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होठों को ही नहीं सँवारती है लिपस्टिक, अर्थव्यवस्था का भी हाल है बताता: जानिए कॉस्मेटिक्स सेल और मंदी में क्या है रिश्ता

एक तरफ जहाँ ब्रिटेन मंदी के दौर से गुजर रहा है, वहीं अमेरिका के भी हालात अच्छे नहीं हैं। ब्रिटेन के वित्त मंत्री जेरेमी हंट ने कुछ दिन पहले ही कहा था कि मंदी के कारण देश की अर्थव्यवस्था में सिकुड़न आ सकती है। इन सब के बीच ‘लिपस्टिक इंडेक्स’ की काफी चर्चा है। आइए इस रिपोर्ट में जानते हैं ‘लिपस्टिक इंडेक्स’ के बारे में। साथ ही आपको यह भी बताते हैं कि इसका मंदी से क्या संबंध है।

फ़ोर्ब्स की रिपोर्ट की मुताबिक, अमेरिका में बीते 1 साल की तुलना में इस साल फेस केयर आइटम की बिक्री में 2.1% की गिरावट आई है। भले ही डॉलर मजबूत है, अर्थव्यवस्था के अन्य क्षेत्र लड़खड़ा रहे हैं। मेकअप के सामग्रियों की बिक्री और लिपस्टिक आमतौर पर मुद्रास्फीति के दबावों से प्रभावित नहीं होते हैं, बल्कि इसकी खरीदारी में बढ़ोतरी होती है। हालाँकि, अमेरिका में ‘लिपस्टिक इंडेक्स’ संकेत दे रहे हैं कि इसमें अब बदलाव हो रहा है।

क्या होता है ‘लिपस्टिक इंडेक्स’

मंदी के समय में लिपस्टिक इंडेक्स एक लंबे समय से आर्थिक संकेतक रहा है। आर्थिक मंदी के बावजूद लिपस्टिक की बिक्री बढ़ती है। इसके पीछे वजह यह है की उपभोक्ता, खासकर महिलाएँ तंगी की वजह से महँगी वस्तुओं पर खर्च कम कर देती हैं और खुद को अच्छा महसूस कराने के लिए कम महँगी चीजों को खरीदना पसंद करती हैं। दूसरी ओर कोरोना की वजह से मास्क की अनिवार्यता भी समाप्त हो गई है और लिपस्टिक की बिक्री बढ़ने लगी है।

ग्लोबल मार्केट ट्रैकिंग फर्म एनपीडी ग्रुप के डेटा में पाया गया कि लिपस्टिक और अन्य लिप मेकअप की बिक्री पिछले साल की तुलना में पहली तिमाही में 48% बढ़ी है। इसका मतलब है पिछले साल की तुलना में लिप मेकअप की बिक्री में 222 मिलियन डॉलर से अधिक की बिक्री हुई है।

कैसे आया चर्चा में

‘लिपस्टिक इफेक्ट’ पहली बार 2001 की मंदी के दौरान चर्चा में आया था। उस समय यह देखा गया था कि इकोनॉमी की खराब हालत के बावजूद लिपस्टिक की बिक्री बढ़ी है। 1929 और 1993 की महामंदी के दौरान भी ऐसा देखने को मिला था। इसे ‘लिपस्टिक इंडेक्स’ नाम दिया गया। इस थ्योरी के मुताबिक, इकोनॉमी की सेहत और कॉस्मेटिक्स की बिक्री के बीच विपरीत संबंध है।

वहीं 2008-09 की आर्थिक मंदी के दौरान ‘फाउंडेशन इंडेक्‍स’ का टर्म सामने आया था। जब महिलाओं ने ब्‍यूटी प्रोडक्‍ट पर ज्‍यादा पैसे खर्च करने के बजाए फाउंडेशन के जरिये अपनी त्‍वचा को चमकाने का राज खोजा। इस दौरान देखा गया कि मंदी के बावजूद बाजार में फाउंडेशन की बिक्री जबरदस्‍त रही और यह निष्‍कर्ष निकाला गया कि महिलाएं जब अन्‍य शौक की चीजों पर ज्‍यादा पैसे नहीं खर्च कर पा रहीं थी, तो फाउंडेशन के इस्‍तेमाल से खुद को खूबसूरत दिखाने की कोशिश की।

एनपीडी में ब्यूटी इंडस्ट्री एडवाइजर की सलाहकार लारिसा जेन्सेन ने बताया, “उपभोक्ता अर्थव्यवस्था के बारे में बुरा महसूस करते हैं तो वे अच्छा दिखना चाहते हैं। चूंकि वसंत और गर्मियों की शुरुआत में कंज्यूमर सेंटीमेंट गिर गया था, लिपस्टिक की बिक्री बढ़ गई। ‘लिपस्टिक इंडेक्स’ जीवित और अच्छी तरह से हमारे बीच है।”

‘खुद को हिन्दू बता रहा था आतंकी मोहम्मद शरीक, दिखाया था फर्जी आधार कार्ड’: पूरे मंगलुरु को दहलाने की थी साजिश, तमिलनाडु के कई इलाकों में घूमा था

शनिवार (19 नवंबर, 2022) को कर्नाटक के मंगलुरु में हुए बम धमाके को लेकर जैसे-जैसे जाँच आगे बढ़ रही है, नए खुलासे होते जा रहे हैं। एक ओर जहाँ पुलिस का कहना है कि गिरफ्तार आरोपित मोहम्मद शरीक भीड़-भाड़ वाले इलाके को निशाना बनाना चाहता था लेकिन बम ऑटो में ही फट गया, वहीं, कर्नाटक के स्वास्थ्य मंत्री के सुधाकर ने कहा है कि मोहम्मद शरीक खुद को हिंदू बता रहा था।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मंगलुरु बम ब्लास्ट में गिरफ्तार आरोपित मोहम्मद शरीक को लेकर कर्नाटक के स्वास्थ्य मंत्री के सुधाकर ने बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा है कि शरीक ऑटो में बैठने के बाद खुद को हिंदू बता रहा था, ताकि उस पर किसी को शक न हो। इसके लिए, उसने एक आधार कार्ड दिखाया था, जिस पर हिंदू नाम था। उसने यह आधार कार्ड रेलवे कर्मचारी से चुराया था।

के सुधाकर ने यह भी कहा है कि पुलिस हर एंगल से मामले की जाँच कर रही है। यह भी पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि मोहम्मद शारिक के संबंध अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठनों, बैन किए गए संगठनों या स्लीपर सेल से तो नहीं है। उन्होंने कहा है कि कर्नाटक की सीमा केरल से लगती है। इसलिए, स्लीपर सेल से जुड़े होने की भी आशंका है।

उन्होंने यह भी कहा है कि बीते महीने तमिलनाडु के कोयंबटूर में भी ऐसा ही बम धमाका हुआ था। तब भी आतंकियों ने मंदिर के पास ब्लास्ट करने की साजिश रची थी। पुलिस ने मोहम्मद शरीक के मूवमेंट को ट्रेस किया है, जिसमें सामने आया है कि उसने कोयंबटूर में एक व्यक्ति से मुलाकात की थी।

इस मामले में पुलिस का कहना है कि गिरफ्तार आरोपित मोहम्मद शरीक ऑटो में बैठकर पंपवेल एरिया में जाना चाहता था। वहाँ वह अपने साथ लिए हुए कुकर बम (विस्फोटक) को नगौरी के भीड़-भाड़ इलाके में प्लांट करना चाहता था। हालाँकि, ऑटो में बैठने के थोड़ा देर बाद ही विस्फोट हो गया।

यही नहीं, शुरुआती जाँच के बाद पुलिस ने कहा है कि शरीक ने कोयंबटूर से किसी और के नाम पर एक सिम खरीदा था। इस सिम कार्ड के टावर लोकेशन की जाँच से सामने आया है कि वह तमिलनाडु के कई इलाकों में घूम रहा था। शरीक की फोन डिटेल निकाली जा रही है, जिससे उसके साथियों के बारे में जानकारी सामने आ सकेगी।

बता दें, मंगलुरु बम धमाके के आरोपित मोहम्मद शरीक के घर से भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री, एक मोबाइल फोन, दो फर्जी आधार कार्ड, एक पैन कार्ड, डेबिट कार्ड बरामद हुए हैं। विस्फोटक बनाने में इस्तेमाल होने वाली सामग्रियों में जिलेटिन पाउडर, सर्किट बोर्ड, छोटे बोल्ट, बैटरी, वुड पावर, एल्युमीनियम मल्टी मीटर, तार, मिक्सचर जार, प्रेशर कुकर आदि बरामद हुए हैं। पुलिस ने शरीक के जिस घर में छापेमारी की है, वह घर किराए पर लिया हुआ था।

एक रिपोर्ट के अनुसार, शरीक इस्लामिक स्टेट (ISIS) के हैंडलर अराफात अली के संपर्क में था। अराफात पहले ही दो मामलों में आरोपित है और अल-हिंद मॉड्यूल मामले के आरोपी मुस्सविर हुसैन के संपर्क में था। यही नहीं, शरीक दो तीन अन्य संदिग्धों के भी संपर्क में था। इन सभी की पहचान की जा रही है।

‘अगर सरदार पटेल भारत को एक कर पाए तो इसका श्रेय जगद्गुरु शंकराचार्य को जाता है’: बोले राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान – राजनीतिक रूप से बँटा रहा देश

केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान (Arif Mohammed Khan) ने रविवार (20 नवंबर, 2022) को कहा कि अगर सरदार वल्लभभाई पटेल 1947 के बाद भारत को एकजुट कर पाए, तो इसका श्रेय वास्तव में ‘केरल के पुत्र’ शंकराचार्य को जाता है। उन्होंने 1000 साल से भी पहले लोगों को अपनी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक एकता से अवगत कराया था। विभिन्न विश्वविद्यालयों में कुलपतियों की नियुक्ति सहित कई मुद्दों पर राज्य सरकार का विरोध करने वाले खान ने ‘पीटीआई’ को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि केरल ‘ज्ञान की खोज करने वालों’ के लिए बहुत अनुकूल जगह है।

राज्यपाल के मुताबिक, भारत में सांस्कृतिक और आध्यात्मिक एकता है, लेकिन देश लंबे समय तक राजनीतिक रूप से बँटा रहा।

उत्तर प्रदेश के रहने वाले खान ने कहा कि केरल राज्य की एक महान परंपरा है और यह भारत के सबसे अच्छे राज्यों में से एक है। केरल के समाज, लोगों को श्रेय दिया जाना चाहिए। यह श्री नारायण गुरु जैसे लोग हैं। केरल में एक बहुत ही दमनकारी सामंती व्यवस्था थी। महिलाओं को ऊपरी वस्त्र तक पहनने की अनुमति नहीं थी… जब भी संकट की घड़ी आती है, तो कोई न कोई महान आत्मा सामने आती है।

राज्यपाल के अनुसार, “अगर सरदार पटेल 1947 के बाद भारत को एकजुट कर सके, हम सबसे बड़ा लोकतंत्र बन सके और एक राष्ट्र बन सके, तो इसका श्रेय वास्तव में केरल के बेटे शंकराचार्य को जाता है, जिन्होंने 1000 साल से भी अधिक समय पहले उनकी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक एकता के बारे में भारत के लोगों को जागरूक किया। मैं आपसे पहली बार नहीं कह रहा हूँ।”

बता दें कि शंकराचार्य को आदि शंकराचार्य के नाम से भी जाना जाता है। उनका जन्म 788 ईस्वी में केरल के कालडी में हुआ था। वे अद्वैत दर्शन के विद्वान, ऋषि और प्रतिपादक थे। देश के पहले गृहमंत्री और उप प्रधानमंत्री के रूप में सरदार पटेल को भारत की 560 से अधिक रियासतों के विलय का श्रेय दिया जाता है। केंद्र सरकार सरदार पटेल के जन्मदिन को 31 अक्टूबर को 2014 से ‘राष्ट्रीय एकता दिवस’ के रूप में मना रही है। पटेल का जन्म 31 अक्टूबर, 1875 को गुजरात के नडियाद में हुआ था।

डर, दबाव और सब ठीक होने की उम्मीद…: आखिर क्यों कोई ‘श्रद्धा’ चाहकर भी नहीं छोड़ पाती किसी ‘आफताब’ को?

श्रद्धा मर्डर जैसे किसी भी सनसनीखेज अपराध से जुड़ी जानकारियाँ सुर्खियों में आते ही हमारे मन में तमाम तरह के सवाल उमड़ते हैं। हम सोचने लगते हैं कि आखिर पीड़िता पुलिस के पास क्यों नहीं गई होगी, उसने क्यों अपने पड़ोसियों को कुछ नहीं बताया गया, वो क्यों नहीं चिल्लाई होगी, उसने क्यों मदद नहीं माँगी होगी? ये सब सवाल अंतहीन है और इनके ऊपर दी जाने वाली जजमेंट एकदम निराधार।

इंसानी स्वभाव बेहद जटिल होता है। जब हम अखबारों और टीवी चैनलों में क्राइम के बारे में पढ़ते हैं हमें किसी के जीवन का बस एक पहलू पता होता है, वो भी या तो रिपोर्टर के नजरिए से या फिर उस जाँचकर्ता की नजर से, जिन्हें अपराध से पहले उस व्यक्ति के बारे में कुछ पता तक नहीं होता।

हाल का श्रद्धा वाकर केस ऐसा ही है। हत्या के बाद श्रद्धा के जीवन पर, उसके रिलेशनशिप पर, उसके अपने माता-पिता से संबंधों पर, उसकी पसंद-नापसंद पर काफी चर्चा है और इंसान होने के नाते हम लोग सारे उमड़ते सवालों पर काफी तेजी से प्रतिक्रिया भी दे रहे हैं।

इन्हीं सवालों में से एक सवाल यह है कि आखिर श्रद्धा ने आफताब को समय रहते क्यों नहीं छोड़ा? इस प्रश्न पर हर क्षेत्र के लोग अपनी अपनी राय जोड़ रहे हैं। कुछ लोग नारीवाद को दोषी ठहरा रहे हैं तो कुछ श्रद्धा के पिता को कि उन्होंने अपनी बेटी को दोबारा क्यों नहीं स्वीकारा। कुछ लोगों की शिकायत आधुनिक समाज से है…जिसकी वजह से लड़कियाँ इतनी हिम्मत करती हैं कि वो बाहर निकल पाएँ, बंदिशों को तोड़कर प्रेमी के साथ रह पाएँ…।

इन सबके बीच श्रद्धा की वो तस्वीरें भी हैं जिसमें नजर आ रहे चेहरे पर तमाम निशान हैं और जो ये सवाल खड़ा कर रहे हैं कि आखिर उसने आफताब को क्यों नहीं छोड़ा होगा?

दरअसल, सच कभी एक नैरेटिव या सटीक व्याख्या नहीं हो सकता। आज श्रद्धा मर्डर केस भले ही मीडिया सुर्खियों में है, लेकिन ये भी वास्तविकता है कि उसकी हत्या के बाद ऐसे ही हिंसा के तमाम केस सामने आए हैं। हर मामला एक दूसरे से अलग है। फिर चाहे वो पीड़िता की मानसिकता के मामले में हो, उसकी परिस्थितियाँ के बारे में हो या फिर अपराधी के सोचने के ढंग पर हो।

सामाजिक दबाव

घरेलू हिंसा की पीड़िताएँ अक्सर मारपीट, भय और ग्लानि में जकड़ी होती हैं। उनके पास सोचने समझने की आजादी नहीं होती। उन्हें डर होता है कि अगर उन्होंने गलत के खिलाफ आवाज उठाई तो क्या होगा, समाज क्या कहेगा, उनपर क्या-क्या कलंक लगाएगा। एक शादीशुदा औरत से उम्मीद की जाती है कि वो सिर्फ सब कुछ सहे और बदले में कुछ न कहे, क्योंकि अगर कुछ कहा और कुछ गलत हुआ तो सारी गलती उसी की मानी जाएगी। कभी अच्छी पत्नी न होने के लिए उसे कोसा जाएगा, कभी अच्छी बहू न होने के लिए और कभी अच्छी माँ न होने के लिए…। हमारे देश में किसी न किसी माध्यम से हमेशा से ये बताया जाता रहा है कि घर की महिला के पास हर गलत को सही करने की ताकत होती है, लेकिन फिर भी अगर वो चीज गलत हो जाए तो उसके लिए जिम्मेदार औरत ही होती है।

रिश्ता चाहे शादी का हो या लिव-इन का… महिलाओं को हमेशा से प्रताड़ित किया गया। हाँ, ऐसे पुरूष भी हैं जो प्रताड़ित होते हैं, वो भी घरेलू हिंसा का शिकार होते हैं, लेकिन फिर भी जो घरेलू हिंसा सहने वालों की संख्या है वो महिलाओं में ज्यादा है और ऐसा सिर्फ भारत के नहीं बल्कि पूरे विश्व के आँकड़े कहते हैं। घर की बंदिशें औरतों को बोलने नहीं देतीं। शादी वाले में रिश्तों में महिलाओं की चिंता अपने बच्चे को लेकर होती है, उनके भविष्य को लेकर होती है और समाज में लांछन न लगे इस बात की होती है।

डर का फायदा

ऐसे रिश्तों में अपराधी के पास औरत का सारा कंट्रोल होता है और पीड़िता हर मायनों में अकेली रह जाती है। रिश्ता भयावह तब होता जाता है जब अपराधी जान जाए कि आखिर किस तरह से वो पीड़िता को सता सकता है या डरा सकता है। वो उन्हीं आधारों पर पीड़िता को प्रताड़ना देना शुरू करता है। वहीं पीड़िता भी कभी प्यार के नाम पर कभी कमजोरी में उसे सह लेती है और इस तरह अपराधी की हिम्मत और बढ़ जाती है।

रिश्ता चाहे शादी के बाद वाला हो या लिव-इन के दौरान का। अपराधी हमेशा पीड़िता की कमजोरी का फायदा उठाता है। श्रद्धा के केस में भी उसने अपने दोस्तों को मारपीट और गाली-गलौच के बारे में बताया था। आज उसके मैसेज वायरल हैं। जबकि भुवनेश्वर की उषाश्री परीदा के केस में हमें पता भी नहीं था कि उनका पति जिनके साथ उन्होंने दो बच्चों को जन्म दिया, जिनके साथ वह कई साल तक रहीं, वह उन्हें लगातार मारता था।

दरअसल ऐसे केसों में पीड़िताएँ अपनी सोचने-समझने की शक्ति खो देती हैं। उनके पास खुद को बचाने का तरीका नहीं बचता और न ही वो खुद इस विषय में सोच पाती हैं कि लगातार होती हिंसा से वह कैसे दूर हटें।

सब ठीक होने की उम्मीद

एक पीड़िता को नहीं पता चलता कि कब उसके साथ हदें पार कर दी गईं। अनुराग कश्यप की थप्पड़ मूवी में दिखाया गया कि कैसे एक थप्पड़ पड़ते ही महिला इस बात पर अड़ जाती है कि ये उसे अस्वीकार्य है और वो किसी कीमत पर उसके साथ नहीं रह सकती। हकीकत में ये सिर्फ फिल्मों में होता है। वास्तविक जीवन में औरतें केवल ये सोचती रह जाती हैं कि चीजें एक दिन ठीक हो जाएँगी। एक रिश्ते को 5 साल देने वाली महिला के लिए आसान नहीं होता कि वो एक पल में अपने रिश्ते में लगाई सारी उम्मीदें छोड़ दें।

हो सकता है श्रद्धा ने भी ये सब सोचा हो। उसे भी लगा हो कि आफताब के साथ सब चीजें सही हो जाएँगी। एक दिन सब ठीक हो जाएगा। समय सब ठीक कर देगा। आदि-आदि…। क्या ये सब सोचना हमें बचपन से नहीं सिखाया गया।

भविष्य का डर नहीं होने देता अलग

शोध बताते हैं कि शादीशुदा औरतें अपने रिश्ते में अपमान सहने के बावजूद उससे इसलिए नहीं निकल पाती क्योंकि उन्हें आर्थिक दिक्कतों के साथ-साथ बच्चों को खोने का डर होता है, उन्हें उनके भविष्य के लिए डर होता है। आज तमाम हेल्पलाइन नंबर हैं, पुलिस सहायता का आश्वासन है, एनजीओ हैं, लेकिन फिर भी तमाम महिलाएँ घरेलू हिंसा का शिकार होती हैं। दुर्भाग्य से वह लोग मानसिक रूप से सशक्त नहीं होतीं। उन्हें सिर झुकाकर मारपीट सहने की आदत हो जाती है। वो लोग जिनके लिए आज श्रद्धा हेडलाइन है वो ये जान लें कि ऐसी तमाम औरतें हैं जो अपनी आवाज नहीं उठा पा रहीं। उन औरतों को मारा भी नहीं गया फिर भी वो चुप हैं क्योंकि उन्हें उस माहौल में रहने की आदत हो गई है।

सोशल मीडिया पर जो राय निर्मित की जा रही है, लड़कियों को उसके कपड़ों के लिए शर्मसार किया जा रहा है, उन्हें पता होना चाहिए कि ऐसे हजारों द्वंद पीड़िता के भीतर चलते हैं। ये द्वंद भले ही समाज और राजनीति के कारण हमारे निजी विचारों से मेल न खाते हों लेकिन ये फिर भी पीड़िता के मन में चलते हैं। ऐसे में अगर हम कुछ नहीं कर सकते तो कम से कम इतना करें कि अगर कोई जरूरतमंद मदद माँगे तो दयालु बनकर उसके लिए आगे आएँ।

महिलाओं की मदद के लिए राष्ट्रीय महिला आयोग ने हेल्पलाइन नंबर निकाला हुआ है। जो भी महिला घरेलू हिंसा का शिकार होती हैं उनके लिए ऑल इंडिया हेल्पलाइन नंबर 181 और 1091 है। हर राज्य की अलग अलग हेल्पलाइन नंबर यहाँ देख सकते हैं।

नोट: ये लेख अंग्रेजी में लिखे गए लेख के अंशों पर आधारित है। आप मूल लेख इस लिंक पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं।

जिसके साथ लिव-इन में रहता था नजीबुद्दीन, उसी की बेटी को मार डाला: लाश के साथ किया बलात्कार, मीडिया ‘राजू’ बता कर चला रहा खबर

तमिलनाडु की चेन्नई पुलिस ने 18 साल की एक लड़की की हत्या के आरोप में नजीबुद्दीन को गिरफ्तार किया है। आरोपित अपना नाम राजू मणि नायर बताया करता था। मृतका उसकी प्रेमिका व लिव इन पार्टनर की बेटी थी। आशंका जताई जा रही है कि आरोपित ने मृतका की लाश के साथ रेप किया था। घटना के बाद नजीबुद्दीन मुंबई के पूर्वी विरार में छिपा हुआ था। घटना 12 नवम्बर 2022 की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मृतका की माँ ने इस बाबत पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई थी। अपनी शिकायत में उन्होंने बताया था कि घटना के वक्त वो कहीं बाहर गई थीं। जब वो लौंटी तब घर पर बाहर से ताला लगा था। उन्होंने अपनी चाबियों से ताले को खोला तो उनकी बेटी बेसुध जमीन पर पड़ी मिली। बेटी के गले पर निशान पड़े थे और उसकी साँसें बंद थीं। शिकायत में पीड़िता ने खुद को इस घटना से सदमे में बताया।

पीड़िता ने आगे बताया कि पूछताछ करने पर एक पड़ोसी ने जानकारी दी कि राजू उर्फ़ नजीबुद्दीन घर पर ताला लगा कर कहीं चला गया। पड़ोसी के मुताबिक, ताला लगाने के दौरान राजू काफी जल्दबाजी में लग रहा था। पीड़िता के मुताबिक, बाद में घर की तलाशी लेने पर उसकी बेटी के झुमके, चाँदी की पायल के साथ कैश रखे गए 20 हजार रुपए गायब मिले। वो पिछले 5 साल से अपने पति से अलग रह रही थी। उसके 2 बेटे हैं जो उसके पति के साथ रहते थे।

कुछ समय पहले पीड़िता को नजीबुद्दीन मिला। उसने पीड़िता और उसके बच्चों की देखभाल करने का वादा किया और अपने साथ ले आया। बाद में पीड़िता ने अपनी बेटी को भी अपने साथ रख लिया।

अपनी शिकायत में पीड़िता ने आगे लिखा है कि बेटी के आने के बाद नजीबुद्दीन उस पर गलत नजर रखने लगा। लगभग 15 दिन पहले उसने सोते समय बेटी को गलत नीयत से छुआ। इस दौरान बेटी ने विरोध किया और शोर मचाया। बताया गया कि इस घटना के बाद से बेटी नजीबुद्दीन से नफरत करने लगी थी। इस घटना के बाद पीड़िता का भी नजीबुद्दीन से झगड़ा हुआ था। बाद में आरोपित को अलग होने के लिए कह दिया गया था।

पुलिस को दी गई शिकायत में इसी झगड़े की वजह से पीड़िता ने अपनी बेटी की हत्या होने का शक जताया है। शिकायत में यह भी बताया गया है कि जब पीड़िता काम पर जा रही थी तब नजीबुद्दीन ने उस से फोन को घर पर छोड़ कर जाने के लिए कहा था। इस मामले में पूनमल्ली पुलिस के इंस्पेक्टर पीआर चिदंबरमुरुगेसन ने कहा, “फॉरेंसिक टीम ने मौखिक रूप से हत्यारे द्वारा लड़की के शव के साथ रेप किए जाने की आशंका जताई है।” पुलिस ने नजीबुद्दीन पर IPC की धारा 302 (हत्या) और 380(चोरी) की धाराओं पर FIR दर्ज कर के उसकी तलाश शुरू कर दी थी।

नजीबुद्दीन पहले से शादीशुदा है। बताया जा रहा है कि शातिर नजीबुद्दीन ने फरार होने के दौरान अपने फोन को बंद कर दिया था। वो पीड़िता और उसकी मृतका बेटी का फोन ले कर भागा था। शक जताया जा रहा है कि पीड़िता की बेटी को मार कर वो विरार चला गया था जहाँ उसकी ससुराल है। पुलिस ने सर्विलांस से उसकी लोकेशन निकाली और विरार पुलिस को उसकी लोकेशन भेज कर उसे गिरफ्तार करवा दिया। उसकी गिरफ्तारी गुरुवार (17 नवम्बर, 2022) को हुई है। नजीबुद्दीन का पुराना आपराधिक इतिहास भी है। बताया जा रहा है कि वो पहले चेन स्नेचिंग जैसी वारदातों में शामिल रह चुका है।

नाम छिपाने की कोशिश

नजीबुद्दीन के मामले में मीडिया के एक वर्ग ने उसका नाम छिपाने पूरी कोशिश की। कई मीडिया रिपोर्ट्स में उसे सिर्फ राजू नाम से बताया गया। टाइम्स ऑफ़ इंडिया और न्यू इंडियन एक्सप्रेस में उसका एक बार नजीबुद्दीन नाम बताया गया है। मिड डे की रिपोर्ट में उसके नजीबुद्दीन नाम को पूरी तरह से छिपा कर सिर्फ राजू मणि अय्यर बताया गया है।

कमलनाथ की राह पर मध्य प्रदेश कॉन्ग्रेस के पटवारी: गए थे भारत जोड़ो यात्रा की तैयारी करने, काटा तिरंगे वाला केक

कॉन्ग्रेस के मध्य प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने हाल ही में मंदिर जैसा दिखने वाला केक काटा था। इस पर हनुमान जी का भी चित्र था। अब उनके मंत्रिमंडल में रहे कॉन्ग्रेस विधायक जीतू पटवारी ने भी इसका अनुसरण किया है। उन्होंने तिरंगे जैसा दिखने वाला केक काटा है। इसका वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

जीतू पटवारी राऊ से कॉन्ग्रेस विधायक हैं। वे भारत जोड़ो यात्रा की तैयारी को लेकर बुरहानपुर में थे। शनिवार (19 नवंबर 2022) को उनके जन्मदिन पर समर्थकों ने एक ढाबे में इसका जश्न मनाया। इस दौरान पटवारी ने जो केक काटा, वह तिरंगे जैसा दिख रहा था।

वायरल वीडियो में दिख रहा है कि जीतू पटवारी जिस केक को काट रहे हैं, वह तिरंगे जैसा है। केसरिया और हरे रंग के बीच सफेद पट्टी बनी हुई है। बताया जा रहा है कि जब पटवारी केक काट रहे थे, तब कॉन्ग्रेस जिला अध्यक्ष अजय रघुवंशी समेत कई अन्य नेता भी मौजूद थे।

बता दें, इससे पहले मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कॉन्ग्रेस नेता कमलनाथ ने भी विवादित केक काटा था। इसका वीडियो भी वायरल हुआ था। वायरल वीडियो में कमलनाथ अपने जन्मदिन से पूर्व बुधवार (16 नवंबर 2022) को शिकारपुर में भगवान हनुमान के चित्र और मंदिर के आकार का बना केक काटते हुए दिखाई दिए थे।

केक चार हिस्सों में बना था। नीचे पहली लेयर पर ‘हम हैं छिंदवाड़ा वाले’ लिखा हुआ था। इससे ऊपर दूसरी लेयर पर- जीवेत शरद: शतम्, तीसरी पर माननीय कमलनाथ जी और चौथी लेयर पर जन नायक लिखा हुआ था। चौथी लेयर पर ही हनुमान जी का फोटो, राम मंदिर की तरह शिखर झंडा लगा हुआ था। कमलनाथ द्वारा इस केक को काटने के बाद मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कमलनाथ को बगुला भगत तो वहीं, गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने इसे ‘हिंदू आस्था से खिलवाड़’ बताया था।

ललाट पर भस्म मल कर आया ‘भोला’, त्रिशूल से होगा वार: उधर ‘दृश्यम 2’ ने 3 दिन में ही निकाला बजट, इधर अजय देवगन ने दिया नया ‘सरप्राइज’

बॉलीवुड अभिनेता अजय देवगन (Ajay Devgn) की फिल्म ‘दृश्यम 2’ (Drishyam 2) का बॉक्स ऑफिस पर शानदार कमाई का सिलसिला जारी है। फिल्म ने तीसरे दिन 64.14 करोड़ का बिजनेस किया है। ट्रेंड एनालिस्ट तरण आदर्श के मुताबिक, अजय देवगन की फिल्म ने शुक्रवार को 15.38 करोड़, शनिवार को 21.59 करोड़ और रविवार को 27.17 करोड़ रुपए की नेट कमाई के साथ कुल 64.14 करोड़ कमा लिए हैं। फिल्म की कमाई की रफ्तार देखते हुए ये उम्मीद जताई जा रही है कि ‘दृश्यम 2’ जल्द ही 100 करोड़ क्लब में शामिल हो जाएगी।

‘दृश्यम 2’ के ओपनिंग वीकेंड का कलेक्शन ‘भूल भुलैया 2’ से बहुत आगे है। कार्तिक आर्यन की फिल्म ने अपने पहले 3 दिनों में 55.96 करोड़ का नेट कलेक्शन किया था। लेकिन ‘दृश्यम 2’ ने ‘भूल भुलैया 2’ को पीछे छोड़ते हुए ओपनिंग वीकेंड पर सबसे अधिक कमाई करने वाली फिल्म का रिकॉर्ड बनाया है।

बता दें कि ‘दृश्यम 2’ फिल्म 18 नवंबर 2022 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई है। फिल्म में श्रिया सरन अजय देवगन की पत्नी बनी हैं। वहीं इशिता दत्ता ने उनकी बेटी का किरदार निभाया है। यह एक मिस्ट्री थ्रिलर फिल्म है, जो मोहनलाल की मलयालम फिल्म का ऑफिशियल रीमेक है। ‘दृश्यम 2’ मलयालम भाषा में 19 फरवरी 2021 को ही रिलीज हो गई थी। मलयालम की ‘दृश्यम’ और ‘दृश्यम 2’ भी बॉक्स ऑफिस पर बहुत बड़ी हिट साबित हुई थी।

बॉलीवुड के लिए यह बहुत अच्छी बात है कि इस फिल्म को दर्शकों का भरपूर प्यार मिल रहा है। लेकिन अगर यह ​फिल्म भी पुष्पा, केजीएफ चैप्टर 2, आरआरआर और अन्य दक्षिण भारतीय फिल्मों की तरह एक साथ कई भाषाओं में रिलीज की जाती तो, आज अजय देवगन की जगह मोहनलाल को हिन्दी बेल्ट के दर्शकों का प्यार मिल रहा होता। साउथ की फिल्मों के रिमेक से मोटी कमाई करना बॉलीवुड का पुराना धंधा रहा है। अजय देवगन की इस साल रिलीज हुई ये तीसरी फिल्म है। उनकी पिछली दोनों फिल्में ‘रनवे 34’ और ‘थैंक गॉड’ सिनेमाघरों में फ्लॉप साबित हुई हैं।

उधर अजय देवगन ने अब ‘भोला’ का टीजर भी जारी कर दिया है, जो कार्ति स्टारर तमिल फिल्म ‘कैथी’ की रीमेक है। इस फिल्म के टीजर में अजय देवगन को ललाट पर भस्म लगाते हुए देखा जा सकता है। साथ ही फिल्म के लोगो के रूप में त्रिशूल को भी प्रदर्शित किया गया है।

‘मेरे लिए आप अल्लाह जैसे’: कॉन्ग्रेस MLA का वीडियो वायरल, गुजरात में मुस्लिमों को साधने के लिए कहा- हिंदू इलाके में डिस्पेंसरी नहीं बनने दूँगा

गुजरात की 182 सदस्यीय विधानसभा (Gujarat Assembly Election 2022) के लिए 1 और 5 दिसंबर को वोट डलेंगे। नतीजे 8 दिसंबर को आएँगे। चुनाव प्रचार के बीच कॉन्ग्रेस नेता इंद्रजीत परमार (Indrajit Parmar) का एक वीडियो वायरल हुआ है। वे महुधा के निवर्तमान विधायक हैं। वीडियो में वे अपने क्षेत्र के मुस्लिम निवासियों को संबोधित करते हुए उनकी तुलना ‘अल्लाह’ से कर रहे हैं। साथ में यह भी कह रहे हैं कि हिंदू इलाके में कोई डिस्पेंसरी नहीं बनने देंगे।

कॉन्ग्रेस नेता का यह वीडियो गुजरात BJP के महासचिव प्रदीपसिंह वाघेला ने रविवार (20 नवंबर 2022) को शेयर किया। वायरल वीडियो में परमार कह रहे हैं, “कई मुस्लिमों, महिलाओं ने यह अफवाह फैलाई कि आपका विधायक आपके साथ नहीं है। लेकिन मेरे लिए आप मेरे माता-पिता, अल्लाह की तरह हैं। यदि यह डिस्पेंसरी उस क्षेत्र (हिन्दू बहुल क्षेत्र) में चला जाता है, तो यह किसी काम का नहीं है। वे (हिंदू) निजी अस्पतालों में ही जाएँगे। केवल मुस्लिम समुदाय ही है, जो ‘आरोग्य’ में जाता है। मैं आपकी वजह से विधायक बना हूँ। मुस्लिम समुदाय ने मुझे काफी वोट दिए हैं। मैं आपको गारंटी देता हूँ कि मैं वहाँ डिस्पेंसरी नहीं बनने दूँगा।”

हालाँकि, परमार ने दावा किया है कि वीडियो 2017 का है। परमार ने साथ ही अपने ऊपर लगाए गए धार्मिक भेदभाव के आरोपों का खंडन किया है।

इससे पहले एक और कॉन्ग्रेस नेता चंदनजी ठाकोर का भी इसी तरह का एक वीडियो सामने आया था। इसमें वे दावा कर रहे थे कि केवल मुस्लिम समुदाय ही देश को बचा सकता है और केवल मुस्लिम समुदाय ही कॉन्ग्रेस को वोट देकर सत्ता में ला सकता है। यह वीडियो गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने शनिवार (19 नवंबर 2022)को शेयर किया था।

ठाकोर ने दावा किया था कि कॉन्ग्रेस के अलावा किसी भी राजनीतिक दल ने मुस्लिम समुदाय की बात नहीं की है। उन्होंने दावा किया कि केवल कॉन्ग्रेस ही मुस्लिम समुदाय की बात सुनती है। उन्होंने यह भी कहा कि कॉन्ग्रेस पार्टी मुस्लिमों की रक्षा करती है।

ऐसी भी क्या एहसास-ए-कमतरी, याद रखो मुस्लिम हो… फहाद मुस्तफा ने छुए गोविंदा के पाँव तो भड़के इस्लामी कट्टरपंथी, कहा – घुटनों पर ही लेट जाओ

दुबई में हुए ‘फिल्मफेयर मिडिल ईस्ट अचीवर्स नाइट’ में पाकिस्तानी अभिनेता फहाद मुस्तफा (Fahad Mustafa) ने बॉलीवुड स्टार गोविंदा (Govinda) की तारीफों के पुल बाँधे और पाँव छूकर उनका आशीर्वाद भी लिया। उन्होंने रविवार (20 नवंबर, 2022) को कहा, “फिल्मफेयर के स्टेज पर खड़ा होना बहुत ही गर्व की बात है। आज हम वहाँ खड़े हैं, जहाँ पर कभी गोविंदा सर खड़े हो चुके हैं।”

बॉलीवुड अभिनेता की प्रशंसा करते हुए पाकिस्तानी एक्टर ने आगे कहा, “गोविंदा सर, हम आपके फैन हैं। हमें पाकिस्तान में एक्टिंग करते हुए हमेशा ऐसा लगता था कि हमें जो भी एक्टिंग करनी है वो आपके जैसी ही करनी है। एक बार फिर से गोविंदा सर के लिए जोरदार तालियाँ।” इसके बाद फहाद मुस्तफा ने वहाँ मौजूद बॉलीवुड अभिनेता रणवीर सिंह की भी तारीफ की और फिर स्टेज से नीचे उतरकर गोविंदा के पाँव छूकर उनका आशीर्वाद भी लिया।

सोशल मीडिया पर यह वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। इसको लेकर कुछ मुस्लिम फहाद को ट्रोल कर रहे हैं और उन्हें गालियाँ दे रहे हैं।

@NayabSohail7 नाम के ट्रॉलर ने अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा, “समझ नहीं आता कि फहाद मुस्तफा ने गोविंदा के पैर क्यों छुए? हो क्या जाता है… वहाँ के कितने जूनियर्स और जावेद शेख को इज्जत दी है?”

दरअसल, फहाद मुस्तफा को फिल्मफेयर एमई अचीवर्स नाइट में ‘पाकिस्तान के प्रॉमिसिंग स्टार’ के अवॉर्ड सम्मानित किया गया, जहाँ उन्होंने बताया कि कैसे गोविंदा ने उन्हें एक्टिंग की दुनिया में आने के लिए प्रेरित किया। इस वीडियो पर मोहम्मद बिन सादिक ने लिखा यकीन नहीं होता हमारे पाकिस्तानी इतने क्यों लेट जाते हैं भारतीय कलाकारों के सामने। ऐसी भी क्या एहसास-ए-कमतरी।

सामरा ने लिखा, “फहाद मुस्तफा को गोविंदा के पैर छूते देख बहुत गुस्सा आया।”

मरयम ने कहा कि उनके घुटनों से लग कर बैठ जाओ ना।

इंस्टाग्राम पर कुछ ट्रोल्स ने कहा कि तुम मुस्लिम हो और मुस्लिम ऐसा नहीं करते हैं।

फोटो साभार: इंस्टाग्राम @entertainmentv

बता दें कि इस अवॉर्ड शो में गोविंदा के अलावा रणवीर​ सिंह, हेमा मालिनी (Hema Malini), आयुष्मान खुराना (Ayushmann Khurrana), अर्जुन कपूर (Arjun Kapoor), तमन्ना भाटिया, जाह्नवी कपूर और मनीष पॉल के साथ बॉलीवुड (Bollywood) की कई दिग्गज हस्तियाँ भी मौजूद रही। इनके अलावा पाकिस्तान (Pakistan) के कुछ कलाकार भी कार्यक्रम में शामिल हुए।

सालभर से ‘गायब’ था विकास, जंगल में मिले टुकड़े (80 हड्डियाँ): ‘दोस्त’ युनूस ने काटकर फेंक दिया, बहन से प्रेम नहीं था कबूल

मध्य प्रदेश के रीवा में विकास गिरी नाम के एक व्यक्ति की निर्मम हत्या का मामला प्रकाश में आया है। बताया जा रहा है कि विकास की जान उनके बिजनेस पार्टनर यूनुस अंसारी ने ली। यूनुस ने न केवल उनको मारा बल्कि उनके शव को रीवा के दुधमुनिया जंगल में ले जाकर फेंक दिया। बाद में मीडिया ने बताया कि पुलिस को जंगल से विकास के 80 टुकड़े बरामद हुए हैं।

पिछले साल 3 अक्टूबर 2021 को विकास के अचानक लापता होने के कारण उनके पिता ने पुलिस में कंप्लेन दी थी, लेकिन बहुत खोजबीन के बाद भी उनका कुछ पता नहीं चला। केस का खुलासा उस वक्त हुआ जब जंगल से एक इंसानी कंकाल बरामद हुआ और उसके पास से विकास गिरी का आधार कार्ड पड़ा मिला।

नरकंकाल मिलने के बाद विकास के पिता ने इस केस में हत्या का आरोप लगाकर इस केस को दर्ज करवाया और पुलिस ने 9 महीने बाद जाकर 14 नवंबर को यूनुस को गिरफ्तार किया। पूछताछ में सामने आया कि यूनुस ने अपने जीजा सिरताज मोहम्मद के साथ मिलकर इस हत्या को अंजाम दिया था।

जंगल से मिली 80 हड्डियाँ

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक विकास गिरी मऊगंज से 3 अक्टूबर 2021 को लापता हुए थे। मिसिंग कंप्लेन होने के बाद से पुलिस उन्हें तलाशने में जुटी थी। लेकिन, उनके बारे में 4 महीने बाद पता चला जब चरवाहों को नरकंकाल मिला। मीडिया में दावा किया गया कि विकास के 80 टुकड़े करके फेंके गए। हालाँकि रीवा रियासत की रिपोर्ट बताती है कि 80 टुकड़े नहीं बल्कि 80 हड्डियाँ मिली थीं जिन्हें सबूत के तौर पर कलेक्ट किया गया और उन्हीं की जाँच करवाई गई।

यूनुस अंसारी ने क्यों की हत्या?

आरोपित यूनुस अंसारी ने हत्या का कारण बताते हुए कहा कि वो और विकास दोनों अच्छे दोस्त थे। दोनों को साथ में प्लांटेशन का ठेका मिलता था। इसी सिलसिले में विकास उसके घर आता था। जहाँ विकास का यूनुस की तीन बहनों में से एक शादीशुदा बहन के साथ अफेयर हो गया।

3 अक्टूबर की शाम 6 बजे विकास गिरी यूनुस के घर में देशी अंडा लेकर आया था। तब, यूनुस और उसका जीजा सिरताज जंगल में घूमने गए थे। करीबन 8 बजे बजे दोनों घर में लौटे तो विकास 19 वर्षीय बड़ी बहन के साथ दिखा। इसके बाद उन्होंने विकास के सिर पर डंडा मारकर उसे मारा और उसके मरने के बाद शव को रस्सी से बाँधकर जंगल में छिपा दिया।