उत्तर प्रदेश के वाराणसी में एक मंदिर में उपद्रवी तत्वों द्वारा तोड़फोड़ की घटना सामने आई है। चौबेपुर के डुबकियाँ गाँव स्थित हनुमान मंदिर में प्रतिमाओं को क्षतिग्रस्त कर दिया गया। त्रिशूल उखाड़ दिया गया। पुलिस CCTV व अन्य सबूतों के आधार पर उपद्रवियों की तलाश कर रही है। आक्रोशित लोगों को नई मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा करवाने का भरोसा दिया है। घटना सोमवार (6 फरवरी 2023) रात की है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना चौबेपुर थाना क्षेत्र के डुबकियाँ स्थित खपड़िया बाबा आश्रम में दक्षिणमुखी हनुमान मंदिर है। इस मंदिर में तमाम देवताओं के साथ हनुमान प्रतिमा भी स्थापित है। सोमवार की रात 3 बजे के करीब उपद्रवी तत्व ने हनुमान प्रतिमा को तोड़ दिया। शिवलिंग गायब है। नंदी को उखाड़ कर फेंक दिया। सुबह सबसे पहले सीताराम यादव नाम का श्रद्धालु मंदिर में दर्शन करने पहुँचा, तब उसे इस घटना की जानकारी हुई।
प्रकरण संज्ञान में है। मौके पर पुलिस बल मौजूद है। आवश्यक कार्यवाही की जा रही है।
कुछ ही देर में बाकी श्रद्धालु मंदिर पर जमा हो गए। सभी लोग मंदिर में तोडफोड़ करने वाले अज्ञात आरोपित पर कड़ी कार्रवाई की माँग करने लगे। मामले की जानकारी होते ही पुलिस मौके पर पहुँची। पुलिस ने मंदिर में नई मूर्तियों और शिवलिंग के स्थापना का आश्वासन दिया। इंस्पेक्टर राजीव सिंह के मुताबिक घटना की जाँच की जा रही। मदिर व आसपास लगे CCTV फुटेज को खँगाला जा रहा है। खबर लिखे जाने तक तोडफोड़ करने वाले की पहचान नहीं हो पाई थी।
बताया जा रहा है कि जनवरी 2023 के अंतिम सप्ताह में इसी इलाके के पास शिवपुर थाना क्षेत्र में डीह बाबा मंदिर को चोरों ने निशाना बनाया था। तब 10 दानपत्रों को तोड़ कर लाखों रुपए चुरा लिए गए थे। चोर जाते-जाते मंदिर की CCTV से लगा DVR भी उखाड़ ले गए थे।
कर्नाटक के कलबुर्गी में लोगों पर चाकू से हमला करने की धमकी देने वाले एक शख्स को गिरफ्तार किया गया है। घटना रविवार (5 फरवरी, 2023) की है। दरअसल, अब्दुल जफर नाम का शख्स सरेआम धारदार चाकू से लोगों को हमले की धमकी दे रहा था। मौके पर पहुँची पुलिस ने जब उसे समझाने की कोशिश की तो उसने पुलिस पर ही हमला कर दिया। पुलिस को मजबूरन हमलावर पर गोली चलानी पड़ी। घटना का सीसीटीवी फुटेज सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है।
ಕಲಬುರಗಿ ನಗರದ ಸೂಪರ್ ಮಾರ್ಕೆಟ್ನಲ್ಲಿ ಭಾನುವಾರ ರಾತ್ರಿ ಮಾರಕಾಸ್ತ್ರ ಹಿಡಿದು ಜನರಿಗೆ ಹೆದರಿಸುತ್ತಿದ್ದ ವ್ಯಕ್ತಿಯ ಮೇಲೆ ಪೊಲೀಸರು ಫೈರಿಂಗ್ ಮಾಡಿದ್ದಾರೆ. ಕಾಲಿಗೆ ಗುಂಡು ತಗುಲಿ ಗಾಯಗೊಂಡ ಅಬ್ದುಲ ಜಾಫರ್ ಸಾಬ್ ಎಂಬಾತನನ್ನು ಆಸ್ಪತ್ರೆಗೆ ದಾಖಲಿಸಲಾಗಿದೆ.#kalaburagipic.twitter.com/cXC3woDpYG
वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि पुलिस मौके पर पहुँच कर स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास करती है। हालाँकि, आरोपित पर चाकू फेंकने और सरेंडर करने के पुलिस के अनुरोध का कोई असर नहीं हुआ। पुलिस ने जब उसे रोकने की कोशिश की तो उसने उन पर हमला कर दिया। मामले को बिगड़ता देख सब इंस्पेक्टर वाहिद कोतवाल आत्मरक्षा और लोगों को बचाने के लिए फायरिंग कर देते हैं। इससे हमलावर का ध्यान भटक जाता है और एक गोली उसके पैर में लगती है।
गोली लगने के बाद वह घटनास्थल पर ही गिर जाता है और पुलिस उसपर कुछ लाठियाँ बरसाती है, और उसे काबू में कर लेती है। घायल जफर को इसके बाद अस्पताल ले जाया जाता है।
कलबुर्गी के पुलिस आयुक्त चेतन ने कहा, “सुपरमार्केट के पास एक बदमाश धारदार हथियार से लोगों पर हमला करने की कोशिश कर रहा था। जब पुलिस ने उसे रोकने और हिरासत में लेने की कोशिश की तो उसने हमारे पुलिसकर्मियों पर हमला कर दिया। आत्मरक्षा में और जनता की सुरक्षा के लिए पुलिस ने बदमाश पर फायरिंग कर दी। उसे अस्पताल ले जाया गया गया है। हमें अभी तक आरोपित का ब्योरा नहीं मिला है। एक बार जब हमें जानकारी मिल जाएगी, तो हम उन्हें साझा करेंगे।”
पुलिस ने कहा कि यह स्पष्ट नहीं है कि वह हथियार लेकर बाजार में क्यों घूम रहा था और लोगों को क्यो धमका रहा था। कमिश्नर ने कहा, “हमें नहीं पता कि इसके पीछे क्या मंशा है। कंट्रोल रूम से हमें फोन आया। हमें सूचित किया गया था कि एक व्यक्ति आम जनता पर हमला करने की कोशिश कर रहा है और लोगों ने खुद को उससे बचाने के लिए पुलिस से मदद माँगी।”
जफर पर पुलिस ने ‘भारतीय दंड संहिता (IPC)’ की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस ने इलाज के बाद औपचारिक रूप से उसे गिरफ्तार कर लिया। मामले की आगे की जाँच चल रही है।
RSS प्रमुख मोहन भागवत ने संत रोहिदास की जयंती पर आयोजित एक कार्यक्रम में रविवार (5 फरवरी, 2023) को मराठी में भाषण दिया। इसके बाद मीडिया ने बिना उनकी बात को समझे कुछ ऐसा चला दिया, जिससे ऐसा प्रतीत हो कि उन्होंने ब्राह्मणों के विरुद्ध कुछ कहा था। ऐसी गलतियाँ करने वालों में सबसे पहले ANI और ‘आज तक’ शामिल रहे। सरसंघचालक ने ‘पंडित’ शब्द का प्रयोग किया था, जिसका तात्पर्य विद्वान से है।
मोहन भागवत ने ब्राह्मण जाति का नहीं लिया नाम, उनका आशय ‘विद्वानों’ से था
ये एक ऐसा शब्द है, जो अब अंग्रेजी डिक्शनरी में भी जा चुका है और अमेरिका तक के बड़े-बड़े लोग इस शब्द का प्रयोग करते हैं। जैसे, राजनीति की समझ रखने वाले को ‘पॉलिटिकल पंडित’ पश्चिमी जगत में भी कहा जाता है। जैसे, ANI ने पहले मोहन भागवत के हवाले से ये बयान चलाया, “हमारी समाज के प्रति भी जिम्मेदारी है। जब हर काम समाज के लिए है तो कोई ऊँचा, कोई नीचा या कोई अलग कैसे हो गया? भगवान ने हमेशा बोला है कि मेरे लिए सभी एक हैं, उनमें कोई जाति-वर्ण नहीं है। लेकिन, पंडितों ने जो श्रेणी बनाई – वो गलत था।”
बाद में खुद ANI ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए कहा कि अनुवाद में त्रुटि के कारण ये ट्वीट हटाया जा रहा है। फिर दोबारा अनुवाद कर के उसने मोहन भागवत का ये बयान चलाया, “सत्य ही ईश्वर है, सत्य कहता है मैं सर्वभूति हूँ, रूप कुछ भी रहे योग्यता एक है, ऊँच-नीच नहीं है, शास्त्रों के आधार पर कुछ पंडित जो बताते है वो झूठ है। जाति की श्रेष्ठता की कल्पना में ऊँच-नीच में अटक कर हम गुमराह हो गए, भ्रम दूर करना है।”
CORRECTION|Truth's God,says he's omnipresent.Whatever the name,ability&honor same;no differences.What some Pandits say on basis of Shaastras is lie.We're misled by caste superiority illusion.Illusion has to be set aside: M Bhagwat
स्पष्ट है, सरसंघचालक यहाँ हिन्दुओं को एक करने की बात कर रहे थे और सभी को बराबर की नज़र से देखने व सम्मान करने का सन्देश दे रहे थे। उन्होंने ब्राह्मण जाति का नाम नहीं लिया। RSS के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने वीडियो शेयर कर के बताया कि मोहन भागवत ने असल में कहा क्या था, “सत्य यह है कि मैं सब प्राणियों में हूँ, इसलिए रूप नाम कुछ भी हो लेकिन योग्यता एक है, मान-सम्मान एक है, सबके बारे में अपनापन है। कोई भी ऊँचा-नीचा नहीं है। शास्त्रों का आधार लेकर पंडित (विद्वान) लोग जो (जाति आधारित ऊँच-नीच की बात) कहते हैं – वह झूठ हैं।“
मीडिया ने कुछ इस तरह से RSS प्रमुख मोहन भागवत के बयान को चलाया, अधिकतर नहीं समझ पाए सही अनुवाद
RSS प्रमुख ने आखिर क्या-क्या कहा, जानिए सच
RSS प्रमुख मोहन भागवत ने उक्त कार्यक्रम में कहा कि सब उपेक्षा देखते हुए उनके मन में आया कि जो सत्य है वह मुझे ढूँढना चाहिए। उन्होंने पूछा कि वह जो शाश्वत सुख का मार्ग है, वह क्या है? फिर उन्होंने समझाया कि संत रैदास सोच रहे थे कि वह वास्तव में वैसा है क्या? सुनी-सुनाई बातों पर न जाकर प्रत्यक्ष अनुभव लेने का उन्होंने निर्णय लिया। संत रविदास ने स्वामी रामानंद का सान्निध्य प्राप्त किया। फिर उन्हें ज्ञान हुआ कि सत्य ही ईश्वर है।
मोहन भागवत ने इसके बाद ही कहा, “वह सत्य यह बताता है कि मैं सब प्राणियों में हूँ, इसलिए रूप-नाम कुछ भी हो लेकिन योग्यता एक है, मान सम्मान एक है, सबके बारे में अपनापन है। कोई भी ऊँचा-नीचा नहीं है। शास्त्रों का आधार लेकर पंडित लोग जो कहते हैं वह झूठ है। जाति, जाति की कल्पना में ऊँच-नीचता के भँवर में फँस कर हम भ्रमित हो गए हैं। यह भ्रम दूर करना है। अपनी ज्ञान, परंपरा यह नहीं बताती है यह समाज को बताना चाहिए। वह परंपरा यह बताती है कि सत्य, धर्म और कर्म कभी छोड़ना नहीं चाहिए। मर भी गया तो भी धर्म नहीं छोड़ूँगा। प्रत्यक्ष उनके जीवन में यह प्रसंग आया।”
RSS प्रमुख ने बताया कि कैसे सिकंदर लोदी ने पहले कपट से उनको बुलाया कि हमें समझाइए कि आपका धर्म क्या है? संत रविदास जी ने उसको बताया तो उसने कहा कि तुम्हारा धर्म बेकार है, हमारा इस्लाम इससे श्रेष्ठ है, तुम मुस्लिम बनो। मुस्लिमों के बारे में किसी के मन में द्वेष नहीं था, उनके मन में भी नहीं था। मोहन भागवत ने कहा कि संत रैदास ने यह भी बताया है कि हिन्दू क्या, मुस्लिम क्या – सत्य एक है और सभी परमेश्वर की संतानें हैं। सत्य वही है, परंतु इसका अर्थ यह नहीं कि बदलना चाहिए।
अपनी अपनी श्रद्धा पर ठीक से रहो, सभी मार्ग एक ही जगह जाने वाले हैं, अपनी अपनी प्रकृति के अनुसार जो मार्ग है वह अच्छा है या बुरा है यह विषय नहीं है अपनी प्रकृति का जो है वही मानो – मोहन भागवत यहाँ संत रविदास को उद्धृत कर रहे थे। यही बात संत ने सिकंदर लोदी को बताया और कहा कि मैं धर्म नहीं छोड़ूँगा। बकौल मोहन भागवत, संत रैदास ने सिकंदर लोदी से कहा कि वेदों का धर्म सर्वश्रेष्ठ है, तुम्हारे इस्लाम की तुलना में भी श्रेष्ठ है।
मीडिया ने #MohanBhagwat के बयान का अर्थ का अनर्थ कर दिया। RSS प्रमुख मराठी में बोल रहे थे। गलत अनुवाद किया गया। उन्होंने कहीं ब्राह्मण जाति का नाम नहीं लिया।
"शास्त्रों का आधार लेकर पंडित (विद्वान) लोग जो (जाति आधारित ऊँच-नीच की बात) कहते हैं – वह झूठ हैं।" – ये है असली बयान। pic.twitter.com/8RGtpV0gSK
मोहन भागवत ने कहा, “वाद-विवाद चल रहा था, इसलिए ऐसा तर्क उनको देना ही पड़ा। सिकंदर लोदी ने बेड़ियाँ पहनाकर जेल में डाल दिया। पर जेल में क्या हुआ? उनको सगुण कृष्ण के दर्शन हुए। और वहाँ दिल्ली, फतेहपुर सीकरी के लोगों को और सिकंदर लोदी को हर जगह रविदास जी के दर्शन होने लगे। घबरा गए, शरण में आ गए। सिकंदर लोदी की योजना होती इनको हाथी के पैर के नीचे कुचलवा कर मरवाने की। प्राण संकट में आए तो भी अपने उदाहरण से समाज को बताया कि धर्म नहीं छोड़ो। वह धर्म – शाश्वत धर्म।”
बिहार के भागलपुर में गंगा नदी में एक बच्चे को तैरने वाला पत्थर मिला है। इस पत्थर पर ‘श्रीराम’ लिखा हुआ है। बच्चे के परिजन इसे रामायण काल से जोड़ रहे हैं। यह पत्थर पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गया है। लोग इसकी पूजा करने के लिए बच्चे के घर पर पहुँच रहे हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, खंजरपुर निवासी विजय कुमार पासवान के आठ साल के बेटे ब्रिगेडियर पासवान को धोबी घाट के पास यह पत्थर तैरते हुआ दिखा। वह इसे उठाकर वह अपने घर ले आया। अब श्रीराम लिखा हुआ यह पत्थर लोगों की आस्था का केंद्र बन गया है। इसे देखने और इसकी पूजा-अर्चना करने के लिए बड़ी संख्या में लोग पासवान के घर पहुँच रहे हैं। कोई उसे प्रणाम कर रहा है, तो कोई इसे भगवान श्रीराम का आशीर्वाद समझ रहा है।
बच्चे ब्रिगेडियर पासवान का कहना है कि जब वह दियारा जा रहा था, तभी उसने धोबी घाट के पास इस पत्थर को तैरता देखा। उसने इसे बहुत डूबोने का प्रयास किया, लेकिन यह नहीं डूबा। इस पर श्रीराम लिखा हुआ है। यह पत्थर रामायण काल का बताया जा रहा है। यह वही पत्थर लग रहा है, जिसका इस्तेमाल रामसेतु बनाने में हुआ था। बच्चे के पिता विजय कुमार पासवान ने बताया कि जब बेटा इस पत्थर को घर लेकर आया, तो हम लोगों ने उसे पानी में डाला। लेकिन यह पत्थर पानी में डूबा नहीं, बल्कि तैरने लगा। उस पत्थर पर श्रीराम लिखे होने के कारण लोग इसे पूजने के लिए पहुँच रहे हैं।
वहीं, वैज्ञानिकों की माने तो यह पत्थर एक स्पंज के समान होता है। यह खुरदरा होता है। इसमें बहुत सारे छिद्र होते हैं। इस पत्थर में हवा भरे होने के कारण इसका घनत्व पानी से कम होता है, जिसकी वजह से यह पानी में तैरता है। हालाँकि, अभी इसकी जाँच को लेकर आर्कियोलॉजी या सरकारी विभाग से कोई टीम नहीं पहुँची है।
पहले भी मिल चुका है श्रीराम लिखा हुआ पत्थर
यह पहली बार नहीं है, जब किसी बच्चे को श्रीराम लिखा हुआ पानी में तैरने वाला पत्थर मिला हो। इससे पहले उत्तर प्रदेश के मैनपुरी में भी इस तरह का मामला सामने आ चुका है। अगस्त 2022 में कुछ बच्चों को ईशान नदी में राम नाम का पत्थर तैरता हुआ मिला था।
बच्चे उस पत्थर को अपने गाँव उठा लाए। ग्रामीण इसे चमत्कारी पत्थर मानकर उसकी पूजा-अर्चना करने लगे। गाँव के प्रधान ने जब पत्थर का वजन कराया, तो यह 5 किलो 700 ग्राम का निकला। इसके बाद यहाँ के लोगों ने इस पत्थर को गाँव के मंदिर में रखने और उसकी पूजा करने का फैसला लिया था।
ईरान में हिजाब विरोधी प्रदर्शन हो रहे हैं। अधिकारों के लिए महिलाएँ बीते 5 महीनों से सड़कों पर हैं। इस बीच ईरान में खेले गए फज्र इंटरनेशनल चैलेंज बैडमिंटन टूर्नामेंट में भारतीय महिला खिलाड़ी तान्या हेमंत को हिजाब पहनने के लिए मजबूर करने का मामला सामने आया है। तान्या ने टूर्नामेंट में स्वर्ण पदक अपने नाम किया है। लेकिन हिजाब पहनने के बाद ही उन्हें मेडल दिया गया।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कर्नाटक की रहने वाली तान्या हेमंत ने फज्र इंटरनेशल चैलेंज बैडमिंटन टूर्नामेंट के फाइनल में गत विजेता और हमवतन खिलाड़ी तसनीम मीर को मात दी थी। इस जीत के साथ उन्होंने महिला सिंगल्स में स्वर्ण पदक अपने नाम किया। लेकिन स्वर्ण पदक जीतने के बाद आयोजकों ने उन्हें हिजाब पहनने के लिए कहा। इसके बाद ही वह पदक लेने के लिए पोडियम पर जा सकीं। तान्या हेमंत ने यह मैच सीधे सेटों में 21-11, 21-7 से जीता था।
टाइम्स ऑफ इंडिया ने सूत्रों के हवाले से कहा है कि आयोजकों ने साफ तौर पर यह कहा था कि पदक जीतने वाली महिलाओं को हर हाल में हिजाब पहनना होगा। हालाँकि इस टूर्नामेंट की नियमावली में ड्रेस कोड का कोई जिक्र नहीं था। सूत्रों ने यह भी कहा है, “टूर्नामेंट के नियमों में ड्रेस कोड को लेकर जो बात कही गई थी वह आम कपड़े हैं। दुनिया भर में जहाँ भी बैडमिंटन खेला जाता है, वहाँ विश्व बैडमिंटन महासंघ द्वारा निर्धारित किए गए कपड़े पहने जाते हैं। हालाँकि हम जानते थे कि ईरान में महिलाओं को घर से बाहर निकलने पर हिजाब पहनना जरूरी है। लेकिन इस टूर्नामेंट में हिजाब पहनने को लेकर कोई भी बात नहीं कही गई थी।”
गौरतलब है कि इस टूर्नामेंट में महिला खिलाड़ियों को अपने मैच के दौरान हिजाब पहनने जैसी कोई पाबंदी नहीं थी। लेकिन मैच के दौरान किसी भी पुरुष का स्टेडियम में प्रवेश वर्जित रखा गया था। यानी कोई भी पुरुष महिलाओं को खेलते हुए नहीं देख सकता था।
इसको लेकर स्टेडियम के गेट पर एक स्टीकर भी लगाया गया था। इस स्टीकर में लिखा हुआ था, पुरुषों का प्रवेश वर्जित है। यही नहीं महिला खिलाड़ियों के पुरुष कोच और फिर उनके पिता को भी स्टेडियम में प्रवेश नहीं करने दिया गया। इन तमाम बातों के बीच एक और दिलचस्प बात यह थी कि टूर्नामेंट में पहली बार मिश्रित युगल (मिक्स डबल) को शामिल किया गया था। इसमें महिला और पुरुष एक टीम की तरह साथ में खेलते हैं।
हालाँकि मिश्रित युगल वाले मैचों में भी दर्शक के तौर पर केवल महिलाओं को ही प्रवेश दिया जा रहा था। यही नहीं, टूर्नामेंट के जिन मैचों में महिलाएँ भाग ले रहीं थीं वहाँ रेफरी से लेकर सभी छोटे-बड़े अधिकारी महिलाएँ ही थीं।
बिहार के सारण जिले में रविवार (5 जनवरी, 2023) को विजय यादव और उसके साथियों ने मिल कर राजपूत समाज के व्यक्ति अमितेश कुमार की हत्या कर दी थी। इसी पिटाई में 2 अन्य पीड़ित घायल हुए हैं, जिनका इलाज अस्पताल में चल रहा है। इस घटना को ट्विटर पर जंगलराज बताते हुए हैशटैग #राजपूत_नरसंहार_छपरा के साथ कई नेटीजेंस द्वारा शेयर किया जा रहा है। अभी तक 3 आरोपितों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
स्थानीय थाना प्रभारी देवानंद को सस्पेंड किया गया है। मामले की जाँच के लिए SIT का गठन कर दिया गया है।गाँव और आस-पास तनाव को देखते हुए भारी फ़ोर्स लगाते हए धारा 144 लागू कर दी गई है।
थाना प्रभारी सस्पेंड
इस मामले में सारण जिले के माँझी थाना प्रभारी देवानंद को सस्पेंड कर दिया गया है। देवानंद ने 5 जनवरी को ऑपइंडिया से बात करते हुए घटना की वजह पुरानी रंजिश और आरोपितों द्वारा पीड़ितों को हमलावर समझने की भूल बताया था। तब थाना प्रभारी ने कहा था कि आरोपित विजय के भाई की थोड़े समय पहले मर्डर हुआ था, जिसके कारण वह थोड़ा सतर्क था। घटना विजय यादव के मुर्गी फॉर्म की है। वहीं मामले की निष्पक्ष जाँच के लिए पुलिस के सीनियर अधिकारियों के नेतृत्व में SIT टीम का गठन किया गया है।
सारण जिला पुलिस ने सोशल मीडिया पर किसी भी प्रकार की अफवाह उड़ाने वालों को भी सख्त चेतावनी दी है। पुलिस का कहना है कि न सिर्फ आरोपितों बल्कि उपद्रवियों और सोशल मीडिया पर भ्रामक बातें फैला रहे लोगों को भी चिन्हित कर के कार्रवाई की जा रही है। पुलिस ने लोगों से शांति से रहने की अपील की है। हत्या में शामिल अब तक 3 आरोपितों की गिरफ्तारी की खबर है।
इलाके में धारा 144 लागू
वहीं सारण पुलिस के मुताबिक क्षेत्र में धारा 144 लागू कर दी गई है। पुलिस का कहना है कि कुछ लोगों ने इलाके में जातीय संघर्ष फ़ैलाने की कोशिश की है जिनको चिन्हित कर के कुर्की की कार्रवाई की जाएगी। यही कार्रवाई हत्यारोपितों पर भी होगी। पुलिस ने स्वीकार किया है कि घटना के बाद मुबारकपुर में आगजनी हुई है। अब नए आदेशों के मुताबिक इलाके में 5 या उस से अधिक लोगों का जमावड़ा, कोई धरना-प्रदर्शन और पोस्टर-पर्चे लगाना प्रतिबंधित होगा।
दोनों कांड (हत्या व उपद्रव /उन्माद फैलाना) के दोषियों के फरार रहने की स्थिति में *तुरंत उनकी संपत्ति कुर्क* करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। *Social media पर भड़काने वालों के विरुद्ध नगर थाना कांड 108/23* दर्ज किया गया है।@biharpolice#saranpolicepic.twitter.com/GvflE9aG4U
धारा 144 लागू होने की समय सीमा प्रशासन ने हालात सामान्य होने तक रखा है। सारण में हालात काबू करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।
बवाल के बाद घरों और वाहनों को नुकसान
अमितेश कुमार नाम के युवक की हत्या के बाद बाद मुबारकपुर में हिंसा की खबर है। मुख्य आरोपित विजय यादव की पोल्ट्री फार्म को आग के हवाले कर दिया गया। बताया जा रहा है कि एक भीड़ द्वारा किए गए हमले में कई घरों में आगजनी की गई है। 3 वाहनों को भी आग लगा दी गई। हंगामे को देखते हुए एक महिला को हार्ट अटैक भी आने की खबर है। बवाल को काबू करते हुए पुलिस के एक जवान का सिर भी फट गया जिसका इलाज अस्पताल में चल रहा है।
बिहार के सारण जिले में अमितेश लिंचिंग मामले के बाद मुबारकपुर गांव में तनाव का माहौल व्याप्त है। दरअसल, बीते गुरुवार की दोपहर को मुखिया प्रतिनिधि पर गोली चलाने के आरोप में 3 युवकों की बंद कमरे में पिटाई की गई थी, जिसमें एक युवक की मौत हो गई थी।#Saran#Chhapra#BiharPolicepic.twitter.com/vTaTVoQjD6
हिंसा के बड़ा हुए बवाल में 5 नामजद के साथ 50 अज्ञात लोगों को आरोपित किया गया है। फ़िलहाल हिंसा में शामिल फरार लोगों के साथ हत्यारोपितों की तलाश की जा रही है।
पाकिस्तान सुपर लीग (PSL) के प्रदर्शनी मैच में इफ्तिखार अहमद ने 6 गेंदों में 6 छक्के जड़ते हुए बड़ा कीर्तिमान स्थापित किया। उनके इस कारनामे की हर तरफ चर्चा हो रही है। खास बात यह रही कि उन्होंने जिस गेंदबाज के खिलाफ यह कारनामा किया है, वे पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के खेल मंत्री बहाव रियाज हैं। मैच रविवार (5 फरवरी 2023) को खेला गया।
पाकिस्तान सुपर लीग का आगाज 13 फरवरी से होना है। इससे पहले क्वेटा ग्लैडिएटर्स और पेशावर जाल्मी के बीच एक प्रदर्शनी मैच खेला गया। 19वें ओवर तक क्वेटा ग्लेडिएटर्स का स्कोर 148 रन था। लेकिन आखिरी ओवर में गेंदबाजी करने आए वहाब रियाज के खिलाफ इफ्तिखार ने छक्कों की झड़ी लगा दी। बहाव को हाल ही में पाकिस्तान के पंजाब प्रांत का कार्यवाहक खेल मंत्री नियुक्त किया गया है।
इस ओवर से पहले वहाब रियाज ने 3 ओवरों में 11 रन देकर 3 विकेट लिए थे। मैच की कमेंट्री कर रहे कमेंटेटर भी उनकी तारीफ कर रहे थे। लेकिन आखिरी 6 गेंदों में इफ्तिखार अहमद ने 6 छक्के जड़ते हुए उनकी लाइन-लेंथ बिगाड़ कर रख दी। वहाब रियाज के इस ओवर से पहले इफ्तिखार अहमद 44 गेंदों पर 58 रन बनाकर बल्लेबाजी कर रहे थे। लेकिन 6 गेंद बाद उनका स्कोर 50 गेंदों में 94 रन था। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है।
आखिरी ओवर में इफ्तिखार के बल्ले से हुई छक्कों की बौछार की बदौलत क्वेटा ग्लेडिएटर्स ने मैच में 184/5 का स्कोर खड़ा कर दिया था। इसके जवाब में, पेशावर जाल्मी 181 रन ही बना सकी। इस तरह से यह मैच क्वेटा ने 3 रनों से जीत लिया। हालाँकि, मैच में हार-जीत से कहीं अधिक चर्चा इफ्तिखार अहमद की बल्लेबाजी की रही।
इससे पहले यह मैच बम धमाके को लेकर भी चर्चा में था। दरअसल स्टेडियम से कुछ दूरी पर ही बम धमाका हुआ था। इस कारण मैच को कुछ देर के लिए रोकना पड़ा था। इस धमाके में 5 लोग घायल हुए थे। कुछ देर रोकने के बाद मैच फिर से शुरू किया गया था।
भारत को इस्लामिक मुल्क बनाने के पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) की साजिश को लेकर महाराष्ट्र एटीएस ने बड़ा खुलासा किया है। प्रतिबंधित संगठन PFI के 5 कट्टरपंथियों के खिलाफ दायर चार्जशीट में कहा गया है कि इनका इरादा 2047 तक भारत को इस्लामिक मुल्क बनाना था। रिपोर्टों के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जैसे नेताओं का नाम लेकर मुस्लिम युवाओं को उकसाया जा रहा था। इनके पास से एक हिंदू घृणा से भरी किताब भी मिली है।
महाराष्ट्र एटीएस ने गुरुवार (2 फरवरी 2023) को चार्जशीट दाखिल की थी। इस चार्जशीट को लेकर रिपब्लिक ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि एटीएस ने पीएफआई के इन आरोपितों के फोन से ‘365 डेज: थ्रू अ थाउजेंड कट्स (365 days: Through a Thousand Cuts)’ नामक किताब जब्त की थी। इस किताब में कहा गया है कि साल 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने आने के बाद से देश में मुस्लिमों के लिए स्थितियाँ बदल गई हैं। इस किताब एक पैराग्राफ में लिखा है, “मोदी के सत्ता में आने के अगले ही दिन से सभी बुरी ताकतें सामने आ गईं। नफरत फैलाने वाले लोगों ने जहर उगलना शुरू कर दिया। उन सभी को यह लग रहा है कि भारत एक हिंदू राष्ट्र बन चुका है।”
हिंदुओं के खिलाफ नफरत से भरी हुई इस किताब में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गुजरात में हुए 2002 के दंगों का भी जिक्र है। दंगों के समय मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे। इसके अलावा एटीएस द्वारा जब्त की गई इस किताब में योगी आदित्यनाथ, केंद्रीय मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति और गिरिराज सिंह समेत कई अन्य हिंदू नेताओं का भी जिक्र किया गया है।
इस किताब में पीएफआई और सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) के संबंधों का भी खुलासा हुआ। इस किताब में एसडीपीआई का नाम बतौर प्रकाशक लिखा हुआ है। हालाँकि, एसडीपीआई ने पीएफआई से अपने संबंधों को कभी स्वीकार नहीं किया है। लेकिन इसे पीएफआई की शाखा के रूप में देखा जाता है।
चार्जशीट में एटीएस ने बताया है कि पीएफआई भारत को इस्लामिक राज्य बनाने के लिए मुस्लिम युवाओं को कट्टरपंथी बना रहा था। गिरफ्तार कट्टरपंथियों ने मुस्लिम युवाओं को लेकर महाराष्ट्र के कई जिलों में सभाएँ की थी।
बता दें कि महाराष्ट्र एटीएस और राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने सितंबर 2022 में छापेमार कार्रवाई करते हुए पीएफआई से जुड़े 21 लोगों को गिरफ्तार किया था। इनमें से 5 आरोपित मुंबई से गिरफ्तार हुए थे। इन 5 आरोपितों की पहचान मजहर खान, सादिक शेख, मोहम्मद इकबाल खान, मोमिन मिस्त्री और आसिफ हुसैन खान के रूप में हुई थी। इन सभी को गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल होने और देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।
उत्तर प्रदेश के कानपुर की भाजपा नेत्री और अल्पसंख्यक आयोग की पूर्व सदस्य सोफिया अहमद ने पिछले दिनों अपनी प्रताड़ना के बारे में बताया था। कहा था कि उन पर ससुराल वाले बीजेपी छोड़ने का दबाव बना रहे हैं। सोफिया ने 24 जनवरी 2023 को वीडियो जारी कर भाजपा से जुड़े होने के चलते शौहर शारिक पर घर से निकालने और दूसरी औरत से निकाह की तैयारी का आरोप लगाया था। आरोपित शारिक 4 बार की समजवादी पार्टी से विधायक गजाला लारी का भाई है। अब सोफिया ने हत्या की आशंका जताई है।
जताया जान का खतरा
सोफिया ने शनिवार (4 फरवरी 2023) को कानपुर पुलिस को एक शिकायती पत्र देते हुए हत्या की आशंका जताई है। उन्होंने ट्वीट कर कहा है कि यदि उन्हें कुछ होता है तो उसके जिम्मेदार गजाला लारी, शारिक, तैयब और मंजर लारी होंगे। ट्वीट में अटैच की गई शिकायत कॉपी में सोफिया ने लिखा है कि उन्होंने 27 जनवरी को कानपुर के कर्नलगंज थाने में अपने शौहर व अन्य के खिलाफ विभिन्न धाराओं में FIR दर्ज करवाई है। इस केस की पैरवी कर वह 3 फ़रवरी को अपने स्वरूप नगर स्थित फ़्लैट पर लौटी तो उन्हें एक स्पीड पोस्ट मिला।
पूर्व सपा विधायक गजाला लारी से जान को खतराl मैं सोफिया अहमद स्वरूप नगर कानपुर की निवासी भाजपा से पूर्व सदस्य अल्पसंख्यक आयोग को जान से मारने की धमकी मिलीlअगर मुझे व मेरे परिवार को कुछ होता है तो उसके जिम्मेदार गजाला लारी शारिक अराफात तैयब कुरेशी मंजर लारी मेहजबीन बानो होंगेl pic.twitter.com/bCcmcE0eTW
सोफिया ने बताया है कि इस स्पीड पोस्ट में लिखा था, “जो तुमने किया वह अच्छा नहीं किया।” यह पत्र जाजमऊ कानपुर के ही किसी पिंटू लारी नाम के व्यक्ति द्वारा 2 फरवरी 2023 को भेजा गया है। सोफिया के मुताबिक उनके शौहर शारिक और उनके घर वाले लगातार उन्हें धमकी दे रहे हैं। सोफिया ने अपने साथ अपने बेटे और पैरवी कर रहे असद सिद्दीकी को खतरा बताते हुए पुलिस से सुरक्षा की माँग की है।
सोफिया ने भेजे गए संदिग्ध स्पीड पोस्ट को भी ट्विटर पर साझा किया है।
जान से मारने की धमकियां मुझेl आज 3.2.23 को जब मैं अपना मेडिकल और 161 का ब्यान दर्ज करवा कर घर आयी तभी एक चिट्ठी सिक्योरिटी गार्ड से मिलीl ज़िसमे मुझे धमकी दी गईl मेरी गुजारिश है मुख्यमंत्री जी से की मेरी और मेरे परिवार की सुरक्षा की जाएl pic.twitter.com/H6kJfXZryt
सोफिया ने जो FIR दर्ज करवाई है उसमें IPC की धारा 377 सहित 498 – A, 323, 313 और 506 के तहत कार्रवाई हुई है। पुलिस को दी गई अपनी शिकायत में सोफिया ने शौहर पर अप्राकृतिक सेक्स, जबरन गर्भपात का आरोप लगाया है। शारिक पर मारपीट और धमकाने का भी आरोप है।
हो रहा पीछा और मिल रहीं धमकियाँ
दैनिक भास्कर से बातचीत में सोफिया ने कहा कि संदिग्ध लोग उनका आते-जाते हुए पीछा कर रहे हैं। कभी गाड़ी रोक कर तो कभी अपार्टमेंट के नीचे आकर धमकी दी जा रही है। इन संदिग्धों को सोफिया ने अपने शौहर शारिक के गुंडे बताया है। सोफिया ने बताया है कि निकाह के बाद जब वो गर्भवती हुईं थी तब से उनका शौहर और घर के बाकी लोग उन्हें न सिर्फ मारते-पीटते थे, बल्कि और दहेज़ लाने का दबाव भी बनाते थे।
बांग्लादेश में हिंदुओं और उनके धार्मिक स्थलों पर हमले की घटनाएँ थमने का नाम नहीं ले रही हैं। अब पश्चिमोत्तर बांग्लादेश के 14 मंदिरों में तोड़फोड़ की घटना सामने आई। मंदिरों पर हमला कर मूर्तियों को खंडित कर दिया। कुछ मंदिरों की मूर्तियाँ नजदीकी तालाब में मिली हैं। घटना शनिवार (4 फरवरी 2023) रात की है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, निशाना बने मंदिर ठाकुरगाँव जिले के बलियाडाँगी उपजिला में स्थित हैं। यहाँ धनतला यूनियन के सिंदूरपिंडी इलाके में 9 मंदिरों, परिया यूनियन के कॉलेजपाड़ा इलाके में 4 मंदिरों और चरोल यूनियन के शाहबाजपुर नाथपारा इलाके में स्थित 1 मंदिर को निशाना बनाया गया।
बलियाडाँगी उपजिला के हिंदूवादी संगठन के नेता विद्यानाथ बर्मन ने कहा है, “अज्ञात लोगों ने रात में 14 मंदिरों में तोड़फोड़ की। बीते कई महीनों से बंग्लादेश में हिंदुओं और उनके धार्मिक स्थलों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। कुछ मूर्तियाँ मंदिर में ही नष्ट कर दी गईं। वहीं कुछ मूर्तियाँ मंदिरों के पास स्थित तलाब में मिली हैं। मंदिरों पर हमला करने वाले अब तक पकड़े नहीं गए हैं। हम चाहते हैं कि उन्हें जल्द से जल्द पकड़ा जाए।”
एक अन्य हिंदूवादी नेता एवं यूनियन परिषद के अध्यक्ष समर चटर्जी ने कहा है कि इस क्षेत्र में पहले कभी कोई ऐसी घटना नहीं हुई। इस इलाके को धार्मिक सद्भाव के लिए जाना जाता था। मुस्लिमों का हिंदुओं से कोई विवाद नहीं है। लेकिन जिस तरह से हमले हुए हैं, उसे देखकर ऐसा लगता है कि उपद्रवियों ने बड़ी संख्या में एकजुट होकर हमले को अंजाम दिया है।
जिला पूजा उत्सव परिषद के महासचिव तपन कुमार घोष ने सिंदूरपिंडी इलाके के हरिबसर मंदिर का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने मंदिर में हुई तोड़फोड़ और खंडित मूर्तियों को देखते हुए दुःख जताया। उन्होंने कहा है, “यह बेहद दुखद और भयावह है। हम इस घटना की निष्पक्ष जाँच की माँग कर रहे हैं।” सिंदूरपिंडी इलाके के निवासी काशीनाथ सिंह ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “हम दहशत में हैं। इस घटना में शामिल लोगों को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाना चाहिए।”
मंदिर में हमले को लेकर ठाकुरगाँव के एसपी मोहम्मद जहाँगीर हुसैन ने कहा है कि ऐसा लग रहा है कि यह हमला देश की शांति और सौहार्द को भंग करने के लिए सोची-समझी साजिश के तहत किया गया है। इस घटना में शामिल लोगों की पहचान करने की कोशिश की जा रही है। हमलवारों को जल्द ही गिरफ्तार किया जाएगा।
बता दें कि बीते कुछ समय से बांग्लादेश में हिंदुओं पर लगातार हमले हो रहे हैं। साल 2022 में इस्लामवादियों ने 319 मंदिरों में हमला किया था। वहीं, 51 मंदिरों की जमीन पर कब्जे की घटनाएँ सामने आईं। यही नहीं, बीते साल 66 हिंदू महिलाओं का बलात्कार, 154 हिंदुओं की हत्या और 333 लोगों को जबरन बीफ खिलाने की घटनाएँ भी हुईं।