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जीसस से लेकर ट्रंप का फर्जी अकॉउंट पैसे देकर वेरीफाइड, ट्विटर ने रोकी ‘8 डॉलर’ वाली सुविधा: असली ID पर दिखेगा ‘ऑफिशियल’ का लेबल

दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति एलन मस्क ने ट्विटर खरीदने के बाद से इसमें लगातार कई बदलाव किए हैं। जिसमें सबसे बड़ा बदलाव ‘ट्विटर ब्लू’ को माना जा रहा है। इसके अंतर्गत कोई भी व्यक्ति 7.99 डॉलर का पेमेंट करके ब्लू टिक हासिल कर सकता था। इस दौरान लोगों ने कई मशहूर हस्तियों और बड़ी कंपनियों से लेकर ईसा मसीह तक का ट्विटर अकाउंट वेरिफाइड करा लिया था।

हालाँकि, गुरुवार (10 नवंबर 2022) को ट्विटर पर फर्जी अकाउंट्स को ‘ब्लू टिक’ मिलने के कारण उत्पन्न हुई भ्रामक स्थिति बाद अब यह सुविधा बंद कर दी गई है।

दरअसल, इससे पहले तक ट्विटर पर ‘ब्लू टिक’ या ‘वेरिफिकेशन बैज’ सिर्फ मशहूर हस्तियों, राजनीतिक दलों के बड़े नेताओं, खिलाड़ियों, पत्रकारों या बड़ी कम्पनियों के काम कर रहे कर्मचारियों समेत कुछ चुनिंदा लोगों को ही मिलता था। लेकिन, ट्विटर ब्लू के बाद हजारों लोगों ने 7.99 डॉलर पेमेंट कर फर्जी अकाउंट्स पर ‘ब्लू टिक’ खरीद लिया था।

गुरुवार (10 नवंबर 2022) को पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, ईसाइयों के भगवान जीसस क्राइस्ट (ईसा मसीह), ट्विटर के मालिक एलन मस्क और उनकी कंपनियों टेस्ला और स्पेसएक्स समेत मशहूर हस्तियों और खिलाड़ियों के भी फेक अकाउंट्स पर ‘ब्लू टिक’ दिख रहा था।

इसी प्रकार फार्मास्युटिकल कंपनी एली लिली के नाम से बनाए गए एक फेक अकाउंट को भी ब्लू टिक दे दिया गया। इस फेक अकाउंट से किए गए एक ट्वीट ने कंपनी को हिलाकर कर रख दिया। दरअसल, इस अकाउंट से ट्वीट किया गया था कि अब कंपनी मुफ्त में इंसुलिन उपलब्ध कराएगी। इस ट्वीट के बाद शेयर बाजार में कंपनी के शेयर 5% तक गिर गए। जिसके बाद इस ट्वीट के लिए कंपनी को ट्वीट कर माफी भी माँगनी पड़ी है।

हालाँकि, जब ट्विटर पर एक के बाद एक कई फेक ट्विटर अकाउंट्स को वेरिफिकेशन बैज मिल गया तब ट्विटर ने शुक्रवार (11 नवंबर 2022) को ट्वीट कर कहा कि फेक अकाउंट्स से निपटने के लिए कुछ अकाउंट्स में ‘ऑफिशियल’ लेबल जोड़ दिया जाएगा। फिलहाल अब ऐसे कई ट्विटर अकाउंट्स हैं जिनमें ‘ऑफिशियल’ लेबल दिख रहा है। साथ ही, फेक ट्विटर अकाउंट्स जिन्हें ‘ब्लू टिक’ दिया गया था उसे अब हटा दिया गया है।

उल्लेखनीय है कि ट्विटर खरीदने से पहले एलन मस्क ने दावा किया था कि ट्विटर फर्जी खातों से भरा हुआ है इसलिए वह इसे खरीदना नहीं चाहते हैं। लेकिन अब, उनके ट्विटर खरीदने के बाद ट्विटर पर फेक वेटिफाइड अकाउंट्स का अंबार लगा हुआ है।

NCP नेता ने बेल पाने के बाद मनाया जश्न: ‘हर-हर महादेव’ फिल्म रोकने के लिए हॉल में किया था हुड़दंग, समर्थकों ने दर्शक के कपड़े फाड़े थे

महाराष्ट्र (Maharashtra) में उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) के नेतृत्व वाली महाविकास आघाड़ी सरकार (MVA Government) में मंत्री रहे राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (NCP) के नेता जितेंद्र अव्हाड (Jitendra Awhad) को जमानत मिल गई है। बेल मिलने के बाद उन्होंने जश्न मनाया। ठाणे की सत्र न्यायालय के हॉलिडे कोर्ट ने आव्हाड समेत सभी 12 लोगों को 15000 रुपए के निजी मुचलके पर जमानत मंजूर की।

जितेंद्र आव्हाड ने अपने समर्थकों के साथ ठाणे के विवियान मॉल में प्रदर्शित फिल्म हर हर महादेव का रोकने के दौरान एक दर्शक के साथ मारपीट की थी। उसके कपड़े फाड़ दिए गए थे। यह फिल्म छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन पर आधारित है। इसके बाद उन्हें ठाणे पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था।

जमानत से पहले आज (12 नवंबर) हुई सुनवाई में कोर्ट ने जितेंद्र अव्हाड को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। इसके बाद तुरंत आव्हाड ने जमानत के लिए कोर्ट में अपील कर दी। कोर्ट ने सुनवाई के लिए दोपहर 2:45 बजे का समय रखा।

सुनवाई के दौरान पुलिस ने जितेंद्र आव्हाड की जमानत का विरोध किया। पुलिस ने अदालत से कहा कि जितेंद्र आव्हाड एक राजनीतिक शख्सियत हैं और अगर उन्हें जमानत दी गई तो वे गवाहों को धमका सकते हैं। इसके साथ ही सबूतों के साथ छेड़छाड़ भी कर सकते हैं।

हालाँकि, अदालत ने पुलिस की बातों का संज्ञान लिया और जमानत देते समय सभी आरोपितों को ऐसा ना करने की हिदायत दी और इसे जमानत की शर्तों के साथ जोड़ दिया। अव्हाड का कहना था कि फिल्म में शिवाजी महाराज के ऐतिहासिक संदर्भों को गलत तरीके से दिखाया गया है। अव्हाड ने कहा कि उन्हें गिरफ्तार करने का आदेश ‘ऊपर’ से आया था।

जमानत मिलने के बाद जितेंद्र अव्हाड ने जश्न मनाना शुरू कर दिया। जमानत मिलने के बाद जितेंद्र आव्हाड कोर्ट से बाहर आए और जीत का निशान बनाया। इसके बाद उनके समर्थक नारे लगाने शुरू किए। नारे लगाते हुए उन्होंने कहा, ‘तेरा-मेरा नाता क्या…जय शिवाजी, जय शिवाजी’, जय भीम-जय भीम‘।

एंबुलेंस VIP सेवा में थी, माता-पिता ने रेहड़ी पर बच्चे को अस्पताल पहुँचाया: पंजाब की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल, डॉक्टर ने कहा था- खुद करो इंतजाम

चुनाव जीतने के लिए आम आदमी पार्टी जो वादे करती है उसमें बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का मुद्दा सबसे ऊपर होता है। हालाँकि चुनाव जीतने के बाद हाल क्या होता है इसकी एक तस्वीर डेराबस्सी से सामने आई है जहाँ सिविल अस्पताल में एंबुलेंस सुविधा न मिलने के कारण माता-पिता अपने बेटे को रेहड़ी पर ले जाते दिखाई दिए।

घटना डेरीबस्सी की है। यहाँ सिविल अस्पताल में एक 20 साल के लड़के की तबीयत बिगड़ने पर उसे चंडीगढ़ रेफर किया गया। लेकिन जब परिवार ने एंबुलेंस ढूँढनी शुरू की तो उन्हें कोई एंबुलेंस नहीं मिली। अंतत: बेटे की जान बचाने के लिए बुजर्ग पिता अब्दुल वहीद ने मोटहर रेहड़ी चलाई और माँ ग्लूकोज की बोतल लेकर पीछे बैठे रही। रेहड़ी चलाते-चलाते ही दोनों माता-पिता बेटे को लेकर चंडीगढ़ के सेक्टर 31 पहुँचे और बेटे का इलाज कराया।

चंडीगढ़ पहुँचने के बाद पीड़ित पिता ने बताया कि उनके 20 साल के बेटे को कई दिनों से बुखार आ रहा था। इसलिए उन लोगों ने उसे डेराबस्सी के सिविल अस्पताल में भर्ती करवाया। लेकिन डॉक्टरों ने उस पर ध्यान नहीं दिया। नतीजतन लड़के की प्लेटलेट केवल 20 हजार बचीं। हालात बिगड़ती देख सिविल अस्पताल ने उसे चंडीगढ़ रेफर किया। मगर वहाँ भेजने की व्यवस्था नहीं की।

अब्दुल ने खुद एंबुलेंस के नंबर पर फोन लगाया। उन्हें कहा गया कि अभी एंबुलेंस उपलब्ध नहीं हैं और जल्दी में कोई एंबुलेंस नहीं मिल पाएगी। 108 नंबर पर मनाही होने पर पिता मोटर रेहड़ी पर बेटे को चंडीगढ़ लाए। माँ ने लड़के के ग्लूकोज को पकड़ा। अब उसका इलाज वहीं चल रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार सिविल अस्पताल के एसएमओ डॉ धर्मिंदर ने बताया कि शुक्रवार को 2 एंबुलेंस में से एक वीआईपी ड्यूटी पर थी। दूसरी एक मरीज को लेकर चंडीगढ़ गई थी। इसलिए अभिभावकों से कहा गया था कि वो एंबुलेंस की व्यवस्था खुद करें।

पंजाब की इस घटना पर तजिंदर पाल बग्गा ने ट्वीट किया है। ट्वीट में भाजपा नेता ने लिखा, “आम आदमी की सरकार में एंबुलेंस ‘वीआईपी ड्यूटी’ पर थी… इसलिए बेचारा पिता क्या करता, अपने बेटे को मरता तो छोड़ नहीं सकता था। इसलिए बाप ने रेहड़ी चलाई और माँ हाथ में ग्लूकोज लिए पीछे बैठी रही। ऐसे वो डेराबस्सी से चंडीगढ़ पहुँचे।”

मदरसे में छात्रा से 2 महीने से रेप कर रहा था मौलवी, मार कर लाश नहर में फेंकने की धमकी: उधर दिल्ली की मस्जिद में मौलाना ने छात्रा से किया छेड़छाड़

दिल्ली और गाजियाबाद की 2 अलग-अलग घटनाओं में मौलवियों द्वारा 2 नाबालिग लड़कियों से छेड़छाड़ और दुष्कर्म का मामला सामने आया है। दिल्ली पुलिस ने छेड़छाड़ के आरोपित मौलवी अरमान और रेप केस में आरोपित गाजियाबाद के मौलवी शहादत को गिरफ्तार कर लिया है। दिल्ली में छेड़छाड़ मस्जिद में जबकि गाजियाबाद में मदरसे की इमारत के अंदर रेप का आरोप है। दोनों मौलवियों पर पॉक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज हुआ है।

पहला मामला दिल्ली के जफराबाद इलाके का है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 10 साल की पीड़िता क्लास 3 की छात्रा है। वह सरकारी स्कूल में पढ़ाई खत्म कर के रोज घर के पास वाली मस्जिद के मौलवी से तालीम हासिल करने जाया करती थी। गुरुवार (10 नवम्बर, 2022) को मौलवी ने बाकी बच्चों को नीचे छोड़ दिया और बच्ची को ले कर मस्जिद के पहले फ्लोर पर चला गया। वहाँ पहुँच कर उसने पीड़िता से छेड़खानी शुरू कर दिया।

बताया जा रहा है कि इस दौरान पीड़िता शोर मचाने लगी तो मौलवी ने उसे छोड़ दिया। बच्ची ने घर पहुँच कर सभी को मौलवी की करतूत बताई तो परिजनों ने पुलिस को बुलाया। बच्ची के अब्बा की शिकायत पर मौलवी मोहम्मद अरमान को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस मामले की जाँच कर रही है।

गाजियाबाद में फोन चलाने के बहाने रेप

वहीं दूसरा मामला गाजियाबाद के मसूरी थाना क्षेत्र का है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यहाँ मदरसा चलाने वाले मौलवी शहादत पर एक नाबालिग छात्रा के साथ 2 महीने तक रेप का आरोप है। बताया जा रहा है कि शहादत पीड़िता को छुट्टी के बाद भी अपने साथ मोबाइल चलाना सिखाने के बहाने रोक लिया करता था। इस दौरान वो बच्ची से रेप करता था और किसी को बताने पर जान से मारने की धमकी भी दिया करता था। पीड़िता के मुताबिक, मौलवी शहादत उसकी लाश को नहर में फेंक देने की बात कह कर उसे डराता था।

पुलिस ने बताया कि आरोपित ने पहले छेड़छाड़ की और बाद में छात्रा के चुप रहने से उसने रेप किया। बताया जा रहा है कि शहादत ने बच्ची को फोन भी दिलाने का वादा किया था। पीड़िता की उम्र 13 साल है, जो मौलवी शहादत के ही द्वारा संचालित एक प्राइवेट स्कूल में क्लास 6 में पढ़ती थी। जैसे तैसे बच्ची ने हिम्मत कर के अपने घर मौलवी की करतूत बताई, तब उसके परिजनों ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई। पुलिस ने पॉक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज कर के शहादत को गिरफ्तार कर लिया है।

शहादत का मदरसा साल 2014 से चल रहा है। उसका एक स्कूल भी क्लास 8 तक है। पुलिस ने शिक्षा विभाग से मदरसे और स्कूल के मान्यता संबंधी जानकारियाँ जुटाईं हैं।

ICC में अध्यक्ष के बाद सबसे ताकतवर पद पर जय शाह: बजट से लेकर तमाम वित्तीय फैसले भी उनके ही जिम्मे, महत्वपूर्ण समिति के बने प्रमुख

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के सचिव जय शाह (Jay Shah) को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (ICC) का वित्त-वाणिज्यिक मामलों की समिति (F&CA) का प्रमुख चुना गया है। यह ICC की सबसे महत्वपूर्ण समिति है और इस समिति का प्रमुख हमेशा बोर्ड का सदस्य होता है। इसे अध्यक्ष के बाद सबसे ताकतवर पद माना जाता है।

उधर, न्यूजीलैंड के ग्रेग बार्कले (Greg Barclay) को शनिवार (9 नवंबर 2022) को फिर से आईसीसी (ICC) का चेयरमैन चुना गया। उनका कार्यकाल दो साल के लिए होगा। ग्रेग बार्कले को नवंबर 2020 में आईसीसी का चेयमरैन बनाया गया था। इससे पहले वह न्यूजीलैंड क्रिकेट के अध्यक्ष और 2015 में आईसीसी पुरूष क्रिकेट विश्व कप के निदेशक थे।

ग्रेग बार्कले को निर्विरोध चुना गया है। इसका मतलब है कि 17 सदस्यीय बोर्ड में उन्हें BCCI का भी समर्थन प्राप्त था। शाह का वित्त समिति का अध्यक्ष चुने जाने के बाद स्पष्ट हो गया है कि वह ICC बोर्ड में BCCI का प्रतिनिधित्व करेंगे।

ICC की वित्त-वाणिज्यिक मामलों की समिति सभी बड़े वित्तीय नीतिगत फैसले लेती है। यह समिति वार्षिक बजट पर निर्णय लेती है। इसके बाद इस पर बोर्ड मुहर लगाता है। समिति के प्रमुख कामों में सदस्य देशों के बीच राजस्व को साझा शामिल है।

एन श्रीनिवासन के समय में इस समिति का प्रमुख भारत का ही होता था। हालाँकि, बाद में स्थिति ऐसी नहीं रही। BCCI के पूर्व अध्यक्ष सौरव गांगुली पिछले साल तक इस समिति के सदस्य थे। जय शाह अगले कुछ दिनों में आईसीसी बोर्ड की वार्षिक बैठक के लिए मेलबर्न पहुंचेंगे।

UAE से लौटे शाहरुख खान को कस्टम विभाग ने मुंबई एयरपोर्ट पर पकड़ा, ₹18 लाख की कई घड़ियाँ बरामद: 1 घण्टे पूछताछ के बाद भरना पड़ा ₹6 लाख का टैक्स

बॉलीवुड एक्टर शाहरुख खान को मुंबई एयरपोर्ट पर करीब एक घण्टे तक रोका गया। इस दौरान उनसे व उनकी टीम के सदस्यों से कड़ी पूछताछ की गई। इस दौरान कस्टम विभाग ने उनके बैग्स की जाँच की जिसमें उनके पास से महंगी घड़ियों के कवर व कुछ घड़ियाँ भी मिली। इन सारी घड़ियों की कीमत 18 लाख रुपए के आसपास बताई जा रही है। इन घड़ियों के लिए शाहरुख को 6.83 लाख रुपए का टैक्स भरना पड़ा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शाहरुख खान शुक्रवार (11 नवंबर 2022) देर रात करीब 1 बजे यूएई के शारजाह से मुंबई लौटे थे। इस दौरान वह अपनी मैनेजर पूजा, बॉडीगार्ड रवि समेत टीम के अन्य लोगों के साथ थे। गेट से निकलते समय कस्टम विभाग ने उन्हें रोक लिया और उनके सामान की जाँच की।

इस जाँच में कस्टम विभाग को Babun & Zurbk घड़ी, Rolex घड़ी के 6 डिब्बे Spirit ब्रांड की घड़ी व एप्पल सीरीज की घडियाँ भी मिली हैं। यही नहीं, उनके बैग्स से 6 घड़ियों के खाली बॉक्स भी मिले। कस्टम ने इन घड़ियों का इवैल्यूएशन किया तो इन पर 17 लाख 56 हज़ार 500 रुपए की कस्टम ड्यूटी बनी। जिसके बाद इस पर 6 लाख 87 हजार रुपए की कस्टम ड्यूटी चुकाई गई है। रिपोर्ट के अनुसार, कस्टम ड्यूटी का यह बिल शाहरुख खान के क्रेडिट से भरा गया है।

बता दें, जाँच के दौरान कस्टम विभाग ने शाहरुख खान और उनकी टीम से करीब 1 घण्टे तक पूछताछ की है। हालाँकि, इसके बाद शाहरुख और उनकी मैनेजर पूजा ददलानी को एयरपोर्ट से बाहर जाने की अनुमति दे दी गई। लेकिन, उनके बॉडीगार्ड रवि और टीम के अन्य सदस्यों को रोक कर रखा गया था। सभी आवश्यक प्रक्रियाओं को पूरा करने के बाद शनिवार (12 नवंबर 2022) की सुबह 8 बजे कस्टम विभाग ने शाहरुख के बॉडीगार्ड सहित अन्य सदस्यों को भी छोड़ दिया था।

बता दें, शाहरुख खान आखिरी बार साल 2018 में फिल्म ‘जीरो’ के साथ बड़े पर्दे पर दिखाई दिए थे। तब उनकी यह फ़िल्म बॉक्स ऑफिस पर कुछ खास कमाल नहीं कर पाई थी। अब वह अपनी आगामी फ़िल्म पठान के प्रमोशन में जुटे हुए हैं। शाहरुख खान, दीपिका पादुकोण, जॉन अब्राहिम, आशुतोष राणा और डिंपल कपाड़िया स्टारर यह फिल्म 25 जनवरी 2023 को बड़े पर्दे पर रिलीज होगी।

हिन्दू नेता और डेरा अनुयायी के बाद पंजाब में अब महंत की हत्या: धारदार हथियार से किए गए कई वार, कुटिया के पास मिला शव

पंजाब के मोहाली में एक हिन्दू संत की हत्या हो गई है। मृतक का नाम महंत शीतल दास है जिनकी उम्र 70 साल थी। हत्या धारदार हथियार से की गई है। महंत शीतल दास एक कुटिया में रहते थे और भीख माँग कर गुजारा करते थे। हमलावरों का अभी तक कुछ भी नहीं पता चल पाया है। स्थानीय लोगों ने उनका शव गुरुवार (10 नवम्बर 2022) को देखा। पुलिस ने मामला दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मृतक शीतल दास पिछले 42 वर्षों से मोहाली के पास गाँव बूढ़नपुर में रहते थे। यहाँ उनकी झोपड़ी एक सरकारी स्कूल के पीछे बनी हुई थी। इसी जगह पर महंत की समाधि है। शीतल दास मूल रूप से पंजाब के ही फतेहगढ़ साहिब जिले के पास एक गाँव के निवासी थे। घटना के दिन 10 बजे गाँव की महिलाओं ने उनके शव को देखा तो पुलिस को सूचना दी थी।

इस हत्या के पीछे भैंसों की चोरी करने वाले गैंग के होने की आशंका जताई जा रही है। गाँव वालों का कहना है कि एक दिन पहले गाँव में भैंस चोर घुसे थे और उन्होंने एक किसान की भैंस चुराने का प्रयास किया था। इसी दौरान कुछ लोग जाग गए और शोरगुल शुरू हो गया। शोर सुन कर चोर घर की दीवार कूद कर भाग गए। महंत शीतल दास के पास 3 बीघे जमीन भी थी।

पुलिस हत्या से जुड़े तमाम पहलुओं पर जाँच कर रही है। फिलहाल पुलिस ने शव को कब्ज़े में ले कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। घटना की जाँच की जा रही है। पुलिस ने आरोपितों को जल्द गिरफ्तार करने का भरोसा दिया है। बहुजन समाज पार्टी ने शीतल दास की हत्या की निंदा की है।

घटनास्थल पर पहुँच कर बसपा के प्रदेश सचिव जगजीत सिंह छड़बड़ ने आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के बाद पंजाब में कानून व्यवस्था को पूरी तरह से खत्म बताया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में लोगों को मरता छोड़ कर यहाँ के मुख्यमंत्री भगवंत मान गुजरात और हिमाचल प्रदेश के प्रचार में व्यस्त हैं।

उल्लेखनीय है कि पंजाब में पिछले दिनों कई हिंसा की घटनाएँ हुईं हैं। कुछ दिन पहले हिन्दू नेता सुधीर सूरी को मार दिया गया। इसके बाद डेरा अनुयायी की हत्या कर दी गई थी और अब इस तरह हिन्दू महंत को मारने का मामला सामने आया है।

‘कन्नड़ में ही बनाऊँगा फ़िल्में’: ‘कांतारा’ वाले ऋषभ शेट्टी ने ठुकराए बॉलीवुड के ऑफर्स, अकेले कर्नाटक में बिके हैं फिल्म के 1 करोड़ टिकट

कन्नड़ फिल्म ‘कांतारा’ से अपने अभिनय और निर्देशन का लोहा मनवा चुके ऋषभ शेट्टी ने बॉलीवुड के लिए काम करने से मना कर दिया है। ऋषभ शेट्टी ने यह जानकारी ‘मैशेबल इंडिया’ को दिए अपने साक्षातकार में दी। उन्होंने कहा कि बॉलीवुड के कई प्रोडक्शन हाउसेस और फिल्म मेकर्स उनसे संपर्क कर चुके हैं लेकिन उन्हें बॉलीवुड में कोई दिलचस्पी नहीं है। ऋषभ शेट्टी का कहना है कि उन्हें अपने कन्नड़ होने पर गर्व है और कन्नड़ में ही फिल्में बनाना चाहते हैं।

बॉलीवुड को ‘ना’ कहने वाले ऋषभ शेट्टी अकेले स्टार नहीं हैं। उनके पहले भी तेलुगू फिल्मों के सुपरस्टार महेश बाबू और KGF स्टार यश बॉलावुड को मना कर चुके हैं। महेश बाबू ने तो यह तक कह दिया था कि बॉलीवुड उन्हें अफॉर्ड नहीं कर सकता।

‘कांतारा’ मूल रूप से कन्नड़ भाषा में बनी थी, जिसे हिंदी भाषा में डब करके हिंदी मार्केट के लिए भी रिलीज किया गया। ‘कांतारा’ ने हिन्दी मार्केट में भी बंपर कमाई की है। ‘बॉलीवुड हंगामा’ के मुताबिक, फिल्म जल्द ही हिंदी मार्केट में 100 करोड़ क्लब में शामिल होने वाली है। हिंदी भाषा में फिल्म की कमाई 90 करोड़ के आसपास पहुँच चुकी है। ये हाल ही में रिलीज़ हुई बॉलीवुड की कई फिल्मों के लाइफटाइम कमाई से कहीं ज्यादा है।

‘कांतारा’ ने अब तक 350 करोड़ रुपए से ज्यादा की कमाई की

फिल्म की कुल कमाई की बात करें तो इसने अब तक पूरे दुनिया में 350 करोड़ रुपए से ज्यादा बटोर लिए हैं। डोमेस्टिक बॉक्स ऑफिस पर फिल्म ने लगभग 280 करोड़ का कलेक्शन कर लिया है। आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि ‘कांतारा’ मात्र 16 करोड़ रुपए के बजट में बनी फिल्म है, जो अब तक 350 करोड़ रुपए से ज्यादा कमा चुकी है। वहीं IMDB पर ‘कांतारा’ एक्टर यश की ‘केजीएफ 2’ को पछाड़कर देश की नंबर वन फिल्म बन गई है।

इतना ही नहीं, पौराणिक कथाओं और सांस्कृतिक मान्यताओं पर आधारित इस कन्‍नड़ फिल्‍म ने कर्नाटक में 1 करोड़ टिकटें बेचने का रिकॉर्ड बनाया है। 1 करोड़ से ज्यादा फुटफॉल प्राप्त कर फिल्म ने केजीएफ 2 को बड़े अंतर से पिछे छोड़ते हुए इतिहास रच दिया है। 16 करोड़ की इस फिल्‍म ने अकेले कन्‍नड़ वर्जन से अब तक 152 करोड़ रुपए से ज्यादा की कमाई कर ली है। ‘कांतारा’ जैसी फिल्म ने ऋषभ शेट्टी को पैन इंडिया स्टार बना दिया है। हिंदी फिल्मों की दुनिया में जो लोग ऋषभ का नाम नहीं जानते थे, अब उन्हें ‘कांतारा’ के नाम से जानने लगे हैं।

सफाईकर्मियों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुँची थी तमिलनाडु सरकार, लेकिन रवीश ने केंद्र को किया बदनाम: NDTV के झूठ का हुआ पर्दाफाश

केंद्र की भाजपा सरकार के विरोध में NDTV के पत्रकार रवीश कुमार (Ravish Kumar) इतने आगे निकल चुके हैं कि वे मोदी सरकार (Modi Government) को घेरने के लिए लोगों को झूठी खबरें देने लगे हैं। रवीश कुमार ने 9 नवंबर 2022 के अपने प्राइम टाइम शो में कुछ ऐसा ही किया।

रवीश कुमार अपने शो में एक सफाई कर्मचारी के मामले को उठाते हुए केंद्र सरकार पर बरसते हैं। वे कहते हैं, “भारत के मुख्य न्यायधीश के तौर पर जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने आज से अपना कार्यभार संभाल लिया। केंद्र सरकार एक सफाई कर्मचारी के खिलाफ अपील लेकर कोर्ट में आई। मुख्य न्यायाधीश ने केंद्र को ही फटकार लगा दी और कहा कि ये क्या हो रहा है। केंद्र सरकार एक सफाईकर्मी के खिलाफ अपील में यहाँ तक आई है? इतनी शक्तिशाली सरकार और एक सफाईकर्मी के खिलाफ यहाँ तक आ गई? सॉरी, डिसमिस, अपील खारिज हो गई।”

रवीश कुमार आगे कहते हैं, “यह फैसला कहीं से सामान्य नहीं है। कानून मंत्रालय को जानने वाले और समझने वाले ही बता सकेंगे कि ऐसे कितने कमजोर लोगों के खिलाफ केंद्र सरकार और राज्य सरकारें मुकदमा लड़ रही हैं और अपील में सुप्रीम कोर्ट तक आ रही हैं। तब जाकर पता चलेगा कि इस फैसले का कितना महत्व और इसका कितना दूरगामी है।”

रवीश कुमार के प्राइम टाइम के इस शो का वीडियो यूट्यूब पर भी उपलब्ध है। NDTV के हैंडल से इस शो के वीडियो को Youtube पर अपलोड किया गया है। इसके कैप्शन में वीडियो का डेट 9 नवंबर 2022 लिखा हुआ है। रवीश कुमार की इस झूठ को वीडियो के 12वें मिनट से सुना जा सकता है।

दरअसल, जिस सुप्रीम कोर्ट के जिस फैसले की बात रवीश कुमार अपने शो में करके केंद्र सरकार को लताड़ रहे हैं, वह फैसला केंद्र सरकार के खिलाफ नहीं, बल्कि तमिलनाडु सरकार के खिलाफ है। तमिलनाडु में DMK की सरकार है और वहाँ के मुख्यमंत्री एमके स्टालीन (MK Stalin) हैं।

दरअसल, बुधवार (9 नवंबर 2022) को अपना पद ग्रहण करने के बाद चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस हिमा कोहली और जस्टिस जेबी पारदीवाला की बेंच ने तमिलनाडु सरकार की एक अपील पर सुनवाई की। इस सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु की सरकार को फटकार लगाते हुए कहा याचिका खारिज कर दी।

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस चंद्रचूड़ ने तमिलनाडु सरकार को फटकारते हुए कहा, “एक व्यक्ति ने स्कूल में 22 साल तक नौकरी की। इन 22 सालों के बाद वह बिना ग्रैच्युटी और पेंशन के घर लौटता है। यह समाज का सबसे निचला वर्ग है। आखिर सरकार एक स्वीपर के खिलाफ कैसे जा सकती है? इतनी शक्तिशाली सरकार और एक अदने से सफाई कर्मचारी के खिलाफ यहां तक आ गई गई? एक सरकार सफाई कर्मचारी के खिलाफ अपनी ताकत का इस्तेमाल कर रही है? सॉरी, हम इस अर्जी को खारिज करते हैं।”

सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई

दरअसल, एक व्यक्ति तमिलनाडु के सरकारी उच्च माध्यमिक विद्यालय में स्वीपर की पोस्ट पर 22 सालों तक पार्ट टाइम काम कर रहा था। राज्य सरकार ने यह तर्क दिया था कि नई भर्ती के अभाव में व्यक्ति को नियमित कर्मचारी के लाभ नहीं दिए जा सकते हैं। इस मामले में मद्रास हाईकोर्ट ने सफाई कर्मचारी के पक्ष में फैसला सुनाया था। इसके बाद तमिलनाडु सरकार ने इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

तमिलनाडु सरकार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के फैसले को रवीश कुमार ने अपने शो में केंद्र सरकार का मुद्दा बताकर झूठी स्टोरी लोगों को परोसी है। ऐसा नहीं है कि रवीश कुमार ये पहली बार कर रहे हैं। इसके पहले भी वे कई बार फेक न्यूज फैला चुके हैं। रवीश कुमार ने 14 जनवरी 2021 की प्राइम टाइम में भारत सरकार पर आरोप लगाया कि कृषि उत्पाद खरीद के संबंध में सरकार ने गलत डेटा प्रस्तुत किया। इसके बाद उनका फर्जीवाड़ा पकड़ा गया था और सरकार ने कहा था कि रवीश के कार्यक्रम में पेश किए गए आँकड़े गलत हैं।

नेपाल में बंधक बनाए गए 38 भारतीय वापस देश लौटे: जबरन भट्ठे पर करवाया जा रहा था काम, महिलाएँ और बच्चे भी कैद थे

नेपाल के रौतहाट इलाके में बंधक बना कर काम करवाए जा रहे 38 भारतीय मजदूरों को मुक्त करवाया गया है। इसमें महिलाएँ और बच्चे भी शामिल हैं। ये सभी मजदूर उत्तर प्रदेश के निवासी हैं जिन्हें ईंट के एक भट्ठे पर लगाया गया था। मजदूरों के लिए नेपाल के प्रशासन द्वारा बचाव कार्य बुधवार (9 नवम्बर 2022) को छेड़ा गया था। नेपाली पुलिस ने इस कार्रवाई की पुष्टि की है। सभी बंधुआ मजदूरों को भारतीय बलों के हवाले कर दिया गया है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक यह बचाव कार्य परोहा नगर पालिका के अमन ईंट कारखाने पर चला है। मुक्त करवाए गए लोगों में कुल 20 पुरुष थे। बाकी 18 लोगों में महिलाएँ और बच्चे भी शामिल हैं। पुलिस ने यह कार्रवाई एक सूचना के आधार पर की। मुक्त करवाए गए बंधकों को आवश्यक कागजी कार्रवाई के बाद बिहार में सीतामढ़ी जिले के बैरगनिया में SSB (सशस्त्र सीमा बल) के हवाले कर दिया गया। जानकारी के मुताबिक नेपाल के इस इलाके में भारत के अलग-अलग हिस्सों से आए सैकड़ों मजदूर काम करते हैं।

नेपाली मीडिया ने भी इस कार्रवाई की जानकारी देते हुए बताया कि अरुण सिंह नाम के एक पुलिस अधिकारी के नेतृत्व में इस अभियान को अंजाम दिया गया। गौरतलब है कि नेपाल में भारतीय मजदूरों को बंधक बनाने का ये पहला मामला नहीं है। एक रिपोर्ट के मुताबिक साल 2013 में दक्षिणी नेपाल में नेपाली पुलिस ने 27 नाबालिगों सहित 64 भारतीय बंधुआ मजदूरों को मुक्त करवाया था।