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वही शैली, वही वेशभूषा… पंजाब में पैदा हो गया है दूसरा भिंडरावाले? तिरंगे का करता है अपमान, आज तक एक FIR नहीं: हथियार लहराने वाले सहयोगी पर दर्ज हुआ मामला

कट्टरपंथी अमृतपाल पाल सिंह के सहयोगी भगवंत सिंह उर्फ ‘प्रधानमंत्री बाजेके’ पर मोगा पुलिस ने स्वतः संज्ञान लेते हुए केस दर्ज कर लिया है। बाजेके पर सोशल मीडिया पर हथियारों के प्रदर्शन के आरोप में एफआईआर दर्ज किया गया है। बाजेके गाँव का रहने वाला भगवंत सिंह खालिस्तान समर्थक अमृतपाल सिंह का करीबी है। उसे अक्सर विभिन्न कार्यक्रमों में अमृतपाल के साथ देखा जाता रहा है।

कौन है अमृतपाल सिंह?

अमृतसर के जलालपुर खेड़ा गाँव का रहने वाला अमृतपाल सिंह तब सुर्खियों में आया, जब उसने ‘वारिस पंजाब दे’ नाम के संगठन की बागडोर संभाली। वह सिर्फ 12वीं तक पढ़ा है। ‘वारिस पंजाब दे’ संगठन अभिनेता और एक्टिविस्ट दीप सिद्धू ने शुरू किया था। संदीप सिंह उर्फ़ दीप सिद्धू वही था, जिसने 26 जनवरी, 2021 को लालकिले पर खालसा पंथ का झंडा फहराया था। इसके बाद देश भर में उसकी आलोचना हुई थी। पुलिस ने उसे गिरफ्तार भी किया था।

15 फ़रवरी, 2022 को एक सड़क हादसे में दीप सिद्धू की मौत हो गई थी। उसकी मौत के बाद ‘वारिस पंजाब दे’ संगठन का मुखिया अमृतपाल सिंह को बनाया गया। लगभग दो महीने पहले 29 सितंबर को मोगा जिले में ही अलगाववादी जरनैल सिंह भिंडरावाले के गाँव रोडे में अमृतपाल सिंह की दस्तारबंदी (पगड़ी बाँधा जाना) हुई। इस समारोह में खुलकर ‘खालिस्तान जिंदाबाद’ और ‘हमें क्या चाहिए-आजादी’ जैसे नारे लगाए गए। पगड़ी पहनते ही अमृतपाल सिंह ने मंच से ‘भविष्य की जंग’ शुरू करने की घोषणा की। वह खुलेआम खालिस्तान की माँग करने लगा।

अमृतपाल की भिंडरावाले से क्यों हो रही तुलना?

खालिस्तान समर्थक अमृत पाल सिंह और भिंडरवाला (फोटो साभार: ज़ी मीडिया)

अमृतपाल सिंह ने खालिस्तानी आतंकी भिंडरावाले को प्रेरणा बताते हुए उसके रास्ते पर चलने की बात कही थी। इतना ही नहीं, अमृतपाल की वेशभूषा भी खालिस्तानी आतंकी भिंडरावाले से मिलती-जुलती है। अमृतपाल, भिंडरावाले की शैली में ही हर संवेदनशील मुद्दे पर नौजवानों को उकसाने और अलगाववाद को हवा देने की कोशिश करता है। अमृतपाल न सिर्फ जंग, खालिस्तान, आजादी, कुर्बानी और मरजीवड़े (आत्मघाती दस्ते) की बातें कर रहा है, बल्कि कानून को चुनौती देते हुए पुलिस और अदालतों को छोड़कर पंथ के दोषियों को अपने दम पर दंडित करने जैसी बातें करता है।

अमृतपाल पर राज्य सरकार मौन

इतना ही नहीं, अमृतपाल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वीडियो अपलोड कर सरेआम राष्ट्रीय ध्वज का अपमान करता है। वह कहता है, “तिरंगा हमारा झंडा नहीं है क्योंकि इस झंडे ने हमारे ऊपर बेइंतहा जुल्म किए… इसे बदल डालो… मिटा डालो।”

आश्चर्य इस बात पर है कि इतना सबकुछ होने के बाद भी इस पर एक एफआईआर तक दर्ज नहीं की गई। लोगों को भड़काने वाले राष्ट्र विरोधी बातें करने वाले के अमृतपाल के खिलाफ पुलिस किसी भी सख्त कार्रवाई से कतरा रही है। राज्य के आम आदमी पार्टी की सरकार को भी अमृतपाल के उकसावे वाले भाषणों में भी कुछ गलत नहीं दिख रहा। मुख्यमंत्री भगवंत मान भी चुप हैं। अमृतपाल सिंह और उसकी संस्था ‘वारिस पंजाब दे’ की संदिग्ध गतिविधियों पर पंजाब पुलिस और राज्य सरकार का नरम रुख चिंताजनक है।

हिन्दूवादी नेता सुधीर सूरी की हत्या में अमृतपाल का नाम

पिछले दिनों अमृतसर में हुए हिन्दूवादी नेता सुधीर सूरी की हत्या मामले में भी अमृतपाल सिंह का हाथ बताया जा रहा है। सुधीर के बेटे ने अपने पिता की हत्या का जिम्मेदार अमृतपाल को ठहराया है। सूरी की हत्या के मामले में जिस आरोपित संदीप को गिरफ्तार किया गया है, उसे एक वीडियो में अमृतपाल सिंह के साथ देखा गया है। इतना ही नहीं, आरोपी की कार पर भी ‘वारिस पंजाब दे’ का स्टीकर लगा हुआ था। इसके बावजूद अमृतपाल के खिलाफ केस दर्ज करने की माँग को राज्य सरकार ने खारिज कर दिया था।

इससे तो यही संदेश जाता है कि आम आदमी पार्टी पंजाब में अलगाववादियों का मूक समर्थन कर रही है। पिछले कुछ महीनों में घटी कुछ घटनाएँ पंजाब में आतंकवाद के पुनर्जीवित होने का संकेत दे रही हैं। सबसे खतरनाक बात यह है कि इन संकेतों को नजरअंदाज किया जा रहा है।

मंदिर के अंदर तोड़फोड़, मूर्तियों को पहुँचाया नुकसान: मेरठ पुलिस ने आरोपित को दबोचा, हिन्दू संगठनों का विरोध प्रदर्शन

उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में एक मंदिर में घुस कर मूर्तियों को नुकसान पहुँचाया गया है। घटना से नाराज हिन्दू संगठनों ने प्रदर्शन किया है। पुलिस द्वारा नई मूर्तियों को लगवाए जाने की जानकारी मिली है। पुलिस द्वारा एक आरोपित को हिरासत में लेने की भी जानकारी सामने आ रही है। घटना बुधवार (23 नवम्बर 2022) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना मेडिकल थाना क्षेत्र की है। यहाँ की चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी मार्ग पर स्थित अजंता कॉलोनी में शनि देव का एक मंदिर है। इस जगह आसपास के लोग पूजा करने आते हैं। 23 नवम्बर, 2022 को जब सुबह 6 बजे पुजारी मंदिर में पूजा करने पहुँचे तब वहाँ का सामान अस्त-व्यस्त पाया। बताया जा रहा है कि मंदिर के अंदर गणेश जी और शनिदेव के साथ अन्य मूर्तियों को भारी नुकसान पहुँचाया गया था। टूटी मूर्तियों का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

घटना की जानकारी हिन्दू संगठन के सदस्यों को हुई तो वो भी मंदिर पहुँचने लगे। कुछ ही देर बाद मंदिर के आगे भीड़ जमा हो गई और आरोपितों पर कार्रवाई की माँग की जाने लगी। घटना की जानकारी पुलिस को हुई तो वो भी मौके पर पहुँची और नाराज लोगों को समझा-बुझा कर शाँत करने का प्रयास करने लगी। मेरठ के पुलिस अधीक्षक नगर पियूष सिंह ने नई मूर्तियों को लगवाने और 1 संदिग्ध के हिरासत में होने की जानकारी दी।

पियूष सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि आरोपित ने ऐसा नशे की हालत में किया है। उन्होंने बताया कि आरोपित पर FIR दर्ज कर के जाँच की जा रही है।

सत्येंद्र जैन का ‘तबरेज भाई’ कौन, जेल में मालिश करवाने में 20 थे बिहार वाले ‘तबरेज आलम’: जिनसे सीख सकती है केजरीवाल एंड मंडली

वे सबके तबरेज भाई थे। नाम था- तबरेज आलम। बिहार में विधायक थे। सचीमुची के नहीं। उस बिहार के जो प्रकाश झा ने ‘अपहरण’ नाम की सनिमा में दिखाया है। तबरेज भाई बने नाना पाटेकर का जेल में गजब जोगार था। अपने गुर्गों के लिए विशेष इंतजाम कराने में उनका जोर न था। दिल्ली के मंत्री सत्येंद्र जैन भले जेल में ‘मसाज’ लेते हों पर तबरेज भाई के गुर्गे जेल में ‘मालिश’ लेते थे।

फिल्म अपहरण में जेल के भीतर मालिश का दृश्य

लेते क्या थे। अधनंगे लेट बैरक में करवाते थे। पूरा तेल चपोर के। उनको वीडियो लीक होने का टेंशन भी न था। वैसे तबरेज भाई ‘मुँहचोर’ भी नहीं थे कि गुर्गों की मालिश को फिजियोथेरेपी बता दें। तबरेज भाई के गुर्गे की सेवा के लिए जेल में पट्ठों की भी कमी न थी। थोबड़े से ही हार्डकोर लगते थे। उन्हें ‘बलात्कारी’ को ‘फिजियोथेरेपिस्ट’ बताकर छिपाना भी न पड़ता था।

तिहाड़ में मसाज लेते सत्येंद्र जैन

बाबू रमाधीर सिंह का कहना है कि हिंदुस्तान में जब तक सनिमा है लोग चुतिया बनते रहेंगे। ऐसे ही तबरेज भाई से सीख आप चुतिया बना सकती है। कहते हैं कि ‘अपहरण’ उस इंडस्ट्री पर बनी है जो ‘सामाजिक न्याय के मसीहा’ वाले बिहार में एकमात्र फलता-फूलता उद्योग था। इस इंडस्ट्री की ‘मनी लॉन्ड्रिंग’ अपने तबरेज भाई ही करते थे। ये तब की बात है जब मनी लॉन्ड्रिंग में सत्येंद्र जैन जेल न पहुँचे थे।

तबरेज भाई का जलवा ही कुछ ऐसा था। उनके गुर्गे जेल में थूक चटवाते थे। बैरक में बैठे-बैठे ‘प्रोटेक्शन मनी’ वसूलते थे। मजाल कोई सुकेश चंद्रशेखर कभी शिकायत कर दे। उनके गुर्गे को जब मन होता धोती-कुर्ता पहन जेल से बाहर निकल जाते। मम्मी कसम कभी तबरेज भाई को कहना न पड़ा- गया सिंह के लिए भाभी जी बहुत चिंतित हैं। तबरेज भाई ने कभी न कहा- भाभी जी, हम समझ सकते हैं… जब गया का काम हो गया तब भी नहीं। बस भाभी जी को गुजर-बसर के लिए ‘मनी लॉन्ड्रिंग’ का सांत्वना दे आए।

वक्त बदला तो नए गुर्गे के लिए तबरेज भाई ने जेल में जिम तक जोगार दी। मजाल कोई बग्गा लिख दे कि जिम का सामान बाहर से आया है। तबरेज भाई के गुर्गे कभी ड्राई फ्रूट्स और सलाद के लिए भी न रोए। भई जो ‘प्रोटेक्शन मनी’ लेता हो वो काहे का रोए। जितने देर में रोएगा उतने देर में धोती-कुर्ता पहनकर मौर्या से खाकर लौट आएगा। इसलिए वो नौबत ही न आई कि तबरेज भाई के गुर्गों को यह कहना पड़े कि वजन कम हो गया है। आयरन और प्रोटीन की कमी हो रही है।

बताते हैं कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल सनिमा प्रेमी हैं। उनके नंबर दो मनीष सिसोदिया भी। AAP के संस्थापक मालिक ​सनिमा का रिव्यू भी देते रहे हैं। सो, लगता नहीं उन्होंने ‘अपहरण’ मिस की होगी। शायद वर्ल्ड क्लास स्कूल और शराब पॉलिसी बनाने में पटकथा भेजे से फ्री बिजली-पानी की तरह निकल गई होगी।

तबरेज भाई मिसाल हैं। बिना सत्ता में रहते हुए भी जेल जोगार से चलाए जाने का। कोई शोर नहीं। यहाँ तिहाड़ अपनी ही सरकार की। फिर भी बिना तेल चपोरे मसाज पर इतनी थू-थू! वो भी तबरेज भाई वाली संभावनाओं से ओत-प्रोत ‘अमानतुल्लाह’ के रहते। लाहौल विला कूवत…

‘ISIS विचारधारा हो या जिहादी, देश की सुरक्षा के लिए खतरा बनने पर क्रूरता से कुचल दिया जाएगा’: केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा- गुजरात में BJP अपना पिछला रिकॉर्ड तोड़ेगी

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने कहा कि साल 1990 के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) गुजरात में एक भी चुनाव नहीं हारी है। चाहे वह विधानसभा का चुनाव हो या लोकसभा का। इस बार भाजपा अब तक हासिल किए गए सीटों और वोट प्रतिशत के सारे रिकॉर्ड को तोड़ने जा रही है। उन्होंने कहा कि देश में आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरा बनने वाले किसी भी विचारधारा, चाहे वह ISIS हो या जिहादी, क्रूरता से कुचल दिया जाएगा।

आम आदमी पार्टी (AAP) को इस चुनाव में फैक्टर मानते हुए अमित शाह ने कहा कि त्रिकोणीय चुनाव गुजरात का स्वभाव नहीं है। उन्होंने कहा कि चिमनभाई पटेल, शंकर सिंह वाघेला और केशुभाई पटेल ने कोशिश की थी, लेकिन उन लोगों को अपनी-अपनी पार्टी को खत्म करना पड़ा। इसलिए इस चुनाव में AAP का नाम सिर्फ मीडिया में है, जमीनी स्तर पर नहीं।

गुजरात में कॉन्ग्रेस के कम होते जनाधार के कारण वैक्यूम को AAP द्वारा भरने के सवाल पर केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा कि यह भाजपा द्वारा भी भरा जा सकता है। उन्होंने कहा कि कई बार जनता सत्ताधारी पार्टी को और मजबूत करने की कोशिश करती है। गुजरात में भाजपा के मामले में ऐसा ही है।

रिपब्लिक न्यूज के संपादक अर्णव गोस्वामी के साथ बाचतीत में अमित शाह ने कहा, “गुजरात में कॉन्ग्रेस ही विपक्षी पार्टी है, AAP नहीं। उन्होंने कहा कि वे 47 विधानसभा क्षेत्रों में प्रत्यक्ष रूप से शामिल रहे हैं, जमीन स्तर के कार्यकर्ताओं के साथ संवाद किए हैं और इसमें स्पष्ट है कि मुकाबला कॉन्ग्रेस से है, लेकिन भारी जीत भाजपा की होने जा रही है।”

सीएम अरविंद केजरीवाल द्वारा भारतीय मुद्रा पर लक्ष्मी-गणेश की फोटो छापने की माँगकर हिंदुत्व कार्ड खेलने की कोशिश पर अमित शाह ने कहा, “गुजरात की जनता इतनी भोली नहीं है। राजनीति में हर व्यक्ति की विश्वसनीयता का अपना एक इतिहास होता है। आप किस तरह की बात करते हो, आपकी आइडियोलॉजी क्या है और उसका लक्ष्य क्या है?”

उन्होंने आगे कहा, “जैसे हमने भारतीय जनसंघ से लेकर भारतीय जनता पार्टी तक कहा कि हम धारा 370 हटाएँगे। एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान नहीं चल सकते। हमने इसे करके दिखाया। हमन रामजन्मभूमि को लेकर कहा था कि हमारा मानना है कि रामजी का जन्म इसी स्थान पर हुआ था। जब नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा सत्ता में आई और प्रधानमंत्री ने सारी समस्याओं को दूर कर भूमि पूजन और शिलान्यास किया तो जनता में एक विश्वास बना। तो इससे क्रेडेनशियल बनते हैं।”

तीन तलाक को लेकर उन्होंने कहा, “किसी भी पंथनिरपेक्ष देश में धर्म के आधार पर कानून नहीं होने चाहिए। इसलिए हमने तीन तलाक खत्म किए। तो हमने करके दिखाया। तो बोलने से पार्टी या व्यक्ति की विश्वसनीयता नहीं बनती, करने से बनती है। भाजपा के पास उसके कामों की पूँजी है।”

समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा, “हमने कहा था कि इस देश में समान नागरिक संहिता की पैरवी करेंगे और अगर हम पावर में आते हैं तो इसे लाएँगे। हमने 1950 में ये बात कही थी और आज भारत के तीन राज्यों ने इसके लिए पहल की है। कुछ ही दिनों में तीनों राज्यों में कॉमन सिविल दिखाई देगा।”

राज्यों के बजाए केंद्र में UCC लागू करने के सवाल पर गृहमंत्री ने कहा कि भाजपा का मुख्य उद्देश्य इसे बहस में लाना है। राज्य इसे लागू करते हैं तो इस पर बहस होगी। उन्होंने कहा कि भाजपा की आइडियोलॉजी के आधार पर इतना बड़ा फैसला लेने के बजाय अच्छा हो कि इस पर एक सार्वजनिक बहस हो। अन्य लोगों के विचारों का भी महत्व है और उस पर चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि समय देखकर इस पर संसद में भी चर्चा होगी।

विनायक दामोदर सावरकर पर राहुल गाँधी के बयान को लेकर अमित शाह ने कहा कि एक देशभक्त के लिए इस तरह के विचार निंदनीय हैं। सावरकर ने सिर्फ देश के लिए सोचा और असीम यातनाएँ सहीं। उन्होंने कहा कि सावरकर ने बिना सोचे-समझे देश के लिए दरिया में छलाँग लगा दी। ऐसे व्यक्ति के लिए देश के साथ धोखेबाजी वाली बात कहना किसी भी व्यक्ति या पार्टी को शोभा नहीं देता।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर अमित शाह ने कहा कि आजाद भारत के इतिहास में उनसे अधिक लोकप्रिय प्रधानमंत्री आज तक नहीं हुआ। वे आज भी सबसे लोकप्रिय प्रधानमंत्री हैं। उन्होंने कहा, “यूपी चुनाव के बाद प्रधानमंत्री दिल्ली जाते हैं और यूक्रेन और रूस के नेताओं से कहते हैं कि हमारे बच्चे फँसे हैं। अगर 2-3 घंटे के लिए युद्ध रोक दिया जाए तो हम अपने बच्चों को निकाल लेंगे और दोनों देश उनकी बात मान जाते हैं। आज उनसे ज्यादा प्रभावशाली नेता पूरे विश्व में कोई नहीं है।”

लाल बहादुर शास्त्री का उदाहरण देते हुए अमित शाह ने कहा, “हमने शास्त्री जी के आह्वान पर देश की जनता को चावल छोड़ने की बात सुनी थी। उनके बाद पहली बार कोरोना काल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर देश की 130 जनता अपने घरों में बंद रही।”

गुजरात के घटलोडिया सीट की रैली में बेट द्वारका के अवैध मजारों पर अपने दिए गए बयान को लेकर अमित शाह ने कहा, “बेट द्वारका देश के करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। माना जाता है कि जब द्वारका समुद्र में डूबी तो वहीं डूबी है। इसके तथ्य भी मिले हैं। वो एक जाँच का विषय है। देश में किसी भी जगह पर, खासकर सीमांत क्षेत्र में और दरियाई सीमा पर अवैध अतिक्रमण होता है तो वह देश के लिए खतरा है और वह अवैध अतिक्रमण धार्मिक आधार पर होता है तो और बड़ा खतरा है।”

आंतरिक सुरक्षा को लेकर उन्होंने कहा, “आंतरिक सुरक्षा का मुद्दा किसी भी राज्य के चुनाव के लिए महत्वपूर्ण है और गुजरात जैसे सीमांत राज्य के लिए और महत्वपूर्ण है। मैंने अपने युवा दिनों में देखा है कि जहाँ से पोरबंदर जिले की शुरुआत होती थी, वहाँ पर बोर्ड लिखा था- ‘यहाँ से पोरबंदर जिले की सीमा शुरू होती है, यहाँ से कानून-व्यवस्था की सीमा समाप्त होती है।’ गुजरात सरकार की वेबसाइट पर आज भी लिखा है कि 1984 में नोटिफिकेशन निकालकर कर पोरबंदर जेल बंद करनी पड़ी थी, क्योंकि वहाँ कंट्रोल नहीं हो पा रहा थ।”

उन्होंने आगे कहा, “पूरे सागर के किनारे स्मगलरों का अड्डा था। यहीं से मौत का सामान पूरे देश को जाता था। 2001 में नरेंद्र भाई के शासन के बाद वहाँ परिंदा भी पर नहीं मार सकता। स्मगलिंग की एक्टिविटी बंद हो गई। जो गैंग्स बने थे, उन्हें दूरबीन लेकर भी आज आप ढूँढ नहीं सकते। 365 दिन में 250 दिन कर्फ्यू रहता था गुजरात में। सांप्रदायिक हिंसा होती रहती थी। आज 20 साल से किसी ने कर्फ्यू नहीं देखा है।”

देश में जिहादी गतिविधियों के जारी रहने को लेकर गृहमंत्री ने कहा कि आंतरिक सुरक्षा को लेकर सरकार की जीरो टोलरेेंस नीति है। उन्होंने कहा कि इसके लिए UAPA कानून में संशोधन लाकर उसे कठोर बनाया गया। NIA में संशोधन करके विदेशों तक उसकी जाँच का दायर बढ़ाया। संगठन के साथ-साथ व्यक्ति को भी टेररिस्ट घोषित करने का अधिकार NIA को दिया गया। NIA के दायरे को बढ़ाकर नारकोटिक्स और वामपंथी उग्रवादी तक ले गए।

अमित शाह ने कहा कि अब देश में साजिश करना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि ISIS हो या जिहादी हो, अगर वे देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरा बनेंगी तो उन्हें क्रूरता के साथ कुचल दिया जाएगा। उन्हें बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बहुत समय के बाद आज देश अपनी संस्कृति के प्रति गौरवान्वित हो रहा है। इसके मूल में गुजरात की भाजपा की सरकार रही है।

जिस क्राउडफंडिंग प्लेटफॉर्म पर मोदी घृणा के लिए जुटाए गए पैसे, वो फिर से सक्रिय: अबकी कॉन्ग्रेस नेता जिग्नेश मेवानी जुटा रहे फंड, उमर सिद्दीकी है CEO

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से नफरत करने वाले कुछ लोगों द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला क्राउडफंडिंग प्लेटफॉर्म ‘Our Democracy’ फिर से ऑनलाइन है। इस बार कॉन्ग्रेस नेता जिग्नेश मेवानी अपने चुनाव प्रचार के लिए फंड जुटाने के लिए इसका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करते देखे गए। मेवानी का कैंपेन 16 नवंबर को वेबसाइट पर शुरू किया गया था। कैंपेन की लॉचिंग पर मेवानी ने एक वीडियो जारी कर दावा किया, “विधायकों की खरीद-फरोख्त के दौर में एक ‘नॉन करप्ट’ विधायक होना आसान नहीं है। भाजपा जैसे बड़े दल के सामने लड़ना मेरे लिए चुनौती है।”

जिग्नेश ने लोगों से कहा, “अगर वे मुझे ईमानदार नेता मानते हैं। उन्हें लगता है कि मैं सच्चाई से काम रहा हूँ। संविधान में जिन मूल्यों की बात की गई है, उन मूल्यों को प्रोटेक्ट करने की लड़ाई लड़ रहा हूँ, तो प्लीज मेरे इस कैंपेन को सपोर्ट किजिए। इस कैंपेन के लिंक को तमाम व्हाट्सएप्प ग्रुप और जहाँ भी आपका संपर्क है, वहाँ शेयर किजिए। इस संदेश को ज्यादा से ज्यादा फैलाएँ। पिछली बार भी मैंने कहा था कि जनता का नेता जनता के चंदे से चुनाव लड़ेगा। आप सभी से हाथ जोड़कर विनती है प्लीज मेरा सहयोग करें।”

दिलचस्प बात यह है कि जिग्नेश ने लोगों से जिस व्हाट्सएप्प पर उनके कैंपेन का लिंक फैलाने का आग्रह किया, वह लंबे समय से इस प्लेटफॉर्म का मजाक उड़ाते आ रहे हैं। उन्होंने कई बार यह कहकर भाजपा समर्थकों का मजाक उड़ाया कि वे अपनी कई जानकारी ‘व्हाट्सएप्प यूनिवर्सिटी’ से प्राप्त करते हैं। दरअसल, मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर फैली फर्जी खबरों के लिए इस तरह के शब्द प्रयोग किए जाते हैं।

जिग्नेश ने लोगों से अपने कैंपेन का लिंक फैलाने के लिए व्हाट्सएप का उपयोग करने को कहा। (फोटो साभार: ट्विटर)

‘ऑवर डेमोक्रेसी’ पर जिग्नेश के कैंपेन का एक और दिलचस्प पहलू यह है कि इसमें उनके राजनीतिक दल का कोई उल्लेख नहीं किया गया है। जबकि जिग्नेश वडगाम सीट से कॉन्ग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं, लेकिन प्रचार पेज पर कॉन्ग्रेस पार्टी का कोई जिक्र नहीं है। पिछली बार मेवानी ने कॉन्ग्रेस के समर्थन से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव जीता था। मालूम हो कि वडगाम से 2012 का चुनाव जीतने वाले कॉन्ग्रेस के पूर्व नेता मणिलाल वाघेला बीजेपी की टिकट पर मेवानी के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं।

ऑवर डेमोक्रेसी पर जिग्नेश के राजनीतिक दल का कोई उल्लेख नहीं (फोटो साभार: ourdemocracy.in)

मेवानी चुनाव लड़ने के लिए 40 लाख रुपए माँग रहे हैं। अब तक उन्होंने 7.20 लाख रुपए से ज्यादा का चंदा जुटा लिया है। इसे दिव्या गौर द्वारा शुरू किया गया, इस रिपोर्ट के प्रकाशित होने तक कैंपेन के 713 से अधिक समर्थक थे। चंदा देने वालों में टॉप पर तीस्ता सीतलवाड़ नाम की एक दानदाता भी शामिल हैं, जिन्होंने 30,000 रुपए का चंदा दिया है। यह स्पष्ट नहीं है कि क्या यह वही सीतलवाड़ हैं, जिसे हाल ही में गुजरात पुलिस ने तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ साजिश रचने और गुजरात की छवि खराब करने के आरोप में गिरफ्तार किया है।

चंदा दान करने वाली की वास्तविक पहचान कर पाना संभव नहीं है। वेबसाइट को 2000 रुपए से अधिक के दान के लिए पैन कार्ड की आवश्यकता होती है।

तीस्ता सीतलवाड़ का नाम टॉप डोनर की लिस्ट में (फोटो साभार: ourdemocracy)

‘Our Democracy’ का विवादास्पद इतिहास

जनवरी 2022 में, ऑपइंडिया ने बताया था कि कैसे ‘Our Democracy’ वेबसाइट अचानक से ऑफलाइन हो गई थी। यहाँ पर तत्कालीन कॉन्ग्रेस समर्थक (अब टीएमसी नेता) साकेत गोखले, कॉन्ग्रेस नेता कन्हैया कुमार, आप नेता आतिशी और कई अन्य लोगों को जगह दी गई थी। मेवानी पहले भी इस मंच का इस्तेमाल कर चुके हैं। चूँकि, गोखले पूर्णकालिक नौकरी छोड़कर 10 रुपए खर्च करके आरटीआई डालने का काम करते थे, इसलिए उन्हें धन जुटाने के लिए क्राउडफंडिंग का सहारा लेना पड़ता था।

नवंबर 2019 में गोखले ने क्राउडफंडिंग प्लेटफॉर्म का एक लिंक ट्वीट कर कहा था कि उन्होंने ‘बीजेपी/आरएसएस से लड़ने’ के लिए अपनी नौकरी छोड़ने का फैसला किया है। उन्होंने मोदी से नफरत करने लोगों से इकट्ठा होने और उन्हें पैसे देने का आग्रह किया था, ताकि वे इस लड़ाई के खर्चों का वहन कर सकें और इसके लिए उन्हें नौकरी ना करनी पड़े।

ऑपइंडिया ने क्राउडफंडिंग प्लेटफॉर्म की गहराई से पड़ताल की तो कुछ और दिलचस्प कनेक्शन पाए। इस दौरान पता चला कि टाइम्स नाउ और WION जैसे चैनलों के साथ काम कर चुके एनडीटीवी के पूर्व पत्रकार बिलाल जैदी ने आनंद मंगनाले (Anand Mangnale) के साथ मिलकर 2017 में कथित स्वतंत्र पत्रकारों के लिए ऑनलाइन क्राउडफंडिंग प्लेटफॉर्म ‘क्राउडन्यूजिंग’ की शुरुआत की थी।

हालाँकि, 2019 के आम चुनावों से ठीक पहले उन्होंने इस प्लेटफॉर्म का विस्तार करने का फैसला किया और इसे ‘ourdemocracy’ में बदल दिया। इस पर कन्हैया कुमार, आतिशी मार्लेना जैसे नेताओं और साकेत गोखले जैसे ‘बेरोजगार’ लोगों का स्वागत किया, जिन्होंने आरटीआई भरने के लिए अपनी नौकरी छोड़ दी थी। जब साकेत टीएमसी में शामिल हुए थे तब OurDemocracy प्लेटफॉर्म के को-फाउंडर ने उनकी सराहना की थी। इस साल जुलाई में Our Democracy की वापसी हुई। 4 जुलाई को, ट्विटर पर घोषणा की गई कि उन्हें एक नया सीईओ उमर सिद्दीकी मिल गया है।

फोटो साभार: Our Democracy

8 जुलाई को फिर से घोषणा की गई कि वेबसाइट एक बार फिर लाइव हो गई है। हालाँकि, तब से इस पर बेहद कम गतिविधि हुई थी। लेकिन 17 नवंबर, 2022 को इस मंच से जिग्नेश के समर्थन में वीडियो और कैम्पेन लिंक को आगे बढ़ाना शुरू कर दिया गया।

फोटो साभार: Our Democracy

विशेष रूप से, बहुत कम गतिविधि वाले छह अन्य कैंपेन हैं। उनमें से एक पुराना कैंपेन है, जिसे इस साल सितंबर में बीबीएमपी चुनाव के लिए AAP उम्मीदवार सिंथिया स्टीफन के लिए शुरू किया गया था। बीबीएमपी चुनाव दिसंबर में होने हैं। सिंथिया स्टीफन ने खुद अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर अभियान का लिंक साझा नहीं किया है। लेकिन, उसने इसे एक बार अपने फेसबुक अकाउंट पर शेयर किया था। कैंपेन से 64,000 रुपए से अधिक चंदा जुटाया गया है।

फोटो साभार: सिंथिया स्टीफन का फेसबुक

बता दें कि इस मंच का उपयोग करने वाले अन्य प्रचारकों में AAP नेता हरगोवन देभी (25,000 रुपए से अधिक का चंदा), AAP नेता विपुल परमार (1,000 रुपए से अधिक का चंदा), AAP नेता आशु ठाकुर (49,000 रुपए से अधिक चंदा एकत्र किया), AAP नेता कैलाशदान गधवी (कुछ भी चंदा एकत्र नहीं) और AAP नेता बीना बालगुहर (5,000 रुपए से अधिक का चंदा एकत्र किया) हैं। पैसे जुटाने के मामले में इस प्लेटफॉर्म पर मेवानी का कैंपेन अब तक का सबसे सफल कैंपेन रहा है। पुराने कैंपेन का रिकॉर्ड इस वेबसाइट से हटा दिया गया है।

यूनुस ने नाबालिग हिन्दू लड़की को फोन-सिम गिफ्ट किया, फिर वीडियो कॉल पर प्राइवेट पार्ट दिखाने को मजबूर किया: कॉल रिकॉर्ड कर यौन शोषण, निकाह-धर्मांतरण के लिए धमकी

कर्नाटक के बेंगलुरु में एक मुस्लिम युवक पर एक नाबालिग हिन्दू लड़की के धर्मांतरण के दबाव और यौन शोषण का आरोप लगा है। आरोपित का नाम यूनुस पाशा है। बताया जा रहा है कि पाशा ने पीड़िता को वीडियो कॉल पर प्राइवेट पार्ट दिखाने के लिए भी मजबूर किया। पीड़िता के पिता की तहरीर पर यूनुस के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है। पुलिस ने मामले की जाँच शुरू कर दी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुतबिक, मामला नागमंगला टाउन का है। पीड़िता के पिता ने पुलिस को शिकायत देते हुए बताया कि 12 नवंबर को उनकी बेटी परेशान थी। इसकी वजह पूछने पर उसने यूनुस पाशा फयाज अहमद नाम के लड़के से अपनी बातचीत होने की जानकारी दी। पीड़िता ने बताया कि फयाज ने उसके पास एक स्मार्टफोन और सिम भिजवा कर वीडियो कॉल करने के लिए कहा था। इसी दौरान उसने पीड़िता से अपना प्राइवेट पार्ट भी दिखाने की जिद की थी, जिसे पीड़िता ने मान लिया था।

अपनी शिकायत में पीड़िता के पिता ने आगे बताया कि यूनुस पाशा ने उनकी बेटी की वीडियो कॉल भी रिकार्ड की है। बाद में वो पीड़िता को उसकी आपत्तिजनक तस्वीरों के सहारे ब्लैकमेल करने लगा। 10 नवंबर, 2022 को जब पीड़िता अपनी नानी के घर गई तब आरोपित ने उसे नींद की गोलियाँ दीं जिसे उसने घर के खाने में मिलाने के लिए कहा। इसी दौरान यूनुस ने पीड़िता का यौन शोषण किया। यह यौन शोषण पीड़िता के ही घर में हुआ। बाद में उसने पीड़िता से इस्लाम कबूल कर के खुद से निकाह करने का दबाव बनाया।

शिकायतकर्ता के अनुसार, इस दौरान आरोपित ने उनकी बेटी को धमकी दी थी कि उसने अगर इन घटनाओं के बारे में किसी को बताया तो उसे जान से मार डाला जाएगा। अपनी बेटी को बेहद डरी हुई बता कर पीड़िता के पिता ने पुलिस से आरोपित पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है। इस शिकायत पर पुलिस ने यूनुस पाशा के खिलाफ ‘धर्मांतरण विरोधी अधिनियम’ और पॉक्सो की विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया गया है। आरोपित की तलाश की जा रही है।

जंगल, सेक्स और ताबीज वाली फेवीक्विक: वे चिल्लाते रहे… ये चाकू से करता रहा वार, उदयपुर डबल मर्डर से उठा पर्दा

राजस्थान के उदयपुर के जंगलों में 18 नवम्बर 2022 को युवक-युवती की नग्न लाश मिली थी। पुलिस ने इस दोहरे हत्याकांड का खुलासा करते हुए भावेश जोशी को गिरफ्तार किया है। खुद को तांत्रिक बताने वाले भावेश ने दोनों को जंगल में बुलाया। अपने सामने सेक्स करने को मजबूर किया। फिर उनकी हत्या कर दी।

मृतक की पहचान राहुल मीणा और सोनू के तौर पर हुई है। कथित तौर पर दोनों का अफेयर चल रहा था। राहुल एक सरकारी स्कूल में शिक्षक था। शादीशुदा था। आरोपित भावेश को मृतक पहले से जानते थे। दोनों का परिवार इस तांत्रिक के पास आता था।

रिपोर्ट के अनुसार 14 नवंबर को भावेश ने राहुल और सोनू को बुलाया। तीनों एक ही बाइक से जंगल में गए। जंगल में भावेश ने दोनों को नग्न होकर संबंध बनाने को मजबूर किया। इस दौरान उनकी आँखों और शरीर को फेवीक्विक से चिपका दिया। चिपकने के बाद राहुल और सोनू चिल्लाते रहे और भावेश उन पर चाकू से वार करते गया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना गोगुन्दा थान क्षेत्र के जंगलों के अंदर केला बावड़ी इलाके की है। CCTV फुटेज और कॉल डिटेल के जरिए पुलिस भावेश जोशी तक पहुँची। उसने पुलिस के आगे अपना गुनाह कबूल कर लिया है। रिपोर्ट के अनुसार भावेश हमेशा अपने पास फेवीक्विक रखता था। इसका इस्तेमाल वह ताबीज बनाने के लिए करता था। घटना के दिन उसने करीब 50 फेवीक्विक एक बोतल में भर ली थी और उसे जंगल में युवक-युवती पर उड़ेल दिया। कुछ रिपोर्टों में भावेश का नाम भालेश कुमार भी बताया गया है।

पूछताछ में भावेश ने बताया है कि वह आठ साल से भादवी गुड़ा के पास इच्छापूर्ण शेषनाग भावजी मंदिर में ताबीज देने का काम कर रहा है। राहुल और सोनू से इसी मंदिर में उसकी पहचान हुई थी। राहुल और सोनू का परिचय भी इसी मंदिर में हुआ था। राहुल की पत्नी भी यहाँ आती थी। बताया जा रहा है कि राहुल का अपनी पत्नी से काफी झगड़ा होता था। राहुल की पत्नी ने जब भावेश से मदद माँगी तो उसने सोनू से राहुल के रिश्तों के बारे में बता दिया।

बताया जा रहा है कि भावेश द्वारा सच्चाई बताने के बाद से राहुल और सोनू उससे नाराज रहने लगे। वे उसे बदनाम करने की धमकी देने लगे थे। भावेश ने अपनी पहचान खराब होने के डर से दोनों को रास्ते से हटाने का प्लान बनाया और दोनों को जंगल में ले गया। जंगल में उसने अपने आगे सेक्स करने के लिए कहा ताकि आपत्तिजनक हालत में दोनों भाग न पाएँ। हत्या के बाद वह मौके से फरार हो गया था।

‘मार कर टुकड़े-टुकड़े काट कर फेंक देगा’: 2020 में जो-जो श्रद्धा ने पुलिस को लिखा, वही-वही 2022 में आफताब ने किया

श्रद्धा मर्डर केस में एक और बड़ी जानकारी सामने आई है। दावा किया जा रहा है कि श्रद्धा ने आफताब के हिंसक बर्ताव के बारे में 2 साल पहले ही मुंबई के तूलिंज पुलिस स्टेशन में आफताब के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। श्रद्धा ने शिकायत में आफताब से अपनी जान को खतरा बताया था। एक अन्य मीडिया रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है कि श्रद्धा ने 23 नवंबर, 2020 को मुंबई की पालघर पुलिस को एक पत्र लिखा था।

इसमें उसने पुलिस को बताया था कि उसका लिव-इन पार्टनर आफताब उसे मारता-पीटता है। अगर वक्त पर एक्शन नहीं लिया, तो आफताब उसे टुकड़े-टुकड़े कर डालेगा। बुधवार (23 नवंबर, 2022) को सामने आई जानकारी में यह भी दावा किया जा रहा है कि श्रद्धा ने आफताब के बर्ताव के बारे में उसके परिवार वालों को भी बताया था, लेकिन उन्होंने कुछ नहीं किया। दिल्ली पुलिस ने आज मुंबई जाकर श्रद्धा के परिवार वालों के बयान दर्ज किए हैं।

श्रद्धा ने 23 नवंबर, 2020 को पालघर पुलिस को एक पत्र लिखा था। (फोटो साभार: दैनिक भास्कर)

श्रद्धा ने आफताब के खिलाफ अपनी शिकायत में कहा था, “वह मेरे साथ गाली-गलौज और मारपीट करता है। आज उसने मेरी हत्या करने की कोशिश की। वह मुझे धमकी देता है कि वह मेरे शरीर के टुकड़े-टुकड़े करके फेंक देगा। वह पिछले 6 महीनों से मेरे साथ मारपीट कर रहा है। वह मुझे जान से मारने की धमकी देता है, इसलिए मैं पुलिस के पास नहीं जा सकी। उसके परिजनों को भी इसकी जानकारी है कि वह मेरे साथ मारपीट करता है और मुझे मारने की कोशिश की।”

श्रद्धा ने आगे लिखा था, “अब मेरी उसके साथ रहने की इच्छा नहीं है। वह मुझे ब्लैकमेल करता है, ऐसे में अगर मुझे कुछ भी होता है, इसका जिम्मेदार वही होगा।”

आफताब ने वही किया, जो श्रद्धा ने मुंबई पुलिस को पत्र लिखा था

वहीं, टेलीविजन अभिनेता इमरान नजीर खान (Imran Nazir Khan) ने श्रद्धा मर्डर केस (Shraddha murder case) में आफताब अमीन पूनावाला (Aftab Amin Poonawalla) को लेकर चौंकाने वाला दावा किया है। इमरान ने एक टीवी इंटरव्यू में बताया कि आफताब को ड्रग्स की लत थी और श्रद्धा उसकी इस लत को छुड़वाना चाहती थीं। वह श्रद्धा को पहले से जानते थे। श्रद्धा ने दो साल पहले उन्हें बताया था कि उसका लिव-इन पार्टनर आफताब ड्रग एडिक्ट है। वह करीब दो-तीन साल से ड्रग्स ले रहा है।

अभिनेता के मुताबिक, उन्हें पता नहीं था कि मुंबई में क्या हो रहा है, क्योंकि वह मुंबई से बाहर कश्मीर में अपने घर पर आए हुए थे। सोमवार (21 नवंबर, 2022) की सुबह जब वह मुंबई लौटे और सभी समाचार चैनलों पर श्रद्धा वाकर की मौत की खबर देखी, तो शॉक्ड रह गए। उनके लिए श्रद्धा वाकर की मौत की खबर एक सदमे की तरह थी।

इंडिया टीवी से बात करते हुए नजीर खान ने कहा,, “मैं श्रद्धा को जानता था। मैं उससे फरवरी 2021 में एक सफाई कैंपेन के दौरान मुंबई में मिला था। उसने मुझे बताया था कि वह नर्क की जिंदगी जी रही है। उसका प्रेमी आफताब उसे प्रताड़ित करता है। श्रद्धा के अनुसार, उसका प्रेमी एक ड्रग एडिक्ट था। वह लगभग 2-3 साल से ड्रग्स ले रहा था। वह चाहती थी कि आफताब ड्रग्स छोड़ दे, इसके लिए उसने मुझसे रिहैब सेंटर के बारे में जानकारी माँगी थी।” इमरान ने भी श्रद्धा की मदद करने का वादा किया था, लेकिन दिल्ली जाने के बाद वह उनसे संपर्क नहीं कर पाई।

बता दें कि इमरान नजीर खान हमारी बहू सिल्क, गठबंधन, मरियम खान रिपोर्टिंग लाइव, ‘मैडम सर और अलादीन: नाम तो सुना होगा’ जैसे टीवी शोज में काम कर चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने तमिल, तेलुगु, मलयालम और कन्नड़ फिल्मों में भी काम किया है।

गौरतलब है कि मुंबई की श्रद्धा वाकर आफताब के साथ दिल्ली के एक फ्लैट में लिव इन में रह रही थी। आफताब पर आरोप है कि उसने 18 मई को श्रद्धा की गला दबाकर हत्या कर दी थी। इसके बाद उसने श्रद्धा के शव के 35 टुकड़े किए। उन्हें रखने के लिए एक फ्रिज खरीदा। उसने 18 दिनों में एक एक करके शव के टुकड़े को अलग-अलग जगहों पर ठिकाने लगाया।

iPhone बनाने वाली दुनिया की सबसे बड़ी चायनीज फैक्ट्री में बवाल: लात-घूँसों से मजदूरों का विद्रोह, हजारों छोड़ कर भागे

एपल को सबसे ज्यादा आईफोन बना कर देने वाली फैक्ट्री चीन में है और यहाँ बवाल मचा हुआ है। जेंगझाउ (Zhengzhou) शहर में स्थित फॉक्सकॉन (Foxconn) की फैक्ट्री में हजारों मजदूरों ने विरोध शुरू कर दिया है, लात-घूँसे भी चले हैं।

चायनीज वीडियो शेयरिंग ऐप काइशॉ (Kuaishou) पर फॉक्सकॉन के ही कर्मचारियों ने वहाँ के लाइव वीडियो शेयर किए। वहाँ के कुछ वीडियो ट्विटर पर भी हैं। इन वीडियो में देखा जा सकता है कि हजारों की संख्या में आईफोन (iPhone) बनाने वाले मजदूर विरोध कर रहे हैं, हाथापाई भी होते देखा जा सकता है।

कुछ वीडियो में मजदूरों को मिलने वाले खाने को लेकर शिकायत वाली बात भी है। कुछ वीडियो में यह दिखाया गया है कंपनी के वादे के अनुसार उन लोगों को न तो प्रति घंटे ज्यादा सैलरी दी जा रही है, न ही बोनस का भुगतान नहीं किया गया।

इन सब की शुरुआत हुई पिछले सप्ताह 1 लाख नए मजदूरों की बहाली से। चायनीज मीडिया (जो सब सरकारी ही होते हैं) ने तब इस खबर को खूब चलाया, पूरी दुनिया को दिखाया। जो छिपा लिया, वो खौफनाक है – यह कोविड से जुड़ा है, मजदूरों के जीवन-मौत से खिलवाड़ है।

चीन के जेंगझाउ (Zhengzhou) शहर में फॉक्सकॉन (Foxconn) की आईफोन बनाने वाली फैक्ट्री की क्षमता 2 लाख मजदूरों की है। इनके बहुत सारे मजदूरों को कोविड हो गया। उनको ठीक से क्वॉरंटाइन नहीं किया गया। बाकियों को भी कोविड फैल न जाए, इसके डर से हजारों मजदूर फैक्ट्री छोड़ कर भाग गए।

फैक्ट्री से हजारों की संख्या में भागते कर्मचारियों के वीडियो भी चायनीज सोशल मीडिया पर बहुत वायरल हुआ। कम मजदूर और कम उत्पादन के चक्कर में ही 1 लाख नए मजदूरों की बहाली की गई, वो भी ज्यादा सैलरी और बोनस वगैरह का लालच देकर।

नए मजदूरों को कंपनी की ओर से आश्वासन दिया गया था कि उन्हें पुराने मजदूरों से अलग रखा जाएगा, अलग काम कराया जाएगा। लेकिन ऐसा किया नहीं गया। इस कारण से नए मजदूरों को भी कोविड की चपेट में आ जाने का भय हुआ। और तो और, बोनस और नौकरी के नियम-कानून भी जो बोला गया था, उससे अलग था।

चीन में कोविड-कंट्रोल की नीति और फैक्ट्री में काम करने वाले मजदूरों के दमनकारी नियम-कानूनों के कारण यह हालात पैदा हुए। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि कोविड-कंट्रोल के नाम पर फॉक्सकॉन (Foxconn) की आईफोन बनाने वाली फैक्ट्री से कर्मचारी घर नहीं जा सकते। इन मजदूरों का रहना और काम करना सब कुछ इसी फैक्ट्री की चारदीवारी के भीतर होता है।

WhatsApp डीपी में आदियोगी शिव, हिंदू नाम, फर्जी आधार कार्ड: 2 महीने पहले गिरफ्तार किया गया था मंगलुरु का आतंकी मोहम्मद शरीक, मिल गई थी जमानत

कर्नाटक के मंगलुरु में शनिवार (19 नवंबर 2022) को बम धमाका हुआ था। इस मामले में गिरफ्तार मोहम्मद शरीक को लेकर जिस तरह की जानकारी सामने आ रही है, उससे जाहिर है कि अपनी पहचान छिपाने की उसने पूरी तैयारी कर रखी थी। उसने अपने व्हाट्सएप डीपी में आदियोगी शिव की प्रतिमा लगा रखी थी।

इससे पहले यह बात सामने आई थी कि वह मोबाइल रिपेयरिंग की ट्रेनिंग ‘प्रेम राज’ के नाम से ले रहा था। धमाके के बाद भी वह खुद को हिंदू बता रहा था। उसने फर्जी आधार कार्ड में रख रखे थे। पुलिस यह जानने में जुटी है कि व्हाट्सएप डीपी में उसने आदियोगी की फोटो जाँच को गुमराह करने के लिए लगाई थी या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश है। अब तक हुई जाँच से पता चला है कि कोयंबटूर में जिस जगह आदियोगी की प्रतिमा लगी है, उस जगह शरीक कभी नहीं गया है। मंगलुरु में वह जिस डोरमेट्री में रुका था, वहाँ उसने नकली पहचान पत्र के साथ फर्जी मोबाइल नंबर नोट करवाया था। यहाँ CCTV कैमरे भी नहीं लगे हुए थे।

मंगलुरु धमाके से करीब दो महीने पहले शिवमोगा पुलिस ने जो जानकारी जुटाई थी उससे यह संदेह पैदा हो रहा है कि शरीक ने विस्फोटक बनाने में कुछ इंजीनियरिंग छात्रों की मदद लेने की भी कोशिश की थी। बताया ये भी जा रहा है कि उसके मोबाइल में ISIS से जुड़े लेख मिले हैं। साथ में IED बनाने की विधि का पर्चा भी मिला है। एक अन्य जानकारी के मुताबिक आरोपित जाँच एजेंसियों के रडार पर इसी साल 15 अगस्त को शिवमोगा में हुई साम्प्रदायिक हिंसा के बाद से था। इसके अलावा वह 2 साल पहले ‘लश्कर जिंदाबाद’ लिखने के आरोप में भी गिरफ्तार हुआ था। बाद में उसे जमानत मिल गई थी।

जमानत के बाद शरीक कोयंबटूर चला गया था। यहाँ 3 दिनों तक रहने के बाद वह एर्नाकुलम चला गया था। एर्नाकुलम से तमिलनाडु के रास्ते शारिक फिर कर्नाटक में मंगलुरु में आया था। यह बात भी सामने आई है कि मोहम्मद शरीक बिटकॉइन ट्रेडिंग करता था और अपने साथियों को क्रिप्टो करेंसी भेजता था।