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डरने का नहीं, हिंदुओं को सुरक्षित बसाने का समय है: कश्मीर में आतंकियों की कमर तोड़ने के लिए उठाने होंगे और कड़े कदम, अब्दुल्ला-मुफ्ती से दूर रहना होगा

दुर्दांत आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैय्यबा के कुख्यात मुखौटे ‘द रेसिस्टेंस फ्रंट’ (TRF) ने कुछ दिन पहले प्रधानमंत्री पुनर्वास पैकेज के तहत घाटी में कार्यरत 56 कश्मीरी अल्पसंख्यकों (गैर-मुस्लिमों) की सूची जारी करते हुए उन्हें धमकी दी थी। उसने पिछले सप्ताह फिर से ऐसे ही 10 और लोगों की सूची जारी की है। इससे पहले भी यह आतंकी संगठन ‘राइजिंग कश्मीर’ नामक अखबार में काम करने वाले आठ पत्रकारों की सूची जारी करके उन्हें धमका चुका है। TRF यह कारगुजारियाँ ‘कश्मीर फाइट्स’ नामक अपने ऑनलाइन मुखपत्र के माध्यम से करता है। TRF के द्वारा जारी सूची में कश्मीरी अल्पसंख्यकों के नाम के साथ-साथ उनके नए और पुराने कार्यस्थलों का पूरा विवरण है। यह तथ्य सर्वाधिक चौंकाने वाला और चिंताजनक है।

यह सूची जारी होने के बाद से कश्मीरी विस्थापितों के जम्मू-कश्मीर पीपुल्स फोरम, कश्मीरी पंडित संघर्ष समिति और पनुन कश्मीर जैसे तमाम संगठन इन कर्मियों की सुरक्षा की माँग कर रहे हैं। कुछेक महीने पहले हुई टारगेट किलिंग की घटनाओं के बाद से प्रधानमंत्री राहत पैकेज के तहत नौकरी पाए कश्मीरी विस्थापित काफी संख्या में कश्मीर से वापस जम्मू लौट आए हैं और खुद की जम्मू में नियुक्ति की माँग कर रहे हैं। उन्हें पिछले लगभग आठ माह से वेतन भी नहीं मिला है।

दरअसल, यह सूची जम्मू-कश्मीर में हालात को सामान्य बनाने की केंद्र सरकार की कोशिशों को नाकाम करने की साजिश है। अब TRF जैसे आतंकी संगठन की खुलेआम धमकी का गंभीर संज्ञान लेने की आवश्यकता है। इन धमकियों के लिए जिम्मेदार चार TRF आतंकियों को चिह्नित करते हुए उनकी खोज-खबर और आवभगत करने के लिए राष्ट्रीय जाँच एजेंसी ने घाटी में पोस्टर लगवाए हैं। निश्चय ही, यह TRF और उसके आकाओं की कमर तोड़ने का सही समय है।

आतंकियों की इस गीदड़ भभकी से डरकर मैदान छोड़ने की आवश्यकता नहीं है। परंतु, कश्मीरी विस्थापितों की सुरक्षा और उनकी अन्यान्य माँगों पर तत्काल ध्यान दिया जाना चाहिए। क्योंकि सुरक्षित वातावरण में ही उनकी घर वापसी हो सकती है और तभी वे निश्चिंत होकर अपना काम कर सकते हैं। इसलिए उन्हें सुरक्षा और विश्वास दिलाना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए। अगर कश्मीरी विस्थापित और प्रवासी घाटी से भाग खड़े होते हैं, तो आतंकियों और उनके आकाओं के मंसूबे पूरे हो जाएँगे।

कश्मीर के हालात को सामान्य बनाने के लिए केंद्र सरकार, उपराज्यपाल प्रशासन और तमाम सुरक्षा एजेंसियाँ जुटे हुए हैं। लेकिन जिस प्रकार से यह सूची जारी हुई है और उसमें जिस प्रकार की गोपनीय सूचनाएँ हैं, वे कान खड़े करने वाली हैं। इससे एकबार फिर यह स्पष्ट हो गया है कि आतंकियों के हमदर्द और हिमायतियों की शासन-प्रशासन में गहरी पैठ है। उनको चिह्नित करने और दण्डित किए जाने का जो काम किया गया है, वह नाकाफी है। इस काम को और भी तेजी और बारीकी से किया जाना चाहिए।

अनुच्छेद 370 और 35 ए की समाप्ति हुए 3 वर्ष से अधिक समय बीत गया है। इस दौरान केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर में जमीनी बदलाव के लिए और हालात को सामान्य बनाने के लिए अनेक काम किए हैं। उनका सुखद और सकारात्मक परिणाम भी दिखाई-सुनाई पड़ रहा है। फिर भी स्थिति को सामान्य बनाने के लिए और इस सिरदर्द की समाप्ति के लिए कुछ सर्जिकल कार्रवाई करने की आवश्यकता को नज़रन्दाज नहीं किया जा सकता है। सिर्फ कश्मीरी विस्थापितों को घाटी में नौकरी देना या उनकी घर वापसी कराना काफी नहीं है। वे वास्तविक अल्पसंख्यक हैं। इसीलिए दांतों के बीच जीभ की तरह दबे-कुचले और असुरक्षित हैं।

उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद् और हरियाणा अर्बन डवलपमेंट अथॉरिटी की तर्ज पर जम्मू-कश्मीर डवलपमेंट अथॉरिटी का गठन करके कश्मीर के प्रत्येक जिले में सर्वसुविधासम्पन्न बड़े-बड़े रिहायशी और व्यावसायिक परिसर बनाए जाने चाहिए। इन परिसरों में न सिर्फ कश्मीरी विस्थापितों को भूखंड आवंटित किए जाएँ, बल्कि सेना और अर्ध-सैनिक बलों के पूर्व-कर्मियों को भी रियायती दर पर भूखंड आवंटित किए जाने चाहिए। इन परिसरों में किसी भी भारतीय को रियायती दर पर भूखंड खरीदने का अधिकार दिया जाना चाहिए।

इसी प्रकार कश्मीर में बड़े-छोटे उद्योग स्थापित करने वालों और अपना रोजगार शुरू करने वाले दुकानदारों, रेहड़ी-ठेले वालों आदि को रियायती ब्याज पर ऋण और सब्सिडी दी जानी चाहिए। उन्हें काम-धंधे/व्यवसाय के मुफ्त बीमे के अलावा जीवन बीमा की सुविधा भी दी जानी चाहिए। आसानी से लाइसेंस मुहैया कराते हुए सस्ते दाम पर शस्त्र उपलब्ध कराए जाने चाहिए। इससे इन परिसरों में बसने वाले लोग अपनी सुरक्षा के लिए सिर्फ सुरक्षा बलों पर ही निर्भर नहीं रहेंगे।

पिछली सदी के आखिरी दशक में आतंक अपने चरम पर था। उस वक्त लालकृष्ण आडवाणी जी के प्रयासों से प्रत्येक गाँव के स्थानीय नागरिक समाज को जोड़कर विलेज डिफेंस कमेटियों (वी डी सी) का गठन किया गया थाष कश्मीर संभाग में इन कमेटियों का पुनर्गठन करने की आवश्यकता है। इन्हें साधनों, संसाधनों और सुविधाओं से भी लैस किया जाना चाहिए। ये कमेटियाँ आतंकियों को मुँहतोड़ जवाब देने में सक्षम होंगी और विश्वास बहाली का आधार बनेंगी।

सीमापार से घुसपैठ को भारतीय सुरक्षा बलों की मुस्तैदी ने काफी कम कर दिया है। सरकार ने हवाला फंडिंग की भी कमर तोड़ दी है। लेकिन पिछले कुछ दिनों से एक नयी समस्या उभर रही है। यह समस्या मादक पदार्थों की तस्करी है। पंजाब के रास्ते जम्मू-कश्मीर में नशे का कारोबार दिन दूना रात चौगुना फल-फूल रहा है। नशे के इस कारोबार के तार आतंकियों से जुड़े हुए हैं। यह आतंकी फंडिंग और जम्मू-कश्मीर की युवा पीढ़ी को बर्बाद करने का नया तरीका है। समय रहते इसकी नकेल कसना जरूरी है। अन्यथा यह असाध्य रोग बन जाएगा।

अब्दुल्ला-मुफ़्ती खानदान से इतर राजनीतिक नेतृत्व खड़ा करने की भी कोशिश होनी चाहिए। ये दोनों परिवार लोगों को बरगलाने और भड़काने में माहिर हैं। झूठ और लूट की राजनीति ही उनका वास्तविक एजेंडा है। पिछले 70 साल से जम्मू-कश्मीर इसी भय, भ्रम और भ्रष्टाचार की राजनीति का शिकार रहा है। जम्मू-कश्मीर के पुराने और पके हुए नेता घाघ हैं और उनमें से कई शीर्षस्थ नेताओं का गठजोड़ आतंकियों और अलगाववादियों के साथ गठजोड़ जगजाहिर है।

आतंकियों और अलगाववादियों की सबसे बड़ी हमदर्द महबूबा मुफ़्ती हैं। अब इस परम्परागत नेतृत्व के बरक्स विकास और बदलाव की बात करने वाले नए नेतृत्व को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। इस प्रकार का वैकल्पिक और विकासोन्मुख नेतृत्व ग्राम पंचायतों, खंड/जिला विकास परिषदों और नगर निकायों में से चिह्नित करके प्रोत्साहित किया जा सकता है। सकारात्मक सोच ही विकास और बदलाव की संवाहक हो सकती है। जम्मू-कश्मीर में इसकी विशेष आवश्यकता है। ‘बैक टू विलेज’ और ‘माय टाउन, माय प्राइड’ कार्यक्रमों के दौरान नागरिकों और जनप्रतिनिधियों की अत्यंत निराशाजनक भागीदारी और नकारात्मक प्रतिक्रिया चिंताजनक है। यह प्रतिक्रिया दर्शाती है कि उपराज्यपाल शासन को और अधिक पारदर्शी, जवाबदेह, संवेदनशील, त्वरित और परिणामोन्मुख होने की आवश्यकता है।

नौकरशाही पर अति-निर्भरता स्थानीय समाज में अलगाव और अन्यमनस्कता पैदा करती है। जम्मू-कश्मीर पब्लिक यूनिवर्सिटी बिल-2022 इसका एक उदाहरण है। इस प्रकार का कोई कानून बनाने से पहले छात्रों-प्राध्यापकों और नागरिक समाज आदि सभी स्टेकहोल्डर्स के साथ व्यापक विचार-विमर्श करके उन्हें विश्वास में लिया जाना चाहिए था। व्यवस्था में जड़ जमाए बैठे घाघ कानून पारित होने के बावजूद अन्य प्रान्तवासियों को अभी भी जम्मू-कश्मीर में रिहाइशी भूखंड/घर नहीं खरीदने दे रहे हैं। तन्त्र में ऐसे अनेक राष्ट्रद्रोही तत्त्व हैं, जो सरकार को ‘फेल’ करना चाहते हैं।

भारत की स्वतंत्रता और एकता-अखंडता के लिए अपने प्राण गँवाने वाले जम्मू-कश्मीर के हजारों वीरों और वीरांगनाओं के नाम पर विद्यालयों, महाविद्यालयों, चौकों, मार्गों, पुलों, बस अड्डों, रेलवे–स्टेशनों आदि के नाम रखने की पहल सराहनीय है। यही लोग जम्मू-कश्मीर की युवा पीढ़ी के आइकॉन होने चाहिए। पिछली सरकारों ने बिट्टा कराटे और वुरहान वानी जैसे आतंकियों को हीरो बनाने/बताने की कारस्तानी की है। अब इतिहास को ठीक करने और ठीक से पढ़ने-पढ़ाने का भी अवसर है, ताकि स्थानीय समाज की भ्रांतियाँ दूर की जा सकें और उन्हें राष्ट्रीय धारा से जोड़ा जा सके। धीरे-धीरे ही सही पर स्थानीय लोग इस सत्य को स्वीकारने लगे हैं कि राष्ट्रीय धारा से जुड़कर ही घाटी में अमन-चैन और खुशहाली आ सकती है।

पाक अधिक्रांत जम्मू-कश्मीर और चीन अधिक्रांत जम्मू-कश्मीर के लाखों विस्थापित अभी तक न्याय की बाट जोह रहे हैं। उनकी समस्याओं और मांगों पर भी सहानुभूतिपूर्वक विचार करने की आवश्यकता है। वे आजतक अपने नागरिक अधिकारों से ही नहीं, बल्कि मानव अधिकारों तक से वंचित हैं। उनकी सुनवाई जरूरी है, ताकि वे भी शेष भारतवासियों की तरह सुख, शांति और सम्मान से जीवनयापन कर सकें। उनकी शासन-प्रशासन और विधान-सभा में समुचित भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए। जब तक एक-एक कश्मीरी विस्थापित की सुरक्षित ‘घर वापसी’ नहीं हो जाती, तबतक विधानसभा चुनाव कराने की जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। जम्मू-कश्मीर के प्रत्येक नागरिक के मन में निडर होकर मतदान करने का विश्वास पैदा करके ही वहाँ वास्तविक लोकतंत्र की बहाली हो सकती है।

उमेश कोल्हे हत्या मामले में फँसे उद्धव ठाकरे, महाराष्ट्र सरकार ने दिए ‘फोन कॉल’ जाँच के आदेश: नूपुर शर्मा का समर्थन करने पर हुई थी कोल्हे की हत्या

महाराष्ट्र (Maharashtra) के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं। महाराष्ट्र सरकार ने शुक्रवार (23 दिसंबर 2022) को महाराष्ट्र के उद्धव ठाकरे के खिलाफ जाँच के आदेश दिए हैं। ठाकरे पर आरोप है कि उन्होंने अमरावती पुलिस पर उमेश कोल्हे की हत्या को लेकर डकैती के नजरिए से जाँच करने का दवाब डाला था।

महाराष्ट्र सरकार के मंत्री शंभूराज देसाई ने इस मामले को लेकर कहा कि राज्य खुफिया विभाग (SID) जाँच करेगी कि क्या उद्धव ठाकरे ने अमरावती की पुलिस आयुक्त आरती सिंह को कोल्हे की हत्या में डकैती के एंगल से जाँच करने के लिए कहा था। बता दें कि उमेश कोल्हे की हत्या की जाँच फिलहाल राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) कर रही है।

दरअसल, उद्धव ठाकरे के खिलाफ जाँच के आदेश अमरावती के निर्दलीय विधायक रवि राणा (MLA Ravi Rana) की माँग के बाद लिया गया है। रवि राणा ने विधानसभा में इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि उमेश कोल्हे की हत्या 21 जून 2022 को हुई थी और मामले की जाँच पुलिस ने डकैती के एंगल से जाँच की थी। उस समय राज्य के सीएम उद्धव ठाकरे थे।

उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि उद्धव ठाकरे ने स्थानीय कॉन्ग्रेस नेता (Congress Leader) के कहने पर पुलिस आयुक्त आरती सिंह को इस मामले की जाँच डकैती के एंगल से करने के लिए कहा था। उन्होंने जाँच की माँग करते हुए कहा कि वह चाहते हैं कि उद्धव ठाकरे के फोन कॉल की जाँच विशेष जाँच दल (SIT) करे।

महाराष्ट्र के गृहमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) की ओर से जवाब देते हुए मंत्री शंभूराज देसाई ने SID जाँच का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा है कि उमेश कोल्हे की हत्या के बाद क्या हुआ, क्या मामले को दबाने की कोशिश की गई, इसकी जाँच की जाएगी। इसके बाद रिपोर्ट गृहमंत्री को सौंपी जाएगी।

गौरतलब है कि उमेश कोल्हे महाराष्ट्र के अमरावती में फार्मेसी की दुकान चलाते थे। 21 जून 2022 की रात जब वह घर लौट रहे थे मुस्लिम हमलावरों ने उनकी गला काटकर हत्या कर दी थी। उनकी हत्या बीजेपी की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा की पैगंबर मोहम्मद पर की गई टिप्पणी का समर्थन करने कारण की गई थी।

फिलहाल, मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे (CM Eknath Shinde) की अगुवाई वाली शिवसेना (शिंदे गुट) और भाजपा (BJP) की गठबंधन सरकार की सिफारिश के बाद इस मामले की जाँच राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) कर रही है। इस मामले में NIA ने पिछले सप्ताह चार्जशीट दाखिल की थी। इस मामले में 11 आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है।

मीडिया जिसे बता रहा RSS की क्रिसमस पार्टी, संघ को 25 दिसंबर के उस भोज की खबर भी नहीं: कश्मीर से केरल तक आयोजन का हो रहा दावा

देश भर में ईसाई समुदाय क्रिसमस (Christmas) का त्योहार मना रहा है। इस बीच मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पहली बार देश भर में ईसाइयों के लिए क्रिसमस का आयोजन कर रहा है और 25 दिसंबर 2022 को इसके मौके पर भोज का आयोजित करेगा। हालाँकि, संघ ने इससे साफ इनकार किया है।

मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि संघ की ईकाइ राष्ट्रीय ईसाई मंच (RIM) क्रिसमस सेलिब्रेशन का आयोजन जम्मू-कश्मीर से लेकर केरल तक आयोजित किया जा रहा है। इस क्रिसमस भोज में देश के महत्वपूर्ण चर्चों के प्रमुख भी शामिल होंगे। वहीं, संघ के वरिष्ठ के वरिष्ठ नेता इंद्रेश कुमार के भी इन आयोजनों में शामिल होने की बात कही जा रही है।

ऑपइंडिया से बात करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर कार्यवाह मनमोहन वैद्य (Man Mohan Vaidya) ने इस तरह के किसी भी आयोजन को सिरे से नकार दिया। मीडिया रिपोर्ट को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि इस तरह का कोई भी कार्यक्रम का आयोजन करने की कोई योजना नहीं है। जो आयोजन किए जा रहे हैं, उनका संघ से कोई ताल्लुक नहीं है।

इतना ही नहीं, मीडिया में जिस राष्ट्रीय ईसाई मंच को संघ का संगठन बताया जा रहा है, उससे भी किसी तरह का ताल्लुक होने से उन्होंने इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि अगर कोई व्यक्तिगत कार्यक्रम का आयोजन कर रहा है, उसे संघ से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।

बता दें कि देश की मुख्यधारा की मीडिया लगातार इस बात कह रही है कि संघ अपने दृष्टिकोण में बदलाव और समाज के हर संप्रदाय में अपनी स्वीकृति को बढ़ाने के लिए यह कदम उठाया है। मीडिया रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ईसाई समुदाय को भाजपा से जोड़ने के लिए संघ द्वारा यह पहल की गई है।

दैनिक भास्कर की न्यूज का स्क्रीनशॉट

कुछ मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है, “राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ परिवार ने चर्च प्रमुखों को बता दिया है कि वे वोट बैंक की राजनीति का हिस्सा न बनें।” इसके अलावा, यह भी दावा किया गया है कि राष्ट्रीय ईसाई मंच की ओर से उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के चर्च प्रमुखों को आमंत्रित किया जा रहा है, जहाँ पिछले कुछ समय से पादरियों, चर्चों और ईसाइयों के कुछ संस्थानों पर हमले की घटनाएँ सामने आई हैं। इस कार्यक्रम में RSS के वरिष्ठ नेता इंद्रेश कुमार के भी कार्यक्रम में शामिल होने की संभावना है।

ऑपइंडिया से बातचीत में संघ के मीडिया विभाग अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने कहा कि इन मीडिया रिपोर्ट में किसी भी तरह की सच्चाई नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि इस तरह के दावे पर उन्हें देश के एक प्रमुख दैनिक अखबार से बात की और इस रिपोर्ट को पूरी तरह खंडन किया।

बता दें कि अल्पसंख्यक मामलों के केंद्रीय राज्यमंत्री जॉन बारला मेघालय हाउस में क्रिसमस भोज की मेजबानी करने की बात कही जा रही है। यह पहली बार है, जब भाजपा सरकार में इस तरह का आयोजन किया जा रहा है।

जनसत्ता की खबर का स्क्रीनशॉट

सुनील आंबेकर ने कहा कि राष्ट्रीय ईसाई मंच को इस आयोजन का आयोजक बताया जा रहा है, उसका संघ से प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर कोई संगठन, सरकार या मंत्री-सांसद इस तरह का आयोजन कर रहे है तो उनसे संघ का कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय ईसाई मंच भी संघ का संगठन नहीं है।

यहाँ उल्लेखनीय है कि संघ और ईसाई संगठनों के बीच दूरी की प्रमुख वजह प्रलोभन के जरिए किया जाने वाला धर्मांतरण है। संघ धर्मांतरण को देश विरोधी गतिविधि मानता है, वहीं कुछ ईसाई मिशनरियाँ लोगों को लालच देकर धर्मांतरण के काम में लगी हैं। इसको लेकर आम लोगों और चर्च के बीच नोक-झोंक की स्थिति भी देखने को मिलती है।

संघ के दूसरे सरसंघचालक और गुरुजी के नाम से प्रसिद्ध माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर (Madhav Sadashivrao Golwalkar) ने ईसाई मिशनरियों को देश के लिए खतरनाक माना था। सन 1940 से लेकर निधन होने तक लगभग 33 वर्षों तक संघ के सरसंघचालक रहे गोलवलकर ने अपनी किताब में भी इसका जिक्र किया है।

गोलवलकर ने सन 1966 में ‘बंच ऑफ थॉट’ नाम लिखी अपनी किताब में भी इसका उल्लेख किया है। चार भागों में बँटी इस पुस्तक में ‘राष्ट्र और उसकी समस्याओं’ नाम से एक विषय है। इसमें ‘आंतरिक खतरा’ नाम से गोलवलकर ने मुस्लिम और ईसाई संगठनों को देश के लिए आंतरिक खतरा बताया है। बता दें कि ये दोनों संगठन अपनी मजहबी क्रिया-कलापों के लिए बाहरी देशों में स्थित संगठनों से सीधे तौर पर जुड़े हुए हैं।

खैर जो भी हो, संघ ने स्पष्ट कर दिया है कि उसने अपनी विचारधारा को नहीं छोड़ा है। हालाँकि, संघ की भोज वाली खबर को लेकर राजनीति भी होने लगी। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इसको लेकर संघ को कठघरे में खड़ा करने की कोशिश की है।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा, “मोहन भागवत कभी मस्जिद और कभी मजार जा रहे हैं, कभी क्रिसमस का आयोजन कर रहे हैं। इनकी कथनी और करनी में बहुत अंतर है। इनको सिद्धांत से कोई लेना-देना नहीं है, बस सत्ता में बने रहना है। इनको लोगों में वैमनस्यता फैलाना है, एक से दूसरे भाई को लड़ाकर अपना उल्लू सीधा करना है और वोट लेना है। यही इनका उद्देश्य है।”

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने उन मीडिया रिपोर्ट के आधार पर ये बातें कही हैं, जिनमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा क्रिसमस पर भोज का आयोजन करने की बात कही गई है। हालाँकि, इस तरह की असमंजस और अटकलों को संघ ने नकार दिया है और कहा कि इन आयोजनों में उसकी कोई भूमिका या संबंध नहीं है। ऐसे में सीएम बघेल का यह बयान भी अब निरापद हो गया है।

जिस NGO से जुड़े, उसके MD को बना दिया ईसाई: सीतापुर के धर्मांतरण केस में लाखों की विदेशी फंडिंग का खुलासा, चंदे के लिए डेविड करता था अलग-अलग देशों की यात्रा

उत्तर प्रदेश के सीतापुर से सामने आए ईसाई धर्मांतरण मामले में कई खुलासे हुए हैं। पता चला है कि धर्मांतरण के लिए एनजीओ चलाने वाले डेविड के बैंक खातों में लाखों की फंडिंग होती थी। चंदे के रूप में मिलने वाले इन रुपयों का कोई रिकॉर्ड नहीं दिया गया। आरोप है कि डेविड ने FCRA (विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम) का उल्लंघन किया था। डेविड कई देशों की यात्रा कर चुका है।

सीतापुर से जबरन धर्मांतरण कराए जाने का मामला सामने आने के बाद पुलिस ने आरोपित डेविड के तीन बैंक खातों को सीज कर दिया है। जाँच के दौरान पता चला है कि धर्मांतरण के लिए डेविड को बड़े पैमाने पर विदेशी फंडिंग की जाती थी। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक(ASP) एनपी सिंह के मुताबिक डेविड ने FCRA का उल्लंघन किया था। डेविड व उसके एनजीओ को 2014-15 के दौरान अमेरिका, दक्षिण कोरिया, ब्राजील, केन्या और अर्जेंटीना से भारी फंडिंग हुई थी। जिसका कोई भी रिकॉर्ड नहीं दिया गया।

जाँच में खुलासा हुआ है कि धर्मांतरण कराने वालों ने करीब 50 लाख रुपए की संपत्ति बना ली है। पुलिस सूत्रों के अनुसार साल 2018-19 के बीच एक करोड़ रुपए के दान का पता लगा है। इसे लेकर विस्तार से जाँच की जा रही है।

पुलिस ने डेविड को दान देने वाले 12 सोर्सेस के पता लगाने का दावा किया है। जिसमें कैलिफोर्निया, टेक्सास, दक्षिण कोरिया, केन्या, अर्जेंटीना और ब्राजील के लोग शामिल हैं। सीतापुर से हिरासत में लिया गया रिवाल्डो जोसे डिसिल्वा ही ब्राजील से पैसे भेजने वालों में से एक है। जाँच से पता चला है कि दान के रूप में फंड एक ई-गेटवे के माध्यम से डेविड के खाते में ट्रांसफर किया जाता था। रिपोर्ट्स के मुताबिक चेन्नई में कैल्वेरी चर्च के माध्यम से ई-गेटवे सुविधा प्रदान की गई थी।

डेविड उसकी पत्नी और बाकी सहयोगियों पर गाँव के गरीब व भोले भाले लोगों को नौकरी व पैसे की लालच देकर धर्म परिवर्तन करा ईसाई बनाने का आरोप है। इसके लिए डेविड ने कई जगहों पर संपत्तियाँ खरीदी हैं। आरोप है कि सीतापुर में भी ऐसी ही एक संपत्ति पर बड़े स्तर पर लोगों को जमा कर धर्मांतरण का कार्य किया जा रहा था।

डेविड ने पैसे जुटाने के लिए और धर्मांतरण को रफ्तार देने के लिए तीन देशों की यात्रा भी की। उसने साल 2018 में ब्राजील, 2019 में साउथ कोरिया और अर्जेंटीना की यात्रा की। माना जा रहा है कि ब्राजील यात्रा के दौरान डेविड ने जिन लोगों से फंडिंग के लिए संपर्क किया था, वही लोग बीते दिनों सीतापुर चर्च में आए थे। चर्च में आए ब्राजील के नागरिकों को 29 दिसंबर तक भारत छोड़ने का निर्देश जारी किया गया है।

जाँच के दौरान यह भी पता चला है कि डेविड मूल रूप से जौनपुर के लाखापूरब गाँव का रहने वाला है। साल 2008 में डेविड ने एक एनजीओ से जुड़ने के बाद अपना धर्म बदलकर ईसाई बन गया था। उसके बाद 2011 में उसने रोहिणी नाम के लड़की से शादी कर ली औऱ लखनऊ में एक दूसरे एनजीओ से जुड़े। डेविड ने इस एनजीओ के एमडी को अपनी बातों में फँसा कर ईसाई बना दिया था। उसके बाद यह सिलसिला नहीं थमा।

आपको बता दें कि डेविड और उनकी पत्नी रोहिणी पर 19 दिसंबर 2022 को ब्राजील के लोगों के साथ सीतापुर के शहबाजपुर में धार्मिक सभा आयोजित कर लोगों के धर्मांतरण का आरोप लगा था। घटना की शिकायत नैमिष गुप्ता नाम के व्यक्ति ने की थी। उनका आरोप था कि सभा में लोगों को ईसाई बनने का प्रलोभन दिया जा रहा था। शिकायतकर्ता ने खुद को भी धर्मांतरण का लालच दिए जाने का दावा किया था। इस कार्य्रकम का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। पुलिस ने डेविड अस्थाना और उनकी पत्नी रोहिणी अस्थाना उर्फ़ रिंकी को नामजद करते हुए दोनों के खिलाफ छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम 1968 की धारा 3/5 के तहत FIR दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया। वहीं विदेशियों को 29 दिसंबर तक अपने देश लौटने की हिदायत दी।

गजब बिहार, अजब मामला! पुलिस ने पहले मजदूरी में दी दारू, फिर शराबबंदी में कर लिया गिरफ्तार: SP से पीड़ित पत्नी ने लगाई न्याय की फरियाद

शराबबंदी वाले बिहार में पुलिस का नया कारनामा सामने आया है। बिहार के रोहतास में पुलिस ने लल्लू भुइयां नाम के एक व्यक्ति को शराब रखने के आरोप में गिरफ्तार किया। भुइयां की पत्नी ने आरोप लगाया है कि थाने में काम करने के बदले उसके पति को पुलिस ने मजदूरी में शराब दी थी। फिर उसे गिरफ्तार कर लिया।

पीड़ित पत्नी ने रोहतास के एसपी से इसकी शिकायत करते हुए न्याय की गुहार लगाई है। मामला रोहतास के इंद्रपुरी थाने का है। लल्लू भुइयां की पत्नी ने थानेदार पर आरोप लगाते हुए कहा है कि उसके पति को इंद्रपुरी थाने मे काम करने के लिए बुलाया जाता था। बड़ा बाबू चौकीदार के उसके पति को बुलाते थे। महिला का आरोप है कि मजदूरी के बदले उसके पति को शराब दिया जाता था। जब वह पैसे माँगता था तो उसे थाने से भगा दिया जाता था।

महिला का कहना है कि हाल ही में उसके पति को थाने में सफाई के लिए बुलाया गया था। इस बार भी मजदूरी में पैसे की जगह शराब पकड़ाकर भगा दिया। उसका पति शराब लेकर घर आ गया। आसपास के ही 2 लोगों के साथ बैठकर शराब पी। जैसे ही वे दो लोग शराब पीकर निकले पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया। उन्होंने लल्लू भुइयां का नाम लिया। इसके बाद इंद्रपुरी पुलिस ने उसके पति को भी गिरफ्तार कर लिया। यह घटना 20 नवंबर की रात की बताई जाती है।

महिला का आरोप है कि इस दौरान उसके साथ भी खराब व्यवहार किया गया। महिला ने थानेदार समेत अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की माँग की है। रोहतास के एसपी आशीष भारती ने बताया है कि मामले की जाँच की जा रही है। जाँच के बाद जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। वहीं भीम आर्मी के बिहार प्रदेश महासचिव डॉ. शैलेश सागर ने थानेदार सहित दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की है। ऐसा नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।

IPL 2023 ऑक्शन: 9 गुना अधिक भाव पर बिके हैरी ब्रूक, लेकिन चर्चा काव्या मारान की, नेटिजन्स बोले- वो स्त्री है कुछ भी कर सकती है

इंडियन प्रीमियर लीग 2023 (IPL 2023) की नीलामी में सभी टीमें अपनी जरूरतों के हिसाब से प्लेयर्स को ट्रेड करती नजर आ रही हैं। इस बीच सनराइजर्स हैदराबाद की ऑक्शन टेबल पर नजर आने वाली काव्या मारान का नाम (#KavyaMaran) ट्विटर से लेकर सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ट्रेंड कर रहा है।

कौन हैं काव्या मारान?

इससे पहले काव्या मारान आईपीएल 2022 की मेगा नीलामी में भी ऑक्शन टेबल पर नजर आईं थीं। तब, बहुत सारे क्रिकेट फैंस इस मिस्ट्री गर्ल को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा कर रहे थे। ठीक इसी तरह आईपीएल 2023 की नीलामी में भी काव्या को लेकर चर्चा का बाजार गर्म है।

दरअसल, काव्या मारान सन ग्रुप (Sun Group) के मालिक कलानिधि मारान की बेटी हैं। कलानिधि मारान सनराइजर्स हैदराबाद (SRH) के मालिक हैं। वहीं, काव्या मारान सनराइजर्स में CEO पद पर हैं। इसके अलावा, वह सन टीवी नेटवर्क के ओटीटी प्लेटफॉर्म के सन नेक्स्ट (Sun NXT) की भी प्रमुख हैं।

ट्रेंड पर क्यों हैं काव्या मारान?

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर काव्या मारान के ट्रेंड होने की पहली वजह यह है कि लोग जानना चाहते हैं कि आखिर वह कौन लड़की है जो सनराइजर्स के लिए प्लेयर्स को ट्रेड कर रही है। वहीं, दूसरी वजह यह है कि काव्या ने इंग्लैंड के युवा बल्लेबाज हैरी ब्रूक (Harry Brook) को 13.25 करोड़ रुपए की कीमत पर खरीदा है। यह कीमत ब्रूक के बेस प्राइस 1.5 करोड़ से करीब 9 गुना अधिक है। वहीं, उन्होंने मयंक अग्रवाल के लिए 8.25 करोड़ रुपए की बोली लगाई है। ऐसे में, नेटिजन्स ने काव्या मारान को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रिया दी है। कुछ लोगों ने कहा कि वो स्त्री है कुछ भी कर सकती है तो किसी ने उनसे पूछा कि आखिर वो क्या कर रही हैं।

हैरी ब्रूक को 13.25 करोड़ रुपए में खरीदने को लेकर सिद्धार्थ पटेल नामक यूजर ने मीम शेयर करते हुए ट्वीट किया है, “जब काव्या मारान ने हैरी ब्रूक को 13 करोड़ में खरीदा तब सनराइजर्स के फैंस काव्या को कहते हैं- आप ओवर मोटिवेट हो गए हो थोड़ा प्रैक्टिकल होकर सोचो।”

Rampy नामक यूजर ने एक मीम शेयर किया। इसमें हैरी ब्रूक को काव्या मारान की गोद में दिखाया गया है। यूजर ने ट्वीट कर लिखा, “अगली पीढ़ी का सुपर स्टार यहाँ है, हैरी ब्रूक..”

Vaibhav walde नामक यूजर ने ट्वीट किया, “अगर इस बंदी को शिद्दत से चाहूँगा तो मिलेगी क्या”?

IPL 2023 की नीलामी में काव्या मारान द्वारा प्लेयर्स पर पैसा लुटाने को लेकर Jal Sain नामक ट्विटर यूजर ने लिखा, हैरी ब्रूक 13.25 करोड़ कुछ ज्यादा नहीं हो गया”

कुछ अन्य यूजर्स ने मीम शेयर करते हुए काव्या मारान को ट्रोल किया है::

बता दें कि इस बार आईपीएल नीलामी में सबसे महंगे बिकने वाले खिलाड़ी सैम कुर्रन हैं। उन्हें पंजाब किग्स ने 18.5 करोड़ रुपए में खरीदा है।

‘केंद्र सरकार ने राम सेतु के अस्तित्व से किया इनकार’: द टेलीग्राफ ने मंत्री के बयान से की छेड़छाड़, जानें संसद में क्या कहा गया

अंग्रेजी में प्रकाशित होने वाले दैनिक समाचार पत्र ‘द टेलीग्राफ’ ने हाल ही में ‘नो कन्क्लूसिव प्रूफ ऑफ राम सेतु: गवर्नमेंट इन पार्लियामेंट’ टाइटल के साथ एक रिपोर्ट प्रकाशित की। टेलीग्राफ के इस टाइटल को देखने के बाद ऐसा लगता है कि केंद्र ने भगवान श्री राम की सेना द्वारा भारत को श्रीलंका से जोड़ने वाले ऐतिहासिक पुल राम सेतु के अस्तित्व को नकार दिया है।

दरअसल, भाजपा सांसद कार्तिकेय शर्मा ने राम सेतु को लेकर संसद में मौखिक रूप से एक सवाल पूछा था। उन्होंने कहा था, वह जानना चाहते हैं कि सरकार भारत के इतिहास का वैज्ञानिक मूल्यांकन करने के लिए कोई प्रयास कर रही है। उनके इस सवाल को लेकर केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने जवाब दिया था।

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह के इसी जवाब को कोट करते हुए टेलीग्राफ ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि केंद्र सरकार ने भारत और श्रीलंका के बीच बने राम सेतु के अस्तित्व से इनकार किया है।

क्या डॉ. जितेंद्र सिंह ने राम सेतु के अस्तित्व को नकारा?

द टेलीग्राफ की हेडलाइन ने पूरी तरह से यह बताने की कोशिश की है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चल रही केंद्र सरकार ने राम सेतु के आस्तित्व को खारिज कर दिया है। हालाँकि, डॉ. जितेंद्र सिंह के जवाब में ऐसी कोई बात थी ही नहीं।

भाजपा सांसद कार्तिकेय शर्मा के सवाल का जवाब देते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा था, “मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि वास्तव में अंतरिक्ष विभाग इसमें लगा हुआ है। राम सेतु के संबंध में उनके द्वारा यहाँ पूछे गए सवाल की बात करें तो इसकी खोज को लेकर हमारी कुछ सीमाएँ हैं। इसका बड़ा कारण यह है कि इस पुल का इतिहास 18,000 साल से अधिक पुराना है और यदि आप इतिहास को देखें, तो वह पुल लगभग 56 किमी लंबा था।”

उन्होंने यह भी कहा है, “इस बारे में जो चीजें मैं संक्षेप में कहने की कोशिश कर रहा हूँ वह यह है कि वहाँ मौजूद सटीक संरचना को दर्शाना बेहद मुश्किल है। लेकिन प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से ऐसी बातें सामने आईं हैं कि वे संरचनाएँ मौजूद हैं।”

केंद्रीय मंत्री डॉ. सिंह ने आगे कहा कि उपग्रह द्वारा ली गई फोटो से यह कहा जा सकता है, “स्थान में निरंतरता की एक निश्चित मात्रा का पता चला है जिसके माध्यम से कुछ अनुमान लगाया जा सकता है।”

उन्होंने राज्यसभा में यह भी कहा है, “हाँ कुछ हद तक, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी (स्पेस टेक्नोलॉजी) के माध्यम से हम सेतु के टुकड़ों, द्वीपों और कुछ प्रकार के चूना पत्थर के ढेरों की खोज करने में सक्षम हुए हैं, जिन्हें निश्चित रूप से अवशेष या पुल के हिस्से नहीं कहा जा सकता।”

कुल मिलाकर देखें तो डॉ सिंह ने यह कहा है कि राम सेतु वहाँ पर मौजूद था। लेकिन, यह 18,000 वर्ष से अधिक पुराना है, इसलिए इस पुल के निर्णायक प्रमाण खोजने के लिए उपयोग किए गए साधन अब तक उपयुक्त परिणाम नहीं दे पाए हैं। डॉ जितेंद्र सिंह ने राम सेतु को खोजने में अपनी सीमाओं के बारे में बात कर रहे थे। हालाँकि, उन्होंने राम सेतु के अस्तित्व से इनकार नहीं किया है। उन्होंने यह भी कहा है कि राम सेतु 56 किमी लंबा था और यह स्थान पर संरचनाओं की निरंतरता से पूरी तरह स्पष्ट है।

एएसआई ने राम सेतु के पानी के भीतर खोज से जुड़ी परियोजना को मंजूरी दी

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने पिछले साल राम सेतु से जुड़े एक शोध प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। इस परियोजना में पानी के नीचे की खोज शामिल थी, जिसमें सेतु (पुल) की उम्र और इसके निर्माण से जुड़ी जानकारी हासिल करने की कोशिश की जा रही है।

इस परियोजना को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अंतर्गत काम करने वाले केंद्रीय पुरातत्व सलाहकार बोर्ड द्वारा अप्रूव किया गया था। इस परियोजना को सीएसआईआर-राष्ट्रीय समुद्र विज्ञान संस्थान, गोवा द्वारा प्रस्तुत किया गया था।

राम सेतु भारत के तमिलनाडु में पंबन द्वीप (जिसे रामेश्वरम द्वीप भी कहा जाता है) और श्रीलंका में मन्नार द्वीप के बीच शैलों की एक श्रृंखला है। भूवैज्ञानिक साक्ष्य के अनुसार, यह सेतु भारत और श्रीलंका के बीच एक प्राचीन संरचना है।

गुरुग्राम में फिर खुले में नमाज: बजरंग दल कार्यकर्ताओं ने भगाया, कहा- हिंदुओं के खिलाफ रच रहे साजिश, कुछ दिन बाद बना लेंगे मजार

​हरियाणा के गुरुग्राम में एक बार फिर सार्वजनिक स्थानों पर नमाज अदा करने का मामला सामने आया है। शुक्रवार (23 दिसंबर 2022) को सेक्टर-69 में खुले में नमाज पढ़े जाने का हिंदू संगठनों ने जमकर विरोध किया है। मौके पर पहुँचे बजरंग दल के कार्यकताओं ने जुम्मे की नमाज पढ़ने आए मुस्लिमों को यहाँ से खदेड़ कर भगा दिया। इस दौरान पुलिस पर मौजूद रही।

हिंदू संगठनों का आरोप है कि दूसरी जगहों से सैकड़ों लोगों को बुलाकर यहाँ खुले में नमाज पढ़वाई जा रही है। हिंदुओं के खिलाफ बड़ी साजिश रची जा रही है। खुले में नमाज पढ़ने के लिए यह जमीन नहीं दी गई है। ​हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर का आदेश है कि कोई भी खुले में नमाज नहीं पढ़ सकता है। यहाँ कई लोग अन्य जिले से आए हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, हिंदू संगठन के लोगों के कहना है कि मुस्लिम बाहर से आकर यहाँ नमाज पढ़ते हैं। मौलवी पलवल से यहाँ नमाज पढ़ाने आ रहा है। हर शुक्रवार को ये यहाँ आकर लैंड जिहाद कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा, “हम 15 सालों से यहाँ रह रहे हैं। थोड़े दिन बाद ये यहाँ मजार बनाकर कहेंगे की ये 25 साल पहले बनी थी। सीएम साहब के स्पष्ट आदेश है कि खुले में नमाज नहीं पढ़ सकते, इसके बावजूद ये लोग ऐसा कर रहे हैं।” बताया जा रहा है कि घटनास्थल पर दोनों पक्षों को नियंत्रित करने के लिए पुलिस बल तैनात किया गया है।

वहीं, सोशल मीडिया पर भी इस घटना का ​वीडियो खूब वायरल हो रहा है। वायरल हो रहे वीडियो में बजरंग दल के कार्यकर्ता मुस्लिमों द्वारा खुले में नमाज पढ़ने को लेकर उनका विरोध कर रहे हैं। बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने कहा, “खुले में होने वाली 6 नमाजों को भी हटाया जाएगा। तुम्हें खुले में नमाज पढ़ने की अनुमति किसने दी है।” तभी एक अन्य कार्यकर्ता पीछे से कहता है कि ये लोग कह रहे हैं कि वे यहाँ 15 सालों से खुले में नमाज अदा कर रहे हैं, जबकि इस रोड को भी बने हुए 15 साल नहीं हुए हैं।

इसके बाद कार्यकर्ताओं ने कहा, “यहाँ 35 टुकड़े नहीं चलेंगे। ये उदयपुर नहीं है, गुड़गाँव है ये। गुड़गाँव की धरती है ये। दिन में पढ़ा करो तुम लोग नमाज। नमाज पढ़ने के लिए वहाँ से यहाँ आते हो। कहाँ है पुलिस प्रशासन।” इसके बाद सभी कार्यकर्ताओं ने पास में खड़ी पुलिस से इन पर कार्रवाई करने को कहा।

ध्यान दें पिछले साल 10 दिसंबर को हरियाणा CM मनोहर लाल खट्टर ने गुरुग्राम में खुले में नमाज पढ़ने के मामले पर कहा था, “अगर कोई अपनी जगह पर नमाज पढ़ता है, पाठ पढ़ता है उससे हमें कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन खुले में ऐसे कार्यक्रम नहीं होने चाहिए। नमाज पढ़ने का जो काम खुले में हुआ है, यह बिल्कुल भी सहन नहीं किया जाएगा।”

गौरतलब है कि पिछले साल भी गुरुग्राम में खुले में नमाज अदा करने को लेकर विरोध प्रदर्शन हुआ था। शुक्रवार (15 अक्टूबर, 2021) को गुरुग्राम सेक्टर-47 में स्थानीय हिंदू लोगों ने लगातार चौथे सप्ताह भजन-कीर्तन कर प्रदर्शन किया था।

सिक्किम में सैन्य ट्रक खाई में गिरा, 16 जवान बलिदान: सीमा चौकियों पर जा रहे थे सैनिक

उत्तरी सिक्किम (North Sikkim) में शुक्रवार (23 दिसंबर 2022) को एक दर्दनाक सड़क हादसे में सेना के 16 जवान वीरगति को प्राप्त हो गए और 4 अन्य घायल हो गए। यह हादसा राजधानी गंगटोक से लगभग 130 किलोमीटर की दूरी पर स्थित लाचेन से करीब 15 किलोमीटर दूर जेमा (Zema) में आज सुबह करीब 8 बजे हुआ। भारतीय सेना ने बतायाकि जवान ट्रक से काफिले के साथ चट्टेन से थांगू जा रहे थे, तभी यह हादसा हुआ।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सिक्किम में हुए हादसे में भारतीय सेना के वीर जवानों के बलिदान पर गहरा दुख व्यक्त किया है। पीएम ने कहा, “शोक संतप्त परिवारों के प्रति मेरी संवेदनाएँ। घायल जवान जल्द स्वस्थ हों।” दुर्घटना के तुरंत बाद बचाव कार्य शुरू किया गया।

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार, सभी घायलों को उत्तरी बंगाल के एक सैन्य अस्पताल में हवाई मार्ग से ले जाया गया है। घटना की जानकारी मिलने के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी ट्वीट कर गहरा दुख जताया है।

राजनाथ सिंह ने कहा, “उत्तरी सिक्किम में एक सड़क दुर्घटना के कारण भारतीय सेना के जवानों के बलिदान होने का गहरा दुख हुआ। देश उनकी सेवा और प्रतिबद्धता के लिए हमेशा आभारी रहेगा। जवानों के परिवारों के प्रति मेरी संवेदनाएँ। हादसे में जो लोग घायल हुए हैं, उनके शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करता हूँ।”

चुंगथांग उप-विभागीय पुलिस अधिकारी (एसडीपीओ) अरुण थाटल के मुताबिक, सेना के वाहन में 20 लोग थे। ये सीमा चौकियों की ओर जा रहा था। ऐसा लगता है कि जेमा 3 क्षेत्र में एक तीव्र मोड़ को पार करते समय जवानों से भरा ट्रक सड़क से उतर गया और सैकड़ों फीट नीचे गिर खाई में गिर गया।

इस हादसे में सेना का ट्रक चकनाचूर हो गया है। यह तीन बसों के उस काफिले का हिस्सा था, जो चट्टेन से थांगू के लिए निकला था। बलिदान होने वालों में तीन जूनियर कमिशन ऑफिसर (JSO) और 13 जवान शामिल हैं।

सेना के 16 जवानों के पार्थिव शरीर को दुर्घटनास्थल से बरामद कर लिया गया है। लाचेन की एक पुलिस टीम के साथ घटनास्थल पर मौजूद थाटल ने कहा कि चार गंभीर रूप से घायल जवानों की स्थिति अज्ञात बनी हुई है। शवों को पोस्टमार्टम के लिए गंगटोक के सरकारी एसटीएनएम अस्पताल ले जाया गया है, जिसके बाद इसे सेना को सौंप दिया जाएगा। पीड़ितों की रेजिमेंट का पता लगाया जाना बाकी है।

बिहार के भोजपुर में बैडमिंटन ट्रॉफी जीतने के बाद ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के लगाए गए नारे: मोहम्मद अरमान, तनवीर सहित 5 गिरफ्तार, अन्य लोगों को तलाश जारी

बिहार के भोजपुर (Bhojpur, Bihar) में कुछ लोगों ने पाकिस्तान ज़िंदाबाद के नारे लगाए। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि एक ट्रॉफी के साथ कुछ लड़कों की टोली पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाते हुए आगे बढ़ रही है।

इस मामले में पुलिस ने पाँच लड़कों को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं, अन्य लोगों की तलाश जारी है। दावा किया जा रहा है कि मामले से जुड़ा एक और वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें नारे लगाने वाले 2 लड़कों को पकड़ कर उनसे हिंदुस्तान जिंदाबाद के नारे लगवाए जा रहे हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, भोजपुर के कोईलवर इलाके के चाँदी में बैडमिंटन टूर्नामेंट का आयोजन किया गया था। बुधवार (21 दिसंबर 2022) को कोईलवर बनाम चाँदी के बीच फाइनल मुकाबला खेला गया, जिसमें चाँदी की टीम जीत गई। विजयी टीम के खिलाड़ी ट्रॉफी लेकर पाकिस्तान के समर्थन में नारेबाजी करने लगे। दर्जनों नौजवान ट्रॉफी के साथ जुलूस निकालते हुए ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगा रहे थे। घटना के कुछ ही देर बाद इससे जुड़ा वीडियो वायरल होने लगा।

वायरल वीडियो के सही पाए जाते ही पुलिस ने मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी। पुलिस ने अब तक 5 लड़कों को गिरफ़्तार किया है। उनसे पूछताछ की जा रही है। जिन लोगों को गिरफ्तार किया या है उनमें मोहम्मद अरमान, मोहम्मद तनवीर आलम, कल्लू और सोनू शामिल हैं। पुलिस वायरल वीडियो से चिन्हित कर बाकियों की तलाश कर रही है। पूरे मामले पर एसपी संजय कुमार सिंह ने कहा है कि दोषियों के खिलाफ एक्शन लिया जा रहा है।

वहीं, मामले से जुड़ा एक अन्य वीडियो भी वायरल हो रहा है। दावा है कि दूसरे वीडियो में पाकिस्तान के हक में नारे लगाने वाले नौजवानों को पकड़ कर उनसे हिन्दुस्तान जिंदाबाद और पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगवाए जा रहे हैं। वायरल वीडियो चाँदी का ही बताया जा रहा है।