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कश्मीर में पाकिस्तान का ड्रग्स रैकेट चला रहे थे 5 पुलिसकर्मी: 17 गिरफ्तारों में कारोबारी, ठेकेदार और नेता भी शामिल

केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर की पुलिस ने बड़ी कामयाबी हासिल की है। नशीले पदार्थों की तस्करी के मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है। ड्रग्स की यह तस्करी पाकिस्तान के जरिए हो रही थी। पुलिस ने कुपवाड़ा और बारामूला के विभिन्न इलाकों से से इस रैकेट से जुड़े 17 लोगों को गिरफ्तार किया है।

गिरफ्तार लोगों में 5 पुलिसकर्मी हैं। इसके अलावा एक स्थानीय नेता, एक ठेकेदार और एक कारोबारी भी गिरफ्तार लोगों में शामिल है। पुलिस ने 2 किलो हेरोइन भी बरामद की है।

जम्मू-कश्मीर के DGP दिलबाग सिंह ने बताया है, “इस तरह की गतिविधियों में शामिल पाए जाने वाले सभी लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी, भले ही वे किसी भी विभाग के हों। हम ड्रग्स की इस चुनौती से उसी तरह निपटेंगे जैसे हमने आतंकवाद की चुनौती का सामना किया है।”

न्यूज 24 की रिपोर्ट के मुताबिक, कुपवाड़ा के SSP युगल मन्हास ने मॉड्यूल के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि एक पोल्ट्री दुकान के मालिक के बारे में सूचना मिली थी कि उसके घर में कुछ नशीला पदार्थ है। इसके बाद उसे ड्रग्स के साथ गिरफ्तार किया गया था। जाँच में खुलासा हुआ कि गिरफ्तार पोल्ट्री दुकान का मालिक ड्रग्स तस्करी के एक बड़े समूह का हिस्सा था। गिरफ्तार व्यक्ति ने कुछ ड्रग पेडलर्स और बारामूला जिले के कुछ सहयोगियों के नाम का खुलासा किया था।

SSP ने बताया कि इस ड्रग्स तस्करी रैकेट के भंडाफोड़ होने से कश्मीर में पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संचालकों की सीधी संलिप्तता फिर से उजागर हुई है। दरअसल पाकिस्तान स्थित आतंकवादी हैंडलर शाकिर अली खान भारत में अपने बेटे तहमीद खान को नशीले पदार्थों का आपूर्ति करता था।

इससे पहले गुरुवार (22 दिसंबर 2022) को पुलिस ने सुरक्षा बलों के साथ मिलकर कुपवाड़ा जिले के वन क्षेत्र में आतंकवादी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन (HM) के पाँच आतंकवादी सहयोगियों को गिरफ्तार किया था। सुरक्षाबलों ने उनके पास से बड़ी संख्या में हथियार और गोला-बारूद बरामद किया था।

‘खुद को ईसाई कहने में गर्व’- मुख्यमंत्री का बेटा और DMK नेता ने कहा, बेटी जब भगवान गणेश की मूर्ति पकड़ी थी तो बोला था नास्तिक

तमिलनाडु (Tamil Nadu) में द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) सरकार पर द्रविड़ मॉडल के नाम पर ईसाई धर्म को बढ़ावा देने के आरोप लग रहे हैं। पार्टी ने कई मौकों पर इसे साबित भी किया है। मुख्यमंत्री एमके स्टालिन (MK Stalin) के बेटे उधयनिधि स्टालिन ने गुरुवार (22 दिसंबर 2022) को यह कहकर विवाद खडा कर दिया कि वह और उनकी पत्नी ईसाई हैं। उन्होंने कहा कि सुनकर संघी आग-बबूला हो जाएँगे। उधयनिधि को हाल ही में राज्य का युवा कल्याण और खेल विकास मंत्री नियुक्त किया गया है।

चेन्नई के हार्बर निर्वाचन क्षेत्र में एक क्रिसमस समारोह में DMK नेता ने कहा कि उन्हें खुद को ईसाई कहने में गर्व है और यह जानने के बाद संघी आग बबूला हो जाएँगे। वह यहीं नहीं रूके। उन्होंने कहा, “हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती (HRCE) मंत्री पीके शेखर बाबू ‘हैललूजाह (Hallelujah)’ कह रहे हैं। मैं खुद को ईसाई बता रहा हूँ। मैं यह भी कहूँगा कि मैं मुस्लिम हूँ।”

उधयनिधि ने कहा, ”मैं यहाँ एग्मोर के डॉन बॉस्को स्कूल में पढ़ा। मैंने अपनी डिग्री लॉयोला कॉलेज से प्राप्त की। मुझे एक ईसाई महिला (किरुथिगा उधयनिधि) से प्यार हो गया और मैंने उससे शादी कर ली। इस आधार पर मैं इस क्रिसमस कार्यक्रम का हिस्सा बनकर खुश हूँ।”

उधयनिधि स्टालिन ने आगे कहा, “हर कोई पूछ रहा है कि यह ‘द्रविड़ मॉडल’ शासन क्या है। हमारे प्रमुख बार-बार ‘द्रविड़ मॉडल शासन’ का उल्लेख करते हैं। मैं आपको बताता हूँ। HR&CE मंत्री ‘हैललूजाह’ कहते हैं। इसे द्रविड़ मॉडल शासन के रूप में जाना जाता है। उन्होंने रमजान के लिए और भी बड़ी योजना बनाई थी। वह बाहर माला लेकर घूम रहे होंगे। यह सामाजिक न्याय का शासन है। इन सब चीजों को हमें पेरियार, अन्ना, कलैगनार और अंबाझगन ने हमें सिखाया है। यही ‘द्रविड़ मॉडल शासन’ है, जिसे हमारे प्रमुख लागू कर रहे हैं।”

एक ट्वीटर यूजर ने उधयनिधि के बयान का वीडियो ट्वीट किया, जिसके कैप्शन में उन्होंने लिखा, “उधयनिधि स्टालिन ने अंततः स्वीकार किया कि वह गर्व से भरे एक ईसाई हैं। डीएमके सबसे बड़ा मिशनरी माफिया है। जागो हिन्दुओं जागो।”

उधयनिधि भले ही खुद को ईसाई बता लें या मुस्लिम बता लें, वह वास्तव में अपनी ही बात को काट रहे हैं। उधयनिधि स्टालिन ने साल 2020 में दावा किया था कि वह और उनकी पत्नी नास्तिक हैं।

दरअसल उन्होंने सोशल मीडिया पर भगवान गणेश की मूर्ति पकड़े हुए अपनी बेटी की तस्वीर साझा की थी, जिसके बाद विवाद खड़ा हो गया था। उधयनिधि ने तब एक बयान में स्पष्ट किया था कि भगवान की मूर्ति पकड़कर फोटो खिंचवाने की इच्छा उनकी बेटी की थी। वह और उनकी पत्नी किसी भी भगवान में विश्वास नहीं करते हैं।

वास्तव में यह पहली बार नहीं है कि DMK के किसी नेता ने ईसाई धर्म का महिमामंडन किया है। 28 जुलाई 2022 को तमिलनाडु विधानसभा अध्यक्ष एम अप्पावु ने कहा था कि तमिलनाडु में डीएमके की सरकार ईसाइयों के कारण ही बनी है।

उन्होंने कहा था कि डीएमके सरकार ईसाइयों के लिए और ईसाइयों द्वारा है। स्पीकर ने तब ईसाई कैथोलिक मिशनरियों को डीएमके के सत्ता में आने की प्रार्थना करने के लिए धन्यवाद दिया था।

‘शराब को पेप्सी समझ पीने पर अल्लाह माफ कर देगा, लेकिन क्रिमसम की बधाई देने पर नहीं’: जो कट्टरपंथी जाकिर नाइक ने कहा वही इस्लामी विद्वान कह रहे, बता रहे गैर-इस्लामी

क्रिसमस और अंग्रेजी नववर्ष से पहले लोग छुट्टियाँ मना रहे हैं। इस बीच इंडोनेशिया के एक मौलवी ने कहा है कि मुस्लिमों को ‘मेरी क्रिसमस’ कहते हुए क्रिसमस की शुभकामनाएँ देने से बचना चाहिए। मौलवी मारूफ अमीन ने बुधवार (21 दिसंबर 2022) को कहा, “यह अभी भी बहस का विषय है कि दूसरों को शुभकामनाएँ देना हलाल है या हराम। इसलिए, बेहतर है कि मुस्लिम इससे दूर रहें और मेरी क्रिसमस न कहें।”

रिपोर्ट्स के अनुसार, मौलवी मारूफ अमीन इंडोनेशिया में इस्लामिक संस्था का अध्यक्ष है। मौलवी ने कहा है कि मुस्लिम ‘हैप्पी न्यू ईयर’ विश कर सकते हैं, लेकिन उन्हें दूसरों को ‘मेरी क्रिसमस’ कहने से बचना चाहिए। उसने यह भी कहा कि मुस्लिमों के लिए क्रिसमस पार्टियों या समारोहों में शामिल होना ‘हराम’ है। 

मौलवी ने कहा है, “MUI ने मुस्लिमों को इस तरह के कार्यक्रमों में भाग लेने से मना करने का आदेश जारी किया है, क्योंकि ऐसे कार्यक्रम धार्मिक प्रवृत्ति के होते हैं। इसलिए किसी भी मुस्लिम के लिए इसमें हिस्सा लेना हराम होगा।”

मौलवियों ने कुरान का हवाला देकर ‘मेरी क्रिसमस’ कहना बताया हराम

क्रिसमस से पहले ‘द इस्लामिक इंफॉर्मेशन’ द्वारा प्रकाशित की गई एक अन्य रिपोर्ट में कहा गया है कि इस्लाम में क्रिसमस सहित किसी भी गैर-मुस्लिम त्योहार को मनाना ‘हराम’ है। ईसाई यीशु (ईश्वर के पुत्र) के जन्म को मनाते हैं। क्रिसमस का जश्न शिर्क (पाप) के दायरे में है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह इस्लाम में सबसे दंडनीय अपराधों में से एक है।

रिपोर्ट में कुरान की उन आयतों का भी हवाला दिया गया है, जो क्रिसमस मनाने पर रोक लगाती हैं। कुरान की आयत को कोट करते हुए कहा गया है, “ऐ किताब के मानने वालों! अपने विश्वास के संबंध में अति न करें; सत्य के सिवा अल्लाह के बारे में कुछ मत कहो। मरियम के पुत्र यीशु मसीह अल्लाह के दूत से अधिक नहीं थे और मरियम के माध्यम से उनके शब्दों की पूर्ति से ज्यादा कुछ नहीं था। केवल एक ईश्वर है और वह अल्लाह है। उसकी जय हो। वह एक बेटा होने से बहुत ऊपर है।”

(फोटो साभार: TheIslamicInformation.com)

‘मेरी क्रिसमस’ के जवाब में ‘वा अलैकुम अस-सलाम’ कहें मुसलमान

इससे पहले, जिम्बाब्वे के इस्लामी विद्वान मुफ्ती मेंक ने कहा था कि मुस्लिमों को जबरदस्ती मेरी क्रिसमस की शुभकामनाएँ देने की जरूरत नहीं है। लेकिन, अगर कोई उन्हें मेरी क्रिसमस कहता है तो उन्हें ‘वा अलैकुम अस-सलाम’ कहना चाहिए।

5 साल पहले शेयर किए गए इस वीडियो में मुफ़्ती मेंक को इस्लाम को ‘गलत’ तरीके से चित्रित करने के लिए मीडियाकर्मियों की खिंचाई करते हुए भी देखा जा सकता है। वीडियो में कहा है, “मेरी क्रिसमस की बधाई नहीं देने का मतलब यह नहीं है कि मुस्लिम ईसाइयों का अपमान करते हैं।”

सऊदी के मौलाना आसिम अलहकीम ने बताया है हराम

इससे पहले ऐसे कई वाकये सामने आए हैं, जब दुनिया भर के कई इस्लामी मौलवियों और विद्वानों ने मुस्लिम समुदाय को क्रिसमस नहीं मनाने और ‘मेरी क्रिसमस’ कहने से बचने का निर्देश दिया था। साल 2018 में असिम अलहकीम नामक एक सऊदी मौलवी ने ट्विटर पर कहा था कि किसी को ‘मेरी क्रिसमस’ की बधाई देना इस्लाम में हराम है। अलहकीम ने ट्वीट किया था, “मेरी क्रिसमस कहने का मतलब है कि आप स्वीकार करते हैं कि अल्लाह का एक बेटा है। कोई मुस्लिम ऐसा नहीं करेगा।”

एक अन्य ट्वीट में मौलवी ने स्पष्ट करते हुए कहा था कि इस मुद्दे पर उनके दृष्टिकोण का उद्देश्य दुश्मनी को बढ़ावा देना या साथ में रहने पर रोक लगाना नहीं था। मौलवी ने ट्वीट कर कहा था, “बधाई नहीं देने का मतलब यह नहीं है कि हम उनसे (ईसाइयों से) नफरत करते हैं या वे हमारे दुश्मन हैं या फिर उनके (यीशु के) होने से इनकार कर रहे हैं। हम अपने धर्म का पालन कर रहे हैं और वे अपने धर्म का पालन कर रहे हैं। हम उनके अधिकार का सम्मान करते हैं और उन्हें भी हमारे अधिकार का सम्मान करना चाहिए।”

‘क्रिसमस की बधाई देना हत्या से बड़ा पाप’: इस्लामी मौलवी

एक रिपोर्ट के अनुसार, ब्रिटिश कोलंबिया के एक इस्लामिक मौलवी शेख यूनुस कथराडा ने कहा था कि जो मुस्लिम ईसाइयों को ‘मेरी क्रिसमस’ की बधाई देते हैं, वे हत्या से भी गंभीर पापों के दोषी हैं। साल 2018 में कथराडा ने ब्रिटिश कोलंबिया में एक भाषण देते हुए कहा था, “ऐसे लोग हैं जो उन्हें (ईसाइयों को) ‘मेरी क्रिसमस’ कहेंगे। आप उन्हें किस बात की बधाई दे रहे हैं? क्या ये आपके भगवान के जन्म पर बधाई है? क्या यह एक मुस्लिम को मंजूर होगा? क्या अब आप उनकी मान्यताओं का स्वीकृति दे रहे हैं?”

मौलवी ने कहा था, “यदि कोई व्यक्ति बहुत बड़ा पाप कर रहा है, जैसे कि व्यभिचार, ब्याज लेना, झूठ बोलना या हत्या। कोई अन्य व्यक्ति गैर-मुस्लिमों को उनके त्योहारों पर बधाई दे रहा है तो वह इनसे कहीं अधिक बड़ा पाप कर रहा है।”

केरल के इस्लामी स्कॉलर शम्सुद्दीन फरीद ने क्रिसमस को बताया ‘गैर-इस्लामी’

केरल के एक इस्लामी मौलवी शम्सुद्दीन फरीद ने साल 2016 में क्रिसमस और ओणम को गैर-इस्लामिक त्यौहार कहकर विवाद खड़ा कर दिया था। उसने मुस्लिमों को क्रिसमस के दौरान होने वाले समारोहों से दूर रहने का भी आदेश दिया था। रिपोर्ट्स के अनुसार, फरीद केरल में एक ऐसे इस्लामी संगठन का अनौपचारिक प्रवक्ता है, जो केरल के युवाओं के बीच कट्टरता फैलाने के लिए भी जिम्मेदार है।

‘मेरी क्रिसमस’ विश करना 100% गलत: इस्लामी कट्टरपंथी जाकिर नाइक

फरार कट्टरपंथी जाकिर नाइक ने अप्रैल 2019 में एक वीडियो में कहा था कि मुस्लिमों द्वारा मेरी क्रिसमस की शुभकामना देना 100% गलत है। उसने कहा था, “अपने लक्ष्य तक पहुँचने के लिए आप गलत साधनों का उपयोग नहीं कर सकते। जो उनके लिए हराम है, वह आपके लिए भी हराम है। जब आप उन्हें मेरी क्रिसमस की शुभकामनाएँ दे रहे हैं तो आप मान रहे हैं कि वह ईश्वर का पुत्र है और वह शिर्क (पाप) है।”

भगोड़े जाकिर नाइक ने यह भी कहा था, “यदि आप नहीं जानते कि क्रिसमस क्या है और किसको बधाई दे रहे हैं तो अल्लाह आपको क्षमा कर सकता है। अगर आप गलती से पेप्सी समझकर शराब पीते हैं तो अल्लाह आपको माफ कर सकता है, लेकिन अगर आप यह जानने के बाद भी कि क्रिसमस क्या है, सिर्फ संबंध बनाने के लिए ऐसा कर रहे हैं तो आप जहन्नम (नरक) में अपनी जगह बना रहे हैं।”

बीते कई वर्षों से इस्लामी मौलवियों और विद्वानों ने ईसाई त्योहार क्रिसमस को ‘हराम’ कहा है। मौलवियों ने मुस्लिमों को निर्देश दिया है कि वे दूसरों को ‘मेरी क्रिसमस’ की शुभकामनाएँ न दें। क्रिसमस का पेड़ भी मुस्लिमों के लिए हराम है, क्योंकि क्रिसमस मनाना इस्लाम में हराम है।

ब्यूटी पार्लर वाली जाहिला बेगम का हनीट्रैप: एक ने ₹50 लाख देकर किया सुसाइड, दूसरे से ₹30 लाख वसूले; अब गैंगस्टर एक्ट में एक्शन

उत्तर प्रदेश के बांदा में एक महिला को लखनऊ के युवक को हनी ट्रैप में फँसाकर 30 लाख रुपए वसूलने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। इस महिला का नाम जाहिला बेगम है। वह ब्यूटी पार्लर चलाती है। यह पहली बार नहीं है, जब जाहिला ने किसी शख्स को हनी ट्रैप में फँसाया है। इससे पहले उसने इस साल मई में एक सर्राफा व्यापारी को भी अपना शिकार बनाया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बिजनेसमैन शैलेश जड़िया को प्रेम जाल में फँसाने के बाद जाहिला ने उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। इसका वीडियो बना लिया। इसके बाद वीडियो वायरल करने की धमकी देने लगी। ब्लैकमेल कर उसने व्यापारी से करीब 50 लाख रुपए वसूले थे। बाद में वह और बड़ी रकम की माँग कर रही थी। बार-बार धमकियों से तंग आकर व्यापारी ने आत्महत्या कर ली थी। पुलिस ने इस मामले की जाँच करने के बाद जाहिला को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। लेकिन जेल से बाहर आने के बाद वह फिर इसी काम में लग गई।

जेल से छूटने के बाद वह सोशल मीडिया पर फिर एक्टिव हो गई। इस बार उसने लखनऊ के रहने वाले इरसाद शहाद खान को अपने जाल में फँसाया। वह उससे चैटिंग करने लगी। इसके बाद दोनों एक-दूसरे के करीब आ गए। बाद में महिला ने शहाद के साथ भी वही किया, जो वह अपने हर शिकार के साथ करती थी। उसने शारीरिक संबंध बनाकर वीडियो बनाया। फिर खान को ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया। उससे करीब 30 लाख रुपए वसूले। कुछ रिपोर्ट में यह रकम 40 लाख रुपए बताई गई है। महिला की ब्लैकमेलिंग से तंग आकर युवक ने लखनऊ में मामला दर्ज कराया। कुछ मीडिया रिपोर्ट में गिरफ्तार की गई महिला का नाम राहिला बेगम बताया जा रहा है।

बांदा के अपर पुलिस अधीक्षक लक्ष्मी निवास मिश्रा ने बताया कि इस महिला ने सर्राफा व्यापारी को अपने प्रेमजाल में फँसाकर काफी पैसा ऐंठा था। इससे तंग आकर उसने आत्महत्या कर ली थी। इस मामले में उसको जेल भेजा गया था। अब दूसरा प्रकरण सामने आया है, जिसमें एक युवक से फेसबुक के जरिए उसका सम्पर्क हुआ था। सम्पर्क के बाद दोनों काफी निकट आ गए। बाद में युवक को पता चला कि महिला शादीशुदा है। महिला के पास युवक की आपत्तिजनक तस्वीरें और फोटो थी, जिसके चलते उसने उससे 30 से 40 लाख रुपए अपने खाते में डलवा लिए, जिसके प्रमाण भी मिले हैं। महिला को जेल भेजा गया है और छानबीन की जा रही है। वहीं इस मामले में SP अभिनंदन ने कहा कि आरोपित महिला के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी।

चीन में 10 लाख नए केस, रोज 5000 मौतें: ब्रिटिश रिसर्च कंपनी ने बताया, चीन कर रहा था 4000 कोरोना+ होने का ही दावा

चीन की सरकार (Chinese Government) के लाख प्रयासों के बावजूद वहाँ की हकीकत दुनिया से छुप नहीं पा रही है। ब्रिटेन स्थित रिसर्च कंपनी एयरफिनिटी (Airfinity) के अनुसार, चीन में हर दिन कोरोना इंफेक्शन (Corona) के लगभग 10 लाख नए मामले आ रहे हैं। वहीं, हर रोज 5,000 लोगों की मौत हो रही है। उधर, चीन की सरकार देश में कोरोना (Covid-19) के सिर्फ 4,000 केस बता रही है।

एयरफिनिटी का दावा है कि उसने चीन के क्षेत्रीय आँकड़ों के आधार पर अपनी रिपोर्ट तैयार की है। फर्म का दावा है कि चीन में मौजूदा दैनिक संक्रमण एक मिलियन (10 लाख) से अधिक है, जो जनवरी के आखिर तक 37 लाख तक पहुँच सकती है। एयरफिनिटी का अंदाजा है कि कोरोना के इस लहर से चीन में 10 लाख से भी ज्यादा लोगों की मौत हो सकती है। बता दें कि चीन के बीजिंग और ग्वांगडोंग में सबसे ज्यादा कोरोना संक्रमण के मामले सामने आ रहे हैं।

चीन के सरकारी आँकड़ों की बात करें तो पिछले एक हफ्ते में कोरोना के 1800 मामले दर्ज किए गए हैं, जबकि सिर्फ 7 लोगों की मौत हुई है। दूसरी तरफ, चीन के इन खोखले दावों की पोल वहीं के लोग खोल रहे हैं। चीन की ह्यूमन राइट एक्टिविस्ट जेनिफर जेंग ने एक क्लास रुम की तस्वीर साझा की है, जिसमें कुछ बच्चे ड्रिप लगाकर पढ़ाई कर रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि इन बच्चों को कोरोना संक्रमण है।

एक अन्य पोस्ट में कब्रिस्तान में लंबी कतार दिखाई दे रही है। बताया जा रहा है कि अंतिम संस्कार के लिए 20 दिन की वेटिंग है। जेनिफर के एक पोस्ट के मुताबिक, चीन शवों को जलाने के लिए भट्टियों का निर्माण करवा रहा है। भट्टियाँ बनाने की ठेकेदारी एक सरकारी चीनी कंपनी को दी गई है।

इधर, चीन में कोविड मामलों में वृद्धि के बीच एक बार फिर से राष्ट्रपति शी जिनपिंग के खिलाफ विरोध शुरू हो गया है। लोग राष्ट्रपति से इस्तीफा माँग कर रहे हैं। दरअसल, चीन की ‘ज़ीरो कोविड पॉलिसी’ का स्थानीय लोग जोर-शोर से विरोध कर रहे थे। इसके बाद चीन की सरकार ने जीरो कोविड पॉलिसी में ढील देने का निर्णय लिया था। ढील देते ही चीन में कोरोना विस्फोट हो गया है। कहा जा रहा है कि सच्चाई बाहर न आ सके इसके लिए चीन में बड़े पैमाने पर परीक्षण बंद कर दिया गया है।

अब नाक से ले सकेंगे कोरोना की वैक्सीन, मोदी सरकार ने दी हरी झंडी: बूस्टर डोज के तौर पर लगेगी, जानिए कैसे काम करेगी

चीन में कोरोना (Corona Virus) के विस्फोटक हालात से पूरी दुनिया चिंतित है। नए वैरिएंट के कुछ केस भारत में भी मिले हैं। इसे देखते हुए नए साल और आगामी त्योहारों के मद्देनजर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय नई एडवाइजरी जारी करेगी। इस बीच भारत सरकार ने कोरोना के नेजल वैक्सीन (Nasal vaccine) को मंजूरी दे दी है। शुक्रवार (23 दिसंबर 2022) से ही यह भारत के कोविड 19 वैक्सीनेशन प्रोग्राम में शामिल हो गया है।

नेजल वैक्सीन को भारत बायोटेक ने तैयार किया है। इस वैक्सीन का नाम iNCOVACC है। इसे बूस्टर डोज के तौर पर लगाया जा सकेगा। नेजल वैक्सीन शुरुआत में प्राइवेट अस्पतालों में लगाई जाएगी। इसे 18 साल से अधिक उम्र के लोगों को बूस्टर डोज के रूप में लगाया जा जाएगा। भारत बायोटेक की यह वैक्सीन देश की पहली ऐसी बूस्टर खुराक होगी, जिसमें टीका नहीं लगाया जाएगा, बल्कि य​ह नाक के द्वारा स्प्रे करके दी जाएगी।

पहले इस वैक्सीन का नाम BBV154 रखा गया था। सितंबर में ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया DCGI ने इसके आपातकालीन इस्तेमाल को मंजूरी दी थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, हैदराबाद स्थित भारत बायोटेक कंपनी ने लगभग 4,000 वॉलिटिंयर पर नेजल वैक्सीन का क्लिनिकल टेस्ट किया था। किसी पर भी कोई भी साइड इफेक्ट देखने को नहीं मिला। इस साल अगस्त में इसके तीसरे क्लीनिकल ट्रायल के बाद यह स्पष्ट हो गया था कि नेजल वैक्सीन के इस्तेमाल से कोई भी जोखिम नहीं है। इस वैक्सीन को काफी किफायती और फ्लू व कोरोना वायरस इंफेक्शन से लड़ने वाला बताया गया है।

किस तरह काम करेगी नेजल वैक्सीन

कोरोना के अलावा कई तरह के वायरस म्युकोसा के जरिए हमारे शरीर में जाते हैं। नेजल वैक्सीन म्युकोसा में इम्युन पैदा करती है। यह (म्युकोसा) एक तरह का चिपचिपा पदार्थ होता है, जो नाक, फेफड़ों, पाचन तंत्र में पाया जाता है। जो लोग पहले वैक्सीन की दो डोज ले चुके हैं, उन्हें ही बूस्टर डोज के तौर पर यह वैक्सीन लगाई जाएगी।

गौरतलब है कि चीन के साथ दुनिया भर में कोरोना के कारण हाहाकार मचा हुआ है। भारत में भी ओमिक्रोन बीएफ.7 की दस्तक दे चुका है। इसको देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार (22 दिसंबर 2022) को एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई थी। बैठक में पीएम मोदी ने कहा कि कोरोना अभी खत्म नहीं हुआ है। इस दौरान उन्होंने भीड़-भाड़ वाले सार्वजनिक स्थानों पर मास्क पहनने, टेस्टिंग बढ़ाने और जीनोमिक सीक्वेंसिंग का आग्रह किया था।

दक्षिण कोरिया में मस्जिद बनाने को लेकर बवाल: स्थानीय लोगों ने सुअर भूनकर किया विरोध, पाकिस्तानी के हमले के बाद से तनाव

दक्षिण कोरिया (South Korea) में प्रवासी मुस्लिमों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। इस बीच यहाँ डेगू के दहेयोन-डोंग में रहने वाले लोग प्रवासी मुस्लिमों द्वारा इलाके में बनाई जा रही मस्जिद का विरोध कर रहे हैं। कोरिया हेराल्ड की एक रिपोर्ट के अनुसार, विगत गुरुवार (15 दिसंबर 2022) को स्थानीय लोग निर्माणाधीन मस्जिद के पास इकट्ठा हुए और वहाँ उन्होंने सुअर का मांस पकाकर पार्टी की।

रिपोर्ट्स के अनुसार, दहेयोन-डोंग इलाके में बन रही मस्जिद का विरोध करने के लिए स्थानीय लोगों ने ‘डेगू मस्जिद विरोधी समिति’ का गठन किया है। यह समिति ही अप्रवासी मुस्लिमों द्वारा बनाई जा रही मस्जिद का विरोध कर रही है।

सोशल मीडिया पर शेयर की गई बारबेक्यू पार्टी (आउटडोर पार्टी) की तस्वीरों में एक छोटी मेज पर सुअर का सिर दिखाया गया है। तस्वीरों में दहेयोन-डोंग के लोगों को सुअर का मांस भूनते और उससे बने कई व्यजनों का लुफ्त उठाते देखा गया। बता दें कि सुअर को इस्लाम में हराम माना जाता है।

स्थानीय लोगों ने क्यूंगपुक नेशनल यूनिवर्सिटी के गेट के पास आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले एक पाकिस्तानी छात्र ने स्थानीय कोरियाई पर हमला किया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पाकिस्तानी छात्र द्वारा किए गए हमले को हल्के में नहीं लिया जाएगा।

मस्जिद निर्माण का विरोध कर रही ‘डेगू मस्जिद विरोधी समिति’ ने कहा, “एक स्थानीय निवासी ने मस्जिद निर्माण कर रहे व्यक्ति का टेंट हटाने की कोशिश की थी। पाकिस्तानी छात्र द्वारा उस पर हमला किया गया, लेकिन पाकिस्तानी छात्र पर छोटा-मोटा अपराध का आरोप लगाया गया।” यह आरोप तब लगाया जाता है, जब कोर्ट द्वारा किसी औपचारिक परीक्षण के बिना छोटे अपराधों के लिए जुर्माना लगाया जाता है।

कोरिया हेराल्ड की रिपोर्ट के अनुसार, कानून व्यवस्था बनाए रखने और दोनों गुटों के बीच किसी प्रकार की झड़प को रोकने के लिए डेगू उत्तरी जिला पुलिस स्टेशन ने मस्जिद के पास इमरजेंसी टीम को तैनात किया है। गौरतलब है कि इससे पहले इसी साल अक्टूबर में मस्जिद निर्माण का विरोध कर रहे लोगों ने मस्जिद के बगल में सुअर का कटा हुआ सर रखकर विरोध किया था।

दक्षिण कोरिया के डेगू शहर के दहेयोन-डोंग के स्थानीय लोग और अप्रवासी मुस्लिमों के बीच संघर्ष लंबे समय से चला आ रहा है। इस विवाद का कारण एक मस्जिद है, जिसका निर्माण 2020 के अंत में शुरू हुआ था। नाटकों और पॉप संस्कृति के लिए मशहूर दक्षिण कोरिया तेजी से बदल रही जनसांख्यिकीय चुनौती का सामना कर रहा है। साल 2020 के आँकड़ों के अनुसार, ‘अप्रवासी’ अब कुल आबादी का 3.3% हैं और उनकी संख्या तेजी से बढ़ रही है।

दहेयोन-डोंग में मस्जिद के बनने से स्थानीय दक्षिण कोरियाई डरे हुए हैं और वह अपने घरों को छोड़ने के लिए भी तैयार हैं। यहाँ की क्यूंगपुक नेशनल यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले मुस्लिम छात्र 2014 से नमाज अदा करने के लिए दहेयोन-डोंग में एक घर का इस्तेमाल कर रहे थे।

जनवरी 2020 में मस्जिद निर्माण का हुआ था विरोध (फोटो साभार: द न्यूयॉर्क टाइम्स)

हालाँकि, साल 2020 में 6 मुस्लिमों (पाकिस्तान और बांग्लादेश से) के एक ग्रुप द्वारा यहाँ जमीन खरीदे जाने के बाद से यहाँ सब कुछ बदलने लगा। उसी साल दिसंबर में इन मुस्लिमों ने स्थानीय अधिकारियों की अनुमति लेकर 20 मीटर लंबी मस्जिद बनानी शुरू कर दी। अप्रवासी मुस्लिमों का तर्क था कि अब तक जहाँ वह नमाज पढ़ रहे थे, वहाँ एक बार में केवल 150 लोग ही इकट्ठे हो सकते हैं।

स्थानीय कोरियाई लोगों की शिकायतें

स्थानीय कोरियाई लोगों का कहना है कि बीते कई वर्षों से वे लोग मुस्लिमों के साथ ही रह रहे हैं। अब तक उनसे कोई समस्या नहीं रही, लेकिन अब मस्जिद बन जाने से नमाज से होना वाला शोर बढ़ जाएगा। लोगों की यह भी आशंका है कि मस्जिद निर्माण से यह इलाका भीड़-भाड़ भरा हो जाएगा।

साल 2020 मस्जिद निर्माण शुरू होने के बाद से स्थानीय जिला प्रशासन के यहाँ के लोगों ने लगातार शिकायतें भेजनी शुरू कर दीं। इसके बाद लोगों के दवाब में आकर मस्जिद बनाने की अनुमति रद्द कर दी गई और मस्जिद का निर्माण रुक गया था।

हालाँकि, स्थानीय लोगों की यह खुशी थोड़े दिनों की ही थी, क्योंकि इसके बाद मुस्लिमों ने जिला प्रशासन के फैसले के खिलाफ कोर्ट में याचिका दायर कर दी। कोर्ट में उन्हें जीत मिल गई। इसके बाद इसी साल सितंबर में कोरियाई सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को सही ठहराते हुए मस्जिद निर्माण की अनुमति दे दी थी।

इसके बाद भी स्थानीय लोगों ने हार नहीं मानी और जिला प्रशासन से मस्जिद को ‘स्थानांतरित’ करने की माँग करने लगे। हालाँकि, उनकी यह अपील भी किसी काम नहीं आई। हालातों से मजबूर कोरियाई लोग अब दहेयोन-डोंग में मस्जिद के निर्माण को किसी ना किसी बहाने रोकने की कोशिश कर रहे हैं।

मस्जिद के विरोध में लगे हुए पोस्टर (फोटो साभार: कोरियाई हेराल्ड)

कोरियाई लोग अब मस्जिद के गेट पर वाहनों को खड़ा कर रहे हैं और गली में सूअरों के कटे हुए सिर रख रहे हैं। यहाँ तक कि मस्जिद के पास खुले में सूअर का मांस भी पका रहे हैं। यही नहीं, नमाज के समय तेज आवाज में गाने भी बजा कर विरोध कर रहे हैं।

इसके अलावा, स्थानीय लोगों ने मोहल्ले में पोस्टर लगाकर भी मस्जिद निर्माण का विरोध किया। इन पोस्टरों में ‘इस्लाम एक दुष्ट मजहब है जो लोगों को मारता है’, ‘हम इस्लामी मस्जिद के निर्माण का कड़ा विरोध करते हैं’, ‘सबसे पहले कोरियाई लोग’ और ‘आतंकवादियों का अड्डा’ जैसे वाक्य लिखे हुए हैं। स्थानीय लोगों के विरोध के बाद भी मस्जिद निर्माण जारी है। इसके 2022 के अंत तक शुरू होने की भी उम्मीद है।

‘भारत रहने लायक नहीं’ पर घिरे अब्दुल बारी सिद्दीकी: बीजेपी नेता ने बताया मदरसा छाप, लिबरलों का राष्ट्रविरोधी एजेंडा

अपनी संतानों को विदेश में बस जाने की सलाह देने वाले राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी (Abdul Bari Siddiqui) पर भाजपा ने करारा हमला बोला है। भाजपा नेता निखिल आनंद ने कहा है कि अगर सिद्दीकी को देश में इतनी ही तकलीफ है तो वे यहाँ मिलने वाली सारी सुविधाओं को छोड़कर परिवार सहित पाकिस्तान चले जाएँ, उन्हें कोई नहीं रोकेगा। सिद्दीकी ने एक कार्यक्रम में कहा था कि अब भारत का माहौल रहने लायक नहीं है। इसलिए वे अपने बच्चों को विदेश में बसने की सलाह दे रहे हैं।

निखिल आनंद ने एक वीडियो ट्वीट कर कहा, “राजद नेता सिद्दीकी का बयान निंदनीय है। ये लोग मदरसा संस्कृति से अभी भी बाहर नहीं निकल पाए हैं। ऐसे ही लोग सेक्युलरिज्म व लिबरलिज्म के मुखौटे में राष्ट्र-विरोधी व धार्मिक एजेंडा चलाते हैं। सिद्दीकी का बयान आरजेडी की विचारधारा को परिलक्षित करता है।” निखिल आनंद ने कहा कि राजद की तुष्टिकरण और मुस्लिम-परस्ती राजनीति के तहत सिद्दीकी हिंदू विरोधी बयान दे रहे हैं।

दरअसल, विधान परिषद के सभापति देवेश चंद्र ठाकुर के सम्मान में एक उर्दू दैनिक की ओर से सम्मान समारोह का आयोजन किया गया था। समारोह में जब सिद्दीकी को बोलने का मौका मिला तो उन्होंने देश का माहौल खराब बता दिया और कहा कि यह देश अब रहने लायक नहीं है। भाजपा नेता निखिल आनंद ने गुरुवार (22 दिसंबर 2022) को एक और ट्वीट किया था, जिसमें अब्दुल बारी सिद्दीकी के विवादास्पद बयान का वीडियो है।

वीडियो के कैप्शन में भाजपा नेता ने लिखा है, “भड़काऊ बयान देकर सिद्दीकी किसे खुश करना चाहते हैं? बेहतर होगा कि वह पाकिस्तान चले जाएँ। सिद्दीकी भारत में रह रहे हैं और भारत की थाली में खा रहे हैं, लेकिन कट्टरपंथियों के इशारों पर गा रहे हैं और विक्टिम कार्ड खेलकर देश विरोधी ज्ञान दे रहे हैं।”

वीडियो में सिद्दीकी कहते हैं, “मेरा एक बेटा और एक बेटी है। बेटा अभी हार्वर्ड में पढ़ रहा है, जबकि बेटी लन्दन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स से पास आउट है। देश के माहौल को देखते हुए हमने अपने बेटा-बेटी को कहा कि वहीं नौकरी कर लो और अगर सिटीजनशिप मिले तो वह भी ले लो। अब इंडिया में वह माहौल नहीं रह गया है। पता नहीं तुम लोग झेल पाओगे या नहीं। आप समझिए कि कोई आदमी कितनी तकलीफ से यह बात अपने बच्चों को कहेगा कि तुम अपनी मातृभूमि छोड़ दो।”

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सिद्दीकी ने बताया कि उनकी सलाह का उनके बच्चों ने ही विरोध किया है। बकौल सिद्दीकी, उनके बच्चों का कहना है कि वे बालिग हैं और उन्हें कहाँ रहना है, इसका निर्णय वे स्वयं करेंगे। इस बारे में सलाह देने का अधिकार उन्हें नहीं है। वहीं, सिद्दीकी ने कहा कि ऐसी सलाह देने में क्या बुराई है।

अब्दुल बारी सिद्दीकी ने कहा कि अगर सर्वेक्षण कराया जाए तो पता चलेगा कि कितने ही देशभक्तों के बच्चे विदेश में पढ़ते हैं और वहीं बस गए हैं। उन्होंने कहा कि समारोह में न्यायपालिका से जुड़े लोग भी उपस्थित थे। सब सहज भाव से सुन रहे थे, लेकिन भाजपा समारोह के पाँच दिन गुजर जाने के बाद अपने एजेंडे के हिसाब से उनकी आलोचना कर रही है।

‘तू शादी के बाद नमाज अदा करेगी’: लव जिहाद का नया मरकज बना इंदौर; 24 घंटे में तीन मामले, एक गणेश मंदिर से पकड़ा गया

मध्य प्रदेश के इंदौर से हाल के दिनों में लव जिहाद के कई मामले सामने आए हैं। बीते 24 घंटे में इस तरह की तीन घटना देखने को मिली है। एक मामले में तो लव जिहादी को मंदिर से पकड़ा गया है।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक गुरुवार (22 दिसंबर 2022) को इंदौर के तीन अलग-अलग स्थानों पर हिंदू लड़कियों को प्रेम का झॉंसा देते मुस्लिमों को पकड़ा गया। एक मामले में अरबाज खान ने अज्जू बनकर हिंदू लड़की से दोस्ती की थी। उसके आधार कार्ड से धोखेबाजी का खुलासा हुआ। दूसरे मामले में फैजान एक स्कूली छात्रा पर शादी करने का दबाव बना रहा था। तीसरे मामले में मोहम्मद समीर एक हिंदू लड़की के साथ अश्लील हरकत करते पकड़ा गया।

पहला मामला

इंदौर के रेडियो कॉलोनी के पास पार्क में बजरंग दल कार्यकर्ताओं ने एक जोड़े को अश्लील हरकत करते देखा। कार्यकर्ताओं को देख युवक भागने लगा। इससे उस पर शक हुआ और बजरंग दल कार्यकर्ताओं ने उसे पकड़ लिया। उसने अपना नाम अज्जू बताया। आधार कार्ड देखने पर पता चला कि उसका नाम अरबाज खान है। यह बात जान उसके साथ पार्क आई लड़की भी चौंक गई। उसने बताया कि वह अरबाज को हिंदू समझ रही थी। कार्यकर्ताओं ने अरबाज को पुलिस के हवाले कर दिया।

दूसरा मामला

इंदौर के के खजराना गणेश मंदिर से मोहम्मद फैजान एक हिंदू स्कूली छात्रा पर शादी का दबाव बनाते पकड़ा गया। वह टाइल्स लगाने का काम करता है। वह लड़की से शादी और शादी के बाद नमाज अदा करने को लेकर दबाव बना रहा था। पुलिस के अनुसार लाल चौक इलाके में रहने वाला फैजान और छात्रा एक ही स्कूल में पढ़ा करते थे। 12वीं की छात्रा को प्रेम जाल में फँसा वह शादी और धर्म परिवर्तन का दबाव बना रहा था। वह छात्रा से किसी को बिना बताए धोखे से शादी करने के लिए भी कह रहा था। पुलिस ने फैजान के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस फैजान की सोशल मीडिया और फोन की भी जाँच कर रही है।

तीसरा मामला

इंदौर के नगीन नगर स्थित सिटी स्टार स्कूल के बाहर मोहम्मद समीर हिंदू लड़की के साथ अश्लील हरकत करते पकड़ा गया। ख़बर के मुताबिक वह हिंदू छात्रा से मिलने रोज आता था। हिंदू संगठन के कार्यकर्ताओं ने जब उसे अश्लील हरकत करते पकड़ा तो वह छात्रा को पहले सहपाठी और फिर अपनी बहन बतलाने लगा। इस बीच मामले की खबर छात्रा के भाई को हुई और वह भी मौके पर पहुँचा। इसके बाद समीर छात्रा से प्यार की बात कहने लगा।

गौरतलब है कि इंदौर से हाल में लव जिहाद के कई मामले सामने आए हैं। 19 दिसंबर 2022 को राजा नगर इलाके में दर्ज मामले के अनुसार आफताब ने राहुल बनकर हिंदू लड़की से दोस्ती की। असलियत सामने आने के बाद लड़की ने उससे दूरी बना ली। इसके बाद आफ़ताब ने श्रद्धा की तरह उसे 35 टुकड़ों में काटने की धमकी दी। 20 दिसंबर 2022 को हीरानगर क्षेत्र से एक मामला सामने आया था, जिसमें तलाकशुदा व 1 बच्चे की माँ लव जिहाद का शिकार हो गई थी। बिहार के नबील शेख ने खुद को नवीन बता कर महिला से दोस्ती की थी और बाद में उस पर इस्लाम कबूलने का दबाव बनाने लगा। एक अन्य मामले में मोइन खान खुद को मोनू वर्मा बताते हुए हिंदू लड़की को प्रेम जाल में फँसा कर अश्लील हरकत करते पकड़ा गया था। पुलिस ने बताया था कि वह कई वर्षों से नाम बदलकर युवती से संबंध बना रहा था।

छठी और 7वीं में गीता, 11-12वीं में वेद के श्लोक: NCERT की किताबों में शामिल करेगी मोदी सरकार, कहा- भारतीय संस्कृति के बारे में सीखें बच्चे

केंद्र सरकार ने बच्चों के पाठ्य-पुस्तकों से संबंधित एक अहम फैसला लिया है। अब बच्चों को श्रीमदभगवद गीता का पाठ पढ़ाया जाएगा। श्रीमदभगवद गीता (Shrimad Bhagavad Gita) के श्लोकों और संदर्भ को एनसीईआरटी (NCERT) की पाठ्य-पुस्तकों में शामिल किया जाएगा। देश की शिक्षा राज्यमंत्री अन्नपूर्णा देवी ने लोकसभा में पत्र लिखकर यह जानकारी दी।

केंद्र सरकार चाहती है कि छात्र भारतीय संस्कृति के बारे में सीखे। इसी के मद्देनजर यह फैसला किया गया है। शिक्षा राज्यमंत्री ने बताया कि NCERT की कक्षा छठी और सातवीं की किताबों में वेदों का ज्ञान और श्रीमदभगवद गीता के संदर्भ शामिल किए जाएँगे। वहीं, कक्षा 11 और 12 की पाठ्य-पुस्तकों में संस्कृत में इसके श्लोक शामिल किए जाएँगे।

अन्नपूर्णा देवी ने बताया कि श्रीमदभगवद गीता को पाठ्यक्रम में शामिल करने का फैसला विभिन्न मंत्रालयों, राज्यों, विभागों और केंद्र शासित प्रदेशों से मिले इनपुट के आधार पर किया गया है। इसके लिए NCERT ने काम भी शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा कि शिक्षा मंत्रालय द्वारा लिए गए फैसले से बच्चे भारतीय संस्कृति के बारे में जान सकेंगे।

अन्नपूर्णा देवी ने लोकसभा में बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) का पैरा 4.27 भारत के पारंपरिक ज्ञान के बारे में है, जिसमें सभी के कल्याण का प्रयास है। इसके साथ ही उन्होंने कहा, “अगर हमें इस शताब्दी में ज्ञान की शक्ति बनना है तो हमें अपनी विरासत को समझना होगा और दुनिया को काम करने के ‘भारतीय तरीके’ के बारे में सिखाना होगा।”

पाठ्य-पुस्तकों में श्रीमदभगवद गीता पढ़ाने के केंद्र सरकार के फैसले का कॉन्ग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने आलोचना की है। उनका कहना है कि भाजपा शिक्षा व्यवस्था का भगवाकरण करने की कोशिश कर रही है। कॉन्ग्रेस नेताओं ने यह भी कहा कि अगर भाजपा श्रीमदभगवद गीता को पाठ्यक्रम में शामिल कर रही है तो उसे अन्य धार्मिक पुस्तकों पर भी विचार करना चाहिए।

भारतीय संस्कृति और विरासत से बच्चों को अवगत कराने के संदर्भ में संसदीय पैनल ने देश के लिए बलिदान होने वाले पूर्वोत्तर के ‘गुमनाम स्वतंत्रता सेनानियों’ की कहानियों को भी एनसीईआरटी में शामिल करने की सिफारिश की थी।

संसदीय पैनल का कहना था कि छात्र भारत के समृद्ध इतिहास को जान सकें, इसके लिए स्कूली पाठ्य-पुस्तकों में स्वतंत्रता सेनानियों और देश के स्वतंत्रता संग्राम में उनकी भूमिका पर जोर दिया जाना चाहिए।