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कानपुर में 5 बांग्लादेशी गिरफ्तार, सपा MLA ने दे रखा था ‘भारतीय’ होने का सर्टिफिकेट: छापेमारी में घर से मिले फर्जी दस्तावेज और लाखों रुपए

उत्तर प्रदेश की कानपुर पुलिस ने अवैध तौर पर रह रहे 5 बांग्लादेशियों को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपितों में 2 पुरुष, 2 महिलाएँ और एक नाबालिग किशोर शामिल हैं। ये सभी आरोपित फर्जी पहचान के साथ भारत में रह रहे थे। इनके पास से कई पासपोर्ट और आधार कार्ड बरामद किए गए हैं। एक बांग्लादेशी नागरिक कई देशों की यात्रा भी कर चुका था और उसके पास तमाम देशों की करेंसी भी बरामद हुई है। कानपुर से समाजवादी पार्टी के विधायक इरफ़ान सोलंकी ने इन सभी के कागजातों को वेरिफाई भी कर रखा था। पुलिस ने यह कार्रवाई रविवार (11 दिसंबर 2022) को की है।

कानपुर पुलिस के मुताबिक 11 दिसंबर को थाना मूलगंज पुलिस को कुछ संदिग्धों के मेस्टन रोड की तरफ जाने की सूचना मिली थी। इस सूचना पर पुलिस ने घेराबंदी की तो 4 लोग पकड़ में आए। उन्हें जब पहचान पत्र दिखाने को कहा गया तब वो लोग टालमटोल करने लगे। पुलिस को गुमराह करने के लिए सभी संदिग्धों ने पहचान पत्र घर पर होने का बहाना बनाने लगे। पुलिस उन सभी संदिग्धों को ले कर उनके घर पहुँची। वहाँ पुलिस को खालिद माजिद नाम का व्यक्ति पहले से मौजूद मिला।

इस दौरान पुलिस ने संदिग्धों के घर की तलाशी ली जिसमें बांग्लादेशी पासपोर्ट, फर्जी आधार कार्ड, विदेशी करेंसी के साथ लगभग साढ़े 14 लाख रुपए भी बरामद हुए। इस बाबत पूछने पर आरोपित कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए। आख़िरकार पुलिस ने सभी 5 संदिग्धों को हिरासत में ले लिया। जब उनसे पूछताछ की गई तो आरोपितों ने बताया कि वो मूल रूप से बांग्लादेश के खुलना जिले के निवासी हैं। संदिग्धों की पहचान 79 साल के ख़ालिद माज़िद, 53 साल के रिज़वान मोहम्मद, 45 साल की हिना खालिद और 21 साल की रुखसार के तौर पर हुई। एक अन्य नाबालिग भी पुलिस हिरासत में है जो इसी परिवार का है।

पुलिस पूछताछ में सभी आरोपितों ने बताया कि सभी आरोपित साल 2016 में भारत में रह रहे हैं। इन सभी के पास 1001 डॉलर विदेशी मुद्रा और सोने के कई आभूषण बरामद हुए हैं। पकड़ा गया रिज़वान पाकिस्तान, मलेशिया, बांग्लादेश और नेपाल कई बार जा चुका है। पुलिस ने सभी आरोपितों पर IPC की धारा 419, 420, 467, 468, 471, 120-B के साथ धारा 14 विदेशी विषयक अधि0 1946 के तहत FIR दर्ज की है। पुलिस पूरे मामले की जाँच कर रही है।

सपा विधायक और पार्षद ने वेरिफाई किए थे कागजात

पुलिस यह भी जानकारी दी है कि पकड़े गए आरोपितों के कागजात कानपुर से समाजवादी पार्टी के विधायक हाजी इरफ़ान सोलंकी ने वेरिफाई किए थे। पुलिस ने बताया कि सपा विधायक इरफ़ान ने न सिर्फ पकड़े गए आरोपितों को अपने आधिकारिक लेटर हेड पर भारतीय होने का सर्टिफिकेट दिया था बल्कि उनके कागजातों को लगातार सत्यापित भी किया था। हाजी इरफ़ान के अलावा सपा पार्षद मन्नू रहमान ने साल 2019 में इन बांग्लादेशियों के भारतीय होने का प्रमाण पत्र जारी किया था।

‘सारी टेंशन सेना की है, ये तो बस पैसे कमाएँगे’: रणबीर कपूर ने सऊदी अरब में पाकिस्तान के साथ काम करने पर भरी ‘हाँ’, भारतीयों ने लताड़ा

सऊदी अरब में हुए ‘रेड सी इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल’ में रणबीर कपूर ने भी शिरकत की। इस कार्यक्रम में उन्हें ‘वैरायटी इंटरनेशनल वैनगार्ड एक्टर अवार्ड’ दिया गया। इस दौरान उन्होंने पाकिस्तान की ब्लॉकबस्टर रही ‘द लीजेंड ऑफ मौला जट’ फिल्म की काफी तारीफ की। साथ ही बोला कि उन्हें पाकिस्तानी क्रू के साथ काम करने में काफी खुशी होगी।

दरअसल, रिपोर्ट्स के मुताबिक, कार्यक्रम में ऑडियंस में से एक सदस्य ने उनसे पूछा था, “आज हमारे पास सऊदी अरब जैसे प्लेटफॉर्म हैं जहाँ मिलकर फिल्में की जा सकती हैं। मुझे आपको अपनी फिल्म के लिए साइन करवाकर खुशी होगी। क्या आप अपनी टीम के साथ मिलकर पाकिस्तानी टीम के साथ सऊदी अरब में काम करना चाहेंगे?”

इस सवाल पर रणबीर कपूर ने कहा, “बिलकुल सर। मुझे लगता है कि कलाकारों के लिए कोई सीमा नहीं होती, खासकर कला में ऐसा नहीं होता। पाकिस्तानी फिल्म इंडस्ट्री को द लीजेंड ऑफ मौला जट के लिए बहुत-बहुत शुभकामानाएँ। ये पिछले कुछ सालों की सबसे बड़ी हिट है जैसा कि हमने देखा। बिलकुल मुझे साथ काम करने में खुशी होगी।“

उनके इस बयान के बाद भारतीयों की सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया आ रही है। एक यूजर ने गुस्से में लिखा, “सारी की सारी टेंशन तो सेना को लेनी है। ये %$# तो पैसे कमाएँगे। अपना काम बनता भाड़ में जाए जनता। लोगों को उर्दूवुड की ये गंदगी साफ करनी होगी।”

एक यूजर ने कहा, अगर ये आदमी पाकिस्तान के साथ काम करता है तो भारत में तो इसका करियर चौपट हो जाएगा।

इसी तरह एक ट्विटर यूजर ने कहा, “जब देश की,देश की सुरक्षा,सम्मान की बात आती है तो वहां ये बात कहना गलत है कि “नो बाउंड्री फॉर आर्टिस्ट्स।” इसका मतलब ये होता है कि वो खुद को देश के सम्मान से ऊँचा मानते हैं। एक सैनिक की भी किसी दूसरे देश से व्यक्तिगत शत्रुता नहीं है लेकिन वो देश के सम्मान और सुरक्षा को महत्व देते हैं।”

अविनाश झा लिखते हैं, “इसका परदादा पृथ्वीराज कपूर जान बच के पाकिस्तान से भारत आया था और इसका पाकिस्तान प्रेम देखो फिर भी लोग इसकी फिल्म देखने जाते है।”

बता दें कि रणबीर कपूर पिछले दिनों अपनी ब्रह्मास्त्र फिल्म के कारण काफी सुर्खियों में रहे थे। उनके बीफ वाले बयान के वायरल होने के बाद उनके बॉयकॉट की माँगें उठीं थीं। इसके बाद वे और आलिया शादी के 6 महीने बाद माता-पिता बनने के कारण मीडिया की हेडलाइन्स में आए और अब उनका ये बयान लोगों में चर्चा का कारण है। उन्होंने द मौला जट्ट के हीरो फवाद खान के साथ अपनी आखिरी फिल्म 2016 में ‘ए दिल है मुश्किल’ की थी। इसके बाद उरी अटैक से भारतीय लोगों में पाकिस्तान के खिलाफ गुस्सा उमड़ा और उनकी भावनाओं को देखते हुए पाकिस्तानी एक्टर-एक्ट्रेस के साथ फिल्में करना बंद कर दिया गया।

‘भारत जोड़ो यात्रा’ में साथ-साथ चल रहे जेब कतरे: 100 लोगों का मोबाइल-सामान चोरी, MP पुलिस ने राजस्थान पुलिस को किया अलर्ट

मध्य प्रदेश पुलिस ने कॉन्ग्रेस की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ यात्रा के लिए खास ‘अलर्ट’ भेजा है। यह ‘अलर्ट’ राजस्थान पुलिस के लिए है। दरअसल, राहुल गाँधी के नेतृत्व में चल रही ‘भारत जोड़ो यात्रा’ में शामिल होने वाले लोगों को जेबकतरों द्वारा निशाना बनाए जाने के बाद एमपी पुलिस ने राजस्थान पुलिस को सतर्क किया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मध्य प्रदेश के आगर मालवा जिले में ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरान कुछ जेब कतरों ने यात्रा में शामिल लोगों को निशाना बनाया था। इनमें से कुछ जेब कतरों को पुलिस ने गिरफ्तार भी किया है। चूँकि, अब ‘भारत जोड़ो यात्रा’ राजस्थान पहुँच चुकी है, इसलिए आगे ऐसी घटना न हो, इसलिए मध्य प्रदेश पुलिस ने राजस्थान पुलिस को इस बारे में अवगत कराया है।

इस मामले में, आगर मालवा के पुलिस अधीक्षक राकेश कुमार सागर ने कहा, ‘‘हमने 8-10 जेबकतरों को पकड़ा है। इनमें से कुछ राजस्थान के कोटा और झालावाड़ के रहने वाले हैं। वहीं, कुछ मध्य प्रदेश के गुना, राजगढ़, शाजापुर और रायसेन जिले के रहने वाले हैं। प्रदेश पुलिस ने राजस्थान पुलिस को ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरान जेबकतरों से सावधान रहने के लिए सतर्क किया है।” एक पुलिस अधिकारी ने कहा:

“हमने आरोपितों (जेब कतरों) से आगर मालवा में ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरान पॉकेटमारी किए गए 5-6 मोबाइल फोन और अन्य चीजें बरामद की हैं।”

एक अन्य अधिकारी का कहना है कि इस मामले में साइबर पुलिस की भी मदद ली गई है। भारत जोड़ो यात्रा में शामिल कम से कम 4-5 लोगों ने अपने कीमती सामान के गुम होने की शिकायत दर्ज कराई है। इस दौरान, सबसे अधिक चोरी तब हुई है, जब इस ‘यात्रा’ के दौरान शिविरों में लंच या डिनर चल रहा था।

कॉन्ग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने शिकायत की है कि ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरान उनके दो मोबाइल फोन खो गए। बुरहानपुर से आगर मालवा तक राहुल गाँधी के साथ चलने वाले नेता ने नाम न छापने की शर्त पर दावा किया कि उनका 28,000 रुपए का मोबाइल फोन खो गया। कहा जा रहा है कि कॉन्ग्रेस की इस यात्रा के दौरान करीब 100 लोगों का सामान चोरी हुआ है।

‘आपकी @$$ बड़ा टॉपिक है…’ : मलाइका अरोड़ा के शो में करण जौहर ने किया सवाल, नोरा फतेही ने एटीट्यूड दिखाया; नेटिजन्स बोले- सब फेक है

मलाइका अरोड़ा (Malaika Arora) अपने चैट शो ‘मूविंग इन विद मलाइका’ (Moving In With Malaika) के प्रमोशन में बिजी हैं। इस शो के एक एपिसोड का नया प्रोमो रिलीज हुआ है। इस प्रोमो में, करण जौहर ने मलाइका से पर्सनल सवाल पूछा, जिसके बाद मलाइका जाने के लिए कहती दिखीं। वहीं, प्रोमो के लास्ट में कोरियोग्राफर टेरेंस लुईस के एक कमेंट के बाद एक्ट्रेस और डांसर नोरा फतेही भी शो छोड़कर जाती दिख रहीं हैं।

दरअसल, मलाइका अरोड़ा का चैट शो ‘मूविंग इन विद मलाइका’ में कई स्टार्स से मुलाकात करती हैं साथ ही अपनी और अन्य स्टार्स की लाइफ से जुड़े सवालों के माध्यम से फैंस को स्टार्स के बारे में बतातीं हैं। इस शो का प्रोमो क्लिप सोशल मीडिया में तेजी से वायरल हो रहा है। इसमें करण जौहर ने मलाइका अरोड़ा से उनके A** के बारे में सवाल पूछा है।

प्रोमो में, करण मलाइका से पूछते नजर आ रहे हैं, “कैसा लगता है जब आपका A** चर्चा का इतना बड़ा विषय बन जाता है?” इस सवाल के जवाब में मलाइका ने कहा, “क्या तुम सीरियस हो? यह मेरा सोफा है, यह तुम्हारा सोफा नहीं है।” इसके बाद, मलाइका हल्के गुस्से में दिखाई देतीं हैं और जवाब देने से इनकार करते हुए कहतीं हैं, “ओके, बाय करण। तुम जा सकते हो।”

वहीं, इस प्रोमो के एक अन्य हिस्से में, मलाइका और नोरा के साथ कोरियोग्राफर टेरेंस लुईस भी नजर आते हैं। टेरेंस उनके साथ डांस सीक्वेंस पर चर्चा करते हुए दिखे। इस दौरान वह, नोरा फतेही को ‘छैंया-छैंया’ गाने पर डांस करने के लिए कहते हैं, तो नोरा नाराज हो जाती हैं और कहती हैं कि उनकी भी कुछ इज्जत है और इतना कहकर वो शो से जाती नजर आती हैं। इसके बाद टेरेंस लुईस उन्हें मनाने जाते हैं।

इस प्रोमो के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद नेटिजन्स शो को स्क्रिप्टेड बताते हुए मलाइका और नोरा फतेही को ट्रोल कर रहे हैं।

एक यूजर ने लिखा, “क्या कचरा है भाई हद हो गई।”

वहीं, एक अन्य यूजर ने कमेंट करते हुए कहा, “नोरा का एटीट्यूड, जाओ अपने देश उधर करो डांस।”

एक इंस्टाग्राम यूजर ने कमेंट कर कहा, “कुछ भी रियल नहीं है। देख कर ही फेक लग रहा है।”

एक अन्य ने लिखा, “शिट, हॉटस्टार तुम कुछ बेहतर कर सकते हो।”

इस शो को फेक बताते हुए एक अन्य यूजर ने कमेंट कर कहा, “मलाइका आप बेहतर कर सकती हैं। यह सब कितना फेक लग रहा है। आज आप जहाँ हैं, वहाँ पहुँचने के लिए आपने कड़ी मेहनत की है। यदि आप कह रहीं हैं कि आप रियल हैं तो…।”

त्रिपुरा का उनाकोटी: वो जगह जहाँ 99 लाख 99 हजार 999 मूर्तियाँ, मिल सकता है विश्व हेरिटेज का टैग, कभी था शिवभक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र

पूर्वोत्तर भारत के त्रिपुरा स्थित उनाकोटी की मूर्तियों को विश्व हेरिटेज का दर्जा दिलाने की कोशिशें की जा रही हैं। यहाँ के एक पहाड़ पर 99 लाख 99 हजार 999 मूर्तियाँ हैं, जो 8वीं से 9वीं सदी के बीच बनी मानी जाती हैं। इस जगह को विश्व धरोहर घोषित करने के लिए भारत सरकार का पुरातात्विक विभाग सक्रिय है। इस जगह पर पर्यटकों के साथ श्रद्धालु भी पूजा अर्चना के लिए आते रहते हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उनाकोटी को विश्व धरोहर बनाने के प्रयास में ही त्रिपुरा सरकार इस जगह के आस-पास पर्यटन स्थल बनवा रही है। सरकार का मानना है कि उनाकोटी के माध्यम से त्रिपुरा के इस हिस्से को पूरे भारत में सांस्कृतिक रूप से भी जोड़ा जा सकता है।

उनाकोटी में स्थित मूर्तियों को या तो पहाड़ो पर उकेरा गया है या चट्टानों को काट कर बनाया गया है। इनमें भगवान शिव और गणेश की मूर्तियाँ सबसे ज्यादा चर्चित हैं। यहाँ पर काल भैरव नाम से प्रसिद्ध भगवान शंकर की मूर्ति लगभग 30 फिट ऊँची है। इनके संरक्षण के लिए जगह-जगह मूर्तियों को हाथ न लगाने और उन्हें किसी भी प्रकार का नुकसान पहुँचाने पर दंडित करने की चेतावनी लिखी हुई है।

प्रसिद्ध इतिहासकार पन्नालाल इन मूर्तियों की तुलना कम्बोडिया के अंगोर वाट से करते हैं। उन्होंने इन मूर्तियों को बेहद दुर्लभ बताते हुए कहा कि बंगाल के पाला साम्राज्य के समय उनाकोटी शिव भक्तों का प्रमुख आस्था केंद्र हुआ करता था। पन्नालाल रॉय ने इन मूर्तियों के संरक्षण को बेहद जरूरत बताते हुए कहा कि कई मूर्तियाँ मौसम और अन्य कारणों से खराब हो चुकी हैं। हालाँकि जब से इस जगह को ASI ने अपने संरक्षण में लिया, तब से यहाँ मूर्तियों का स्वरूप विकृत होने से काफी हद तक बच गया।

उनाकोटी: क्या, कहाँ

उनाकोटी बंगाली भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ 1 करोड़ से कम होता है। यह रघुनंदन पहाड़ियों पर बसा हुआ है। एक पहाड़ों के बीच से लगभग 1 घंटे के सफर के बाद आबादी से दूर यह स्थान पहाड़ों को काट कर बनाया गया है।

यहाँ नीचे और ऊपर चढ़ने के लिए सीढ़ियाँ बनी हुई हैं। अधिक उम्र के लोगों के लिए सीढ़ियों पर चढ़ने और उतरने के लिए रेलिंग बनाई गई हैं। पूरे स्थान को ASI ने एक चारदीवारी से घेर रखा है। बाहर पहरा रहता है। पर्यटकों को दिन में एक तय समय सीमा में ही यहाँ आने और जाने की अनुमति है। ऑपइंडिया की टीम ने डेढ़ साल पहले यहाँ का दौरा किया था।

ऑपइंडिया की टीम ने कुछ मूर्तियों को एक अलग स्थान पर रखे देखा। वो मूर्तियां विभिन्न देवताओं की थीं। कुछ में थोड़ा नुकसान विभिन्न कारणों से पहुँचा था। पहाड़ पर उकेरी कई मूर्तियों के ऊपर से झरना बहता है, जो प्राकृतिक है। झरने में लोग हाथ धोकर सामने रखे शिवलिंग की पूजा करते हैं।

भगवान शिव के अलावा उनाकोटी में माँ दुर्गा की और उनके शेर की भी आकृति है। त्रिशूल और नंदी बैल भी पहाड़ पर चित्रित किए गए हैं। इन मूर्तियों पर यहाँ मौजूद सुरक्षा गार्डों की सख्त नजर होती है। उनाकोटी के लगभग 10 किलोमीटर परिधि में कोई भी होटल आदि नहीं है। सरकार द्वारा शुरू किए जा रहे प्रयासों के बाद अब माना जा रहा है कि इस जगह के आस-पास पर्यटकों के रहने योग्य निर्माण होंगे।

गोवा में जिस एयरपोर्ट की रखी आधारशिला, अब उसका उद्घाटन: PM मोदी ने मनोहर पर्रिकर को किया याद, AIIMS के 3 आयुष भी देश को समर्पित

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (11 दिसंबर 2022) को गोवा में मोपा एयरपोर्ट का उद्घाटन किया। इस एयरपोर्ट को पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर करीब 2,870 करोड़ रुपए से विकसित किया गया है। इसके अलावा, पीएम मोदी ने गोवा की राजधानी पणजी में आयोजित हुए आयुर्वेद कॉन्ग्रेस के समापन समारोह में AIIMS के आयुष हॉस्पिटल समेत 3 आयुष संस्थानों का भी उद्घाटन किया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, साल 2016 में पीएम मोदी ने मोपा एयरपोर्ट की आधारशिला रखी थी। यह गोवा का दूसरा एयरपोर्ट है। यहाँ का पहला एयरपोर्ट डाबोलिम में स्थित है। इस एयरपोर्ट के माध्यम से हर साल करीब 44 लाख यात्रियों को सेवा प्रदान करने की उम्मीद है। वहीं, बाद में इस एयरपोर्ट का विस्तार कर 1 करोड़ यात्रियों तक विस्तारित किया जाना है। 2,870 करोड़ रुपए की लागत से बनकर तैयार हुआ यह एयपोर्ट कार्गो सेवाओं को भी पूरा करेगा।

गोवा के लोगों को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा:

“मुझे खुशी है कि इस हवाई अड्डे के टर्मिनल का नाम मेरे प्रिय मित्र मनोहर जी के नाम पर रखा गया है। मनोहर जी अब इस हवाई अड्डे के माध्यम से यहाँ आने वाले हर किसी की याद में रहेंगे।”

गोवा में बने डाबोलिम एयरपोर्ट से 15 घरेलू और 6 अंतरराष्ट्रीय जगहों के लिए कनेक्टिविटी है। वहीं, मोपा एयरपोर्ट के जरिए 35 घरेलू और 18 अंतरराष्ट्रीय जगहों के लिए कनेक्टिविटी का विस्तार हो जाएगा। यह एयरपोर्ट आगामी 5 जनवरी से शुरू होगा। एयरपोर्ट शुरू होने के बाद गोवा के टूरिज्म में तेजी से इजाफा होने की उम्मीद जताई जा रही है।

गौरतलब है कि साल 2014 में नरेंद्र मोदी की नेतृत्व वाली सरकार सत्ता में आने के बाद से नए एयरपोर्ट के निर्माण ने तेजी पकड़ी है। उससे पहले तक देश में कुल 74 एयरपोर्ट थे। बीते 8 सालों में यह संख्या 74 से बढ़कर 140 या इससे अधिक हो गई है। यानी मोदी सरकार में एयरपोर्ट की संख्या दोगुनी हो गई है।

केंद्र सरकार का टारगेट है कि अगले 5 साल (साल 2027 तक) में देश में एयरपोर्ट की संख्या 220 से ज्यादा कर दी जाए ताकि न सिर्फ देश बल्कि विदेशों के साथ भी कनेक्टिविटी तेज हो सके। इससे न केवल परिवहन की सुविधाओं में विस्तार होगा बल्कि टूरिज्म और व्यापार में भी तेजी से इजाफा होगा।

देश को दी 3 आयुष संस्थानों की सौगात

पीएम मोदी ने गोवा की राजधानी पणजी में 9वें आयुर्वेद कॉन्ग्रेस के समापन समारोह में AIIMS का उद्घाटन किया। इसके अलावा, उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में बने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ यूनानी मेडिसिन और दिल्ली के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ होम्योपैथी का भी वर्चुअल उद्घाटन किया।

इस दौरान, पीएम मोदी ने कहा, “आयुर्वेद एक ऐसा विज्ञान है जिसका दर्शन, जिसका उद्देश्य है ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः’ यानी सबका सुख, सबका स्वास्थ्य। पहले जिस योग और आयुर्वेद को उपेक्षित समझा जाता था, वही आज पूरी मानवता के लिए एक नई उम्मीद बन गई है। हमारे पास आयुर्वेद का परिणाम भी था, प्रभाव भी था, लेकिन प्रमाण के मामले में हम पीछे छूट रहे थे। इसलिए, आज हमें ‘डेटा बेस्ड एविडेंसेस’ का डॉक्युमेंटेशन करना होगा।”

उन्होंने यह भी कहा है, “अपने ज्ञान, विज्ञान और सांस्कृतिक अनुभव से विश्व के कल्याण का संकल्प अमृत काल का बड़ा लक्ष्य है, आयुर्वेद इसके लिए एक प्रभावी माध्यम है। भारत इस वर्ष G20 समुह की अध्यक्षता और मेजबानी कर रहा है। हमने G20 समिट की थीम वन अर्थ, वन फैमिली, वन फ्यूचर रखा है।”

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा है कि कुछ लोग समझते हैं कि आयुर्वेद, सिर्फ इलाज के लिए है लेकिन इसकी खूबी ये भी है कि आयुर्वेद हमें जीवन जीने का तरीका सिखाता है। आयुर्वेद हमें सिखाता है कि हार्डवेयर-सॉफ्टवेयर की तरह ही शरीर और मन भी एक साथ स्वस्थ रहने चाहिए, उनमें समन्वय रहना चाहिए।

मस्जिद से इमाम को उठाया, सिर में 3 गोली मारी, लाश झाड़ियों से बरामद: ईरान में चल रहे हिजाब विरोधी प्रदर्शन के बीच मौलवियों पर हमले बढ़े

शिया मुस्लिम बहुल ईरान में एक सुन्नी मौलवी के हत्या की खबर है। बताया जा रहा है कि कत्ल किए जाने से पहले मौलवी का अपहरण किया गया था। मृतक मौलवी का नाम अब्दुल वहीद है जिनकी लाश एक सड़क के किनारे झाडियों में मिली है। मौलवी अब्दुल वहीद को सिर में गोली मारी गई है। मौलवी का अपहरण गुरुवार (8 दिसंबर 2022) को एक बिना नंबर प्लेट वाली कार से किया गया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना दक्षिण-पूर्वी सिस्तान की है। यहाँ सुन्नी मौलवी अब्दुल वहीद को कुछ समय पहले क्रांति विरोधी समूह ने मौत की धमकी दी थी। गुरुवार को अचानक ही एक कार एक मस्जिद में पहुँची। इस मस्जिद का नाम इमाम हुसैन मस्जिद था जहाँ मौलवी नमाज़ पढ़ाने वाले इमाम की हैसियत से आया-जाया करते थे। यहाँ से अपहरण हुए मौलवी की लाश बाद में रिगी खाश काउंटी में बरामद हुई। मौलवी के सिर में 3 गोलियाँ मारी गईं।

इमाम के अलावा मौलवी अब्दुल वाहिद मस्जिद के पास ही मौजूद एक मदरसे के टीचर भी थे। प्रांतीय सुरक्षा परिषद के मुताबिक मौलवी की लाश शुक्रवार (9 दिसंबर 2022) को बरामद हुई थी जिनकी हत्या की जाँच करवाई जा रही है। बताया जा रहा है कि सुन्नी मौलवी की हत्या के बाद सिस्तान क्षेत्र में तनाव फ़ैल गया है। जिस जगह मौलवी की लाश मिली है वो काफी सुनसान जगह है। घटना की जानकारी होने पर लोगों की भीड़ जमा हो गई थी।

गौरतलब है कि 16 सितम्बर 2022 को ईरानी महिला महसा अमीनी की पुलिस टार्चर के बाद मौत के बाद ईरान अशांति के दौर से गुजर रहा है। वहाँ लगातार मौलवियों पर हमले किए जा रहे हैं। कहीं उनका अपहरण हो रहा है तो कहीं उनके सिर पर बँधे साफे को हाथ मारकर गिराया जा रहा है। पुलिस और प्रदर्शनकारियों की झड़प में कई लोगों की मौत हो चुकी हैं। हिंसा ईरान के लगभग सभी बड़े शहरो में फ़ैल गई यही और हजारों लोग सड़को पर रूढ़िवाद का विरोध कर रहे हैं।

माहवारी होते निकाह, बेटियों को संपत्ति में अधिकार, कट्टरपंथी मानसिकता, न्याय में देरी… जानिए क्यों जरूरी है पूरे भारत में समान नागरिक संहिता

देश में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) को लेकर बहस छिड़ी हुई है। भाजपा शासित कई राज्यों में इसे पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया गया है। यह देश के लिए अनिवार्य है। समान नागरिक संहिता के अभाव में हर धर्म के लिए अलग-अलग पर्सनल लॉ के तहत न्यायिक प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती है। इसके कारण कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। हम बात कर रहे हैं पर्सनल लॉ से होने वाली 15 प्रमुख परेशानियाँ:

  • मुस्लिम पर्सनल लॉ में बहु-विवाह करने की छूट है, लेकिन अन्य धर्मों में ‘एक पति-एक पत्नी’ का नियम बहुत कड़ाई से लागू है। बांझपन या नपुंसकता जैसे उचित और व्यावहारिक कारण होने पर भी हिंदू, ईसाई, पारसी के लिए दूसरा विवाह करना एक गंभीर अपराध है और भारतीय दंड संहिता की धारा 494 में बहुविवाह के लिए 7 वर्ष की सजा का प्रावधान है। इसीलिए कई लोग दूसरा विवाह करने के लिए मुस्लिम धर्म अपना लेते हैं। भारत जैसे सेक्युलर देश में मौज-मस्ती के लिए भी चार निकाह जायज है, जबकि इस्लामी देश पाकिस्तान में पहली बीवी की इजाजत के बिना शौहर दूसरा निकाह नहीं कर सकता हैं। मानव इतिहास में ‘एक पति-एक पत्नी’ का नियम सर्वप्रथम भगवान श्रीराम ने लागू किया था और यह किसी भी प्रकार से धार्मिक या मजहबी विषय नहीं, बल्कि ‘सिविल राइट, ह्यूमन राइट, जेंडर जस्टिस, जेंडर इक्वालिटी और राइट टू डिग्निटी’ का मामला है। इसलिए यह जेंडर न्यूट्रल और रिलीजन न्यूट्रल होना चाहिए।
  • कहने को तो भारत में संविधान अर्थात समान विधान है, लेकिन विवाह की न्यूनतम उम्र भी सबके लिए समान नहीं है। मुस्लिम लड़कियों की वयस्कता की उम्र निर्धारित नहीं है और माहवारी शुरू होने पर लड़की को निकाह योग्य मान लिया जाता है। इसलिए 9 वर्ष की उम्र में लड़कियों का निकाह कर दिया जाता है, जबकि अन्य धर्मों मे लड़कियों की विवाह की न्यूनतम उम्र 18 वर्ष और लड़कों की विवाह की न्यूनतम उम्र 21 वर्ष है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) कई बार कह चुका कि 20 वर्ष से पहले लड़की शारीरिक और मानसिक रूप से परिपक्व नहीं होती है और 20 वर्ष से पहले गर्भधारण करना जच्चा-बच्चा दोनों के लिए अत्यधिक हानिकारक है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, लड़का हो या लड़की 21 वर्ष से पहले दोनों ही मानसिक रूप से परिपक्व नहीं होते हैं। 21 वर्ष से पहले तो बच्चे ग्रेजुएशन भी नहीं कर पाते हैं और आर्थिक रूप से माता-पिता पर निर्भर होते हैं। इसलिए विवाह की न्यूनतम उम्र सबके लिए एक समान ’21 वर्ष’ करना नितांत आवश्यक है। ‘विवाह की न्यूनतम उम्र’ किसी भी तरह से धार्मिक या मजहबी विषय नहीं है बल्कि ‘सिविल राइट, ह्यूमन राइट, जेंडर जस्टिस, जेंडर इक्वालिटी और राइट टू हेल्थ’ का मामला है इसलिए यह जेंडर न्यूट्रल, रिलीजन न्यूट्रल और 21 वर्ष होना चाहिए।
  • तीन तलाक अवैध घोषित होने के बावजूद अन्य प्रकार के मौखिक तलाक (तलाक-ए-हसन एवं तलाक-ए-अहसन) आज भी मान्य है। इसमें भी तलाक का आधार बताने की बाध्यता नहीं है। केवल 3 महीने तक प्रतीक्षा करना है। वहीं अन्य धर्मों में केवल न्यायालय के माध्यम से ही विवाह-विच्छेद हो सकता है। हिंदू, ईसाई, पारसी दंपति आपसी सहमति से भी मौखिक विवाह-विच्छेद की सुविधा से वंचित हैं। मुस्लिमों में प्रचलित मौखिक तलाक का न्यायपालिका के प्रति जवाबदेही नहीं होने के कारण मुस्लिम बेटियों और उनके माता-पिता, भाई-बहन और बच्चों को हमेशा भय के वातावरण में रहना पड़ता है। तुर्की जैसे मुस्लिम बाहुल्य देश में भी अब किसी तरह का मौखिक तलाक मान्य नहीं है। इसलिए तलाक लेने का तरीका जेंडर न्यूट्रल,रिलीजन न्यूट्रल और सबके लिए यूनिफॉर्म होना चाहिए।
  • मुस्लिम कानून में मौखिक वसीयत एवं दान मान्य है, लेकिन अन्य धर्मों में केवल पंजीकृत वसीयत एवं दान ही मान्य है। मुस्लिम कानून में एक-तिहाई से अधिक संपत्ति का वसीयत नहीं किया जा सकता है, जबकि अन्य धर्मों में शत-प्रतिशत संपत्ति का वसीयत किया जा सकता है। वसीयत और दान किसी भी तरह से धार्मिक या मजहबी विषय नहीं, बल्कि ‘सिविल राइट, ह्यूमन राइट, जेंडर जस्टिस, जेंडर इक्वालिटी और राइट टू लिबर्टी’ का मामला है। इसलिए यह जेंडर न्यूट्रल, रिलीजन न्यूट्रल और सबके लिए यूनिफॉर्म होना चाहिए।
  • मुस्लिम कानून में ‘उत्तराधिकार’ की व्यवस्था अत्यधिक जटिल है। पैतृक संपत्ति में पुत्र एवं पुत्रियों के अधिकार में अत्यधिक भेदभाव है। अन्य धर्मों में भी विवाहोपरान्त अर्जित संपत्ति में पत्नी के अधिकार अपरिभाषित हैं। उत्तराधिकार के कानून बहुत जटिल हैं। विवाह के बाद पुत्रियों के पैतृक संपत्ति में अधिकार सुरक्षित रखने की व्यवस्था नहीं है। ‘उत्तराधिकार’ किसी भी तरह से धार्मिक या मजहबी विषय नहीं है, बल्कि ‘सिविल राइट, ह्यूमन राइट, जेंडर जस्टिस, जेंडर इक्वालिटी और राइट टू लाइफ’ का मामला है। इसलिए यह भी जेंडर न्यूट्रल, रिलीजन न्यूट्रल और सबके लिए यूनिफॉर्म होना चाहिए।
  • विवाह विच्छेद (तलाक) का आधार भी सबके लिए एक समान नहीं है। व्यभिचार के आधार पर मुस्लिम शौहर अपनी बीबी को तलाक दे सकता है, लेकिन बीवी अपने शौहर को तलाक नहीं दे सकती है। हिंदू, पारसी और ईसाई धर्म में तो व्यभिचार तलाक का ग्राउंड ही नहीं है। कोढ़ जैसी बीमारी के आधार पर हिंदू और ईसाई धर्म में तलाक हो सकता है, लेकिन पारसी और मुस्लिम धर्म में नहीं। कम उम्र में विवाह के आधार पर हिंदू धर्म में विवाह विच्छेद हो सकता है, लेकिन पारसी, ईसाई और मुस्लिम में यह संभव नहीं है। ‘विवाह विच्छेद’ किसी भी तरह से धार्मिक या मजहबी विषय नहीं है, बल्कि ‘सिविल राइट, ह्यूमन राइट, जेंडर जस्टिस, जेंडर इक्वालिटी और राइट टू लाइफ’ का मामला है। इसलिए यह भी पूर्णतः जेंडर न्यूट्रल, रिलीजन न्यूट्रल और सबके लिए यूनिफॉर्म होना चाहिए।
  • गोद लेने और भरण-पोषण करने का नियम भी हिंदू, मुस्लिम, पारसी और ईसाई के लिए अलग-अलग हैं। मुस्लिम महिला गोद नहीं ले सकती है और अन्य धर्मों में भी पुरुष प्रधानता के साथ गोद लेने की व्यवस्था लागू है। ‘गोद लेने का अधिकार’ किसी भी तरह से धार्मिक या मजहबी विषय नहीं है, बल्कि ‘सिविल राइट, ह्यूमन राइट, जेंडर जस्टिस, जेंडर इक्वालिटी और राइट टू लाइफ’ का मामला है। इसलिए यह भी पूर्णतः जेंडर न्यूट्रल, रिलीजन न्यूट्रल और सबके लिए यूनिफॉर्म होना चाहिए।
  • विवाह-विच्छेद के बाद हिंदू बेटियों को तो गुजारा-भत्ता मिलता है, लेकिन तलाक के बाद मुस्लिम बेटियों को गुजारा भत्ता नहीं मिलता है। गुजारा-भत्ता किसी भी तरह से धार्मिक या मजहबी विषय नहीं है, बल्कि ‘सिविल राइट, ह्यूमन राइट, जेंडर जस्टिस, जेंडर इक्वालिटी और राइट टू लाइफ’ का मामला है। इसलिए यह भी पूर्णतः जेंडर न्यूट्रल, रिलीजन न्यूट्रल और सबके लिए यूनिफॉर्म होना चाहिए। ‘भारतीय दंड संहिता’ की तर्ज पर सभी नागरिकों के लिए एक समग्र, समावेशी और एकीकृत ‘भारतीय नागरिक संहिता’ लागू होने से विवाह विच्छेद के बाद सभी बहन बेटियों को गुजारा भत्ता मिलेगा, चाहे वह हिंदू हो या मुसलमान, पारसी हो या ईसाई। इससे धर्म, जाति, क्षेत्र और लिंग आधारित विसंगतियाँ समाप्त होंगी।
  • पैतृक संपत्ति में पुत्र-पुत्री तथा बेटा-बहू को समान अधिकार प्राप्त नहीं हैं। इसमें धर्म, क्षेत्र और लिंग आधारित बहुत सी विसंगतियाँ व्याप्त हैं। विरासत, वसीयत और संपत्ति का अधिकार किसी भी तरह से धार्मिक या मजहबी विषय नहीं, बल्कि ‘सिविल राइट, ह्यूमन राइट, जेंडर जस्टिस, जेंडर इक्वालिटी और राइट टू लाइफ’ का मामला है। इसलिए यह भी पूर्णतः जेंडर न्यूट्रल, रिलीजन न्यूट्रल और सबके लिए यूनिफॉर्म होना चाहिए। ‘भारतीय दंड संहिता’ की तर्ज पर सभी नागरिकों के लिए एक समग्र, समावेशी और एकीकृत ‘भारतीय नागरिक संहिता’ लागू होने से धर्म, क्षेत्र और लिंग आधारित विसंगतियाँ समाप्त होंगी। विरासत, वसीयत तथा संपत्ति का अधिकार सबके लिए एक समान होगा। चाहे वह हिंदू हो या मुस्लिम, पारसी हो या ईसाई।
  • अलग-अलग पर्सनल लॉ लागू होने के कारण विवाह-विच्छेद की स्थिति में विवाहोपरांत अर्जित संपत्ति में पति-पत्नी को समान अधिकार नहीं है, जबकि यह किसी भी तरह से धार्मिक या मजहबी विषय नहीं, बल्कि ‘सिविल राइट, ह्यूमन राइट, जेंडर जस्टिस, जेंडर इक्वालिटी और राइट टू लाइफ’ का मामला है। इसलिए यह भी पूर्णतः जेंडर न्यूट्रल, रिलीजन न्यूट्रल और सबके लिए यूनिफॉर्म होना चाहिए। ‘भारतीय दंड संहिता’ की तर्ज पर सभी नागरिकों के लिए एक समग्र, समावेशी और एकीकृत ‘भारतीय नागरिक संहिता’ लागू होने से धर्म, क्षेत्र, लिंग आधारित विसंगतियाँ समाप्त होंगी और विवाहोपरांत अर्जित संपत्ति का अधिकार सबके लिए एक समान होगा, चाहे वह हिंदू हो या मुस्लिम, पारसी हो या ईसाई।
  • अलग-अलग धर्मों के लिए अलग-अलग पर्सनल लॉ लागू होने के कारण मुकदमों की सुनवाई में अत्यधिक समय लगता है। भारतीय दंड संहिता की तरह सभी नागरिकों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक समग्र समावेशी एवं एकीकृत भारतीय नागरिक संहिता लागू होने से न्यायालय का बहुमूल्य समय बचेगा और नागरिकों को त्वरित न्याय मिलेगा।
  • अलग-अलग संप्रदाय के लिए लागू अलग-अलग ब्रिटिश कानूनों से नागरिकों के मन में गुलामी की हीनभावना व्याप्त है। भारतीय दंड संहिता की तर्ज पर देश के सभी नागरिकों के लिए एक समग्र समावेशी और एकीकृत ‘भारतीय नागरिक संहिता’ लागू होने से समाज को सैकड़ों जटिल, बेकार और पुराने कानूनों से मुक्ति ही नहीं, बल्कि गुलामी की हीनभावना से भी मुक्ति मिलेगी।
  • अलग-अलग पर्सनल लॉ लागू होने के कारण अलगाववादी और कट्टरपंथी मानसिकता बढ़ रही है और हम एक अखण्ड राष्ट्र के निर्माण की दिशा में त्वरित गति से आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं। भारतीय दंड संहिता की तरह सभी नागरिकों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक समग्र, समावेशी एवं एकीकृत भारतीय नागरिक संहिता लागू होने से ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ का सपना साकार होगा।
  • हिंदू मैरिज एक्ट में तो महिला-पुरुष को लगभग एक समान अधिकार प्राप्त हैं, लेकिन मुस्लिम और पारसी पर्सनल लॉ में बेटियों के अधिकारों में अत्यधिक भेदभाव है। भारतीय दंड संहिता की तरह सभी नागरिकों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक समग्र, समावेशी एवं एकीकृत भारतीय नागरिक संहिता का सबसे ज्यादा फायदा मुस्लिम और पारसी बेटियों को मिलेगा, क्योंकि उन्हें पुरुषों के बराबर नहीं माना जाता है।
  • अलग-अलग पर्सनल लॉ के कारण रूढ़िवाद, कट्टरवाद, सम्प्रदायवाद, क्षेत्रवाद, भाषावाद बढ़ रहा है। देश के सभी नागरिकों के लिए एक समग्र, समावेशी और एकीकृत ‘भारतीय नागरिक संहिता’ लागू होने से रूढ़िवाद, कट्टरवाद, सम्प्रदायवाद, क्षेत्रवाद और भाषावाद ही समाप्त नहीं होगा, बल्कि वैज्ञानिक और तार्किक सोच भी विकसित होगी।

आर्टिकल 14 के अनुसार देश के सभी नागरिक एक समान हैं। आर्टिकल 15 जाति, धर्म, भाषा, क्षेत्र और जन्म स्थान के आधार पर भेदभाव का निषेध करता है। आर्टिकल 16 सबको समान अवसर उपलब्ध कराता है। आर्टिकल 19 देश मे कहीं पर भी जाकर पढ़ने, रहने, बसने, रोजगार करने का अधिकार देता है। आर्टिकल 21 सबको सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अधिकार देता है। आर्टिकल 25 धर्म पालन का अधिकार देता है, लेकिन अधर्म पालन का नहीं। रीतियों को पालन करने का अधिकार देता है, लेकिन कुरीतियों को नहीं। प्रथा को पालन करने का अधिकार देता है, लेकिन कुप्रथा को नहीं।

देश के सभी नागरिकों के लिए एक समग्र, समावेशी और एकीकृत ‘भारतीय नागरिक संहिता’ लागू होने से आर्टिकल 25 के अंतर्गत प्राप्त मूलभूत धार्मिक अधिकार जैसे पूजा, नमाज या प्रार्थना करने, व्रत या रोजा रखने तथा मंदिर, मस्जिद, चर्च, गुरुद्वारा का प्रबंधन करने या धार्मिक स्कूल खोलने, धार्मिक शिक्षा का प्रचार प्रसार करने या विवाह-निकाह की कोई भी पद्धति अपनाने या मृत्यु पश्चात अंतिम संस्कार के लिए कोई भी तरीका अपनाने में किसी भी तरह का हस्तक्षेप नहीं होगा।

विवाह की न्यूनतम उम्र, विवाह विच्छेद (तलाक) का आधार, गुजारा भत्ता, गोद लेने का नियम, विरासत और वसीयत का नियम तथा संपत्ति का अधिकार सहित उपरोक्त सभी विषय “सिविल राइट, ह्यूमन राइट, जेंडर जस्टिस, जेंडर इक्वालिटी और राइट टू लाइफ” से सम्बन्धित हैं। इनका न तो मजहब से किसी तरह का संबंध है और न तो इन्हें धार्मिक या मजहबी व्यवहार कहा जा सकता है, लेकिन आजादी के 75 साल बाद भी धर्म या मजहब के नाम पर महिला-पुरुष में भेदभाव जारी है।

हमारे संविधान निर्माताओं ने अनुच्छेद 44 के माध्यम से ‘समान नागरिक संहिता’ की कल्पना किया था, ताकि सबको समान अधिकार और समान अवसर मिले और देश की एकता, अखंडता मजबूत हो। लेकिन, वोट बैंक राजनीति के कारण आज तक ‘समान नागरिक संहिता या भारतीय नागरिक संहिता’ का एक ड्राफ्ट भी नहीं बनाया गया। जिस दिन ‘भारतीय नागरिक संहिता’ का ड्राफ्ट बनाकर सार्वजनिक कर दिया जाएगा और आम जनता विशेषकर बहन-बेटियों को इसके लाभ के बारे में पता चल जाएगा, उस दिन कोई भी इसका विरोध नहीं करेगा। सच तो यह है कि जो लोग समान नागरिक संहिता के बारे में कुछ नहीं जानते हैं, वे ही इसका विरोध कर रहे हैं।

आर्टिकल 37 में स्पष्ट रूप से लिखा है कि नीति निर्देशक सिद्धांतों को लागू करना सरकार की फंडामेंटल ड्यूटी है। जिस प्रकार संविधान का पालन करना सभी नागरिकों की फंडामेंटल ड्यूटी है, उसी प्रकार संविधान को शत-प्रतिशत लागू करना सरकार की फंडामेंटल ड्यूटी है। किसी भी सेक्युलर देश में धार्मिक आधार पर अलग-अलग कानून नहीं है, लेकिन हमारे यहाँ आज भी हिंदू मैरिज एक्ट, पारसी मैरिज एक्ट और ईसाई मैरिज एक्ट लागू है। जब तक भारतीय नागरिक संहिता लागू नहीं होगी, तब तक भारत को सेक्युलर कहना सेक्युलर शब्द को गाली देना है। यदि गोवा के सभी नागरिकों के लिए एक ‘समान नागरिक संहिता’ लागू हो सकती है तो देश के सभी नागरिकों के लिए एक ‘भारतीय नागरिक संहिता’ क्यों नहीं लागू हो सकती है?

जाति, धर्म, भाषा, क्षेत्र और लिंग आधारित अलग-अलग कानून 1947 के विभाजन की बुझ चुकी आग में सुलगते हुए धुएँ की तरह हैं, जो विस्फोटक होकर देश की एकता को कभी भी खण्डित कर सकते हैं। इसलिए इन्हें समाप्त कर एक ‘भारतीय नागरिक संहिता’ लागू करना न केवल धर्मनिरपेक्षता को बनाए रखने के लिए, बल्कि देश की एकता-अखंडता को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए भी अति आवश्यक है।

दुर्भाग्य से ‘भारतीय नागरिक संहिता’ को हमेशा तुष्टीकरण के चश्मे से देखा जाता रहा है। जब तक भारतीय नागरिक संहिता का ड्राफ्ट प्रकाशित नहीं होगा, तब तक केवल हवा में ही चर्चा होगी और समान नागरिक संहिता के बारे में सब लोग अपने-अपने तरीके से व्याख्या करेंगे और भ्रम फैलाएँगे। इसलिए विकसित देशों में लागू ‘समान नागरिक संहिता’ और गोवा में लागू ‘गोवा नागरिक संहिता’ का अध्ययन करने और ‘भारतीय नागरिक संहिता’ का ड्राफ्ट बनाने के लिए तत्काल एक ज्यूडिशियल कमीशन या एक्सपर्ट कमेटी बनाना नितांत आवश्यक है।

लेखक: अश्विनी उपाध्याय, सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता

लंच ब्रेक में लगा जय श्रीराम का नारा… सेंट जोसेफ स्कूल ने 18 छात्रों को सस्पेंड किया, प्रिंसिपल बोलीं- सिर्फ 1 को किया है, NCPCR ने जवाब माँगा

मध्यप्रदेश के सागर जिले में एक मिशनरी स्कूल में जय श्रीराम बोलने पर डेढ़ दर्जन छात्रों के सस्पेंड किए जाने का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि इस बावत स्कूल प्रशासन ने क्लास में मौजूद 30 बच्चों से लिखित माफीनामा भी लिया है। राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग ने इस घटना का संज्ञान लेते हुए सागर जिले के DM को नोटिस जारी किया है। वहीं स्कूल प्रबंधन ने सफाई देते हुए बताया कि कार्रवाई जय श्री राम बोलने पर नहीं बल्कि जूनियर छात्रों को परेशान करने पर की गई है।

पत्रिका की खबर के मुताबिक मामला सेंट जोसेफ कान्वेंट स्कूल का है। यहाँ क्लास 10 में पढ़ने वाले बच्चों पर लंच ब्रेक के दौरान जय श्रीराम के नारे लगाने का आरोप लगा। मामले की शिकायत स्कूल की प्रिंसिपल से की गई। आरोप है कि इसके बाद स्कूल प्रशासन ने पूरे क्लास के सभी 30 बच्चों से माफ़ीनाम लिखवा डाला। इतना ही नहीं, आरोप तो यह भी है कि कुल 18 छात्रों को कॉलेज से निलंबित कर दिया गया।

सागर जिले के जिला शिक्षा अधिकारी अखिलेश पाठक ने इस घटना पर बयान दिया है। उन्होंने कहा कि छात्रों का निलंबन बेहद गलत है। अखिलेश पाठक ने स्कूल को फ्रीडम ऑफ़ स्पीच का भी सम्मान करने की नसीहत दी। इन तमाम आरोपों के बीच स्कूल की प्रिंसिपल सिस्टर मोली ने कार्रवाई की जद में आए छात्रों पर जूनियर छात्रों को परेशान करने का आरोप लगाया है। सिस्टर मोली थॉमस के मुताबिक सिर्फ एक विद्यार्थी को निलंबित किया गया है।

NCPCR ने जारी किया नोटिस

छात्रों का अभिभावकों ने स्कूल प्रबंधन के एक्शन पर असंतोष जताते हुए कहा कि सस्पेंड करने के बजाए उन्हें चेतवानी दी जा सकती है। इस घटना का संज्ञान राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग के चेयरपर्सन प्रियांक कानूनगो ने लिया है। शनिवार (10 दिसंबर 2022) को उन्होंने ट्वीट कर के अख़बार की कटिंग शेयर की और जिलाधिकारी सागर को नोटिस जारी होने की जानकारी दी।

NCPCR की इस नोटिस में प्रकाशित हुई खबर का हवाला दिया गया है। नोटिस में पूरे मामले की जाँच करवा कर 7 दिनों के अंदर आख्या सौंपने के लिए कहा गया है। इस नोटिस में DM से इस बात का भी ध्यान रखने को कहा गया है कि बच्चों की पढ़ाई किसी भी रूप में बाधित न होने पाए।

ऑपइंडिया ने आरोपों की पुष्टि के लिए सेंट जोसेफ कान्वेंट स्कूल को फोन किया लेकिन उनका फोन उठा नहीं। स्कूल प्रबंधन का बयान आने के बाद उसे खबर में अपडेट किया जाएगा।

एलन मस्क ने ब्लू टिक का रेट किया महंगा, नीलाम करेंगे ऑफिस के 265 सामान: ट्विटर फाइल्स 4.0 से जानें कैसे रची गई ‘ट्रंप’ के खिलाफ साजिश

एलन मस्क के ट्विटर खरीदने के बाद से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म में लगातार बदलाव देखने को मिले। इसमें सबसे बड़ा बदलाव ट्विटर ब्लू को लेकर था जो कि अब फिर से शुरू होने जा रहा है। इस बीच खबर है कि एलन मस्क ट्विटर ऑफिस के गैर-जरूरी सामानों की नीलामी करने जा रहे हैं। यह नीलामी अगले महीने होनी है। इसके अलावा, अमेरिका की राजनीति में भूचाल मचाने वाली ट्विटर फाइल्स की नई कड़ी ‘ट्विटर फाइल्स 4.0’ रविवार (11 दिसंबर 2022) को लॉन्च हुई। इस ‘फाइल्स’ में बताया गया है कि ट्विटर से डोनाल्ड ट्रंप को बैन करने के लिए नियमों की धज्जियाँ उड़ाई गईं थीं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एलन मस्क ने ट्विटर की प्रीमियम सर्विस ‘ट्विटर ब्लू’ को एक बार फिर से लॉन्च करने का ऐलान किया है। सब्सक्रिप्शन पर आधारित यह सर्विस सोमवार (12 दिसंबर 2022) से शुरू होने जा रही है।

‘ट्विटर ब्लू’ के लिए सब्सक्रिप्शन लेने वाले यूजर्स को उनके ट्विटर हैंडल पर ‘ब्लू-टिक’ यानी नीला चेकमार्क प्राप्त करने के लिए हर महीने भुगतान करना होगा। ट्विटर ब्लू के लिए जारी नए प्लान के अनुसार, ट्विटर ने वेबयूजर्स को हर महीने 9 डॉलर यानी करीब 660 रुपए और iPhone यूजर्स से 11 डॉलर यानी करीब 907 रुपए का भुगतान करना होगा।

हालाँकि, ट्विटर की ओर से यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि APPLE यूजर्स को अन्य यूजर्स के मुकाबले अधिक चार्ज क्यों देना होगा। लेकिन, ऐसा माना जा रहा है कि, ट्विटर ‘ऐप स्टोर’ के साथ जुड़ी कॉस्ट को बैलेंस करने के लिए ऐसा कर रहा है।

बता दें कि इससे पहले नवंबर की शुरुआत में ट्विटर ब्लू की शुरुआत की थी। इस सर्विस में ट्विटर यूजर 8 डॉलर का पेमेंट करके अपने अकाउंट को वेरिफाई करा सकते थे। हालाँकि, कई फेक अकाउंट्स के वेरिफाई होने के बाद यह सर्विस हटा दी गई थी। इसके बाद अब, एलन मस्क ने अकाउंट वेरिफिकेशन के लिए यह ऐलान किया है।

ट्विटर ऑफिस के सामानों की होगी नीलामी

ट्विटर खरीदने के बस एलन मस्क ने खुलासा करते हुए कहा था कि सैन फ्रांसिस्को ऑफिस में काम करने वाले कमचारियों के भोजन के लिए ट्विटर को हर साल करीब 13 मिलियन डॉलर खर्च करना पड़ रहा है। इसके बाद एलन मस्क ने फ्री लंच सर्विस को बंद करने का ऐलान कर दिया था।

इस ऐलान के बाद, ट्विटर को कैंटीन से जुड़े सामानों की जरूरत बंद हो गई है। इसलिए, अब ट्विटर कंपनी किचिन व ऑफिस से जुड़े करीब 265 सामानों की नीलामी करने जा रही है। यह नीलामी 17-18 जनवरी को हेरिटेज ग्लोबल पार्टनर्स की वेबसाइट पर ऑनलाइन होगी।

इस नीलामी में, किचन से जुड़े सामान, इलेक्ट्रॉनिक्स आइटम, फर्नीचर, मेमोरेबल वस्तुओं समेत अन्य सामानों को बेचा जाएगा। इन सामानों में से कुछ की बोली केवल महज 25 डॉलर से शुरू होगी, जिसमें ट्विटर बर्ड स्टैच्यू और स्कल्पचर प्लांटर भी शामिल हैं।

ट्विटर फाइल्स 4.0 में हुए कई और बड़े खुलासे…

अमेरिका की राजनीति में भूचाल लाने वाली ट्विटर फाइल्स की नई सीरीज ‘ट्विटर फाइल्स 4.0’ रविवार (11 दिसंबर 2022) को जारी की गई। इससे पहले इस ‘फाइल्स’ की तीन सीरीज ट्विटर फाइल्स, ट्विटर फाइल्स 2.0 और ट्विटर फाइल्स 3.0 लॉन्च की जा चुकी है।

लेखक माइकल शेलेंबर्गर द्वारा कवर की गई ट्विटर फाइल्स 4.0 में बताया गया है कि अमेरिका कैपिटल (यूएस कैपिटल) में हुए दंगों के बाद ट्विटर ट्रस्ट एंड सेफ्टी के पूर्व-ग्लोबल हेड योएल रोथ ने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सेंसर करने का फैसला किया था। साथ ही, यह भी बताया गया है कि रोथ ने ट्विटर के अन्य जूनियर कर्मचारियों के सुझावों की पूरी तरह से अनदेखा करते हुए ट्विटर के नियमों में बदलाव कर दिए थे।

माइकल शेलेंबर्गर ने ट्वीट के थ्रेड में बताया है कि पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की पत्नी मिशेल ओबामा सहित डेमोक्रेटिक पार्टी के अन्य नेताओं और समर्थकों ने ट्विटर से डोनाल्ड ट्रम्प को ‘डी-प्लेटफॉर्म’ (हटाने) करने के लिए ट्विटर के सीईओ जैक डार्सी पर दबाव बनाया था।

हालाँकि, उस दौरान डार्सी छुट्टी पर थे और उन्होंने अधिकारियों से ट्विटर के नियमों में बदलाव न करने के लिए कहा था। लेकिन, योएल रोथ ने नियमों में फेरबदल करते हुए डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ कार्रवाई की थी।

ट्विटर फाइल्स के तीन भाग

ट्विटर फाइल्स 4.0 से पहले इसके तीन भाग जारी किए जा चुके हैं। पहले भाग ट्विटर फाइल्स में बताया गया है कि ‘द न्यूयॉर्क पोस्ट’ द्वारा अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के बेटे हंटर बाइडेन को लेकर कवर की गई ‘लैपटॉप स्टोरी’ को ‘बाइडन टीम’ के दवाब में आकर ट्विटर द्वारा हटाया गया था।

वहीं, ट्विटर फाइल्स 2.0 में बताया गया है कि ट्विटर के अधिकारी मेन स्ट्रीम व दक्षिणपंथी विचारधारा के लोगों के ट्विटर अकाउंट और ट्विट्स को सेंसर कर रहे थे। यह सब नियमों को ताक में रख कर किया जा रहा था। इसी प्रकार, ट्विटर फाइल्स 3.0 में खुलासा किया गया कि अमेरिकी जाँच एजेंसी FBI व डेमोक्रेटिक पार्टी (जो बाइडेन की पार्टी) के बड़े नेताओं के कहने पर ट्विटर के अधिकारियों ने नियमों का उल्लंघन करते हुए डोनाल्ड ट्रंप का ट्विटर हैंडल सस्पेंड किया था।