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यहूदियों के नरसंहार वाली फिल्म प्रोपगेंडा नहीं, हिंदुओं के रक्तपात वाली The Kashmir Files ‘अश्लील’: डायरेक्टर ने मारी पलटी

घाटी में हिंदुओं के नरसंहार और पलायन पर बनी ‘द कश्मीर फाइल्स’ को ‘भद्दी और प्रोपेगेंडा’ बताने के बाद IFFI जूरी हेड और इजरायल के फिल्म निर्माता नादव लैपिड (Nadav Lapid) ने पलटी मार दी है। उनके बयान को लेकर उठे विवाद के बाद उन्होंने कहा कि द कश्मीर फाइल्स एक ब्रिलियंट फिल्म है।

फिल्म निर्माता नादव लैपिड ने कश्मीर फाइल्स को बहुत लोग पसंद करते हैं और ब्रिलियंट फइल्म मानते हैं। उन्होंने कहा कि कोई यह निर्धारित निर्धारित नहीं कर सकता कि प्रोपेगेंडा क्या है। उन्होंने कहा कि IFFI के समापन समारोह में उन्होंने फिल्म के बारे में जो कुछ कहा, उस पर वे अब भी कायम हैं।

इंडिया टुडे से बातचीत करते हुए उन्होंने प्रोपेगेंडा को लेकर कहा, “कोई भी यह निर्धारित नहीं कर सकता कि प्रोपेगेंडा क्या है। मैं इस तथ्य को स्वीकार करता हूँ। यह एक शानदार फिल्म है। मैंने जो कहा वह मेरा कर्तव्य था कि मैं जो देखूँ उसे कहूँ। यह एक बहुत ही व्यक्तिपरक तरीका है।”

उन्होंने कहा कि हंगामा ‘लोगों को भड़काने के लिए उनकी टिप्पणियों में सस्ता हेरफेर’ किया गया और हंगामा कराया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि अन्य जूरी सदस्यों ने भी वही महसूस किया, जो उन्होंने किया लेकिन वे खुलकर नहीं बोले।

उन्होंने कहा, “कश्मीर में जो हुआ, ऐसे ट्रैजिक इवेंट हमें सीरियस फिल्म बनाने को प्रेरित करते हैं। ये फिल्म मेरे लिए चीप सिनेमैटिक मैनिपुलेशन है। इस फिल्म के जरिए राजनीतिक फायदा पहुँचाने की कोशिश की गई थी। मेरे बयान से दूसरे जूरी मेंबर्स भी सहमत थे। हालाँकि, डर या दबाव से वे बाद में बदल सकते हैं।”

नादव लैपिड ने कहा, “मैंने कभी भी कश्मीर और वहाँ के लोगोें के बारे में नहीं बात की। मैंने जो कुछ भी कहा, सिर्फ फिल्म को लेकर कहा था। अगर मेरे बयान से किसी को ठेस पहुँची है तो मैं माफी माँगता हूँ।”

लैपिड ने कश्मीर फाइल्स को ‘प्रोपेगेंडा और अश्लील’ बताया था। इसके साथ ही वे बाद में दो कदम आगे बढ़ते हुए कश्मीर में भारतीय नीति को ही गलत ठहरा दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि इसमें फासीवादी विशेषताएँ हैं। दरअसल, कश्मीर फाइल्स फिल्म 90 के दशक में कश्मीरी हिंदुओं के पलायन पर आधारित है। नादव ने कहा कि अगर इस तरह की फिल्म आने वाले वर्षों में इजरायल में भी बनती है तो उन्हें आश्चर्य होगा।

उन्होंने स्थानीय मीडिया Ynet से बात करते हुए कहा, “इस तरह से बोलना और राजनीतिक बयान देना आसान नहीं था। मुझे पता था कि यह एक ऐसी घटना है, जो देश से जुड़ी हुई है। हर कोई यहाँ सरकार की प्रशंसा करता है। यह कोई आसान स्थिति नहीं है, क्योंकि आप एक अतिथि के तौर पर यहाँ पर हैं।”

उन्होंने आगे कहा, आगे कहा, “मैं यहाँ हजारों लोगों के साथ एक हॉल में मौजूद था। हर कोई स्थानीय सितारों को देखने और सरकार की जय-जयकार करने के लिए उत्साहित था। उन देशों में जो तेजी से अपने मन की बात कहने या सच बोलने की क्षमता खो रहे हैं, किसी को बोलने की जरूरत है। जब मैंने यह फिल्म देखी, तो मैं इसके साथ इजरायली परिस्थिति की कल्पना किए बिना नहीं रह सका, जो यहाँ मौजूद नहीं थे। लेकिन, वे निश्चित रूप से मौजूद हो सकते थे। इसलिए मुझे ऐसा लगा कि मुझे यह करना ही पड़ेगा, क्योंकि मैं एक ऐसी जगह से आया हूँ, जहाँ खुद में सुधार नहीं हुआ है। वह खुद भी इसी रास्ते पर है।”

पंजाब में मजदूरों-किसानों पर बरसी AAP सरकार की लाठियाँ, पुलिस ने दौड़ा-दौड़ा कर पीटा: दिहाड़ी माँग रहे थे, बढ़ाई गई CM भगवंत मान के आवास की सुरक्षा

पंजाब के संगरूर में पंजाब सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे मजदूर यूनियन के लोगों और किसानों पर पंजाब पुलिस ने लाठी चार्ज किया है। जानकारी के मुताबिक यूनियन के लोग और किसान अपनी माँगों के लेकर प्रदर्शन करते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के आवास की ओर बढ़ रहे थे। तभी पुलिस ने इन पर हमला कर दिया। इस घटना में कुछ मजदूरों के चोटिल होने की खबर है।

प्रदर्शन कर रहे किसानों और मजदूरों की कई माँगे हैं। प्रदर्शनकारी पक्का रोजगार, न्यूनतम दैनिक मजदूरी में इजाफा और रहने व मकान बनाने के लिए प्लॉट की माँग कर रहे हैं। प्रदर्शानकारियों का कहना है कि मनरेगा और खेतों में काम करने पर उन्हें रोज दिहाड़ी नहीं मिलती। मजदूर संगठन के लोग मुख्यमंत्री आवास वाली कॉलोनी के गेट के आगे धरने पर बैठे हैं।

जानकारी के मुताबिक मजदूर संगठन के लोग पहले पटियाला बाईपास पर जमा हुए, उसके बाद सीएम आवास की ओर कूच करने लगे, जहाँ पहले से ही भारी पुलिस बल तैनात था। पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की, इस दौरान दोनों पक्षों में जमकर धक्का-मुक्की भी हुई। इसके बाद पुलिस ने लाठीजार्ज कर दिया, जिससे कई मजदूर-किसान घायल हो गए।

वहीं मामले में एसएसपी संगरूर सुरिंदर लांबा का कहना है कि कोई लाठीचार्ज नहीं किया गया और विरोध शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा है। उनका कहना है कि प्रदर्शनकारियों के एक आक्रामक गुट से हाथापाई हुई, लेकिन पुलिस ने हालात नियंत्रित कर लिया। उन्होंने जानकारी दी कि प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों की माँगों का संज्ञान लिया है।

आपको बता दें कि दिल्ली की AAP सरकार ने 2020-21 में हुए तथाकथित किसान आंदोलन में बढ़-चढ़ कर प्रदर्शनकारियों का साथ दिया था। आज जब पंजाब के किसान-मजदूर अपनी माँगों को लेकर पहुँचे हैं तो उनका स्वागत लाठी से किया जा रहा है। उधर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान गुजरात में विधानसभा चुनाव के लिए आम आदमी पार्टी के प्रत्याशियों के लिए वोट माँग रहे हैं। मिली जानकारी के मुताबिक, मुख्यमंत्री मान के संगरूर के आवास के बाहर सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

अब वक्फ बोर्ड खुद खोलेगा स्कूल-कॉलेज, मुस्लिम छात्राएँ पहनेंगी बुर्का-हिजाब: बोले आक्रोशित हिन्दू संगठन – देश के लिए खतरा बनेंगे शरिया शैक्षणिक संस्थान

कर्नाटक वक्फ बोर्ड ने राज्य में अपने खर्चे पर स्कूल और कॉलेज खोलने का ऐलान किया है। मामला कर्नाटक हिजाब विवाद से जुड़ा हुआ है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, राज्य में ऐसे स्कूल और कॉलेज खोले जाएँगे जहाँ मुस्लिम छात्राओं को हिजाब पहनने की इजाजत होगी।

कर्नाटक वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शफी सादी ने जानकारी दी है कि वक्फ बोर्ड सेल्फ फंडेड स्कूल-कॉलेज खोलने की योजना बना रहा है। उन्होंने बताया कि इन स्कूल-कॉलेजों में हिजाब पहनने की पूरी आजादी होगी। जानकारी यह भी है कि कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई दिसंबर महीने के अंत तक हिजाब वाले शिक्षण संस्थानों को खोले जाने की आधिकारिक घोषणा कर सकते हैं।

वक्फ बोर्ड ने ऐलान किया है कि मुस्लिमों की बढ़ती माँगों को देखते हुए शिक्षण संस्थान खोले जाएँगे। महिलाओं के लिए 10 कॉलेज खोलने की घोषणा की गई है। वक्फ के शिक्षण संस्थान मंगलुरु, शिवमोग्गा, हासन, कोडागू, बीजापुर, हुबली और अन्य इलाकों में खोले जाएँगे। शफी सादी ने कहा कि शिक्षण संस्थान बोर्ड या यूनिवर्सिटी के शिक्षा संबंधी नियमों का ही पालन करेंगे। लेकिन, वक्फ बोर्ड के शिक्षण संस्‍थान पूरी तरह से सेल्‍फ फंडेड होने की वजह से अपने नियम लागू करने के लिए स्वतंत्र होंगे।

कर्नाटक वक्फ बोर्ड के चेयरमैन ने कहा, “5 से 6 महीने पहले इसकी घोषणा की गई थी। वक्फ बोर्ड में इसके लिए 25 करोड़ रुपए आवंटित हैं। हमारे पास अपनी जमीनें हैं।” शफी सादी ने सफाई दी कि इस फैसले का हिजाब विवाद से कोई लेना-देना नहीं है। उनके मुताबिक, ये फैसला पहले ही ले लिया गया था।

उधर दक्षिणपंथी संगठनों ने वक्फ बोर्ड के इस फैसले का विरोध शुरू कर दिया है। हिन्दू नेताओं का कहना है कि सरकार को इस तरह के फैसले का समर्थन नहीं करना चाहिए। उनका कहना है कि समुदाय विशेष के लिए अलग से शिक्षण संस्थान खोले जाने की कोई आवश्यकता नहीं है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, संगठनों के नेताओं ने खोले जा रहे इन संस्थानों को ‘शरिया स्कूल’ का नाम दिया है और कहा है कि यह देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरा बन सकते हैं।

आपको बता दें कि कर्नाटक में स्कूल-कॉलेजों में हिजाब पहनने को लेकर काफी विवाद हुआ था। इसी साल की शुरुआत में उडुपी के एक कॉलेज में कुछ मुस्लिम छात्राएँ जबरन हिजाब पहनकर क्लास में दाखिल होने की कोशिश करने लगीं। जिन्हें इसकी अनुमति नहीं दी गई थी। दरअसल, हिजाब कॉलेज ड्रेस कोड का हिस्सा नहीं है। इसके बाद भी मुस्लिम समुदाय की तरफ से इसका विरोध किया गया। देखते ही देखते यह राष्ट्रीय बहस का मुद्दा बन गया कि शिक्षा संस्थानों में हिजाब पहनना सही है या नहीं – ये मामला हाई कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट के बड़े बेंच तक पहुँच चुका है।

दिल्ली शराब घोटाले में ED ने मुख्य आरोपित अमित अरोड़ा को किया गिरफ्तार, कहा- मनीष सिसोदिया सहित आरोपितों ने बार-बार बदले फोन और नष्ट किए सबूत

दिल्ली (Delhi) के शराब घोटाले को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने आरोप लगाया है कि उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया (MAnish Sisodia) सहित आरोपितों ने कई बार फोन बदले और सबूतों को नष्ट कर दिया। ED ने इसके बारे में कोर्ट को जानकारी दी। इसके साथ ही अमित अरोड़ा नाम के एक अन्य अभियुक्त को गिरफ्तार किया गया है।

जाँच एजेंसी ने बुधवार (30 नवंबर 20122) को दिल्ली की एक अदालत को बताया कि गिरफ्तार किए गए दिल्ली के व्यवसायी अमित अरोड़ा और उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने 11 फोन इस्तेमाल किए और बदले। ये फोन कथित शराब घोटाले की अवधि के दौरान इस्तेमाल किए गए और बदले गए थे।

प्रवर्तन निदेशालय ने राउज एवेन्यू कोर्ट में बताया, “इसकी भयावहता इतनी अधिक है कि अधिकांश संदिग्ध, शराब कारोबारी, वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, दिल्ली के आबकारी मंत्री (मनीष सिसोदिया) और अन्य संदिग्धों ने कई बार अपने फोन बदले हैं। उपयोग किए गए और नष्ट किए गए उपकरणों का अनुमानित मूल्य लगभग 1.38 करोड़ रुपए है।”

प्रवर्तन निदेशालय ने दिल्ली शराब नीति घोटाले की जाँच के सिलसिले में व्यवसायी अमित अरोड़ा की 7 दिन की ED हिरासत को मंजूर कर लिया। बता दें कि अमित अरोड़ा को वित्तीय जाँच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय ने आज (30 नवंबर 2022) को गिरफ्तार किया। इसके बाद उसे कोर्ट में पेश किया गया।

अमित अरोड़ा पर आरोप

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, अमित अरोड़ा के रिमांड अप्लीकेशन में ED ने कोर्ट को बताया कि अमित अरोड़ा ने दिनेश अरोड़ा के साथ साजिश और मिलीभगत में एक एल-1 थोक व्यापारी से 2.5 करोड़ की रिश्वत ली। इसे आम आदमी पार्टी के नेता विजय नायर को दिया जाना था।

ED ने यह भी कहा कि अप्रैल-मई 2022 में अमित अरोड़ा ने पंजाब सरकार और दिल्ली सरकार की मदद से महादेव लीकर को अपनी कंपनियों को सरेंडर करने और उसके बाद अपना लाइसेंस सरेंडर करने के लिए दबाव डाला था। महादेव लीकर 6% किकबैक देने के लिए तैयार नहीं था।

पता चला है कि अमित अरोड़ा ने महादेव लीकर से कहा था कि अगर होलसेल मार्जिन की 6 फीसदी रकम (यानी 12 फीसदी) रिश्वत के तौर पर नहीं चुकाते हैं तो पंजाब के उनकी शराब निर्माण की फैक्ट्रियों को वहाँ की आबकारी विभाग द्वारा बंद करा दिया जाएगा। बाद में पंजाब के आबकारी अधिकारियों के मौखिक आदेशों से कारखाने बंद कर दिए गए।

ED ने यह भी बताया कि अमित अरोड़ा ने अप्रैल-मई 2022 में जबरन वसूली और किकबैक से सहमत नहीं होने वाले अन्य कंपनियों को अपने लाइसेंस वापस करने के लिए मजबूर कर अनुचित लाभ हासिल करने में पंजाब सरकार से सहयोग लिया था और उससे राजनीतिक दबाव डलवाया था।

पूरे घोटाले में अमित अरोड़ा की मुख्य भूमिका इस बात से जाहिर होती है कि उसने न केवल एक एल-1 और दो एल-7 लाइसेंस हासिल किए, बल्कि आबकारी नीति के क्रियान्वयन से जुड़े अन्य मामलों में भी सक्रिय रूप से हस्तक्षेप रहा। अमित अरोड़ा कहता था, “हम ही सरकार हैं”।

ED ने यह भी आरोप लगाया कि मनीष सिसोदिया के प्रभाव से अमित अरोड़ा को अपनी एक दुकान तुरंत स्थानांतरित करने की मंजूरी मिल गई। एयरपोर्ट L7 जोन में H4 नंबर बिडर होने के बावजूद उसे आकर्षक एयरपोर्ट L-7 लाइसेंस मिला। जाँच के दौरान आबकारी अधिकारियों को 90 लाख और खुदरा दुकान खोलने के लिए 10 लाख रुपए घूस दिए गए। ये घूस अमित अरोड़ा के कहने पर दिए गए।

घर में घुस मुस्लिम युवकों ने दलित महिला को पीटा, गाली-गलौच कर दी जान से मारने की धमकी: मुजफ्फरनगर पुलिस ने 2 को पकड़ा, 1 फरार

उत्तर प्रदेश की मुजफ्फरनगर पुलिस ने शुक्रवार (25 नवम्बर 2022) को दलित समुदाय के लोगों के घर में घुस कर मारपीट के आरोप में 2 लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपितों के नाम शहजाद और सनव्वर हैं। आरोपित शहजाद पर पहले से ही कई मुकदमे दर्ज बताए जा रहे हैं। मारपीट में शामिल तीसरा आरोपित गुलबहार अभी फरार चल रहा है जिसकी तलाश की जा रही है।

घटना चरथावल थानाक्षेत्र के गाँव कुल्हेड़ी की है। पीड़ित परिवार द्वारा पुलिस को दी गई शिकायत के मुताबिक घटना 25 नवम्बर शाम लगभग 7 बजे की है। पीड़ित के घर में मुस्तकीम का बेटा शहजाद, मुरसलीन का बेटा गुलबहार और खैरुद्दीन का बेटा सनव्वर अचानक ही घुस गए। इन तीनों ने पीड़ित की पत्नी को बेरहमी से मारा। इस दौरान उन्होंने पीड़िता को गंदी-गंदी गालियाँ भी दी।

इसी शिकायत में आगे बताया गया है कि शोरगुल की आवाज सुन कर आस-पास के लोग जमा होने लगे। इसके बाद शहज़ाद, गुलबहार और सनव्वर पीड़िता को जान से मार डालने की धमकी देते हुए भाग निकले। पीड़ित के मुताबिक तीनों आरोपितों के हमले में उसकी पत्नी बुरी तरह से घायल हो गई है। खुद को बाल्मीकि समाज का बताते हुए पीड़ित फूल सिंह ने तीनों आरोपितों पर कानूनी कार्रवाई की माँग की है।

आरोप है कि इस दौरान तीनों आरोपितों ने पीड़ित के घर पर तोड़फोड़ भी की थी। फूल सिंह की शिकायत पर पुलिस ने शहजाद, गुलबहार और सनव्वर के खिलाफ नामजद FIR दर्ज कर ली। तीनों आरोपितों पर IPC की धारा 452, 323, 504 और 506 के अलावा SC/ST एक्ट के तहत FIR दर्ज की गई। घायल महिला का इलाज करवाया गया। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। केस दर्ज कर के पुलिस ने तीनों आरोपितों की तलाश शुरू कर दी थी।

थाना प्रभारी चरथावल इंस्पेक्टर राकेश कुमार के मुताबिक आरोपितों की तलाश के दौरान शहजाद और सन्नवर उन्हें मुजफ्फरनगर जिले के ही एक इलाके दधेडू के पास मिल गए। दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया और न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया। तीसरे आरोपित गुलबहार की तलाश की जा रही है।

गुरुग्राम में दलेर मेहंदी का फार्म हाउस सील: डेढ़ एकड़ में किया था अवैध निर्माण, NGT ने करवाई कार्रवाई

पंजाबी गायक दलेर मेहंदी (Daler Mehndi) का हरियाणा के गुरुग्राम में स्थित फार्म हाउस सील कर दिया गया है। उन पर अवैध तरीके से फार्म हाउस बनाने का आरोप लगा है। इसके अलावा प्रशासन ने मंगलवार (29 नवंबर 2022) को दो अन्य फार्म हाउस भी सील कर दिए। बताया जा रहा है कि ये तीनों फार्म हाउस सोहना में दमदमा झील के पास थे और अवैध रूप से बनाए गए थे। इसमें एक फार्म हाउस गायक दलेर मेहंदी का भी है, जो करीब डेढ़ एकड़ में फैला हुआ है।

प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कार्रवाई की गई है, क्योंकि अरावली की पहाड़ियों को नुकसान पहुँचाया जा रहा था। यह ​कार्रवाई जिला नगर नियोजक अधिकारी (डीटीपी) अमित मधोलिया ने की है। उन्होंने बताया कि ये झील के जलाशय क्षेत्र में बनाए गए अनधिकृत फार्महाउस थे। तीनों फार्महाउस को सील कर दिया गया है। इन्हें बिना किसी अनुमति के अरावली रेंज में विकसित किया गया था। एनजीटी के आदेश का पालन करते हुए पुलिस ने यह कार्रवाई की है।

क्या है कबूतरबाजी मामला

दलेर मेहंदी का विवादों से पुराना नाता है। इससे पहले भी वह कई बार विवादों में फँस चुके हैं। साल 2003 में दलेर मेहंदी के खिलाफ कबूतरबाजी (मानव तस्करी) का आरोप लगा था। इस मामले में पटियाला की सेशन कोर्ट ने 2 साल जेल की सजा सुनाई थी। उन पर 2000 रुपए का जुर्माना भी लगाया गया था। इससे पहले पटियाला के ज्युडिशियल मजिस्ट्रेट ने भी मेंहदी को यही सजा सुनाई थी, जिसे सेशन कोर्ट में चुनौती दी गई थी। 14 जुलाई 2022 को उन्हें गिरफ्तार कर पटियाला सेंट्रल जेल में भेज दिया गया था। इसके बाद उनकी तरफ से जमानत के लिए पंजाब हरियाणा हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। पहले उनकी याचिका को खारिज किया गया था, लेकिन फिर उन्हें सितंबर 2022 में रिहा कर दिया गया था।

लोगों को अवैध तरीके से विदेश भेजने को कबूतरबाजी कहते हैं। इस शब्द का इस्तेमाल पंजाब में अधिक किया जाता है। 2003 में पटियाला के थाना सदर की पुलिस ने बलवेड़ा गाँव के रहने वाले बख्शीश सिंह की शिकायत पर दलेर मेंहदी, उनके भाई शमशेर सिंह, ध्यान सिंह और बुलबुल मेहता के खिलाफ कबूतरबाजी का केस दर्ज किया था। आरोप था कि इन सभी ने लोगों को विदेश भेजने के नाम पर लाखों रुपए की धोखाधड़ी की थी।

बख्शीश सिंह ने पुलिस को दी गई शिकायत में ये आरोप लगाया था कि दलेर मेंहदी ने उनसे विदेश भेजने का वादा किया था। इसके बदले में उन्होंनें उनसे 13 लाख रुपए लिए थे। हालाँकि, बाद में वो इससे पलट गए। उन्होंने न तो उन्हें विदेश भेजा और न ही पैसे वापस किए। दलेर मेंहदी और उनके भाई शमशेर सिंह के खिलाफ कुल 31 केस दर्ज किए गए थे।

इस केस में न्यायिक मजिस्ट्रेट ने दलेर मेंहदी को दोषी करार देते हुए उन्हें सजा सुनाई थी। कोर्ट की इसी सजा को उन्होंने चुनौती दी थी। लेकिन, पटियाला सेशन कोर्ट ने उन्हें झटका देते हुए उनकी सजा को बरकरार रखा।

मनोवैज्ञानिक थी, फिर भी आफताब को नहीं पहचान पाई नई GF: श्रद्धा का मर्डर सुन बोली- वो किसी को भी मार सकता था

दिल्ली के महरौली में हुए श्रद्धा मर्डर केस में आरोपित आफताब की दरिंदगी से उसकी दूसरी प्रेमिका भी हैरान है। आफ़ताब की नई प्रेमिका ने कहा कि उसको भी श्रद्धा की ही तरह काटा जा सकता था। इसी के साथ उन्होंने बताया कि वो कभी आफ़ताब को भाँप भी नहीं पाई। नई प्रेमिका ने आफताब के अपने साथ व्यवहार को पूरी तरह से नॉर्मल बताया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक आफ़ताब की नई प्रेमिका ने खुद का श्रद्धा के मर्डर से कोई भी लेना-देना नहीं होने की जानकारी दी है। उनका कहना है कि श्रद्धा के कटे टुकड़ों से भी उनका कोई वास्ता नहीं है। लड़की का यहाँ तक कहना है कि आफ़ताब के फ़्लैट पर आने-जाने के दौरान आफताब ने उसे भनक भी नहीं लगने दी कि उसी घर में श्रद्धा की लाश टुकड़ों में कटी रखी हुई थी।

जानकारी के मुताबिक श्रद्धा की हत्या के महज 12 दिनों के ही अंदर आफताब ने नई गर्ल फ्रेंड बना ली थी। ऐसा उसने उसी डेटिंग एप के जरिए किया था जिससे वो कभी श्रद्धा से मिला था। आफ़ताब की नई प्रेमिका साइकेट्रिस्ट है जो पुलिस द्वारा किए जा रहे तमाम खुलासों से हतप्रभ है। लड़की का कहना है कि उसे आफ़ताब के व्यवहार में कभी भी कुछ असमान्य नहीं लगा। वो अपनी नई प्रेमिका को कभी डरा-सहमा भी नहीं दिखा। वह अक्सर अपने मुंबई वाले घर की बातें किया करता था।

साथ ही यह भी जानकारी दी कि आफताब खुद के लिए काफी केरयिंग था और कई परफ्यूम का कलेक्शन रखता था। उसने कुछ पर्फ्यूम अपनी नई प्रेमिका को भी गिफ्ट किए थे। दोनों 12 अक्टूबर 2022 को आफ़ताब के ही फ़्लैट पर मिले थे और काफी देर तक साथ में समय भी बिताया था। हालाँकि अब आफ़ताब की नई प्रेमिका काफी घबराई हुई है और लड़की का कहना है कि आफ़ताब किसी की भी जान ले सकता है। हालाँकि दिल्ली पुलिस ने एक लम्बे सवाल जवाब के बाद उसे वापस भेज दिया है।

बालों का DNA मिला श्रद्धा के पिता के DNA से

एक अन्य जानकारी के मुताबिक आफ़ताब लगभग 15 से 20 अलग-अलग लड़कियों के सम्पर्क में था। इन लड़कियों से वो अलग-अलग डेटिंग एप के जरिए मिला था। बताया जा रहा है कि आफ़ताब ने श्रद्धा के सिर को धड़ से अलग कर के उसके बालों को काटा था। उन्ही बालों के कुछ हिस्से दिल्ली के एक हिस्से में मिले हैं। दावा किया जा रहा है कि बालों का DNA श्रद्धा के पिता के DNA से मिल गया है।

‘द कश्मीर फाइल्स में जो देखा वो सिर्फ 5% है’: इजरायली फिल्मकार लैपिड के खिलाफ प्रदर्शन, हिंदू बोले- हमारे घावों पर छिड़का जा रहा नमक

घाटी में पंडितों के नरसंहार पर बनी ‘द कश्मीर फाइल्स’ फिल्म को IFFI जूरी हेड और इजरायल के फिल्म निर्माता नादव लैपिड (Nadav Lapid) द्वारा ‘अश्लील और प्रोपेगेंडा’ बताए जाने पर कश्मीरी पंडित भड़क गए हैं। जम्मू में कश्मीर पंडितों ने लैपिड के बयानों की निंदा की और उसे ‘घाव को नमक मलने’ जैसा बताया।

नादव लैपिड के विरोध में कश्मीरी पंडितों ने प्रदर्शन किया। कश्मीरी पंडितों का कहना है कि लैपिड ने वहाँ के नरसंहार, नस्लीय उत्पीड़न, बलात्कार और पलायन पर एक शब्द नहीं बोला, लेकिन उस तथ्य को दिखाने वाली फिल्म को ही प्रोपेगेंडा बता दिया। कश्मीरी पंडितों का पूछना है कि लैपिड की नजर में कश्मीरी पंडितों का नरसंहार और पलायन हुआ ही नहीं।

रंजन नाम के प्रदर्शनकारी कहते हैं, नादव लैपिड का बयान निंदनीय है। उन्होंने ऐसा बयान देकर जख्म पर नमक रगड़ने का काम किया है। वहीं, एक अन्य प्रदर्शनकारी ने कहा कि पिछले 32 सालों से वे न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं, लेकिन न्याय की जगह इसे प्रोपेगेंडा प्रसारित किया जा रहा है।

एक प्रदर्शनकारी योगेश पंडिता का कहना है, “कश्मीर फाइल्स सिर्फ 5% है। जो हुआ उसका 95% उन्होंने देखा ही नहीं। हम इज़राइल के राजदूत के बयान का स्वागत करते हैं, जो इजरायली फिल्म निर्माता के बयान की निंदा करता है।”

कश्मीरी ऐक्टविस्टस्ट का कहना है कि आजकल हर कोई इस फिल्म को प्रोपेगेंडा बता रहा है और कश्मीरी पंडितों की न्याय की बात कर रहा है, लेकिन सवाल है कि किससे न्याय? इसकी बात कोई नहीं कर रहा है। उन्होंने का कि 30 साल से यही नैरेटिव रचा गया कि कश्मीरी पंडितों को कुछ नहीं हुआ। यह बेहद सोच-समझकर प्रचारित किया गया।

अमित रैना ने कहा कि पहले कश्मीर के पूर्व राज्यपाल जगमोहन को दोषी बताया गया फिर इस फिल्म को बताया जाने लगा। जिन लोगों ने हथियार उठाए और कश्मीरी हिंदुओं की हत्या की, उनको लेकर सवाल नहीं उठाए जा रहे हैं। इस फिल्म ने 32 साल पुराने इस नैरेटिव का भंडाफोड़ कर दिया।

वहीं, एक अन्य कश्मीरी ऐक्टविस्ट सुशील पंडित ने कहा, जहाँ तक कश्मीरी हिंदुओं के नरसंहार का सवाल है तो वह (महबूबा) हिस्ट्रीशीटर हैं। अब तक उन्होंने अपना और अपने पिता का रोल लिमिट करने की कोशिश नहीं की। उस नरसंहार के लिए आज तक किसी को दोषी नहीं ठहराया गया, किसी को सजा नहीं हुई।”

सुशील पंडित ने कहा कि महबूबा जेहादी हैं और हमेशा जेहाद की बात करती हैं। उन्होंने हमेशा जेहादियों को बचाने की कोशिश की है। महबूबा कश्मीरियों की दुश्मन हैं। उन्होंने अपने समय में 300 से अधिक पत्थरबाजों को हायर किया था।

बता दें कि जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने लैपिड के बयान का समर्थन किया है। उन्होंने कहा, “अंतत: किसी ने फिल्म का नाम लिया, जिसे सत्ताधारी दल द्वारा मुस्लिमों, विशेष रूप से कश्मीरियों को नीचा दिखाने और पंडितों एवं मुस्लिमों के बीच की खाई को चौड़ा करने के लिए प्रचारित किया गया था। दुख की बात है कि अब सच को खामोश करने के लिए कूटनीतिक माध्यमों का इस्तेमाल किया जा रहा है।”

लैपिड ने कश्मीर फाइल्स को ‘प्रोपेगेंडा और अश्लील’ बताने के बाद दो कदम आगे बढ़ गए और कश्मीर में भारतीय नीति को ही गलत ठहरा दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि इसमें फासीवादी विशेषताएँ हैं। दरअसल, कश्मीर फाइल्स फिल्म 90 के दशक में कश्मीरी हिंदुओं के पलायन पर आधारित है। नादव ने कहा कि अगर इस तरह की फिल्म आने वाले वर्षों में इजरायल में भी बनती है तो उन्हें आश्चर्य होगा।

उन्होंने स्थानीय मीडिया Ynet से बात करते हुए कहा, “इस तरह से बोलना और राजनीतिक बयान देना आसान नहीं था। मुझे पता था कि यह एक ऐसी घटना है, जो देश से जुड़ी हुई है। हर कोई यहाँ सरकार की प्रशंसा करता है। यह कोई आसान स्थिति नहीं है, क्योंकि आप एक अतिथि के तौर पर यहाँ पर हैं।”

उन्होंने आगे कहा, आगे कहा, “मैं यहाँ हजारों लोगों के साथ एक हॉल में मौजूद था। हर कोई स्थानीय सितारों को देखने और सरकार की जय-जयकार करने के लिए उत्साहित था। उन देशों में जो तेजी से अपने मन की बात कहने या सच बोलने की क्षमता खो रहे हैं, किसी को बोलने की जरूरत है। जब मैंने यह फिल्म देखी, तो मैं इसके साथ इजरायली परिस्थिति की कल्पना किए बिना नहीं रह सका, जो यहाँ मौजूद नहीं थे। लेकिन, वे निश्चित रूप से मौजूद हो सकते थे। इसलिए मुझे ऐसा लगा कि मुझे यह करना ही पड़ेगा, क्योंकि मैं एक ऐसी जगह से आया हूँ, जहाँ खुद में सुधार नहीं हुआ है। वह खुद भी इसी रास्ते पर है।”

बता दें कि लैपिड वामपंथी विचारधारा से ग्रसित इजरायली फिल्म निर्माता है। इसने अब तक कुल 13 फिल्में डायरेक्ट की हैं। नादव लैपिड को इजरायल से नफरत वाले व्यक्ति के रूप में देखा जाता है। यहूदियों के एक मात्र देश और उसकी मातृभूमि को लेकर नादव लैपिड के विचार कितने अच्छे हैं, इसका अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि उसके विचारों में इजरायल के विरोधी देश फिलीस्तीन की तरफदारी नजर आती है।

एक इंटरव्यू में लैपिड ने अपनी फिल्म ‘सिनोनिम्स’ पर बात करते हुए इजरायल को लेकर कहा था, “फिल्म इजरायल की आत्मा के बारे में बात करती है। इजरायल की आत्मा एक बीमार आत्मा है। इजरायल के अस्तित्व के गहरे सार में कुछ गलत सा सड़ा हुआ है। यह गलत सिर्फ बेंजामिन नेतन्याहू (इजरायल के प्रधानमंत्री) नहीं है। बल्कि, मुझे लगता है कि इस इजरायली बीमारी या प्रकृति की विशेषता युवा इजरायली लोग हैं जो मस्कुलर बॉडी देखकर खुश होते हैं। लेकिन, न तो कोई सवाल नहीं उठाते हैं और न ही कोई संदेह नहीं करते। उन्हें सिर्फ इजरायली होने में गर्व होता है।”

मॉर्निंग वॉक पर निकली मंदिर के हथिनी ‘लक्ष्मी’ की मौत, लोगों ने रोते हुए दी अंतिम विदाई: लोगों ने एक्टिविस्ट्स को बताया जिम्मेदार

पुडुचेरी के मनाकुला विनयागर मंदिर (Manakula Vinayagar Temple) की प्रसिद्ध हथिनी लक्ष्मी की बुधवार (30 नवंबर, 2022) को अचानक गिरने से मौत हो गई। लक्ष्मी की मौत से इलाके में लोग बेहद दुखी हैं। सोशल मीडिया पर उसका वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वहीं, भारतीय वन सेवा के अधिकारी वंजुलवल्ली श्रीधर और एनिमल वेलफेयर के एस मुरलीधरन ने तोड़-फोड़ का संदेह जताया है और उसकी मौत के लिए मंदिर के कार्यकर्ताओं को जिम्मेदार ठहराया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, लक्ष्मी अपने महावत के साथ आज सुबह मॉर्निग वॉक पर निकली थी। इस दौरान वह अचानक बेहोश होकर सड़क पर गिर गई। उसे इलाज के लिए पशु चिकित्सकों के पास ले जाया गया, लेकिन कार्डियक अरेस्ट के कारण उसने दम तोड़ दिया। इसके बाद उसे क्रेन से उठाकर मंदिर के सामने रखा गया, ताकि भक्त लक्ष्मी को श्रद्धांजलि अर्पित कर सकें। वहीं, लक्ष्मी के मौत की खबर सुनते ही पुडुचेरी के लोग उसे देखने के लिए उमड़ पड़े। उन्होंने उसे रोते हुए अंतिम विदाई दी।

बताया जा रहा है कि हथिनी लक्ष्मी साल 1995 में 5 साल की उम्र में मनाकुला विनायगर मंदिर में आई थी। तब से उसे यहाँ भक्तों का बहुत प्यार मिला है। लोग उसे प्रसाद खिलाते थे। उसका आशीर्वाद लेते थे, लेकिन उसके इस तरह से जाने से उनका रो-रोकर बुरा हाल है।

मंदिर के कार्यकर्ताओं ने लक्ष्मी की मौत को साजिश करार दिया है। उनका आरोप है कोरोना महामारी के दौरान भाजपा नेता मेनका गाँधी द्वारा लक्ष्मी को मनाकुला विनयागर मंदिर से जबरदस्ती उठा लिया गया था। उनके मुताबिक, “हम तत्कालीन पुडुचेरी के मुख्यमंत्री नारायणसामी, कॉन्ग्रेस नेता अमेरिकाई नारायणन और इंदु मक्कल काची की मदद से लक्ष्मी को यहाँ वापस लाए। लेकिन, उसके बाद मेनका ने वन विभाग पर दबाव डाला कि वह हाथी को टहलाने तक के लिए न ले जाएँ। उसकी वजह से उसके (लक्ष्मी) शरीर में वॉटर रिटेंशन था, जिसके कारण उसे दिल का दौरा पड़ा और आज सुबह उसकी मौत हो गई।”

वहीं, दूसरी ओर भारतीय वन सेवा के अधिकारी वंजुलवल्ली श्रीधर और एनिमल वेलफेयर कार्यकर्ता एस मुरलीधरन ने तोड़-फोड़ का संदेह जताया है। मुरलीधरन ने पूछा, “किसके निर्देश पर वह हाथी को टहलाने ले गए। इसके बाद उसे शेड में बंद कर दिया और पोस्टमॉर्टम हुआ।”

‘प्रिंसिपल फ़िरोज़उद्दीन ने रेप का प्रयास किया, विरोध करने पर कर्मचारियों से पिटवाया’: सरकारी स्कूल में काम करती है हिन्दू विधवा, बताया जान का खतरा

उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में सरकारी स्कूल के एक प्रिंसिपल पर हिन्दू महिला से रेप के प्रयास का आरोप लगा है। प्रिंसिपल का नाम फिरोजउद्दीन है। पीड़िता विधवा है, जिसे उसी स्कूल में बच्चों की देखभाल की नौकरी मिली हुई है। आरोप है कि प्रिंसिपल पिछले 7 वर्षों से पीड़िता पर गंदी नजर रखे हुए था। महिला की शिकायत पर पुलिस ने FIR दर्ज कर के मामले की जाँच शुरू कर दी है। घटना शनिवार (26 नवम्बर 2022) की बताई जा रही है।

मामला मौदहा थानाक्षेत्र के तिंदूही स्थित पूर्व माध्यमिक विद्यालय का है। यहाँ परिचायिका के पद कर काम करने वाली पीड़िता ने पुलिस में शिकायत देते हुए बताया कि वह अपने अध्यापक पति की मृत्यु के बाद ‘मृतक आश्रित कोटे’ में स्कूल में नौकरी करती है। उसकी नियुक्ति 25 अगस्त, 2015 से हुई है। महिला का कहना है कि तैनाती के बाद से ही स्कूल का प्रिंसिपल फ़िरोज़उद्दीन उन पर जबरन शारीरिक संबंध बनाने का दबाव बना रहा है। शिकायत में यह भी बताया गया है कि पीड़िता ने लोकलाज के डर से उसकी हरकतों की शिकायत नहीं की तो इसका आरोपित ने गलत फायदा उठाया।

महिला ने शिकायत में आगे बताया है कि फ़िरोज़उद्दीन उसके साथ लगातार छेड़खानी कर रहा था, जिसका वो विरोध करती थी। 26 नवम्बर, 2022 को जब वो स्कूल में आने के बाद प्रिंसिपल के कमरे में रखे रजिस्टर पर दस्तखत करने गई, तब प्रिंसिपल ने अंदर से अचानक ही कुण्डी लगा ली। इस दौरान फ़िरोज़उद्दीन पीड़िता से जबरन शारीरिक संबंध बनाने की कोशिश करने लगा। महिला द्वारा इसका विरोध करने पर उसकी पिटाई भी की गई। जैसे-तैसे पीड़िता खुद को छुड़ा कर कमरे से बाहर निकल पाई।

पीड़िता ने शिकायत में आगे बताया है कि बाहर निकल कर उसने शोर मचाया तो लोग जमा हो गए। इस बीच फ़िरोज़उद्दीन भी बाहर निकल आया। उसके प्रभाव में उसी स्कूल की 3 अन्य महिला स्टाफ ने उसका पक्ष लिया और पीड़िता की पिटाई की। शिकायत में यह भी बताया गया है कि स्कूल में आने वाले मिड डे मील में भी धाँधली की जाती है। कुछ टीचरों के न आने के बावजूद भी उनके हस्ताक्षर होने और उन्हें वेतन दिए जाने की बात भी कही गई है।

महिला ने अपनी शिकायत में फ़िरोज़उद्दीन को काफी दबंग किस्म का बताते हुए अपनी जान को खतरा बताया है। बताया ये भी गया है कि फ़िरोज़उद्दीन के अब्बा पत्रकार हैं, जिनकी धौंस पर वह पीड़िता को ही गलत साबित करने पर तुला हुआ है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है।

पुलिस ने इस FIR में फ़िरोज़उद्दीन के साथ मारपीट की आरोपित 3 अन्य महिला टीचरों को को भी नामजद किया है। यह केस IPC की धारा 354 (ख), 452 और 323 के तहत लिखा गया है। ऑपइंडिया से बात करते हुए पीड़िता ने बताया कि वो 2 बच्चों की माँ है और ये नौकरी ही उनके साथ दोनों बच्चों का भी सहारा है। उन्होंने हमें आगे बताया कि जिस जगह स्कूल है, वहाँ आबादी में मुस्लिम बहुलता में हैं। महिला का आरोप है कि FIR दर्ज हुए 3 दिन बीत गए, लेकिन अभी तक आरोपित फ़िरोज़उद्दीन की गिरफ्तारी नहीं हो पाई है और वो खुलेआम घूम रहा है। पीड़िता के मुताबिक, उसे केस वापस लेने की धमकी और दबाव भी मिल रहा है।

पीड़िता ने हमें बताया कि वो फ़िरोज़उद्दीन की प्रताड़ना के चलते कहीं और ट्रांसफर करवाना चाह रही थी, लेकिन आरोपित ने अपने प्रभाव से ये भी नहीं होने दिया। इसी के साथ प्रिंसिपल के अब्बा पर यह भी आरोप है कि उसने पीड़िता के भाई को भी फोन पर धमकाया और केस वापस लेने का दबाव बनाया। महिला का कहना है कि शिक्षा विभाग ने भी अभी तक उनकी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं की है।

स्कूल में करता है योगी-मोदी विरोध बातें

पीड़िता का आरोप है कि फ़िरोज़उद्दीन स्कूल में अक्सर योगी और मोदी के खिलाफ लोगों से बातें किया करता है। महिला ने हमें बताया कि फ़िरोज़ लोगों को स्कूल परिसर में भी अक्सर यह बताते सुना जा सकता है कि भाजपा सरकार EVM में गड़बड़ी कर के बनी है।