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बच्चों और महिलाओं के कत्लेआम पर पाकिस्तानी फौज के खिलाफ गुस्से में आवाम, सोशल मीडिया से सड़क तक लोगों का हंगामा: अंतर्राष्ट्रीय मदद की लगा रहे गुहार

पाकिस्तानी फौज अपने ही मुल्क के आम नागरिकों पर बमबारी कर 30 लोगों को मौत के घाट उतार दिया। इस हमले के बाद पाकिस्तानी फौज के खिलाफ आम नागरिक, मानवाधिकार कार्यकर्ता सोशल मीडिया पर विरोध कर रहे हैं और अंतर्राष्ट्रीय मदद माँग रहे हैं।

पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में पाकिस्तानी फौज अपने ही मुल्क के नागरिकों पर हमला कर रहा है, जिसमें 30 लोग मारे गए। मारे गए लोगों में महिलाएँ और बच्चे भी शामिल हैं। इस बर्बर कार्रवाई के बाद पाकिस्तानी नेताओं, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और आम जनता ने सरकार और फौज के खिलाफ खुलकर आवाज उठाई और सोशल मीडिया पर शवों की तस्वीर शेयर कर विरोध हो रहा है। इसके अलावा, अंतर्राष्ट्रीय मदद की गुहार भी लगाई गई है।

हमले पर पाकिस्तानी राजनेताओं और जनता का गुस्सा

पाकिस्तानी फौज के आम नागरिकों पर हमले के बाद देशभर में गुस्सा देखा जा रहा है। इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) की स्थानीय शाखा ने इसे अपने ही नागरिकों पर ‘जेट-बॉम्बिंग’ कहा है।

खैबर पख्तूनख्वा असेंबली के सदस्य अब्दुल गनी आफरीदी ने भी फौज की आलोचना की है। अब्दुल गनी ने कहा कि तिराह में बेगुनाह बच्चों, नौजवानों और औरतों को मारना मानवता के खिलाफ एक खुला अपराध है। अब्दुल गनी ने आगे कहा कि ये बच्चे आतंकवादी नहीं थे। उनके हाथों में खिलौने थे, बंदूकें नहीं।

कई लोगों ने सोशल मीडिया पर इस हमले में मारे गए मासूम बच्चों की दिल दहला देने वाली तस्वीरें साझा की हैं। रिपोर्टर फिरोज बलोच ने बच्चों की तस्वीरें पोस्ट की हैं। ये दिल दहला देने वाली हैं। खाट पर लेटे शवों पर चादरें पड़ी थीं, जिन्हें एक-एक कर हटाया गया। आसपास रोने की आवाजें थीं। लोगों की आँखों में खून उतर आया।

अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से मदद की गुहार

पाकिस्तान के मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों ने अंतर्राष्ट्रीय संगठनों से इस मामले में हस्तक्षेप करने की माँग की है। मानवाधिकार कार्यकर्ता जहनवाज वेशा ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से पूछा है कि क्या इन बच्चों के कोई अधिकार नहीं हैं? क्या पाकिस्तान को अपने ही नागरिकों की हत्या का लाइसेंस मिल गया है?

इमरान खान के समर्थकों ने भी इस घटना को गाजा या सीरिया से जोड़ा है। समर्थकों ने सवाल उठाया कि जब गाजा या सीरिया में बमबारी होती है, तो पूरी दुनिया हिल जाती है। लेकिन तिराह घाटी में मारे गए बच्चों के लिए कोई नहीं बोल रहा। शायद इसलिए क्योंकि ये पाकिस्तान के गरीब परिवारों से थे। न इनके पास पावर है, न प्लेटफॉर्म।

फौज और सरकार पर गंभीर आरोप

इस हमले के बाद पाकिस्तानी फौज पर अत्याचार के आरोप लग रहे हैं। पाकिस्तान की खैबर पख्तूनख्वा सरकार ने भी अपनी गलती मानी है। पुलिस अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि जेट विमानों ने चार घरों को निशाना बनाया, जो पूरी तरह से नष्ट हो गए।

इसके अलावा, बलूच जनता भी पाकिस्तानी फौज से नाराज है और उन्होंने विरोध प्रदर्शन करने की घोषणा की है। राजनेता मौलाना फजल-उर-रहमान ने भी आरोप लगाया है कि बलूचिस्तान में लोगों के गायब होने में फौज का हाथ है। इस घटना ने एक बार फिर से इस बात को साबित कर दिया है कि पाकिस्तानी फौज ‘आतंकवाद-विरोधी अभियानों’ के नाम पर अपने ही लोगों पर अत्याचार कर रही है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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