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हँसते हुए कहा बाय-बाय और खा ली सल्फास की गोलियाँ… वायरल हुआ 3 सहेलियों की आत्महत्या वाला वीडियो, स्कूल प्रिंसिपल ने कहा – पढ़ने में अच्छी थी तीनों

मध्य प्रदेश के सीहोर जिले से तीन सहेलियों का जहर खाने का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि तीनों लड़कियाँ अपने हाथ में सल्फास की दर्जनों गोलियाँ लिए हुए हैं और बाय-बाय करती हुई नजर आ रही हैं। यही नहीं, सुसाइड करने से पहले तीनों को मुस्कुराते हुए भी देखा जा सकता है। इनमें से दो की मौत हो गई है और तीसरी की हालत गंभीर बताई जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह मामला सिहोर जिले के आष्टा का है। तीनों लड़कियाँ 12वीं कक्षा की छात्रा थीं। स्कूल के ​प्रिंसिपल ने बताया कि ये तीनों छात्राएँ बहुत होशियार थीं। वे शुक्रवार (28 अक्टूबर, 2022) को स्कूल पहुँची थी, लेकिन यूनिफार्म नहीं पहनकर आने पर गार्ड ने दो छात्राओं को बाहर ही रोक दिया। ऐसे में तीसरी जो स्कूल की ड्रेस पहनकर आई थी, वह भी उनके साथ चली गई। इसके बाद तीनों सीधा बस से इंदौर पहुँची और वहाँ राजेंद्र नगर थाना क्षेत्र में जहर खा लिया।

प्रारंभिक जाँच में सामने आया है कि एक ने अपने दोस्त के मिलने से मना करने और दूसरी ने परिवार से परेशान होकर यह कदम उठाया था। वहीं तीसरी ने इन दोनों को देखकर सुसाइड किया। बताया जा रहा है कि पायल इंदौर अपने दोस्त रोहित से मिलने आई थी। पार्क में पहुँचने के बाद पायल ने रोहित को मिलने के लिए बुलाया, लेकिन वह नहीं आया और उसे घर लौटने के लिए कहा। इस बात को लेकर पायल और रोहित का झगड़ा हो गया। झगड़े से नाराज होकर पायल ने जहर खा लिया। वहीं दूसरी सहेली पूजा अपने परिवार की कलह से परेशान थी।

जब उसने अपनी सहेली को जहर खाता देखा तो उसने भी खा लिया। इसके बाद तीसरी लड़की इनको देखकर डर गई और उसने भी सल्फास की गोलियाँ खा लीं। तीनों में से पायल और पूजा की मौत हो गई है। वहीं आरती जिंदगी की जंग लड़ रही है। आरती ने बताया कि जहर खाते ही उसे उल्टी हुई। उसे डर था कि वह इनके साथ भाग कर आई है, ऐसे में इन दोनों की मौत के बारे में परिजनों को क्या बताएगी। यही सोचकर उसने भी जहर खाया।

आष्टा थाना प्रभारी पुष्पेंद्र राठौर ने बताया कि पुलिस हर एंगल से इस मामले की जाँच कर रही है। साथ ही पुलिस यह पता लगाने में लगी है कि छात्राओं ने इतना बड़ा कदम किस वजह से उठाया।

गुजरात में चोर-चोर के नारों से हुआ अरविंद केजरीवाल का स्वागत, लोगों ने दिखाए काले झंडे भी: 4 नवंबर को CM प्रत्याशी के चेहरे का ऐलान करेगी AAP

गुजरात के नवसारी में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का स्वागत ‘चोर-चोर’ के नारों के साथ हुआ। जनता ने AAP नेताओं के काफिले के सामने ‘मोदी-मोदी’ के नारे भी लगाए। इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिसके बाद AAP की खूब खिल्ली उड़ रही है। नारे लगाने वालों में कई महिलाएँ भी शामिल थीं। लोगों ने अरविंद केजरीवाल के काफिले को काले झंडे भी दिखाए। ये वीडियो चिखली तालुका में खुदवेल और गोलवड गाँव के बीच का है।

उस समय AAP नेताओं का काफिला वहाँ से गुजर रहा था। वहाँ AAP के संयोजक अरविंद केजरीवाल के साथ-साथ पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान भी एक रैली को संबोधित करने पहुँचे थे। सीएम केजरीवाल ने रैली में अपने भाषण के दौरान इस घटना का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि काले झंडे दिखाने वालों को वो अपना भाई मानते हैं और उन्हें विश्वास है कि एक दिन वो उनलोगों का भी दिल जीतते हुए उन्हें अपनी पार्टी में शामिल करेंगे।

दूसरी पार्टियों के समर्थकों से अपील करते हुए अरविंद केजरीवाल ने कहा कि वो अपनी-अपनी पार्टी के साथ ही रहें, लेकिन वोट AAP को दें। उन्होंने कहा कि जनता जिसे चाहे देख कर चिल्लाए और जिसे चाहे वोट दें, वो उनके लिए अच्छे स्कूल बनवाएँगे और बीमारों का इलाज करवाएँगे। ये अलग बात है कि दिल्ली में खुद उनकी सरकार घोटालों में फँसी हुई है और छठ महापर्व के बीच यमुना को प्रदूषित छोड़ कर सीएम खुद गुजरात में चुनाव के प्रचार-प्रसार में लगे हुए हैं।

AAP शुक्रवार (4 नवंबर, 2022) को गुजरात में अपने मुख्यमंत्री के चेहरे का ऐलान करने वाली है। पार्टी ने पंजाब की तर्ज पर 6357000360 नंबर पर कॉल, SMS और व्हाट्सएप्प के माध्यम से सुझाव माँगे हैं। 3 नवंबर को शाम 5 बजे तक ये चालू रहेगा। इसी बहाने बाद में केजरीवाल ये दावा करेंगे कि उन्होंने जनता से पूछ कर उम्मीदवार का चयन किया है। गुजरात विधानसभा चुनाव के लिए तारीखों का ऐलान भी चुनाव आयोग द्वारा बाकी है।

ज्ञानवापी केस की पैरवी में CM योगी आदित्यनाथ को शामिल करने की तैयारी, 5 मामलों में पावर ऑफ अटॉर्नी सौंपेगा विश्व वैदिक सनातन संघ

ज्ञानवापी विवादित ढाँचे से संबंधित मामलों की सुनवाई में अब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) को भी शामिल करने की तैयारी हो रही है। मुकदमों की पावर ऑफ अटॉर्नी जल्द ही मुख्यमंत्री को सौंपी जाएगी। विश्व वैदिक सनातन संघ के प्रमुख जितेंद्र सिंह विसेन ने शनिवार (29 अक्टूबर 2022) को यह जानकारी। अभी तक ये सभी मुकदमे विश्व वैदिक सनातन संघ देख रहा है।

जितेंद्र सिंह विसेन ने बताया, “ज्ञानवापी परिसर से संबंधित लगभग सभी मुकदमे हमारे द्वारा ही फाइल किए गए थे। लेकिन वर्तमान में हम केवल 5 मुकदमों को ही देख रहे हैं। इसमें माँ श्रृंगार गौरी केस, भगवान आदि विश्वेश्वर विराजमान के अलावा तीन अन्य मुकदमे हैं। इन पाँचों मुकदमों की पावर ऑफ अटॉर्नी अब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद सौंप दी जाएगी। इस संबंध में सभी कानूनी प्रक्रिया 15 नवंबर तक पूरी कर ली जाएगी।”

आसान शब्दों में पावर ऑफ अटॉर्नी (POA) का अर्थ एक ऐसी एक कानूनी व्यवस्था से है, जो किसी व्यक्ति को उसकी अनुपस्थिति में उसकी संपत्ति, चिकित्सा मामलों और वित्त प्रबंधन करने के लिए किसी अन्य व्यक्ति या संगठन को नियुक्त करने की अनुमति देता है। अधिकृत व्यक्ति को एजेंट या पावर ऑफ अटॉर्नी एजेंट कहा जाता है। नियमों और शर्तों के आधार पर अधिकृत एजेंट के पास संपत्ति, चिकित्सा मामलों और वित्त से संबंधित कानूनी निर्णय लेने के लिए व्यापक या सीमित अधिकार हो सकते हैं। यह पावर ऑफ अटॉर्नी एक्ट, 1888 द्वारा शासित होता है।

बता दें कि ज्ञानवापी से संबंधित कई केस लंबित हैं। इनमें चार प्रमुख माँ श्रृंगार गौरी केस, भगवान श्री आदि विश्वेश्वर विराजमान, ज्ञानवापी में मिले शिवलिंग को लेकर धार्मिक भावनाएँ आहत करने का आरोप और प्राचीन मूर्ति स्वयंभू ज्योतिर्लिंग आदिविश्वेश्वर का साल 1991 का केस है। इलाहाबाद ​हाई कोर्ट में ज्ञानवापी के पुरातात्विक सर्वेक्षण की माँग से जुड़े मामले की नियमित सुनवाई चल रही है। वहीं, सुप्रीम कोर्ट में ज्ञानवापी परिसर के पुरातात्विक सर्वेक्षण की माँग का एक मामला नियमित सुनवाई पर चल रहा है। इसके अलावा, श्रृंगार गौरी के केस के दौरान ही मई 2022 में कमीशन कार्रवाई रोकने के लिए पिटीशन फाइल की गई थी, जो डिसमिस कर दी गई थी।

पंजाब में पराली जलाने की घटनाएँ 10000 के पार, पिछले साल के मुकाबले 25% बढ़ गए केस: बोली BJP – AAP दीवाली को करती है बदनाम

मौजूदा मौसम में पंजाब में पराली जलाने की घटनाएँ 10,000 के पार हो गई हैं। उधर नवाँशहर पहुँचे राज्य के कृषि मंत्री कुलदीप सिंह धालीवाल कह रहे हैं कि राज्य की AAP सरकार ने किसानों को पराली के प्रबंधन के लिए सब्सिडी पर 1.33 लाख उपकरण मुहैया कराए हैं। जबकि वास्तविकता ये है कि अकेले शुक्रवार (28 अक्टूबर, 2022) को राज्य में पराली जलाने की 2000+ घटनाएँ सामने आई हैं। ये अब तक एक दिन में रिकॉर्ड है।

अगर समान अवधि की ही बात करें तो पिछले साल के मुकाबले इस साल पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं में 26.5% की वृद्धि दर्ज की गई है। शुक्रवार को 2067 जगह पराली जलाया जाना एक नया रिकॉर्ड है। पराली जलाने की कुल घटनाओं की संख्या अब 10,214 के पार चली गई है। जबकि पिछले वर्ष 15 सितंबर से लेकर 28 अक्टूबर तक इसी अवधि में ऐसी 7503 घटनाएँ सामने आई थीं। शुक्रवार को सबसे ज्यादा मामले संगरूर में सामने आए।

जिले में पराली जलाने की एक दिन में 296 मामले सामने आए। इसके बाद पटियाला का स्थान आता है, जहाँ 274 जगह पराली जलाई गई। तीसरे नंबर पर तरनतारण जिले में 258 जगह से पराली जलाने की घटनाएँ सामने आईं। इसी तरह कपूरथला (137), फ़िरोजपुर (131), बठिंडा (124) और जालंधर (116) भी पीछे नहीं रहा। पठानकोट अकेले ऐसा जिला है, जहाँ से पराली जलाने की कोई भी घटना सामने नहीं आई।

अब तक के कुल आँकड़ों की बात करें तो इस साल सबसे ज्यादा पराली जलाने की घटनाएँ तरनतारण (1996) में सामने आई हैं। इसी तरह अमृतसर में पराली जलाने की 1245, पटियाला में 1059 और संगरूर में 760 मामले सामने आए हैं। खास बात ये भी है कि संगरूर में 760 में से 550 मामले पिछले 3 दिनों में ही सामने आए हैं। अकेले पंजाब के 10 जिले राज्य में पराली जलाने की 83% घटनाओं के लिए जिम्मेदार हैं।

इनमें से 5 जिले मालवा में आते हैं, जबकि 2 दोआब और 3 माँझा में स्थित हैं। हरियाणा में पराली जलाने के मामले में सुधार हुआ है। जहाँ पिछले साल इस तरह की 2252 घटनाएँ सामने आई थीं, इस साल आँकड़ा 24% की गिरावट के साथ 1701 पर है।2021 में दिल्ली में पराली जलाने के एक भी मामले नहीं थे, जबकि इस साल यहाँ भी ऐसी 5 घटनाएँ हुई हैं। मध्य प्रदेश में भी 14% की गिरावट दर्ज की गई है। उत्तर प्रदेश में भी मामले घटे हैं।

भाजपा इसे लेकर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर हमलावर हैं, जो पिछले साल तक पंजाब-हरियाणा को दोष देते फिरते थे और इस साल चुप्पी साध कर दीवाली के पटाखे प्रतिबंधित करने में लगे रहे। दिल्ली में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने कहा कि केजरीवाल सरकार प्रदूषण को नियंत्रित करने में नाकाम रही है और यमुना साफ़ करने के नाम पर उसमें ज़हरीला सिलिकॉन डिफॉमर डाल रही है। भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने भी कहा कि प्रदूषण का कारण पराली जलाने की घटनाओं में वृद्धि है, लेकिन हिन्दू विरोधी AAP दीवाली को बदनाम करती है।

J&K हाईकोर्ट का आदेश- जल्द पूरी करें नदीमर्ग नरसंहार की सुनवाई, 70 साल की महिला से लेकर 2 साल के मासूम तक को मारी थी गोली

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने एक दशक पहले बंद हो चुके नदीमर्ग नरसंहार केस में जम्मू-कश्मीर पुलिस की पुनरीक्षण याचिका को मंजूरी दे दी है। इस मंजूरी का मतलब है कि नदीमर्ग नरसंहार केस एक बार फिर से खोला जाएगा। नदीमर्ग नरसंहार मार्च 2003 में पुलवामा जिले के नदीमर्ग गाँव में हुआ था। लश्कर आतंकियों ने 24 कश्मीरी हिन्दुओं की निर्मम हत्या कर दी थी।

शनिवार (29 अक्टूबर 2022) को हुई सुनवाई में जस्टिस विनोद चटर्जी कौल ने निचली अदालत को आदेश देते हुए कहा है कि वह वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए (कमीशन जारी करके या रिकॉर्ड करके) गवाहों के बयान लेने और उसकी जाँच सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक उपाय करें।

कोर्ट ने निचली अदालत को यह भी कहा है कि नदीमर्ग नरसंहार मामले की जल्द से जल्द सुनवाई करें ताकि इस मामले को जल्द खत्म किया जा सके।

अगस्त में खुली थी नरसंहार की फाइल

उल्लेखनीय है कि इससे पहले 26 अगस्त 2022 को न्यायमूर्ति संजय धर ने राज्य सरकार की याचिका पर सुनवाई करते हुए इस केस को फिर से खोलने का आदेश दिया था। इस याचिका में दिसंबर 2011 के आदेश को वापस लेने की माँग की गई थी। उस समय आपराधिक पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी गई थी।

नदीमर्ग नरसंहार मामले में स्थानीय जैनपोरा थाने में धारा 302, 450, 395, 307, 120-बी, 326, 427 आरपीसी, 7/27 आर्म्स एक्ट और धारा 30 के तहत दर्ज किया गया था। शुरुआती जाँच के बाद 7 आरोपितों के खिलाफ प्रधान सत्र न्यायालय पुलवामा में चालान पेश किया गया। बाद में केस शोपियाँ के प्रधान सत्र न्यायालय में ट्रांसफर कर दिया गया था।

शोपियाँ की अदालत को अभियोजन पक्ष ने बताया था कि गवाह डर के कारण घाटी छोड़कर जा चुके हैं। वे सुनवाई के दौरान हाजिर नहीं हो सकते। इसके बाद केस बंद कर दिया गया। लेकिन, जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट के ताजा आदेश से इस मामले में एक बार फिर न्याय की उम्मीद जगी।

क्या है नदीमर्ग नरसंहार

शोपियाँ जिले में नदीमर्ग (अब पुलवामा में) एक हिंदू बहुल गाँव था, जिसकी कुल आबादी मात्र 54 थी। तत्कालीन मुख्यमंत्री मुफ़्ती मोहम्मद सईद के पैतृक गाँव से 7 किलोमीटर दूर स्थित इस गाँव में 23 मार्च, 2003 की रात सब तबाह हो गया। जब पूरा देश भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की याद में शहीद दिवस मना रहा था, तब नदीमर्ग में हिन्दुओं का नरसंहार हो रहा था। उस दिन 7 आतंकवादी गाँव में घुसे और सभी हिंदुओं को चिनार के पेड़ के नीचे इकठ्ठा करने लगे। रात के 10 बजकर 30 मिनट पर इन आतंकियों ने 24 हिंदुओं की गोली मार कर हत्या कर दी। गौर करने वाली बात थी कि 23 मार्च को पाकिस्तान का राष्ट्रीय दिवस मनाया जाता है।

मरने वालों में 70 साल की बुजुर्ग महिला से लेकर 2 साल का मासूम बच्चा तक शामिल था। क्रूरता की हद पार करते हुए एक दिव्यांग सहित 11 महिलाओं, 11 पुरुषों और 2 बच्चों पर बेहद नजदीक से गोलियाँ चलाई गई थी। कुछ रिपोर्ट्स का दावा है कि पॉइंट ब्लेंक रेंज से हिंदुओं के सिर में गोलियाँ मारी गई थी। आतंकी यही नहीं रुके उन्होंने घरों को लूटा और महिलाओं के गहने उतरवा लिए। न्यूयॉर्क टाइम्स अखबार ने इस घटना का जिम्मेदार ‘मुस्लिम आतंकवादियों’ को बताया। अमेरिका के स्टेट्स डिपार्टमेंट ने भी इसे धर्म आधारित नरसंहार माना था।

आतंकियों को मदद पड़ोस के मुस्लिम बहुलता वाले गाँवों से मिली थी। उस दौरान जम्मू-कश्मीर पुलिस के इंटेलिजेंस विंग को संभाल रहे कुलदीप खोड़ा भी मानते हैं कि बिना स्थानीय सहायता के नदीमर्ग नरसंहार को अंजाम ही नहीं दिया जा सकता था।

नरसंहार के चश्मदीद बताते है कि आतंकियों ने हिंदुओं को उनके नाम से पुकारकर घरों से बाहर निकाला था। यानी वे पहले से ही इस योजना पर काम कर रहे थे। आतंकियों ने गाँव का दौरा किया हो, इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता। इस प्रकरण में राज्य सरकार की भूमिका भी संदेह वाली बनी रही। उस इलाके की सुरक्षा में लगी पुलिस को हटा लिया गया था। घटना से पहले वहाँ 30 सुरक्षाकर्मी तैनात थे, जिनकी संख्या उस रात घटाकर 5 कर दी गई।

नदीमर्ग नरसंहार के बाद जम्मू-कश्मीर के हिंदुओं के मन में डर बैठ गया कि वे राज्य में सुरक्षित नहीं हैं। इस नरसंहार के करीब एक महीने बाद आतंकी जिया मुस्तफा गिरफ्तार किया गया था। वह पाकिस्तान के रावलकोट का रहने वाला था और आतंकी संगठन लश्कर-ए-तय्यबा का एरिया कमांडर था। उसने बताया था कि लश्कर के अबू उमैर ने उसे ऐसा करने के लिए कहा था। मुस्तफा के मुताबिक वह उन बैठकों का हिस्सा रहा था, जहाँ भारत के हिंदू मंदिरों पर आतंकी हमले की योजना बनाई गई थी। 

जम्मू-कश्मीर के पुंछ इलाके में 24 अक्टूबर 2021 को सुरक्षा बलों और आतंकियों के बीच एक मुठभेड़ में जिया मुस्तफा मारा गया था। कश्मीर की कोट बलवाल जेल में बंद मुस्तफा को 10 दिनों की रिमांड पर लिया गया था। भाटा दूरियान नाम की जगह पर पहचान के लिए उसे ले जाते वक़्त आतंकियों ने जवानों पर फायरिंग कर दी थी। आग से घिर जाने के चलते आतंकी मुस्तफा को निकाला नहीं सके। बाद में उसकी लाश बरामद की गई।

पराग अग्रवाल को लगा कंगना रनौत का श्राप! मस्क के आते ही ट्विटर पर ट्रेंड हुईं: बोलीं- ‘मैं वो भविष्यवाणी करती हूँ, जो जल्दी होने वाली होती है’

दुनिया के सबसे अमीर शख्स एलन मस्क (Elon Musk) ने ट्विटर को खरीदते ही कंपनी के भारतीय मूल के सीईओ पराग अग्रवाल (CEO Parag Agrawal) समेत तीन टॉप एग्जीक्यूटिव्स की छुट्टी कर दी। इसको लेकर बॉलीवुड एक्ट्रेस कंगना रनौत ने भी रिएक्ट किया है।

कंगना ने शनिवार (29 अक्टूबर 2022) अपनी इंस्टा स्टोरी पर अप्रत्यक्ष रूप से लिखा,

“मैं हमेशा उन चीजों की भविष्यवाणी करती हूँ, जो जल्द ही होने वाली होती हैं… कुछ लोग मेरी दूरदर्शिता को एक्स-रे कहते हैं, कुछ उसे श्राप कहते हैं और कुछ इसे जादू-टोना कहते हैं। हम कब तक इस तरह एक महिला प्रतिभा को खारिज करते रहेंगे… भविष्य की भविष्यवाणी करना आसान नहीं है। इसके लिए मानव प्रवृत्ति की उल्लेखनीय पहचान और व्याख्या के साथ-साथ ऑबसर्वेशनल स्किल्स की भी जरूरत पड़ती है। सबसे बड़ी बात इसके लिए अपनी पसंद और नापसंद को भी छोड़ना पड़ता है, ताकि हम जिस टॉपिक का अध्ययन करना चाहते हैं, उसका अध्ययन कर सके।”

फोटो साभार: कंगना का इंस्टाग्राम

इसके अलावा कंगना रनौत (Kangana ranaut Twitter) ने अपनी इंस्टा स्टोरी में अपने फैंस द्वारा किए गए कई ट्वीट भी शेयर किए हैं, जो बहुत फनी है। दरअसल, एलन मस्क के ट्विटर पर टेकओवर के बाद कंगना सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ट्रेंड कर रही हैं। उनके नाम वाले हैशटैग में कई लोग ट्वीट करके कह रहे हैं कि कंगना का अकॉउंट जल्द रिस्टोर होगा।

इस हैशटैग में सागर नाम के यूजर ने अमिताभ बच्चन और जया बच्चन की फोटो शेयर करते हुए लिखा, “एलन मस्क के ट्विटर खरीदने के बाद डोनाल्ड ट्रंप और कंगना रनौत।” इस तस्वीर के नीचे यूजर ने लिखा है, “गेस करो हम कहाँ हैं।”

फोटो साभार: @sagarcasm

बॉलीवुड एक्ट्रेस ने लेडी सुपरस्टार कंगना रनौत नाम के ट्विटर हैंडल का पोस्ट भी अपनी इंस्टा स्टोरी में साझा किया है।

फोटो साभार: @ladyranaut

बता दें कि कंगना का ट्विटर अकाउंट पिछले साल मई में बंगाल विधानसभा के नतीजों को लेकर की गई पोस्ट के बाद सस्पेंड कर दिया गया था। ट्विटर ने कहा था कि ये कार्रवाई नियमों के उल्लंघन पर हुई है। वहीं कंगना रनौत ने इस कार्रवाई को पक्षपाती और अनुचित करार दिया था। उन्होंने कहा था कि पश्चिम बंगाल में हिंसा रोकने के लिए लोगों को लगातार आवाज उठानी चाहिए। वहीं, एक्ट्रेस के यू अचानक अकाउंट बंद से फैंस काफी आक्रोशित नजर आए थे। उन्होंने कंगना का सपोर्ट करते हुए ट्विटर की कार्रवाई को गलत ठहराया था। बता दें कि अब नए मालिक के आने के बाद एक्ट्रेस के फैन्स उनके अकाउंट को रीस्टोर करने की भी बात कर रहे हैं।

UCC की राह पर बढ़ा गुजरात: BJP सरकार ने कमेटी के गठन का किया ऐलान, गृहमंत्री बोले- PM मोदी के नेतृत्व में समान नागरिक संहिता पर काम शुरू

गुजरात (Gujarat) में विधानसभा चुनाव से पहले वहाँ की सत्ताधारी भाजपा सरकार ने राज्य में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) लागू करने की दिशा में कदम बढ़ा दिया है। शनिवार (29 अक्टूबर 2022) को मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल (CM Bhupendra Patel) की अध्यक्षता वाली कैबिनेट की बैठक में इस प्रस्ताव को पास किया गया।

इस बात की जानकारी देते हुए प्रदेश के गृह मंत्री हर्ष सांघवी ने कहा, “पीएम नरेंद्र मोदी और यूनियन एचएम अमित शाह के नेतृत्व में सीएम भूपेंद्र पटेल ने आज कैबिनेट बैठक में राज्य में समान नागरिक संहिता को लागू करने के लिए कमिटी बनाने का ऐतिहासिक फैसला लिया है।”

इस कमिटी की अध्यक्षता हाईकोर्ट के रिटायर जज करेंगे। बता दें कि इससे पहले उत्तराखंड में भी भाजपा की सरकार ने विधानसभा चुनाव से पहले UCC लागू करने का वादा किया था और सत्ता में वापसी करते ही इस साल मार्च में एक कमिटी का गठन किया था।

बता दें कि भाजपा के घोषणा पत्र में राम मंदिर निर्माण, अनुच्छेद 370 की समाप्ति और देश में समान नागरिक संहिता को लागू करना प्रमुख मुद्दा है। इनमें से दो वादे को भाजपा पूरा कर चुकी है और तीसरा एवं फिलहाल का अंतिम प्रमुख मुद्दा UCC को लागू करना भाजपा के लिए अभी बाकी है।

क्या है समान नागरिक संहिता

समान नागरिक संहिता एक ऐसा कानून है, जो देश के हर समुदाय, चाहे वह हिंदू हो, मुस्लिम हो, सिख हो या ईसाई, सब पर समान रूप से लागू होता है। व्यक्ति चाहे किसी भी धर्म का हो, जाति का हो या पंथ का हो, सबके लिए सिविल कानून एक ही होगा। वर्तमान में ऐसा नहीं है।

अंग्रेजों ने आपराधिक और राजस्व से जुड़े कानूनों को भारतीय दंड संहिता (IPC) 1860, भारतीय साक्ष्य अधिनियम (IEA) 1872, भारतीय अनुबंध अधिनियम (ICA) 1872, विशिष्ट राहत अधिनियम 1877 आदि के माध्यम से सारे समुदायों पर लागू किया, लेकिन शादी-विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, संपत्ति, गोद लेने आदि से जुड़े मसलों को धार्मिक समूहों के लिए उनकी मान्यताओं के आधार पर छोड़ दिया।

आजादी के बाद देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने हिंदुओं के पर्सनल लॉ को खत्म कर दिया, लेकिन मुस्लिमों के कानून को ज्यों का त्यों बनाए रखा। हिंदुओं की धार्मिक प्रथाओं के तहत जारी कानूनों को निरस्त कर हिंदू कोड बिल के जरिए हिंदू विवाह अधिनियम 1955, हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम 1956, हिंदू नाबालिग एवं अभिभावक अधिनियम 1956, हिंदू दत्तक ग्रहण और रखरखाव अधिनियम 1956 लागू कर दिया गया। ये कानून हिंदू, बौद्ध, जैन, सिख आदि पर समान रूप से लागू होते हैं।

मुस्लिमों का कानून पर्सनल कानून (शरिया), 1937 के तहत संचालित होता है। इसमें मुस्लिमों के निकाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार, संपत्ति का अधिकार, बच्चा गोद लेना आदि आता है, जो इस्लामी शरिया कानून के तहत संचालित होते हैं। अगर समान नागरिक संहिता लागू होता है तो मुस्लिमों के निम्नलिखित कानून बदल जाएँगे।

51 बीघा की पहाड़ी, 369 फीट की ऊँचाई: 10 साल में 50 हजार लोगों ने मिलकर बनाई महादेव की सबसे ऊँची मूर्ति, 20 किमी दूर से भी नजर आएगी

दुनिया की सबसे ऊँची शिव प्रतिमा बनकर तैयार हो चुकी है। ये मूर्ति राजस्थान के राजसमंद जिले के नाथद्वारा में बनी है। शिव प्रतिमा की ऊँचाई 369 फीट है। शनिवार (29 अक्टूबर 2022) को मोरारी बापू की रामकथा के साथ इस प्रतिमा का अनावरण कार्यक्रम शुरू होगा। अनावरण कार्यक्रम 6 नवंबर तक चलेगा। इस प्रतिमा को विश्वास स्वरूपम (स्टैच्यू ऑफ बिलीफ) नाम दिया गया है। खास बात यह है कि इसे 20 किलोमीटर दूर से भी देखा जा सकता है।

यह शिव प्रतिमा राजसमंद जिले के नाथद्वारा कस्बे में गणेश टेकरी नामक 51 बीघा की पहाड़ी पर बनी है। जिस परिसर में इस प्रतिमा का निर्माण किया गया है उसे तद पदम् उपवन नाम दिया गया है। प्रतिमा में भगवान भोलेनाथ को ध्यान एवं अल्हण मुद्रा में देखा जा सकता है। 369 फीट ऊँची इस प्रतिमा को दुनिया की 5 सबसे ऊँची प्रतिमा में भी शामिल किया गया है। इसकी ऊँचाई इतनी अधिक है कि कई किलोमीटर दूर से भी इसे देखा जा सकता है। यही नहीं, ‘विश्वास स्वरूपम’ नामक यह प्रतिमा रात में भी दिखाई दे इसलिए यहाँ विशेष लाइटिंग की व्यवस्था भी की गई है।

टाट पदम संस्थान द्वारा निर्मित दुनिया की सबसे ऊँची शिव प्रतिमा के निर्माण में 10 साल का लंबा वक्त लगा है। इस पूरी प्रतिमा के निर्माण में 50 हजार से अधिक लोगों ने काम किया है। इस प्रतिमा को बनवाने का जब प्लान तैयार किया गया था तब इसकी ऊँचाई 251 फीट तय की गई थी। हालाँकि, निर्माण के दौरान इसकी ऊँचाई 100 फीट अधिक यानी 351 फीट हो गई। साथ ही, जब भगवान शिव की जटा में माँ गङ्गा की जलधारा जोड़ने का प्लान बनाया गया तो इसकी ऊँचाई में 18 फीट की और बढ़ोतरी हो गई। इस प्रकार यह प्रतिमा 369 फीट ऊँची हो गई है।

रिपोर्ट के अनुसार, साल 2012 में जब इस प्रतिमा का निर्माण कार्य शुरु हुआ था तब से सिर्फ कोविड-19 के कारण लगाए गए लॉकडाउन में ही इसका काम रोका गया था। लेकिन, इसके बाद कारीगर काम में वापस लौटते और फिर काम शुरू करते। प्रतिमा बनाने का काम दिन के साथ-साथ रात में भी चलता रहता था।

इस प्रतिमा में लिफ्ट, सीढ़ियाँ, हॉल आदि का निर्माण भी कराया गया है। निर्माण कै दौरान 3000 टन स्टील और लोहा, जबकि करीब 2.5 लाख क्यूबिक टन कंक्रीट और रेत का इस्तेमाल हुआ है। इसका निर्माण कुछ ऐसी डिजाइन से किया गया है कि 250 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार वाली हवाएँ भी इस प्रतिमा के आगे बेअसर साबित होंगीं। प्रतिमा के डिजाइन का विंड टनल टेस्ट ऑस्ट्रेलिया में किया गया है।

इस प्रतिमा के अलग-अलग हिस्सों के दर्शन करने के लिए 4 लिफ्ट और 3 सीढियाँ हैं। दर्शन करने वाले लोगों को 20 फीट से लेकर 351 फीट तक के अलग-अलग हिस्सों का दर्शन कराया जाएगा। प्रतिमा में 270 से 280 फीट की ऊँचाई पर जाने के लिए एक छोटा सा ब्रिज बनाया गया है। यह ब्रिज पत्थर या कंक्रीट का नहीं, बल्कि काँच का है।

मदरसों में न छात्रा सुरक्षित और न टीचर: MP में बच्ची से अश्लील हरकत करने वाला मौलाना गिरफ्तार, UP में शिक्षिका से गैंगरेप करने पर राशिद, हसन, मुजाहिद पर केस दर्ज

मदरसा में मासूम बच्ची के साथ गलत काम करने और एक शिक्षिका के साथ गैंगरेप करने का मामला सामने आया है। पहला मामला मध्य प्रदेश के खंडवा का है, जहाँ 6 साल की बच्ची के साथ गलत हरकत करने वाले मौलाना अब्दुल समद को गिरफ्तार कर लिया गया है। वहीं, दूसरा मामला उत्तर प्रदेश के बदायूँ का है। यहाँ की एक शिक्षिका ने अपने ही मदरसा के प्रबंधक राशिद अली, नजरुल हसन और मुजाहिद उर्फ गुड्डू के खिलाफ गैंगरेप का आरोप लगाया है। ​पुलिस ने तीनों के खिलाफ गैंगरेप का मामला दर्ज कर लिया है।

6 साल की बच्ची से अश्लील हरकत

रिपोर्ट्स के मुताबिक, खंडवा के खानशाहवली क्षेत्र में जकरिया मस्जिद में मौलाना अब्दुल समद ने 6 साल की बच्ची के साथ गलत हरकत की। जब उसने घर जाकर अपने परिजनों को यह बात बताई, तो उन्होंने मौलाना के खिलाफ थाने में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में पीड़िता के परिजन ने बताया कि मदरसे में बहुत सारे छोटे बच्चे पढ़ने जाते हैं। उनकी 6 साल की बच्ची भी मदरसे में पढ़ने जाती थी। इस दौरान मौलाना अब्दुल समद ने उसके साथ छेड़छाड़ की। जब बच्ची ने घर आकर इस घटना के बारे में उन्हें बताया तो उनके होश उड़ गए। इसके बाद वह और कुछ स्थानीय लोग थाने पहुँचे और मौलाना के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने आरोपित को तुरंत गिरफ्तार कर लिया। उसके खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है।

नशीला पदार्थ देकर मदरसा शिक्षिका से गैंगरेप

वहीं, बदायूँ की घटना 26 अप्रैल 2020 की है। उस वक्त लॉकडाउन लगा हुआ था। अलापुर इलाके के ककराला स्थित मदरसा की शिक्षिका ने वहाँ के प्रबंधक समेत तीन लोगों के खिलाफ गैंगरेप आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि कोल्ड ड्रिंग में नशीला पदार्थ मिलाकर उसके साथ गलत काम किया। पुलिस ने कोर्ट के आदेश पर मदरसा के प्रबंधक राशिद अली निवासी ककराला, नजरुल हसन और मुजाहिद उर्फ गुड्डू निवासी उरौलिया थाना अलापुर के खिलाफ गैंगरेप का मामला दर्ज कर लिया है।

आरोप है कि पुलिस ने इस मामले पर ध्यान नहीं दिया था, क्योंकि 2 साल बाद इस मामले में शिकायत की थी। इसको लेकर पीड़िता ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था। पीड़िता ने आरोप लगाया है कि वह ककराला के एक मदरसा में वर्ष 2017 से पढ़ा रही थी। मदरसा प्रबंधक उससे आए दिन अश्लील बातें करता था।

लॉकडाउन के दौरान 16 अप्रैल 2020 को प्रबंधक ने शिक्षिका को फोन करके कहा कि कुछ बच्चे पढ़ने के लिए मदरसे में आए हैं। बच्चों को पढ़ाने के लिए आ जाओ। तुम्हें पूरे महीने का वेतन दिया जाएगा। जिसके बाद वह अपने भाई के साथ मदरसा पहुँची। वहाँ पर प्रबंधक समेत नजरुल हसन और मुजाहिद उर्फ गुड्डू मौजूद थे।

जब शिक्षिका ने पूछा, “बच्चे किधर हैं तो राशिद अली ने कहा कि आते होंगे। इसके बाद उसने मेरे भाई को घर भेज दिया। कहा कि दो घंटे बाद वह खुद उसकी बहन को घर छोड़ देगा।” इसके बाद प्रबंधक और उसके साथियों ने कोल्ड ड्रिंक में नशीला पदार्थ पिलाकर उसके साथ गैंगरेप किया। होश में आने पर जब शिक्षिका ने इसका विरोध किया तो उन्होंने उसे और उसके परिवार वालों को जान से मारने की धमकी दी।

‘पिछले 5 वर्षों में यूपी पुलिस में एक भी भर्ती नहीं’: हैशटैग चला कर राम मंदिर पर भी साधा गया निशाना, आँकड़ों के साथ UP पुलिस ने बता दी सच्चाई

सोशल मीडिया पर यूपी पुलिस में भारतियों को लेकर झूठी खबरें शेयर की जा रही हैं। अब खुद उत्तर प्रदेश पुलिस ने सफाई देते हुए आँकड़ों के साथ इसका खंडन किया है। दरअसल, इन ख़बरों में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली योगी आदित्यनाथ सरकार पर निशाना साधते हुए कहा जा रहा है कि पिछले 5 साल से यूपी पुलिस में कोई भर्ती ही नहीं हुई है, कोई वैकेंसी ही नहीं निकली है। सोशल मीडिया पर ये दावे किए जा रहे हैं।

उत्तर प्रदेश पुलिस ने इन दावों के साथ चलाए जा रहे हैशटैग ‘यूपी पुलिस वैकेंसी’ को लेकर कहा कि सुनियोजित तरीके से ऐसा किया जा रहा है। इन हैंडलों में से कोई पूछ रहा है कि यूपी पुलिस मर भर्ती कब होगी, तो कोई मीम्स शेयर कर के निशाना साध रहा है। साथ ही लिखा जा रहा है कि 2018 में भर्तियाँ हुई थीं, अब 2023 आने जा रहा है। एक ने लिखा, “भाषण नहीं, रोजगार चाहिए”। एक अन्य ने दावा किया कि यूपी पुलिस में नौकरी के इंतजार में युवा ओवरएज हो रहे हैं। देखें कुछ ट्वीट्स:

इतना ही नहीं, यूपी पुलिस में भर्तियों की बात करते हुए इनमें से कई हैंडल्स ने अयोध्या में बन रहे भव्य राम मंदिर पर भी निशाना साधा। ज्ञात हो कि ये मंदिर जनता के चंदे से बन रहा है, इसमें सरकारी रुपया नहीं लग रहा। यूपी पुलिस ने इन दावों को भ्रामक बताते हुए आँकड़े गिनाए हैं। यूपी पुलिस ने बताया कि पिछले 5 वर्षों में कुल 1,53,728 भर्तियाँ की गई हैं, जिनमें 22,000 से भी अधिक महिलाएँ पुलिसकर्मी बनी हैं।

इसी तरह, यूपी पुलिस ने बताया कि विभिन्न संवर्गों के 18,332 नए पदों का भी सृजन किया गया है। उत्तर प्रदेश की पुलिस ने ये भी जानकारी दी कि फ़िलहाल विभाग में 45,689 रिक्तियाँ हैं, जिन पर भर्ती की प्रक्रिया जल्द ही पूरी कर ली जाएगी। याद दिला दें कि फरवरी 2022 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद बताया था कि बीते 5 वर्षों में कानून का राज स्थापित करने के लिए यूपी पुलिस में लगभग 1.5 लाख भर्तियाँ हुई हैं, जबकि इससे पहले के 15 सालों में सवा लाख से भी कम भर्तियाँ हुई थीं।