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‘येशु मसीह के शरीर में वजाइना, वो ट्रांसजेंडर थे’: ट्रिनटी कॉलेज के रिसर्चर का दावा, भड़के चर्च ने कहा – पुरुष के शरीर में छेद कर स्त्री मत बनाओ

ट्रिनिटी कॉलेज के डीन डॉ माइकल बैनर ने कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के छात्र जोशुआ हीथ के उस दावे का समर्थन किया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि ईसा मसीह ट्रांसजेंडर थे। हालाँकि, उनके इस समर्थन के बाद चर्च से जुड़े लोग उनका विरोध कर रहे हैं और ‘ट्रांस मसीह’ की अवधारणा को नकार रहे हैं।

दरअसल, विगत रविवार (20 नवंबर, 2022) को ट्रिनिटी कॉलेज में आयोजित ईवनसॉन्ग में जूनियर रिसर्च फेलो जोशुआ हीथ ने ईसा मसीह के कुछ फोटो को प्रदर्शित किया था। इन फोटो में ईसा मसीह के शरीर में एक घाव दिखाया गया था। जोशुआ हीथ ने इस घाव की तुलना वजाइना से की थी। जोशुआ हीथ ने अपने संबोधन के दौरान तीन फोटोज दिखाए थे। इसमें, जीन मलौएल की पेंटिंग पिएटा और फ्रांसीसी पेंटर मैकरोनी की पेंटिंग क्राइस्ट्स भी शामिल है।

इस फोटो की ओर इशारा करते हुए हीथ ने जीसस के घाव और कमर तक बह रहे खून को लेकर ही टिप्पणी की थी। हीथ ने कहा था, “यदि मसीह के शरीर में मर्द और स्त्री दोनों के साथ हैं तो निश्चित तौर पर वह ट्रांसजेंडर थे।” हीथ के इस बयान के बाद ट्रिनिटी कॉलेज के डीन डॉ माइकल बैनर ने कहा, “मुमकिन है कि ईसा मसीह ट्रांसजेंडर रहे हों।” उन्होंने यह भी कहा, “हम मसीह के मेल/फीमेल शरीर वाली ऐसी तस्वीरों के बारे में सोच सकते हैं। मसीह आज हमें ट्रांसजेंडर्स के बारे में सोचने के तरीके बता रहे हैं।”

बैनर के इस बयान के बाद ईसा मसीह को मानने वालों ने उनका विरोध किया है। चर्च के एक सदस्य ने ट्रिनिटी कॉलेज के डीन को पत्र लिखते हुए कहा “मैं बेहद दुःखी हूँ। आपने मुझसे बात करने के लिए कहा था लेकिन मैं व्यथित था। मैं ऐसे किसी भी विचार को स्वीकार नहीं कर सकता जिसमें कहा गया हो कि पुरुष में छेद बनाकर उसे स्त्री बनाया जा सकता है।”

उन्होंने अपने शिकायती पत्र में यह भी कहा है कि ‘ईवनसॉन्ग’ के मंच से उनके ईश्वर के लिए जिस तरह की बातें की गईं हैं उन सभी बातों को वह अस्वीकार करते हैं। यही नहीं, ‘ट्रांस मसीह’ वाली धारणा को उन्होंने अधर्म करार दिया है।

गिनीज बुक में बजा ‘नरेंद्र मोदी स्टेडियम’ का डंका, दर्शकों की संख्या के मामले में बना दिया नया रिकॉर्ड: IPL फाइनल में हुआ था कारनामा

गुजरात स्थित नरेंद्र मोदी स्टेडियम (Narendra Modi Stadium) के नाम एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज हो गई है। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI ) के सचिव जय शाह ने रविवार (27 नवंबर, 2022) को बताया कि नरेंद्र मोदी स्टेडियम का नाम किसी भी T-20 मैच के दौरान सर्वाधिक दर्शकों की उपस्थिति के लिए ‘गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड्स’ में शामिल हो गया है। आईपीएल 2022 (IPL 2022) के फाइनल मुकाबले को यहाँ कुल 101,566 दर्शकों ने देखा था।

इस स्टेडियम को पहले गुजरात क्रिकेट संघ (जीसीए) स्टेडियम मोटेरा के नाम से जाना जाता था। इसकी क्षमता 110,000 दर्शकों की है, जो कि मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड (एमसीजी) से लगभग 10,000 अधिक है। एमसीजी की क्षमता 100,024 दर्शकों की है।

शाह ने ट्वीट किया, “मुझे गर्व और खुशी है कि जीसीए मोटेरा के भव्य ‘नरेंद्र मोदी स्टेडियम’ को किसी एक टी20 मैच में सर्वाधिक दर्शकों की उपस्थिति के लिए ‘गिनीज बुक रिकॉर्ड’ में शामिल किया गया है। इस स्टेडियम में 29 मई 2022 को आईपीएल फाइनल के दौरान 101,566 दर्शक उपस्थित थे। इसे संभव बनाने के लिए हमारे प्रशंसकों का बहुत-बहुत आभार।”

इस मौके पर बीसीसीआई ने ट्वीट कर कहा, “हर भारतीय के लिए बहुत बड़ा लम्हा है क्योंकि भारत ने गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज करवाया है। हमारे सभी प्रशंसको और दर्शकों को उनके बेजोड़ जुनून और अटूट समर्थन की वजह से यह सफल हो पाया है। नरेंद्र मोदी स्टेडियम और आईपीएल को शुभकामनाएँ।”

वहीं आईपीएल 2022 के फाइनल मुकाबले से पहले ही बीसीसीआई ने एक और वर्ल्ड रिकॉर्ड बना दिया था। बीसीसीआई ने सबसे बड़ी क्रिकेट जर्सी बनाकर गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराया था। इस जर्सी पर सभी 10 आईपीएल टीम के लोगो हैं। बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष सौरव गांगुली, सचिव जय शाह और आईपीएल बृजेश पटेल ने गिनीज रिकॉर्ड रिसीव किया था। इस विशालकाय जर्सी का साइज 66×42 मीटर है।

‘4 साल से फराज से मोहब्बत करती हूँ’: हिन्दू लड़की के अपहरण की FIR के बाद दोनों ने बनाया वीडियो, बिहार पुलिस पर लगा ‘लव जिहादी’ को बचाने का आरोप

बिहार के पूर्णिया से ‘लव जिहाद’ का मामला सामने आया है। ये मामला बनमनखी का है। लड़की के परिवार वालों ने आरोप लगाया है कि एक मुस्लिम लड़का उनकी बेटी को भगा कर ले गया है। वहीं लड़का के परिजनों का कहना है कि ये दोनों ही अपनी मर्जी से फरार हुए हैं। इस घटना को 3 दिन हो गए हैं, लेकिन मामला अब जाकर तूल पकड़ रहा है। लोगों ने विरोध प्रदर्शन करते हुए बाजार बंद करवा दिया और साथ ही थाने का भी घेराव किया।

‘दैनिक भास्कर’ की खबर के अनुसार, इस संबंध में बनमनखी थाने में इस संबंध में मामला दर्ज कराया है। स्थानीय लोगों ने भी इसे ‘लव जिहाद’ करार दिया है। अब लड़की और लड़के का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद मामले में मोड़ आ गया है, जिसमें दोनों अपनी मर्जी से साथ जाने की बात कहते दिख रहे हैं। लड़की की उम्र 19 वर्ष बताई जा रही है, जबकि आरोपित फ़राज़ 22 साल का बताया जा रहा है।

उक्त घटना गुरुवार (24 नवंबर, 2022) की बताई जा रही है। फ़राज़ दर्जी टोला का रहने वाला है। लड़के द्वारा लड़की के परिजनों को मोबाइल फोन पर धमकी दिए जाने की बात भी कही जा रही है। वहीं वीडियो में लड़का और लड़की पास बैठे दिख रहे हैं, जिसमें फराज कह रहा है कि कुछ स्थानीय नेता लड़की के पिता के साथ मिल कर साजिश रच रहे हैं। लड़की की अब तक बरामदगी नहीं हो पाई है, जिससे आक्रोशित लोगों ने जम कर विरोध प्रदर्शन किया।

थानेदार मेराज हसन को लोगों को समझाने-बुझाने के लिए लगाया गया है। पुलिस का कहना है कि लड़का-लड़की की तलाश की जा रही है। लोगों का कहना है कि पुलिस ‘लव जिहाद’ के आरोपित को बचा रही है। वीडियो में लड़की का कहना है कि उसके पिता दूसरी जगह उसकी शादी करवाना चाहते हैं, जो उसे मंजूर नहीं है। उसने कहा कि वो 4 साल से फराज के साथ है और दोनों एक-दूसरे से मोहब्बत करते हैं। मोहम्मद फराज ने दबाव डालने का आरोप लगाते हुए सरकार से माँग की कि दोनों का साथ दे।

टोपी वाले ने गोरखपुर रेलवे स्टेशन पर खुलेआम पढ़ी नमाज, विरोध करते रह गए लोग: वीडियो वायरल, कहा – आसपास कोई मस्जिद नहीं, इसीलिए…

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर रेलवे स्टेशन में एक व्यक्ति के नमाज पढ़ने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। जब वह नमाज पढ़ रहा था तब वहाँ मौजूद लोगों ने उसका विरोध किया। लेकिन, वह नहीं माना और नमाज पढ़ता रहा। वीडियो स्टेशन के कैब-वे गेट का बताया जा रहा है। वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने मामले का संज्ञान लिया है। फिलहाल, आरोपित की तलाश की जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वायरल वीडियो गोरखपुर रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर एक बने के कैब-वे गेट का है। वहाँ अधेड़ उम्र का एक व्यक्ति फर्स्ट क्लास गेट के अंदर बने टिकट काउंटर के बाहर बैठकर नमाज पढ़ता दिखाई दे रहा है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि व्यक्ति टोपी लगाए हुए नमाज पढ़ रहा है।

कहा जा रहा है कि जब नमाज पढ़ रहे इस व्यक्ति का रेलवे स्टेशन में मौजूद लोगों ने विरोध किया तो उसने कहा कि उसे ट्रेन पकड़नी है। उसने दलील दी कि पास में कोई मस्जिद नहीं मिली और न ही कोई नमाज़ पढ़ने वाली जगह दिखी, इसलिए वह रेलवे स्टेशन में ही नमाज पढ़ रहा है।

इस मामले में, आरपीएफ के प्रभारी निरीक्षक राजेश कुमार सिन्हा का कहना है कि पुलिस ने मामले का संज्ञान लिया है। सीसीटीवी फुटेज के आधार पर जाँच की जा रही है। साथ ही, आसपास स्थित खानपान के स्टॉल वालों और अन्य लोगों से पूछताछ की जा रही है। स्टेशन में नमाज पढ़ने वाले व्यक्ति की पहचान अब तक नहीं हो सकी है।

बता दें सार्वजनिक जगह में नमाज पढ़ने का यह मामला नहीं है। इससे पहले गत 21 अक्टूबर, 2022 को उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में सत्याग्रह एक्सप्रेस के स्लीपर कोच की गैलरी में नमाज पढ़ने का वीडियो वायरल हुआ था। वीडियो में देखा गया था कि स्लीपर क्लास की बोगी में दोनों तरफ यात्री बैठे हुए थे। इसके बाद भी, गैलरी में चादर बिछाकर नमाज पढ़ी जा रही थी। इस दौरान एक अन्य व्यक्ति इन नमाज़ियों की रखवाली करते हुए आने-जाने वालों को रुकने और इंतज़ार करने के लिए कहता हुआ भी देखा गया था।

‘छोटी लड़कियों को मैसेज किया, तब ध्यान नहीं भटका’: चेतन भगत को उर्फी जावेद का जवाब, वायरल कर दिए चैट के स्क्रीनशॉट्स

बिग बॉस ओटीटी (Bigg Boss OTT) से मशहूर होने वाली उर्फी जावेद (Urfi Javed) आए दिन अपने अतरंगी ड्रेस सेंस की वजह से चर्चा में रहती हैं। उर्फी अपने बोल्ड पहनावे की वजह से इंटरनेट सेंसेशन बन चुकी हैं। हालाँकि इन दिनों वह लेखक चेतन भगत के साथ विवादों की वजह से चर्चा में हैं।

दरअसल चेतन भगत (Chetan Bhagat) ने हाल ही में एक कार्यक्रम में उर्फी जावेद को लेकर टिप्पणी कर दी थी, जिसका उर्फी जावेद ने करारा जवाब दिया है। उन्होंने कहा था, “आज यूथ सिर्फ उर्फी जावेद के वीडियो देख रहे हैं, फोटो लाइक कर रहे हैं। यह उर्फी की गलती नहीं है। वो तो अपना करियर बना रही है। लेकिन लोग बिस्तर में घुस कर उर्फी की फोटोज देख रहे हैं। मैं भी आज उर्फी की सब फोटोज देखकर आया हूँ।”

चेतन भगत की यह बात उर्फी को जरा भी रास नहीं आई, उन्होंने हाल ही में लेखक के बयान पर प्रतिक्रिया भी दी है। उन्होंने अपनी इंस्‍टा स्टोरी में चेतन भगत को जमकर खरी खोटी सुनाई और कहा कि उन्होंने सच में बकवास हरकत की है। उर्फी ने कहा, ”जब अपने से आधी उम्र की लड़कियों को सोशल मीडिया पर मैसेज करते थे, तब उनके कपड़ों ने आपका ध्यान नहीं भटकाया था। आप उन इंसानों में से एक हो, जो अपनी हर गलती के लिए महिलाओं को दोषी मानते हैं।”

उन्होंने आगे लिखा, ”अगर आपकी सोच खराब है तो इसका यह मतलब नहीं है कि उसमें लड़की के कपड़ों की गलती है। आप कहते हैं कि मेरे ड्रेसिंग सेंस से देश के यंग लड़कों का ध्यान भटक रहा है। क्या आपका यंग लड़कियों को मैसेज करना ध्यान भटकाने वाला नहीं था। सच में यह बेहद बकवास है। स्टोरी में उर्फी जावेद, चेतन भगत पर लगे मी टू मामले की बात की ओर इशारा कर रही हैं।”

उर्फी की insta स्टोरी

उर्फी ने आगे लिखा, ”रेप कल्चर को बढ़ावा देना बंद कर दो तुम बीमार दिमाग वाले लोगों। मर्दों के बर्ताव के लिए औरत को जिम्मेदार ठहराना 80 के दशक की बात हो गई है मिस्टर चेतन भगत। अपने से आधी उम्र की लड़कियों को जब तुमने मैसेज किए, तो तुम्हें कौन भटका रहा था? हमेशा दूसरे जेंडर पर उंगली उठाओ। अपनी गलती मत देखो। तुम्हारे जैसे लोग यूथ को बिगाड़ रहे हैं, मैं नहीं।”

वहीं जब पैपराजी ने उनसे इस बारे में बात की और उनसे चेतन की बात पर रिएक्शन देने के लिए कहा गया, तो वह बोलीं कि उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि चेतन भगत आखिर क्या सोच रहे थे कि उन्होंने एक साहित्य के मंच पर एक एक्ट्रेस के बारे में बात की।

कॉन्ग्रेस ने जानबूझकर मालेगाँव ब्लास्ट में कर्नल पुरोहित को देशद्रोही बनाया, हिंदू आतंक का नैरेटिव गढा: रिपोर्ट से खुलासा, CWG घोटाले से ध्यान भटकाना था उद्देश्य

कॉन्ग्रेस (UPA) की नेतृत्व वाली केंद्र की तत्कालीन UPA सरकार ने भारतीय सेना के लेफ्टिनेंट कर्नल श्रीकांत प्रसाद पुरोहित (Lt. Colonel Shrikant Prasad Purohit) को जानबूझकर फँसाया था, जबकि सरकार को जानकारी थी कि वह ड्यूटी पर थे और खुफिया जानकारी जुटा रहे थे। हाल ही में सामने आए खुफिया दस्तावेजों से इसका खुलासा हुआ है।

बता दें कि मालेगांव विस्फोट मामले में 2008 में गिरफ्तार किए गए लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित को कुल 8 साल 9 महीने 22 दिन की जेल हुई थी। उस समय की सरकार और मीडिया ने ‘हिंदू आतंकवाद’ की विचार को स्थापित करने के अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित को देशद्रोही बताया।

रिपब्लिक टीवी को इससे संंबंधित सैन्य खुफिया महानिदेशालय द्वारा लिखित आधिकारिक गुप्त सेना फ़ाइल नंबर ए/31687/पुरोहित/एमआई-9 नाम का दस्तावेज मिला है। यह पत्र दिसंबर 2017 में दक्षिणी कमान संपर्क इकाई के आवेदन डिटैचमेंट 3 के जवाब में लिखा गया था। इसे कॉन्ग्रेस सरकार के साथ बातचीत का संदर्भ देते हुए कथित तौर पर सेना प्रमुख को भेजा गया था।

रिपोर्ट के अनुसार, पत्र के बिंदु 2 में डीजीएमआई ने पूर्व एटीएस प्रमुख राकेश मारिया द्वारा भेजे गए एक प्रश्न का संदर्भ दिया है, जिसमें सेना से लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित से जुड़े मामले में संबंधित किसी भी बैठक और आतंकवादी पर साझा या भेजे गए इनपुट और पत्रों का विवरण माँगा गया है। राकेश मारिया का यह सवाल राष्ट्रमंडल खेलों से संबंधित घोटाले को लेकर सुरेश कलमाड़ी से पूछताछ के नौ दिन बाद 24 मार्च 2011 को आया है। रिपब्लिक टीवी का दावा है कि यह ऐसे समय में किया गया था, जब कॉन्ग्रेस को ध्यान भटकाने की जरूरत थी।

समाचार रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि पत्र के तीसरे बिंदु से पता चलता है कि डीजीएमआई ने मारिया को 5 दिनों के बाद क्या प्रतिक्रिया दी। प्रतिक्रिया कथित तौर पर अधूरी और सेना के अन्य कार्यालयों से किसी भी परिणामी प्रतिक्रिया के बिना थी। कथित तौर पर प्रतिक्रिया थी, “लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित के मामले में किसी भी आतंकवादी से संबंधित इनपुट या बैठकों के बारे में जानकारी से संबंधित कोई भी आधिकारिक कम्युनिकेशन कार्यालय के पास उपलब्ध नहीं है।”

रिपोर्ट में कहा गया है कि कॉन्ग्रेस द्वारा ‘नो इनपुट अवेलेबल’ शब्द का इस्तेमाल सत्य के रूप में किया गया था। बाद में डीजीएमआई ने अधिक इनपुट के लिए परिणामी कार्यालयों को लिखा, लेकिन सरकार ने कोई फॉलोअप कार्रवाई नहीं की।

पेज 2 पर 4 लाइनें बताती हैं कि पूरा कॉन्ग्रेस नेतृत्व कर्नल पुरोहित के बारे में झूठ बोल रहा था। सेना के पत्र की लाइन 1 में कथित तौर पर निष्कर्ष निकाला गया है कि ‘लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित एक सोर्स नेटवर्क का संचालन कर रहे थे, जिसके माध्यम से उन्होंने खुफिया जानकारी प्राप्त की थी’। यह उस बात के विपरीत है, जिसे हमें यह मानने के लिए प्रेरित किया गया था कि ‘कोई इनपुट नहीं’ था।

लाइन 2 में आगे कहा गया है कि सेना के पत्र का निष्कर्ष है कि ‘लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित के उपयुक्त स्तर के वरिष्ठों को सोर्स द्वारा प्रदान की गई जानकारी के बारे में सूचित किया गया था’। हालाँकि, कॉन्ग्रेस ने कभी भी यह खुलासा नहीं किया कि सुधाकर चतुर्वेदी, जिन्हें इस मामले में एक आरोपित के रूप में नामित किया गया था, वे वास्तव में एक ‘सोर्स’ थे। इन्होंने सेना के लिए काम किया था।

दस्तावेज़ के बिंदु 3A से पता चलता है कि UPA सरकार की सुधाकर चतुर्वेदी से संबंधित उल्लेखित साक्ष्य तक पहुँच थी। सेना के गोपनीय दस्तावेज में लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित की गिरफ्तारी से 10 महीने पहले जनवरी 2008 में प्राप्त एक रिपोर्ट के बारे में विस्तार से बताया गया है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि ‘सूत्रों में से एक श्री सुधाकर चतुर्वेदी थे’ जिन्हें एक सक्रिय सोर्स के रूप में पेश किया गया था। इसमें कहा गया है कि सुधाकर चतुर्वेदी वास्तव में ‘अपनी जिम्मेदारी वाले क्षेत्र में राजनीतिक और धार्मिक गतिविधियों की जानकारी दे रहे थे।’ यह सब इस महीने डीडीजीएमआई द्वारा भेजे गए सेना के पत्र में लिखित है।

सुधाकर चतुर्वेदी को 2017 में लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित की रिहाई के एक महीने बाद जमानत दी गई थी। इससे पहले गृह मंत्रालय के पूर्व अवर सचिव आरवीएस मणि ने खुलासा किया था कि लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित कट्टरपंथ में शामिल समूहों की कमर तोड़ रहे थे और इसलिए उन्हें जानबूझकर यूपीए सरकार द्वारा फँसाया गया था।

कर्नल पुरोहित के दोस्त हनी बख्शी का बयान

सेना के टेक्निकल सपोर्ट डिविजन (TSD) के पूर्व कमांडिंग ऑफिसर और लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित के दोस्त कर्नल हनी बख्शी ने इस मामले में खुलासा किया है। उन्होंने कहा, “मामले की जानकारी मिलते ही मैं मुंबई गया और पुरोहित से कहा कि प्रसाद तुने गलत नहीं किया है ना तो ईश्वर में विश्वास रख और तू निकल जाएगा इससे। पुरोहित के एक सीनियर अधिकारी ने कोर्ट में कहा था कि पुरोहित जो भी कर रहे हैं, उसकी मुझे ब्रीफिंग देते हैं।”

कर्नल बख्शी ने ANI के एडिटर स्मिता प्रकाश के साथ बातचीत में कहा, “पुरोहित अप्रत्यक्ष रूप से 2003-04 मेरे अधीन थे। वह तीसरी पीढ़ी के सैन्य अधिकारी थे, जिस पर आप गर्व कर सकते हैं। वे बहुत राष्ट्रवादी थे। उनके खिलाफ सेना ने भी इन्क्वॉयरी की थी, उसमें कुछ नहीं मिला था। उस दौरान जनरल बिपिन रावत सामने आए और कहा था कि इस अधिकारी सारे सपोर्ट दिए जाएँ, जिसकी आवश्यकता हो। जनरल रावत बहुत फेयर आदमी थे।”

पुरोहित को फँसाने को लेकर कर्नल बख्शी ने कहा, “NIA के चार्जशीट में कहा गया है कि महाराष्ट्र ATS के एक अधिकारी आया है और इंटेलिजेंस JCO के पास आया और कहा कि उसे उस घर को दिखाया जाए। उसके बाद वे घर में जाते हैं और जमीन पर कुछ रगड़ने लगता है और अगले दिन फोरेंसिक टीम आती है। इस तरह RDX रखा गया था। NIA ने भी कहा कि ATS के लोगों ने फँसाने के लिए RDX प्लांट किया था।”

उस दौरान कर्नल पुरोहित को सेना द्वारा सपोर्ट नहीं करने पर कर्नल बख्शी ने कहा, “अगर एक बार नैरेटिव क्रिएट कर दिया जाए तो उसे…. ये एकदम से शॉकर के रूप में आया था कि यार, पुरोहित ने ऐसा कर दिया। उन्होंने कहा कि पुरोहित कवर्ट ऑपरेशन पर थे और इसकी बुक में एंट्री नहीं होती। इसलिए यह एक ऐसा ऑपरेशन था, जो होकर भी नहीं था।”

स्कूली छात्रों में चले लात-घूँसे और डंडे, 1 की मौत, 3 पर FIR: पत्रकारों ने घसीटा CM योगी का नाम, UP पुलिस ने सच बताया

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के दो नामी स्कूलों के छात्रों के बीच हुई मारपीट में एक छात्र की मौत के बाद सोशल मीडिया पर सीएम योगी को बदनाम करने का प्रयास हो रहा है। मृतक छात्र की पहचान अंश तिवारी के रूप में हुई है।

सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि अंश को मारने वाले के पिता सीएम योगी के आईएएस सचिव हैं इसलिए कोई गिरफ्तारी नहीं हो रही। वहीं पुलिस का कहना है कि उनकी जाँच में ऐसा कुछ सामने नहीं आया है। उन्होंने मृतक के परिजनों की शिकायत के बाद आरोपित छात्रों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। मामले की जाँच चल रही है।

अंश तिवारी की मौत

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शनिवार (26 नवंबर 2022) को लखनऊ पब्लिक स्कूल और रॉयल माउंट स्कूल के छात्रों के बीच जमकर लात-घूँसे और डंडे चले। इस मारपीट के दौरान अंश तिवारी नामक छात्र गंभीर रूप से घायल हो गया था। उसे इलाज के लिए लोहिया हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। जहाँ, इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। वह 12 वीं का छात्र था।

छात्रों के दो गुटों के बीच हुई मारपीट को लेकर कहा जा रहा है कि एक लड़के ने मृतक अंश के सिर पर गमले से हमला कर दिया था। इससे उसके सिर पर गंभीर चोटें आईं थीं और वह घायल होकर जमीन पर गिर गया था। घटना के तुरंत बाद इसकी जानकारी पुलिस को दी गई थी। लेकिन, तब तक आरोपित छात्र मौके से फरार हो चुके थे।

इस मामले में, मृतक अंश तिवारी के दादा नंद किशोर तिवारी की शिकायत के आधार पर पुलिस ने आरोपित छात्रों अभय सिंह, शाश्वत और शिवम पर हत्या की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। अंश की हत्या को लेकर उसके दादा नंद किशोर तिवारी का कहना है कि अंश का अभय सिंह से हुक्का बार को लेकर पुराना विवाद था। अभय सिंह ने साजिश के तहत उनके पोते की हत्या कराई है। उन्होंने आरोप लगाया है कि अंश की हत्या गला दबाकर की गई है।

वहीं, मामले की जाँच कर रही पुलिस का कहना है कि मृतक अंश के शरीर में कोई गंभीर चोट नहीं पाई गई है। ऐसे में उसकी मौत कैसे हुई, इसकी जाँच की जा रही है। पोस्टमार्टम के बाद उसकी मौत की वजह सामने आएगी।

CM योगी को बदनाम करने का प्रयास, लखनऊ पुलिस ने बताई सच्चाई

बता दें कि अंश की मौत के बाद सोशल मीडिया पर पत्रकार आलोक पाठक ने दावा किया था कि यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आईएएस सचिव के लड़के ने अंश की हत्या की। टोटल समाचार के पत्रकार आलोक पाठक ने घटना की वीडियो शेयर करते हुए बताया था कि 20 घंटे बाद भी मामले में कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है। इस दावे को वामपंथी पत्रकार रोहिणी सिंह ने भी शेयर किया था। हालाँकि लखनऊ पुलिस ने सक्रियता दिखाते हुए इन ट्वीट की सच्चाई बताई।

लखनऊ पुलिस ने कहा, “उक्त प्रकरण में मृतक के पिता द्वारा दी गई तहरीर के आधार पर थाना विभूतिखण्ड द्वारा सुसंगत धारा में नामजद 03 अभियुक्तों के विरुद्ध अभियोग पंजीकृत किया गया है। 03 अभियुक्तों का किसी अधिकारी से कोई संबंध नहीं है। ट्वीट में बताए गए तथ्य पूर्णतः असत्य हैं, कृपया भ्रामक सूचना ना फैलाएँ।”

‘किसी महिला को 14 सेकेंड्स देखते रहने पर जेल’: NCIB का दावा कानून की कसौटी पर कितना सही? देखें क्या कहती हैं IPC की धाराएँ

क्या आपको पता है कि अगर आपके घूरने से कोई महिला असहज महसूस करती है तो आप जेल भी जा सकते हैं? ‘राष्ट्रीय अपराध जाँच ब्यूरो (National Crime Investigation Bureau)’ के एक ट्वीट के बाद ये नियम फिर से चर्चा में आया है। NCIB एक गैर-सरकारी संगठन (NGO) है, जो अपराध-भ्रष्टाचार के खिलाफ एक नेटवर्क के जरिए देश भर की पुलिस के साथ मिल कर काम करने का दावा करता है। लेकिन, क्या सच में किसी महिला को देखने पर भी ‘टाइम लिमिट’ है?

NCIB ने अपने ट्वीट में लिखा, “आवश्यक जानकारी – किसी भी युवती/ महिला को 14 सेकेंड्स से ज्यादा देखने पर हो सकती है जेल, क्योंकि जाने-अनजाने व मजाक में, ही सही किसी परिचित व अपरिचित युवती/महिला को 14 सेकेंड्स से ज्यादा घूरना IPC की धारा 294 व 509 के तहत गंभीर अपराध है। ऐसे मामले छेड़छाड़ के अंतर्गत आते है।” आइए, अब हम आपको बताते हैं कि ‘भारतीय दंड संहिता’ की इन धाराओं में है क्या।

IPC की धारा-294 के अनुसार, सार्वजनिक स्थानों पर अश्लील कार्य करना या फिर अश्लील गीत गाना या कोई अश्लील शब्द कहना दंडात्मक अपराधों के अंतर्गत आता है। इसके लिए 3 महीने की सज़ा और जुर्माना का सामना करना पड़ सकता है। सीधे शब्दों में कहें तो किसी को परेशान करने के लिए सार्वजनिक स्थल पर अश्लील कार्य करना अपराध है। हालाँकि, ‘अश्लीलता’ क्या है, इसे यहाँ पूरी तरह परिभाषित नहीं किया गया है।

मंदिरों की कलाकृतियाँ या हजारों वर्षों की नागा साधु परंपरा को इससे बाहर रखा गया है। वहीं IPC की धारा-509 की बात करें तो किसी स्त्री का अनादर करने के लिए कोई शब्द कहना, इशारे करना या किसी वस्तु का प्रदर्शन करना 3 साल के लिए कारावास और जुर्माने को आमंत्रित कर सकता है। किसी स्त्री की ‘एकांतता का अतिक्रमण’ भी इसके तहत अपराध है। सीधे शब्दों में किसी महिला का शीलभंग करने के इरादे से किया गया शब्दों, वस्तुओं या इशारों का प्रदर्शन अपराध है।

NCIB का भ्रामक ट्वीट – ये एक NGO है, कोई सरकारी एजेंसी नहीं

हालाँकि, इन दोनों ही धाराओं में कहीं भी समयसीमा की बात नहीं है। लेकिन, NCIB के ट्वीट से कई लोगों को ऐसा प्रतीत हुआ जैसे ये किसी सरकारी एजेंसी का ट्वीट हो, जबकि ये एक संगठन है। इसने अपना लोगो भी ऐसा बना रखा है, जिससे भ्रम पैदा होता है कि ये कोई सरकारी एजेंसी है। NGO का ये दावा भ्रामक है कि 14 सेकेंड्स तक किसी महिला को देखने से जेल हो सकती है। अगर किसी महिला को असहज करने के लिए कुछ किया जाता है, तब जेल का प्रावधान है।

कानून में कहीं किसी समयसीमा का जिक्र नहीं है। अगस्त 2016 के केरल के तत्कालीन एक्साइज कमिश्नर ऋषिराज सिंह के बयान से ये कथित नियम चर्चा में आया था। उन्होंने पूछा था कि अगर 14 सेकेंड्स की अनुमति नहीं है तो क्या किसी महिला को 13 सेकेंड्स तक घूरने की अनुमति है? धारा-354D के तहत किसी महिला द्वारा मना करने के बावजूद उससे संपर्क की कोशिश करना अपराध है। पीछा करने पर भी सज़ा हो सकती है। हालाँकि, 14 सेकेंड्स वाले कानून का जिक्र आधिकारिक रूप से कहीं नहीं है।

‘जो बच्चे कागज के जहाज बनाते थे, वो आज रॉकेट बना रहे हैं’ : PM मोदी ने की 95 वीं बार ‘मन की बात’, स्कूली छात्रों से कहा- G-20 से जुड़ें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (27 नवंबर 2022) को ‘मन की बात’ कार्यक्रम के 95वें एपिसोड के जरिए लोगों को संबोधित किया। प्रधानमंत्री ने इस दौरान G-20 शिखर सम्मेलन की चर्चा की। उन्होंने कहा G-20 की अध्यक्षता करना देश के लिए गौरव की बात है।

पीएम मोदी ने अपने संबोधन की शुरुआत तेलंगाना के राजन्ना सिर्सिल्ला जिले के एक बुनकर येल्धी हरिप्रसाद गारू की चर्चा के साथ की। उन्होंने कहा, ”येल्धी हरिप्रसाद गारू ने मुझे अपने हाथों से G-20 का लोगो बुन करके भेजा है। ये शानदार उपहार देखकर तो मैं हैरान ही रह गया। हरिप्रसाद जी को अपनी कला में इतनी महारथ हासिल है कि वो सबका ध्यान आकर्षित कर लेते हैं।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि कुछ दिन पहले ही उन्हें G-20 का लोगों और भारत की अध्यक्षता की वेबसाईट को लॉन्च करने का सौभाग्य मिला था। उन्होंने कहा, ”इस लोगो का चुनाव एक प्रतियोगिता के जरिए हुआ था। जब मुझे हरिप्रसाद गारू द्वारा भेजा गया ये उपहार मिला, तो मेरे मन में एक और विचार उठा। तेलंगाना के किसी जिले में बैठा व्यक्ति भी G-20 जैसी सम्मेलन से खुद को कितना जुड़ाव महसूस कर सकता है, ये देखकर मुझे बहुत अच्छा लगा।”

उन्होंने कहा, ”G-20 की विश्व जनसंख्या में दो-तिहाई, वर्ल्ड ट्रेड में तीन-चौथाई, और वर्ल्ड जीडीपी में 85% भागीदारी है। आप कल्पना कर सकते हैं – भारत अब से 3 दिन बाद यानी 1 दिसंबर से इतने बड़े समूह की अध्यक्षता करने जा रहा है। भारत के लिए, हर भारतवासी के लिए, ये कितना बड़ा अवसर आया है। ये इसलिए भी और विशेष हो जाता है क्योंकि ये जिम्मेदारी भारत को आजादी के अमृतकाल में मिली है।” उन्होंने कहा, “हमने ( G-20 के लिए) ‘वन अर्थ, वन फैमिली, वन फ्यूचर’ की जो थीम दी है, उससे वसुधैव कुटुम्बकम के लिए हमारी प्रतिबद्धता जाहिर होती है।”

उन्होंने स्कूलों, कॉलेजों के छात्रों से G-20 से जुड़ने का आह्वान किया। इसके साथ ही उन्होंने भारत के अंतरिक्ष सेक्टर में प्राप्त उपलब्धि पर चर्चा की। उन्होंने कहा, ”18 नवंबर 2022 को पूरे देश ने स्पेस सेक्टर में एक नया इतिहास बनते देखा। इस दिन भारत ने अपने पहले ऐसे रॉकेट को अंतरिक्ष में भेजा, जिसे भारत के प्राइवेट सेक्टर ने डिजाइन और तैयार किया था। इस रॉकेट का नाम है – ‘विक्रम–एस’। श्रीहरिकोटा से स्वदेशी स्पेस स्टार्ट अप के इस पहले रॉकेट ने जैसे ही ऐतिहासिक उड़ान भरी, हर भारतीय का सिर गर्व से ऊँचा हो गया।”

उन्होंने कहा, ”ये भारत में निजी स्पेस सेक्टर के लिए एक नए युग के उदय का प्रतीक है। ये देश में आत्मविश्वास से भरे एक नए युग का आरंभ है। आप कल्पना कर सकते हैं जो बच्चे कभी हाथ से कागज का हवाई जहाज बनाकर उड़ाया करते थे, उन्हें अब भारत में ही हवाई जहाज बनाने का मौका मिल रहा है। आप कल्पना कर सकते हैं कि जो बच्चे कभी चाँद-तारों को देखकर आसमान में आकृतियाँ बनाया करते थे, उन्हें अब भारत में ही रॉकेट बनाने का मौका मिल रहा है। युवाओं के ये सपने भी साकार हो रहे हैं। रॉकेट बना रहे ये युवा मानो कह रहे हैं – Sky is not the limit।

‘भारत के सभी मुस्लिम पहले हिन्दू थे’: बोले नीतीश की पार्टी के MLC गुलाम गौस – दलितों-मुस्लिमों-गरीबों की बात करने वाले इकलौते PM हैं मोदी

नीतीश कुमार की पार्टी ‘जनता दल यूनाइटेड (JDU)’ के नेता और बिहार विधान परिषद सदस्य (MLC Ghulam Gaus) गुलाम गौस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) की तारीफ की है। उन्होंने कहा है कि पीएम मोदी ने मुस्लिमों के लिए कुछ करने के लिए कहा है इसलिए वह बधाई के पात्र हैं। इसके अलावा उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान के सभी मुस्लिम पहले हिंदू थे।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शनिवार (27 नवंबर 2022) को बिहार की राजधानी पटना में विधान परिषद सभागार में ‘वंचित पसमांदा विमर्श’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इस कार्यक्रम में गुलाम गौस ने कहा, “यदि दलित और पिछड़ों को सुविधाएं दी जाएँगी, तो वह दूसरे धर्म में नहीं जाएँगे। मैं पीएम मोदी को बधाई देता हूँ कि उन्होंने मुस्लिमों के लिए कुछ करने को कहा। आज तक देश के किसी प्रधानमंत्री ने गरीब, पिछड़ा, दलित और मुसलमानों की बात नहीं की।”

इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि हिंदुस्तान के सभी मुस्लिम पहले हिन्दू थे। उन्होंने दावा किया कि ब्राह्मणवादी व्यवस्था के कारण लोगों ने इस्लाम धर्म को अपनाया, क्योंकि ब्रह्मणवादी नीति से लोग प्रताड़ित होते थे – इसलिए धर्म को छोड़ दिया। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ लोगों की कुर्सी भले ही खतरे में हो सकती है, लेकिन देश में न तो इस्लाम खतरे में है, न हिंदुत्व खतरे में है और न ही देश खतरे में है।

इसके अलावा, गुलाम गौस ने कॉन्ग्रेस के पूर्व नेता और जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री व राज्यसभा के नेता प्रतिपक्ष रहे गुलाम नबी आजाद पर भी हमला बोला है। उन्होंने कहा है कि गुलाम नबी आजाद तो खानदानी गुलाम हैं और उन्होंने कभी मुस्लिमों के हित की बात नहीं की। ऐसे लोग सिर्फ कुर्सी के लिए जीते हैं। गुलाम नबी आजाद ने कॉन्ग्रेस से इस्तीफा देने के बाद अपनी नई पार्टी बना ली है, जिसे उन्होंने डेमोक्रेटिक आजाद पार्टी नाम दिया है।

बता दें कि बिहार विधानसभा परिषद में हुए इस कार्यक्रम का आयोजन भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री संजय पासवान ने किया था। इस कार्यक्रम में कई राजनीतिक दलों के हिंदू-मुस्लिम समुदाय के एमएलसी और विधायक मौजूद थे।