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हत्या से पहले दिलदार अंसारी के मामा और दोस्त ने गर्भवती जनजातीय महिला से किया था रेप, पहचान छिपाने के लिए उतार दी खाल: प्लास्टिक बिछा कर टुकड़े-टुकड़े किया

झारखंड के साहिबगंज के रिबिका मर्डर मामले में रूह कँपा देने वाली बातें सामने आई हैं। जाँच के दौरान यह बात सामने आई है कि आरोपितों ने शव की पहचान छिपाने के लिए उसका खाल तक उतार दिया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, हत्या से पहले दिलदार के मामा और उसके सहयोगी ने रिबिका के साथ बलात्कार भी किया था। इतना ही नहीं जाँच में यह बात भी सामने आई है कि हत्या के वक्त रिबिका गर्भवती थी।

दिलदार की दरिंदगी का शिकार रिबिका का अंतिम संस्कार कर दिया गया। इस मौके पर डिप्टी कमिश्नर रामनिवास यादव और एसपी अनुरंजन किस्पोट्टा भी मौजूद रहे। पुलिस के मुताबिक मामले में अब तक 10 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस की जाँच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है मामले में रोंगटे खड़े कर देने वाले खुलासे हो रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हत्या के समय रिबिका गर्भवती थी। दिलदार के मामा और उसके दोस्त ने रिबिका के क़त्ल से पहले उसके साथ जबरदस्ती भी की थी। इतने से भी उनका मन नहीं भरा तो हैवानों ने दरिंदगी की सारी हदें पार कर दीं। लाश की पहचान न हो सके इसके लिए उन्होंने खाल तक उतार दिया था।

पुलिस ने मामले पर रिपोर्ट्स आने के बाद ही अपना बयान देने की बात कही है। सूत्रों का दावा है कि आरोपितों ने गुनाह कबूल लिया है। बताया जा रहा है कि रिबिका के शौहर दिलदार अंसारी के मामा मोइनुद्दीन अंसारी और उसके दोस्त मैनुल अंसारी ने बलात्कार के बाद रिबिका की गला दबाकर हत्या कर दी। हत्या के बाद शव को मामा के दोस्‍त मैनुल अंसारी के घर ले जाया गया क्‍योंकि मोइनुद्दीन के घर पर लाश को बोटियों में काटने के लिए पर्याप्त जगह नहीं थी।

मैनुल के घर पर प्‍लास्टिक बिछाकर शव के टुकड़े किए गए। शव के टुकड़े करने के लिए जिन धारदार हथियारों का इस्तेमाल हुआ उनमें से कुछ बरामद हो चुकी हैं और कुछ की तलाश की जा रही है। रुबिका की बेदर्दी से हुई हत्‍या से उसके गाँव के लोगों में आक्रोश है। सभी आरोपितों की फाँसी की माँग कर रहे हैं।

आपको बता दें कि जनजातीय समाज की 22 वर्षीय रिबिका पहाड़िन नाम की एक महिला को मार कर उसके शव के टुकड़े अलग-अलग जगह फेंक दिए गए थे। माँस के लोथड़ों को कुत्ते निवाला बना रहे थे। रिबिका को उसके शौहर और रिश्तेदारों ने मौत के घाट उतार दिया। रिबिका और दिलदार दोनों की यह दूसरी शादी थी। कई वर्षों तक मिलने-मिलाने के बाद दोनों ने 10 दिनों पहले ही निकाह किया था।

हरियाणा से शुरू हुआ संगठन जिसके शागिर्द ISI के मुखिया भी, गोधरा-कंधार से भी कनेक्शन: जानें क्या है ‘तबलीगी जमात’, उमेश कोल्हे की हत्या में आया नाम

देश में कोरोना वायरस की पहली लहर के समय ‘तबलीगी जमात’ का नाम चर्चा में आया था। दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित इसके मुख्यालय मरकज में इसके कई लोग एक मस्जिद में छिपे हुए पकड़े गए थे। इन पर देश भर में कोरोना फैलाने का आरोप लगा था। इस्लामी तकरीर करने के नाम पर इनका आतंकी कनेक्शन अब कई घटनाओं में जगजाहिर है। हाल ही में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने उमेश कोल्हे हत्याकांड में चार्जशीट दाखिल की है।

NIA ने बताया है कि इससे जुड़े लोग इस्लामी कट्टरपंथी हैं। उनका ‘तबलीगी जमात’ से कनेक्शन है। इसमें 11 नाम हैं। मुख्य आरोपितों में से एक इरफान खान जमात का कट्टर समर्थक बताया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, NIA की चार्जशीट में बताया गया है कि कट्टरपंथियों का मकसद हत्या कर आतंक पैदा करना था। नूपुर शर्मा के समर्थन में व्हाट्सएप मैसेज फॉरवर्ड करने की वजह से कोल्हे उनके टारगेट पर थे। उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र के अमरावती में 22 जून 2022 को उमेश कोल्हे की हत्या कर दी गई थी।

तबलीगी जमात की शुरुआत 1927 में एक आंदोलन के रूप में हुई थी। मुहम्मद इलियास अल-कांधलवी ने भारत में हरियाणा के नूँह जिले के एक गाँव से इसे शुरू किया था। ‘तबलीगी जमात’ की पहली मरकज वर्ष 1941 में 25 हजार लोगों के साथ हुई थी। विश्व के अलग-अलग देशों में हर साल इसका वार्षिक कार्यक्रम आयोजित होता है, जिसे ‘इज्तेमा’ कहा जाता है।

आइए पहले ‘मरकज, तबलीगी, जमात’ के शाब्दिक अर्थ जान लेते हैं। तबलीगी का शाब्दिक अर्थ होता है, अल्लाह के संदेशों का प्रचार करने वाला। जमात मतलब, समूह और मरकज का अर्थ होता है बैठक के लिए इस्तेमाल की जाने वाली जगह। यानी, अल्लाह की कही बातों का प्रचार करने वाला समूह।

तबलीगी जमात ख़ुद के ग़ैर-राजनीतिक होने के दावे भी करता रहा है, भले ही इसका इतिहास कई आतंकी घटनाओं से जुड़ा हुआ है। पाकिस्तानी क्रिकेटर शाहिद अफरीदी से लेकर आईएसआई के प्रमुख रहे जावेद नसीर तक इसके अनुयायी रहे हैं। कई अन्य पाकिस्तानी सेलेब्रिटी भी तबलीगी जमात में शामिल हैं। हालाँकि, समुदाय विशेष में इस जमात को लेकर आपस में ही सिर-फुटव्वल चलती रहती है। सऊदी अरब में सुन्नी वहाबी उलेमाओं ने तो मुल्क में तबलीगी जमात द्वारा मजहबी उपदेश की गतिविधियाँ करने पर रोक तक लगा दी है। इसके लिए फतवा भी जारी किया गया था।

तबलीगी जमात की कई आतंकी घटनाओं में संलिप्तता

कोरोना आने से पहले भारत में बहुत कम लोग इस बारे में जानते थे। लेकिन न्यूयॉर्क टाइम्स, विकीलीक्स से लेकर भारत के ही कुछ पूर्व अनुसंधान और विश्लेषण विंग (RAW), आईबी अधिकारियों ने तबलीगी जमात की आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने की बात से पर्दा उठाया था। तबलीगी जमात का पाकिस्तान स्थित प्रतिबंधित आतंकी संगठनों जैसे हरकत-उल-मुजाहिदीन (HuM) के साथ एक लंबे समय तक संबंध रहा है। भारतीय ख़ुफ़िया विभाग (IB) के एक पूर्व अधिकारी और कुछ पाकिस्तानी विश्लेषकों के मुताबिक, हरकत-उल-मुजाहिदीन के मूल संस्थापक तबलीगी जमात के ही सदस्य थे। इसी हरकत-उल-मुजाहिदीन (HuM) के आतंकवादियों ने जम्मू कश्मीर में कई लोगों की हत्याएँ की है।

न्यूयॉर्क टाइम्स में 14 जुलाई, 2003 को प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, एफबीआई के तत्कालीन वाशिंगटन फील्ड कार्यालय के आतंकवाद निरोधी प्रभाग के विशेष एजेंट माइकल जे हेइम्बच (Michael J. Heimbach) ने कहा था, ”हमने अमेरिका में तबलीगी जमात की बड़े स्तर पर मौजूदगी पाई है और हमने यह भी पाया है कि आतंकी संगठन अलकायदा भर्ती के लिए इनका इस्तेमाल करता है।”

तबलीगी जमात पर 2002 में गोधरा में 59 हिंदू कार सेवकों को ट्रेन में जिंदा जलाने के मामले में भी शामिल होने के आरोप हैं। उल्लेखनीय है कि हिंदुओं को साबरमती एक्सप्रेस में जिंदा जलाने की इस घटना के कारण गुजरात में सांप्रदायिक दंगे भड़के थे, जिसमें कई लोगों की जान चली गई। इसी तरह से कांधार कांड में भी जमात की भूमिका सामने आई थी। नेपाल के काठमांडू से नई दिल्ली के लिए उड़ान भरने वाले इंडियन एयरलाइंस के विमान को 24 दिसंबर, 1999 को हाईजैक कर अफगानिस्तान के कंधार ले जाया गया था। बाद में तीन आतंकवादियों की रिहाई के बदले विमान में सवार 170 लोगों को छोड़ा गया था। ये आतंकवादी मसूद अजहर अल्वी, सैयद उमर शेख और मुश्ताक अहमद जरगर थे।

‘विदेशी माता से पैदा हुआ पुत्र कभी राष्ट्रभक्त नहीं हो सकता, प्रॉब्लम DNA का है’: मनोज मुंतशिर ने राहुल गाँधी को लताड़ा, भारतीय सेना का किया था अपमान

मध्य प्रदेश के भोपाल में आयोजित एक कार्यक्रम में प्रसिद्ध गीतकार मनोज मुंतशिर ने ब‍िना नाम ल‍िए ही राहुल गाँधी पर निशाना साधा है। मनोज मुन्तशिर ने कहा, “चाणक्य ने कहा था कि विदेशी माता से उत्पन्न पुत्र कभी राष्ट्र भक्त नहीं हो सकता। समस्या डीएनए की है।”

भोपाल के रवींद्र भवन में आयोजित ‘मैं भारत हूँ’ विषय पर मनोज मुंतशिर अपनी बात रख रहे थे। इस दौरान उन्होंने राहुल गाँधी के सेना पर दिए बयान का जिक्र किया। मनोज ने कहा, “एक गैर-ज‍िम्‍मेदार राजनेता ने कहा कि हमारे देश के सैन‍िक चीन के सैन‍िकों से प‍िट गए। कोई इतनी शर्मनाक भाषा का इस्‍तेमाल कैसे कर सकता है, पर मैं उसे क्या दोष दूँ? मैंने चाणक्य को पढ़ा है, उनका बयान है, मैं आचार्य व‍िष्‍णुगुप्‍त चाणक्‍य के बयान को कोट कर रहा हूँ – व‍िदेशी माता से पैदा हुआ पुत्र कभी राष्‍ट्रभक्‍त नहीं हो सकता।”

उन्होंने आगे कहा, “साथियों, प्रॉबलम डीएनए का है – कोई कुछ नहीं कर सकता है इसमें.. हम तो भारत माता कहते हैं ना, हम जब भारत माता कहते हैं तो फिर माँ से प्यार करना थोड़ी ना सीखना है।” मनोज मुंतशिर ने कहा कि भारत माता कह दिया तो हम सदा के लिए ऋणी हो गए उस माँ के।

मनोज मुंतशिर के इस बयान के बाद जहाँ कई भाजपा नेता उनका समर्थन कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ उन्हें कॉन्ग्रेसियों की आलोचना का शिकार होना पड़ रहा है।

बता दें कि 9 द‍िसंबर, 2022 को अरुणाचल प्रदेश के तवांग में भारतीय सैनि‍कों और चीनी सैनि‍कों के बीच ह‍िंसक झड़प हुई थी। झड़प के दौरान भारतीय सैन‍िकों ने घुसपैठ कर रहे लगभग 300 चीनी सैन‍िकों को खदेड़ द‍िया था। इसी घटना का ज‍िक्र करते हुए शुक्रवार (16 दिसंबर, 2022) को राजस्‍थान में राहुल गाँधी ने केंद्र सरकार पर न‍िशाना साधते हुए कहा था कि चीनी सैन‍िक हमारे जवानों को अरुणाचल प्रदेश में पीट रहे हैं।

राहुल गाँधी के इस बयान के बाद देश भर में उनकी आलोचना हुई थी। 19 दिसंबर 2022 को विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी राहुल को लोकसभा में करारा जवाब दिया। जयशंकर ने कहा कि राजनीतिक आलोचनाओं का हमेशा स्वागत है, लेकिन अपने जवानों का अपमान नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सेना के लिए ‘पिटाई’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल करना ठीक नहीं है।

विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा, “हमें प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से अपने जवानों की आलोचना नहीं करनी चाहिए। हमारे जवान यांग्त्से में 13 हजार फीट की ऊँचाई पर खड़े होकर हमारी सीमा की रखवाली कर रहे हैं। उनका सम्मान और उनकी सराहना की जानी चाहिए।”

‘खराब प्रबंधन का विरोध किया तो कॉलेज ने लगवा दिया SC/ST एक्ट’: पुलिस से क्लीन चिट के बाद भी मेडिकल छात्रा को नहीं दे रहे हॉस्टल, कह रहे – माँ-बाप माँगें माफ़ी

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के एक मेडिकल कॉलेज की छात्रा ने कॉलेज प्रबंधन के खिलाफ आवाज उठाने पर खुद को प्रताड़ित किए जाने का आरोप लगाया है। पीड़िता के मुताबिक, उस पर पैसे दे कर SC/ST का झूठा केस भी दर्ज करवाया गया, जिसमें जाँच के बाद उसे क्लीन चिट मिली। छात्रा ने अपने भविष्य और करियर का वास्ता देते हुए कॉलेज प्रशासन से खुद पर रहम करने की माँग की है।

डॉ सोनाली द्वारा जारी किए गए एक बयान के मुताबिक, वो बाराबंकी स्थित ‘मेयो इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज’ में साल 2017-18 बैच की इंटर्न हैं। सोनाली के अनुसार, उनके बैच ने कॉलेज के ख़राब प्रबंधन के खिलाफ 18 जून, 2022 को एक विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया था। आरोप है कि इस विरोध प्रदर्शन में सोनाली का दिया बयान मीडिया और सोशल मीडिया में वायरल होने की वजह से कॉलेज प्रशासन ने उन्हें प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। बकौल सोनाली, इस प्रताड़ना के पहले चरण में उन्हें 4 सितम्बर, 2022 को 60 दिनों के लिए सस्पेंड कर दिया गया।

सस्पेंशन का आदेश

सोनाली के अनुसार, ऐसा बाकी छात्रों पर दबाव बनाने के लिए किया गया था। हालाँकि, कॉलेज प्रबंधन ने सोनाली सिंह को सस्पेंड करने की वजह गेट पर तैनात गार्डों से बदतमीजी को बताया है। प्रोफेसर एन के मोहिंद्रू द्वारा जारी आदेश की मानें तो सोनाली का व्यवहार कॉलेज के नियमों के हिसाब से अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है। इस आदेश में सोनाली पर पूर्व में भी गलतियाँ करने का आरोप लगाया गया है। 27 सितम्बर को DGME (डॉयरेक्टर जनरल मेडिकल एजुकेशन एन्ड ट्रेनिंग) ने उनका सस्पेंशन रद्द कर दिया गया।

DGME आदेश

बताया गया है कि इसके बाद सोनाली लगातार अपनी पढ़ाई पूरी करने के लिए ‘मेयो मेडिकल कॉलेज’ के चक्कर लगा रही है, लेकिन उन्हें कोई जवाब नहीं मिला। सोनाली का कहना है कि उनका निलंबन भी 5 नवम्बर, 2022 को खत्म हो चुका है, लेकिन उन्हें फिर से पढ़ने की अनुमति अभी तक नहीं दी गई है।

सोनाली द्वारा भेजा गया ईमेल

बकौल सोनाली, कॉलेज प्रशासन ने उनसे कहा है कि वो पहले 8,62,500 रुपए दें, उसके बाद उनकी माँग पर विचार किया जाएगा। आरोप यह भी है कि कॉलेज प्रबंधन ने न सिर्फ सोनाली, बल्कि उनके माता-पिता से भी लिखित माफ़ी माँगने को कहा है। हालाँकि, कॉलेज प्रशासन द्वारा दिए गए फीस स्ट्रक्चर में कुल देय राशि 2 लाख 50 हजार रुपए है। इस राशि को पेनाल्टी में छूट और एक अन्य राशि को एडजस्ट कर के अंतिम रूप दिया गया है।

फीस लिस्ट

सोनाली ने कॉलेज प्रशासन द्वारा पैसे माँगे जाने को लालच करार देते हुए खुद पर मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाया है। उन्होंने अपने माता-पिता से माफ़ी माँगने के लिए कहे जाने को भी गलत व्यवहार करार दिया। सोनाली ने कहा कि उनके ऊपर कॉलेज प्रबंधन ने ही दबाव बनाने के लिए SC/ST का फर्जी केस दर्ज करवाया था, जिसमें पुलिस जाँच के बाद वो बेदाग़ बरी हुई हैं। इस FIR की साजिश में सोनाली ने मधुलिका मैडम (मेडिकल कॉलेज की चेयरपर्सन) और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के OSD के पी सिंह को भी शामिल बताया है।

क्या था SC/ST की FIR में और क्या निकला निष्कर्ष

सोनाली के खिलाफ यह FIR कॉलेज में ही सुरक्षाकर्मी के तौर पर तैनात मोनिका नाम की एक दलित महिला ने दर्ज करवाया था। मोनिका ने सोनाली पर आरोप लगाया था कि 24 जुलाई, 2022 को सोनाली अपने कमरे में एक जूनियर छात्रा के साथ नशा कर रही थी, जिसे रोकने पर उसने जातिसूचक शब्द बोले और मारपीट की। हालाँकि, 24 जुलाई को कथित तौर पर घटी इस घटना की शिकायत 30 सितम्बर, 2022 को पुलिस में दर्ज करवाई गई थी। FIR कोतवाली नगर बाराबंकी में दर्ज हुई थी।

एफआईआर की कॉपी

इस FIR की जाँच बाराबंकी पुलिस के डिप्टी SP सिटी ने की थी। उन्होंने 17 नवम्बर, 2022 को इस केस में आरोपों के ठोस सबूत न होने की रिपोर्ट लगाते हुए केस को बंद कर दिया था। पुलिस के मुताबिक, घटना के दिन की CCTV माँगे जाने पर कैमरे खराब बताए गए।इसी के साथ जिस चोट का आरोप सोनाली पर लगाया गया था, उसका कोई मेडिकल परीक्षण भी नहीं करवाया गया था।

क्लोजर रिपोर्ट

अब सोनाली को नहीं मिलेगा हॉस्टल

कॉलेज प्रशासन ने लिखित तौर पर सोनाली को फिर से इंटर्नशिप शुरू करवाने के लिए कुछ शर्तें रखी हैं। सोनाली को सस्पेंड करने वाले प्रोफेसर एन के मोहिंद्रू ने 21 नवम्बर, 2022 को एक सोनाली को सम्बोधित करते हुए एक पत्र जारी किया है। इस पत्र में उन्होंने सोनाली को फिर से इंटर्नशिप करने के लिए आमंत्रित किया है। हालाँकि सोनाली को अब हॉस्टल न मिलने और ड्यूटी के दौरान मोबाइल प्रयोग न करने की हिदायत दी गई है।

आधिकारिक पत्र में यह भी कहा गया है कि सोनाली को इंटर्नशिप फिर से शुरू करने के लिए पहले अपने बकाया फीस आदि का भुगतान करने के साथ लिखित तौर पर अंडरटेकिंग जमा करना होगा।

नोटिस

FIFA वर्ल्ड कप जीता अर्जेंटीना ने, लेकिन ट्रॉफी जाएगी स्विट्जरलैंड! जिस ट्रॉफी को चूम रहे थे, उसे अपने देश नहीं ले जा पाएगी मेसी की टीम

रविवार (18 दिसंबर, 2022) को फीफा विश्व कप (FIFA World Cup) के फाइनल में अर्जेंटीना ने फ्रांस को हराकर विश्व विजेता का खिताब अपने नाम किया। आपने विश्व कप जीतने के बाद लियोनेल मेसी (Lionel Messi) को फीफा ट्रॉफी उठाते हुए देखा होगा। लेकिन, क्या आप जानते हैं कि मेसी यह ट्रॉफी अपने घर नहीं ले जा सकते।

फीफा ट्रॉफी के इतिहास को देखें तो, विजेता को साल 1930 से 1970 तक ऑफिशियल ट्रॉफी दी जाती थी। फीफा के तीसरे अध्यक्ष रहे जूल्स रिमेट के नाम पर इस ट्रॉफी को जूल्स रिमेट ट्रॉफी भी कहा जाता था। रिमेट ने ही साल 1928 में फुटबॉल विश्व कप की योजना बनाई थी। आज हम जो ट्रॉफी देख रहे हैं, वह 48 साल पुरानी है। दरअसल, यह ट्रॉफी साल 1974 से ट्रेंड में आई।

दरअसल, फीफा विश्वकप विजेता को ऑफिशियल या ओरिजिनल ट्रॉफी की जगह एक ऐसी ट्रॉफी दी जाती है जो ऑफिशियल ट्रॉफी की तरह ही दिखती है। यह एक डमी ट्रॉफी होती है जो ब्रॉन्ज की होती है और उस पर सोने की परत की जाती है। इस ट्रॉफी को 18 कैरेट सोने से तैयार किया जाता है, जिसका वजन 6 किलो से ज्यादा होता है। इस ट्रॉफी को विश्व कप ट्रॉफी की जगह विश्व कप विजेता ट्रॉफी कहा जाता है।

क्यों नहीं दी जाती असली ट्रॉफी

दरअसल, साल 1974 से पहले तक फीफा का नियम यह था कि जिस देश ने तीन बार विश्व कप जीता हो वह ओरिजिनल ट्रॉफी रख सकता था। यहाँ तक कि साल 1970 में तीसरी बार फीफा विश्व कप जीतने वाली ब्राजील को भी ऑरिजिनल जूल्स रिमेट ट्रॉफी दी गई थी। हालाँकि, अब जूल्स रिमेट ट्रॉफी की जगह रेप्लिका या डमी ट्रॉफी देने के पीछे की वजह यह है कि इंग्लैंड में हुए साल 1966 के विश्व कप में फीफा ट्रॉफी चोरी हो गई थी। हालाँकि, फिर इस ट्रॉफी को एक कुत्ते ने लंदन में ही ढूँढ़ निकाला था।

इसके बाद साल 1974 के फीफा विश्व कप से असली ट्रॉफी की जगह डमी ट्रॉफी देने का नियम शुरू किया गया था। हालाँकि, फीफा विश्व कप विजेता को जीत के बाद जश्न मनाने के लिए यह ट्रॉफी दी जाती है। लेकिन, इसके बाद यह ट्रॉफी स्विटरजरलैंड के ज्यूरिख में स्थित फीफा हेडक्वार्टर में रख दी जाती है।

1983 में भी चोरी हुई थी ट्रॉफी

ब्राजील ने साल 1974 में फीफा जीता था। यह ट्रॉफी ब्राजीली फुटबॉल फेडरेशन के अध्यक्ष ने रियो डी जेनेरो में एक बुलेटप्रूफ काँच की अलमारी में रखी थी। लेकिन, 19 दिसंबर, 1983 को चोरों ने हथौड़े से उस अलमारी का पिछला हिस्सा तोड़ कर ट्रॉफी निकाल ली। इस मामले में 4 लोगों को गिरफ्तार किया गया। उन पर, मुकदमा भी चला, लेकिन ट्रॉफी नहीं मिली। ऐसा कहा जाता है कि चोरों ने इस ट्रॉफी को पिघला कर इसका सोना बेंच दिया था।

पंचायत ने नहीं दी इजाजत, फिर भी गुजरात के उस गाँव में बना रहे चर्च जहाँ कोई ईसाई नहीं: ग्रामीणों ने कलेक्टर से की शिकायत

गुजरात के वलसाड जिले के कपराडा तालुका के उस गाँव में भी चर्च का निर्माण किया जा रहा, जहाँ सरकारी दस्तावेजों में कोई ईसाई नहीं है। ऐसा पंचायत के फैसले को दरकिनार कर किया जा रहा है। सरपंच सहित स्थानीय लोगों ने कलेक्टर कार्यालय से इसकी​ शिकायत की है। उन पर सख्त कार्रवाई की माँग की है जो अवैध तरीके से चर्च निर्माण कर रहे हैं।

स्थानीय लोगों की मानें तो कपराडा तालुका के शाहुदा गाँव में कोई भी व्यक्ति ईसाई नहीं है। गाँव के कार्यालय में भी किसी का पंजीकरण ईसाई के तौर पर नहीं है। बावजूद इसके ग्राम पंचायत की अवहेलना कर चर्च का निर्माण कराया जा रहा है। ग्रामीणों ने कलेक्टर ऑफिस को जो शिकायती पत्र भेजा है, उसकी प्रति ऑपइंडिया के पास भी है।

शिकायत के अनुसार, इसके पीछे वन विभाग में कार्यरत चंदरभाई चौधरी है। वह ईसाई होने का दावा करता है। हालॉंकि सरकारी दस्तावेजों में उसने इसका पंजीकरण नहीं करवा रखा है। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत की अनुमति नहीं होने के बावजूद चंदरभाई चर्च का निर्माण करवा रहा है। अन्य ग्रामीण इसका विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि प्रशासन ने समय रहते उचित कार्रवाई नहीं की तो अप्रिय घटना भी घट सकती है। इसी स्थिति का जिम्मेदार प्रशासन होगा।

स्थानीय निवासियों का दावा है कि क्षेत्र के कम पढ़े-लिखे लोगों को लालच देकर धर्मांतरण की कोशिश की जाती है। गरीबों को ईसाई धर्म अपनाने के लिए लालच दिए जा रहे हैं। उन्हें हिंदू देवी-देवताओं के बारे में गलत और अपमानजनक बातें बता कर पथ भ्रष्ट करने की कोशिश हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि इन्हीं प्रलोभनों के दम पर चर्च गाँवों में फैल रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि ज्यादातर चर्च का निर्माण अवैध रूप से सरकारी और वन विभाग की जमीनों पर किया गया है।

स्थानीय निवासियों ने इस तरह के चर्च के निर्माण के लिए की जाने वाली फंडिंग को लेकर भी चिंता व्यक्त की है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार शाहुदा गाँव में इसी साल जुलाई में सामूहिक धर्मांतरण किया गया था। 20 परिवारों के 90 लोगों ने ईसाई धर्म अपना लिया। पता चला है कि इस धर्मांतरण के लिए प्रशासन की अनुमति नहीं ली गई थी। इस घटना के बाद ग्राम पंचायत की ओर से कपराडा के पीएसआई को लिखित शिकायत भी की गई थी। ग्रामीणों का आरोप है कि अभी तक इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

इससे पहले भी तापी जिले के सोनगढ़ गाँव में एक प्राचीन हिंदू मंदिर की जगह चर्च बनाए जाने की खबर सामने आई थी। नवरात्रि के मौके पर जब हिंदू पूजा करने के लिए प्राचीन मंदिर पहुँचे, तो उस समय ईसाइयों की भीड़ भी वहाँ पहुँच गई और हंगामा कर दिया। यही नहीं, उन्होंने हिंदुओं को पहाड़ी पर भी जाने से रोका। जानकारी के मुताबिक प्राचीन हिंदू मंदिर को ध्वस्त कर उस स्थान पर स्थानीय ईसाइयों ने चर्च (Church) बना दिया था। उस चर्च का नाम उन्होंने मरियम माता का मंदिर (Mariam Mata’s Temple) रखा था। मौके पर पुलिस के पहुँचने के बाद हिंदू माता की पूजा कर पाए थे।

नूपुर शर्मा का समर्थन करने पर हुई थी उमेश कोल्हे की हत्या, अब गवाह को मिल रही धमकी: ‘दोस्त’ आदिल पर भी शक, माफ़ी वाला वीडियो बनवाया

महाराष्ट्र के अमरावती में उमेश कोल्हे हत्याकांड (Umesh Kolhe Murder) के एक गवाह ने बड़ा खुलासा किया है। उसने मंगलवार (19 दिसंबर, 2022) को दावा किया कि सोशल मीडिया पर भाजपा की पूर्व निलंबित प्रवक्ता नूपुर शर्मा (Nupur Sharma) का समर्थन करने के बाद से उसे इस्लामवादियों द्वारा जान से मारने की धमकियाँ मिल रही हैं। इलेक्ट्रॉनिक सामानों की दुकान चलाने वाले गवाह ने बताया कि उसने नूपुर शर्मा के समर्थन में एक व्हाट्सएप ग्रुप में मैसेज किया था। लेकिन, जल्द ही उसने उस मैसेज को यह सोचकर डिलीट कर दिया की कहीं इससे कोई बड़ा विवाद ना हो जाए। हालाँकि, उसके मैसेज डिलीट करने से पहले ही छह लोग उसे पढ़ चुके थे।

बताया जा रहा है कि इसके बाद से गवाह को लगातार अज्ञात नंबरों से जान से मारने की धमकी भरे कॉल आने लगे। धमकी देने वाले लोगों ने उसे बाद में माफी माँगने वाला वीडियो बनाने के लिए भी कहा। उमेश कोल्हे की हत्या के बाद से गवाह काफी डरा हुआ है। उसने लगातार मिल रही धमकियों के संबंध में पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है।

गवाह ने अपने बयान में कहा कि उसे आदिल नाम के एक परिचित का भी फोन आया था, जिसने उससे पोस्ट के बारे में पूछताछ की थी। इस पर गवाह ने आदिल से कहा कि उसने यह पोस्ट तुरंत हटा दी थी। इसे शेयर करने के पीछे उसका कोई गलत इरादा नहीं था। कुछ समय बाद उसके एक अन्य दोस्त ने उसकी तस्वीर और दुकान की डिटेल के साथ एक स्क्रीनशॉट भेजा, जिसमें ‘बॉयकॉट’ लिखा हुआ था। उसने पूछा कि लोग तुम्हारा और तुम्हारी दुकान का बहिष्कार करने की माँग क्यों कर रहे हैं?

गवाह ने संकेत दिया कि उसे अज्ञात व्यक्तियों के फोन आए और उन्होंने उससे 30 सेकंड का माफी माँगने वाला वीडियो बनाने के लिए कहा। उन्होंने उसे धमकी दी कि अगर उसने ऐसा नहीं किया, तो वे उसके घर पर आ जाएँगे। बाद में उन्हें पता चला कि अमरावती के एक अन्य व्यवसायी को भी नूपुर शर्मा के समर्थन में उनके फेसबुक पोस्ट के लिए मुस्लिम समुदाय द्वारा धमकाया गया था।

कई रिपोर्टों में उल्लेख किया गया है कि अमरावती के तीन और निवासियों श्रीगोपाल चंदूलाल राठी, विशाल राजेश बहाड़ और जय कुमार अछड़ा को भी कोल्हे की हत्या से पहले नूपुर शर्मा का समर्थन करने के लिए कट्टरपंथी इस्लामवादियों ने धमकी दी थी।

गौरतलब है कि राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) ने मंगलवार (20 दिसंबर 2022) को खुलासा किया कि अमरावती के फार्मासिस्ट उमेश कोल्हे की हत्या करने वाले 11 आरोपित इस्लामी कट्टरपंथी हैं। उनका तबलीगी जमात से कनेक्शन है। अधिकारियों ने मुख्य आरोपितों में से एक इरफान खान को जमात का कट्टर समर्थक बताया गया है। 16 दिसंबर, 2022 को NIA ने कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की थी। NIA की चार्जशीट में बताया गया है कि कट्टरपंथियों का मकसद हत्या कर आतंक पैदा करना था। नूपुर शर्मा के समर्थन में व्हाट्सएप मैसेज फॉरवर्ड करने की वजह से कोल्हे उनके टारगेट पर थे।

‘AAP को दिए ₹60 करोड़’: पेशी पर कोर्ट आए सुकेश चंद्रशेखर का दावा, जेल से लिखी चिट्ठी में भी केजरीवाल के मंत्री को पैसे देने की कही थी बात

महाठग सुकेश चंद्रशेखर ने आम आदमी पार्टी को 60 करोड़ रुपए देने की बात कही है। उसने यह दावा 20 दिसंबर 2022 को किया। पटियाला हाउस कोर्ट में पेशी के बाद जब उसे ले जाया जा रहा था तो उसने पत्रकारों के सवाल के जवाब में इस रकम का उल्लेख किया। उसके जवाब का वीडियो सोशल मीडिया में वायरल है।

इससे पहले उसने जेल से चिट्ठी लिखकर भी आप को पैसे देने की बात कही थी। उसने मनी लॉन्ड्रिंग केस में जेल में बंद दिल्ली के मंत्री सत्येंद्र जैन को 10 करोड़ रुपए ‘प्रोटेक्शन मनी’ के तौर पर देने के आरोप लगाए थे। दिल्ली के उपराज्यपाल को भेजी चिट्ठी में कहा था कि जैन उससे मिलने तिहाड़ जेल में भी आते थे। इसके अलावा AAP को 50 करोड़ रुपए का भुगतान करने की बात कही थी, क्योंकि कथित तौर पर जैन ने उसे दक्षिण भारत में पार्टी का बड़ा नेता बनाने का वादा किया था।

राउज एवेन्यू कोर्ट में सीबीआई जज के सामने पेश होने के बाद न्यूज 18 से बात करते हुए सुकेश ने कहा है, “मैंने आम आदमी पार्टी को 60 करोड़ रुपए दिए थे। सब कुछ लिखित रूप में दे दिया हूँ।” उसके वकील अनंत मलिक ने मीडिया से बात करते हुए कहा है, “सुकेश ने आम आदमी पार्टी को 60 करोड़ रुपए देने की शिकायत दिल्ली के उपराज्यपाल से की थी। उपराज्यपाल द्वारा बनाई गई हाई पावर कमेटी ने जेल में जाकर उसके बयान लिए हैं। कमेटी का भी मानना है कि आरोप काफी गंभीर हैं इसकी जाँच होनी चाहिए।”

इसके अलावा, सुकेश ने अदालत में कहा है कि वह अरविंद केजरीवाल के खिलाफ गवाह है, इसलिए उसे परेशान किया जा रहा है। सुकेश ने कहा है, “मुझे जेल अधिकारियों द्वारा परेशान किया जा रहा है। मैं दिल्ली के मुख्यमंत्री के खिलाफ गवाह हूँ। अब वे मुझ पर दबाव बना रहे हैं। मुझे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है। मुझे और अधिक प्रताड़ित नहीं किया जाना चाहिए।”

गौरतलब है कि सुकेश दिल्ली की मंडोली जेल में बंद है। आप को पैसा देने का दावा करने के बाद उपराज्यपाल को लिखी एक चिट्ठी में उसने जेल में अपनी जान को खतरा बताया था। यह भी कहा था कि उसकी पत्नी का उत्पीड़न हो रहा है। उसने जेल के भीतर पिटाई और शिकायत वापस लेने के लिए आप नेताओं की ओर से धमकी मिलने का आरोप लगाया था।

एक चिट्ठी में उसने आप को पैसे दिए जाने की CBI जाँच और FIR दर्ज करने की माँग की थी। पैसे के लेन देन में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की संलिप्तता को उजागर करते हुए दावा किया था कि 50 करोड़ रुपए मिलने के बाद वे उसके साथ डिनर करने दिल्ली के हयात होटल आए थे।

मंगलवार (20 दिसंबर 2022) को दो अलग-अलग मामलों में दिल्ली के राउज एवेन्यू और पटियाला हाउस कोर्ट में सुकेश चन्द्रशेखर को पेश किया गया था। राउज एवेन्यू कोर्ट में वह AIADMK के दो पत्ती चुनाव चिन्ह मामले में चुनाव आयोग को 50 करोड़ रुपए की घूस देने के मामले में पेश हुआ। वहीं, पटियाला हाउस कोर्ट में 200 करोड़ रुपए की ठगी के मामले में पेश हुआ।

ऑटो ड्राइवर इरफान ने प्रेमजाल में फँसाया, प्राइवेट वीडियो सोशल साइट पर डाला: 11वीं की छात्रा ने की सुसाइड, गाजियाबाद का मामला

दिल्ली से सटे गाजियाबाद के खोड़ा कॉलोनी में एक छात्रा ने आत्महत्या कर ली है। 11वीं में पढ़ने वाली इस छात्रा का प्राइवेट वीडियो इरफान ने सोशल मीडिया पर डाल दिया था। इरफान से उसकी दोस्ती थी। इससे आहत छात्रा ने जान सोमवार (19 दिसंबर 2022) की रात जान दे दी।

पीड़ित परिवार की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। आरोपित फरार है। इस घटना को लेकर हिंदू संगठनों ने रोष जताया है। रिपोर्ट के अनुसार वीडियो सोशल मीडिया पर डाले जाने के बाद से छात्रा का पूरा परिवार सदमे में था। बताया जाता है कि इरफान ने छात्रों को प्रेमजाल में फँसाकर उसके साथ अश्लील कृत्य करते हुए वीडियो बनाया था।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार छात्रा ने अपने पिता को बताया था कि इरफान उसे परेशान करता है। इसके बाद 17 दिसंबर की शाम वह अपने पिता के साथ खोड़ा थाने भी गई थी। छात्रा के पिता ने आरोप लगाया था कि इरफान उनकी बेटी को स्कूल से आते-जाते परेशान करता है। बताया जा रहा है कि पुलिस ने उनकी शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया।

वहीं हिंदू संगठनों से जुड़े लोगों ने आरोपित के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग की है। इरफान और उसके साथी ऑटो चलाने का काम करते हैं। ये लोग मोहल्ले की अन्य लड़कियों का भी पीछा कर और उन्हें परेशान करते रहे हैं। गाजियाबाद के एसपी स्वतंत्र कुमार सिंह ने बताया है, “आरोपित की तलाश में पुलिस की 6 टीमों का गठन किया है। जल्द ही आरोपी युवक को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। छात्रा के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।”

अस्पताल में बेड नहीं, कब्रिस्तान में वेटिंग: 90 दिन में चीन की 60% आबादी के कोरोना+ होने की आशंका, बीजिंग में भी अंतिम संस्कार के लिए लगी लाइन

चीन में जीरो कोविड पॉलिसी में ढील दिए जाने के बाद हालात बेकाबू हो गए हैं। रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि चीन में कोरोना बहुत ही तेजी के साथ फैल रहा है। इतना ही नहीं भारी संख्या में लोगों की मौत भी हो रही है। राजधानी बीजिंग और शंघाई जैसे प्रमुख शहरों के अस्पताल कोरोना के मरीजों से भर चुके हैं। अनुमान लगाया जा रहा है कि बीजिंग की 70 प्रतिशत आबादी कोरोना वायरस से इन्फेक्टेड है।

एपिडेमोलॉजिस्ट (महामारी विशेषज्ञ) एरिक फीगल डिंग ने दावा किया है कि अगले 90 दिनों में चीन के 60 प्रतिशत लोग और पृथ्वी की 10 प्रतिशत आबादी कोरोना संक्रमित हो सकती है। उन्होंने लाखों लोगों के मौत का पूर्वानुमान भी लगाया है। एरिक ने ट्विटर पर चीन के अस्पताल का वीडियो शेयर किया। इस वीडियो में अस्पताल के वार्ड में भर्ती मरीजों और गलियारों में पड़े लाश दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने लिखा यह तो बस शुरुआत है।

आपको बता दें कि साल 2021 में कोरोना विस्फोट को लेकर उनका दावा सही साबित हुआ था। उन्होंने दावा किया है कि चीन में तेजी से बढ़ने कोरोना के मामलों की वजह से सभी लोगों का पीसीआर टेस्ट करना मुश्किल हो रहा है। ऐसे में चीन और दुनिया पर एक बार फिर से कोरोना संक्रमण का खतरा मंडरा रहा है। शुरुआत से ही चीन अपने यहाँ कोरोना से हुई मौतों को छिपाता रहा है। चीन की सरकार ने सोमवार को बीजिंग में कोरोना से 2 लोगों की मौत की बात स्वीकार की है।

हालाँकि, दावा किया जा रहा है कि बीजिंग में मरने वालों की तादाद अचानक बढ़ने लगी है और लगातार अंतिम संस्कार किया जा रहा है। एरिक फीगल डिंग का दावा है कि बीजिंग के मुर्दाघर भरे हुए हैं और 2 हजार शव अंतिम संस्कार की प्रतीक्षा में हैं।

एरिक फीगल डिंग ने कहा कि, चीनी कम्युनिस्ट पार्टी ने बढ़ते मरीजों की वजह से यहाँ तक कह दिया है कि, “जिसे भी संक्रमित होना है, संक्रमित होने दें, जिसे मरना है, उसे मरने दें। ज्यादा संक्रमण का मतलब है ज्यादा मौत, फिर जल्दी पीक आएगा और फिर जल्दी ही उत्पादन शुरू होगा।”

एरिक ने एक अन्य ट्वीट में दावा किया कि चीन के शहरों में बुखार और दर्द की दवा खत्म हो रही है। उन्होंने दावा किया कि झू हाई शहर में लोग बुखार की दवा खरीदने के लिए फैक्ट्री तक पहुँच गए।

दरअसल, चीन की ‘ज़ीरो कोविड पॉलिसी’ का स्थानीय लोग जोर-शोर से विरोध कर रहे थे। इसके बाद चीन ने जीरो कोविड पॉलिसी में ढील देने का निर्णय लिया। साथ ही चीन ने लोगों से जहाँ तक संभव हो घर में रहने की अपील की थी। एपिडेमोलॉजिस्ट एरिक ने चीन में अचानक कोरोना के बढ़ते मामलों की प्रमुख वजहों में चीन में एंटी कोरोना वैक्सीन को ठहराया है। उनका कहना है कि कोरोना को रोकने में चीनी वैक्सीन नाकाम रही है। जिससे कोरोना के साथ उसके नए वैरिएंट ओमिक्रॉन को बढ़ने में मदद मिल रही है। बता दें कि चीन में ओमीक्रोन के सब वेरिएंट BF.7 और BA.5 ने कहर बरपाया हुआ है।