल मीडिया पोस्ट ने माहौल बिगाड़ दिया। पोस्ट के बाद एक समुदाय विशेष के लोग थाने पहुँचकर नारेबाजी और सड़क जाम करने लगे, जिससे हालात तनावपूर्ण हो गए।

देखते ही देखते पथराव शुरू हो गया जिसमें पुलिसकर्मी और स्थानीय लोग घायल हुए। इसके बाद जब हंगामा बढ़ा तो स्थिति सँभालने खुद एडिशनल पुलिस कमिश्नर डॉ. लीना पाटिल मौके पर पहुँचीं और लोगों से सख्त संवाद कर भीड़ को कंट्रोल किया।

पुलिस ने साफ कहा है कि हिंसा, तोड़फोड़ और अफवाह फैलाने वालों को किसी भी कीमत पर नहीं बख्शा जाएगा। वीडियोग्राफी से पत्थरबाजों की पहचान हो रही है और अज्ञात लोगों पर प्राथमिकी दर्ज की जा रही है।

MP में गरबा पंडालों में गैर-हिंदुओं की एंट्री बैन: ‘लव जिहाद’ रोकने के लिए हिंदू संगठनों और BJP का सख्त रुख, कहा- ‘सनातन धर्म अपनाओ, तिलक लगाओ’

मध्य प्रदेश में इस साल नवरात्रि से पहले गरबा को लेकर एक नया विवाद शुरू हो गया है, जिसे हिंदू संगठन ‘गरबा जिहाद’ कह रहे हैं। हिंदू संगठन और कुछ बीजेपी विधायक खुलकर गरबा पंडालों में गैर-हिंदुओं की एंट्री बैन करने की माँग कर रहे हैं।

हिंदू संगठनों का आरोप है कि कुछ लोग अपनी पहचान छिपाकर गरबा में आते हैं और ‘लव जिहाद’ जैसी घटनाओं को अंजाम देते हैं। इस मुद्दे को लेकर गरबा आयोजकों से भी कहा गया है कि वे पंडालों में सिर्फ उन्हीं लोगों को आने दें जिनकी पहचान हिंदू के रूप में हो।

गरबा पंडालों में गैर-हिंदुओं की एंट्री पर बैन

मध्य प्रदेश में अब गरबा आयोजनों को लेकर एक नई ‘सनातनी क्रांति‘ की शुरुआत हो चुकी है। राज्य में कई हिंदू संगठन और भाजपा विधायक जोर-शोर से इस बात की माँग कर रहे हैं कि नवरात्रि के दौरान होने वाले गरबा पंडालों में केवल हिंदू धर्म के अनुयायी ही प्रवेश करें।

इन संगठनों का कहना है कि अगर गैर हिंदू गरबा में भाग लेना चाहते हैं, तो उन्हें ‘सनातक धर्म‘ अपनाने के बाद ही पंडाल में प्रवेश दिया जाए। इसके अलावा, आयोजकों से कहा है कि वे पंडालों के बाहर वराह अवतार की तस्वीर लगाकर उसकी पूजा करें, आधार कार्ड- पहचान पत्र देखने के बाद ही लोगों को अंदर जाने दें।

प्रवेश चाहिए, तो सनातन धर्म में करो वापसी

भोपाल की हुजूर विधानसभा सीट से बीजेपी विधायक रामेश्वर शर्मा ने इस मुद्दे पर एक पहल करते हुए प्रतिक्रिया दी है। बीजेपी विधायक ने कहा कि ‘गरबा पंडालों’ में ‘गैर हिंदुओं‘ का प्रवेश नहीं होना चाहिए। बीजेपी विधायक ने आगे कहा कि अगर किसी को ‘गरबा पंडालों’ में है तो अपने पूरे परिवार (अब्बा-अम्मी, बहन, मौसी, चच्चा) के साथ आए, हिंदू रीति-रिवाजों का पालन करें, तिलक लगाए, देवी की पूजा करें, प्रसाद खाए और सनातन धर्म स्वीकार करे।

रामेश्वर शर्मा ने यह भी कहा कि अगर कोई मुस्लिम या ईसाई फिर से देवी की पूजा करना चाहता है, तो उसे एक चम्मच गंगाजल और तुलसी का पत्ता खिलाकर हिंदू बनाया जा सकता है। रामेश्वर शर्मा ने दावा किया कि सबका DNA हिंदू ही है और कई लोग कुछ साल पहले ही धर्म बदलकर मुस्लिम या ईसाई बने हैं। रामेश्वर शर्मा ने चेतावनी भी दी कि अगर कोई अपनी पहचान छिपाकर या गलत इरादे से आया तो उसका ऐसा इलाज किया जाएगा कि वह जिंदगी भर याद रखेगा।

बीजेपी नेता आलोक शर्मा ने चेतावनी दी कि कुछ लोग गरबा आयोजनों में कलावा और तिलक लगाकर हिंदू बेटियों को बहलाने की कोशिश कर सकते हैं। आलोक शर्मा की यह टिप्पणी, ‘लव जिहाद’ से जुड़ी चिंताओं के मद्देनजर आई, जिसमें अंतर-धार्मिक विवाहों को लेकर कई विवाद सामने आए थे। आलोक शर्मा ने दावा किया कि बीजेपी की सरकार में ‘लव जिहादियों’ की खैर नहीं है।

कॉन्ग्रेस विधायक की प्रतिक्रिया

इस विवाद पर कॉन्ग्रेस की तरफ से भी प्रतिक्रिया आई है। भोपाल मध्य सीट से कॉन्ग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने कहा कि मुस्लिमों को गरबा आयोजनों में जाने की कोई जरूरत नहीं है। इसके अलावा, आरिफ मसूद कहते हैं कि BJP के लोग हर त्योहार से पहले विवाद खड़ा करते हैं। आरिफ मसूद ने यह भी आरोप लगाया कि BJP के नेता नवरात्रि जैसे धार्मिक आयोजनों को राजनीति का हथियार बना रहे हैं।

बता दें, कि नवरात्रि और गरबा मध्य प्रदेश के हिंदू समाज के लिए एक बड़ा धार्मिक और सांस्कृतिक अवसर होता है। गरबा न केवल एक नृत्य उत्सव है, बल्कि यह देवी दुर्गा की पूजा का भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस आयोजन में हिंदू समुदाय के लोग अपनी श्रद्धा और भक्ति के साथ भाग लेते हैं।

मॉल में 80% हिंदू लड़कियाँ, लेकिन पुरुष मुस्लिम… यौन उत्पीड़न-ब्लैकमेलिंग-धर्म परिवर्तन का चल रहा था रैकेट: देवरिया धर्मांतरण में मिले नए सबूत

उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में स्थित SS मॉल में चल रहे यौन उत्पीड़न और जबरन धर्म परिवर्तन के लिए ब्लैकमेल किए जाने के मामले में लगातार नई बातें सामने आ रही हैं।

SS मॉल के मालिक उस्मान अंसारी गनी , उसकी बीवी तरन्नुम और साले गौहर अली पर उसी मॉल में काम करने वाली एक युवती ने धर्मांतरण और यौन शोषण के गंभीर आरोप लगाए थे।

आरोप है कि गनी ने खास तौर पर हिंदू लड़कियों को मॉल में नौकरी पर रखा ताकि उनका यौन शोषण कर उन्हें ब्लैकमेल किया जा सके। इसके बाद उन्हें इस्लाम धर्म अपनाने के लिए मजबूर किया जा सके।

पीड़िता ने शिकायत में बताया कि नौकरी मिलने के बाद महिलाओं को मॉल की ऊपरी मंजिल पर स्थित दो कमरों में ले जाया जाता था, जहाँ उनका यौन उत्पीड़न किया जाता था। इसके बाद उन्हें वेश्यावृत्ति में धकेला जाता और इस्लाम धर्म अपनाने के लिए ब्रेनवॉश किया जाता था।

मामले की भनक लगते ही उस्मान अंसारी और उसकी बीवी रविवार (14 सितंबर 2025) को मॉल में ताला डालकर फरार हो गए थे। लेकिन 15 सितंबर 2025 को दुबई भागने की कोशिश करते समय उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।

हिंदूफोबिया ट्रैकर की रिपोर्ट के अनुसार, देवरिया मामले में चल रहा ये रैकेट आगरा धर्मांतरण रैकेट और छांगुर पीर के नेटवर्क के जैसे ही काफी बड़े स्तर पर चलाया जा रहा था। पीड़िता ने बताया, “मॉल में काम करने वाली 80 प्रतिशत महिलाएँ हिंदू थीं, जबकि ज्यादातर पुरुष मुस्लिम थे।”

इसके तहत हिंदू समाज के कमजोर वर्गों, गरीब और सामाजिक रूप से वंचित समुदायों के साथ छात्राओं और महिलाओं को टारगेट करते थे।पैसों का लालच और काम के बहाने ये लोगों को अपने पास बुलाते थे। इसके बाद इस्लाम धर्म अपनाने के लिए ब्रेनवॉश किया जाता था।

देवरिया में रहना है तो इस्लाम अपनाना पड़ेगा

रिपोर्ट में पीड़िता ने बताया कि जो लड़कियाँ धर्मांतरण का विरोध करतीं, उनका अश्लील वीडियो बनाकर ब्लैकमेल किया जाता था। लड़कियों को मानसिक रूप से इतना प्रताड़ित किया जाता कि वे टूट जातीं।

पीड़िता ने बताया, “एक दिन वे लोग मुझे उस कमरे में लेकर गए। उस्मान और गौहर ने मेरे कपड़े फाड़ दिए और मेरे साथ रेप किया। इनके साथ तरन्नुम भी थी जो वहीं खड़ी होकर सबकुछ होते हुए देख रही थी। उन लोगों ने मेरा वीडियो भी बनाया और फिर मुझे धमकी दी।”

पीड़िता ने कहा कि उसे बार बार कहा गया कि अगर देवरिया में रहना है तो उसे धर्म परिवर्तन कर इस्लाम अपनाना पड़ेगा। मना करने पर उसे धमकी के साथ शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न किया गया। इसके बाद पीड़िता ने मॉल में नौकरी छोड़ दी। वह 2 साल तक डर डर कर रही। इसके बाद हिम्मत कर पुलिस के पास पहुँची।

हालाँकि पुलिस ने भी पहली बार में उसकी बात को अनसुना कर दिया। मार्च 2025 में वह SHO और सर्किल अधिकारी से मिली लेकिन उसकी शिकायत नहीं लिखी गई। पीड़िता ने बताया कि आरोपितों ने अपने पैसे और ताकत के दम पर किसी भी जगह शिकायत दर्ज नहीं होने दी।

इसके बाद वह SP और स्थानीय विधायक शलभमणि त्रिपाठी के पास पहुँची। इसके बाद उसके मामले को संज्ञान में लिया गया। हालाँकि महीनों तक उसे केस वापस लेने की धमकी मिलती रही। उसे कहा गया कि केस वापस लेलो वरना जान से मारी जाएगी।

7 सितंबर 2025 को उसकी शिकायत पर पुलिस ने एक्शन लिया। इसके बाद SS मॉल के कई अन्य कर्मचारियों ने भी हिम्मत की और शिकायत दर्ज करवाई। कई हिंदू लड़कियों ने आगे आकर अपनी आपबीती बताई।

उस्मान गनी के SS मॉल और EG मार्ट में काम करने वाले पुराने कर्मचारी शाह आलम और अजय ने पुलिस को बताया कि उन लोगो को अक्सर मॉल के उन दोनों CCTV फुटेज को हटाने को कहा जाता था जिसमें हिंदू लड़कियों के अंदर जाने और कमरे से निकलने का समय हो।

दोनों ने बताया कि उन्हें कहा जाता था कि हर हफ्ते कुछ फुटेज हटाना पड़ता था। अगर वे इसका विरोध करते तो उन्हे नौकरी से हटाने और उन पर कार्रवाई की धमकी दी जाती थी। शाह आलम के भाई सलमान ने बताया कि वह भी पहले EG मार्ट में काम करते थे लेकिन उन्होंने नौकरी छोड़ दी।

सलमान के अनुसार, वहाँ का माहौल ठीक नहीं था। जब शाम को सारा स्टाफ चला जाता था तो कुछ हिंदू लड़कियों को रोक लिया जाता था। उन्हें उस कमरे में भेजा जाता था जिसमें वेश्यावृत्ति का काम होता था। सुबह उस CCTV फुटेज को डिलीट करवाया जाता था।

हिंदुओं से पढ़वाई जाती थी हदीस

देवरिया के इस मामले में उस्मान अंसारी और उसके भाई इजराफिल अंसारी के साथ एक और नाम अब्दुर्रहमान का भी सामने आया है। EG मार्ट में बतौर मैनेजर काम कर रहा अब्दुर्रहमान भी इस रैकेट का अहम हिस्सा है।

असल में अब्दुर्रहमान का भी धर्मांतरण किया गया है। उसका असली नाम दत्तात्रेय गुप्ता था। 2019 अपनी पत्नी गायत्री के साथ उसने इस्लाम कबूल कर लिया था। इसके बाद उनके नाम अब्दुर्रहमान और गुलशन फातिमा हो गया। दोनों ने अपने परिवार से भी सारे रिश्ते तोड़ लिए।

मार्ट में काम करने के दौरान छोटे से पद से सीधे मैनेजर पर प्रमोशन दे दिया गया। पीड़ितों के अनुसार, वह हिंदू कर्मचारियों का ब्रेनवॉश करता था। उन्हें सुबह बैठक आयोजित कर कलमा और हदीस सिखाता था।

EG मार्ट और SS मॉल में काम करने वाले हिंदू कर्मचारियों को अलग-थलग किया जाता था और उन्हें कलमा और हदीस पढ़ने के लिए मजबूर किया जाता था।

सलमान के अनुसार, अब्दुर्रहमान की बीवी गुलशन अक्सर मॉल परिसर में आती थीं और हिंदू महिला कर्मचारियों को अलग कमरों में ले जाकर इस्लामी तौर-तरीकों को अपनाने के लिए मजबूर करती थीं।

ये दोनों मिलकर उस्मान के रैकेट में हिंदू कर्मचारियों को फँसाते थे। इसके जरिए धर्म परिवर्तन का ये धंधा फल फूल रहा है।

हिंदू लड़कियाँ धर्मांतरण रैकेट की पहली पसंद

पीड़िता इकलौती लड़की नहीं थी बल्कि उस्मान के मॉल में काम करने वाली उस जैसी लगभग सारी हिंदू लड़कियाँ धर्मांतरण रैकेट के निशाने पर थीं।

हिंदूफोबिया से बात करते हुए पीड़िता ने बताया, “लड़कियों को जिले से बाहर घुमाने ले जाया जाता था। उन्हें ऐशो-आराम का वादा किया जाता था और फिर धीरे-धीरे उनका ब्रेनवॉश किया जाता था।”

इस प्रक्रिया में तरन्नुम अपना किरदार निभाती थी। वो ही लड़कियों को नमाज पढ़ना, कलमा दोहराना सिखाती और यह भी कहती थी कि हिंदू देवी-देवता झूठे हैं। उसका कहना था कि केवल इस्लाम ही सबसे ऊपर है।

अपने बारे में पीड़िता ने कहा, “मैंने पूरी तरह फँस जाने से पहले ही नौकरी छोड़ दी, लेकिन कई लड़कियाँ बच नहीं सकीं। वे या तो पैसों के कारण रुक गईं या इसलिए क्योंकि विरोध करने या धमकियों से डरती थीं।”

पीड़िता की तरह देवरिया धर्मांतरण के मामले में एक और खुलासा हुआ है। खुखुंदू थाना क्षेत्र के रहने वाले उमेश सिंह की बेटी लक्ष्मी सिंह को उस्मान गनी के साले गौहर अली ने बहलाकर निकाह किया।

लक्ष्मी के पिता उमेश सिंह के अनुसार, गौहर 31 जुलाई 2025 को उनकी बेटी को बहला-फुसलाकर दिल्ली ले गया। वहाँ उसका इस्लाम में धर्म परिवर्तन कराया गया और उसका नाम बदलकर ‘सलमा’ रख दिया गया।

उमेश सिंह ने बताया, “मेरी बेटी को गौहर दिल्ली ले गया। वहाँ उसका धर्म बदल दिया गया और नाम सलमा रख दिया गया। उसके अपने सपने थे, लेकिन उसका ब्रेनवॉश कर दिया गया।”

उमेश ने आगे कहा, “मैंने अपहरण का मामला दर्ज कराया। इसके बाद अगस्त 2025 में गौहर को गिरफ्तार किया गया। हालाँकि मुझे पता है कि वह अकेले ये काम नहीं कर रहा था। इसके पीछे उस्मान ही था।”

अब पीड़ित परिवारों को धमकियाँ भी दी जा रही हैं। मामले में सदर विधायक शलभ मणि त्रिपाठी ने कहा है कि जिले में छांगुर पीर जैसे सिंडिकेट को पनपने नहीं दिया जाएगा।

उन्होंने जिला प्रशासन को सख्त कार्रवाई के आदेश दिए हैं और SS मॉल और EG मार्ट की जाँच की माँग की जा रही है। पिछले कुछ दिनों से लगातार खुलासों के बाद अब SS मॉल और EG मार्ट पर स्थानीय लोगों द्वारा भी जाँच की माँग उठाई जा रही है।

उमेश सिंह का कहना है कि उस्मान अंसारी का देवरिया में चल रहा धर्मांतरण रैकेट छांगुर पीर के धर्मांतरण रैकेट के जैसा ही है। पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, शुरुआत में उमेश सिंह ने गौहर अंसारी के खिलाफ अपहरण की शिकायत दर्ज कराई थी।

शिकायत के बाद पुलिस ने गौहर और लक्ष्मी दोनों को ढूंढ निकाला। लेकिन तब तक गौहर लक्ष्मी से मंदिर में विवाह कर चुका था। चूंकि लक्ष्मी बालिग थी, इसलिए कोर्ट में उसकी बात को ही माना। हालाँकि ब्रेनवॉश हो चुकी लक्ष्मी ने गौहर की ही साथ दिया।

लक्ष्मी सिंह के पिता उमेश सिंह ने बाद में एक और शिकायत दर्ज कराई, जिसमें उन्होंने गौहर अंसारी पर उनकी बेटी का जबरन इस्लाम धर्म में परिवर्तन कराने का आरोप लगाया।

खुखुंदू थाने के प्रभारी निरीक्षक कल्याण सिंह सागर ने पुष्टि की कि उमेश सिंह की शिकायत के आधार पर गौहर अंसारी समेत छह लोगों के खिलाफ जबरन धर्म परिवर्तन, विवाह, धमकी और दबाव का मामला दर्ज किया गया।

हालाँकि लक्ष्मी ने पुलिस के सामने अपने पिता पर ही आरोप लगा दिए, जिससे मामला और उलझ गया। पुलिस जाँच के बाद गौहर अंसारी को गिरफ्तार कर लिया गया।

हिंदू कर्मचारियों के लिए तय की गई हरी यूनिफॉर्म

हिंदूफोबिया ट्रैकर टीम के खुलासे में यह भी सामने आया कि मॉल में काम करने वाले स्टाफ को हरे रंग की यूनिफॉर्म पहनने के लिए मजबूर किया जाता था। टीम ने मॉल का दौरा किया तो देखा कि सभी महिला कर्मचारी वास्तव में हरे सलवार-कुर्ते में थीं।

असल में हरे रंग से ये रैकेट इस्लामी मजहब और पहचान को दिखाने की कोशिश कर रहा था। इस ड्रेस कोड के जरिए हिंदू कर्मचारियों की धार्मिक पहचान को कमजोर करने का प्रयास किया गया।

पूरे मामले में देवरिया सदर विधायक शलभ मणि त्रिपाठी के दखल के बाद पुलिस ने कार्रवाई की और उस्मान, उसकी पत्नी तरन्नुम और सहयोगी गौहर के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई।

इस मामले पर विधायक ने कहा कि ये पूरा रैकेट असल में कई स्तर पर चसल रहा है और किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा प्रतीत होता है। इसके अलावा जो उस्मान आज धर्मांतरण गिरोह का सरगना बना बैठा है, उसकी आर्थिक स्थिति भी सवालों के घेरे में है क्योंकि कुछ वर्षों पहले वह बस स्टैंड पर चप्पल बेचता था। अचानक उसके पास मॉल और बड़े मार्ट के पैसे और इतनी फंडिंग कहां से आ गई? असल में इस तरह की बड़ी फंडिंग और ये काम किसी बड़ी साजिश का ही हिस्सा हैं, जिनकी गहन जाँच आवश्यक है।”

(मूलरूप से अंग्रेजी में लिखी गई इस रिपोर्ट को विस्तार से इस खबर को पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें।)

बताया गैर हिंदू नहीं कर सकते चामुंडेश्वरी मंदिर में अनुष्ठान, फिर भी सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी याचिका: बानू मुश्ताक ही रहेंगी दशहरा कार्यक्रम की मुख्य अतिथि

मैसूर दशहरा महोत्सव की मुख्य अतिथि बानू मुश्ताक को बनाने के मामले में हिंदुओं को सुप्रीम कोर्ट से भी न्याय नहीं मिला है। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (19 सितंबर 2025) को कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार के उस फैसले को बरकरार रखा, जिसमें लेखिका बानू मुश्ताक को मैसूर दशहरा उद्घाटन के लिए मुख्य अतिथि बनाया गया।

जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की बेंच ने हिंदू संगठनों की याचिका खारिज कर दी, जो बानू की मुस्लिम पहचान और कथित हिंदू-विरोधी बयानों के आधार पर विरोध कर रहे थे।

ताजे मामले में 19 सितंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट की बेंच (जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता) ने बानू मुश्ताक को मुख्य अतिथि बनाने से रोकने के लिए दायर अपील को खारिज कर दिया। जस्टिस नाथ ने कहा, “इस देश का प्रीएम्बल क्या है? यह राज्य कार्यक्रम है… राज्य कैसे ए, बी और सी में भेदभाव कर सकता है?”

याचिकाकर्ताओं के वकील पीबी सुरेश ने तर्क दिया कि मंदिर में पूजा सेकुलर नहीं है और मुश्ताक के ‘एंटी-हिंदू’ बयान उन्हें अयोग्य बनाते हैं। लेकिन कोर्ट ने कहा, “हमने तीन बार डिसमिस्ड कहा है, कितनी बार कहें?”

सीजेआई बीआर गवई ने एक दिन पहले ही मामले को तत्काल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया था, लेकिन फैसला याचिकाकर्ताओं के खिलाफ गया। यह फैसला न केवल आस्था को चोट पहुँचाता है, बल्कि यह संकेत देता है कि न्यायपालिका बहुसंख्यक दलीलों को गंभीरता से नहीं ले रही। जस्टिस नाथ और मेहता में से एक भविष्य के सीजेआई हो सकते हैं, जो चिंता बढ़ाता है।

बानू मुश्ताक की उपस्थिति पर क्यों है आपत्ति?

दशहरा हिंदुओं का प्रमुख पर्व है, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। मैसूर का दशहरा उत्सव दुनिया भर में प्रसिद्ध है। यह न केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम है, बल्कि एक गहन धार्मिक अनुष्ठान है, जो सदियों से चली आ रही परंपराओं पर आधारित है।

हर वर्ष चामुंडी पहाड़ियों पर देवी चामुंडेश्वरी की पूजा के साथ इसकी शुरुआत होती है, जिसमें मुख्य अतिथि द्वारा दीप प्रज्ज्वलन, फल-फूल अर्पित करना और वैदिक मंत्रों का जाप शामिल होता है। ऐसे में परंपरा के अनुसार, उद्घाटन में शामिल होने वाला व्यक्ति हिंदू आस्था में विश्वास रखने वाला होना चाहिए, क्योंकि यह धार्मिक अनुष्ठान का हिस्सा है।

बीजेपी और हिंदू संगठनों का कहना है कि मुस्लिम बानू मुश्ताक को इस धार्मिक अनुष्ठान में शामिल करना हिंदू आस्था का अपमान है। याचिकाकर्ता एच.एस. गौरव ने सुप्रीम कोर्ट में तर्क दिया कि मंदिर के भीतर पूजा एक धार्मिक कार्य है, न कि धर्मनिरपेक्ष, और इसे केवल हिंदू ही कर सकते हैं। उनके वकील पी.बी. सुरेश ने यह भी दावा किया कि बानू ने अतीत में हिंदू-विरोधी बयान दिए हैं, जिसके चलते उनकी उपस्थिति आपत्तिजनक है। हालाँकि सुप्रीम कोर्ट ने दलीलों को खारिज कर दिया।

हाई कोर्ट से भी हिंदुओं को नहीं मिला था न्याय

इससे पहले, 15 सितंबर 2025 को कर्नाटक हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच (चीफ जस्टिस विवु बखरू और जस्टिस सीएम जोशी) ने याचिकाओं को खारिज कर दिया था। हाई कोर्ट ने कहा कि मुश्ताक एक योग्य महिला हैं, और उनकी भागीदारी संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 का उल्लंघन नहीं करती। कोर्ट ने कहा, “किसी अन्य धर्म के व्यक्ति की भागीदारी अन्य धर्मों के उत्सवों में संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं करती।”

हाई कोर्ट ने जोर दिया कि फैसला एक समिति द्वारा लिया गया, जिसमें विभिन्न पार्टियों के प्रतिनिधि शामिल हैं, और यह कोई धार्मिक संस्था द्वारा नहीं आयोजित है। याचिकाकर्ताओं के वकील एस सुदर्शन ने तर्क दिया कि हिंदू संस्कृति में मूर्ति पूजा महत्वपूर्ण है, और गैर-आस्थावान व्यक्ति को अनुमति देना गलत है। लेकिन कोर्ट ने कहा, “हम केवल राय पर फैसला नहीं ले सकते।” यह फैसला बहुसंख्यक भावनाओं को नजरअंदाज करता लगता है, जहाँ संविधान की सेकुलर भावना को अल्पसंख्यक पक्ष में इस्तेमाल किया गया।

CJI गवई भी दे चुके हैं हिंदू विरोधी बयान

इस मामले ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई के एक पुराने बयान को भी चर्चा में ला दिया। खजुराहो के जावरी मंदिर में भगवान विष्णु की टूटी मूर्ति को ठीक करने की याचिका पर सुनवाई के दौरान CJI गवई ने कहा था, “ये पब्लिसिटी का हथकंडा है। जाओ, भगवान विष्णु से कहो कि कुछ करें।”

इस टिप्पणी को हिंदू आस्था का मज़ाक बताकर सोशल मीडिया पर तीखी आलोचना हुई थी। गवई को बाद में सफाई देनी पड़ी कि उनका इरादा भावनाएँ आहत करना नहीं था।

न्यायपालिका पर उठ रहे सवाल

बानू मुश्ताक प्रकरण ने न्यायपालिका की निष्पक्षता और संवेदनशीलता पर सवाल उठाए हैं। हिंदू संगठनों का कहना है कि जब शीर्ष अदालतें बहुसंख्यक समुदाय की भावनाओं को नज़रअंदाज़ करती हैं, तो यह विश्वास की कमी पैदा करता है। सुप्रीम कोर्ट की बेंच में शामिल जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता में से एक के भविष्य में CJI बनने की संभावना है। ऐसे में इस फैसले को हिंदू समुदाय के एक वर्ग ने आस्था के खिलाफ माना है।

यह विवाद केवल बानू मुश्ताक के चयन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह धार्मिक स्वतंत्रता, परंपराओं, और धर्मनिरपेक्षता के बीच संतुलन का सवाल उठाता है। हिंदू समुदाय का एक बड़ा वर्ग मानता है कि उनके त्योहारों को राजनीतिक मंच बनाने की कोशिश हो रही है।