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ऋषि सुनक को देवी माँ, बिडेन को राधा-कृष्ण; सांचेज को कुल्लू-मंडी का बाजा: G-20 में PM मोदी ने दुनिया को भेंट किया भारतीय हुनर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने G-20 सम्मेलन के दौरान अमेरिका, ब्रिटेन समेत कई देशों के राष्ट्राध्यक्षों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने वैश्विक नेताओं को भारतीय संस्कृति की झलक पेश करने वाले उपहार दिए। इनमें से कई उपहार राज्यों की संस्कृति से जुड़े हुए हैं। प्रधानमंत्री ने बुधवार (16 नवंबर 2022) को G-20 सम्मेलन की समाप्ति के बाद यह उपहार भेंट किए।

पीएम मोदी ने अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन (Joe Biden) को भगवान श्रीकृष्ण और राधा की पेंटिंग गिफ्ट की। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा के चित्रकारों ने इसे बनाया है। कांगड़ा की पेंटिंग में श्रृंगार रस और प्राकृतिक प्रेम का चित्रण किया जाता है। इसकी खासियत ये है कि इसे बनाने में सिर्फ प्राकृतिक रंगों का ही उपयोग किया जाता है।

प्रधानमंत्री मोदी ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक (Rishi Sunak) को ‘माता नी पछेड़ी’ उपहार के रूप में दिया। यह गुजरात का एक हस्तनिर्मित कपड़ा है। इसमें देवी माँ का चित्र बना हुआ है। नवरात्रि के समय और अन्य पूजन के दौरान इसे देवी मंदिर में चढ़ाया जाता है। यह नाम गुजराती शब्द माता से लिया गया है, जिसका मतलब देवी माँ होता है। नी का मतलब संबंधित होता है। पछेड़ी का मतलब पृष्ठभूमि से है।

प्रधानमंत्री मोदी ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक को ‘माता नी पछेड़ी’ उपहार में भेंट की

प्रधानमंत्री मोदी ने इटली की पहली महिला प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी (Georgia Meloni) से मुलाकात की और उन्हें गुजरात के पाटन की परम्परा के प्रतीक ‘पाटन पटोला दुपट्टा’ (स्कार्फ) गिफ्ट किया। यह स्कार्फ उत्तरी गुजरात के पाटन क्षेत्र में साल्वी परिवार द्वारा बुना गया था। इसमें आगे और पीछे का हिस्सा एक जैसा दिखता है। इसे अलग-अलग पहचानना मुश्किल है।

PM Modi ने इटली की पहली महिला प्रधानमंत्री को ‘पाटन पटोला दुपट्टा’ (स्कार्फ) गिफ्ट किया

पीएम नरेंद्र मोदी ने ऑस्ट्रेलियाई पीएम एंथनी अल्बनीज को जनजातीय लोक कला का चित्र ‘पिथौरा’ उपहार में दिया। गुजरात के छोटा उदयपुर के राठवा कारीगरों ने इसे बना है। ये चित्र ऑस्ट्रेलिया के समुदायों की एबोरिजिनल डॉट पेंटिंग की तरह ही है।

पीएम नरेंद्र मोदी ने ऑस्ट्रेलियाई पीएम एंथनी अल्बनीज को ‘पिथौरा’ उपहार में दिया है।

PM ने इंडोनेशिया के राष्ट्रपति को दिए दो तोहफे

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडोनेशिया के बाली में आयोजित जी-20 शिखर सम्मेलन में इंडोनेशिया के राष्ट्रपति जोको विडोडो (Joko Widodo) को सूरत से चाँदी का कटोरा और हिमाचल प्रदेश की किन्नौरी शॉल उपहार में दिया। उल्लेखनीय है कि इंडोनेशिया जी-20 शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा था।

सूरत से चांदी का कटोरा

वहीं, PM मोदी ने दूसरे तोहफे के रूप में इंडोनेशियाई राष्ट्रपति को किन्नौरी शॉल दिया। यह हिमाचल प्रदेश के किन्नौर के कारीगरों द्वारा हाथ से बनाया गया है।

यह हिमाचल प्रदेश के किन्नौर के कारीगरों द्वारा हाथ से बनाया गया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज को मंडी और कुल्लू का कनाल ब्रास सेट (वाद्ययंत्र) गिफ्ट किया। यह हिमाचल के आयोजनों में बजाए जाने वाला प्रमुख बाजा है, लेकिन इसका उपयोग अब सजावट के सामान के तौर पर किया जाने लगा है। इसे मंडी और कुल्लू के कलाकारों ने हाथ से ही बनाया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज को मंडी और कुल्लू का कनाल ब्रास सेट (वाध्ययंत्र) गिफ्ट किया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन, सिंगापुर के प्रधानमंत्री ली सिएन लूंग और जर्मन चांसलर ओलाफ शोल्ज़ को गुजरात के कच्छ में बना एगेट बाउल गिफ्ट किया।

कच्छ में बना एगेट बाउल

‘जो TMC सपोर्टर, उनका ही वोटर लिस्ट में हो नाम’: ममता बनर्जी के MLA ने पश्चिम बंगाल में ‘बांग्लादेशी घुसपैठियों’ को मतदाता बनाने का दिखाया रास्ता

वोटर लिस्ट में बांग्लादेशियों की घुसपैठ पुरानी है। अब पश्चिम बंगाल में सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के विधायक खोकन दास ने इन घुसपैठियों को मतदाता बनाने का एक नया रास्ता दिखाया है। उन्होंने कहा है कि जो बांग्लादेशी घुसपैठिए टीएमसी के समर्थक हैं, उनका नाम वोटर लिस्ट में होना चाहिए। उन्होंने यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी बकायदा पार्टी कार्यकर्ताओं को सौंपी भी है।

दास का एक वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है। इसमें वे कह रहे हैं, “काफी लोग बांग्लादेश से आ रहे हैं। इनमें से बहुत सारे हिंदू भावनाओं के कारण बीजेपी का समर्थन करते हैं। यह सुनिश्चित करिए कि वोटर लिस्ट में ऐसे ही लोगों का नाम हो जो हमारी पार्टी के समर्थक हैं।”

बताया जा रहा है कि दास ने यह बात मंगलवार (15 नवंबर 2022) की शाम को बर्धमान में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कही। वे बर्धमान दक्षिण से विधायक हैं। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी के विधायक ने यह बात ऐसे समय में कही है जब देश के अन्य राज्यों की तरह पश्चिम बंगाल में भी मतदाता सूची में संशोधन पर काम चल रहा है।

जी न्यूज़ की रिपोर्ट के अनुसार, 2021 के विधानसभा चुनाव में दास अपने क्षेत्र के कई वार्डों में पिछड़ गए थे। इसमें उनका अपना वार्ड कंचननगर-रथतला भी शामिल था। यहाँ मुख्य रूप से बांग्लादेश मूल के लोगों की बड़ी आबादी रहती है। हालाँकि, बाद में जब विधायक से उनकी टिप्पणी के बारे में पूछा गया तो वह पलट गए। उन्होंने कहा, “अवैध बांग्लादेशी अप्रवासी हर दिन हमारे क्षेत्र में प्रवेश कर रहे हैं। मैंने टीएमसी कार्यकर्ताओं को कहा है कि उनको मतदाता सूची में जगह नहीं मिलनी चाहिए।”

वहीं, खोकन दास के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए बर्धमान भाजपा के प्रवक्ता सौम्यराज मुखोपाध्याय ने कहा कि इस मुद्दे पर दलगत राजनीति करने की जगह बजाय विधायक को अवैध अप्रवासियों के बारे में केंद्र और राज्य सरकार को सूचित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यही वजह है कि भाजपा नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (CAA) लागू करेगी।

दूसरी ओर टीएमसी के बर्धमान पूर्व जिले के प्रवक्ता प्रसेनजीत दास ने ​पार्टी विधायक का बचाव किया है। उनका कहना है कि विधायक की टिप्पणियों का गलत अर्थ निकाला गया है। साथ ही कहा है कि सीएए को लागू करने के पीछे भाजपा की राजनीतिक मंशा है।

मुस्लिम लड़के संग पकड़ी गई 15 साल की हिंदू लड़की, गर्भवती निकली: बताया- लड़के की अम्मी ने कहा निकाह कर ले… धर्म बदलवा दूँगी

भोपाल से 17 साल के मुस्लिम लड़की के साथ एक 15 साल की हिंदू लड़की निकाह करने भागी। सागर में निकाह होना था। लेकिन गलत ट्रेन में बैठ जाने की वजह से दोनों मध्य प्रदेश के विदिशा में पकड़े गए। लड़की ढाई माह की गर्भवती है।

नाबालिग जोड़े को विदिशा में जीआरपी (Government Railway Police) ने पकड़ा। जाँच में सामने आया कि लड़की गर्भवती है। लड़के को भोपाल किशोर न्याय बोर्ड और लड़की को बाल कल्याण समिति भोपाल को सौंप दिया गया है।

चाइल्ड लाइन की काउंसलिंग में लड़की ने बताया, “हम दोनों साल भर से एक-दूसरे को जानते हैं। लड़के की माँ ने मुझसे कहा था कि जबसे तुम मेरे बेटे की जिंदगी में आई हो, उसकी हरकतों में सुधार होने लगा है। लड़का और उसकी अम्मी मुझ पर निकाह का दबाव बना रहे थे। लड़के की अम्मी ने यह भी कहा था कि निकाह कर लेगी तो बेटा चोरी और नशा करना छोड़ देगा। इसके बाद वह लड़के का धर्म परिवर्तन भी करवा देगी। लड़के की अम्मी के कहने पर मैं मजबूरी में उससे बात किया करती थी।”

विदिशा चाइल्ड लाइन की काउंसलर दीपा शर्मा ने बताया, GRP ने हमें सूचना दी थी। काउंसलिंग में पता चला कि 15 साल की लड़की और 17 साल के लड़के के बीच एक साल से अफेयर चल रहा है। दोनों भोपाल में एक ही मोहल्ले में रहते हैं। लड़का ऑटो चलाता है और चोरी के आरोप में पकड़ा जा चुका है। वह नशे का भी आदी है।

उन्होंने आगे बताया कि लड़की के माता-पिता में अलगाव हो गया है। माँ अस्पताल में काम करती है। ज्यादातर समय वह नाइट ड्यूटी में रहती है। मौका पाकर लड़का घर आ जाया करता था। यहाँ लड़की की बहनें भी रहती थीं, लेकिन उन्होंने कभी उसका विरोध नहीं किया और न ही माँ से कुछ कहा। इस दौरान उनके बीच संबंध भी बने। पकड़े जाने के बाद जब लड़की का मेडिकल करवाया गया तो वह गर्भवती निकली।

GRP के‎ ASI मनोहर सिंह चौहान, हेड कॉन्स्टेबल‎ शिवराज यादव सहित अन्य जवानों ने लड़की की माँ का फोन‎ नंबर लेकर उससे बातचीत की तो पता चला कि‎ वह परिजनों की अनुमति के बगैर ही दूसरे संप्रदाय के लड़के के साथ गई थी।‎ वहीं, लड़के के घर वालों को इस बात की पूरी जानकारी थी। लड़के ने पूछताछ में बताया कि वह लड़की को लेकर अपनी एक‎ रिश्तेदार के यहाँ सागर जा रहा था। इसके बारे में ‎उसकी महिला रिश्तेदार को भी पूरी जानकारी थी।‎ उसी ने कहा था कि लड़की को लेकर भोपाल से ‎सागर आ जाओ।‎

‘डूड, आई हैव गॉट न्यूज’: जब आफताब ने किए टुकड़े-टुकड़े गर्भवती थी श्रद्धा? हत्या के दिन का चैट आया सामने, जानिए क्या-क्या हुई बात

क्या जब हत्या हुई 27 साल की श्रद्धा वाकर (Shraddha Walker Murder) गर्भवती थी? उसके शव के 35 टुकड़े करने वाले 28 साल के आफताब अमीन पूनावाला (Aftab Amin Poonawalla) के रवैए को देख पुलिस को यह शक हुआ है। अब इस एंगल से भी पुलिस जाँच कर रही है। वहीं रिपब्लिक वर्ल्ड ने 18 मई 2022 का श्रद्धा का चैट एक्सेस करने का दावा किया है। इसी दिन उसकी हत्या हुई थी।

एनबीटी की रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली पुलिस को शक है कि हत्या के वक्त श्रद्धा गर्भवती थी। वैसे इसकी आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन रिपोर्ट में कहा गया है कि हत्या के इतने महीने बाद हड्डियों से उसके गर्भवती होने का पता लगाना मुश्किल है। ऐसे में मोबाइल, चैट और घर से मिले डॉक्टरी पर्चे से ही शायद यह राज खुले।

एक अन्य रिपोर्ट में मराठी अभिनेत्री संगीता पाटिल और सागरिका सोना सुमन का हवाला देकर बताया गया है कि श्रद्धा करीब साल भर पहले गर्भवती हुई थी। वह आफताब से शादी कर इस बच्चे को पिता का नाम देना चाहती थी। कथित तौर पर श्रद्धा ने यह बात साल भर पहले मुंबई के जुहू बीच पर चले एक सफाई कैंपेन में हिस्सा लेते हुए खुद कहा था। यहीं पाटिल और सुमन से उसकी मुलाकात हुई थी।

सुमन के अनुसार, “श्रद्धा ने 3-4 लोगों से यह बात बताई थी कि वह गर्भवती है और आफताब के साथ शादी कर अपने बच्चे को इस दुनिया में लाना चाहती है। लेकिन आफताब बच्चा नहीं चाहता था। उसने श्रद्धा से गर्भपात कराने को कहा था।

रिपब्लिक वर्ल्ड की रिपोर्ट के मुताबिक 18 कई को श्रद्धा ने अपनी एक दोस्त को शाम 4.34 पर एक मैसेज किया था। इसमें कहा था- डूड, आई हैव गॉट न्यूज। आई गॉट सुपर बिजी विद समथिंग (Dude, I’ve got news. I got super busy with something)। दोस्त ने पूछा- व्हाट इज द न्यूज (What’s the news)। लेकिन इसके बाद श्रद्धा ने कोई जवाब नहीं दिया।

फोटो साभार: रिपब्लिक टीवी

फिर उसकी सहेली ने 4 महीने बाद 24 सितंबर को उसे दोबारा मैसेज भेजा और उसके पूछा, “कहाँ हो तुम? क्या तुम सुरक्षित हो।” श्रद्धा की दोस्त ने 15 सितंबर को इंस्टाग्राम पर आफताब से भी उसके बारे में पूछा, उसको फोन भी किया, लेकिन आफताब ने कोई जवाब नहीं दिया।

फोटो साभार: रिपब्लिक टीवी

श्रद्धा की हत्या आफताब ने 18 मई 2022 को कर दी थी। इसके बाद उसने उसके शव के 35 टुकड़े किए थे। कई दिनों तक वह शव के टुकड़े दिल्ली के महरौली के जंगलों में फेंकता रहा था। 15 नवंबर को शवों के अवशेष की बरामदगी के लिए पुलिस आफताब के लेकर जंगल में गई थी। 10 बॉडी पार्ट्स मिलने की बात कही जा रही है। हालाँकि ये श्रद्धा के ही हैं, इसकी पुष्टि फोरेंसिक और डीएनए जाँच के बाद ही हो पाएगी।

‘EWS में मुस्लिम-सिख-जैन भी, फिर ये सवर्ण आरक्षण कैसे?’: समर्थन करने वालों के सवाल, विरोधी कह रहे – रोज़ के ₹2000 कमाने वाला ब्राह्मण ‘गरीब’ कैसे?

आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) का निर्णय आने के बाद इसको लेकर बहस हो रही है। एक पक्ष EWS आरक्षण को लेकर सवाल खड़ा कर रहा है तो दूसरा पक्ष इसके समर्थन में तर्क दे रहा है।

EWS आरक्षण आज देश में एक बड़ा मुद्दा है और इसको लेकर दोनों पक्षों की क्या राय है और इसके पीछे उनका क्या तर्क है, इसको समझने का प्रयास करते हैं। हर विषय पर जनता की राय अलग-अलग हो सकती है और इस विषय पर भी है। इसके विरोधियों के तर्क निम्नलिखित हैं-

शरण्या का कहना है, “जिन परिवारों की वार्षिक आय ₹8 लाख तक है, वे ईडब्ल्यूएस आरक्षण का लाभ पाने के पात्र होंगे। स्पष्ट रूप से उच्च जातियों के अहंकार पर आघात करने के लिए इसे बनाया गया है और वे इसके बाद जाति आधारित आरक्षण के बारे में शिकायत करना बंद नहीं करेंगे।”

CPI नेता क्लिफन डी रोजारियो का कहना है, “EWS एक मिथ्या है। यह अगड़ी जातियों के लिए आरक्षण है। इसकी पात्रता का कट-ऑफ वार्षिक आय 8 लाख रुपए यानी लगभग 67,000 रुपए प्रतिमाह है। यह जाति के ऐतिहासिक अन्याय के कारण उत्पीड़ित समुदायों की अपार गरीबी का मजाक बनाता है।”

एक तमिल व्यक्ति का कहना है, “एक दलित अमीर है अगर उसके पास एक घर है, एक दोपहिया वाहन है और प्रति दिन लगभग 300 रुपए कमाता है। लेकिन, एक ब्राह्मण गरीब है, भले ही उसके पास जमीन हो, घर हो, वह लगभग 2000 प्रति दिन कमाता हो। यह EWS का पूरा तर्क है। यह एक घोटाला है।”

सौमित्र पठारे का कहना है, “ईडब्ल्यूएस श्रेणी के लिए आय सीमा इतनी अधिक निर्धारित करके कि इसमें 90-95% सवर्ण शामिल किए गए हैं और इस श्रेणी से दलितों/आदिवासियों/बहुजनों को बाहर कर दिया गया है। यह सवर्णों के लिए आरक्षण है, न कि ईडब्ल्यूएस के लिए।”

ये तर्क EWS आरक्षण के विरोधियों के हैं। वहीं, EWS आरक्षण का समर्थन करने वालों के अपने तर्क हैं। उनका मानना है कि सवर्णों में भी गरीब लोग हैं और सरकार को उनका भी ख्याल करना है। ऐसे में EWS का यह आरक्षण जरूरी और गरीबों के हित में है।

शरद दूबे का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने सामान्य वर्ग के आर्थिक कमजोर लोगों को 10% का आरक्षण देकर अच्छा काम किया है। गरीब किसी भी समाज में हो सकते हैं, सवर्णों में भी हो सकते हैं। इसलिए इसका स्वागत किया जाना चाहिए।

अभिषेक पराशर का कहना है कि जो वर्षों से जो जातिगत आरक्षण का खैरात ले रहे हैं, उन्हें EWS आरक्षण असंवैधानिक लग रहा है। आरक्षण आर्थिक आधार पर ही होना चाहिए, क्योंकि ST/ST/OBC आरक्षण का मलाई इन जातियों के कुछ ऊपर बैठे लोग खा रहे हैं।

रोशन सिंह का कहना है, “EWS आरक्षण के लाभार्थी सिर्फ हिन्दू सवर्ण नहीं हैं और न यह खालिस अल्पाय वर्ग सवर्णों को आरक्षण है। इसके सबसे बड़े लाभार्थी मुस्लिम, सिख, जैन, जैन और अन्य मजहब की जातियाँ भी हैं। EWS को सवर्ण आरक्षण कहना, अज्ञान और मूर्खता है।”

एक नहीं, कई डेटिंग एप्स के जरिए लड़कियों को फाँसता था आफताब: हत्या के 10 दिन पहले ऋषिकेश में गंगा किनारे सिगरेट पी रही थी श्रद्धा

श्रद्धा वाकर हत्या मामले में आफताब अमीन पूनावाल को लेकर जो बातें सामने आ रही हैं, उससे स्पष्ट है कि उसका कई लड़कियों के साथ संबंध था। पुलिस फिलहाल यही पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आफताब की दोस्ती और किन लड़कियों के साथ थी। लड़कियों से संपर्क करने के लिए आफताब डेटिंग एप्स का सहारा लेता था। इस मामले में एक डेटिंग ऐप बंबल (Bumble) का नाम सामने आया था। पुलिस की मानें तो श्रद्धा और आफताब की मुलाकात भी ‘बंबल’ डेटिंग ऐप पर हुई थी।

श्रद्धा से रिलेशनशिप में रहने के बाद भी वह न सिर्फ बंबल बल्कि कई और डेटिंग एप्स पर एक्टिव था। दिल्ली पुलिस को शक है कि श्रद्धा वाकर की हत्या के वक्त भी आफताब दूसरी लड़कियों के संपर्क में आया था। ‘टीवी 9 भारतवर्ष’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, श्रद्धा वाकर हत्याकांड का आरोपित आफताब पूनावाला एक बार फिर से डेटिंग ऐप पर सक्रिय हो गया था। इसी एप के जरिए वह एक और लड़की के संपर्क में था। बताया जा रहा है कि इस लड़की को भी आफताब अपने घर बुलाने ही वाला था कि पहली गर्लफ्रेंड की हत्या का खुलासा हो गया।

इससे आरोपित को अपना नया शिकार हाथ में आते-आते रह गया। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, आरोपित करीब 5 साल से इस डेटिंग एप्लिकेशन का इस्तेमाल कर रहा था। पुलिस अब डेटिंग एप और आफताब के व्हाट्सएप्प को खंगाल रही है।

चूँकि आफताब बार-बार पुलिस को गुमराह करने की कोशिश कर रहा है, इसलिए उसकी सभी बातों पर यकीन कर पाना पुलिस के लिए भी मुश्किल हो रहा है। पुलिस श्रद्धा हत्या मामले में केस को मजबूत बनाने के लिए कत्ल के वजह की तलाश कर रही है, ताकि आरोपित को कठोर दंड मिल सके। पुलिस कड़ी दर कड़ी जोड़कर सबूत जुटा रही है, कत्ल के मोटिव का पता लगा रही है। इसके लिए पुलिस मनोचिकित्सक की भी मदद ले रही है।

पुलिस की जाँच में अब तक यह साफ नहीं हो सका है कि आफताब और श्रद्धा के बीच लड़ाई के मुख्य कारण क्या थे। दिल्ली पुलिस यह भी पता करने की कोशिश कर रही है कि श्रद्धा की मौत के बाद आफताब किन लड़कियों से मिला और कौन-कौन उसके फ्लैट पर आया था।

पुलिस से पूछताछ में आफताब ने कत्ल की वजह झगड़े को बताया है। आफताब ने दिल्ली पुलिस से कहा कि 18 मई की रात उसके और श्रद्धा के बीच झगड़ा हुआ था। बात इतनी बढ़ गई कि दोनों के बीच हाथापाई भी हुई। जिसके बाद उसने गला दबाकर श्रद्धा की हत्या कर दी। दूसरी तरफ आफताब ने यह भी बताया कि 18 मई से एक हफ्ता पहले ही उसने श्रद्धा को मारने की प्लानिंग कर ली थी। उस दिन भी दोनों का झगड़ा हुआ था।

झगड़े के बाद श्रद्धा भावुक हो गई और रोने लगी थी। इसलिए, उसने उस दिन श्रद्धा की हत्या नहीं की। पुलिस को आशंका है कि आफताब अब भी सारी सच्चाई नहीं बता रहा है।

आफताब की सच्चाई जानने लगी थी श्रद्धा

दूसरी तरफ श्रद्धा इन सब बातों से अनजान थी। श्रद्धा ने उसकी नृशंस हत्या किए जाने से एक सप्ताह पहले ही खुद की एक तस्वीर पोस्ट की थी। आफताब ने श्रद्धा को मारने की प्लानिंग भी एक हफ्ते पहले की थी। श्रद्धा इस पोस्ट में हिमाचल प्रदेश के किसी इलाके में एक किताब पढ़ती दिखाई दे रही थी। इंस्टाग्राम पर यही पोस्ट श्रद्धा की आखिरी पोस्ट थी।

हत्या से 10 दिन पहले, श्रद्धा ने एक इंस्टाग्राम रील भी पोस्ट की थी, जिसमें वह ऋषिकेश में गंगा किनारे बैठी नज़र आ रही थी। इस वीडियो में वो सिगरेट पीती हुई भी दिख रही है।

मुंबई से दिल्ली आने के बाद श्रद्धा के इंस्टाग्राम अकाउंट से यही 2 पोस्ट हुए हैं। ज़ाहिर सी बात है कि श्रद्धा ने जिसके लिए घर-बार और अपनों को छोड़ दिया था, वह लगातार श्रद्धा को धोखा दे रहा था। इसकी भनक शायद श्रद्धा को लग चुकी थी। दोनों के बीच झगड़े की वजह भी आफताब का दूसरे लड़कियों से संबंध हो सकता है। बहरहाल पुलिस की जाँच जारी है और हर रोज़ कत्ल से जुड़ी चौंकाने वाली बातें सामने आ रही हैं।

42 साल के हजरत अली ने किया बच्ची के बलात्कार का प्रयास, चिल्लाने लगी तो गला दबा कर मार डाला: फंदे से झूलता मिला शव

असम के सोनितपुर जिले के ढेकियाजुली इलाके से एक दर्दनाक खबर सामने आई है। यहाँ रहने वाले 42 वर्षीय हजरत अली ने 14 साल की नाबालिग लड़की के साथ बलात्कार करने की कोशिश की और जब वह नहीं मानी तो निर्ममता से उसकी हत्या कर दी। 

हालाँकि, पुलिस ने घटना के संबंध में आरोप‍ित हजरत अली को बुधवार (16 नवंबर, 2022) को गिरफ्तार कर लिया है। अली ढेकियाजुली इलाके के भाकुमारी क्षेत्र का रहने वाला है। वह मृतका का पड़ोसी था। वहीं ‘नॉर्थ ईस्ट लाइव’ के वीडियो के माध्यम से जानकारी सामने आई है कि असम के ढेकियाजुली में रेप और मर्डर का मामला सामने आया है। पुलिस की पूछताछ में आरोपित हजरत अली ने अपना गुनाह कबूल किया है। बता दें कि मंगलवार को फंदे से झूलते हुए एक किशोरी का शव बरामद किया गया था।

‘नॉर्थ ईस्ट लाइव’ ने बताया कि मंगलवार (15 नवंबर, 2022) को लड़की को फंदे से झूलते हुए पाया गया। स्थानीय लोग शुरुआत से ही इसे अस्वाभाविक मौत का मामला मान रहे थे। वहीं ग्रामीणों ने हजरत के घर पर तोड़फोड़ भी की।

एक स्‍थानीय वेबसाइट से बात करते हुए ढेकियाजुली पुलिस स्टेशन के ऑफिसर इन चार्ज ने बताया, “लड़की अपने घर में सो रही थी। हजरत अली परिवार के अन्य सदस्यों की अनुपस्थिति का फायदा उठाकर उसके घर घुस गया और रेप करने का प्रयास किया। लेकिन, जब वह हजरत के हरकतों के बाद जाग गई और चिल्लाने लगी तो उसने उसकी गला दबाकर हत्या कर दी।”

पुलिस ने पहले अप्राकृतिक मौत का मामला दर्ज कर किया। पुलिस को हजरत पर शक हुआ और उसे पूछताछ के लिए अपने साथ ले गई। हजरत ने बाद में अपना गुनाह कबूल कर ल‍िया। इसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया।  

जनजातीय समाज के साथ लव-लैंड का धोखा रोक पाएगा शिवराज का PESA Act?, छत्तीसगढ़-झारखंड में हालात और खराब, PFI जैसे संगठनों का बन रहे ‘पनाहगाह’

मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chauhan) ने जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर मंगलवार (15 नवंबर 2022) को अनुसूचित क्षेत्रों में पंचायत विस्तार अधिनियम (PESA Act) लागू कर दिया है। इस कानून के तहत जनजातीय क्षेत्र की ग्राम सभाओं को अधिक शक्ति दिया गया है, ताकि जनजातीय लोगों की जमीन पर कब्जा करने के उद्देश्य से जनजातीय महिलाओं से विवाह एवं धर्मांतरण पर रोक लगाई जा सके।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (President Draupadi Murmu) की उपस्थिति में मुख्यमंत्री चौहान ने शहडोल जिले के लालपुर गाँव में आयोजित कार्यक्रम में इस कानून को लागू करने की घोषणा की। इस कानून के तहत राज्य के 89 जनजातीय ब्लॉकों के अंतर्गत आने वाले 5,212 पंचायतों के 2,350 गाँवों की ग्राम सभाओं को स्व-शासन की अनुमति दिया गया है।

मुख्यमंत्री चौहान ने कहा, “कई बार धोखे से, छल-कपट से, हमारी जनजातीय बहनों-बेटियों को लालच देकर विवाह कर लिया जाता है, उनके नाम पर जमीन दे दी जाती है और वह जनजातीय भूमि कहलाती है। कभी-कभी धर्मांतरण का भी उपयोग किया जाता है। अब हम मध्य प्रदेश में ऐसा नहीं दिया जाएगा।”

PESA Act ग्राम पंचायतों को इन अनुसूचित क्षेत्रों में बंधुआ मजदूरी पर अंकुश लगाने के लिए सरकारी योजनाओं के कार्यान्वयन और प्रवासी मजदूरों के रिकॉर्ड रखने का काम करेगी। इसके साथ लघु वनोपज, भूमि और छोटे जल निकायों से संबंधित मामलों को तय करेगी। अधिसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभा की अनुशंसा के बिना खनिज के सर्वे, पट्टा देने या नीलामी की कार्यवाही नहीं हो सकेगी।

निशाने पर जनजातीय महिलाएँ

मध्य प्रदेश PESA Act लागू करने वाला देश का सातवाँ राज्य बन चुका है। इसके पहले 6 राज्य- हिमाचल प्रदेश, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र पेसा कानून बना चुके हैं। हालाँकि, सबसे अधिक प्रभावित झारखंड में इसको लेकर किसी तरह की चर्चा नहीं है।

पेसा कानून की सबसे बड़ी जरूरत राज्य में इस्लामी और मिशनरियों द्वारा जनजातीय महिलाओं से विवाह के नाम पर उनकी जमीनों पर किए जाने वाले कब्जे को रोकना है। PESA कानून के तहत ग्राम सभाएँ अगर किसी जनजातीय महिला को बहला-फुसलाकर शादी कर जमीन पर गलत तरीके से कब्जा या खरीदने की कोशिश करें तो ग्राम सभा इसमें अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगी। ग्राम सभा उस जमीन को कब्जा से मुक्त कराके उसे फिर से जनजातीय लोगों को दिलवाएगी।

जनजाति बहुल इलाकों में इस्लामी और मिशनरी संस्थाएँ अपने उद्देश्यों को अंजाम देने के लिए ना सिर्फ धर्मांतरण का खेल खेल रही हैं, बल्कि शादी के नाम पर उनकी जमीनों पर भी अवैध कब्जा कर रही हैं। वैसे तो ये सारा काम पूरे देश में अबाध गति से चल रहा है, लेकिन मध्य प्रदेश और झारखंड इनके लिए खुला मैदान बना हुआ था, जहाँ वे अपने कार्यों को मजबूती के साथ अंजाम देते आते रहे हैं।

PFI के डॉक्युमेंट में जनजातीय लोगों से नजदीकी का जिक्र

प्रतिबंधित संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) ने भारत को साल 2047 तक इस्लामी राष्ट्र बनाने के अपने ‘विजन डॉक्युमेंट’ में इस साजिश का उल्लेख किया है। छापेमारी में जब्त किए गए दस्तावेज में कहा गया है,  “पार्टी को ‘राष्ट्रीय ध्वज’, ‘संविधान’ और ‘अंबेडकर’ जैसी अवधारणाओं का उपयोग इस्लामी शासन स्थापित करने के वास्तविक इरादे को ढालने के रूप में और अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/ओबीसी तक पहुँचने के लिए करना चाहिए।

PFI ने अपने विजन डॉक्यूमेंट आगे लिखा था, “इस चरण में पीएफआई का कहना है कि पार्टी (PFI) को एससी/एसटी/ओबीसी समुदाय के साथ घनिष्ठ गठबंधन बनाना चाहिए और चुनाव में कम-से-कम कुछ सीटें जीतनी चाहिए। PFI जो गठबंधन बनाना चाहता है, उसमें 50% मुस्लिमों की हिस्सेदारी और 10% एससी/एसटी/ओबीसी की हिस्सेदारी होगी। हमें यह दिखाकर आरएसएस और एससी/एसटी/ओबीसी के बीच एक विभाजन पैदा करने की जरूरत है कि आरएसएस केवल उच्च जाति के हिंदुओं के हित की बात करने वाला संगठन है।”

धर्मांतरण के जरिए जनसंख्या बढ़ाने के साथ-साथ जनजातीय इलाकों में जमीनों की क्यों जरूरत है, इसका खुलासा भी PFI के डॉक्युमेंट में किया गया है। इसमें लिखा है, “हमारे पास एडवांस PE पाठ्यक्रम संचालित करने के लिए अभी तक उचित एवं एकांत प्रशिक्षण केंद्र/स्थान नहीं हैं। चुनौती का सामना करने के लिए इकाइयों को मुस्लिम बहुल इलाकों या दूरदराज के स्थानों में भूखंडों का अधिग्रहण करना चाहिए, ताकि हथियारों और विस्फोटकों के भंडार के लिए उचित प्रशिक्षण सुविधाएँ और डिपो स्थापित किए जा सकें।”

जनजाति महिलाओं के नाम पर जमीनों की खरीद और चुनावों में उम्मीदवारी

झारखंड और मध्य प्रदेश के कई इलाके में मुस्लिम जनजातीय महिलाओं से शादी कर उन्हें दूसरी-तीसरी बीवी का दर्जा देकर अपना मतलब साध रहे हैं। कोई पंचायत चुनाव में क्षेत्र को अनुसूचित घोषित होने पर जनजातीय महिला से शादी कर उसे उम्मीदवार बनाकर अपना काम साध रहा है तो कोई जनजातीय महिला से शादी करके उसके नाम पर जनजातीय लोगों की जमीनों की खरीद कर रहा है। ऐसे तमाम उदाहरण हैं और मीडिया में खबरें भी आती रही हैं।

दैनिक भास्कर ने अपनी ग्राउंड रिपोर्ट में इस लैंड जिहाद का खुलासा किया है। ग्वालियर-चंबल संभाग के श्योपुर में कई ऐसे मुस्लिम हैं, जिन्होंने यही काम किया है। काली तराई गाँव का सलीम गुड्डी नाम की सहरिया जनजातीय महिला गुड्डी को अपने साथ रखता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सलीम उसके नाम पर जनजातीय लोगों की जमीनें खरीदता है। गुड्डी एक मोहरे के रूप में इस्तेमाल हो रही है। लोगों का कहना है कि सलीम ने गुड्डी से निकाह किया है या नहीं, यह पता नहीं है लेकिन वह उसे अपने साथ रखता है।

इसी तरह दांतरधा पंचायत में पप्पू पठान ने जनजातीय महिला फूला बाई को अपनी दूसरी पत्नी बनाकर रखा है। पप्पू ने फूला बाई को जिला पंचायत का चुनाव में उम्मीदवार बनाया था, लेकिन वह जीत नहीं पाई। हालाँकि, फूला बाई के भाई राजाराम पंचायत के सरपंच चुने गए हैं। राजाराम का कहना है कि पप्पू पठान ने ही उन्हें सरपंच बनाया है और उनका सारा काम पप्पू पठान ही देखता है। इसी तरह कनापुर गाँव का शहाबुद्दीन वहाँ की पूर्व सरपंच गुड्डी बाई को अपनी दूसरी बीवी बना लिया।

दरअसल, मुस्लिम जनजातीय की जमीन पर कब्जा करने के लिए उनकी बहन-बेटियों से से जान-पहचान बढ़ाते हैं और फिर अपनापन दिखाकर दूसरी या तीसरी शादी कर लेते हैं। इसके बाद निकाह के नाम पर धर्मांतरण करते हैं और इनकी जमीनों को औन-पौने दामों में खरीद लेते हैं। आज स्थिति ऐसी है कि जनजातीय इलाके में मुस्लिमों का प्रभाव और दबदबा तेजी से बढ़ रहा है। इतना ही नहीं, PFI जैसे चरमपंथी संगठनों का भी इन क्षेत्रों में तेजी से फैलाव भी होता है।

जनजातीय इलाकों में PFI जैसे चरमपंथी संगठनों की पैठ

PFI के खिलाफ की गई कार्रवाई में श्योपुर से भी कई संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तार किए गए PFI के संदिग्धों ने पूछताछ में खुलासा किया था कि श्योपुर में भी संगठन के कार्यकर्ता सक्रिय हैं। PFI के संदिग्धों का यहाँ आना-जाना लगा रहता है। इतना ही नहीं, श्योपुर के पास राजस्थान के कोटा में उनकी ट्रेनिंग कैंप का भी पता चला था। इन इलाकों में जमातों का आयोजन होते रहता है और विदेशी भी आते रहते हैं। कोरोना काल में लॉकडाउन के दौरान यहाँ से 12 बांग्लादेशियों को गिरफ्तार किया गया था। 

कानून के मुताबिक, यदि जनजातीय महिला किसी मुस्लिम, ईसाई या गैर-जनजातीय से शादी करती है और उस महिला की मौत हो जाती है तो उसकी प्रॉपर्टी के अधिकार हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम के तहत तय होते हैं। इस तरह उसके नाम पर चल या अचल संपत्ति उसके पति या बच्चों के होते हैं। हालाँकि, इसके लिए जिलाधिकारी की अनुमति जरूरी होती है, लेकिन कई बार भ्रष्टाचार या जानकारी के अभाव में इसे हस्तांतरित कर दिया जाता है। 

झारखंड में तो हालात तो और बदतर हैं। वहाँ जमीनों को मुस्लिमों द्वारा खरीदने और अवैध बसावट के कारण कई जिलों में जनसांख्यिकीय बदलाव हो गया है। इसका परिणाम भी जनजातीय लोगों पर देखने को मिल रहा है। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता रघुवर दास ने भी कहा था कि प्रदेश के भोले-भाले जनजातीय महिलाओं को लव जिहाद में फँसाया जा रहा है और उनकी जमीनों पर अवैध कब्जा किया जा रहा है।

कुछ महीने पहले जनजातीय बहुल राज्य के पलामू जिले के पांडू थाना के अंतर्गत आने वाले मारुमातू गाँव में मुस्लिमों ने महादलित मुसहर जाति के लोगों पर हमला कर उनके कच्चे घरों और झोपड़ियों को गिरा दिया था। मुस्लिमों ने उनकी जमीनों पर कब्जा कर लिया था और उन्हें ट्रकों में भर कर छतरपुर के लोटो गाँव के पास जंगल में फेंक दिया था। झारखंड के कई इलाकों से भी PFI के सदस्यों की गिरफ्तारी हुई है।

25 KM तक चलती ट्रक से फेंकते रहे ज़िंदा गायें, गोरक्षकों पर फेंके कांच के टुकड़े और की पत्थरबाजी: मेवात के महबूब, साद और सलीम को किया गया पुलिस के हवाले

हरियाणा के गुरुग्राम में गो-तस्करों और गोरक्षकों के बीच भिड़ंत हुई है। भाग रहे तस्करों ने पीछा कर रहे गोरक्षकों पर कंचे फेंके और पथराव किया। इस दौरान 2 गोरक्षक घायल हो गए। उनके वाहनों को भी नुकसान पहुँचा है। इस दौरान चलते वाहनों से सड़क पर रुकावट डालने के लिए जीवित गायों को भी फेंका गया। लम्बे समय तक चले चोर-पुलिस जैसे खेल के बाद आखिरकार 3 गो-तस्करों को पकड़ लिया गया है। इनके नाम सलीम, साद और महबूब हैं। घटना बुधवार (16 नवम्बर, 2022) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 3 गोतस्कर भागने में कामयाब रहे। बताया जा रहा है कि इन सभी आरोपितों ने गुरुग्राम के सेक्टर 37 से गायें चुराई थीं। इसकी जानकारी मिलते ही गोरक्षकों ने सोहना रोड पर भोंसड़ी के पास बैरियर लगा दिया था। गोतस्करों के वाहन को रुकने का भी इशारा किया गया, लेकिन उन्होंने बैरियर को तोड़ दिया। इस दौरान उन्होंने गाड़ी की स्पीड बढ़ा ली जिसका पीछा गोरक्षकों ने शुरू कर दिया।

इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में तेज गति से ट्रक से भाग रहे तस्करों को देखा जा सकता है। वीडियो को पीछा कर रहे गोरक्षकों द्वारा बनाया गया है।

पीछा करने के दौरान पहले तो गो-तस्करो ने भागने की कोशिश की, लेकिन उन्हें 25 किलोमीटर तक खदेड़ा जाता रहा। इस दौरान आरोपितों ने पीछा कर रहे लोगों पर काँच, पत्थर और जिन्दा गायों को फेंका लेकिन फिर भी उन्हें पलवल इलाके में पकड़ ही लिया गया। इस दौरान आरोपितों के वाहन का टायर भी निकल गया। खुद को घिरा देख कर 3 गो-तस्कर भाग निकले जबकि साद, महबूब और सलीम को दबोच लिया गया।

तीनों मेवात के नूँह इलाके के रहने वाले हैं। इस बीच गुरुग्राम और पलवल पुलिस घटनास्थल पर पहुँच गई। बाद में तीनों आरोपितों को पलवल पुलिस ने अपनी कस्टडी में ले लिया। तीनों की तलाशी के बाद इनके वाहन से पत्थर, कंचे और गोलियाँ बरामद हुईं हैं।

’50 वर्षों में एक बार आती है कांतारा जैसी फ़िल्में’: गदगद सुपरस्टार रजनीकांत ने ऋषभ शेट्टी को भेंट की सोने की चेन, ₹360 करोड़ कमा चुकी है फिल्म

महज 16 करोड़ रुपए की लागत में बनी और वर्ल्डवाइड 360 रुपए से अधिक की कमाई करने वाली फिल्म ‘कांतारा’ अब भी दर्शकों का दिल जीत रही है। फिल्म 30 सितंबर को सिनेमाघरों में आई और छा गई। फिल्म ने कन्नड़ भाषा के साथ हिंदी, तेलुगू और मलयालम में अपना जादू चलाया है। 

फिल्म और इसके कलाकार व निर्देशक ऋषभ शेट्टी एक बार फिर से चर्चा में है। वजह हैं सुपरस्टार रजनीकांत। रजनीकांत ने फिल्म की सराहना की है और अभिनेता को एक सोने की चेन भेंट की। हालाँकि, इससे भी महत्वपूर्ण रजनीकांत की इस फिल्म को लेकर राय है। उन्होंने कहा है कि ऐसी फिल्में 50 साल में एक बार बनती हैं।

उन्होंने ट्विटर पर भी इस फिल्म की तारीफ़ की थी। हालाँकि, अब यह जानकारी सामने आई है कि ‘थलाईवा’ ने ऋषभ शेट्टी को एक महँगी सोने की चेन उपहार में दी है और एक शानदार फिल्म देने के लिए बधाई दी है।

‘कांतारा’ के अभिनेता ने रजनीकांत के साथ उनके आवास पर मुलाकात की थी। उन्होंने बताया था, ”मैं उनसे मिला और उनके साथ लगभग एक घंटा बिताया। वो मेरे लिए बहुत बड़ा फैनबॉय मोमेंट था। हमने हर सीन के बारे में बात की, मैंने इसे कैसे किया, मैंने इसे कैसे अंजाम दिया और उनकी आध्यात्मिक यात्रा के बारे में भी। वो एक अद्भुत क्षण था।”

रजनीकांत ने इससे पहले ट्वीटर पर भी फिल्म की तारीफ़ की थी और इसे शानदार बताया था। वहीं ऋषभ शेट्टी ने उनसे आवास पर मुलाकात की तस्वीर भी साझा की थी। एक तस्वीर में वो वरिष्ठ अभिनेता के पाँव छूते नज़र आ रहे हैं और सुपरस्टार उन्हें आशीर्वाद दे रहे हैं, जबकि एक अन्य तस्वीर में रजनीकांत उन्हें अंगवस्त्र ओढ़ा कर सम्मानित कर रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भी साउथ स्टार और निर्देशक ऋषभ शेट्टी की फिल्म ‘कांतारा’ की तारीफ की थी। उन्होंने 2 नवंबर, 2022 को बेंगलुरु में हुई ग्लोबल इन्वेस्टर्स मीट (जीआईएम) में उद्योगपतियों और निवेशकों को ‘कांतारा’ की सफलता की कहानी का हवाला दिया था।

केंद्रीय मंत्री ने कहा था, ”कांतारा 16 करोड़ रुपए के मामूली बजट में बनी फिल्म है। इसमें कर्नाटक की कला और संस्कृति को बेहद खूबसूरती के साथ दिखाया गया है। इस फिल्म ने 300 करोड़ रुपए का बिजनेस किया है।” इसके बाद उन्होंने कहा, “मुझे यकीन है कि ‘कांतारा’ की सफलता ने यहाँ कई कंपनियों के नेतृत्वकर्ताओं का ध्यान आकर्षित किया है कि रिटर्न कैसे प्राप्त करें।”

ऋषभ शेट्टी के निर्देशन में बनने वाली कन्नड़ फिल्म ‘कांतारा’ को दर्शकों और समीक्षकों का बढ़िया रेस्पॉन्स मिल रहा है। फिल्म एक एक्शन थ्रिलर है जो ‘भूत कोला’ की परंपरा इर्द-गिर्द घूमती है। फिल्म के कलाकारों में किशोर, अच्युत कुमार, सप्तमी गौड़ा और प्रमोद शेट्टी प्रमुख भूमिकाओं में हैं। इसका निर्माण ‘केजीएफ’ फ्रैंचाइजी के बैनर ‘होमबेल फिल्म्स’ के तहत विजय किरगंदूर द्वारा किया गया है। ऋषभ शेट्टी ने कुछ समय पहले संकेत दिया था कि फिल्म का सीक्वल या प्रीक्वल भी बनाया जा सकता है।