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पुण्यकोटि दत्तू योजना: गाय संरक्षण के लिए 1 दिन का वेतन देंगे कर्नाटक के सरकारी कर्मचारी, आम लोग भी ले सकेंगे गौवंश को गोद

कर्नाटक की भाजपा सरकार ने गौ वंश संरक्षण के लिए ‘पुण्यकोटि दत्तू योजना’ शुरू की है। योजना के तहत बेसहारा गायों को संरक्षण प्रदान किया जाएगा। योजना के सफल संचालन और वित्तीय आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए राज्य के सरकारी कर्मचारियों का एक दिन का वेतन काटा जाएगा।

राज्य के वित्त विभाग की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि राज्य कर्मचारियों के नवंबर महीने की सैलरी में से एक दिन का वेतन इस योजना के लिए काटा जाएगा। हालाँकि यह स्वैच्छिक है। जो कर्मचारी योगदान नहीं देना चाहते, उन्हें अपने विभाग प्रमुख को 25 नवंबर से पहले लिखित में बताना होगा। इसके जरिए 80 से 100 करोड़ रुपए योजना के लिए जमा होने का अनुमान है।

रैंक के अनुसार कटेगा वेतन

वित्त विभाग के आदेश के अनुसार ग्रुप ए के कर्मचारियों के वेतन से लगभग 11,000 रुपए, ग्रुप बी के कर्मचारियों से 4,000 रुपए और ग्रुप सी के कर्मचारियों से लगभग 400 रुपए कटेंगे। वहीं ग्रुप डी के कर्मचारियों को इस कटौती से छूट दी गई है।

स्वैच्छिक है योगदान

राज्य के सरकारी कर्मचारियों के लिए यह योगदान स्वैच्छिक रखा गया है। वेतन से काटी जाने वाली एक दिन की राशि सीधे कर्नाटक पशुपालन एवं पशु चिकित्सा सेवा विभाग के खाते में जमा होंगे। जो कर्मचारी यह योगदान नहीं देना चाहते हैं, उन्हें अपने विभाग प्रमुख को 25 नवंबर से पहले लिखित में जानकारी देनी होगी। पिछले महीने कर्नाटक के सरकारी कमचारी संघ के अध्यक्ष सीएस सदाक्षरी ने सीएम बोम्मई से मुलाकात कर संघ की ओर से कर्मचारियों के वेतन कटौती का सहमति पत्र सौंपा था। उन्होंने कहा था कि इस नेक काम में योगदान देने से हमें खुशी होगी।

मवेशियों के कल्याण और रखरखाव का होगा प्रबंध

जमा किए गए इस राशि से राज्य की सरकारी गौशालाओं में मवेशियों के कल्याण और रखरखाव के लिए प्रबंध किए जाएँगे। ‘पुण्यकोटि दत्तू योजना’ को बसवराज बोम्मई सरकार ने पिछले बजट पेश किया था। इसमें गायों को गोद लेने और उनके पालन-पोषण के लिए प्रोत्साहित करने के उपाय शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने स्वयं अब तक 100 गायों को गोद लेने का दावा किया है। राज्य सरकार की मानें तो कर्नाटक सरकार की पुण्यकोटि दत्तू योजना के तहत गोद लेने के लिए विभिन्न गोशालाओं में एक लाख से अधिक गायें हैं। वहीं प्रत्येक जिले में नई गोशाला स्थापित की जा रही हैं, जिसके लिए 50 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं। बड़े पैमाने पर गौवंश संरक्षण के लिए लोगों की भागीदारी की आवश्यकता है और इसके लिए एक वेबसाइट भी बनाई गई है। इस योजना के तहत एक वर्ष के लिए गाय को गोद लेने के लिए ₹11,000 निर्धारित किया गया है।

एलन मस्क ने शेयर की ‘ट्विटर की कब्र’, ट्रेंड हुआ RIP Twitter: अल्टीमेटम के बाद सैकड़ों का इस्तीफा, 3700 को खुद निकाल चुके हैं

जब से ट्विटर की कमान एलन मस्क (Elon Musk) के हाथों में आई है, यह किसी न किसी वजह से रोज चर्चा में बना रहता है। सैकड़ों कर्मचारियों के इस्तीफे के बीच ट्विटर पर #RIPTwitter ट्रेंड हो रहा है। इसके साथ खूब मीम शेयर हो रहे हैं। खुद मस्क ने एक मीम शेयर किया है, जिसमें आप ट्विटर की कब्र देख सकते हैं।

RIPTwitter ट्रेंड के बीच मस्क का पोस्ट

यह सब तब हो रहा है जब ट्विटर के सैंकड़ों कर्मचारियों के नौकरी छोड़ने की खबरें सामने आई है। बताया जा रहा है कंपनी में बड़े स्तर पर किए जा रहे बदलाव और ‘हार्डकोर वर्क’ को लेकर कर्मचारी बेहद नाराज हैं। रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि मस्क के काम के घंटे बढ़ाने और ‘हार्डकोर वर्क’ का अल्टीमेटम देने के बाद सैकड़ों कर्मचारियों ने खुद ही कंपनी से इस्तीफा दे दिया है। इन कर्मचारियों ने ऐसे समय में सामूहिक इस्तीफा दिया है, जब मस्क पहले से ही कंपनी में बड़े स्तर पर कर्मचारियों की छंटनी और अन्य बदलावों को लेकर आलोचना का सामना कर रहे हैं।

27 अक्टूबर 2022 को 44 बिलियन डॉलर (362461220000 रुपए) में ट्विटर को खरीदने के बाद मस्क सीनियर मैनेजमेंट समेत 3700 पूर्व कर्मचारियों को नौकरी से निकाल चुके हैं। मस्क ने सबसे पहले भारतीय मूल के सीईओ पराग अग्रवाल (Parag Agrawal) सहित CFO नेड सेगल और लीगल अफेयर-पॉलिसी हेड विजया गाड्डे की छुट्टी की थी और इन्हें कंपनी हेडक्वार्टर से भी बाहर निकलवा दिया था। इसके बाद उन्होंने ट्वीट किया था- द बर्ड इज फ्रीड (the bird is freed) यानी आजाद हुई चिड़िया।

बताया जा रहा है कि बुधवार (16 नवंबर 2022) को एलन मस्क ने कर्मचारियों को ईमेल के जरिए एक अल्टीमेटम दिया था। इसमें कंपनी के नए मालिक ने ट्विटर 2.0 के निर्माण को लेकर कर्मचारियों को कहा था, “ट्विटर को सफल बनाने के लिए हमें बेहद कट्टर होने की आवश्यकता है।” इसके साथ ही लंबे समय तक काम करने का भी जिक्र किया गया था। इस ईमेल से कर्मचारी खासा नाराज दिखे।

एलन मस्क ने कर्मचारियों को गुरुवार (17 नवंबर 2022) तक कंपनी को छोड़ने का विकल्प दिया था। उन्होंने कहा था कि यह आपको तय करना होगा कि क्या आप लंबे समय तक काम करना चाहते हैं या नहीं। अगर आप यहाँ काम नहीं करना चाहते हैं, तो आपको अगले तीन महीने की सैलरी दे जाएगी।

बता दें कि इससे पहले भी कई कर्मचारियों ने खुद से इस्तीफा दे दिया था। बीते हफ्ते ब्लूमबर्ग न्यूज ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी। इसके मुताबिक, ट्विटर के प्रति लोगों का विश्वास कम हुआ है। मस्क ने कंपनी के कर्मचारियों को बताया था कि वह ट्विटर के दिवालियापन से इनकार नहीं कर सकते हैं। उन्होंने कर्मचा​रियों से यह भी कहा था कि उन्हें हफ्ते में 80 घंटे कार्य करने के लिए तैयार रहना होगा। इसके अलावा उन्होंने कोरोना काल में काम करने के उस लचीलेपन को भी समाप्त कर दिया है, जिसमें कर्मचारियों को घर से काम करने की अनुमति दी गई थी। इस मामले की जानकारी रखने वाले एक व्यक्ति के अनुसार एलन मस्क ने कहा था, “यदि आप नहीं आना चाहते हैं, तो आपका इस्तीफा स्वीकार कर लिया जाएगा। हम सभी को और अधिक मेहनत करने की आवश्यकता है।”

राहुल गाँधी के साथ अंग्रेजों के ‘वफादार नौकर’ के प्रपौत्र, पुलिस के पास पहुँचे सावरकर के पोते और बाला साहब की शिवसेना

कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी (Rahul Gandhi) इन दिनों भारत जोड़ो यात्रा (Bharat Jodo Yatra) पर हैं। अभी यात्रा महाराष्ट्र में है। शुक्रवार (18 नवंबर 2022) को महात्मा गाँधी के प्रपौत्र तुषार गाँधी भी इस यात्रा में शामिल हुए। इधर वीर सावरकर पर की गई टिप्पणियों को लेकर रंजीत सावरकर और बालासाहेबांची शिवसेना ने राहुल गाँधी के खिलाफ पुलिस से शिकायत की है।

राहुल की यात्रा महाराष्ट्र में अपने अंतिम चरण में है। शुक्रवार सुबह अकोला जिले के बालापुर से यात्रा शुरू हुई। बुलढाणा के शेगांव में कॉन्ग्रेस नेता एक जनसभा को भी संबोधित करेंगे। यात्रा से तुषार गाँधी के जुड़ने को लेकर कॉन्ग्रेस ने ट्वीट कर कहा है, “आज भारत जोड़ो यात्रा में महात्मा गाँधी के प्रपौत्र श्री तुषार गाँधी शामिल हुए। वैसे भी इतिहास गवाह है- संकट में घिरे देश को बचाने गाँधी-नेहरू हमेशा साथ आए हैं।”

सावरकर पर टिप्पणी राहुल गाँधी ने महाराष्ट्र के वाशिम में गुरुवार को की थी। उन्होंने कहा था कि सावरकर ने अंग्रेजों की मदद की। जेल में रहने के दौरान माफीनामा लिखकर महात्मा गाँधी और भारतीय नेताओं को धोखा दिया। राहुल गाँधी ने कहा, “सावरकर ने अंग्रेजों को खत लिखकर कहा था कि सर, मैं आपका नौकर रहना चाहता हूँ। जब सावरकर जी ने माफीनामे पर हस्ताक्षर किए तो उसका कारण डर था। अगर वह डरते नहीं तो वह कभी हस्ताक्षर नहीं करते। इससे उन्होंने महात्मा गाँधी और उस वक्त के नेताओं के साथ धोखा किया था।”

इसके खिलाफ वीर सावरकर के पोते रंजीत ने मुंबई के शिवाजी पार्क पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करवाई है। उन्होंने कहा है, “राहुल गाँधी और कॉन्ग्रेस ने सावरकर का पहली बार अपमान नहीं किया है। ये पहले भी सावरकर का अपमान कर चुके हैं। उनका बार-बार अपमान किया जा रहा है। अब हम इसे और नहीं सह सकते।”

इसी तरह महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली बालासाहेबांची शिवसेना ने भी शिकायत दर्ज करवाई है। वंदना सुहास डोंगरे की शिकायत पर पुलिस आईपीसी की धारा 500 और 501 के तहत मामला दर्ज किया है। शिकायत में स्वतंत्रता सेनानी को बदनाम करने और स्थानीय लोगों की भावनाओं को आहत करने का आरोप कॉन्ग्रेस नेता पर लगाया गया है।

वीर सावरकर पर टिप्पणी करते हुए राहुल गाँधी ने एक पत्र भी दिखाया था। इसकी भाषा के आधार पर सावरकर को अंग्रेजों का वफादार बताया था। वैसे इस तरह की भाषा में पत्र लिखने का उस जमाने में चलन था। सावरकर ही नहीं, उस समय महात्मा गाँधी ने भी अंग्रेजों को लिखे अपने पत्रों के अंत में इसी वाक्य का प्रयोग किया था। इससे पता चलता है कि जिस तरह आज ‘भवदीय’ आदि लिखकर पत्र के अंत में अपना नाम लिखने का चलन है, उसी तरह यह उन दिनों पत्रों को समाप्त करने का मानक और सामान्य तरीका था।

ड्यूक ऑफ कनॉट को लिखे पत्र के अंत में महात्मा गाँधी ने लिखा था, ‘I beg to remain, your royal Highness faithful servant, M.K Gandhi’ यानी ‘आपका सदैव नौकर बने का प्रार्थी….’। राहुल गाँधी पत्र लिखने के इसी तरीके पर सवाल उठा रहे हैं और इसे अंग्रेजों के मददगार के रूप में मान रहे हैं। पत्र के अंत में महात्मा गाँधी जो लिखते थे, वही सावरकर ने भी लिखा था।

टीवी पर कट्टरपंथी पाठ, नाबालिगों से रेप: जिस ‘इस्लामिक उपदेशक’ की 1000 गर्लफ्रेंड उसे 8658 साल की सजा, मिली थी 69000 गर्भनिरोधक गोलियाँ

तुर्की की अदालत ने इस्लामिक उपदेशक अदनान ओकतार (Adnan Oktar) को 8658 साल की सजा सुनाई है। टीवी पर कट्टरपंथी पाठ पढ़ाने वाला ओकतार अपने मॉर्डन कपड़ों और महिलाओं से घिरे रहने को लेकर चर्चा में रहा है। वह लड़कियों को किटेन्स बोलता था। अदालत में बताया था कि उसकी करीब 1000 गर्लफ्रेंड है।

इस्तांबुल की हाई क्रिमिनल कोर्ट ने उसे बुधवार (16 नवंबर 2022) को सजा सुनाई। उसे आतंकवादी संगठन चलाने, यौन शोषण, नाबालिगों से रेप, ब्लैकमेल करने, मनी लॉन्ड्रिंग और जासूसी के मामले में सजा सुनाई गई है। वह ऑनलाइन ए9 टीवी चैनल पर इस्लामिक उपदेश देता था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ओकतार जब टीवी पर कट्टरपंथी पाठ पढ़ाता था तब उसके चारों तरफ छोटे कपड़ों में महिलाएँ मौजूद रहती थीं। वह इन महिलाओं को ‘किटेन्स (kittens)’ यानी बिल्ली कहता था। उसके इस शो की खूब आलोचना भी होती रही है। सोशल मीडिया पर भी उसके कई वीडियो वायरल हुए हैं, जिसमें वह महिलाओं के साथ डांस करता हुआ नजर आ रहा है।

फोटो साभार: breezyscroll

अदालत के फैसले के बाद आरोपित अदनान ने कहा, “हमें आपसे बहुत प्यार है। हमें अपनी सरकार पर पूरा भरोसा है। हम इस फैसले से खुश हैं। ये अल्लाह का फैसला है। हमारे जीवन में अच्छे दिन हैं। इस्लाम पूरी दुनिया पर राज करेगा। तुर्की एक सुंदर देश होगा। यह फैसला फायदेमंद हो सकता है।“

मालूम हो कि पिछले साल 66 वर्षीय अदनान ओकतार को यौन उत्पीड़न, नाबालिगों के यौन शोषण, धोखाधड़ी और राजनीतिक और सैन्य जासूसी के प्रयास सहित अन्य अपराधों के लिए 1,075 साल की सजा सुनाई गई थी। 236 अन्य लोगों पर उसके संगठन से जुड़े होने और उसका सदस्य होने का आरोप लगाया गया था, लेकिन इस फैसले को ऊपरी अदालत ने पलट दिया था।

इसी तरह इससे पहले दूसरे मामलों में ओकतार को 891 साल की सजा सुनाई गई थी। उसके खिलाफ एक आपराधिक संगठन चलाने, यौन शोषण, शिक्षा के अधिकारों से वंचित करने, यातना, अपहरण और गैरकानूनी तरीके से व्यक्तिगत डेटा इकट्ठा करने के आरोप थे। उसके द्वारा किए गए अपराधों की लिस्ट इतनी लंबी है कि उसकी सजा बढ़ाकर 8658 साल कर दी गई।

बता दें कि इस्तांबुल की पुलिस अपराध इकाई ने 2018 में अदनान ओकतार के विला पर छापा मार कर सैकड़ों समर्थकों के साथ उसे गिरफ्तार किया था। छापेमारी के दौरान पुलिस को पता चला कि वह इस्लामिक उपदेशक बनकर आपराधिक गिरोह चलाता है। इसके अलावा उसके घर में पुलिस को लगभग 69000 गर्भ निरोधक गोलियाँ मिली थीं। इसको लेकर उपदेशक ने अदालत में दावा किया था कि इसका इस्तेमाल वह स्किन से संबन्धित और मासिक धर्म से जुड़ी समस्याओं का इलाज करने के लिए करता था।

स्कूली बच्चों के टैबलेट में केजरीवाल ने माँगा था कमीशन: सुकेश चंद्रशेखर का दावा, बताया- सिसोदिया के रिश्तेदार के नाम पर बननी थी कंपनी

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया सहित आम आदमी पार्टी (AAP) के नेताओं ने टैबलेट सप्लाई में कमीशन की माँग की थी। यह दावा दिल्ली की मंडोली जेल में बंद महाठग सुकेश चंद्रशेखर ने किया है। उसने गुरुवार (17 नवंबर 2021) को अपने वकील अनंत मलिक के जरिए पत्र जारी कर ये आरोप लगाए हैं।

पत्र के अनुसार यह मामला 2016 का है। दिल्ली के स्कूली बच्चों के लिए टैबलेट की सप्लाई की जानी थी। पत्र में केजरीवाल, सिसोदिया, जेल में बंद दिल्ली के मंत्री सतेन्द्र जैन पर टैबलेट्स खरीद में घोटाला करने का आरोप लगाया गया है।

सुकेश चंद्रशेखर ने दावा किया है क‍ि उसने चीन की कंपनी डीओएस इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स के शाइन लाउ से AAP नेताओं का परिचय करवाया था। उसने कहा कि टैबलेट के बारे में और जानकारी प्राप्त करने के लिए शाइन और सतेन्द्र जैन, मनीष सिसोदिया के बीच कई बार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग हुई थी। कॉन्फ्रेंस में वह भी शामिल रहता था।

सुकेश चंद्रशेखर का आरोप है कि 2016 के मध्‍य में कैलाश गहलोत के फार्म हाउस में एक मीटिंग हुई थी और इसमें कमीशन तय हुआ था। महाठग ने दावा क‍िया क‍ि बैठक में उसके साथ कंपनी का प्र‍तिन‍िध‍ि अर्णव मलोड‍िया और मनीष स‍िसोद‍िया व सतेन्द्र जैन जैन मौजूद थे। सुकेश ने पत्र में बताया कि सिसोदिया के पुणे के एक रिश्तेदार पंकज के नाम से एक शेल कंपनी बनाई जानी थी। उसमें कमीशन की राशि कर्ज के रूप में स्थानांतरित की जानी थी।

सुकेश का दावा है क‍ि बाद में ज्यादा कमीशन माँगने की वजह से यह सौदा आगे नहीं बढ़ पाया था। सीएम अरविंद केजरीवाल ने उसे कंपनी के प्रतिनिधि को सिसोदिया और जैन की शर्तों पर मनाने को कहा था। लेकिन वह कंपनी के प्रतिनिधि को इसके लिए राजी नहीं कर सका।

सुकेश ने हाल में कई पत्र लिखे हैं। इन पत्रों में केजरीवाल, जैन और सिसोदिया पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उसने दावा किया था कि केजरीवाल ने पैसे देकर दिल्ली के ‘शिक्षा मॉडल’ वाली स्टोरी न्यूयॉर्क टाइम्स में छपवाई थी।

सुकेश ने कहा था कि उसने जो भी आरोप AAP और अरविंद केजरीवाल पर लगाए हैं, वो सब सही हैं और इसके लिए वह पॉलीग्राफी टेस्ट कराने के लिए भी वो तैयार है। साथ ही उसने जैन और केजरीवाल का भी पॉलीग्राफी टेस्ट कराने की माँग की थी।

दिल्ली के उपराज्यपाल विनय सक्सेना को लिखी एक चिट्ठी में वह इन खुलासों के कारण अपनी जान को खतरा भी बता चुका है। इस पत्र में उसने जेल के भीतर हमले का दावा किया था। साथ ही अपनी पत्नी का उत्पीड़न किए जाने की बात भी कही थी। उसने एलजी से दिल्ली के बाहर किसी ऐसी जेल में शिफ्ट करने की गुहार लगाई थी जो आम आदमी पार्टी (AAP) की सरकार के नियंत्रण में न हो।

भगवान कृष्ण की भूमि और हिन्दुओं के तीर्थ स्थल पर मस्जिद-मजारें… सबको ढाह दिया: 1 लाख वर्ग फुट जमीन कब्जे से मुक्त

गुजरात में द्वारका है। हिंदुओं की मान्यता है कि स्वयं भगवान श्री कृष्ण ने इस नगर को बसाया था। यहीं से कुछ दूरी पर बेट द्वारका नाम का द्वीप है। बेट द्वारका वही स्थान है, जहाँ श्री कृष्ण का महल हुआ करता था। इसी बेट द्वारका में गैरकानूनी कब्जे करके लोगों ने मजारें, दरगाहें, गोदाम और रिहाइशी इमारतें खड़ी कर दी थीं। अब इन्हें ढाहा जा रहा है।

2022 के अक्टूबर की शुरुआत से ही गुजरात सरकार ने इन अतिक्रमणों को ढहाने के लिए बड़े पैमाने पर अभियान चलाया और लगभग एक लाख वर्ग फुट सरकारी जमीन को कब्जे से मुक्त करा लिया। इस दौरान 100 से ज्यादा अतिक्रमण हटाए गए। इनमें कई मस्जिद, मजारें और इमारतें शामिल थीं।

पिछले दिनों न्यूज़ 18 इंडिया पर एक कार्यक्रम के दौरान गुजरात के गृह मंत्री हर्ष संघवी से जब इन अवैध मजारों को लेकर प्रश्न किया गया तो उन्होंने साफ कहा, “वह सारी जमीन श्रीकृष्णा की है, वहाँ इस तरह की डुप्लिकेट मज़ार नहीं चलाएँगे।”

किसी को नहीं पता कैसे बन गई मस्जिद और मजारें

बेट द्वारका कभी हिन्दू बहुल हुआ करता था। देखते-देखते यहाँ हिन्दुओं का आबादी कम हो गई और मुस्लिम बहुसंख्यक हो गए। फिर शुरु हुई जमीन पर अवैध कब्जे की साज़िश। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक बेट द्वारका में जंगल काटकर समुद्र के किनारे कई मस्जिद और मज़ारें बनाई गईं। उन स्थानों को चुना गया, जो खाली या वीरान थीं। सालों से निवास कर रहे लोगों को भी नहीं पता कि मस्जिद और मजारों को किसने बनाया।

भौगोलिक स्थितियों के कारण बेट द्वारका में गिनती के लोग रहते थे। समुद्र से घिरे होने की वजह से यहाँ पीने के पानी की दिक्कत थी और रोजगार के साधन भी नहीं थे। धीरे-धीरे मछुआरों ने यहाँ रहना शुरू किया, लेकिन मुस्लिमों की बढ़ती आबादी की वजह से हिंदू बेट द्वारका छोड़कर जाने लगे।

बदल चुकी है डेमोग्राफी

इंडिया टीवी की एक रिपोर्ट के अनुसार बेट द्वारका मंदिर के मुख्य पुजारी का दावा है कि हर साल 5-10 हिन्दू परिवार बेट द्वारका छोड़कर चले जाते हैं। कुछ लोग अवैध कब्जे से परेशान हैं तो कुछ लोग यहाँ चल रही अवैध गतिविधियों से परेशान होकर चले जाते हैं।

भगवान कृष्ण की भूमि बेट द्वारका की डेमोग्राफी पूरी बदल चुकी है। द्वीप पर मुस्लिमों की आबादी बहुत तेजी से बढ़ रही है। राज्य सरकार के अतिक्रमण हटाओ अभियान से बेट द्वारका मंदिर के पुजारी बेहद खुश हैं। बेट द्वारका न सिर्फ हिंदू तीर्थ स्थल होने के नाते बल्कि सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी बहुत संवेदनशील है।

राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा

बेट द्वारका के ज्यादातर लोग मछली का कारोबार करते हैं। लोग बोट से इंटरनेशनल बॉर्डर तक जाते हैं। कितने लोग बॉर्डर की तरफ जा रहे हैं, लौट कर कितने लोग आते हैं, इसका हिसाब रखने वाला कोई नहीं है। यहाँ से कराची की दूरी सिर्फ 105 किलोमीटर के आसपास है।

रिपोर्ट के मुताबिक यहाँ के लोगों ने पाकिस्तानियों से वैवाहिक संबंध भी स्थापित किए हुए हैं। द्वारका के एक स्थानीय आरएसएस नेता ने दैनिक भास्कर को बताया कि द्वीप पर कुछ घर तो ऐसे बने हुए हैं, जिनमें बोट अंदर तक चली जाती है। इन घरों के बारे में अधिकारियों को भी पता है।

गुजरात हाईकोर्ट ने सुन्नी वक्फ बोर्ड को लगाई थी फटकार

बेट द्वारका की डेमोग्राफी बदल रही, हिंदू अपने घर छोड़ कर जा रहे। ऊपर से रही सही कसर सुन्नी वक्फ बोर्ड ने पूरी कर दी। पिछले दिनों बेट द्वारका द्वीप पर सुन्नी वक्फ बोर्ड ने अपना दावा कर दिया। मामला गुजरात हाई कोर्ट पहुँचा। कोर्ट ने वक्फ बोर्ड से पूछा कि श्री कृष्ण की नगरी पर आप कैसे दावा कर सकते हैं? और फटकार लगाते हुए याचिका खारिज कर दी थी।

अंग्रेजों के ‘वफादार नौकर’ थे महात्मा गाँधी, खुद लिखा है… राहुल गाँधी और कॉन्ग्रेसियों को पढ़ना चाहिए, फिर सावरकर पर बोलें

‘भारत जोड़ो यात्रा’ पर निकले कॉन्ग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता राहुल गाँधी (Rahul Gandhi) ने हिंदू बनाम हिंदुत्व के अपने मुद्दे को धार देने के लिए एक बार फिर स्वतंत्रता सेनानी विनायक दामोदर सावरकर (Vinayak Damodar Savarkar) का सहारा लिया है। राहुल गाँधी ने एक चिट्ठी दिखाते हुए कहा कि सावरकर ने अंग्रेजों से माफी माँगी थी और उनके मददगार थे।

अपनी यात्रा के दौरान महाराष्ट्र के वाशिम में पहुँचे कॉन्ग्रेस सांसद राहुल गाँधी ने गुरुवार (17 नवंबर 2022) को एक सभा में कहा कि सावरकर ने अंग्रेजों की मदद की थी और जेल में रहने के दौरान माफीनामा लिखकर महात्मा गाँधी और भारतीय नेताओं को धोखा दिया था।

राहुल गाँधी ने कहा, “सावरकर ने अंग्रेजों को खत लिखकर कहा था कि सर, मैं आपका नौकर रहना चाहता हूँ। जब सावरकर जी ने माफीनामे पर हस्ताक्षर किए तो उसका कारण डर था। अगर वह डरते नहीं तो वह कभी हस्ताक्षर नहीं करते। इससे उन्होंने महात्मा गाँधी और उस वक्त के नेताओं के साथ धोखा किया था।”

हालाँकि, राहुल गाधी के इस बयान पर भाजपा और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने आपत्ति जताई है। इसको लेकर महाराष्ट्र की कैबिनेट में निंदा प्रस्ताव पास किया गया। वहीं, सावरकर के पोते रंजीत सावरकर ने राहुल गाँधी के खिलाफ सावरकर का अपमान करने का मामला दर्ज कराया है।

इस राजनीति से अलग एक तथ्य यह भी है कि ब्रिटिश हुकूमत के दौरान भारत ब्रिटेन की महारानी और सम्राट के अधीन शासित था। इसलिए जो भी अंग्रजों को पत्र लिखता था, उसमें ‘I beg to remain your faithful servant’ लिखता था। सावरकर की चिट्ठी के इसी वाक्य को राहुल गाँधी मुद्दा बना रहे हैं और कह रहे हैं कि वे अंग्रेजों के नौकर रहना चाहते थे।

सावरकर ही नहीं, उस समय महात्मा गाँधी ने भी अंग्रेजों को लिखे अपने पत्रों के अंत में इसी वाक्य का प्रयोग किया है। इससे पता चलता है कि जिस तरह आज ‘भवदीय’ आदि लिखकर पत्र के अंत में अपना नाम लिखने का चलन है, उसी तरह यह उन दिनों पत्रों को समाप्त करने का मानक और सामान्य तरीका था।

ड्यूक ऑफ कनॉट को लिखे पत्र के अंत में महात्मा गाँधी ने लिखा था, ‘I beg to remain, your royal Highness faithful servant, M.K Gandhi’ यानी ‘आपका सदैव नौकर बने का प्रार्थी….’। राहुल गाँधी पत्र लिखने के इसी तरीके पर सवाल उठा रहे हैं और इसे अंग्रेजों के मददगार के रूप में मान रहे हैं। पत्र के अंत में महात्मा गाँधी जो लिखते थे, वही सावरकर ने भी लिखा था।

LGBT समर्थक आफताब को मौलाना ने दिया इस्लाम का ज्ञान, लव जिहाद को नकारा, कहा – ‘प्यार करना ही था तो बहन की तरह करता’

श्रद्धा वाकर की हत्या (Shraddha Walker Murder) आरोपित आफताब शादी के नाम पर उससे नजदीकियाँ बढ़ाई थीं और श्रद्धा इसके लिए अपने माता-पिता की हिदायत को भी दरकिनार कर चली आई थी। इतना ही नहीं, यह बात भी सामने आई है कि आफताब LGBT का समर्थक है। इस्लाम के एक मौलाना ने उसके आचरण को गैर-इस्लामिक बताया है।

यूपी के सीतापुर के लहरपुर कस्बे में स्थित दारुल उलूम रहमानिया मदरसे के मौलाना और जमीयत-उल-हिंद के जिला महासचिव वकील अहमद काशमी का कहना है कि इस्लाम में मर्द-मर्द और औरत-औरत के रिश्ते की मनाही है। एक मुस्लिम LGBT का समर्थक नहीं हो सकता है।

हत्यारोपित आफताब के LGBT समर्थक होने को लेकर मौलाना काशमी ने कहा, “इस्लाम एक कानून का नाम है और जो भी उसके खिलाफ जाएगा तो इस्लाम उसे बोलने या करने की इजाजत नहीं देता है। हम तो उसे सजा नहीं दे सकते, लेकिन मरने के बाद अल्लाह उसे सजा जरूरत देगा कि तुने फितरत के बाहर काम क्यों किया।”

मौलाना काशमी ने कहा कि जहाँ तक शादी की ताल्लुकात की बात है तो ये दुनिया जानती है कि इसके लिए एक मर्द और एक औरत का होना जरूरी है। दुनिया के किसी भी धर्म में इस चीज को जायज करार नहीं दी गई है कि कोई लड़का लड़के से और कोई लड़की लड़की से शादी कर ले। ईश्वर/खालिक ने मर्द और औरत का जिन्स अलग-अलग बनाया है। उसे सुकून तभी मिलेगा, जब शादी के लिए जो सिस्टम बनाया गया है, वहाँ पहुँचेगा। इंसानियत के नाते भी ये एक घिनौना खेल है।

उन्होंने आगे कहा, “एक लड़का एक लड़के के साथ जा करके करेगा क्या? शादी करने के बाद दो चीजें होती हैं- एक ये है कि मियाँ-बीवी आपस में मोहब्बत के साथ रहेंगे, रात गुजारेंगे और उसके नतीजे में कहीं ना कहीं हमारी औलादें पैदा होती हैं। अगर मर्द मर्द से और औरत औरत से शादी कर लेगा तो औलादें कहाँ से आएँगी?”

आफताब के कारनामों को इंसानियत को शर्मसार करने वाला बताते हुए काशमी ने कहा कि धार्मिक सिस्टम में इस तरह की बातें बिल्कुल नहीं आतीं। ऐसा किसी को भी नहीं करना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि अगर कोई मुस्लिम लिव-इन रिलेशन में रहता है तो वह इस्लाम का उल्लंघन करता है।

आफताब मृतक श्रद्धा के साथ लिव-इन रिलेशन में रह रहा था। इसको लेकर मौलाना काशमी ने कहा, “इस्लामी कानून लिव-इन रिलेशन की इजाजत नहीं देता। इसकी इजाजत नहीं है कि बगैर शादी के कोई शख्स किसी से भी संबंध बनाए। दोस्ती-ताल्लुकात की बुनियाद तो एक अलग चीज होती है, लेकिन बगैर शादी के हमारे यहाँ मियाँ-बीवी का ताल्लुकात कोई बनाता है तो उसे ‘जीना’ कहा जाता है। आफताब ने बहुत बड़ा गुनाह किया है।”

आफताब और श्रद्धा के रिलेशन को कुछ लोग लव जिहाद भी मान रहे हैं। हालाँकि, मौलाना काशमी लव जिहाद जैसी किसी बात को सिरे से नकारते हैं। उनका कहना है कि यह प्रोपेगेंडा है। अगर कोई प्यार करने लगा तो यह लव जिहाद है, यह कहना गलत है।

उन्होंने कहा कि एक मुस्लिम को मुस्लिम से ही शादी करना जरूरी है। किसी मुस्लिम को गैर-मुस्लिम से शादी की इजाजत इस्लाम में नहीं है। उन्होंने कहा, “अगर किसी गैर-मुस्लिम को प्यार कर बैठे तो बहन मान कर प्यार करते, शादी के लिए मुस्लिम समुदाय में बहुत सारी लड़कियाँ थीं। यह गलत है कि हम शादी के लिए किसी धर्म के सिस्टम का इस्तेमाल करें।”

कौन है सहर शिनवारी: भारत के खिलाफ टी-20 विश्व कप में 2 बार निकाह करने वाली… या इंटरनेट पर पाकिस्तान की ‘जहरीली नागिन’

पाकिस्तानी एंटरटेनर सहर शिनवारी (Sehar Shinwari) पिछले कुछ हफ्तों से ट्विटर पर चर्चा का विषय बनी हुई हैं। दरअसल, उन्होंने नवंबर की शुरुआत में ट्वीट किया था, “मैं जिम्बाब्वे के लड़के से निकाह करूँगी, अगर उनकी टीम रोमांचक तरीके से अगले मैच में भारत को हरा देती है तो।” इस ट्वीट के वायरल होने के बाद भारत के कई लोगों ने उनके इस प्रस्ताव का मजाक उड़ाया था। हालाँकि, उन्होंने ऐसा ट्वीट पहली बार नहीं किया था। इससे पहले भी वह निकाह का प्रस्ताव देने वाले ट्वीट कर चुकी हैं।

सहर शिनवारी ने 11 सितंबर 2022 को भी इसी तरह एक ट्वीट किया था। उन्होंने लिखा था, “अगर आज श्रीलंका जीत जाती है तो मैं श्रीलंकाई लड़के से निकाह करूँगी।”

शिनवारी इस तरह से अन्य देश के खिलाड़ियों को बार-बार निकाह का प्रस्ताव देकर खुद ही सोशल मीडिया पर अपना मजाक बना चुकी हैं। अनजाने में ही सही लेकिन, शिनवारी का जुनून काफी हद तक सभी को समझ में आ रहा है। पाकिस्तानियों का एक और जुनून भारत और भारत की राजनीति को लेकर भी है। शिनवारी द्वारा गुरुवार (17 नवंबर 2022) तड़के को किए गए ट्वीट से यह साफ जाहिर होता है।

शिनवारी ने अपने ट्वीट में दावा ​किया कि गुजरात में बीजेपी हारेगी और अगर ऐसा नहीं हुआ है तो कोई भी उन्हें कुछ भी कह सकता है। उन्होंने ट्वीट किया, “मैं शर्त लगाती हूँ कि गुजरात विधानसभा चुनाव में भाजपा को शर्मनाक हार मिलने वाली है। अगर ऐसा नहीं होता है, तो मुझे जो मन चाहे वह कहकर बुलाओ।”

उनके पिछले पोस्ट की भी काफी आलोचना हुई थी। उन्हें पता है कि भारतीय भी पाकिस्तानियों का मजाक उड़ाना पसंद करते हैं। इसके तुरंत बाद उन्होंने ट्वीट किया कि कैसे आम आदमी पार्टी गुजरात में चुनाव जीतेगी। उन्होंने लिखा, “पूर्वानुमान के मुताबिक अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी बीजेपी के खिलाफ गुजरात में भारी उलटफेर करेगी।”

भारत से मिल रही तवज्जो से उत्साहित शिनवारी ने फिर ट्वीट कर अरविंद केजरीवाल की तारीफ की।

इंटरनेट की भाषा में कहें तो शिनवारी जो कर रही हैं, उसे ‘टट्टी पोस्टिंग’ और ‘बेटिंग’ कहा जाता है। आम तौर पर मशहूर होने के लिए, फॉलोअर्स की संख्या बढ़ाने के लिए या फिर किसी का रिएक्शन पाने के लिए ऐसे ट्वीट किए जाते हैं। सोशल मीडिया पर ‘वायरल’ होने के लिए यह एक आम हथकंडा है।

अक्सर, विज्ञापन या किसी प्रोडक्ट के प्रमोशन, सेल के लिए भी पैसे देकर लोगों या ब्रांड द्वारा ऐसी लोकप्रियता का लाभ उठाया जाता है। जैसा कि देखा जा सकता है, सहर शिनवारी के ट्विटर बायो में एक लाइन लिखी हुई है, जिससे लोग डायरेक्ट उन तक अपने ब्रांड के प्रमोशन के लिए पहुँच सकते हैं। उनके बॉयो में साफ लिखा गया है, ‘बिजनेस और ब्रांड के पेड प्रमोशन के मुझे DM करें।

सहर शिनवारी का ट्विटर अकाउंट

शिनवारी ने नरेंद्र मोदी के विरोध में और राहुल गाँधी के समर्थन में भी ट्वीट किए हैं।

इस साल सितंबर 2022 में शिनवारी ने ट्वीट किया कि कैसे सिर्फ राहुल गाँधी ही भारत को बीजेपी और आरएसएस से बचा सकते हैं।

शिनवारी आरएसएस (RSS) को बिल्कुल पसंद नहीं करती हैं।

दिलचस्प बात यह है कि कॉन्ग्रेस समर्थक और नेता भी इसी तरह की भाषा का इस्तेमाल आरएसएस से जुड़े लोगों के लिए करते हैं।

2019 के आम चुनाव से पहले शिनवारी ने 2018 में ट्वीट किया था। इस ट्वीट में उन्होंने भारत के प्रधानमंत्री के रूप में राहुल गाँधी का समर्थन किया था।

मालूम हो कि पंजाब के पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने नवजोत सिंह सिद्धू पर पाकिस्तानी नेताओं के साथ होने का आरोप लगाया था।

26 अक्टूबर को ट्वीट करके वह कहती है, “नरेंद्र मोदी आज के रावण हैं।”

वह ‘भक्त’ का मजाक भी उड़ाती हैं और चाहती हैं कि सीएए को निरस्त कर दिया जाए।

सीएए के तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान से आने वाले वहाँ के धार्मिक अल्पसंख्यकों (हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई) को नागरिकता देने का प्रावधान है। यह इन देशों के मुस्लिम नागरिकों के भारत आने पर भी प्रतिबंध नहीं लगाता है, लेकिन इसके लिए अलग प्रावधान है। सीएए विशेष रूप से केवल इन तीन देशों में प्रताड़ित किए जा रहे 6 अल्पसंख्यक धार्मिक समूहों के लिए है।

शिनवारी पाकिस्तान के आईएसआई समर्थित अलगाववादी खालिस्तानी समूह का भी समर्थन करती हैं, जो सिखों के लिए एक अलग देश खालिस्तान बनाना चाहता है।

शिनवारी हिंदुओं और सिखों को बाँटने की कोशिश करती हुए भी देखी गई हैं।

यह तथाकथित किसानों के आंदोलन के दौरान अक्सर इस्तेमाल किया जाता था, जिसमें खालिस्तानी तत्व दिल्ली सीमा पर विरोध-प्रदर्शन का समर्थन कर रहे थे।

शिनवारी, जो स्पष्ट रूप से भारतीय राजनीति से बहुत अधिक जुड़ी हुई लगती हैं, उनके पास ब्लू टिक वाला वैरिफाइड ट्विटर अकाउंट भी है। लेकिन, उनके बारे में बहुत कम ही लोग जानते हैं। कोई मीडिया लेख नहीं है, YouTube पर कोई वीडियो नहीं है, जो इस बात की पुष्टि करता हो कि वह एक पाकिस्तानी एक्ट्रेस हैं।

IMDb पर सहर शिनवारी की प्रोफाइल

वहीं, Avt Khyber पर भी सहर शिनवारी के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल सकी।

Avt Khyber पर सहर शिनवरी के बारे में कुछ नहीं

दरअसल, Avt Khyber के यूट्यूब चैनल पर भी सहर शिनवारी का कोई जिक्र नहीं है।

Avt Khyber के यूट्यूब चैनल पर भी सहर शिनवारी का जिक्र नहीं है।

थोड़ी और पड़ताल करने पर खैबर न्यूज पर ‘खुबूना ना मरी’ (Khuboona Na Mri) नाम से कुछ ‘मिनी टीवी सीरीज’ का पता चला। लेकिन 2017 में अपलोड किए गए एपिसोड में अंग्रेजी सब-टाइटल नहीं है और कोई भी स्पष्ट रूप से पहचान नहीं सकता है कि ट्विटर पर सहर शिनवारी होने का दावा करने वाली महिला वही एक्ट्रेस है, जो सीरियल का हिस्सा थी।

पहली फोटो, अपने ट्विटर हैंडल से शेयर की गई सहर शिनवारी की तस्वीर। दूसरी फोटा, बिना नाम के यूट्यूब वीडियो से ली गई। तीसरी फोटो, सहर शिनवारी के ट्विटर अकाउंट पर प्रोफाइल पिक्चर।

शिनवारी के इंस्टाग्राम अकाउंट में भी सेम ट्विटर बायो जैसा ही लिखा हुआ है। लगभग 35,000 फॉलोअर्स वाला यह उनका प्राइवेट अकाउंट है। हालाँकि, यह एक वैरिफाइड अकाउंट नहीं है।

‘सहर शिरवानी’ का इंस्टाग्राम अकाउंट

वास्तव में, शिनवारी का केवल भारतीय मीडिया ने उल्लेख किया है कि वह दो सप्ताह पहले चर्चा में आई थीं। लेकिन पाकिस्तानी मीडिया में किसी ने भी उनके बारे में कभी कुछ नहीं लिखा। डॉन, द नेशन, अन्य प्रमुख पाकिस्तानी प्रकाशनों में भी उनके बारे में एक भी लेख नहीं है। किसी पाकिस्तानी मीडिया ने उनके बारे में कोई चर्चा नहीं की है। यह दिलचस्प है कि कैसे वह पाकिस्तान में अब तक किसी भी चीज का हिस्सा नहीं रही है और अभी भी उनकी प्रोफाइल पर ब्लू टिक है।

पाकिस्तान PsyOps (दुश्मन को हराने के लिए मनोवैज्ञानिक ऑपरेशन) करने के लिए जाना जाता है, ताकि भारत के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नैरेटिव बनाया जा सके। खासकर कश्मीर और ‘हिंदुत्व शासन में मुस्लिमों की दुर्दशा’ जैसे मुद्दों पर बात करके। ज्ञात हो कि इस साल सितंबर में पाकिस्तान के खिलाफ मैच में अर्शदीप ने 18वें ओवर की तीसरी गेंद में आसिफ अली का कैच छोड़ा था, जिसके बाद भारतीय क्रिकेटर को अचानक सोशल मीडिया पर ट्रोल किया जाने लगा। कुछ अकॉउंट्स से उन्हें देश विरोधी जैसे शब्द तक कहे गए। जो ट्वीट अर्शदीप को देशद्रोही आदि बताते हुए किए गए थे, वो अधिकतर पाकिस्तान और अरब देशों के लोगों ने भारतीय बनकर किए थे।

अक्टूबर 2021 में भारत टी20 वर्ल्ड कप में पाकिस्तान के खिलाफ मैच हार गया था। उस समय, भारतीय क्रिकेटर मोहम्मद शमी को निशाना बनाया गया था। तब प्रोपेगेंडा करने वाले एक शख्स ने दावा किया था कि भारतीयों ने शमी को गाली दी और हार के लिए दोषी ठहराया क्योंकि वह एक मुस्लिम है।

ऐसे में यह निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता है कि क्या ‘सहर शिरवानी’ एक पाकिस्तानी अभिनेत्री का रियल अकाउंट है, जिसने 2017 में एक धारावाहिक में काम किया था और भारतीय राजनीति से बेहद अच्छी तरह से वाकिफ हैं। हो सकता है, यह सिर्फ एक हनीट्रैप है। कुछ गुप्त उद्देश्यों के लिए पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों द्वारा चलाया जाने वाला प्रोपेगेंडा अकाउंट है।

ज्ञानवापी मामले में मुस्लिम पक्ष को झटका, कोर्ट ने कहा- हिन्दू पक्ष की याचिका सुनवाई योग्य: मंदिर में पूजा, मुस्लिमों के प्रवेश पर रोक की है माँग

वाराणसी कोर्ट (Varanasi Court) ने ज्ञानवापी मामले (Gyanvapi Case) में गुरुवार (17 नवंबर 2022) को एक अहम फैसला सुनाया। कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष की आपत्ति खारिज कर दी है। मुस्लिम पक्ष ने कहा था कि ज्ञानवापी परिसर का कब्जा हिंदुओं को सौंपने से जुड़ा मुकदमा सुनवाई योग्य नहीं है। इसकी सुनवाई नहीं होनी चाहिए, लेकिन कोर्ट ने आदेश दिया कि इस मुकदमे पर सुनवाई संभव है। कोर्ट के इस आदेश को ज्ञानवापी मामले में हिन्दुओं की की जीत से जोड़कर देखा जा रहा है।

हिंदू पक्ष के वकील अनुपम द्विवेदी ने कहा, “वाराणसी कोर्ट ने ज्ञानवापी मस्जिद मामले में मुकदमे की पोषणीयता को चुनौती देने वाली मस्जिद समिति की याचिका को खारिज कर दिया। अगली सुनवाई 2 दिसंबर 2022 को है।”

फास्‍ट ट्रैक ने ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में मिले शिवलिंग के पूजा करने के अधिकार, ज्ञानवापी परिसर में मुस्लिमों के प्रवेश पर रोक और ज्ञानवापी परिसर में बने अवैध ढाँचे को हटाने संबंधी मामले को सुनवाई के योग्य माना है। फास्ट ट्रैक कोर्ट में सिविल जज महेंद्र पांडे की अदालत में विश्व वैदिक सनातन संघ ने इस बारे में याचिका दाखिल की थी।

ज्ञानवापी परिसर हिंदुओं को सौंपने सहित तीन माँगों को लेकर फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई हुई। जिन तीन माँगों पर सुनवाई होनी थी, उनमें एक याचिका किरण सिंह विशेन और अन्य की है। इसमें ज्ञानवापी परिसर हिंदुओं को सौंपने की माँग की गई है। इस पर अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमिटी ने आपत्ति की थी। कमेटी ने कहा था कि किरन सिंह विशेन की यह याचिका सुनवाई योग्य नहीं है।

याचिका में हिंदू पक्ष ने गुहार लगाई थी कि तत्काल प्रभाव से ज्योतिर्लिंग की पूजा शुरू कराई जाए और विवादित परिसर हिंदुओं को सौंप दिया जाए जाए। कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई की अगली तारीख 2 दिसंबर 2022 को तय की है।

वादी किरण सिंह ने 24 मई 2022 को मामला दाखिल किया था, जिसमें वाराणसी के जिलाधिकारी, पुलिस आयुक्त, अंजुमन इंतेजामिया कमिटी के साथ ही विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट को प्रतिवादी बनाया गया था। बाद में 25 मई 2022 को जिला अदालत के न्यायाधीश एके विश्वेश ने मुकदमे को फास्ट ट्रैक अदालत अदालत में स्थानांतरित कर दिया था।

विश्व वैदिक सनातन संघ के कार्यकारी अध्यक्ष संतोष सिंह ने फैसले पर ख़ुशी जाहिर करते हुए कहा की यह बड़ी जीत है। उन्होंने कहा कि अब सुनवाई के बाद हिंदुओं की माँगें भी मानी जाएँगी। ऐसी उम्मीद है।

इससे पहले मई में दीवानी न्यायाधीश (सीनियर डिवीजन) की अदालत के आदेश पर ज्ञानवापी-श्रृंगार गौरी परिसर का वीडियोग्राफी सर्वेक्षण कराया गया था। इस सर्वे के दौरान ज्ञानवापी ढाँचे के वजूखाने में शिवलिंग मिला था।