अफगानिस्तान के विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताकी आज दिल्ली पहुँचे हैं। अमीर खान मुत्ताकी विदेश मंत्री एस जयशंकर और अन्य वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात करेंगे। यह 7 दिवसीय दौरा भारत और तालिबान-प्रशासित अफगान सरकार के बीच रिश्ते सुधारने की एक बड़ी पहल मानी जा रही है। मुत्ताकी तालिबान के पहले वरिष्ठ अधिकारी हैं जो भारत आए हैं। हालाँकि, भारत ने अभी तक तालिबान सरकार को औपचारिक मान्यता नहीं दी है, लेकिन 2021 से ही मानवीय सहायता और व्यापार के जरिए व्यावहारिक संबंध बनाए हुए है।
मुत्ताकी पर संयुक्त राष्ट्र (UN) के प्रतिबंध लागू हैं, इसलिए उन्हें इस दौरे के लिए UN सुरक्षा परिषद (UNSC) से विशेष यात्रा छूट मिली है। इस यात्रा से पहले दोनों देशों के बीच कई बैठकें हो चुकी हैं। जनवरी 2025 में भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने मुत्ताकी से दुबई में मुलाकात की थी। इसके बाद मई 2025 में विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर ने भी मुत्ताकी से बात की थी। पहलगाम आतंकी हमले के बाद हुई इस बातचीत में काबुल ने हमले की कड़ी निंदा की थी। तालिबान सरकार भारत को ‘महत्वपूर्ण क्षेत्रीय और आर्थिक साझेदार’ बता चुकी है।
दौरा: देवबंद, ताज महल और व्यापार पर फोकस
अमीर खान मुत्ताकी तालिबान के पहले ऐसे वरिष्ठ अधिकारी हैं जो भारत की यात्रा कर रहे हैं। अपनी इस यात्रा के दौरान वह राजनीतिक मुलाकातों के अलावा कई महत्वपूर्ण जगहों का दौरा करेंगे। शनिवार (11 अक्टूबर 2025) को मुत्ताकी देवबंद के प्रसिद्ध दारुल उलूम मदरसे का दौरा करेंगे। यह मदरसा तालिबान के कई नेताओं के लिए सम्मान का केंद्र रहा है। यहाँ कुछ अफगान छात्र भी पढ़ाई कर रहे हैं।
इसके बाद, रविवार (12 अक्टूबर 2025) को वह आगरा जाकर ताजमहल देखेंगे। फिर सोमवार (13 अक्टूबर 2025) को मुत्ताकी नई दिल्ली में एक प्रमुख उद्योग मंडल के कार्यक्रम में शामिल होंगे। वह भारतीय व्यापार और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे। तालिबान सरकार भारत के साथ व्यापारिक संबंध मजबूत करना चाहती है। इसी दिन (13 अक्टूबर) को मुत्ताकी नई दिल्ली में अफगान समुदाय के लोगों से भी मिलेंगे। बुधवार (15 अक्टूबर 2025) को मुत्ताकी भारत का दौरा खत्म कर काबुल लौट जाएँगे।
राजदूत शाहीन ने क्या कहा?
मुत्ताकी की भारत यात्रा से पहले कतर में अफगानिस्तान के राजदूत मुहम्मद सुहैल शाहीन ने इस दौरे को बहुत अहम बताया। उन्होंने कहा कि भारत और अफगानिस्तान के लोगों के बीच ऐतिहासिक और गहरे संबंध हमेशा रहे हैं, चाहे सरकार कोई भी रही हो। यह दौरा आपसी विश्वास को बढ़ाने और पुराने मतभेदों को खत्म करने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगा।
सुहैल शाहीन ने अंतर्राष्ट्रीय मान्यता न मिलने को राजनीतिक कारण बताया। सुहैल शाहीन ने तर्क दिया, “हमने विदेशी कब्जे से आजादी अपनी जनता के समर्थन से हासिल की है। ठीक वैसे ही, जैसे भारत ने ब्रिटिश राज से स्वतंत्रता पाई थी।” सुहैल शाहीन ने ज़ोर दिया कि तालिबान का पूरे अफगानिस्तान पर नियंत्रण है और वे उसकी सुरक्षा करने में सक्षम हैं, इसलिए उन्हें अंतर्राष्ट्रीय मान्यता मिलनी चाहिए।
व्यापार और कनेक्टिविटी के विकल्प
राजदूत शाहीन ने द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने के लिए एक उच्च-स्तरीय समिति बनाने का प्रस्ताव दिया। यह समिति शिक्षा, व्यापार और बुनियादी ढाँचे जैसे क्षेत्रों में नियमित बैठकें कर सकती है। जब भारत-अफगानिस्तान व्यापार के लिए पाकिस्तान द्वारा रास्ता न दिए जाने की बात आई, तो उन्होंने दो विकल्प बताए।
पहला, चूंकि पाकिस्तान मध्य एशिया के रास्ते अपने व्यापार के लिए अफगानिस्तान से गुजरता है, इसलिए उसे भारत के साथ व्यापार के लिए भी अफगानिस्तान को रास्ता देना चाहिए। राजदूत शाहीन ने चाबहार पोर्ट को एक अच्छा विकल्प बताया। उन्होंने प्रस्ताव दिया कि दोनों देशों को व्यापारिक सुविधाएँ बेहतर बनाने और व्यापार बढ़ाने के लिए चाबहार पोर्ट पर मिलकर काम करना चाहिए।
संकट में भारत की सहायता
भारत ने अफगान जनता को मानवीय मदद देने में हमेशा तत्परता दिखाई है। सितंबर 2025 में आए भूकंप के बाद, भारत सबसे पहले राहत सामग्री भेजने वाले देशों में था। उस समय 1,000 परिवारों के लिए टेंट और 15 टन खाद्य सामग्री भेजी गई थी। इसके अलावा, दवाइयाँ, हाइजीन किट, कंबल और जनरेटर सहित 21 टन अतिरिक्त राहत सामग्री भी अफगानिस्तान पहुँची।

अगस्त 2021 से अब तक भारत 50,000 टन गेहूँ, 330 टन से अधिक दवाइयाँ और टीके, और 40,000 लीटर कीटनाशक जैसी जरूरी राहत सामग्री दे चुका है। इन प्रयासों से भारत ने यह साबित किया है कि वह अफगान जनता के साथ एक मानवीय और विकास साझेदार के रूप में खड़ा है, भले ही उसने तालिबान सरकार को औपचारिक मान्यता न दी हो।
भारत के करीब आने का मौका
मुत्ताकी का यह दौरा तब हो रहा है जब अफगानिस्तान-पाकिस्तान के रिश्ते तनावपूर्ण हैं। पाकिस्तान पर तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) को समर्थन देने के आरोप लग रहे हैं। ऐसे में, मुत्ताकी के पास भारत के करीब आकर क्षेत्रीय मंच पर अपनी स्थिति मजबूत करने का यह सही मौका है। अफगान राजदूत मुहम्मद सुहैल शाहीन ने भी कहा है कि यह दौरा ‘आपसी विश्वास बढ़ाने’ की दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे साफ है कि काबुल, नई दिल्ली को एक मजबूत विकल्प के तौर पर देख रहा है।


