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₹15 हजार देकर बंगाल में घुसे, फिर UP आकर बांग्लादेशियों ने बसा ली बस्ती: रहीमा ने दिए दस्तावेज, हलीम ने पार करवाया बॉर्डर

उत्तर प्रदेश के आगरा में बांग्लादेशी घुसपैठियों की एक बस्ती मिली है। पुलिस ने 28 घुसपैठियों को गिरफ्तार किया है। एक खाली जमीन पर झुग्गी बनाकर ये बस गए थे। इनके पास से फर्जी आधार, पैन कार्ड और वीजा भी मिला है। पूछताछ में बताया है कि बॉर्डर पार करने के लिए 15 से 20 हजार रुपए प्रति व्यक्ति के हिसाब उन्होंने हालिम को दिए थे।

आगरा पुलिस ने रविवार (5 फरवरी 2023) को इस बस्ती का पर्दाफाश किया। आगरा सिटी के DCP विकास कुमार ने बताया कि फर्जी दस्तावेज बनाने वालों की भी तलाश की जा रही है। हालिम के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि वह आगरा में 12 साल से स्वीपर बनकर रह रहा है। उसके बैंक अकाउंट में पैसों का अच्छा-खासा लेन-देन भी हुआ है। ये पैसे हवाला के माध्यम से बांग्लादेश भेजे गए हैं। हालिम के साथ बाकी अन्य आरोपितों के भी बैंक खातों की जाँच करवाई जा रही है।

मामला सिकंदरा थाना क्षेत्र का है। गिरफ्तार हुए सभी 28 बांग्लादेशियों ने आगरा की आवास-विकास कॉलोनी सेक्टर 14 के ग्राउंड को अपना ठिकाना बना लिया था। इनके पास से 35 फर्जी आधार कार्ड और एक फर्जी पैन कार्ड बरामद हुआ है। इन सभी पर IPC की धारा 419, 420, 467, 471 के साथ 14 (C) विदेशी विषयक अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई है। DCP विकास के मुताबिक इन सभी के प्रत्यर्पण के लिए भी संबंधित विभाग को पत्र लिखा जाएगा।

कुछ रिपोर्टों में बांग्लादेशी घुसपैठियों की संख्या 32 बताई गई है। समूह में 15 पुरुष, 13 औरतें और 12 साल से ज्यादा उम्र वाले 4 बच्चे बताए जा रहे हैं। 8 ऐसे भी बच्चे हैं जिनकी उम्र 1 से 8 साल के बीच की है। पुलिस ने बताया कि ये घुसपैठिए कूड़ा बीनने का काम करते थे। गिरफ्तार लोगों में अभी तक बबलू, फारुख, रवीउल शेख जैसे नाम सामने आए हैं। इनका कहना है कि इन्हें नदी के रास्ते नाव से पश्चिम बंगाल में बॉर्डर पार करवाया गया था।

पुलिस द्वारा शेयर अख़बारों में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार रास्ते में चेकिंग होने पर ये लोग खुद को मछुआरा बताते हैं। जानकारी के मुताबिक बांग्लादेश की रहने वाली रहीमा इन घुसपैठियों के फर्जी कागजात तैयार करती है।

एक तो श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर कब्जा, ऊपर से हजम कर रहे थे मुफ्त की बिजली: काटी गई शाही ईदगाह मस्जिद की लाइट, ₹3 लाख का जुर्माना भी

उत्तर प्रदेश के मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद के चलते शाही ईदगाह मस्जिद चर्चा में रही है। यह श्रीकृष्ण जन्मभूमि के पास ही स्थित है। इस मस्जिद की बिजली काट दी गई। साथ ही बिजली चोरी को लेकर मुकदमा दर्ज हुआ और 3 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया गया। मस्जिद में बिना कनेक्शन के बिजली का उपयोग किया जा रहा था।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मस्जिद में बिजली चोरी के इस मामले को लेकर हिंदूवादी संगठनों और श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति निर्माण ट्रस्ट समेत अन्य ने ऊर्जा मंत्री एके शर्मा और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से शिकायत की थी। इस शिकायत में मस्जिद में बिजली कनेक्शन न होने की जानकारी देते हुए कार्रवाई करने की माँग की थी।

इस शिकायत के बाद बिजली विभाग ने मामले की जाँच कर शिकायत को सही पाया। इसके बाद, अधिकारियों ने बिजली थाना और गोविंद नगर थाने की पुलिस के साथ लेते छापेमारी की। इस छापेमारी में करीब 50 लोग शामिल थे। छापेमारी के बाद कार्रवाई करते हुए शाही ईदगाह मस्जिद की बिजली काट दी गई।

चूँकि, माहौल खराब होने का डर था इसलिए प्रशासन ने इस पूरी कार्रवाई को गुप्त रखा था। साथ ही, कार्रवाई के दौड़ा पूरी तरह से वीडियोग्राफी की गई है। बिजली चोरी के इस मामले में एसडीओ ने कृष्णा नगर स्थित बिजली थाना में शाही ईदगाह कमेटी का संचालन कर रही इंतजामिया कमेटी के सचिव तनवीर अहमद के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई।

छापेमारी के दौरान बिजली विभाग ने मस्जिद में 4035 वॉट का लोड पाया। इस कारण मस्जिद कमेटी पर 3 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है। कहा जा रहा है कि मस्जिद द्वारा जब तक कनेक्शन नहीं लिया जाता, तब तक बिजली नहीं जोड़ी जाएगी।

हिंदू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष दिनेश शर्मा द्वारा मुख्यमंत्री को लिखा गया शिकायती पत्र (फोटो साभार : भास्कर)

इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अखिल भारत हिंदू महासभा के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष दिनेश शर्मा ने दावा किया है कि उन्होंने गत 28 जनवरी को पत्र लिखकर योगी आदित्यनाथ से बिजली चोरी की शिकायत की थी। इसके बाद ही बिजली विभाग ने यह कार्रवाई की है।

‘बाप ने हिंदू-मुस्लिम को लड़ाया, बेटा हिंदुओं को लड़ा रहा’: श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट के सदस्य ने अखिलेश यादव को लताड़ा, बोले सपा प्रमुख – जो गलत है, वह तो गलत ही है

रामचरितमानस को लेकर जारी विवाद के बीच भाजपा के पूर्व सांसद रामविलास वेदांती ने अखिलेश यादव पर बड़ा हमला बोला। उन्होंने कहा है कि हिंदुओं को आपस में लड़ाने की अखिलेश यादव ने आतंकवादियों से पैसा लिया है। इसके पीछे अंतरराष्ट्रीय साजिश है। वहीं, अखिलेश यादव ने कहा है कि रामचरितमानस से किसी को कोई शिकायत नहीं है। लेकिन जो गलत है वह तो गलत ही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रामविलास वेदांती रविवार (5 फरवरी, 2023) को झाँसी के मड़िया महादेव मंदिर दर्शन करने गए थे। इस दौरान मीडिया से बात करते हुए उन्होंने धार्मिक तुष्टिकरण की पार्टियों पर जमकर निशाना साधा। वेदांती ने कहा है कि समाजवादी पार्टी के नेता हिंदुत्व के नाम पर समाज के लोगों को आपस में लड़ाना चाहते हैं।

रामविलास वेदांती ने कहा है कि जिस तरह से मुलायम सिंह यादव ने हिंदू और मुस्लिम को आपस में लड़ाया था, ठीक उसी तरह उनके बेटे अखिलेश यादव हिंदुओं को आपस में लड़ा रहे हैं। वेदांती ने कहा कि अखिलेश यादव मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति में सफल नहीं हो पाए। साल 2014, 2017, 2019 और 2022 के चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इसीलिए अब हिंदुओं को आपस में लड़ाकर जीतना चाहते हैं।

उन्होंने बड़ा आरोप लगाते हुए यह भी कहा है कि हिंदू-मुस्लिम को अलग करने के बाद भी नेता सफल नहीं हो पाए। इसलिए हिंदुओं को हिंदुओं से लड़ाने के लिए सोनिया गाँधी, राहुल गाँधी, अखिलेश यादव, अरविंद केजरीवाल, आप नेता संजय सिंह और कॉन्ग्रेस के पी चिदंबरम ने षड्यंत्र के तहत एक मीटिंग की थी। पूर्व सांसद की मानें तो इस मीटिंग में हिंदुओं को आपस में लड़ाकर धार्मिक आस्था समाप्त करने की साजिश रची गई।

पूर्व सांसद वेदांती ने यह भी कहा है कि उन्हें ऐसा लगता है कि अखिलेश यादव ने आतंकवादियों से पैसा लिया है। क्योंकि अब तक कभी भी किसी ने रामचरित मानस पर आरोप नहीं लगाया। आतंकवादियों ने अखिलेश यादव और आप नेता संजय सिंह को खरीद लिया है। रामचरितमानस में कोई विवाद नहीं है। लेकिन रामचरित मानस को बदनाम किया जा रहा है। इसके पीछे अंतर्राष्ट्रीय आतंकवादियों का गिरोह तथा सपा, बसपा, कॉन्ग्रेस और आप शामिल हैं।

वहीं, रामचरितमानस को लेकर जारी विवाद को लेकर सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने कहा है कि वह आज भी हर रोज एक घंटा भजन सुनते हैं। उन्होंने यह भी कहा है कि योगी जी को तो सारे भजन याद होंगे उन्हें सुनने की ज़रुरत नहीं है। उन्हें भजन सुनने का समय भी नहीं मिलता होगा। उन्होंने कहा कि रामचरितमानस से किसी को शिकायत नहीं है लेकिन जो गलत है वह गलत है।

अखिलेश यादव ने यह भी कहा है कि यह देश का बड़ा सवाल है। सिर्फ एक दिन के समझने से यह समझ में नहीं आएगा। अगर आप महाभारत पढ़ेंगे तो देखेंगे कि दानवीर कर्ण के साथ क्या हुआ, कर्ण को कितना अपमान सहना पड़ा। भाजपा के लोग धर्म के वैज्ञानिक हैं। इसलिए वह बताएँ कि शूद्र कौन होता है?

बात दें कि रामचरितमानस को लेकर विवाद की शुरुआत बिहार के शिक्षा मंत्री चन्द्रशेखर के विवादित बयान से हुई थी। उन्होंने कहा था, रामचरितमानस दलितों-पिछड़ों को शिक्षा ग्रहण करने से रोकता है। रामचरितमानस के एक दोहे “अधम जाति में विद्या पाए, भयहु यथा अहि दूध पिलाए” का जिक्र करते हुए कहा कि यह समाज में नफरत फैलाने वाला ग्रंथ है। उन्होंने कहा कि दोहे में अधम का अर्थ नीच होता है जिसे उन्होंने जाति से जोड़ते हुए कहा कि इस दोहे के अनुसार नीच जाति अर्थात दलितों-पिछड़ों और महिलाओं को शिक्षा ग्रहण करने का अधिकार नहीं था।

वहीं, समाजवादी पार्टी नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने एक कदम आगे बढ़ाते हुए रामचरित मानस को प्रतिबंधित करने की माँग कर डाली थी। उन्होंने कहा था कि अब करोड़ों लोग इस किताब को नहीं पढ़ते हैं और इसमें सब बकवास है। स्वामी प्रसाद ने सरकार से रामचरितमानस में कुछ अंश को आपत्तिजनक बताते हुए उसे हटाने की माँग की। उन्होंने आगे कहा कि अगर वो अंश न हट पाएँ तो पूरी किताब को ही बैन कर देना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा था कि वो रामचरितमानस को धर्म ग्रंथ मानते ही नहीं हैं क्योकि इस किताब को तुलसीदास ने अपनी खुद की ख़ुशी के लिए लिखा था। स्वामी प्रसाद ने आरोप लगाया कि रामचरितमानस में कुछ ऐसी चौपाइयाँ हैं, जिनमें शूद्रों को अधम होने का सर्टिफिकेट दिया गया है। उन्होंने उन चौपाइयों को एक वर्ग के लिए गाली जैसे बताया। उन्होंने कहा कि रामचरितमानस के हिसाब से ब्राह्मण भले ही कितना गलत करे वो सही और शूद्र कितना भी सही करे वो गलत होता है। मौर्य के अनुसार, अगर उसे ही धर्म कहते हैं वो ऐसे धर्म का सत्यानाश हो और ऐसे धर्म को वो दूर से नमस्कार करते हैं।

इन तमाम विवादित बयानों के चलते विवाद बढ़ता जा रहा है। गत (29 जनवरी 2023) को स्वामी प्रसाद मौर्य के समर्थन में ओबीसी महासभा ने रामचरित मानस की प्रतियाँ जलाई थी। हालाँकि, बाद में इन लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई थी। रामचरित मानस जलाने वालों में एक मुस्लिम भी शामिल था। इन आरोपितों में यशपाल सिंह लोधी, देवेंद्र यादव, महेंद्र प्रताप यादव, नरेश सिंह, एसएस यादव, सुजीत, संतोष वर्मा और सलीम का नाम शामिल हैं। इन सभी पर IPC की धारा 153A, 295A, 505 और 298 और आईटी एक्ट की धारा 66 के तहत मामला दर्ज किया हुआ था।

अगर ये आग ज्वालामुखी बनी तो सब ख़ाक हो जाएगा… लखनऊ में मुस्लिम बोर्ड की बैठक, UCC के खिलाफ लड़ाई का ऐलान: कहा – फैलाया जा रहा नफरत का ज़हर

‘ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB)’ ने ‘समान नागरिक संहिता (UCC)’ के खिलाफ कमर कस ली है और बड़ी लड़ाई का ऐलान किया है। लखनऊ में बोर्ड की कार्यकारिणी की बैठक में मुस्लिमों से कई आह्वान किए गए।बोर्ड के अध्यक्ष मौलाना सैयद राबे हसनी नदवी के नेतृत्व में ये बैठक नदवातुल उलेमा में आयोजित हुई। बोर्ड ने मुस्लिमों को सलाह दी कि मुस्लिम होने का मतलब है खुद को अल्लाह के हवाले करना – इसीलिए, हमें पूरी तरह शरीयत पर अमल करना है।

इस्लामी जिहाद को आगे बढ़ाने के लिए AIMPLB ने भारत के संविधान की भी आड़ ली और कहा कि इसमें सभी धर्मों पर अमल की स्वतंत्रता दी गई है। हुकूमत से अपील करते हुए कहा गया कि वो आम नागरिकों की आज़ादी का एहतेराम करे। साथ ही UCC को लागू किए जाने को बोर्ड ने अलोकतांत्रिक करार दिया। AIMPLB ने कहा कि मुल्क में नफरत का ज़हर फैलाया जा रहा है और इसे सियासी हथियार भी बनाया जा रहा है।

AIMPLB ने कहा कि ये नुकसानदेह है और और अगर मुल्क में भाईचारा खत्म हो गया तो मुल्क का इत्तेहाद पार हो जाएगा। बोर्ड ने धमकाया कि अगर ये आग ज्वालामुखी बन गई तो मुल्क की तहजीब, उसकी नेकनामी, इसकी तरक्की और इसकी नैतिकता – सब जल कर ख़ाक हो जाएगी। ‘मॉब लिंचिंग’ वाले नैरेटिव को आगे बढ़ाते हुए ‘ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड’ ने कई राज्यों में बने जबरन धर्मांतरण विरोधी कानूनों का जिक्र करते हुए कहा कि धर्म के प्रचार का हक़ संविधान देता है।

बोर्ड ने कहा, “सभी से अपील है कि नफरत की इस आग को बुझाने का काम करें। मुस्लिम अधिक से अधिक अपने शैक्षणिक संस्थान कायम करें, जहाँ पर आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ अपनी सभ्यता और संस्कृति की सुरक्षा को भी यकीनी बनाया जा सके। UCC से दलितों-आदिवासियों की सामाजिक-सांस्कृतिक पहचान को भी नुकसान पहुँचेगा। अगर वर्शिप एक्ट खत्म किया गया तो देश भर में अराजकता फ़ैल जाएगी।” बैठक में AIMIM के मुखिया और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी भी शामिल हुए।

‘अस्थायी वीजा वाले निहंग किए जाएँ बाहर, सिखों के हथियार लाने पर लगे बैन’: हमलों के बाद हिन्दुओं ने ऑस्ट्रेलिया के मंत्री को सौंपा ज्ञापन, माँगा न्याय

ऑस्ट्रेलिया में खालिस्तानी गतिविधियाँ बढ़ रही हैं। आए दिन हिंदू मंदिरों पर हमले हो रहे हैं। गत 29 जनवरी को शांतिपूर्ण तरीके से तिरंगा यात्रा निकाल रहे हिंदुओं पर खालिस्तानियों ने हमला किया था। इस हमले को लेकर वहाँ रहने वाले हिंदुओं ने ऑस्ट्रेलियाई गृह मंत्री क्लेयर ओ’नील को ज्ञापन सौंपा है। इस ज्ञापन में हिन्दुओं को सुरक्षा देने समेत 7 माँगे की गई हैं।

दरअसल, बीते कुछ दिनों में ऑस्ट्रेलिया के विक्टोरिया राज्य में खालिस्तानियों ने कई हिंदू मंदिरों पर हमला किया है। खासतौर से मेलर्बन शहर खालिस्तानियों का गढ़ बन चुका है। यही नहीं, खालिस्तानी आतंकी खालिस्तान बनाने के लिए जनमत संग्रह का आयोजन भी कर रहे हैं। इसलिए ऐसी गतिविधियों पर रोक लगाने तथा 29 जनवरी को हुए हमले के पीड़ित हिंदुओं को न्याय दिलाने के लिए गृह मंत्री को यह ‘माँग पत्र’ सौंपा गया।

इस ज्ञापन में निम्न माँगे की गईं

1.) सिखों के लिए हथियार ले जाने और इस्तेमाल करने पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए।

2.) अस्थाई वीजा पर रह रहे हर निहंग को ऑस्ट्रेलिया से बाहर भेजा जाए।

3.) धार्मिक स्थलों और कारों से सभी आपत्तिजनक/ आक्रामक पोस्टर हटाए जाएँ।

4.) 29 जनवरी, 2023 को हुए हमले के सभी पीड़ितों को जल्द से जल्द न्याय दिलाया जाए।

5.) 29 जनवरी, 2023 की घटना के सभी पीड़ितों को सुरक्षा प्रदान की जाए

6.) सिखों के धार्मिक स्थलों को कट्टरपंथ से मुक्ति दिलाई जाए।

7.) इन सभी मामलों पर नियमित रूप से अपडेट दिया जाए।

बता दें कि हिंदुओं ने ऑस्ट्रेलियाई गृह मंत्री को ज्ञापन तब सौंपा जब वह दुर्गा मंदिर से दर्शन कर बाहर निकल रही थीं। ज्ञापन सौंपे जाने के समय मंदिर में मौजूद एक ट्विटर यूजर Savan_2011 के अनुसार, ऑस्ट्रेलिया गृह मंत्री ने इन माँगों पर गंभीरता से विचार करने पर सहमति व्यक्त की है।

ऑस्ट्रेलिया के सहायक विदेश मंत्री टिम वाट्स और विल्स के श्रम संघीय सदस्य पीटर खलील भी गृह मंत्री क्लेयर के साथ मंदिर गए थे। एक आधिकारिक बयान में, सहायक विदेश मंत्री वाट्स ने कहा, “संसद शुरू होने से पहले क्लेयर ओ’नील, पीटर खलील और मैंने समिति के सदस्यों से मिलने और उनके दृष्टिकोण को सुनने के लिए श्री दुर्गा मंदिर का दौरा किया। यह मेलबर्न के पश्चिम में स्थित सबसे बड़ा हिंदू मंदिर है। शायद यह पूरे ऑस्ट्रेलिया का सबसे बड़ा मंदिर हो।”

टिम वाट्स ने यह भी कहा है, “हमारा समाज अविश्वसनीय सांस्कृतिक और धार्मिक विविधता वाला है। मुझे दीवाली और होली जैसे त्योहारों को मनाने के लिए बीते वर्षों में कई बार श्री दुर्गा के दर्शन करने का सौभाग्य मिला है। यह ऑस्ट्रेलिया के सांस्कृतिक कैलेंडर में भी शामिल हैं।

हिंदुओं पर हुए हमलों को लेकर उन्होंने कहा, “बीते कुछ हफ्तों में हमने पूजा स्थलों की जो तोड़-फोड़ देखी है, वह हमारे बहुसांस्कृतिक और बहु-विश्वास वाले देश में पूरी तरह से अस्वीकार्य है। हम इन घृणित कार्यों को लेकर विक्टोरियन पुलिस द्वारा की जा रही जाँच का पूरी तरह से समर्थन करते हैं।”

खालिस्तानियों के तथाकथित जनमत संग्रह का विरोध कर रहे हिंदुओं पर हमला

बता दें कि गत 29 जनवरी को, तिरंगा यात्रा निकाल रहे हिंदुओं पर खालिस्तानियों ने हमला किया था। इसके कई वीडियो भी सामने आए थे। दरअसल, प्रतिबंधित खालिस्तानी आतंकी संगठन सिख फॉर जस्टिस ने 29 जनवरी को मेलर्बन के फेडरेशन स्कावयर पर जनमत संग्रह करने का ऐलान किया था।

खालिस्तानी आतंकियों की इन गतिविधियों का विरोध करने के लिए आस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीयों ने विरोध करने के लिए शांतिपूर्ण तरीके से तिरंगा यात्रा निकाली थी। इस तिरंगा यात्रा के दौरान खालिस्तानी आतंकियों ने हिंदुओं पर लाठी-डंडों और तलवार से हमला किया था। ऑस्ट्रेलियाई मीडिया के अनुसार, तलवार से हमला करने वाले एक खालिस्तानी को ऑस्ट्रेलिया पुलिस ने गिरफ्तार किया है।

राम मंदिर परिसर में वाल्मीकि, वशिष्ठ, निषाद राज, जटायु, शबरी, अहिल्या के भी मंदिर हों – ये आईडिया PM मोदी का था: जन्मभूमि ट्रस्ट के महासचिव

ये तो लगभग सभी स्वीकारते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोच हमेशा से समावेशी रही है। वो हमेशा से सभी धर्मों और जातियों को मिला कर चलने की बातें करते रहे हैं और उनकी जन-कल्याणकारी नीतियों में भी इस बात की झलक मिलती है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय के अंत्योदय से वो और उनकी पार्टी प्रेरित रही है, ऐसे में ये स्वाभाविक है। राम मंदिर को लेकर भी पीएम मोदी ने कुछ ऐसी सलाह दी थी, जिसे ट्रस्ट के लोगों ने तुरंत स्वीकार किया।

आखिर करें भी क्यों न, ये विचार ऐसा था जो हिन्दू धर्म के विभिन्न वर्गों के बीच एकता को और सुदृढ़ करेगा। ‘श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र’ ट्रस्ट के जनरल सेक्रेटरी और ‘विश्व हिन्दू परिषद (VHP)’ के अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष चंपत राय ने ‘मोदी स्टोरी’ नामक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से इस बारे में वाकया साझा किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पीएम मोदी का विचार विचार राष्ट्र को जोड़ने वाला विचार है। उनका ही सुझाव था कि राम मंदिर के प्रांगण में शबरी, जटायु, निषादराज, अहिल्या आदि का स्थान होना चाहिए, क्योंकि ये प्रभु श्री राम के जीवन के अभिन्न अंग हैं।

चंपत राय ने बताया, “रामनवमी के दिन भगवान श्रीराम का जन्म दोपहर के 12 बजे हुआ था। वो सूर्यवंशी कुल में जन्मे थे। तो क्या प्रतिवर्ष दोपहर के 12 बजे सूर्य देवता की किरणें रामलला के मस्तक को प्रकाशित कर सकती हैं? – ये आईडिया उनका है। उन्होंने CSIR (वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद) को ये आईडिया दिया और उन्होंने इसे स्वीकार कर लिया। उन्हें सफलता भी मिली। भगवान श्रीराम के जीवन में सामाजिक सौहार्दता दिखती है।”

चंपत राय ने बताया कि राम के जीवन की सामाजिक सौहार्दता को ट्रस्ट के सामने पीएम मोदी ने ही प्रदर्शित किया था। महर्षि वाल्मीकि के कारण राम की कहानी लोगों के सामने आई, ब्रह्मर्षि वशिष्ठ उनके गुरु थे, विश्वामित्र, भारद्वाज – इन सारे महर्षियों के स्थान वहाँ होने चाहिए। चंपत राय ने बताया कि सामाजिक दृष्टि का भाव रखते हुए पीएम मोदी ने ही शबरी, जटायु, निषादराज और अहिल्या के मंदिरों का सुझाव दिया था – क्योंकि ये राम के जीवन के अभिन्न अंग रहे हैं। चंपत राय ने इसे राष्ट्र की एकात्मता को सिद्ध करने वाला विचार करार दिया।

‘आज मंदिर बना लो, हमारी नस्लें वहाँ फिर बाबरी मस्जिद बनाएँगी’: प्रशांत किशोर के साथ घूमने वाला SDPI सदस्य उस्मान का वीडियो वायरल

प्रशांत किशोर के साथ अक्सर दिखने वाले SDPI सदस्य सुल्तान उस्मान खान का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस वीडियो में उस्मान राम मंदिर के खिलाफ भड़काऊ बयानबाजी कर रहा है और कह रहा है कि अभी मंदिर बना लो पर मुस्लिमों की आने वाली नस्लें वहाँ फिर से बाबरी मस्जिद बनाएँगी। उस्मान की प्रशांत किशोर के साथ कई तस्वीरें सोशल मीडिया पर मौजूद हैं।

इस वीडियो को @USIndia_ नाम के हैंडल से शनिवार (4 फरवरी) को शेयर किया है। मूल वीडियो 22 सेकेण्ड का है। वीडियो के एक बड़े हिस्से में शिलाओं को अयोध्या लेकर जा रहे वाहन की है। वहीं एक छोटे हिस्से में उस्मान दिखाई दे रहा है। उस्मान को प्रतिबंधित PFI की राजनीतिक शाखा SDPI बिहार का सदस्य बताया जा रहा है।

इस वीडियो में उस्मान कह रहा है, “ये वो पत्थर है जो राम मंदिर के लिए… RSS के मंदिर के लिए जा रहा है, जो हमारी बाबरी मस्जिद के ऊपर बनेगी। आज ले जा रहे हो पत्थर, लेकिन याद रखना, एक वक्त आएगा जब हमारी नस्लें वहीं बाबरी मस्जिद इंशाअल्लाह बनाएँगी।”

वीडियो के अंत में उस्मान ने ‘नारा-ए-तकबीर’ के साथ ‘बाबरी मस्जिद जिंदाबाद’ और ‘अल्लाह हु अकबर’ का नारा लगाता है। इस दौरान उसने बाबरी मस्जिद की दावेदारी कायम रहने का भी एलान किया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 2 दिन पहले भी उस्मान ने एक वीडियो जारी करके बाबरी, राम मंदिर और कोर्ट पर टिप्पणी की थी। उस्मान कई बार प्रशांत किशोर के साथ देखा गया है। इस दौरान उसने बाबरी गिरने और कोर्ट के आदेश पर वहाँ मंदिर बनने पर अफ़सोस जताया था।

गौरतलब है कि NIA ने शनिवार (4 फरवरी 2023) को बिहार में छापेमारी कर 8 संदिग्ध लोगों को पकड़ा था। इस दौरान प्रतिबंधित चरमपंथी इस्लामी संगठन PFI से जुड़े रियाज मारुफ़ को भी हिरासत में लेने की जानकारी सामने आई थी। NIA ने यह कार्रवाई उन्हीं इलाकों में की थी, जहाँ से होकर अयोध्या के लिए शिलाएँ गईं थीं।

कारगिल युद्ध के विलेन को कॉन्ग्रेस नेता शशि थरूर ने बताया शांतिदूत: बोली BJP- यही है पाकपरस्ती, उन्होंने भी राहुल गाँधी को सज्जन कहा था

पाकिस्तान (Pakistan) के पूर्व राष्ट्रपति और तानाशाह परवेज मुशर्रफ (Parvez Musharaf) का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। मुशर्रफ के निधन पर कॉन्ग्रेस नेता शशि थरूर (Shashi Tharoor) ने उन्हें ‘शांतिदूत’ कहते हुए श्रद्धांजलि दी। कारगिल युद्ध के मुख्य विलेन को शांतिदूत बताने पर राजनीति गरमा गई है।

थरूर ने ट्वीट कर कहा, “पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ का एक दुर्लभ बीमारी के कारण निधन हो गया। कभी भारत के कट्टर दुश्मन रहे मुशर्रफ साल 2002 से 2007 के बीच शांति के लिए असली ताकत बन गए थे। मैंने उन दिनों उनसे संयुक्त राष्ट्र में हर साल मुलाकात की थी। मैं उन्हें एक चतुर और स्पष्ट कूटनीतिक विचारों वाला मानता हूँ। भगवान उनकी आत्मा को शांति दें।”

थरूर के इस ट्वीट के बाद कॉन्ग्रेस पर भाजपा हमलावर हो गई है। बीजेपी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कॉन्ग्रेस को पाकिस्तान परस्त बताते हुए ट्वीट किया। उन्होंने लिखा, “कारगिल युद्ध कराने वाले तानाशाह परवेज मुशर्रफ जघन्य अपराधों के आरोपित थे। उन्होंने तालिबान और ओसामा को ‘भाई’ और ‘नायक’ माना था। उन्होंने अपने ही मृत सैनिकों के शवों को वापस लेने से इनकार कर दिया था। इसके बाद भी कॉन्ग्रेस द्वारा उनका स्वागत किया जा रहा है। क्या आपको हैरानी हो रही है? कॉन्ग्रेस की पाकपरस्ती फिर से सामने आ गई।”

पूनावाला ने अपने एक अन्य ट्वीट में कहा, “एक समय मुशर्रफ ने राहुल गाँधी को सज्जन व्यक्ति कहते हुए तारीफ की थी। शायद इसीलिए मुशर्रफ कॉन्ग्रेस को प्रिय हैं। धारा 370 से लेकर बालाकोट सर्जिकल स्ट्राइक तक पर संदेह करने वाली कॉन्ग्रेस पाक की भाषा बोलते हुए मुशर्रफ की तारीफ करती है, लेकिन अपने देश के मुखिया को ‘सड़क का गुंडा’ कहती है।”

बता दें कि पाकिस्तान के पूर्व तानाशाह परवेज मुशर्रफ का लंबी बीमारी के बाद रविवार (5 फरवरी 2023) को निधन हो गया। वह बेहद दुर्लभ बीमारी ‘एमिलॉयडोसिस’ से पीड़ित थे। इस बीमारी के दौरान शरीर के अंगों में एमिलॉयड नामक एक असामान्य प्रोटीन जमा होने लगता है। इसके बाद शरीर का हर धीरे-धीरे काम करना बंद कर देता है। मुशर्रफ का इलाज दुबई के एक हॉस्पिटल में चल रहा था।

पाकिस्तान के तानाशाह राष्ट्रपति रहे परवेज मुशर्रफ को साल 1999 में हुए कारगिल युद्ध का मुख्य विलेन माना जाता है। युद्ध के समय मुशर्रफ ही पाकिस्तानी सेना के मुखिया थे। हालाँकि, कारगिल युद्ध में पाकिस्तान को मुँह की खानी पड़ी थी। इस युद्ध में करारी हार झेलने के बाद बौखलाए मुशर्रफ ने तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ का तख्ता पलट दिया था।

232 चीनी ऐप बैन: बेटिंग और लोन ऐप पर मोदी सरकार का एक्शन, तत्काल प्रभाव से सब बंद

सरकार ने एक बार फिर चीनी ऐप्स (Chinese Apps) पर ऐक्शन लिया है। केंद्र ने सुरक्षा का हवाले देते हुए चाइनीज लिंक वाले 232 एप को बैन कर दिया है। जिन ऐप को सरकार ने बैन किया है, उनमें इन एप में 138 बेटिंग एप और 94 लोन एप शामिल हैं।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने चाइनीज लिंक वाले इन सभी एप को तत्काल प्रतिबंधित और ब्लॉक करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। ऐसा गृह मंत्रालय द्वारा लिए गए निर्णय के बाद किया गया।

रिपोर्ट के अनुसार, जिन ऐप के खिलाफ कार्रवाई की गई है उन पर गृह मंत्रालय पिछले छह महीने से नजर रख रहा था। हालाँकि, गृह मंत्रालय कु 288 चाइनीज लोन एप का नजर रख रहा था, लेकिन इनमें 94 एप स्टोर पर उपलब्ध हैं। बाकी एप थर्ड पार्टी लिंक के माध्यम से काम कर रहे हैं।

केंद्रीय खुफिया एजेंसियों ने भी केंद्रीय गृह मंत्रालय से इन एप के खिलाफ कार्रवाई करने की सिफारिश की है। इसके बाद गृह मंत्रालय ने इन एप को तत्काल और आपातकालीन आधार पर प्रतिबंधित और ब्लॉक करने का निर्णय लिया।

लोन एप के जरिए ब्लैकमेलिंग की कई घटनाएँ भी सामने आ चुकी हैं। ये एप बिना किसी कागजी कार्रवाई और केवाईसी के लोन देने का ऑफर देते हैं। ऐसे में लोन के लालच में जब इन चीनी ऐप को डाउनलोड कर लेते हैं तो वह उनके मोबाइल से निजी तस्वीरें और चुरा करने लगता है।

जब कोई यूजर लोन की रकम चुकाने में देर करता तो उसे इनके सहारे ब्लैकमेल करते। ऐसे में सुसाइड तक की नौबत आ चुकी है।  इनके जाल में फँसते ही कर्ज पर ब्याज को 3000 प्रतिशत तक बढ़ा दिया जाता है। इसलिए उनके कर्ज की भरपाई करना कठिन हो जाता है। ऐसे एप्स का डायरेक्टर आमतौर पर भारतीयों को बनाया गया था, लेकिन संचालन चीन से होता था।

इसके पहले फरवरी 2022 में सरकार ने 54 चीनी ऐप को ब्लॉक करने का निर्णय लिया था। इन 54 चीनी ऐप्स में ब्यूटी कैमरा, स्वीट सेल्फी एचडी, सेल्फी कैमरा, इक्वलाइजर और बास बूस्टर, आइसोलैंड 2, एशेज आफ टाइम लाइट, वाइवा वीडियो एडिटर, टेनसेंट एक्सरिवर, ओनमोजी चेस, ओनमोजी एरिना, ऐपलाक, डुअल स्पेस लाइट शामिल थे।

जून 2021 में भी भारत ने देश की संप्रभुता और सुरक्षा के खतरे को ध्यान में रखते हुए व्यापक रूप से उपयोग किए जाने वाले सोशल मीडिया प्लेटफार्म जैसे टिकटॉक, वीचैट और हेलो सहित 59 चीनी मोबाइल एप्लिकेशन पर प्रतिबंध लगा दिया था। 29 जून, 2021 के आदेश में प्रतिबंधित अधिकांश ऐप्स को लेकर खुफिया एजेंसियों ने चिंता जाहिर करते हुए कहा था कि यूजर्स डेटा इकट्ठा कर रहे हैं और संभवतः उन्हें बाहर भी भेज रहे हैं।

इसके बाद 27 जुलाई 2021 को भी 47 चीनी ऐप बैन किए गए थे। सरकार ने यह कदम तब उठाया था, जब लद्दाख में तनाव बढ़ रहा था और चीनी सैनिकों ने दो बार घुसपैठ की कोशिश की थी। इन ऐप के जरिए के जरिए भारतीय लोगों के डेटा इकट्ठा किया जा रहा था।

सितंबर 2021 में भी भारत सरकार ने 118 चीनी मोबाइल ऐप्स पर प्रतिबंध लगाया था। भारत सरकार की तरफ से ये कहा गया था कि भारत की संप्रभुता और अखंडता, भारत की रक्षा, राज्य की सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था के लिए ये ऐप्स हानिकारक हैं। फिर नवंबर में भारत सरकार ने 43 मोबाइल ऐप्स बैन किया था। इसे देश की सुरक्षा और अखंडता के लिए खतरा बताया गया था।

चीन ने ऐप्स पर प्रतिबंध लगाए जाने के भारत सरकार के फैसले का विरोध किया था। चीन ने कहा था कि यह कार्रवाई विश्व व्यापार संगठन के गैर-भेदभावपूर्ण सिद्धांतों का उल्लंघन है। उल्लेखनीय है कि भारत सरकार द्वारा यह कार्रवाई 20 भारतीय सैनिकों के बलिदान के बाद चीन के खिलाफ की गई थी। पिछले साल पूर्वी लद्दाख की गालवान घाटी में हिंसक झड़प में 20 सैनिक वीरगति को प्राप्त हो गए थे।

भगोड़े माफिया हाजी इक़बाल की यूनिवर्सिटी, ‘पाकिस्तान ज़िंदाबाद’ के नारे: शाबान-सोबन की हरकत पर हँसते दिखे छात्र, एक्शन में यूपी पुलिस

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर की विवादित ग्लोकल यूनिवर्सिटी के छात्रों द्वारा आपत्तिजनक नारेबाजी का मामला सामने आया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में आरोप है कि कुछ छात्र पाकिस्तान जिंदाबाद का नारा लगा रहे हैं। वीडियो का संज्ञान ले कर सहारनपुर पुलिस ने शनिवार (4 फरवरी, 2023) को पुलिस ने सोबन अहमद और शाबान सहित अन्य अज्ञात छात्रों पर FIR दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है। ग्लोकल यूनिवर्सिटी खनन माफिया के तौर पर भगोड़े घोषित बसपा के पूर्व MLC हाजी इकबाल की है जिस पर जमीन कब्ज़ा करने के आरोप सहित कई अन्य जाँचे भी चल रहीं हैं।

ABP न्यूज़ के पत्रकार विवेक वाजपेयी ने 12 सेकेण्ड के इस वीडियो को शेयर किया है। इस वीडियो में चलती बस के अंदर एक व्यक्ति वीडियो बना रहा है और बाकी सब छात्र के ड्रेस में बैठे दिख रहे। जब सामने से स्टार्ट का संकेत मिलता है तो नारेबाजी शुरू हो जाती है। इस दौरान एक बार’ पाकिस्तान जिंदाबाद’ का नारा सुनाई देता है। इस नारे के बाद बस में मौजूद छात्र खिलखिला कर हँस रहे हैं। सहारनपुर पुलिस ने थाना मिर्जापुर पर FIR दर्ज कर के जाँच और कार्रवाई जारी होने का जवाब दिया है।

वीडियो शेयर करते हुए पत्रकार विवेक ने लिखा, “ये नमक हराम सहारनपुर की ग्लोकल यूनिवर्सिटी के हैं जो पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगा रहे हैं। इनमें से दो की पहचान सहारनपुर के DIG ने कर ली है। इन कमबख़्तों को ऐसा सबक़ सिखाइए कि इनकी पुश्ते भी भारत माता की जय बोलें।”

इस वीडियो के वायरल होने के बाद सहारनपुर की मिर्जापुर थाना पुलिस ने ही FIR दर्ज करवाई है। FIR में बताया गया है कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे से समाज में रोष पैदा हो रहा है। पुलिस के मुताबिक, इस वीडियो के चलते समाज के विभिन्न वर्गों में शत्रुता का भाव पैदा हो रहा है। शिकायत के अनुसार, दिलशाद के बेटे शाबान और रिज़वान के बेटे सोबन व अन्य छात्रों की करतूत जानबूझ कर राष्ट्रीय अखंडता को प्रभावित करने के लिए की गई है।

पुलिस की प्रेस नोट

FIR में पुलिस ने बताया है कि आरोपित छात्रों की पहचान यूनिवर्सिटी में जा कर करवाई गई है। दोनों आरोपित सहारनपुर के बिहारीगढ़ थानाक्षेत्र के गाँव कुरडीखेड़ा के रहने वाले हैं। आपत्तिजनक नारा लगाने वाले सभी छात्र ग्लोकल यूनिवर्सिटी से D फार्मा का कोर्स कर रहे हैं। पुलिस ने आरोपितों पर IPC की धारा 153- B व 505 (2) के तहत कार्रवाई की है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। पुलिस के मुताबिक मामले में जाँच की जा रही है।