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‘जहन्नुम में जाए भारत’: एशिया कप की मेजबानी Pak से छिनने की आशंका से भड़के दाऊद के समधी जावेद मियाँदाद, BCCI ने कह दिया है – पाकिस्तान नहीं जाएगी इंडियन टीम

पूर्व पाकिस्तानी क्रिकेटर जावेद मियाँदाद (Javed Miandad) ने एशिया कप (Asia Cup) 2023 में भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम को नहीं भेजने पर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के खिलाफ जहर उगला है। मियाँदाद ने कहा है कि पाकिस्तान को बने रहने के लिए भारत की आवश्यकता नहीं है और न ही भारत द्वारा नियंत्रित क्रिकेट की आवश्यकता है। उन्होंने आईसीसी से भारत के खिलाफ कार्रवाई करने की माँग की।

जावेद मियाँदाद ने हाल ही में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में कहा था, “अगर भारत क्रिकेट खेलने के लिए पाकिस्तान नहीं आना चाहता है तो वह जहन्नुम में जाए।” उन्होंने आगे कहा, ”मैंने हमेशा पाकिस्तान का समर्थन किया है। आप जानते हैं कि जब भी कोई समस्या आती है तो मैं भारत को नहीं बख्शता हूँ। लेकिन, बात यह है कि हमें अपने हिस्से को देखने की जरूरत है। हमें इसके लिए लड़ना चाहिए। हमें किसी बात की परवाह नहीं है क्योंकि हमें मेजबानी करनी है। यह आईसीसी का काम है। यदि ICC इसे नियंत्रित नहीं कर सकता है तो उसके गवर्निंग बॉडी होने का कोई मतलब नहीं है। उन्हें हर टीम के लिए समान नियम लागू करने की जरूरत है। अगर इस तरह की टीमें नहीं आती हैं तो उन्हें प्रतिबंधित कर दिया जाना चाहिए। इंडिया होगा, अपने लिए होगा। हमारे लिए नहीं है।”

पूर्व पाकिस्तानी क्रिकेटर ने आगे कहा कि भारत हार के डर से पाकिस्तान का सामना करने से डरता है। जबकि तथ्य यह है कि पाकिस्तान ने पिछले 13 विश्व कप मैचों में से 12 में भारत से हार का सामना किया है। इसके अलावा कई महत्वपूर्ण मैचों में भी भारत ने पाकिस्तान को पटखनी दी है। बता दें कि अंडरवर्ल्ड सरगना दाऊद इब्राहिम की बेटी का निकाह जावेद मियाँदाद के बेटे से हुआ है। इस तरह वो आतंकी दाऊद के समधी हैं।

मियाँदाद ने कहा, “भारत पाकिस्तान के खिलाफ खेलने से क्यों डरता है? उन्हें पता है कि अगर वे पाकिस्तान से हार गए तो उनकी जनता उन्हें बख्शेगी नहीं। नरेंद्र मोदी गायब हो जाएँगे, उनकी जनता उन्हें नहीं छोड़ेगी। पाकिस्तान से भागना भारत की पुरानी आदत है। यह कोई नई बात नहीं है, मैं उन्हें अपने खेल के दिनों से जानता हूँ।”

उन्होंने आगे कहा, “जब हमने शारजाह में जीतना शुरू किया तो भारत वहाँ से भाग गया, वे हमसे खेलना नहीं चाहते थे। जब भी वो हमसे हारते थे तो उनकी जनता खिलाड़ियों के घरों में आग लगा देती थी। गावस्कर सहित उनके खिलाड़ियों को हमसे हारने के बाद काफी परेशानी हुई थी।” मियाँदाद, दरअसल हाल के महीनों में 2023 एशिया कप के आयोजन स्थल को लेकर उठे विवाद पर प्रतिक्रिया दे रहे थे।

2023 एशिया कप की मेजबानी को लेकर क्या है विवाद ?

दरअसल एशिया कप 2023 पाकिस्तान में आयोजित किया जाना था और इस बात को लेकर अनिश्चितता है कि भारतीय क्रिकेट टीम भाग लेने के लिए वहाँ जाएगी या नहीं। ऐसी अफवाहें थीं कि मेन इन ब्लू एशिया कप के लिए पाकिस्तान जाने की योजना बना रही है, लेकिन एशियाई क्रिकेट परिषद (ACC) के अध्यक्ष (ACC) और बीसीसीआई सचिव जय शाह ने पिछले साल अक्टूबर में स्पष्ट किया था कि भारत एशिया कप के लिए अपने पड़ोसी देश का दौरा नहीं करेगा। इसके बजाय, जय शाह ने संकेत दिया था कि एशिया कप 2023 किसी तटस्थ स्थान पर होगा।

उन्होंने तब कहा था,“एशिया कप 2023 एक तटस्थ स्थान पर होगा। सरकार पाकिस्तान जाने वाली टीम की अनुमति के बारे में फैसला करती है, इसलिए हम उस पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे। 2023 एशिया कप के लिए यह तय किया गया है कि टूर्नामेंट किसी तटस्थ स्थान पर आयोजित किया जाएगा।” भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) की बैठक 18 अक्टूबर 2022 को मुंबई में आयोजित की गई थी।

उन्होंने कहा था, “2025 चैंपियनशिप ट्रॉफी के लिए भी स्थान अभी भी तय किया जाना है, जब यह तय हो जाएगा तो हम उस पर टिप्पणी करेंगे। हमें अपने मीडिया राइट्स से अच्छी कमाई हो रही है। हमारा मकसद है कि घरेलू खिलाड़ियों को ज्यादा फायदा मिलना चाहिए क्योंकि हमारी कमाई बढ़ रही है।”

दिसंबर 2022 में, ACC के अध्यक्ष जय शाह ने यात्रा कार्यक्रम जारी किया था लेकिन एशिया कप के आयोजन स्थल का उल्लेख नहीं किया था। वहीं पीसीबी प्रमुख नजम सेठी ने शाह पर ‘एकतरफा निर्णय’ लेने का आरोप लगाया आरोप। हालाँकि इस आरोप को ACC अधिकारी ने आधिकारिक तौर पर ख़ारिज कर दिया था और कहा था कि यात्रा कार्यक्रम पर सिफारिशें माँगने के लिए पीसीबी को बार-बार ईमेल किया गया था लेकिन कोई जवाब नहीं आया।

जय शाह के फैसले के बाद PCB प्रमुख सेठी ने हाल ही में BCCI को धमकी दी थी कि अगर एशिया कप तटस्थ स्थान पर खेला जाएगा तो पाकिस्तान 2023 विश्व कप से बाहर हो जाएगा। पीसीबी ने एशिया कप की मेजबानी के अधिकार पर चर्चा के लिए आपात बैठक बुलाई थी।

विवाद को समाप्त करने के लिए, एशियाई क्रिकेट परिषद (ACC) ने 4 फरवरी 2023 को बहरीन में एशिया कप की मेजबानी पर चर्चा करने के लिए एक आपातकालीन बैठक की थी। बैठक के बाद शाह ने दोहराया कि पाकिस्तान में सितंबर 2023 में एशिया कप आयोजित होने की कोई संभावना नहीं है। BCCI का कहना है कि भारत पाकिस्तान में एशिया कप में भाग नहीं ले सकता क्योंकि भारत सरकार ने भारतीय टीम को पाकिस्तान जाने की अनुमति नहीं दी है। इसके बजाए, संयुक्त अरब अमीरात और श्रीलंका दो संभावित विकल्प हैं। आयोजन स्थल पर अंतिम फैसला मार्च में लिया जाएगा।

उल्लेखनीय है कि 2009 में लाहौर में श्रीलंका की टीम पर बस में हुए हमले के बाद से पाकिस्तान में अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों की मेजबानी कई वर्षों तक नहीं हुई थी। पिछले तीन वर्षों से, पाकिस्तान ने अंतर्राष्ट्रीय टूर्नामेंटों की मेजबानी करना शुरू किया है, लेकिन भारत ने अभी तक पाकिस्तान का दौरा नहीं किया है।

इस गाँव में 7 साल से चल रहा रामचरितमानस का अखंड पाठ, 24 घंटे गूँजती हैं तुलसीदास की चौपाइयाँ: ‘भारत के दिल’ में स्वामी जैसे जातिवादियों की नहीं गलती दाल

देशभर में रामचरितमानस को लेकर विवाद छिड़ा हुआ है। एक ओर जहाँ राजनीतिक रोटियाँ सेंकने के लिए नेता बेतुके बयान दे रहे हैं। वहीं दूसरी ओर, मध्य प्रदेश के रतलाम जिले के एक छोटे से गाँव में बीते 7 साल से 24 घण्टे रामचरितमानस का पाठ किया जा रहा है। इसके लिए 130 लोगों का समूह शिफ्ट बनाकर पाठ करता है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रतलाम जिले के पंचेड़ गाँव में रामचरितमानस के पाठ की परंपरा साल 1985 से चली आ रही है। लेकिन साल 2016 में इस परंपरा में बड़ा बदलाव हुआ। दरअसल, 2016 में महाकाल की नगरी उज्जैन में सिहंस्थ कुंभ मेले का आयोजन हुआ था। यहाँ स्वामी प्रसाद मौर्या जैसे जातिवादियों की दाल नहीं गलती, क्योंकि सभी वर्ग के लोग साथ-साथ अपनी साझा आस्था और विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं, उस पर गर्व कर रहे हैं।

इस आयोजन का पंचेड़ गाँव के लोगों में ऐसा प्रभाव हुआ कि ग्रामीणों ने रामचरितमानस का सालभर पाठ करने का निर्णय किया लिया। हालाँकि, गाँव वालों के लिए यह निर्णय चुनौती भरा था। सबसे बड़ा सवाल यह था कि साल के 365 दिन और 24 घण्टे अखण्ड रामचरितमानस का पाठ कैसे होगा?

हालाँकि, इसके बाद गाँव वालों ने 130 लोगों का एक समूह बनाया। इस समूह को 4-4 सदस्यों में बाँटा गया। साथ ही सभी को एक-एक घण्टे रामचरितमानस का पाठ करने का काम सौंपा गया। लोगों ने पुण्य के इस कार्य को प्रसन्नतापूर्वक स्वीकार किया। इसके बाद से ही बीते 7 साल से पंचेड़ गाँव में स्थित भगवान शिव और हनुमान जी के मंदिर में हर रोज 24 घण्टे रामचरितमानस की चौपाइयाँ गूँज रहीं हैं।

गाँव मे बीते 7 सालों से किए जा रहे अखंड रामचरितमानस के पाठ का प्रभाव यहाँ के युवाओं पर भी पड़ रहा है। गाँव के ऐसे कई युवा हैं जिन्हें रामचरितमानस की दोहे और चौपाइयाँ कंठस्थ हो गईं हैं। साथ ही, भगवान श्रीराम के चरित्र का गुणगान सुन गाँव के लोगों का धार्मिक और सांस्कृतिक विकास भी हो रहा है।

रामचरितमानस के पाठ को लेकर पंचेड़ गाँव के सरपंच का कहना है कि गाँव के लोग पिछले 7 साल से इस परंपरा का निर्वहन करते आ रहे हैं। गाँव के लोगों की टीम बनी है। यह टीम अपने-अपने समय पर आकर रामचरितमानस का पाठ करती है। ऐसे में लगातार पाठ भी चलता रहता है और किसी एक व्यक्ति पर भार नहीं पड़ता। सरपंच ने यह भी कहा है कि रामचरितमानस के प्रभाव से गाँव में जातिवाद नहीं है। सभी जातिवर्ग के लोग रामचरितमानस के पाठ में अपना योगदान देते हैं।

बिहार के मधुबनी में DPO लापता, पत्नी ने दर्ज कराया अपहरण का मामला, परिवार ने कहा – किसी से कोई झगड़ा नहीं था: CCTV-मोबाइल लोकेशन खँगाल रही पुलिस

गोपालगंज में साम्प्रदायिक व सारण में जातीय तनाव के बाद अब बिहार के मुजफ्फरपुर से एक DPO (जिला कार्यक्रम पदाधिकारी) के लापता होने की खबर है। गायब हुए अधिकारी का नाम राजेश कुमार मिश्रा है जो मधुबनी जिले में तैनात थे। राजेश की पत्नी ने उनके अपहरण की FIR दर्ज करवाई है। 59 वर्षीय लापता DPO के परिजनों के मुताबिक, रविवार (5 जनवरी 2023) की दोपहर से उनका कुछ भी अता-पता नहीं है। वहीं पुलिस का कहना है कि DPO को किसी वीडियो के सहारे पैसों के लिए ब्लैकमेल किया जा रहा था। फ़िलहाल मामले की जाँच की जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला अहियापुर थानाक्षेत्र के ग्राम अयाची का है। यही पर DPO अपने परिवार के साथ रहते हैं। सोमवार (6 फरवरी 2023) को उनकी पत्नी अर्चना ने थाने में पहुँच कर उनके अपहरण होने की आशंका जताई। पुलिस ने केस दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है। अर्चना ने मीडिया से बातचीत के दौरान बताया कि मधुबनी में पोस्टेड उनके पति रविवार को छुट्टी होने के चलते शनिवार को घर आए थे। उनके घर में सब सही चल रहा था और उनके पति का घर, मोहल्ला और ऑफिस मिला कर किसी से कोई विवाद भी नहीं था।

अर्चना के मुताबिक, रविवार को उनके पति दोपहर को अकेले ही घर से बाहर निकले लेकिन अब तक लौट कर वापस नहीं आए।

DPO की पत्नी ने यह भी बताया कि पुलिस ने उनके पति को खोजने में समय लगने की बात कही है। CCTV कैमरे में राजेश मिश्रा घर से मुख्य सड़क की तरफ जाते दिखाई दे रहे हैं। वहीं DSP राघव दयाल के मुताबिक DPO को पिछले कुछ समय से कोई किसी वीडियो के नाम पर पैसे के लिए ब्लैकमेल कर रहा था। बताया गया कि DPO ने ब्लैकमेल करने वाले को कुछ पैसे भी भेजे थे। पुलिस का कहना है कि राजेश कुमार दबाव में भी थे। पुलिस के मुताबिक, मामले में जाँच की जा रही है।

कुछ खबरों में ये भी कहा जा रहा है कि अधिकारी को सेक्सटॉर्शन गिरोह ने निशाना बनाया था। आशंका है कि ये साइबर फ्रॉड का मामला है, जिसके तहत उन्हें ब्लैकमेल कर के उनसे कई बार रुपए ऐंठे गए थे। इसीलिए, पुलिस उनके बैंक खाते के डिटेल्स भी खँगाल रही है। उन्होंने दोपहर में घर से निकलने से पहले अपने इंजिनियर बेटे के साथ भोजन भी किया था। बीबीगंज उनका अंतिम मोबाइल लोकेशन बता रहा है। उनका सरकारी और निजी – दोनों फोन नंबर फ़िलहाल ऑफ है। फ़िलहाल फिरौती की कोई माँग भी नहीं की गई है।

नाना कर्नल, मेजर पिता ने देश के लिए दिया बलिदान, अब 23 की उम्र में भारतीय सेना में सेवा देने को तैयार है इनायत वत्स: इकलौती संतान, पर नहीं ली सरकारी नौकरी

जम्मू-कश्मीर में नवंबर 2003 में एक एंटी टेरर ऑपरेशन में जान गँवाने वाले हरियाणा के पंचकुला के मेजर नवनीत वत्स की बेटी इनायत वत्स अपने पिता की राह पर निकल पड़ी है। इनायत अपने माता-पिता की इकलौती संतान हैं। जब वह 2.5 साल की थी, तब उनके पिता ने देश के लिए बलिदान दिया था। अब वह 23 साल की हो गई हैं। इनायत का परिवार भारतीय सेना के लिए समर्पित रहा है। उनके नाना कर्नल थे। अब तीसरी पीढ़ी की इनायत सेना की शान बढ़ाने के लिए तैयार हैं।

वह प्री-कमीशनिंग बेसिक मिलिट्री ट्रेनिंग के लिए अप्रैल 2023 में ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी (OTA) चेन्नई में शामिल होंगी। प्री कमीशन बेसिस ट्रेनिंग में वह सेना की बारिकियों को सीखेंगी। इनायत ने दिल्ली के लेडी श्रीराम कॉलेज से अपनी ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है। अभी वह डीयू के हिंदू कॉलेज से राजनीति विज्ञान में पोस्ट ग्रेजुएशन कर रही हैं।

इनायत के परिवार पर उस समय दुखों का पहाड़ टूट पड़ा था, जब उन लोगों को मेजर नवनीत वत्स के बलिदान होने की सूचना मिली थी। पूरे गाँव में सन्नाटा पसर गया था, लेकिन अपने पिता के वीरगति को प्राप्त होने के बाद भी इनायत ने हिम्मत नहीं हारी और जी-तोड़ मेहनत की। इनायत की माँ शिवानी वत्स ने अपनी बेटी के सेना में भर्ती होने के सपने में उनकी मदद की। कम उम्र में पिता का साया उठ जाने के बाद उन्होंने कभी भी इनायत को उनकी कमी महसूस नहीं होने दी। वह माँ के साथ अपनी बच्ची के लिए एक बेहतर शिक्षक भी साबित हुईं, जिन्होंने उसके भविष्य को आकार दिया, उसे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। इस बीच माँ शिवानी ने मुश्किल परिस्थितियों में भी अपनी बेटी के सपनों से समझौता नहीं किया।

शिवानी ने बेटी के सेना में शामिल होने पर ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ को बताया कि वह एक बहादुर बेटी है, जब उसने ग्रेजुएशन किया तो सबको लगा कि वह सरकार की ओर से मृतक आश्रितों को मिलने वाली कोई नौकरी ले लेगी। भले ही वह एक बलिदानी की बेटी है, इसके बावजूद उसने सेना में शामिल होने का फैसला किया।

शिवानी ने बताया कि उस वक्त वह 27 साल की थीं और शादी को सिर्फ चार साल ही हुए थे, तभी उनके पति की मौत हो गई। अब वह पास के चंडीमंदिर में आर्मी पब्लिक स्कूल में एक टीचर हैं। वह आगे कहती हैं, “इनायत ने एक बार मुझसे पूछा था, अगर मैं लड़का होता, तो आप क्या करतीं? मैंने उससे कहा था कि मैं तुम्हें एनडीए या आईएमए में शामिल होने के लिए कहती। मुझे खुशी है कि एक आरामदायक जीवन जीने का विकल्प होने के बावजूद, उसने अपने पिता की राह पर चलना स्वीकार किया।”

इंदौर में वकील को बाइक सवारों ने रोका, सर तन से जुदा करने की दी धमकी: पठान विरोधी नारेबाजी में हिंदुओं की कर रहे हैं पैरवी, नूरजहाँ अब भी फरार

मध्य प्रदेश के इंदौर में एक हिंदूवादी वकील को धमकी देने का मामला सामने आया है। बाइक सवार युवकों ने रस्ते में रोक कर वकील को उदयपुर के कन्हैया लाल की तरह सिर तन से जुदा करने की धमकी दी। पीड़ित वकील अनिल नायडू हैं। वे फिल्म पठान के विरोध में हुई नारेबाजी से जुड़े एक केस में हिंदुवादियों के वकील है। लव जिहाद के आरोपितों की रिहाई पर भी आपत्ति जता चुके हैं।

नायडू को धमकी दिए जाने की घटना शनिवार (4 फरवरी 2023) की है। पुलिस ने CCTV फुटेज से दो आरोपितों की तस्वीरें निकालकर उनकी तलाश कर रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक एडवोकेट अनिल नायडू लम्बे समय से कट्टरपंथियों के निशाने पर हैं। वे विश्व हिंदू परिषद के प्रांत संयोजक भी हैं।

इस घटना के बाद अनिल नायडू खुद मीडिया के सामने आए। उन्होंने बताया कि घटना के दिन वो रोज की तरफ 10 बजे ऑफिस के लिए निकले थे। रास्ते में संजय सेतु के पास 2 बाइक सवार युवकों ने उन्हें रोका। नायडू के मुताबिक आरोपितों ने उन्हें हिन्दुओं की पैरवी और मुस्लिमों का विरोध करने पर उदयपुर वाला हाल करने की धमकी दी। इस दौरान दोनों ने गंदी-गंदी गालियाँ दी। दोनों युवक काले रंग की बाइक पर सवार थे। वकील का कहना है कि वेशभूषा और बातचीत से दोनों मुस्लिम लग रहे थे।

धमकी देने वाले दोनों संदिग्धों की उम्र 18 से 20 वर्ष के बीच बताई जा रही है। वकील का कहना है कि उन्हें धमकी देने संदिग्धों ने सोनू मंसूरी, फरार चल रहीं महिला वकील नूरजहाँ का नाम लेते हुए उनके केस में आपत्ति न लेने की चेतावनी दी। इस मामले में पुलिस ने अज्ञात 2 लोगों पर IPC की धारा 341, 294, 506 और 34 के तहत FIR दर्ज की है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही दोनों संदिग्धों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

गौरतलब है कि कोर्ट कार्रवाई की वीडियोग्राफी करती पकड़ी गई सोनू मंसूरी से पुलिस की पूछताछ जारी है। बताया जा रहा है कि उसे भरोसा दिलाया गया था कि कोई बात होने पर महिला वकील नूरजहाँ संभाल लेगी। नूरजहाँ घटना के बाद से फरार हैं। सोनू मंसूरी और नूरजहाँ का संबंध प्रतिबंधित चरमपंथी संगठन PFI (पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया) से बताया जा रहा है।

‘AAP ने 9 पार्षदों को दिया पद और पैसे का लालच’: तीसरी बार टल गया MCD के मेयर का चुनाव, सुप्रीम कोर्ट जाएगी अरविंद केजरीवाल की पार्टी

दिल्ली नगर निगम के मेयर, डिप्टी मेयर और स्टैंडिंग कमेटी का चुनाव लगातार तीसरी बार टल गया है। इस चुनाव के लिए सोमवार (6 फरवरी, 2023) को बुलाई गई बैठक अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दी गई। भाजपा ने मेयर पद के लिए रेखा गुप्ता को प्रत्याशी बनाया है। वहीं, ‘आम आदमी पार्टी (AAP)’ की ओर से शैली ओबरॉय मैदान में हैं।

दरअसल, दिल्ली नगर निगम (MCD) के महापौर चुनाव के लिए नियुक्त पीठासीन अधिकारी ने ‘आम आदमी पार्टी’ के दो पार्षदों का वोटिंग करने का अधिकार रद्द कर दिया। इसके चलते सदन में AAP के पार्षदों ने हंगामा करना शुरू कर दिया। यही नहीं, पीठासीन अधिकारी ने सदन में यह भी कहा कि उप-राज्यपाल ने जिन 10 सदस्यों को मनोनीत किया है, वह भी वोट डाल सकेंगे। इसके बाद सदन में जारी हंगामा और तेज हो गया। इस हंगामे के चलते सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।

बता दें कि इससे पहले मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव के लिए दो बार सदन की बैठक बुलाई गई थी। पहली बार 6 जनवरी को और दूसरी बार 24 जनवरी को। लेकिन, दोनों पार्टी के नेताओं के हंगामे के चलते पीठासीन अधिकारी ने बिना चुनाव कराए ही कार्यवाही स्थगित कर दी थी। गौरतलब है कि दिल्ली नगर निगम चुनाव में सभी 250 वार्डों में मतदान हुआ था। इसमें आम आदमी पार्टी 134 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आई थी। वहीं, भाजपा के खाते में 104 सीटें और कॉन्ग्रेस के खाते में 9 सीटें गईं।

सदन की कार्यवाही स्थगित होने के बाद आम आदमी पार्टी और भाजपा के बीच जुबानी जंग तेज हो गई। AAP नेता आतिशी ने कहा है कि बीजेपी की मंशा साफ नजर आ रही है और वह मेयर का चुनाव नहीं करवाना चाहती। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा बेईमानी से दिल्ली नगर निगम में सरकार बना कर बैठी है। उन्होंने यह भी कहा है कि पार्टी आज ही सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी, ताकि मेयर का चुनाव अदालत की निगरानी में हो सके।

वहीं, केंद्रीय मंत्री मिनाक्षी लेखी ने पलटवार करते हुए कहा कि दिल्ली को एक भ्रष्ट मुख्यमंत्री मिला है। एक ऐसा मुख्यमंत्री जिसका नाम हर रोज शराब घोटाले में आ रहा है। इसी पैसे का इस्तेमाल कर पहले गोवा में और फिर दिल्ली में मेयर का चुनाव लड़ने की कोशिश की। इन लोगों ने भाजपा के 9 पार्षदों को पद और पैसे का लालच दिया।

मुंबई में मजूदरी करता था जफर, इधर ताबीज-दुआ बाँटते-बाँटते उसकी बीवी से मौलाना ने बना लिए संबंध: फिर हत्या कर लाश फेंक दी

उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले में जफर अली की हत्या में पुलिस ने अशफाक नाम के मौलाना सहित तीन को गिरफ्तार किया है। मौलाना और जफर की बीवी नजमा के बीच अवैध संबंध बताए जा रहे हैं। कत्ल में नजमा ने भी उसका साथ दिया था। तीसरे गिरफ्तारी की पहखन सलीम के तौर पर हुई है। जफर की हत्या 25 जनवरी 2023 को हुई थी।

बलरामपुर पुलिस के मुताबिक मूल रूप से सिद्धार्थनगर जिले के ढेबरुआ थाना क्षेत्र का रहने वाला जफर मुंबई में मजदूरी करता था। उसका अब्बा भी मजदूर था और अम्मी की मौत हो चुकी है। परिवार में उसकी बीवी नाजमा खातून और 3 छोटे बच्चे थे। कुछ समय पहले जफर के घर के बगल में बलरामपुर के तुलसीपुर थाना क्षेत्र के गाँव गदाखौवा मजरे नैकिनिया का रहने वाला मौलाना अशफाक आ कर रहने लगा। यहाँ वह लोगों को दुआ और ताबीज बाँटता था।

पुलिस ने बताया कि जफर की बीवी नाजमा भी मौलाना अशफाक से दुआ और ताबीज ले रही थी। इस दौरान दोनों के बीच संबंध बन गए। इस बीच जफर ने मुंबई से लौटकर अपने जिले में ही काम-धंधे का प्लान बनाया। इसकी जानकारी मिलने के बाद जाफर की बीवी और मौलाना परेशान हो उठे। दोनों ने मिलकर जफर को रास्ते से हटाने का प्लान बनाया।

प्लान के मुताबिक मौलाना ने फोन पर जफर से दोस्ती की। 24 जनवरी को जफर ने मुंबई से ट्रेन पकड़ी। 25 जनवरी को रास्ते में दवा के बहाने जफर ने तुलसीपुर रेलवे स्टेशन पर उसे ट्रेन से उतार लिया। यहाँ से वह जफर को अपने साथ ले गया और सलीम के साथ मिल गला दबाकर उसकी हत्या कर दी। लाश उसी रात सरयू नहर में फेंक दी। 4 दिनों बाद जफर की लाश 29 जनवरी को सोनपुर धुतकहवा गाँव के पास बरामद हुई थी।

इस मामले की जाँच करते हुए पुलिस ने जफर सहित उसकी बीवी की कॉल डिटेल खँगाली। यहीं से मौलाना अशफाक का नंबर प्रकाश में आया। पुलिस ने पहले नजमा को 31 जनवरी 2023 को गिरफ्तार किया। नाजमा ने पूछताछ में पूरी पोल खोल दी और और रविवार (5 जनवरी 2023) को पुलिस ने पूरे मामले का खुलासा करते हुए मौलाना अशफाक के साथ उसके साथी सलीम को भी गिरफ्तार कर लिया। आरोपितों के पास से कत्ल में प्रयोग हुई बाइक, जफर का बैग और कपड़े, बेहोश करने में प्रयोग हुई नशीली दवा बरामद की गई है। सभी आरोपितों को जेल भेज दिया गया है।

कर्नाटक से छत्तीसगढ़ तक हिंदुओं को अपमानित करने में जुटी कॉन्ग्रेस: पूर्व CM सिद्धारमैया ने हिंदुत्व को हिंसा से जोड़ा, छत्तीसगढ़ के मंत्री ने कहा- आदिवासी हिंदू नहीं

छत्तीसगढ़ और कर्नाटक में इसी साल विधानसभा चुनाव होने हैं। इसके साथ ही कॉन्ग्रेस नेताओं की हिंदू घृणा भी सामने आने लगी है। कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया (Siddaramaiah) ने हिंदुत्व को संविधान के खिलाफ बताया है। वहीं छत्तीसगढ़ के आबकारी मंत्री कवासी लखमा (Kawasi Lakhma) ने कहा है कि आदिवासी हिंदुओं से अलग हैं।

सिद्धारमैया ने कलबुर्गी में रविवार (5 जनवरी 2023) को एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए हिंदुओं को अपमानित करने वाला बयान दिया। उन्होंने कहा, “हिंदुत्व संविधान के खिलाफ है। हिंदुत्व और हिंदू धर्म अलग-अलग हैं। मैं हिंदू धर्म के खिलाफ नहीं हूँ। मैं एक हिंदू हूँ, लेकिन मनुवाद और हिंदुत्व का विरोध करता हूँ। कोई भी धर्म हत्या और हिंसा का समर्थन नहीं करता है, लेकिन हिंदुत्व और मनुवाद हत्या, हिंसा और भेदभाव का समर्थन करता है।”

पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन के दौरान यह भी कहा कि यह उनका आखिरी विधानसभा चुनाव है। लेकिन रिटायरमेंट के बाद भी वे पार्टी के लिए काम करते रहेंगे। यह पहली बार नहीं है कि जब सिद्धारमैया ने हिंदू भावनाओं को आहत करने का काम किया है। इससे पहले मई 2022 में उन्होंने बीफ खाने को लेकर विवादित बयान दिया था। उन्होंने कहा था, “मैं हिंदू हूँ और मैंने अभी तक बीफ नहीं खाया है। पर चाहूँ तो बीफ खा सकता हूँ। यह मेरी मर्जी है।”

दूसरी ओर छत्तीसगढ के आबकारी मंत्री कवासी लखमा ने जनजातीय लोगों को हिंदू धर्म से अलग बताया है। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा, “आदिवासी हिंदू से अलग होते हैं। हमारा पूजा-पाठ और शादी ब्याह का तरीका अलग-अलग होता है। इसलिए आदिवासी हिंदू नहीं होते हैं। आदिवासी लोग आदिकाल से रहने वाले लोग हैं। हमलोग जंगलों में रहते हैं। पूजा-पाठ करते हैं। हिंदू और आदिवासियों के रीति-रिवाज भी अलग होते हैं।”

बीजापुर से भाजपा के पूर्व विधायक और छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज के प्रांतीय उपाध्यक्ष राजाराम तोड़ेम ने कवासा के बयान का विराेध किया है। उन्होंने कहा है कि कवासी लखमा पढ़े-लिखे नहीं हैं इसलिए वह सनातन धर्म के बारे में कुछ नहीं जानते हैं। उन्होंने कहा कि आदिवासी के प्रमुख देवता शिव जी हैं। आदिवासी शिव जी को बुढ़ादेव के नाम से जानते हैं।

भूकंप से हिले 4 देश, तुर्की-सीरिया में रातोंरात ढही सैकड़ों इमारतें, उगल रही लाशें: PM मोदी ने कहा- करेंगे हर संभव मदद

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) ने तुर्की में आए विनाशकारी भूकंप पर गहरा दुख जताया है। उन्होंने सोमवार (6 फरवरी 2023) को ट्वीट किया, “तुर्की में आए भूकंप के कारण जनहानि और संपत्तियों को हुए नुकसान से दुखी हूँ। शोक संतप्त परिवारों के प्रति मेरी संवेदनाएँ हैं। घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना है। इस विपत्ति की घड़ी में भारत तुर्की के साथ एकजुटता के साथ खड़ा है। इस भूकंप की त्रासदी से निपटने में हरसंभव मदद के लिए हम तैयार हैं।”

दरअसल, तुर्की में स्थानीय समय के मुताबिक आज सुबह 04:17 बजे 7.8 तीव्रता का भूकंप आया। इसका केंद्र गाजियांटेप के पास था, जो सीरिया बॉर्डर से करीब 90 किमी दूर स्थित है। इसके कारण सीरिया के कई शहरों में भी भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। दोनों देशों में सैकड़ों इमारतें रातों रात ढेर गईं। इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में सीरियाई शरणार्थियों का घर है।

तुर्की में भूकंप के बाद चल रहे राहत और बचाव कार्य के दौरान एक इमारत के मलबे के नीचे दबी महिला को सुरक्षित बाहर निकालकर अस्पताल ले जाया गया (फोटो साभार: डेली मेल)

रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब तक तुर्की और सीरिया में आए भूकंप में 640 से अधिक लोगों की मौत हो गई, जबकि हजारों लोग घायल हुए हैं। तुर्की में भूकंप प्रभावित इलाकों में लोगों को मस्जिदों में शरण दी जा रही है। मरने वालों की संख्या और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। इन दोनों देशों के अलावा मिस्र, लेबनान और साइप्रस में भी भूकंप से झटके महसूस किए गए हैं।

तुर्की के किलिस में भूकंप के कारण इमारत के नीचे दबे लोगों को बाहर निकालते हुए बचावकर्मी (फोटो साभार: डेली मेल)

बताया जा रहा रहा है कि सीरिया के अलेप्पो और हमा शहर में भी काफी नुकसान हुआ है। सीरिया में तुर्की से सटे इलाकों में कई इमारतें गिर गईं और इसकी राजधानी दमिश्क में भी भूकंप के झटकों के बाद लोग सड़कों पर आ गए हैं।

सीरिया के अलेप्पो में भूकंप के कारण कई घर और वाहनों को पहुँचा नुकसान। (फोटो साभार: Th Guardian)

सीरिया के हामा शहर की कुछ तस्वीरें सामने आई हैं, जिसमें बचावकर्मी मलबे के नीचे दबे लोगों को निकालते हुए नजर आ रहे हैं।

सीरिया के हामा शहर में बचावकर्मी मलबे के नीचे दबे लोगों को बाहर निकाल रहे हैं। (फोटो साभार: डेली मेल)

तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तईप एर्दोगन ने भूकंप के बाद ट्वीट किया, “भूकंप से प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव दलों को तुरंत भेजा गया है। हमें उम्मीद है कि हम इस आपदा को एक साथ जल्द से जल्द और कम से कम नुकसान के साथ पार कर लेंगे। हमारी प्राथमिकता इमारतों के नीचे फँसे लोगों को बाहर निकालना और उन्हें अस्पतालों में भेजना है।” मालूम हो कि पूरे तुर्की में कम से कम 1000 बचावकर्मी तैनात किए गए हैं।

बता दें कि तुर्की दुनिया के उन देशों में आता है, जहाँ बार-बार भूकंप आता है। बताया जाता है कि तुर्की का ज्यादातर हिस्सा एनाटोलियन प्लेट पर है। इस प्लेट के पूर्व में ईस्ट एनाटोलियन फॉल्ट है और बाईं तरफ ट्रांसफॉर्म फॉल्ट है, जो अरेबियन प्लेट के साथ जुड़ता है। तुर्की के नीचे मौजूद एनाटोलियन टेक्टोनिक प्लेट एंटीक्लॉकवाइज घूम रहा है। साथ ही इसे अरेबियन प्लेट धक्का दे रही है। घूमती हुई एनाटोलियन प्लेट को जब अरेबियन प्लेट धक्का देती है, तब यह यूरेशियन प्लेट से टकराती है। इसकी वजह से भूकंप के तगड़े झटके लगते हैं।

‘इससे सिख धर्म और भारत का नाम खराब होगा’: कनाडा गए 3 पंजाबी गायक लापता, खालिस्तानी हाथ होने का शक

गुरुद्वारों में धार्मिक गीत (ढाडी जत्थे) गाने के लिए कनाडा गए 3 लोग गायब हो गए। ये सभी पंजाब के रहने वाले हैं। इन गायकों के प्रमुख और मशहूर गायक जसविंदर सिंह शांत ने संदेह जताते हुए कहा है कि तीनों ने फर्जी तरीके से शरणार्थी के रूप में रहने के लिए ‘गायब होने की’ योजना बनाई होगी।

‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ की रिपोर्ट के अनुसार, पंजाब के रहने वाले हरपाल सिंह, रणजीत सिंह राणा और राजेश सिंह महाय 6 महीने के वीजा पर कनाडा गए थे। उनके साथ ही जसविंदर सिंह शांत भी गए हुए थे। लेकिन तीनों गत 22 जनवरी को कनाडा के कैलगरी शहर से गायब हो गए। कनाडा गए पंजाबी गायकों के गायब होने को जसविंदर सिंह शांत ने बेहद दुर्भाग्यपूर्ण घटना बताया है। उन्होंने कहा है कि इससे सिख धर्म, पंजाब और भारत का नाम खराब होगा।

उन्होंने यह भी कहा है कि भारत छोड़ने से पहले हरपाल और रंजीत ने शिरोमणि अकाली दल (अमृतसर) के अध्यक्ष सिमरनजीत सिंह मान के साथ फोटो खिंचवाई थी। सिमरजीत सिंह लंबे समय से खालिस्तान का समर्थक रहा है। हालाँकि, जसविंदर सिंह ने स्पष्ट करते हुए कहा है कि उन्हें मान और गायब हुए लोगों के इरादे के बारे में कोई जानकारी नहीं थी।

जसविंदर सिंह शांत ने यह भी कहा है, “मुझे लगता है कि गायब हुए लोगों ने मान के साथ खींची गई फोटो का दुरुपयोग किया होगा। उन लोगों ने फोटो दिखाकर यह दावा किया होगा कि वे सिमरनजीत सिंह मान की पार्टी से जुड़े हुए हैं और भारत में उनकी जान को खतरा है। हरपाल और रंजीत का वीजा 23 फरवरी तक वैध है। उन्होंने वीजा बढ़ाने के लिए पहले आवेदन कर दिया था। लेकिन, अब हमने उनका आवेदन वापस ले लिया।”

उन्होंने यह भी कहा है, “हमारी यात्रा ब्रिटिश कोलंबिया के विक्टोरिया शहर की गुरुद्वारा समिति द्वारा स्पॉन्सर की गई थी। गुरुद्वारे में आयोजित बैसाखी उत्सव में हमें भजन गाना था। इन लोगों के गायब होने पर गुरुद्वारा समिति ने शिकायत कराई है। शिकायत के आधार पर विक्टोरिया पुलिस ने मामला दर्ज किया है।”

गौरतलब है कि पंजाबियों के गायब होने की यह पहली घटना नहीं है। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के इशारे पर काम कर रहे खालिस्तानी आतंकवादी हमेशा ही सिखों का गलत उपयोग करते रहे हैं। यहाँ तक कि पाकिस्तान, सिखों के धार्मिक स्थल करतारपुर कॉरिडोर में मत्था टेकने जाने वाले सिखों को फँसाकर भी भारत के खिलाफ इस्तेमाल कर रहा है।

यही नहीं, पाकिस्तान में पहले सिख पुलिस अफसर गुलाब सिंह शाहीन भी गायब हो चुके हैं। अप्रैल 2022 के बाद से वह कहाँ हैं, इसकी जानकारी किसी को नहीं है। ऐसा कहा जाता है कि गुलाब सिंह शाहीन को अगवा कर पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों ने किसी अज्ञात जगह पर रखा है। साल 2018 में उन्हें पत्नी और तीन बच्चों समेत जबरन घर से निकाला गया था। इसके बाद, ट्रैफिक वॉर्डन के पद से बरख़ास्त कर दिया गया था। बरख़ास्तगी से पहले वे 116 दिन नौकरी से भी गायब रहे थे। उन्होंने ही ETPB पर गंभीर आरोप लगाए थे।