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Pak vs Eng: पाकिस्तानी गेंदबाज भारतीय जैसे नहीं – शोएब अख्तर ने चेताया, T-20 वर्ल्ड कप फाइनल के लिए ICC ने बदला नियम

पाकिस्तान और इंग्लैंड (Pakistan Vs. England) के बीच होने वाले T-20 वर्ल्ड कप के फाइनल मैच को लेकर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (ICC) ने नियमों में कुछ बदलाव किए हैं। वहीं, पाकिस्तान के पूर्व गेंदबाज शोएब अख्तर ने पाकिस्तानी टीम को सलाह दी है कि इंग्लैंड की टीम भारतीय टीम नहीं है। इसलिए कुछ ना कुछ करके जीतना पड़ेगा।

आज रविवार (13 नवंबर 2022) को ऑस्ट्रेलिया के मेलबॉर्न स्टेडियम में हो रहे इस फाइनल मैच के लिए ICC ने नियमों में छूट दी है। भारी बारिश को देखते हुए ICC ने फाइनल मैच के लिए एक दिन रिजर्व रखा है। मैच को खत्म करने के लिए ICC ने अतिरिक्त दिन में निर्धारित समय 2 घंटे को बढ़ाकर 4 घंटे कर दिया है।

ICC मैच को निर्धारित दिन खत्म करने के लिए हरसंभव कोशिश करेगा। नॉकआउट स्टेज के लिए एक मैच में दोनों टीमों के कम-से-कम 10 ओवर होने चाहिए। वहीं, सुपर 12 स्टेज के लिए कम-से-कम पाँच ओवर खेले जाने होंगे। मैच रिजर्व डे में तभी जा सकती है, जब मैच को पूरा करने के लिए आवश्यक न्यूनतम ओवर करना संभव ना हो।

उधर, पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर शोएब अख्तर ने कहा कि इंग्लैंड से जीत आसान नहीं होने वाली। उन्होंने कहा, “फर्क ये पडेगा कि इंग्लैंड एक कॉम्प्रिहेंसिव पोजीशन में है। इंग्लैंड का आत्मविश्वास आसमान छू रहा है। इंग्लैंड को पता है की यहाँ पर पाकिस्तान के गेंदबाज भारत की गेंदबाजी की तरह नहीं है। यहाँ कुछ न कुछ करके जीतना होगा। इतनी आसान से वॉकओवर नहीं मिलेगा।”

उन्होंने आगे कहा, “ये बाबर और रिजवान पर बहुत निर्भर करता है। जिस स्ट्राइक रेट से खेले हैं, वो अहम हैं। जिन 6 ओवर में हमारा स्ट्राइक रेट कम था, वो वापस आ गया है। मेलबर्न विकेट अनुमति देगा आपको कि आप उसी स्ट्राइक रेट को बनाए रखें।”

बता दें कि ऑस्ट्रेलिया के मेलबॉर्न में स्थानीय समय के अनुसार 9:30 बजे फाइनल मैच शुरू हो गया है। मुकाबला में पाकिस्तान ने न्यूजीलैंड को 7 विकेट और इंग्लैंड ने भारत को 10 विकट से हराकर प्रवेश किया है।

अमेरिका में एयर शो के दौरान 2 लड़ाकू विमान टकराकर हुए क्रैश, 6 लोगों के मारे जाने की आशंका: द्वितीय विश्वयुद्ध में इनका हुआ था इस्तेमाल

अमेरिका के टेक्सास (Texas, America) में एक एयर शो के दौरान आसमान में दो वार प्लेनों की आपस में भीषण टक्कर हो गई। इसके बाद दोनों में जमीन पर गिर गए और उनमें आग लग गई। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस हादसे में तीन लोगों की मौत हो गई है।

टेक्सास के डलास में शनिवार (12 नवंबर 2022) को एयर शो हो रहा था। यह एयर शो द्वितीय विश्व युद्ध की यादगार के तौर पर आयोजित किया गया था। शो के दौरान एक बोइंग B-17 फ्लाइंग फोर्ट्रेस बॉम्बर और बेल P-63 किंग कोबरा फाइटर आपस में टकरा गए।

अधिकारियों ने यह स्पष्ट नहीं किया कि विमान में कितने लोग सवार थे। हालाँकि, दुर्घटना में चालक दल के सभी छह सदस्यों के मारे जाने की आशंका है। बोल्डर काउंटी शैरिफ ऑफिस की तरफ से दी गई जानकारी के मुताबिक, एक मलबे से दो लोगों के शव निकाले गए हैं। वहीं, दूसरे मलबे से एक व्यक्ति का शव निकाला गया है। घटना को देखते हुए फेडरल एविएशन एडमिनिसट्रेशन (FAA) और नेशनल ट्रांसपोर्टेशन सेफ्टी बोर्ड (NTSB) ने जाँच शुरू कर दी है।

इस घटना का सोशल मीडिया पर कई वीडियो वायरल हो रहे हैं। वीडियो में नजर आ रहा है कि प्लेन बहुत ज्यादा ऊँचाई पर नहीं उड़ रहे थे। इस दौरान दूसरे प्लेन को क्रॉस करने के दौरान एक विमान टकरा गया। टकराने के बाद दोनों प्लेन जमीन पर गिर गए औ उनमें आग लग गई।

डेलास के मेयर ने ट्वीट कर कहा, “जैसा कि आप लोगों ने देखा कि हमारे शहर में एयर शो के दौरान एक दुखद घटना हो गई। फिलहाल, पूरी जानकारी नहीं मिल पाई है या मिली जानकारी की पुष्टि नहीं हो सकी है। नेशनल ट्रांसपोर्टेशन सेफ्टी बोर्ड ने घटनास्थल की कमान संँभाल ली है। डलास पुलिस विभाग और डलास फायर रेस्क्यू की तरफ से मदद पहुँचाई जा रही है।”

बता दें कि B-17 बॉम्बर चार इंजन वाला विमान था और इसने दूसरे विश्व युद्ध में बड़ी भूमिका निभाई थी। वहीं, P-63 किंग कोबरा को उस दौरान बेल एयरक्राफ्ट ने तैयार किया था। इस विमान का इस्तेमाल केवल सोवियत एयर फोर्स करती थी। किंग कोबरा वन सीटर विमान है, जबकि B-17 में 4-5 लोगों के बैठने की जगह होती है। घटना में चालक दल के सभी 6 लोगों की मौत की आशंका जताई जा रही है।

कोमोरेटिव एयरफोर्स के अध्यक्ष हैंक कोट्स ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि समूह के पायलट अच्छी तरह से प्रशिक्षित और लाइसेंस प्राप्त थे, जो आमतौर पर पूर्व एयरलाइन या सैन्य पायलट होते हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह एक एयर शो के दौरान मिडएयर टक्कर ‘बेहद दुर्लभ’ घटना होती है।

कश्मीर में 2 गैर-मुस्लिम (छोटा प्रसाद, गोविंद) फिर बने इस्लामी आतंकियों का शिकार, 10 दिनों में ‘बाहरी’ मजदूरों पर दूसरा आतंकी हमला

कश्मीर (Kashmir) में एक बार फिर इस्लामी आतंकियों ने बाहरी लोगों को निशाना बनाते हुए उन पर अंधाधुन फायरिंग की है। फायरिंग में 2 गैर-स्थानीय श्रमिक घायल हो गए हैं। उन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी है।

घटना अनंतनाग जिले के रक्ख मोमिन इलाके की है। घायल मजदूरों की पहचान छोटा प्रसाद और गोविंद के तौर पर हुई है। दोनों उत्तर प्रदेश के कुशीनगर के रहने वाले हैं। 30 वर्षीय छोटा के पेट में गोली लगी है। वहीं गोविंद के कूल्हे में गोली लगी है। इलाज के लिए दोनों को जीएमसी अनंतनाग शिफ्ट कर दिया गया है।

बता दें कि पिछले 10 दिनों में दक्षिण दूसरे राज्यों के श्रमिकों पर यह दूसरा आतंकी हमला है। इससे पहले 3 नवंबर को अनंतनाग में एक निजी स्कूल के पास बिहार और नेपाल के दो श्रमिकों पर आतंकियों ने हमला किया था।

शनिवार रात को आतंकियों ने जिला अनंतनाग में बिजबेहाड़ा के पास रक्ख मोमिन इलाके में दो मजदूर जा रहे थे। इसी दौरान आतंकियों ने नजदीक से उन पर गोलियाँ बरसा दीं। गोली लगते ही दोनों मजदूर जख्मी होकर गिर गए। उन्हें मरा समझकर आतंकी वहाँ से भाग निकले।

गोलियों की आवाज सुनकर आसपास के गश्त कर रहे सुरक्षाकर्मी मौके पर पहुँच गए और घायलों को स्थानीय लोगों की मदद से अनंतनाग के मेडिकल कालेज अस्पताल पहुँचाया। अस्पताल के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ इकबाल ने बताया कि दोनों मजदूरों की हालत स्थिर है।

घटना के बाद सुरक्षाबल इलाके की घेराबंदी करके आतंकियों को खत्म करने की कोशिश में जुटे हैं। आसपास के इलाकों में सक्रिय संदिग्ध लोगों की पहचान करने की कोशिश की जा रही है। सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट में इस हमले की जिम्मेदारी आतंकी संगठन द रजिस्टेंस फ्रंट (TRF) ने ली है।

‘गलती से हुआ’: उत्तराखंड सरकार ने बाबा रामदेव की 5 दवाओं पर लगा बैन हटाया, बोले आचार्य बालकृष्ण – ऋषि परंपरा को कलंकित कर रहे अयोग्य अधिकारी

शुक्रवार (11 नवंबर, 2022) को उत्तराखंड सरकार की ‘आयुर्वेद और यूनानी लाइसेंस अथॉरिटी’ ने केरल के एक डॉक्टर की शिकायत के बाद ‘भ्रामक विज्ञापनों’ का हवाला देते हुए पतंजलि कंपनी की ‘दिव्य फॉर्मेसी’ की 5 दवाओं के उत्पादन पर बैन लगा दिया था। हालाँकि, अब शनिवार (12 नवंबर) को सरकार ने अपनी ‘गलती’ मानते हुए यह बैन हटा दिया है। बाबा रामदेव के सहयोगी और पतंजलि आयुर्वेदि लिमिटेड के डायरेक्टर आचार्य बालकृष्ण ने इसकी जानकारी दी है।

आचार्य बालकृष्ण ने ट्वीट कर कहा है, “उत्तराखण्ड सरकार ने मानी गलती, पतंजलि की पाँचों दवाओं पर लगा बैन हटाया। पतंजलि संस्थान ने विश्व में सर्वप्रथम आयुर्वेद की औषधियों को 30 वर्षों के निरन्तर पुरुषार्थ व अनुसंधान से अनुसंधान और साक्ष्य आधारित दवा के रूप में स्वीकार्यता दिलाई है।”

उन्होंने यह भी कहा, “माननीय प्रधानमंत्री भी देश को सभी प्रकार की गुलामी की निशानियों को मिटाकर अपनी विरासत के गौरव को प्रतिष्ठित करने के लिए अखण्ड पुरुषार्थ कर रहे हैं। उत्तराखंड के आयुर्वेद लाइसेंसिंग अधिकारी अज्ञानी, असंवेदनशील, अयोग्य अधिकारी पूरी आयुर्वेद की ऋषि परम्परा को कलंकित कर रहे हैं।”

इससे पहले दिव्य फार्मेसी की दवाओं पर बैन लगाने की खबर सामने आने के बाद पतंजलि की ओर से एक बयान जारी कर कहा गया था कि उनकी कंपनी में जितने भी उत्पाद व औषधियाँ बनती हैं सभी निर्धारित मानकों के अनुरूप व वैधानिक प्रक्रियाओं को पूर्ण करते हुए बनाई जाती हैं।

पतंजलि की ओर से यह भी कहा गया था कि पतंजलि की औषधि निर्माण इकाई दिव्य फार्मेसी भी आयुर्वेद परम्परा में सर्वाधिक अनुसंधान व गुणवत्ता के साथ अन्तर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप औषधि बनाने वाली संस्था है। जिसने 500 से अधिक वैज्ञानिकों के सहयोग से प्रिक्लिनिकल व क्लिनिकल ट्रायल के आधार पर जो भी निष्कर्ष निकलता है, उसको रोगी के हित के लिए देश के सामने रखा। कंपनी ने कहा था कि जो आयुर्वेद के विरोधी हैं, उन्हें अपने अनुसंधान से हमेशा प्रमाण व तथ्यों के साथ जवाब दिया है।

क्या है पूरा मामला

दरअसल, केरल के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ केवी बाबू ने राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकरण (एसएलए) ने दिव्य फार्मेसी की दवाओं को लेकर शिकायत की थी। इसके बाद उत्तराखंड की आयुर्वेद और यूनानी लाइसेंस अथॉरिटी ने दिव्य फार्मेसी को आदेश जारी कर बीपीग्रिट, मधुग्रिट, थाइरोग्रिट, लिपिडोम और आईग्रिट गोल्ड दवाओं का उत्पादन रोकने के लिए कहा था। यही नहीं, भ्रामक विज्ञापनों का हवाला देते हुए, प्राधिकरण ने पतंजलि को फॉर्मूलेशन शीट और लेबल में बदलाव करते हुए इन पाँचो दवाओं के लिए फिर से मंजूरी लेने के लिए भी कहा था।

बता दें कि बाबा रामदेव की आयुर्वेदिक प्रोडक्ट बनाने वाली कंपनी ‘पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड’ कई प्रकार के प्रोडक्ट तैयार करती है। इसके अंतर्गत काम करने वाली कंपनी दिव्य फार्मेसी दवाओं का निर्माण करती है।

कुत्ता, हविष्य, माँ सीता… ‘स्त्री विमर्श’ के नाम पर रामायण का उपहास, राहुल गाँधी के फैन की किताब से उद्धरण: जानें एक श्लोक दिखा कर कितना कुछ छिपाया

सोशल मीडिया पर विकास दिव्यकीर्ति का एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वो रामायण में भगवान श्रीराम और माँ सीता को लेकर कुछ ऐसा कहते दिख रहे हैं, जिससे उनका विरोध हो रहा है। विकास दिव्यकीर्ति ‘Drishti IAS’ नामक कोचिंग संस्थान चलाते हैं और UPSC की तैयारी करने वाले छात्रों के बीच काफी लोकप्रिय भी हैं। ऐसे में ये निश्चित है कि वो क्लासरूम में क्या कहते हैं, इसका प्रभाव लाखों छात्रों की सोच पर पड़ता है।

तथ्य तो दे दिए, लेकिन रामायण को उपहास की विषय-वस्तु की तरह पेश किया

उससे भी ज्यादा असर इसका पड़ता है कि ये चीजें किस अंदाज़ में पेश की जा रही हैं। विकास दिव्यकीर्ति जहाँ ये चीजें बोल रहे थे, वहाँ उन्हें काटने वाला कोई नहीं था। उनकी क्लास थी, उनके छात्र थे, उनका संस्थान था, उन्हें बोलने का अधिकार था – उन्होंने बोला। जिस अंदाज़ में उन्होंने कहा कि राम ने खराब वाक्य बोला और फिर कहने लगे कि बोलते हुए उनकी जबान कट कर रह जाएगी, उसके बाद छात्रों की हँसी और फिर उनकी हँसी – धर्मग्रंथ से तथ्य देने का ये अंदाज़ तो सही नहीं ही था।

खास बात ये है कि दूसरे मजहब के धर्म ग्रंथों का ऐसा विश्लेषण वो बंद कमरे में भी नहीं कर सकते। जब बात आप राम, सीता और रामायण की कर रहे हैं तो आपका अंदाज़ भी करोड़ों लोगों की आस्थाओं को ध्यान में रखते हुए उसी अनुरूप होना चाहिए। हमारे धर्मग्रंथ विश्लेषण, बदलाव या आलोचना से परे नहीं हैं, लेकिन ऐसा करने के लिए इन्हें लिखने वालों जैसी योग्यता भी होनी चाहिए। विकास दिव्यकीर्ति विद्वान हैं, लेकिन लाखों छात्रों के मन में वो जो सोच छोड़ गए हैं – हो सकता है इसका असर आज से कुछ वर्षों बाद तब दिखे जब यही छात्र डीएम-एसपी बन कर अलग-अलग इलाकों में पदस्थापित होंगे।

सब पहले बात करते हैं कि माजरा क्या है। पूर्व IAS अधिकारी पुरुषोत्तम अग्रवाल की पुस्तक से उद्धरण देते हुए विकास दिव्यकीर्ति ने उल्लेख किया कि कैसे रावण को हराने के बाद भगवान राम ने माँ सीता से कहा, ये तुम्हारी ग़लतफ़हमी है कि मैंने ये युद्ध तुम्हारे लिए लड़ा है, बल्कि अपने कुल के सम्मान के लिए लड़ा है। विकास दिव्यकीर्ति इसके बाद कहते हैं कि इसके बाद भगवान राम ने कहा कि जिस तरह कुत्ते द्वारा चाटे जाने के बाद घी भोजन योग्य नहीं रहता, उसी तरह अब तुम (माँ सीता) मेरे योग्य नहीं हो।

विकास दिव्यकीर्ति का कहना है कि ऐसे प्रसंगों को गोस्वामी तुलसीदास ने अपने रामचरितमानस में नहीं लिया। उनका तर्क है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में ‘स्त्री विमर्श’ पर छात्रों में लिखने की समझ के लिए ये चीजें बतानी ज़रूरी है। वैसे ‘तीन तलाक’ और ‘हलाला’ इस ‘स्त्री विमर्श’ में आता है या नहीं, हजारों वर्ष पूर्व जाने वाले बस डेढ़ हजार साल पहले जा सकते हैं या नहीं – इस पर बोलने की हिम्मत शायद ही किसी शिक्षक में हो।

विकास दिव्यकीर्ति या अवध प्रताप ओझा जैसे शिक्षक जानते हैं कि उन्हें डिजिटल लोकप्रियता ही इसीलिए मिली है कि उनका पढ़ाने अंदाज़ अलग है और उससे भी ज्यादा इससे कि वो शिक्षक होने के साथ-साथ ‘मोटिवेशनल स्पीकर’ भी हैं। आज विकास दिव्यकीर्ति के कोचिंग संस्थान में उनके द्वारा पढ़ाए जाने वाले विषय (Essay) के अलग से रुपए लिए जाते हैं और उसमें भी अधिकतर उनकी रिकॉर्डिंग्स चलाई जाती हैं। खैर, बाजार के समय में जब सब कुछ बाजार बन चुका है तो नैतिकता की उम्मीद बेमानी है।

राहुल गाँधी का फैन पुरुषोत्तम अग्रवाल, जिसके पुस्तक से ‘स्टार शिक्षक’ ने दिए उद्धरण

आगे बढ़ने से पहले पुरुषोत्तम अग्रवाल की ही बात कर लेते है, जिसका लिखा एक स्टार शिक्षक पढ़ा रहा है और हिन्दू देवी-देवताओं का पूरे क्लासरूम में मजाक बन रहा है। इस व्यक्ति का ट्विटर हैंडल देख कर ही इसकी मानसिकता का अंदाज़ा लग जाता है। खुद को साहित्य आलोचक कहने वाले ये व्यक्ति UPSC बोर्ड का सदस्य रह चुका है। ग्वालियर में जन्मे पुरुषोत्तम अग्रवाल JNU से MA और Ph.D कर चुके हैं। ‘राज्य सभा टीवी (अब संसद टीवी)’ पर आए एक शो ‘किताब’ में वो बतौर एंकर मौजूद रहते थे।

इस व्यक्ति ने कई पुस्तकें लिखी हैं। ट्विटर पर कॉन्ग्रेस पार्टी के ट्वीट्स को रीट्वीट करते हुए वो आपको मिल जाएँगे। ‘भारत जोड़ो यात्रा’ और राहुल गाँधी के भविष्य को लेकर भी चिंतित हैं वो आजकल। नेहरू-गाँधी के बड़े फैन हैं। राहुल गाँधी के भाषण उन्हें अच्छे लगते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मजाक बनाना और लिबरल गिरोह के पत्रकारों के साथ सुर मिलना इनका पेशा है। आजकल इस तरह के ‘बरोजगार’ लोग जो करते है, मोदी सरकार आने के बाद वो भी यही सब कर रहे।

लेकिन, सरकार भले ही भाजपा की हो पर सिस्टम तो ऐसे ही लोगों का है। तभी UPSC एस्पिरेंट्स उन्हें ही पढ़ रहे। स्टार टीचर उन्हें ही पढ़ा रहा। अब आप कहेंगे कि भला कोई व्यक्ति मोदी विरोधी ये देश विरोधी हो गया, या फिर राहुल गाँधी का फैन ही हो गया तो इससे उसका लिखा कैसे गलत हो गया? चूँकि विकास दिव्यकीर्ति ने ‘द लल्लनटॉप’ में आकर महाभारत और वाल्मीकि रामायण की पुस्तकें लाकर अपनी बात साबित की, इसीलिए उन्हें भी तथ्यों से जवाब देना बनता है।

महाभारत में रामोपाख्यान’: वो प्रसंग, जब मार्कण्डेय मुनि ने किया ‘कुत्ते और हविष्य’ वाले कथन का जिक्र

आगे हम इसी सवाल का जवाब देंगे। विकास दिव्यकीर्ति ने ‘कुत्ते और हविष्य’ वाली जो बात कही है, निश्चित तौर पर वो वाल्मीकि रामायण में नहीं है। वो महाभारत में है। महाभारत में एक प्रसंग है जब वन में से जयद्रथ द्रौपदी को हर ले जाता है और पांडव उससे युद्ध कर अपनी पत्नी को छुड़ाते हैं। वन में युधिष्ठिर जब खुद के भाग्य पर ग्लानि कर रहे होते हैं, तब मार्कण्डेय मुनि उन्हें रामायण की कथा सुनाते हैं। विकास दिव्यकीर्ति ने जो उद्धरण दिया, वो यहीं का है।

उन्होंने महाभारत के ‘वन पर्व’ के 291वें अध्याय से उद्धरण दिया। गोरखपुर स्थित गीताप्रेस से अनुवाद का भी जिक्र किया। सबसे पहली बात तो ये है कि लाखों श्लोक वाले किसी साहित्य में कहीं से एक श्लोक का हिंदी अर्थ पढ़ लेने से सब कुछ अंदाज़ा लग जाए, ये मुश्किल है। मार्कण्डेय जी जो कथा सुना रहे हैं, उसमें बताया गया है कि सीता को देख कर राम के मन में शंका आती है और तब वो ये बात कहते हैं। इसमें न घृणा है, न हीन भावना और न ही लिंगभेद, बल्कि ये अपनापन में ‘दारुण वचन’ है, जो शोक में कहा गया है।

वेद व्यास रचित महाभारत में ‘रामोपाख्यान’: मार्कण्डेय मुनि द्वारा सुनाई गई रामायण

संस्कृत साहित्य एक अन्य विद्वान हैं नित्यानंद मिश्रा, जो इस प्रसंग को समझाते हुए नाट्य के रसों के बारे में बताते हैं, जिसमें अस्थायी रूप से आने वाले ‘श्रृंगार रास’ के शंका भाव के बारे में बताया गया है। वो बताते हैं कि वियोग श्रृंगार रस इस प्रसंग में आता है, जबकि कुत्ते और हविष्य वाले श्लोक में ‘करुण भाव/रस’ है। व आगे समझाते हैं कि करुण रस का स्थायी भाव शोक होता है और इस वचन को सुन कर सीता और वहाँ मौजूद वानर-भालू को शोक हुआ।

वो साहित्य के बारे में समझाते हैं कि किसी बात को धीरे से कहने और चिल्ला कर कहने से शोक या क्रोध का पता चलता है। यहाँ अगर संस्कृत शब्द ‘अवलीढ़’ को देखें तो इसके कई अर्थ निकलते हैं। हिंदी में सुनने में ‘कुत्ते का चाटा हुआ’ काफी अपमानकारी लगता है, लेकिन इसी शब्द का अर्थ खाया हुआ, चबाया हुआ या छुआ हुआ भी होता है। ‘अलंकार’ के रूप में भी इसका अर्थ होता है, जिसका कोई लिटरल अर्थ नहीं भी निकल सकता है।

इसका एक अर्थ ये भी है – चारों तरफ से घिरा हुआ। अर्थात, इसका अर्थ ये भी समझा जा सकता है कि ‘कुत्तों से घिरा हुआ।’ यहाँ एक सबसे बड़ी बात देखिए। माँ सीता की तुलना यहाँ किस्से की गई है? हविष्य से। हविष्य पवित्र होता है, यज्ञ में अर्पण किया जाता है, अतः माँ सीता के लिए अपमानजनक शब्द नहीं कही गई है। यहाँ भगवान राम घृणा का भाव नहीं प्रकट कर रहे, बल्कि वो शोक कर रहे हैं, करुणा का भाव प्रकट कर रहे हैं।

संस्कृत साहित्य शास्त्र में रस का सिद्धांत संस्कृत साहित्य का विद्वान ही समझा सकता है, इसे किसी ने छुआ भी नहीं हो और हिन्दुओं को बदनाम करने के लिए एक श्लोक उठा कर ले आए – ये उतना सरल नहीं है। खुद मार्कण्डेय ऋषि कथा सुनाते हुए कह रहे हैं कि राम यहाँ ‘दारुण वचन’ कह रहे हैं, कोई क्रोध या घृणा नहीं दिखा रहे। शोक में एक साधारण व्यक्ति ये बातें कह सकता है, वो स्त्री हो या पुरुष। इन ग्रंथों में अनेकों प्रसंग में ऐसा हुआ है जब लिंगभेद के बिना एक-दूसरे को खरी-खोटी सुनाई गई हो।

‘स्त्री विमर्श’ और ‘Literal Meaning’ उठाने का चक्कर: धर्मग्रंथों की आलोचना कीजिए, पर उपहास नहीं

क्या गांधारी ने महाभारत के बाद शोक करते हुए श्रीकृष्ण को जो श्राप दिया, उसे ‘स्त्री विमर्श’ की श्रेणी में देखा जाएगा या नहीं? कुंती के हर एक आदेश का पाँचों पांडव पालन करते थे, इसे ‘स्त्री विमर्श’ में लाया जाएगा या नहीं? कई बार कटु वचन द्रौपदी ने युधिष्ठिर को भी कहा है उनकी अति-उदारता देख कर, इसे ‘स्त्री विमर्श’ में रखा जाएगा या नहीं? कैकेयी के एक वचन से इतिहास बदल गया, इसे ‘स्त्री विमर्श’ का हिस्सा मान कर इस पर विश्लेषण होगा या नहीं?

मार्कण्डेय मुनि जब ये कथा सुना रहे हैं, वो द्वापर युग का समय है। ये घटना त्रेता युग की है, जिसे वाल्मीकि ने मूल रूप से लिखा है। वेद व्यास द्वारा रचित महाभारत, जिसे उनके शिष्य वैशम्पायन सुना रहे हैं, उसमें मार्कण्डेय मुनि जो कह रहे हैं – ये वो प्रसंग है। क्या इसके ‘Literal Meaning’ को कहीं से उठा कर कहीं रख कर समझ लेना इतना आसान है? गोस्वामी तुलसीदास ने इसका जिक्र करना उचित नहीं समझा, उन्होंने नहीं लिया। ये फिर अलग काल की बात हो गई।

रामकथा के कई रूप हैं और देश, समय एवं समाजिक परिवेश के हिसाब से बदलते रहे हैं। पूरे एशिया की अलग-अलग संस्कृति में इसके अलग-अलग रूप हैं। ये भी छिपा नहीं है कि हमारे ग्रंथों से हजार वर्षों के इस्लामी एवं ईसाई शासन के काल में काफी छेड़छाड़ हुए। उनके उलटे-सीधे अर्थ निकाले गए। आज भी यही कार्य हो रहा है। ऐसे में विकास दिव्यकीर्ति द्वारा इसे उपहास का विषय-वास्तु बना कर पेश करना सही नहीं है, क्योंकि उपर्युक्त प्रसंग में ऐसा कुछ भी नहीं है कि किसी की जबान कट कर गिर जाए।

भगवान श्रीराम के चरित्र को जानने वाले ये समझते हैं कि वो सबसे पहले जनता के शासक हैं, उसके बाद उनके लिए परिवार आता है – लेकिन खुद दुःख सह कर भी वो किसी को नाराज़ नहीं होने देना चाहते। सौतेली माँ एवं पिता के लिए वनवास झेलते हैं। माँ सीता के हरण के बाद विरह में जो उनका क्रंदन है, वो किसी को भी दुःखी कर दे। प्रजा के लिए सर्वस्व त्याग करने को तैयार रहते हैं। राम ऐसे हैं, जिन्होंने कभी स्वयं के सुख के लिए कुछ नहीं किया।

जनता के बीच बुरी चर्चा से बचाने के लिए, एक शासक के साथ-साथ पति धर्म निभाने के लिए – ‘हृदय प्रिया’ के लिए राम ने किया सब

अगर समीक्षा ही करनी है तो ये भी तो हो सकता है कि राम ने जनता तरह-तरह की बातें न करे, इसीलिए ऐसा कहा। इस प्रसंग के दौरान सृष्टि के पाँचों तत्व और स्वयं ब्रह्मा आकर कहते हैं कि सीता पवित्र है और आप उन्हें ग्रहण कीजिए। राम राजा हैं, अतः निवेदन उन्हीं से किया जाता है, सारा पराक्रम उन्होंने ही दिखाया है। जहाँ तक राम के चरित्र की बात है, लक्ष्मण से लेकर वानर-भालू तक इसके साक्षी हैं। भगवान श्रीराम ने साधारण मनुष्य की तरह युक्ति लगा कर प्रजा को तरह-तरह की बातें करने से रोका, ताकि सीता को अपमान न झेलना पड़े – ये भी तो इस ‘दारुण वचन’ का कारण हो सकता है?

राम ने अपने कुल के लिए, अपने राज्य के लिए ये सब किया, अपनी पत्नी और खुद के लिए – इसका ये अर्थ भी तो हो सकता है। उन्होंने रावण का वध कर संसार का कल्याण किया, वो सिर्फ खुद के हित के लिए नहीं गए थे। एक शिक्षक इस प्रसंग को इस तरह से भी तो समझा सकता था न? एक शिक्षक ये भी बता सकता था कि राम ने इस प्रसंग में सीता के लिए देवताओं का प्रमाण लेकर न सिर्फ जनता और इतिहास को चुप कराया, बल्कि ये भी जता दिया कि उनके व्यक्तिगत हित से ज्यादा संसार का कल्याण महत्वपूर्ण है।

वाल्मीकि रामायण देखिए, अपनी ‘हृदय प्रिया’ सीता के लिए ‘जनवाद भय’ राम को सता रहा है। ‘लोग क्या कहेंगे’ – क्या ये आज भी हम सब नहीं सोचते? यहाँ प्रश्न इससे भी बड़ा है। ऐसा क्या किया जाए कि लोग मेरी जो सबसे प्रिय है, उसके बारे में खोटी बुद्धि न रखें। एक पति और एक शासक के बीच धर्मसंकट वाली स्थिति में राम जीवन भर गुजरते रहे। विकास दिव्यकीर्ति सीता विरह में राम का विलाप भी पढ़ाएँ, उनके भीतर के अंतर्द्वंद्व को भी बताएँ – एक श्लोक उठा कर उपहास उड़ा देना हमारी संस्कृति को कमजोर ही करेगा।

66% मतदान, 412 प्रत्याशियों की किस्मत EVM में कैद: विश्व के सबसे ऊँचे पोलिंग बूथ पर शत-प्रतिशत मतदान, अब 8 दिसंबर का इंतजार

शनिवार (12 नवंबर 2022) को हिमाचल प्रदेश की सभी 68 विधानसभा सीटों पर मतदान हुआ। इस बार 412 प्रत्याशी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं, जिसमें 22 महिलाएँ भी हैं। इन सभी प्रत्याशियों की किस्मत अब ईवीएम में कैद हो चुकी है, जिसका फैसला आगामी 8 दिसंबर को होगा।

हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए मतदान सुबह 8 बजे से ही शुरू हो गया था जो कि शाम 5 बजे तक चला। जिसमें कुल 66.09% मतदाताओं ने वोट डाला है। जिलेवार आँकड़ों पर नजर डालें तो लाहौल-स्पीति में सर्वाधिक 62.75 प्रतिशत और चम्बा जिले में सबसे कम 46 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया है।

अन्य जिलों की बात करें तो बिलासपुर में 54.14 प्रतिशत, हमीरपुर में 55.60 प्रतिशत, कांगड़ा में 54.21 प्रतिशत, किन्नौर में 55.30 प्रतिशत, कुल्लू में 58.88 प्रतिशत, मंडी में 56.90 प्रतिशत, शिमला में 55.55 प्रतिशत, सिरमौर में 60.38 प्रतिशत, सोलन में 54.14 प्रतिशत और ऊना जिले में 58.11 प्रतिशत मतदान हुआ है।

हिमाचल प्रदेश में विश्व का सबसे ऊँचा मतदान केंद्र (पोलिंग बूथ) भी है। जहाँ 100 प्रतिशत मतदान कर इतिहास रचा गया है। दरअसल, टशीगंग में कुल 52 मतदाता हैं और सभी ने वोट डाला है।

बता दें, हिमाचल प्रदेश में 1977 में हुए विधानसभा चुनावों के बाद से कभी भी लगातार दो बार एक ही पार्टी की सरकार नहीं बनी है। यानी राज्य की जनता ने दुबारा किसी को भी मौका नहीं दिया है। हालाँकि, इस बार के विधानसभा चुनाव से पहले सामने आए ओपिनियन पोल देखने के बाद ऐसा लग रहा है कि एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी की सरकार बन सकती है। भाजपा भी ऐसा ही दावा करती नजर आ रही है। जबकि, कॉन्ग्रेस नेताओं का दावा है कि उनकी पार्टी सत्ता में आ रही है।

‘तुम्हारे स्तन छोटे हैं, सर्जरी कराओ, रोज तेल मालिश करो’: मॉडल ने बताया – 5 मिनट तक मेरे प्राइवेट पार्ट घूरते रहे साजिद खान, काम माँगने गई थी

फिल्म मेकर साज़िद खान के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोप का एक और मामला सामने आया है। ‘Me Too’ के कई आरोप झेल रहे साज़िद पर अब शीला प्रिया सेठ ने गंभीर आरोप लगाए हैं। मॉडल और अभिनेत्री रहीं शीला प्रिया सेठ ने एक इंटरव्यू में बताया कि उनके साथ साज़िद खान ने घिनौनी हरकत की थी।

दक्षिण भारतीय फिल्मों (तमिल, तेलुगू, मलयालम और अन्य) में काम कर चुकीं शीला ने बताया कि साज़िद से उनकी पहली मुलाकात साल 2008 में हुई थी। वो साज़िद खान से फिल्मों में काम माँगने के लिए गई थीं। शीला ने बताया कि ‘जब मैंने उनसे उनकी आने वाली फिल्म में मुझे कास्ट करने के लिए कहा तब उनकी कुछ हरकतों से मैं दंग रह गई।” शीला ने बताया कि साजिद उन्हें बहुत ही गंदी तरह से घूर रहे थे।

उन्होंने कहा, “वह लगभग 5 मिनट तक मेरे प्राइवेट पार्ट को देखता रहा और टिप्पणी की कि तुम्हें सर्जरी करवानी चाहिए, क्योंकि तुम्हारे स्तन छोटे हैं जो बॉलीवुड के लिए पर्याप्त नहीं हैं।” उन्होंने यहाँ तक कहा कि इसके लिए उन्हें कुछ तेलों से रोजाना मालिश करनी चाहिए।

साज़िद पर पहले भी कई मॉडल्स ने लगाए हैं इल्ज़ाम


शीला से पहले भी कईं एक्ट्रेसेस और मॉडल्स ने साजिद खान पर यौन शोषण के आरोप लगाए थे। इस लिस्ट में शर्लिन चोपड़ा, प्रियंका बोस, अहना कुम्रा जैसी एक्ट्रेसेस का नाम तो है ही, साथ ही इसमें बिपाशा बसु और दिया मिर्जा का नाम भी शामिल है। शर्लिन चोपड़ा ने साज़िद खान पर आरोप लगाया है कि वर्ष 2005 में साज़िद ने उनके साथ गलत व्यवहार किया था। उन्होंने उन्हें अपना प्राइवेट पार्ट दिखाकर उसे छूने के लिए कहा था।

साज़िद की हरकतों पर बहन फराह खान ने भी प्रतिक्रिया दी थी। बॉलीवुड की कोरियोग्राफर और फिल्म निर्माता फराह खान ने साल 2018 में आरोप लगाने वाली महिलाओं का समर्थन किया था। महिलाओं के समर्थन में उन्हें ट्वीट किया था।

फराह ने ट्वीट कर लिखा था, “ये मेरे परिवार के लिए दिल तोड़ने वाला वक़्त है। हमें बहुत ही कठिन समस्याओं पर काम करना होगा। अगर मेरे भाई ने इस तरह का व्यवहार किया है तो उसे प्रायश्चित करना चाहिए। मैं किसी भी तरह से इस तरह के व्यवहार का समर्थन नहीं करती और ऐसी महिलाओं के साथ खड़ी हूँ, जिन्हें चोट पहुँची है।” फ़िलहाल साजिद खान के खिलाफ पीड़ित महिलाओं की संख्या बढ़ती ही जा रही है।

हैदराबाद के हॉस्टल में छात्र हिमांक बंसल को पीटा, लगवाए ‘अल्लाहु अकबर’ के नारे: लात-चाँटे से मारने का वीडियो वायरल, बेड से नीचे पटका

शनिवार (12 नवंबर, 2022) सुबह से ही एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में हैदराबाद के ‘ICFAI फाउंडेशन फॉर हायर एजुकेशन (IFHE)’ के एक छात्र हिमांक बंसल को कॉलेज के अन्य छात्रों द्वारा द्वारा पीटते हुए ‘अल्लाहु अकबर’ का नारा लगाने के लिए मजबूर किया जा रहा था।

सोशल मीडिया पर वायरल इस वीडियो में छात्रों के एक गुट द्वारा छात्रावास के कमरे के अंदर हिमांक बंसल को पीटते और धमकाते हुए देखा जा सकता है। इस वीडियो में यह साफ दिखाई दे रहा है कि हिमांक कमरे में अकेला है और बाकी लोग मिलकर उसके गालों में चाँटे और शरीर के अन्य हिस्सों में पैरों से मार रहे हैं। मारपीट के दौरान हिमांक जिस बेड में बैठा हुआ दिख रहा है, उससे भी उसे नीचे फेंक दिया जाता है।

हमले के बाद, पीड़ित हिमांक बंसल ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। इस शिकायत में उसने कहा है कि कॉलेज ही एक छात्रा दीपाशा शर्मा ने उसे तीन साल छोटी उम्र की लड़की से दोस्ती करने को लेकर ‘Pedophile (बच्चों के प्रति यौन आकर्षण रखने वाला)’ बताया था। इसके बाद हिमांक ने अपने बचाव में दलीलें देते हुए कहा कि उसने अपने से तीन साल छोटी लड़की से यौन संबंध स्थापित करने के लिए दोस्ती नहीं की है।

अपनी बातों की पुष्टि करने के लिए हिमांक ने इस्लामी साहित्य का भी हवाला देकर बताया कि वह गलत नहीं है। इसके बाद दीपाशा ने हिमांक की बातों को कॉलेज के दूसरे छात्रों तक पहुँचा दिया।

हिमांक बंसल द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत
हिमांक बंसल द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत

हिमांक ने अपनी शिकायत में यह भी कहा है कि छात्रावास के कमरे में 15-20 लोगों ने घुसकर उस पर हमला किया और जबरन ‘अल्लाहु अकबर’ के नारे लगवाए। हिमांक का आरोप है कि मारपीट करने आए लड़कों ने उसे निर्वस्त्र करने की भी कोशिश की। यही नहीं, आरोपितों ने उसे और उसके परिवार वालों को भी धमकी दी है। हिमांक ने अपनी शिकायत में अपने साथ हुए हादसे का जिक्र करते हुए सभी आरोपितों के बारे में विस्तार से बताया है।

पीड़ित हिमांक बंसल ने शिकायत के साथ मारपीट के वीडियो और फोटोग्राफिक सबूत भी पुलिस को सौंप दिए हैं। उसकी शिकायत के बाद, साइबराबाद पुलिस ने कहा है कि शंकरपल्ली पुलिस स्टेशन द्वारा 11 नवंबर 2022 को दोषियों के खिलाफ 307, 342, 450, 323, 506, आर/डब्ल्यू 149, आईपीसी और 2011 के रैगिंग निषेध अधिनियम के धारा 4 (I), (II), और (III) के तहत मामला दर्ज किया गया है।पुलिस द्वारा मामले में आगे की कार्रवाई की जा रही है। कॉलेज ने मारपीट में शामिल छात्रों के साथ-साथ हिमांक बंसल के खिलाफ भी कार्रवाई शुरू कर दी है।

‘इस जन-सैलाब को देख कर हैदराबाद में कुछ लोगों को नींद नहीं आएगी’: PM मोदी ने तेलंगाना को दी ₹10000 करोड़ के परियोजनाओं की सौगात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार (12 नवंबर, 2022) को तेलंगाना के दौरे पर रहे। प्रधानमंत्री मोदी ने तेलंगाना को 10 हजार करोड़ रुपए से भी अधिक की परियोजनाओं की सौगात दी। उन्होंने पेडापल्ली जिले के रामागुंडम में ‘फर्टिलाइजर्स एंड केमिकल्स लिमिटेड (RFCL)’ के यूरिया प्लांट का उद्घाटन किया। इससे पहले उन्होंने प्लांट का दौरा भी किया। इस मौके पर विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आज 10 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा की विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण तेलंगाना के लिए हुआ है।

उन्होंने जानकारी दी कि ये परियोजनाएँ राज्य में खेती और उद्योग, दोनों को बल देने वाली हैं। पीएम ने कहा, “अब देश में यूरिया का सिर्फ एक ही ब्रांड होगा, भारत ब्रांड। इसकी कीमत भी तय है और क्वालिटी भी तय है।” प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि हम एक प्रोजेक्ट का लोकार्पण करते हैं तो अनेक प्रोजेक्ट्स पर काम शुरू कर देते हैं। पीएम मोदी ने कहा कि विकास हमारे लिए 24 घंटे, सातों दिन, 12 महीने चलने वाला देशव्यापी मिशन है। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि विकास के कामों में रोड़ा अटकाने के लिए हैदराबाद से झूठ फैलाए जाते हैं।

रामागुंडम में प्रधानमंत्री को सुनने के लिए बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। भीड़ को देखकर प्रधानमंत्री भी गदगद नज़र आए। उन्होंने कार्यक्रम स्थल पर बड़ी संख्या में पहुँचने के लिए लोगों का धन्यवाद दिया। पीएम ने कहा कि विशाल जन-सैलाब को देखकर हैदराबाद में कुछ लोगों को नींद नहीं आएगी। उनका निशाना ओवैसी भाइयों और मुख्यमंत्री KCR पर था।

भद्राचलम रोड और सत्तुपल्ली के बीच नई रेलवे लाइन की शुरुआत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेडापल्ली जिले में भद्राचलम रोड और सत्तुपल्ली के बीच चलने वाली नई रेलवे लाइन भी जनता को समर्पित किया। नई रेलवे लाइन को लगभग 1000 करोड़ रुपए की लागत से बनाया गया है। इसके अलावा प्रधानमंत्री मोदी ने 2200 करोड़ रुपए से अधिक की विभिन्न सड़क परियोजनाओं की आधारशिला रखी। इनमें NH-765DG का मेदक-सिद्दीपेट-एलकाथुर्ति खंड, NH-161BB का बोधन-बसर-भैंसा खंड, NH-353C का सिरोंचा से महादेवपुर खंड शामिल हैं।

प्रधानमंत्री का मिशन साउथ

इसके पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को आंध्र प्रदेश में हजारों करोड़ रुपए के परियोजनाओं की आधारशिला रखी और उन्हें राष्ट्र को समर्पित किया था। इससे एक दिन पहले शुक्रवार को प्रधानमंत्री मोदी ने कर्नाटक और तमिलनाडु में कई कार्यक्रमों में हिस्सा लिया था। उन्होंने चेन्नई-मैसुरु वंदे भारत एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाई थी, बेंगलुरू एयरपोर्ट के टर्मिनल 2 का उद्घाटन किया था और नादप्रभु केम्पेगौड़ा की 108 फुट ऊंची कांस्य प्रतिमा का भी अनावरण किया था।

AMU कैंपस में बाइक सवारों ने की गोलीबारी, पुलिस के हत्थे चढ़ा शोएब: फायरिंग के बाद भाग रहा था, तमंचा और कारतूस बरामद

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में AMU (अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी) कैम्पस में गोली चलने की खबर है। बताया जा रहा है कि गोलियाँ बाइक सवार 2 युवकों ने चलाई हैं। मौके पर मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने गोली चला रहे एक आरोपित को पकड़ कर पुलिस के हवाले कर दिया है। उसे खदेड़ कर पकड़ा गया। पकड़े गए आरोपित का नाम शोएब उर्फ़ चोबा है, जिससे पूछताछ चल रही है। दूसरा आरोपित फरार होने में कामयाब रहा। घटना शनिवार (12 नवम्बर 2022) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना सिविल लाइंस थाना क्षेत्र की है। यहाँ AMU की आर्ट फैकल्टी के पास मौजूद जनरल एजुकेशन सेंटर (GEC) पर कुछ छात्र और छात्राएँ बैठे हुए थे। दोपहर के लगभग 12:30 बजे बाइक पर सवार एक युवक आया और छात्रों को धमकाना शुरू कर दिया। जब दोनों की इस हरकत के खिलाफ यूनिवर्सिटी के बाकी छात्र एकजुट होने लगे तो आरोपित धमकी देते हुए वहाँ से निकल गया। अलीगढ़ पुलिस के अनुसार, वह आरोपित शोएब थी था। AMU के असिस्टेंट प्रॉक्टर सैयद नवाज जैद अली ने बताया कि इसके थोड़ी देर बाद 2 आरोपित कैम्पस में आए।

आरोप है कि इस दौरान दोनों छात्रों ने हथियार ले रखे थे। वापस आते ही दोनों ने ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। गोली चलने की आवाज सुन कर यूनिवर्सिटी कैम्पस में मौजूद सुरक्षाकर्मी घटनास्थल की तरफ दौड़े। इस बीच खुद को घिरता देख कर दोनों हमलावर भागने लगे। सुरक्षाकर्मियों ने भागने के दौरान शोएब को पकड़ लिया। मिल रही जानकारी के मुताबिक, शोएब की तलाशी के दौरान उसके पास से तमंचा और कारतूस भी बरामद हुआ है।

पकड़ा गया आरोपित शोएब जीवनगढ़ इलाके के एक फ्लैट में रहने वाला बताया जा रहा है। असिस्टेंट प्रॉक्टर सैयद नवाज जैद अली के मुताबिक, शोएब AMU का छात्र नहीं है। उन्होंने बताया कि आरोपित को पकड़ कर पुलिस के हवाले कर दिया गया है। अलीगढ़ पुलिस के अनुसार, एक आरोपित को पकड़ कर घटना की जाँच करवाई जा रही है। पुलिस ने मौके पर शांत कायम होने का दावा भी किया है। पुलिस ने बताया कि फायरिंग में किसी को चोट नहीं आई है।